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राहुल गाँधी की रैली में भीड़ के लिए दाढ़ी वाले की वायरल वीडियो: ‘2025 की तलवार…’ से बनाया डर का माहौल

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी और उनके सार्वजानिक भाषणों में जुटने वाली भीड़ अक्सर चर्चा का विषय रहती है। इसी के चलते कॉन्ग्रेस पार्टी और इसके कार्यकर्ता यह प्रयास करते देखे जाते हैं कि जब जिस शहर में राहुल गाँधी बोलें, तो वहाँ श्रोता कम से कम ‘ठीक-ठाक’ मात्रा में नजर आ जाएँ।

इस बार राजस्थान में 13 फरवरी को राहुल गाँधी की एक रैली हुई, जिसमें ‘भीड़ जुटाए जाने’ वाली रणनीति एक वायरल वीडियो के जरिए बहस का विषय बनी हुई है। ठीक एक साल पहले भी इसी तरह के आरोप राहुल गाँधी की रैलियों में भीड़ के जुटान को लेकर राजस्थान सरकार पर लगे थे। आरोप यह था कि राहुल गाँधी की रैली में भीड़ जुटाने के लिए एक ‘वायरल’ आदेश में कॉलेज की कक्षाएँ नहीं लगने की बात कही गईं थीं।

इसे लेकर तब भारी बवाल भी हुआ था और भाजपा ने फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप पर इस आदेश की फोटो के साथ राजस्थान की राज्य सरकार पर रैली में भीड़ जुटाने के लिए सत्ता का दुरुपयोग करने के आरोप लगाए थे। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने रिट्वीट कर उठाया मुद्दा था।

ऐसे में, अब एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि एक मजहबी गुरू लोगों से राहुल गाँधी की रैली में भारी मात्रा में इकठ्ठा होने के लिए कह रहा है।

ट्विटर पर ‘हम लोग We The People’ (@humlogindia) नाम के एक ट्विटर यूजर ने ये वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “आखिर कॉन्ग्रेस का विरोध क्यों जरूरी है.. राजस्थान में राहुल गाँधी की रैली के लिए भीड़ इकट्ठी करने के लिए बाकायदा मस्जिदों से 2025 का डर दिखाकर रैली में इकट्ठा होने का ऐलान किया गया।”

इस वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मंच से कह रहा है, “जनाब राहुल गाँधी, राजस्थान के मुख्यमंत्री जनाब अशोक गहलोत साहब और बहुत सारे मंत्री आ रहे हैं.. और इस मौके पर, जो टाइम दिया गया है… शहर में ऐलान भी हो रहे हैं, उसका आप ध्यान रखें और 13 फरवरी को सुबह 11 बजे अपने काम बंद कर के राज पब्लिक स्कूल के पास सभास्थल पर पहुँचकर अपनी जिंदादिली का सबूत पेश करें और एकजुटता का परिचय दें। ये इसलिए भी जरुरी है क्योंकि आपके सर पर 2025 की भी तलवार लटक रही है।”

हालाँकि, इस वायरल वीडियो के वास्तविक स्रोत और तारीख की पुष्टि नहीं की गई है लेकिन ट्विटर पर इस वायरल वीडियो को बड़े स्तर पर शेयर किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यही असली सेक्यूलरिज़्म है। वहीं, कुछ लोग इस वीडियो को लेकर कॉन्ग्रेस समर्थकों और वामपंथियों से भी सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर मुस्लिम समुदाय के लोग कॉन्ग्रेस को वोट क्यों देते हैं?

एक ट्विटर यूजर ने पूछा है कि यही बात अगर किसी मंदिर में पुजारी ने कही होती तो?

वास्तव में, लोगों के बीच यह वीडियो इस कारण वायरल हो रहा है क्योंकि उनका मानना है कि वीडियो में नजर आ रहा दाढ़ी वाला व्यक्ति एक मौलवी है और वो मस्जिद से 2025 (माना जा रहा है कि इस व्यक्ति का इशारा 2024 के आम चुनाव की ओर था) के आम चुनाव को ध्यान में रखते हुए राहुल गाँधी की रैली में शामिल होने की अपील कर रहा था।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी गत 13 फरवरी को राजस्थान के अपने दौरे के दूसरे दिन अजमेर के पास रूपनगढ़ में किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने तीन केंद्रीय कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदुस्तान का सबसे बड़ा व्यापार कृषि का है। उन्होंने कहा कि कानून रद्द किए बगैर अब सरकार से बात नहीं होगी।

एमएस गोलवलकर… वो ‘गुरुजी’ जिनका संगठन मंत्र और तंत्र आज भी प्रासंगिक: पटेल और वाजपेयी दोनों जिनके कायल

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अधिकतर कार्यक्रमों में मुख्यतः तीन चित्र मंच पर दिखाई देते हैं। सबसे बाईं ओर डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का, उसके बाद बीच में भारत माता का और सबसे दाहिनी ओर माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर का।

स्वाभाविक है डॉ. हेडगेवार संघ के संस्थापक रहे हैं और भारत माता संघ के स्वयंसेवकों के लिए आराध्य हैं, इसलिए उनका चित्र लगाया जाता है। तीसरा चित्र एमएस गोलवलकर का होता है, जो मात्र उनके संघ के द्वितीय सरसंघचालक होने के नाते नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व की विशेताओं के कारण लगाया जाता है।

