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वर्षा चौहान का चाकू और कैंची से शौहर वारिस ने किया कत्ल, कार से भाग रहा था; ट्रक ने रौंदा

वर्षा चौहान ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उसका शौहर वारिस क्यामुद्दीन 10 साल पुरानी प्रेम कहानी का ऐसा अंत करेगा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार वारिस ने पहले वर्षा की हत्या की। फिर कार से फरार हो गया। इसी दौरान ट्रक की चपेट में आकर वह भी मर गया।

घटना पंजाब के मोहाली जिले के खरड़ स्थित सन्नी एन्क्लेव की है। बताया जा रहे कि घरेलू कलह में वारिस ने अपनी पत्नी वर्षा को मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद पुलिस से बचने के लिए मौके से फरार हो गया। लेकिन उसकी कार का चंडीगढ़ के रास्ते में एक्सीडेंट हो गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

भोपाल की रहने वाली वर्षा चौहान और नोएडा निवासी वारिस क्यामुद्दीन एक महीने पहले ही किराए पर रुम लेकर यहाँ रहने आए थे। दोनों ने लव मैरिज की थी। हालाँकि परिवारवाले इस शादी से खुश नहीं थे। पड़ोसियों का कहना है कि दोनों का आपस में अक्सर झगड़ा होता रहता था। गुरुवार देर रात भी दोनों में झगड़ा हुआ था।

बात इस कदर बढ़ गई कि गुस्साए क्यामुद्दीन ने वर्षा की तेजधार चाकू और कैंची से कई बार वार कर हत्या कर दी। जिसके बाद पकड़े जाने के डर से उसने अपनी कार से फरार होने की कोशिश की, लेकिन सारंगपुर के पास उसकी कार एक ट्रक की चपेट में आ गई।

हादसे की सूचना पर घटनास्थल पहुँची पुलिस ने वारिस के पास से मिले दस्तावेजों के आधार उसकी पहचान की। जिसके बाद मृतक के परिजनों को उसके मरने की खबर दी गई। वहीं खबर मिलते ही जब वारिस के परिजन उसके घर में पहुँचे तो उसकी पत्नी बाथरूम में खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। आनन-फानन में उसे अस्पताल तो ले जाएगा, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कहा जा रहा कि पुलिस को मृतका के घर से खून से सना सिलेंडर भी मिला, जिस पर उसके मृतक शौहर वारिस के फिंगर प्रिंट भी है। इसी आधार पर दोनों क्षेत्रों की पुलिस ने मामला दर्ज किया है और आगे की जाँच पड़ताल कर रही है।

वे ‘भारत माता की जय’ से नाराज हो जाती हैं, देश के खिलाफ जहर उगलने वालों से नहीं: बंगाल में ममता पर बरसे मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हल्दिया में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए सबसे पहले उत्तराखंड में हुई त्रासदी की जानकारी लोगों के साथ साझा की और बताया कि वे लगातार अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा है।

पीएम मोदी ने ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में आप दीदी से अपने अधिकार की बात पूछ देंगे तो वो नाराज हो जाती हैं। यहाँ तक कि ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा दो, तो भी वो नाराज हो जाती हैं, लेकिन देश के खिलाफ बोलने वाले कितना भी जहर उगल दें, दीदी को गुस्सा नहीं आता।

उन्होंने कहा कि किसानों के पास सीधे पैसे जाए इस से यहाँ के सरकार को काफी परेशानी है। टीएमसी सरकार कैसी है। 25 लाख में से महज 6 हजार किसानों का नाम ही भेज पाई है। इन किसानों को सीधे रुपए भी हम नहीं भेज पा रहे हैं। राज्य एजेंसी का बैंक विवरण दिया ही नहीं है। एक-एक दिन कर ऐसे ही निकलता जा रहा है। माँ, माटी मानुष कहने वाली सरकार की संवेदनशीलता को लोग देख रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “अभी आपने न्यूज़ में देखा होगा कि इन दिनों भारत को बदनाम करने के लिए कैसे-कैसे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र सामने आ रहे हैं, कैसी-कैसी अंतरराष्ट्रीय साज़िशें हो रही हैं। साजिश करने वालों की बेचैनी इतनी ज्यादा है कि भारत को बदनाम करने के लिए वो चाय से जुड़ी भारत की पहचान पर हमला करने की बात कह रहे हैं। टी वर्कर्स की कड़ी मेहनत पर हमला करने का षड्यंत्र किया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि बंगाल के लोगों की विकास के लिए केंद्र सरकार पूरा प्रयास कर रही है। हाईवे, पोर्ट, रेलवे, एयरपोर्ट, जल मार्ग, मेट्रो, इंटरनेट सभी पर केंद्र सरकार पैसे खर्च कर रही है। बंगाल में 73 लाख शौचालय बनाने के लिए भी केंद्र ने बड़ी मदद दी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लेफ्ट, तृणमूल और कॉन्ग्रेस मिलकर पर्दे के पीछे फिक्सिंग कर रहे हैं। दिल्ली में लेफ्ट, तृणमूल और कॉन्ग्रेस नेता मिलते हैं और बंद कमरे में बैठकर मीटिंग करते हैं और रणनीति बनाते हैं। केरल में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट मिलकर लूटते हैं और पाँच-पाँच साल का खेल करते हैं। हमें धोखेबाजी के खिलाफ सतर्क रहना है।

