पश्चिम बंगाल में करीब ₹200 करोड़ के नगर पालिका भर्ती घोटाले की जाँच के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (13 जून 2026) को तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) विधायक और पूर्व मंत्री मदन मित्रा से जुड़ी कई संपत्तियों पर छापेमारी की। जाँच एजेंसी ने मदन मित्रा से जुड़े कुल सात ठिकानों पर कार्रवाई की।
ED का कहना है कि जाँच के दौरान ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे संकेत मिलता है कि कई नगर पालिकाओं में पैसे और सोना लेकर अवैध नियुक्तियाँ कराने में उनकी भूमिका रही है।
The Enforcement Directorate is conducting searches at seven premises related to Madan Mitra, MLA TMC and Ex Minister in the Municipality Recruitment Scam. Investigation conducted so far has revealed that Mitra received bribe in the form of cash and gold through middlemen in… pic.twitter.com/BV3e9gxybX
— ANI (@ANI) June 13, 2026
ED के मुताबिक, जाँच में पता चला है कि मदन मित्रा ने बिचौलियों के जरिए रिश्वत ली और नगर पालिकाओं में अयोग्य उम्मीदवारों को नौकरी दिलाने में मदद की। जाँच एजेंसी का दावा है कि खास तौर पर कमरहाटी नगर पालिका में उन्होंने करीब 125 लोगों की नियमों के खिलाफ नियुक्तियाँ करवाने में भूमिका निभाई।
छापेमारी के दौरान ED की टीम कमरहाटी स्थित मदन मित्रा के घर ‘उदय विला’ भी पहुँची। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्रवाई में बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट के अधिकारी भी टीम के साथ मौजूद थे। बताया गया कि घर बंद मिला, जिसके बाद अधिकारियों ने ताला तोड़कर अंदर प्रवेश किया और कई घंटों तक तलाशी अभियान चलाया।
इस दौरान दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री जब्त की गई, जिनकी अब जाँच की जा रही है। जाँच एजेंसियाँ इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि जिस जमीन पर यह संपत्ति बनी है, वह कहीं किसी केंद्रीय सरकारी एजेंसी की जमीन तो नहीं है।
तलाशी के दौरान कुछ गोपनीय दस्तावेज मिलने की भी बात सामने आई है, जिन्हें अब इस पूरे मामले की जाँच के तहत खंगाला जा रहा है।
TMC विधायक सुजीत बोस को इसी साल की शुरुआत में ED ने किया था गिरफ्तार
मदन मित्रा पर ED की यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब इसी भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में कुछ ही हफ्ते पहले मई 2026 में TMC के एक अन्य वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री सुजीत बोस को भी ED ने गिरफ्तार किया था।
🛑 #BreakingNews | Former Bengal minister Sujit Bose arrested by ED in connection to the municipal recruitment scam case pic.twitter.com/McfJD17kBB
— Indrajit Kundu | ইন্দ্রজিৎ (@iindrojit) May 11, 2026
ED के मुताबिक, जाँच में सामने आया कि सुजीत बोस ने दक्षिण दमदम नगर पालिका और अन्य नगर निकायों में नौकरी दिलाने के लिए करीब 150 उम्मीदवारों की सिफारिश की थी और इसके बदले पैसे लिए गए थे। जाँच एजेंसी का दावा है कि उन्हें ऐसे सबूत मिले हैं जिनसे पता चलता है कि नगर पालिका में नियुक्तियाँ कराने के बदले बोस को फ्लैट और अन्य संपत्तियाँ मिली थीं, जिन्हें अपराध से अर्जित संपत्ति माना जा रहा है।
ED ने यह भी दावा किया कि उनसे जुड़े बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा की गई थी। उनकी गिरफ्तारी से पहले एजेंसी ने कई बार पूछताछ की और उन्हें कई समन भी जारी किए थे। पूर्व मंत्री ने इससे पहले विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ईडी के सामने पेश होने से छूट मांगते हुए कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया था।
हालाँकि चुनाव खत्म होने के बाद वह जाँच एजेंसी के सामने पेश हुए। बाद में ED ने दोबारा पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इससे पहले भी ED ने सुजीत बोस से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिनमें उनका दफ्तर और उनके परिवार से जुड़े परिसर शामिल थे।
अक्टूबर 2025 में हुई एक ऐसी कार्रवाई के दौरान अधिकारियों को 45 लाख रुपए नकद और कई दस्तावेज मिले थे, जिन्हें जाँच के लिए अहम सबूत माना गया।
क्या है नगरपालिका भर्ती घोटाला और कैसे सामने आया?
