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पानीपत लव जिहाद: निजामुद्दीन ने जाँघ पर चाकू से वार कर महिला से की जबरन किया निकाह, गर्भवती होने पर घर से निकला

हरियाणा के पानीपत में 25 साल की विधवा के साथ लव जिहाद, मारपीट और गर्भवती होने के बाद घर से बाहर निकलने का मामला सामने आया है। महिला को कदम-कदम पर दरिंदगी झेलनी पड़ी। पीड़ित महिला ने मॉडल टाउन की एक महिला की मदद से पुलिस में आरोपित शौहर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया है।

पीड़ित महिला मूलरूप से रायबरेली उत्तरप्रदेश की रहने वाली है। शादी के बाद वह पानीपत के एकता कॉलोनी रहती है। पुलिस ने बताया कि महिला एक साल पहले गोल्डी नाम के युवक से मिली थी। जिसने बहला फुसला कर युवती को अपने झाँसे में ले लिया। गोल्डी का असली नाम निजामुद्दीन है। जिसका पता चलने के बाद महिला ने उसका विरोध किया तो उसने जबरन उससे निकाह कर ली। फिर गर्भवती होने के बाद उसे घर से निकल दिया।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार महिला ने अपने एफआईआर बताया कि 15 साल की उम्र में उसकी शादी जिस युवक से हुई थी, उसकी सात साल पहले एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। जिसके बाद वह अपने ससुराल पानीपत में घर के आस-पास के इलाकों में जाकर साफ-सफाई का काम करने लगी। जिस दौरान उसकी मुलाकात गोल्डी नाम के युवक से हुई। जो अक्सर काम पर जाते वक्त उसके साथ छेड़खानी करता था। जिससे पीछे छुटाने के लिए वह ससुराल छोड़ मायके चली गई। लेकिन वहाँ भी गोल्डी (निजामुद्दीन) पहुँच गया और वही हरकतें दोहराने लगा।

वह प्यार मोहब्बत की बातें कर उसे वापस पानीपत ले आया। महिला को इस बात की भनक लग गई थी कि गोल्डी दूसरे धर्म का है तो उसने इसका विरोध किया और शादी करने से इनकार कर दिया। जिस पर गुस्सा हुए निजामुद्दीन ने उसके जाँघ पर चाकू से हमला कर दिया। उसने महिला को गाला रेतने और जान से मारने की धमकी भी दी। निजामुद्दीन के परिजनों ने उसे डरा धमका कर जनवरी 2020 में मदरसे में इस्लाम धर्म के अनुसार निक़ाह करवा दिया।

महिला ने बताया कि शादी के बाद निजामुद्दीन के परिजन उसे डंडे और तवे से मारने पीटने लगे। आरोपित उसके चरित्र को लेकर भद्दी टिप्पणी करता था। उसका संबंध ससुर और पड़ोसियों के साथ भी जोड़ने लगा। परिवार वाले मिलकर उस पर अत्याचार करते थे और उसे कमरे में बंद कर देते थे। इतना ही नहीं आरोपित परिवार महिला के हाथ पैर बाँध कर उसे नदी में फेंकने और उसे तेजाब से जलाने की धमकी भी देने लगे थे।

अपनी आपबीती बताते हुए महिला ने इस बात का भी खुलासा किया कि निजामुद्दीन ने कई बार उसे जान से मारने के लिए उसका गला भी दबाया। और पैसों के लिए अपने दोस्तों के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव भी बनाने लगा था। गर्भवती होने के बावजूद परिवार वाले उस पर लगातार अत्याचार करते रहते थे। महिला ने बताया कि वह पाँच माह की गर्भवती है। और ऐसी हालत में परिजनों ने उसे घर से निकाल दिया है।

महिला ने अपने बारे में बताया कि पहली शादी से उसके तीन बच्चे है। जिन्हें वह नाना-नानी और पहले पति सचिन की माँ के पास छोड़ आई थी। निजामुद्दीन और उसके घरवालों ने कभी उसे बच्चों से मिलने नहीं दिया। शादी के समय भी उन्होंने महिला के परिवारवालों को नहीं बुलाया गया था।

पुलिस ने महिला की शिकायत पर आरोपित पति, सास और ससुर के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। वहीं पानीपत मॉडल टाउन थाना प्रभारी सुनील कुमार ने बताया कि आरोपितों के खिलाफ दुष्कर्म और दहेज प्रताड़ना सहित विभिन्न धाराओं के तहत के दर्ज कर लिया है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

तमिलनाडु: सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल की पिटाई से आहत साधु ने की आत्महत्या, आरोपित के खिलाफ अभी तक FIR नहीं

तमिलनाडु में पुलिस सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल के हाथों यातना और अपमान सहन करने के बाद 42 वर्षीय साधु सरवनन ने आत्महत्या कर ली। साधु ने अपने दोस्तों को भेजे वीडियो में कहा है कि उप-निरीक्षक एंथनी माइकल उनके ‘डिप्रेशन’ के लिए जिम्मेदार थे, उन्होंने उन्हें अपमानित किया था। उन्होंने यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी पोस्ट किया था।

सरवनन के परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और बेटा है। उन्होंने वीडियो में कहा कि वह गंभीर अवसाद में थे क्योंकि माइकल ने उन्हें बुरी तरह पीटा था। उन्होंने आगे कहा कि उनकी मौत का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ एंथनी माइकल है। साधु ने यह भी कहा कि उनके मरने के बाद उनकी आत्मा पुलिस सब इंस्पेक्टर एंथनी माइकल से बदला लेगी।

