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बलरामपुर के आतंकी अबू को अफगानिस्तान से मिल रहे थे ऑर्डर, राम मंदिर का लेना था बदला: 6 ठिकानों पर रेड

दिल्ली में गिरफ्तार किए गए ISIS आतंकी अबू यूसुफ खान राम मंदिर को लेकर गुस्से में था और इसीलिए आतंकी हमले की साजिश रच रहा था। पुलिस से पूछताछ में उसने खुलासा किया है कि वो दिल्ली और यूपी में धमाके की फिराक में था। उसने बताया कि राम मंदिर को लेकर आतंकियों के भीतर गुस्सा है। वो अफगानिस्तान में बैठे अपने आकाओं के लगातार संपर्क में था और उनसे निर्देश ले रहा था।

एनसजी की टीम फ़िलहाल इस बात की जाँच में लगी हुई है कि आतंकी के पास से जब्त प्रेशर कूकर में मौजूद विस्फोटक किस प्रकार का था और उसमें कौन से केमिकल का प्रयोग किया गया था। इससे पहले ही ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा जारी किए गए अलर्ट में कहा गया था कि राम मंदिर को लेकर आतंकियों का गुस्सा उबाल पर है और वो किसी हमले को अंजाम दे सकते हैं। बताया गया था की राजधानी दिल्ली और वीआईपी उसके निशाने पर हैं।

पूछताछ में उसने बताया कि दिल्ली में हमले के बाद फिदायीन हमला उसका अगला कदम होता। दरअसल, जिस आतंकी ने उसे परिवार सहित अफगानिस्तान बुलाने का वादा किया था, वो मारा गया। उसका दूसरा हैंडलर भी एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारा गया। नए हैंडलर ने उसे भारत में ही रह कर काम करने को कहा था। वो 2010 से पहले काम करने सऊदी अरब गया था लेकिन वो ISIS के संपर्क में आकर आतंकी बन गया।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के डीएसपी ने बताया कि अबू यूसुफ खान कोरोना के कारण कम सक्रिय हो गया था, वरना वो पहले ही किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने दिल्ली आता। बाद में उसने स्वतंत्रता दिवस के दिन हमले की योजना बनाई पर कामयाब नहीं हुआ। वह गाँव में कॉस्मेटिक की दुकान चलाता था। उसे लगा था कि अब दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नहीं होगी, इसीलिए वो फिर से आया था।

एनएसजी को भी इस मामले की जाँच में शामिल किया गया है। उससे ये पूछा जा रहा है कि उसने दिल्ली के किन-किन इलाकों की रेकी की थी और उसकी जानकारी किसे उपलब्ध कराई थी। नोएडा में उत्तर प्रदेश और दिल्ली की सीमा पर जाँच अभियान चलाया जा रहा है। अब यूपी के अलावा उत्तराखंड में इस मामले से जुड़ी छापेमारी चल रही है। अब तक दिल्ली गाजियाबाद और उत्तराखंड के 6 ठिकानों पर छापा हो चुका है।

साथ ही बलरामपुर में भी दिल्ली पुलिस की एक टीम पहुँची हुई है। वहाँ पूरे इलाके को घेर कर छापेमारी अभियान चलाया गया है और कुछ क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती बढ़ा कर आमजनों का प्रवेश वर्जित किया गया है। ज्ञात हो कि  राष्ट्रीय राजधानी के रिंग रोड में हुए एक मुठभेड़ के बाद खूँखार वैश्विक आतंकी संगठन ISIS के आतंकी अबू युसूफ खान को शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) आधी रात को गिरफ्तार किया गया। 

उक्त आतंकी के बारे में ये भी पता चला है कि वो ‘इस्लामिक स्टेट इन खोरासन प्रोविंस (ISKP)’ के भी संपर्क में था और अफगानिस्तान के आतंकियों की मदद से भारत में हमला करने वाला था। वो कश्मीर में सक्रिय आतंकी संगठनों से भी संपर्क में था। उसे यूपी पुलिस आगे की जाँच के लिए उसके पैतृक क्षेत्र बलरामपुर लेकर आएगी। वो साइबरस्पेस के जरिए देश-विदेश के आतंकियों के साथ संपर्क में था।

इससे पहले भी खबर आई थी कि इस्लामिक आतंकी इस बार भी साल 1993 जैसा साम्प्रदायिक माहौल बनाने की फिराक में हैं। केंद्र ने इसी कारण 2 राज्यों को रेड अलर्ट पर भी रखा है।

इजरायल के गेट से अल-अक्सा मस्जिद में नमाज पढ़ने वाले गद्दार, लोग उन पर थूकेंगे: फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती का फतवा

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मोहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा है कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के समझौते के बाद अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना यूएई वालों के लिए हराम है। अल-अक्सा मस्जिद में केवल उन्हीं को नमाज की इजाजत है, जो इस्लामिक सीरिया से होकर आते हैं। 

फतवे के अनुसार, जो लोग अल-अक्सा मस्जिद में इजरायल के साथ दोस्ती के माध्यम से इबादत करते हैं, उनको इबादत की इजाज़त नहीं। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका की तथाकथित शांति योजना, सेंचुरी डील में भी, अल-अक्सा मस्जिद को इजरायल के साथ दोस्ती का स्रोत बनाने का कुत्सित प्रयास किया गया है।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने घोषणा की है कि संयुक्त अरब अमीरात के माध्यम से इज़राइल की ओर से अल अक्सा मस्जिद में आने वाला कोई भी गद्दार और ‘अवांछित’ हैं, क्योंकि उन्होंने पहले ही इस तरह की यात्राओं को प्रतिबंधित करने का फतवा जारी कर रखा है।

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती ने कहा कि जो अल-अक्सा मस्जिद में नमाज अदा करना चाहते हैं, उन्हें ईमानदारी से फिलिस्तीनी राष्ट्र का समर्थन करना चाहिए और अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के लिए काम करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जो लोग इजरायल के दोस्त हैं, वे अल-कुद्स और अल-अक्सा मस्जिद को दुश्मन के कब्जा में देने की कोशिश कर रहे हैं। जो लोग यरूशलेम को इजरायल की राजधानी के रूप में समझते हैं, वे कैसे अल-अक्सा मस्जिद की मुक्ति के बारे में बात कर सकते हैं?

