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मुख्यमंत्री पिता के नाम पर नहीं, अपने काम पर वोट चाहता हूँ: नीतीश मिश्र, भाजपा प्रत्याशी | Nitish Mishra talks to OpIndia

बिहार की चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया ने झंझारपुर (मधुबनी) के विधानसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार नीतीश मिश्र से विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की। बता दें कि नीतीश मिश्र पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र के पुत्र हैं। वो दस साल विधायक रहे हैं। उन्होंने हमारे साथ बातचीत करते हुए वंशवाद पर उठते सवालों पर बात की।

हमने उनसे जानने की कोशिश की कि उन पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने गन्ना विकास मंत्री रहने के दौरान ऐसा कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिससे कि चीनी मील वापस से खुल सके, जिससे लोगों को रोजगार मिलता और तब शायद इस तरह से पलायन नहीं होता। इस दौरान हमने बढ़ते कट्टरपंथ और धर्मांतरण पर भी उनसे सवाल किया।

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55 से डील 1 पर निशाना: मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक TV से बदला लेने के लिए हंसा विजन को बनाया शिकार

मुंबई पुलिस और रिपब्लिक टीवी के बीच चल रहे घमासान में अब पुलिस ने चैनल को आर्थिक रूप से अपंग बनाने की कोशिश की है। पुलिस ने चैनल में विज्ञापन देने वाली मीडिया बाइंग एजेंसियों को अपना निशाना बनाया है। इसी क्रम में परम बीर सिंह की अगुवाई में मुंबई पुलिस का पहला टारगेट हंसा विजन है। जो एक मीडिया बाइंग एजेंसी है।

बता दें पुलिस द्वारा हंसा विजन को निशाना बनाने का कारण यह है कि इसकी ग्रुप कंपनी हंसा रिसर्च टीवी चैनलों की दर्शकों की संख्या को मापने वाले ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) के बार-ओ-मीटर्स को मैनेज करती है। मुंबई पुलिस के अनुसार, हंसा रिसर्च और सहयोगी कंपनियाँ किसी भी टीवी चैनल के साथ किसी भी प्रकार की बिज़नेस डीलिंग नहीं कर सकती हैं।

मुंबई के एक पुलिस अधिकारी ने शुक्रवार को दावा किया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी सामान्य व्यावसायिक नैतिकता और दिशानिर्देशों के तहत, हंसा रिसर्च या इसकी सहयोगी कंपनियाँ किसी भी टीवी चैनल के साथ व्यापार में संलग्न नहीं हो सकती हैं।

गौरतलब है कि मुंबई पुलिस का यह दावा कई सवाल खड़े करता है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह की शर्त को केंद्रीय सरकार द्वारा दिशा-निर्देशों में रखा गया है या नहीं।

बता दें हंसा रिसर्च और हंसा विजन पूरी तरह से अलग-अलग इकाइयाँ हैं, जबकि पहली टीवी चैनलों के साथ डीलिंग नहीं कर सकती क्योंकि यह BARC के साथ बार-ओ-मीटर्स का प्रबंधन करने के लिए काम करती है, दूसरी एक मीडिया बाइंग एजेंसी है। जिससे यह पता चलता कि इसका पहला बिज़नेस TYV चैनलों के साथ डीलिंग करना है। वहीं पुलिस के अनुसार अगर ऐसा कोई नियम मौजूद है, तो कंपनी का अस्तित्व बिल्कुल भी नहीं होना चाहिए।

वहीं दूसरी बात कि अगर हंसा विजन को टीवी चैनलों से डील की अनुमति नहीं है, तो मुंबई पुलिस इस मामले में केवल रिपब्लिक को क्यों निशाना बना रही है। कंपनी ने खुद कहा है कि वे 55 टीवी चैनलों के साथ डील करते हैं।

हंसा ग्रुप के सीईओ शेखर स्वामी द्वारा जारी एक बयान में कहा गया था, “पिछले दो वर्षों में व्यवसाय के हिस्से के रूप में, हंसा विजन ने अपने ग्राहकों की ओर से कुल टीवी चैनलों के लिए 55.42 करोड़ रुपए के टीवी विज्ञापन का समय खरीदा है। वहीं 2019 और 2020 में हंसा विजन द्वारा रिपब्लिक टीवी से कोई विज्ञापन समय नहीं खरीदा गया है।”

इस तरह से देखा जाए तो अगर किए गए यह डील अवैध है तो मुंबई पुलिस को उन सभी 55 चैनलों से पूछताछ करनी चाहिए, लेकिन मुंबई पुलिस सिर्फ रिपब्लिक को ही कटघरे में खड़ा कर रही है।

हंसा विजन द्वारा प्रकाशित वित्तीय विवरणों में कंपनी ने 2017-18 और 2018-19 में रिपब्लिक पर विज्ञापन स्लॉट खरीदे थे। और इसी चीज का टीवी नेटवर्क को पेमेंट किया गया था। कंपनी ने उसके बाद चैनल से कोई स्लॉट नहीं खरीदा है, जबकि अन्य टीवी चैनलों में विज्ञापन स्लॉट खरीदने और उसकी पेमेंट करने की प्रकिया लगातार बनी हुई है।

हंसा विजन ने जारी एक बयान में कहा, “हंसा विजन टेलीविज़न चैनल्स से विज्ञापन समय खरीदती है, ताकि क्लाइंट की तरह से विज्ञापन प्रकाशित किए जा सके।