आज यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि किन कारणों से अपनी मृत्यु के इतने वर्षों के बाद भी एमएस गोलवलकर लाखों स्वयंसेवकों के लिए मार्गदर्शक हैं और क्यों आज भी हर संघ स्वयंसेवक उनको ”गुरुजी” के नाम से पुकारता है। क्योंकि वो गोलवलकर ही थे, जिनके कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लम्बे संघर्ष और उथल-पुथल के बाद भी आज देश का ही नहीं अपितु दुनिया का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन बन पाया है।

आज के परिप्रेक्ष्य में उनके संगठन तंत्र और मंत्र की विशेषता जानना और भी प्रासंगिक हो जाता है क्योंकि उनके मार्गदर्शन में स्थापित सभी संगठन चाहे वह किसी भी क्षेत्र में हो… जैसे शिक्षा, सेवा, वनवासी कल्याण, मजदूर उत्थान, राजनीति या अन्य हर क्षेत्र में… वह देश या दुनिया के सबसे मुख्य संगठनों में से एक है।

एमएस गोलवलकर 1940–1973 तक संघ के सरसंघचालक रहे और यह वही दौर था, जब संघ ने स्वतंत्रता संग्राम में भी भाग लिया और बाद में महात्मा गाँधी का हत्यारा होने का आरोप भी सहा सबूतों के अभाव में फिर प्रतिबंध हटाया भी जाता है और 1962 के भारत-चीन युद्ध में संघ स्वयंसेवकों की भूमिका देख कर 1963 में राजपथ पर परेड में भाग लेने के लिए बुलाया भी जाता है।

आज संघ का स्वयंसेवक राष्ट्रपति से लेकर प्रधानमंत्री तक का दायित्व निभा रहा है। यह “गुरुजी” की कार्यशैली ही थी, जिसके कारण भारत के प्रथम गृहमंत्री सरदार पटेल दिनांक 11 अगस्त 1948 को उनके लिखे पत्र के उत्तर में लिखते हैं,

”राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने संकटकाल में हिन्दू समाज की सेवा की, इसमें कोई संदेह नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में, जहाँ उनकी सहायता की आवश्यकता थी, संघ के नवयुवकों ने स्त्रियों तथा बच्चों की रक्षा की तथा उनके लिए काफी काम किया।”

एमएस गोलवलकर ऐसे संगठनकर्ता थे, जिनके संगठन तंत्र और मंत्र चुनौतियों का सामना करना भी सिखाते हैं और साथ ही साथ दृढ़ होकर विस्तार का मार्ग भी दिखलाते हैं। अपने कार्य के प्रति अद्भुत वैचारिक स्पष्टता थी गोलवलकर में। यह उनकी वैचारिक स्पष्टता और स्पष्ट दृष्टिकोण ही था, जिसके कारण वह इतने विशाल जन समर्थन और प्रसिद्धि पाने के बाद भी राजनीति से दूर रह कर जीवन भर मनुष्य निर्माण के कार्य में, व्यक्ति को समाज से जोड़ने की साधना में और हिन्दू समाज को एकत्रित करने में लगे रहे।

जब गोलवलकर 1940 में संघ के द्वितीय सरसंघचालक बने, तब तक संघ का कार्य देश के हर प्रान्त और जिले तक नहीं पहुँचा था। लेकिन अपने दायित्व पर रहते हुए उन्होंने इस लक्ष्य को पूर्ण किया। कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण, उनका चिंतन, उनके सुख-दुःख में सहभागी होना… यह एमएस गोलवलकर की दिनचर्या का अहम भाग बन गया था। उन्होंने अपने साथी कार्यकर्ताओं को उपदेश नहीं अपितु स्वयं के उद्धरण से प्रेरित किया।

डॉ कृष्ण कुमार बवेजा द्वारा लिखित पुस्तक ‘श्री गुरुजी – व्यक्तित्व एवं कृतित्व’ के अनुसार “गुरुजी” को यह कदापि पसन्द नहीं था कि कोई भी सेवाकार्य जनता पर उपकार की भावना से किया जाए। उनके अनुसार,

”सेवा हिन्दू जीवन-दर्शन की प्रमुख विशेषता है। निःस्वार्थ सेवा ही उसका स्वभाव है। जहाँ स्वार्थ है, वह सेवा नहीं हो सकती। स्वार्थ का प्रवेश होते ही, वह सेवा न रह कर व्यापार बन जाती है।”

यह एमएस गोलवलकर की असीम साधना ही थी, जिसके कारण संघ इतने उथल-पुथल के बाद भी राष्ट्रजागरण का केंद्र-बिंदु बना और भारत की जनता का आकर्षण केंद्र ही नहीं बल्कि आशा का केंद्र भी बन पाया। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहते थे कि ”श्री गुरुजी” के महान व्यक्तित्व में समर्थ स्वामी रामदास की भक्ति तथा शिवाजी महाराज की शक्ति का अपूर्व संगम था।

आत्मविस्मृत हिन्दू समाज को स्वत्व का साक्षात्कार करा कर “गुरुजी” ने उसे संगठित शक्तिशाली तथा आत्मविश्वास से परिपूर्ण बनाने के राष्ट्रकार्य के लिए अपने शरीर का कण-कण और जीवन का क्षण-क्षण समर्पित कर दिया। आज भी लाखों संघ स्वयंसेवक एमएस गोलवलकर को ”गुरुजी” के नाम से पुकारते हैं और वह सैकड़ों युवाओं को राष्ट्र समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर कार्टून, पैगंबर मोहम्मद के नाम पर माफी: हिंदू-घृणा से सनी BBC हिंदी की दोहरी मानसिकता

