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‘उर्दू शब्दों के इस्तेमाल पर सूचना मंत्रालय ने हिंदी न्यूज चैनलों को भेजा नोटिस’: ‘द वायर’ ने फैलाई झूठी खबर, जानिए क्या है सच

पीआईबी ने इसका पूरा सच सामने रखते हुए बताया, "मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक दर्शक की शिकायत संबंधित चैनलों को भेज दी है।"

अपनी खबरों से ज्यादा अपने प्रोपेगेंडा के लिए चर्चा में रहने वाला ‘द वायर’ एक बार फिर झूठ फैलाता पकड़ा गया है। वायर ने शनिवार (20 सितंबर 2025) को ‘उर्दू शब्दों के इस्तेमाल पर सूचना मंत्रालय ने हिंदी न्यूज़ चैनलों को भेजा नोटिस’ हेडिंग के साथ एक खबर की।

इससे हेडिंग को पढ़ने से साफ जाहिर होता है कि वायर यह बताना चाहता है कि यह कार्रवाई सूचना मंत्रालय ने की है और इसकी वजह उर्दू शब्दों का इस्तेमाल करना है।

द वायर की हेडलाइन

वायर ने अपनी खबर में आगे लिखा, “सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने टीवी9 भारतवर्ष, आजतक, एबीपी, ज़ी न्यूज़ और टीवी 18 को औपचारिक नोटिस भेजा है क्योंकि ये चैनल हिंदी होने के बावजूद प्रसारण में करीब तीस प्रतिशत उर्दू शब्दों का प्रयोग कर रहे हैं।” वायर ने यहाँ तक भी दावा कि मंत्रालय ने भाषा विशेषज्ञ की नियुक्ति करने का निर्देश दिया है।

इससे पहले की वायर का यह झूठ लोगों तक पहुँचता, सरकार ने खुद ही इसकी पोल खोल दी है। पीआईबी की फैक्ट चेक यूनिट ने रविवार (21 सितंबर 2025) को X पर एक पोस्ट के जरिए इस दावे का सच सामने रख दिया।

पीआईबी ने कहा, “कुछ मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने हिंदी समाचार चैनलों को अपने प्रसारणों में अत्यधिक उर्दू शब्दों के इस्तेमाल के लिए नोटिस जारी किया है और उन्हें भाषा विशेषज्ञ नियुक्त करने का निर्देश दिया है। यह दावा भ्रामक है।”

पीआईबी ने इसका पूरा सच सामने रखते हुए बताया, “मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क विनियमन अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक दर्शक की शिकायत संबंधित चैनलों को भेज दी है।” पीआईबी के मुताबिक, चैनलों को निर्देश दिया गया है कि वे शिकायतकर्ता को की गई कार्रवाई से अवगत कराएँ और संबंधित नियमों के अनुसार मंत्रालय को भी सूचित करें।

वायर की झूठ फैलाने की पुरानी आदत रही है लेकिन हर बार की तरह इस बार भी उसका झूठ पकड़ लिया गया है। करीब 10 दिन पहले की ही बात है जब ‘द वायर’ ने पश्चिम बंगाल के बांकुरा में एक मुस्लिम फेरीवाले मइमूर अली मंडल पर हमले की खबर को सांप्रदायिक रंग देकर पेश किया था।

‘द वायर’ ने कहा कि मइमूर को जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया लेकिन पुलिस की जाँच में सामने आया कि वायर ने जानबूझकर समाज में जहर फैलाने की कोशिश की थी। इसके अलावा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी ‘द वायर’ ने भारत के लड़ाकू विमानों के नुकसान का फर्जी नैरेटिव फैलाया था और इसके जरिए मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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