दिलचस्प बात यह है कि नगर पालिका भर्ती घोटाला शुरुआत में अलग मामले के तौर पर सामने नहीं आया था। इसका खुलासा पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले की जाँच के दौरान हुआ। साल 2023 में ED ने TMC से जुड़े प्रमोटर और कारोबारी अयान शील के ठिकानों पर छापेमारी की थी।
उस समय एजेंसी स्कूल भर्ती में अनियमितताओं और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जाँच कर रही थी। तलाशी के दौरान अधिकारियों को बड़ी संख्या में दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य सामग्री मिली। इन सबूतों की जाँच के दौरान एजेंसी को संकेत मिले कि पश्चिम बंगाल की कई नगर पालिकाओं में भी पैसे लेकर नौकरी देने का ऐसा ही नेटवर्क चल रहा था।
इसके बाद ED ने अपनी जाँच का दायरा बढ़ाया। बाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने नगर पालिका भर्ती में अनियमितताओं की जाँच के लिए CBI जाँच का आदेश दिया।
जैसे-जैसे ED और CBI ने जाँच आगे बढ़ाई, वैसे-वैसे राज्य के कई नगर निकायों में बड़े स्तर पर अवैध नियुक्तियों के नेटवर्क का खुलासा होने लगा।
नगरपालिकाओं में बेची गईं हजारों नौकरियाँ
यह भर्ती घोटाला बंगाल की कई नगर पालिकाओं में साल 2014 से 2018 के बीच हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, इस दौरान कई पदों पर पैसे लेकर नौकरियाँ दी गईं। इनमें मजदूर, सफाईकर्मी, क्लर्क, चपरासी, एम्बुलेंस अटेंडेंट, ड्राइवर, वार्ड मास्टर, सैनिटरी असिस्टेंट, हेल्पर, पंप ऑपरेटर और मेडिकल स्टाफ जैसे पद शामिल थे।
ED और CBI का दावा है कि इन नियुक्तियों में तय भर्ती प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि जिन्होंने पैसे दिए उन्हें नगर पालिकाओं में स्थायी नौकरी मिल गई, जबकि योग्य उम्मीदवारों को मौका नहीं मिला।
जाँच एजेंसियों का यह भी कहना है कि अयान शील इस पूरे मामले में एक अहम बिचौलिए की भूमिका में था और उसने कई नगर पालिकाओं में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर नियुक्तियाँ कराने का काम किया।
करोड़ों रुपए और धन का व्यापक जाल
जैसे-जैसे जाँच आगे बढ़ी, ED और CBI को पश्चिम बंगाल की कई नगर पालिकाओं में फैले पैसे लेकर नौकरी देने के बड़े नेटवर्क के संकेत मिलने लगे। जाँच एजेंसियों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ कुछ नियुक्तियों तक सीमित नहीं था, बल्कि कई नगर निकायों तक फैला हुआ एक बड़ा भर्ती घोटाला हो सकता है।
साल 2023 में कलकत्ता हाई कोर्ट में दाखिल अपनी शुरुआती रिपोर्ट में ED ने बताया था कि नगर पालिका भर्ती घोटाले से जुड़े लेनदेन की रकम करीब 200 करोड़ रुपए तक हो सकती है। एजेंसी के अनुसार, यह अनुमान मुख्य आरोपित अयान शील से पूछताछ में मिले बयानों और उसके ठिकानों से बरामद दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और रिकॉर्ड के आधार पर लगाया गया था।
जाँचकर्ताओं का मानना है कि उम्मीदवारों से नगर पालिका में नौकरी दिलाने के बदले पैसे लिए गए थे। ED के मुताबिक, इन अवैध नियुक्तियों का बड़ा हिस्सा उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना जिलों की नगर पालिकाओं में हुआ। एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि आरोपितों के बयान और जाँच में मिले दस्तावेजी व डिजिटल सबूतों का मिलान करने के बाद इस घोटाले की अनुमानित रकम तय की गई।
जाँच के दौरान ED ने कोलकाता के तारातला इलाके में छापेमारी कर 1.5 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद बरामद करने का दावा किया। वहीं लेक टाउन में की गई कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, सोने के आभूषण और लग्जरी वाहन मिलने की बात कही गई।
जाँच एजेंसी का दावा है कि भर्ती घोटाले से मिले पैसों को वैध दिखाने के लिए कई निजी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। ED अधिकारियों के अनुसार, अवैध भर्ती से जुटाए गए करोड़ों रुपए अलग-अलग बैंक खातों और कारोबारी संस्थाओं के जरिए घुमाए गए। एजेंसी को शक है कि इस पूरे पैसे के नेटवर्क से कई प्रभावशाली लोगों को फायदा पहुँचा।