असहिष्णुता, अभिव्यक्ति की आजादी और फासीवाद, इस देश के वामपंथी मीडिया से लेकर उदारवादी गिरोह के बीच ये जुमले अक्सर लोकप्रिय विषय रहे हैं और वो भी सिर्फ भारत के संदर्भ में। इस बीच, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का ध्वजवाहक होने का दावा करने वाले वामपंथी मीडिया संस्थान अक्सर दक्षिणपंथी सत्ता और हिन्दुओं पर असहिष्णुता बढ़ाने का भी आरोप लगाते आए हैं। ये और बात है कि इसी बहाने हिन्दुओं के खिलाफ जिसने भी, जब और जिस तरह से चाहा, उसी तरह से नफरत फैलाई गई।

कभी त्रिशूल और शिवलिंग पर कंडोम चढ़ाकर हिन्दू-घृणा को अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर परोसा गया, तो कभी हिन्दुओं की आराध्य देवी दुर्गा को अपमानित किया जाता रहा। ऐसा सिर्फ खबरों में ही हिन्दू-घृणा परोसकर नहीं, बल्कि कार्टून और विषैले लेखों, यूट्यूब वीडियो से लेकर टीवी चैनल्स और फिल्मों के माध्यम से भी हिन्दू धर्म को निशाना बनाया जाता रहा। मगर कभी शायद ही इन बातों को लेकर किसी ने कोई आपत्ति व्यक्त की हो।

लेकिन इस बार इन्हीं वामपंथी संगठनों में से एक, प्रोपेगेंडा मशीन बीबीसी को मुस्लिम संगठनों ने निशाने पर लिया है। मजहबी संगठन राजा अकादमी की आपत्ति के बाद बीबीसी हिंदी ने अपने चैनल से एक ऐसे वीडियो को डिलीट कर दिया है, जिसमें बीबीसी द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का चित्र दिखाया गया था। बीबीसी ने अपनी इस ‘भूल’ के लिए इस मजहबी संगठन से बाकायदा माफ़ी भी माँगी है। बीबीसी के इस वीडियो का शीर्षक था- “पाकिस्तान के इस कदम से अहमदिया मुस्लिमों में डर किसलिए है?”

लेकिन इसी बीबीसी ने हिन्दुओं की आस्था को एक नहीं बल्कि अनेकों बार निशाना बनाया है और इसके पीछे आधार ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ को बनाया गया। ऐसे ही कुछ उदाहरण, जब-जब बीबीसी ने अपने हिन्दू विरोधी अजेंडे को हवा देने का काम किया, नीचे दी गई तस्वीरों में देख सकते हैं –

बीबीसी ने एक ऐसे ‘कार्टून’ का समर्थन किया था, जिसमें श्रीराम से सीता को यह कहते दिखाया गया था कि वो इस बात से खुश हैं कि उन्हें रावण ने कैद किया था, ना कि रामभक्तों ने। इस कार्टून का मकसद ये साबित करना था कि रामभक्त बलात्कारी होते हैं।

‘जय श्री राम’ को बीबीसी ने बताया था ‘मर्डर क्राई’ –

मॉब लिंचिंग में बीबीसी और उसके ‘कार्टूनिस्ट्स’ का ‘जय श्री राम’ वाला नैरेटिव –

“BBC HINDI CARTOON: मंदिर बनता रहेगा, पहले ठेकेदार तो लड़ लें…” –

फ़ोटो का कोई वर्णन उपलब्ध नहीं है.

इन खबरों/कार्टून्स/वीडियो की ख़ास बात और हिन्दू धर्म की खूबसूरती यही है कि ये सभी आज भी बीबीसी की वेबसाइट पर मौजूद हैं।

गाड़ी से निकाल वकील पति-पत्नी को काट डाला: TRS नेता समेत 3 पर FIR, अवैध जमीन और मंदिर निर्माण का मामला

तेलंगाना के पेडापल्ली जिले स्थित हाइवे पर मंगलवार (17 फरवरी 2021) की दोपहर वकील दंपत्ति जी वामन राव (52) और जी नागमणि (48) की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई। अब इस मामले में कई बड़े खुलासे हो रहे हैं। हत्या में टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) नेता कुंता श्रीनिवास का नाम सामने आया है।

एफ़आईआर के मुताबिक़ घटना के पहले आरोपित वेल्दी वसंथा राव ने टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास और अक्कापका कुमार के साथ मिल कर वकील दंपत्ति की हत्या का षड्यंत्र रचा। इसके पीछे की वजह ये थी कि वो कथित तौर पर गुंजापडूगू गाँव में पेदम्मा मंदिर और अवैध घर का निर्माण करवा रहा था।

ज़ोन आईजी वाई नागी रेड्डी के मुताबिक़ टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास का मंदिर निर्माण को लेकर वामन राव से विवाद था। वामन राव के ड्राइवर ने भी बयान दिया, जिसके मुताबिक़ वामन राव ने टीआरएस नेता का नाम लिया था। फिलहाल पुलिस इस मामले में 4 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें 3 का नाम एफ़आईआर में मौजूद है।

पति-पत्नी दोनों ही तेलंगाना हाईकोर्ट में वकालत करते थे। दरअसल मंगलवार को जी वामन राव और उनकी पत्नी जी नागमणि अपनी कार में मंथानी कोर्ट से हैदराबाद जा रहे थे। कलवाचर्ला गाँव के नज़दीक बदमाशों ने जबरन उनका रास्ता रोका। इसके बाद उन्होंने वकील दंपत्ति पर धारदार हथियार से हमला कर दिया और उनके टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

