दक्षिण गुजरात के शांत जनजातीय इलाकों में इन दिनों धर्म को लेकर एक बड़ी जंग छिड़ गई है। यह मामला कोई मामूली झगड़ा नहीं है, बल्कि उस ‘रक्षक’ पर सवाल उठ रहे हैं जिसे अपनी ही संस्कृति को खत्म करने का दोषी माना जा रहा है। तापी से BJP विधायक मोहन कोंकणी, जिन्हें जनजातीय समाज की आवाज उठाने के लिए चुना गया था, आज खुद धर्मांतरण (कन्वर्जन) के आरोपों में घिरे हैं। तापी और डांग जिलों में हजारों लोगों का गुपचुप तरीके से धर्मांतरण और विधायक के निजी जीवन में ईसाई रीति-रिवाजों का आना, पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बन गया है।
ऑपइंडिया की जाँच और स्थानीय देव बिरसा सेना के खुलासे बताते हैं कि यह कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। तापी जिले में पिछले कुछ सालों में 1500 से ज्यादा अवैध चर्च बना दिए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि सरकारी कागजों में आज भी कोई ‘ईसाई’ नहीं बना है, फिर भी गाँव-गाँव पादरी घूम रहे हैं। यह दोहरा खेल इसलिए खेला जा रहा है ताकि धर्म बदलने के बाद भी जनजातीय स्टेटस और आरक्षण का फायदा मिलता रहे और धीरे-धीरे पूरे समाज की पहचान बदल दी जाए।
विधायक के ‘गृह प्रवेश’ में पादरियों का जमावड़ा
विवाद की सबसे बड़ी और हाल ही की वजह BJP विधायक मोहन कोंकणी का अपना ‘गृह प्रवेश’ कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम गाँधीनगर में विधायकों के लिए बने नए सरकारी आवास (MLA Quarters) के आवंटन के बाद आयोजित किया गया था। एक जनजातीय नेता को आवंटित सरकारी घर पर जहाँ पारंपरिक रीति-रिवाजों, मंत्रों की गूंज और शंख की आवाज होनी चाहिए थी, वहाँ ईसाई पादरियों की भीड़ जमा थी। पादरियों ने अपने धर्म के हिसाब से पूजा-पाठ कराया और अब विधायक इसे अपनी ‘निजी पसंद’ बताकर लोगों का मुँह बंद करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पर सामाजिक कार्यकर्ता काजल हिंदुस्तानी ने कड़ा सवाल उठाया और लिखा, “विधायक जी, जनता के प्रतिनिधि के लिए कुछ भी ‘निजी’ नहीं होता, जब आप जनजातीय समाज के लिए सुरक्षित सीट से चुनाव जीतकर आए हैं, तो आप पूरे समाज के जिम्मेदार हैं। गाँधीनगर के सरकारी क्वार्टर में पादरियों को बुलाकर यह कार्यक्रम करना दरअसल गाँव के अन्य जनजातीय लोगों को यह संदेश देने जैसा था कि ‘देखो, जब स्वयं विधायक अपनी परंपरा बदल सकते हैं, तो तुम क्यों नहीं?'”
गुजरात के आदिवासी समाज के विधायक “मोहन कोंकणी” अपने गृह प्रवेश पूजा में ईसाई पादरी को बुलाने पर स्पष्टीकरण दे रहे है की ये उनकी आस्था का विषय है, वे पादरी को भी बुला सकते है और वे ब्राह्मण को भी बुला सकते है, ये उनका निजी विषय है
— Kajal HINDUsthani (@kajal_jaihind) March 27, 2026
विधायक जी, पहली बात तो यह है कि जब आप “पब्लिक… pic.twitter.com/Diw1oJiGCD
मंच से पादरियों जैसी भाषा और ‘मसीही’ गुणगान
BJP विधायक कोंकणी का एक Video भी खूब वायरल हो रहा है। इसमें वे किसी ईसाई सभा में बिल्कुल एक ‘पेशेवर पादरी’ की तरह ‘ईसा मसीह’ और ‘माता मरियम’ की तारीफें कर रहे हैं। वे मंच पर खड़े होकर बाइबल की बातें पढ़ रहे हैं और वहाँ मौजूद लोगों को उकसा रहे हैं कि ‘अगली बार अकेले मत आना, अपने साथ और लोगों को भी लेकर आना।’
देव बिरसा सेना के नेताओं का साफ कहना है कि बीजेपी विधायक जी सिर्फ कागजों पर जनजातीय बने हुए हैं, जबकि उनके काम और उनकी बातें पूरी तरह ईसाइयत वाली हैं। यह उस जनजातीय समाज के साथ सबसे बड़ा धोखा है, जिसने भगवान बिरसा मुंडा के आदर्शों को मानकर उन्हें अपना नेता चुना था।
घटना- व्यारा, जिला तापी (गुजरात)
— Kajal HINDUsthani (@kajal_jaihind) March 25, 2025
गुजरात में खुलेआम हो रहा है वनवासियों का धर्मांतरण…!!