फिलिस्तीन के ग्रैंड मुफ्ती शेख मुहम्मद हुसैन ने कहा कि अल-अक्सा मस्जिद और उसके संपत्ति के संरक्षक केवल इस्लाम को मानने वाले हैं। इजरायल की मदद करने वाले का कोई अधिकार नहीं है।

बता दें कि फतवा में इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात के बीच इजरायल की यात्रा और यरुशलम अल-अक्सा मस्जिद में प्रार्थना करने के बीच इस्लाम को मानने वालों के सामान्यीकरण का लाभ लेने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

यूएई-इजरायल शांति समझौते के तहत यरुशलम में इस्लाम मानने वाले सभी के लिए अल-अक्सा मस्जिद इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल को खोलने की अनुमति देता है। हालाँकि, फिलिस्तीनी प्राधिकरण इस समझौते को विश्वासघात मानता है। इसलिए साइट पर आने वाले किसी भी संप्रदाय विशेष के लोग को देशद्रोही माना जाता है।

मीडिया से बात करते हुए, शरिया जस्टिस के लिए पीए सुप्रीम काउंसिल के अध्यक्ष महमूद अल-हबश ने कहा, “जो कोई भी फिलिस्तीन के द्वार के माध्यम से अक्सा मस्जिद का दौरा करना चाहता है, उनका स्वागत है, हम खुशी मनाएँगे। लेकिन जो कोई भी इजरायल के द्वार से आना चाहता है, वह अवांछित है, और उसे यरूशलेम के लोगों के जूते और उसके चेहरे पर यरूशलेम के लोगों के थूक के अलावा और कुछ नहीं मिलेगा।”

अल-हबश ने कहा कि इजरायल / यहूदियों के साथ सामान्यीकरण का मतलब पैगंबर मुहम्मद के दुश्मनों के साथ सामान्य संबंधों के लिए सहमत होना था।

सुप्रीम शरिया न्यायाधीश महमूद अल-हबश ने आगे कहा, “हम (यूएई) के देशद्रोह को स्वीकार नहीं करते। पवित्र फिलिस्तीन की मिट्टी और अल-अक्सा मस्जिद की मिट्टी से रेत का एक एक दाना हमारे खून और हमारे जीवन से अधिक कीमती है।”

इस बीच, फिलिस्तीन प्राधिकरण ग्रैंड मुफ्ती और फिलिस्तीनी सुप्रीम फतवा परिषद के अध्यक्ष मुहम्मद हुसैन ने एक फतवा जारी करते हुए कहा, “एक मुस्लिम के लिए बेन-गुरियन एयरपोर्ट स्थित अल-अस्का मस्जिद तक पहुँचने के लिए संयुक्त अरब अमीरात के विमान में प्रवेश करना वर्जित है।”

गौरतलब है कि हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक आश्चर्यजनक घोषणा करते हुए कहा कि इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने वेस्ट बैंक में भूमि के अधिग्रहण को रोकने के लिए एक समझौते के हिस्से के रूप में पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की थी।

इस बीच फिलिस्तीन स्थित आतंकवादियों ने गाजापट्टी से इजराइल पर 12 रॉकेट दागे। रात भर चले इस हमले के नौ रॉकेट को इजराइल ने विफल कर दिया और जवाबी कार्रवाई में हमास आतंकवादी संगठन के ठिकानों पर तीन हवाई हमले किए। इजराइल की सेना ने शुक्रवार ( अगस्त 21, 2020) तड़के यह जानकारी दी। 

वहीं इजराइली सेना की जवाबी कार्रवाई में एयर स्ट्राइक के दौरान आतंकवादी संगठन हमास के ठिकानों पर 3 हवाई हमले हुए। पिछले कुछ महीनों में गाजा सीमा के पास होने वाली यह सबसे बड़ी झड़प है, हालाँकि हमलों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

भगोड़ा नित्यानंद लाया ‘रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा’, अपनी मुद्रा चलाएगा; अमेरिका सहित 3 महाद्वीपों में फैला है जाल

कोरोना महामारी की वजह से पूरी दुनिया भीड़भाड़ से बच रही है। लेकिन, भारत से हजारों किलोमीटर दूर एक द्वीप पर भगोड़ा नित्यानंद अपने अनुयायियों के साथ ‘रिजर्व बैंक ऑफ कैलासा’ और अपनी मुद्रा के उद्घाटन के मौके पर जश्न में डूबा हुआ है। कैलासा उसी ‘देश’ का नाम है, जहाँ का नित्यानंद खुद को प्रधानमंत्री बताता है।

उसने एनजीओ और कंपनियों का एक ऐसा नेटवर्क बिछाया है, जिससे पूरे अमेरिका से लेकर कई देशों में अपना जाल फैलाने में कामयाब रहा है। वह फंड्स को चैनलाइज करने के लिए भी इन संस्थाओं का उपयोग करेगा। उसने कहा कि लोग दान कर रहे हैं और सरकारों के साथ मिल कर काम किया जा रहा है, जिसका पूरा ढाँचा तैयार है।

‘आजतक/इंडिया टुडे’ मे प्रकाशित अंकित कुमार की एक एक्सक्लूसिव खबर में नित्यानंद से जुड़े 13 संगठनों से संबंधित जानकारियों के हवाले से बताया गया है कि कैसे सामाजिक-आर्थिक समूहों के जरिए ‘कैलासा’ का गड़बड़झाला चल रहा है। वह बैंकों और शिक्षण संस्थानों को अपने ढाँचे का आधार बना रहा है। उसका नेटवर्क 3 महाद्वीपों में फैला हुआ है। अमेरिकी अधिकारियों को बताया गया है कि वह एक हिन्दू दूतावास बना रहा है।

