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गुजरात के भरूच में कोविड अस्पताल में लगी भीषण आग: 18 लोगों की मौत, कई घायल

गुजरात के भरूच में एक कोविड 19 अस्पताल में आग लग गई। इस घटना में 18 लोगों की मौत हुई है। घटना के बाद मरीजों को यहाँ से दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं लगा है। बताया जा रहा है कि आग शुक्रवार (अप्रैल 30, 2021) देर रात 12:30 बजे के आसपास लगी।

इस घटना में कई मरीज घायल भी हुए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियाँ आग बुझाने पहुँच गईं। पटेल वेलफेयर अस्पताल की पहली मंजिल में कोरोना मरीजों के लिए कोविड केयर सेंटर बनाया गया था।

भरूच के एसपी राजेंद्र सिंह चुडासमा ने बताया कि आईसीयू में शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी। एक पुलिस अधिकारी ने पीटीआई को बताया, “सुबह 6.30 बजे की सूचना के अनुसार, त्रासदी में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है। आग लगने के तुरंत बाद, हमने 12 लोगों की मौत की पुष्टि की थी।” 

जानकारी के मुताबिक, चार मंजिला यह अस्पताल भरूच-जंबूसर हाईवे पर स्थित है। इसे एक ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाता है। फायर ऑफिसर शैलेश संसिया ने बताया कि अस्पताल की पहली मंजिल पर कोविड वार्ड बनाया गया था। एक घंटे के भीतर आग पर काबू पा लिया गया। साथ ही, फायर फाइटर्स और स्थानीय लोगों की मदद से करीब 50 लोगों को बचा लिया गया और उन्हें दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मृतकों में 14 मरीज और 2 नर्स शामिल हैं, वहीं अन्य मृतकों के बारे में फिलहाल जानकारी नहीं मिल पाई है। जिस समय अस्पताल में आग लगी उस वक्‍त वहाँ पर 70 मरीज भर्ती थे, जिसमें से 24 मरीज आईसीयू में एडमिट थे। मौके पर पहुँचे अधिकारियों का कहना है कि अस्‍पताल की जाँच की जा रही है। मृतकों की संख्‍या बढ़ भी सकती है।

Covid-19 से लड़ाई में अब ‘गब्बर’ का भी साथ: पंजाब किंग्स और राजस्थान रॉयल्स ने भी दिया योगदान

भारत में कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच कई देशों ने सहायता का हाथ आगे बढ़ाया है। विभिन्न देशों से वेंटीलेटर, ऑक्सीजन के उपकरण और दवाएँ भारत भेजी जा रही हैं। इन सब के बीच क्रिकेट के कई खिलाड़ी भी इस महामारी में मदद के लिए आगे आ रहे हैं। सचिन तेंदुलकर, ब्रेट ली और पैट कमिंस के बाद अब शिखर धवन, वेस्टइंडीज के बल्लेबाज निकोलस पूरन और आईपीएल की टीम पंजाब किंग्स ने Covid-19 संक्रमण से लड़ने में अपने हिस्से का योगदान देने का निर्णय लिया है।

भारत के सलामी बल्लेबाज शिखर धवन ने ट्विटर के माध्यम से यह सूचना दी कि वह ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए 20 लाख रुपए का दान देंगे और साथ ही आगामी मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने पर उन्हें जो भी नकद पुरस्कार मिलेगा, वह भी मिशन ऑक्सीजन के जरिए दान में दिया जाएगा।

धवन ने लिखा, “वर्षों से मुझे इस देश के लोगों से बहुत प्यार और सहयोग प्राप्त हुआ। इसके लिए मैं हृदय से शुक्रगुजार हूँ। अब मेरी बारी है कि मैं इस देश के लोगों की मदद के लिए कुछ करूँ।“

साथ ही धवन ने फ्रंटलाइन वर्कर्स का भी धन्यवाद किया और लोगों को कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करने की सलाह दी।

शिखर धवन के अलावा वेस्टइंडीज के बाएँ हाथ के बल्लेबाज निकोलस पूरन ने भी चाइनीज कोरोना वायरस के संक्रमण से लड़ने में भारत को मदद देने की इच्छा जताई है। ट्विटर के माध्यम से निकोलस पूरन ने इसकी जानकारी दी।

पूरन ने कहा कि कई देश इस महामारी से जूझ रहे हैं लेकिन वर्तमान में भारत में यह समस्या गंभीर है। उन्होंने कहा कि वह अपने योगदान के रूप में आईपीएल के वेतन का एक भाग अवेयरनेस और वित्तीय सहायता के रूप में देना चाहते हैं। निकोलस पूरन आईपीएल में पंजाब किंग्स का हिस्सा हैं।

आईपीएल टीम की बात करें तो पंजाब किंग्स ने भी Covid-19 के संक्रमण से लड़ने के लिए अपना योगदान देने की बात कही है। पंजाब किंग्स ने अपने अधिकारिक ट्विटर एकाउंट से ट्वीट करके बताया कि टीम, राउंड टेबल इंडिया नाम के संगठन के माध्यम से ऑक्सीजन कॉन्संट्रेटर के लिए सहायता उपलब्ध कराएगी।