उन्होंने कहा कि बंगाल फुटबाल का राज्य है। फुटबाल की भाषा में कई फाउल कर लिए गए हैं। कुशासन के फाउल से लेकर कई फाउल। बंगाल के लोग अब तृणमूल सरकार को लाल कार्ड दिखाने जा रहे हैं। बुआ-भतीजा की सरकार को बाय-बाय करेंगे।

मैंने दिलजीत को चुनौती दी, पर उसने खालिस्तानी होने पर जवाब नहीं दिया: कंगना

किसान आंदोलन को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और पंजाबी गायक-अभिनेता दिलजीत दोसांझ के बीच कई बार जुबानी जंग हो चुकी है। अब एक बार फिर कंगना ने दोसांझ को चुनौती दी है।

कंगना ने हाल ही में न्यूज चैनल रिपब्लिक टीवी के पत्रकार अर्नब गोस्वामी को इंटरव्यू दिया है। इस इंटरव्यू में उन्होंने कई मुद्दों को लेकर ढेर सारी बातें की हैं। इस दौरान कंगना ने दिलजीत दोसांझ को खालिस्तानी बताया। साथ ही कहा कि उन्होंने दिलजीत को यह बात करने की चुनौती दी थी कि वह खालिस्तानी नहीं है। लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया।

कंगना रनौत ने कहा, “मैंने खुली चुनौती दी कि वह सिर्फ एक बार कह दें कि वह खालिस्तानी नहीं हैं। लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। युवाओं को गुमराह किया जा रहा है। उन्हें खालिस्तान के बारे में एक सपना दिखाया गया है।” कंगना ने पॉप सिंगर रिहाना पर अधारित गाना जारी करने को लेकर भी दिलजीत की आलोचना की।

कंगना ने कहा, “इसका मतलब साफ है कि इसकी प्लानिंग सितंबर 2020 से थी कि 26 जनवरी को एक हमला होगा और इस अश्लील गायक द्वारा एक ट्वीट किया जाएगा। अगर हर कोई अपना खुद का एक टुकड़ा चाहता है, तो चीन की यही रणनीति है कि हम फिर से 1000 साल के लिए गुलाम हो जाएँ।” 

इस दौरान उन्होंने किसान आंदोलन में ‘अंतरराष्ट्रीय फंडिग और पोएटिक जस्टिस’ की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कंगना रनौत ने कहा, “बड़े रहस्यों का खुलासा हो रहा है। बेहद विनम्र शब्द का उपयोग कर कहा जा रहा है कि यह भारत को ‘बदनाम’ करने की साजिश है। मुझे लगता है कि यह भारत को टुकड़ों में तोड़ने की साजिश है।”

उन्होंने आगे कहा, “जबसे यह आंदोलन शुरू हुआ है उसी दिन से मैं कह रही हूँ ये किसान नहीं हैं। ये साजिश है। उस समय मेरे पास 6 से 7 ब्रांड थे। उन्होंने मुझे अल्टीमेटम भेजा कि आप किसानों को आतंकवादी मत कहिए। मैंने एक महीने में 12 से 15 करोड़ रुपए के ब्रांडों को खो दिया।”

कंगना ने कहा, “रिहाना जो एक अमेरिकी पॉप स्टार है, यूएस कैपिटल हिल के दंगे के बारे में बात नहीं की। किसान विरोध पर ट्वीट करने के लिए उसने 100 करोड़ रुपए लिए होंगे। ये सारे पैसे कहाँ से आ रहे हैं? ग्रेटा, जो एक युवा बच्ची है, उसे आगे धकेला जा रहा है, उसका इस्तेमाल किया जा रहा है।”