नित्यानंद का कहना है कि पूरी दुनिया मे वास्तविक रूप से हिंदुओं के अभ्यास के लिए कोई जगह नहीं है, इसीलिए वो ‘कैलासा’ के जरिए ऐसा करना चाहता है। ‘इंडिया टुडे/आजतक’ ने कॉर्पोरेट फाइलिंग के हवाले से जानकारी दी है कि पूरे अमेरिका में इसके फुटप्रिंटस का फैलाव है और वहाँ उसने पिछले साल ही ‘कैलासा’ से जुड़े 10 संगठनों की स्थापना की है। इनमें से 9 एनजीओ हैं और 1 घरेलू प्रॉफ़िट कॉर्पोरेशन है।

अमेरिका के सैन जोस, मिशिगन, मिनेसोटा, पेंसिल्वेनिया, पिट्सबर्ग, टेनेसी, डलास, ह्यूस्टन और सिएटल मे ‘कैलासा’ से जुड़े एनजीओ स्थापित किए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों के समक्ष भी नित्यानंद किसी अन्य देश की तरह बातें रखता है और उसने बताया है कि वो हिंदुओं के वैश्विक प्रतिनिधित्व के लिए एक दूतावास बनाना चाहता है। वो देशों की अर्थिक व राजनीतिक स्थिति का विश्लेषण कर ‘कैलासा’ के ‘मंत्रालय’ को रिपोर्ट करेगा।

नित्यानंद ध्यानपीठम और नित्यानंद मिशन उर्फ ​​यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ कैलासा के साथ निगम ने अपनी संबद्धता स्वीकार की है। यहाँ तक कि हॉन्गकॉन्ग के ग्लोबल फाइनेंशियल हब में एक प्राइवेट कंपनी ‘कैलासा लिमिटेड’ के नाम से पंजीकृत कराया गया है। अप्रैल 2020 में ब्रिटेन में भी उसने कुछ संगठनों को इनकॉर्पोरेट किया है। ब्रिटेन में तो संगठनों को कॉम्पलिमेंट्री करेंसी के इस्तेमाल की अनुमति दी गई है।

कैलासा को अब एक अलग मुद्रा बनाने की तैयारी है। कॉम्पलिमेंट्री करेंसी और प्राइवेट करेंसी पहले भी आते रहे हैं। सामाजिक, धार्मिक और पर्यावरण समूहों को ऐसी करेंसी का इस्तेमाल करने की इजाजत है। इसीलिए, नित्यानंद अपने अनुयायियों के बीच अपनी करेंसी के इस्तेमाल करने बढ़ावा दे सकता है। ये लीगल टेन्डर हो न हो लेकिन नित्यानंद इससे अपना वर्चुअल बैंक कहता रहेगा। नित्यानंद ई-पासपोर्ट भी देता रहा है।

इससे पहले जनवरी 2020 में बच्चियों से दुष्कर्म के आरोपी और हाईप्रोफाइल बाबा नित्यानंद के ख़िलाफ़ इंटरपोल ने गुजरात पुलिस के अनुरोध के बाद ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया था। हालाँकि, आरोप के बाद देश छोड़कर भागे नित्यानंद का अभी तक एजेंसियाँ सुराग नहीं लगा सकी हैं। नित्यानंद अलग देश ‘कैलासा’ बनाने वाली खबरों के बाद चर्चा में रहा था।

बेंगलुरु दंगों में शामिल 40 आरोपितों के आतंकी संगठनों से कनेक्शन: RSS कार्यकर्ता की हत्या और बम विस्फोटो से लिंक भी आया सामने

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में 11 अगस्त की रात हुए दंगों की जाँच में आतंकी कनेक्शन भी सामने आ रहे हैं। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) द्वारा दंगों में शामिल गिरफ्तार किए 40 संदिग्धों का 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या, 2014 में चर्च स्ट्रीट विस्फोट और 2013 में मल्लेश्वरम में भाजपा कार्यालय विस्फोट जैसे मामलों में गिरफ्तार अभियुक्तों के साथ नजदीकी संबंध होने का पता चला हैं।

पुलिस सूत्रों ने CNN-News18 को बताया कि समीउद्दीन जो खुद को सोशल वर्कर बताता है, उसे बुधवार को गिरफ्तार किया गया है। समीउद्दीन से पूछताछ में पता चला है कि वह अक्टूबर 2016 में आरएसएस कार्यकर्ता रुद्रेश की हत्या के मुख्य आरोपित के संपर्क में था और एक बार उससे मिलने के लिए जेल भी गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु हिंसा को भड़काने और साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार 380 आरोपितों में से 40 अभियुक्त ऐसे हैं जिनके संबंध चर्च स्ट्रीट ब्लास्ट, मल्लेश्वरम बम विस्फोट और सांप्रदायिक तनाव से जुड़े मामलों के आरोपितों से हैं। इन मामलों में से कुछ की जाँच एनआईए द्वारा की जा चुकी है तो कुछ में जाँच जारी है।

बेंगलुरु में दंगों की रात सोशल मीडिया पर कथिततौर पर मुदस्सिर नाम के एक युवक ने फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लोगों से पुलिस स्टेशन पर इकट्ठा होने की अपील की थी। फिलहाल वह फरार है और पुलिस अभी भी उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस अब 380 आरोपितों में से उन 27 लोगों के फोन रिकॉर्ड खंगाल रही है जिन्होंने दंगा भड़काने में बड़ी भूमिका निभाई है।

