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बिरयानीजीवी, हार्वर्डजीवी, थप्पड़जीवी…: PM के ‘आंदोलनजीवी’ के बाद मीम्स की बौछार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फरवरी 8, 2021) को संसद के उच्च सदन राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत हुई चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान किसान आंदोलन की आड़ में हो रही राजनीति को लेकर उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधा। पीएम मोदी ने कहा कि हमने बुद्धिजीवी सुना था। लेकिन कुछ लोग आंदोलनजीवी बन गए हैं। देश में कुछ भी हो वे वहाँ पहुँच जाते हैं। कभी पर्दे के पीछे और कभी आगे, इनकी पूरी जमात है। ऐसे लोगों की पहचान कर हमें इनसे बचना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवी हुआ करते थे। अब एक नया वर्ग जुड़ गया है- आंदोलनजीवी। ऐसे लोग खुद आंदोलन नहीं चला सकते हैं। लेकिन किसी का आंदोलन चल रहा है तो वहाँ पहुँच सकते हैं। ये आंदोलनकारी ही परजीवी हैं, जो हर जगह मिलते हैं।

प्रधानमंत्री के ‘आंदोलनजीवी’ शब्द का इस्तेमाल करने के बाद सोशल मीडिया में मीम्स की बौछार हो गई है। यूजर्स कुछ लोगों की ‘विशेषता’ को ध्यान में रखते हुए बता रहे हैं कि वे कौन सा जीवी हैं।

एक सोशल मीडिया यूजर ने सीएए-एनआरसी के खिलाफ शाहीन बाग में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल बिल्किस बानो (दादी) की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें ‘बिरयानीजीवी’ बताया है।

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने NDTV के ‘पत्रकार’ रवीश कुमार की तस्वीर शेयर करते हुए उन्हें ‘डर का माहौल जीवी’ बताया।

ऐसे ही एक मीम में ‘इच्छाधारी’ प्रदर्शनकारी योगेंद्र यादव को ‘आंदोलनजीवी’ बताया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक मीम में आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को लोगों ने ‘थप्पड़जीवी’ का नाम दिया है।

यूजर्स ने NDTV की पूर्व पत्रकार निधि राजदान पर मीम बनाते हुए उन्हें ‘हार्वर्डजीवी’ बताया है।

लोगों ने भाजपा के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी को ‘क्रिटिक्सजीवी’ करार दिया है।

इसी कड़ी में राणा अयूब और आरफा खानम शेरवानी को ‘फोटोशॉपजीवी’ नाम दिया गया है।

प्रशांत भूषण के रूप में देश को मिला पहला ‘आन्दोलनजीवी’, नहीं मालूम UP और हरियाणा किधर हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यसभा में ‘आन्दोलनजीवी’ शब्द का प्रयोग किया। पीएम ने राज्यसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ सालों में एक नई जमात सामने आई है- आंदोलनजीवियों की, जो कि वकीलों का आंदोलन हो, छात्रों का आंदोलन हो, सब जगह पहुँच जाते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि ये आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं, देश को इन आंदोलनजीवियों से बचाने की जरूरत है। पीएम मोदी के इस बयान के ट्विटर पर चर्चा बनते ही प्रशांत भूषण ने फ़ौरन इसका एक उदाहरण पेश कर दिया, और साबित कर दिया कि वो ना ही श्रमजीवी हैं ना ही बुद्धिजीवी।

दरअसल, ट्विटर पर लेफ्ट-लिबरल्स के मसीहा बनने वाले प्रशांत भूषण ने रविवार (फरवरी 07, 2021) को एक वीडियो रीट्वीट किया जिसमें लिखा था, “चरखी दादरी पर आज किसान आंदोलन।” प्रशांत भूषण ने इसे रीट्वीट करते हुए लिखा, “बंगाल जीतने के चक्कर में शायद भाजपा उत्तर प्रदेश खो दिया है।”

वास्तव में, प्रशांत भूषण को ये जानकारी ही नहीं थी कि चरखी-दादरी उत्तर प्रदेश नहीं बल्कि हरियाणा राज्य में स्थित है। ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) के कंचन गुप्ता ने प्रशांत भूषण के ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्वीट करते लिखा, “चरखी दादरी हरियाणा में है। याद है 1996 में सऊदी और कज़ाख (कजाकिस्तान) विमान इस जगह पर टकरा गए थे और खेत जली लाशों से भरे हुए थे? RSS कार्यकर्ता तब सबसे पहले मौके पर मदद करने वाले लोग थे और वो मानव अवशेष एकत्र कर रहे थे। मरने वाले यात्रियों में से अधिकांश मुस्लिम थे। उस दिन तुम कहाँ थे?”