यह दिल दहला देने वाली घटना तमिलनाडु के सलेम जिले के संकागिरी तालुक के कुंदंगल कादु में हुई। साधु सरवनन अपने भक्तों को उनकी चिंताओं और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्त करने के लिए अमावस्या की रात में विशेष पूजा करते थे। इस दौरान भक्त उनके पास भूतों की शिकायत लेकर आया करते थे, जिनका वह निदान करते थे।

इसके लिए वह अपने घर के पास ही पानी की टंकी के निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढे के पास बैठ गए थे। 14 अगस्त को दो महिलाएँ उनके पास आई थी। वह उनकी शिकायत सुन ही रहे थे कि थेवुर पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मियों का एक समूह उस स्थान पर उतरा और उनके साथ मारपीट की।

अगली सुबह सरवनन लापता हो गए। जब उनकी तलाश शुरू की गई, तो उनके दोस्तों ने व्हाट्सएप पर उनका वीडियो प्राप्त किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि पुलिस की पिटाई से वो अत्यधिक डिप्रेशन में थे। 

साधु ने आरोप लगाया, “सब-इंस्पेक्टर एंथनी माइकल ने मुझे यह सोचकर पीटा कि उसे जो पावर मिली, उससे वह कुछ भी कर सकता है।” सरवनन का शव शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को विघटित अवस्था में उनके आवास के पास एक वन क्षेत्र में चट्टानों के बीच पाया गया था। पुलिस को शव के पास एक मोबाइल मिला। जिसकी जाँच करने पर यह वीडियो मिला।

जानकारी के मुताबिक सरवनन के बच्चों ने पुलिस द्वारा उनके पिता की पिटाई देखी थी, जबकि उनकी पत्नी ने कहा है कि उन्होंने सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत नहीं की क्योंकि पुलिस ने उन्हें धमकी दी थी। 

NewsJ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित सरवनन के बेटे और बेटी ने मीडिया को बताया कि उन्होंने पुलिस सब इंस्पेक्टर को अपने पिता पर बेरहमी से हमला करते हुए देखा था। उन्होंने बताया, “पिताजी अपने परिवार के सामने हमला किए जाने से परेशान थे और हमसे बात नहीं की और शनिवार (अगस्त 15, 2020) सुबह घर से निकल गए। उनका शव एक वन क्षेत्र में पाया गया।”

उन्होंने अधिकारियों से एसआई एंथनी के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। बता दें कि पुलिस ने अभी तक एंथनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की है। इधर हिंदू मक्कल काची ने कहा है कि सरवनन को न्याय दिलाने के लिए तमिलनाडु भर में विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है।

ब्लूम्सबरी ने किया ताहिर हुसैन को निर्दोष साबित करने वाले लेखक के किताब को प्रोमोट, दिल्ली दंगों के सच को पब्लिश से इनकार

पब्लिशिंग हाउस ब्लूम्सबरी ने ‘दिल्ली दंगों 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ नामक पुस्तक को लेफ्ट लिबरल्स के दबाव की वजह से पब्लिश नहीं किया। उसी पब्लिशिंग हाउस ने पहले सीएए के विरोध को बढ़ावा देते हुए ऐसे व्यक्ति द्वारा लिखित एक किताब को पब्लिश और प्रोमोट किया था जिसने दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन निर्दोष बताया था।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने ज़िया उस सलाम (Ziya Us Salam) और उज़मा औसफ़ (Uzma Ausaf) द्वारा लिखित पुस्तक “शाहीन बाग: फ्रॉम ए प्रोटेस्ट टू ए मूवमेंट” प्रकाशित की है। उस किताब में शाहीनबाग के पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया गया है। पुस्तक में पिछले साल नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ संप्रदाय विशेष की महिलाओं के नेतृत्व में किए गए विरोध प्रदर्शन के बारे में बताया गया है। जिसका समापन इस साल फरवरी में दिल्ली के दंगों के रूप में हुआ था।

महिलाओं ने संशोधन को वापस लेने की माँग को लेकर महीनों तक एक आवश्यक सड़क को जाम रखा था। पुस्तक के दोनों लेखक शाहीन बाग विरोध के साथ निकटता से जुड़े थे। पुस्तक में यह तर्क दिया गया है कि शाहीनबाग का विरोध भारत के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना थी।

गौरतलब है कि किताब के अनुसार नवंबर से फरवरी तक देश भर में सीएए के विरोध में हुए दंगे भारत को गौरवान्वित करते है। इसे “सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों के लिए एक आधुनिक गाँधीवादी आंदोलन” कहा गया हैं। बता दें, ये विरोध प्रदर्शन गाँधीवादी नहीं थे, क्योंकि यह कई राज्यों में लगातार हो रही हिंसा का दिल्ली के दंगों के साथ समापन था। वहीं इसका नागरिकों के लिए समान अधिकारों से कोई लेना-देना नहीं है। क्योंकि सीएए भारतीय नागरिकों के लिए लागू नहीं किया गया है।

इस साल 23 से 27 तारीख के बीच दिल्ली में हुए हिंसा का मास्टरमाइंड आम आदमी पार्टी का नेता ताहिर हुसैन था। दंगों के ठीक बाद, सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें हिंदुओं पर हमला करने के लिए ताहिर की इमारत के छत पर संप्रदाय विशेष की भीड़ को देखा गया था। इसके साथ ही उन्हें दंगाइयों को निर्देश देते हुए भी देखा गया था। वहीं दंगों में इस्तेमाल किए गए एसिड, ईंधन, पत्थर, पेट्रोल बम आदि को दंगे के बाद उनके घर से बरामद किया गया था।