बता दें बेंगलुरु हिंसा में जाँच कर रही एनआईए टीम को ऐसे कई सबूत मिले है, जिनसे दंगों के पीछे आतंकी संगठनों और दंगा फैलाने वाले नेटवर्क का हाथ होने का पता चलता है। इन लोगों में पिछले कुछ सालों में साम्प्रदयिक हिंसा को बढ़ाते हुए अपने संगठन को काफी मजबूत कर लिया है। पुलिस ने अब तक दंगों में शामिल 380 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें से कई लोगों के संबंध सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) और अल हिंद आतंकी समूह जैसे संगठनों से भी हैं।

वहीं एक सेवारत IPS अधिकारी ने News18 को बताया कि डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) ज्यादातर मैंगलोर, मैसूर और बेंगलुरु में सक्रिय है। एक दशक पहले बेंगलुरु में इसकी स्थापना की गई थी जब केजी हल्ली से भी इसका संचालन किया जाता था। इस संगठन पर कर्नाटक की पिछली कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान भी प्रतिबंध लगाए जाने की तैयारी की गई थी लेकिन कानूनी झंझट के कारण इस पर प्रतिबंध नहीं लगाया जा सका था।

पुलिस को जाँच के दौरान हिंसा के पीछे की वजह का भी पता चला है। उनके अनुसार 11 अगस्त को डीजे हल्ली और आस-पास के इलाकों में हुई हिंसा को पुलकेशीनगर के कॉन्ग्रेस विधायक आर अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के एक रिश्तेदार द्वारा कथित रूप से सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालने के बाद अंजाम दिया गया था। जिसके चलते इस्लामी कट्टरपंथी द्वारा किए हिंसा में 3 लोगों की जान चली गई थी और सैंकड़ों लोग घायल हुए थे।

बरखा दत्त के मीडिया वेंचर मोजो ने शेयर किया फर्जी फ़ोटो: 2018 शोपियां की फोटो दिखाकर किया कठुआ में हमले का दावा

जर्नलिस्ट बरखा दत्त के मीडिया वेंचर मोजो द्वारा कश्मीर की वर्तमान स्थिति को दर्शाने के लिए दो साल पहले क्लिक की गई तस्वीरों का इस्तेमाल किया है। असल में मोजो में दिखाई गई तस्वीर शोपियां की है जिसका दावा कठुआ जिले का होने से किया गया है। जिस पर फ़ोटोग्राफ़र अहमर ख़ान ने ट्विटर पर बरखा दत्त और उनके मीडिया वेंचर से जवाब माँगा है।

बता दें फ़ोटोग्राफ़र द्वारा माँगे गए जवाब पर बरखा दत्त ने प्रतिक्रिया देते हुए मोजो स्टोरी पर डाली गई फर्जी फ़ोटो की गलती को स्वीकार कर लिया है। बरखा दत्त ने कहा, “मुझे बताया गया है कि फ़ोटो को हटा दिया गया है और टीम को यह जाँचने के लिए कहा गया है कि उन्होंने बिना वेरिफिकेशन के फ़ोटो कैसे साझा की।” अहमर खान ने कहा कि तस्वीर 1 अप्रैल, 2018 को खींची की गई थी। मोजो स्टोरी में दावा किया गया है कि तस्वीरें हाल ही की हैं।

मोजो स्टोरी ने तस्वीर की कैप्शन में लिखा, “कठुआ जिले में पाकिस्तान द्वारा भारी गोलाबारी से घरों को नुकसान पहुँचा है। वहाँ रहने वाले स्थानीय लोगों का कहना है, “हम हर दिन यह झेलते हैं, गोलीबारी सुबह 10 बजे शुरू होती है और शाम 5 बजे तक जारी रहती है।” हालाँकि, तस्वीर में क्षतिग्रस्त घर शोपियां में इस्लामिक आतंकवादियों और भारतीय सेना के बीच हुए मुठभेड़ के बाद का परिणाम था।

गौरतलब है कि धीरे-धीरे बरखा दत्त अपने अस्तित्व को खोती हुई नजर आ रही हैं। हाल ही में, वे प्रधानमंत्री मोदी की दाढ़ी के कथित सांप्रदायिक स्वरूप को लेकर कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के साथ गंभीर चर्चा करते हुई नजर आई थी। इसके अलावा, उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के कुछ इस्लामिक कट्टरपंथी ‘छात्रों’ को ‘शेरो’ के रूप में नामांकित भी किया गया था।

मंदिरों में 5000 SC/ST पुजारी, पिछड़े इलाकों में 1.25 लाख शिक्षण संस्थान: वामपंथियों के प्रोपेगेंडा को VHP का तमाचा

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने 5000 ऐसे पुजारियों को प्रशिक्षित कर विभिन्न मंदिरों में नियुक्त किया है, जो एससी-एसटी (दलित) समुदाय से आते हैं। संगठन के निवेदन के बाद विभिन्न राज्य सरकारों ने भी अपने पैनल में इन पुजारियों को जगह दी है। खासकर दक्षिण भारत में संगठन को इस कार्य में खासी सफलता मिली है। अकेले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में एससी-एसटी (दलित) समुदाय के 2500 पुजारियों को प्रशिक्षित किया गया है।

खबरों में बताया गया था कि विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) की 2 संस्थाओं ने मिल कर इस उल्लेखनीय कार्य को सफल बनाया है। इसके अंतर्गत एससी-एसटी समुदाय के ऐसे लोगों को, जो पूजा-पाठ कराने की प्रक्रिया सीखने में दिलचस्पी रखते हैं, प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रमाण-पत्र भी दिया जाता है। दक्षिण भारत में ऐसे प्रशिक्षित पुजारियों को तिरुपति बालाजी मंदिर से सर्टिफिकेट दिलाया जाता है।