कंचन गुप्ता ने लिखा कि वो उस दिन वहाँ मौजूद थे। गौरतलब है कि नवंबर 12, 1996 को चरखी-दादरी जगह पर ही हवा में दो विमान टकरा गए थे। इस विमान हादसे में करीब 349 लोगों की मौत हो गई थी। यात्रियों के शव लगभग 10 किमी के दायरे में फैले थे। यह हादसा देर शाम हुआ था इसलिए बचाव और राहत के काम में काफी दिक्कतें आई थीं और आरएसएस ने तब राहत और बचाव कार्य में मदद की थी।

प्रशांत भूषण का यह ट्वीट प्रधानमंत्री के आज के भाषण के बाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है। लोगों का कहाँ है कि प्रशांत भूषण ना ही बुद्धिजीवी है क्योंकि उसे चरखी-दादरी तक का पता नहीं, ना ही वह श्रमजीवी है, क्योंकि वो विमान हादसे के दिन भी कहीं मौजूद नहीं थे। बाकी जो एक कैटेगरी अब बचती है, वह है- आन्दोलनजीवी की और उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण प्रशांत भूषण हैं ही।

पीएम मोदी ने कहा कि कुछ बुद्धिजीवी होते हैं, लेकिन कुछ लोग आंदोलनजीवी हो गए हैं, देश में कुछ भी हो वो वहाँ पहुँच जाते हैं, कभी पर्दे के पीछे और कभी फ्रंट पर, ऐसे लोगों को पहचानकर हमें इनसे बचना होगा क्योंकि ये आंदोलनजीवी ही परजीवी हैं, जो हर जगह मिलते हैं।

धोती और साड़ी में स्कीइंग… बर्फीली वादियों में गजब का बैलेंस, वायरल हो रहा वीडियो

एक NRI कपल के वीडियोज काफी वायरल हो रहे हैं, जिनमें वो धोती और साड़ी जैसे भारतीय पारंपरिक परिधान पहन कर स्कीइंग करते हुए देखे जा सकते हैं। ये वीडियोज मिनेसोटा के वेल्श गाँव का है। अमेरिका का ये क्षेत्र स्कीइंग के लिए अच्छा डेस्टिनेशन माना जाता है और यहाँ लोग इसीलिए आते भी हैं। मधु और दिव्या नामक पति-पत्नी ने जो वीडियो शूट किए, उन्हें दिव्या ने अपने सोशल मीडिया हैंडल्स पर डाला है।

इंस्टाग्राम पर दिव्या ने शेयर किया वीडियो

दिव्या ने इन वीडियोज को शेयर करते हुए लिखा कि उन्हें अपना ध्यान बँटाने के लिए कुछ अलग, कुछ क्रेजी करना पड़ा। इस वीडियो में दोनों पहले स्कीइंग गियर थामे हुए दिखते हैं। जहाँ मधु ने सफ़ेद रंग की धोती पहन रखी है, वहीं दिव्या ने हरे रंग की साड़ी पहनी है। उनके वीडियो को इंस्टाग्राम पर अब तक लगभग 4 लाख लोगों ने देखा है और जम कर प्रशंसा की है। खासकर भारतीय लोग इससे खुश नजर आए।

लाखों लोगों ने देख कर की सराहना

कई कमेंट्स में लोगों ने उन दोनों की सराहना की और उन्हें ‘मेड फॉर एच अदर’ बताया। वहीं कई लोग ‘ओह माय गॉड’ का कमेंट देते हुए देखे गए। उन्हें यकीन ही नहीं हो रहा था कि इस तरह से कोई अमेरिका में कर सकता है। कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि उन्होंने आज जो सबसे अच्छी चीज देखी है, वो यही है। लोगों ने विदेश में भारतीय परंपरा को इस तरह से जीवित रखने के लिए उनका धन्यवाद भी किया।

NGO से लेकर बेंगलुरु दंगों की फंडिंग तक: चीन बिना लड़े ही दुनिया जीत लेगा, ताइवान के लेखक ने बताया

‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ (PRC) एक खूनी गृहयुद्ध से जन्मा था, जो कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा जीता गया था। विस्तारवादी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के लिए अपनी भौगोलिक सीमाओं के विस्तार का यह अघोषित युद्ध फिर कभी समाप्त ही नहीं हुआ। चीन निरंतर ही अपने इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपने देश के भीतर से लेकर विदेशों को भी विभिन्न तरह से निशाना बनाते रहा है और उसका सबसे पहला लक्ष्य है भारत!

