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गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के ग्रंथी की 17 साल की बेटी का 2 मुस्लिम लड़कों ने किया अपहरण, 15 दिन से Pak प्रशासन सुस्त

पाकिस्तान में बहुसंख्यक आबादी के अत्याचार और मनमानी की एक और घटना सामने आई है। हाल में वहाँ गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब के ग्रंथी एस प्रीतम सिंह की 17 साल की बेटी बलबीर कौर (बदला हुआ नाम) का अपहरण किया गया। इससे पहले ननकाना साहिब गुरुद्वारे के ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर के अपहरण, धर्म परिवर्तन और निकाह की बात पाकिस्तान से सामने आई थी।

जानकारी के अनुसार, हाल की घटना में बलबीर कौर का अपहरण दो मुस्लिम युवकों ने किया है। इस वारदात के बाद वहाँ के सिखों में भारी रोष व्याप्त है। कहा जा रहा है कि प्रशासन आरोपितों का पता लगाने में अब तक असफल है।

मामले की सूचना होने के बाद दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (डीएसजीपीसी) के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने शनिवार को केंद्रीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से उनके दफ्तर में मुलाकात कर इस मामले की जानकारी देते हुए एक शिकायत पत्र भी सौंपा।

सिरसा ने विदेश मंत्री को एक सूची भी दी, जिसमें 55 हिंदू-सिख लड़कियों के नाम दर्ज हैं, जिन्हें बीते कुछ वर्षों में अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन करवाया गया। बाद में उनकी शादी मुस्लिम युवकों के साथ की गई।

मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक वीडियो जारी करते हुए कहा, “गुरुद्वारा ननकाना साहिब के ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर का पहले अपहरण किया गया। उनका धर्म परिवर्तन करके निकाह किया गया और अब पंजा साहिब की ग्रंथी सरदार प्रीतम की बेटी बलबीर कौर, 17 साल की बच्ची को 1 सितंबर को दो मुस्लिम लोगों ने अगवा कर लिया। उसके बाद से सरदार प्रीतम का रो-रो कर बुरा हाल है। उनका दर्द उनकी वीडियो-ऑडियो से छलक रहा है। वो कह रहे हैं कि मेरी बच्ची को इन जालिमों से बचा लो। मैं सारी संगत से अपील करता हूँ, मेरी बच्ची को बचा लो। मेरी बच्ची के लिए पाठ करो। उसे जालिमों ने अगवा कर लिया है।”

अकाली दल नेता आगे कहते हैं, “बड़ी शर्म की बात है कि पाकिस्तान अब औरंगजेब के राज से भी खतरनाक हो गया है, जब लोगों के जबरदस्ती धर्म बदले जा रहे थे। आज पाकिस्तान के कट्टर लोग यह साबित करने पर उतरे हुए हैं कि सिख कौम के ग्रंथियों की लड़कियों को भी नहीं छोड़ेंगे। उन्हें जबरन अगवा किया जा रहा है। उनका धर्म परिवर्तन किया जा रहा है।”

सिरसा कहते हैं, “मुझे जैसे ही इस संबंध में जानकारी मिली, मैंने सबसे पहले विदेश मंत्रालय से बात की। फिर विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान को समन किया और टाइम दिया। मगर, तब भी कुछ नहीं हुआ। इसलिए वह विदेश मंत्रालय के अंदर जो पाकिस्तान के इंचार्ज हैं, जेपी सिंह उनसे मिल रहे हैं।”

वह सारी कौम से कहते हैं कि पाकिस्तान का यह जुल्म सिर्फ बढ़ेगा, रुकेगा नहीं। इसलिए उन्हें आवाज उठानी होगी। उन्होंने बच्चियों के ख़िलाफ हो रहे अत्याचार की निंदा की और विरोध दर्ज कराने की बात की। साथ ही पाकिस्तान की इमरान सरकार से कहा कि वह बलबीर कौर को लौटा दें वरना उन्हें हाईकमीशन पहुँचना पड़ेगा।

इसके अलावा सिरसा ने विदेश मंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि पाकिस्तान में बसे सिखों को अलग-थलग करने की साजिश रची जा रही है। भारतीय सिख पाकिस्तान में बसे अपनों की मदद करने में असहाय हैं।

पाकिस्तान का समाज ऐसी घटनाओं पर कभी भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं देता है। सिरसा ने विदेश मंत्री से अपील की है कि वह इस मामले को पाकिस्तान की सरकार के सामने उठाएँ और बलबीर कौर सुरक्षित अपने घर लौटे। पाकिस्तान में बसे सिखों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

गौरतलब है कि पिछले साल गुरुद्वारा ननकाना साहिब के मुख्य ग्रंथी की बेटी जगजीत कौर का मोहम्मद हसन नाम के एक लड़के ने अपहरण कर लिया था। हसन के तार हाफिज सईद के आतंकी संगठन से जुड़े पाए गए थे।

पाकिस्तान समेत भारत के कई सिखों ने इस पर विरोध व्यक्त किया था, जिससे यह मामला अदालत पहुँचा। हालाँकि, वहाँ जगजीत कौर से यह कहलवा कर कि उसने खुद इस्लाम कबूला है, उसे हसन के पास वापस भेज दिया गया था।