गौरतलब है कि 3 फरवरी 2021 को दिलजीत के एक ट्वीट के जवाब में कंगना ने लिखा, “देश सिर्फ भारतीयों का है, खालिस्तानियों का नहीं। बोल तू खालिस्तानी नहीं है। बोल तू कि जिन खालिस्तानियों ने आंदोलन में हिस्सा लिया, उनकी निंदा करता है। अगर तू ये बोलता है तो मैं माफी माँग लूँगी और तुझे सच्चा देशभक्त समझ लूँगी। जल्दी बोल, मैं इंतजार कर रही हूँ।”

180 साल जिंदा रहूँगा, इसके लिए अब तक ₹7.3 करोड़ खर्च कर चुका हूँ: अमेरिकी बिजनेसमैन का दावा

अमेरिका के एक अरबपति बिजनेसमैन ने अजीबोगरीब दावा किया है। उनका कहना है कि वह 180 सालों तक जिंदा रहेंगे। इसके लिए वे अब तक करोड़ों रुपए खर्च कर चुके हैं।

मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, अमेरिका के रहने वाले 47 वर्षीय डेव एस्प्रे (Dave Asprey) ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि वे 180 सालों तक जिंदा रहेंगे। उन्होंने बताया कि जवान रहने के लिए अब तक अपने शरीर पर वह करीब 7.3 करोड़ रुपए खर्च कर चुके हैं। लंबी उम्र बने रहने के इस तकनीक को उसने बायोहैकिंग का नाम दिया है।

रिपोर्ट्स की माने तो डेव एस्प्रे ने लाखों रुपए खर्चकर अपने शरीर के बोन मैरो से स्टेम सेल निकलवाकर इन्हें फिर से ट्रांसप्लांट करवाया है। उनका कहना हैं, “मैंने खाने पर काबू कर, सोने का तरीका बदलकर और बुढ़ापा रोकने वाले तरीके अपनाकर खुद को इस तरह बना लिया है कि शरीर में कम से कम जलन (इन्फ्लेमेशन) हो।”

हेल्थ डाइट और अपने स्टेम सेल को ट्रांसप्लांट करवाने को लेकर डेव ने कहा, “जब हम जवान होते हैं, तो शरीर में करोड़ों स्टेम सेल होती हैं। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, स्टेम सेल खत्म होने लगती हैं। इसलिए मैं इंटरमिटेंट फास्टिंग करता हूँ। इसमें जब शरीर भोजन नहीं पचा रहा होता है, तो वह खुद की मरम्मत करता है।”

ज्यादा उम्र जीने के लिए अरबपति बिजनेसमैन कोल्ड क्रायोथेरेपी चैंबर का उपयोग भी साथ-साथ करते है। बता दें यह एक ऐसा प्रोसेस है जोकि शरीर के क्षतिग्रस्त ऊतकों (टिश्यू) का कम तापमान में इलाज करता है।

डेव का मानना है कि 40 साल से कम उम्र वाले इन चीजों को अपनाकर 100 साल तक खुश और एक्टिव बने रह सकते हैं। इसलिए वह इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं। उनका मानना है कि खाली पेट रहने से शरीर खुद की मरम्मत करता है।

चीनी लड़कों में ‘मर्दाना कमजोरी’? स्कूली बच्चों में हो ‘मर्द’ वाली खूबियाँ, कम हों ‘लड़कियों वाले गुण’- शिक्षा मंत्रालय का जोर

एक महिला विरोधी फरमान को लेकर चीन के शिक्षा विभाग की आलोचना हो रही है। चीनी शिक्षा मंत्रालय का मानना है कि स्कूलों में लड़कियों के साथ रहते-रहते लड़कों में ‘लड़कियों वाले गुण’ आ रहे हैं। लिहाजा उन्हें ‘मर्दाना गुण’ देने के लिए नई तरह की शिक्षाएँ दी जाएँगी। इसके तहत चीनी छात्रों को शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। कई लोग इसे महिलाओं के खिलाफ दुर्भावना के रूप में देख रहे हैं।

कई विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को सहिष्णु और विविधता वाली शिक्षा देनी चाहिए। इस प्रस्ताव का नाम है- ‘चीन के टीनएजर लड़कों में स्त्री वाले गुण विकसित होने से रोकना’। चीन के शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इससे युवावस्था में मानसिक अवस्था से जुड़े रिसर्च में मदद मिलेगी। 2018 में ही इस बारे में चीन के नेताओं ने कहा था कि अगर चीन के युवाओं में लड़की वाले गुण बढ़ने से नहीं रोका गया तो ये देश की स्थिरता और विकास में बाधक बनेगा।

