यूँ तो इस लेख में बात हम पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा की करेंगे लेकिन इसकी शुरुआत एक बयान से करते हैं। बुधवार (6 मई 2026) को BJP बंगाल के मुख्य प्रवक्ता देबजीत सरकार ने कहा कि कोई भी व्यक्ति स्वयं घोषणा करके भारतीय जनता पार्टी का सदस्य नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक पार्टी आपको आधिकारिक रूप से ना स्वीकार कर ले तब तक आप भाजपा के कार्यकर्ता नहीं माने जाएँगे।
अब जाहिर है कि कई लोगों को यह बात बहुत अचरज भरी लगेगी कि ऐसा क्यों? राजनीतिक दल तो चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके साथ जुड़े और उनकी विचारधारा का विस्तार हो। तो बंगाल में हवा उल्टी क्यों बह रही है। दरअसल, इस उल्टी हवा बहने के पीछे जो कहानी छिपी है वो बंगाल हिंसा से जुड़ी ही है।
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— Debjit Sarkar (@Bjp_Debjit) May 6, 2026
𝐍𝐎𝐓𝐄
No individual can become a member of the Bharatiya Janata Party through self-declaration.
Those associated with the TMC who have been involved in atrocities, unlawful activities, or intimidation cannot seek refuge in @BJP4Bengal to escape accountability. https://t.co/kXNEPkeMob pic.twitter.com/WD3UUEZmXR
बंगाल में BJP को मिली बंपर जीत के बाद राजनीतिक हिंसा की कई घटनाएँ सामने आईं। बीरभूम, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, नदिया और बाँकुड़ा समेत कई जिलों से झड़पों, तोड़फोड़ और हत्याओं की खबरें आईं। इनके बीच ममता बनर्जी और TMC का गैंग खुद को इस राजनीतिक हिंसा का विक्टिम दिखाने की कोशिश में जुट गया है। हालाँकि, सच इसके विपरित है बेशक राज्य में BJP पूरी ताकत से लौटी हो लेकिन अब भी निशाना बीजेपी के कार्यकर्ता ही बन रहे हैं।
TMC के गुंडे बीजेपी के लोगों को मारपीट रहे हैं और पार्टी की महिला सांसद इस पर झूठ फैला रही हैं। TMC की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने बीजेपी के एक कार्यकर्ता की हत्या पर कहा कि TMC के कार्यकर्ता की हत्या कर दी गई। जबकि सच्चाई यह है कि उस बीजेपी कार्यकर्ता को TMC के गुंडों ने मारा था।
कोलकाता के न्यू टाउन इलाके में चुनाव नतीजों के तुरंत बाद एक BJP विधायक के ‘भाई’ की हत्या कर दी गई। हुई। नवनिर्वाचित BJP विधायक पीयूष कनोडिया ने इस पर गहरा दुख जताया। पीयूष कनोडिया ने कहा कि उन्हें विधायक बने अभी 4 घंटे भी नहीं हुए थे कि उन्हें अपने साथी का शव देखना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने TMC नेता कमल मंडल समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है।
कैनिंग विधानसभा क्षेत्र के गोलोकपाड़ा इलाके स्थित बूथ नंबर 240 में जय श्रीराम के नारे लगाने वाले BJP के तीन कार्यकर्ताओं को TMC के गुंडों ने बेरहमी से पीटा। यह दिखाता है कि किस तरह चुनाव में हार को TMC के गुंडे नहीं पचा पा रहा है और हिंसा पर उतारू हैं।
ये तो हुई एक बात… अब समझते हैं कि देबजीत का बयान क्यों महत्वपूर्ण है। इसे भी एक उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं। कोलकाता में भगवा तिलक लगाए और झंडा पकड़े 30-40 गुंडे शालिनी सेन के पेट्रोल पंप पर घुस आए और वहाँ आकर मैनेजर को धमकाने लगे। आपको ये पढ़कर लगेगा की BJP के लोगों ने जीत के बाद उत्पात मचाना शुरू कर दिया है लेकिन यहीं कहानी में ट्विस्ट है।
दरअसल, ये गुंडे बीेजपी के नहीं थे, ये TMC के थे जिन्होंने अब अपनी पहचान बदल ली थी। ऐसे दावा हम नहीं कर रहे बल्कि खुद शालिनी का ये कहना है। शालिनी की मदद के लिए बाद में पुलिस भेजी गई।
Kolkata, West Bengal: HPCL Petrol Pump Owner, Tollygunge, Shalini Sen says, "Yesterday evening, when I had gone home, around 30–40 miscreants from the previous regime came to the petrol pump in an intoxicated state. They threatened my manager regarding the parking of a large fuel… pic.twitter.com/QVEq2L2lFR
— IANS (@ians_india) May 6, 2026
अब ऐसा ही एक और उदाहरण देखते हैं, इन विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज करने वाले भाजपा नेता दिलीप घोष से जुड़ा भी एक ऐसा ही किस्सा है। देर रात को दिलीप घोष के पास उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले TMC के उम्मीदवार का फोन पहुँचा।
