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‘इनको ऑक्सीजन सप्लाई चेन की समझ नहीं’: हाई कोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों ने फिर केजरीवाल सरकार को घेरा

दिल्ली में जैसे-जैसे कोरोना का संकट गहराता जा रहा है, अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार की अक्षमता भी उजागर होती जा रही है। अस्पतालों में बेड के साथ-साथ ऑक्सीजन का गहरा संकट है। इसको लेकर पिछले कुछ दिनों में कई अस्पतालों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। एक बार फिर दिल्ली हाई कोर्ट में अस्पतालों ने केजरीवाल सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

सोमवार (26 अप्रैल 2021) को इस मसले पर हुई सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट में जयपुर गोल्डन अस्पताल के वरिष्ठ वकील सचिन दत्ता ने केजरीवाल सरकार को राष्ट्रीय राजधानी में चल रहे संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया। साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई चेन को बाधित करने का भी आरोप लगाया।

हाई कोर्ट में दिल्ली में COVID-19 के प्रकोप और शहर में ऑक्सीजन की आपूर्ति से संबंधित याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान दत्ता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार के कारण ऑक्सीजन की सप्लाई चेन बाधित हुई है। इससे अस्पतालों को ऑक्सीजन मिलने में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि हमें शाम के 5 बजे तक 3.6 एमटी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन नहीं मिली। दिल्ली सरकार के अफसर सप्लाई चेन को समझ नहीं रहे हैं। उसे बिगाड़ रहे हैं। अस्पताल ने सप्लायर से सीधे संपर्क की इजाजत माँगी।

वकील ने आगे कहा कि कई एसओएस कॉल किए गए थे। उन्होंने एम्स से कुछ व्यवस्था की, लेकिन उसमें कुछ मिनट की देरी लगी। कमी और अनिश्चितता है। दिल्ली सरकार सप्लाई चेन को नहीं समझती है। उन्होंने दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया को भी आड़े हाथों लिया।

वहीं महाराजा अग्रसेन अस्पताल के वकील आलोक अग्रवाल ने भी उनकी बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि दिल्ली के अस्पतालों के सामने समस्या यह है कि उन्हें इस बात की जानकारी ही नहीं है कि उन्हें ऑक्सीजन कितनी और कब मिलेगी। दिल्ली के नोडल अधिकारियों से सीधा संवाद न होने के कारण कोरोना काल में अस्पतालों की चिंता बढ़ गई है।

शांति मुकुंद अस्पताल की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उनके अस्पताल में पहले से ही ऑक्सीजन की सप्लाई कम हो रही है। इस समय हालात और भी खराब हैं, जिसके चलते मरीजों को वापस भेजना पड़ रहा है।

शांति मुकुंद अस्पताल के वकील विराज दातार ने कहा, “मेरे पास ऑक्सीजन सपोर्ट पर 96 मरीज हैं। इन सभी के लिए व्यवस्था करनी है। मैंने व्हाट्सएप, कॉल किया है। जल्द ही मेरा बफर स्टॉक भी खत्म हो जाएगा।”

बता दें कि अरविंद केजरीवाल की आपदा में भी राजनीति करने की प्रवृत्ति रही है। हाल ही में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से दिसंबर 2020 में ही केजरीवाल सरकार को ऑक्सीजन के लिए राशि मुहैया कराई थी। केंद्र सरकार द्वारा यह राशि दिल्ली में 8 PSA (Pressure Swing Absorption) ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने के लिए दी गई थी, लेकिन केजरीवाल सरकार ने अब तक मात्र एक ऐसा ऑक्सीजन प्लांट स्थापित किया है।  

दिल्ली हाईकोर्ट ने इस मामले पर केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई थी और कहा था कि सरकार के कुप्रशासन और अक्षमता के कारण आज राजधानी में ऑक्सीजन का संकट उत्पन्न हुआ है। कोर्ट ने सरकार से यह प्रश्न भी किया था कि केंद्र सरकार द्वारा फंड दिए जाने के बाद भी केजरीवाल सरकार अब तक मात्र एक PSA ऑक्सीजन प्लांट क्यों स्थापित कर पाई है?

‘तो क्या करूँ मैं मर जाऊँ?’: मालदीव के बैन के बाद मीम की बौछार, पर बॉलीवुड सितारों पर नहीं होगा इसका असर

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के मद्देनजर मालदीव ने भारतीय पर्यटकों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके बाद बॉलीवुड सितारों पर मीम की बौछार हो गई। लेकिन इस बैन का शायद ही इन सितारों पर कोई प्रभाव पड़े।

असल में मालदीव के पर्यटन मंत्रालय ने कहा है कि देश की ‘हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी (HPA)’ ने मंगलवार (अप्रैल 27, 2021) से लोगों की बसावट वाले द्वीपों पर भारतीय नागरिकों का आगमन प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही मालदीव ने पर्यटन को अधिक सुरक्षित और आसान बनाने के प्रयासों में सहयोग माँगते हुए पर्यटकों को धन्यवाद दिया है।

हाल के समय में मालदीव बॉलीवुड सितारों का छुट्टी मनाने का पसंदीदा डेस्टिनेशन बनकर उभरा है। यहाँ तक कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच भी कई सितारे वहाँ की यात्रा करते दिखे हैं। लिहाजा मालदीव के बैन के बॉलीवुड सेलेब्स पर मीम्स की बौछार आ गई है। पिछले 1 साल में ऐसे कई बॉलीवुड सेलेब्स हैं जिन्होंने मालदीव की यात्रा की है और कई तस्वीरें सोशल मीडिया, खासकर इंस्टाग्राम पर अपलोड की हैं। कई अभिनेत्रियाँ अपने पार्टनर के साथ वहाँ पहुँची रहीं तो कई अभिनेता पनी गर्लफ्रेंड्स या परिवार के साथ मालदीव गए थे। कोरोना आपदा के बीच इस तरह तस्वीरें शेयर करने पर उनकी आलोचना भी हुई थी।