इसके अलावा आईपीएल टीम राजस्थान रॉयल्स और दिल्ली कैपिटल्स भी कोरोना वायरस संक्रमण से लड़ने के लिए सहायता उपलब्ध कराने की बात कर चुके हैं। राजस्थान रॉयल्स जहाँ 7.5 करोड़ रुपए दान में देगी, वहीं दिल्ली कैपिटल्स 1.5 करोड़ रुपए दान में देने की घोषणा कर चुकी है। इसके अलावा राजस्थान रॉयल्स के तेज गेंदबाज जयदेव उनादकट ने अपने आईपीएल वेतन का 10% हिस्सा दान में देने का निर्णय किया है।  

11 साल की रेहाना को अब्बा ने कमरे में भूख से तड़पा कर मार डाला, चुपचाप दफना कर फरार

महाराष्ट्र के जलगाँव से 11 वर्षीय एक बच्ची की मौत का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बच्ची की मौत भूख से तड़प कर हुई। पड़ताल में पता चला कि रेहाना नाम की इस बच्ची की मौत से पहले उसके पिता ने उसे कमरे में कई दिन बिना खाना-पीना दिए बंद रखा और बाद में मौत हो जाने पर चुपचाप दफना भी दिया।

पूरा मामला रजा कॉलोनी का है। इस संबंध में रेहाना के चाचा ने पुलिस के पास शिकायत लिखवाई। नवभारत टाइम्स के मुताबिक, लड़की के चाचा को अपने भाई पर पहले संदेह हुआ और तभी उन्होंने पुलिस स्टेशन जाकर इसकी जानकारी दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जाँच की तो मालूम चला कि जावेद और उसकी बीवी फरार हैं।

अपनी जाँच के बाद पुलिस ने तहसीलदार की मौजूदगी में बच्ची के शव को जमीन से निकाला और पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। रिपोर्ट में पता चला कि बच्ची की मृत्यु भूख के कारण हुई। सच्चाई सामने आने के बाद पुलिस आरोपितों की तलाश में है। वहीं आसपास के लोगों को यकीन नहीं हो रहा कि ऐसी घटना उनके पड़ोस में घटी है।

गौरतलब है कि लड़कियों और महिलाओं को अपशकुन मानकर उनके साथ ऐसे अत्याचार लंबे समय से होते आए हैं। अभी कुछ दिन पहले ऐसी घटना मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई थी। वहाँ एक फैसल इकबाल नाम के युवक ने अपनी बीवी को अपशकुन मानकर तीन तलाक दे दिया था।

पुलिस ने बताया था कि महिला का पति उसे मनहूस व अपशकुन बता कर उसे प्रताड़ित करता था, इस पर उनका अक्सर विवाद भी होता था। पुलिस के मुताबिक, निकाह के समय लड़के की माँ का इंतकाल हो गया था। यही कारण था कि वह अपनी पत्नी को मनहूस कहता था। जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसके साथ अभद्रता हुई। बाद में झगड़े होने लगे। 14 मार्च को फैसल ने गुस्से में तीन तलाक दे दिया। 

कोविड संकट में IIT बॉम्बे का कमाल: नाइट्रोजन जनरेटर से ऑक्सीजन पैदा, खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट का मात्र 15%

Covid-19 के संक्रमण की दूसरी लहर ने देश में चिंता का माहौल बना दिया है। विभिन्न राज्यों में स्वास्थ्य सुविधाओं पर भारी दबाव या रहा है लेकिन संक्रमित मरीजों के लिए अति आवश्यक ऑक्सीजन की कमी प्रमुख चिंता का विषय है। इस कमी से निपटने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं। इन्हीं प्रयासों में एक नाम आईआईटी बॉम्बे का भी जुड़ गया है। देश में मेडिकल ऑक्सीजन की कमी से निपटने के लिए आईआईटी बॉम्बे ने एक समाधान दिया है। यह समाधान है नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने का।

भारत के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों में से एक आईआईटी बॉम्बे के शोध एवं विकास (R&D) के डीन मिलिंद आत्रेय के नेतृत्व में तकनीकी संस्थान ने नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया। संस्थान के अनुसार वर्तमान ऑक्सीजन संकट के लिए यह एक सरल एवं तीव्र प्रक्रिया है। संस्थान ने सरकारी प्राधिकरणों, एनजीओ और निजी कंपनियों को साथ आने का अनुरोध किया है जिससे इस तकनीकि पर कार्य किया जा सके।

क्या है प्रक्रिया

आईआईटी बॉम्बे के द्वारा बताया गया कि विभिन्न उद्योगों में स्थित नाइट्रोजन प्लांट वातावरण से ही नाइट्रोजन ग्रहण करते हैं। इन नाइट्रोजन प्लांट्स को ऑक्सीजन जनरेटर में बदला जा सकता है। इस प्रक्रिया में मात्र मॉलेक्युलर फिल्टर्स में बदलाव किया जाता है। इसके लिए प्रेशर स्विंग एडसॉरप्शन (PSA) नाइट्रोजन प्लांट्स के मॉलेक्युलर फिल्टर्स में उपस्थित कार्बन के स्थान पर जिओलाइट का उपयोग किया जाता है, जिससे PSA नाइट्रोजन प्लांट PSA ऑक्सीजन प्लांट में बदल जाता है।

