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मुफ्त में ऑक्सीजन देगा महावीर मंदिर, 150 लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन: जानें क्या है प्रक्रिया

कोरोना संकट के समय में पटना का महावीर मंदिर संकटमोचक की तरह कोविड मरीजों की मदद करने आगे बढ़ा है। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, महावीर मंदिर के परिसर में आज से ऑक्सीजन सिलेंडर फ्री में भरे जाएँगे।

मंदिर के सचिव ने बताया, “हमारा लक्ष्य 150 लोगों को ऑक्सीजन सिलेंडर प्रतिदिन देना है। भीड़ से बचने के लिए ये काम ऑनलाइन बुकिंग के जरिए होगा। हम उन्हें स्लॉट देंगे और मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर रिफिल करेंगे।”

बता दें कि मंदिर परिसर में इस काम की शुरुआत आज यानी 30 अप्रैल को जरूरतमंद रोगियों को नि:शुल्क ऑक्सीजन वितरित करके की गई।

यहाँ से ऑक्सीजन पाने की प्रक्रिया मेंं इन खास बातों का ध्यान दें:

  • ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए ऑनलाइन बुकिंग करना अनिवार्य है।
  • ऑनलाइन ऑक्सीजन बुकिंग के बाद अपना बुकिंग स्टेटस चेक करें।
  • यह ऑक्सीजन पूर्णतः नि:शुल्क है। किसी से कोई पैसा नहीं लिया जाएगा।
  • इसके लिए मरीजों को आधार कार्ड, मेडिकल पर्ची, जिसमें ऑक्सीजन बुकिंग आईडी स्लिप हो, अपने साथ लाना अनिवार्य है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, महावीर मंदिर के परिसर में इस शुभ काम की शुरुआत न्यास के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने की। आचार्य कुणाल ने बताया कि महावीर मंदिर ट्रस्ट ने ऑक्सीजन प्लांट बिठाने के लिए पूरे देश में संपर्क किया। लेकिन किसी ने भी 4 माह के पहले इसे क्रियान्वित करने का आश्वासन नहीं दिया। तभी मंदिर की ओर से स्थानीय स्तर पर ऑक्सीजन सस्ते दर में मुफ्त वितरण करने का निर्णय लिया। 

आचार्य किशोर कुणाल ने कहा कि उनका लक्ष्य प्रतिदिन 150 जरूरतमंद रोगियों को ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध कराने का है। ऑक्सीजन सिलेंडर का वितरण ऑनलाइन सिस्‍टम से होगा। उन्होंने कहा, “हम लोगों ने छोटे साइज के सिलेंडर खरीदने की बहुत कोशिश की, लेकिन इसकी उपलब्धता नहीं होने से लोगों को 10.2 लीटर के सिलिंडर में ही ऑक्सीजन दे पाने में समर्थ होंगे।”

न्यास सचिव ने यह जानकारी भी दी कि 1 मई यानी शनिवार से चिरैयाटाँड पुल के पास कंकड़बाग में स्थित महावीर आरोग्य संस्थान में कोविड रोगियों के लिए 40 बेड वाला अस्पताल आरंभ किया जा रहा है। वहीं बेगूसराय में भी शनिवार या सोमवार से महावीर अग्रसेन सेवा सदन में 25 बेड के साथ कोविड अस्पताल प्रारंभ करने की तैयारी है।

कैसे पहचानें असली और नकली Remdesivir, IPS अधिकारी ने दो ट्वीट से समझाया

देश भर में कोरोना वायरस की दूसरी लहर का प्रकोप जारी है। अस्पतालों में कोविड के गंभीर मरीजों के इलाज के लिए डॉक्टर रेमडेसिविर इंजेक्शन की माँग कर रहे हैं। इसी बीच रेमडेसिविर की माँग अधिक और सप्लाई ​कम होने के कारण इसकी कालाबाजारी की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ लोग जरूरतमंदों को ऊँचे दामों पर नकली इंजेक्शन बेच रहे हैं। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन असली है या नकली, ये जानना बेहद जरूरी हो गया है।

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की डीसीपी और आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने दो ट्वीट के जरिए रेमडेसिविर की नकली और असली शीशी की पहचान कैसे की जाए इसकी जानकारी दी है। उन्होंने रेमडेसिविर इंजेक्शन के असली और नकली पैकेट की तस्वीरें शेयर करते हुए बताया है कि कि हम असली रेमडेसिविर के पैकेट की पहचान कैसे कर सकते हैं।

आईपीएस अधिकारी मोनिका भारद्वाज ने सोमवार (26 अप्रैल 2021) को दो ट्वीट कर बताया कि नकली और असली रेमडेसिविर शीशी के बीच की पहचान कैसे की जाए। IPS ऑफिसर ने इंजेक्शन के नकली पैकेट पर मौजूद कुछ गलतियों की तरफ इशारा किया है, जो इसे असली पैकेट से अलग करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

मोनिका ने असली और नकली रेमडेसिविर के बीच के अंतर को तस्वीरों में उजगार किया है, जो इस प्रकार हैं-

1.नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर इंजेक्शन के नाम से ठीक पहले ‘Rx‘ नहीं लिखा हुआ है।

2. पैकेट पर लिखी गई तीसरी लाइन में एक कैपिटलाइजेशन एरर है। असली पैकेट पर 100 mg/Vial (V Capital) लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर 100 mg/vial (v small) लिखा हुआ है।