एक यूजर ने ‘तो क्या करूँ मैं मर जाऊँ?’ वाले गाने के बोल शेयर करते हुए लिखा कि फ़िलहाल बॉलीवुड सेलेब्स के दिल की स्थिति यही होगी। एक अन्य यूजर ने उस बच्चे का इंटरव्यू शेयर किया, जो ‘आई एम फाइन’ बोल कर रोने लगता है। उसने कहा कि बॉलीवुड सेलेब्स की हालत भी इस घोषणा के बाद कुछ ऐसी ही है। एक यूजर ने कहा कि जब पूरी दुनिया भारत की मदद करने में लगी है, हमारे सेलेब्स मालदीव में घूमते रहे।

एक यूजर ने ‘अँधेरा हो गया जीवन में बिलकुल’ वाला मीम शेयर किया। ‘इंडियन मीम्स’ नामक हैंडल ने ‘क्वीन’ फिल्म से कंगना रनौत का डायलॉग ‘मेरा तो इतना लाइफ ख़राब हो गया’ शेयर किया। तो किसी ने ‘बाजीराव मस्तानी’ में प्रियंका चोपड़ा का डायलॉग ‘आपने हमसे हमारा ग़ुरूर छीन लिया’ शेयर किया। एक यूजर ने राजपाल यादव का डायलॉग ‘अब कुछ नहीं हो सकता क्या?’ के जरिए मालदीव को सेलेब्स का ‘नानी का घर’ बताते हुए निशाना साधा।

मीम्स अपनी जगह है लेकिन सच्चाई ये है कि इन प्रतिबंधों का बॉलीवुड सेलेब्स पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केवल ‘इन्हैबिटेड आइलैंड्स’ पर पर्यटन फैसिलिटीज और बजट होटलों का उपयोग करने वाले पर्यटकों को रोका गया है। रिसॉर्ट्स बुक करने वाले या आम लोगों के बसावट में न रह कर अन्य द्वीपों पर जाकर रहने वाले बॉलीवुड सेलेब्स को वहाँ की यात्रा की छूट मिलती रहेगी। उनके लिए वहाँ डेडिकेटेड रिसॉर्ट्स होते हैं।

पिछले 1 साल में कियारा आडवाणी, तापसी पन्नू, टाइगर श्रॉफ, दिशा पाटनी, सिद्धार्थ मल्होत्रा, सोनाक्षी सिन्हा, किम शरण, धीरज धूपर, विवेक ओबेरॉय, हिना खान, सुरेश रैना, तारा सुतरिया, आदर जैन, अरमान जैन, अनिशा मल्होत्रा, सामंथा, रकुल प्रीत सिंह, कैटरीना कैफ, काजल अग्रवाल, वरुण धवन, मॉनी रॉय, नेहा धूपिया-अंगद बेदी सहित कई सेलेब्स मालदीव्स के दौरे पर गए।

कोरोना संकट में काम कर रहे वॉलंटियर्स को परेशान करने के आरोपों का दिल्ली पुलिस ने किया खंडन, वामपंथी-कॉन्ग्रेसियों ने फैलाई फेक न्यूज़

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली जिस तरह से कोरोना की चौथी लहर का सामना कर रही है, उसी तरह मोदी विरोधी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर भी लगातार फेक न्यूज की लहर चला रहे हैं।

दिल्ली के वकील और कॉलमनिस्ट दुष्यंत ने रविवार को ट्वीट किया कि कई लोग उनके पास यह शिकायत लेकर आए हैं कि दिल्ली पुलिस उन्हें महामारी के बीच अपने व्हाट्सएप ग्रुप समेत दूसरे क्राउडसोर्सिंग प्रयासों को बंद करने के लिए धमकी दे रही है। बता दें कि दुष्यंत राहुल गाँधी के करीबी और कॉन्ग्रेस के कट्टर समर्थक हैं।

दुष्यंत का ट्वीट

दिल्ली की पुलिस के खिलाफ दुष्यंत के ट्वीट के बाद NDTV की गार्गी रावत अंसारी ने सोशल मीडिया पर उन्हें ज्वाइन किया। गार्गी ने ट्वीट किया, “क्या दिल्ली पुलिस इन वॉलंटियर्स के खिलाफ काम कर रही है, क्योंकि वे दुर्लभ संसाधनों को उपलब्ध करवा रहे हैं। दिल्ली पुलिस वॉलंटियर्स द्वारा किए जा रहे राहत कार्यों को रोकने की कोशिश कर रही है।”

एनडीटीवी की पत्रकार गार्गी रावत अंसारी का ट्वीट

गार्गी रावत अंसारी का विवाह पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मुख्तार अहमद अंसारी के पड़पोते यूसुफ अहमद अंसारी से हुआ है। हाल ही पंजाब से उत्तर प्रदेश लाए गए कुख्यात गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की वह करीबी रिश्तेदार हैं।

सोशल मीडिया पर इन मोदी विरोधियों ने इसी तरह के और मैसेज करके दिल्ली पुलिस पर “व्हाट्सएप रिलीफ ग्रुप” को बंद करवाने का आरोप लगाया।

दिल्ली पुलिस के आदेश पर ‘व्हाट्सएप ग्रुप’ को बंद करने के आरोप वाला ट्वीट

दुष्यंत के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए कई अन्य लोगों ने भी दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप लगाया, कि लॉकडाउन के दौरान जब अंतरराज्यीय बस सेवा नहीं चल रही थी तो केजरीवाल सरकार ने प्रवासियों को यूपी की सीमा तक पहुँचाने के लिए बसें चलवाई थी। लेकिन उस, दौरान भी दिल्ली पुलिस ने वॉलंटियर्स को काफी परेशान किया था।