लेकिन ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित पुस्तक की लेखक जिया उल सलाम ने 28 फरवरी को ताहिर हुसैन को निर्दोष करार दिया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि भीड़ ने उनकी अनुपस्थिति में उनके घर को लूट लिया और नष्ट कर दिया। बता दें उस समय तक, ताहिर हुसैन को दंगों के पीछे के मास्टरमाइंडों में से एक घोषित किया जा चुका था। इसके अलावा, संप्रदाय विशेष के दंगाइयों द्वारा मारे गए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा के परिवार ने पहले ही आरोप लगाया था, कि ताहिर हुसैन अंकित की हत्या का जिम्मेदार है, और उन्होंने उसका नाम एफआईआर में लिया था।

दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के मामले में कई चार्जशीट दायर किए हैं। इसके साथ ही ताहिर हुसैन को दंगों के पीछे महत्वपूर्ण साजिशकर्ता के रूप में भी नामित किया गया है। चार्जशीट में उनका कॉन्फेशन भी शामिल है, जहाँ उन्होंने बताया है कि कैसे उन्होंने दंगों के लिए योजना बनाई और व्यवस्था की थी। अंकित शर्मा मामले में चार्जशीट भी उनका नाम है।

जिया उल सलाम का यह भी दावा है कि दिल्ली में कोई दंगे नहीं हुए थे, और यह सिर्फ संप्रदाय विशेष के लोगों और मस्जिदों पर हमला करने की योजना थी। उन्होंने यह दावे इस तथ्य के बावजूद किए कि इन दंगों में सबसे ज्यादा हिंदुओं को नुकसान हुआ था। और उन्हें पहले निशाना बनाया गया था। जबकि संप्रदाय विशेष के लोगों को हिंदुओं द्वारा किए गए जवाबी हमलों में निशाना बनाया गया था। चार्जशीट के अनुसार संप्रदाय विशेष के लोगों द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मामले को उजागर करने के लिए एक बड़ी योजना बनाई गई थी।

हालाँकि, ज़िया उस सलाम और उज़मा औसफ़ द्वारा कथित किताब जुलाई में प्रकाशित की गई थी, लेकिन उन्होंने उस किताब को आज (22 अगस्त, 2020) प्रोमोट किया है। उन्होंने ट्विटर पर एक ट्वीट पोस्ट किया, जिसमें शाहीन बाग के विरोध को दर्शाते हुए किताब का प्रचार किया गया।

उनके द्वारा किताब को आज प्रोमोट करने का फैसला मोनिका अरोड़ा, सोनाली चीतलकर और प्रेरणा मल्होत्रा ​​द्वारा लिखित पुस्तक ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ को वापस लेने बाद आया है।

दिल्ली दंगों को लेकर लिखी गई यह किताब तथ्यों के अनुसार लेखकों द्वारा की गई जाँच और साक्षात्कार पर आधारित है। असल में यह सितंबर में रिलीज़ होनी थी। पुस्तक को लॉन्च करने के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से लेखक घटना में शामिल हो रहे थे उसके बावजूद उन्होंने पुस्तक को वापस ले लिया।

पुस्तक की घोषणा के बाद इसे वाम-उदारवादियों द्वारा टारगेट किया गया था। इस किताब को आज भाजपा के कपिल मिश्रा, फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री और ऑपइंडिया की संपादक नूपुर शर्मा की उपस्थिति में लॉन्च किया जाना था।

दिल्ली दंगों के सच को बयाँ करने वाली किताब को वापस लेने और ज़िया उस सलाम और उज़मा औसफ़ द्वारा लिखित पुस्तक को प्रोमोट करने जोकि दंगों के पीछे के मुख्य आरोपित को बचा रहा है, ब्लूम्सबरी ने स्पष्ट रूप से दंगों को लेकर उनका पक्ष लिया है।

फेसबुक के कर्मचारियों ने ‘इस्लाम विरोधी कंटेंट’ पर की शिकायत: भारतीय मीडिया समूह ने छुपाई उनकी पहचान

फेसबुक के संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों ने उनके समुदाय के प्रति सोशल नेटवर्किंग साईट की चुप्पी पर विरोध जताया है। संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों ने फेसबुक के ‘इस्लाम विरोधी’ होने की शीर्ष अधिकारियों से शिकायत की है। बता दें कि भारत में फेसबुक पिछले कुछ समय से काफी विवादों से घिरा हुआ है।

फेसबुक की वरिष्ठ अधिकारी अंखी दास पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने भाजपा के तमाम नेताओं पर हेट स्पीच के नियम लागू नहीं किए थे। आरोपों के मुताबिक उन्होंने ऐसा इसलिए किया जिससे भारत में उनका काम प्रभावित न हो।   

फेसबुक के अधिकारियों को लिखे गए पत्र में संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों ने कई बातों का उल्लेख किया। उन्होंने लिखा बीते कुछ समय में जिस तरह की घटनाएँ सामने आई हैं उन्हें देख निराश और दुखी न होना बहुत मुश्किल है। हम इस पूरी प्रक्रिया में अकेले नहीं हैं, समूह के तमाम कर्मचारी इस मुद्दे पर ऐसे ही विचार रखते हैं। इसके बाद उस पत्र में लिखा था कि फेसबुक में काम करने वाले संप्रदाय विशेष के कर्मचारी यह जानना चाहते हैं। जो कुछ हो रहा है क्या यह सही है? 