संस्थान की विज्ञप्ति में कहा गया है कि इस पूरे प्रयोग के लिए मात्र 3 दिन में ही सेटअप को स्थापित किया गया, जो नए ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने में लगने वाले समय की तुलना में काफी कम है। इस सेटअप से 3.5 एटमॉस्फेरिक प्रेशर पर ऑक्सीजन का उत्पादन हो सकता है, जिसकी शुद्धता 93-96 फीसदी होती है। इस गैसीय ऑक्सीजन का उपयोग कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के लिए किया जा सकता है। नाइट्रोजन जनरेटर को ऑक्सीजन जनरेटर में बदलने की प्रक्रिया में लगने वाला खर्च नए ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना में लगने वाले खर्च का मात्र 10-15 फीसदी है।  

आईआईटी बॉम्बे के साथ इस प्रयोग में टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स लिमिटेड (TCE) ने भी अपना योगदान दिया।  

‘बेशर्म भाई, गर्ल गैंग… पार्टी कर चुकी’ – मास्क पर ज्ञान देने आईं करीना कपूर खान को लोगों ने किया ट्रोल

देश भर में कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज हो रखी है। ऐसे में कई बॉलीवुड कलाकार हैं, जो सोशल मीडिया पर अपने फॉलोवर्स से कोविड प्रोटोकॉल्स को फॉलो करने की अपील कर रहे हैं। करीना भी उन्हीं कलाकारों की सूची में शामिल एक नाम हैं। 

हाल में उन्होंने एक पोस्ट किया। इसमें उन्होंने मास्क सही से न पहनने वालों पर अपना गुस्सा दिखाया। करीना ने लिखा,

“इस बात की कल्पना करना मेरे लिए मुश्किल है कि अब भी न जाने कितने लोग हैं जो देश की स्थिति को नहीं समझ रहे। अगली बार आप बाहर निकलें या मास्क को चिन से नीचे पहनें या नियम का उल्लंघन करें तो पहले डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के बारे में सोचें। वे मानसिक और शारीरिक रूप से टूटने लगे हैं। जो कोई भी ये पढ़ रहा है वो इस चेन को तोड़ने के लिए उत्तरदायी है। अब और नहीं। भारत को आपकी जरूरत है।”

करीना का यह पोस्ट दो दिन पहले उनके इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था। कई लोग इस पोस्ट पर करीना की प्रशंसा करने लगे लेकिन कुछ ने उनसे सवाल भी किया है कि आखिर वो ये सब बात अपने कजन (चचेरे भाई) को क्यों नहीं समझातीं।

एक यूजर ने कहा, “ये सेलेब्रिटियों पर भी लागू है, जो बेशर्मों की तरह छुट्टियों पर जा रहे हैं। उन तक भी अपनी बात पहुँचाओ।”

ट्रुशा नाम की यूजर ने कहा, “यही बात अपने कजन को भी समझाओ जो मालदीव में एक हफ्ते पहले तक छुट्टी मना रहा था।”

सायरा कादरी ने करीना का मजाक उड़ाते हुए पूछा कि क्या तुम अपनी गर्ल गैंग के साथ हो? और अपनी पार्टी कर चुकी हो?

स्नेहा ने कहा, “इतना बड़ा पोस्ट लिखने से बेहतर था कि आप ऑक्सीजन देश को डोनेट करतीं, वो ज्यादा मददगार साबित होता।”

प्रज्ञा तिवारी ने कहा, “अपनी गर्ल गैंग और भाई रणबीर को समझा लो, वही मालदीव में घूम रहे थे।”

एक यूजर ने पूछा कि आखिर तुम और तुम्हारा पति इस संकट के समय में देश के लिए क्या कर रहे हो? सिर्फ़ नसीहत दे रहे हो। दूसरे ने पूछा, “करीना तुम लोग बेड और ऑक्सीजन खऱीदकर भारत के अस्पतालों को क्यों नहीं दे देते।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कोरोना संक्रमण से रिकवर होने के बाद करीना कपूर खान के चचेरे भाई रणबीर कपूर और महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट मालदीव के लिए निकले थे। उनकी कोरोना काल में एयरपोर्ट से फोटो भी सामने आई थी। उसे देखने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के अलग-अलग रिएक्शन आए। कुछ यूजर्स ने उन्हें दुत्कारा तो कुछ उनके हीरो हिरोइन होने पर सवाल खड़े करने लगे।

हिंदू मंदिरों ने कोरोना संकट में लाखों-करोड़ों का किया दान: कहीं कोविड सेंटर की व्यवस्था, कहीं हुआ खाने का इंतजाम

कोरोना महामारी से आज पूरा भारत त्रस्त हो रखा है। हर जगह स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी के कारण मौत की खबरें आ रही हैं। लोग एक राज्य से दूसरे राज्य मदद के लिए भाग रहे हैं। कहीं दवाइयों की किल्लत है तो कहीं ऑक्सीजन की।

ऐसी विकट स्थिति में केवल केंद्र या राज्य सरकारें ही महामारी से निपटने के लिए योजना नहीं बना रहीं बल्कि कई अन्य संस्थान भी अपने बूते पीड़ितों की मदद करने में लगे हैं। इसी क्रम में अलग-अलग राज्यों के विभिन्न मंदिर कोरोना संक्रमितों की सहायता के लिए आगे आए हैं। किसी ने दान पेटी देकर मदद की, तो किसी ने मंदिर परिसर को कोविड सेंटर बना दिया।