वहीं हंसा रिसर्च ने भी यही तथ्य रखा था कि उसकी कंपनी हंसा विजन टीवी चैनलों में विज्ञापन स्पॉट खरीदती है, और वह ऐसी कोई डीलिंग नहीं करती है। वास्तव में हंसा रिसर्च और रिपब्लिक नेटवर्क दोनों ने कहा कि हंसा विजन ने रिपब्लिक को विज्ञापन स्पॉट खरीदने के लिए 108 करोड़ रुपए का भुगतान किया था। जबकि मुंबई पुलिस ने सिर्फ 32 करोड़ का दावा किया है। रिपब्लिक ने इस तथ्य के समर्थन में ऑडिट किए गए वित्तीय विवरण भी प्रकाशित किए थे।

अब अगर वास्तव में यह सच है कि हंसा ग्रुप की कंपनी हंसा विज़न टीवी चैनलों के साथ डीलिंग नहीं कर सकती है, तो इसका मतलब होगा कि कंपनी का पूरा कारोबार अवैध है। अब यह देखना बाकी है कि क्या मुंबई पुलिस हंसा विजन के साथ इस अवैध कारोबार के लिए अन्य सभी 54 टीवी चैनलों को जाँच के दायरे में लाती है या नहीं।

‘मैन ऑफ अमित शाह’ क्यों कहते हैं इन्हें? | Bihar Elections: ‘Man of Amit Shah’ talks to OpIndia

बिहार की चुनावी यात्रा के दौरान ऑपइंडिया ने ‘मैन ऑफ अमित शाह’ कहे जाने वाले मुरारी मोहन झा से मुस्लिम बहुल केवटी विधानसभा क्षेत्र के मुद्दों पर बातचीत की। यह पूछे जाने पर कि वह जनता के बीच किन मुद्दों को लेकर जाएँगे, उनका कहना है कि वो प्रधानमंत्री की योजनाओं के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं।

यात्रा के दौरान हमने पाया कि उनके लिए जनता का झुकाव पार्टी से परे जाकर भी है। जब हमने इस बारे में उनसे जानने की कोशिश की तो उन्होंने बताया कि वो छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों में लगे रहे हैं। उन्होंने हर जाति-दल के लोगों की मदद की है। यही कारण है कि आज लोग जाति-दल से ऊपर उठ कर उनका समर्थन कर रहे हैं।

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फ्रांस में पाकिस्तान और बांग्लादेशी नागरिकों की एंट्री पर लगे बैन: हिंसक प्रदर्शनों को देखते हुए विपक्षी नेता की माँग

फ्रांस में अक्‍टूबर माह में हुए आतंकी हमलों के बाद इस्‍लामिक आतंकवाद के खिलाफ कड़े कदम उठाने की माँग तेज होती जा रही है। विपक्ष की नेता मरीन ले पेन ने अब सरकार से पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश से जुड़ी एक ऐसी माँग कर डाली है जो इन देशों खासतौर पर पाक की मुश्किलें बढ़ाने वाली है। 

पेन ने माँग की है कि पाक और बांग्‍लादेश से आकर यहाँ बसने वाले अप्रवासियों पर बैन लगा देना चाहिए। उन्‍होंने यह माँग दक्षिण एशिया के इन दोनों देशों में होने वाले अति हिंसक विरोध प्रदर्शनों के चलते की है। बता दें कि फ्रांस के राष्‍ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो की तरफ से की गई टिप्‍पणी से नाराज पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश के लोग बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन पर उतर आए हैं।

ले पेन ने ट्वीट कर अपनी माँग सरकार के सामने रखी है। फ्रेंच में की गई ट्वीट का अनुवाद कुछ इस तरह से है, “आज बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान में नए सिरे से हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए हैं। इन्‍हें देखते हुए मैं सरकार से माँग करती हूँ कि इन देशों से आने वाले लोगों को राष्‍ट्रीय सुरक्षा के नाम तुरंत बैन कर दिया जाना चाहिए।”

इससे पहले, पेन ने फ्रांस और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रो का साथ देने और फ्रांसीसी विरोधी भावनाओं के खिलाफ समर्थन दिखाने के लिए भारत को धन्यवाद दिया था। बता दें कि भारत ने एक बार फिर यह साफ किया है कि वो मौजूदा संकट में फ्रांस के साथ खड़ा है। साथ ही भारत ने आतंकवाद और कट्टरपंथ का समर्थन करने वालों के खिलाफ समन्वित कार्रवाई का आह्वान भी किया है।

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उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, “नई दिल्ली ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि आतंकवाद और उसे जन्म देने वाला कट्टरपंथ सेंसरशिप का सबसे डरावना रूप है। यह हमारी लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और हमारे साझा गणतंत्रवादी आदर्शों के लिए खतरा है। पेरिस और नीस में जो कुछ हुआ, उसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है। भारत इस लड़ाई में फ्रांस के साथ है।”

बता दें कि तुर्की और पाकिस्तान द्वारा फ्रांस के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद भारत फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का समर्थन करने वाला पहला गैर-पश्चिमी देश था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस और नीस की घटना की निंदा करते हुए आतंकवाद से लड़ाई में फ्रांस के समर्थन की बात कही। उन्होंने शिक्षक की हत्या की निंदा करते हुए कहा था कि किसी भी कारण या किसी भी परिस्थिति में आतंकवाद को सही नहीं ठहराया जा सकता।

