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ठेले पर बेचना पड़ा समोसा-चाट तो सुहैल और शोएब ने दरगाह के पास ऑफिस वाले बाबू को मारी गोली

बेंगलुरु में केआर पुरम पुलिस ने शनिवार (अगस्त 22, 2020) रात एक उद्योगपति पर गोली चलाने वाले दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। इनकी पहचान मोहम्मद सुहैल पाशा (23) और शोएब (19) के रूप में हुई। इन पर आरोप है कि इन्होंने बाबू नाम के व्यक्ति पर देशी कट्टे से गोली दागी और धारधार हथियार से उन पर हमला बोला।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने इन दोनों की गिरफ्तारी के बाद हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद कर लिए हैं। इसके साथ ही इनके पास से एक कार भी मिली है। दोनों केआर पुरम के रहने वाले हैं। उद्योगपति से विवाद के बाद इन्होंने उस पर हमला बोला था।

पुलिस ने बताया कि सुहैल और उसका साथी मिर्जा केआर पुरम में दरगाह के पास अरुधंती कॉलनी में समोसे चाट चाय की दुकान चलाते थे। वहीं बाबू का पास में ऑफिस था। एक दिन इन दोनों ने बहुत देर तक अपनी दुकान खोले रखी और ग्राहकों के वाहनों के कारण बाबू के दफ्तर का रास्ता ब्लाक हो गया। जिससे उसे गुस्सा आया और उसकी मिर्जा से बहस हो गई। इस बीच पुलिस ने दोनों पक्षों को झगड़ा न करने की सलाह दी और चेतावनी देकर छोड़ दिया।

बाबू ने इस बहस के बाद बिल्डिंग के मालिक को शिकायत की, जिसकी वजह से मिर्जा के व्यवसाय पर फर्क पड़ा। दोनों से वह दुकान खाली करवा दी गई और सुहैल को फुटपाथ पर ठेला में चाट समोसे बेचने पड़े। बाबू ने यह देखकर उनका मजाक भी उड़ाया। इसके कारण फिर दोनों पक्षों में जोरदार झगड़ा हुए।

अब सोहेल ने मिर्जा के साथ मिलकर बदला लेने का प्लान बनाया। सुहैल ने अपने साथी शोएब के साथ पूरे प्लान तैयार किया और मौका देखते ही शनिवार रात बाबू पर हमला बोल दिया। घटना में बाबू का बायां हाथ जख्मी हो गया। बाद में उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। अब उनकी स्थिति खतरे से बाहर है।

दोनों की गिरफ्तारी चामराजनगर जिले के कोल्लेगल के पास एक गाँव से हुई। पुलिस अब पूरे मामले में मिर्जा की खोजबीन करने में लगी हुई है। इसके साथ ही ये भी पता लगाया जा रहा है कि क्या इस हमले में कोई और भी शामिल था और साथ ही ये जानने की कोशिश हो रही है कि आरोपितों ने बंदूक का इंतजाम कहाँ से किया।

दूसरे राज्यों से आए नेताओं से नहीं मिलते हैं सोनिया-राहुल: लाल बहादुर शास्त्री के बेटे ने कहा- प्रियंका बनें अध्यक्ष

कॉन्ग्रेस में बढ़ती कलह के बीच अब पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिवंगत प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के बेटे अनिल शास्त्री ने अपनी बात रखते हुए कहा है कि पार्टी नेतृत्व में कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी पार्टी नेताओं से नहीं मिलते हैं। उन्होंने सलाह दी कि अगर सोनिया-राहुल नेताओं से मिलना-जुलना शुरू कर दें तो आधी समस्या अपने-आप हल हो जाएगी। अनिल शास्त्री कॉन्ग्रेस के हिंदी विभाग के अध्यक्ष हैं।

हालाँकि, उन्होंने ये भी कहा कि प्रियंका गाँधी या राहुल गाँधी में से किसी एक को पार्टी अध्यक्ष बनना चाहिए। उन्होंने गाँधी परिवार से ही किसी को अध्यक्ष बनाए जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि कुछ चीजें हैं, जो पार्टी नेतृत्व में कमी की ओर इशारा करती है और नेताओं के बीच बैठकें ही नहीं होती हैं। उन्होंने कहा कि जब दूसरे राज्यों से कोई नेता दिल्ली आता है, तो राहुल-सोनिया से उनका मिलना मुश्किल हो जाता है।