ताइवान के युद्ध विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर केरी गेर्शनेक (Kerry Gershaneck) ने अपनी पुस्तक ‘पॉलिटिकल वॉरफेयर चीन’ (Political Warfare: Strategies for Combating China’s Plan to Win without Fighting) में कम्युनिस्ट नेतृत्व वाले चीन द्वारा ताइवान और दुनिया पर अपना वर्चस्व बनाने के उद्देश्य से अपनाई जा रही रणनीतियों और चीन के संदेशों के बारे में बताया है कि किस तरह से चीन बिना किसी प्रत्यक्ष युद्ध के ही दुनिया जीतने की रणनीति पर काम करता रहा है।

गेर्शेनक की इस पुस्तक के अनुसार, भारत पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के इस राजनीतिक युद्ध का एक प्रमुख लक्ष्य है। उनका मानना है कि पीआरसी का पूरा राजनीतिक युद्ध बल भारत को कमजोर करने से लेकर, एनजीओ की फंडिंग, और संभवतः बेंगलुरु में एक ताइवानी निर्माण फैक्ट्री पर हमला कराने के लिए काम कर रहा है। लेखक ने बेंगलुरु में हुई उस हिंसा की ओर इशारा किया है, जो हाल ही में एप्पल के ताइवानी कांट्रेक्टर कंपनी विस्ट्रोन की फैक्ट्री में की गई थी।

लेखक के अनुसार, नई दिल्ली ने आत्मरक्षा में कुछ कदम उठाए हैं, जैसे कि चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाना। हालाँकि, उनका मानना है कि भारत पर चीनी हमले होते रहेंगे, खासकर अगर भारत को लगता है कि यह चीन की सप्लाई चेन को विस्थापित करने के साथ ही इंडो-पेसिफिक क्षेत्र के लिए सुरक्षा कवच के रूप में उभर सकता है।

पुस्तक के अनुसार, भारत को चीन के इस आक्रामक रुख से निपटने के लिए अपने जैसे देशों को साथ लेकर एक रणनीति बनाने की आवश्यकता है। लेखक का कहना है कि स्वतंत्र दुनिया को अब यह तय करना होगा कि क्या वह बिना लड़े हारने को तैयार है? इस पुस्तक में ऐसे कई अहम फैसलों का सुझाव दिया गया है, जो स्वतंत्र राष्ट्रों को चीन के खिलाफ अपनानी चाहिए। चीनी अधिकारियों पर कार्रवाई से लेकर उनके संस्थानों पर कड़ी पैरवी भी इनमें से कुछ सुझाव हैं।

CCP ने लंबे समय से अपने दुश्मनों के खिलाफ दुष्प्रचार का तरीका अपनायाहै। लेखक का कहना है कि हाल ही के कुछ वर्षों में चीन ने सोशल मीडिया की नई दुनिया में ‘राजनीतिक और मनोवैज्ञानिक युद्ध’ के द्वारा बड़ी कामयाबी हासिल की और इसका लाभ उठाकर प्रोपेगेंडा के साथ अपने विरोधियों के खिलाफ माहौल बनाया। लेखक का कहना है कि सोशल मीडिया का उपयोग कर चीन ने यह विश्वास पैदा करने की कोशिश की है कि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास कमजोर होता रहे और राजनीतिक अस्थिरता बनी रहे।

इसके अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रभुत्व जमाने के लिए पीआरसी ने पीएलए साइबर फोर्स की स्थापना की है, जिसमें 3,00,000 ‘सैनिकों’ के साथ-साथ शायद 2 मिलियन लोगों का एक समूह ’50 सेंट आर्मी’ बनाया है, जिन्हें सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने और सीसीपी के प्रचार के लिए मामूली सी फीस दी जाती है।

सभी ‘नाराज फूफा’ को PM मोदी ने कहा – ‘MSP था, MSP है, MSP रहेगा… बनाएँगे मंडियों को अत्याधुनिक’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए राज्यसभा में विपक्षी दलों के ‘शादी वाले फूफाजी’ विशेषण का प्रयोग किया। उन्होंने कहा कि सदन में किसान आंदोलन की भरपूर चर्चा हुई है। ज्यादा से ज्यादा समय जो बात बताई गईं, वो आंदोलन के संबंध में बताई गई। लेकिन, उन्होंने ये भी कहा कि किस बात को लेकर आंदोलन है उस पर सब मौन रहे।

उन्होंने सलाह दी कि जो मूलभूत बात है, अच्छा होता कि उस पर भी चर्चा होती। उन्होंने पूछा कि खेती की मूलभूत समस्या क्या है, उसकी जड़ कहाँ है? उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को याद करते हुए कहा कि वो छोटे किसानों की दयनीय स्थिति पर हमेशा चिंता करते थे। पीएम मोदी ने सवाल दागा कि पहले की सरकारों की सोच में छोटा किसान था क्या? जब हम चुनाव आते ही एक कार्यक्रम करते हैं कर्जमाफी, ये वोट का कार्यक्रम है या कर्जमाफी का… ये हिन्दुस्तान का नागरिक भलीभाँति जानता है।

