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गोधरा में ‘I Love Muhammad’ से जुड़े पोस्ट को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों का हंगामा, पुलिसकर्मियों पर पथराव और थाने में तोड़फोड़: वडोदरा में भी पुलिस पर फेंके गए पत्थर

गुजरात के गोधरा और वडोदरा के जूनीगढ़ी इलाके में बीती रात सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट को लेकर कट्टरपंथियों ने पुलिस थानों को निशाना बनाया है। गोधरा में तो कट्टरपंथियों ने थाने में तोड़फोड़ तक कर दी जिसके बाद पुलिस को हालात काबू में करने के लिए लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा है।

गोधरा में I Love Muhammad से जुड़े पोस्ट को लेकर हंगामा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मामले की जड़ कानपुर से शुरु हुए ‘I Love Muhammad’ के प्रदर्शनों से जुड़ी हुई हैं। गोधरा में पिछले कुछ दिनों से इसी हैशटेग के साथ वायरल वीडियो बनाए जा रहे थे। इन वीडियोज के जरिए सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश की जा रही थी।

सोशल मीडिया पर लगातार भड़काऊ पोस्ट डालने वाले एक इन्फ्लुएंसर को गोधरा सिटी बी डिवीजन थाने द्वारा बुलाया गया और पुलिस उसे समझाने की कोशिश कर रही थी कि ऐसी पोस्ट से नवरात्रि पर्व से पहले तनाव फैले सकता है। इसके चलते युवक को ऐसे पोस्ट करने से बचना चाहिए।

इस बीच कुछ लोगों द्वारा अफवाह फैला दी गई कि पुलिस युवक को धमका रही है और उसके खिलाफ गलत तरीके से कार्रवाई की जा रही है। इस अफवाह के सामने आते ही करीब आधे घंटे में भीड़ थाने पर उमड़ी और जमकर तोड़फोड़ मचाई गई। इसके बाद कट्टरपंथियों की भीड़ आती गई और थाने पर लगातार हमला होता रहे।

थाने में जमकर तोड़फोड़ की गई और फर्नीचर, खिड़कियाँ और पुलिस के वाहनों को भी नुकसान पहुँचाया गया। साथ ही, भीड़ ने पुलिस कर्मियों पर पथराव भी शुरू कर दिया। जब हालात बेकाबू होने लगे तो पुलिस ने पहले चेतावनी दी और फिर भी लोग नहीं माने तो लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस को आंसू गैस के गोले तक छोड़ने पड़े जिसके बाद घंटों की मशक्कत के बाद भीड़ को हटाया जा सका।

जूनीगढ़ी में भी सोशल मीडिया पोस्ट पर बवाल

वहीं, वडोदरा के संवेदनशील जूनीगढ़ी इलाके में एक विवादित सोशल मीडिया पोस्ट ने माहौल बिगाड़ दिया। पोस्ट के बाद एक समुदाय विशेष के लोग थाने पहुँचकर नारेबाजी और सड़क जाम करने लगे, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए।

देखते ही देखते पथराव शुरू हो गया जिसमें पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए। इसके बाद जब हंगामा बढ़ा तो स्थिति सँभालने खुद एडिशनल पुलिस कमिश्नर डॉ. लीना पाटिल मौके पर पहुँचीं और लोगों से सख्त संवाद कर भीड़ को कंट्रोल किया।

पुलिस ने साफ कहा है कि हिंसा, तोड़फोड़ और अफवाह फैलाने वालों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा। वीडियोग्राफी से पत्थरबाजों की पहचान हो रही है और अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।

MP में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन: ‘लव जिहाद’ रोकने के लिए हिंदू संगठनों और BJP का सख्त रुख, कहा- ‘सनातन धर्म अपनाओ, तिलक लगाओ’

मध्य प्रदेश में इस साल नवरात्रि से पहले गरबा को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है, जिसे हिंदू संगठन ‘गरबा जिहाद’ कह रहे हैं। हिंदू संगठन और कुछ बीजेपी विधायक खुलकर गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री बैन करने की माँग कर रहे हैं।

हिंदू संगठनों का आरोप है कि कुछ लोग अपनी पहचान छिपाकर गरबा में आते हैं और ‘लव जिहाद’ जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। इस मुद्दे को लेकर गरबा आयोजकों से भी कहा गया है कि वे पंडालों में सिर्फ उन्हीं लोगों को आने दें जिनकी पहचान हिंदू के रूप में हो।

गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर बैन

मध्य प्रदेश में अब गरबा आयोजनों को लेकर एक नई ‘सनातनी क्रांति‘ की शुरुआत हो चुकी है। राज्य में कई हिंदू संगठन और भाजपा विधायक जोर-शोर से इस बात की माँग कर रहे हैं कि नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा पंडालों में केवल हिंदू धर्म के अनुयायी ही प्रवेश करें।

इन संगठनों का कहना है कि अगर गैर हिंदू गरबा में भाग लेना चाहते हैं, तो उन्हें ‘सनातक धर्म‘ अपनाने के बाद ही पंडाल में प्रवेश दिया जाए। इसके अलावा, आयोजकों से कहा है कि वे पंडालों के बाहर वराह अवतार की तस्वीर लगाकर उसकी पूजा करें, आधार कार्ड- पहचान पत्र देखने के बाद ही लोगों को अंदर जाने दें।

प्रवेश चाहिए, तो सनातन धर्म में करो वापसी

भोपाल की हुजूर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस मुद्दे पर एक पहल करते हुए प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी विधायक ने कहा कि ‘गरबा पंडालों’ में ‘गैर हिंदुओं‘ का प्रवेश नहीं होना चाहिए। बीजेपी विधायक ने आगे कहा कि अगर किसी को ‘गरबा पंडालों’ में है तो अपने पूरे परिवार (अब्बा-अम्मी, बहन, मौसी, चच्चा) के साथ आए, हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करें, तिलक लगाए, देवी की पूजा करें, प्रसाद खाए और सनातन धर्म स्वीकार करे।

रामेश्वर शर्मा ने यह भी कहा कि अगर कोई मुस्लिम या ईसाई फिर से देवी की पूजा करना चाहता है, तो उसे एक चम्मच गंगाजल और तुलसी का पत्ता खिलाकर हिंदू बनाया जा सकता है। रामेश्वर शर्मा ने दावा किया कि सबका DNA हिंदू ही है और कई लोग कुछ साल पहले ही धर्म बदलकर मुस्लिम या ईसाई बने हैं। रामेश्वर शर्मा ने चेतावनी भी दी कि अगर कोई अपनी पहचान छिपाकर या गलत इरादे से आया तो उसका ऐसा इलाज किया जाएगा कि वह जिंदगी भर याद रखेगा।

बीजेपी नेता आलोक शर्मा ने चेतावनी दी कि कुछ लोग गरबा आयोजनों में कलावा और तिलक लगाकर हिंदू बेटियों को बहलाने की कोशिश कर सकते हैं। आलोक शर्मा की यह टिप्पणी, ‘लव जिहाद’ से जुड़ी चिंताओं के मद्देनजर आई, जिसमें अंतर-धार्मिक विवाहों को लेकर कई विवाद सामने आए थे। आलोक शर्मा ने दावा किया कि बीजेपी की सरकार में ‘लव जिहादियों’ की खैर नहीं है।

कॉन्ग्रेस विधायक की प्रतिक्रिया

इस विवाद पर कॉन्ग्रेस की तरफ से भी प्रतिक्रिया आई है। भोपाल मध्य सीट से कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि मुस्लिमों को गरबा आयोजनों में जाने की कोई जरूरत नहीं है। इसके अलावा, आरिफ मसूद कहते हैं कि BJP के लोग हर त्योहार से पहले विवाद खड़ा करते हैं। आरिफ मसूद ने यह भी आरोप लगाया कि BJP के नेता नवरात्रि जैसे धार्मिक आयोजनों को राजनीति का हथियार बना रहे हैं।

बता दें, कि नवरात्रि और गरबा मध्य प्रदेश के हिंदू समाज के लिए एक बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर होता है। गरबा न केवल एक नृत्य उत्सव है, बल्कि यह देवी दुर्गा की पूजा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस आयोजन में हिंदू समुदाय के लोग अपनी श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लेते हैं।

मॉल में 80% हिंदू लड़कियाँ, लेकिन पुरुष मुस्लिम… यौन उत्पीड़न-ब्लैकमेलिंग-धर्म परिवर्तन का चल रहा था रैकेट: देवरिया धर्मांतरण में मिले नए सबूत

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में स्थित SS मॉल में चल रहे यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए ब्लैकमेल किए जाने के मामले में लगातार नई बातें सामने आ रही हैं।

SS मॉल के मालिक उस्मान अंसारी गनी , उसकी बीवी तरन्नुम और साले गौहर अली पर उसी मॉल में काम करने वाली एक युवती ने धर्मांतरण और यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे।

आरोप है कि गनी ने खास तौर पर हिंदू लड़कियों को मॉल में नौकरी पर रखा ताकि उनका यौन शोषण कर उन्हें ब्लैकमेल किया जा सके। इसके बाद उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा सके।

पीड़िता ने शिकायत में बताया कि नौकरी मिलने के बाद महिलाओं को मॉल की ऊपरी मंजिल पर स्थित दो कमरों में ले जाया जाता था, जहाँ उनका यौन उत्पीड़न किया जाता था। इसके बाद उन्हें वेश्यावृत्ति में धकेला जाता और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