दिल्ली पुलिस पर पिछले साल 2020 में प्रवासियों को भोजन देने वालों को गिरफ्तार करने का आरोप लगाया गया

खास बात यह है कि जितने भी दावे सोशल मीडिया पर किए जा रहे हैं, उनका कोई भी सबूत नहीं है।

गार्गी रावत अंसारी और दुष्यंत के ट्वीट करने के बाद सोशल मीडिया पर कॉपी-पेस्ट टूलकिट गैंग सक्रिय हो गई और इसी तरह के मैसेजेज की सोशल मीडिया पर बाढ़ सी आ गई।

दुष्यंत के ट्वीट का कॉपी पेस्ट

जैसा ट्वीट दुष्यंत ने किया था, ठीक उसी तरह का ट्वीट पीकू नाम की यूजर ने किया। ट्विटर पर राइजिंग सुरभि नाम की यह यूजर आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया कार्यकर्ता हैं और AAP के कई नेता इन्हें फॉलो करते हैं।

पीकू

कई लोगों ने इसी मैसेज को दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैला दिया। इसमें यह दावा किया गया कि पुलिस सहयोग करने के सभी कार्यों को बंद करने के लिए वॉलंटियर्स को मजबूर कर रही है।

ऐसे ही और भी मैसेज शेयर किए गए हैं।

यहाँ हम दिल्ली पुलिस के बारे में फेक न्यूज फैला रहे सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के कुछ ट्वीट दिखाते है।

किस्से कहानियाँ ट्विटर यूजर

Kisse कहानियाँ नाम के यूजर को ट्विटर पर 4,400 लोग फॉलो करते हैं। इसमें कई पत्रकार, नेता भी शामिल हैां

किस्से कहानियाँ के फॉलोवर्स

आप देश सकते हैं कि किस्से कहानियाँ को कई कॉन्ग्रेस के नेता और समर्थक फॉलो करते हैं।

काकुल का ट्वीट

इसी तरह, कई राजनेताओं, पत्रकारों और एक्टिविस्ट काकुल पराशर को भी फॉलो करते हैं।

काकुल के फॉलोवर्स

हालाँकि, दिल्ली पुलिस ने प्रोपागैंडाबाजों के आरोपों का खंडन किया है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह इस तरह के पूर्वाग्रह से प्रेरित, असत्यापित और निराधार आरोपों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए वॉलंटियर्स से संसाधन और जानकारी बढ़ाने के लिए कहा है। पुलिस ने यह भी कहा कि कोरोनो वायरस संकट के बीच ऑक्सीजन की आपूर्ति और अन्य आवश्यक मदद करने के लिए वे वे घुटनों के बल खड़े हैं और इस तरह के दुष्प्रचार उन्हें अच्छे कार्यों को करने से नहीं रोक सकते हैं।

साजिश के तहत फैलाई गई फेक न्यूज

कोरोना वायरस के संबंध में फेक न्यूज फैलाने के मामले में शनिवार (24 अप्रैल 2021) को केंद्र सरकार ने ट्विटर से फेक, दुर्भावनापूर्ण और भ्रामक ट्वीट्स को हटाने के लिए कहा था। विनोद कापरी, स्वरा भास्कर और अनारकली जैसी फिल्मों के निर्माता अविनाश दास ने कई सारे पुराने और भ्रामक तस्वीरें शेयर की थी। इसके अलावा हंसराज मीणा जैसे राजनीतिक कार्यकर्ता ने भी अपने प्रभाव का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि कोरोना वायरस एक धोखा और साजिश है। यह बीमारी है ही नहीं।

‘EC अधिकारियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए, 2 मई की काउंटिंग भी रोक देंगे’: मद्रास HC ने कोरोना की दूसरी लहर का बताया जिम्मेदार

मद्रास हाईकोर्ट ने देश में कोरोना की दूसरी लहर के लिए पूरी तरह से चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराया है। उच्च न्यायालय ने सोमवार (अप्रैल 26, 2021) को कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि EC के अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए। उसने राजनीतिक रैलियों में आयोजन की अनुमति देने के लिए भी EC को फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी पूरी तरह से EC से खिन्न दिखे।

उन्होंने चुनाव आयोग से कहा, “आपका संस्थान अकेले कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के लिए जिम्मेदार है। आपके अधिकारियों पर शायद हत्या के आरोप में मामला दर्ज करना चाहिए।” उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनाव प्रचार के दौरान फेस मास्क पहनने, सैनिटाइजर का प्रयोग करने और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे दिशा-निर्देशों का पालन कराने में चुनाव आयोग संपूर्ण रूप से विफल रहा है।

उन्होंने कहा कि कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश के बावजूद ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने ECI के वकील से पूछा, “जब रैलियाँ हो रही थीं तब क्या आप किसी और ग्रह पर थे?” मद्रास उच्च-न्यायालय ने ये भी चेतावनी दी है कि 2 मई को होने वाले मतगणना के दौरान कोरोना के दिशा-निर्देशों का पालन कराने की योजना का खाका आयोग नहीं पेश कर पाया तो वह इस पर रोक लगा देगा।

चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी ने कहा, “लोगों के स्वास्थ्य को उच्चतम दर्जे की प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ये बात विक्षुब्ध कर देने वाली है कि संवैधानिक संस्थाओं को भी इस सम्बन्ध में बातें याद दिलानी पड़ रही है। अगर कोई नागरिक ज़िंदा बचेगा तभी तो वो एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल करेगा। परिस्थिति ज़िंदा बचने और सुरक्षा के लिए संघर्षों पर पहुँच गई है। अन्य कोई भी चीज इसके बाद ही आती है।”