इससे पहले हम उन मंदिरों की सूची आज आपके सामने रखें, एक बात ये ध्यान रखने वाली है कि सामान्य दिनों में इन्हीं मंदिरों को वामपंथी अपने निशाने पर लेते हैं। यहाँ होने वाले धर्म-कर्म के पाठ पर आपत्ति उठाते हैं। इन्हें मिलने वाले दान पर सवाल करते हैं। लेकिन जब संकट की घड़ी आती है, तब यही मंदिर निःस्वार्थ भाव के साथ जनता की मदद को आगे आ जाते हैं। 

आइए जानें उन मंदिरों के नाम, जो इस संकट की घड़ी में वाकई संकटमोचक की भूमिका में आगे बढ़ कर आए :

पटना का महावीर मंदिर: कोरोना संकट में पटना जंक्शन पर स्थित महावीर मंदिर संक्रमितों को मुफ्त में ऑक्सीजन मुहैया कराने के लिए आगे आया है। आज से यानी 30 अप्रैल से यहाँ ऑक्सीजन वितरण का काम ऑनलाइन शुरू हुआ है। पिछले साल भी महावीर मंदिर ने कोरोना संक्रमण के बीच आमजन तक मदद पहुँचाई थी।

मुंबई में जैन समुदाय का मंदिर: हाल में मुंबई स्थित जैन समुदाय मंदिर को कोविड 19 सेंटर में परिवर्तित किया गया। यहाँ 100 बिस्तर वाले पैथोलॉजी लैब बनाए गए। पिछले साल इसी मंदिर के कोविड सेंटर में बदलने के बाद 2000 से अधिक मरीजों का यहाँ इलाज हुआ था।

मुंबई का श्री स्वामी नारायण मंदिर: मुंबई की बिगड़ती स्थिति देखते हुए इस मंदिर को कुछ समय पहले कोविड अस्पताल में तब्दील किया गया। मंदिर प्रमुख ने आश्वस्त किया कि यहाँ उपचार का ध्यान मंदिर समिति द्वारा रखा जाएगा।

महाराष्ट्र का संत गजानन मंदिर: प्रदेश में बुलढाणा जिले के शेगाँव में स्थित संत गजानन महाराज मंदिर, राज्य के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में से एक है। यहाँ कोरोना संदिग्धों और रोगियों के लिए 500-500 बेड के अलग-अलग आइसोलेशन परिसर बनाए हैं। इसमें एक सामुदायिक रसोई है जो 2,000 लोगों के लिए खाना तैयार करती है। ये खाना सबको मुफ्त में दिया जाता है। 

वडोडरा का स्वामी नारायण मंदिर: कोरोना मरीजों के लिए मंदिर में 500 बेड का इंतजाम किया गया है। वहाँ के सारे साधू-संत मरीजों की सेवा में जुटे हैं। मंदिर प्रशासन ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर कोविड बेड संख्या बढ़ा दी जाएगी।

वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर: मंदिर प्रशासन ने ऐलान किया है कि कोरोना संक्रमित लोगों को दवाएँ वितरित की जाएँगी। इसका लाभ कम आय वाले वर्ग को मिलेगा। मंदिर प्रशासन ने इस पर बजट जारी कर दिया है। पहले चरण में 5 हजार दवाई की पोटली तैयार हैं। इसमें एक सुझाव पर्ची भी दी जा रही है।

पुरी का श्री जगन्नाथ मंदिर: मंदिर प्रशासन ने अपने नीलाचल भक्त निवास को कोविड-19 केयर सेंटर में परिवर्तित करने का निर्णय लिया है। 120 बिस्तरों वाली यह सुविधा कोरोना वायरस से संक्रमित मंदिर से जुड़े अधिकारियों के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में भी काम करेगी।

मुंबई के कांदिवली के पावन धाम मंदिर ने एक बार फिर अपनी चार मंजिला इमारत को 100 बेड से सुसज्जित कोविड-19 क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया है। 100 में से, 50 बेड एक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर यूनिट, ऑक्सीमीटर, पल्स मीटर, पोर्टेबल बीपी उपकरण, मॉनिटर मशीन से लैस है। इसके अतिरिक्त, 10 डॉक्टरों सहित 50 से अधिक चिकित्सा कर्मचारी सुविधा में तैनात हैं।

इस्कॉन मंदिर: इस्कॉन मंदिर की ओर से गर्भवती महिलाओं, घर में रह रहे बुजुर्ग, बच्चों व कोरोना मरीजों के लिए फ्री में खाने की व्यवस्था की जाएगी। मंदिर की ओर से इसके लिए स्पेशल किचन शुरू की गई है। एक कॉल पर मंदिर इस खाने को फ्री में पहुँचाएगा। इस्कॉन की ओर से हेल्पलाइन नंबर 9717544444 जारी किया गया है। 

इंदौर का राधास्वामी सत्संग व्यास: कोरोना संकट में इसे देश का दूसरा सबसे बड़ा कोविड सेंटर बनाया गया है। इसे “माँ अहिल्या कोविड केयर सेंटर” नाम दिया गया है। 600 बिस्तरों वाले इस सेंटर में मरीजों के मनोरंजन की भी अच्छी व्यवस्था की गई है। आवश्यकता पड़ने पर यहाँ अधिकतम 6000 बिस्तरों की भी व्यवस्था की जा सकेगी। इसके परिसर में 10 बड़े एलईडी लगाए गए हैं, जिसमें रामायण, महाभारत के साथ ही आईपीएल का टेलीकास्ट भी किया जाएगा।