3. असली पैकेट पर For use in लिखा हुआ है, जबकि नकली पैकेट पर for use in लिखा हुआ है। यानी दोनों में सिर्फ Capital F का अंतर है।

4. असली पैकेट के पीछे चेतावनी लेबल (Warning Label) लाल रंग में है, जबकि नकली पैकेट पर Warning लेबल काले रंग में है।

5. नकली रेमडेसिविर के पैकेट पर ‘Warning’ लेबल के ठीक नीचे मुख्य सूचना ‘Covifir’ (ब्रैंड नाम) is manufactured under the licence from Gilead Sciences में Inc नहीं लिखा हुआ है।

6.Manufactured by के नीचे Hyderabad के बाद india लिखा है, जो कि India होना चाहिए।

अंत में उन्होंने बताया कि रेमडेसिविर वाले पैकेट पर पूरे पते में स्पेलिंग की गलतियाँ हैं। जैसे नकली पैकेट पर Telangana की जगह Telagana लिखा हुआ है।

एक अन्य ट्वीट में, मोनिका भारद्वाज ने स्पष्ट किया, ये ट्वीट जानकारी देने के लिए किए गए हैं। अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है। उन्होंने ट्विटर पर एक असली रेमडेसिविर पैकेट की फोटो भी शेयर की है, ताकि वे इसे देखकर नकली से अलग कर सकें।

बता दें कि गाजियाबाद पुलिस और अपराध शाखा की टीम ने मंगलवार को (27 अप्रैल) कोरोना काल में दिल्ली-एनसीआर में रेमडेसिविर (Remdesivir) इंजेक्शन की कालाबाजारी करते देश के प्रख्यात न्यूरो सर्जन मोहम्मद अल्तमश और उनके दो साथियों को गिरफ्तार किया था। हजरत निजामुद्दीन का रहने वाला डॉ. अल्तमश लंबे समय तक एम्स में अपनी सेवाएँ दे चुका है और उसके देश के कई बड़े नेताओं के साथ अच्छे संबंध हैं। पुलिस ने इसके कब्जे से 70 रेमडेसिविर इंजेक्शन के अलावा दो अक्टेमरा इंजेक्शन व 36 लाख दस हजार रुपए नकद और एक लग्जरी कार भी बरामद की थी।

ऑक्सीजन के लिए ओडिशा कर रहा दूसरे राज्यों की दिल खोल मदद, केरल बढ़ाने में लगा है सिर्फ अपना रिजर्व

एक ओर जहाँ भारत के कई राज्य ऑक्सीजन की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं ओडिशा एक ऐसा राज्य है जो दूसरे राज्यों को ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है। अभी तक मिली जानकारी के अनुसार ओडिशा से 90 कंटेनर्स के माध्यम से 1675.781 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन आठ राज्यों को भेजी जा चुकी है। वहीं दूसरी ओर केरल ने राज्य में ऑक्सीजन के रिजर्व को 1000 मीट्रिक टन तक बढ़ाने का निर्णय लिया है।  

22 अप्रैल 2021 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कुछ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों से ऑक्सीजन की आपूर्ति को लेकर बात की थी। इसके बाद ओडिशा सरकार ने मंगलवार को यह सूचना दी कि Covid-19 से बुरी तरह संक्रमित 8 राज्यों को 1676 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा चुकी है।

ओडिशा पुलिस के एडीजी वाय के जेठवा ने बताया कि राउरकेला, जयपुर, ढेंकानाल और अंगुल से ऑक्सीजन टैंकर भेजे जा रहे हैं। एक डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाकर मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति की जा रही है।

उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक चार राज्यों आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश और हरियाणा को सर्वाधिक ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। आंध्र प्रदेश को 644 मीट्रिक टन जबकि तेलंगाना को लगभग 324 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। वहीं ओडिशा से मध्य प्रदेश और हरियाणा को क्रमशः 216 मीट्रिक टन और 187 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई है।

इन चार राज्यों के अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ को भी ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। महाराष्ट्र को 112 मीट्रिक टन तो उत्तरप्रदेश को लगभग 114 मीट्रिक टन मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति हुई। वहीं छत्तीसगढ़ को 61 मीट्रिक टन एवं तमिलनाडु को भी लगभग 16 मीट्रिक टन ऑक्सीजन ओडिशा से सप्लाई किया गया।

ऑक्सीजन की आपूर्ति में किसी प्रकार की देर न हो, इसलिए बाकायदा एक डेडिकेटेड कॉरिडोर बनाकर ओडिशा पुलिस की निगरानी में मेडिकल ऑक्सीजन को इन राज्यों के लिए भेजा गया।

जहाँ एक ओर ओडिशा, अन्य राज्यों की मदद के लिए लगातार ऑक्सीजन भेज रहा है वहीं केरल ने 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का रिजर्व तैयार किया है। इसे और बढ़ा कर 1000 मीट्रिक टन किए जाने का लक्ष्य है।

केरल की स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा ने बताया कि Covid-19 से संक्रमित और सामान्य मरीजों के लिए ऑक्सीजन के वितरण के बाद राज्य में 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रिजर्व स्टॉक में है। ऑक्सीजन की उपलब्धता की समीक्षा करने के लिए बुलाई गई बैठक में यह निर्णय लिया गया कि 510 मीट्रिक टन ऑक्सीजन रिजर्व को बढ़ा कर 1000 मीट्रिक टन तक किया जाना चाहिए।