गाड़ी हिंदू या मुस्लिम की? जलाने से पहले ‘इ-वाहन’ पर चेक किया जाता: Tech के इस्तेमाल से दिल्ली दंगों के 2655 आरोपित धराए

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट न सिर्फ वॉल्यूम के मामले में सबसे बड़ी है बल्कि जाँच के दौरान प्रयोग में लाए गए नए वैज्ञानिक तकनीकों के कारण भी इसे खास माना जा रहा है। इस मामले की संवेदनशीलता और इसके पेचीदा होने के कारण दिल्ली दंगों की जाँच के दौरान पुलिस द्वारा कॉल डिटेल्स विवरण के अलावा कई अन्य तरह की तकनीक का भी इस्तेमाल किया गया।

पश्चिमी देशों में आपराधिक मामलों की जाँच के दौरान ‘इंटरनेट प्रोटोकॉल्स डिटेल्स रिकॉर्ड्स’ तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है। दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में भी पुलिस ने इसे आजमाया। इसके तहत स्मार्टफोन्स में इंटरनेट ट्रैफिक का विवरण जुटाया जाता है। इससे VoIP कॉल्स के दौरान बनाए गए कनेक्शंस का अध्ययन करने में आसानी होती है। चूँकि अधिकतर आरोपित व्हाट्सएप्प और टेलीग्राम जैसे एप्स के माध्यम से सम्पर्क में थे, पुलिस को इस तकनीक से खासी सहायता मिली।

कई ऐसे पीड़ित भी थे, जो जल गए थे और उनकी पहचान ज़रूरी थी। ऐसे मृतकों के चेहरे को फिर से तैयार करने के लिए उनके फोटोग्राफ्स से उनकी खोपड़ी को ‘Superimpose’ किया गया और इससे ‘फेसिअल रिकंस्ट्रक्शन’ में मदद मिली। यहाँ तक कि इस मामले में फंडिंग और ‘मनी ट्रेल’ के लिए भी तकनीक का सहारा लिया गया। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में राज शेखर झा की रिपोर्ट में ये बातें सामने आई हैं।

इस मामले में ‘फण्ड फ्लो एनालिसिस’ के लिए भी तकनीक का सहारा लिया गया। आरोपितों द्वारा किए गए वित्तीय लेनदेन के पैटर्न की जाँच के लिए एक सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया। बता दें कि दिल्ली दंगों के दौरान रुपयों का खूब लेनदेन हुआ था औ दंगाइयों तक वित्तीय मदद पहुँचाई गई थी। वाहनों को जलाने से पहले दंगाइयों ने ‘इ-वाहन’ को मैसेज भेज के उसके मालिकों की पहचान जुटाई थी।

इसके लिए टेक्स मैसेजों की जाँच की गई। सरकारी डाटाबेस से उन नंबरों को जुटाया गया, जिनके द्वारा ‘इ-वाहन’ को टेक्स्ट मैसेज भेजे गए थे। दंगों के दिन भेजे गए इन मैसेजों का ब्यौरा जुटाया गया। क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम द्वारा अन्य दंगों की जाँच के लिए भी ये तरीका आजमाया जा रहा है। इसके अलावा ‘Geo-लोकेशन’ के जरिए गूगल मैप्स का इस्तेमाल कर आरोपितों के मूवमेंट के बारे में पुलिस ने सारी जानकारी जुटाई।

फ़रवरी 24 को शाम 5:50 बजे मार डाले गए राहुल सोलंकी का मामले में जियो-टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल काफी काम आया। सड़क पर लगे सीसीटीवी कैमरों, मीडिया कैमरों और फोन कैमरों से शूट किए गए 950 वीडियो फुटेज जुटाए गए, जिनमें ‘फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम’ का इस्तेमाल कर के 2655 आरोपितों की पहचान की गई। इसके लिए एनालिटिक्स टूल्स का भी इस्तेमाल किया गया। ये तकनीकें मृतकों की पहचान के लिए भी काम आई।

इन सबसे जो फोटोग्राफ्स मिले, उन्हें कई सारे डेटाबेस से मैच कराया गया। दिल्ली पुलिस क्रिमिनल डोजियर सहित अन्य सरकारी डेटाबेस से उन्हें मैच कराया गया। इससे 2655 आरोपितों की पहचान हुई और उनके खिलाफ सबूत होने के कारण उन पर कार्रवाई करने में आसानी हुई। मोबाइल फॉरेन्सिक्स और क्लोनिंग जैसी तकनीकों से आरोपितों के पास से जब्त मोबाइल फोन्स की जाँच की गई।

वीडियो और कॉल्स के रिकॉर्डेड ऑडियो के माध्यम से आरोपितों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करने में आसानी हुई। दिल्ली पुलिस कमिश्नर एसएन श्रीवास्तव ने TOI को बताया कि इस केस के ‘सब-जुडिस (न्यायलय में चल रहा)’ होने के कारण इससे जुड़ी जानकारियाँ साझा नहीं की जा सकतीं। हालाँकि, उन्होंने स्वीकारा कि दिल्ली पुलिस की जाँच काफी हद तक वैज्ञानिक और तकनीकी माध्यमों और तौर-तरीकों पर आधारित रही है।