अयोध्या में राम मंदिर: कोरोना संकट को देखते हुए ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ने ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित करने की घोषणा की। इसमें 55 लाख रुपए के खर्चे को ट्रस्ट उठाएगा। ये ऑक्सीजन प्लांट दशरथ मेडिकल कॉलेज में स्थापित होगा।

तिरुपति मंदिर: दान पुण्य के नाम पर तिरुपति मंदिर का नाम अक्सर सूची में सबसे ऊपर होता है। ये मंदिर आंध्र प्रदेश के चित्तूर में है। कोरोना संकट में पिछले साल यहाँ प्रवासी मजदूरों को ठहराने की व्यवस्था हुई थी।

शिरडी साई बाबा मंदिर: पिछले साल कोरोना से लड़ाई में शिरडी के श्रीसाईंबाबा संस्थान ट्रस्ट ने कोरोना वायरस से निपटने के लिए राज्य सरकार को आर्थिक मदद का ऐलान किया था। ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 51 करोड़ रुपए देने का निर्णय लिया था।

सिद्धिविनायक मंदिर: मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर ने  पिछले साल कोरोना संकट को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार को 10 करोड़ रुपए की मदद की थी। इसमें 5 करोड़ कोरोना के लिए और 5 करोड़ शिव भोजन के लिए दिए गए थे।

छत्तीसगढ़ का माँ महामाया मंदिर: संक्रमण से चल रही जंग में महामाया मंदिर ट्रस्ट समिति ने पिछले साल मुख्यमंत्री राहत कोष में 5 लाख 11 हजार रुपए दान दिए थे। इस दान के पीछे मंदिर का उद्देश्य संक्रमितों की मदद करना था।

सारंगपुर हनुमान मंदिर: गुजरात के बोटाद जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर ने पिछले साल कोरोना वायरस मरीजों के लिए अपनी धर्मशाला को 100 बिस्तरों वाले अस्पताल में बदल दिया था।

यूपी के सिद्धार्थनगर में स्थित काली मंदिर: कोरोना संकट की गंभीरता को देखते हुए डुमरियागंज में बने इस काली मंदिर ने पिछले साल अपना पूरा दान पात्र प्रशासन को सौंप दिया था। खास बात ये थी कि ये दान पात्र पिछले 6 दशक से नहीं खुला था। लेकिन मंदिर ने महामारी के समय निपटने के लिए इसे प्रशासन को देकर नई मिसाल दी।

गोरखपुर का प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर: पिछले साल मंदिर में आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए रसोई चलाई गई। मंदिर ने वायरस पीड़ितों के इलाज के लिए गोरखपुर एवं बलरामपुर के तुलसीपुर में अस्पताल का संचालन भी किया। इसके अलावा गोरखनाथ पीठ और उससे संबंधित कुछ संस्थाओं और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् ने ‘पीएम केयर फंड’ एवं ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में अब तक 51,00000 रुपए का योगदान भी दिया।

सोमनाथ मंदिर: पिछले साल राज्य के पूर्व सीएम केशूभाई पटेल की अध्यक्षता वाले श्रीसोमनाथ ट्रस्ट की ओर से कोरोना स्थिति से निपटने के लिए 1 करोड़ रुपए का दान सीएम राहत कोष में दिया गया था।

गुजरात का अंबाजी मंदिर: सीएम रिलीफ फंड में 1 करोड़ रुपए अंबाजी मंदिर ने भी डोनेट किए थे। मंदिर ने साथ ही लॉकडाउन प्रभावित इलाकों में खाना पहुँचाने का भी किया था।

पंचकुला में माता मनसा देवी मंदिर: पिछले साल 21 अप्रैल को हरियाणा स्थित मशहूर माता के मंदिर की ओर से 10 करोड़ रुपए कोरोना रिलीफ फंड में दिए गए थे।

राजस्थान का रानी सत्ती मंदिर : राजस्थान के रानी सत्ती मंदिर में पिछले वर्ष 200 रूम का आइसोलेशन फैसिलिटी तैयार की गई थी।

माता वैष्णो देवी मंदिर: कटरा स्थित माँ वैष्णो मंदिर के नॉन गैजेटेड स्टॉफ ने अपनी अपनी 1 दिन की सैलरी को स्टेट रिलीफ फंड में दान किया था। वहीं गैजेटेड स्टाफ ने 2 दिन की सैलरी दान में दी थी। इसके अलावा कटरा बस्ती में जरूरतमंदों को बोर्ड उपाध्यक्ष के निर्देश पर राशन किट बाँटने का काम भी हुआ था। श्राइन बोर्ड की ओर से आशीर्वाद कॉम्प्लेक्स जिला प्रशासन को दिया गया था, जिसमें 600 बेड डालने की जगह थी।

तमिलनाडु का काँची मठ: काँची मठ ने पिछले वर्ष पीएम रिलीफ फंड को 10 लाख रुपए और सीएम रिलीफ फंड को भी 10 लाख रुपए का दान दिया था। इसके अलावा महामारी से उबरने के लिए वहाँ प्रार्थना भी की थी।