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स से एक लाख ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर खरीदने के लिए फंड जारी करने की अनुमति दी थी। साथ ही 500 अतिरिक्त PSA ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए भी फंड जारी किया गया। इसके पहले ऐसे ही 713 PSA ऑक्सीजन प्लांट के लिए पीएम केयर्स से फंड जारी किया गया था।

4000+ लड़कियों के साथ हमबिस्तर होने के लिए खर्च किए ₹200 करोड़, 55 साल छोटी बीवी ने कर दी हत्या

जापान की एक महिला को उसके पति की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। 25 वर्षीय साकी सुडो पर आरोप है कि उन्होंने अपने करोड़पति पति कोसुके नोज़ाकि उर्फ़ ‘डॉन जुआन’ को ज़हर देकर मार डाला। 3 साल पहले हुई ये घटना जापान के वकायामा प्रीफेक्चर (Wakayama Prefecture) के सबसे बड़े शहर तनबे (Tanabe) की है। 2018 में हत्या से 3 महीने पहले ही साकी सुडो ने कोसुके से शादी की थी।

कोसुके अपनी पत्नी से 55 वर्ष बड़े थे। उन्होंने रियल एस्टेट कारोबार, कृषि और कर्ज देने के जरिए अकूत दौलत कमाई थी। उन्होंने फ़रवरी 2018 में सुडो से शादी की। उन्होंने खुद पर एक किताब भी लिख रखी थी। ‘डॉन जुआन’ का दावा था कि उन्होंने अपने जीवन में 4000 महिलाओं के साथ बिस्तर शेयर किया था। उन्होंने अपने दौलत कमाने के पीछे की वजह ‘आकर्षक महिलाओं को डेट करना’ बताया था।

पुलिस ने कहा है कि सुडो ने अपनी पति की हत्या के लिए उन्हें तीक्ष्ण विष दिया। उन्होंने सुडो से पूछा था, “क्या तुम मेरे जीवन की अंतिम महिला बननी चाहोगी?” तनबे में मई 2018 में सुडो ने दावा किया था कि उनके पति सोफे पर मृत मिले। इससे पहले पुलिसकर्मियों को संदेह था कि सुडो ने नोज़ाकि को ड्रग्स दिया था। बुधवार (अप्रैल 28, 2021) को पुलिस ने छापा मार कर सुडो को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने टोक्यो से उसे गिरफ्तार करने के बाद उसके गृह राज्य वकायामा लेकर गई, जहाँ वो अपने पति के साथ रहा करती थी। चूँकि कोसुके के शरीर पर सूई चुभोने का कोई निशान नहीं मिला, माना जा रहा है कि उन्हें ड्रिंक्स में मिला कर ज़हर दिया गया था। कोसुके ने अपनी आत्मकथा में दावा किया था कि उन्होंने 4000 महिलाओं को बिस्तर पर लाने के लिए 300 करोड़ येन (204.21 करोड़ रुपए) खर्च किए थे।

उन्होंने लिखा था, “मुझे लक्जरी कारों और घरों में कोई रुचि नहीं है। लेकिन, मेरे मन में हमेशा आकर्षक महिलाओं के साथ सेक्स करने की इच्छा मौजूद रहती है।” इस पुस्तक में उन्होंने बताया था कि यूनिवर्सिटी की छात्रों और फ्लाइट अटेंडेंट महिलाओं को कैसे आकर्षित करें। उन्होंने गरीबी में धातुओं के टुकड़े, कंडोम और शराब बेचने से कारोबार की शुरुआत की थी। वो अपने गृह शहर को 130 करोड़ येन (88.45 करोड़ रुपए) दान करना चाहते थे।

उनकी मौत के बाद आधी संपत्ति विधवा सुडो को ही जानी थी। ख़बरों में ये भी कहा गया है कि सुडो हत्या के दिन से पहले ऑनलाइन ड्रग्स के बारे में सर्च कर रही थी। पहले तो इसे प्राकृतिक मौत माना गया, लेकिन उनके शरीर में नारकोटिक्स की मात्रा मिलने के बाद पुलिस का शक बढ़ा क्योंकि वो ड्रग्स नहीं लेते थे। सुडो से उनकी मुलाकात टोक्यो के हेनेडा अस्पताल में हुई थी। सुडो मॉडल हुआ करती थी।

‘मैं व्हिसिल ब्लोअर’: मुंबई के पूर्व CP परमबीर सिंह की बॉम्बे HC से गुहार, महाराष्ट्र सरकार के एक्शन पर लगे रोक

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिशनर (CP) परमबीर सिंह ने गुरुवार को (अप्रैल 29, 2021) महाराष्ट्र सरकार के आदेश के ख़िलाफ़ बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपनी याचिका में सिंह ने उच्च न्यायालय से माँग उठाई कि कोर्ट महाराष्ट्र सरकार को उनके विरुद्ध एक्शन लेने से रोकें। मामले में आगे की सुनवाई 4 मई 2021 को होगी।

याचिका में परमबीर सिंह ने खुद को Whistle-blower बताते हुए प्रोटेक्शन की माँग की। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनके विरुद्ध शुरू की गई दो प्रारंभिक जाँच पर रोक लगाने की माँग की। ये आदेश राज्य सरकार ने इसी साल 1 अप्रैल और 20 अप्रैल को दिए थे।