मामले की भनक लगते ही उस्मान अंसारी और उसकी बीवी रविवार (14 सितंबर 2025) को मॉल में ताला डालकर फरार हो गए थे। लेकिन 15 सितंबर 2025 को दुबई भागने की कोशिश करते समय उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

हिंदूफोबिया ट्रैकर की रिपोर्ट के अनुसार, देवरिया मामले में चल रहा ये रैकेट आगरा धर्मांतरण रैकेट और छांगुर पीर के नेटवर्क के जैसे ही काफी बड़े स्तर पर चलाया जा रहा था। पीड़िता ने बताया, “मॉल में काम करने वाली 80 प्रतिशत महिलाएँ हिंदू थीं, जबकि ज्यादातर पुरुष मुस्लिम थे।”

इसके तहत हिंदू समाज के कमजोर वर्गों, गरीब और सामाजिक रूप से वंचित समुदायों के साथ छात्राओं और महिलाओं को टारगेट करते थे।पैसों का लालच और काम के बहाने ये लोगों को अपने पास बुलाते थे। इसके बाद इस्लाम धर्म अपनाने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता था।

देवरिया में रहना है तो इस्लाम अपनाना पड़ेगा

रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि जो लड़कियाँ धर्मांतरण का विरोध करतीं, उनका अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया जाता था। लड़कियों को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया जाता कि वे टूट जातीं।

पीड़िता ने बताया, “एक दिन वे लोग मुझे उस कमरे में लेकर गए। उस्मान और गौहर ने मेरे कपड़े फाड़ दिए और मेरे साथ रेप किया। इनके साथ तरन्नुम भी थी जो वहीं खड़ी होकर सबकुछ होते हुए देख रही थी। उन लोगों ने मेरा वीडियो भी बनाया और फिर मुझे धमकी दी।”

पीड़िता ने कहा कि उसे बार बार कहा गया कि अगर देवरिया में रहना है तो उसे धर्म परिवर्तन कर इस्लाम अपनाना पड़ेगा। मना करने पर उसे धमकी के साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न किया गया। इसके बाद पीड़िता ने मॉल में नौकरी छोड़ दी। वह 2 साल तक डर डर कर रही। इसके बाद हिम्मत कर पुलिस के पास पहुँची।

हालाँकि पुलिस ने भी पहली बार में उसकी बात को अनसुना कर दिया। मार्च 2025 में वह SHO और सर्किल अधिकारी से मिली लेकिन उसकी शिकायत नहीं लिखी गई। पीड़िता ने बताया कि आरोपितों ने अपने पैसे और ताकत के दम पर किसी भी जगह शिकायत दर्ज नहीं होने दी।

इसके बाद वह SP और स्थानीय विधायक शलभमणि त्रिपाठी के पास पहुँची। इसके बाद उसके मामले को संज्ञान में लिया गया। हालाँकि महीनों तक उसे केस वापस लेने की धमकी मिलती रही। उसे कहा गया कि केस वापस लेलो वरना जान से मारी जाएगी।

7 सितंबर 2025 को उसकी शिकायत पर पुलिस ने एक्शन लिया। इसके बाद SS मॉल के कई अन्य कर्मचारियों ने भी हिम्मत की और शिकायत दर्ज करवाई। कई हिंदू लड़कियों ने आगे आकर अपनी आपबीती बताई।

उस्मान गनी के SS मॉल और EG मार्ट में काम करने वाले पुराने कर्मचारी शाह आलम और अजय ने पुलिस को बताया कि उन लोगो को अक्सर मॉल के उन दोनों CCTV फुटेज को हटाने को कहा जाता था जिसमें हिंदू लड़कियों के अंदर जाने और कमरे से निकलने का समय हो।

दोनों ने बताया कि उन्हें कहा जाता था कि हर हफ्ते कुछ फुटेज हटाना पड़ता था। अगर वे इसका विरोध करते तो उन्हे नौकरी से हटाने और उन पर कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। शाह आलम के भाई सलमान ने बताया कि वह भी पहले EG मार्ट में काम करते थे लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ दी।

सलमान के अनुसार, वहाँ का माहौल ठीक नहीं था। जब शाम को सारा स्टाफ चला जाता था तो कुछ हिंदू लड़कियों को रोक लिया जाता था। उन्हें उस कमरे में भेजा जाता था जिसमें वेश्यावृत्ति का काम होता था। सुबह उस CCTV फुटेज को डिलीट करवाया जाता था।

हिंदुओं से पढ़वाई जाती थी हदीस

देवरिया के इस मामले में उस्मान अंसारी और उसके भाई इजराफिल अंसारी के साथ एक और नाम अब्दुर्रहमान का भी सामने आया है। EG मार्ट में बतौर मैनेजर काम कर रहा अब्दुर्रहमान भी इस रैकेट का अहम हिस्सा है।

असल में अब्दुर्रहमान का भी धर्मांतरण किया गया है। उसका असली नाम दत्तात्रेय गुप्ता था। 2019 अपनी पत्नी गायत्री के साथ उसने इस्लाम कबूल कर लिया था। इसके बाद उनके नाम अब्दुर्रहमान और गुलशन फातिमा हो गया। दोनों ने अपने परिवार से भी सारे रिश्ते तोड़ लिए।

मार्ट में काम करने के दौरान छोटे से पद से सीधे मैनेजर पर प्रमोशन दे दिया गया। पीड़ितों के अनुसार, वह हिंदू कर्मचारियों का ब्रेनवॉश करता था। उन्हें सुबह बैठक आयोजित कर कलमा और हदीस सिखाता था।

EG मार्ट और SS मॉल में काम करने वाले हिंदू कर्मचारियों को अलग-थलग किया जाता था और उन्हें कलमा और हदीस पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता था।

सलमान के अनुसार, अब्दुर्रहमान की बीवी गुलशन अक्सर मॉल परिसर में आती थीं और हिंदू महिला कर्मचारियों को अलग कमरों में ले जाकर इस्लामी तौर-तरीकों को अपनाने के लिए मजबूर करती थीं।

ये दोनों मिलकर उस्मान के रैकेट में हिंदू कर्मचारियों को फँसाते थे। इसके जरिए धर्म परिवर्तन का ये धंधा फल फूल रहा है।

हिंदू लड़कियाँ धर्मांतरण रैकेट की पहली पसंद

पीड़िता इकलौती लड़की नहीं थी बल्कि उस्मान के मॉल में काम करने वाली उस जैसी लगभग सारी हिंदू लड़कियाँ धर्मांतरण रैकेट के निशाने पर थीं।

हिंदूफोबिया से बात करते हुए पीड़िता ने बताया, “लड़कियों को जिले से बाहर घुमाने ले जाया जाता था। उन्हें ऐशो-आराम का वादा किया जाता था और फिर धीरे-धीरे उनका ब्रेनवॉश किया जाता था।”

इस प्रक्रिया में तरन्नुम अपना किरदार निभाती थी। वो ही लड़कियों को नमाज पढ़ना, कलमा दोहराना सिखाती और यह भी कहती थी कि हिंदू देवी-देवता झूठे हैं। उसका कहना था कि केवल इस्लाम ही सबसे ऊपर है।

अपने बारे में पीड़िता ने कहा, “मैंने पूरी तरह फँस जाने से पहले ही नौकरी छोड़ दी, लेकिन कई लड़कियाँ बच नहीं सकीं। वे या तो पैसों के कारण रुक गईं या इसलिए क्योंकि विरोध करने या धमकियों से डरती थीं।”

पीड़िता की तरह देवरिया धर्मांतरण के मामले में एक और खुलासा हुआ है। खुखुंदू थाना क्षेत्र के रहने वाले उमेश सिंह की बेटी लक्ष्मी सिंह को उस्मान गनी के साले गौहर अली ने बहलाकर निकाह किया।

लक्ष्मी के पिता उमेश सिंह के अनुसार, गौहर 31 जुलाई 2025 को उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर दिल्ली ले गया। वहाँ उसका इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया और उसका नाम बदलकर ‘सलमा’ रख दिया गया।

उमेश सिंह ने बताया, “मेरी बेटी को गौहर दिल्ली ले गया। वहाँ उसका धर्म बदल दिया गया और नाम सलमा रख दिया गया। उसके अपने सपने थे, लेकिन उसका ब्रेनवॉश कर दिया गया।”

उमेश ने आगे कहा, “मैंने अपहरण का मामला दर्ज कराया। इसके बाद अगस्त 2025 में गौहर को गिरफ्तार किया गया। हालाँकि मुझे पता है कि वह अकेले ये काम नहीं कर रहा था। इसके पीछे उस्मान ही था।”

अब पीड़ित परिवारों को धमकियाँ भी दी जा रही हैं। मामले में सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा है कि जिले में छांगुर पीर जैसे सिंडिकेट को पनपने नहीं दिया जाएगा।

उन्होंने जिला प्रशासन को सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं और SS मॉल और EG मार्ट की जाँच की माँग की जा रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार खुलासों के बाद अब SS मॉल और EG मार्ट पर स्थानीय लोगों द्वारा भी जाँच की माँग उठाई जा रही है।