प्रशिक्षण के बाद जब वो अलग-अलग तरीके से पूजा-पाठ कराने और अलग-अलग अवसरों पर पूजा प्रक्रिया संपन्न कराने में सक्षम हो जाते हैं, तभी उन्हें प्रमाण-पत्र दिया जाता है। विहिप का कहना है कि 1964 में वो अपनी स्थापना के साथ ही जातिगत भेदभाव और छुआछूत को ख़त्म करने के भगीरथ प्रयासों में रत है। संगठन ने गिनाया कि कैसे जातिगत भेदभाव को ख़त्म कर के उसने हिंदुत्व की भावना को धरातल पर उतारने का प्रयास किया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल से बातचीत की, जिन्होंने इतिहास से लेकर अब तक जातिगत भेदभाव मिटाने के लिए हुए मैराथन प्रयासों का पूरा ब्यौरा देते हुए बताया कि कैसे मंदिरों में एससी-एसटी (दलित) पुजारियों के प्रशिक्षण और नियुक्ति से एक साथ कई सार्थक उद्देश्यों की पूर्ति हुई है। नीचे हम उनसे हुई बातचीत को उनके ही शब्दों में प्रस्तुत कर रहे हैं।

हिन्दव:सोदरा: सर्वे, न हिन्दू: पतितो भवेत्! : विनोद बंसल ने बताया इतिहास

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना 1964 में हुई थी। उसका मूल उद्देश्य ही यही था कि समाज के अंदर की विषमता का उन्मूलन कर समरस समाज का निर्माण किया जाए। तत्कालीन सरसंघचालक गुरु गोलवलकर का यही उद्देश्य था। धर्म की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध लोगों को एक साथ लाने और पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति का डंका बजाने के उद्देश्य से संदीपन ऋषि के आश्रम में मुंबई में विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना हुई थी।

इसके बाद गुरु गोलवलकर के प्रयासों से विहिप ने 1969 में कर्नाटक के उडुपी स्थित पेजावर मठ में साधु-संतों का एक बड़ा सम्मेलन किया। ये सम्मेलन शंकराचार्य की अध्यक्षता में हुआ, जिसमें कई वरिष्ठ संत उपस्थित थे। वहाँ गुरु गोलवलकर ने शंकराचार्य से ये घोषणा करने का अनुरोध किया कि हिन्दू समाज में कोई दलित नहीं है। उन्हें ये प्रेरणा बाबासाहब भीमराव आंबेडकर से मिली थी।

जब बाबासाहब आंबेडकर, गुरु गोलवलकर से मिले थे तो उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया था कि संघ में कोई भी स्वयंसेवक अपनी जाति नहीं बताता। वो इस बात से खुश थे और कहा था कि संघ बहुत बड़ा कार्य कर रहा है। उनका भी मानना था कि संघ ने जाति-प्रथा का उन्मूलन कर दिया और यहाँ समाज के सभी वर्ग एक साथ बैठ कर भोजन करते हैं। साथ ही उन्होंने जाति-प्रथा के उन्मूलन का प्रयास करने के लिए संतों को आगे आने की सलाह दी थी।

यही कारण था कि गुरुजी इस उद्देश्य को लेकर ज्यादा ही सक्रिय थे और उन्होंने एक तरह से संतों को दंडवत कर के अनुरोध किया था कि वे जाति-प्रथा के उन्मूलन के लिए घोषणा करें। उसी सम्मेलन में ‘हिन्दव:सोदरा: सर्वे, न हिन्दू: पतितो भवेत्!‘ का नारा दिया गया। इसका अर्थ है कि सभी हिन्दू भाई-भाई हैं, सहोदर हैं और कोई भी पतित नहीं है। विहिप ने उस सम्मेलन में इसी ध्येय को लेकर जन-जन तक जाने का फैसला किया।

इसके बाद काशी में एक बहुत बड़ा धर्म-सम्मेलन हुआ, जिसमें वहाँ के ‘डोम राजा’ को निमंत्रित किया गया। अशोक सिंघल के साथ खुद जगतगुरु शंकराचार्य ‘डोम राजा’ के पास गए और उन्हें निमंत्रित किया। उनके घर जाकर उन्हें अपने हाथ से निमंत्रण दिया गया और आग्रह किया गया कि वो सम्मलेन में पधारें। साथ ही उन दोनों ने ‘डोम राजा’ के घर पर भोजन भी किया। जब वे प्रयाग में हुए हिन्दू सम्मलेन में आए तो उन्हें सेन्ट्रल स्टेज पर बिठाया गया।

उस दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य ने ही आगे बढ़ कर ‘डोम राजा’ का स्वागत किया था और उन्हें मंच पर हार पहनाया था। इसके बाद ये संकल्प लिया गया कि विश्व हिन्दू परिषद समरस समाज के निर्माण के लिए एससी-एसटी समाज के लोगों को पूजनकार्य के लिए प्रशिक्षित करेगा, ताकि उनके मन में जो भी कटुता है, मंदिर में एंट्री वगैरह को लेकर, वो ख़त्म हो जाए। दक्षिण भारत के कुछ मंदिर ऐसे थे, जहाँ पुजारियों की कमी थी, खासकर पिछड़ों के गाँवों में।

उन गाँवों में वनवासी, गिरिवासी और अन्य पिछड़ा समाज के लोग थे, जहाँ ब्राह्मण नहीं थे और इसीलिए पूजा करने-कराने की व्यवस्था नहीं थी। ऊपर से दूसरे इलाकों के ब्राह्मणों को वहाँ लेकर जाना भी आर्थिक रूप से ठीक नहीं था। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए विहिप ने एक काम से दो-दो समस्याओं का निवारण किया। उन्हें पूजा करने-कराने के लिए प्रशिक्षित किया।

ऐसे पुरोहितों को तैयार कर उन्हें मंदिरों में पूजन करने के लिए नियुक्त किया गया। आज भारत के सुदूर वनवासी-गिरिवासी समुदाय के गाँवों में विश्व हिन्दू परिषद के सवा लाख के करीब शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से 1.03 लाख एकल विद्यालय हैं। इनके अलावा सिलाई केंद्र, कढ़ाई केंद्र, संस्कार केंद्र और ग्राम विकास केंद्र सहित कई स्कूल-कॉलेज भी शामिल हैं। ये ऐसी बस्तियों में चल रहे हैं, जहाँ पिछड़े लोग रहते हैं।