ज्ञात हो कि हाल ही में सितम्बर 14 को उमर खालिद को दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया। आम आदमी पार्टी के पार्षद रहे ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों की चार्जशीट में मुख्य अभियुक्त बनाया गया है और उसने पूछताछ में कबूला भी है कि वो हिन्दुओं को सबक सिखाना चाहता था। साथ ही ‘पिंजड़ा तोड़’ जैसे संगठनों के कई ‘एक्टिविस्ट्स’ पर भी शिकंजा कसा गया।

‘जेल’ से लालू यादव रोज करते हैं बात, मँगाते हैं फोटो: RJD नेता का खुलासा, तेज प्रताप ने खुद दिया है आशीर्वाद

चारा घोटाला मामले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की राँची जेल में मौज है – ये खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि राजद के ही स्वघोषित विधायक प्रत्याशी ने किया है। गया के टेकारी विधानसभा के राजद नेता कमलेश शर्मा ने कहा है कि राँची में लालू यादव जब चाहते हैं, तब अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से फोन पर बात करते हैं और और प्रत्याशियों तक से भी लगातार संपर्क में रहते हैं।

कमलेश शर्मा जदयू छोड़ कर राजद में आए हैं और उनकी हनक ऐसी है कि तेज प्रताप यादव भी कह चुके हैं कि उनका आशीर्वाद कमलेश शर्मा के साथ है। उन्होंने दावा किया कि राजद सुप्रीमो लालू यादव उनसे रोज फोन पर बात करते हैं और चुनावी तैयारियों का जायजा लेते हैं। उन्होंने कहा कि लालू से उनकी रोज बात होती है। कमलेश गया में युवा जदयू के जिलाध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने 5 सितम्बर को ही राजद की सदस्यता ली है।

लालू यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने ही उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई थी। जदयू नेता अजय आलोक ने इस बयान को आधार बनाते हुए राजद पर हमला बोला और कहा कि लालू यादव राँची जेल में एक-दो नहीं बल्कि चार-चार मोबाइल फोन का प्रयोग करते हैं। सफाई में जहाँ राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कमलेश शर्मा को ‘राह चलता आदमी’ करार दिया, वहीं शक्ति सिंह यादव ने कहा कि अति-उत्साह में लोग कुछ भी बोल देते हैं।

जदयू नेता नीरज सिंह ने लालू को ‘420’ और आदतन अपराधी करार दिया। मंत्री नीरज ने कहा कि जिस व्यक्ति से उनकी बातचीत का मामला सामने आया है, वो एक बड़ा ठेकेदार है। उन्होंने दावा किया कि झारखण्ड की हेमंत सोरेन सरकार ने लालू यादव को जेल की जगह ‘ऐशगाह’ में रखा हुआ है, जहाँ उन्हें तमाम सुविधाएँ दी जा रही हैं। उन्होंने इसे हेमंत सरकार की निर्लज्जता की हद करार दिया।

वहीं अजय आलोक ने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में संज्ञान लेने की माँग की है। सफाई में शक्ति सिंह यादव ने कहा कि जब लालू यादव से बड़े-बड़े नेता नहीं मिल पा रहे हैं, ऐसे में कमलेश ऐसा कैसे बोल सकते हैं। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इसे लेकर राजनीति गरमा गई है। कमलेश शर्मा ने ये भी कहा कि फोन पर लालू यादव पार्टी कार्यक्रमों की तस्वीरें मँगाते रहते हैं, जो उन्हें भेजी जाती हैं।

बता दें कि लालू यादव को रिम्स से निदेशक के बंगले में शिफ्ट किया गया है और हेमंत सोरेन ने बताया है कि उनका स्वास्थ्य पहले से बेहतर है। नीरज कुमार ने आरोप लगाया था कि हेमंत सोरेन लालू के दर पर फ़रियाद लेकर गए थे। जहाँ लालू यादव रुके हुए हैं, वहाँ लगातार नेताओं का जमावड़ा लगा हुआ है और बिहार से टिकट के दावेदार एक-एक कर के पहुँच रहे हैं। हेमंत सोरेन ने उनसे मुलाकात के बाद बिहार में साथ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी।

एंबुलेंस ड्राइवर नौफल ने कोरोना संक्रमित लड़की का किया था रेप: पीड़िता ने लगाई फाँसी, गेट तोड़ बचाया गया

केरल के पतनमिट्टा से पिछले दिनों एक कोरोना पीड़िता के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी। अब खबर है कि उसी पीड़िता ने कोट्टयम के एक सरकारी मेडिकल कॉलेज में सुसाइड करने की कोशिश की है।

डेक्कन क्रॉनिकल की खबर के अनुसार, पीड़िता अपने आइसोलेशन वार्ड के बाथरूम में फँदे पर लटकने जा रही थी, तभी अस्पताल प्रशासन ने बाथरूम का गेट तोड़ कर उसे बचा लिया। फिलहाल लड़की की स्थिति स्थिर है और उसे निगरानी में रखा गया है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों केरल के पतनमतिट्टा जिले में कोरोना संक्रमित लड़की के साथ बलात्कार की घटना सामने आई थी। आरोपित की पहचान नौफ़ल नामक एक एंबुलेंस चालक के रूप में हुई थी। नौफ़ल ने घटना को अंजाम रविवार (6 सितंबर 2020) देर रात करीब 1 बजे दिया था। मामला उजागर होने के बाद पुलिस ने नौफ़ल की गिरफ्तारी की थी।