इस पीठ में जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति भी शामिल थे। उन्होंने भारत और तमिलनाडु के मुख्य चुनाव आयुक्तों को निर्देश दिया कि वे राज्य और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिवों के साथ विचार-विमर्श करें और मतगणना के दिन कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित कराने के लिए खाका तैयार करें। शुक्रवार को इस मामले पर फिर सुनवाई होगी। उस दिन कोर्ट देखेगा कि क्या योजना बनाई गई है और क्या कदम उठाए गए हैं।

तमिलनाडु में रविवार को दूसरी लहर के दौरान पहली बार पूर्ण लॉकडाउन लगा। केवल ज़रूरी सेवाओं को ही छूट दी गई थी। 1,05,180 सक्रिय कोरोना मामलों के साथ तमिलनाडु भारतीय राज्यों में 8वें स्थान पर है। राज्य में 13,557 लोग अब तक कोरोना के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं। तमिलनाडु में चुनाव संपन्न हो चुका है और सत्ताधारी AIADMK और विपक्षी DMK के बीच मुख्य मुकाबला है।

कोरोना से मौत, हिंदुओं की जलती चिताएँ: Reuters की पत्रकारिता या हिंदू-घृणा?

किसी भी त्रासदी के वक्त लोगों का पहला कर्तव्य क्या होना चाहिए? त्रासदी में जानमाल की क्षति की तस्वीरें वायरल करके पब्लिसिटी बटोरना या फिर लोगों में आत्मविश्वास जगाना कि वो इससे बाहर निकलेंगे? आज हम आपको अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी Reuters के भारत में चीफ फोटोग्राफर दानिश सिद्दीकी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें उसकी तस्वीरों के लिए ‘पुलित्जर प्राइस’ से भी नवाजा जा चुका है।

हिन्दू लाशों के जलने की तस्वीरें शेयर कर के दानिश सिद्दीकी ने पूरी दुनिया में भारत की ऐसी छवि बनाने का प्रयास किया है, जैसे कोरोना वायरस संक्रमण के लिए हिन्दू ही जिम्मेदार हों और वही मर रहे हों। उसने नई दिल्ली के एक श्मशान में जलती चिताओं की तस्वीरें शेयर की, जो सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। Reuters ने भी अपनी वेबसाइट पर इसे जगह दी। कइयों ने इसे सनसनी फैलाने की कोशिश करार दिया है।

दुःख और विपत्ति की इस घड़ी में जलती चिताओं की फोटो शेयर करने के पीछे क्या उद्देश्य रहा होगा, आप समझ सकते हैं। वैसे दानिश सिद्दीकी का हिन्दू-विरोधी इतिहास ही रहा है। उन्होंने हरिद्वार में लगे उस कुम्भ मेले को लेकर भी प्रोपेगंडा फैलाया था, जिसका भारत सरकार के आग्रह के बाद समय पूर्व ही समापन कर दिया गया और जहाँ नेगेटिव कोरोना रिपोर्ट व दिशानिर्देशों का पालन करने वाले ही लोग थे।

Reuters पर दानिश सिद्दीकी की ली हुई कुम्भ की जो तस्वीरें प्रकाशित की गईं उसके हैडिंग में लिखा गया कि ‘कोरोना वायरस संक्रमण के प्रसार के बीच’ कुम्भ का आयोजन हो रहा है। साथ ही साधुओं की तस्वीरों के जरिए नकारात्मकता फैलाने की कोशिश की गई। दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के दौरान भी उन्होंने जो तस्वीर शेयर की थी, उसमें ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि बहुत सारे हिन्दू मिल कर एक मुस्लिम को पीट रहे हैं।

अब दानिश सिद्दीकी का दोहरा रवैया देखिए। उन्होंने अप्रैल 12 को कुम्भ की तस्वीरें शेयर की और उसके 9 दिन बाद अप्रैल 21 को ‘किसान आंदोलन’ की। ‘किसान आंदोलन’ की उस तस्वीर में प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ दिख रही थी। पंजाब के बरनाला में हुई इस रैली की तस्वीरों को शेयर करते वक़्त कहीं भी कोरोना वायरस का नाम नहीं लिया गया, जबकि कुम्भ में इससे छोटी और नियमों का पालन करने वाली भीड़ की तस्वीरों के जरिए हिन्दू विरोधी प्रोपेगंडा फैलाया गया।

स्पष्ट है, जहाँ भी मौतें होंगी वहाँ मृतकों का अंतिम संस्कार होगा। इसी दौरान एक पत्रकार की, या सभ्य समाज में जिम्मेदारी निभा रहे किसी भी व्यक्ति की परीक्षा होती है। अब पत्रकार ही गिद्ध बन जाएँ तो क्या कहना। कोरोना के कारण दुनिया भर में दुर्भाग्यपूर्ण मौतें हुई हैं और हो रही हैं, लेकिन इन पत्रकारों को भारत में हिन्दुओं की जलती चिताओं से ही मतलब है। इस दौरान कइयों ने दानिश को ‘नायक’ बता कर उनकी प्रशंसा भी की।

दानिश सिद्दीकी ने लगभग एक हफ्ते में ऐसी 6-7 तस्वीरें क्लिक की हैं, जिन्हें Reuters ने कई मीडिया संस्थानों को ख़बरों में प्रयोग करने के लिए दिया है। कुछ ही दिनों पहले हमने बरखा दत्त को कैमरे और लैपटॉप सहित सभी साजोसामान के साथ ऐसे ही एक श्मशान में देखा था। सभी हिन्दुओं के ही अंतिम संस्कार के स्थल में घूम रहे हैं। एक-एक मौत दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन इसका इस्तेमाल भी ब्रांडिंग और प्रोपेगंडा के लिए हो रहा।

