पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन के दौरान कई बार हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। चुनाव बाद हुई हिंसा, CAA विरोधी दंगे और वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर सवाल उठाता रहा।
अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 2019 में CAA के विरोध में हुए दंगों की जाँच कराने का फैसला किया है, जिनमें रेलवे की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुँचा था। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को निर्देश दिया है कि 2019 के CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान आगजनी, तोड़फोड़ और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाने से जुड़े सभी मामलों की समीक्षा की जाए।
खास तौर पर रेलवे की संपत्तियों को हुए नुकसान की जाँच की जाएगी। इसके लिए एक विशेष पुलिस सेल बनाई जाएगी, जो सत्यापित मामलों की जाँच करेगी। सरकार का दावा है कि मुर्शिदाबाद, हावड़ा और अन्य इलाकों में हुए दंगों के कारण रेलवे को करीब 93 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था।
जाँच के बाद इस नुकसान की भरपाई दंगों में शामिल लोगों से कराने की भी कोशिश की जाएगी। यह फैसला केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई बैठक के बाद लिया गया है।

पश्चिम बंगाल में CAA-विरोधी दंगे और TMC सरकार का परोक्ष समर्थन
12 दिसंबर 2019 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित किया गया था। इस कानून का उद्देश्य पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदाय के उन लोगों को भारतीय नागरिकता देने की प्रक्रिया आसान बनाना था, जो 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके थे।
हालाँकि CAA में मुस्लिमों को शामिल नहीं किए जाने को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। विपक्षी दलों और कई संगठनों ने आरोप लगाया कि यह कानून भेदभावपूर्ण है। यह भी दावा किया गया कि CAA को राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) से जोड़कर लागू किया जाएगा और इससे भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता खतरे में पड़ सकती है।
इन दावों के बाद देशभर में CAA विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए। उस समय पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी लगातार CAA के खिलाफ रैलियाँ और प्रदर्शन कर रही थीं। विरोध प्रदर्शनों के बीच कई राज्यों में हालात तनावपूर्ण हो गए और कुछ जगहों पर हिंसा भी हुई।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने कई सभाओं में CAA का विरोध करते हुए कहा था कि यह कानून उनकी लाश पर ही लागू हो सकेगा। 16 दिसंबर 2019 को उन्होंने एक रैली में कहा था, “अगर CAA लागू करना है तो मेरी लाश पर करना होगा।” इसी दौरान 14 दिसंबर 2019 को पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले में हिंसा भड़क उठी।
मुस्लिम भीड़ ने लालगोला और कृष्णापुर रेलवे स्टेशनों पर खड़ी पाँच खाली ट्रेनों में आग लगा दी। सूती इलाके में रेलवे ट्रैक को नुकसान पहुँचाया गया, जबकि बेलडांगा रेलवे स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। मुर्शिदाबाद जिले में कई रेलवे स्टेशनों पर तोड़फोड़ की गई और एक टोल प्लाजा में भी आगजनी की घटना सामने आई।

CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा केवल मुर्शिदाबाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि हावड़ा जिले में भी कई जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएँ सामने आईं। उलूबेरिया रेलवे स्टेशन पर दंगाईयों ने रेलवे ट्रैक जाम कर दिए, जिससे ट्रेन सेवाएँ प्रभावित हुईं। इस दौरान स्टेशन परिसर और कुछ ट्रेनों में भी तोड़फोड़ की गई तथा पथराव की घटनाएँ हुईं।
अधिकारियों के अनुसार, पथराव में एक ट्रेन चालक घायल हो गया था। हिंसा का असर पूर्व रेलवे के सियालदह मंडल की रेल सेवाओं पर भी पड़ा। इसके अलावा पूर्व रेलवे के मालदा मंडल के अंतर्गत आने वाले सुजनीपाड़ा रेलवे स्टेशन पर भी हमला किया गया।
हावड़ा जिले के सांकराइल रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर को निशाना बनाया गया और स्टेशन परिसर में आग लगा दी गई। वहीं निमतीता रेलवे स्टेशन पर भी प्रदर्शनकारियों ने रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुँचाया और पथराव किया। इन घटनाओं के कारण कई इलाकों में रेल सेवाएँ बाधित हुईं और रेलवे को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
