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अल्लाह के लिए 6 साल के बेटे की कुर्बानी: पैर बाँध कर मदरसा टीचर माँ ने रेत डाला गला, कमरे में सोए रहे पिता और 2 बच्चे

केरल के पलक्कड जिले की यह खबर पुलिस के लिए भी चौंकाने वाली थी। क्योंकि अपराध करने वाली कोई आम महिला नहीं थी बल्कि एक माँ थी। जिसकी हत्या हुई, वो कोई आम बच्चा नहीं था, बल्कि उसका खुद का बेटा था। लेकिन इससे भी ज्यादा खौफनाक था हत्या का कारण – अल्लाह को खुश करने के लिए बेटे की गर्दन रेत कर कुर्बानी देना।

7 फरवरी 2021 की रात को 3-4 बजे के बीच पुलिस को इस अपराध से संबंधित कॉल गई। कॉल करने वाली कोई और नहीं बल्कि खुद वो माँ थी, जिसने अपने 6 साल के बेटे की कुर्बानी दी।

30 साल की शाहिदा ने फोन पर पुलिस को बताया कि उसने अपने 6 साल के बेटे आमिल की हत्या अल्लाह के लिए कुर्बानी के तौर पर की है। जिस मोबाइल से कॉल की गई थी, उसका लोकेशन ट्रेस करते-करते जब केरल पुलिस की टीम उसके घर पर पहुँची, तो शाहिदा गेट पर उनका इंतजार कर रही थी।

हाथ और शरीर के अन्य जगहों पर खून के निशान देख कर पुलिस जल्दी से घर में घुसी लेकिन देर तो हो ही चुकी थी। बाथरूम में 6 साल के आमिल का पैर बंधा हुआ था, गर्दन रेता हुआ था। जबकि बेडरूम में शाहिदा का पति सुलेमान और उसके दो अन्य बच्चे सो रहे थे… इस हत्या से बिल्कुल अनजान।

अपने ही बेटे की कातिल शाहिदा मदरसे में टीचर है। वो 3 महीने की गर्भवती भी है। उसका पति सुलेमान पहले खाड़ी के देशों में काम करते था। अब लॉकडाउन के दौरान वो पलक्कड में ही ऑटो-रिक्शा ड्राइवर का काम करता है। इनके 2 और बच्चे 11 साल व 8 साल के हैं, जो हत्या की रात अपने पिता के साथ कमरे में बेखबर सोए हुए थे।

पलक्कड की पुलिस के अनुसार इस मामले की जाँच की जा रही है। हत्या के अलावा मनोवैज्ञानिक कारणों की भी जाँच की जाएगी।

चमोली आपदा: PM मोदी ने 4 बार CM रावत को किया कॉल, अनाथ बच्चों को गोद लेगा पतंजलि, नहीं बचे 2 पॉवर प्रोजेक्ट्स

उत्तराखंड के चमोली में आए जल-प्रलय आपदा के बाद केंद्र और राज्य सरकारों ने तो त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए लगातार कई कदम उठाए जिससे लोगों की जान बची, लेकिन उस पूरे इलाके को इस त्रासदी ने तबाह कर डाला। ऋषिगंगा हाइड्रो प्रोजेक्ट को नदी अपने साथ ही बहा कर ले गई। साथ ही 530MW धौलीगंगा हाइडल पॉवर प्रोजेक्ट को भारी नुकसान पहुँचा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन समिति (NCMC) ने भी रविवार (फ़रवरी 7, 2021) को बैठक की।

ये बैठक समिति के अध्यक्ष और कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गौबा के नेतृत्व में हुई। इस बैठक में इस आपदा और इससे हुए नुकसान को लेकर विचार-विमर्श किया गया। ऋषिगंगा में जलस्तर अब भी बढ़ा ही हुआ है। धौलीगंगा नदी आगे जाकर अलकनंदा में ही मिलती है। अब कई छोटे-बड़े पॉवर प्रोजेक्ट्स के मलबे इन्हीं नदियों में दबे हुए हैं। अपने सामान्य स्तर से 15 मीटर ऊपर बह रही नदी सब कुछ अपने साथ ले गई।

ऋषिगंगा हाइडल प्रोजेक्ट के अंतर्गत किनारों पर जो कंक्रीट संरचनाएँ बन हुई थीं, अब केवल वही बची रह गई है। धौलीगंगा प्रोजेक्ट के पास से भी शुरुआत में 2 लाशें मिलीं। धौलीगंगा प्लांट में 42 मजदूर घिरे हुए थे। जहाँ 12 को वहाँ से बचा लिया गया, 30 दूसरे टनल में फँसे हुए थे। दोनों प्रोजेक्ट्स के 170 कामगार गायब हैं। रैणी गाँव के लोगों ने ऋषिगंगा हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट के खिलाफ अदालत में अर्जी दे रखी थी, जिसके बाद न्यायालय ने एक टीम बना कर जाँच करने को कहा था।