पिछले पाँच वर्षों में बहुत ही तेज़ी से दक्षिण गुजरात में बढ़ रहा है मिशनरीयो का धर्मांतरण का खेल
वनवासी समाज के सामाजिक संगठन “देव बिरसा सेना” ने कहा- “भाजपा विधायक #मोहन_कोंकणी धर्मांतरण… pic.twitter.com/1tAH3TeQ8d
BJP विधायक मोहन कोंकणी की सफाई: ‘सबूत है तो कार्रवाई करो’
जब ऑपइंडिया ने इस पूरे विवाद पर BJP विधायक मोहन कोंकणी से सवाल किए, तो उन्होंने धर्मांतरण को बढ़ावा देने के आरोपों से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे ऐसा कुछ कर रहे हैं, तो इसके सबूत दिए जाने चाहिए और उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
जब BJP विधायक से पूछा गया कि उन्होंने ईसाई सभा में जाकर जनजातीय समाज के लोगों से यह क्यों कहा कि ‘आप भी आइए और अपने साथ दूसरों को भी लाइए,’ तो उन्होंने इसे राजनीति से जोड़ दिया। विधायक का कहना था कि एक जनता के प्रतिनिधि (नेता) होने के नाते उन्हें ऐसे कार्यक्रमों में जाना पड़ता है और वहाँ अच्छी बातें कहनी पड़ती हैं।
जब उनसे अगला सवाल किया और पूछा कि तापी इलाके में जब कोई कागजी तौर पर ईसाई नहीं है, तो वहाँ देश भर से बड़े-बड़े पादरी सभा करने क्यों आते हैं? इसपर BJP विधायक ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि देश में हर कोई कहीं भी सभा करने के लिए आजाद है। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने इसकी इजाजत दी है, तो यह सवाल पुलिस से ही पूछना चाहिए।
विधायक ने यह भी दावा किया कि उनके पास इस विवाद को लेकर कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे अंदर ही अंदर ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रहे हैं, लेकिन विधायक बार-बार यही कहते रहे कि ‘अगर ऐसा है तो सबूत लाओ।’ यहाँ तक कि जब देव बिरसा सेना (जो जनजातीय हितों के लिए लड़ रही है) का जिक्र हुआ, तो विधायक ने साफ कह दिया कि वे ऐसी किसी संस्था को जानते ही नहीं हैं।
आस्था पर प्रहार: कुलदेवी के पहाड़ों पर चर्च का कब्जा और ‘नो-एंट्री’
धर्मांतरण की यह बीमारी अब जनजातीय समाज की आस्था के पुराने केंद्रों को खत्म कर रही है। सोनगढ़ का ‘गीधमाड़ी आया’ पहाड़, जो बरसों से जनजातीय समाज की कुलदेवी का पवित्र स्थान था, वहाँ अब हालात बदल चुके हैं। वहाँ से हिंदू धर्म के प्रतीकों और निशानों को हटाकर ईसाई मिशनरियों ने ‘मरियम माता’ का कब्जा जमा लिया है।
हैरानी की बात यह है कि आज वहाँ असली जनजातीय लोगों को अपनी ही कुलदेवी की पूजा करने से रोका जा रहा है। आरोप तो यह भी है कि BJP विधायक के अपने गाँव हरिपुरा के पास वाले पहाड़ पर भी एक अवैध चर्च खड़ा कर दिया गया है, जिसे प्रशासन की भी चुप्पी (मूक सहमति) हासिल है। सवाल यह उठता है कि जब रक्षक ही पादरियों के स्वागत में पलकें बिछाएगा, तो जनजातीय समाज की परंपराओं की रक्षा कौन करेगा?
आरक्षण और स्टेटस का ‘डबल गेम’: कागजों पर हिंदू, दिल से ईसाई
इस पूरे मामले का सबसे खतरनाक हिस्सा यह है कि धर्मांतरण पर कोई सख्त कानून न होने की वजह से पादरियों को खुली छूट मिल गई है। लोग ईसाई धर्म अपना रहे हैं, चर्च जा रहे हैं और पादरियों की बातें मान रहे हैं, लेकिन सरकारी कागजों में वे आज भी खुद को ‘हिंदू जनजातीय’ ही दिखाते हैं।
यह सब एक सोची-समझी चाल के तहत हो रहा है। ऐसा करने से न तो उनका सरकारी आरक्षण छिनता है और न ही उनकी राजनीतिक ताकत (Status) कम होती है। यही वजह है कि हिंदू संगठन अब पुरजोर माँग कर रहे हैं कि ऐसे ‘नकली जनजातीय’ लोगों को तुरंत लिस्ट से बाहर (डिलिस्ट) किया जाए। मशहूर कथावाचक मोरारी बापू ने भी हाल ही में अपनी कथा में इस बड़े खतरे की ओर इशारा किया था, लेकिन BJP विधायक कोंकणी ने उनके जैसे संत की बात को भी झुठलाने की हिम्मत दिखाई।
दक्षिण गुजरात में जनजातीय समाज पर धर्मांतरण का खतरा: मंदिर तोड़कर चर्च बनाने तक पहुँचा खेल