चेतावनी: नीचे एम्बेड किए ट्वीट का वीडियो खौफनाक है

घायल वकील दंपत्ति को पेडापल्ली स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ दोनों की मृत्यु हो गई। फ़िलहाल टीआरएस नेता कुंता श्रीनिवास को पार्टी से निलंबित कर दिया गया है। 

इस पूरे प्रकरण का एक और पहलू है। एक मामला था, जिसमें हिरासत के दौरान मृत्यु हुई थी। इसकी जाँच के लिए वकील दंपत्ति ने याचिका दायर की थी। इस संबंध में उन्होंने पुलिस पर प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया था। इस मामले में जी वामन राव और जी नागमणि ने खुद को ख़तरा बताया था।

वकील दंपत्ति के एक मित्र का कहना था कि दोनों ने ज़मीन से जुड़े घोटालों में कई स्थानीय नेताओं के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। मृतक जी वामन राव के पिता किशन राव ने ही रामागिरी पुलिस थाने में इस मामले को लेकर एफ़आईआर दर्ज कराई। 

किशन राव ने एफ़आईआर में कहा है कि उनके बेटे और बहू की हत्या इसलिए की गई क्योंकि वह जमीन से जुड़े कई घोटालों को उजागर करने वाले थे। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए किशन राव ने कहा:

“मैंने अपनी एफ़आईआर में 3 लोगों का नाम लिखा है। जिसमें से एक सत्ताधारी दल टीआरएस के मंथानी मंडल का अध्यक्ष है। मुझे ऐसा लगता है कि मेरे बेटे और बहू की हत्या के पीछे इन तीनों का हाथ है। मेरा बेटा गुमशुदा लोगों की शिकायत का ड्राफ्ट तैयार कराने में लोगों की मदद करता था। अगर पुलिस कार्रवाई नहीं थी तो वह अदालत में याचिका दायर करता था, जब उसे ज़मीन पर कब्ज़े या अवैध गतिविधियों के बारे में पता चलता था तो वह शांत नहीं बैठता था।” 

         

पैगंबर मोहम्मद का फोटो दिखाया, BBC हिंदी ने माँगी माफी: मजहबी संगठन ने धमकाया, खौफ या पत्रकारिता?

मुस्लिम संगठन रजा अकादमी (Raza academy) की आपत्ति के बाद बीबीसी हिंदी (BBC) ने अपने यूट्यूब चैनल और फेसबुक पेज से एक ऐसे वीडियो को डिलीट कर दिया है, जिसमें BBC द्वारा कथित तौर पर पैगंबर मोहम्मद का चित्र दिखाया गया था। BBC ने अपनी इस ‘भूल’ के लिए इस मजहबी संगठन से बाकायदा माफ़ी भी माँगी है। बीबीसी के इस वीडियो का शीर्षक था- “पाकिस्तान के इस कदम से अहमदिया मुस्लिमों में डर किसलिए है?”

TOI Noida/Ghaziabad edition, date 18 Feb, page 13

दरअसल, मुंबई स्थित मुस्लिम संगठन ने बीबीसी हिंदी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। तहफ़ुज़ ए नामूस ए रिसालत (टीएनआर) बोर्ड के नेताओं ने मुंबई के पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह से मुलाकात की और सोशल मीडिया पर पैगंबर मुहम्मद को चित्रित करने के लिए बीबीसी हिंदी समाचार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।

मुंबई पुलिस को सौंपे इस ज्ञापन में TNR बोर्ड के अध्यक्ष हज़रत सईद मोईन मिया ने लिखा कि बीबीसी हिंदी समाचार को अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से पैगंबर मोहम्मद के चित्र वाला ये वीडियो हटाना होगा और मुस्लिमों से माफी माँगनी होगी। उन्होंने आगे लिखा है कि बीबीसी हिंदी समाचार को मुस्लिम समुदाय को भविष्य में इस तरह के कृत्यों से बचना होगा।

मजहबी संगठन का कहना है कि इस वीडियो में बीबीसी द्वारा एक चित्र दिखाया गया है और उसमें इसका नाम पैगम्बर मोहम्मद बताया है, जबकि यह इस्लाम के अनुसार ईशनिंदा है। टीएनआर नेताओं ने कमिश्नर परमबीर सिंह से शिकायत पर कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही इन लिंक और यूआरएल को जल्द से जल्द ब्लॉक करने का भी अनुरोध किया।

आमदार नारायण वाघ (@MLANarayanWagh) नाम के ट्विटर यूजर ने तमाम स्क्रीनशॉट के साथ ही एक यूट्यूब वीडियो की लिंक भी शेयर की है। इस यूट्यूब वीडियो में दावा किया गया है कि यह संगठन की आपत्ति के बाद बीबीसी हिंदी द्वारा टीएनआर नेता मोहम्मद सईद नूरी के साथ बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग है।