पाक-बांग्‍लादेश में हो रहे प्रदर्शन

पाक और बांग्‍लादेश में हजारों की संख्‍या में कट्टरपंथी इकट्ठा हुए थे। इन लोगों ने राष्‍ट्रपति मैंक्रो के पुतले जलाए और सड़कों पर इनका प्रदर्शन किसी को भी दहशत में डालने वाला था। मैंक्रो इस समय हर मजहबी देश के निशाने पर हैं। 16 अक्‍टूबर को जब एक शिक्षक का सिर कलम कर दिया गया था तो मैंक्रो ने फ्रांस की संस्‍कृति की तारीफ की थी। उन्‍होंने कहा था कि फ्रांस पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून छापना बंद नहीं करेगा।

मदरसे में मैक्रों के पुतले का सिर कलम 

समुदाय विशेष के लोग पैगंबर मोहम्‍मद के चित्रण को ईशनिंदा मानते हैं। शिक्षक की निर्मम हत्‍या के बाद कई जगह पर फ्रेंच नागरिकों ने इन कार्टूनों का प्रदर्शन किया था। इसकी वजह से समुदाय के लोग खासे नाराज हैं। मैक्रों ने हिस्‍ट्री के टीचर सैमुअल पैटी की हत्‍या के बाद कहा था, “उन्‍हें इस्‍लामिक आतंकियों ने इसलिए मार दिया क्‍योंकि वह हमारा भविष्‍य चाहते थे। लेकिन फ्रांस कार्टूनों को नहीं त्‍यागेगा।”

शुक्रवार को पाकिस्‍तान में विरोध प्रदर्शन के नाम पर अजब-गजब वाकया हुआ। यहाँ पर मदरसे में पढ़ाने वाले टीचर ने छात्राओं के सामने मैक्रों के पुतले का सिर कलम कर दिया। इन छात्राओं में से कई ऐसी थीं जिनकी उम्र बहुत कम थी। 

वहीं बांग्‍लादेश की राजधानी ढाका में भी प्रदर्शन जारी है। बताया जा रहा है कि एक प्रदर्शन में करीब 40,000 लोगों ने हिस्‍सा लिया था, जिसे इस्‍लामी आंदोलन बांग्‍लादेश की तरफ से आयोजित किया गया था। पाक की राजधानी इस्‍लामाबाद में भी 2000 प्रदर्शनकारियों ने फ्रांस के दूतावास तक मार्च निकाला था।

‘पैगंबर मोहम्मद के कार्टून बना वो सोचते हैं कि ‘वो’ ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ समझ पचा लेंगे?’ नरसंहार ट्वीट का बचाव

मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने एक बयान दिया था, जिसमें उनका कहना था कि समुदाय विशेष के पास लाखों फ्रांसीसी लोगों को जान से मारने का अधिकार है। इस बयान पर उनकी पूरी दुनिया में आलोचना हुई लेकिन इसके बाद वह शुक्रवार (30 अक्टूबर 2020) को फिर अपने नफ़रत भरे बयान के पक्ष में खड़े हुए नज़र आए। इस बयान के संबंध में ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत संदर्भ में लिया जा रहा है।

दरअसल गुरूवार (29 अक्टूबर 2020) मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने ट्विटर पर जहर उगलते हुए कहा था कि मजहब विशेष वालों के पास फ्रांस के लोगों की हत्या करने का अधिकार है। फ्रांस के लोगों की हत्या का समर्थन करते हुए महातिर मोहम्मद ने अपने ट्वीट में लिखा था, “क्रोधित लोगों के पास जान लेने का अधिकार है क्योंकि भूतकाल (इतिहास) में फ्रांस ने लाखों लोगों का नरसंहार किया है। 

महातिर मोहम्मद का ट्वीट

अपने नफ़रत भरे ट्वीट पर पूरी दुनिया में विवाद बढ़ने और आलोचना का शिकार होने के बाद उन्होंने इस संबंध में सफाई भी पेश की। उन्होंने कहा, “जिस तरह मेरे द्वारा पेश किए गए विचारों की गलत व्याख्या की गई और तोड़-मरोड़ का उनका प्रचार किया गया, मैं इस बात से बहुत ज़्यादा निराश हूँ।”

महातिर मोहम्मद ने कहा कि लोग उनके ट्वीट को पूरा नहीं पढ़ पाए, जिसके अगले हिस्से में यह लिखा था, “मुस्लिमों ने कभी आँख के बदले आँख वाली नीति के क़ानून का पालन नहीं किया। मुस्लिम ऐसा नहीं करते हैं और फ्रांस के लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। बल्कि फ्रांस सरकार को अपने लोगों को इस बात की शिक्षा देनी चाहिए कि वह दूसरों की भावनाओं का सम्मान करें।” 

इसके बाद महातिर मोहम्मद ने कहा कि जिस तरह उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया और इसके गलत मायने निकाले गए। उसके आधार पर उन्हें फेसबुक और ट्विटर पर हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। इस कार्रवाई को मद्देनज़र रखते हुए उन्होंने फेसबुक और ट्विटर की आलोचना की। आलोचना करते हुए उन्होंने लिखा कि उनके द्वारा अपना पक्ष रखने और सफाई पेश किए जाने के बावजूद इस तरह की कार्रवाई गलत है।