याचिका में उन्होंने दोनों आदेशों का हवाला देकर राज्य सरकार पर आरोप लगाया है कि ये सब उन्हें निशाना बनाने और उन्हें प्रताड़ित करने के लिए किया जा रहा है। याचिका में कहा है कि उनके विरुद्ध राज्य सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 के खिलाफ़ है।

लाइव लॉ के अनुसार, याचिका में यह भी दावा किया गया है कि जब परमीबर सिंह 19 अप्रैल को महाराष्ट्र के डीजीपी संजय पांडे से मिले तो उन्होंने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लिखे गए पत्र को वापस लेने की ‘सलाह’ दी थी। इससे पहले बुधवार को परमबीर सिंह समेत कई अन्य पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध SC/ST एक्ट के तहत एफआईआर की थी।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद परमबीर सिंह ने सीएम उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा था। इसमें उस समय राज्य के गृहमंत्री रहे अनिल देशमुख पर निलंबित इंस्पेक्टर सचिन वाजे के जरिए वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि देशमुख ने वाजे को सौ करोड़ रुपए की वसूली का टारगेट दे रखा था। शुरुआत में टालमटोल के बाद बाद देशमुख को इन आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा था। पिछले दिनों सीबीआई ने इस मामले में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। वहीं वाजे इस समय एंटीलिया बम केस में एनआईए की गिरफ्त में है।

परमबीर सिंह की ओर से वकील ने क्या कहा?

सिंह की ओर से वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने न्यायाधीश एसएस शिंदे और मनीष पिटाले के सामने गुरुवार को पेश हुए। रोहतगी ने राज्य सरकार के दोनों आदेशों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 19 अप्रैल को सिंह जब डीजीपी से मिले तो उन्होंने उन्हें पत्र वापस लेने की सलाह दी।

रोहतगी के अनुसार, “पांडे ने सिंह से कहा कि वह तंत्र से इस तरह नहीं लड़ सकते और वही सरकार अब उनके (सिंह) के विरुद्ध तमाम आपराधिक मामलों में जाँच शुरू कर रही है। पांडे ने उन्हें सलाह दी थी कि वह सरकार को भेजा गया अपना पत्र वापस ले लें।”

रोहतगी के अनुसार राज्य सरकार सिर्फ़ मनगढंत शिकायतें सिंह के ख़िलाफ़ कर रही है। सिंह ने पांडे के साथ बातचीत को रिकॉर्ड कर उसकी कॉपी सीबीआई को भी दी है। रोहतगी ने बताया कि सरकार ने सिंह के खिलाफ प्रारंभिक जाँच शुरू करने के जो आदेश दिए हैं, वे स्पष्ट रूप से मनमाने ढंग से, पूरी तरह से अवैध, शून्य और निराधार हैं। बता दें कि इस केस में सरकारी अधिवक्ता दीपक ठाकरे ने प्रतिक्रिया देने के लिए समय माँगा।

अदालत ने क्या कहा?

रोहतगी की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने जानना चाहा कि क्या जाँच में अभी सिंह को कोई कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। अगर नहीं तो इतनी जल्दी क्या है। कोर्ट ने कहा, “हमें अंतरिम ऑर्डर जल्दबाजी में पास करने की क्या जरूरत। ये जाँच सर्विस रूल्स के उल्लंघन पर हो रही है। इसलिए ये सर्विस का विषय है। सरकार को याचिका में लगे आरोपों का जवाब देने दीजिए।”

विदेश मंत्रालय का भारतीय राजनयिकों को संदेश, नकारात्मक खबरों से दबाव में आए बिना दें अंतरराष्ट्रीय मीडिया के प्रोपेगेंडा को जवाब

महामारी की शुरुआत से ही भारत ने दुनिया भर के देशों की मदद की। पहले हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन और अन्य आवश्यक दवाओं का निर्यात करके और बाद में ‘वैक्सीन मैत्री’ के अंतर्गत दुनिया भर के कई देशों को वैक्सीन मुहैया करवा कर।

भारत के इन प्रयासों के बाद भी विश्व का मीडिया भारत के मुश्किल समय में ‘गिद्ध पत्रकारिता’ करने से बाज नहीं आ रहा है। ऐसे में विदेशी मामलों के मंत्री एस. जयशंकर ने राजनयिकों को यह संदेश दिया है कि वो अंतरराष्ट्रीय मीडिया की इस प्रकार की नकारात्मक खबरों से दबाव में न आएँ अपितु अपने कर्त्तव्य का पालन करें।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार एस. जयशंकर ने राजनयिकों को कहा है कि वो महामारी से निपटने में भारत की ‘असफलता’ का नैरेटिव गढ़ने वाली अंतरराष्ट्रीय मीडिया की खबरों को काउंटर करें।

हालाँकि ज्यादातर समय यही चर्चा हुई कि किस प्रकार भारत में कोरोनावायरस के संक्रमण की दूसरी लहर से लड़ने में विश्व के अन्य हिस्सों से उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किया जाए लेकिन यह मुद्दा भी उठाया गया कि किस प्रकार अंतरराष्ट्रीय मीडिया के पक्षपाती रवैये का सामना किया जाए। रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्री जयशंकर ने राजनयिकों को कहा कि मीडिया की इस प्रकार की नकारात्मक रिपोर्टिंग से हताश होने के स्थान पर उसका काउंटर किया जाए। 