चीन के नेताओं ने इस प्रस्ताव पर बहस में कहा था, “आजकल चीन के लड़कों में कायरता बढ़ रही है। उनके भीतर आत्मविश्वास कम हो रहा है। साथ ही उनके अंदर कमजोरी वाले लक्षण नजर आ रहे हैं। वो ‘प्रीटी बॉय सुपरस्टार्स’ की तरह बनते जा रहे हैं।” इन नेताओं का कहना है कि ऐसा इसीलिए हुआ होगा, क्योंकि नर्सरी से लेकर कॉलेजों तक इन छात्रों को अधिकतर कक्षाओं के कई विषयों में महिला शिक्षक ही मिलते हैं।

साथ ही टीवी और फिल्मों में ‘प्रिटी बॉयज’ को दिखाए जाने को भी इसके लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। चीनी सोशल मीडिया वेबसाइट Weibo पर इस सम्बन्ध में 200 करोड़ से अधिक बार लोग चर्चा कर चुके हैं। चीनी शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि शिक्षा के अलावा महिलाओं एवं पुरुषों को उनकी ‘जिम्मेदारियों और कर्तव्यों’ की याद दिलानी भी ज़रूरी है। मंत्रालय का कहना है कि लड़के अपने आचरण, मनोभाव और शारीरिक गठन में ‘सख्ती’ लाएँ, क्योंकि यही ‘मर्दों की खूबसूरती’ है।

चीन में महिलाओं को लेकर आम लोगों की सोच भी खास अच्छी नहीं है। मुल्क में 40% शादीशुदा या रिश्ते में आ चुकी महिलाएँ यौन हिंसा और मारपीट का शिकार होती हैं। ‘ऑल चाइना वीमन्स फेडरेशन (All-China Women’s Federation)’ ने ये आँकड़े जारी किए थे। चीन ऊपर से तो संपन्न और आधुनिक दिखता है, लेकिन महिलाओं के साथ हिंसा और उनके साथ होने वाले भेदभाव की कई घटनाएँ सामने आती रहती हैं।

हाल ही में ये ही खबर आई थी कि चीन में कैसे कोई भी चीज तैयार करवाने के लिए मजदूरों से से दिन-रात काम करवाया जाता है। वह मुश्किल से दो-चार घंटे सो पाते हैं। हालात इतने बुरे होते हैं कि सपने में भी उन्हें सिर्फ़ वही काम दिखाई देता है। लोगों से ऐसे काम करवाने के लिए चीन में बाकायदा एक कैंप है जिसका नाम- ‘मसंजिया’ रखा गया है। एक रिपोर्ट में बताया गया था कि कैसे मजदूरों के हाथ कागज रगड़ते-रगड़ते हाथ छिल जाते हैं। 

क्या औकात है, जमीर मरी है, भारत रत्न के लायक नहीं: सचिन-अक्षय पर कॉन्ग्रेसी MP

कथित किसान आंदोलन की आड़ में रची गई विदेशी साजिशों के खिलाफ जिस तरह देश की नामी हस्तियों ने एकजुटता दिखाई है, वह विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। कॉन्ग्रेस नेता तो लगातार सचिन तेंदुलकर को निशाना बना रहे हैं।

कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर सिंह गिल ने तेंदुलकर पर हमला करते हुए कहा है कि वे ‘भारत रत्न के लायक नहीं हैं’। साथ ही दावा किया है कि सचिन अपने बेटे को आईपीएल टीम में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन कर रहे हैं। इसके अलावा अक्षय कुमार के फिल्मों का भी उन्होंने बहिष्कार करने की अपील की है।

इससे पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने सचिन को अपने क्षेत्र से इतर विषय पर बोलने में ‘सावधानी बरतने’ की ‘सलाह’ दी थी। दिग्गज क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार जैसी हस्तियों ने भारत के खिलाफ चलाए जा रहे वैश्विक अभियान के विरोध में एकजुट रहने का आह्वान किया था।

पंजाब के कॉन्ग्रेस सांसद जसबीर गिल ने कहा, “मैं अपील करता हूँ सभी लोगों से, देशवासियों से, किसान के समर्थकों से कि इनकी फिल्मों का बहिष्कार करना चाहिए। इन लोगों की क्या औकात है, इनकी जमीर मरी हुई है, जिन्होंने किसानों के खिलाफ बयान देकर सरकार की पूँछ पकड़ी है। मैंने तो पहले ही कह दिया कि ये सचिन तेंदुलकर ने सिर्फ अपने बेटे को आईपीएल में जगह दिलाने के लिए सरकार का समर्थन किया। आप अपने आप सोच लीजिए, मैं आपके दर्शकों पर छोड़ देता हूँ कि वो फैसला करें कि क्या ये आदमी भारत रत्न के लायक है। मैं समझता हूँ कि ये उसके लायक नहीं है।”

