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अर्णब के समर्थन में देश भर से सामने आए विभिन्न वर्गों के लोग: सुप्रीम कोर्ट से स्वतः संज्ञान लेकर जल्द रिहाई की माँग

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी से नाराज देश भर के तमाम लोग उनके समर्थन में सामने आ रहे हैं। सोशल मीडिया और प्रदर्शनों के माध्यम से लोग उनकी जल्द रिहाई की माँग कर रहे है। गोस्वामी को रविवार (नवंबर 8, 2020) सुबह अलीबाग क्वारंटाइन सेंटर से तलोजा जेल ले जाया गया। इस दौरान उन्होंने खुलासा किया कि उनकी जान को खतरा है और पुलिस द्वारा उनको प्रताड़ित किया जा रहा है।

रिपब्लिक टीवी के कंसल्टिंग एडिटर प्रदीप भंडारी ने ट्वीट कर बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और अर्णब गोस्वामी को सुरक्षा प्रदान करने को लेकर स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।

दिग्गजों और नागरिकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी राष्ट्रपति से संपर्क कर इस घटना पर एक ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कहा, “यह अब हमारे लिए एक चुनौती है, क्या सत्य की जीत होगी, या अत्याचारी झूठ को शासन करने की अनुमति दी जाएगी।”

एक तरफ जहाँ बीजेपी अर्णब की गिरफ्तारी का विरोध कर रही, वहीं अब रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) में शामिल हुईं बॉलीवुड अभिनेत्री पायल घोष ने भी अर्णब का समर्थन किया है। RPI की महिला शाखा की उपाध्यक्ष पायल घोष ने ट्वीट करते हुए कहा, “न्याय की लड़ाई में हम अर्णब गोस्वामी के साथ खड़े हैं। RPI अर्णब गोस्वामी के साथ है।”

फिल्मकार अशोक पंडित ने जम्मू कश्मीर के साहित्यिक सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र के लोगों की तरफ से अर्णब की गिरफ्तारी की निंदा की है। उन्होंने कहा, “प्रेस को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है और यह प्रेस / मीडिया का कर्तव्य है कि वह चीजों की आलोचना करे। जनता की आँख और कान बने। एक भारतीय पत्रकार के प्रति इस तरह का व्यवहार किया गया। देश भर में जिसका व्यापक रूप से विरोध किया जा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “रिपब्लिक टीवी चैनल के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी को मुंबई में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने की कोई वजह नहीं है। उन्हें सार्वजनिक रूप से धक्का दिया गया है। जो सबके आँखों के सामने हुआ है।”

अर्णब गोस्वामी के समर्थन में सेवानिवृत्त मेजर जनरल जीडी बख्शी भी दृढ़ता से सामने आए हैं। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं, और आज एक कर्नल के बच्चे को दोषी ठहराया जा रहा है।”

राज्य सभा के सदस्य सोनल मानसिंह ने कहा, “अर्नब गोस्वामी के साथ जो हो रहा है उसे देखकर बेहद दुखी हूँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि सच्चाई प्रबल हो। इस तरह के ट्रीटमेंट से किसी को फायदा नहीं मिलेगा “

वहीं जयपुर में सत्र न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश सीपी सिंह ने कहा, “जो हुआ, उससे पता चलता है कि अपराधियों के माध्यम से उन्हें परेशान करने के लिए उन पर दबाव डाला जा रहा है; यह राजनीतिक आतंकवाद है।”

अर्णब ने बताया अपनी जान को खतरा

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब की गिरफ्तारी

रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी को चार नवंबर की सुबह उनके घर से पुलिस ने बिना किसी सूचना के गिरफ्तार कर लिया था। अर्णब को दो साल पुराने केस में गिरफ्तार किया गया है जो पहले ही बंद हो चुका है। गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने अर्णब गोस्वामी को अलीबाग कोर्ट में पेश किया था, जहाँ पर पुलिस कस्टडी की माँग की गई थी, हालाँकि कोर्ट ने पुलिस कस्टडी से इनकार करते हुए अर्णब गोस्वामी को 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

राम जन्मभूमि पर 500 साल बाद मनेगी दीपावली, जलेंगे 5.51 लाख दीप: रामलला का दर्शन कर शुभारम्भ करेंगे CM योगी

भगवान राम की नगरी अयोध्या में पाच सौ वर्ष बाद राम जन्मभूमि प्रांगण में दीप जलेंगे। यहाँ पर पाँच अगस्त को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भूमि पूजन होने के बाद इस बार तो अयोध्या का तीन दिवसीय दीपोत्सव कार्यक्रम बेहद ही खास होगा। 11 से होने वाले तीन दिनी दीपोत्सव में 13 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन होगा। सीएम योगी आदित्यनाथ रामलला का दर्शन कर श्री राम जन्मभूमि परिसर में करीब पाँच सौ वर्ष बाद दीप जलाएँगे। सीएम योगी आदित्यनाथ जन्मभूमि परिसर में रामलला की आरती भी उतारेंगे।

अयोध्या में इस दौरान करोड़ों राम भक्तों के लिए भी भव्य इंतजाम किया गया है। वह लोग भी अयोध्या में श्री रामलला के दरबार में वर्चुअल हाजिरी लगाएँगे। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ‘दीपोत्सव’ में वर्चुअली भाग लेंगे। भगवान राम के श्रद्धालु अयोध्या के राम दरबार में आस्था-दीप जलाने से वंचित न रहे, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने पोर्टल तैयार करवाया है। जहाँ लोग वर्चुअल दीप जलाकर श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। प्रदेश सरकार का अनूठा वर्चुअल दीपोत्सव प्लेटफार्म बिल्कुल रियल जैसा अनुभव देगा। पोर्टल पर श्री रामलला विराजमान की तस्वीर होगी।

