Homeविविध विषयअन्यफर्जी पुलिस कॉल, 'डिजिटल अरेस्ट' और UPI से ठगी पर RBI की सर्जिकल स्ट्राइक:...

फर्जी पुलिस कॉल, ‘डिजिटल अरेस्ट’ और UPI से ठगी पर RBI की सर्जिकल स्ट्राइक: आ रहा ‘Kill Switch’, समझें- AI कैसे करेगा ट्रांजैक्शन की निगरानी

RBI अब ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें डिजिटल भुगतान की सुविधा बनी रहे लेकिन ठगी करने वालों के लिए रास्ता कठिन हो जाए। आने वाले समय में संभव है कि पैसे भेजने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो लेकिन इसके बदले लोगों के खातों की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाए।

भारत में पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल पेमेंट ने जिंदगी को बेहद आसान बना दिया है। अब पैसे भेजने के लिए बैंक की लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ती बस मोबाइल उठाइए और कुछ सेकेंड में UPI, इंटरनेट बैंकिंग या IMPS के जरिए पैसा एक खाते से दूसरे खाते में भेज दीजिए।

हालाँकि, जितनी तेजी से डिजिटल पेमेंट बढ़ा है, उतनी ही तेजी से डिजिटल फ्रॉड के मामले भी सामने आए हैं। अब धोखेबाज मोबाइल या सिस्टम को हैक नहीं करते बल्कि डर, लालच और दबाव बनाकर खुद उनसे पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब एक बड़े सुरक्षा तंत्र पर काम कर रहा है। RBI ने मई 2026 में जारी वार्षिक रिपोर्ट में बताया है कि वह एक ‘किल स्विच’ (Kill Switch) सुविधा और सभी डिजिटल पेमेंट मोड के लिए ‘स्विच ऑन-स्विच ऑफ’ सिस्टम लाने की संभावना तलाश रहा है।

इसके अलावा, पहली बार बड़े मूल्य के कुछ डिजिटल ट्रांजैक्शन में थोड़ी देरी यानी ‘कूलिंग पीरियड’ देने पर भी विचार हो रहा है ताकि ठगी होने से पहले लोगों को सोचने और पहचानने का समय मिल सके।

क्या है ‘किल स्विच’ और यह कैसे करेगा काम?

कल्पना कीजिए कि किसी दिन अचानक आपको पुलिस अधिकारी, CBI, ED या किसी सरकारी एजेंसी के नाम पर वीडियो कॉल आती है। सामने वाला कहता है कि आपके खिलाफ गंभीर मामला दर्ज है और गिरफ्तारी से बचना है तो तुरंत पैसा किसी खाते में भेजिए। डर और घबराहट में बहुत से लोग बिना सोचे पैसे ट्रांसफर कर देते हैं। RBI का मानना है कि ऐसे मामलों में अगर ग्राहक को तुरंत बैंकिंग लेन-देन रोकने का विकल्प मिल जाए, तो बड़ी ठगी टाली जा सकती है।

यहीं पर ‘किल स्विच’ काम आएगा। आसान भाषा में समझें तो यह एक तरह का ‘इमरजेंसी बटन’ होगा। अगर किसी व्यक्ति को लगे कि उसके साथ डिजिटल फ्रॉड हो सकता है तो वह अपने बैंक ऐप, इंटरनेट बैंकिंग या दूसरे माध्यम से इस सुविधा को सक्रिय कर सकेगा। इसके बाद खाते से होने वाले सभी डेबिट ट्रांजैक्शन यानी पैसे निकलने की प्रक्रिया तुरंत बंद हो सकती है।

इसका मतलब यह होगा कि UPI पेमेंट, बैंक ट्रांसफर, कार्ड पेमेंट, इंटरनेट बैंकिंग या दूसरे डिजिटल माध्यमों से पैसा भेजना अस्थायी रूप से रुक जाएगा। यानी अगर कोई ठग आपको दबाव में पैसा ट्रांसफर कराने की कोशिश कर रहा है तो आप एक क्लिक में पूरा खाता ‘फ्रीज’ जैसे मोड में डाल सकते हैं और बाद में स्थिति सामान्य होने पर सेवाओं को फिर चालू कर सकते हैं।

यह प्रस्ताव नया जरूर है लेकिन इसकी सोच पूरी तरह नई नहीं है। गृह मंत्रालय (MHA) की एक उच्च स्तरीय समिति पहले भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे मामलों को रोकने के लिए ऐसे सिस्टम पर विचार कर चुकी है।

‘स्विच ऑन-स्विच ऑफ’ सिस्टम क्या होगा, आप खुद तय करेंगे कौन सी सेवा चलेगी?