पड़ताल में मालूम हुआ था कि कोरोना संक्रमित के साथ बलात्कार करने वाला नौफ़ल अलाप्पुझा (Alappuzha) जिले का रहने वाला था और राज्य सरकार के 108 एंबुलेंस सर्विस विभाग से जुड़ा हुआ था।

20 वर्षीय लड़की के साथ बलात्कार की घटना उस वक्त हुई थी, जब उसे एंबुलेंस के जरिए पतनमतिट्टा से कोज़ेनचेरी स्थित कोविड स्वास्थ्य केंद्र ले जाया जा रहा था। ख़बरों के मुताबिक एंबुलेंस में दो मरीज थे। स्वास्थ्य अधिकारियों ने एक को कोज़ेनचेरी जिला अस्पताल लेकर जाने के लिए कहा और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र। इसके बाद नौफ़ल ने एक मरीज को जिला अस्पताल पहुँचाया और दूसरी को कोविड स्वास्थ्य केंद्र की तरफ लेकर गया।

कोविड स्वास्थ्य केंद्र जाने से पहले उसने एर्नामुला हवाई अड्डे के पास लड़की के साथ बलात्कार किया। पीड़िता ने स्वास्थ्य केंद्र पहुँचने के बाद वहाँ मौजूद कर्मचारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद कर्मचारियों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। उसी वक्त पीड़िता ने अपना बयान भी दर्ज कराया और पुलिस ने आरोपित एम्बुलेंस चालक नौफ़ल को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस को जाँच में पता चला कि आरोपित पर एक हत्या का मामला भी दर्ज है।

वहीं, पीड़िता के साथ हुई घटना की जानकारी होने के बाद उसे सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन मेंटल ट्रॉमा से गुजरने के कारण उसे काउंसलिंग की आवश्यकता थी इसलिए उसे कोट्टयम मेडिकल कॉलेज में भर्ती करवाना पड़ा, जहाँ स्थानीय मीडिया के अनुसार उसने हाल में फाँसी लगाने की कोशिश की।

AAP वाले संजय सिंह, TMC के डेरेक ओ ब्रायन सहित 8 सांसद एक सप्ताह के लिए सस्पेंड: वेंकैया नायडू

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने सदन में उपद्रव करने के लिए 8 सांसदों को 1 सप्ताह के लिए निलंबित कर दिया है। इस दौरान वो सदन की कार्यवाही में भी हिस्सा नहीं ले सकेंगे। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने जिन सांसदों को सस्पेंड किया, उसमें आम आदमी पार्टी के संजय सिंह और तृणमूल कॉन्ग्रेस के डेरेक ओब्रायन भी शामिल हैं। इन सभी ने रविवार (सितम्बर 20, 2020) को जबरदस्त उपद्रव किया था।

संजय सिंह और डेरेक ओब्रायन के अलावा राजू सातव, केके रागेश, रिपुन बोरा, डोला सेन, सैयद नज़ीर हुसैन और एलमरान करीम पर कार्रवाई करते हुए इन सभी को 1 सप्ताह के लिए सस्पेंड किया गया। इन सभी ने रविवार को सदन में महत्वपूर्ण कृषि बिलों के पास होने के दौरान जम कर हंगामा किया था। उपसभापति हरिवंश के सामने लगे माइक को भी तोड़ डाला गया था। साथ ही बिल की प्रति फाड़ कर चेयर की तरफ फेंका था।

राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने पूरी कार्यवाही की वीडयो फुटेज देख कर उपद्रवी सांसदों के व्यवहारों को देखा। जैसे ही सोमवार को राज्यसभा शुरू हुई, डिप्टी स्पीकर हरिवंश ने सभी सस्पेंड हुए सांसदों को सदन से बाहर जाने को कहा। वहीं सभापति नायडू ने कहा कि रविवार को राज्यसभा के लिए अत्यंत बुरा दिन था, जब कुछ सांसदों के व्यवहार ने निश्चित रूप से संसदीय मर्यादा और शिष्टाचार की सारी रेखाओं को पार कर दिया और सदन के सम्मान को नीचा दिखाया।

हालाँकि, सस्पेंड हुए सांसदों ने पहले तो सदन से निकलने से इनकार कर दिया, जिसके बाद 10 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले इन सांसदों पर कार्रवाई के लिए सदन में मोशन मूव किया गया। नायडू ने कहा कि कल डिप्टी स्पीकर को शारीरिक रूप से धमकाया गया और मार्शल अगर समय पर हस्तक्षेप नहीं करते तो उन्हें नुकसान भी पहुँचाया जा सकता था।