जाँच एजेंसियों का मानना है कि इस घोटाले का असली दायरा इससे भी बड़ा हो सकता है क्योंकि अभी कई अन्य नगर पालिकाओं और संभावित लाभार्थियों की जाँच जारी है।जाँचकर्ताओं के अनुसार, यह भर्ती नेटवर्क कई सालों तक चलता रहा, जिसमें बिचौलियों, नगर पालिका अधिकारियों, नेताओं और निजी संस्थाओं की भूमिका की जाँच की जा रही है।
CBI ने की 1,814 अवैध नियुक्तियों की पहचान
इस मामले में सबसे बड़े खुलासों में से एक CBI की जाँच के दौरान सामने आया। सूत्रों के मुताबिक, CBI ने पश्चिम बंगाल की 15 नगर पालिकाओं में कुल 1,814 अवैध नियुक्तियों की पहचान की। जाँच में सामने आया कि इनमें से कई भर्तियाँ अयान शील की कंपनी एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड के जरिए कराई गई थीं।
जाँच एजेंसी ने 17 नगर पालिकाओं के भर्ती रिकॉर्ड की जाँच की। इनमें से 15 नगर निकायों में अनियमित नियुक्तियाँ मिलीं। जाँच के दायरे में आई नगर पालिकाओं में दक्षिण दमदम में सबसे ज्यादा 329 नियुक्तियों को संदिग्ध या नियमों के खिलाफ पाया गया।
इसके अलावा कमरहाटी, बारानगर और टीटागढ़ जैसी नगर पालिकाओं में भी बड़ी संख्या में संदिग्ध नियुक्तियों के मामले सामने आए। CBI ने इन निष्कर्षों की जानकारी कोलकाता की विशेष अदालत को दी और नियुक्तियों से जुड़े विस्तृत रिकॉर्ड भी जमा किए।
जाँच के दौरान एजेंसी को कम से कम 25 ऐसे बैंक खातों की जानकारी मिली, जिनका इस्तेमाल घोटाले से जुड़े पैसों के लेनदेन के लिए किया गया। जाँचकर्ताओं ने पाया कि इन खातों में बड़ी रकम जमा होने के कुछ घंटों के भीतर ही निकाल ली जाती थी, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका और मजबूत हुई।
जाँच के तहत CBI अधिकारियों ने 42 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े कई अहम दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।
फाइनल चार्जशीट में मुख्य आरोपितों के नाम आए सामने
इस मामले की जाँच एक अहम मोड़ पर तब पहुँची जब CBI ने इस साल जनवरी में अलीपुर स्थित विशेष CBI कोर्ट में अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल की। चार्जशीट में जिन बड़े नामों को शामिल किया गया, उनमें पश्चिम बंगाल कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय का नाम भी शामिल है।
CBI के मुताबिक, साल 2017 से 2019 के बीच वह शहरी विकास और नगर मामलों के विभाग के अंतर्गत स्थानीय निकाय निदेशालय में अहम पद पर तैनात थे और सितंबर 2018 में विभाग के निदेशक बने थे। यह निदेशालय नगर पालिका भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसमें नियुक्तियों का आवंटन और भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी देना शामिल होता है।
CBI का आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान ज्योतिष्मान चट्टोपाध्याय ने अपने पद का गलत इस्तेमाल किया और नियमों के खिलाफ नियुक्तियाँ कराने में मदद की। उनके घर से मिले कुछ दस्तावेजों को भी जाँच एजेंसी ने इन आरोपों का आधार बताया है।
अंतिम चार्जशीट में एबीएस इन्फोजोन प्राइवेट लिमिटेड का नाम भी शामिल किया गया है। जाँच एजेंसियों का मानना है कि अयान शील ने इसी कंपनी के जरिए अवैध भर्तियों को अंजाम दिया। इससे पहले की चार्जशीट में अयान शील और दक्षिण दमदम नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन पंचुगोपाल राय को भी आरोपित बनाया जा चुका था।
जाँचकर्ताओं के अनुसार, अयान शील इस पूरे मामले के प्रमुख चेहरों में से एक माना जा रहा है और उसका नाम मुख्य रूप से TMC से जुड़ा बताया गया है। कोलकाता और चिनसुरा स्थित उसके दफ्तरों और घरों पर छापेमारी के बाद ED ने दावा किया था कि उससे जुड़ी करीब 100 करोड़ रुपए की संपत्तियों और कई अहम दस्तावेजों का पता चला है।
अंतिम चार्जशीट दाखिल होने और ED की लगातार कार्रवाई के बाद नगर पालिका भर्ती घोटाला पश्चिम बंगाल के स्थानीय निकायों से जुड़े सबसे बड़े भ्रष्टाचार मामलों में से एक बनकर सामने आया है। हाल में मदन मित्रा के ठिकानों पर हुई छापेमारी और सुजीत बोस की गिरफ्तारी को जाँच के दायरे के लगातार बढ़ने के तौर पर देखा जा रहा है। जाँच एजेंसियाँ अब इस मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।
मूल रुप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।
url- ED raids properties belonging Madan Mitra TMC municipality recruitment scam now come under scanner West Bengal


