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भोपाल में मुस्लिम गर्लफ्रेंड के परिवार ने हिंदू लड़के को जबरन कबूल कराया इस्लाम, शुभम को नाम दिया अमान खान: 3 साल बाद केस दर्ज, पढ़ें- FIR की Exclusive डिटेल्स

शुभम ने कहा कि इल्मा के परिवार वालों ने धमकी दी कि अगर वह हिंदू धर्म में वापस लौटने की कोशिश करेगा या अपनी कम्युनिटी के सदस्यों से संपर्क करेगा, तो वे उसे और उसके रिश्तेदारों को मार देंगे।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में जबरन धर्म परिवर्तन का एक परेशान करने वाला मामला सामने आया है। एक हिंदू युवक जिसका नाम शुभम गोस्वामी है, उसे 2022 में एक मुस्लिम लड़की से प्यार हो गया था। इसके बाद उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और उसने मुस्लिम पहचान ‘अमान खान’ दी गई। शुभम ने अब कहा है कि वह हिंदू धर्म में वापस लौटना चाहता है। इसके लिए वह एक जन शिकायत कार्यक्रम के दौरान मंत्री विश्वास कैलाश सारंग से भी मिला है।

शुभम ने उस मुस्लिम लड़की के परिवार द्वारा की गई जबरदस्ती, धार्मिक दबाव और धमकी की डरावनी कहानी सुनाई, जिस लड़की के साथ उसके कभी रिश्ते थे।

मीडिया से बात करते हुए सारंग ने कहा कि शुभम की बातें सुनना दिल दहला देने वाली थी। उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि शुभम को उचित घर वापसी के जरिए अपनी पहचान वापस हासिल करने की इजाजत मिले। मंत्री ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि राज्य के लिए जबरन धार्मिक परिवर्तन के खिलाफ कानून बनाना क्यों जरूरी है।

शुभम पर सिर्फ धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला गया ही नहीं, बल्कि उसे ऐसी स्थिति में धकेल दिया गया जहाँ उसकी पहचान, सामाजिक स्थिति और मानसिक स्वास्थ्य को व्यवस्थित तरीके से तोड़ा गया। जिस परिवार ने शुभम को निशाना बनाया, उसने उसके खिलाफ झूठे केस दर्ज कराए, उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया और यहाँ तक कि समाज में खुद को कैसे पेश करना है, उस पर भी नियंत्रण रखा।

ऑपइंडिया ने इस मामले से जुड़े एफआईआर और कोर्ट दस्तावेजों को हासिल किया है, जिसमें से चौंकाने वाली बातें निकल कर सामने आई हैं।

जबरन इस्लाम कबूल कराया, जमात भेजा और गोमांस खिलाया

शुभम गोस्वामी अपने 2 दोस्तों के साथ 20 नवंबर 2025 को जहाँगीराबाद पुलिस स्टेशन पहुँचा। वहाँ उसने अब्दुल नईम, उसके बेटे अब्दुल नदीम और उसकी बीवी शामा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उसकी शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 3(5) और 251(2) तथा मध्य प्रदेश धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत एफआईआर दर्ज की गई।

सोर्स -मध्य प्रदेश पुलिस

अपनी शिकायत में शुभम ने कहा कि वह हिंदू ब्राह्मण है और 2022 के अंत में एक मुस्लिम लड़की के साथ उसके रिश्ते हो गए। उसने कहा कि यह रिश्ता लड़की के परिवार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने उसके खिलाफ अपहरण और बलात्कार के आरोपों के तहत केस दर्ज कराया, जिसमें पॉक्सो एक्ट के प्रावधान भी शामिल थे।

चूँकि केस गंभीर धाराओं के तहत दर्ज हुआ था, इसलिए उसे गिरफ्तार कर लिया गया और वह लगभग चार महीने जेल में रहा। आखिरकार उसे जमानत पर रिहा किया गया लेकिन इस मामले में आपराधिक कार्रवाई जारी है और अगली सुनवाई भोपाल जिला कोर्ट में 22 दिसंबर 2025 को निर्धारित है।

उसने जोर देकर कहा कि भले ही उनके दबाव में उसने इस्लाम कबूल कर लिया और लड़की से शादी करने पर राजी हो गया, लेकिन POCSO केस कभी वापस नहीं लिया गया और वह अभी भी भोपाल की कोर्ट में चल रहा है।

शुभम को इस्लाम कबूल करने के लिए कैसे मजबूर किया गया

एफआईआर में शुभम ने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद उसके परिवार ने उसे एक हिंदू लड़की से शादी कराने का फैसला किया और इसके लिए तैयारियाँ शुरू हो गईं। लेकिन इल्मा ने उससे संपर्क किया और कहा कि उसने उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी है और उसे उससे शादी करनी ही होगी। एक कोर्ट की पेशी के दौरान वह उसके अब्बू-अम्मी अब्दुल नईम और शमा से मिला, जिन्होंने कहा कि बलात्कार का केस तभी वापस लिया जाएगा जब वह पूरी तरह हिंदू धर्म छोड़ दे और इस्लाम कबूल कर ले।

एफआईआर की कॉपी

शुभम ने शुरुआत में विरोध किया लेकिन अगले दो महीनों तक नईम और उसके बेटे अब्दुल नदीम ने उसे बार-बार धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डाला। आखिरकार वह टूट गया और मार्च 2023 में आम वाली मस्जिद में इस्लाम कबूल कर लिया।