इन लोगों को ईसाई मिशनरियों के चंगुल से छुड़ा कर धर्म के मार्ग पर लेकर जाने और उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए विहिप ने ये कार्य किया है। दिल्ली में भी आर्य समाज मंदिरों में अधिकतर पुरोहित ब्राह्मण नहीं हैं। हिन्दू धर्म में कर्मानुसार वर्ण व्यवस्था की बात कही गई है, जिसमें जाति का कुछ लेना-देना नहीं है। भारत के कई मंदिरों में महिलाएँ ही कर्मकांड करा रही हैं। विहिप ने भी कई महिलाओं को प्रशिक्षित किया है।

एससी-एसटी समुदाय के कल्याण में लगा विश्व हिन्दू परिषद

बता दें कि खुद विनोद बंसल भी दिल्ली स्थित ईस्ट ऑफ कैलाश के जिस आर्य समाज मंदिर से जुड़े हुए हैं, वहाँ भी महिलाएँ ही पूजा-पाठ का सारा कार्य कराती हैं। मीडिया अक्सर उन ख़बरों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करते हुए हिंदुत्व की बुराइयाँ गिनाने में लग जाता है, जिनमें कहा जाता है कि फलाँ दलित को फलाँ मंदिर में नहीं घुसने दिया गया। बंसल कहते हैं कि विहिप भी इन ख़बरों से चिंतित रहता है।

उन्होंने कहा कि विहिप ने समाज के पिछड़े लोगों को प्रशिक्षित कर पुरोहित का कार्य देकर सामाजिक समरसता के क्षेत्र में कदम उठाया है, जिसमें आगे बहुत कुछ होना है। बता दें कि कुछ ही दिनों पहले अयोध्या के राम मंदिर में भी दलित पुजारी की नियुक्ति की माँग उठी थी। वामपंथी अक्सर हिन्दू समाज पर जातिवादी होने का आरोप लगाते हुए दलित-राग अलापते रहते हैं और कई बार उन्हें भड़काने का भी काम करते हैं।

लेकिन, असलियत में देखा जाए तो तमाम हिन्दू संगठन ऐसे कामों में लगे हुए हैं, जिससे दलित वर्ग आगे आए हैं। कोरोना काल में भी तमाम मंदिर लोगों को भोजन मुहैया कराने का काम कर रहे हैं। वहीं ये वामपंथी उन ईसाई मिशनरियों के बारे में कुछ नहीं बोलते जो दलितों-आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनके धर्मान्तरण में लगे हैं। हिन्दू धर्म में सेवाभाव है, जबरदस्ती और प्रलोभन की यहाँ कोई गुंजाइश नहीं है।

अकाउंट बहाल कर डॉ. आनंद रंगनाथन से ट्विटर ने माँगी माफी, कुरान का जिक्र करने पर कर दिया था ब्लॉक

माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने 10 दिन बाद वैज्ञानिक और स्तंभकार डॉ. आनंद रंगनाथन के ट्विटर अकाउंट फिर से बहाल कर दिया है। साथ ही ट्विटर ने माफी भी माँगी है। बता दें कि 10 दिन पहले ट्विटर ने रंगनाथन को कुरान की एक आयत पोस्ट करने पर ब्लॉक कर दिया था।

अब ट्विटर ने अकाउंट सक्रिय करते हुए ईमेल के जरिए आनंद रंगनाथन को होने वाली असुविधा के लिए खेद जताया है और अपनी गलती भी मानी है।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में इस्लामिक भीड़ की हिंसा के बाद जेएनयू के प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में उन्होंने समुदाय विशेष से अपील की कि जो भी लोग कुरान की एक ऐसी आयत का विरोध करते हैं, जिसमें अल्लाह या अल्लाह के बंदों को दुत्कारने पर सजा मिलने की बात है, उन्हें अब मुखर होकर बोलना चाहिए।

आनंद रंगनाथन का यह ट्वीट उन लोगों पर एक निशाने की तरह था, जो आम दिनों में मजहब और दीन की बातें करते हैं, लेकिन जब बेंगलुरु जैसी कोई मजहबी हिंसा घट जाती है तो मानवता की बात करके उनके अपराधों से ध्यान भटकाने में लग जाते हैं।

जेएनयू के प्रोफेसर ने इसी रवैये पर कुरान की इस आयत को कोट किया था, “जो भी अल्लाह और उसके बंदे को दुत्कारेगा, अल्लाह उन्हें इस जहां में लानत देता है और उनके लिए अपमानजनक दंड भी तैयार रखता है।”

डॉ. रंगनाथन ने कुरान की इन पंक्तियों को लिखते हुए कहा था कि इस्लाम को मानने वाले जो कुरान की इन बातों में विश्वास नहीं रखते, उन्हें यह बात मुखर हो कर कहना चाहिए। मगर, ट्विटर ने उनके इस ट्वीट को नियमों का उल्लंघन बताकर उनका अकाउंट ब्लॉक कर दिया था।

ट्विटर ने आनंद रंगनाथन के ट्वीट को ‘घृणा वाला’ बताया। इसके जवाब में जेएनयू के प्रोफेसर ने ट्विटर को लिखा था कि उन्होंने जो भी ट्वीट किया है, वह कुरान की एक आयत है। तो क्या इसका मतलब ये है कि कुरान में लिखी आयत घृणा वाली है। किस मामले में ये निर्धारित होगा कि किसी आयत का हवाला देना आपके नियमों का उल्लंघन है।

गौरतलब है कि 11 अगस्त 2020 को बेंगलुरु कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे के फेसबुक पोस्ट के बाद संप्रदाय विशेष की भीड़ सड़कों पर उतरी थी। भीड़ ने कॉन्ग्रेस विधायक के घर में तोड़फोड़ करने के साथ ही आग लगा दी।

