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दिशा सालियान की आखिरी रात की पूरी कहानी: ‘मौत’ से 1 घंटे पहले का वीडियो आया सामने, सुसाइड थ्योरी पर उठे कई नए सवाल

सुशांत सुसाइड केस में खुलासों के बीच उनकी पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सुशांत की मौत के साथ उनकी एक्स मैनेजर दिशा सानियान केस को जोड़ा जा रहा है। इस बीच आज एक वीडियो सामने आया है, जिसे दिशा का आखिरी वीडियो बताया जा रहा है। दावा है कि दिशा के 14 वें माले से गिरने से पहले का ये वीडियो हो सकता है।

गौरतलब है कि 34 वर्षीय सुशांत ने 14 जून को अपने बांद्रा स्थित घर में फाँसी लगाकर सुसाइड किया था। वहीं उनकी मौत से ठीक 6 दिन पहले दिशा सालियान का निधन हुआ था। रिपोर्ट के अनुसार आत्महत्या से पहले दिशा एक पार्टी में गई थी। वायरल हुए वीडियो में दिशा दोस्तों के साथ खुश दिख रही हैं। वीडियो में दिशा अपने दोस्तों के साथ डांस करती हुई भी नजर आ रही हैं।

बता दें यह वीडियो दिशा ने ही रिकॉर्ड कर उसे अपने दोस्तों के WhatsApp ग्रुप पर भेजा था। सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे हैं कि यह वीडियो 8 जून की रात रात 11 बजकर 48 मिनट पर दिशा द्वारा अपने दोस्तों के वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया गया था। इसके तकरीबन एक घंटे के भीतर उन्होंने सुसाइड कर लिया था। यह वीडियो खुद दिशा ने ही बनाई है।

सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो को देख कर हर किसी के मन में यहीं सवाल है कि इतनी खुश दिखने वाली दिशा ने आखिर क्यों कुछ समय बाद सुसाइड कर लिया?

वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद मीडिया में तमाम तरह की बातें सामने आ रहीं हैं। एक मीडिया रिपार्ट में दिशा के दोस्त ने पार्टी की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 9 जून को एक गेट टूगेदर पार्टी थी। जिसमें दिशा उसका मंगेतर और कुछ दोस्त भी शामिल थे। दिशा पार्टी में शराब पी कर सभी को लेकर कुछ कुछ शिकायतें कर रही थी। उसने बोला कि कोई उसका ख्याल नहीं रखता है किसी को उसकी परवाह नहीं है। इतना कहते ही दिशा पार्टी छोड़ कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया।

काफी देर तक जब वह नहीं आई तो दोस्तों ने दरवाजा पीटा और उसे बुलाने की बहुत कोशिश की। लेकिन कमरे से कोई आवाज नहीं आने पर सबने दरवाजा तोड़ दिया। दरवाजा टूटने के बाद पार्टी में मौजूद सभी लोगों को इस बात का पता चला कि दिशा ने छत से कूद कर आत्महत्या कर ली है। जब तक सब नीचे पहुँचते वॉचमैन ने पुलिस को खबर कर दी थी। हॉस्पिटल ले जाते समय दिशा जिंदा थी। लेकिन बाद में उसे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर हर दिन नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। दिवंगत अभिनेता के वकील, परिवार के सदस्यों, दोस्तों के बाद, अब उनके पूर्व कर्मचारी अंकित आचार्य ने चौंकाने वाला दावा किया है। अंकित बतौर सुशांत के निजी सहायक ने यह दावा है कि यह सुसाइड न होकर मर्डर है।

अंकित आचार्य ने एक इंटरव्यू में बताया, “सुशांत भैया खुश और सकारात्मक इंसान थे। वह हमेशा एक्टिव रहना चाहते थे। जब मैंने उनके साथ 2017 से 2019 तक काम किया, तब वह कभी उदास या परेशान नहीं रहते थे। वह कभी-कभी गुस्से में आ जाते थे, लेकिन 5 मिनट में शांत हो जाते थे। वह हमारे साथ परिवार और अपने भाइयों की तरह व्यवहार करते थे।”

आचार्य ने यह भी बताया कि अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के जिंदगी में आने के बाद से सुशांत पूरी तरह से बदल गए थे। उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया। उनका पूरा स्टाफ भी बदल दिया गया। अंकित ने कहा कि जब वे अपनी 2 माह की सैलरी लेने के लिए सुशांत से मिलना चाहते थे तो उन्हें मिलने से रोक दिया गया था।

पिछली सरकारों ने नहीं दिया अयोध्या पर ध्यान, CM योगी के नेतृत्व में होगा राम जन्मस्थान का विकास: अयोध्या के शाही सदस्य