उन्होंने ये भी ध्यान दिलाया कि जब कर्जमाफी की जाती है, तो छोटा किसान उससे वंचित रहता है, उसके नसीब में कुछ नहीं आता है। पहले की फसल बीमा योजना भी छोटे किसानों को नसीब ही नहीं होती थी। यूरिया के लिए भी छोटे किसानों को रात-रात भर लाइन में खड़े रहना पड़ता था, उस पर डंडे चलते थे। अपनी सरकार की उपलब्धि गिनाते हुए उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि योजना से सीधे किसान के खाते में मदद पहुँच रही है। 10 करोड़ ऐसे किसान परिवार हैं, जिनको इसका लाभ मिल गया।

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक 1 लाख 15 हजार करोड़ रुपये उनके खाते में भेजे गये हैं, जिसमें अधिकतर छोटे किसान हैं। साथ ही अफ़सोस जताया कि अगर पश्चिम बंगाल में ये सहायता पहुँचने दी जाती तो ये आँकड़ा कहीं ज्यादा होता। उन्होंने बताया कि 2014 के बाद सरकार ने कुछ परिवर्तन किया, फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ा दिया ताकि छोटा किसान भी उसका फायदा ले सके। उन्होंने आँकड़े बताए कि पिछले 4-5 साल में फसल बीमा योजना के तहत 90 हजार करोड़ रुपए के क्लेम किसानों को दिए गए है। पीएम ने कहा:

“पहली बार हमने किसान रेल की कल्पना की। छोटा किसान जिसका सामान बिकता नहीं था, आज गाँव का छोटा किसान किसान रेल के माध्यम से मुंबई के बाजार में अपना सामान बेचने लगा, इससे छोटे किसान को फायदा हो रहा है। ‘किसान उड़ान’ के द्वारा हवाई जहाज से जैसे हमारे नॉर्थ-ईस्ट की कितनी बढ़िया-बढ़िया चीजें जो ट्रांसपोर्ट सिस्टम के अभाव में वहाँ का किसान लाभ नहीं उठा पाता था, आज उसे किसान उड़ान योजना का लाभ मिल रहा है। हर कानून में अच्छे सुझावों के बाद कुछ समय के बाद बदलाव होते हैं। इसलिए अच्छा करने के लिए अच्छे सुझावों के साथ, अच्छे सुधारों की तैयारी के साथ हमें आगे बढ़ना होगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी को मिल कर चलने की सलाह दी और निमंत्रण दिया कि हम देश को आगे बढ़ाने के लिए, कृषि क्षेत्र के विकास के लिए, आंदोलनकारियों को समझाते हुए, हमें देश को आगे ले जाना होगा। उन्होंने कहा कि हमें एक बार देखना चाहिए कि कृषि परिवर्तन से बदलाव होता है कि नहीं। कोई कमी हो तो उसे ठीक करेंगे, कोई ढिलाई हो तो उसे कसेंगे। साथ ही विश्वास दिलाया कि मंडियाँ और अधिक आधुनिक बनेंगी। उन्होंने कहा, “एमएसपी है, एसएसपी था और एमएसपी रहेगा।”

पीएम मोदी ने सभी को सदन की पवित्रता का ख्याल रखने की सलाह देते हुए आश्वासन दिया कि जिन 80 करोड़ लोगों को सस्ते में राशन दिया जाता है, वो भी लगातार रहेगा। उन्होंने कहा कि एक बड़े परिवार में ऐसा होता है कि शादी-ब्याह में फूफा नाराज़ हो जाते हैं कि हमें नहीं पूछा, नहीं बुलाया, लेकिन मिल-बैठ कर सभी समस्याएँ सुलझा ली जाती हैं। पीएम के इस बयान पर सदन में माहौल काफी हल्का हो गया।

किसान आंदोलन में राजनीति करने वालों पर निशाना साधते हुए PM मोदी ने कहा, “पहले श्रमजीवी और बुद्धिजीवी हुआ करते थे, अब एक नया वर्ग जुड़ गया है – आन्दोलनजीवी… और ये सारे आंदोलनजीवी परजीवी होते हैं।”

81 साल के मौलवी को जमानत: कराया था बाल विवाह, निकाह से पहले ही शादीशुदा शौहर ने जबरन बना लिए थे शारीरिक सम्बन्ध

महाराष्ट्र के ठाणे में बाल-विवाह के मामले में आरोपित 81 वर्षीय मौलाना को अदालत ने गिरफ्तारी से राहत प्रदान की है। उसने एक नाबालिग का निकाह कराया था। स्पेशल POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण करने संबंधी अधिनियम) जज केडी शिरभाते ने सोमवार (फ़रवरी 1, 2021) को उसे गिरफ़्तारी पूर्व एंटीसिपेटरी बेल दिया, जिस आदेश की कॉपी शनिवार को उपलब्ध हुई। पीड़िता ने जनवरी में ही शिकायत दर्ज कराई थी।