अनिल शास्त्री का बयान ऐसे समय में आया है, जब वर्किंग कमिटी की बैठक में सोनिया गाँधी के अध्यक्ष बने रहने का फैसला किया गया और कॉन्ग्रेस का अधिवेशन होने तक उनकी मदद के लिए नेताओं की एक टीम गठित करने की बात कही गई। बैठक में उन नेताओं के प्रति नाराजगी जताई गई, जिन्होंने पत्र लिख कर पार्टी में सुधार की माँग की थी। कॉन्ग्रेस अधिवेशन में राहुल गाँधी के फिर से अध्यक्ष बनने की बात तय मानी जा रही है।

अनिल शास्त्री दिल्ली, बरेली, इंदौर और प्रयागराज में लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर स्थापित शिक्षण संस्थानों के अध्यक्ष हैं। वो काफी समय से राजनीति में सक्रिय हैं। 1989 में उन्होंने वाराणसी से लोकसभा का चुनाव जीता था, जिसके बाद वो केंद्रीय मंत्री भी बने थे। उन्होंने कहा है कि कॉन्ग्रेस में एक सिंडिकेट उभर रहा है, ऐसे में प्रियंका गाँधी को अध्यक्ष बनाना सबसे अच्छा विकल्प हो सकता है।

उन्होंने कहा कि प्रियंका गाँधी की पूरे कॉन्ग्रेस कैडर में गजब की स्वीकार्यता है और वो पहले ही साबित कर चुकी हैं कि वो एक परिपक्व नेता हैं। उन्होंने 23 नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि पत्र लिख कर उसे सार्वजनिक करना मतलब पार्टी को मजबूत करना नहीं है। उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी की वापसी से डरे लोग उन्हें रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गाँधी परिवार के बिना कॉन्ग्रेस अस्तित्व में ही नहीं रहेगी।

कॉन्ग्रेस में कलह पर अनिल शास्त्री ने रखी अपनी बात

ज्ञात हो कि बगावत के ये तेवर जो आज दिख रहे हैं, इसकी नींव 5 महीने पहले ही पड़ गई थी। कॉन्ग्रेस में रिफॉर्म की माँग के लिए एजेंडा शशि थरूर द्वारा आयोजित एक डिनर पार्टी में ही तैयार कर लिया गया था, जिसमें कई कॉन्ग्रेस नेता शामिल हुए थे। इसका ही परिणाम सोनिया गाँधी को पत्र भेजे जाने के रूप में सामने आया। थरूर के डिनर में इस बात पर चर्चा हुई थी कि पार्टी का जीर्णोद्धार कैसे किया जाए और इसकी सेक्युलर विचारधारा की तरफ कैसे लौटा जाए। 

चायनीज लोगों और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ POK में विरोध प्रदर्शन: लगे ‘हमें जिंदा रहने दो’ जैसे नारे

चीन और पाकिस्तान का बढ़ता याराना अब प्रकृति पर खतरा बन रहा है। यही कारण है कि POK के मुजफ्फराबाद में लगातार प्राकृतिक धरोहर को बचाने के लिए लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और खुलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में सोमवार (अगस्त 24, 2020) को भी वहाँ की सड़कों पर लोगों में गुस्सा देखने को मिला।

नीलम-झेलम नदी पर विशाल बाँध निर्माण को रुकवाने के लिए ‘दरिया बचाओ, मुजफ्फराबाद बचाओ’ (सेव रिवर, सेव मुजफ्फराबाद) कमिटी के प्रदर्शनकारियों ने ‘नीलम-झेलम बहने दो , हमें जिंदा रहने दो’ जैसे नारे लगाए। इस प्रदर्शन में सैंकड़ों लोग शामिल हुए। मुजफ्फराबाद को छोड़ दें, तो POK के अन्य शहरों से भी इस प्रदर्शन में काफी लोग थे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान ने भारत के डर से चीन को POK के कुछ हिस्से दे रखे हैं और वहाँ के खनिज संसाधनों को भी चीन के हवाले कर दिया है, जो POK का जम कर दोहन तो कर ही रहा है, साथ ही वहाँ कई सारे प्रोजेक्ट्स भी चला रहा है। इससे स्थानीय लोगों मे आक्रोश का माहौल है। 

अभी हाल में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आज़ाद पट्टन और कोहाला हाइड्रोपावर कंपनी ने निर्माण के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के हिस्से के रूप में 700.7 मेगावाट बिजली की आजाद पट्टन हाइड्रो प्रॉजेक्ट पर 6 जुलाई, 2020 को हस्ताक्षर किए गए थे।