तपोवन हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर डैम भी अब नहीं रहा। मलारी घाटी में जाने के लिए जो 2 पुल थे, वो भी नदी के साथ बह गए। हालाँकि, जोशीमठ से तपोवन तक की प्रमुख सड़क अभी भी ठीक है। भारतीय वायुसेना के 2 हैलीकॉप्टर राहत कार्य में लगे हुए हैं। 2 एयरक्राफ्ट्स की मदद से राहत सामग्रियाँ पहुँचाई गईं। पीएम मोदी ने सीएम रावत को दिन भर के दौरान 4 बार फोन कॉल किया। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों के लिए 4-4 लाख रुपए मुआवजा राशि की घोषणा की है।

इस आपदा में जानवरों को भी नुकसान पहुँचा है, जो पहाड़ी गाँवों की अर्थव्यवस्था में बड़ा किरदार निभाते हैं। 180 भेड़-बकरियाँ नदी के साथ ही बह गईं। 5 स्थानीय लोग, जिनमें एक चरवाहा और 2 घास काट रही महिलाएँ शामिल थीं, इस आपदा में नहीं बच सके। सरकार फ़िलहाल लोगों की जान बचाने और राहत कार्य पर ध्यान दे रही है, जिसके बाद आपदा के पुष्ट कारणों की समीक्षा होगी। सीएम रावत ने खुद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के ये जानकारी दी।

गायब लोगों का कुल आँकड़ा फिलहाल 170 है। एक टनल से 12 लोगों को सुरक्षित निकालने के बाद उत्साहित ITBP के जवानों ने ‘जय बद्री विशाल’ और ‘जय नंदा देवी’ के नारे लगाए। तपोवन के पास अपने आप ही एक झील बन गई है। टिहरी डैम से पानी छोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। DRDO के विशेषज्ञों की टीम सोमवार को घटनास्थल पर जाकर ग्लेशियरों का अध्ययन करेगी। अब नंदप्रयाग से आगे अलकनंदा का बहाव सामान्य है।

उधर आचार्य बालकृष्ण ने ऐलान किया है कि उत्तराखंड जोशीमठ त्रासदी में जितने भी बच्चे अनाथ हुए हैं, ‘पतंजलि योगपीठ’ उन्हें गोद लेगी। उन्होंने कहा कि पतंजलि के लिए देश एक बाजार नहीं, बल्कि परिवार है। उन्होंने आश्वासन दिया कि तत्काल किसी भी सहायता के लिए कंपनी तैयार है। विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने अपनी एक मैच की सैलरी राहत कार्य के लिए दान कर दी। राज्य सरकार ने अफवाहों से बचने की सलाह दी है।

1 दिन पहले सीएम ने बतया था कि सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, NDRF, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और पुलिस के जवान बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। तपोवन स्थित जिन दो सुरंगों में मजदूर फँसे हुए हैं, वहाँ मुस्तैदी से बचाव कार्य चल रहा है। करीब 1 घंटे पहले तक ITBP के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक पहुँच पाए थे। ये सुरंग करीब 250 मीटर लंबी है। अभी तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रंप को सेंसर करने के लिए फेसबुक-ट्विटर को लताड़ा, सरकारी कायदों से चलने की दी नसीहत

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने एक हालिया बयान में अभिव्यक्ति की आजादी को प्रतिबंधित करने को लेकर किए गए मनमाने फैसलों को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक और ट्विटर की आलोचना की है। मैक्रों ने बयान में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को बैन किए जाने का मुद्दा उठाया। यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर सेंसरशिप की बहस भारत में भी गरमाई हुई है।

मैक्रों ने कहा, “हम पेरिस में बहुत परेशान थे (कैपिटल हमले को लेकर)। लेकिन उसी समय हम इस बात को लेकर भी उतना ही परेशान थे कि कुछ ही घंटों बाद सभी प्लेटफॉर्म, जो राष्ट्रपति ट्रम्प को अपनी बात रखने का मौका देते थे, जहाँ वो अपनी चीजें रख रहे थे, वहाँ उन्हें बैन कर दिया गया। कुछ ही देर में जब उन्हें (मीडिया प्लेटफॉर्म) यह स्पष्ट हो गया कि वे (ट्रंप) सत्ता से बाहर हो चुके है, अचानक से उनकी आवाज बंद कर दी गई।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक ऐसे लोकतंत्र में नहीं रहना चाहता जहाँ महत्वपूर्ण निर्णय और फैसले एक प्राइवेट प्लेयर, एक प्राइवेट सोशल नेटवर्क द्वारा तय किया जाता है, जो मुख्य समय में आपकी आवाज को बंद कर दें।” फ्रांस के राष्ट्रपति ने 4 फरवरी को दिए आपने बयान में कहा, “मैं चाहता हूँ कि यह आपके प्रतिनिधि द्वारा या एक विनियमन द्वारा मतदान किए गए कानून द्वारा तय किया जाए। जिसे लोकतांत्रिक नेताओं द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से चर्चा और अप्रूव किया गया हो।”