500 साल की प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण जारी है। ऐसे में इस बार योगी आदित्यनाथ सरकार ‘दीपोत्सव’ को खास बनाने में जुटी है। इस बार भगवान राम के भक्त आस्था व विश्वास के साथ अपने प्रभु के दरबार में वर्चुअल तरीके हाजिरी लगा पाएँगे, साथ ही उनके समक्ष दीप भी प्रज्जवलित कर आशीर्वाद पाने की भी व्यवस्था की जा रही है। 

दीप जलाने के बाद जिला प्रशासन धन्यवाद पत्र देगा। यह क्षण ऐसा होगा कि आप स्वयं दीपोत्सव में शामिल हैं। इन सब अत्याधुनिक व्यवस्थाओं के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार एक वेबसाइट तैयार करा रही है। यह वेबसाइट सुविधा प्रस्तावित मुख्य समारोह से पहले 13 नवम्बर को आमजन के लिए उपलब्ध हो जाएगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या दीपोत्सव को भव्य-दिव्य बनाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन स्पष्ट कहा है कि कहीं भी कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं होना चाहिए। प्रतिदिन के अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। जितने भी कार्यक्रम होंगे सभी में कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि दीपोत्सव पर राम की पैड़ी के साथ सभी मठ मंदिरों व घरों में ऐसे दीप जलेंगे, जिससे भगवान राम की नगरी अयोध्या दीप के प्रकाश से पूरी तरह से अलोकित हो जाए। इस बार करीब साढ़े पाँच लाख दीप जलाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामायण के प्रसंगों पर आधारित झाँकियों का अवलोकन करेंगे। इसके साथ ही, श्री राम, सीता और लक्ष्मण के स्वरूप की आरती कर श्री राम का राज्याभिषेक करेंगे। अयोध्या दीपोत्सव की तैयारियों पर मुख्यमंत्री की सीधी नजर है। 

योगी ने कहा कि राम की पैड़ी पर इस बार 5.51 लाख दीप जलाए जाएँ। साथ ही, सभी मठ-मन्दिरों और घरों में दीप प्रज्ज्वलन की ऐसी व्यवस्था की जाए, जिससे भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या दीपों के प्रकाश से पूरी तरह आलोकित हो जाए।

सीएम ने निर्देश दिया कि इस दौरान मठ-मन्दिरों में भजन और रामायण पाठ का आयोजन कराया जाए। अयोध्या की भव्य सजावट की जाए। श्रीरामजन्मभूमि, कनक भवन, राम की पैड़ी, हनुमान गढ़ी सहित सभी मन्दिरों में बिजली की सजावट की जाए। इसी प्रकार पुलों, विद्युत पोल आदि पर बिजली की झालर लगाई जाए।

प्रदेश के पर्यटन मंत्री नीलकंठ तिवारी ने कहा कि इस साल दीपोत्सव पर 5 लाख से ज्यादा मिट्टी के दीये जलेंगे। राम जन्मभूमि स्थल पर पहली बार ऐसा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जो पिछले 500 सालों से लंबित पड़ा था।

तिवारी ने कहा कि 500 सालों तक संघर्ष करने के सुप्रीम कोर्ट ने आखिरकार केंद्र सरकार को राम मंदिर निर्माण शुरू करने का आदेश दे दिया। अगर कोरोना नहीं होता तो इस कार्यक्रम में करोड़ों लोग शामिल होते। उन्होंने बताया कि लोग कार्यक्रम स्थल पर न आएँ इसके लिए कार्यक्रम के डिजिटल प्रसारण की तैयारी की गई है।

‘प्रोफेटिक डीक्लरेशन’ से महिला को गर्भवती बनाने का दावा’: ईसाई प्रचारक पर 2.6 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज

केंद्रीय गृह मंत्रालय को लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग और धर्मांतरण के आरोपों पर एफसीआरए लाइसेंस रद्द करने की माँग करते हुए एक आध्यात्मिक कल्याण सोसायटी के खिलाफ एक शिकायत दर्ज की गई है। ईसाई मत प्रचारक इस संगठन का नेतृत्व पंजाब के एक प्रचारक अंकुर नरूला द्वारा किया जाता है।

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, ईसाई संगठन ने यूनाइटेड किंगडम में एक शेल कंपनी बनाई थी, जिसने विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के माध्यम से 2.6 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग की थी।

ईसाई प्रचारक द्वारा बनाई गई शेल कंपनी, अंकुर नरुला मिनिस्ट्रीज (यूके) लिमिटेड, लंदन के ओल्ड ग्लूसेस्टर स्ट्रीट में पंजीकृत थी। हालाँकि, यह 3 साल पहले 23 अप्रैल, 2017 को मनी लॉन्ड्रिंग के लिए एक नेटवर्क बनाने के बाद इसे डिजॉल्व कर दिया गया था। आरएसएस स्वयंसेवक विनय जोशी द्वारा संचालित संगठन लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी ने कुछ सबूत भी शेयर किए जिसमें अंकुर नरूला को विदेशी दाताओं से पारंपरिक बैंकिंग प्रणाली को दरकिनार कर धन लेते पाया गया था।

“भारत के बाहर से कुछ भेजने के लिए कृपया इस नंबर पर संपर्क करें …” ईसाई प्रचारक द्वारा यह मैसेज शेयर किया गया है। जोकि यह दिखाता है कि अंकुर नरूला सरकार से अनुमति लिए बिना विदेशी योगदान स्वीकार कर रहे थे।

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी ने उन पोस्टरों को साझा किया जिनमें अंकुर नरूला ने लोगों को ‘काले जादू’ के प्रभाव से बचाने का दावा किया था। ऐसा ही एक विवादास्पद पोस्टर जोकि अंकुर नरूला ने छपवाया था उसमें लिखा है, “काला जादू से आज़ादी पाएँ।”