उस शिकायत में कहा गया था कि उसका निकाह एक व्यक्ति से ठीक कर दिया गया था और दोनों परिवारों ने निर्णय लिया था कि उसके 18 वर्ष के होते ही दोनों का निकाह करा दिया जाएगा। लेकिन, दिसंबर 2017 में उक्त व्यक्ति ने पीड़िता से जबरन शारीरिक सम्बन्ध बनाए। तब तक वो बालिग़ भी नहीं हुई थी। इसके बाद उसने धमकाया कि वो इसी तरह उसके साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाती रहे, वरना अच्छा नहीं होगा।

जनवरी 5, 2019 को आखिरकार उसका निकाह उस व्यक्ति से करा दिया गया। लड़की तब भी बालिग़ नहीं हुई थी, जिससे ये बाल-विवाह की श्रेणी में आता है और भारत के कानून के हिसाब से ये अपराध है। शिकायतकर्ता ने अपनी अर्जी में आरोपितों की सूची में 81 वर्षीय मौलवी का नामा भी दिया था, जिसने निकाह की प्रक्रिया संपन्न कराई। पीड़िता ने ये भी खुलासा किया है कि निकाह के बाद वो 2 बार गर्भवती हुई।

आरोप है कि दोनों बार उसके शौहर ने उसका जबरन गर्भपात करा दिया। कोर्ट के आदेश में पीड़िता की उम्र की चर्चा नहीं की गई है। पीड़िता ने बताया है कि उसके निकाह के 3 महीने बाद ही उसका शौहर एक दूसरी महिला को घर में लेकर आया था। उसने दावा किया कि वो महिला उसकी पहली पत्नी है, जिससे उसने दिसंबर 24, 2018 को निकाह किया था। जबकि वो इससे 1 वर्ष पूर्व ही पीड़िता के साथ शारीरिक सम्बन्ध बना चुका था।

पीड़िता ने बताया कि उसके शौहर के साथ अक्सर उसका झगड़ा होता था और वो उसकी पिटाई भी करता था। उसने दिसंबर 10, 2020 को इन हरकतों से तंग आकर अपने शौहर का घर छोड़ दिया। फिर जनवरी 2021 में FIR दर्ज कराई। मौलवी ने अपने बचाव में कहा कि पीड़िता की उम्र दस्तावेजों में 18 वर्ष थी और उसने इस्लामी रीति-रिवाजों के हिसाब से सब किया। जज ने उसके रोल को सीमित’ मानते हुए जमानत दे दी।

‘लोकतंत्र की हत्या’ गिरोह को संसद में PM मोदी ने दिया करारा जवाब, नेताजी बोस को बताया ‘प्रथम प्रधानमंत्री’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (फ़रवरी 8, 2021) को राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब दिया। संसद के उच्च-सदन में अभिभाषण पर चर्चा शुक्रवार को ही ख़त्म हो गई थी। प्रधानमंत्री का ये सम्बोधन ऐसे समय में हुआ, जब दिल्ली और आसपास के इलाकों में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ संसद में बहस का मुद्दा बना रहा। वहीं असम और पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव भी होने हैं।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा विश्व अनेक चुनौतियों से जूझ रहा है और शायद ही किसी ने सोचा होगा कि मानव जाति को ऐसे कठिन दौर से गुजरना होगा, ऐसी चुनौतियों के बीच। उन्होंने कहा कि जब हम पूरी दुनिया को देखते हैं और फिर भारत की तरफ ध्यान देते हैं तो पता चलता है कि हमारा देश युवा प्रतिभाओं के लिए मौकों का देश बन गया है। उन्होंने कहा कि भारत आज एक युवा, उत्साही और मेहनती देश है।

पीएम मोदी ने 13-14 घंटे तक 50 से अधिक सदस्यों द्वारा अपने विचार रखने को लेकर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि अनेक चुनौतियों के बीच राष्ट्रपति का इस दशक का प्रथम भाषण हुआ। लेकिन, ये भी सही है जब पूरे विश्व पटल की तरफ देखते हैं, भारत के युवा मन को देखते हैं तो ऐसा लगता है कि आज भारत सच्चे में एक अवसरों की भूमि है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि अनेक अवसर हमारा इंतजार कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि हम सभी के लिए ये भी एक अवसर है कि हम आजादी के 75 वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं, ये अपने आप में एक प्रेरक अवसर है। साथ ही लोगों से अपील की कि हम जहाँ भी, जिस रूप में हों, माँ भारती की संतान के रूप में इस आजादी के 75वें पर्व को हमें प्रेरणा का पर्व मनाना चाहिए।