फ्रांसीसी लोगों के नरसंहार की बात कहने वाले महातिर मोहम्मद अगले ही क्षण खुद ही भुक्तभोगी (victim) भी बन गए। 

महातिर मोहम्मद द्वारा किए गए ट्वीट

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि उनके लिए यही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है। एक तरफ उन्होंने ऐसे लोगों का बचाव किया, जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाया। साथ ही समुदाय के लोगों से इस बात की आशा रखी कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर बिना कोई प्रतिक्रिया दिए इसे पचा (स्वीकार) लें।

खुद को भुक्तभोगी साबित करते और ट्विटर की आलोचना करते हुए महातिर मोहम्मद इस बात पर अड़े थे कि पैगंबर मोहम्मद का कार्टून बनाना अभिव्यक्ति की आज़ादी के दायरे में नहीं आता है लेकिन उनकी प्रतिक्रिया ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ की मिसाल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिमों से इस बात की उम्मीद की जाती है कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कार्टून स्वीकार कर लें जबकि ट्विटर ने उनका यह ट्वीट डिलीट कर दिया था। महातिर मोहम्मद की तरफ से यह प्रतिक्रिया शुक्रवार को कट्टर इस्लामियों द्वारा नीस शहर में आतंकी हमलों के बाद आई थी। 

इस आतंकवादी हमले में एक आतंकी ने नीस शहर स्थित एक चर्च के पास कुल 3 लोगों की हत्या कर दी थी, जिसमें एक महिला भी शामिल थी, जिसका गला काट दिया गया था। यह भयावह हमला फ्रांस के एक शिक्षक का अभिव्यक्ति की आज़ादी से संबंधित मुद्दे पर एक कार्टून (पैगंबर मोहम्मद) दिखाने के लिए गला काटने के बाद हुआ था। महातिर मोहम्मद के ट्वीट पर विवाद बढ़ने के बाद ट्विटर ने उसे हिंसा को बढ़ावा देने वाला बता कर डिलीट कर दिया था। 

‘Boycott Islam’ लिख कर फँस गईं तस्लीमा नसरीन, कॉन्ग्रेसी साकेत गोखले ने दर्ज कराई शिकायत

बांग्‍लादेश की जानी-मानी लेखिका और एक्टिविस्ट तस्लीमा नसरीन के खिलाफ शिकायत दर्ज किया गया है। यह शिकायत कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने दर्ज करवाई है। साकेत ने तस्लीमा के खिलाफ भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने की कोशिश करने को लेकर शिकायत दर्ज कराई है।

बता दें कि तस्लीमा नसरीन ने 29 अक्टूबर 2020 को अपने ट्विटर अकाउंट के माध्यम से एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें ’बॉयकॉट इस्लाम’ लिखा था। विदेशियों के क्षेत्रीय पंजीकरण अधिकारी के समक्ष दायर शिकायत में कहा गया है कि नई दिल्ली में वीजा पर रहने वाली तस्लीमा नसरीन (स्वीडन की नागरिक) ने वीजा मानदंडों का व्यापक उल्लंघन करते हुए अपने ट्वीट के माध्यम से भारत में सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने का प्रयास किया है। 

गोखले ने गृह मंत्रालय के वीजा विंग और एफआरआरओ को लिखे अपने पत्र में कहा कि नसरीन का ट्वीट ‘हमारे देश में सांप्रदायिक विद्वेष और नफरत फैलाने का एक कुत्सित और जानबूझकर किया गया प्रयास’ है। शिकायत में आगे कहा गया है, “यह नोट किया जा सकता है कि किसी भी तरह के वीजा पर रहने वाले विदेशियों को देश में उनके निवास के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की अनुमति नहीं है।” गोखले ने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने का अनुरोध किया। 

तस्लीमा नसरीन ने हाल ही में ट्व‍िटर पर लिखा था, “इस्लाम धर्म में सुधार की जरूरत है, नहीं तो आधुनिक सभ्‍यता में इस धर्म के लिए कोई जगह नहीं है।” इसके पहले तस्लीमा ने ट्व‍िटर पर ही लिखा था, “बॉयकॉट इस्‍लाम।”

तस्लीमा नसरीन के इन ट्वीट्स के बाद सोशल मीडि‍या में खासा बवाल हुआ। जहाँ इस्‍लामि‍क कट्टरपंथियों ने उनकी आलोचना की तो बाकी लोग खुलकर उनके समर्थन में आए। दरअसल, तस्लीमा लगातार खुलकर इस्‍लाम की बुराइयों और इस धर्म की खामियों के बारे में बात करती हैं।

हाल ही में फ्रांस में पैगंबर मोहम्‍मद के कार्टून को लेकर चल रहे विवाद पर भी वे खुलकर अपना पक्ष रख रही हैं। वे लगातार ट्वीट करती हैं और मुस्लिम कट्टरपंथियों को आइना दिखाती रहती हैं। तस्लीमा पाकिस्‍तान मूल के तारेक फतेह की तरह ही इस्‍लाम की बुराइयों की आलोचना करती हैं और भारत की पैरवी करती रही हैं।