उल्लेखनीय है कि हमने आपको सिर्फ उन चंद मंदिरों के नाम बताएँ हैं, जिन्हें पिछले साल से अब तक मीडिया में कवरेज मिली या वह सोशल मीडिया की वजह से ये चर्चा में आए। इनके अलावा देश-विदेश में स्थित तमाम हिंदू मंदिर हैं, जो लगातार प्रयास में जुटे हैं कि वह कैसे कोरोना से निपटने के लिए राज्य प्रशासन और आम जन की सहायता करें।

पूनावाला को Y सेक्योरिटी के मायने: अब ‘देशद्रोही’ बता किसी नम्बी नारायणन का जीवन तबाह नहीं किया जाएगा

केंद्र सरकार ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला के लिए वाई-श्रेणी की सुरक्षा-व्यवस्था की घोषणा की है। अब से पूनावाला की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की होगी। सरकार का यह फैसला सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के निदेशक प्रकाश कुमार सिंह द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लिखे एक पत्र के बाद आया है। पत्र में प्रकाश कुमार सिंह ने लिखा था कि पूनावाला को कई ग्रुप की तरफ से धमकी मिल रही है।

जब से केंद्र सरकार ने टीकाकरण के तृतीय चरण की घोषणा की है, भारत में बनने वाली वैक्सीन की कीमतों को लेकर एक तीखी बहस छिड़ गई है। ऐसा नहीं है कि केवल कुछ राज्य सरकारों ने ही बार-बार वैक्सीन की कीमतों को अधिक बताया। ऐक्टिविस्ट, सिनेमा स्टार और सोशल मीडिया सेलेब ने भी क़ीमतों पर बयान दिए हैं, जिन पर काफी लंबी बहसें हुई हैं। कुछ ऐक्टिविस्ट तो यह माँग भी उठा चुके हैं कि सीरम इंस्टीट्यूट हर भारतीय को मुफ़्त में वैक्सीन दे।

फ़रहान अख़्तर ट्वीट कर वैक्सीन की क़ीमत को लेकर पूनावाला से सवाल कर चुके हैं। राहुल गाँधी पहले ही उन्हें न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मित्र घोषित कर चुके हैं, बल्कि आदत के अनुसार यह आरोप भी लगा चुके हैं कि प्रधानमंत्री उन्हें फायदा पहुँचाने की कोशिश कर रहे हैं।

ऐसे में यदि पूनावाला को धमकी मिल रही हों तो इसमें आश्चर्य की बात नहीं। नेताओं या सिनेमा स्टार के समर्थक आचरण में कभी-कभी उनसे कई हाथ आगे चले जाते हैं।

पर यहाँ प्रश्न यह उठता है कि एक उद्योगपति को मिलनेवाली इस तरह की धमकियाँ क्या सोशल मीडिया पर लोगों के दो-चार दिन की प्रतिक्रियाओं का परिणाम है? कोई भी नेता यदि किसी के ऊपर जनता या देश के विरुद्ध काम करने का बार-बार गैर जिम्मेदारीपूर्ण आरोप लगाएगा तो उसके समर्थकों के मन में उस व्यक्ति के लिए क्या धारणा बनेगी और वे कैसी प्रतिक्रिया देंगे? जब राहुल गाँधी, कोई सिनेमा स्टार या कोई सोशल मीडिया इंफलुएंशर किसी के बारे में बिना तथ्य के लगातार कुछ लिखेगा तो सोशल मीडिया पर उसके समर्थकों का आचरण उनकी लिखी गई बातों के अनुसार ही तो होगा। मैं यह नहीं कह रहा हूँ कि पूनावाला को मिलने वाली धमकियाँ इनमें से किसी के समर्थकों की करतूत है, मेरा कहना मात्र इतना है कि एक आम सोशल मीडिया यूजर अपने नेता या अपने प्रणेता से बहुत हद तक प्रभावित रहता है।

दूसरा प्रश्न यहाँ यह भी उठता है कि हमारे देश के कुछ लोग हमारे उद्योगपतियों के लिए अपने मन में कैसी धारणाएँ पालते हैं और उसे सार्वजनिक मंचों पर कैसे रखते हैं? कल्पना करें कि अपने जिन उद्योगपतियों के लिए इन लोगों के मन में ऐसी धारणा है, यही उद्योगपति यदि किसी और देश के नागरिक होते तो उनके प्रति वहाँ के लोगों का व्यवहार वैसा ही होता जैसा हमारे यहाँ है? सीरम इंस्टीट्यूट जिस तरह के शोध करता है और जिस काम के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, उसके सीईओ के साथ ऐसे व्यवहार की कल्पना हम किसी और देश में कर सकते हैं? क्या हम सोचते हैं कि दुनिया भर में फैली ऐसी महामारी के लिए टीके बनाने वाले इंस्टीट्यूट के सीईओ को किसी और देश में धमकी मिलती या उसे वहाँ हीरो की तरह देखा जाता?