साथ ही कहा कि भारत के लिए दुनिया ने बहुत आशंकाएँ जताई थीं और विश्व बहुत चिंतित था कि अगर कोरोना की इस महामारी में अगर भारत अपने आप को संभाल नहीं पाया तो न सिर्फ भारत पूरी मानव जाति के लिए कितना बड़ा संकट आ जाएगा।

प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा कि कोरोना की लड़ाई जीतने का यश किसी सरकार को नहीं जाता है, किसी व्यक्ति को नहीं जाता है, लेकिन पूरे हिंदुस्तान को तो जाता है। उन्होंने पूछा कि गर्व करने में क्या जाता है? विश्व के सामने आत्मविश्वास से बोलने में क्या जाता है? उन्होंने लोकतंत्र पर शक उठाने वालों को करारा जवाब देने के लिए नेताजी का उद्बोधन साझा किया। उन्होंने कहा कि हमने अपने युवा पीढ़ी को ये नहीं दिखाया कि हम लोकतंत्र की जननी हैं।

“हमारा लोकतंत्र किसी भी मायने में पश्चिमी संस्थान नहीं है, ये एक मानव संस्थान है। भारत का इतिहास लोकतांत्रिक संस्थानों से भरा पड़ा है। प्राचीन भारत में 81 लोकतंत्र का वर्णन मिलता है। आज इस लोकतंत्र पर चौतरफा हमला हो रहा है। ये न तो आक्रामक है, न संकीर्ण है। ये सत्यम, शिवम्, सुंदरम से प्रेरित है।” – पीएम मोदी ने कहा कि ये बयान ‘आज़ादी हिन्द फ़ौज के प्रथम सरकार के प्रथम प्रधानमंत्री’ नेताजी सुभास चंद्र बोस ने दिया था।

उन्होंने कहा कि जब दुनिया भर में निराशा का माहौल है, भारत का विदेशी मुद्रा भण्डार बढ़ रहा है, अन्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है और इंटरनेट यूजरों के मामले में हम दूसरे बड़े देश हैं। उन्होंने कहा कि अब देश में निवेश बढ़ रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि 2 वर्ष पहले इसी सदन में कुछ लोग कह रहे थे कि लोगों के पास मोबाइल फोन कहाँ है, डिजिटल लेनदेन कैसे होगा लेकिन अब हर महीने 4 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन डिजिटली हो रहा है।

उन्होंने कहा कि यहाँ की धरती पर हुए स्टार्टअप्स की जयजयकार दुनिया कर रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अक्षय ऊर्जा से लेकर जल-नभ और थल तक भारत आगे बढ़ रहा है। उन्होंने संसद में 2014 में दिए अपने पहले भाषण की याद दिलाई, जब उन्होंने अपनी सरकार को गरीबों को समर्पित बताया था। उन्होंने कोरोना के दौरान करोड़ों लोगों को अनाज दिए जाने से लेकर अपनी अन्य योजनाओं के बारे में गिनाया।

उन्होंने कहा कि इस कोरोना काल में भारत ने वैश्विक संबंधों में एक विशिष्ट स्थान बनाया है, वैसे ही भारत ने हमारे फेडरल स्ट्रक्चर को इस कोरोना काल में, हमारी अंतर्भूत ताकत क्या है, संकट के समय हम कैसे मिल कर काम कर सकते हैं, ये केंद्र और रज्य सरकार ने मिल कर कर दिखाया है। साथ ही कहा कि भारत का लोकतंत्र ऐसा नहीं है कि जिसकी खाल हम इस तरह से उधेड़ सकते हैं। देश के नागरिक कभी इसे नहीं मानेंगे।

प्रधानमंत्री ने स्वीकार किया कि चुनौतियाँ तो हैं, लेकिन हमें तय करना है कि हम समस्या का हिस्सा बनना चाहते हैं या समाधान का माध्यम बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है कि जाने-अनजाने में हमने नेताजी की भावना को, उनके आदर्शों को भुला दिया है। उसका परिणाम है कि आज हम ही, खुद को कोसने लगे हैं। हमने अपनी युवा पीढ़ी को सिखाया नहीं कि ये देश लोकतंत्र की जननी है। हमें ये बात नई पीढ़ी को सिखानी है।

‘दुनिया की सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले मुल्क की सड़कों पर खून की बाढ़, बहुत बड़ा अपशकुन’ : FACT CHECK