ईसाई प्रचारक ने अपनी भविष्यवाणियों के माध्यम से एक महिला को गर्भवती करने का दावा भी किया था। उसके द्वारा प्रकाशित एक पोस्टर में कहा गया था, “गर्भ का आशीर्वाद, भविष्यवाणी ग्रहण करने के बाद गर्भवती हुई।”

लीगल राइट ऑब्जर्वेटरी द्वारा साझा किए गए एक अन्य पोस्टर में अंकुर नरूला मिनिस्ट्रीज़ ने दावा किया, “भविष्यवाणी पूरी हुई!” उन्होंने एक महिला की तस्वीरें साझा की थीं और दावा किया था कि भविष्यवाणियों की मदद से उसके शरीर से एक सिस्ट निकाली गई। पोस्टर में लिखा था, “भविष्यवाणी ग्रहण करने के तुरंत बाद गुप्तांग के द्वारा रसौली बाहर आई।” गौरतलब है कि ऐसे ‘चमत्कारी दावों’ के साथ, ईसाई मत प्रचारक अशिक्षित और गरीब लोगों को फँसाने और उन्हें ईसाई धर्म में धर्मान्तरित करने की कोशिश करता है।

कौन है अंकित नरूला

उनकी वेबसाइट के अनुसार, अंकुर नरूला द चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स में एक पादरी हैं। चर्च पंजाब में सबसे तेजी से विस्तारित चर्च होने का दावा करता है, जिसमें 1,00,000 से अधिक लोग इंटरनेट के माध्यम से उनके उपदेशों और लाइव सत्रों में भाग लेते हैं। एक गैर-आस्तिक परिवार में जन्मे, प्रेरित अंकुर नरूला को प्रभु यीशु मसीह के बारे में तब पता चला कि जब वह अपनी जिंदगी से परेशान हो आत्महत्या करने वाला था। इसमें आगे कहा गया है, “प्रेरित के ईश्वर के प्रेम के स्पष्ट संदेश ने दुनिया भर के हजारों लोगों को प्रभु यीशु मसीह के साथ एक व्यक्तिगत संबंध बनाए रखने के लिए प्रेरित किया है।”

नोटबंदी के 4 साल- काला धन घटाने, टैक्स कलेक्शन बढ़ाने, पारदर्शिता सुदृढ़ करने में मिली मदद: PM मोदी

आज देश में नोटबंदी को पूरे चार साल हो गए हैं। नोटबंदी के चार साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (नवंबर 8, 2020) को कहा कि इससे काले धन को कम करने में मदद मिली है, कर जमा करने में वृद्धि हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आठ नवंबर, 2016 की आधी रात से 500 रुपए और 1000 रुपए के नोटों को बंद करने की घोषणा की थी, जो उस समय चलन में थे। बाद में सरकार ने पाँच सौ और दो हजार के नए नोट जारी किए थे।

मोदी ने आज ट्विटर पर विमुद्रीकरण के अपनी सरकार के फैसले के लाभों को गिनाया। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘नोटबंदी ने कालेधन को कम करने में, कर अनुपालन बढ़ाने में तथा पारदर्शिता सुदृढ़ करने में मदद की है।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘ये परिणाम देश की प्रगति के लिए बहुत लाभकारी रहे हैं।’’ प्रधानमंत्री ने अपने ट्वीट के साथ एक ग्राफिक भी साझा किया है, जिसमें दर्शाया गया है कि किस तरह से विमुद्रीकरण से कर जमा होने में वृद्धि हुई, कर तथा जीडीपी अनुपात बढ़ा, भारत अपेक्षाकृत कम नकदी आधारित अर्थव्यवस्था बना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिली।

प्रधानमंत्री मोदी ने नोटबंदी से हुए फायदों के आँकड़ों की भी जानकारी दी। जिसके मुताबिक, नोटबंदी के कारण दस लाख से अधिक कैश जमा करने वाले वे तीन लाख लोग चिन्हित हुए जो आइटी रिटर्न नहीं फाइल करते थे।

डिजिटल ट्रांजेक्शन को मिला बढ़ावा- भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नोटबंदी के चार साल पूरे होने पर अपने ट्विटर हैंडल पर कहा कि साल 2016 में पीएम मोदी के नेतृत्व में की गई नोटबंदी के बाद से डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिला है। अक्टूबर 2020 के दौरान देश में 207.16 करोड़ डिजिटल ट्रांजेक्शन हुए। NPCI के अनुसार अब तक 3.86 लाख करोड़ रुपए के UPI ट्रांजेक्शन हो चुके हैं।

बीजेपी ने एक अन्य ट्वीट करते हुए लिखा, “नोटबंदी रियल एस्टेट के लिए वरदान साबित हुई। रियल एस्टेट क्षेत्र कालेधन के ट्रांजेक्शन के लिए बेहद ही आसान जरिया बना था। नोटबंदी के वाद रियल एस्टेट सेक्टर अब अधिक पारदर्शी, संगठित, भरोसेमंद और खरीदारों के लिए अनुकूल साबित हो रहा है।”

इसके साथ ही बीजेपी ने बताया कि नोटबंदी ने आतंकवाद और नक्सलवाद पर गहरी चोट की। नोटबंदी से आतंकियों और नक्सलियों के बौसले पस्त हुए। नोटबंदी के बाद जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाएँ लगभग समाप्त हो गई है और वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में भी भारी कमी आई है।

नोटबंदी लाने की मोदी सरकार ने कई वजहें बताईं। इसमें कालेधन का खात्मा करना, सर्कुलेशन में मौजूद नकली नोटों को खत्म करना, आतंकवाद और नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने समेत कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने जैसे कई वजहें गिनाई गई थीं। सरकार का तर्क है कि नोटबंदी के बाद टैक्स कलेक्शन बढ़ा और कालेधन में इस्तेमाल होने वाला पैसा सिस्टम में आ चुका है। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने नोटबंदी के कदम की आलोचना करते हुए रविवार को सरकार पर करारा हमला बोला। उन्‍होंने कहा कि इस कदम ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया।