सचिन तेंदुलकर को 2014 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था और 2012 में भारत के राष्ट्रपति द्वारा राज्यसभा के लिए नामित किया गया था। इस दौरान केंद्र में कॉन्ग्रेस नीत यूपीए की सरकार चल रही थी। ऐसे में एक कॉन्ग्रेस सांसद का यह कहना कि वह भारत रत्न के योग्य नहीं है, काफी आश्चर्यजनक है।

दिलचस्प बात यह है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के प्रधानमंत्रियों का इतिहास रहा है कि वे खुद को ही ‘भारत रत्न’ से सम्मानित कर चुके हैं। जवाहरलाल नेहरू ने खुद को पद पर रहते हुए भारत रत्न दिया था। उनकी बेटी इंदिरा गाँधी ने प्रधानमंत्री पद पर रहते ही ऐसा किया था। लेकिन कोई भी कॉन्ग्रेस सदस्य यह सवाल नहीं करता कि क्या वे सम्मान के योग्य थे।

बता दें कि क्रिकेट का भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने हाल ही में ट्वीट कर कहा था कि किसान आंदोलन में बाहरी ताकतों को दखल नहीं करना चाहिए। भारतीय ही भारतीयों के बारे में सोचने में सक्षम हैं। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “भारत की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता। बाहरी ताकत दर्शक हो सकते हैं, लेकिन भागीदार नहीं। भारतीय नागरिक भारत के बारे में जानते हैं। हम एक राष्ट्र के तौर पर एकजुट रहें।”

बाहरी ताकतों के ख़िलाफ़ सचिन के आवाज उठाते ही सोशल मीडिया पर केरल वाले यूजर्स के एक धड़े ने खुलकर न केवल उनका विरोध किया, बल्कि देश के साथ खड़े होने के लिए उनका अपमान भी किया। केरल के कोच्चि में शुक्रवार (5 फरवरी 2021) को युवा कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सचिन तेंदुलकर के कट आउट पर कालिख पोत दी थी।

कई सौगात दे PM मोदी ने लॉन्च की ‘असम माला’, कहा- साजिश रचने वालों ने भारत की चाय को भी नहीं छोड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (7 फरवरी, 2021) को असम के बिश्वनाथ और चराइदेव में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की आधारशिला रखी। असम के सोनितपुर जिले के ढेकियाजुली में ‘असम माला (Asom Mala)’ प्रोग्राम को भी लॉन्च किया। सोनितपुर में जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम ने उन विदेशी साजिशों का भी जिक्र किया जो कथित किसान आंदोलन की आड़ में रचे जा रहे हैं।

बता दें, ‘असम माला’ प्रोजेक्ट के तहत राज्य की सड़कों के बुनियादी ढाँचे को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण सड़कों के नेटवर्क के साथ-साथ निर्बाध मल्टी-मॉडल परिवहन की सुविधा के साथ गुणवत्तापूर्ण अंतर-संपर्क मार्ग प्रदान करेगी। यह परिवहन गलियारों के साथ आर्थिक विकास केंद्रों को भी आपस में जोड़ने का काम करेगा और इससे अंतर-राज्य कनेक्टिविटी में सुधार होगा।

इस प्रोजेक्ट को लेकर प्रधानमंत्री ने कहा, “आज भारत माला की तर्ज पर असम माला की शुरुआत की गई है। अगले 15 सालों में असम में चौड़े हाईवेज का जाल हो, सभी गाँव मुख्य सड़कों से जुड़ें, सड़कें देश के शहरों की तरह आधुनिक हों, यह प्रोजेक्ट सपनों को पूरा करेगा, आपका सामर्थ्य बढ़ाएगा।”

पीएम मोदी ने अपने संबोधन के दौरान कहा, “पिछले महीने असम आकर गरीब, पीड़ित, शोषित लोगों को जमीन के पट्टों के वितरण कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मुझे सौभाग्य मिला था। तब मैंने कहा था कि असम के लोगों का स्नेह और आपका प्रेम इतना गहरा है कि वो मुझे बार-बार असम ले आता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मेरा सपना है कि हर राज्य में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज मातृभाषा में पढ़ाना शुरू करें। जब असम में नई सरकार बनेगी मैं असम के लोगों की तरफ से वादा करता हूँ कि असम में हम एक मेडिकल कॉलेज स्थानीय भाषा में शुरू करेंगे।”