कुछ लोगों का मानना है कि वैक्सीन बनानेवाली भारतीय कंपनियाँ लोगों को मुफ़्त वैक्सीन दें। ऐसे लोगों ने कभी यह सोचा है कि इतने बड़े स्तर पर वैक्सीन बनाने के लिए जो तैयारी और निवेश चाहिए उसे लेकर किस तरह का जोखिम रहता है? लोग क्यों नहीं सोचते कि दुनिया भर के लिए वैक्सीन बनाने वाला इंस्टीट्यूट हमारे देश के लिए कितने गर्व की बात है? क्यों नहीं सोचते कि अपने उद्योगपतियों, ख़ासकर उन उद्योगपतियों के लिए जो शोध के इतने महत्वपूर्ण क्षेत्र में हैं, उनके साथ यदि ऐसा व्यवहार किया जाएगा तो हमारे कितने उद्योगपति इस क्षेत्र में जाएँगे? आए दिन अपने देश में शोध के लिए सही वातावरण न होने की शिकायत की जाती है। पर ऐसा करते हुए लोग यह नहीं सोचते कि अपने एक हीरो के प्रति हमारा ऐसा व्यवहार भविष्य के दर्जनों और हीरो को इस क्षेत्र में आगे आने से रोकेगा?

धमकी देने वाले लोग चाहे जो हों पर राहत की बात है कि सरकार ने अपनी ज़िम्मेदारी समझते हुए उनकी सुरक्षा का यथोचित प्रबंध किया। यह इस बात को भी दर्शाता है कि न केवल अपने उद्योगों, बल्कि अपने उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों और ऐसे तमाम लोगों की सुरक्षा के प्रति सरकार अति गंभीर है। हम सोशलिज्म के उन दिनों से बहुत आगे आ चुके हैं, जिसमें सरकार या नेताओं के लिए प्रॉफिट शब्द का उच्चारण एक असंभव सा काम माना जाता है। हम नेहरू और जेआरडी टाटा के सम्बंध वाले दिनों से आगे आ चुके हैं। हम काफी हद तक यह समझने लगे हैं कि हमारे हीरो केवल एक खास वर्ग के लोग नहीं हैं। हमारे उद्योगपति भी हमारे हीरो हैं।

सरकार का यह कदम हमें यह भी बताता है कि हम केवल नेहरू जी और जेआरडी टाटा के सम्बंधों वाले दिनों से ही आगे नहीं आए हैं, बल्कि नम्बी नारायणन के दिनों से भी आगे आ चुके हैं।

‘आयशा की तरह मरना नहीं चाहती’: दहेज के लिए मुस्लिम महिला की प्रताड़ना, PM मोदी-CM योगी से लगाई गुहार

इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें दिख रही मुस्लिम महिला ने अपनी पहचान बुलंदशहर के हिना खान के तौर पर बताई है। उसका कहना है कि ससुरालवाले दहेज के लिए उसे प्रताड़ित कर रहे हैं। उसने अधिकारियों से अपनी जान बचाने की गुहार लगाई है।

हिना खान यह भी बता रही है कि इस मामले को लेकर वह पुलिस के पास भी गई, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। वीडियो में वह कहती नजर आ रही है, “मैं मरना नहीं चाहतीं मैं… आयशा की तरह जान नहीं देना चाहती।”

वीडियो में वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी इंसाफ दिलाने की गुहार लगा रही है। उसका कहना है कि पिछले छह महीने से वह यहॉं से वहॉं दौड़ रही है। लेकिन उसे कोई मदद नहीं मिल रही, क्योंकि अधिकारियों को देने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं।

हिना पत्रकारों से अपनी पीड़ा लोगों तक पहुॅंचाने की भी अपील कर रही है ताकि उसे इंसाफ मिल सके। उसका कहना है कि उसके ससुरालवाले उसे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और उसकी हत्या कर दी जाएगी।

वीडियो में हिना खान को आयशा का भी जिक्र करते सुना जा सकता है। आयशा ने दहेज के लिए प्रताड़ना सहने के बाद गुजरात में आत्महत्या कर ली थी। साबरमती नदी में कूदकर जान देने से पहले आयशा ने एक वीडियो रिकॉर्ड की थी। यह वीडियो वायरल होने के बाद उसके पति को गिरफ्तार कर लिया था। फिलहाल वह जमानत पर है।

कोविड संक्रमण के बावजूद जारी रहेगा राकेश टिकैत का ‘ड्रामा’, कहा, ‘सरकार किसानों की आवाज दबा रही’

दिल्ली में लगातार बढ़ रहे कोरोनावायरस संक्रमण के बीच भारतीय किसान संघ (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने गुरुवार (29 अप्रैल) को कहा कि किसान आंदोलन चलता रहेगा। टिकैत के कहने का यही मतलब था कि चाहे संक्रमण कितना भी बढ़ जाए उनकी आंदोलन की नौटंकी चलती रहेगी।

29 अप्रैल को हरियाणा के भिवानी में प्रेम नगर गाँव में किसान महा पंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत ने कहा कि Covid-19 संक्रमण की दूसरी लहर के बाद भी किसान दिल्ली बॉर्डर में प्रदर्शन स्थल से नहीं हटेंगे।

टिकैत ने कहा, “Covid-19 के बढ़ते संक्रमण के बीच सरकार किसानों की आवाज को दबाना चाहती है। हम सरकार से बात करने को तैयार हैं। गुजरात में किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं लेकिन अगर किसानों का मुद्दा नहीं सुलझा तो भाजपा सरकार गुजरात मॉडल को पूरे देश में लागू कर देगी।“