जानकारी के अनुसार, ये 1.54 बिलियन डॉलर की परियोजनाएँ चीनी जियोझाबा कंपनी द्वारा प्रायोजित की जाएँगी और कोहारला हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट जो झेलम नदी पर बनाया जाएगा, वह पीओके के सुधनोटी जिले में आज़ाद पट्टन पुल से लगभग 7 किमी और पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 90 किमी दूर है।

कहा जा रहा है कि ये परियोजना साल 2026 तक पूरी होगी। जिसके बाद देश में बिजली सस्ती हो पाएगी। लेकिन वहाँ स्थानीय लोग इस समझौते के सख्त ख़िलाफ़ हैं। वह वहाँ पर चीनियों की उपस्थिति, बांधों के बड़े पैमाने पर निर्माण और नदियों के बहाव मोड़ने से उनके अस्तित्व पर पड़ रहे खतरे को लेकर खासा नाराज हैं।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि चीन और पाकिस्तान मिलकर पीओके और गिलगित बाल्टिस्टान के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ताओं में इसे लेकर अक्सर रोष देखने को मिलता है।

याद दिला दें कि ये विरोध प्रदर्शन पहली बार देखने को नहीं मिला है। इससे पहले भी मुजफ्फराबाद की जमीन पर ऐसे विरोध हुए हैं। 6 जुलाई को ऐसा ही नजारा क्षेत्र में देखने को मिला था। दरअसल, तब भी लोगों का यही आरोप था कि चीन द्वारा बनाए जा रहे बाँधों से वहाँ के वातावरण पर भी काफ़ी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण पर्यावरण संबंधी कई समस्याओं के खड़े होने की आशंका है। इसके बाद 13 अगस्त को एक बार फिर ऐसा ही माहौल मुजफ्फराबाद में फिर बना। तब भी लोगों ने विरोध करके अपना गुस्सा जाहिर किया था और जमकर नारेबाजी की थी।

हीर खान ने YouTube वीडियो में हिन्दुओं को बताया मा$रचो#: अयोध्या को कहा ₹#डीखाना, माता सीता के लिए बहुत गंदा शब्द

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो शेयर किया है, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई हैं। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की है।

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”

उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछाड़ लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।”

यूट्यूब पर अपलोड किए गए इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया में जबरदस्त आक्रोश का माहौल है। हीर खान ने अपनी बदजुबानी जारी रखते हुए आगे कहा, “सेकुलरिज्म की माँ का भों#ड़ा, भाईचारा निभाने वालों की माँ का भों#ड़ा। साथ में उनकी भी माँ का भों#ड़ा जो कहते हैं कि भगवानों को गाली मत दो। उनकी भी माँ-बहनों को $#द डालेंगे। सीता, दुर्गा और काली – सबको कोठे पर बिठा कर चु#$ डालेंगे।”

लखनऊ पुलिस कमिश्नर के ट्विटर हैंडल ने सूचना दी है कि उक्त मामले में साइबर सेल को आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देश दे दिया गया है। अपनी हर वीडियो में ज़हर उगलने वाली हीर खान ने उस वीडियो में कहा है, “वो नाजायज थी और मात्र 6 साल की थी, जब रावण ने उसका ख़ून निकाल दिया था। जितने भी सेक्युलर पत्रकार हैं, तेरी माँ का भों#ड़ा। तुमलोग सोच रहे थे कि तुम इस्लाम को गाली दोगे और हम सुनते रहेंगे?”

महिला ने लगातार माँ सीता और माँ दुर्गा के लिए अपशब्द कहे। साथ ही उसने ये भी धमकी दी कि जिसे मन हो, वो जाकर एफआईआर करा दे। हीर खान के इस यूट्यब चैनल पर कई वीडियो हैं। वो वहाँ जनवरी 2020 से वीडियो डाल रही है। उसका कहना है कि उसका पुराना यूट्यूब चैनल डिलीट हो गया है। कुछ वीडियो में तो वो पाकिस्तानी आतंकी मसूद अज़हर के लिए भी अपने ‘प्यार’ का प्रदर्शन करती रहती है।

पत्रकार की गोली मार कर हत्या: UP पुलिस ने गिरफ्तार किए 6 आरोपित, SHO सस्पेंड, आपसी रंजिश का मामला

उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के फेफना थाना क्षेत्र में सोमवार (अगस्त 24, 2020) की देर शाम आपसी रंजिश और जमीन विवाद के कारण रतन सिंह नाम के व्यक्ति (42) को गोली मार दी गई। रतन सिंह पेशे से पत्रकार थे और एक हिंदी न्यूज चैनल में काम करते थे।