फेसबुक में काम करने वाले संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों के इस समूह का नाम Muslim@ है। इसमें भारत और खाड़ी के देशों के तमाम संप्रदाय विशेष के लोग शामिल हैं। इसके बाद पत्र में लिखा था, “हम में से अधिकांश लोगों का मानना है। संस्थान का ढाँचा ही ऐसा बना हुआ है कि कंटेंट पॉलिसी और सरकारी मामलों में एक साथ रखना गलत है। इस बात का कहीं कोई ज़िक्र ही नहीं था कि ऐसे कंटेंट को अनुमति देकर फेसबुक ने ग़लती की हो।”

पत्र के मुताबिक़ फेसबुक पर इस तरह का संप्रदाय विशेष विरोधी कंटेंट का मौजूद होना निराश करता है। यह दिखाता है कि दुनिया के सबसे बड़े संस्थान की संप्रदाय विशेष के लोगों के प्रति सहानुभूति ही नहीं है। इसके बाद फेसबुक ने भी इस मुद्दे पर अपना पक्ष रखा। फेसबुक ने इसे खुली और स्वतंत्र संस्कृति का उदाहरण बताया। फेसबुक की तरफ से जारी किए गए बयान में कई अहम बातें थीं। बयान में सबसे पहले कहा गया कि फेसबुक इस तरह की खरी प्रतिक्रिया की सराहना करता है।   

इसके बाद फेसबुक ने अपने बयान में कहा कि वो संप्रदाय विशेष के प्रति फैलाई जाने वाली नफ़रत का विरोध करते हैं। साथ ही इस मुद्दे पर विमर्श शुरू करने का स्वागत करते हैं। पत्र के अंत में यह भी लिखा हुआ था कि भारत में ऐसा एक भी गैर-इस्लामिक संगठन नहीं है, जिसे खतरनाक संगठन की श्रेणी में रखा गया हो। इस मामले का एक और हैरान कर देने वाला पक्ष था।   

जिसके मुताबिक़ भारत के कई मीडिया समूहों ने यह बात छिपाई कि शिकायत फेसबुक के संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों द्वारा की गई है। रॉयटर्स ने यह दावा किया था कि उसके पास यह पत्र है। उसके मुताबिक़ पत्र फेसबुक के एक कर्मचारी समूह ने लिखा है। यानी रॉयटर्स ने यह बात छिपाए रखी कि शिकायत फेसबुक के संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों ने की थी।       

साभार – रॉयटर्स

हिंदुस्तान टाइम्स ने भी कुछ ऐसा ही किया है। उन्होंने भी अपनी ख़बर में इस बात का ज़िक्र कही नहीं किया कि यह पत्र फेसबुक के संप्रदाय विशेष के कर्मचारियों द्वारा लिखा गया है।   

साभार – हिन्दुस्तान टाइम्स

इस तरह करने वालों में सबसे ज़्यादा हैरान करने वाली बात न्यूज़ क्लिक की ख़बर में सामने आई। न्यूज़ क्लिक ने अपनी ख़बर में वॉल स्ट्रीट जर्नल का हवाला दिया है, लेकिन संप्रदाय विशेष का ज़िक्र कही नहीं किया है। जबकि वॉल स्ट्रीट जर्नल की ख़बर में यह साफ तौर पर लिखा है कि शिकायत फेसबुक में काम करने वाले संप्रदाय विशेष समूह ने की थी।   

साभार – न्यूज़ क्लिक

दरअसल, 14 अगस्त 2020 को वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। जिसमें यह आरोप लगाया गया था कि भारत में फेसबुक के बड़े अधिकारी धार्मिक और राजनीतिक मुद्दों पर की जाने टिप्पणी को लेकर पक्षपात कर रहे हैं। इसके बाद रिपोर्ट में कहा गया कि फेसबुक ऐसे एकाउंट्स पर कार्रवाई नहीं कर रहा है जो भारतीय जनता पार्टी से संबंधित हैं। इसके बाद विरोधी दलों को केंद्र की भाजपा सरकार का विरोध करने का मौक़ा मिल गया। 

इसके चलते एनडीटीवी की पूर्व पत्रकार निधि राजदान समेत कुछ कई लोगों ने फेसबुक छोड़ दिया था। कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि वह इस मुद्दे को संसदीय समिति के सामने उठाएँगे। उन्होंने कहा था कि संसदीय समिति “आम नागरिकों की सुरक्षा, सोशल और ऑनलाइन मीडिया पर अधिकार और दुरुपयोग से बचाव” के मुद्दे पर मंथन ज़रूर करेगी। इस मामले में पहले भी फेसबुक को समन किया जा चुका है। इसके कुछ ही समय बाद राहुल गाँधी ने भी अंखी दास की आलोचना की थी। जिसके बाद अंखी दास को तमाम तरह की धमकियाँ मिलने लगी थीं। इस मामले में शिकायत भी दर्ज कराई गई थी।   

पाकिस्तान ने माना कराची में रहता है दाऊद इब्राहिम, 88 आतंकी समूहों पर लगाया प्रतिबंध: विदेश यात्रा पर भी बैन

आतंकी फंडिंग की निगरानी रखने वाली संस्था एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए पाकिस्‍तान ने एक और कवायद की है। पाकिस्तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों और हाफिज सईद, मसूद अजहर और दाऊद इब्राहिम समेत उनके आकाओं पर और तथाकथित कड़े वित्तीय प्रतिबंध लगाए हैं। 

सबसे बड़ी बात यह कि पाकिस्‍तान आज तक अपने यहाँ दाऊद इब्राहिम के मौजूद होने की बात को नकारता रहा है। पहली बार है जब पाकिस्‍तान ने खुले तौर पर स्‍वीकार किया है कि दाऊद उसके यहाँ है। पाकिस्तान की सरकार ने इस बात को मान ल‍िया है कि भारत के मोस्ट वांटेड लोगों में से एक दाऊद इब्राहिम कराची में रहता है।