उमेश सिंह का कहना है कि उस्मान अंसारी का देवरिया में चल रहा धर्मांतरण रैकेट छांगुर पीर के धर्मांतरण रैकेट के जैसा ही है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआत में उमेश सिंह ने गौहर अंसारी के खिलाफ अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत के बाद पुलिस ने गौहर और लक्ष्मी दोनों को ढूंढ निकाला। लेकिन तब तक गौहर लक्ष्मी से मंदिर में विवाह कर चुका था। चूंकि लक्ष्मी बालिग थी, इसलिए कोर्ट में उसकी बात को ही माना। हालाँकि ब्रेनवॉश हो चुकी लक्ष्मी ने गौहर की ही साथ दिया।

लक्ष्मी सिंह के पिता उमेश सिंह ने बाद में एक और शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने गौहर अंसारी पर उनकी बेटी का जबरन इस्लाम धर्म में परिवर्तन कराने का आरोप लगाया।

खुखुंदू थाने के प्रभारी निरीक्षक कल्याण सिंह सागर ने पुष्टि की कि उमेश सिंह की शिकायत के आधार पर गौहर अंसारी समेत छह लोगों के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन, विवाह, धमकी और दबाव का मामला दर्ज किया गया।

हालाँकि लक्ष्मी ने पुलिस के सामने अपने पिता पर ही आरोप लगा दिए, जिससे मामला और उलझ गया। पुलिस जाँच के बाद गौहर अंसारी को गिरफ्तार कर लिया गया।

हिंदू कर्मचारियों के लिए तय की गई हरी यूनिफॉर्म

हिंदूफोबिया ट्रैकर टीम के खुलासे में यह भी सामने आया कि मॉल में काम करने वाले स्टाफ को हरे रंग की यूनिफॉर्म पहनने के लिए मजबूर किया जाता था। टीम ने मॉल का दौरा किया तो देखा कि सभी महिला कर्मचारी वास्तव में हरे सलवार-कुर्ते में थीं।

असल में हरे रंग से ये रैकेट इस्लामी मजहब और पहचान को दिखाने की कोशिश कर रहा था। इस ड्रेस कोड के जरिए हिंदू कर्मचारियों की धार्मिक पहचान को कमजोर करने का प्रयास किया गया।

पूरे मामले में देवरिया सदर विधायक शलभ मणि त्रिपाठी के दखल के बाद पुलिस ने कार्रवाई की और उस्मान, उसकी पत्नी तरन्नुम और सहयोगी गौहर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।

इस मामले पर विधायक ने कहा कि ये पूरा रैकेट असल में कई स्तर पर चसल रहा है और किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। इसके अलावा जो उस्मान आज धर्मांतरण गिरोह का सरगना बना बैठा है, उसकी आर्थिक स्थिति भी सवालों के घेरे में है क्योंकि कुछ वर्षों पहले वह बस स्टैंड पर चप्पल बेचता था। अचानक उसके पास मॉल और बड़े मार्ट के पैसे और इतनी फंडिंग कहां से आ गई? असल में इस तरह की बड़ी फंडिंग और ये काम किसी बड़ी साजिश का ही हिस्सा हैं, जिनकी गहन जाँच आवश्यक है।”

(मूलरूप से अंग्रेजी में लिखी गई इस रिपोर्ट को विस्तार से इस खबर को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।)

बताया गैर हिंदू नहीं कर सकते चामुंडेश्वरी मंदिर में अनुष्ठान, फिर भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी याचिका: बानू मुश्ताक ही रहेंगी दशहरा कार्यक्रम की मुख्य अतिथि

मैसूर दशहरा महोत्सव की मुख्य अतिथि बानू मुश्ताक को बनाने के मामले में हिंदुओं को सुप्रीम कोर्ट से भी न्याय नहीं मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (19 सितंबर 2025) को कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें लेखिका बानू मुश्ताक को मैसूर दशहरा उद्घाटन के लिए मुख्य अतिथि बनाया गया।

जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने हिंदू संगठनों की याचिका खारिज कर दी, जो बानू की मुस्लिम पहचान और कथित हिंदू-विरोधी बयानों के आधार पर विरोध कर रहे थे।

ताजे मामले में 19 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता) ने बानू मुश्ताक को मुख्य अतिथि बनाने से रोकने के लिए दायर अपील को खारिज कर दिया। जस्टिस नाथ ने कहा, “इस देश का प्रीएम्बल क्या है? यह राज्य कार्यक्रम है… राज्य कैसे ए, बी और सी में भेदभाव कर सकता है?”

याचिकाकर्ताओं के वकील पीबी सुरेश ने तर्क दिया कि मंदिर में पूजा सेकुलर नहीं है और मुश्ताक के ‘एंटी-हिंदू’ बयान उन्हें अयोग्य बनाते हैं। लेकिन कोर्ट ने कहा, “हमने तीन बार डिसमिस्ड कहा है, कितनी बार कहें?”

सीजेआई बीआर गवई ने एक दिन पहले ही मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया था, लेकिन फैसला याचिकाकर्ताओं के खिलाफ गया। यह फैसला न केवल आस्था को चोट पहुँचाता है, बल्कि यह संकेत देता है कि न्यायपालिका बहुसंख्यक दलीलों को गंभीरता से नहीं ले रही। जस्टिस नाथ और मेहता में से एक भविष्य के सीजेआई हो सकते हैं, जो चिंता बढ़ाता है।

बानू मुश्ताक की उपस्थिति पर क्यों है आपत्ति?

दशहरा हिंदुओं का प्रमुख पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मैसूर का दशहरा उत्सव दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यह न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम है, बल्कि एक गहन धार्मिक अनुष्ठान है, जो सदियों से चली आ रही परंपराओं पर आधारित है।

हर वर्ष चामुंडी पहाड़ियों पर देवी चामुंडेश्वरी की पूजा के साथ इसकी शुरुआत होती है, जिसमें मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलन, फल-फूल अर्पित करना और वैदिक मंत्रों का जाप शामिल होता है। ऐसे में परंपरा के अनुसार, उद्घाटन में शामिल होने वाला व्यक्ति हिंदू आस्था में विश्वास रखने वाला होना चाहिए, क्योंकि यह धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा है।

बीजेपी और हिंदू संगठनों का कहना है कि मुस्लिम बानू मुश्ताक को इस धार्मिक अनुष्ठान में शामिल करना हिंदू आस्था का अपमान है। याचिकाकर्ता एच.एस. गौरव ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि मंदिर के भीतर पूजा एक धार्मिक कार्य है, न कि धर्मनिरपेक्ष, और इसे केवल हिंदू ही कर सकते हैं। उनके वकील पी.बी. सुरेश ने यह भी दावा किया कि बानू ने अतीत में हिंदू-विरोधी बयान दिए हैं, जिसके चलते उनकी उपस्थिति आपत्तिजनक है। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने दलीलों को खारिज कर दिया।

हाई कोर्ट से भी हिंदुओं को नहीं मिला था न्याय

इससे पहले, 15 सितंबर 2025 को कर्नाटक हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच (चीफ जस्टिस विवु बखरू और जस्टिस सीएम जोशी) ने याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट ने कहा कि मुश्ताक एक योग्य महिला हैं, और उनकी भागीदारी संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन नहीं करती। कोर्ट ने कहा, “किसी अन्य धर्म के व्यक्ति की भागीदारी अन्य धर्मों के उत्सवों में संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करती।”

हाई कोर्ट ने जोर दिया कि फैसला एक समिति द्वारा लिया गया, जिसमें विभिन्न पार्टियों के प्रतिनिधि शामिल हैं, और यह कोई धार्मिक संस्था द्वारा नहीं आयोजित है। याचिकाकर्ताओं के वकील एस सुदर्शन ने तर्क दिया कि हिंदू संस्कृति में मूर्ति पूजा महत्वपूर्ण है, और गैर-आस्थावान व्यक्ति को अनुमति देना गलत है। लेकिन कोर्ट ने कहा, “हम केवल राय पर फैसला नहीं ले सकते।” यह फैसला बहुसंख्यक भावनाओं को नजरअंदाज करता लगता है, जहाँ संविधान की सेकुलर भावना को अल्पसंख्यक पक्ष में इस्तेमाल किया गया।

CJI गवई भी दे चुके हैं हिंदू विरोधी बयान

इस मामले ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई के एक पुराने बयान को भी चर्चा में ला दिया। खजुराहो के जावरी मंदिर में भगवान विष्णु की टूटी मूर्ति को ठीक करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान CJI गवई ने कहा था, “ये पब्लिसिटी का हथकंडा है। जाओ, भगवान विष्णु से कहो कि कुछ करें।”

इस टिप्पणी को हिंदू आस्था का मज़ाक बताकर सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हुई थी। गवई को बाद में सफाई देनी पड़ी कि उनका इरादा भावनाएँ आहत करना नहीं था।

न्यायपालिका पर उठ रहे सवाल

बानू मुश्ताक प्रकरण ने न्यायपालिका की निष्पक्षता और संवेदनशीलता पर सवाल उठाए हैं। हिंदू संगठनों का कहना है कि जब शीर्ष अदालतें बहुसंख्यक समुदाय की भावनाओं को नज़रअंदाज़ करती हैं, तो यह विश्वास की कमी पैदा करता है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच में शामिल जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता में से एक के भविष्य में CJI बनने की संभावना है। ऐसे में इस फैसले को हिंदू समुदाय के एक वर्ग ने आस्था के खिलाफ माना है।