‘मैं तो जिंदा हूँ’- TOI ने नीतीश के जीवित मंत्री को मार दिया, खुद को सही-सलामत बताते मंत्रीजी ने किया ट्वीट

फेक न्यूज फैलाने के कारण बिहार के मधुबनी से जदयू के राष्ट्रीय महासचिव संजय झा ने समाचार समूह ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) की ट्विटर पर जमकर क्लास लगाई है। बता दें कि  ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने संजय कुमार झा के निधन की झूठी खबर प्रकाशित की थी।

बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरा चरण का मतदान शनिवार (नवंबर 7, 2020) की शाम समाप्त हो गया। इसी बीच ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने खबर प्रकाशित की कि मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड से चुनावी मैदान में उतरे जदयू के बागी नेता व निर्दलीय उम्मीदवार संजय झा का कोरोना वायरस से निधन हो गया।

टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित खबर

रिपोर्ट में कहा गया कि संजय झा का यहाँ के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में निधन हो गया। वे इस अस्पताल में पिछले 10 दिनों से भर्ती थे। इसमें आगे कहा गया था कि बेनीपट्टी से टिकट न मिलने से नाराज सत्ताधारी जनता दल-युनाइटेड के नेता संजय झा ने पार्टी से बागवत कर पार्टी के खिलाफ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरे थे। इससे पहले वह राजद के जिला उपाध्यक्ष भी रहे चुके थे।

संजय कुमार झा ने ट्विटर पर ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ टैग करते हुए लिखा, “मैं तो जिंदा हूँ। मुझे मृत घोषित करने वाली आपकी गलत स्टोरी ने मेरे परिवार, दोस्तों और समर्थकों को पीड़ा दी है। कृपया अपने ऑनलाइन और प्रिंट प्लेटफ़ॉर्म पर तत्काल स्पष्टीकरण जारी करें और अपने संवाददाताओं / डेस्क को तत्परता के साथ अपना काम सुनिश्चित करने के लिए कहें।”

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर दिया हो। इससे पहले भी ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ऐसा कर चुका है। पिछले दिनों ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर प्रकाशित किया कि कोलकाता के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और सास की हत्या कर के ख़ुद को भी गोली मार ली। लेकिन, TOI ने इसमें शिल्पी अग्रवाल नामक फूड ब्लॉगर और उनके पति अमित अग्रवाल की तस्वीर लगा दी। नाम भी उनका ही डाल दिया। जबकि दोनों सकुशल हैं।

जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने शिल्पी अग्रवाल और उनके पति की तस्वीर इस हत्याकांड वाली ख़बर में लगा दी तो उनके पास कई मैसेज आने लगे, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वो ठीक हैं। इसके बाद शिल्पी ने TOI की उस ख़बर को अपने लैपटॉप पर खोल कर उसका वीडियो बनाया और फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देखिए भारत में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर गया है। उन्होंने कहा कि TOI या भारतीय मीडिया में उनका जो भी थोड़ा-बहुत विश्वास बचा था, वो इस ख़बर के साथ ही उड़न-छू हो गया।

बता दें कि मधुबनी के बेनीपट्टी सीट से निर्दलीय उम्‍मीदवार नीरज झा का निधन हो गया है। कोरोना संक्रमित नीरज पिछले कई दिनों से एम्‍स में भर्ती थे। दस दिन पहले उन्‍हें एम्स पटना में भर्ती कराया गया था। उन्‍हें मधुमेह की भी शिकायत थी। एम्‍स में इलाज के दौरान उन्‍होंने शनिवार को अंतिम साँस ली।

नीरज झा के निधन से उनके समर्थकों में शोक की लहर है। नीरज झा जदयू से जुड़े थे लेकिन चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी छोड़ निर्दलीय पर्चा भरा था। इस बार बेनीपट्टी सीट से 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे। जदयू नेता रहे नीरज के चुनाव मैदान में उतरने से बेनीपट्टी सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो गया था। उनके निधन की खबर से समर्थक दु:खी हैं।

भारत के PM की तुलना ‘हिटलर’ से प्रशंसा योग्य लेकिन सीएम के बेटे को ‘पेंगुइन’ कहने की सजा जेल: ये है 2020 का भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अक्सर ‘फासीवादी‘ कहा जाता है। और लिब्रल्स की ओर से देखे तो ठीक ही तो है।

जहाँ भारत के प्रमुख विपक्षी दल, ‘बुद्धिजीवी’, शिक्षाविद, मीडिया हस्ती और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले तमाम पत्रकारों का पूरा इकोसिस्टम मोदी को ‘हिटलर’ के रूप में बार-बार बुला सकता है और साथ ही पीएम मोदी की छवि को एडॉल्फ हिटलर के रूप में प्रदर्शित कर सकता है, वहाँ मोदी के खिलाफ कोई भी बात गलत नहीं हो सकती।

भारत ही नहीं पाकिस्तान भी नियमित रूप से पीएम मोदी पर हमला करने के लिए कॉन्ग्रेस की लाइन का इस्तेमाल करता है। मतलब मोदी की तुलना हिटलर से करना।

पाकिस्तान द्वारा किए गए इस ट्वीट को 1 साल से भी ज्यादा हो गया है।

पाकिस्तान की बात करें तो आपको याद होगा कि कैसे कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के विश्वासपात्र सैम पित्रोदा ने बालाकोट हवाई हमलों के दौरान न केवल पाकिस्तान का साथ दिया था, बल्कि पीएम मोदी की तुलना हिटलर से भी की थी। उन्होंने न केवल भारतीय सशस्त्र बलों को कम आँका बल्कि हवाई हमलों पर विदेशी मीडिया के पक्षपाती नैरेटिव का समर्थन भी किया। लेकिन किसी को भी कोई फर्क नहीं पड़ता जब कोई वरिष्ठ और प्रभावशाली कॉन्ग्रेसी नेता पीएम को ’हिटलर’ कहता है।