माना जा रहा है कि पाकिस्‍तान ने यह कार्रवाई एफएटीएफ द्वारा ब्‍लैक लिस्‍ट किए जाने की आशंका से घबराकर की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्‍तान ने 88 प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और हाफिज, मसूद और दाऊद जैसे आतंकी आकाओं की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। उनकी विदेश यात्रा पर भी बैन लगा दिया गया है।

मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि 18 अगस्त को दो अधिसूचनाएँ जारी करते हुए 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ता और जमात-उद-दावा के सरगना हाफ‍िज सईद, जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम पर प्रतिबंधों का ऐलान किया था। 

भारत बार बार कहता रहा है कि 1993 के मुंबई बम धमाकों का गुनहगार दाऊद पाकिस्‍तान में ही छिपा है लेकिन पाकिस्‍तानी हुक्‍मरान इसे नहीं मानते थे। अब जब पाकिस्‍तान ने दाऊद की सभी संपत्तियों को जब्त करने और बैंक खातों को सील करने के आदेश जारी किए हैं। यह बात जगजाहिर हो गई है कि भारत का दावा सौ फीसद सही था कि दाऊद पाकिस्‍तान में ही दुबका बैठा है।

1993 मुंबई बम धमाकों का गुनहगार दाऊद इब्राहीम भारत का मोस्‍ट वांटेड आतंकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने हाल ही में पाकिस्‍तान को इन आतंकियों पर एक्‍शन लेने के निर्देश दिए थे। 

खबर के अनुसार सरकार ने इन संगठनों और आकाओं की सभी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने और उनके बैंक खातों को सील करने के आदेश दिए है। सईद, अजहर, मुल्ला फजलुल्ला (उर्फ मुल्ला रेडियो), जकीउर रहमान लखवी, मुहम्मद यह्या मुजाहिद, अब्दुल हकीम मुराद, नूर वली महसूद, उजबेकिस्तान लिबरेशन मूवमेंट के फजल रहीम शाह, तालिबान नेताओं जलालुद्दीन हक्कानी, खलील अहमद हक्कानी, यह्या हक्कानी और इब्राहिम और उनके सहयोगी सूची में हैं।

गौरतलब है कि पेरिस स्थित एफएटीएफ ने जून, 2018 में पाकिस्तान को ‘ग्रे लिस्ट’ में डाला था और इस्लामाबाद को 2019 के अंत तक कार्ययोजना लागू करने को कहा था लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इस समय सीमा बढ़ा दी गई थी।

सुशांत की मौत से पहली वाली रात जल्दी बंद हो गई थी घर की लाइट, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, नहीं थी कोई पार्टी: पड़ोसी का खुलासा

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मुंबई के बांद्रा स्थित फ्लैट में हुई मौत इस वक्त लोगों के सामने एक पहेली बनी हुई है। इस मामले में केन्द्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई की तरफ से बारीकी से की जा रही पूछताछ और हो रहे नए-नए खुलासों ने शक को और गहरा दिया है कि किसी चीज को छिपाने की कोशिश लगातार की जा रही है।

बांद्रा में जिस किराए के मकान में सुशांत सिंह राजपूत का 14 जून को शव लटका हुआ मिला था, वहाँ पर पड़ोसी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि 13 जून की रात करीब 10.30-10.45 के बीच सुशांत राजपूत के कमरे की सभी लाइट्स बंद हो गई थी। सिर्फ किचन की लाइट जल रही थी।

सुशांत की बिल्‍ड‍िंग में रहने वाली उनकी पड़ोसी महिला पहली बार शनिवार (अगस्त 22, 2020) को मीडिया के सामने आई। उन्‍होंने कहा, “सुशांत के घर की लाइट 13 जून की रात को 10.30-10.45 बजे अचानक बंद हो गई थी। ऐसा अमूमन नहीं होता था, क्‍योंकि वह देर तक जागते थे। लेकिन उस दिन किचन की लाइट को छोड़कर बाकी सारी लाइट्स जल्‍दी बंद हो गई थीं।”

इतना ही नहीं, लगातार यह कहा जा रहा था कि सुशांत की जिस दिन मौत हुई उससे पहली वाली रात को घर में पार्टी हुई थी। लेकिन पड़ोसी ने इस बात को भी खारिज कर दिया। सुशांत की पड़ोसी ने बताया कि उस रात सुशांत सिंह के घर में किसी तरह की कोई पार्टी नहीं हुई थी। महिला का कहना है कि लाइट्स का बंद होना जरूर मामले में संदेह पैदा करता है कि ऐसा क्‍यों हुआ था।

सुशांत के फ्लैट पर क्राइम सीन तैयार करने पहुँची सीबीआई

इस बीच सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले की जाँच कर रही सीबीआई की टीम फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ शनिवार की दोपहर को अभिनेता के बांद्रा स्थित फ्लैट पर पहुँची। एक अधिकारी ने बताया कि राजपूत के फ्लैट में सीबीआई की टीम फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ मिल कर वारदात की क्राइम सीन तैयार करेगी, जहाँ वह 14 जून को लटकते पाए गए थे।

केंद्रीय एजेंसी की टीम और फोरेंसिक विशेषज्ञ दोपहर ढाई बजे मों ब्लां अपार्टमेंट पहुँचे। अधिकारी ने बताया, ”वे घटना की उन कड़ियों को जोड़ने के लिए फ्लैट में पहुँचे जिनके कारण अभिनेता की मौत हुई थी।” सीबीआई के अधिकारी और केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) के विशेषज्ञ सात से अधिक वाहनों में उनके आवास पर पहुँचे।