नायडू ने कहा कि बेंच पर चढ़ जाना, सदन में नाचने लगना और चेयर की तरफ रूल-बुक फेंकना सांसदों के लिए अशोभनीय व्यवहार है। उन्होंने कहा कि वो रविवार की कार्यवाही देखने के बाद क्षुब्ध हैं। उधर उल्टा डिप्टी स्पीकर के खिलाफ ही राज्यसभा में नो-कॉन्फिडेंस मोशन पेश कर दिया गया, जिसे ‘प्रॉपर फॉर्मेट’ में न होने के कारण सभापति वेंकैया नायडू द्वारा रिजेक्ट कर दिया गया। सदन में आज भी हंगामा जारी है।

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया। राजनाथ सिंह ने भी संसद में हुए हंगामे की कड़ी निंदा की। 

जावेद चिकना, साहेबजान, सैफ गिरफ्तार: दिल्ली में दोहरे हत्याकांड का पर्दाफाश, महिला की शादी इससे या उससे का मामला

दिल्ली में हुए एक दोहरे हत्याकांड की परत अब जाकर खुली है, जब पुलिस ने 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर के उनसे पूछताछ की। नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली जिले की पुलिस ने जावेद चिकना, साहेबजान और जहाँ सैफ अली को गिरफ्तार किया। 22 वर्षीय जहाँ सैफ अली दिल्ली के न्यू मुस्तफाबाद का रहने वाला है। तीनों ने बताया है कि दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर वो अजमेर, मेरठ और रुड़की में छिपते फिर रहे थे।

ये घटना शनिवार (सितम्बर 12, 2020) की है, जब मूँगा नगर स्थित संजय चौक पर बन्दूक से फायरिंग की सूचना दयालपुर थाने की पुलिस को फोन से मिली। पुलिस घटनास्थल पर जब एक इमारत की पहली मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में पहुँचे तो उन्होंने देखा कि जहाँ एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है, वहीं दूसरा गोली लगने से गंभीर रूप से घायल है। मृतक की पहचान मुस्तफाबाद के फ़ारूक़ अहमद के रूप में हुई थी।

इसके कुछ ही देर बाद नेहरू विहार की एक गली से फायरिंग की सूचना आई। जब पुलिस वहाँ पहुँची तो उसने पाया कि अब्दुल हमीद नामक व्यक्ति मृत पड़ा हुआ था। इन मामलों में दो एफआईआर दर्ज कर के पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जाँच के दौरान पुलिस ने आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए और सीसीटीवी फुटेजों को खँगाला। आरोपित जावेद चिकना और उसके एक साथी की पहचान होने के बाद पुलिस ने अपने मुखबिरों को मुस्तैद कर तलाश के लिए टीमें गठित की।

‘इंडिया टुडे’ की खबर के अनुसार, सितम्बर 19 को पुलिस को सूचना मिली कि तीनों आरोपित दिल्ली से किसी अनजान जगह पर छुपने जा रहे हैं। पुलिस को उनका कार नंबर भी मिल गया। पुलिस ने जाल बिछाया और तीनों आरोपित धरे गए। साथ ही उक्त कार को भी जब्त कर लिया गया। पूछताछ में तीनों आरोपितों ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने की बात कबूल की और व्यक्तिगत दुश्मनी को इसकी वजह बताया।

चिकना और साहेबजान की मृतकों से एक महिला की शादी को लेकर दुश्मनी हुई थी, जिसमें वो किसी और पक्ष का समर्थन कर रहे थे। साथ ही संपत्ति और वित्तीय विवाद भी थे, जिनके कारण तीनों ने इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। फज्जी सहित अन्य आरोपितों ने इस मामले में उसकी मदद की। दो ऑटोमेटिक पिस्टल और एक देशी रिवॉल्वर को जब्त किया है। एक आरोपित अभी भी फरार है, जिसे गिरफ्तार करने के लिए तलाश जारी है।

अयोध्या मस्जिद का नाम नहीं होगा बाबरी, मक्का के काबा शरीफ जैसा (वर्गाकार, गुंबद या मीनारें नहीं) संभव: ट्रस्ट

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अयोध्या के धन्नीपुर गाँव में यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली जमीन पर बनने जा रही मस्जिद आम मस्जिदों जैसी नहीं होगी। इसका नाम किसी भी राजा या शासक के नाम पर नहीं होगा और इसकी बनावट भी अन्य मस्जिदों से एकदम अलग हो सकती है। कहा जा रहा है कि इसकी बनावट मक्का में स्थित काबा शरीफ जैसी हो सकती है यानी वर्गाकार।

इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के सचिव एवं प्रवक्ता अतहर हुसैन ने रविवार को पीटीआई को बताया कि धन्नीपुर गाँव में 15,000 वर्ग फीट की मस्जिद बनाई जाएगी। इसका क्षेत्रफल बाबरी मस्जिद जितना होगा। मगर, इसका आकार बाकी मस्जिदों से एकदम भिन्न होगा। यह मक्का में स्थित काबा शरीफ की तरह चौकोर हो सकता है जैसा कि मस्जिद के लिए नियुक्त किए गए आर्किटेक्ट एसएम अख्तर ने इशारा भी दिया है।