टिकैत ने भी राम मंदिर के लिए मिले दान पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राम मंदिर के लिए दान देने से अच्छा है कि नए एम्स खोलने के लिए लोगों से दान की अपील की जाए। हरियाणा सरकार पर आरोप लगाते हुए टिकैत ने कहा कि सरकार 6 सालों तक सत्ता में रहने के बाद भी भिवानी में एक मेडिकल कॉलेज भी नहीं बना सकी।

एक अन्य किसान नेता गुरनाम सिंह चारुनी ने राकेश टिकैत की भाषा बोलते हुए कहा कि अगर सरकार पूरे देश में भी सीआरपीसी की धारा 144 लगा देती है तब भी किसान आंदोलन चलता रहेगा।

पंजाब और हरियाणा के कई किसान पिछले 5 महीनों से मोदी सरकार द्वारा पास किए गए कृषि कानूनों को रद्द करने की माँग करते हुए दिल्ली की ओर आने वाले राजमार्गों में धरने पर बैठे हुए हैं।

सितंबर 2020 में मोदी सरकार ने इन कृषि कानूनों को पास किया था। ये तीन कृषि कानून हैं, कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) अधिनियम 2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं सुरक्षा) मूल्य निर्धारण समझौता अधिनियम 2020, आवश्यक वस्तु (संशोधन) अधिनियम 2020.

पहले भी यह रिपोर्ट दी जा चुकी है कि दिल्ली बॉर्डर के आसपास होने वाले प्रदर्शन और किसान रैलियों के कारण दिल्ली और उसके आसपास के राज्यों में Covid-19 संक्रमण तेजी से फैला। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (NCDC) के द्वारा जीनोम सीक्वेंसिंग के आधार पर प्राप्त डाटा में बताया गया है कि कोरोनावायरस के यूके स्ट्रेन कई उत्तरी राज्यों में प्रभावी हुआ जिनमें पंजाब भी शामिल है। केंद्र सरकार की प्रयोगशालाओं के दो वैज्ञानिकों ने यह भी जानकारी दी कि पंजाब में बड़ी सँख्या में लोगों के जमा होने के कारण कोरोनावायरस के यह स्ट्रेन दिल्ली, उत्तरप्रदेश और हरियाणा में फैल गया।

Covid-19 संक्रमण ने दिल्ली को बहुत अधिक नुकसान पहुँचाया है। गुरुवार (29 अप्रैल) को संक्रमण से दिल्ली में 395 मौतें हुईं। इसी दिन दिल्ली के अंदर 24,235 नए संक्रमित मरीज मिले और संक्रमण दर बढ़कर 32.82 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आँकड़ों से यह पता चला है कि पिछले आठ दिनों से दिल्ली में लगातार 300 से अधिक मौतें हुई हैं।

UP सरकार नहीं चाहती थी पंचायत चुनाव, कारण था कोरोना संक्रमण… इलाहाबाद HC के फैसले के बाद कराना पड़ा

उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर प्रश्न उठ रहे हैं। Covid-19 के संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश में हो रहे पंचायत चुनावों के कारण लगातार राज्य सरकार की आलोचना हो रही है किन्तु सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार पंचायत चुनाव नहीं कराना चाहती थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्णय के कारण राज्य में चुनाव कराने पड़े। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि राज्य में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 10 मई के पहले पूरी हो जानी चाहिए।

रविवार को उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि एक रिट याचिका पर निर्णय देते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 4 फरवरी को राज्य सरकार को यह आदेशित किया था कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया 10 मई के पहले पूरी हो जानी चाहिए।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने जानकारी दी कि विनोद उपाध्याय द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विरुद्ध दायर की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए 4 फरवरी को न्यायालय ने यह आदेश दिया था। प्रवक्ता ने यह भी बताया कि उच्च न्यायालय का यह आदेश भी था कि राज्य चुनाव आयोग पंचायत चुनाव में आरक्षण और सीट आवंटन की प्रक्रिया भी 15 मार्च तक पूरी कर ले।

हाथरस के एक ग्राम प्रधान विनोद उपाध्याय की याचिका पर जस्टिस मुनीश्वर नाथ भंडारी और रोहित रंजन अग्रवाल की बेंच ने सुनवाई की थी। याचिका में उपाध्याय के द्वारा संविधान के अनुच्छेद 243-E के प्रावधानों के तहत उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने के लिए न्यायालय द्वारा आदेशित किए जाने की माँग की गई थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के बाद ही उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव चार चरणों में आयोजित किए गए, जिनका परिणाम 2 मई को घोषित किया जाएगा।

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि पंचायत चुनाव पिछले साल दिसंबर से ही लंबित थे। महामारी के कारण पंचायतों के पुनर्गठन और परिसीमन का कार्य भी प्रभावित हुआ था। इसी विषय में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर की गई थी और माँग की गई थी कि सरकार चुनावों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप न करे।

उत्तर प्रदेश के सरकारी प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी कि चुनाव आयोजित कराने के न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव का नोटिफिकेशन जारी किया लेकिन चुनावों को कोविड प्रोटोकॉल के तहत ही संपन्न कराने की पूरी व्यवस्था की गई।

प्रवक्ता के अनुसार मतदाताओं की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया। गाँवों के सैनिटाइजेशन का काम भी किया गया। कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते राज्य चुनाव आयोग ने यह निर्णय भी लिया था कि चुनाव प्रचार के दौरान प्रत्याशी के साथ 5 से अधिक व्यक्ति नहीं होंगे।