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MLA बनने के शरजील इमाम के ख्वाब पर मुस्लिम भी खसा रहे बज्जर: समर्थक कह रहे- किशनगंज से ओवैसी दे टिकट, AIMIM ने कहा- मर्द है तो अपने इलाके से लड़े

शरजील ने किशनगंज जिले के अंतर्गत आने वाली बहादुरगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। शरजील का भाई मुजम्मिल इमाम उसके लिए प्रचार कर रहा है।

बिहार के किशनगंज में मुस्लिमों की संख्या पूरे राज्य में सर्वाधिक है, 70% मुस्लिम आबादी वाले इस जिले में चुनाव से पहले मुस्लिम आपस में बँट गए हैं। इसकी वजह बना है जेल में बंद दिल्ली दंगों का आरोपित शरजील इमाम।

शरजील ने किशनगंज जिले के अंतर्गत आने वाली बहादुरगंज विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। शरजील का भाई मुजम्मिल इमाम उसके लिए प्रचार कर रहा है। अब यहाँ मुस्लिम इस बात को लेकर आपस में बँट गए हैं कि शरजील इमाम को किस दल से चुनाव लड़ना चाहिए।

स्क्रॉल में बीते अगस्त में शरजील इमाम का एक इंटरव्यू छपा था। इसमें शरजील से पूछा गया कि वह किस पार्टी से चुनाव लड़ना चाहता है। शरजील ने कहा, “हमारे विकल्प सीमित हैं। मैं उन पार्टियों के साथ जुड़ना नहीं चाहता जो सिर्फ इमोशनल भाषण देती हैं।”

शरजील ने कहा, “हम किसी भी ऐसी पार्टी के साथ काम करने और जुड़ने के लिए तैयार हैं जो हमें बुनियादी व्यवस्थागत मुद्दों को उठाने और अल्पसंख्यकों व हाशिए पर पड़े लोगों के सम्मानजनक जीवन के लिए जरूरी संवैधानिक बदलावों के बारे में संदेश फैलाने में मदद करे।”

शरजील को AIMIM के समर्थन मिलने की माँग

सीमांचल के इस इलाके में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने 2020 के चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया था। उन्होंने सीमांचल की 24 सीटों में से 20 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे जिनमें से 5 सीटें जीतीं थी। इस बार भी इस मुस्लिम बहुल इलाके में उनकी पार्टी पूरे दमखम से चुनाव लड़ रही है।

ऐसे में सोशल मीडिया और जमीन पर शरजील के समर्थकों के बीच यह माँग उठने लगी है कि ओवैसी की पार्टी को अपना उम्मीदवार इस सीट पर नहीं खड़ा करना चाहिए, कुछ लोग माँग कर रहे हैं कि ओवैसी की पार्टी को शरजील को टिकट देना चाहिए।

X पर शेख सब्बीर नामक एक यूजर ने लिखा, “शरजील इमाम जैसे होनहार, काबिल, पढ़ा लिखा, संजीदा शख्स को सदन में भेजना चाहिए। इसके लिए AIMIM के जिम्मेदार हजरात मुजम्मिल से बात करें।” सोहेल नामक एक अन्य यूजर ने लिखा, “AIMIM ने शरजील इमाम को टिकट क्यों नहीं दी है।”

वहीं, बहादुरगंज विधानसभा के AIMIM प्रत्याशी तौसीफ आलम ने कह दिया है कि वो किसी शरजील इमाम को नहीं जानते हैं। तौसीफ ने तो यहाँ तक कह दिया कि अगर उसमें मर्दानगी है तो अपने क्षेत्र से वह चुनाव लड़े। इस पर शरजील के भाई मुजम्मिल ने प्रतिक्रिया दी है।

मुजम्मिल ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वही बात दोहराई जो सोशल मीडिया पर चर्चा में है। मुजम्मिल ने कहा, “क्या किसी ने ये सवाल AIMIM के आलाकमान से ये सवाल पूछा कि शरजील इमाम को टिकट क्यों नहीं दिया, जब कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में ताहिर हुसैन साहब के घर तक चल कर खुद ओवैसी साहब गए और उनके परिवार से मुलाकात कर टिकट दिया।”

सोशल मीडिया पर जारी इस बहस के बीच यह जानना भी अहम है कि शरजील इमाम के अब्बू अकबर इमाम भी नेता रहे हैं। 2000 में उन्होंने कुर्था से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था और इसके बाद वह नीतीश कुमार की पार्टी JDU से जुड़े रहे। 2005 में उन्होंने JDU के टिकट पर जहाँनाबाद से चुनाव लड़ा था लेकिन वह RJD के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे। 2014 में उनका निधन हो गए था।

मुस्लिमों के ठेकेदार RJD-कॉन्ग्रेस की चुप्पी

शरजील इमाम को टिकट देने के नाम पर RJD और कॉन्ग्रेस दोनों चुप हैं। ये दोनों पार्टियाँ खुद को मुस्लिमों की रहनुमा बताती हैं लेकिन ये दोनों ही ना शरजील को टिकट देने में दिलचस्पी दिखा रही हैं, ना कोई इनसे यह माँग कर रहा है कि ये शरजील को टिकट दें। यानी बिहार में मुस्लिमों की उम्मीद केवल अब AIMIM से रह गई है और उस उम्मीद के चक्कर में किशनगंज के वोटर बँट गए हैं।

RJD और कॉन्ग्रेस दोनों दल AIMIM पर वोट काटने का आरोप लगाते हैं, बीजेपी की ‘B’ टीम बताते हैं लेकिन जब बारी साथ खड़े होने की आती है तो भाग खड़े होते हैं। इस चुनाव से पहले भी खुद औवेसी ने RJD से गठबंधन कर उन्हें महागठबंधन का हिस्सा बनाने की बात कही थी।

RJD ने क्या किया, RJD ने गठबंधन करना तो दूर AIMIM के नेताओं से ठीक तरह से मिलना तक मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में शरजील इमाम के बहाने मुस्लिमों के बीच किशनगंज में मची सर-फुटव्वल फिर सामने आ गई है।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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