गौरतलब है कि 29 अक्टूबर 2020 की सुबह 9 बजे फ्रांस के नीस शहर में स्थित कैथेड्रल चर्च में एक आतंकवादी घटना हुई। इस आतंकी घटना में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर बोलते हुए कई लोगों पर धारदार हथियार से हमला किया। इस घटना में अभी तक 3 लोगों की जान जा चुकी है और कई घायल बताए जा रहे हैं। मरने वालों में एक महिला भी शामिल है, जिनका गला काट दिया गया है।

इसके बाद फ्रांस के एविगनन (Avignon) शहर में एक व्यक्ति ने अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाते हुए धारदार हथियार से पुलिसकर्मियों के एक समूह पर हमला कर दिया। इसके बाद पुलिस वालों ने उस व्यक्ति पर जवाबी कार्रवाई में गोली चलाई जिसमें उस व्यक्ति की मौत हो गई। स्थानीय समयानुसार यह घटना लगभग 11:15 बजे हुई थी यानी फ्रांस के ही नीस शहर के चर्च में 1 महिला समेत 3 लोगों की गला काट कर हत्या करने के कुछ ही घंटों बाद।

लव जिहाद करने वाले अगर सुधरे नहीं तो ‘राम नाम सत्य है’ की यात्रा अब निकलने वाली है: योगी आदित्यनाथ

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन को लेकर कल ही एक बड़ा आदेश जारी किया था। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन स्वीकार्य नहीं है। इसके अलावा न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि धर्म परिवर्तन का उद्देश्य अलग है, उसका विवाह से कोई सरोकार नहीं है।

अब न्यायालय के इस आदेश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सरकार भी ‘लव जिहाद’ के मामलों पर रोक लगाने के लिए क़ानून लेकर आएगी। इसके बाद उन्होंने कहा, “ऐसे लोगों के लिए चेतावनी है, जो अपनी पहचान छिपा कर हमारी बहनों के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं।” 

जौनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा, “हमने जो कहा था, वह करके दिखाया है। साथ ही यह भी कहने के लिए आए हैं कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश दिया है शादी ब्याह के लिए धर्म परिवर्तन आवश्यक नहीं है। ऐसा नहीं किया जाना चाहिए और न ही इसे मान्यता मिलनी चाहिए। इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार भी निर्णय ले रही है कि हम लव जिहाद को सख्ती से रोकने का प्रयास करेंगे।” 

इस मुद्दे पर आगे बोलते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा:

“हम लव जिहाद के मामलों को रोकने के लिए एक प्रभावशाली क़ानून बनाएँगे। छद्म वेश में, चोरी-छिपे नाम बदल कर जो लोग बहन-बेटियों की इज्जत के साथ खिलवाड़ करते हैं, उनके लिए पहले से मेरी चेतावनी है। अगर वह सुधरे नहीं तो राम नाम सत्य है की यात्रा अब निकलने वाली है। हम लोग मिशन शक्ति के कार्यक्रम को इसलिए आगे बढ़ा रहे हैं। मिशन शक्ति के कार्यक्रम का मतलब है कि हम हर बेटी को, हर बहन को सुरक्षा की गारंटी देंगे। इन सारी बातों के बावजूद अगर किसी ने दुस्साहस किया तो उनके लिए ऑपरेशन शक्ति अब तैयार है। इसका उद्देश्य यही है कि हम हर हाल में लड़कियों की सुरक्षा करेंगे और उनके सम्मान की सुरक्षा करेंगे। इसके अलावा न्यायालय के आदेश का भी पालन होगा और बहन-बेटियों का सम्मान सुनिश्चित होगा।”

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन और विवाह को लेकर जो अहम फैसला सुनाया था, उसके अनुसार विवाह से धर्म परिवर्तन का कोई सरोकार नहीं है। धर्म परिवर्तन करने के बाद विवाह करने वाले एक जोड़े ने संरक्षण के लिए माँग करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एमसी त्रिपाठी ने यह आदेश सुनाया था। 

न्यायालय ने 2014 के नूर जहां बेगम मामले के आदेश का हवाला देते हुए आदेश सुनाया और कहा कि ऐसे मामलों में न्यायालय पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि ‘विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य नहीं हो सकता है।’

नूर जहां बेगम मामले में दायर की गई अनेक याचिकाओं में एक ही प्रश्न था, “क्या सिर्फ विवाह के लिए धर्म परिवर्तन मान्य हो सकता है?” जबकि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को न तो उस धर्म के बारे में कोई जानकारी होती है और न आस्था/विश्वास। तमाम याचिकाओं में एक ही प्रश्न था कि लड़कियों ने मुस्लिम लड़कों के कहने पर इस्लाम धर्म कबूल किया। जबकि उन लड़कियों को न तो इस धर्म के बारे में मूलभूत जानकारी थी और न ही आस्था।

बिहार में तेजस्वी यादव के समर्थन में खड़े वामपंथी दलों ने यूपी की दी दुहाई, कहा- ‘हम हारे तो नहीं बचेगा लोकतंत्र’

बिहार में वामपंथी अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए फिर से कुलबुलाने लगे हैं। बिहार में जंगलराज का पर्याय मानी जाने वाली राजद के साथ मिल कर महागठबंधन में चुनाव लड़ रहे भाकपा (माले) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य लोगों को उत्तर प्रदेश का डर दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा देश में लोकतंत्र ख़त्म कर रही है और वो नहीं जीते तो बिहार में भी यही होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में उनकी सरकार नहीं बनी तो वहाँ लोकतंत्र की हत्या हो जाएगी।