भारत में कोरोनावायरस संक्रमण की दूसरी लहर के बीच भारत दुनिया भर की मीडिया के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। ये मीडिया हाउस हिन्दू रीति से जलाई जाने वाली चिताओं की तस्वीरों को दिखाकर अपने गैर-भारतीय दर्शकों अथवा पाठकों में रोमांच पैदा कर रहे हैं। विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त के द्वारा श्मशान से रिपोर्टिंग करने के बाद अब COVID-19 महामारी के कारण होने वाले मौतों के बाद दुखद अंतिम संस्कार की तस्वीरें, पश्चिमी मीडिया में धड़ल्ले से खरीदी और बेची जा रही हैं।

ब्रिटिश-अमेरिकी मीडिया कंपनी Getty Images ने अपनी वेबसाइट पर भारतीय अंतिम संस्कार की कई तस्वीरें लगा रखी हैं, जो उनकी वेबसाइट पर प्रकाशित होती हैं। इन तस्वीरों को दुनिया भर का कोई भी मीडिया समूह खरीद सकता है। ये तस्वीरें तीन साइज में उपलब्ध हैं जिनमें सबसे बड़ी साइज की तस्वीर की कीमत 23,000 रुपए है। हमने हाल ही में रायटर्स के द्वारा अपने होम पेज पर मात्र दो दिनों में ही भारत में जलती चिताओं पर 6 लेख और 7 तस्वीरें प्रकाशित करने पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब भारत अपने कठिन समय से गुजर रहा है तब कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया मंच जैसे न्यूयॉर्क टाइम्स, न्यूयॉर्क पोस्ट, अल-जजीरा, वाशिंगटन पोस्ट आदि ने गिद्ध पत्रकारिता करते हुए भय का माहौल बनाया और फेक न्यूज फैलाई जबकि पिछले साल जब अमेरिका अपने सबसे कठिन दौर में था तब भारतीय मीडिया ने उसका समर्थन किया था।

अप्रैल 2020 में न्यूयॉर्क, वुहान कोरोनावायरस से बुरी तरह से संक्रमित था। घरों से कचरे की तरह लाशें निकाल रही थीं। ये वो लोग थे जिन्हे टेस्ट कराने का अवसर भी नहीं मिला।

डेली बीस्ट ने उस समय लिखा था, “पहली बार गॉथमिस्ट द्वारा बताए गए आपातकालीन चिकित्सा सेवा के आंकड़ों से पता चलता है कि जिन व्यक्तियों की वायरस से मृत्यु होने की संभावना है और वो रिकॉर्ड में नहीं आए हैं, उनकी संख्या बड़े पैमाने पर हैं। अकेले मंगलवार को पांच नगरों में 256 लोगों को घर पर मृत घोषित कर दिया गया था। इस महीने तक न्यूयॉर्क शहर में लगभग 25 लोग अपने घरों में मृत पाए गए थे। यह बताया गया कि मंगलवार की अधिकांश कॉल महामारी से संबंधित थीं जो पहले ही राज्य भर में 5400 से अधिक लोगों को मार चुकी हैं और जिससे 140,386 से अधिक लोग संक्रमित हैं।”

रिपोर्ट में कहा गया कि न्यूयॉर्क सिटी फायर डिपार्टमेंट से प्राप्त आँकड़ों के अनुसार दो हफ्तों में औसतन 2192 ‘डेड ऑन अराइवल’ कॉल प्राप्त हुई थीं। जबकि डिपार्टमेंट ने पिछले साल में उसी समयान्तराल में मात्र 453 ऐसी कॉल प्राप्त की थी। इसके अलावा न्यूयॉर्क शहर में 45 रेफ्रीजरेटेड ट्रक स्टैन्डबाय मोड पर रखे गए थे जिससे लाशों को उनमें रखा जा सके और बाद में गिना जा सके।  

महामारी ने बिना किसी भेदभाव के दुनिया भर के देशों को अपना निशाना बनाया है। पश्चिमी देश भी जो भारत की आलोचना को अपना अधिकार मानते हैं, इस महामारी से अछूते नहीं रहे और उनकी मृत्यु दर भी कहीं अधिक रही। जहाँ भारत में 208,330 मौतें हुईं वहीं अमेरिका में 589,207 मौतें दर्ज की गईं। महामारी शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका में 33 मिलियन लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि भारत में यह सँख्या 18 मिलियन ही है जबकि दोनों देशों की जनसँख्या में बहुत बड़ा अंतर है। भारत में महामारी की मृत्यु दर 1% है जबकि अमेरिका में यह 2% है।  

अतः पश्चिमी मीडिया को भारत में कोविड-19 की रिपोर्टिंग पर नैतिकता और धैर्य का परिचय देना चाहिए। इस विषय में विदेश मंत्री एस. जयशंकर का बयान भी मायने रखता है जब वह कहते हैं कि मीडिया के द्वारा भारत के विषय में चलाए जा रहे प्रोपेगंडा से निराश होने के बजाय उसका सामना करना होगा और उसका काउंटर भी किया जाना चाहिए।

नहीं रहीं ‘शूटर दादी’ चंद्रो तोमर, मेरठ के अस्पताल में हुआ निधन: कोरोना से संक्रमित थीं