फोन करने वाले ने कहा- ‘कुछ करो।’ दिलीप घोष ने पूछा- ‘मैं क्या कर सकता हूँ?’ तो उसने कहा- ‘मेरे दफ्तर पर हमला हो रहा है। दरवाजे बंद कर दिए गए हैं। हम मर जाएँगे।’ इस पर दिलीप घोष ने पूछा- ‘कौन हमला कर रहा है?’ तो एक नाम लिया गया। दिलीप घोष ने कहा कि लेकिन वो तो TMC का आदमी था, तुम्हारे साथ था। इस पर दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘हाँ था तो TMC के ही साथ।’ यह पूरा वाक्या बताया है, BJP बंगाल के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने।
सिर्फ इतना ही नहीं, उन्होंने एक और घटना का जिक्र करते हुए कहा कि बारासात से बीजेपी के नवनिर्वाचित विधायक उनके पास आए और बताया कि 28 तारीख की रात को फेसबुक लाइव में जो उनका चरित्र पर सवाल उठा रहे थे, आज वो भगवा झंडा लेकर घूम रहे हैं। वो TMC के लोग BJP के बन गए हैं।
Kolkata, West Bengal: BJP State President Samik Bhattacharya says, "The Barasat candidate came to me… What is even more interesting is that our former president, former MP Dilip Ghosh, against whom the TMC candidate was contesting elections… Two hours later, at night, he… pic.twitter.com/Lp7vzjHo5t
— IANS (@ians_india) May 6, 2026
बंगाल बीजेपी ने भी इससे जुड़ा एक पोस्ट किया है। बीजेपी ने X पर लिखा, “हमारे ध्यान में आया है कि तृणमूल की तथाकथित ‘गुंडा वाहिनी’ के कुछ लोग बीजेपी कार्यकर्ताओं के रूप में खुद को पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि लोगों को गुमराह किया जा सके और अव्यवस्था फैलाई जा सके।”
पार्टी ने आगे लिखा, “यह बात साफ और स्पष्ट तौर पर बताई जा रही है कि बीजेपी इस तरह की धोखाधड़ी बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगी। जो भी व्यक्ति खुद को किसी और के रूप में पेश करेगा, डराने-धमकाने की कोशिश करेगा या कानून को अपने हाथ में लेगा, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अपराधियों पर कानून की पूरी ताकत के साथ कार्रवाई होगी।”
Statement: pic.twitter.com/XJSKh80Cq5
— BJP West Bengal (@BJP4Bengal) May 6, 2026
बंगाल की राजनीति का हिस्सा है हिंसा
पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर एक चीज कॉमन रही है तो वो है राजनीतिक हिंसा। वर्षों से यही पैटर्न चलता आया है बस चेहरे बदलते रहे हैं, झंडे बदलते रहे हैं, लेकिन तरीका वही रहा है। बंगाल में अब तक सत्ता का मतलब सिर्फ सरकार चलाना नहीं रहा है बल्कि इलाके पर पकड़, डर का माहौल और विरोध को दबाना भी रहा है।
बंगाल में वामपंथी शासन के दौरान गुंडे का एक संगठित ‘कैडर सिस्टम’ तैयार हो गया था। ये कैडर के लोग चुनाव जिताने से लेकर विरोधियों को खत्म करने तक हर काम करते थे। बंगाल में इन्हें खूब राजनीतिक संरक्षण मिला और हिंसा को राजनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल किया जाने लगा। बूथ पर कब्जा, विरोधियों को डराना-धमकाना, इलाके में दहशत फैलाना- यही सब वामपंथियों के इस ‘कैडर’ की कार्यशैली थी।
फिर 2011 आया। ममता बनर्जी ने ‘पोरिबोर्तोन’ यानी बदलाव का नारा दिया और 34 साल के वामपंथी शासन को खत्म कर दिया। जनता ने हिंसा से बचने की चाह में सत्ता पलट दी। लेकिन कुछ बदला नहीं। जो कल तक CPM का झंडा लेकर भीड़ को नियंत्रित करते थे, वे अगले दिन TMC का झंडा थामे खड़े थे। हथियार और हाथ वही था, बस मालिक बदल गया था। पोरिबोर्तोन तो हुआ लेकिन सिर्फ सत्ता का हिंसा की संस्कृति यूँ ही चलती रही।
TMC के शासन में यही होता रहा। TMC के गुंडे बूथों को नियंत्रित करते, लोगों को धमकाते, कटी मनी वसूलते और पारा मॉडल चलाकर उगाही करते। 2021 के चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद इन गुंडों का आतंक खूब दिखा, TMC के इन गुंडों ने BJP समर्थकों पर हमले किए, उनके घरों में आग लगाई गई और राजनीतिक हत्याएँ और बलात्कार तक किए गए।
इस बार भी इन गुंडों की कोशिश यही है। हालाँकि, इस बार उनकी दाल नहीं गल रही है। 2011 में जब TMC आई तो उसने CPM के गुंडों को खुले हाथों अपनाया क्योंकि उसे ‘मसल पावर’ चाहिए थी। परिणाम यह हुआ कि पार्टी बदली, हिंसा की संस्कृति नहीं। लेकिन BJP ने तय कर दिया है कि TMC के गुंडे अगर सोच रहे हैं कि वो BJP में शामिल होकर बच जाएँगे या कार्रवाई नहीं होगी तो ये वो भूल जाएँ।
इस बार हिंसा की शिकायतों पर कार्रवाई हो रही है, हिंसा से निपटने के लिए चुनावों के बाद भी केंद्रीय बलों को पश्चिम बंगाल में तैनात किया गया है और जिस तरह 2021 में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी उसे इस बार काबू पाने की पूरी कोशिशें की जा रही हैं।