Anti-CAB protesters set the ticket counter at Sankrail railway station on fire in Howrah district pic.twitter.com/5fSws6mYRz
— Indrajit Kundu | ইন্দ্রজিৎ (@iindrojit) December 14, 2019
हिंसा के दौरान रेलवे ट्रैक पर टायर जलाकर ट्रेनों का संचालन रोक दिया गया। कई जगहों पर पथराव की घटनाएँ भी हुईं। स्थिति को नियंत्रित करने पहुँची पुलिस की एक गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया गया। हालात बिगड़ने के बाद एहतियात के तौर पर कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।
वहीं कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अफवाहों को रोकने के लिए राज्य के छह जिलों में इंटरनेट सेवाएँ भी अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थीं।

12 से 16 दिसंबर 2019 के बीच पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद, बीरभूम और उत्तर 24 परगना समेत कई जिलों में CAA विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएँ सामने आईं। दक्षिण 24 परगना जिले में नुंगी और आक्रा रेलवे स्टेशनों के बीच दंगाईयों द्वारा रेलवे ट्रैक जाम किए जाने से रेल सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हुईं।
आक्रा रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ की गई और बाद में उसमें आग लगा दी गई। इसके अलावा टिकट काउंटर में रखी नकदी भी लूट लिए जाने की खबरें सामने आईं। उस समय ऑपइंडिया ने पश्चिम बंगाल में जिहादी दंगों के दौरान एक स्थानीय बंगाली, शंखदीप शोम के भयावह अनुभव पर रिपोर्ट की थी।
एक फेसबुक पोस्ट में शोम ने बताया कि वह यूपी हावड़ा-चेन्नई सेंट्रल कोरोमंडल एक्सप्रेस में सवार थे, जो शुक्रवार को दोपहर लगभग 3:20 बजे हावड़ा-खड़गपुर खंड पर उलुबेरिया स्टेशन पर पहुँची थी।
उन्होंने बताया कि स्टेशन से सटी एक मस्जिद में जुम्मे की नमाज के बाद करीब 500-700 उपद्रवियों की एक बड़ी भीड़ निकली, जिन्होंने स्टेशन के बाहर लेवल क्रॉसिंग के पास रेलवे लाइन को जाम कर दिया, जिसके कारण ट्रेन सेवाएँ प्रभावित हुईं और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ट्रेनों में तोड़-फोड़-स्टेशनों पर आगजनी, लेकिन राजनीति करने और जिहादी हिंसा को कमतर दिखाने में व्यस्त थीं ममता सरकार
जब बंगाल जल रहा था, तब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आग में घी डालने और खुद को ‘धर्मनिरपेक्षता’ का रक्षक बताने वाली अपनी छवि को चमकाने के तरीके ढूँढ रही थीं।
याद दिला दें कि पश्चिम बंगाल में विरोध-प्रदर्शनों के बीच, तत्कालीन गवर्नर जगदीप धनखड़ ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस विज्ञापन को असंवैधानिक बताया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि NRC और नागरिकता संशोधन कानून लागू नहीं किए जाएँगे।
गवर्नर ने कहा था कि सरकार के प्रमुख के तौर पर ममता बनर्जी ऐसे विज्ञापनों के लिए सरकारी फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकतीं। इस बीच बीजेपी ने आरोप लगाया था कि सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम भीड़ हिंदू घरों पर हमले कर रही थी।
बंगाल में बांग्लादेश से लगे सभी जिलों में घुसपैठियों द्वारा हिन्दुओं के घरों में लूटपाट और आगजनी की जा रहा है। pic.twitter.com/3lyShh8s8F
— Kailash Vijayvargiya (@KailashOnline) December 15, 2019
13 से 17 दिसंबर 2019 के बीच कई जगहों पर TMC कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर मुस्लिम दंगाइयों ने 19 से ज्यादा रेलवे स्टेशनों और 20 ट्रेनों में तोड़-फोड़ की या उन्हें आग के हवाले कर दिया। दंगाइयों ने गुजरती ट्रेनों पर पत्थर भी फेंके, टिकट बुकिंग काउंटरों में तोड़-फोड़ की, पैसे चुराए और रेल की पटरियों को घेर लिया।
रेलवे को हुआ भारी नुकसान, करोड़ों की संपत्ति नष्ट, सैकड़ों ट्रेनें करनी पड़ीं रद्द
परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल में रेल मंत्रालय को लगभग 655 ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं। रेलवे परिसर में दंगे और आगजनी के कई मामलों में लगभग 17 FIR दर्ज की गईं। पूर्वी रेलवे (ER) ने कथित तौर पर 127 मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें, 190 यात्री ट्रेनें और 290 उपनगरीय ट्रेनें रद्द कीं।
दक्षिण-पूर्वी रेलवे के खड़गपुर डिवीजन को अकेले जिहादी भीड़ की हिंसा के कारण लगभग 16 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, क्योंकि 13 से 17 दिसंबर 2019 के बीच 48 ट्रेनें रद्द की गईं, छह स्टेशनों में तोड़फोड़ की गई, पाँच ट्रेनों में आग लगा दी गई और RPF टीमों पर दंगाइयों ने हमला किया।