इस सवाल के जवाब में कि मस्जिद में गुंबद या मीनारें नहीं होंगी जैसे काबा शरीफ में नहीं हैं? उन्होंने कहा कि हाँ ऐसा हो सकता है। इसकी संभावनाएँ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में वास्तुशास्त्री को खुली छूट दी गई है कि वह अपने हिसाब से काम करें। हुसैन के मुताबिक, “मस्जिद का नाम बाबरी मस्जिद नहीं होगा। यह किसी राजा या शासक के नाम पर भी नहीं होगा। उनकी निजी राय में इसे धन्नीपुर मस्जिद बुलाया जाना चाहिए।”

उन्होंने जानकारी दी कि ट्रस्ट इसके लिए पोर्टल बना रहा है ताकि लोग मस्जिद, म्यूजियम, अस्पताल, रिसर्च सेंटर के लिए डोनेट कर सकें, जिन्हें परिसर के अंदर बनाना है। इस पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्कॉलर के लेख भी नजर आया करेंगे। हुसैन की मानें तो पोर्टल पर अभी कुछ काम पूरा होना बाकी है, इसलिए, दान शुरू नहीं हुआ है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 5 एकड़ के भूखंड पर मस्जिद के निर्माण के लिए एक ट्रस्ट, IICF का गठन किया है। राज्य सरकार ने यह भूखंड सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर दिया है। दशकों से चले आ रहे विवाद पर पिछले साल 9 नवंबर को फैसला आया था। कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को राम मंदिर का निर्माण कराने और मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या के ही किसी प्रमुख स्थान पर 5 एकड़ जमीन आवंटित करने का आदेश दिया था।

‘अनुराग की उपस्थिति में पूरी सुरक्षित, हमेशा खुश रहती हूँ’ – तापसी के बाद अब राधिका भी कश्यप के बचाव में

बॉलीवुड में 20 से भी अधिक फ़िल्में निर्देशित कर चुके अनुराग कश्यप पर अभिनेत्री पायल घोष ने यौन शोषण के आरोप लगाए थे, जिसके बाद फिल्म निर्देशक ने कहा था कि उन्हें फँसाया जा रहा है। अब उन्होंने अपने वकील प्रियंका खिमानी के जरिए बयान जारी किया है। प्रियंका ‘वीमेन इन म्यूजिक’ की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने अपने बयान में कहा है कि उनके क्लाइंट अनुराग कश्यप के खिलाफ यौन दुर्व्यवहार के जो ‘झूठे आरोप’ लगे हैं, उससे वो काफी दर्द में हैं।

प्रियंका का कहना है कि यौन शोषण के ये आरोप पूरी तरह गलत, दुर्भावनापूर्ण और बेईमानी भरे हैं। उन्होंने कहा कि ‘Me Too’ जैसे एक महत्वपूर्ण सामाजिक अभियान का निहित स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे किसी के ‘कैरेक्टर एसेसिनेशन’ का माध्यम बनाया जा रहा है। प्रियंका ने इसे ‘मनगढ़ंत आरोप’ बताते हुए दावा किया कि इससे ‘Me Too’ अभियान कमजोर होता है। ये बयान सोमवार (सितम्बर 21, 2020) को जारी किया गया।

साथ ही अनुराग कश्यप की वकील प्रियंका ने कहा कि यौन शोषण के इस तरह के आरोपों का अर्थ हुआ कि असली पीड़ितों के दर्द और जख्म का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि उनके क्लाइंट को क़ानून के हिसाब से आगे बढ़ने का पूरा अधिकार है और वो इस दिशा में जाएँगे। अनुराग कश्यप ने प्रियंका का बयान शेयर करते हुए लिखा कि ये उनके वकील का बयान है, उनकी तरफ से।

इससे पहले अनुराग कश्यप ने कहा था कि अभी बहुत से आक्रमण होने वाले हैं और उन्हें पता है कि और कहाँ-कहाँ से तीर छोड़े जाने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार फोन आ रहे हैं और चुप रहने के लिए कहा जा रहा है। बकौल अनुराग कश्यप, उन्हें ऐसे और आरोपों का इन्तजार है। पत्रकार विनोद कापड़ी से लेकर फिल्म निर्देशक अविनाश दास ने भी अनुराग कश्यप का समर्थन किया है।

उधर अभिनेत्री तापसी पन्नू के बाद अब राधिका आप्टे भी अनुराग कश्यप के समर्थन में उतर गई हैं। आप्टे ने इंस्टाग्राम और अनुराग कश्यप के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि वो उनके सबसे करीबी मित्रों में से एक हैं और उन्होंने हमेशा उन्हें प्रेरित किया है, उनका समर्थन किया है। आप्टे ने लिखा, “आपने हमेशा मेरे साथ बराबरी का व्यवहार किया है और हम दोनों के बीच जो प्यार और सम्मान है, उससे मैं हमेशा खुश रहती हूँ।”

राधिका आप्टे ने किया अनुराग कश्यप का समर्थन

राधिका आप्टे ने लिखा कि वो हमेशा से अनुराग कश्यप की उपस्थिति में पूरी तरह से सुरक्षित महसूस करती हैं और वो हमेशा उनके सबसे ज्यादा विश्वासपात्र मित्र रहेंगे। वहीं अनुराग कश्यप की पूर्व पत्नी आरती बजाज ने भी इंस्टाग्राम के जरिए अनुराग कश्यप को ‘रॉकस्टार’ बताते हुए आरोपों को ‘सस्ता स्टंट’ करार दिया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर लोग लगातार बॉलीवुड सेलेब्स के दोहरे रवैये पर सवाल उठा रहे हैं।