यह विवाद केवल बानू मुश्ताक के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह धार्मिक स्वतंत्रता, परंपराओं, और धर्मनिरपेक्षता के बीच संतुलन का सवाल उठाता है। हिंदू समुदाय का एक बड़ा वर्ग मानता है कि उनके त्योहारों को राजनीतिक मंच बनाने की कोशिश हो रही है।

UP CM योगी आदित्यनाथ करेंगे 5 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रोजेक्ट लॉन्च, किसानों-युवाओं को होगा फायदा: खाली पड़ी औद्योगिक जमीनों पर होंगे निर्माण

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस साल नवंबर में 5वें ग्राउंड-ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC) के अवसर पर 5 लाख करोड़ रुपए के निजी निवेश प्रोजेक्ट्स की शुरुआत करेंगे। पिछले 8.5 सालों में 4 GBCs के दौरान पहले ही 15 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पूरे किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 60 लाख लोगों को रोजगार मिला है।

औद्योगिक विकास विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया कि हर निवेश प्रस्ताव की नियमित निगरानी हो और उस पर समय से कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि निजी औद्योगिक इकाइयों के लिए जमीन अधिग्रहण स्थानीय लोगों की सहमति से होना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया “जमीन हर व्यक्ति की भावनाओं और जीवनभर की पूँजी से जुड़ी होती है। अगर राज्यहित में जमीन लेनी हो तो किसानों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए और शोषण की कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए। संवाद और तालमेल से यह कार्य आसानी से किया जा सकता है।”

मुख्यमंत्री ने सभी औद्योगिक विकास प्राधिकरणों से कहा कि वे अपनी-अपनी स्थिति के अनुसार जमीन अधिग्रहण के मुआवजे की दरें बढ़ाने पर विचार करें। उन्होंने इसे किसानों के हित में और समय की माँग बताया। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी उद्योग को दी गई जमीन 3 साल तक उपयोग नहीं होती, तो उसका आवंटन रद्द कर दिया जाएगा और वह जमीन दूसरे निवेशकों को दी जाएगी।

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2025–26 के लिए मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 5 लाख करोड़ रुपए GVA का लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए 8,000 नई और पुरानी इकाइयों को फ़ैक्ट्रीज़ एक्ट के तहत रजिस्टर करना होगा, जिनमें से अभी तक 1354 इकाइयाँ रजिस्टर हुई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि श्रम सुधार की प्रक्रिया तेज की जाए और खाली पड़ी औद्योगिक जमीन को सक्रिय किया जाए।

विदेशी कर्ज पर TMC MP साकेत गोखले ने किया गुमराह, दावा- 7 साल में मोदी सरकार ने किया ₹8 लाख करोड़ का लोन: जानिए- क्या है सच्चाई

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसद और मनी लॉन्ड्रिंग घोटाले के आरोपित साकेत गोखले ने एक बाद फिर से अधूरी जानकारी देकर आम लोगों को भ्रमित करने का काम किया है। इस बार गोखले ने मोदी सरकार पर भारी-भरकम विदेशी कर्ज लेने का आरोप लगाया है।

बुधवार (17 सितम्बर 2025) को गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट लिखी। इसमे उसने दावा किया कि पिछले 7-8 सालों में मोदी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बैंकों से भारी भरकम कर्ज लिया है।

गोखले ने कहा कि वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग ने दिसंबर 2023 में राज्यसभा में उनके सवाल का जवाब देते हुए ये जानकारी दी थी। जिसके मुताबिक, मोदी सरकार ने इन सालों में विदेशी बैंकों से कुल 91 अरब डॉलर (करीब 8,03,530 करोड़ रुपए) का कर्ज लिया।

यानी हर साल औसतन 1.2 लाख करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज। गोखले का दावा है कि इस कर्ज पर भारत हर साल लगभग 45,000 करोड़ रुपए सिर्फ ब्याज के तौर पर चुका रहा है। इसके अलावा असली कर्ज (प्रिंसिपल अमाउंट) की अदायगी अलग से करनी होगी।

साकेत गोखले ने विदेशी कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज को लेकर लोगों को इसका बोझ समझाने की कोशिश की। गोखले के अनुसार 2018 से अब तक इस विदेशी कर्ज पर हर साल सिर्फ ब्याज ही 45,000 करोड़ रुपए का चुकाना पड़ता है।

यह रकम उतनी ही है जितना भारत का पूरा सालाना बजट उच्च शिक्षा पर खर्च होता है। गोखले ने आरोप लगाया कि मोदी के जन्मदिन पर सरकार जनता को तौहफ़े के नाम पर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करती है। इसके अलावा, हर राज्य चुनाव से पहले मोदी नियमित रूप से प्रचार यात्राएँ करते हैं और लाखों-करोड़ों के प्रोजेक्ट्स घोषित करते हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 सालों से मोदी सरकार ने लोगों पर टैक्स का बोझ डाला है। इसके बावजूद, विदेशी संस्थाओं से भारी कर्ज लिया गया है। अब सवाल है कि इस बड़े विदेशी कर्ज का बोझ आखिर कौन उठाएगा? गोखले के अनुसार, इसका बोझ सीधे आम जनता पर ही पड़ेगा।

विवादित टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव से पहले विदेशी बैंकों से कर्ज लेकर बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स की घोषणा करते हैं और चुनाव खत्म होते ही वादे भूल जाते हैं। इसका असली बोझ आम जनता को उठाना पड़ता है।

गोखले ने कहा, “मोदी हर चुनाव से पहले जुमलेबाज़ी करते हैं। वे करोड़ों-लाखों के प्रोजेक्ट्स ‘जनता को तोहफे’ के नाम पर ऐसे घोषित करते हैं जैसे अपनी जेब से खर्च कर रहे हों। लेकिन सच्चाई यह है कि इन चुनावी वादों की असली कीमत भारत की जनता को चुकानी पड़ रही है। चुनाव के बाद मोदी अपने वादे भूल जाते हैं। भारत अरबों डॉलर का कर्ज सिर्फ मोदी के झूठे चुनावी वादों को पूरा करने के लिए ले रहा है। इस विदेशी कर्ज की अदायगी जनता को दशकों तक करनी पड़ेगी।”

गोखले ने इसके साथ वित्त मंत्रालय की उस जवाब की कुछ चुनी हुई कॉपियाँ भी साझा कीं जो उन्होंने राज्यसभा में पूछे गए सवाल पर मिली थीं। लेकिन यह भी साफ दिखा कि या तो उन्होंने जानबूझकर सरकार के जवाब की पूरी सच्चाई छिपाई या फिर उनकी समझ ही हकीकत से कटी हुई है।

क्या मोदी सरकार ने 8 लाख करोड़ रुपए का विदेशी कर्ज लिया है?

सरकार के जवाब में बताया गया कि जनवरी 2018 से अब तक विदेशी बहुपक्षीय वित्तीय संस्थाओं और बैंकों से लिए गए कर्ज का पूरा ब्यौरा मौजूद है, जिसमें कुल राशि और हर कर्ज पर लगने वाली ब्याज दर का विवरण शामिल है।

साकेत गोखले की पोस्ट में जो दूसरी इमेज लगाई गई थी, उसमें कर्ज की मुद्रा, बकाया राशि (LC, INR और USD) के सही आँकड़े दिए गए थे। लेकिन गोखले ने इन्हें ऐसे पेश किया मानो यह पूरा कर्ज सिर्फ केंद्र सरकार ने लिया हो।

असल में, यह कर्ज सिर्फ केंद्र सरकार ने नहीं बल्कि कई राज्य सरकारों ने भी लिया है। राज्यसभा में 2023 में गोखले के सवाल पर दिए गए जवाब के मुताबिक, केंद्र सरकार ने 15.23 अरब डॉलर का कर्ज लिया है।

इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार ने 2.90 अरब डॉलर, तमिलनाडु 1.80 अरब डॉलर, राजस्थान 1.36 अरब डॉलर, मध्य प्रदेश 1.10 अरब डॉलर, आंध्र प्रदेश 1.09 अरब डॉलर, छत्तीसगढ़ 0.46 अरब डॉलर, उत्तर प्रदेश 0.42 अरब डॉलर, कर्नाटक 0.40 अरब डॉलर, पश्चिम बंगाल 0.38 अरब डॉलर, असम 0.36 अरब डॉलर, हिमाचल प्रदेश 0.35 अरब डॉलर, बिहार 0.31 अरब डॉलर, केरल 0.22 अरब डॉलर, पंजाब 0.24 अरब डॉलर, त्रिपुरा 0.28 अरब डॉलर, ओडिशा 0.22 अरब डॉलर और उत्तराखंड सरकार ने 0.23 अरब डॉलर विदेशी स्रोतों से कर्ज लिया है।

मोदी सरकार पर हमला करने की जल्दबाज़ी में साकेत गोखले ने अधूरी और चुनिंदा जानकारी ही पेश की, लेकिन अपनी ही पार्टी द्वारा शासित राज्य की खराब आर्थिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया।

मार्च 2024 तक पश्चिम बंगाल का बकाया कर्ज राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) का 38% है। यह बड़े राज्यों में कर्ज से GSDP अनुपात के मामले में सबसे ऊँचे स्तरों में से एक है।

फरवरी 2025 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला पश्चिम बंगाल वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक लगभग 7.72 लाख करोड़ रुपए के कुल कर्ज के साथ बंद होगा। यह आंकड़ा 31 मार्च 2025 को दर्ज 6,30,783.50 करोड़ रुपए की तुलना में 9.21% ज्यादा है। यह अनुमान 2024-25 के संशोधित आकलन पर आधारित है।