‘न्यूज़ 18’ के इंटरव्यू में वामपंथी नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि राजग को ध्वस्त करने के लिए उन्होंने पार्टी हित को किनारे रख कर लालू यादव की पार्टी के साथ गठबंधन किया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी न तो कोई वैचारिक समझौता कर रही है और न ही किसी का पिछलग्गू बन रही है। उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के 25 पॉइंट चार्टर में भी वामपंथ का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि कृषि ऋण माफी, सुरक्षित रोजगार और समान काम के लिए समान वेतन जैसे मुद्दे वामपंथी पहले से उठाते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने 30 सीटों की माँग रखी थी, पर उन्होंने समझौता किया और राजद ने 19 सीटें दी। उन्होंने दावा किया कि उनके पास मजबूत उम्मीदवार और जनाधार है, जिससे वो चुनावी समीकरणों को बदलने की ताकत रखते हैं। भाकपा (माले) के महासचिव ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए दोनों कैडर आधारित दल साथ आए हैं और एक कॉम्पैक्ट और विश्वसनीय गठबंधन बनाया है।

इस दौरान उन्होंने 2015 में महागठबंधन का चेहरा रहे और अब राजग के मुख्यमंत्री उम्मीदवार नीतीश कुमार को अवसरवादी और अविश्वसनीय करार दिया। उन्होंने कहा कि अब महागठबंधन में पाला बदलने वाला कोई नहीं है और यही उनके पक्ष में गेमचेंजर साबित होगा। हालाँकि, उन्होंने जीतन राम माँझी, मुकेश साहनी और उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं के महागठबंधन छोड़ने पर दुःख जताते हुए कहा कि वो रहते तो अच्छा होता।

अपनी बिहार की चुनावी सभाओं में भी भाकपा नेता दीपांकर भट्टाचार्य भाजपा पर निशाना साधते हुए कहते रहे है कि अगर बिहार में भाजपा की सरकार बनी तो यहाँ भी ‘उत्तर प्रदेश जैसे हालात’ पैदा हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि भाजपा की ‘लोकतंत्र विरोधी और फासीवादी’ मुहिम को रोकने के लिए माले ने कॉन्ग्रेस और राजद से गठबंधन किया है। दीपांकर ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में तेजस्वी यादव की सरकार बनी तो उसमें माले शामिल नहीं होगी बल्कि बाहर से ‘नजर रखेगी’।

हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेड़कर ने ऑपइंडिया से कहा था, “बिहार में हमारा पहले से ही गठबंधन है, बीच में जदयू निकल गए थे, लेकिन फिर वापस आए, तो आज हम काफी मजबूती से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री बनाने के वादे पर ही चुनाव लड़ रहे हैं। और हमें जनता का आशीर्वाद मिलेगा। पहले चरण के चुनाव के बाद पता चलेगा कि बीजेपी और जदयू कॉम्बिनेशन बहुत आगे निकलेगा। HAM और VIP चार पार्टियों का ये गठबंधन मजबूती से लड़ रहा है और निश्चित रूप से जीतेगा।”

कार्तिक मास: मौसम के बदलाव की सूचना भी पर्व से, सिर्फ सभ्यता-संस्कृति नहीं, छिपे हैं अनगिनत वैज्ञानिक तथ्य

प्राणी मात्र के संरक्षण संवर्धन के ज्ञान से अनुस्यूत वेदों का अनुसरण करने वाली भारतीय संस्कृति में पर्व की एक लंबी पंक्ति है। पर्व या उत्सव किसी संस्कृति की समृद्धता को द्योतित करते हैं। जो संस्कृति जितनी वैभवशाली होती है, उसमें उतने ही पर्व होते हैं और पर्व भी केवल मनोरंजन के लिए नहीं अपितु अन्वर्थ है अर्थात् पर्व शब्द संस्कृत की ‘पृ’ धातु से बना है जिसका अर्थ होता है पूर्ण करने वाला, तृप्त करने वाला। पहाड़ को भी पर्वत कहते हैं क्योंकि वह भी पर्व वाला है अर्थात् उसका निर्माण भी कालखण्ड में धीरे-धीरे हुआ है।

गन्ने के एक-एक भाग को भी पर्व (पौरी) कहते हैं, उसका प्रत्येक भाग मिलकर पूर्ण मिठास, तृप्ति को प्राप्त कराता है। इसी प्रकार वर्ष पर्यन्त प्राकृतिक दिवस विशेष को पर्व कहा जाता है क्योंकि ये दिवस विशेष हमें पूर्ण करने वाले तथा तृप्त करने वाले होते हैं। भारतीय संस्कृति व्यक्ति प्रधान नहीं अपितु समष्टि प्रधान है, अत: वह प्रकृति के परिवर्तन को उत्सव के रूप में मनाती है।