वहीं विपक्षियों के नापाक मंसूबे पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “आज देश को बदनाम करने के लिए साजिश रचने वाले इस स्तर तक पहुँच गए हैं कि भारत की चाय को भी नहीं छोड़ रहे। कुछ दस्तावेज सामने आए हैं जिनसे खुलासा होता है कि विदेश में बैठी कुछ ताकतें चाय के साथ भारत की जो पहचान जुड़ी है, उस पर हमला करने की फिराक में हैं।”

उन्होंने पूछा, “क्या आप ऐसे लोगों के इन हमलो को स्वीकार करेंगे? आप इस हमले में शामिल लोगों को स्वीकार करेंगे? क्या आप इन हमलावरों की प्रशंसा करने वालों को स्वीकार करेंगे ? मैं असम की धरती से षड्यंत्रकारियों से कहना चाहता हूँ कि ये जितनी मर्जी षड्यंत्र कर लें देश इनके नापाक मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगा। भारत की चाय पर किए जा रहे हमलों में इतनी ताकत नहीं है कि वो हमारे चाय बागान में काम करने वाले लोगों के परिश्रम का मुकाबला कर सकें।”

पीएम ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए अहा, “गुवाहाटी में एम्स का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। पिछली सरकारें क्यों नहीं समझ पाईं की गुवाहाटी में एम्स होगा तो यहाँ के लोगों को कितना फायदा होगा। सरकार असम के विकास के लिए पूरी निष्ठा से काम कर रही है। असम में आयुष्मान भारत योजना का लाभ करीब सवा करोड़ लोगों को मिल रहा है।”

उन्होंने कहा, “इस बार देश के बजट में चाय बगान में काम करने वाले हमारे भाइयों और बहनों के लिए 1000 करोड़ रुपये की विशेष योजना की घोषणा की गई है। ये पैसा आपको मिलने वाली सुविधाओं को बढ़ाएगा, टी-वर्कर्स का जीवन और आसान बनाएगा।”

गौरतलब है कि असम के कोने-कोने में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर्स भी खोले जा रहे हैं जो गाँव-गरीब के प्राथमिक स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं। इन सेंटर्स पर अब तक असम के 55 लाख से ज्यादा लोग अपना इलाज करा चुके हैं।

Bra देख कर अपना होठ चाटने का आरोपित The Wire का पत्रकार बना मुंबई प्रेस क्लब का अध्यक्ष

वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ के सह संस्थापक और महिलाकर्मियों के साथ यौन शोषण के आरोपित सिद्धार्थ भाटिया को मुंबई प्रेस क्लब का अध्यक्ष चुना गया है। शनिवार (6 फरवरी 2021) को मुंबई प्रेस क्लब के चुनाव हुए थे, जिसमें सिद्धार्थ भाटिया ने सुधाकर कश्यप के खिलाफ जीत दर्ज की। 

पत्रकार स्मिता देशमुख ने ट्वीट करते हुए इस बात की जानकारी दी कि घनघोर वामंथी पत्रकारों ने ‘प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायन्स’ (Progressive Democratic Alliance) नाम का समूह बना कर मुंबई प्रेस क्लब का चुनाव लड़ा। इसमें सिद्धार्थ भाटिया ने अध्यक्ष पद के लिए, इंडियन एक्सप्रेस के वामपंथी पत्रकार गुरबीर सिंह ने चेयरमैन और महाराष्ट्र टाइम्स के समर खलदस ने वाइस चेयरमैन पद के लिए चुनाव लड़ा था। 

एक अन्य पत्रकार श्रीकांत भोंसले के मुताबिक़ प्रोग्रेसिव डेमोक्रेटिक अलायन्स ने क्लब के पदाधिकारियों के लिए 6 उम्मीदवार उतारे थे और 10 अन्य को समिति के सदस्यों के लिए उतारा था। इन सभी 16 उम्मीदवारों की अगुवाई घनघोर वामपंथी ‘पत्रकार’ सिद्धार्थ भाटिया ने की थी और सभी ने मुंबई प्रेस क्लब के चुनावों में जीत हासिल की है। 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2018 के दौरान #Metoo अभियान काफी चर्चा में था। इसमें तमाम दिग्गजों पर कई गंभीर आरोप सामने आए थे। उसी दौरान एक महिला ने सिद्धार्थ भाटिया पर यौन शोषण का आरोप लगाया था। 