बता दें, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की यह टिप्पणी ऐसे समय मे सामने आई जब भारत सरकार भी ट्विटर के रवैए से नाखुश है। गौरतलब है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ने उन ट्वीट्स और अकाउंट को हटाने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने भारत में गणतंत्र दिवस के मौके पर हुई हिंसा के ठीक बाद भड़काऊ दावे किए थे।

दरअसल, भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म से ट्वीट और एकाउंट्स को ब्लॉक करने का अनुरोध किया था, क्योंकि इससे देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति खराब हो सकती है। हालाँकि, ट्विटर ने यह दावा करते हुए सरकार की बात को नकार दिया कि यह ‘बोलने की स्वतंत्रता’ थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का दोहरापन और इससे जो खतरा पैदा हुआ है, उससे स्पष्ट होता है कि वे अपनी राजनीतिक विचारधारा के आधार पर सेंसरशिप लगाते हैं, जो भारतीय हितों को जरूरी नहीं मानता है।

जर्मनी के एंजेला मर्केल और मेक्सिको के आंद्रेस मैनुअल लोपेज़ ओब्रेडोर जैसे अन्य नेताभी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों द्वारा लागू की गई मनमानी सेंसरशिप की निंदा कर चुके हैं।

उत्तराखंड में 170 अब भी लापता, तपोवन के टनल से 16 जिंदा निकाले गए; ग्लेशियर हादसे के मृतकों के परिजनों को ₹6 लाख

उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही के बीच 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 170 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। मृतकों का आँकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र ने यह जानकारी दी है।

उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ऐलान किया है कि घटना में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनके परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा राज्य सरकार देगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय आपदा कोष से मृतकों के परिवार के लिए 2-2 लाख रुपए और गंभीर रूप से घायलों को 50-50 हजार मुआवजे का ऐलान किया है।

16 बचाए गए

सीएम ने कहा कि सेना, भारत तिब्बत सीमा पुलिस, NDRF, स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और पुलिस के जवान बचाव और राहत कार्य में जुटे हुए हैं। तपोवन स्थित जिन दो सुरंगों में मजदूर फँसे हुए हैं, वहाँ मुस्तैदी से बचाव कार्य चल रहा है। करीब 1 घंटे पहले तक ITBP के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर करीब 150 मीटर तक पहुँच पाए थे। ये सुरंग करीब 250 मीटर लंबी है। अभी तक 16 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।

आईटीबीपी के जनसंपर्क अधिकारी विवेक पांडे ने बताया, “अब हम दूसरी सुरंग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो कि सुरंग नंबर एक है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार यहाँ लगभग 30 लोग फँसे हुए हैं। हम रात में भी ऑपरेशन करेंगे। हमारी टीमें पहले से ही काम पर लगी हुई हैं और उम्मीद है कि हम उन्हें जल्द ही बाहर निकाल लेंगे।”

सीएम ने कहा कि भारतीय सेना मौके पर पहुँच गई है। एनडीआरएफ की टीम देहरादून पहुँच गई है और चमोली के रूट पर है। डॉक्टरों की टीम भी वहाँ पर पहुँच गई है। इसके साथ ही उपकरणों के साथ 60 एसडीआरएफ कर्मियों की एक टीम मौके पर पहुँच गई है।

बचाव दल को लेकर देहरादून पहुँचा सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान

एनडीआरएफ के बचाव दल और हैवी उपकरण को लेकर देहरादून भारतीय वायु सेना का सुपर हरक्यूलिस परिवहन विमान पहुँचा गया है। उत्तराखंड के चमोली में रविवार (फरवरी 7, 2021) को ​​ग्लेशियर टूटने ​के बाद मची तबाही को देखते हुए तीनों सेनाओं ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चा सँभाल रखा है​​​​​।​​ सेना की टीम सुरंग में फँसे लोगों को निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है​। ​वायुसेना ने अपने परिवहन विमानों से एनडीआरएफ टीमों को मौके पर पहुँचाया है​​​।​