भारत में किसी नेता/सेलेब्रिटी से आक्रोशित होने पर उनके पुतला दहन करने की बात आम रही है। आपको याद होगा जब ग्रेटा थनबर्ग और मीना हैरिस जैसों ने खालिस्तानी टूलकिट के हिसाब से भारत के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप किया तब तब भारत में विरोध प्रदर्शन के रूप में कहीं उनकी तस्वीरें जलाई गईं। उसकी तस्वीर भी दानिश सिद्दीकी ने ही वायरल की थी। खास तौर पर बताया गया था कि ये काम एक हिन्दू संगठन का है।

लेकिन, अगर आप दानिश सिद्दीकी की पूरी टाइमलाइन पर कहीं भी तबलीगी जमात से जुड़ी कोई तस्वीर खोजेंगे तो वो नहीं मिलेगा। पिछले साल जमातियों की वजह से कोरोना पूरे देश में फैला था और उनके द्वारा पथराव से लेकर कोरोना के दिशानिर्देशों के उल्लंघन की एक भी तस्वीर दानिश सिद्दीकी ने नहीं ली, क्योंकि इससे उनका प्रोपेगंडा कमजोर होता। कोरोना त्रासदी का इस्तेमाल भी ऐसे ही किया जा रहा है।

इसका दुष्परिणाम ये हो रहा है कि सोशल मीडिया पर कई पूर्वाग्रही लोग पुरानी त्रासदियों की तस्वीरें या फेक तस्वीरें भी पोस्ट कर के मोदी सरकार को अनाप-शनाप बक रहे हैं। भारत सरकार ने ट्विटर से ऐसी फेक न्यूज से भरी पोस्ट को अपने प्लेटफॉर्म से डिलीट करने का आदेश दिया। इसमें अविनाश दास, आशुतोष मिश्रा, विनोद कापरी और डॉक्टर कफील खान जैसे लोग शामिल थे। जलती हिन्दू चिताओं की तस्वीरों पर ये सारा खेल किया जा रहा है।

बंगाल चुनाव: मुर्शिदाबाद में बमबारी, मतदान से पहले BJP दफ्तर पर हमला करने का TMC के गुंडों पर आरोप

पश्चिम बंगाल में आज (26 अप्रैल 2021) सातवें चरण का मतदान हो रहा है। उससे पहले मुर्शिदाबाद के तेंतुलिया में बॉर्डरपारा क्षेत्र से बमबारी की घटना सामने आई। जी 24 घंटा की खबर के मुताबिक हमला रविवार (25 अप्रैल 2021) देर रात हुआ था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, अज्ञात गुंडों ने तेंतुलिया में भाजपा कार्यालय को निशाना बनाया और पार्टी के झंडे-बैनर फाड़ दिए। घटना पर एक स्थानीय व्यक्ति ने बताया, “हमला तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा किया गया था। इलाके में बमबारी हुई है। टीएमसी के गुंडों ने हमें सार्वजनिक रूप से धमकी भी दी।”

जिस स्थान पर बमबारी की घटना हुई उसके बारे में पूछे जाने पर एक अन्य स्थानीय ने कहा, “बमबारी हमारे गाँव में ठीक मेरे चाचा के घर के सामने हुई। शुरू में (गुंडों) मेरे चाचा को पकड़ लिया था। हमले को अंजाम देने के लिए करीब 25-30 बदमाश आए थे। यही अब वे कई रातों से कर रहे हैं। उन्होंने हमारी रातों की नींद छीन ली है।”

(वीडियो साभार: Youtube / ZEE 24 Ghanta)

उन्होंने आगे कहा कि वे हमें अपना वोट देने से मना कर रहे हैं। गुंडे भाजपा के लोगों को धमका रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति के अनुसार, “उन्होंने भाजपा कार्यालय में तोड़फोड़ की कोशिश की। लेकिन हमारे वहाँ होने से वे लोग इसमें सफल नहीं हो पाए। उन्होंने बम फेंका और वहाँ से भाग गए। इस डर से कि कहीं वोट देने से पहले उन्हें कोई चोट न पहुँच जाए। इसके बावजूद तेंतुलिया में कई महिलाओं ने सुबह-सुबह अपना वोट डालने का फैसला किया। मैं भी जल्दी मतदान करने जा रहा हूँ। हर कोई कह रहा है कि दिन में हंगामा हो सकता है।”

बमबारी की घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल है। पश्चिम बंगाल में 34 सीटों पर होने वाल मतदान में 81 लाख से ज्यादा वोटर 284 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। इनमें कोलकाता के 4 निर्वाचन क्षेत्र, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा के 6 निर्वाचन क्षेत्र और मुर्शिदाबाद और पश्चिम बर्धमान के 9 निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं।

इससे पहले पश्चिम बंगाल में पाँचवें चरण के मतदान के दौरान बमबारी की घटना सामने आई थी। राज्य के उत्तर 24 परगना में स्थित मिनाखान के पोल बूथ 114 पर बम से हमला किया गया था। इसके अलावा बर्द्धमान उत्तर विधानसभा क्षेत्र के सरायटीकर प्राथमिक विद्यालय की बूथ संख्या 60, 61, 63 व 72 से और नदिया जिले से छिटपुट हिंसा व झड़प की खबरें सामने आई थीं। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने पीरजादा शरीफ अब्बास सिद्दीकी की पार्टी इंडियन सेक्युलर फ्रंट के सदस्यों पर हमला करने का आरोप लगाया था।

वहीं, एक अन्य घटना में पश्चिम बंगाल के उत्तरी बर्धमान जिले में बीजेपी पोलिंग एजेंट द्वारा कथित रूप से हमला किए जाने के बाद भाजपा और टीएमसी कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए थे। तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया था कि कम से कम 35 बाहरी और भाजपा के गुंडे नादिया के कल्याणी में मतदान केंद्र पर मौजूद टीएमसी के मतदाताओं को धमकी दे रहे थे।