अधिकारी ने कहा, ”राजपूत के रसोइया नीरज और फ्लैट में उनके साथ रहने वाले सिद्धार्थ पिठानी भी सीबीआई की टीम के साथ थे।” अधिकारी के मुताबिक सीबीआई के अधिकारियों ने सांता क्रूज में आईएएफ के अतिथि गृह में पिठानी के बयान दर्ज किए। इसी स्थान पर केंद्रीय एजेंसी के सदस्य ठहरे हुए हैं। केंद्रीय एजेंसी ने शुक्रवार को नीरज से पूछताछ की।

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सीबीआई की एक दूसरी टीम ने शनिवार को कूपर अस्पताल का दौरा किया जहाँ दिवंगत अभिनेता का पोस्टमार्टम हुआ था। उन्होंने कहा कि टीम ने कूपर अस्पताल के डीन से मुलाकात की थी। उन्होंने कहा कि अधिकारी उन चिकित्सकों से भी मिलेंगे जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने कॉन्ग्रेस समर्थकों और वामपंथियों के दबाव में दिल्ली दंगे से जुड़ी किताब के प्रकाशन का फैसला लिया वापस

प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने मोनिका अरोरा, सोनाली चितलकर और प्रेरणा मल्होत्रा की की पुस्तक ‘Delhi Riots 2020: The Untold Story’ के प्रकाशन को वापस लेने का फैसला किया है। उन्होंने इसके पीछे का एक कारण उनकी जानकारी के बिना लेखकों द्वारा आयोजित किए गए वर्चुअल प्री-पब्लिकेन इवेंट लॉन्च करने को बताया। प्रकाशक ब्लूम्सबरी इंडिया ने यह बातें एक प्रेस रिलीज जारी करके कहा।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने कहा कि उन्होंने लेखकों द्वारा की गई जाँच और इंटरव्यू के आधार पर सितंबर 2020 में पुस्तक को जारी करने की योजना बनाई थी, लेकिन अब उन्होंने अपने फैसले को रद्द कर दिया है।

पब्लिकेशन हाउस ने आगे कहा, “लेखकों द्वारा हमारी जानकारी के बिना आयोजित एक वर्चुअल प्री-पब्लिकेन इवेंट लॉन्च सहित हाल ही की घटनाओं को देखते हुए, हमने पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने का फैसला किया है।”

पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने का निर्णय सोशल मीडिया पर प्रमुख ’बुद्धिजीवियों’ के नेतृत्व वाली वामपंथी उग्र भीड़ के विरोध के बाद आया, जिसने पब्लिकेशन हाउस पर ऐसा निर्णय लेने के लिए पर दबाव डाला था। आक्रोशित वामपंथी भीड़ में विवादास्पद अभिनेत्री स्वरा भास्कर और अन्य प्रख्यात ‘पत्रकारों’ और ‘बुद्धिजीवियों’ जैसे कई व्यक्तित्व शामिल थे।

दक्षिण एशिया सॉलिडैरिटी इनिशिएटिव ने भी ब्लूम्सबरी इंडिया को पुस्तक का प्रकाशन वापस लेने के लिए धमकी दी। बता दें कि दक्षिण एशिया सॉलिडैरिटी इनिशिएटिव के इस्लामवादियों से संबंध हैं। इसने हाल ही में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में राम मंदिर भूमि पूजन के अवसर पर ‘हिंदू फासीवादियों’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

कॉन्ग्रेस समर्थकों ने भी ब्लूम्सबरी इंडिया को किताब वापस लेने के लिए उकसाया।

बता दें कि पुस्तक के प्रकाशन को वापस लेने के कारणों में से एक के रूप में उद्धृत किए जाने वाले कार्यक्रम में भाजपा नेता कपिल मिश्रा और ऑपइंडिया इंग्लिश की एडिटर-इन-चीफ नूपुर शर्मा ने भाग लिया था, जिससे वामपंथी भीड़ के बीच भारी रोष था।

ब्लूम्सबरी इंडिया ने लिबरलों, कॉन्ग्रेस समर्थकों और इस्लामवादियों की उग्र भीड़ के दबाव में रहते हुए दावा किया कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करता है। उनका कहना है कि उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन का फैसला इसलिए वापस ले लिया, क्योंकि वो ‘समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को लेकर काफी सचेत हैं।’

रिया के बाद अब महेश भट्ट और जिया खान का वीडियो वायरल: दिखे काफी क्लोज, हाथ पकड़े असहज आए नजर

बॉलीवुड ऐक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे है। जहाँ एक तरफ रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट को लेकर शक गहराता जा रहा है। वहीं अब सोशल मीडिया पर महेश भट्ट का दिवंगत अभिनेत्री जिया खान के साथ एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद यूजर्स महेश भट्ट पर निशाना साध रहे हैं। वीडियो में महेश भट्ट, जिया खान का हाथ पकड़े नजर आ रहे हैं। दोनों काफी क्लोज भी दिखाई दे रहे हैं। वहीं कमेंट बॉक्स पर नजर डाले तो यूजर्स का मानना है कि जिया इस दौरान काफी असहज दिखाई दे रही हैं। हालाँकि, इस वीडियो में आवाज क्लीयर नहीं है। साथ ही यह भी नहीं पता चल पाया है कि वीडियो कब का है।