सहकर्मियों ने भी लगाया था यौन शोषण का आरोप 

#Metoo अभियान के दौरान दो अलग-अलग घटनाओं में, दो अलग-अलग महिलाओं ने सिद्धार्थ भाटिया पर आरोप लगाया था कि उन्होंने अपनी पावर और पोजिशन का इस्तेमाल करके उनका शोषण किया था। एक महिला के मुताबिक़ भाटिया DNA में रहते हुए नई इंटर्न्स को लिखने से जुड़ी बारीकियाँ समझाने के बहाने अपने झाँसे में लेता था। वहीं एक ट्विटर यूजर ने आरोप लगाया था भाटिया दफ्तर में महिलाकर्मियों की ब्रा की स्ट्रिप देख कर होठों का निचला हिस्सा चाटना शुरू कर देता था। 

हालाँकि DNA के कार्यकाल से जुड़े महिला के आरोपों को भाटिया ने खारिज कर दिया था। भाटिया के मुताबिक़ जब वो DNA में काम करते थे, तब वहाँ इस नाम की कोई महिला काम नहीं करती थी। इसके अलावा भाटिया ने द वायर की कर्मचारी रह चुकी महिला के आरोपों पर कहा कि वो सच नहीं है क्योंकि द वायर हिन्दी में कोई महिला कर्मचारी नहीं थी। 

इस तरह के तमाम आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी कि उन पर आरोप लगाने वाले ट्विटर हैंडल्स की जाँच हो। भाटिया ने यहाँ तक दावा किया था कि उन्होंने महिलाओं से कहा था कि वह मामले से जुड़ी अधिक जानकारी के साथ आगे आएँ लेकिन ऐसा किसी ने नहीं किया। 

देश की इकलौती ‘फ़ेक न्यूज़’ वेबसाइट – The Wire

ख़बरों से ज़्यादा विवादों के चलते सुर्ख़ियों में रहने वाले वामपंथी मीडिया समूह ‘द वायर’ हिन्दू विरोधी विचारधारा और देश विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देने के लिए मशहूर है। स्वघोषित ‘समाचार वेबसाइट’ की शुरुआत अमेरिकी नागरिक सिद्धार्थ वरदराजन, एमके वेणु और सिद्धार्थ भाटिया ने की थी। ये वेबसाइट फर्जी ख़बरें फैलाने और प्रोपेगेंडा प्रचार करने के लिए मशहूर है। 

ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब द वायर झूठ परोसते हुए नज़र आया है लेकिन इन्होंने अपने झूठ के लिए कभी माफ़ी नहीं माँगी। उन तमाम झूठों में ये कुछ झूठ हैं, जो द वायर ने पत्रकारिता के नाम पर परोसे हैं। 

द वायर के संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर फेक न्यूज़ फैलाने पर एफ़आईआर दर्ज की गई थी। इसके अलावा पूर्व न्यूज एंकर विनोद दुआ पर भी दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों के दौरान गलत रिपोर्टिंग करने और जनता के बीच भ्रम पैदा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। विनोद दुआ पर भी यौन शोषण के आरोप लगाए गए थे।

‘शहर कोई सा हो, राज हमारा होगा’: रचित जाट की हत्या का जश्न मना रहा था नाज़िम, यूपी पुलिस ने दबोचा

उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर सेल ने बिजनौर में रचित जाट की हत्या का जश्न मनाने वाले एक शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपित नाज़िम सोशल मीडिया के जरिए इस हत्याकांड का जश्न मना रहा था। उसने व्हाट्सएप्प पर इस सम्बन्ध में भड़काऊ स्टोरी लगाई थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। स्थानीय स्तर पर इस मामले में सांप्रदायिक तनाव गहराने की कोशिश की जा रही है, ऐसा इस गिरफ़्तारी से खुलासा हुआ है।

यूपी पुलिस भी इस चीज को समझती है और इसीलिए सतर्क हो गई है। सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही आपत्तिजनक सामग्रियों का निरीक्षण किया जा रहा है। ताज़ा घटना शनिवार (फ़रवरी 6, 2021) की है, जब झालू क्षेत्र के कानून गोयान मोहल्ले के रहने वाले मोहम्मद मोहसिन के बेटे नाज़िम को गिरफ्तार किया गया। उसने रचित जाट की हत्याकांड का जश्न मनाते हुए व्हाट्सएप्प पर स्टोरी लगाई थी।