बता दें कि सोमवार सुबह मतदान शुरू होने के थोड़ी देर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वोटरों से कोविड प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील की। पीएम मोदी ने ट्विटर पर मतदाताओं के नाम संदेश में कहा, “पश्चिम बंगाल चुनावों के सातवें चरण का मतदान आज हो रहा है। लोगों से उनके मताधिकार का प्रयोग करने और कोविड से संबंधित प्रोटोकॉल का अनुसरण करने की अपील करता हूँ।”

कोविड मरीजों के लिए हेमकुंट फाउंडेशन के ऑक्सीजन ट्रक को राजस्थान पुलिस ने रोका, सोशल मीडिया पर आक्रोश के बाद छोड़ा

देश में कोरोनावायरस के बढ़ते मामलों के बीच, कई एनजीओ मुफ्त मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। ऐसा ही एक गैर-सरकारी संगठन हेमकुंट फाउंडेशन है, जिसने ₹ 10,000 के रिफंडेबल सिक्योरिटी पर अब तक 1000 से अधिक सिलेंडरों की आपूर्ति की है।

तरल ऑक्सीजन की माँग और आपूर्ति के बीच की गहरी खाई को पाटने के अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयासों के बावजूद, फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि उन्हें राजस्थान पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है। कल एक ट्वीट में कहा उन्होंने कहा, “भिवाड़ी पुलिस स्टेशन पर हमारे ड्राइवर और ट्रक को हिरासत में ले लिया गया है। इस बीच गंभीर मरीज हमारे गुड़गाँव के मुहीम के तहत इंतजार कर रहे हैं।”

एक अन्य ट्वीट में, एनजीओ ने बताया कि जबकि कोरोनोवायरस के गंभीर मरीज ऑक्सीजन सिलेंडरों की प्रतीक्षा कर रहे थे और क्योंकि उनके रिसोर्स ख़त्म हो रहे थे। पुलिस ने सभी ट्रकों को रोक दिया है। हम इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते, पृष्ठभूमि में एक व्यक्ति को इसके लिए दुख व्यक्त करते हुए भी देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी के बाद, राजस्थान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और भिवाड़ी पुलिस शाखा को मामले में तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। जिसके बाद हेमकुंट फाउंडेशन ने जवाब दिया, “अभी भी हम प्रतीक्षा कर रहे हैं।”

राजस्थान पुलिस हेल्प डेस्क ने पुलिस महानिरीक्षक को इस मामले के बारे में अपडेट देने का निर्देश दिया। जवाब में, IGP जयपुर के ट्विटर हैंडल ने सूचित किया, “भिवाड़ी पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक पिकअप वाहन घाटाल गाँव के पास खड़ी थी। कार में कुल 5 खाली ऑक्सीजन सिलेंडर मिले। वाहन के चालक से संतोषजनक जवाब नहीं देने पर उसे पुलिस स्टेशन लाया गया और रात में 2:56 बजे पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया। ”

ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामलों का हवाला देते हुए, भिवाड़ी पुलिस ने हेमकुंट फाउंडेशन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को सही ठहराया। इस तथ्य को आसानी से नजरअंदाज करते हुए कि राजस्थान पुलिस के कारण गंभीर कोरोनावायरस रोगियों को मेडिकल ऑक्सीजन की आपूर्ति में देरी हुई, पुलिस के उच्चाधिकारियों ने कहा, “ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामलों को ध्यान में रखते हुए, ड्राइवर को पुलिस स्टेशन लाया गया था क्योंकि उसने संतोषजनक जवाब नहीं दिया था। हालाँकि, पूछताछ के बाद उन्हें 2:56 बजे जाने की अनुमति दे दी गई थी और वाहन को भी ले जाने की अनुमति थी।

आईपीएस अरुण बोथरा द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई थी। उन्होंने ट्वीट किया, “वाहनों को छोड़ दिया गया है। आप इसकी पुष्टि कर सकते हैं।”

दिल्लीः कोरोना की दस्तक के बाद रिलीफ फंड में आए ₹35 करोड़, संक्रमण रोकने पर केजरीवाल सरकार का खर्च ‘शून्य’

दिल्ली सरकार के एलजी/सीएम रिलीफ फण्ड मार्च 2020 से जनवरी 2021 के बीच करीब 35 करोड़ रुपए आए। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने इसमें से 17 करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए। लेकिन इसी दौरान इस फण्ड से कितना को रोकने पर खर्च हुआ, इसकी जानकारी देने में सरकार विफल रही है। यह तथ्य सूचना का अधिकार (RTI) के जवाब से सामने आया है। खास बात ये है कि दिल्ली सरकार राष्ट्रीय राजधानी में महामारी के कुप्रबंधन का आरोप केंद्र सरकार पर लगा रही है।

आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे ने इस संबंध में जानकारी माँगी थी। ऑपइंडिया से बात करते हुए विवेक ने बताया कि उन्होंने मार्च 2020 से सीएम/एलजी राहत कोष में आए धन और उसके उपयोग को लेकर जानकारी माँगी थी। इसके लिए उन्होंने दिल्ली सरकार के पास दो आरटीआई आवेदन दिए थे।

पहला आरटीआई नवंबर 2020 में और दूसरा फरवरी 2021 में दाखिल किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि आप सरकार ने इस अवधि के दौरान कोविड-19 महामारी को नियंत्रित करने पर कितना खर्च किया है।

दोनों के मिले लगभग समान जवाब

दोनों आरटीआई में उल्लेखित सवालों और मिले जवाबों का स्क्रीनशॉट विवेक ने शेयर किया है। 16 नवंबर 2020 के आरटीआई आवेदन में उन्होंने सरकार से मार्च 2020 तक एलजी/सीएम राहत कोष में जमा राशि का विवरण देने के लिए कहा था। जवाब में बताया गया कि इस दौरान फण्ड में 34.69 करोड़ रुपए जमा हुए।