इंडोनेशिया की सड़कों पर कुछ लाल-लाल सा बहता दिख रहा है, जिसकी कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। जहाँ कई लोगों ने इसे सोशल मीडिया पर अपशकुन के रूप में देखा, वहीं कुछ लोगों ने बाइबिल की बातें करते हुए इसे ‘खून की बाढ़’ बता खतरे की आशंका जताई। दुनिया ख़त्म होने से लेकर खून की बारिश तक, न जाने लोगों ने कैसी-कैसी बातें की। इंडोनेशिया में भारी बारिश हुई है और कई इलाकों में अभी भी बाढ़ की स्थिति है।

आपको बता दें कि ये तस्वीरें वास्तविक हैं। ये घटना जेंग्गोट की है। ये गाँव पेकालोंगन क्षेत्र की है। ये क्षेत्र ‘Batik’ के निर्माण के लिए खासा प्रसिद्ध है, जो एक वैक्स-रेजिस्ट डाईंग है। इसका उपयोग विभिन्न वस्तुओं के रंगरोगन में किया जाता रहा है। व्हाट्सएप्प पर भी वायरल हो रहे एक संदेश में कहा जा रहा है, “दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया की सड़कें खून से लाल है। कोई जवाब है इसका?”

इंडोनेशिया में सड़कों पर ‘खून फैलने’ की अफवाह

अब आपको बताते हैं कि इसकी सच्चाई क्या है। इससे पहले ये बताना ज़रूरी है कि कुछ ही महीनों पहले इंडोनेशिया की सड़कों पर हरे रंग का द्रव्य बहता हुआ दिखा था। असल में जो इंडोनेशिया की सड़कों पर बह रहा है, वो ‘बाटिक डाई’ का ही कमाल ही है। वहाँ की कई फैक्ट्रियों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिसमें बाटिक डाई मिक्स हो गया। इससे जिस रंग का डाई था, उसी रंग का पानी भी बन गया और वो पानी फिर सड़कों पर बह निकला।

इंडोनेशिया के बोर्नेओ द्वीप पर अब तक 15 से अभी अधिक लोगों की बाढ़ के कारण मौत हो चुकी है और जनवरी महीने में ही हजारों लोगों को वहाँ से स्थानांतरित किया जा चुका है। इंडोनेशिया में बाढ़ के कारण भूस्खलन भी हो रहा है। 17,000 द्वीपों वाले इस देश के अधिकतर लोग पहाड़ों या फिर नदी के किनारे बने मैदानों में निवास करते हैं। अधिकारियों ने कहा है कि बारिश के और पानी के साथ मिलने के बाद ये लाल रंग गायब हो जाएगा।

पैगंबर मुहम्मद, जीसस… शादी के बाहर सेक्स करते थे? – बॉलीवुड एक्टर के ट्वीट पर लोग पूछ रहे – ‘अंग्रेजी नहीं आती क्या’

सोशल मीडिया पर अक्सर विवादों में रहने वाले अभिनेता सिद्धार्थ एक बार फिर से अपनी ट्वीट की वजह से चर्चा में हैं। मुख्यतः तमिल फिल्मों में काम करने वाले सिद्धार्थ ने बॉलीवुड और तेलुगु में भी फ़िल्में की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा कर डाला है कि पैगंबर मुहम्मद, जीसस क्राइस्ट, बुद्ध, साईं बाबा और गुरु गोविंद सिंह – ये सभी विवाहेतर शारीरिक सम्बन्ध बनाते थे, अर्थात शादी के बाहर सेक्स करते थे।

सिद्धार्थ ने ट्विटर पर इन पाँचों के बारे में लिखा, “ये सभी मनुष्य ही तो थे। ईश्वर की निश्चित रचना थे। वो सभी एकदम आपकी तरह ही थे। वो भोजन करते थे, विवाहेतर सेक्स करते थे, वो शौच करते थे और उन सबकी मृत्यु भी हुई। आप ख़ास हो। आप ईश्वर हो। अपने-आप से प्यार करो। दूसरों की सहायता करो। एक ईश्वर की तरह बनो। ईश्वर की संतान की तरह बनो। प्यार हमें स्वतंत्र करेगा।” इस ट्वीट के बाद उन्हें लोगों के गुस्से का भी सामना करना पड़ा।

जहाँ कई लोगों ने उनकी अंग्रेजी पर सवाल उठाए, तो कई ने आशंका जताई कि जीसस क्राइस्ट, पैगंबर मुहम्मद, गुरु गोविंद सिंह, साईं बाबा और महात्मा बुद्ध के बारे में ऐसी टिप्पणी कर के उन्होंने इन सबके अनुयायियों को नाराज़ कर दिया है। कुछ ने उनसे कहा कि आप अपने ट्वीट डिलीट मत करना। कुछ ने उन्हें याद दिलाया कि इनमें से एक तो मृत्यु के 3 दिनों बाद जीवित हो गए थे। एक यूजर ने उन्हें याद दिलाया कि रावण, कंस और दुर्योधन भी खुद को भगवान मानते थे।

