Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीयबांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार, डेढ़ साल से मौन है यूनुस सरकार:...

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहा अत्याचार, डेढ़ साल से मौन है यूनुस सरकार: समझिए ‘दीपू चंद्र दास’ को इंसाफ दिलाने का क्यों चल रहा दिखावा, भीतर बसा है ‘कट्टरपंथ’

इस्लामी कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश की व्यवस्था को पैरों तले रौंद दिया था और खबरें आई थी कि 2000 से ज्यादा हिंदुओं का उत्पीड़न हुआ है। उस समय भी यही बात सामने आई थी कि एक्शन लिया जाएगा, कार्रवाई होगी, दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

बांग्लादेश में हिंदुओं के घरों पर हमला हुआ यूनुस सरकार कुछ नहीं कर सकी। बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं का रेप हुआ यूनुस सरकार कुछ नहीं कर सकी। बांग्लादेश में हिंदुओं के देवी-देवताओं का अपमान हुआ, मंदिर टूटे युनूस सरकार कुछ नहीं कर सकी। बांग्लादेश में एक हिंदू युवक को सरेआम जलाकर फूँक दिया गया तब भी यूनुस सरकार कुछ नहीं कर सकी…।

यूनुस सरकार हर उस मुद्दे पर चुप रही जो हिंदुओं के उत्पीड़न से जुड़े हुए थे, मगर, अब दुनिया को दिखाने के लिए अचानक उन्हें दीपू चंद्र दास याद आ रहे हैं। कारण- जग में हो रही थू-थू है।

16-17 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश में जब उस्मान हादी की हत्या की नाराजगी लेकर इस्लामी कट्टरपंथी सड़कों पर उतरे तो उनका ये गुस्सा 18 दिसंबर 2025 को एक दीपू चंद्र दास नाम के हिंदू युवक को मारकर, उसका शव पेड़ पर बाँधकर, शरीर जलाकर शांत हुआ।

घटना के बाद दीपू का जला हुआ धड़ और खोपड़ी देखकर उसका परिवार रोता रहा, इंसाफ माँगता रहा लेकिन यूनुस सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। बाद में मीडिया में खबर आई, भारत में विरोध हुआ, सोशल मीडिया पर आवाज उठी, विदेशों से मानवाधिकारों पर प्रश्न हुए तब जाकर अपनी इज्जत बचाने के लिए यूनुस सरकार ने इस पर प्रतिक्रिया देनी उचित समझी।

मीडिया में पहले दो दिन कहा गया कि आरोपितों की गिरफ्तारी हो गई है। करीबन दो दिन तक यही बताया जाता रहा कि कब 7 लोग गिरफ्तार हुए और कब 12। आज इसी दिखावे के क्रम में एक खबर ये भी आई है कि वहाँ यूनुस सरकार के मंत्री अबरार ने दीपू चंद्र दास के परिजनों से मुलाकात की है। कुल मिलाकर मीडिया में माहौल ऐसे बनाया जा रहा है जैसे यूनुस सरकार दीपू चंद्र दास की हत्या को लेकर बहुत चिंतित है और जितना हो सकेगा कार्रवाई करेगी।

हालाँकि इस सरकार की सच्चाई क्या है इसे इन खबरों से मत समझिए… समझना है तो याद करिए बांग्लादेश का बीता डेढ़ साल

शेख हसीना सरकार को हटाने के लिए कैसे इस्लामी कट्टरपंथियों ने बांग्लादेश की व्यवस्था को पैरों तले रौंद दिया था और खबरें आई थी कि बांग्लादेश में 2000+ से ज्यादा हिंदुओं का उत्पीड़न हुआ है। उस समय भी यही बात सामने आई थी कि एक्शन लिया जाएगा, कार्रवाई होगी, दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा।

कुछ दिन तक यही राग चला और बाद में एक खबर आई कि अगस्त 2024 में छात्र प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों पर केस हुए उनपर से मामले को वापस लिया जा रहा है।

ये खबर उन हिंदुओं के लिए बड़ा आघात था जो इस्लामी भीड़ के बीच रहते हुए इस्लामी कट्टरपंथियो से इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठे थे। यूनुस सरकार ने एक पल में उस हिंसा को छात्र प्रदर्शन का नाम देकर सब अपराध धो-पोंछकर साफ कर दिया। वहीं उस कथित छात्र प्रदर्शन में शामिल लोगों को कानूनी संरक्षण देने तक की बात कही।

दीपू चंद्र दास के पिता से मिले यूनुस सरकार के मंत्री

बकायदा बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी हुआ- “एक नए गैर-भेदभावपूर्ण बांग्लादेश की यात्रा शुरू हो गई है। जो छात्र और नागरिक इस उथल-पुथल में शामिल थे, उन्हें 15 जुलाई से 8 अगस्त के बीच उनके कार्यों के लिए दंड, गिरफ्तारी या परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।”

अब बताइए क्या सच में बांग्लादेश की यूनुस सरकार जो दिखावा कर रही है कि उन्होंने दीपू चंद्र दास के हत्यारों को पकड़ लिया है, मंत्री उनके परिवार से मिल रहे हैं, उसके कोई भी मायने हैं…?