इस वीडियो में एक ओर से एक व्यक्ति, जो कि बीबीसी का सीनियर जर्नलिस्ट होने का दावा किया है, कहते हैं, “मैं इकबाल अहमद बीबीसी न्यूज़ हिंदी से। मेरे दोस्त ने आपसे बात की होगी। मैं खुद अभी छुट्टी पर हूँ, मेरे वालिद की बरसी है। लेकिन मुझे खबर मिली है। हम बीबीसी की तरफ से बहुत शर्मिंदा हैं, हम लोगों की तरफ से गलती हुई है। क्या है, कैसा है.. ये लंदन से मामला है। हम भी कलमागोह हैं, गलती पर हम लोग बिलकुल जाँच करवा रहे हैं। आपसे गुजारिश है कि आपके जो भी ऐतराज हैं, हम शत प्रतिशत अपनी गलती मानते हैं। हम इस वीडियो को हटवा भी रहे हैं। और लंदन से जैसे ही वो लोग आ जाएँगे, उसके बाद वहाँ से वो चीजें हटा ली जाएँगी। ऐसी कोई मंशा नहीं थी। वो किसी इंसान की बेवकूफी हो सकती है। मैं आपसे छोटा हूँ, इस मामले को रफा-दफा करा दिए जाए। कैसे भी इस बात को खत्म कर दिया जाए। और सबसे बड़ी बात कि गलती हुई है।”

दूसरी ओर से आवाज आती है, “हमारा प्रोग्राम था बीबीसी ऑफिस जाने का लेकिन आप कह रहे हैं कि दो-चार घंटे में वीडियो हट जाएगा….”

इस पर पहला व्यक्ति कहता है, “मैं खुद उसी संस्था से जुड़ा हूँ। मेरे वालिद की बरसी है। मुझे उठाया गया कि आप हमारी तरफ से बात कीजिए। वीडियो बिलकुल हट जाएगा। ये लंदन का ममला है, वक्त का फासला है और कुछ नहीं। चार-पाँच घंटे का समय लगेगा, लेकिन हटा दिया जाएगा। किसी स्टाफ की गलती से ये हो गया। हम ये अभी करवा देते हैं।”

इसके बाद सोशल मीडिया पर बीबीसी का ये वीडियो अब नजर नहीं आ रहा है। वीडियो की यूट्यूब लिंक पर भी यही सन्देश नजर आ रहा है कि ये वीडियो अब उपलब्ध नहीं है। हालाँकि, सोशल मीडिया पर जिन लोगों द्वारा यह वीडियो शेयर किया गया था, वो ट्वीट अब भी ट्विटर पर मौजूद हैं।

बीबीसी की वेबसाइट पर यह रिपोर्ट अभी भी मौजूद है। इसका यह भी कारण हो सकता है कि मजहबी संगठन की आपत्ति सिर्फ वीडियो में पैगम्बर मोहम्मद के चित्र को दिखाए जाने को लेकर थी।

महाराष्ट्र: एक ही दिन में 5000 से ज्यादा कोरोना केस, स्वास्थ्य मंत्री संक्रमित- लॉकडाउन के साथ जारी हुईं नई गाइडलाइंस

महाराष्ट्र सरकार ने बृहस्पतिवार (फरवरी 18, 2021) को कोरोनो वायरस मामलों में एक बार फिर उछाल आने के बाद राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में लॉकडाउन सहित नए कोरोना दिशानिर्देशों की घोषणा की। महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

राजेश टोपे ने अपने कोरोना संक्रमित होने की जानकारी अपने ट्विटर अकाउंट से सोशल मीडिया पर दी है। उनका कहना है कि उनकी तबीयत पूरी तरह से ठीक है और वह जल्द ही कोरोना से ठीक हो जाएँगे।

उल्लेखनीय है कि मुंबई समेत महाराष्ट्र राज्य में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक बार फिर तेजी से बढ़ रहे हैं। दो दिन पहले ही अकेले मुंबई में कोरोना संक्रमण के 700 नए मरीज सामने आए थे। इसके बाद महाराष्ट्र में सख्ती बढ़ा दी गई है।

यवतमाल में 10 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई है, वहीं अमरावती में सप्ताहांत में लॉकडाउन रहेगा। बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने राजधानी मुंबई के लिए नए कोविड -19 दिशानिर्देशों को भी नए सिरे से जारी किया है। सुरक्षा दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया जाएगा।

बीएमसी ने सार्वजनिक रूप से मास्क के बिना पाए जाने पर लोगों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। जिम और अन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ कोरोना दिशानिर्देशों का पालन ना करने पर कार्रवाई की जाएगी।

अमरावती और यवतमाल, ये दोनों ही विदर्भ में आते हैं। इस इलाके में फरवरी माह की शुरुआत से ही कोविड -19 मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज हो रही हैं। सख्ती बढ़ाने का फैसला ऐसे समय में लिया गया जब एक ही दिन में महाराष्ट्र में 5,427 नए कोविड -19 मामलों की जानकारी सामने आई। आँकड़ों में यह उछाल लगभग दो महीने से अधिक समय बाद देखा गया है।

यवतमाल जिले में प्रशासन ने दस दिनों के लिए सार्वजनिक मीटिंग्स पर रोक लगाने के साथ ही हाल ही में खुले स्कूलों को बंद करने का आदेश दिया है। यवतमाल कलेक्टर डीएम सिंह ने कहा कि यवतमाल जिले के स्कूल (कक्षा 5 से 9 के छात्रों के लिए), कॉलेजों और कोचिंग क्लासेस 28 फरवरी तक बंद रहेंगे, जबकि 50 लोगों को ही शादी समारोहों में शामिल होने की अनुमति होगी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थल खुले रहेंगे लेकिन कोविड -19 प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू किया जाएगा।