नवंबर 2020 में विवेक पांडे द्वारा दायर आरटीआई आवेदन और दिल्ली सरकार का जवाब

सरकार ने फण्ड से कितना खर्च किया, इस सवाल के जवाब में बताया गया कि अब तक 17.02 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। हालाँकि दिल्ली सरकार यह बताने में विफल रही कि उन्होंने पैसा कहाँ खर्च किया। जवाब में कहा गया कि अभी डाटा को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और इसका मिलान करना बाकी है। कोविड महामारी नियंत्रण पर कितना पैसा खर्च किया गया, इसका जवाब ‘शून्य’ बताया गया।

फरवरी 2021 में विवेक पांडे द्वारा दायर आरटीआई आवेदन और दिल्ली सरकार का जवाब

तीन महीने इंतजार करने के बाद, विवेक ने केजरीवाल सरकार से बेहतर जवाब पाने की आशा में एक और आवेदन प्रस्तुत किया। दिल्ली सरकार द्वारा दिए गए उत्तरों में एकमात्र अंतर उन्हें प्राप्त राशि (34.77 करोड़ रुपये) और उनके द्वारा खर्च की गई राशि (17.27 करोड़ रुपये) में था। इस प्रश्न के लिए कि कोविड महामारी नियंत्रण पर कितना पैसा खर्च किया, जवाब फिर से वही था NIL (शून्य)।

ऑपइंडिया से बात करते हुए, विवेक ने कहा कि कोविड मामलों की बढ़ती संख्या के बीच राष्ट्रीय राजधानी में स्वास्थ्य ढाँचे के कुप्रबंधन के लिए दिल्ली सरकार लगातार केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रही है। हालाँकि, केजरीवाल के हाथ में धन होने के बावजूद, उन्होंने महामारी को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया। विवेक ने कहा, “वह सीएम रिलीफ फण्ड से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित कर सकते थे या कुछ अन्य व्यवस्था कर सकते थे।” विशेष रूप से, केजरीवाल सरकार ने उस राहत कार्य का श्रेय लेने की कोशिश की, जो पिछले साल दिल्ली सरकार के महामारी का प्रबंधन करने में विफल रहने के बाद केंद्र सरकार द्वारा किया गया था। महामारी की दूसरी लहार के दौरान भी, उन्होंने (केजरीवाल) उसी रणनीति को अपनाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहे।

दिल्ली सरकार ने 2021 में विज्ञापनों पर खर्च किए 150 करोड़

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने पिछले कुछ महीनों में प्रिंट, टेलीविजन और ऑनलाइन मीडिया के विज्ञापनों पर करोड़ों खर्च किए हैं। केवल 2021 में विज्ञापनों पर 150 करोड़ रुपए खर्च किए गए, जो दिखाते हैं कि दिल्ली सरकार की प्राथमिकताएँ क्या हैं। अकेले मार्च में, सरकार ने विज्ञापनों पर 92.48 करोड़ रुपए खर्च किए। एक ट्विटर उपयोगकर्ता ने कहा कि उसने गिना कि टीवी पर छह घंटे के भीतर 15 बार विज्ञापन चलाए गए।

25 अप्रैल को दिल्ली में 22933 नए कोरोना केस सामने आए। अब तक राज्य में 10,27,715 कोविड-19 के मामले आ चुके हैं, जिनमें से 9,18,143 ठीक हो चुके हैं। राज्य में 94,592 ऐक्टिव केस हैं और 14248 लोग अपनी जान गँवा चुके हैं। 25 अप्रैल को ही 350 लोगों की मौत हुई है। पिछले एक हफ्ते के दौरान पॉजिटिव रेट बढ़कर 30 फीसदी हो गया है। पिछले दो हफ्ते के दौरान वैक्सीन लगाए जाने वालों की भी संख्या घटी है। 10 अप्रैल से राज्य द्वारा 1,05,918 डोज जारी किए गए, जिनमें से दिल्ली 1 लाख/दिन का आँकड़ा भी नहीं पार कर पाई। कई दिन तो 50 हजार टीके भी नहीं लग सके।

इधर डोभाल की जय-जय, उधर डैमेज कंट्रोल में जुटा अमेरिकी अमला: रॉ मेटेरियल के साथ भारत का ‘सच्चा साथी’ दिखने की होड़

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने अमेरिकी समकक्ष जेक सुल्लिवन से बात की। इसके 24 घंटे के भीतर भारतीय डिप्लोमेसी ने कमाल कर दिया और अमेरिका कोरोना वैक्सीन के लिए कच्चा माल देने को राजी हो गया। इसके बाद से डोभाल ट्विटर पर ट्रेंड में हैं और उनके प्रभाव की चौतरफा सराहना हो रही है। दूसरी ओर, रॉ मेटेरियल की सप्लाई रोकने के कारण चौतरफा दबाव में आया अमेरिकी प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ है।

NSA लेवल की वार्ता के बाद खुद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बायडेन ने ट्वीट कर कहा कि जिस तरह से भारत ने अमेरिका को तब सहायता भेजी थी, जब वहाँ के अस्पताल कोरोना की शुरुआती लहर के दौरान ही गहरे तनाव में थे, ठीक उसी तरह ज़रूरत के इस समय में वे भारत की मदद करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति, स्टेट सेक्रेटरी और डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी, NSA जैसे शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने भी भारत के समर्थन में ट्वीट किया है। हर ट्वीट में त्वरित मदद का आश्वासन और भारत के लोगों के साथ अमेरिका के होने की बात कही गई है।

पहले तो अमेरिका ने भारत को वैक्सीन बनाने के लिए ज़रूरी रॉ मैटेरियल्स की सप्लाई देने से इनकार कर दिया था, वहीं अब वहाँ की पूरी की पूरी सरकार ही डैमेज कंट्रोल मोड में है और राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, स्टेट सेक्रेटरी और डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी के अलावा NSA ने भी भारत के समर्थन में ट्वीट किया। हर ट्वीट में त्वरित मदद का आश्वासन और भारत के लोगों के साथ अमेरिका के होने की बात कही गई।