हालाँकि तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जिन्होंने कई मौकों पर यह दावा किया था कि वह काफिर नहीं हैं और वह काफिरों से लड़ती हैं, ने मुस्लिम भीड़ हिंसा की घटनाओं को ‘छोटी-मोटी घटनाएँ’ कहकर खारिज कर दिया। ममता यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने खुद को पीड़ित बताते हुए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को खलनायक के रूप में पेश किया।
उन पर पश्चिम बंगाल में जानबूझकर ट्रेनें रद्द करने का आरोप लगाया ताकि राज्य और उनकी सरकार को बदनाम किया जा सके। यह अपमानजनक और द्वेषपूर्ण बयान तब आया जब रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के दंगा प्रभावित क्षेत्रों में मौजूदा तनाव, नाकाबंदी, हमलों और TMC सरकार द्वारा दंगाइयों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफलता के कारण सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए सेवाएँ निलंबित कर दीं।
इतना ही नहीं जब रेलवे अधिकारियों को मुस्लिम भीड़ से बचने के लिए भागना और छिपना पड़ा, तब ममता बनर्जी ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया कि रेलवे अधिकारियों और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा राज्य सरकार का काम नहीं है।
ममता ने 17 दिसंबर 2019 को दक्षिण कोलकाता के जादवपुर में एक रैली में कहा, “कुछ जगहों पर कुछ छोटी-मोटी घटनाएँ हुईं। लेकिन उन्होंने (केंद्र सरकार ने) लगभग रेल सेवाएँ ठप कर दीं। ट्रेनों के मनमाने ढंग से रद्द होने के कारण लोगों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे की सुरक्षा करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन हमने यथासंभव उनकी मदद करने की कोशिश की। ट्रेनों और स्टेशनों की सुरक्षा के लिए उनके पास अपनी पुलिस फोर्स, RPF है।”
TMC सुप्रीमो का यह कहना कि रेलवे की संपत्ति और अधिकारियों की सुरक्षा करना उनकी सरकार का काम नहीं था, एक तरह से यह स्वीकार करने जैसा था कि उन्होंने जिहादियों को दंगे करने और विशेष रूप से केंद्र सरकार की संपत्तियों को निशाना बनाने की अनुमति दी ताकि दबाव बनाया जा सके और यह सब एक ऐसे कानून के लिए किया गया जिसका किसी भी भारतीय नागरिक से कोई लेना-देना नहीं था।
दंगों में हुए नुकसान की कीमत उपद्रवियों से वसूलने में भी TMC ने नहीं दिया केंद्र सरकार का साथ
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली TMC सरकार ने न सिर्फ़ दंगाईयों को परोक्ष रूप से समर्थन दिया और जवाबदेही से बचने की कोशिश की, बल्कि 2019 में CAA-विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा के दौरान रेलवे की संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई को भी असल में रोक दिया।
CAA-विरोधी दंगों के कुछ दिनों बाद रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि पश्चिम बंगाल में ट्रेनों, स्टेशनों, पटरियों और दूसरी संपत्तियों के नष्ट होने से भारतीय रेलवे को 80-93 करोड़ रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है।
मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से घोषणा की कि वे रेलवे संपत्ति को नष्ट करने में शामिल पहचाने गए दंगाइयों से लागत वसूलने के लिए राज्य अधिकारियों के साथ समन्वय करेंगे। हालाँकि कानून और व्यवस्था राज्य का विषय है, लेकिन TMC ने दंगाइयों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए कोई प्रयास नहीं किए और ना अपराधियों के खिलाफ मुआवजे की कार्यवाही में सहायता की।
रेल मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल लोक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) अधिनियम, 2017 (सामूहिक मुआवजे की अनुमति देने वाला) और सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम, 1984 (अनिवार्य दंड और वसूली) का हवाला देते हुए TMC सरकार से सहयोग माँगा था। हालाँकि ममता बनर्जी के असहयोग के कारण कोई सार्थक वसूली कार्रवाई नहीं की जा सकी।
2026 में नई सरकार के लिए छह साल बाद 2019 के CAA विरोधी हिंसा की नए सिरे से, समयबद्ध जाँच का आदेश देना आवश्यक होना, ममता के नेतृत्व वाली TMC सरकार की जानबूझकर की गई निष्क्रियता, दस्तावेजी रूप से दर्ज आगजनी और हिंसा को व्यवस्थित रूप से कम आँकने और केंद्र सरकार के साथ असहयोग करने के बारे में बहुत कुछ कहता है।
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