साल 2022 में टीएमसी सरकार ने मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) की निधि को बोटुई हिंसा पीड़ितों को मुआवजा देने में इस्तेमाल किया था। केंद्र सरकार की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अप्रैल से सितंबर 2022 के बीच पश्चिम बंगाल प्रशासन ने 16 करोड़ से ज्यादा मध्याह्न भोजन की गिनती अतिरंजित दिखा दी, जिसकी कीमत 100 करोड़ रुपए से अधिक थी।

इसके अलावा पश्चिम बंगाल पहले से ही एसएससी घोटाला, पीडीएस घोटाला और मवेशी तस्करी जैसे कई भ्रष्टाचार मामलों से जूझ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। इसके बावजूद, राज्य के टीएमसी सांसद केंद्र सरकार को बदनाम करने के लिए भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

साकेत गोखले के बेतुके षड्यंत्र सिद्धांत और झूठे दावे

जनवरी 2020 में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान साकेत गोखले ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें रैली करने और नारा लगाने की अनुमति दी थी, “देश के गद्दारों को, गोली मारो …”। लेकिन उन्होंने कभी कोई सबूत या दिल्ली पुलिस की मंजूरी का पत्र नहीं दिखाया, जिससे उनका दावा साबित हो सके।

बाद में गोखले ने अपने बयान को बदलते हुए कहा कि पुलिस ने उन्हें 8 फरवरी के बाद प्रदर्शन करने के लिए कहा था, क्योंकि उस समय आचार संहिता लागू थी।

इस मामले की सही जाँच किए बिना ही वामपंथी वेबसाइट द वायर और कॉन्ग्रेस समर्थित नेशनल हेराल्ड ने गोखले के दावों को प्रकाशित कर दिया। इन रिपोर्टों से ऐसा दिखाने की कोशिश हुई मानो दिल्ली पुलिस को उस नारे में कोई आपत्ति नहीं थी।

दिल्ली पुलिस को साकेत गोखले के झूठे दावों का पर्दाफाश करने के लिए ट्विटर का सहारा लेना पड़ा। पुलिस ने साफ कहा कि 2 फरवरी 2020 को गोखले को किसी भी तरह की रैली या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर जो पत्र अनुमति-पत्र बताकर फैलाया जा रहा है, वह असल में केवल गोखले का अनुरोध पत्र था।

जून 2020 में गोखले ने पीएम केयर्स फंड से खरीदे गए वेंटिलेटरों को लेकर एक ‘वेंटिलेटर घोटाले’ की साजिश थ्योरी फैलाई। उन्होंने ट्विटर पर सात हिस्सों में लिखी पोस्ट में दावा किया कि वेंटिलेटर खरीद के लिए दिए गए 750 करोड़ रुपए गायब हो गए हैं। इसके बाद कॉन्ग्रेस से जुड़े कई लोग इस झूठ को सच मानकर फैलाने लगे। लेकिन भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के चेयरमैन ने इन दावों को खारिज कर दिया। फरवरी 2021 में BEL ने झूठ फैलाने के आरोप में गोखले पर 1 करोड़ कॉन्ग्रेस का मानहानि मुकदमा भी दायर किया।

14 अगस्त 2020 को वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि फेसबुक की एक वरिष्ठ अधिकारी भाजपा सरकार का पक्ष ले रही हैं। इसके बाद फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर अंकही दास पर कॉन्ग्रेस और उसके समर्थकों ने निशाना साधा।

साकेत गोखले ने भी आरोप लगाया कि अंकही दास आरएसएस से जुड़े संगठनों के कार्यक्रमों में शामिल हुईं। उन्होंने दावा किया कि अंकही दास World Organization of Students & Youth (WOSY) के एक सत्र में शामिल हुई थीं, जबकि सच यह था कि उस कार्यक्रम में उनकी जुड़वाँ बहन डॉ रश्मि दास मौजूद थीं। WOSY ने इस पर नाराजगी जताई और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। संगठन ने कहा कि डॉ रश्मि दास का जुड़ाव WOSY से स्वेच्छा से था, जिसका मकसद भारत में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों के बीच वसुधैव कुटुंबकम का संदेश फैलाना है।

अप्रैल 2021 में गोखले महाराष्ट्र सरकार द्वारा ब्रुक फार्मा के डायरेक्टर को रेमडेसिविर दवा सप्लाई मामले में परेशान किए जाने को सही ठहराने के लिए झूठ फैलाते पकड़े गए। उन्होंने महाराष्ट्र के गृहमंत्री से शिकायत की थी कि बीजेपी और विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस जैसे निजी लोग यह दवा कैसे हासिल कर पाए, जबकि इसका वितरण केवल राज्य सरकार को ही किया जाना था।

सितंबर 2024 में गोखले ने दावा किया कि मोदी सरकार ने ट्रेनों के निर्माण की लागत में 50% तक बढ़ोतरी की है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेनों की संख्या घटाकर 133 कर दी गई और प्रति ट्रेन की लागत 290 करोड़ से बढ़ाकर 436 करोड़ कर दी गई। लेकिन जल्द ही रेलवे मंत्रालय ने उनके इन दावों को झूठा बताया और साफ किया कि गोखले ने जानबूझकर अहम तथ्यों को छुपाकर भ्रामक जानकारी दी।


(मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में श्रद्धा पांडे ने लिखी है। इस लिंक पर क्लिक कर विस्तार से पढ़ सकते है)

पहले शाहिद अफरीदी को राहुल गाँधी लगे ‘सकारात्मक’, अब सैम पित्रोदा ने पाकिस्तान को बताया ‘घर जैसा’: ‘मोहब्बत की दुकान’ से आतंकिस्तान की ब्रांडिंग कर रहे कॉन्ग्रेसी

राहुल गाँधी के करीबी सैम पित्रोदा ने एक बार फिर भारत के दुश्मनों के लिए प्रेम दिखाया है। सैम पित्रोदा ने कहा है कि भारत को अपनी विदेश नीति में सबसे पहले अपने पड़ोसियों पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि उन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में ‘घर जैसा महसूस’ होता है।

पित्रोदा का यह बयान उस वक्त आया है जब कुछ समय पहले ही पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में हिंदुओं की निर्मम हत्या की थी। जब भारत में खून बहाया जा रहा है, तब राहुल गाँधी के खास आदमी को पाकिस्तान में अपनापन महसूस हो रहा है।

बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने सैम पित्रोदा के बयान पर तीखा हमला बोला है। प्रदीप भंडारी ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “राहुल गाँधी के चहेते और कॉन्ग्रेस के विदेश प्रमुख सैम पित्रोदा कहते हैं कि उन्हें पाकिस्तान में ‘घर जैसा’ महसूस हुआ।”

प्रदीप भंडारी ने आगे कहा, “कोई आश्चर्य नहीं कि UPA सरकार ने 26/11 हमले के बाद भी पाकिस्तान के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं की।” प्रदीप भंडारी ने आखिरी में लिखा, “पाकिस्तान का चहेता, कॉन्ग्रेस का चुना हुआ”

सैम पित्रोदा का विवादित बयान

इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस के प्रमुख सैम पित्रोदा ने कहा कि भारत को अपने पड़ोसियों के साथ अच्छे संबंध बनाने चाहिए और हमारे पड़ोसी देश मुश्किल समय से गुजर रहे हैं, इसलिए उनसे लड़ना सही नहीं है। सैम पित्रोदा ने माना कि इन देशों में हिंसा और आतंकवाद जैसी समस्याएँ हैं, लेकिन फिर भी हमें उनके साथ शांति और सद्भाव से रहना सीखना चाहिए।

सैम पित्रोदा ने अपने बयान को सही साबित करने के लिए पाकिस्तान का उदाहरण दिया। सैम पित्रोदा ने कहा, “मैं पाकिस्तान गया हूँ, और मुझे कहना पड़ेगा कि मुझे वहाँ घर जैसा महसूस हुआ। मैं बांग्लादेश और नेपाल भी गया हूँ, और वहाँ भी मुझे घर जैसा महसूस हुआ।” सैम पित्रोदा ने आगे कहा कि ये देश उन्हें विदेशी नहीं लगते, क्योंकि यहाँ के लोग उन्हीं की तरह दिखते हैं, उन्हीं की तरह बात करते हैं, उन्हीं के गाने पसंद करते हैं और उन्हीं जैसा खाना खाते हैं।

सैम पित्रोदा ने यह भी कहा कि मैं देश के युवाओं से अनुरोध करना चाहता हूँ कि वे राहुल गाँधी के साथ खड़े हों। उनकी आवाज के साथ अपनी आवाज मिलाएँ। राहुल गाँधी ने GenZ से अपील की थी कि वे आगे आएँ और देश के लोकतंत्र की रक्षा करें।

शाहिद अफरीदी का राहुल गाँधी पर बयान

इसी बीच, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने भी भारत में राजनीतिक विवादों को हवा दी है। शाहिद अफरीदी ने कहीं ना कहीं मौजूदा सरकार पर हमला करते हुए कहा, “ये सरकार अपने आपको पावर में लाने के लिए हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेलती है और यह बहुत गंदा किस्म का माइंडसेट है।”