दरअसल, सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद रिया चक्रवर्ती और महेश भट्ट का नाम काफी सुर्खियों में आ गया है। ऐसे में जहाँ दोनों की चैट और पुरानी तस्वीरें, वीडियो वायरल हो रहे हैं तो वहीं अब महेश भट्ट और भी दूसरी एक्ट्रेसेस के साथ तस्वीरें और वीडियो वायरल कर यूजर्स अपने विचार शेयर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग महेश भट्ट को इस वक्त काफी ट्रोल कर रहे है। सुशांत की मौत के बाद फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट के सितारे गर्दिश में चल रहे है।

बता दें, जिया खान की मौत भी रहस्यमय तरीके से हुई थी। उनकी मौत के पीछे भी कई बॉलीवुड के दिग्गजों का नाम सामने आया था। यहाँ तक कि उनकी मौत के बाद सबूतों के साथ भी काफी छेड़छाड़ की गई थी। अभी तक उनकी मौत के पीछे का राज सामने नहीं आया है।

सुशांत की मौत के बाद से जिया खान सुसाइड केस भी सुर्खियों में आ गया है। एक्ट्रेस की माँ लगातार माँग कर रही हैं कि इस केस की भी फिर से जाँच की जाए। वे लगातार सूरज पंचोली पर भी निशाना साध रही हैं। उनके मुताबिक सूरज ने जाँच में ना सहयोग किया और ना ही कभी सच बताया। वहीं सूरज भी जिया की माँ पर कई तरह के आरोप लगा रहे हैं। अब इस केस की फिर जाँच होती है या नहीं, ये तो समय बताएगा।

वहीं महेश भट्ट की बात करें तो इस समय उनकी रिया संग एक चैट वायरल है सुशांत की मौत वाले दिन यानि 14 जून को भी रिया और महेश भट्ट के बीच बातचीत हुई थी। रिया ने भट्ट से मॉर्निंग कोट्स भेजने की बात कही जिसके जबाव में उन्होंने एक मैसेज भेजा। रिया ने फिर जवाब दिया, लव यू सर, मेरे एंजेल। फिर 14 जून दोपहर 2.35 बजे भट्ट ने रिया को मैसेज किया है, मुझे कॉल करो। बता दें कि इस वक्त तक हर जगह सुशांत की आत्महत्या की खबर फैल चुकी थी।

उन्होंने फिर शाम को 4.01 और 5.13 पर रिया को कॉल की, लेकिन एक्ट्रेस ने फोन नहीं उठाया। बता दें केंद्रीय जाँच एजेंसी की टीम फिलहाल मुंबई में ही अभिनेता की मौत की जाँच में जुट गई हैं, जो 14 जून को अपने घर में मृत पाए गए थे।

सुशांत केस: क्राइम सीन रीक्रिएट, डॉक्टरों से पूछताछ में कई खुलासे, एक्टर की बिल्डिंग में पानी पीने पहुँची मुंबई पुलिस भी शक के घेरे में

सुशांत सिंह राजपूत खुदकुशी मामले में सीबीआई फुल एक्शन में है। टीम क्राइम सीन को रीक्रिएट करने के लिए सिद्धार्थ पिठानी और कुक नीरज को साथ लेकर एक्टर के बांद्रा स्थित घर पहुँची है। सीबीआई के साथ फॉरेंसिक टीम भी मौजूद है। सुशांत के पोस्टमॉर्टम को लेकर डॉक्टर्स ने भी एक बड़ा खुलासा किया है। वहीं अब मुंबई पुलिस भी शक के घेरे में आ चुकी है।

शनिवार सुबह से सुशांत के कुक नीरज और सिद्धार्थ पिठानी से पूछताछ हो रही थी। दूसरी तरफ जाँच के लिए एक टीम कूपर अस्पताल और दूसरी टीम बांद्रा पुलिस स्टेशन पहुँची थी। सीबीआई की टीम सुशांत के फ्लैट पर क्राइम सीन को दोबारा रीक्रिएट कर रही है। ताकि घटनास्थल की जाँच व तमाम जानकारी कंफर्म हो सके और हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं पर जाँच की जा सके। फ्लैट पर बेडरूम में डमी टेस्‍ट भी किया गया।

मीडिया रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि सुशांत की मौत के बाद अपार्टमेंट के मालिक ने उसके फ्लैट में काफी बदलाव कर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की है। उन्होंने सुशांत के फ्लैट में मौजूद फर्नीचर को भी हटवा दिया है।

सीबीआई ने की डॉक्टरों से पूछताछ

सीबीआई की एक टीम ने शनिवार को कूपर अस्‍पताल में सुशांत की अटॉप्‍सी करने वाले डॉक्‍टरों से भी सवाल-जवाब किया है। सीबीआई के अधिकारियों ने जब सुशांत का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से पूछा कि पोस्टमार्टम जल्दी में क्यों किया गया, तो उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा।

सीबीआई ने कूपर अस्पताल के पाँच डॉक्टरों की एक टीम से पूछताछ की जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था। इसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। सीबीआई ने डॉक्टरों से पूछने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों की एक सूची तैयार की थी। सीबीआई ने पूछा, “कोविड 19 की रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम क्यों किया गया था?” डॉक्टरों में से एक ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया, “यह मुंबई पुलिस के आदेश पर देर रात में पोस्टमार्टम किया गया था।”

सीबीआई ने कूपर अस्पताल के पाँच डॉक्टरों की एक टीम से पूछताछ की जिन्होंने पोस्टमार्टम किया था। इसमें कुछ चौंकाने वाले खुलासे हुए। सीबीआई ने डॉक्टरों से पूछने के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों की एक सूची तैयार की थी। सीबीआई ने पूछा, “कोविड 19 की रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम क्यों किया गया था?” डॉक्टरों में से एक ने कथित तौर पर अधिकारियों को बताया, “यह मुंबई पुलिस के आदेश पर देर रात में पोस्टमार्टम किया गया था।”