घटना को उस समय (करीब 8:45 बजे) अंजाम दिया गया, जब वह अपने मित्र के घर से लौट रहे थे। बदमाशों को देखकर उन्होंने प्रधान के घर में जाकर अपनी जान बचाने का भी प्रयास किया। लेकिन बदमाशों ने तब भी दौड़कर उनके सिर में गोली मार दी, जिसके कारण मौके पर ही पत्रकार रतन सिंह ने दम तोड़ दिया।

घटना के बाद बलिया पुलिस ने फेफना के प्रभारी निरीक्षक शशिमौलि पांडेय को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा इस मामले में 10 नामजद आरोपितों में से 6 आरोपितों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। इनमें से चार की पहचान दिनेश सिंह, अरविंद सिंह, सुनील सिंह और मोती सिंह के रूप में हुई है।

उधर, प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी मामले को संज्ञान में लेते हुए परिवार के साथ अपनी संवेदनाएँ प्रकट की हैं। उन्होंने रतन लाल के परिवार को 10 लाख रुपए देकर मदद करने की घोषणा की है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि हर मुमकिन कार्रवाई आरोपितों के ख़िलाफ़ की जाए।

जानकारी के मुताबिक, सारा मामला पिछले साल 26 दिसंबर को शुरू हुआ था, जब दोनों पक्षों में मारपीट हुई थी। पुलिस का कहना है कि लड़ाई के बाद दोनों ही पक्षों ने एक दूसरे के ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन रतन सिंह पर मुकदमा दर्ज मुकदमा गलत पाया गया था।

वहीं, रतन सिंह की हत्या में 5 अभियुक्त उन्हीं लोगों में से हैं, जिनके ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज हुई थी। इसलिए इस मामले में प्रभावी कार्रवाई न करने पर प्रभारी निरिक्षक को निलंबित कर दिया गया है।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 साल पहले इनके भाई की भी हत्या हो चुकी है। परिजनों का दावा है कि उन्होंने इससे पहले 10 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाई थी।

गौरतलब है कि इससे पहले यूपी के गाजियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी हत्याकांड हुआ था। जहाँ देर रात अपने घर लौट रहे पत्रकार को गोली मारी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 9 आरोपितों को गिरफ्तार किया था। जिनमें तीन मुख्य आरोपित थे और 6 उनके साथी थे।

इस मामले में घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था, जिसमें दिख रहा था कि पहले तो पत्रकार के साथ मारपीट की गई, उसके बाद गोली मारी गई। इस मामले में भी लापरवाही के लिए सम्बंधित चौकी इंचार्ज को लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया था।

कॉन्ग्रेस में बगावत के पीछे थरूर की डिनर पार्टी: 5 महीने पहले ही बन गई थी योजना, राज्यसभा का एंगल भी आया सामने

कॉन्ग्रेस के 23 नेताओं ने पत्र लिख कर पार्टी के प्रथम परिवार को असहज कर दिया था। अब पता चला है कि बगावत के ये तेवर जो आज दिख रहे हैं, इसकी नींव 5 महीने पहले ही पड़ गई थी। कॉन्ग्रेस में रिफॉर्म की माँग के लिए एजेंडा शशि थरूर द्वारा आयोजित एक डिनर पार्टी में ही तैयार कर लिया गया था, जिसमें कई कॉन्ग्रेस नेता शामिल हुए थे। इसका ही परिणाम सोनिया गाँधी को पत्र भेजे जाने के रूप में सामने आया।

हालाँकि, थरूर की पार्टी में ऐसे कई नेता भी थे, जिन्होंने गाँधी परिवार के प्रति वफादारी दिखाने के लिए पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किया था। उनमें पी चिदंबरम, उनके बेटे कार्ति चिदंबरम, सचिन पायलट और मणिशंकर अय्यर शामिल थे। अभिषेक मनु सिंघवी ने बताया कि वो डिनर में उपस्थित थे, जिसके लिए उन्हें एक दिन पहले ही आमंत्रित किया गया था। उस दौरान पार्टी में रिफॉर्म्स को लेकर चर्चा होने की बात भी उन्होंने कबूली है।