इसके तुरंत बाद शाहिद अफरीदी राहुल गाँधी की तारीफ करते हुए दिखे। शाहिद अफरीदी ने कहा, “राहुल गाँधी की बात करू तो, राहुल बहुत पॉजिटिव माइंडसेट के हैं। वो (राहुल) दुनिया के साथ चलना चाहता है।” इसके बाद शाहिद अफरीदी बोलते हैं कि एक इजरायल कम था, जो दूसरा इजरायल बनने की कोशिश की जा रही है।

यह वही शाहिद अफरीदी हैं, जिसने यासीन मलिक जैसे आतंकियों का समर्थन किया था और कश्मीर के अलगाव की माँग की थी। शाहिद अफरीदी के बयान और सैम पित्रोदा के विचार एक ही धारा में दिखते हैं, जिसमें भारत की सत्ता को अस्थिर करने और पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें साफ नजर आती हैं।

यह हैरान करने वाली बात है कि एक तरफ पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर शाहिद अफरीदी राहुल गाँधी की तारीफ कर रहे है और दूसरी तरफ राहुल गाँधी के करीबी सैम पित्रोदा पाकिस्तान की तारीफ कर रहे हैं। ऐसा लगता है कि यह कोई संयोग नहीं है। यह दिखाता है कि एक तरफ कुछ लोग भारत के खिलाफ काम कर रहे हैं और दूसरी तरफ राहुल गाँधी के खास आदमी उन देशों से अच्छे संबंध बनाने की बात कर रहे हैं, जहाँ से आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है।

70 वर्षों में पंजाब की सबसे भीषण बाढ़: प्रकृति के कहर ने उजागर किया AAP सरकार का असफल शासन

भगवंत मान की लापरवाही ने प्राकृतिक आपदा को मानव निर्मित त्रासदी में बदल दिया, लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया जबकि केंद्र सरकार ने तुरंत मदद पहुँचाई।

पंजाब इस समय पिछले सत्तर वर्षों की सबसे भीषण बाढ़ का सामना कर रहा है। पूरे 23 जिले और 2,000 से अधिक गाँव पानी में डूब चुके हैं। लाखों लोग बेघर हो गए हैं और 1.75 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि जलमग्न हो गई है। पूरी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और आने वाला बुवाई का मौसम भी खतरे में है। ये सिर्फ आँकड़े नहीं हैं, बल्कि उन किसानों की पीड़ा है जिनकी सालभर की मेहनत कुछ ही दिनों में बह गई। यह उन परिवारों का दर्द है जिनके घर उजड़ गए, और उन बच्चों की असहायता है जिनके पास अब स्कूल लौटने की जगह नहीं बची।

हालाँकि प्रकृति का कहर टालना संभव नहीं था, लेकिन इतनी बड़ी तबाही को रोका जा सकता था। इस संकट को बढ़ाने का असली कारण भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार की लापरवाही और असंवेदनशीलता है। यह आपदा केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि शासन की विफलता का प्रमाण बन गई है।

इस आपदा की मानवीय कीमत बहुत भयावह है। गुरदासपुर, अजनाला और ससराली जैसे जिलों में परिवारों को अपने घरों की छतों पर फँसा हुआ देखा गया, जो राहत कार्य के इंतजार में थे। माताएँ पूरी रात अपने बुखार से तपते बच्चों को गोद में उठाए पानी के बढ़ते स्तर से बचाने की कोशिश कर रही थीं। किसानों की आँखों में आंसू थे जब उन्होंने अपने खेतों की ओर इशारा किया, जहाँ कभी गेहूँ की लहलहाती फसल होती थी, अब सिर्फ रेत के ढेर थे।

लोगों में एक ही भावना थी त्याग दिए जाने की पीड़ा। गाँववालों ने कहा, “हमें हमारे हाल पर छोड़ दिया गया है।” कई दिनों तक कोई डॉक्टर, कोई दवाई और प्रशासन का कोई कर्मचारी नहीं दिखा। विडंबना यह है कि AAP सरकार द्वारा प्रचारित मोहल्ला क्लीनिक इस आपदा के समय कहीं नजर नहीं आए। राहत कार्य का भार स्वयंसेवकों, सेना, NDRF जवानों, गुरुद्वारों और आम ग्रामीणों पर आ गया। राज्य की प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह नदारद रही।

इस संकट के दौरान सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्यमंत्री भगवंत मान खुद राज्य में मौजूद नहीं थे। जब गांव पानी में डूब रहे थे, तब मुख्यमंत्री तमिलनाडु में छुट्टियां मना रहे थे। जब हालात बेकाबू हो गए और लोगों का आक्रोश बढ़ा, तभी वे पंजाब लौटे। संकट के समय नेतृत्व की असली परीक्षा होती है, और इस परीक्षा में मान पूरी तरह असफल साबित हुए।

इससे भी बड़ी समस्या यह रही कि अरविंद केजरीवाल इस आपदा को भी राजनीतिक अवसर के रूप में इस्तेमाल करने आ पहुँचे। पंजाब में कोई संवैधानिक पद न होने के बावजूद, केजरीवाल ने मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर, सुरक्षा और संसाधनों का उपयोग ऐसे किया जैसे यह उनका निजी राज्य हो। जब मौसम साफ होता है, तो वे फोटो खिंचवाने आते हैं, और जैसे ही हालात बिगड़ते हैं, तुरंत दिल्ली लौट जाते हैं। यह पंजाब की जनता के जनादेश का खुला मजाक है।

इस बीच, दिल्ली के शराब घोटाले में आरोपित मनीष सिसोदिया को पंजाब में तैनात कर दिया गया है। पंजाब को एक ऐसे परीक्षण मैदान में बदल दिया गया है, जहाँ असफल मॉडलों और भ्रष्ट नेताओं को बसाया जा रहा है। AAP के भीतर जो नेता इसका विरोध करते हैं, उन्हें चुप करा दिया जाता है। पठानमाजरा मामले में देखा गया कि जिसने भी आवाज उठाई, उसे धमकियों और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा।

इस आपदा के बीच AAP मंत्रियों का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वे राहत नौका पर बैठकर स्वीडन और गोवा की छुट्टियों की चर्चा कर रहे थे। जबकि लाखों पंजाबी बाढ़ में फँसे थे, उनके नेता मौज-मस्ती में लगे थे। यह असंवेदनशीलता और घमंड की पराकाष्ठा है, जिसे जनता कभी नहीं भूलेगी।

इसके बिल्कुल विपरीत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद पंजाब का दौरा किया। उन्होंने हवाई सर्वेक्षण किया, गुरदासपुर में समीक्षा बैठक की, प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और तुरंत ₹1,600 करोड़ की राहत राशि की घोषणा की। इसके अलावा, पहले से ही पंजाब के राज्य राहत कोष में मौजूद ₹12,000 करोड़ को जोड़कर कुल ₹13,600 करोड़ अब बाढ़ राहत और पुनर्वास के लिए उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख, घायलों को ₹50,000, और अनाथ बच्चों की देखभाल PM CARES के तहत की जाएगी। उनका दीर्घकालिक दृष्टिकोण सिर्फ राहत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें घर और स्कूलों का पुनर्निर्माण, खेती को दोबारा खड़ा करना, पशुपालन को समर्थन, और जल संरक्षण प्रणालियों में निवेश शामिल है ताकि भविष्य में ऐसी तबाही दोबारा न हो।

यह तुलना बेहद स्पष्ट है।​ एक ओर गायब मुख्यमंत्री और विफल राज्य सरकार, जो सिर्फ प्रचार में लगी है।​ दूसरी ओर प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार, जो संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य कर रही है। हालाँकि, राहत राशि तभी प्रभावी होगी जब उसका सही उपयोग और निगरानी की जाए।

यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हर एक रुपया पीड़ितों तक पहुँचे और केजरीवाल व उनकी टीम की जेब में न जाए। यह भी चिंताजनक है कि पहले बाढ़ प्रबंधन के नाम पर खर्च किए गए ₹230 करोड़ का अब तक कोई हिसाब नहीं दिया गया। अवैध बालू खनन के नेटवर्क और राहत राशि के दुरुपयोग की स्वतंत्र जाँच जरूरी है। किसानों को उनकी नष्ट हुई फसलों का उचित मुआवजा मिलना चाहिए और प्रभावित गाँवों में वास्तविक पुनर्वास कार्य दिखना चाहिए, न कि केवल सरकारी विज्ञापनों में।

इस आपदा से कई सबक लेने होंगे। तैयारी को विकल्प नहीं, अनिवार्यता बनाना होगा। मौसम विभाग और विशेषज्ञों की चेतावनियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जवाबदेही तय करनी होगी, और जो लोग जनता की रक्षा करने में विफल रहे हैं उन्हें जिम्मेदार ठहराना होगा। राहत निधियों का पारदर्शी और ऑडिटेड खर्च सुनिश्चित करना होगा। पंजाब का शासन दिल्ली के राजनीतिक बॉसों के हाथों में नहीं, बल्कि पंजाब में रहकर करना होगा। और सबसे जरूरी, नेताओं को पंजाब को राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि गर्वित नागरिकों का राज्य मानना होगा।

पंजाब के लोग साहसी और दृढ़निश्चयी हैं। वे अपने घर, खेत और स्कूल दोबारा बनाएँगे। लेकिन वे टूटे हुए विश्वास को भी पुनर्निर्मित करेंगे। बाढ़ का पानी उतर जाएगा, लेकिन यह याद हमेशा रहेगी कि कौन उनके साथ खड़ा था और कौन उन्हें छोड़कर भाग गया।