धर्म परिवर्तन के बाद उसे तुरंत रायसेन में तीन दिनों की जमात में भेज दिया गया। उसके बाद उसे नियमित रूप से मस्जिद में नमाज पढ़ने और इस्लामी धार्मिक गतिविधियों में हिस्सा लेने के निर्देश दिए जाते रहे। जब उसने लड़की के अम्मी-अब्बू से पूछा कि अब तो उसे लड़की से शादी करने की इजाजत मिल जानी चाहिए, तो उसे कर्नाटक में 130 दिनों की जमात भेज दिया गया। उस दौरान शुभम को गोमांस खाने के लिए मजबूर किया गया।

शुभम गोस्वामी ने कहा कि उसने लगभग तीन साल परिवार से दूर एक मुस्लिम इलाके में अमान खान की पहचान के साथ गुजारे। इस दौरान सहन की गई भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों ने उसे मानसिक रूप से थका दिया।

मुस्लिम बनाने के बाद भी इल्मा से नहीं कराया निकाह, वापस हिंदू न बने- दी धमकियाँ

शुभम गोस्वामी ने कहा कि इस्लाम कबूल करने के बाद उसने लड़की के परिवार से बार-बार अनुरोध किया कि वे अपना वादा निभाएँ और उसे लड़की से शादी करने दें। इसके बजाय उन्होंने मामला बार-बार टालते रहे और बाद में कहा कि वे उसे किसी दूसरी मुस्लिम महिला से निकाह करा देंगे।

एफआईआर की कॉपी

शुभन ने जब जिद की कि वह तो सिर्फ उसी लड़की से शादी करेगा जिसके साथ उसके रिश्ते थे, तो परिवार ने उसे धमकियाँ देनी शुरू कर दीं। उसने कहा कि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वह हिंदू धर्म में वापस लौटने की कोशिश करेगा या अपने समाज के लोगों से संपर्क करेगा, तो वे उसे और उसके रिश्तेदारों को मार देंगे।

शुभम के खिलाफ लंबित केस को लगातार उसके दबाव में इस्तेमाल किया जाता रहा, जिससे वह उनके प्रभाव में बना रहा।

लड़की के परिवार के सदस्यों को कोर्ट ने नहीं दी जमानत

नईम, नदीम और शमा के खिलाफ दर्ज एफआईआर के बाद इस तिकड़ी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उनके बचाव में भोपाल जिला कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई जो 24 नवंबर 2025 को जस्टिस पंकज कुमार जैन ने खारिज कर दी।

अपने आदेश में कोर्ट ने नोट किया कि आरोपितों के खिलाफ लगे आरोप गंभीर प्रकृति के हैं। जाँच की शुरुआत में पाई गई जानकारियों से पता चलता है कि आरोपितों की जबरन शुभम को इस्लाम कबूल कराने में प्रथम दृष्टया भूमिका थी।

कोर्ट ने देखा कि यह मामला ऐसे कार्यों से जुड़ा है जो अपनी प्रकृति से सामाजिक सद्भाव को प्रभावित कर सकते हैं, क्योंकि आरोप सीधे धार्मिक जबरदस्ती और हिंदू धर्म अपनाने से रोकने के लिए दी गई धमकियों से जुड़े हैं। जज ने कहा कि हिंदू बनने की कोशिश में शुभम और उसके परिवार को मारने की धमकी के आरोप काफी गंभीर हैं। इन्हें हल्के में नहीं ले सकते।

भोपाल जिला कोर्ट के फैसले की कॉपी

जज ने देखा कि सांप्रदायिक संवेदनशीलताओं को देखते हुए इस मामले में शांति और सामाजिक स्थिरता को बिगाड़ने की संभावना है। यह भी नोट किया गया कि जाँच अभी चल रही है और इस चरण में आरोपितों को रिहा करने से गवाहों के साथ हस्तक्षेप या सबूतों से छेड़छाड़ हो सकती है। इन आधारों पर कोर्ट ने जमानत देना उचित नहीं समझा।

बर्बाद कर देने वाले 3 साल

उन तीन सालों के दौरान जब शुभम ‘अमान खान’ के रूप में रहा, उसे उसकी पहचान, कम्युनिटी और स्थिरता से दूर कर दिया गया। उसने अपनी नौकरी खो दी, परिवार ने उसे छोड़ दिया और वह लगातार डर में जीता रहा कि उसके खिलाफ केस फिर से इस्तेमाल हो सकता है।

शुभम ने अपनी पीड़िता जाहिर करते हुए बताया कि एक मुस्लिम पड़ोस में रहना, रोजाना मस्जिदों में जाना और ऐसी मजहबी प्रथाओं का पालन करना पड़ता था, जिसे उसने अपनी मर्जी से नहीं चुना था। शुभम ने कहा है कि वो जल्द घर वापसी कर सनातन में लौट आएगा और अपनी असली पहचान हासिल करेगा।

ये रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

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Anurag
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Anurag is a Chief Sub Editor at OpIndia with over twenty one years of professional experience, including more than five years in journalism. He is known for deep dive, research driven reporting on national security, terrorism cases, judiciary and governance, backed by RTIs, court records and on-ground evidence. He also writes hard hitting op-eds that challenge distorted narratives. Beyond investigations, he explores history, fiction and visual storytelling. Email: [email protected]

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