इसके बाद उपद्रवियों की हिंसक भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया, पुलिस थाने और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। दंगे के बाद, कई ‘उदारवादियों’ ने दावा किया कि इस्लाम यह (हिंसा) नहीं सिखाता है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. रंगनाथन ने उन्हें बताया कि इस्लाम क्या सिखाता है। उन्होंने कहा कि जिन ‘उदारवादियों’ का कहना है कि यह इस्लाम नहीं सिखाता है, तो उन्हें कहना चाहिए कि वे कुरान में वर्णित बातों से सहमत नहीं हैं।

इस घटना के बाद आनंद रंगनाथन को ट्विटर पर वापस लाने की माँग तेज हो गई थी। लोग अपने-अपने ट्विटर हैंडल से #BringBackAnandRanganathan ट्वीट कर उनकी वापसी की माँग करने लगे थे। लोगों ने उन्हें सबसे समझदार आवाज बताते हुए ट्विटर से अपील की थी कि उन्होंने कोई भी नियम उल्लंघन नहीं किया। उन्हें वापस लाया जाए।

जो पत्रकार निष्पक्षता का दावा करता है वह झूठा है, यह सिर्फ अपना एजेंडा आगे बढ़ाने का ज़रिया है: शेखर गुप्ता

एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के मुखिया और पत्रकारिता की दुनिया में तथाकथित ‘निष्पक्षता’ का चेहरा माने जाने वाले शेखर गुप्ता। उन्होंने कहा है कि स्वाभाविक रूप से पत्रकारों का राजनीतिक झुकाव होता ही है। अपने मीडिया समूह द प्रिंट के 3 साल पूरे होने पर उन्होंने एक यूट्यूब कार्यक्रम में बात करते हुए लोगों के सवालों का जवाब दिया। एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही।   

कार्यक्रम के दौरान मौजूद लोगों में एक व्यक्ति ने शेखर गुप्ता से यह सवाल किया- “आप अपनी पत्रकारिता को अपनी विचारधारा से कैसे अलग रखते हैं?” इस प्रश्न का उत्तर देते हुए शेखर गुप्ता ने कहा, “अगर कोई भी पत्रकार महिला या पुरुष दावा करता/करती है कि वह निष्पक्ष है तो वह इंसान झूठ बोल रहा है। इसके बाद उन्होंने कहा कि हर पत्रकार इस पेशे में आने के पहले इंसान था और तब वह कैसे निष्पक्ष हो सकता है।”   

शेखर गुप्ता ने कहा, “हम इंसान हैं और हम निष्पक्ष नहीं हो सकते हैं। हम न तो कोई मशीन हैं और न ही कोई रोबोट हैं। हमें याद रखना चाहिए कि हम हर पाँच साल में मतदान करने जाते हैं।”

इसके बाद उन्होंने कहा, “हालाँकि, हर इंसान किसी न किसी राजनीतिक दल को अपना मत देता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश, चुनाव आयुक्त, राष्ट्रपति यह सभी लोग हर पाँच साल बाद मतदान करते हैं। हर इंसान जो चुनाव के दौरान अपने संवैधानिक अधिकारों का सदुपयोग करता है। उसकी कोई न कोई राजनीतिक विचारधारा होती है। ऐसे में निष्पक्षता को लेकर दावा करना कैसे सही हो सकता है।”   

इसके बाद शेखर गुप्ता ने उन राजनीतिक दलों पर विलाप करना शुरू कर दिया। जिस राजनीतिक दल का वह विरोध करते हैं, जो लगभग हर चुनाव बहुमत से जीत रहे हैं। उन्होंने कहा हम न तो इसे बदल सकते हैं और न ही इसे खारिज कर सकते हैं। उनके अनुसार पिछले कुछ सालों में उन्होंने अपनी विचारधारा के झुकाव के साथ समझौता करना सीख लिया है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए ऐसा कर पाना बिलकुल आसान नहीं था। 

शेखर गुप्ता ने इस बात के लिए एक उदाहरण तक दिया। उन्होंने कहा एक राजनीतिक दल जिसे हम जीतते हुए नहीं देखना चाहते हैं। हो सकता है वह फिर भी जीत जाए और रिपोर्टिंग के दौरान हमें यह कहना पड़े- “यह राजनीतिक दल जीत गया।” उन्होंने कहा कि अपने तजुर्बों के आधार पर पूर्वाग्रहों के साथ रहना सीख लिया है। खबर ही है जो हम हमेशा से होना चाहते थे। 

निष्पक्षता पर पड़ा परदा आख़िर हट ही गया

लिबरल्स ने पिछले कुछ समय में ऐसा माहौल बनाने का प्रयास किया। ऐसे पत्रकार जो अपने नैरेटिव को बढ़ावा देते हैं और उस पर चर्चा करते हैं वह निष्पक्ष हैं। इस श्रेणी में शेखर गुप्ता का नाम सबसे उल्लेखनीय है। इनके मुताबिक़ जिन पत्रकारों में वह भरोसा दिखाते हैं वह अपनी राजनीतिक विचारधारा को हमेशा अलग रख कर चलते हैं। उनकी ख़बरें भी किसी विचारधारा से प्रेरित नहीं होती हैं। लेकिन असल मायनों में यह सच नहीं है।   

शेखर गुप्ता के इस बयान से स्पष्ट है कि तथाकथित बुद्धिजीवी पत्रकार भी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित होते हैं। ज़रा सी ईमानदारी दिखाते हुए शेखर गुप्ता ने यह स्वीकार किया कि निष्पक्षता की बात करना दिखावा है। जिससे पत्रकारों को अपना एजेंडा आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। और खुद उनके झुकाव पर कोई सवाल नहीं खड़े होते हैं।     

 