यह त्रासदी एक मोड़ है। इसने AAP सरकार की खोखली राजनीति को उजागर किया और यह दिखाया कि पंजाब को ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो भागे नहीं, सेवा करे। पंजाब को ऐसी सरकार चाहिए जो सेवा को राजनीति पर, जवाबदेही को अहंकार पर, और करुणा को असंवेदनशीलता पर प्राथमिकता दे।

इतिहास जब इस बाढ़ को याद करेगा, तो वह सिर्फ प्रकृति के प्रकोप को नहीं, बल्कि उन नेताओं की विफलता को भी याद करेगा जिन्हें पंजाब की रक्षा करनी थी। अब समय आ गया है कि ऐसी विश्वासघातपूर्ण राजनीति को दोहराया न जाने दिया जाए।

राहुल गाँधी का खतरनाक खेल

(लेफ्ट, राइट और सेंटर: शुक्रवार, 19 सितंबर, 2025)

इस लेखक ने 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दो भविष्यवाणियाँ की थीं। उस समय मीडिया और यहाँ तक कि जो लोग मीडिया की हर बात को पत्थर की लकीर मानते थे, वे भी कह रहे थे कि मोदी 2014 में जैसे तैसे प्रधानमंत्री तो बन गए हैं, लेकिन उन्हें दूसरा कार्यकाल नहीं मिलेगा। भाजपा हार जाएगी।

ऐसे माहौल में पहली भविष्यवाणी यही थी कि मोदी को 300 से ज्यादा सीटें मिलेंगी।

मेरी दूसरी भविष्यवाणी यह ​​थी कि सवाल यह नहीं है कि मोदी जीतेंगे या नहीं। सवाल यह है कि मोदी को दूसरा कार्यकाल मिलने से बौखलाया विपक्ष क्या करेगा? वे अराजकता फैलाएँगे। देश में गृहयुद्ध की स्थिति पैदा करेंगे।

सौभाग्य से पहली भविष्यवाणी सच साबित हुई। 303 सीटें प्राप्त हुईं। और दुर्भाग्य से, दूसरी भविष्यवाणी भी सच साबित हुई। अराजकतावादियों ने सरकार के खिलाफ किसान आंदोलन और शाहीन बाग का प्रदर्शन किया।

राहुल गाँधी को ऐसा लगता है कि 1978 में, जब जनता पार्टी सत्ता में थी, तब दो युवा कॉन्ग्रेसी गुंडों ने खिलौना पिस्तौल और क्रिकेट बॉल दिखाकर इंडियन एयरलाइंस के विमान IC-410 का अपहरण कर लिया था और मोरारजी सरकार से दादी इंदिरा और चाचा संजय पर लगे आरोप वापस लेने और इस्तीफा देने की माँग की थी। वैसे ही यह भी कह रहा है कि वह ‘हाइड्रोजन बम’ दिखाकर मोदी सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। उस समय कॉन्ग्रेस ने कहा था कि भोलानाथ पांडे और देवेंद्र पांडे का कॉन्ग्रेस के साथ कोई सम्बन्ध नहीं था। कॉन्ग्रेस ने सरासर झूठ बोला था। 1980 में जब इंदिरा गाँधी दोबारा प्रधानमंत्री बनीं, तब दोनों पांडे बंधु कॉन्ग्रेस के टिकट पर उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए थे।

कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाने के लिए राहुल गाँधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बाद, उनके ‘हाइड्रोजन बम’ की क्षमता सबको पता चल गई है। इस आदमी के पास फटी हुई एक पिस्तौल भी नहीं है। पिछले कर्नाटक चुनाव में, यानी 2023 में अगर भाजपा ने ‘वोट चोरी’ की थी, तो कॉन्ग्रेस कैसे जीत गई? इस सवाल का जवाब राहुल गाँधी के पास नहीं है। जब एक रिपोर्टर ने पूछा कि ‘वोट चोरी’ के सबूत लेकर कोर्ट जाओगे? तब इस सवाल का जवाब देते हुए राहुल गाँधी ने गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में कहा कि ‘यह मेरा काम नहीं’ है।

तो भई, तुम्हारा काम क्या है? लोगों को भड़काना? यह आदमी ‘वोट चोरी’ का बेबुनियाद मुद्दा इस इरादे से उठा रहा है कि तुम्हारी बकवास से नाराज भारत की जनता सड़कों पर उतर आए, संसद में घुस जाए, प्रधानमंत्री आवास में घुस जाए और बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात पैदा कर दे।

राहुल गाँधी की दाल किसी मुद्दे पर नहीं गलती। उन्होंने जाति जनगणना की माँग करके पिछड़े वर्गों को ऊपर उठाने की कोशिश की। सरकार ने मुसलमानों की दर्जनों जातियों की भी गिनती करने की घोषणा करके हिंदुओं में फूट डालने की चाल को नाकाम किया। इतना ही नहीं, सरकार ने बिहार के अलावा पूरे देश की मतदाता सूची का सत्यापन करने की भी घोषणा की। जब विपक्ष ने विशेष जाँच भूमिका (SIR) का विरोध किया, तो प्रधानमंत्री ने बेहद सख्त और तीखे स्वर में कहा कि मतदाता सूची से घुसपैठियों के नाम हटाने के सरकार के संकल्प को कोई नहीं तोड़ सकता।

राहुल ने अंबानी-अडानी पर निशाना साधा और सूट-बूट वाली सरकार का दिण्डक चलाया। सभी न्यायिक व्यवस्थाओं ने राहुल द्वारा दोनों औद्योगिक घरानों पर लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया है। बस, बची-कुची कसर सेबी ने पूरी कर दी, जिसने हिंडनबर्ग मामले में पलटी मारते हुए गौतम अडानी को क्लीन चिट दे दी है।

ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने का आइडिया भी बहुत चला। 2004 और 2009 में EVM से चुनाव हुए और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी। उस समय ईवीएम हैक नहीं हुई थीं, लेकिन मोदी के सत्ता में आने के बाद ईवीएम में घोटाले होने लगे?

क्या चुनाव आयोग मोदी का खिलौना है? 2014 के चुनाव में कॉन्ग्रेस सत्ता में थी। केंद्रीय चुनाव आयोग के आयुक्त कॉन्ग्रेस द्वारा चुने गए थे। इसके बावजूद, भारतीय जनता पार्टी को 303 सीटें मिलीं। अगर चुनाव आयोग और ईवीएम हैक करना संभव है, तो भाजपा को 2024 में 400 पार करने का मौका क्यों नहीं मिला? उसे 240 सीटों पर क्यों सिमटना पड़ा?

यहाँ तक ​​कि शातीत सोनिया के बेटे राहुल को भी पता है कि वह झूठे आरोप लगा रहे हैं। और कॉन्ग्रेस के कदम चूमने की आदी हो चुकी दरबारी मीडिया, राहुल के इन झूठों को अपने तंत्र के जरिए फैला रही है।

कुछ सड़कों के उबड़-खाबड़ होने की छोटी-मोटी शिकायतों के अलावा, भारत के मतदाताओं को मोदी सरकार से और कोई शिकायत नहीं है। लेकिन मैंने दुनिया के किसी भी देश में ट्रैफिक जाम के कारण दंगे होने और सरकार गिरने की बात नहीं सुनी।

मोदी सरकार का 11 साल का रिकॉर्ड उज्ज्वल है। लोग खुश हैं। राजनीतिक स्थिरता है। असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाए गए दंगे नियंत्रण में हैं। कुछ इलाकों में सरकार की तमाम सुविधाओं का लाभ उठाने के बावजूद, कुछ मुस्लिम मतदाता मोदी को वोट नहीं देते, फिर भी मोदी सबका साथ सबका विकास पर अड़े हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप देश के कई समझदार मुस्लिम शांति से रहने के लिए मोदी समर्थक बन गए हैं।

कुल मिलाकर, देश ठीक चल रहा है। जो भी छोटी-मोटी शिकायतें हैं, वे नगण्य हैं। ऐसी छोटी-मोटी शिकायतें आपके परिवार में, दोस्तों के बीच, सोसायटी की इमारतों में भी बनी रहेंगी। सरकारें बदलती रहेंगी, लेकिन ऐसी शिकायतें किसी न किसी रूप में जारी रहेंगी। पूरी दुनिया में ऐसी कमियाँ होना स्वाभाविक है।

राहुल गाँधी ये सब समझते हैं। उन्हें ये भी पता है कि अगर मोदी 2029 में फिर से प्रधानमंत्री बन गए, तो उनके जीते जी कॉन्ग्रेस कभी सत्ता में नहीं आएगी (मैं दुआ करता हूँ कि राहुल 125 साल जिएँ)।

2029 के चुनाव सिर्फ राहुल के लिए नहीं, सिर्फ कॉन्ग्रेस के लिए नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष के लिए आखरी मौका हैं। बंगाल चुनाव ममता बनर्जी के लिए भी आखिरी मौका है। एक ज्योतिषी ने तो यहाँ तक कह दिया है कि वह दोबारा नहीं चुनी जाएँगी। (ज्योतिषियों की भविष्यवाणियों पर भरोसा नहीं होता, फिर भी इस ज्योतिषी के मुँह में घी-शक्कर डालने के लिए पैसे अलग रखे हैं मैंने।)