मानव प्रकृति का एक अंग है। वह प्रकृति ही उसे पूर्ण बनाती है, उस प्रकृति को जान करके ही व्यक्ति अपना समुन्नत विकास कर सकता है। भारतीय ऋषि-ज्ञान परंपरा ने बहुत गहन अध्ययन और प्रयोगों के उपरांत उनसे मिलने वाले परिणामों को देखते हुए जन सामान्य को अनुसरण करने के लिए कुछ पर्व के रूप में दिवस निर्दिष्ट किए। मानव और प्रकृति में जब तक सामंजस्य है, तब तक मानव स्वस्थ और दीर्घ जीवन जी सकता है- यह तथ्य भारतीय मनीषी बहुत पहले जान चुके थे। अत: भारतीय समाज प्रकृति की पूजा करता है और पूजा का अर्थ होता है “यथायोग्य व्यवहार करना”।

भारतीय समाज जानता था कि प्रकृति का शोषण नहीं बल्कि “तेन त्यक्तेन भुञ्जीथाः” त्याग पूर्वक भोग करना चाहिए। यही त्याग पूर्वक भोग ही प्रकृति की पूजा है, जिसमें किसी प्राणी की हिंसा नहीं अपितु समर्पण होता है। व्यक्ति दैनंदिन की व्यस्तता में यह भूल सकता है अत: पर्व के रूप में उस दिन विशेष को वह पुन: स्मरण करता है और अपने परिश्रम के उपरांत प्राप्त फल के लिए धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रसन्न हो कर मिल बाँट कर खाता है। अतः ये पर्व मानव जीवन में न्यूनताओं को पूर्ण करने वाले होते हैं। जिनको भारतीय मानव समुदाय बड़ी प्रसन्नता उत्साह के साथ मनाता है।

हम सब होली दिवाली इत्यादि बड़े पर्व से परिचित हैं इसी श्रृंखला में शरद पूर्णिमा भी एक पर्व है और उसके बाद प्रारम्भ होने वाला कार्तिक मास का प्रात:स्नान। पृथ्वी की परिभ्रमण और परिक्रमण गति के कारण वर्ष में दो बार वह सूर्य के सबसे समीप होती है । ग्रीष्म ऋतु में उसकी समीपता रस की शोषक का कारक बनती है तो शरद ऋतु में उसकी समीपता रस की पोषक है।

आयुर्वेद में इस काल को विसर्ग काल कहा जाता है- “जनयति आप्यमंशम् प्राणिनां च बलमिति विसर्ग:’ अर्थात् इसमें वायु की रुक्षता कम हो जाती है और चन्द्रमा का बल बढ़ जाता है। सूर्य जब दक्षिणायन होता है तो उत्तरी गोलार्ध में पड़ने के कारण भारतवर्ष सूर्य से दूर हो जाता, जिससे भूभाग शीतल रहता। इस काल में चन्द्रमा भी पृथ्वी के सबसे अधिक समीप होता है और वह समस्त संसार पर अपनी सौम्य एवं स्निग्ध किरणें बिखेर कर जगत को निरंतर तृप्त करता रहता है।

शरद ऋतु में चन्द्रमा पूर्ण बली होकर जलीय स्नेहांश को बढ़ाने लगता है, जिससे द्रव्यों में मधुर रस की वृद्धि होती है और उसके उपयोग से प्राणियों के शरीर में बल की वृद्धि होने लगाती है। चन्द्रमा के साहचर्य से वायु भी अपने योगवाही गुण के कारण चन्द्रमा के शैत्य आदि गुणों की वृद्धि कराती है। शरद ऋतु के प्रारम्भ में दिन थोड़े गर्म और रातें शीतल हो जाया करती हैं। आयुर्वेद के अनुसार “वर्षाशीतोचिताङ्गानां सहसैवार्करश्मिभि:।

तप्तानामचितं पित्तं प्राय: शरदि कुप्यति” अर्थात् वर्षा ऋतु में शरीर वर्षाकालीन शीत का अभ्यस्त रहता है और ऐसे शरीरांगों पर जब सहसा शरद ऋतु के सूर्य की किरणें पड़ती हैं तो शरीर के अवयव संतप्त हो जाते हैं और वर्षा ऋतु में संचित हुआ पित्त शरद ऋतु में प्रकुपित हो सकता है। अत: प्रकृति के इस परिवर्तन को देखते हुए मनुष्य को अपने आहार-विहार, पथ्य-अपथ्य का ध्यान रखना चाहिए। इसका प्रारम्भ नवरात्रि के उपवास से ही हो जाता है।

भारतीय समाज में शरद पूर्णिमा के बाद प्रारम्भ होने वाले कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में शीतल जल के स्नान की परम्परा है। आयुर्वेद के प्रसिद्ध ग्रन्थ चरक संहिता में इस जल को ‘हंसोदक’ कहा गया है क्योंकि दिन के समय सूर्य की किरणों से तपा और रात के समय चन्द्रमा की किरणों के स्पर्श से शीतलकाल स्वभाव में पका हुआ होने से निर्दोष एवं अगस्त्यतारा के उदय होने के प्रभाव से निर्विष हो जाता है।

‘हंस’ शब्द से सूर्य, चन्द्रमा और हंस पक्षी इन तीनों का ग्रहण होता है अत: सूर्य और चन्द्रमा दोनों की किरणों के संपर्क से शुद्ध हुए जल को भी हंस-उदक कहा जाता है। उस जल में स्नान करना, उसका पान करना और उसमें डुबकी लगाना अमृत के सामान फल देने वाला होता है। हमारे पूर्वजों ने इस परंपरा का बड़ी श्रद्धा और निष्ठा से निर्वहण किया है और हम तक सुरक्षित पहुँचाया है।