पानी के बहाव में आई कमी

मुख्यमंत्री ने बताया, “ग्लेशियर फटने से वहाँ बन रहे बाँध को क्षति पहुँची है। मानव क्षति के बारे में अभी अधिकृत तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है। पानी की तीव्रता चमोली तक आते-आते काफी कम हो गई है। पानी खतरे के निशान से नीचे अब हो गया है।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर टूटने से भारी तबाही हुई है। चमोली जिले के रेणी गाँव के पास ग्लेशियर के टूटने से कई गाँव वालों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। यह ग्लेशियर धौली गंगा नदी के किनारे-किनारे बह रहा है। आपदा से निपटने या किसी जानकारी के लिए या किसी जगह की सूचना के लिए राज्य सरकार ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। 1070 या 9557444486 नंबर पर कॉल कर आप इस संबंध में सूचना ले या दे सकते हैं।

बाढ़ आने के समय 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा प्रोजेक्ट और NTPC की 480 मेगावाट तपोवन-विष्णुगाड प्रोजेक्ट में करीब 176 मजदूर काम कर रहे थे। इनके अलावा, ऋषिगंगा परियोजना में ड्यूटी कर रहे दो पुलिसकर्मी भी लापता हैं। बाढ़ से दोनों हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भारी नुकसान हुआ है।

छत्तीसगढ़ में सरकारी फरमान: कॉन्ग्रेस MLA शकुंतला साहू के जन्मदिन में दरी बिछाएँ-जलपान बाँटे कर्मचारी

छत्तीसगढ़ की कॉन्ग्रेस सरकार पार्टी विधायक शकुंतला साहू के जन्मदिन पर सरकारी फरमान निकालने को लेकर विवादों में घिर गई है। जन्मदिन को सरकारी तौर पर मनाने का यह आदेश सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद इस कार्यक्रम को रद्द कर दिया गया।

कसडोल की विधायक शकुंतला साहू का 7 जनवरी को जन्मदिन था। इसको लेकर पलारी जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने लिखित आदेश जारी करते हुए शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों की दरी बिछाने, जलपान, टेंट व अन्य व्यवस्था करने की ड्यूटी लगा दी।

साभार: द न्यू इंडियन एक्सप्रेस

कॉन्ग्रेस विधायक के जन्मदिन की तैयारी को लेकर लिखित आदेश जारी कर छोटे-बड़े लगभग दर्जनों अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। लेकिन यह आदेश सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अधिकारियों की जमकर फजीहत हुई।

आदेश में कहा गया था कि कार्यक्रम में लगभग 500 लोग उपस्थित रहेंगे और इसके लिए सभी की उपस्थिति अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। आम तौर पर महान शख्सियत का जन्मदिवस कार्यक्रम ही शासकीय स्तर पर आयोजित होता है, लेकिन यह पहला मौका था जब पहली बार की कॉन्ग्रेस विधायक शकुंतला साहू का जन्मदिन कार्यक्रम सरकारी तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया था।

आयोजन में शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने का मामला सामने आने के बाद बीजेपी ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लिया है। बीजेपी के पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा, “ऐसी शर्मनाक हरकत केवल कॉन्ग्रेस के शासन में हो सकती है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसे आदेश आधिकारिक तौर पर सरकारी कर्मचारियों को कॉन्ग्रेस नेता के निजी समारोह का संचालन करने के लिए दिए जाते हैं। इसे रोका जाना चाहिए अन्यथा कॉन्ग्रेस का हर एक विधायक भविष्य में इसी तरह अस्वीकार्य तरीके से कार्यक्रम आयोजित करेगा।”

61 साल की राजेश्वरी ने किराया माँगा तो पाशा ने कर दी हत्या, परिजनों संग मिल शव को नाले में फूँक दिया

कर्नाटक के बेंगलुरु में 61 वर्षीय मकान मालकिन की भीषण हत्या के मामले में शुक्रवार (फरवरी 5, 2021) को वीवी पुरम पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पीड़िता की पहचान राजेश्वरी के रूप में हुई है। कोरमंगला की निवासी राजेश्वरी गुरुवार (फरवरी 4, 2021) सुबह 10:30 बजे किराएदारों अलीम पाशा (26) और उसके भाई जीलन (20) से किराया लेने के लिए पार्वतीपुरा गईं थी। पाशा ने पिछले साल मार्च से किराया नहीं दिया था। जब भी राजेश्वरी पैसे माँगती, तो वह कहता था कि लॉकडाउन के कारण उसका कैटरिंग बिजनेस अभी तक शुरू नहीं हो पाया है।

मकान मालकिन ने पहले उसके 3 महीने के किराए को माफ कर दिया था और उसे बाकी का 35000 किराए का भुगतान करने के लिए कहा। घटना वाले दिन, राजेश्वरी, पाशा के पास गई और भुगतान न करने पर उसे घर खाली करने के लिए कहा। तभी पाशा एक रॉड लेकर आया और उसके सिर एवं गर्दन पर वार किया। इस चोट की वजह से राजेश्वरी तुरंत बेहोश हो गई और फिर मौके पर ही उनकी मौत हो गई। उनका शरीर ठंडा और पीला पड़ गया। जब पाशा ने अपने चाचा इब्राहिम और दादी अशरफुन्निसा को पुलिस को आत्मसमर्पण करने की अपनी योजना के बारे में बताया, तो दोनों ने इसके खिलाफ सलाह दी। 