‘शूटर दादी’ के नाम से जानी जाने वाली चंद्रो तोमर का निधन हो गया है। वो कोरोना वायरस से संक्रमित थीं। 89 वर्षीय दादी चंद्रो तोमर ने देश-विदेश में कई शूटिंग प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन किया था। ‘शूटर दादी’ चंद्रों तोमर का निधन मेरठ के एक अस्पताल में हुआ, जहाँ कोरोना संक्रमित होने के बाद उनका इलाज चल रहा था। वो उत्तर प्रदेश के बागपत की रहने वाली थीं। उनके ट्विटर पेज से उनके निधन की पुष्टि की गई।

दादी चंद्रों तोमर सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से जुड़ी रहती थीं और सभी उनके हुनर के साथ-साथ उनकी खुशमिजाजी के भी कायल थे। उनके ऊपर ‘साँड की आँख’ नामक फिल्म भी बन चुकी है, जिसमें उनका किरदार अभिनेत्री भूमि पेड़नेकर ने निभाया था। दादी चंद्रों तोमर ने अपनी सफलता का श्रेय घर में किए जाने वाले रोजमर्रा के कार्यों को दिया था, जैसे – हाथ से गेहूँ पीसना, गायों का दूध दूहना और घास काटना।

दादी चंद्रो तोमर के 5 बेटे-बेटियाँ और 12 पोते-पोतियाँ हैं। उनकी पोती शेफाली को शूटिंग सीखनी थी, तभी से उन पर भी शूटर बनने का जोश सवार हुआ। जोहरी राइफल क्लब में लड़कों की संख्या अधिक होने के कारण जब उनकी पोती शरमा रही थी, तब उन्होंने उसे ढाँढस बँधाने के लिए बंदूक हाथ में थामी थी। उनकी भतीजी सीमा तोमर भी शूटर है और राइफल एंड पिस्टल वर्ल्ड कप 2010 में ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।

रोहित सरदाना ने गालीबाज ट्रोल शौकत अली को दिया था जवाब तो पीछे पड़ गई थी AltNews गैंग

वरिष्ठ पत्रकार और ‘आजतक’ के लोकप्रिय एंकर रोहित सरदाना की शुक्रवार (30 अप्रैल 2021) को हर्ट अटैक से मृत्यु हो गई। वे कोरोना से भी संक्रमित थे। उनके निधन से हर कोई स्तब्ध है। हालाँकि कट्टरपंथी और मीडिया गैंग से जुड़े कई लोग उनके निधन का जश्न मनाते भी दिखे हैं। इनमें ‘न्यूजलॉन्ड्री’ का कॉलमनिस्ट शरजील उस्मानी, खुद को ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ का संवाददाता बताने वाला मोहम्मद इबरार, ‘द प्रिंट’ की स्तंभकार जैनब सिकंदर जैसे नाम शामिल हैं।

बेबाकी से अपनी बात रखने वाले सरदाना के लिए मीडिया गिरोह और कट्टरपंथियों की यह घृणा नई नहीं है। ऐसा ही एक वाकया दिसंबर 2020 में तब देखने को मिला था, जब एक गालीबाज ट्रोल को तीखा जवाब देने पर इनलोगों ने सरदाना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उस वक्त ‘ऑल्टन्यूज’ का सह संस्थापक प्रतीक सिन्हा इसका अगुआ था। उसने ट्रोल शौकत अली की तरफ से विक्टिम कार्ड खेलते हुए ‘आजतक’ के फाउंडर अरुण पुरी और न्यूज डायरेक्टर राहुल कंवल को ट्विटर पर टैग कर सरदाना की शिकायत की थी।

असल में सवाल-जवाब के एक लाइव सेशन में ट्रोल शौकत अली ने सरदाना से पूछा था, “अगर आप ऐसा सोचते हैं कि किसान आंदोलन में प्रदर्शन करने वाले लोग खालिस्तानी हैं तो ‘आपके नेता’ मोदी उन सभी को जेल में क्यों नहीं डाल देते हैं?” इसके जवाब में उन्होंने कहा था, “देखिये! सबसे पहली बात मोदी जी आपके भी नेता हैं। अगर नहीं हैं तो आप पतली गली लेकर निकल लें उधर।”

सरदाना के इस जवाब में कोई धार्मिक पहलू नहीं था। लेकिन लिबरलों ने इसे मजहब से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर रोहित सरदाना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। प्रतीक सिन्हा ने अरुण पुरी और राहुल कंवल को टैग करते हुए ट्विटर पर पूछा था कि उन्होंने सरदाना पर इसके लिए क्या कार्रवाई की। सिन्हा ने दावा किया था कि सवाल पूछने वाला मुस्लिम था, इसलिए सरदाना ने कहा कि तुम्हारे को छूट दी थी देश विरोधी नारे लगाने की।

‘ऑल्टन्यूज’ के दूसरे सह संस्थापक मोहम्मद जुबैर ने भी सरदाना पर कार्रवाई की मॉंग करते हुए कहा था कि उसे अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने की छूट दी गई है।

उस वक्त हमने जब शौकत अली का प्रोफाइल खॅंगाला था तो पता चला था कि यह पहला मौका नहीं था जब उसे सरदाना ने जवाब दिया था। अक्टूबर 2018 में भी उन्होंने इसी ट्रोल के नफ़रत और अभद्रता से भरे ट्वीट का जवाब दिया था। इसके बाद शौकत अली ने सोशल मीडिया पर सरदाना को लेकर तमाम अपमानजनक ट्वीट किए। ऐसे ही एक ट्वीट में उसने हिन्दूफ़ोबिक ‘गौमूत्र’ अपशब्द का इस्तेमाल किया था, जिस तरह पुलवामा के आतंकवादियों ने किया था।