CM योगी ने माँगी रिपोर्ट, कहा- उन्नाव पीड़िता के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का पीड़ितों के साथ नरम रुख और गैंगस्टर, दंगाइयों और भू माफियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में जहाँ एक तरफ सीएम योगी ने उन्नाव पीड़ित के इलाज का पूरा खर्च उठाने की बात कही है, वहीं दूसरी तरफ बाहुबली माफिया कहे जाने वाले अतीक अहमद की अवैध जमीन को चुनाव आयोग को दिए जाने का निर्देश दिया है।

अतीक की अवैध जमीन पर चुनाव आयोग का वेयर हाउस बनाने का प्रस्ताव आवास विकास विभाग द्वारा दिया गया था। जिस पर अब योगी कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी है। सरकारी मुहर लगते ही योगी सरकार के राज्य में अतीक के कब्ज़े से खाली कराई गई ज़मीन पर चुनाव आयोग का वेयर हाउस बनाए जाने का रास्ता साफ़ हो गया है। अधिकारियों द्वारा जल्द ही सारी कागजी कार्रवाई पूरे होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, नए चुनाव आयोग के इस वेयर हाउस में उन सामानों को रखा जाएगा, जिन्हें चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि इसमें इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के साथ ही वीवीपैट मशीनों को भी रखा जाएगा। आयोग के कुछ अधिकारियों के बैठने का इंतजाम भी इस वेयर हाउस में किया जाएगा।

दरअसल, प्रयागराज के लूकरगंज इलाके के प्लाट नंबर 19 और 65 पर माफिया अतीक अहमद के पिता हाजी फ़िरोज़ अहमद का कब्ज़ा था। अतीक के गुर्गे इस ज़मीन पर अपनी पूरी पकड़ बनाए हुए थे और इसकी देखभाल करते थे। तकरीबन सात हज़ार स्क्वायर मीटर की इस जगह की कीमत करीब 70 लाख रूपए है।

भूमाफियाओं और बाहुबलियों पर नकेल कसते हुए योगी सरकार के अंतर्गत प्रयागराज जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन नेस्तनाबूत के तहत इस ज़मीन को अतीक के कब्जे से पिछले साल 13 सितम्बर को खाली कराया गया था। सरकारी रिकार्ड में यह ज़मीन सरकार की ही थी। अतीक के परिवार ने इस पर अवैध कब्ज़ा कर रखा था।

उन्नाव पीड़िता का पूरा खर्च उठाएगी योगी सरकार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्नाव की घटना का संज्ञान लेते हुए प्रदेश के डीजीपी एचसी अवस्थी से घटना की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दे दिए हैं। साथ ही अस्पताल में भर्ती पीड़िता का सरकारी खर्च पर बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित कराए जाने के निर्देश दिए हैं। सीएम योगी ने कहा कि पीड़िता के नि:शुल्क इलाज की व्यवस्था की जाए।

यूपी मुख्यमंत्री कार्यालय से इस संबंध में एक ट्वीट किया गया है, जिसमें कहा गया है, “UPCM योगी आदित्यनाथ ने जनपद उन्नाव की घटना का संज्ञान लेते हुए यूपी DGP से प्रकरण की रिपोर्ट तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अस्पताल में भर्ती पीड़िता का सरकारी खर्च पर बेहतर से बेहतर नि:शुल्क इलाज कराने के आदेश भी दिए हैं।”

गौरतलब है कि बुधवार (फरवरी 17, 2021) देर शाम तीन नाबालिग दलित लड़कियाँ उन्नाव के असोहा थाना क्षेत्र के बबुरहा गाँव के एक खेत में बेहोशी की हालत में मिली थी। इनमें दो की मौत हो चुकी थी, जबकि एक को सीएचसी से जिला अस्पताल और उसके बाद कानपुर रीजेंसी अस्‍पताल रेफर किया गया था।

इलाज के 12 घंटे बाद भी उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। उसे बैग और ट्यूब वेंटिलेशन पर रखा गया है। अस्पताल की चाइल्ड केयर यूनिट उसका गहनता से इलाज कर रही है। वहीं मृत पाई गई दोनों लड़कियों के पोस्‍टमॉर्टम के लिए प्रशासन ने तीन डॉक्‍टरों का पैनल बनाया था।

बता दें, उन्नाव की दोनों किशोरियों का पोस्टमार्टम हो चुका है। पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों का कहना है कि दोनों किशोरियों की मौत जहरीला पदार्थ खाने से हुई है। दोनों ने मौत से करीब 6 घंटे पहले खाना खाया था। दोनों के पेट में 100 से लेकर 80 ग्राम तक खाना मिला है। खाने में जहर होने की वजह से मौत हो गई।

पीड़िता के पिता को उठा कर ले जाने वाले वीडियो की उन्नाव पुलिस ने बताई सच्चाई, कहा- भ्रामक खबरें फैलाने पर होगी कार्रवाई

उन्नाव में दो दलित लड़कियों की मौत ने राजनीतिक रंग ले लिया है। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें एक व्यक्ति को उठाकर ले जाते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो को इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ की सरकार पीड़िता के पिता को किसी अज्ञात स्थान पर ले जा रही है।

कई मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया यूजर्स इस वीडियो को धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं। वायरल हो रहे वीडियो पर अब उन्नाव पुलिस ने स्पष्टीकरण जारी कर सोशल मीडिया पर चल रहे नैरेटिव को खारिज कर दिया।

उन्नाव पुलिस ने ‘भारत समाचार’ की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “वीडियो के संदर्भ में की गई जाँच से प्रकाश में आया कि पीड़िता के पिता को चक्कर आ जाने एवं अस्वस्थ महसूस होने पर ग्राम प्रधान द्वारा उठा कर अन्य स्थान पर ले जाया जा रहा था। वीडियो में कोई पुलिस/ SOGकर्मी नहीं है। निवेदन है कि मामले की संवेदनशीलता को दृष्टिगत रखते हुए भ्रामक तथ्यों को प्रसारित करने से बचें।”