अभी कार्ड पेमेंट में ग्राहकों को कुछ नियंत्रण पहले से मिलता है। जैसे कोई ग्राहक घरेलू कार्ड ट्रांजैक्शन, अंतरराष्ट्रीय पेमेंट या ‘टैप एंड पे’ जैसी सुविधा को बैंक ऐप से बंद या चालू कर सकता है। जरूरत पड़ने पर कार्ड लिमिट भी बदल सकता है।

अब RBI इसी मॉडल को पूरे डिजिटल पेमेंट सिस्टम तक बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसका मतलब है कि भविष्य में ग्राहक खुद तय कर सकते हैं कि उनके खाते से कौन-कौन सी सेवाएँ सक्रिय रहें और कौन सी बंद।

उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति रोज UPI इस्तेमाल नहीं करता तो वह इसे बंद रख सकता है और जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट के लिए चालू कर सकता है। कोई व्यक्ति अंतरराष्ट्रीय कार्ड इस्तेमाल नहीं करता तो वह उस सुविधा को स्थायी रूप से बंद रख सकता है। ATM से निकासी, इंटरनेट बैंकिंग, UPI, कार्ड उपयोग और दूसरे भुगतान चैनलों पर भी ऐसा नियंत्रण मिल सकता है।

इसका फायदा यह होगा कि अगर किसी ठग के पास आपकी बैंक डिटेल या फोन तक पहुँच भी बन जाए तब भी वह हर सेवा का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यानी सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाएगी। RBI का मानना है कि इससे उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल ठगी के मामलों को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

आखिर ट्रांजैक्शन में RBI क्यों चाहता है ‘एक घंटे का इंतजार’?

RBI के एक पेपर में यह भी सुझाव दिया गया है कि कुछ बड़े डिजिटल ट्रांजैक्शन को तुरंत पूरा करने के बजाय थोड़ी देर से प्रोसेस किया जाए। प्रस्ताव के मुताबिक, ₹10,000 से अधिक के कुछ व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) भुगतान, खासकर जब पहली बार किसी व्यक्ति, एकल स्वामित्व (Sole Proprietorship) या साझेदारी फर्म (Partnership Firm) को पैसा भेजा जा रहा हो तो उस ट्रांजैक्शन में करीब एक घंटे का समय लग सकता है।

सुनने में यह लोगों को असुविधा जैसा लग सकता है लेकिन RBI इसके पीछे एक आसान तर्क दे रहा है। आज फ्रॉड इतनी तेजी से होते हैं कि लोगों को सोचने का मौका ही नहीं मिलता। फोन पर धमकी, डर और जल्दी का माहौल बनाकर पैसे तुरंत ट्रांसफर करा लिए जाते हैं। लेकिन अगर ट्रांजैक्शन पूरा होने से पहले थोड़ा समय मिले तो ग्राहक सोच सकता है कि कहीं सामने वाला ठग तो नहीं, परिवार से बात कर सकता है या ट्रांजैक्शन कैंसल भी कर सकता है।

AI करेगा निगरानी, हर ट्रांजैक्शन को मिलेगा रिस्क स्कोर

RBI केवल ‘किल स्विच’ या देरी पर ही काम नहीं कर रहा है। इस साल एक और बड़ी पहल शुरू होने की उम्मीद है, जिसका नाम है Digital Payments Intelligence Platform (DPIP)। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म होगा जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI की मदद से हर डिजिटल ट्रांजैक्शन को रीयल टाइम में खतरे के आधार पर स्कोर देगा।

सीधे शब्दों में कहें तो अगर किसी ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी की आशंका होगी, तो सिस्टम उसे ज्यादा जोखिम वाला मान सकता है। इससे बैंकों और भुगतान प्रणाली को समय रहते चेतावनी मिलने में मदद हो सकती है।

RBI के सर्वे के अनुसार, भारत में 52% लोगों ने डिजिटल पेमेंट को अपनाया है और इसका सबसे बड़ा कारण इसकी गति और सुविधा है। वहीं, 67% व्यापारियों ने कहा कि डिजिटल पेमेंट ने उनके कारोबार पर सकारात्मक असर डाला है। इसी तेजी के साथ सुरक्षा की जरूरत भी बढ़ी है।

यही कारण है कि RBI अब ऐसी व्यवस्था बनाने की कोशिश कर रहा है, जिसमें डिजिटल भुगतान की सुविधा बनी रहे लेकिन ठगी करने वालों के लिए रास्ता कठिन हो जाए। आने वाले समय में संभव है कि पैसे भेजने की रफ्तार थोड़ी धीमी हो लेकिन इसके बदले लोगों के खातों की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो जाए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

शिव
शिव
7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘पोर्टल में गंभीर खामियाँ, दिख रही गोपनीय जानकारी’: री-एग्जाम से पहले सवालों में NEET, दुबई के छात्र के सुझावों को NTA-IIT ने माना; पढ़ें-...

दुबई में रहने वाले CBSE 12वीं के छात्र अनिल ने NTA- IITs के पोर्टल में उन कमियों को बताया, जिससे परीक्षा की सुचिता प्रभावित होती है। संस्थानों ने उसका आभार जताया।

38 की उम्र में भी समय से आगे चल रहा है एक आदमी, जिसका नाम है- लियोनेल मेसी: FIFA World Cup 2026

मेसी की इस ऐतिहासिक रात की पूरी कहानी और जानिए, कैसे उनके हर गोल ने फुटबॉल प्रेमियों को एक बार फिर उनकी अमरता का साक्षी बना दिया।
- विज्ञापन -