वहीं फिल्म निर्माता जैसे नागरिक पीएम मोदी की छवि को धूमिल करने के लिए फर्जी वीडियो का सहारा लेते हैं, जिसके जरिए वह ये दर्शाते हैं कि मोदी जर्मन तानाशाह हिटलर से प्रेरित थे। मोदी को वास्तव में एक फासीवादी होना चाहिए। लेकिन मोदी ने तब भी इन बातों को इतना महत्व नहीं दिया। अनुराग कश्यप को एक लिबरल के रूप में जाना जाता है। जो सत्ता के खिलाफ सच बोलते हैं (क्या हुआ अगर सच एक नकली वीडियो है)।

वहीं जब किसी ने सिर्फ मजाकिया तौर पर एक राज्य के मुख्यमंत्री का मीम्म बनाया, तो उसे गैर-जमानती आरोपों के साथ धर लिया गया। ‘हिटलर’ ने क्या किया? खैर, अगर बात करे पिछले साल दिसंबर की तो पीएम मोदी ने नेटीज़न्स द्वारा बनाए गए उनके सूर्य ग्रहण को देखते हुए मिम्स को प्रोत्साहित किया। जिस पर यह कहा जा सकता है, हाय फासीवादी, बहुत ही फासीवादी मोदी।

गौर करें तो भारत में मीडिया हस्तियों ने भी पीएम मोदी के लिए अपनी नफरत को छुपाने की कोशिश नहीं की है। कोरोनावायरस के शुरुआती दौर में कितने ही पत्रकारों ने मनाया की काश पीएम मोदी को यह जानलेवा बीमारी हो जाए। यहीं नहीं कितनों ने तो उनके मरने की कामना भी की। देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ ऐसी बातें बोलने के बावजूद उनमें से किसी को भी जेल नहीं जाना पड़ा था।

वहीं न्यूज़ चैनल मालिकों को भ्रष्टाचार का खुलासा करने के लिए गिरफ्तार किया गया और जेल में भी डाल दिया गया था, जब उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य सरकार कथिततौर पर कई क्लब को पैसे दे रही है। जिसपर उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई। तब किसी ने भी इन पत्रकारों के समर्थन में आवाज नहीं उठाया जिनके खिलाफ राज्य सरकार बल प्रयोग कर रही थी।

यह सब देखते हुए यही कहा जा सकता है कि मोदी प्रेस की स्वतंत्रता और बोलने की आजादी का गला घोंट रहे है? शर्म आती है ‘हिटलर’ पर।

बता दें सिर्फ “हिटलर” का नाम ही नहीं है जो पीएम मोदी का अपमान करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। और भी ऐसे कई अपमानजनक भाषा है जिसे तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2017 में पीएम मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए विभिन्न अपमानों की लिस्ट बना कर सार्वजनिक किया था।

उरी सर्जिकल स्ट्राइक के बाद राहुल गाँधी द्वारा पीएम मोदी पर ‘खून का दलाली’ करने का आरोप लगाया गया था। लेकिन देखिए मुख्यमंत्री के बेटे, जो कि एक विधायक भी है, को पेंगुइन बुलाने के लिए जेल में ठूस दिया गया है। इस शब्द का संदर्भ बॉलीवुड के अलावा राजनीति में हो रहे भाई भतीजावाद के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अब आप बताइए फासिस्ट कौन है? हाँ जाहिर है नरेंद्र मोदी?

और बेबी पेंगुइन किसी भी प्रकार का अपमान नहीं है क्योंकि ज्यादातर पेंगुइन प्यारे होते हैं।

विडंबनापूर्ण है, कि जो आदमी पेंगुइन को मुंबई के एक चिड़ियाघर में ले आया, जहाँ का मौसम उड़ने वाले पक्षियों के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है, वह राज्य में पर्यावरण मंत्री है। लेकिन फिर ऐसी बातें हुईं जो काफी आश्चर्यजनक थी।

यह 2020 का भारत है।

मुंबई पुलिस का दावा- ‘जेल से सोशल मीडिया पर एक्टिव थे अर्णब’, जबकि नहीं है उनका कोई सोशल मीडिया एकाउंट

रायगढ़ पुलिस ने रविवार को रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को न्यायिक रिमांड जारी रखने के लिए तलोजा जेल शिफ्ट कर दिया गया। अर्णब की शिफ्टिंग का कारण देते हुए पुलिस ने दावा किया कि अर्णब गोस्वामी अलीबाग के क्वारंटाइन सेंटर के अंदर मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे। नियमों के अनुसार, वह अनुमति के बिना न्यायिक हिरासत में रहते हुए मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते है।

क्राइम ब्रांच के इंवेस्टिगेटिंग ऑफिसर जमील शेख ने कहा कि अर्णब किसी का मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहे थे और सोशल मीडिया पर एक्टिव थे। उन्होंने कहा, “शुक्रवार देर शाम को हमें पता चला कि गोस्वामी किसी के मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।”

बता दें पुलिस ने गोस्वामी के फोन को उनके वर्ली निवास से गिरफ्तार करने के बाद जब्त कर लिया था, इसलिए उनके पास अपना फोन नहीं था। पुलिस अधिकारी ने आगे कहा, “मामले के जाँच अधिकारी के रूप में, मैंने अलीबाग जेल अधीक्षक को लिखा था कि एक जाँच रिपोर्ट माँगी जाए कि गोस्वामी को मोबाइल कैसे मिला और किसने उन्हें क्वॉरन्टीन सेंटर में मोबाइल मुहैया कराया था। इसके बाद, हमने उन्हें तलोजा जेल में शिफ्ट कर दिया।”