गौरतलब है कि पायल घोष ने कहा था, “मैं अनुराग से बात करने के अगले दिन उनसे मिलने गई। वह शराब पी रहा था। मिलने के बाद वह मुझे दूसरे कमरे में ले गया। वहाँ उसने अपनी ज़िप खोली और मेरी सलवार कमीज खोलकर मेरी योनि (vagina) के अंदर अपने c**k (penis) को जबरदस्ती डालने की कोशिश की।” अब वो अनुराग कश्यप के खिलाफ मुंबई में शिकायत दर्ज कराएँगी।

केवल इसी को बेचो या अपनी मर्जी से कहीं भी बेचो… किसान के लिए क्या बेहतर?

कभी ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टर-कम्पाउण्डर या झोला छाप डॉक्टर का ही, दवाइयों वाला थैला खुलते हुए देखा है? ये बैग काफी भरा हुआ सा होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ग्रामीण इलाकों में दवाइयाँ मिलनी मुश्किल होती हैं।

इस वजह से डॉक्टर कई जरूरी दवाएँ साथ ही लिए चलते हैं। चूँकि झोला इतना भरा हुआ होता है, इसलिए एक दवा ढूँढनी हो तो पूरा थैला ही खाली करना पड़ता है! ऐसा होते ही आपको दिखेगा कि थैले में 1-2 लाइफबॉय साबुन की टिकिया भी रखी है। आप सोचेंगे कि शायद ये हायजिन मेन्टेन करने के लिए डॉक्टर ने हाथ धोने का साबुन रखा हुआ है।

ऐसा बिलकुल नहीं है। ये एक दवाई के तौर पर ही रखी हुई है। ग्रामीण इलाकों में आत्महत्या का सबसे आसान तरीका कीटनाशक पी लेना होता है। घर से रेल की पटरी पता नहीं कितनी दूर होगी, झोपड़ी में फूस का छप्पर इतना ऊँचा ही नहीं होता कि लटका जा सके, तैरना पहले ही आता है तो डूबना भी मुश्किल है, लेकिन कृषि आधारित काम करने वालों के पास सल्फास से लेकर तरल कीटनाशकों के डब्बे मौजूद होना कोई बड़ी बात नहीं।

किसी के ऐसे जहर खा-पी लेने पर सबसे पहले उसे उल्टी करवाकर उसके पेट से जहर को बाहर निकालने की कोशिश की जाती है। इसके लिए नए लाइफबॉय साबुन को पानी में थोड़ा घोलकर पिला दिया जाता है।

जब कोई और तरीका ना सूझे तो नए लाइफबॉय को पानी में घोलकर पिला देना उल्टी करवाने का सबसे आसान तरीका होता है। अक्सर ऐसा करने पर प्राइमरी हेल्थ सेंटर या अस्पताल तक ले जाने का वक्त मिल जाता है।

अब आप सोच रहे होंगे कि क्या कीटनाशक से इतनी मौतें होती हैं, जो ग्रामीण क्षेत्रों के डॉक्टर उसका इंतजाम पास ही रखते होंगे? तो विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यू.एच.ओ.) के मुताबिक 900000 से अधिक मौतें विश्व भर में आत्महत्या से होती हैं। इसमें से 250000 से 300000 मौतें सिर्फ कीटनाशक वाले जहर से होती हैं। इसमें से भी ज्यादातर मौतें एशियाई देशों, जिनमें चीन, मलेशिया और श्रीलंका भी शामिल हैं, में होती हैं।

हाल ही में जब एनसीआरबी ने किसानों की आत्महत्या का 2019 का आँकड़ा पेश किया तो पता चला कि गत वर्ष 10281 किसानों ने आत्महत्या की है। ये आँकड़े पिछले 25 वर्षों में सबसे कम हैं। सन 1995 से, जबसे ये आँकड़े मौजूद हैं, उसके आधार पर देखें तो 2015 के बाद से इनमें लगातार कमी आती जा रही है।

जाहिर है कुछ लोगों को ये हजम नहीं होता। अपनी आदत के मुताबिक, जब आँकड़े नहीं होते तो वो कहेंगे कि आँकड़े छुपाए जा रहे हैं, और जब आ जाते हैं तो सवाल करेंगे कि क्या इन पर भरोसा किया जाए?