ये सब ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ में हरिंदर बावेजा की एक रिपोर्ट में सामने आया है। सिंघवी ने HT को बताया कि पत्र लिखे जाने के बारे में उन्हें कुछ भी पता नहीं था। जबकि चिदंबरम ने पार्टी के मामलों पर बात करने से इनकार कर दिया। सचिन पायलट ने तो पिछले ही महीने राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत की थी। वो भी टिप्पणी करने से बचते नज़र आए। वही मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उन्हें पत्र पर साइन करने कहा ही नहीं गया था, इसीलिए उन्होंने ऐसा नहीं किया।

मणिशंकर अय्यर ने कहा कि उनसे इसके लिए किसी ने संपर्क ही नहीं किया था। उन्होंने बताया कि शशि थरूर के डिनर में इस बात पर चर्चा हुई थी कि पार्टी का जीर्णोद्धार कैसे किया जाए और इसकी सेक्युलर विचारधारा की तरफ कैसे लौटा जाए। उन्होंने कहा कि उसी दौरान पत्र लिखने पर बात हुई थी और किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया था। उन्होंने कहा कि डिनर के बाद उनसे किसी ने संपर्क ही नहीं किया।

सोमवार (अगस्त 24, 2020) को हुई बैठक में इस पत्र को लेकर चर्चा हुई, जिसमें राहुल गाँधी द्वारा इन नेताओं पर तल्ख़ टिप्पणी करने की बातें सामने आईं, जिसे बाद में नकार दिया गया। एक अन्य नेता ने बताया कि वो शशि थरूर के डिनर में उपस्थित थे और उन्होंने पत्र पर हस्ताक्षर भी किया, क्योंकि पार्टी में बड़ी सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ये मुद्दों की लड़ाई है, व्यक्तित्वों की नहीं।

साथ ही उक्त नेता ने गाँधी परिवार को सलाह दी कि वो सन्देश को समझने की बजाए सन्देश देने वालों पर निशाना साधने से बचें। बता दें कि 1999 में शरद पवार के बाद से पार्टी में सोनिया गाँधी की एकमात्र सत्ता को चुनौती देने की हिम्मत कोई भी नहीं जुटा पाया है। कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने गाँधी परिवार के खिलाफ पत्र पर साइन तो नहीं किया लेकिन वो भी पार्टी में सुधार के लिए खासे इच्छुक हैं।

वहीं इस पूरे मामले में राज्यसभा का एंगल भी सामने आ रहा है। कर्नाटक में पूर्व IIM प्रोफेसर राजीव गौड़ा को पीछे हटने बोल कर राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए राह बनाने को कहा गया था, जिसके बाद पार्टी में कइयों की भौहें तन गई थी क्योंकि 9 बार सांसद रहे खड़गे 2014-19 में संसद में कॉन्ग्रेस के नेतृत्वकर्ता थे और गाँधी परिवार के पुराने वफादार हैं। ऊपर से वो लोकसभा चुनाव भी हार चुके हैं।

आनंद शर्मा भी राज्यसभा में पार्टी के नेता बनने के दावेदार थे लेकिन खड़गे की वहाँ एंट्री से उनकी और गुलाम नबी आजाद की भौहें तनी हुई हैं। यहाँ तक कि गाँधी परिवार के करीबी मुकुल वासनिक ने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किया। महाराष्ट्र में भी कॉन्ग्रेस ने राहुल गाँधी के वफादार राजीव सतव को उम्मीदवार बनाया था। परिवार के वफादारों को जगह मिलने से पार्टी के अन्य नेता नाराज़ हैं।

बता दें कि सोनिया गाँधी के दोबारा अंतरिम अध्यक्ष बनने से पहले उनके इस्तीफे की खबर आई। फिर जल्द ही दावा किया गया कि उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया था। सोनिया गॉंधी को कॉन्ग्रेस ने भले फिर से अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया हो, लेकिन इसने पार्टी के अंदरूनी कलह को बेनकाब कर दिया है। ताजा घमासान के बाद सब कुछ सामान्य होने और नुकसान का ठीक-ठीक पता लग पाने में ही महीनों लग सकते हैं।

तस्लीम ने अपने मालिक ओम प्रकाश की हत्या कर दी… क्योंकि लॉकडाउन में नहीं दे पा रहा था पूरी सैलरी