अमेरिकी NSA जेक सुल्लिवन ने कहा कि उन्होंने अपने भारतीय समकक्ष अजीत डोभाल से बात की है और लगातार बढ़ रहे कोविड-19 संक्रमण के मामलों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि इस दौरान दोनों अधिकारियों में एक-दूसरे के करीबी संपर्क में रहने पर सहमति बनी। जेक ने कहा कि अमेरिका इस परिस्थिति में भारत के साथ खड़ा है और हम उसकी सहायता के लिए अधिक संसाधन और सप्लाई उपलब्ध करा रहे हैं।

उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस ने लिखा, “इस भयानक कोविड-19 संक्रमण के दौरान ज़रूरी चीजों की अतिरिक्त त्वरित सपोर्ट एवं सप्लाई के लिए अमेरिकी सरकार भारत के साथ मिल कर काम कर रही है। जहाँ हम सहायता भी कर रहे हैं, हम भारत के लोगों के लिए प्रार्थना भी करते हैं, वहाँ के बहादुर स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भी।” जैसा कि आप देख सकते हैं, अमेरिकी सरकार के नेताओं और अधिकारियों में भारत के समर्थन में ट्वीट्स करने की होड़ सी मची है।

अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट एंटोनी ब्लिंकेन ने लिखा, “इस भयानक कोविड-19 लहर में हमारा हृदय भारतीयों के साथ है। हम भारत सरकार में अपने साझेदारों के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। हम त्वरित रूप से भारत के लोगों और वहाँ के स्वास्थ्य सिस्टम के नायकों को अतिरिक्त सहायता मुहैया कराएँगे।” डिप्टी स्टेट सेक्रेटरी वेंडी आर शरमन ने कहा कि वो विदेश सचिव हर्ष शृंगला और एम्बेसडर तरनजीत सिंह संधू से लगातार संपर्क में हैं।

यूनाइटेड स्टेटस ने थेराप्यूटिक्स, रैपिड डायग्नोसिस टेस्ट किट्स, वेंटिलेटर्स और PPE भी उपलब्ध कराने की भी बात कही है। 2022 के अंत तक भारत में वैक्सीन बनाने वाली BioE कम से कम 100 करोड़ वैक्सीन के डोज का निर्माण कर सके, इसके लिए US का डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन (DFC) वित्तीय सहायता मुहैया कराएगा। इसके अलावा वहाँ के सेंटर ऑफ डिजीज कंट्रोल (CDC) और USAID के विशेषज्ञों की एक टीम भारत के साथ मिल कर काम करेगी।

american officials in damage control mode tweets in support of india after vaccine raw materials export

प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना के उपचार का खर्च उठाएगी योगी सरकार: नोएडा में 200 बेड खाली कराए, बेवजह भर्ती कर रखे थे मरीज

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार कोरोना के खिलाफ लड़ाई में लगातार जोर-शोर से लगी हुई है। बेड उपलब्ध होने पर कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल संक्रमित को भर्ती करने से मना करे यह सुनिश्चित करने को मुख्यमंत्री ने कहा है। साथ ही सरकारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने पर संबंधित अस्पताल मरीज को निजी चिकित्सालय में भेजे, ऐसी व्यवस्था को भी कहा है।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, प्राइवेट हॉस्पिटल में मरीज भुगतान के आधार पर उपचार कराने में यदि सक्षम नहीं होगा, तो उस दशा में राज्य सरकार ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत कम से कम दर पर वहाँ उसके इलाज का भुगतान करेगी। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि उपचार के अभाव में किसी भी मरीज का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। अगर दुर्भाग्य से मरीज की मौत होती है तो सरकार अपने खर्च से उसके धर्म के हिसाब से अंतिम संस्कार कराएगी।

यूपी सरकार ने कहा है कि राज्य में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। कई अख़बारों के संपादकों के साथ हुए वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य के किसी भी सरकारी या निजी कोविड अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी नहीं है। उन्होंने ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग को ज़रूर समस्या बताया, साथ इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही। ऑक्सीजन की डिमांड, सप्लाई और डिस्ट्रीब्यूशन की लाइव ट्रैकिंग और ऑडिट के लिए IIT कानपुर, IIT BHU और IIM लखनऊ के साथ मिल कर काम किया जा रहा है।

खबर ये भी है कि सनसनी पैदा करने के लिए नोएडा के कुछ निजी अस्पतालों ने ऑक्सीजन व मेडिकल उपकरणों की कमी की बात फैलाई थी, जबकि ऐसी बात नहीं थी। उन्होंने कई ऐसे मरीजों को भर्ती कर रखा था, जिन्हें हॉस्पिटल में रहने की ज़रूरत ही नहीं। ऐसे कई अस्पतालों का निरीक्षण कर DM ने उनकी खिंचाई की और करीब 200 ऐसे बेड्स खाली कराने को कहा। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बिना ज़रूरत के ही कई लोग अस्पताल के बेड्स पर कब्ज़ा कर के बैठे हुए थे।

जिन अस्पतालों में इस प्रकार की गड़बड़ी पाई गई, वे हैं – GIMS यथार्थ, कैलाश, शारदा, जेपी, फोर्टिस, प्रकाश, सेक्टर 39 कोविड अस्पताल, इण्डोगल्फ, JR हॉस्पिटल, SRS, सूर्या और मेट्रो हॉस्पिटल शामिल हैं। ऐसे अस्पतालों पर कार्रवाई होगी जो बिना ज़रूरत के मरीजों को बेड्स दे रहे हैं। साथ ही कोविड मरीजों को लौटाने पर भी कार्रवाई होगी।