बता दें कि भारत समाचार ने वीडियो शेयर करते हुए दावा किया था, “उन्नाव पुलिस का बड़ा कारनामा सामने। पीड़िता के पिता को उठा ले गई पुलिस। सादी वर्दी में आई पुलिस पिता को उठा ले गई। पिता को किसी से भी मिलने पर रोक लगाई। रोते-बिलखते पिता को टाँग कर ले गई पुलिस। पिता को जबरन उठा ले जाने का वीडियो।”

ऑल इंडिया महिला कॉन्ग्रेस ने भी इस वीडियो को शेयर किया। उन्होंने लिखा, उन्नाव की पीड़िता के पिता को जबरन उठाकर ले जा रही अजय सिंह बिष्ट की कठपुतली पुलिस। पीड़िता के परिवार को नज़रबंद कर, मानवधिकार कूड़े में डाल  दिए गए हैं।”

ईस्ट उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार का खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है। उन्नाव में पीड़िता के पिता को अजय बिष्ट की पुलिस उठा के ले जा रही है। अपने देश में तो इस पर आवाज़ नहीं उठेगी, कोई बाहर वाला उठाया तो ये ‘इंटर्नल मैटर’ हो जाएगा।”

इसके साथ ही भीम आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनय रतन सिंह ने इसे शेयर करते हुए लिखा, “उन्नाव में हाथरस कांड को दोहराया जा रहा है। पीड़िता के पिता को पुलिस जबरन उठाकर ले जा रही है। ये यूपी पुलिस की अत्यंत ही भयावह छवि है। योगी सरकार पर भरोसा नहीं।” इसके अलावा भी कई लोग धड़ल्ले से वीडियो को शेयर कर रहे हैं।

एक और टूलकिट से राजधानी में भारी अशांति फैलाने की साजिश में थे एक्टिविस्ट: दिल्ली पुलिस ने किया खुलासा

पर्यावरण एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग द्वारा शेयर किए गए किसानों के आंदोलन की आड़ में भारत को बदनाम करने वाले ‘टूलकिट’ गूगल दस्तावेज की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने पुष्टि की है 26 जनवरी को किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सोशल मीडिया पर टूलकिट के जरिए अशांति फैलाने वाले आरोपितों ने एक और टूलकिट तैयार की थी जिसके जरिए वो 4 और 5 फरवरी को ट्विटर पर दिल्ली में फिर से अशांति फैलाना चाहते थे।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने कहा कि टूलकिट बनाने वाले एक्टिविस्टों’ ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों को उकसाने के लिए दूसरे टूलकिट में 26 जनवरी की ट्रैक्टर रैली के दौरान हिंसा को भड़काने के लिए हैशटैग की मदद से शांति भंग करने की कोशिश करते, लेकिन वो इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

टूलिकट मामले की जाँच कर रहे पुलिसकर्मियों ने कहा कि दूसरा दस्तावेज़ निकता जैकब, शांतनु मुलुक द्वारा बनाया गया था – दो कार्यकर्ता जिन पर पहली टूलकिट बनाने और उसे साझा करने का आरोप लगाया गया है। इनमें एक यूके-आधारित कार्यकर्ता मरीना पैटरसन भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर वैश्विक आंदोलन ‘एक्‍सटिंशन रेबेलियन’ के साथ जुड़ी हैं।

मामले से जुड़े एक दूसरे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, “दूसरी टूलकिट में जिस योजना का जिक्र था उसे पूरा नहीं किया जा सका। हमें संदेह है कि इसका कारण था कि पहली ही टूलकिट गलती से स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग द्वारा 3 फरवरी को ट्वीट कर दिया गया था। दिशा रवि ने इस टूलकिट को ग्रेटा के साथ साझा किया। चूँकि Google टूलकिट दस्तावेजों में आपत्तिजनक सामग्री थी, इसलिए दिशा रवि घबरा गई, उसने ग्रेटा से ट्वीट को हटाने के लिए कहा, एडमिन राइट लिया और टूलकिट से उसका नाम हटा दिया।”

अधिकारी के आगे बताया, जाँच दल ने पहले ही Google को लिख दिया है कि दोनों टूलकिट से जुड़ी जानकारी दें जैसे कि वे वास्तव में कहाँ बनाए गए थे, उन्हें किसने प्रारूपित और संपादित किया था और किसके साथ साझा किया गया था।

टूलकिट का मामला

गौरतलब है कि पॉप स्टार रिहाना और पोर्न स्टार मिया खलीफा जैसी अन्य अंतरराष्ट्रीय हस्तियों के नक्शेकदम पर चलते हुए पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने भारत में चल रहे किसान विरोध के लिए अपना समर्थन दिखाने के लिए ट्विटर पर पोस्ट शेयर किया था।

इस दौरान ग्रेटा ने अनजाने में एक ‘टूलकिट‘ भी ट्वीट कर दिया जोकि भारत के खिलाफ एक कथित साजिश के तहत बनाया गया था। हालाँकि इस ट्वीट के बाद से ही सोशल मीडिया पर बवाल मच गया। इस टूलकिट के जरिए यह पता चला कि कैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत विरोधी ताकतें अशांति पैदा करने की कोशिश कर रही हैं।