ज़ी न्यूज़ के अनुसार, कूपर अस्पताल के डॉक्टरों से सीबीआई को संतोषजनक जवाब नहीं मिला। जब उनसे पूछा गया कि कोरोना वायरस की रिपोर्ट का इंतजार क्यों नहीं किया गया तो डॉक्टरों में से एक ने कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि कोरोना रिपोर्ट आने से पहले पोस्टमार्टम नहीं किया जा सकता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डेथ का टाइम भी नहीं बताया गया है।

सीबीआई के पहुँचने से पहले मुंबई पुलिस पहुँची सुशांत के फ्लैट पर

शनिवार को सुशांत के बांद्रा वाले घर के पास मुंबई के कुछ पुलिसकर्मियों को बिल्डिंग के वॉचमैन से बात करते हुए देखा गया। मुंबई पुलिस सीबीआई के पहुँचने से पहले बिना किसी को बताए और बिना किसी काम के सुशांत के अपार्टमेंट में पहुँची थी। रिपब्लिक न्यूज़ के अनुसार जब इस बारे में उनसे पूछा गया तो मुंबई पुलिस ने कहा कि वो यहाँ पानी पीने के लिए आए थे। ये सारी हरकतें मुंबई पुलिस पर कई सवाल खड़े करती है।

गौरतलब है कि हॉस्पिटल में मौजूद चश्मदीद सुरजीत सिंह ठाकुर ने रिया को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा किया है। उन्होंने बताया, “15 जून को रिया चक्रवर्ती कूपर अस्पताल के मॉर्चरी में पहुँची थी। मैं वहाँ पर मौजूद था। तभी सूरज सिंह ने आकर मुझसे कहा कि रिया चक्रवर्ती यहाँ आना चाहती हैं तो प्लीज थोड़ा कॉरपोरेट करें, पुलिस को थोड़ा समझा दें और उन्हें शव को देखने दें। मैंने उसके बाद वहाँ मौजूद अधिकारियों से बात की और कहा कि रिया चक्रवर्ती आई है उसको सुशांत सिंह की बॉडी को देखना है। जिसके बाद उन्होंने हमें परमिशन दी।”

उन्होंने आगे बताया, “10 मिनट बाद मैं और रिया चक्रवर्ती शवगृह में गए थे। रिया के साथ उसका भाई, माँ और एक और सदस्य भी शायद उसके पिता थे। मैंने सुशांत के चेहरे से सफेद कपड़े को हटाया, उनके गले में एक निशान था। उसी वक्त मुझे कुछ गड़बड़ लगा था। चश्मदीद सुरजीत सिंह राठौर ने कहा कि रिया चक्रवर्ती पाँच से सात मिनट तक शव गृह में मौजूद थी। इस दौरान मैंने ही रिया को कफन उठा कर सुशांत को दिखाया था। रिया ने सुशांत के चेस्ट पर हाथ रखकर कहा था- सॉरी बाबू। ये सुनकर मैं चौंक गया। इसके अलावा रिया ने और कुछ नहीं बोला और वो रोने लगी।

बाबरी विध्वंस केस: SC ने CBI कोर्ट को दिया 30 सितंबर तक फैसला सुनाने का समय, आडवाणी सहित कई बड़े नेता आरोपित

अयोध्या के विवादित ढाँचे बाबरी के विध्वंस के आपराधिक मामले में लखनऊ की विशेष अदालत 30 सितंबर तक फैसला सुनाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज एस. के. यादव की रिपोर्ट देखने के बाद ट्रायल को पूरा करने की समय सीमा को और एक महीना बढ़ाकर 30 सितंबर तक कर दिया है।

बता दें कि इस केस में भाजपा के सीनियर नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और अन्य कई नेताओं को आरोपित बनाया गया है। विशेष अयोध्या न्यायाधीश के अनुरोध पर पिछली समय सीमा को न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा बढ़ाया गया है। न्यायाधीश ने मामले में प्रगति रिपोर्ट SC में दाखिल करने के साथ ही आवेदन पत्र देते हुए मुकदमे को समाप्त करने के लिए कुछ और समय देने की माँग की थी।

पीठ ने 19 अगस्त को अपने आदेश में कहा, “विद्वान विशेष न्यायाधीश सुरेन्द्र कुमार यादव की रिपोर्ट को पढ़कर, और यह देखते हुए कि प्रोसीडिंग अपने अंतिम चरण में पहुँच रही हैं, हम एक महीने का समय देते हैं। जिसका मतलब है, 30 सितंबर, 2020 तक का समय कार्यवाही पूरी करके निर्णय देने के लिए दिया जाता है।”

इस संबंध में आखिरी आदेश मई में आया था, जब पीठ ने सीबीआई अदालत को विशेष न्यायाधीश के एक ऐसे ही अनुरोध पर ध्यान देने के बाद 31 अगस्त, 2020 तक निर्णय देने का निर्देश दिया था।

बता दें कि 24 जुलाई को वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था। खुद को निर्दोष बताते हुए आडवाणी ने कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

इस मामले में मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और खुद को निर्दोष भी बता चुके हैं। जोशी ने उस वक्त केंद्र की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए झूठे सबूत पेश करने की बात भी कही।

गौरतलब है कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ‘कारसेवकों’ ने विवादित बाबरी मस्जिद के ढाँचे को गिरा दिया था। उनका दावा था कि मस्जिद की जगह पर राम का प्राचीन मंदिर हुआ करता था। राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों में आडवाणी और जोशी भी शामिल थे।