गौरतलब है कि अर्नब गोस्वामी किसी भी सोशल मीडिया पर मौजूद नहीं हैं। किसी भी बड़े सोशल प्लेटफॉर्म पर उनका कोई सोशल मीडिया अकाउंट नहीं है। इसलिए यह पक्का नहीं है फिर पुलिस को कैसे पता चला कि गोस्वामी सोशल मीडिया पर सक्रिय थे।” जब अर्णब का सोशल मीडिया पर कोई आधिकारिक एकाउंट है ही नहीं तो सवाल उठता है कि पुलिस के दावे के अनुसार वे कहाँ सक्रिय थे। अगर वास्तव में उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट किया था, फिर वो तो अबतक वायरल हो जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। इसका अभी तक कोई सबूत नहीं है कि पिछले 4 दिनों में अर्णब गोस्वामी सोशल मीडिया पर ‘सक्रिय’ थे।

इसके अलावा जब गोस्वामी के पास अपना फोन नहीं था और जेल में फोन रखने की अनुमति नहीं है तो एक और सवाल उठता है कि कैसे अर्णब गोस्वामी जेल में एक्टिव डेटा कनेक्शन के साथ एक फोन ढूँढने में कामयाब रहे? पुलिस अधिकारी ने अभी तक उस शख्स पर कोई कार्रवाई या उसका खुलासा नहीं किया है जिनसे अर्णब ने कथित तौर पर फोन लिया था और कथित फोन आखिर जेल में कैसे पहुँचा।

इस मामले में ऐसा लगता है कि अर्णब गोस्वामी पर झूठे मामले की तरह, यह भी पुलिस द्वारा गोस्वामी को तलोजा जेल में स्थानांतरित करने के लिए बनाया गया एक बहाना है। जानकारी के लिए बता दें तलोजा जेल में कई कुख्यात अपराधी और अंडरवर्ल्ड डॉन को रखा है।

अर्णब ने बताया अपनी जान को खतरा

गौरतलब है कि रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क’ के संस्थापक और मुख्य संपादक अर्णब गोस्वमी ने अपनी जान को खतरा बताया है। पुलिस वैन के भीतर से ही मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्हें उनके वकीलों से भी बात नहीं करने दी जा रही है। उन्होंने बताया कि उन्हें सुबह के 6 बजे जगा दिया गया और रविवार की सुबह उन्हें धक्का भी दिया गया, उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने कहा, “मेरी ज़िंदगी खतरे में है। मैं भारत की जनता को, पूरे देश की जनता को बताना चाहता हूँ कि मेरी जान खतरे में है।”

अर्णब की गिरफ्तारी

अर्णब को मुंबई के इंटीरियर डिजाइनर अन्वय और उनकी माँ को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 4 नवंबर बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। मुंबई पुलिस ने उन्हें न्यायिक सहमति के बिना हिरासत में लिया था। वे 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। कथिततौर पर गिरफ्तारी के समय मुंबई पुलिस ने अर्णब के नाबालिग बेटे से मारपीट और उनके परिजनों से बत्तमीजी भी की थी।

‘2020 में भारत व US सबसे करीबी दो देश’: 2006 में ऐसा बोलने वाले बायडेन UNSC में भारत की स्थाई सदस्यता का करेंगे समर्थन

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बायडेन का भारत के प्रति रुख एकदम अच्छा रहने वाला है और वो दोनों देशों के रिश्तों को आगे ले जाने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने 2006 में ही बयान दिया था कि 2020 में भारत और संयुक्त राष्ट्र अमेरिका दो सबसे करीबी देश होंगे। इसके बाद भारत-अमेरिका के बीच परमाणु करार हुआ, जिसमें जो बायडेन ने अहम भूमिका निभाई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भी वो भारत की दावेदारी का समर्थन करेंगे।

जो बायडेन ‘कैम्पेन’ के नीति पत्र (पॉलिसी पेपर) का कहना है कि उनकी सरकार भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य बनवाने में मदद करेगी, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहयोग जारी रखेगी और इसी तरह के अन्य फैसलों के साथ भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत करने को उच्च प्राथमिकता देगी। इस नीति-पत्र की मानें तो जो बायडेन अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का समर्थन करेंगे।

आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य और व्यापार जैसे कई अहम मुद्दों पर जारी एक नीति पत्र में ‘जो बायडेन कैम्पेन टीम’ ने भारत के साथ रिश्तों पर भी गर्मजोशी से काम करने की बात कही थी। अब 2006 में दिए गए उनके बयान के हिसाब से इस साल तो नहीं, लेकिन जनवरी 20, 2021 से शुरू होने वाले उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान वो अपने इस स्वप्न को साकार करने पर निश्चित रूप से काम शुरू कर सकते हैं।

जलवायु परिवर्तन और द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि की दिशा में काम करने जैसे कई मुद्दों पर उन्होंने भारत का साथ देने की बात कही थी। नीति पत्र में कहा गया है कि बायडेन ने सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष के रूप में और बराक ओबामा प्रशासन में उप राष्ट्रपति के रूप में सामारिक सहयोग को प्रगाढ़ करने में, लोगों के बीच संबंधों को गहरा करने और वैश्विक चुनौतियों पर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

याद होना चाहिए कि हाल ही में राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में आधिकारिक बहस में भाग लेते हुए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर ट्रंप ने भारत को ‘गंदा’ बताया था, जिसके बाद बायडेन ने उनकी आलोचना की थी। नीति पत्र में ये भी कहा गया है कि बायडेन ने ओबामा के साथ मिल कर रणनीति, रक्षा, आर्थिक, क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को बढ़ावा देने में अपनी ताकत झोंक दी थी।