इब्राहिम ने अलीम पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा के साथ मिलकर शव को पॉलीथीन और बेडशीट में लपेट दिया। इसके बाद तिरपाल से ढक जीलन के ऑटो की पैसेंजर सीट पर रख दिया। इब्राहिम और जीलन शव को ऑटो से कुंभलगोडु तक ले गए। इस दौरान पाशा अपनी बाइक से ऑटो के पीछे चलता रहा। पाशा को मैरीगोल्ड इंटरनेशनल स्कूल के पास एक नाला दिखा। तीनों ने नाले में शव फेंक दिया और पेट्रोल डालकर उसमें आग लगा दी। शव को ठिकाने लगाने के लिए जाते समय उन्होंने रास्ते में पेट्रोल खरीदा था।

पीड़िता के बेटे ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई 

अपराध के सबूतों को नष्ट करने के बाद आरोपित घर लौट आए, स्नान किया और खून का दाग साफ किया। यह मामला तब सामने आया जब पीड़िता के बेटे डॉ. दीपक एमआर ने पुलिस में शिकायत दर्ज की।

जब राजेश्वरी घर नहीं लौटी और उनका फोन बंद आया, तो उसने अपनी माँ के बारे में जानने के लिए रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों से संपर्क किया। पीड़िता ने अपने बेटे से कहा था कि वह पाशा से किराया लेने जा रही है। दीपक गुरुवार की रात लगभग 11 बजे, पाशा के घर गया और अपनी माँ के बारे में पूछताछ की। पाशा ने दावा किया कि उससे किराया वसूलने के बाद राजेश्वरी उसके घर से चली गईं थी।

अगली सुबह, दीपक फिर से अपनी पत्नी ममता के साथ आरोपित के घर गया और जोर देकर कहा कि वह कमरों की जाँच करना चाहता है। हालॉंकि पाशा ने दावा किया कि कमरों से एक में ‘छिड़काव’ किया गया है, इसलिए अंदर अभी नहीं जाया जा सकता। अन्य किराएदारों से पूछताछ करने पर पता चला कि पाशा और उसके परिवार के सदस्यों को उन्होंने एक ऑटो-रिक्शा में तिरपाल से ढके बंडल को ले जाते हुए देखा था।

अन्य किराएदारों की बात से दीपक चौकन्ना हो गया और उसने तुरंत वीवी पुरम पुलिस के पास एक गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने जाँच शुरू की, राजेश्वरी के कॉल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और पाया कि उसका फोन पार्वतीपुरा के एमवी लेन में बंद था। किराएदारों से पूछताछ करने और सीसीटीवी फुटेज की पुष्टि करने पर, पुलिस ने पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा को हिरासत में लिया।

24 घंटे के भीतर मामले को सफलतापूर्वक हल करने के बाद, पुलिस ने सूचित किया, “हमने अलीम पाशा, जीलन और अशरफुन्निसा को पकड़ा, जिन्होंने अपराध स्वीकार किया। अभी हमें इब्राहिम को गिरफ्तार करना बाकी है। उन पर हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया गया है।”

‘किसान’ के साथ प्लेबॉय मॉडल और ड्रग्स एडिक्ट रही हॉलीवुड हीरोइन भी: रिसीव करने ट्रैक्टर से जाएगा ‘टीम किसान’

कथित किसान आंदोलन की आड़ में रची गईं विदेशी साजिशें अब सबके सामने हैं। पॉप स्टार रिहाना, बाल पर्यावरण कार्यकर्ता कही जाने वाली ग्रेटा थनबर्ग और पॉर्न स्टार मिया खलीफा के इनके समर्थन में सामने आने के बादे पूरी साजिश का खुलासा हुआ था। अब ‘किसानों’ के समर्थन में प्लेबॉय मॉडल अमांडा सर्नी (Amanda Cerny) और हॉलीवुड अभिनेत्री सुसान सारंडन (Susan Sarandon) भी कूदी हैं।

किसान आंदोलन को सपोर्ट करने वाली अमांडा ने ट्रैक्टर को सेक्सी बताया है। उसने ट्वीट किया, “मुझे लगता है कि आपका ट्रैक्टर सेक्सी है।” इसके बाद टीम किसान (Team kissan) नाम के समूह ने प्लेबॉय मॉडल को इंडिया आने पर ट्रैक्टर से एयरपोर्ट पर रिसीव करने की पेशकश की है।