हालाँकि, कुछ लोगों ने आशंका जताई कि वो ठीक चीज कहना चाह रहे हैं, लेकिन उन्होंने ‘Fornicated’ शब्द का इस्तेमाल शायद गलती से या बिना इसका अर्थ समझे कर दिया है। एक यूजर ने ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB)’ से पूछा कि क्या वो इससे इत्तिफ़ाक़ रखते हैं? एक यूजर ने कहा कि ये स्टार्स सिर्फ फ़्लूएंट इंग्लिग की ट्रेनिंग लेते हैं, उन्हें ठीक तरह से अंग्रेजी नहीं आती। कुछ ने इसे ‘ओवर स्मार्टनेस’ करार दिया।

हाल ही में कई सेलेब्रिटीज ने रिहाना, ग्रेटा थनबर्ग और मिया खलीफा जैसों की ट्वीट के खिलाफ ‘इंडिया स्टैंड्स टुगेदर’ और ‘इंडिया अगेंस्ट प्रोपेगंडा’ टैग के साथ देश का समर्थन किया था, जिसका ट्विटर पर अक्सर वामपंथी एजेंडा लेकर चलने वाले सिद्धार्थ ने मजाक बनाया था। उन्होंने इंग्लैंड और भारत में चल रही टेस्ट सीरीज को लेकर बयान दिया था कि ‘भारत बोलिंग, बैटिंग और फील्डिंग’ जानता है, उसे ‘बाहरी हस्तक्षेप’ की जरूरत नहीं।

रात भर युद्ध स्तर पर राहत कार्य: NDRF से लेकर CM-DM सब मुस्तैद, ब्रिटेन, फ़्रांस, UN ने भी दिया सहयोग का आश्वासन

उत्तराखंड के चमोली जिले के तपोवन में रविवार (फ़रवरी 07, 2021) को ग्लेशियर टूटने से हुए हादसे के बाद रातभर चले राहत और बचाव कार्य के बीच चमोली जिला पुलिस ने बताया कि अब तक कुल 15 व्यक्तियों को रेस्क्यू किया गया है एवं 14 शव अलग-अलग स्थानों से बरामद किए गए हैं। अभी भी 125 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं।

दूसरी ओर, टनल में फंसे हुए श्रमिकों की तलाश और बचाव में रातभर दुर्गम इलाकों में कार्य जारी रहा। उत्तराखंड में हुए इस हादसे के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लगातार बचाव कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बताया कि भारतीय थल सेना, वायु सेना, NDRF, ITBP, SDRF तत्परता से बचाव कार्य में घटनास्थल पर पहुँच चुके हैं और अपना पूरा सहयोग दे रहे हैं। साथ ही, केंद्र सरकार बचाव कार्यों की लगातार मोनिटरिंग कर रही है

सुबह 04 बजे से एक बार फिर बचाव कार्य शुरू किया गया है। सुरंगों के पास से मलबा हटाया जा रहा है। प्रभावित रैणी और तपोवन में राहत बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। तपोवन टनल से मलबा हटाया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो सुरंगों में अभी भी 50 लोग फँसे हैं।

बचाव कार्यों के लिए भारतीय सेना द्वारा जोशीमठ में कण्ट्रोल रूम तैयार कर लिया गया है। मौके पर जेसीबी, चीता हेलिकॉप्टर, इंजीनियरिंग टास्क फ़ोर्स, मेडिकल टीम तैनात हैं।

रात को ही भारतीय वायुसेना के दो C-130 एयरक्राफ्ट NDRF की टीम के साथ देहरादून के जॉलीग्रांट एअरपोर्ट पर उतरे, जिन्हें प्रभावित इलाकों में भारतीय वायुसेना (IAF) के चॉपर्स से भेजा गया। भारतीय वायुसेना ने पूरी मदद का आश्वासन दिया है। इससे पहले ITBP, NDRF, SDRF रेस्क्यू ऑपरेशन्स में मौजूद थे।

विमान और बाहर की फ़ोटो हो सकती है

इसके साथ ही, ब्रिटेन, अमेरिका, फ़्रांस के बाद अब संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उत्तराखंड में हुए इस हादसे पर अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए बचाव कार्यों में सहयोग का आश्वासन दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा, “महासचिव को उत्तराखंड में ग्लेशियर के फटने और उसके बाद आई बाढ़ से हुए जानमाल के नुकसान और दर्जनों लोगों के लापता होने का गहरा दुख है। वह पीड़ितों के परिवारों, लोगों और भारत सरकार के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हैं। संयुक्त राष्ट्र आवश्यकता होने पर बचाव और सहायता प्रयासों में योगदान देने के लिए तैयार है।”