अयोध्या में राजवंश का इतिहास सैकड़ों वर्ष पुराना है। शाही परिवार के सदस्य बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा एक जानी-मानी शख्सियत हैं। हाल ही में उन्होंने टाइम्स नाउ के पद्मजा जोशी को इंटरव्यू दिया। इस दौरान मिश्रा ने पवित्र शहर अयोध्या को लेकर अपनी पुरानी यादें ताजा की।

इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि अयोध्या में एक भव्य राम मंदिर नहीं होने के कारण इसे इसकी महिमा से वंचित कर दिया गया था। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अयोध्या अपने पवित्रता और वर्चस्व को पुनः प्राप्त करने की ओर अग्रसर है।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने अफसोस जताते हुए कहा कि तीन दशकों से सत्तारूढ़ सरकारों ने प्राचीन शहर को विकसित करने के लिए बहुत कम काम किया।

मिश्रा ने कहा, “अब यहाँ (यूपी) भाजपा की सरकार है, योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री बने हैं, उनका पूरा ध्यान अयोध्या पर है। वह शहर का समग्र विकास चाहते है। अब इस बात की पूरी संभावना है कि अयोध्या एक विकसित शहर बनने की राह पर है।”

उन्होंने आगे कहा, “इससे पहले अन्य लोग सरकार में थे, उन्होंने अयोध्या पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया। यहाँ किसी तरह का विकास कार्य नहीं हुआ करता था। अब पूरे अयोध्या और यहाँ तक ​​कि भारत को भी उम्मीद है कि यह एक सुंदर शहर बनकर उभरेगा।” मिश्रा ने चुटकी लेते हुए यह भी कहा, “मुझे उम्मीद है कि अयोध्या वैटिकन सिटी के समान कद हासिल करेगा।”

उनसे जब अयोध्या में दशकों से चल रहे राजनीतिक उथल-पुथल को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा, “राम मंदिर का मुद्दा काफी वास्तविक था। प्रभु राम का कहाँ जन्म हुआ था। उनका जन्म अयोध्या में हुआ था, वहाँ एक मंदिर का निर्माण होना बहुत आवश्यक था।”

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि बाबरी मस्जिद एक विवादित ढाँचा था जिसे एक मंदिर के विध्वंस के बाद बनाया गया था और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयोध्या का गौरव बहाल हुआ है, इसका सम्मान वापस लौटा है।

मिश्रा ने कोरियाई शाही परिवार के साथ अपने सौहार्दपूर्ण संबंध के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि उन्हें शाही परिवार द्वारा दक्षिण कोरिया में आमंत्रित किया गया था क्योंकि उनका मानना ​​था कि वे अयोध्या की एक राजकुमारी के वंशज हैं। किम जोंग-पिल्म दक्षिण कोरिया के तत्कालीन प्रधान मंत्री, गराक साम्राज्य के राजा किम सुरो की 72 वीं पीढ़ी के वंशज थे।

बिमलेन्द्र प्रताप मिश्रा ने कहा कि कोरियाई शाही परिवार द्वारा उन्हें सरयू नदी के तट पर स्थापित रानी का एक स्मारक उपहार में दिया गया था। हर साल कोरियाई डेलिगेट्स रानी के रूप में कोरिया आने वाली अयोध्या की राजकुमारी को सम्मान देने के लिए उनके स्मारक जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब यूपी सरकार साइट को और विकसित करने के लिए धन आवंटित कर रही है।

सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए: राजदीप सरदेसाई

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच अब सीबीआई के पास पहुँच गई है। वहीं उनके लाखों फैंस और करीबी सुशांत के परिवार को न्याय दिलाने के लिए सोशल मीडिया पर #warriors4ssr के लगातार मुहिम छेड़े हुए हैं। सुशांत की मौत के पीछे किसी की संदिग्ध भूमिका की बात कही जा रही है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत का केंद्र बिंदु बनने के साथ मीडिया संगठनों ने ट्रायल शुरू कर दिया है और वो स्वयं के आकलन के साथ सामने आ रहे हैं। जबकि कई लोग और मीडिया के कुछ वर्ग अभी भी सवाल उठा रहे हैं कि असल में हुआ क्या था और क्या अभिनेता की असामयिक मृत्यु ‘आत्महत्या’ थी, वहीं कई लुटियन पत्रकार हैं जो अब सामने आ रहे सबूतों पर लीपापोती करने में व्यस्त हैं।

शनिवार (अगस्त 8, 2020) को पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने लल्लनटॉप के शो में सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मुद्दे पर बोलते हुए मृतक अभिनेता के खिलाफ चौंकाने वाली घिनौनी टिप्पणी की, जिसमें दावा किया गया, “सुशांत वैसे भी कोई बड़े अभिनेता नहीं थे जिसके लिए मुंबई पुलिस को इतने दबाव में होना चाहिए।”