साभार: ट्विटर

टीम किसान के ट्विटर पर 11000 से अधिक फॉलोवर्स हैं और यह सोशल मीडिया साइट फेसबुक पर भी काफी सक्रिय है।

फेसबुक

इस बीच किसान आंदोलन को लेकर चल रहे ट्वीट युद्ध में अमांडा भी इस विरोध को लेकर बहुत मुखर रही हैं।

साभार: ट्विटर
साभार: ट्विटर

अमांडा ने अपनी टिप्पणियों के चलते सोशल मीडिया यूज़र्स से काफी आकर्षित किया है। लोगों के समर्थन के साथ ही सोशल मीडिया पर उनके जवाबों के स्क्रीनशॉट को सारे मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा भी किए जा रहे हैं।

साभार: ट्विटर

दिलचस्प बात यह है कि अपनी टिप्पणियों के प्रति लोगों का इतना झुकाव देखने के बाद प्लेबॉय मॉडल ने अपने फॉलोवर्स को याद दिलाया है कि वे एक्सक्लूसिव कंटेंट के लिए उन्हें only fans पर पेमेंट कर सकते हैं।

साभार: ट्विटर

बता दें, OnlyFans का उपयोग ज्यादातर पोर्नोग्राफिक मॉडल द्वारा खुद की नंगी तस्वीरों को बेचकर पैसा कमाने के लिए किया जाता है। हालाँकि फिटनेस पर ध्यान देने वाले और संगीतकार भी इस प्लेटफार्म का इस्तेमाल करते हैं।

इस बीच, हॉलीवुड अभिनेत्री सुसान सारंडन ने भी अब भारत के आंतरिक मामले में दखल दी है। सारंडन ne 2014 के एक इंटरव्यू में खुद के ड्रग्स एडिक्ट होने का खुलासा किया था।

किसान आंदोलन पर ज्ञान बाँटने के लिए सामने आई इस अभिनेत्री ने शुक्रवार को एक ट्वीट पोस्ट करते हुए लिखा, “भारत के किसान आंदोलन के साथ एकजुटता से खड़ी हूँ। पढ़ें कि वे कौन हैं और वे क्यों विरोध कर रहे हैं।” साथ ही सुसान ने न्यूयॉर्क टाइम्स की एक आर्टिकल का लिंक साझा किया, जिसका इस्तेमाल वैश्विक स्तर पर भारत विरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया जा रहा।

उल्लेखनीय है कि यह सब उस पागलपन को दर्शाता है, जो भारत विरोधी एजेंडा चलाने के लिए इस पूरे अभियान में उतर गया है। पॉप स्टार, पोर्न स्टार, स्कूल छोड़ने वाली बच्ची के बाद, अब प्लेबॉय मॉडल भी भारत के आंतरिक मसले में जबरन घुस कर लोगों का समर्थन बिटोरने का प्रयास कर रही हैं।

2 दिन तक पति के शव के पास बिलखती रहीं सुनीता, कल्याण का हाथ छोड़ सैलाब में बह गई पत्नी: केदारनाथ का वह प्रलय

देवभूमि उत्तराखंड एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की चपेट में है। चमोली जिले में ग्लेशियर फटने की वजह से तबाही हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ धौलीगंगा और अलकनंदा का जलस्तर बढ़ने की वजह से 100 से 150 लोग बह गए हैं। इस घटना ने ‘केदारनाथ की 2013 की त्रासदी’ की भयावह यादें ताज़ा कर दी। केदारनाथ में आई उस प्रलय में हज़ारों लोग काल-कवलित हो गए थे। कुछ खुशकिस्मत थे। लेकिन प्राकृतिक तबाही को मात देने के बावजूद उनकी आपबीती दिल दहला देने वाली हैं।  

तमाम कहानियों में एक दर्दनाक कहानी है सहारनपुर निवासी सविता नागपाल की है, जो अपने पति सुरेन्द्र नागपाल के साथ केदारनाथ यात्रा पर गई थीं। जिस होटल में बुजुर्ग दंपत्ति रुके थे, आपदा की रात उसमें पानी भर गया। अपनी जान बचाने के लिए वह होटल से बाहर निकल कर सड़क पर आ गए लेकिन उन्हें इस बात का आभास नहीं था कि आगे कितनी भीषण अनहोनी उनका इंतज़ार कर रही है। बाहर पानी का बहाव इतना तेज़ था कि मलबे की चपेट में आकर सुरेन्द्र नागपाल की मौत हो गई। सविता लगभग दो दिन तक अपने पति के शव के पास बिलखती पड़ी हुई थीं। जब तीसरे दिन उनका बेटा किसी तरह वहाँ पहुँचा, तब तक सुरेन्द्र नागपाल का अंतिम संस्कार हो गया था। 