ये पर्व प्रवाही काल का साक्षात्कार है। मनुष्य द्वारा ऋतु को बदलते देखना, उसकी रंगत पहचानना, उस रंगत का असर अपने भीतर अनुभव करना पर्व का लक्ष्य है। हमारे पर्व-त्यौहार हमारी संवेदनाओं और परंपराओं का जीवंत रूप हैं, जिन्हें मनाना या यूँ कहें कि बार-बार मनाना, हर वर्ष मनाना हमारे लिए गर्व का विषय है। पूरी दुनिया में भारत ही एक ऐसा देश है, जहाँ मौसम के बदलाव की सूचना भी पर्व/त्यौहारों से मिलती है।

इन मान्यताओं, परंपराओं और विचारों में हमारी सभ्यता और संस्कृति के अनगिनत वैज्ञानिक तथ्य छुपे हैं। जीवन के अनोखे रंग समेटे हमारे जीवन में रंग भरने वाली हमारी उत्सवधर्मिता की सोच, मन में उमंग और उत्साह के नए प्रवाह को जन्म देती है। हमारी संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है कि यहाँ पर मनाए जाने वाले सभी त्यौहार समाज में मानवीय गुणों को स्थापित करके लोगों में प्रेम और एकता को बढ़ाते हैं।

त्यौहारों और उत्सवों का संबंध किसी जाति, भाषा या क्षेत्र से न होकर समभाव से है। सभी त्यौहारों के पीछे की भावना मानवीय गरिमा को समृद्धि प्रदान करना है। प्रत्‍येक त्‍यौहार अलग अवसर से संबंधित है, कुछ वर्ष की ऋतुओं का, फसल कटाई का, वर्षा ऋतु का अथवा पूर्णिमा का स्‍वागत करते हैं। दूसरों में धार्मिक अवसर, ईश्‍वरीय सत्‍ता/परमात्‍मा व संतों के जन्‍म दिन अथवा नए वर्ष की शुरुआत के अवसर पर मनाए जाते हैं।

‘प्रदेश के हर गाँव से अयोध्या जाने की सुविधा, सबको कराएँगे दर्शन’: CM योगी ने चित्रकूट में किया अखंड रामायण पाठ का शुभारम्भ

कोरोना काल ख़त्म होते ही उत्तर प्रदेश के हर नागरिक को अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने में सुगमता हो, इसके लिए योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रयास शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी ने शुक्रवार (अक्टूबर 30, 2020) को चित्रकूट में कहा कि राज्य के हर एक गाँव से अयोध्या में रामलला के दर्शन के लिए व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि अगर कोरोना बीच में नहीं आता तो अभी तक लोगों को अयोध्या भेजने के लिए व्यवस्था हो चुकी होती।

वाल्मीकि जयंती के अवसर पर चित्रकूट के लालापुर स्थित वाल्मीकि आश्रम पहुँचे यूपी सीएम ने लोगों से ये बातें कहीं। अपने कार्यकाल में 7वीं बार चित्रकूट पहुँचे योगी आदित्यनाथ पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं, जो पद पर रहते हुए इतनी बार यहाँ आए। सीएम ने कहा कि भारत के रामायणकालीन अति प्राचीन परंपरा के वाहक दो ऋषियों की जयंती है, जिनमें पहले वाल्मीकि जी, जिन्होंने भगवान राम से साक्षात्कार कराया है, और दूसरे हैं राष्ट्रऋषि नानाजी। 

उन्होंने दोनों को नमन करते हुए कहा कि जो धरती हजारों वर्षों से रामायणकालीन इतिहास को समेटे है, वो उसका दर्शन करना चाहते थे। रामायण के दौरान भगवान श्रीराम यहाँ आए थे और फिर यहीं से चित्रकूट के लिए प्रस्थान किया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर देव मंदिर में रामकथा का अखंड पाठ हो रहा है, जिससे महर्षि वाल्मीकि ने हमें साक्षात्कार कराया था और जिसे लेकर तुलसीदास घर-घर तक गए।

महर्षि वाल्मीकि की पूजा करने के बाद सीएम योगी पर्वत के शिखर में स्थित वाल्मीकि आश्रम पहुँचे, जहाँ उन्होंने अखंड रामायण पाठ का शुभारंभ किया। इसके बाद उन्होंने कुछ देर तक संतों के साथ बैठ कर चर्चा भी की। उन्होंने कहा कि नए डिफेंस कॉरिडोर के तहत अब चित्रकूट में तोपों का निर्माण होगा और महर्षि वाल्मीकि व तुलसीदास की भूमि दुश्मनों के दाँत खट्टे करेगी। उन्होंने चित्रकूट में हर घर पीने योग्य जल पहुँचाने का वादा भी किया।

बता दें कि शनिवार को गुजरात के केवड़िया में पीएम मोदी ने भी कहा कि सोमनाथ के पुनर्निर्माण से सरदार पटेल ने भारत के सांस्कृतिक गौरव को लौटाने का जो यज्ञ शुरू किया था, उसका विस्तार देश ने अयोध्या में भी देखा है। साथ ही उन्होंने इसे वर्तमान से जोड़ते हुए कहा कि आज देश राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का साक्षी बना है और भव्य राम मंदिर को बनते भी देख रहा है। PM मोदी ने सरदार पटेल की जयंती के अवसर पर वहाँ जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।