चुनाव प्रचार के दौरान जो बायडेन ने कहा था कि वो तुर्की को सबक सिखाते, भले ही इसके लिए उन्हें ‘सिचुएशन रूम’ में हजारों घंटे ही क्यों न व्यतीत करना पड़े या फिर सीरिया या ईराक में स्थिति सुधारने के लिए क्यों न कुछ भी करना पड़े। चुनाव प्रचार के समय ही उन्होंने साफ़ कर दिया था कि वो तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआँ (Erdogan) से बात कर उन्हें चेता देते कि उन्होंने जो कुछ भी किया है, इसके लिए उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी।

‘मेरे पति को कुछ भी हुआ तो राज्य सरकार और राष्ट्रीय तंत्र होगा ज़िम्मेदार’: अर्णब की पत्नी ने जारी किया बयान

रिपब्लिक टीवी की सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर और अर्णब गोस्वामी की पत्नी सम्यब्रता रे गोस्वामी ने एक बयान जारी किया है। इस बयान में उनका कहना है कि अगर उनके पति को किसी भी तरह का नुकसान होता है तो उसके लिए पूरी सरकार और पूरा राष्ट्रीय तंत्र ज़िम्मेदार होगा। महाराष्ट्र पुलिस द्वारा अर्णब गोस्वामी को तलोजा जेल भेजे जाने के बाद यह बयान जारी किया गया। अर्णब गोस्वामी ने खुद आरोप लगाया है कि जब उन्होंने अपने वकील से संपर्क करने की बात कही तब जेलर उनके साथ हिंसा पर उतर आए और उनकी बात को सिरे से खारिज कर दिया। 

अर्णब गोस्वामी की पत्नी ने अपने बयान में कहा, “प्रदेश का पूरा प्रशासनिक तंत्र राजनीतिक गुस्से से प्रेरित नौकर में तब्दील हो गया है और लोकतंत्र के स्तंभ इस तरह के अत्याचार पर तमाशबीन नहीं बने रह सकते हैं। राज्य सरकार ने पूरे तंत्र का इस्तेमाल करके महाराष्ट्र के एक आम नागरिक के मानवाधिकारों का हनन और उस पर अत्याचार किया है।”

इसके बाद उन्होंने अपने बयान में कहा कि अर्णब ने सार्वजनिक रूप से यह बात बताई है कि उनके जीवन पर ख़तरा है और हिरासत में उन्हें किस तरह प्रताड़ित किया जा रहा है। फिर उन्होंने कहा, “अगर मेरे पति को कुछ भी होता है तो पूरा सरकारी तंत्र और राष्ट्रीय तंत्र उसके लिए ज़िम्मेदार होगा।” 

सम्यब्रता रे गोस्वामी का पूरा बयान

आज सुबह मेरे पति और एडिटर इन चीफ जो कि न्यायिक हिरासत में पूरे 4 दिन बिता चुके हैं, महाराष्ट्र पुलिस ने उन्हें तलोजा जेल ले जाते समय पुलिस वैन में बुरी तरह घसीटा और पीटा। वह लगातार यह बात कह रहे थे कि उनकी जान को ख़तरा है। जब उन्होंने जेलर से कहा कि उन्हें अपने वकील से संपर्क करने दिया जाए फिर जेलर ने उनके साथ हिंसा की। अर्नब ने कहा कि हिरासत के दौरान उन पर अत्याचार हुआ जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से जमानत के मामले में दखल देने की गुहार लगाई। 

एक निर्दोष व्यक्ति, जिसकी दशकों की छवि है, एक ऐसा पत्रकार जो देश की सेवा में जुटा हुआ था, उसे घसीटा गया, उसके साथ हिंसा हुई और उस पर झूठे आरोप लगाए गए। उन्हें बिना किसी दंड विधान के जेल में बंद किया गया है। प्रदेश का पूरा प्रशासनिक तंत्र राजनीतिक गुस्से से प्रेरित नौकर में तब्दील हो गया है और लोकतंत्र के स्तंभ इस तरह के अत्याचार पर तमाशबीन नहीं बने रह सकते हैं। राज्य सरकार ने पूरे तंत्र का इस्तेमाल करके महाराष्ट्र के एक आम नागरिक मानवाधिकारों का हनन और उस पर अत्याचार किया है।  

महाराष्ट्र में संस्था नियम और क़ानून की रक्षा करने के लिए मौजूद हैं लेकिन यहाँ नियमों की अनदेखी हो रही है और वर्दीधारी ही प्रताड़ित करने वाले बन गए हैं। मूलभूत अधिकार कुचले जा रहे हैं, इस पूरी प्रक्रिया में सिवाय अत्याचार और अव्यवस्था के कुछ और नज़र नहीं आता है। ऐसा पहली बार हुआ है जब संस्थागत अखंडता इस कदर ख़तरे में पड़ी है। मेरे पति और देश के प्रख्यात समाचार समूह के एडिटर इन चीफ के साथ अत्याचार हुआ है, उनके शारीरिक हानि पहुँचाई गई है, गैरकानूनी तरीके से उनकी गिरफ्तारी हुई है और इस तरह का सार्वजनिक अत्याचार होने के बावजूद किसी भी तरह का दखल नहीं दिया गया है। 

जिस तरह से अर्णब ने यह बात कही है कि उनकी जान को ख़तरा है, अगर ऐसे में उन्हें कुछ होता है तो उसके लिए सिर्फ और सिर्फ कानून व्यवस्था, अधिकारी राष्ट्रीय तंत्र और पूरी सरकार ज़िम्मेदार होगी। मेरा देश की उन संस्थाओं से अनुरोध है जो अभी भी सच के लिए खड़े होते हैं कि वह आगे आएँ और एक पत्रकार पर हो रहे सत्ता के दुरूपयोग को रोकने में, मदद करें। आज लोकतंत्र के लिए एक मिसाल तय की जा रही है, मैं देश की ईमानदार संस्थाओं को लेकर अभी भी आशावादी हूँ कि वह एक नागरिक और पत्रकार के साथ हो रहे इस अत्याचार पर अंधे या शांत होकर नहीं बैठेंगे। 