ऐसी ही एक घटना में राजस्थान के कल्याण सिंह ने अपनी पत्नी को खो दिया था। वह भी अपनी पत्नी के साथ यात्रा पर आए थे और होटल में ठहरे थे। रातों-रात होटल में पानी भरा जिसकी वजह से उनकी नींद खुल गई। अपनी जान बचने के लिए होटल की तीसरी मंजिल पर पहुँच गए, तभी उनकी पत्नी का हाथ छूटा और वह पानी में बह गईं। कुछ ही देर में उनके साथ मौजूद कई साथी भी पानी की तेज धारा में बह गए। कल्याण सिंह बताते हैं कि वह रात उनके जीवन की सबसे कठिन रात थी, जिसे वह शायद ही भुला पाएँ। 

केदारनाथ मंदिर के पुजारी रविन्द्र भट्ट 16-17 जून 2013 को आई प्रलय के बारे में बताते हैं कि रात तक सब कुछ सामान्य था। रात 8 बजे तक किसी को न तो भनक थी और न ही कल्पना। अचानक 8:15 बजे मंदिर की चारों दिशाओं से पानी का सैलाब नज़र आया। जान बचाने के लिए कुछ यात्रियों ने मंदिर के भीतर शरण ली, रात भर लोग डर के साए में रहे काँपते रहे। 17 जून की सुबह लगभग 6 बजे एक बार फिर जल प्रलय आई और इस बार की जल प्रलय के बाद का दृश्य अविश्वसनीय था। पत्थरों, चट्टानों, और रास्तों पर सिर्फ शव नज़र आ रहे थे, उस नज़ारे से भयावह शायद ही कुछ और होता। 

ऐसे ही राजस्थान के सीकर, चूरू और झुंझनू से लगभग 12 परिवार केदारनाथ धाम की यात्रा के लिए गए थे। केदारनाथ त्रासदी के बाद उनका पता ही नहीं चला, वह कभी अपने घरों की ओर नहीं लौटे। कोई होटल के मलबे में दबा तो कोई पानी की धार के साथ बह कर लापता हो गया।

बेशक उनसे जुड़े लोग आज भी इनकी राह देखते होंगे लेकिन सच यही है कि ऐसी आशाएँ अंतहीन हैं। सरकारी आँकड़ों के मुताबिक़ केदारनाथ त्रासदी में 4500 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। लेकिन कथित तौर पर मौत का आँकड़ा कहीं ज़्यादा है।           

जनता ने चुनाव जिताया पर उनसे मिलतीं नहीं: सोनिया पर कॉन्ग्रेस MLA अदिति सिंह ने कसा तंज

अदिति सिंह उत्तर प्रदेश की रायबरेली सदर सीट से कॉन्ग्रेस की विधायक हैं। पिछले कुछ अरसे से पार्टी के साथ उनके रिश्ते सहज नहीं हैं। वो लगातार पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाती रहती हैं। अब उन्होंने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष और रायबरेली की सांसद सोनिया गॉंधी पर निशाना साधा है।

विधायक अदिति सिंह ने सोनिया गाँधी पर आरोप लगाया है कि चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के बाद से वह दो बार ही रायबरेली में आम जनता से मिली हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा बाद उन्होंने कभी भी जिले की जनता से मुलाकात करने की कोशिश नहीं की और न ही वह किसी कार्यक्रम में शामिल होने आई हैं।

उन्होंने कहा, “अगर जनता आपको वोट देकर चुनती है, तो उस जनता की आपको प्रत्येक तरह से मदद और मुलाकात करते रहनी चाहिए। हम किसी पार्टी विशेष की बात नहीं कर रहे हैं। हम सभी राजनीतिक नेताओं की बात करते हैं जो भी चुनाव जीत कर आता है वह अपनी जनता के प्रति पूरी तरह से जिम्मेदार होना चाहिए। जो अच्छा काम करेगा, उसकी तारीफ भी करूँगी।”

अदिति सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की गुजारिश कॉन्ग्रेस ने कुछ महीने पहले विधानसभा अध्यक्ष से की थी, लेकिन उनका अनुरोध खारिज कर दिया गया था गौरतलब है कि कुछ समय पहले अदिति सिंह ने सबके सामने सीएम योगी की भी जमकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था, “मैं खुले मुँह से कहना चाहती हूँ कि गरीबों की जो दुकानें बची हैं वह मेरे राजनीतिक गुरु और हमारे माननीय मुख्यमंत्री महाराज योगी आदित्यनाथ की वजह से है। उनकी वजह से हम यह लड़ाई लड़ रहे हैं।”