दक्षिण गुजरात के तापी और डांग जैसे जनजातीय इलाकों में गुपचुप तरीके से धर्म बदलवाने का खेल लंबे समय से चल रहा है। दिसंबर 2022 में तापी के जराली गाँव में एक हिंदू मंदिर को हटाकर वहाँ चर्च बना दिया गया। आज वहाँ के जनजातीय लोग अपनी ही जगह पर पूजा करने से डर रहे हैं क्योंकि उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं। तापी में एक ही परिवार के 5 लोगों की गिरफ्तारी और सरकारी स्कूलों में गुरु पूर्णिमा पर बाइबल पढ़ाने जैसी घटनाओं ने साफ कर दिया है कि यहाँ जनजातीय संस्कृति को मिटाने की बड़ी साजिश चल रही है।
धर्मांतरण का यह जाल केवल तापी या डांग तक सीमित नहीं है, बल्कि नवसारी, वलसाड और सूरत तक फैल चुका है। नवसारी में हिंदू धर्म का अपमान करने वाले ईसाई शिक्षक दंपतियों की गिरफ्तारी हुई है, तो वलसाड के धरमपुर-कपराड़ा की पहाड़ियों पर अवैध रूप से बड़े-बड़े क्रॉस और ईसाई बस्तियाँ बसाई जा रही हैं। जनजातीय कार्यकर्ता रवि नायका का कहना है कि गाँवों में यह खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है, लेकिन मीडिया में इसकी चर्चा नहीं होती।
सूरत जैसे शहरों की हिंदू सोसायटियों में भी बिना वजह चर्च खड़े किए जा रहे हैं। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि ये तो सिर्फ वो मामले हैं जो सामने आए हैं, असली संख्या इससे कहीं ज्यादा बड़ी है। अगर जल्द ही सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो जनजातीय समाज की सदियों पुरानी पहचान और संस्कृति पूरी तरह खत्म हो सकती है।
अस्तित्व की पुकार: जनजातीय समाज को सरकार से क्या उम्मीद है?
देव बिरसा सेना के नेता अरविंद वसावा ने ऑपइंडिया के जरिए सरकार से गुहार लगाई है कि दक्षिण गुजरात में चल रहे धर्मांतरण के इस खेल को तुरंत रोका जाए और जो अवैध चर्च या ढांचे खड़े किए गए हैं, उन्हें हटाया जाए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सरकार को हमारी संस्कृति बचाने के लिए आगे आना चाहिए और हमारी पीड़ा सुननी चाहिए।
अरविंद वसावा की चेतावनी डराने वाली है। उन्होंने कहा, “हमारी जनजातीय संस्कृति, हमारी परंपरा, भाषा और हमारा वजूद बचा रहे, इसके लिए सरकार और समाज को साथ देना होगा। आज हालात इतने बुरे हैं कि कई गाँवों में केवल 10 असली जनजातीय लोग बचे हैं, बाकी सब ने अपने पूर्वजों की परंपरा और अपनी कुलदेवी को छोड़ दिया है।”
उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि जनजातीय संस्कृति को खत्म करने के लिए विदेशी ताकतों के साथ अब हमारे अपने लोग भी मिल गए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “सरकार से हमारी कोई बड़ी माँग नहीं है, हमें धन-दौलत नहीं चाहिए। हम बस इतना चाहते हैं कि हमारे पूर्वजों के रीति-रिवाज, हमारी विरासत और हमारी पहचान बची रहे। हम सरकार से खुली अपील करते हैं कि वह इस मुश्किल वक्त में हमारा साथ दे और हमारी जड़ों को कटने से बचाए।”
जनजातीय समाज के साथ बड़ा धोखा और विश्वासघात
BJP विधायक मोहन कोंकणी का यह कहना कि ‘मैं अपने घर किसे बुलाता हूँ, यह मेरा निजी मामला है’, पूरी तरह से गलत और जिम्मेदारी से भागने जैसा है। विधायक जी, आपने उस जनजातीय समाज का अपमान किया है जिसने आपको अपनी पहचान और संस्कृति बचाने के भरोसे पर चुना था। ब्राह्मणों को छोड़कर पादरियों से घर की पूजा करवाना यह साफ दिखाता है कि आपकी वफादारी भारत की मिट्टी और परंपराओं के प्रति नहीं है। बल्कि आप उन ताकतों के साथ खड़े हैं जो जनजातीय समाज का नामो-निशान मिटाना चाहती हैं।
यह सिर्फ एक छोटा सा कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। जिस ईसाई धर्म के खिलाफ भगवान बिरसा मुंडा ने ‘उलगुलान’ (बड़ा विद्रोह) किया था, आज उसी को आप अपने घर में बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस-प्रशासन का चुप रहना और एक विधायक का पादरियों के एजेंट की तरह काम करना एक बहुत बड़े खतरे की घंटी है। अगर आज जनजातीय समाज ने इस ‘सफेदपोश धर्मांतरण’ के खिलाफ आवाज नहीं उठाई, तो कल उनके पवित्र पहाड़, उनकी अनोखी संस्कृति और उनकी पहचान, सब कुछ पादरियों के कब्जे में होगा।
(यह रिपोर्ट मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखी है। गुजराती की रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें)