दिल्ली का एक डेयरी ओनर पिछले 15 दिनों से लापता था, जिसके बारे में पता चला है कि उसकी हत्या कर दी गई। पता चला है कि नजफगढ़ के उस डेयरी ओनर की उसके ही कर्मचारी ने हत्या कर दी। आरोपित इस बात से खफा था कि लॉकडाउन के दौरान उसे सैलरी (जितनी थी, उतनी नहीं) नहीं मिल रही थी। 21 वर्षीय आरोपित मोहम्मद तस्लीम को गिरफ्तार कर लिया गया है। वो उत्तर प्रदेश के शामली का रहने वाला है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की खबर के अनुसार, पुलिस को 12 अगस्त को सूचित किया गया था कि दिल्ली के डेयरी ओनर ओम प्रकाश लापता हो गए हैं। शुरुआत में एक मिसिंग रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। इसके कुछ दिनों बाद स्थानीय कुआँ से ही दुर्गन्ध आने के बाद लोगों ने शिकायत की। जब छानबीन की गई तो ओम प्रकाश की लाश उसी में पड़ी हुई थी, जो सड़ चुकी थी। इसके बाद तुरंत हत्या और सबूत मिटाने का मामला दर्ज किया गया।

डीसीपी आंतो अलफोंसे ने बताया कि इसके बाद बॉडी को ऑटोप्सी के लिए भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने रूटीन जाँच के जरिए मृतक के दोस्तों, रिश्तेदारों और कर्मचारियों पर नजर रखनी शुरू की। मृतक का मोबाइल फोन भी गायब था। इसके बाद पुलिस को पता चला कि तस्लीम नाम का एक कर्मचारी गायब है। साथ ही वो डेयरी ओनर का बाइक लेकर भी चला गया था। वो छुट्टी की बात कह कर गायब हो गया था।

शामली और पानीपत में छापेमारी की गई लेकिन पुलिस को कुछ पता नहीं चल सका। इसके बाद पुलिस को सूचना मिली कि तस्लीम उसी क्षेत्र में बाइक लेकर घूम रहा है। लेकिन, उसने डेयरी में आना-जाना बंद कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान तस्लीम ने स्वीकार किया कि सैलरी को लेकर ओम प्रकाश के साथ उसकी झड़प हुई थी।

उसके पास से मृतक के मोबाइल फोन के अलावे उस चाक़ू को भी जब्त कर लिया गया, जिसका प्रयोग कर के उसने डेयरी ओनर की हत्या की थी। उसने बताया कि पहले उसे 15,000 रुपए प्रति महीने की सैलरी मिलती थी लेकिन लॉकडाउन में उसे कम सैलरी पर काम करने बोला गया, जो उसे मंजूर नहीं था। इसके बाद दोनों में झड़प हुई। ओम प्रकाश ने 10 अगस्त की रात तस्लीम को थप्पड़ भी मारा था।

इसके बाद ओम प्रकाश जैसे ही सोने गए, तस्लीम ने एक लाठी से उनके सिर पर जोरदार वार किया। इसके बाद चाकू लेकर उनका गला रेत डाला। इसके बाद सबूत मिटाने की मंशा से उसने बॉडी को एक बैग में पैक कर के उसे पास के कुएँ में फेंक दिया। जब उससे परिजनों ने ओम प्रकाश के बारे में पूछा तो उसने कह दिया कि वो काम से कहीं गए हैं। इसके बाद वो अपने घर से फरार हो गया। अंततः पुलिस ने उसे धर-दबोचने में कामयाबी पाई।

30 सितंबर तक धार्मिक उत्सव या समारोह पर UP में पाबंदी: 29 अगस्त को मोहर्रम, घर में ताजिया रखने पर छूट

उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना महामारी के बीच सुरक्षा लिहाज से किसी भी प्रकार के सार्वजनिक समारोह, धार्मिक उत्सव, राजनैतिक आंदोलन व सभाएँ आयोजित करने पर एक बार फिर बैन लगा दिया है। ये प्रतिबंध 30 सितंबर तक प्रदेश में लागू रहेगा।

उल्लेखनीय है कि 29 अगस्त को मोहर्रम मनाया जाना है। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने इस बारे में आदेश जारी किया है। इस आदेश में कहा गया है कि सभी प्रकार के जुलूस एवं झाँकी पर भी प्रतिबंध रहेगा।

बता दें कि यह रोक इसलिए भी लगाई गई है क्योंकि ऐसी आशंका है कि असामाजिक तत्वों द्वारा कानून-व्यवस्था एवं सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने का प्रयास किया जा सकता है। हालाँकि अपने-अपने घरों में मूर्तियाँ, ताजिया एवं अलम की स्थापना पर किसी प्रकार की रोक नहीं होगी।