उसमें उसने लिखा था, “गद्दी तेरी, ताज हमारा होगा, शहर कोई सा हो, राज हमारा होगा।” उसने रचित जाट की लाश और आरोपितों की तस्वीर शेयर कर ‘लव यू यारों’ भी लिखा था। इसके बाद से ही स्थानीय इलाके में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने लगा था। सोशल मीडिया पर इसके स्क्रीनशॉट्स तेज़ी से वायरल होने से माहौल गरमा रहा था। एसपी के आदेश के बाद उसे तुरंत धर-दबोचा गया और गंभीर धाराओं में मुकदमा भी दर्ज किया जा रहा है। पुलिस ने चेताया है कि सोशल मीडिया के जरिए भड़काने वालों पर कार्रवाई होगी।

पुलिस ने जानकारी दी है कि रचित जाट जब बाजार से अपने दोस्त के लिए गिफ्ट खरीद रहा था, तब हमलावरों ने पीछे से उस पर गोलीबारी की। इससे उसकी मौत हो गई। सर्किल ऑफिसर कुलदीप कुमार गुप्ता ने बताया कि हमलावर और आरोपित पहले दोस्त हुआ करते थे। आरोपितों के खिलाफ NSA (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत कार्रवाई की जाएगी। झालू में पुलिस बल की तैनाती भी बढ़ा दी गई है।

बताते चलें कि बिजनौर जिले के हल्दौर के कस्बा झालू में सरे बाजार युवा रचित जाट को दिनदहाड़े गोलियों से भूनकर मौत के घाट उतार दिया गया था। अपराधी कत्ल कर मौका-ए-वारदात के पास ही दुकान के बाहर बैठ गए और आराम से सिगरेट पीते रहे। बीच-बीच में फायरिग कर तमंचे लहराते हुए गवाही देने वालों को जान से मारने की धमकी देते रहे। आरोपितों शारिक, सहजन, आसिफ आब्दी, शादाब और शहवर गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

Video: डर, सिहरन, अफरातफरी… उत्तराखंड में ग्लेशियर फटने का खौफनाक मंजर

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर फटने से भारी तबाही का मंजर दिख रहा है। अलकनंदा और धौलीगंगा उफान पर हैं। पानी के तेज बहाव के मद्देनजर कीर्ति नगर, देवप्रयाग, मुनि की रेती इलाकों को अलर्ट पर रखा गया है। पानी के बहाव में कई घरों के बहने की आशंका है। इसके कई वीडियो सामने आ रहे हैं, जो काफी खौफनाक हैं।

आसपास के इलाके खाली कराए जा रहे हैं। लोगों से सुरक्षित इलाकों में पहुँचने की अपील की जा रही है। चमोली पुलिस ने अलकनंदा नदी के किनारे रहने वालों को सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन नदी किनारे बसे लोगों के घर खाली कराने में जुट गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के कई जिलों को अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा है कि जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और आपदा प्रबंधन को इस आपदा से निपटने के आदेश दे दिए हैं। किसी भी प्रकार की अफ़वाहों पर ध्यान ना दें। सरकार सभी ज़रूरी कदम उठा रही है।

बताया जा रहा है कि जब यह हादसा हुआ, तब ऋषिगंगा और धौलीगंगा के पावर प्रोजेक्ट पर काफी संख्या में मजदूर कार्य कर रहे थे। इस हादसे में करीब 150 लोगों के लापता होने की आशंका है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार इस घटनाक्रम पर निगरानी रखे हुए हैं। वे मौके के लिए रवाना हो गए हैं। वहीं, केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस पूरे मामले पर रिपोर्ट माँगी है।

मिली जानकारी के अनुसार रविवार (फरवरी 7, 2021) सुबह एवलांच के बाद चमोली जिले के अंर्तगत ऋषिगंगा नदी पर रैणी गाँव में निर्माणाधीन 24 मेगावाट के हाइड्रो प्रोजेक्ट का बैराज टूट गया। इसके बाद मलबे और पानी का तेज बहाव धौलीगंगा की ओर बढ़ा।

नतीजतन रैणी से करीब 10 किमी दूर तपोवन में धौलीगंगा नदी पर निर्माणाधीन 520 मेगावाट की विद्युत परियोजना का बैराज भी टूट गया। इसके बाद हालात बिगड़ गए। दोनों प्रोजेक्ट पर काम कर रहे बड़ी संख्या में मजदूरों के बहने की सूचना है।

आईटीबीपी के अनुसार, “रेणी गाँव के नजदीक धौलीगंगा में भयानक बाढ़ देखी गई है जहाँ बादल फटने या जलाशय के टूटने के चलते जल निकायों में बाढ़ आ गई है और नदी किनारे स्थित कई घर तबाह हो गए हैं। हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है। आईटीबीपी के सैकड़ों जवान रेस्क्यू के लिए रवाना हो गए हैं।”