रोहित सरदाना का निधन, ‘आज तक’ और सदमा: सवा 2 घंटे तक नहीं लिख पाए अपने साथी पत्रकार की खबर

‘आज तक’ के पत्रकार रोहित सरदाना का शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) को हृदयाघात के कारण निधन हो गया। वो कोरोना वायरस से संक्रमित थे। वो अपने पीछे अपनी पत्नी और दो बेटियों को छोड़ गए हैं। उनकी उम्र 41 वर्ष थी। हैरानी की बात ये है कि ‘सबसे तेज़’ चैनल को अपने पत्रकार के निधन की खबर को अपनी वेबसाइट पर डालने में पूरे 2 घंटे 16 मिनट लग गए। शायद आज तक के सब के सब कर्मचारी रोहित सरदाना के निधन को लेकर दुख और शॉक में रहे होंगे।

सोशल मीडिया पर दोपहर के 12:27 बजे ‘ज़ी न्यूज़’ के मुख्य संपादक एवं CEO सुधीर चौधरी ने अपने क्राइम एडिटर जितेंद्र शर्मा के हवाले से इस दुःखद सूचना को शेयर किया। पूरे न्यूज रूम में दुख और शॉक इतना रहा होगा कि इसके 2 घंटे 16 मिनट बाद दोपहर के 2:43 में ‘आज तक’ ने अपने पत्रकार के निधन की खबर प्रकाशित की। 43 लाख ट्विटर फॉलोवर्स और 9.15 लाख फेसबुक फॉलोवर्स वाले रोहित सरदाना सोशल मीडिया के लोकप्रिय पत्रकारों में से एक थे।

आज तक के अलावा बाकी ऐसे वेबसाइट जिनसे रोहित सरदाना डायरेक्ट नहीं जुड़े थे, जैसे ‘लाइव हिंदुस्तान’ ने कुछ ही मिनट बाद इस खबर को अपने होमपेज पर शेयर कर डाली। यहाँ तक कि NBT पर भी ये खबर अगले एक घंटे के भीतर ही आ गई थी। लेकिन, डेढ़ बजे के करीब ‘आज तक’ चैनल का हमने जो स्क्रीनशॉट लिया, उसमें कहीं भी आपको रोहित सरदाना के निधन की खबर नहीं दिखेगी – इससे आप पूरे चैनल और रोहित सरदाना से सबके मित्रवत रिश्ते को समझ सकते हैं। उसी समय के आसपास ‘अमर उजाला’, ‘जनसत्ता’, ‘ज़ी न्यूज़’ और ‘ABP न्यूज़’ पर ये खबर आ गई थी।

रोहित सरदाना के निधन की खबर अधिकतर खबरिया वेबसाइटों पर डेढ़ बजे के आसपास मौजूद थी, उदाहरण देखिए:

लाइव हिंदुस्तान का हो होमपेज
NBT का होमपेज
ABP न्यूज़ का होमपेज
‘अमर उजाला’ का होमपेज
‘जनसत्ता’ के होमपेज पर भी थी रोहित सरदाना के निधन की खबर
‘ज़ी न्यूज़’, जहाँ पहले काम कर चुके थे रोहित सरदाना

1:30 बजे के आसपास ‘आज तक’, ‘इंडिया टुडे’ और ‘आज तक’ लाइव चैनल पर रोहित सरदाना के निधन की खबर नहीं थी। ट्विटर पर सूचना मिलते ही लोगों ने चैनल खोला, ताकि इस सम्बन्ध में और अधिक जानकारी मिले। लेकिन, उन्हें तब निराशा हाथ लगी – शायद वो नहीं समझ सके कि रोहित सरदाना की मौत की खबर छापना आज तक न्यूज रूम के किसी पत्रकार साथी के लिए आम बात नहीं थी।

‘आज तक’ पर भी तब नहीं थी रोहित सरदाना के निधन की खबर
‘आज तक’ के सिस्टर चैनल ‘इंडिया टुडे’ ने भी इस खबर को दोपहर 3 बजे से पहले नहीं प्रकाशित किया था
आज तक के लल्लनटॉप पर भी चुप्पी

सोशल मीडिया पर लोग लगातार ‘आज तक’ को टैग कर के पूछ रहे थे कि वो रोहित सरदाना के निधन की खबर क्यों नहीं प्रकाशित कर रहा है? देश-दुनिया की ख़बरें सबसे तेज़ देने वाले चैनल ने अपने ही पत्रकार के निधन की खबर दिखाने में आखिरकार इतनी देरी क्यों की? – लेकिन सोशल मीडिया के ऐसे लोग शायद खबरों से परे मानवीय पक्षों को समझने में चूक कर रहे थे।

अडानी का केयर सेंटर, रिलायंस का 1000 बेड वाला अस्पताल, सचिन तेंदुलकर के 1 करोड़… ऐसे हो रही कोरोना मरीजों की मदद