सभी जिलाधिकारियों व पुलिस कप्तानों के अलावा पुलिस कमिश्नरों, एडीजी जोन तथा आईजी-डीआईजी रेंज को इस संबंध में सूचित किया गया है। इस आदेश के अनुसार सभी अधिकारियों से प्रदेश के सभी धार्मिक स्थलों विशेषकर श्रीकृष्णजन्मभूमि (मथुरा), श्रीराजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (अयोध्या), श्री काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी) तथा ऐतिहासिक स्थल ताजमहल की सुरक्षा व्यवस्था और पुख्ता करने को कहा गया है। इसके अलावा असामाजिक तत्वों, आतंकवादियों एवं समाज में अस्थिरता फैलाने वाले व्यक्तियों पर भी सतर्क नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब करवा दें कि इससे पहले योगी सरकार ने मोहर्रम को लेकर ताजिया निकालने पर लगी पाबंदी को हटा दिया था। इस जानकारी इस पाबंदी का विरोध कर रहे इमाम-ए-जुमा मौलाना कल्बे जवाद ने इमामबाड़ा गुफरानमआब में धरना खत्म कर दिया था।

उन्होंने कहा था कि सरकार ने उनकी माँगे मान ली हैं। अब मोहर्रम के दौरान ताजिया को घर में रखा जाएगा और मजलिसों का आयोजन सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखकर किया जाएगा।

धरना खत्म करने से पहले मौलाना कल्बे जवाद का आरोप था कि यूपी के कई हिस्सों में प्रशासन अकीदतमंदों को अजादारी करने और ताजिया रखने से रोक रहा है। यहाँ तक की मुकदमा तक दर्ज किया जा रहा है। मौलाना ने कहा था कि सरकार ने ताजिया रखने और घरों में मजलिस करने की इजाजत नहीं दी तो धरना जारी रहेगा।

मौत के 9 दिन बाद भी एक्टिव था सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान का मोबाइल फोन

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सीबीआई जाँच के बीच उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के केस में भी सोमवार (अगस्त 24, 2020) को एक नया खुलासा हुआ। दिशा की कॉल डिटेल्स से पता चला है कि उनका फोन उनकी मौत के कई दिनों बाद तक एक्टिव था। 

बता दें कि कुछ समय के लिए सुशांत सिंह राजपूत के मैनेजर के रूप में काम कर चुकी दिशा की इसी साल 8 जून को रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी, इसके 6 दिन बाद सुशांत ने भी कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।

सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि दिशा सालियान की मौत के 9 दिन बाद तक यानी 17 जून तक उनका फोन एक्टिव रहा। इतना ही नहीं उसके फोन से 9 से 17 जून के बीच इंटरनेट कॉल भी की गई थी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वो कौन शख्स है जो उसका फोन इस्तेमाल कर रहा था।

सूत्रों के मुताबिक, दिशा ने 7 जून को कम से कम 36 कॉल किए, जिसमें उसकी दोस्त एकता को किया फोन कॉल भी है, जिसे उन्होंने करीब 12:10 बजे किया था। चश्मदीद के मुताबिक पुलिस हादसा होने कुछ ही मिनट में पहुँच गई, मगर किसी भी अधिकारियों द्वारा फोन जब्त नहीं किया गया। मुंबई पुलिस ने उनके फोन को 9 दिन बाद तक फोरेंसिक जाँच के लिए नहीं भेजा था।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए सीबीआई लगातार पूछताछ कर साक्ष्य जुटा रही है। इसी बीच सुशांत के जिम पाटर्नर सुनील शुक्ला ने रिया चक्रवर्ती पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक रिया चकवर्ती के ‘दो डैडी’ ने मिलकर सुशांत की हत्या की साजिश रची। उनके अनुसार सुशांत डिप्रेशन में नहीं थे और रिया उन्हें अपने पिता द्वारा दी गई दवाइयॉं दे रही थीं।

सुनील शुक्ला ने कहा, “सुशांत सिंह राजपूत की हत्या की साजिश ‘दो डैडी’ द्वारा की गई थी। इसमें एक रिया चक्रवर्ती के सगे पिता इंद्रजीत चकवर्ती और दूसरे उनके ‘शुगर डैडी’ महेश भट्ट हैं।”

शुक्ला ने दावा किया रिया ने अपने पिता के द्वारा दी गई दवाएँ सुशांत को दी और रिया के घर छोड़कर जाने के बाद घर के किस व्यक्ति ने उसे दवा दी? घर में सुशांत के अलावा उनके फ्लैटमेट सिद्धार्थ पिठानी, कुक नीरज और मैनेजर दीपेश सावंत था।