दीपू चंद्र दास पर सिर्फ इसलिए बोला जा रहा है क्योंकि उसे दिखाकर सवाल खड़े हो रहे हैं। वरना हमेशा याद रखिएगा कि यही सरकार डेढ़ साल से हिंदुओं के हर उत्पीड़न पर सिर्फ चुप है। ये सरकार तब भी मौन थी जब 5 अगस्त 2024 को हुए तख्तापलट के बाद से हिंदुओं पर 2000+ हमलों की खबर आई। ये सरकार तब भी चुप थी जब मोरक्को से इनके खुद के राजदूत हारून अल रशीद ने ये बात स्वीकार की थी कि शेख हसीना की सरकार में बोलने की आजादी का फायदा उठाकर बांग्लादेश में भारत के खिलाफ भड़काया गया। इस सरकार ने उस समय भी एक शब्द नहीं बोला था

  • जब इसी साल बांग्लादेश में 26 साल के अर्नब कुमार सरकार की चाय पीते समय सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी…।
  • जब मोबाइल की दुकान चलाने वाले सुदेब हलदर को बेवजह गला रेतकर मार दिया गया।
  • जब कॉक्स बाजार के चकरिया में 8-10 लोगों ने 14 साल की लड़की से गैंगरेप कर दिय।
  • जब नरैल में हिंदू महिला बसना मलिक के साथ ऐसी दरिंदगी की गई थी क वह बाद में उल्टियाँ कर करके मर गई।
  • जब एक हिंदू पत्रकार सौगात बोस के घर पर हमला हुआ। उसके घरवालों की खोपड़ी फोड़ दी गई। हड्डियाँ तोड़ दी गई और सबको बुरी तरह घायल करके अपराधी फरार हो गए।

1 साल में सैंकड़ों नहीं हजारों घटनाएँ ऐसी हुई हैं जब बांग्लादेश की यूनुस सरकार चाहती तो हिंदुओं के लिए मुखर होकर कड़े एक्शन ले सकती थी, लेकिन ये कभी नहीं हुआ। लगातार हिंदू की हत्याओं की खबरों से मीडिया भरा रहा, मंदिर टूटने की घटनाएँ आती रहीं… मगर यूनुस सरकार शांत रही। इसलिए इस बार मीडिया में आ रहे बयानों से भ्रमित मत होइए।

आपको बरगलाने का, ध्यान भटकाने का ये सिर्फ एक तरीका है। इस्लामी कट्टरपंथियों के आगे झुक चुके बांग्लादेश और उसकी सरकार से हिंदुओं को उम्मीद नहीं लगाना चाहिए। उम्मीद होनी चाहिए तो सिर्फ इतनी कि बांग्लादेश में जो हिंदू शेष हैं वो इन कट्टरपंथियों की आतंक से हमेशा बचे रहें। इन परिवारों पर ऐसी मानसिकता की कभी नजर न पड़े।

बांग्लादेश में हिंदुओं की घटती संख्या

ये चिंता सिर्फ इसलिए है क्योंकि 1971 के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं की आबादी सिर्फ और सिर्फ घटी ही है। 1974 में हुई जनगणना के अनुसार बांग्लादेश में हिंदू कुल आबादी का 13.5% फीसद थे। 1981 2001 में 9.3% और 2011 की जनगणना में 8.5% हो गई।

सिर्फ मीडिया में आती खबरें ही नहीं, आँकड़े भी यही बताते हैं कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ से अल्पसंख्यक हिंदू वैसे ही परेशान है जैसे पाकिस्तान में है। इस इस्लामी मुल्क में एक तरफ जहाँ लगातारा हिंदुओं की आबादी घटी है वहीं मुस्लिमों की आबादी में लगातार इजाफा हुआ है। 1974 में इनकी आबादी 85.4% थी और अब ये 91.5% हो गई

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

Searched termsबांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार, Bangladesh Hindu persecution, बांग्लादेश हिंदू हिंसा, Bangladesh violence against Hindus, हिंदुओं पर हमला बांग्लादेश, Bangladesh minority oppression, युनूस सरकार, यूनुस सरकार मौन, Yunus government silence, बांग्लादेश सरकार हिंदू मुद्दा, Bangladesh interim government controversy, युनूस सरकार कट्टरपंथ, दीपू चंद्र दास, Dipu Chandra Das case, दीपू चंद्र दास इंसाफ, Dipu Chandra Das justice, बांग्लादेश हिंदू नेता दीपू दास, कट्टरपंथ बांग्लादेश, Bangladesh radicalism, इस्लामी कट्टरपंथ बांग्लादेश, धार्मिक उग्रवाद बांग्लादेश, minority persecution Bangladesh, इंसाफ का दिखावा, justice drama Bangladesh, बांग्लादेश हिंदू मुद्दे पर दिखावा, मीडिया रिपोर्ट बांग्लादेश हिंदू, Bangladesh Hindu news Hindi, डेढ़ साल से मौन सरकार, 1.5 years silence Bangladesh government, हालिया बांग्लादेश हिंसा, Bangladesh latest Hindu violence, बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार क्यों हो रहा है, युनूस सरकार हिंदू हिंसा पर चुप क्यों है, दीपू चंद्र दास को इंसाफ क्यों नहीं मिला, बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की स्थिति, Bangladesh Hindu persecution under Yunus government, Is Bangladesh becoming radicalized

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

MOU के बाद भी सुस्ती में रहा तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश ने फुर्ती से पकड़े मझगाँव डॉक के ₹29000 करोड़: समझिए कैसे चंद्रबाबू नायडू के...

प्रोजेक्ट में राज्य सरकार और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी में ₹5289 करोड़ देंगे, जबकि MDL मुख्य निवेशक के रूप में ₹23964 करोड़ का निवेश करेगा।

पूरी तरह से ‘ड्राई स्टेट’ नहीं था लक्षद्वीप, 47 साल बाद सरकार ने बदले शराब के नियम: जानिए क्यों, कभी विकास परियोजनाओं के विरोध...

भारत के केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप में 47 वर्षों बाद शराब नीति में बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने लागू शराबबंदी कानून को समाप्त कर दिया है।
- विज्ञापन -