चीन को एक और झटका: रेलवे ने रद्द किया 44 नए हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस बनाने का टेंडर, बोली में चीनी कंपनी भी थी शामिल

लद्दाख की गलवान घाटी में सीमा विवाद के बाद भारत की ओर से चीनी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी है। अब भारतीय रेलवे ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को 44 नए हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेन निर्मित करने के टेंडर को रद्द कर दिया है। अगले एक हफ्ते में नया टेंडर जारी किया जाएगा। अब नए टेंडर के नियम बदले जाएँगे। रेलवे ने ट्वीट के जरिए शुक्रवार देर रात टेंडर रद्द करने की जानकारी दी।

भारत सरकार की ओर से निविदा रद्द किए जाने का कदम चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है क्योेंकि 44 हाई स्पीड ट्रेन की आपूर्ति के लिए 6 दावेदारों में चीनी संयुक्त उद्यम सीआरआरसी पॉयनियर इलेक्ट्रिक (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड अकेली विदेशी बोलीदाता के रूप में उभरी थी। लेकिन चीन से इसका संबंध होने के कारण टेंडर रद्द कर दिया गया।

रेल मंत्रालय ने एक ट्वीट में कहा, ”44 सेमी-हाई स्पीड ट्रेनों (वंदे भारत) के निर्माण की निविदा रद्द कर दी गई है। संशोधित सार्वजनिक खरीद (‘मेक इन इंडिया” को वरीयता) आदेश के अंतर्गत एक सप्ताह के भीतर ताजा निविदा आमंत्रित की जाएगी।” हालाँकि, रेलवे ने निविदा रद्द करने के पीछे किसी खास कारण का उल्लेख नहीं किया।

चेन्नई की रेलवे कोच फैक्ट्री ने 10 जुलाई को 44 हाई-स्पीड वंदे भारत ट्रेनों के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया था। रेल मंत्रालय के मुताबिक, चीन की संयुक्त उद्यम के अलावा अन्य पाँच बोलीदाताओं में भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, भारत इंडस्ट्रीज, इलेक्ट्रोवेव्स इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, मेधा सेर्वो ड्राइवस प्राइवेट लिमिटेड और पावरनेटिक्स एक्विप्मेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड शामिल थे।

देश में पहली वंदे भारत एक्सप्रेस का लोकार्पण प्रधानमंत्री मोदी ने 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली से वाराणासी के लिए किया था। दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस नई दिल्ली से कटरा के बीच चलती है। इसका नाम पहले टी-18 था। जिसको हरी झंडी अमित शाह द्वारा 3 अक्टूबर को दिखाई गई थी। इसे आईसीएफ चेन्नई ने बनाया था। ये दोनों ट्रेन सेट सौ प्रतिशत मेक इन इंडिया हैं। आईसीएफ ने प्रत्येक वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन सेट को महज 97 करोड़ में बनाया था। इसे 18 महीनों के भीतर ही डिजाइन करके पटरी पर उतार दिया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले भारत सरकार ने टिकटॉक समेत कुल 59 चीनी ऐप्स को देश में बैन कर दिया गया था। भारत और चीन के बीच गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत सरकार की तरफ से यह कार्रवाई हुई थी। उस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे तो वहीं चीन के 35 सैनिकों के मारे जाने की बात कही गई थी। चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के फैसले पर भारत सरकार का कहना था कि सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है।

इरफान ने मारने की धमकी दे 4 महीने तक महादलित लड़की से किया रेप, पीड़िता के गर्भवती होने पर खुला मामला

बिहार के पूर्णिया जिला के कसबा में एक महादलित लड़की के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार आरोपित मोहम्मद इरफान ने पीड़िता के साथ लगातार चार महीने तक दुष्कर्म किया। वह पीड़िता को धमकी भी दिया करता था कि अगर उसने इस घटना के बारे में किसी को बताया तो उसे जान से मार देगा।

इस दौरान पीड़िता गर्भवती भी हो गई। पीड़िता ने पूछताछ के दौरान एसडीपीओ आनंद पांडेय को बताया कि उसने गर्भवती होने की बात अपनी भाभी को बताई। जिसके बाद उन्होंने अपने पति यानी पीड़िता के भाई को इसके बारे में बताया। फिर भाई ने आरोपित इरफान के खिलाफ कसबा थाना में शिकायत दर्ज करवाई।

कसबा थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपित मोहम्मद इरफान के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। साथ ही पीड़िता को मेडिकल जाँच के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया है।

पीड़िता के भाई का कहना है कि उन्हें इस घटना की जानकारी मई में ही मिली थी। उस समय वह पंजाब में थे और लॉकडाउन की वजह से वापस नहीं आ पा रहे थे। उन्होंने बताया कि पीड़िता और उसकी भाभी मोहम्मद इरफान की वजह से कसबा थाना में जाकर रिपोर्ट दर्ज नहीं करवा रही थी।

गौरतलब है कि कसबा थाना क्षेत्र में पिछले दिनों एक 15 वर्षीय महादलित युवती को अगवा कर गाँव के ही तीन युवकों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। दुष्कर्म के बाद उसे बंधक बना लिया गया, जिसे पुलिस ने छुड़ाया।

हालाँकि, पुलिस ने गैंगरेप की बात से इनकार कर दिया था। मौके से सभी आरोपित भी फरार हो गए थे। मामले में मोहम्मद मुजफ्फर मुख्य आरोपित था। मोहम्मद मुजफ्फर अपने सहयोगियों नवाजिश और अबू बकर के साथ मिलकर पीड़िता का अपहरण कर लिया था।

पीड़िता की माँ ने दावा किया था कि अगवा करने से पहले उनकी बेटी को बेहोश किया गया था। आरोपितों ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। पीड़िता की माँ ने बताया कि सुबह उसे घर में न पाकर परिजन बेचैन हो गए और तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद पता चला कि पीड़िता को मोहम्मद मुजफ्फर ने बंधक बना कर रखा था।