बता दें कि एक्टर की मौत के मामले में जाँच के दौरान सीबीआई ने रिपोर्ट का विश्लेषण करने और स्वास्थ्य-कानूनी राय देने के लिए एम्स फॉरेंसिक टीम की मदद भी माँगी है। अधिकारियों ने सुशांत के मैनेजर सैमुअल मिरांडा और बावर्ची नीरज के साथ बांद्रा में दिवंगत अभिनेता के घर का दोबारा से दौरा भी किया ताकि सीन री-क्रिएट हो सके। इसके अलावा सिद्धार्थ पिठानी और नीरज के बयान लिए गए हैं, जो पहले मैच नहीं हुए थे। इसलिए हो सकता है आगे इन्हें समन फिर भेजा जाए।

साधु सरवनन ने हिंदुओं का धर्म परिवर्तन रोका, इसलिए एंथनी माइकल ने उन्हें पीटा: हिंदू मक्कल काची का दावा

तमिलनाडु के सलेम जिले के संकागिरी तालुक के कुंदंगल कादु में पुलिस सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल के हाथों यातना और अपमान सहन करने के बाद 42 वर्षीय साधु सरवनन ने आत्महत्या कर ली थी। साधु ने अपने दोस्तों को भेजे वीडियो में सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल को अपने ‘डिप्रेशन’ के लिए जिम्मेदार ठहराया था।

आज, तमिलनाडु में एक दक्षिणपंथी हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी, हिंदू मक्कल काची (एचएमके) ने सलेम में एक प्रदर्शन किया और इस घटना की सीबीआई जाँच की माँग की। स्वराज्य की एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्यक्रम के स्थानीय आयोजक, सीएम मणिकंदन ने आरोप लगाया है कि सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल ने हिंदू साधु की पिटाई की थी, उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एंथनी माइकल ने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि उनकी गतिविधियाँ स्थानीय चर्च द्वारा किए गए रूपांतरण प्रयासों में बाधा बन रही थीं। 

HMK नेता ने दावा किया कि इलाके में एक चर्च है। इस चर्च में अधिक संख्या में लोग नहीं जा रहे थे। इसके लिए साधु को जिम्मेदार ठहराया गया था। इसलिए, माइकल ने उन्हें पीटा, ताकि वह इसमें बाधा न बन सके।

हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी के सदस्य का कहना था कि जब से साधु सरवनन ने भूतों से पीड़ित लोगों की शिकायत सुनकर अपने दिव्य उपचार से उसे ठीक करने लगे, ईसाई धर्म प्रचारक लोगों को चर्च के लिए लुभा सकने में नाकामयाब होने लगे। आम तौर पर ईसाई प्रचार इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देकर उन्हें चर्च के प्रति आकर्षित करते हैं। इसी वजह से, उन्हें चर्च की गतिविधियों में बाधा के रूप में देखा जा रहा था।

गौरतलब है कि सरवनन का शव शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को विघटित अवस्था में उनके आवास के पास एक वन क्षेत्र में चट्टानों के बीच पाया गया था। पुलिस को शव के पास एक मोबाइल मिला। जिसकी जाँच करने पर वीडियो मिला। इसमें उन्होंने सब इंस्पेक्टर को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

साधु ने आरोप लगाया था, “सब-इंस्पेक्टर एंथनी माइकल ने मुझे यह सोचकर पीटा कि उसे जो पावर मिली, उससे वह कुछ भी कर सकता है।” सरवनन के बच्चों ने पुलिस द्वारा उनके पिता की पिटाई देखी थी, जबकि उनकी पत्नी ने कहा है कि उन्होंने सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत नहीं की, क्योंकि पुलिस ने उन्हें धमकी दी थी। 

इसको लेकर सीबीआई जाँच की माँग करने वाला अभियान शुरू किया गया है। इस मुद्दे पर संज्ञान लेने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को ईमेल भेजे जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर इस घटना की ओर प्रधानमंत्री कार्यालय का ध्यान भी आकर्षित किया गया है। ट्विटर पर #JusticeForSaravanan और #ArrestAntonyMichael जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं, जिसमें नेटिज़न्स हिंदू संत के लिए न्याय की माँग कर रहे हैं। नाराज सोशल मीडिया यूजर्स ने यह भी बताया है कि तमिलनाडु में मीडिया ने कैसे मौत पर चुप्पी बना रखी है, क्योंकि इस मामले में मृतक हिंदू है।