जब इन आँकड़ो को भी गौर से देखा जाए तो पता चलता है कि गरीबी या कर्ज की वजह से कम ही किसान आत्महत्या कर रहे हैं। अधिकांश में आत्महत्या का कारण “अन्य वजहें” नजर आती हैं।

गौरतलब है कि किसानों में दो किस्म के लोग आते हैं। एक तो वो हैं, जो खुद के खेतों में खेती करते हैं, और दूसरे वो जो खेतों में मजदूरी करते हैं। अब अगर आँकड़ों को देखा जाए तो ये पता चलता है कि अपनी जमीन पर खेती करने वालों की आत्महत्या की दर कम नहीं हुई है।

एक तथ्य ये भी है कि 19 राज्य ऐसे हैं, जो किसानों की आत्महत्या के कोई आँकड़े नहीं दे रहे। अब अगर ये देखा जाए कि किसानों की आत्महत्या का कारण क्या है, तो 2015 में उस वक्त के कृषि मंत्री ने कहा था कि कई बार किसान प्रेम संबंधों या नपुंसकता के कारण भी आत्महत्या करते हैं। इस बयान पर अच्छा ख़ासा बवाल भी हुआ था।

ये सब हमें वापस इस बात पर ले आता है कि अगर स्थिति ऐसी है तो क्या कृषि क्षेत्र में सुधारों की जरूरत नहीं है? जिनकी याददाश्त अच्छी होगी, उन्हें इस मुद्दे पर राहुल गाँधी का अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ जाना भी याद होगा।

जाहिर है कृषि क्षेत्रों में सुधार बहुप्रतीक्षित थे। किसान अपनी फसल केवल खुदरा ही कहीं और बेच सकता था, थोक में उसे लाइसेंस-परमिट धारकों के पास ही जाना पड़ता था, उस किसान को इस लाइसेंस-परमिट राज से मुक्त किया जाना आवश्यक था।

अब जब ये कदम उठाया जा रहा है तो तरह-तरह के जुमलों से किसानों को बरगलाने की कोशिश की जा रही है। एमएसपी जो कि अभी भी लागू है, उसके ख़त्म किए जाने का डर बनाया जा रहा है। इस समय ये लोग बताना भूल जाते हैं कि एमएसपी पर खरीदने के बाद भी सरकारें लम्बे समय तक भुगतान नहीं करतीं। इसके लिए भी यदा-कदा धरने-प्रदर्शन की ख़बरें आ ही जाती हैं।

बाकी अब जब लाइसेंस-परमिट राज को कृषि उत्पादों के थोक बाजार से ख़त्म कर दिया गया है, तब बदलाव आने में कितनी देर लगेगी, वो देखने लायक होगा। कुछ वर्षों बाद कृषक की आय दोगुनी हुई है या नहीं, ये तो सरकार की रिपोर्ट कार्ड पर चढ़ेगा ही!

राज्यसभा में हंगामे पर घिरे AAP के संजय सिंह, राजनाथ ने कहा- दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक

राज्यसभा ने ध्वनिमत से रविवार को कृषि बिलों को पास कर दिया। लेकिन उससे पहले विपक्षी सांसदों ने जमकर हंगामा किया। इसका एक वीडियो सामने आने के बाद से आप (AAP) के सांसद संजय सिंह की सोशल मीडिया में आलोचना हो रही है। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि राज्यसभा में जो कुछ भी हुआ वह दुखद, शर्मनाक और दुर्भाग्यपूर्ण था।

बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “संसद में मार्शल का गला दबाकर मारते संजय सिंह। बाद में घूँसों से मार्शल पर हमला किया।”

एक यूजर प्रशांत पटेल उमराव ने ट्वीट कर कहा है, “संजय सिंह ने राज्यसभा में मार्शल का गला दबाया और घूँसों से मार्शल पर हमला किया। माइक तोड़ना, बिल की कॉपी फाड़ना और सभापति की टेबल पर अभद्रता करके डेरेक ओ ब्रायन व संजय ने अपनी पुरानी आदतों का परिचय दिया है। इनका यह कृत्य किसी भी प्रकार से विद्वत राज्यसभा के अनुकूल नहीं है।”

बता दें कि राज्यसभा में बिल का विरोध करते हुए विपक्षी सांसद वेल तक पहुँच गए थे। कोविड-19 के खतरे को भुलाते हुए धक्‍का-मुक्‍की भी हुई। तृणमूल कॉन्ग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने उप सभापति के सामने रूल बुक फाड़ने की कोशिश की। इस दौरान ब्रायन उप सभापति हरिवंश के बिल्कुल ही करीब पहुँच गए। वहाँ खड़े मार्शल ने बड़ी ही मुश्किल से उन्हें हटाया।

राजनाथ सिंह ने संसद में हुए हंगामे की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा, “आज राज्यसभा में जो हुआ वह दुखद, दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक था। सदन में चर्चा की जिम्मेदारी सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी होती है, लेकिन विपक्ष का यह भी कर्तव्य है कि वह अनुशासन बनाए रखे।”

राजनाथ ने कहा, “लोकसभा या राज्यसभा के इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ है। राज्यसभा में ऐसा होना और भी बड़ा मामला है।” उन्होंने विपक्षी दलों पर आरोप लगाते हुए कहा,”अफवाहों के आधार पर किसानों को गुमराह करने का प्रयास किया जा रहा है। सदन में जो हुआ, वह उसकी गरिमा के खिलाफ था।”

दूसरी ओर आम आदमी पार्टी ने अपने हैंडल से एक वीडियो ट्वीट कर लिखा है, “भाजपा के किसान विरोधी काले कानून के खिलाफ सबसे आगे रहकर पूरे दम के साथ किसानों की आवाज बने सांसद संजय सिंह। सड़क से लेकर संसद तक देश के किसानों की आवाज उठाएँगे। संघर्ष जारी रहेगा।”