राहुल गाँधी के पास 1000 से ज्यादा दिन हैं- इस देश में अराजकता फैलाने के लिए, युवाओं को भड़काने के लिए, दलितों वगैरह को भड़काने के लिए और इन सबको सड़कों पर लाकर हालात बेकाबू करने की कोशिशें करने के लिए।

न तो कॉन्ग्रेस और न ही राहुल गाँधी के पास कोई तय दिशा, तय नक्शा या ठोस कार्यक्रम है, जिसके आधार पर वे यह दावा कर सकें कि देश बेहतर तरक्की कर सकता है। न ही उनके पास मोदी सरकार के खिलाफ एक भी सबूत है कि मौजूदा सरकार देश चलाने में सक्षम नहीं है।

राहुल नाम का नकली गाँधी अगले साढ़े तीन सालों में और जोर पकड़ने वाला है। कॉन्ग्रेस पार्टी प्लेट का बचा-खुचा खाना खाने की आदत वाले दरबारी मीडिया के जरिए वो ऐसी अफवाहें फैलाने जा रहे हैं कि अच्छे-अच्छे मोदी समर्थक भी डगमगा जाएँगे। राहुल गाँधी चाहते हैं कि मोदी सरकार उन्हें गिरफ्तार करे, वो चाहते हैं कि कोई विरोधी उन पर हमला करे। इसीलिए वो अभद्र बातें बोलते हैं। इसीलिए वो सरकार द्वारा दी गई जेड प्लस सुरक्षा को नजरअंदाज करते हुए घूमते रहते हैं।

मोदी सरकार यह सब समझती है। अगर मोरारजीभाई के शासनकाल में गृह मंत्री चरण सिंह की जिद पर इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी गिरफ्तार न हुए होते, तो इस प्रतिशोधी माँ-बेटे की जोड़ी को ‘शहीद’ का दर्जा न मिलता, जनता की सहानुभूति न मिलती। लेकिन कॉन्ग्रेस- एक विधवा की गिरफ्तारी, एक होनहार नौजवान की गिरफ्तारी पर प्रचार करके सत्ता में वापस आ गई।

मोदी अतीत को दोहराना नहीं चाहते। मोदी यह भी समझते हैं कि भगवान ना करे और अगर 2029 में भारतीय जनता पार्टी हार जाती है, तो कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दल सत्ता में आ जाएँगे और न सिर्फ भाजपा, बल्कि RSS भी आग में झोंक दिया जाएगा। वे मोदी समेत सभी हिंदुओं को जेल में डाल देंगे, चुनाव आयोग को अपने अधीन कर लेंगे और भारत के सभी राज्यों में गैर-भाजपा सरकारें बना लेंगे।

वे ऐसी स्थिति पैदा कर देंगे कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को बहाल करना पड़ेगा। देश और दुनिया भर में मोदी समर्थक ऐसा माहौल फैलाएँगे कि मोदी-काल भ्रष्ट था, खोखला था, जनता की आँखों में धूल झोंककर अपनी कमजोरियों को छुपा रहा था। इंदिरा गाँधी और राजीव गाँधी की तरह राहुल गाँधी भी न्यायपालिका की खुलेआम अनदेखी करेंगे और देश का खजाना अपने भ्रष्ट साथियों के लिए खोल देंगे।

2029 के चुनावों से पहले, राहुल गाँधी विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर ऐसा निराशाजनक माहौल बनाएँगे कि यह देश नरक में चला गया है, मोदी सरकार विफल हो गई है, तीन कार्यकाल मिलने के बावजूद, मोदी ने देश को 50 साल पीछे धकेल दिया है, युवाओं की उम्मीदें टूट गई हैं, गरीब और भी गरीब हो गए हैं, मोदी ने हिंदू-मुस्लिमों को बाँटकर राज किया है, देश का धर्मनिरपेक्ष ताना-बाना तार-तार हो गया है, देश में लोकतंत्र की बहाली जरूरी है। और इन सभी आरोपों को साबित करने वाला ‘हाइड्रोजन बम’ राहुल गाँधी की जेब में होगा।

राहुल गाँधी देश की सभी संवैधानिक शक्तियों का अनादर करके- संसद, न्यायपालिका और सरकारी तंत्र चलाने वाले सभी लोगों को झूठा बताकर, भारत के नागरिकों में मोदी के प्रति अविश्वास पैदा करने की एक वैश्विक साजिश का अहम हिस्सा हैं। ये सभी नोटबंदी से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, मोदी की तमाम उपलब्धियों पर संदेह जताकर देश की जनता को मूर्ख बनाने की बेकाबू कोशिश कर रहे हैं।

खतरनाक खेल एक जोखिम भरा, लापरवाह और लापरवाह काम है जिसके हमेशा नकारात्मक परिणाम होते हैं और इससे बहुत नुकसान हो सकता है- भयानक आपदाएँ, विपत्तियाँ और विपत्तियाँ। केवल वही व्यक्ति जिसका दिमाग खाली हो, जिसके मन में शैतान ने घर कर लिया हो, ऐसे खतरनाक खेल को खेलने में रुचि ले सकता है।

लास्ट बोल

‘मेरे दिल और आत्मा से आँसू बह निकले, ज़िंदगी एक प्यास बन कर रह गई’

(हसन कमाल की ये पंक्तियाँ राहुल गाँधी 2029 के नतीजों के बाद गाएँगे या आप- यह फैसला आपको ही करना है।)

पाकिस्तान खिलाड़ियों से टीम इंडिया ने नहीं मिलाया हाथ तो राजदीप सरदेसाई को लगा बुरा: खेल भावना की आड़ में चलाया पाक का प्रोपेगेंडा, कहा- ये प्रॉक्सी वॉर

इंडिया टुडे चैनल पर गुरुवार (18 सितंबर 2025) को चल रहे शो ‘Democratic Newsroom’ में ‘पत्रकार’ राजदीप सरदेसाई ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत को पहलगाम आतंकी हमले में जान गँवाने वाले लोगों और भारतीय सेना को समर्पित किया।

दरअसल रविवार (14 सितंबर 2025) को UAE में खेले गए एशिया कप के मुकाबले में भारत ने पाकिस्तान को 7 विकेट से हराया था। मैच के बाद भारतीय टीम ने पाकिस्तानी टीम से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया और जीत को पहलगाम आतंकी हमले के पीड़ितों और भारतीय सेना को समर्पित किया।

राजदीप सरदेसाई ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि खेल और राजनीति को मिलाना गलत है और सूर्यकुमार यादव का बयान ICC के नियमों के खिलाफ है। उन्होंने इसकी तुलना मोईन अली और उस्मान ख्वाजा से की, जिन्होंने फिलिस्तीन के समर्थन में ब्लैक आर्मबैंड पहना था।

राजदीप ने कहा कि जब धोनी ने एक मैच में सेना के निशान वाला ग्लव्स पहना था, तब ICC ने कार्रवाई की थी, तो अब क्यों नहीं? इस पर पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने राजदीप की बातों का खंडन किया और कहा, “हाथ मिलाना नियम नहीं, परंपरा है, जिसे निभाना जरूरी नहीं।”

विक्रांत ने राजदीप को समझाते हुए आगे कहा, “आप जानते हैं, क्रिकेट दो चीजों पर चलता है। एक तो खेल के नियम। दूसरा खेल भावना। ये एमसीसी की खेल शर्तें हैं। तो यही खेल भावना है। आप हाथ मिला सकते हैं। और नहीं भी मिला सकते हैं।” विक्रांत गुप्ता ने कहा कि सूर्यकुमार यादव ने सिर्फ इतना कहा कि ये जीत पहलगाम के शहीदों और सेना को समर्पित है। इसमें कोई राजनीति नहीं है।”

राजदीप सरदेसाई ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा खूब चलाया। सरदेसाई ने तो इसे बाकायदा ‘प्रॉक्सी वॉर’ तक बता दिया और आरोप लगाया कि कप्तान सूर्यकुमार यादव ने मैच जीतने के बाद पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर सिर्फ घरेलू राजनीति के लिए सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश की।

इसके बाद वरिष्ठ खेल पत्रकार विक्रांत गुप्ता ने राजदीप के इस बयान की कड़ी आलोचना की और कहा कि इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं था। विक्रांत ने कहा, “सूर्या ने कहा कि मैं ये जीत पहलगाम में शहीद हुए लोगों के परिवारों को समर्पित करता हूँ। पहलगाम भारत में है। भारत में आतंकी हमला हुआ था। एक भारतीय नागरिक के तौर पर वो ऐसा कह सकते हैं, इसमें गलत क्या है?”

विक्रांत गुप्ता ने ये भी याद दिलाते हुए कहा “जब 26/11 मुंबई आतंकी हमला हुआ था, उसके सिर्फ 15 दिन बाद चेन्नई टेस्ट मैच में जीत के बाद सचिन तेंदुलकर ने भी कहा था कि यह जीत हम 26/11 के पीड़ितों के परिवारों को समर्पित करते हैं। तब किसी ने इसे राजनीति नहीं कहा था।”

इस पूरे विवाद में राजदीप सरदेसाई ने सूर्यकुमार यादव के बयान को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की, जबकि विक्रांत गुप्ता और कई अन्य लोगों ने स्पष्ट किया कि ये बयान एक देशभक्त भारतीय खिलाड़ी की संवेदनशील प्रतिक्रिया थी, ना कि कोई राजनीतिक स्टंट।