कोरोना वायरस की मार झेल रहे मरीजों की मदद के लिए अडानी ग्रुप, रिलायंस ग्रुप और सचिन तेंदुलकर आगे आए हैं। अडानी ग्रुप जहाँ गुजरात में एक कोविड केयर सेंटर खोलेगा तो वहीं रिलांयस समूह जामनगर में कोविड मरीजों की मदद के लिए 1000 बेड का अस्पताल खोलेगा। वहीं महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने कोविड के खिलाफ लड़ाई में एक करोड़ रुपये दान देने का ऐलान किया है।

अडानी ग्रुप नेशुक्रवार (30 अप्रैल) को जारी अपने बयान में अहमदाबाद में कोविड केयर सेंटर खोले जाने की जानकारी दी। अडानी ग्रुप ने अपने बयान में कहा, ‘(कोरोना) वायरस के खिलाफ लड़ाई में समर्थन के लिए अडानी ग्रुप अहमदाबाद (गुजरात) में एक कोविड केयर सेंटर खोलेगा। शहर में स्थित अडानी विद्या मंडिर स्कूल कैंपस को कोविड पॉजिटिव मरीजों के लिए सुविधा केंद्र में बदला जाएगा।

इसके पहले अडानी ग्रुप ने नोएडा में कोरोना मरीजों की मदद करते हुए 300 डी-टाइप ऑक्सीजन सिलेंडर देने की घोषणा की थी। इनमें से 100 के करीब सिलेंडर नोएडा में पहुँच गए हैं।

कोरोना मरीजों की मदद को आएगे आए सचिन, दान किए एक करोड़ रुपये

वहीं, महान क्रिकेट सचिन तेंदुलकर ने गुरुवार (29 अप्रैल 2021) को कोरोना मरीजों के लिए मदद का हाथ बढ़ाते हुए एक करोड़ रुपए दान किए हैं। सचिन ने एक ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी।

देश कोरोना संकट के दौरान ऑक्सीजन की कमी से भी जूझता रहा है। ऐसे में 250 युवा उद्यमियों ने ऑक्सीजन कनसंट्रेटर्स मशीन आयात करके इसे देश भर के अस्पतालों को दान करने के लिए ‘मिशन ऑक्सीजन’ लॉन्च किया है। सचिन ने कहा कि उन्हें ‘मिशन ऑक्सीजन’ से जुड़े इन युवा उद्यमियों की मदद करके खुशी हो रही है।

पिछले साल भी कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान भी सचिन ने मदद का हाथ आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री राहत कोष और महाराष्ट्र के मख्यमंत्री राहत कोष में 25-25 लाख रुपए की राशि प्रदान की थी।

बीते दिनों कोरोना के शिकार हुए सचिन ने ट्वीट कर कहा, ”मेरे खेल जीवन के दौरान आपका सहयोग अमूल्य था। इसी सहयोग और समर्थन की वजह से मैं यश प्राप्त कर सका। आज मेरे लिए आपकी इस कोरोना के खिलाफ लड़ाई में पूरी मजबूती से खड़े रहने और साथ देने का वक्त आया है।”

रिलायंस फाउंडेशन जामनगर में बनाएगा 1000 बिस्तरों वाला कोविड केयर सेंटर

इसके अलावा रिलायंस फाउंडेशन ने घोषणा की है कि वह गुजरात के जामनगर में 1000 बिस्तरों का कोविड केयर सेंटर बनाएगा। सभी बिस्तरों पर ऑक्सीजन उपलब्ध होगी। मरीजों को सभी सेवाएँ मुफ्त में दी जाएँगी। सुविधाओं को स्थापित करने और चलाने की पूरी लागत रिलायंस वहन करेगा।

रिलायंस के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर जामनगर के सरकारी डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में 400 बेड का कोविड केयर सेंटर शुरू हो जाएगा। इसके बाद अगले दो सप्ताह में जामनगर में ही एक अन्य स्थान पर 600 बेड का एक अन्य कोविड केयर सेंटर चालू किया जाएगा।

रिलायंस फाउंडेशन की संस्थापक और चेयरपर्सन नीता अंबानी ने कहा, “भारत कोविड की दूसरी लहर से लड़ रहा है और हम हर तरह से मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस वक्त स्वास्थ्य सुविधाओं की सबसे ज्यादा जरूरत है। हम गुजरात के जामनगर में कोरोना रोगियों के लिए ऑक्सीजन की उपलब्धता वाले 1000 बिस्तरों वाला अस्पताल बनवाएँगे। 400 बेड का पहला सेंटर एक सप्ताह के भीतर तैयार हो जाएगा और दूसरे सप्ताह में 600 बेड वाले सेंटर का काम शुरू हो जाएगा।”

नीता अंबानी ने आगे कहा कि यह अस्पताल मरीजों का मुफ्त में बेहतरीन इलाज करेगा। महामारी की शुरुआत से ही रिलायंस फाउंडेशन सभी भारतीयों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। अनमोल जीवन बचाने के लिए हमारे अथक प्रयास जारी रहेंगे। साथ मिलकर हम कोरोना को हरा सकते हैं और हम इस लड़ाई को जीतेंगे।

देश में शुक्रवार (30 अप्रैल, 2021) कोरोना वायरस के अब तक के सर्वाधिक 3,86,452 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 1,87,62,976 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा शुक्रवार सुबह 8 बजे अपडेट किए गए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में 3498 कोरोना मरीजों की मौत हुई, जिससे संक्रमण के कारण अब तक दम तोड़ चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,08,330 हो गई।