पिछले दिनों रायबरेली कॉन्ग्रेस में बड़ी बगावत भी सामने आई थी। पार्टी के मजबूत नेता के रूप में जाने जाने वाले शिव कुमार पाण्डेय समेत 35 अन्य पदाधिकारियों ने सोनिया गाँधी को अपना इस्तीफा दे दिया था। 

नदी का छोर, 150 से 200 लाशें, नग्न, अर्धनग्न और सड़ी-गली: उत्तराखंड का वह प्रलय जिसमें तबाह हो गया था केदारनाथ

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से तबाही नज़र आ रहा है। धौलीगंगा और अलकनंदा उफ़ान पर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक़ पानी की तेज धार में 100- 150 लोग बह गए हैं। ग्लेशियर फटने की इस घटना ने 2013 के दौरान केदारनाथ में आई प्रलय की भयावह स्मृतियाँ ताज़ा कर दी हैं। ‘केदारनाथ त्रासदी’ का ज़िक्र छेड़ देने भर से सालों पुराना खौफ़नाक मंज़र लोगों में सिहरन पैदा कर देता है। 

देवभूमि उत्तराखंड में 16 जून 2013 को आई प्रलय ने अकल्पनीय विध्वंस किया। बारिश 15 जून से ही शुरू हो गई थी। लेकिन इस बात की कल्पना शायद ही किसी ने की थी कि इस बारिश का परिणाम कितना विकराल हो सकता है। 16 और 17 जून की बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने इतनी तबाही मचाई कि लगभग 4400 से अधिक लोगों की मौत हो गई। हज़ार लोगों की लाशें अलग-अलग क्षेत्रों में मिली। 18 जून को मौसम साफ़ होने पर पूरा केदारनाथ तबाह हो चुका था। हर कोने में सिर्फ लाशें नज़र आ रही थीं। पत्थरों में फँसी लाशें, जिनमें कई पहचानी गई और कुछ नहीं। यह त्रासदी आज भी लोगों के ज़ेहन में दहशत पैदा करती है। 

यूँ तो इस त्रासदी की अनगिनत कहानियाँ हैं, जिनमें कुछ प्रलय के साथ बह गई और कुछ हम तक पहुँच पाई। 

केदारनाथ के नज़दीक रहने वाले एक प्रत्यक्षदर्शी का कहना था, “मैंने अपने आँखों के सामने 60 लाशों को तैरते हुए देखा। इसके अलावा लगभग 200 ऐसे लोग हैं जिन्हें मैं जानता हूँ कि लेकिन उनका कभी कोई पता नहीं चल पाया।” ऐसा ही तबाही का दृश्य नज़र आया था हेमकुंड साहिब में जहाँ से लौटी सुखप्रीत ने प्राकृतिक आपदा के भयावह नज़ारे का वर्णन किया था। उनका कहना था कि उनकी आँखों के सामने 50 यात्री नदी में बह गए थे। 

लाशों का एक भयावह किस्सा मिलता है पत्रकार मंजीत नेगी की किताब ‘केदारनाथ से साक्षात्कार’ में। यह घटना उस समय की है जब आपदा प्रबंधन का कार्य काफी गति पकड़ चुका था, रुद्रप्रयाग के तत्कालीन एडीएम भी इस काम में लगे हुए थे। सरस्वती और मंदाकिनी नदी पर बने ब्रिज को पार करते हुए समय उनका पैर फिसला और वह नदी में गिर गए। बहाव इतना तेज़ था कि कुछ ही देर में वह सभी की नज़रों से ओझल हो गए, कई घंटों की खोजबीन बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिला। पूरे सरकारी महकमे में हड़कंप मच गया, सवाल उठने लगे कि सरकार अपने मुलाज़िम को नहीं बचा पा रही है तो आम जनता को कैसे सुरक्षित रखेगी। 

अधिकारियों ने उनका शव खोजने के लिए एक हल निकाला, डूबने वाले अधिकारी का वजन लगभग 95 किलो था। लिहाज़ा 95 किलो की तीन मैनीक्यून तैयार कराई गई। 10-10 मिनट के अंतर पर तीनों मैनीक्यून वहीं से बहाई गई जहाँ से वह डूबे थे। खोजबीन शुरू हुई, पहली मैनीक्यून का पता ही नहीं चला! दूसरी के कुछ टुकड़े मिले और तीसरी जिस हालत में और जहाँ मिली उसे देख कर सभी स्तब्ध रह गए। नदी के जिस छोर पर तीसरी मैनीक्यून मिली वहाँ लगभग 150 से 200 लाशें पड़ी हुई थीं। नग्न, अर्धनग्न और सड़ी-गली लाशें! यह घटना केदारनाथ त्रासदी के आकार और प्रभाव की तस्वीर साफ़ करने के लिए बहुत थी। ये सिर्फ एक घटना है, न जाने कितनी कहानियाँ अभी तक हमने सुनी ही नहीं।