इस पूरे खेल का खुलासा करते हुए पुलिस साइबर सेल के जॉइंट कमिश्नर प्रेमनाथ ने दिशा की गिरफ्तारी के बाद कहा था, “जैसा कि हम जानते हैं कि 26 जनवरी को बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। 27 नवंबर से किसान आंदोलन चल रहा था। 4 फरवरी को हमें टूलकिट के बारे में जानकारी मिली, जो कि खालिस्तानी सगठनों की मदद से बनाई गई थी।”

दिल्ली पुलिस ने बताया कि दिशा ने टूलकिट को एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर शेयर किया फिर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई गई। उन्होंने कहा कि टूलकिट को विश्वस्तर पर फैलाने की योजना थी और इसमें गलत जानकारियाँ दी गईं थीं।

दिल्ली पुलिस ने यह भी कहा कि मीडिया हाउसों और ‘फैक्ट चेकर्स’ के नामों का भी टूलकिट में उल्लेख है। उन्होंने कहा कि आरोपित ही यह बता पाएँगे कि पैट्रिक फ्रेडरिक का नाम टूलकिट में क्यों है।

इस टूलकिट का संबंध खालिस्तानी संगठन Poetic Justice Foundation (पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन) से है और इस टूलकिट को चार फरवरी को बनाया गया था। टूलकिट में ‘भारत की पहचान योग और चाय’ की छवि को नुकसान पहुँचाने से लेकर दूतावासों को भी नुकसान पहुँचाने की बात है। इससे भारत की छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई।

कालिंदी कुंज में 4 गायों को काट कर अवशेष मंदिर के पास फेंका, कार्रवाई न करने पर BJP और हिंदू संगठन करेंगे प्रदर्शन

दिल्ली के कालिंदी कुज इलाके से गाय को काट कर फेंकने का मामला सामने आया है। घटना कालिंदी कुंज थाने के मदनपुर खादर इलाके की है। यहाँ पर कम से कम 4 गायों को काट कर फेंकने की बात कही जा रही है।

इस बाबत ऑपइंडिया ने बीजेपी के पूर्व मंडल अध्यक्ष प्रभु नारायण से बात की। बता दें कि घटना के बारे में सबसे पहले इनको ही जानकारी मिली। जिसके बाद उन्होंने मामले को उजागर किया। उन्होंने बताया कि घटना रात के 2 से 4 बजे के बीच हुई है। उन्होंने बताया कि आरोपित ने गाय को काट कर उसके अंदर का लोथड़ा तीन-चार जगहों पर फेंक रखा है।

वो कहते हैं, “कुल मिलाकर आरोपितों ने 4 गायों को काटा। एक उन्होंने शीतला माता मंदिर पॉकेट-1 के पास फेंका। दूसरे गाय का अवशेष उन्होंने डी ब्लॉक के पार्क के पास स्थित मंदिर के पास फेंके। इसके अलावा कंचनकुंज के नाले के पास उन्होंने गाय का सिर और बाकी अपशिष्ट फेंके। वहाँ पर हमें एक आईडी कार्ड भी मिला था। जो हमने ACP को दे दिया है।”

उनका कहना है कि आरोपित गाय के अपशिष्ट को फेंकने के लिए वहाँ गए थे, मगर गलती से उन्होंने उसका सिर भी फेंक दिया, जो कि वो फेंकते नहीं हैं। यहीं पर नाले में उसका पर्स गिर गया। जिसमें उसके आईडी कार्ड थे। बरामद हुई आईडी कार्ड के मुताबिक उसका नाम इसानुल होडा और उसके पिता का नाम अब्दुल जलील है। 

प्रभु नारायण ने कहा कि ये लोग इधर-उधर घूमती गायों को कुछ खिला देते हैं, जिससे वह अधमरा होकर वहीं पड़ी रहती है। इसके बाद वो वहीं पर उसे काटकर गाड़ी में भर कर चल देते हैं। अवशेष को फेंक देते हैं।

कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फिलहाल अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किया गया है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि बरामद आईडी कार्ड के आधार पर तफ्तीश कर रही है। पुलिस का कहना है कि वो बदरपुर के हरि नगर का रहने वाला है। 

पूर्व मंडल अध्यक्ष ने पुलिस पर मामला दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस गाड़ी लेकर आ गई और कहा कि इसको जल्दी से भरो इसमें। तुम्हें कैसे पता कि गाय है, सूअर हो सकता है, भैंस हो सकता है। इसके बाद वो लोग इस बात पर अड़ गए कि चेक करवाया जाए कि गाय का है या नहीं। तब जाकर SHO और ACP ने सैंपल इकट्ठा किया। उनका कहना है कि पुलिस का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। 

उन्होंने कहा कि अगर पुलिस ने कल (फरवरी 19, 2021) तक कार्रवाई नहीं की या फिर संतोषजनक जवाब नहीं दिया तो रविवार (फरवरी 21, 2021) को भारतीय जनता पार्टी और हिंदू संगठन प्रदर्शन करेंगे, विशाल जुलूस निकालेंगे। उन्होंने बताया कि स्थानीय नागरिक विपिन चौहान ने 100 नंबर पर कॉल करके शिकायत दर्ज करवाई थी। वहीं गौरक्षा संगठन से गब्बर चौहान समेत अन्य लोग भी वहाँ पर आए थे। हालाँकि, हमने पुलिस से भी बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन उठा कर एक लाइन सुन कर काट दिया। दोबारा कॉल करने पर रिसीव नहीं हुआ।