स्टिंग में हुआ अर्णब के लिए बनाई गई डरावनी योजना का खुलासा 

एक स्टिंग ऑपरेशन में खुलासा हुआ था कि एनसीपी के नवाब मलिक ने कैमरे पर यह बात स्वीकार की थी टीआरपी स्कैम में फँसने के बाद अर्नब गोस्वामी आत्महत्या कर लेंगे। इसके बाद नवाब मलिक ने आरोप लगाया है कि हो सकता है अर्णब गोस्वामी का मानसिक संतुलन बिगड़ गया हो। नवाब मलिक ने कहा था, “उसने जिस तरह का रास्ता अपनाया है उससे वह खुद पर थोपी गई हकीकत में बैठा है। उसे ऐसा लगता है कि यह ऐसे काम करता है, जब उसे इस बात का अंदाजा होगा कि इसमें कुछ नहीं है और सब कुछ नकली है तब क्या वह कुछ कर पाएगा? उसे ऐसा लगता है कि पूरा तंत्र उसकी पसंद पर चलता है, वह कुछ कर सकता है लेकिन जब उसे यह पता चलेगा कि ऐसे नहीं होता है तब वह एक अलग दुनिया में चला जाता है।”

भाजपा ने किया समर्थन 

भारतीय जनता पार्टी के तमाम दिग्गज नेताओं अमित शाह, स्मृति ईरानी और योगी आदित्यनाथ ने अर्णब की गिरफ्तारी का विरोध किया था। भाजपा नेता किरीट सोमैया ने अपने ट्वीट में कहा कि उन्होंने तलोजा जेल के जेलर से बात की है और अर्णब से उचित बर्ताव करने की बात भी कही है। 

इसके कुछ समय बाद किरीट सोमैया तलोजा जेल के जेलर से निजी तौर पर मिलने के लिए गए थे। मुलाक़ात के दौरान उन्होंने जेलर से अनुरोध किया कि अर्णब के साथ सही बर्ताव किया जाए। उन्होंने बताया कि जेलर ने उन्हें आश्वासन दिया है कि अर्णब के साथ किसी भी तरह का अत्याचार नहीं किया जाएगा। कौस्तुभ कुर्लेकर ने किरीट सोमैया को इस बात का आश्वासन दिया कि अर्णब को उचित स्वास्थ्य देखरेख भी प्रदान की जाएगी।              

सनस्क्रीन, लिप बाम लगाकर बॉर्डर पर ‘लोहा’ लेने जा रहे चीनी सैनिक: सोशल मीडिया पर लोगों ने उड़ाया मजाक, वीडियो वायरल

एक तरफ जहाँ चीनी सेना और भारतीय सेना के बीच गतिरोध जारी है, वहीं दूसरी तरफ समय-समय पर कुछ ऐसे वीडियो सामने आ जाते हैं, जो लोगों का खूब मनोरंजन करते हैं। हाल ही में चीनी सेना का एक ऐसा ही वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में चीनी सैनिक अपने चेहरे पर सनस्क्रीन लगा रहे हैं। इसके अलावा, होठों पर लिप बाम भी लगा रहे हैं।

इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग खूब मजे ले रहे हैं। वीडियो चीनी सरकार के प्रोपेगेंडा मीडिया हाउस ग्लोबल टाइम्स द्वारा शेयर किया गया है। इस दौरान चीनी सैनिक तिब्बत की ऊँचाई वाले माहौल में अपने स्किन को लेकर बातें करते हुए भी सुनाई दे रहे हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने वीडियो जारी कर लिखा है कि पीएलए के फ्रंटियर गार्ड स्किनकेयर पर जानकारी दे रहे हैं। गश्त पर जाने से पहले सैनिक जब सनस्क्रीन और लिप बाम लगाते हैं, तब उनका गंभीर दिखने वाला चेहरा क्यूट बन जाता है। ये सैनिक क्रीम के उपयोग को लेकर कुछ अच्छे सुझाव भी दे सकते हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि लद्दाख में तनाव के बीच चीनी सेना अपने जवानों को ‘सुंदर’ दिखाने की तैयारी कर रही है।

वीडियो पर मजे लेते हुए ट्विटर यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दी है। एक यूजर ने लिखा कि इन्हें थोड़ा सा मेकअप भी दे दें।

एक यूजर ने लिखा कि ये सैनिक हैं या फिर इन्हें रैंप के लिए ट्रे़ंड किया जा रहा है।

एक अन्य यूजर ने लिखा कि बॉलीवुड को इनके जैसे जोकरों की जरूरत है।

कई यूजर्स ने चीन के जवानों को लिपस्टिक लगाने की भी सलाह दी।

बता दें कि चीन का दुष्‍प्रचार तंत्र भारत पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और अपनी जनता को खुश करने के लिए अक्‍सर इस तरह के वीडियो और फोटो जारी करता रहता है। इससे पहले भी चीन का दाँव उल्‍टा पड़ चुका है और उसकी थू-थू हो चुकी है। चीन यह दिखाना चाहता है कि वह अपने सैनिकों का कितना ध्यान रखता है। जबकि, वास्तविकता यह है कि कम्युनिस्ट चीन में किसी को भी विरोध करने की आजादी नहीं है।

ग्लोबल टाइम्स ने रिपोर्ट में लिखा है कि चीनी सेना की तिब्बती मिलिशिया परिवहन इकाइयाँ सीमा पर अधिक ऊँचाइयों पर स्थित कठिन वातावरण में आपूर्ति करने के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण के रूप में खच्चरों और घोड़ों का भी उपयोग कर रही है। दक्षिण पश्चिम चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के नगरी प्रान्त के रुतोग काउंटी में तिब्बती मिलिशिया सैनिक की सप्लाई यूनिट चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के सैनिकों को साजो सामान पहुँचा रही है।