शो के दौरान एंकर सौरभ द्विवेदी ने राजदीप सरदेसाई से सुशांत सिंह मामले पर उनकी राय पूछी तो उन्होंने कहा, “लोगों ने पुलिस पर अपना भरोसा खो दिया है। सार्वजनिक संस्थानों, IPS अधिकारियों पर सवाल उठ रहे हैं, चाहे वह मुंबई हो या बिहार पुलिस। क्या वे वास्तव में निष्पक्ष जाँच कर रहे हैं? चलिए इसके बारे में बहुत ईमानदारी से बात करते हैं। सुशांत सिंह राजपूत इतने बड़े स्टार नहीं थे कि मुंबई पुलिस पर इतना दबाव डाला जाए।”

राजदीप सरदेसाई से पूछा गया, “वह कौन है जो पुलिस बल पर जाँच करने के लिए दबाव डाल रहा है?”

राजदीप सरदेसाई के बयान चौंकाने वाले थे। यदि कोई राजदीप द्वारा दिए गए तर्क पर गौर करे तो इसका मतलब होगा कि वह कह रहे है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच कम ध्यान और समर्पण की हकदार है क्योंकि वह “वह बड़े स्टार” नहीं थे।

इसके अलावा, पहले भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जाँच को ‘सर्कस’ करार देते हुए, राजदीप सरदेसाई ने दावा किया कि यह मुद्दा अब मुंबई पुलिस और बिहार पुलिस के बीच एक दूसरी लड़ाई बन गई है। ‘वरिष्ठ पत्रकार’ ने आगे कहा कि व्यक्तिगत स्कोर तय करने के लिए कुछ लोगों के खिलाफ मीडिया ट्रायल चल रहा है।

बिहार डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय को जगह देने वाले मीडिया चैनलों पर विलाप करते हुए, राजदीप सरदेसाई ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी पर यह कहते हुए हमला किया कि उन्होंने बिना किसी सबूत के निराधार आरोप लगाए हैं। जाँच को लेकर दोनों राज्यों के पुलिस के बीच हो रही असामंजस्य को देखते हुए राजदीप सरदेसाई का सोचना है कि केस ने राजनीतिक एंगल ले लिया है और दोनों राज्यों की पुलिस अपनी अपनी सरकार के साथ साइडिंग कर रहे हैं।

गौरतलब है कि भाजपा नेता नारायण राणे ने हाल ही में कहा था कि सुशांत सिंह ने आत्महत्या नहीं की थी, बल्कि उनकी हत्या हुई थी। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत केस जुड़े कई सवालों को उठाया और मुंबई पुलिस पर आरोप लगाया कि आदित्य ठाकरे को बचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस सबूत छुपाने की कोशिश कर रही है। इस मामले में कहीं न कहीं आदित्य ठाकरे भी शामिल हैं। मुंबई पुलिस आदित्य को बचाने के लिए ऐसा कर रही है। राजदीप सरदेसाई ने नारायण राणे पर हमला किया और उन्हें सबूत पेश करने की चुनौती दी।

आजमगढ़ के कबीरुद्दीनपुर में क्षतिग्रस्त कर दी गई भगवान शिव की प्रतिमा: फरार हुए आरोपित, क्षेत्र में तनाव

आजमगढ़ स्थित एक शिव मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने की ख़बर आई है। अराजक तत्वों ने शुक्रवार (अगस्त 7,2020) को भगवान शिव की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया। जैसे ही ग्रामीणों को मंदिर में तोड़फोड़ की सूचना मिली, वो आक्रोशित हो गए। तनाव की खबर मिलते ही कई थानों की पुलिस के साथ पहुँचे वरिष्ठ अधिकारियों ने नई प्रतिमा लगाने का आश्वासन दिया।

‘न्यूज़ 18’ की ख़बर के अनुसार, पुलिस ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार करके कड़ी कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान ने इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। ये घटना अतरौलिया थाना क्षेत्र के शेखपुरा कबीरूद्दीनपुर गाँव की है, जहाँ ग्राम समाज की ही जमीन पर 15 वर्ष पहले शिव मंदिर की स्थापना की गई थी। श्रावण मास में यहाँ श्रद्धालुओं का मेला भी लगता था।

शिव मंदिर में फ़िलहाल कोई पुजारी नहीं था। ग्रामीण ही मंदिर के दरवाजे को खोलने और बंद करने का काम किया करते थे। श्रावण के महीने में मंदिर में ताला नहीं बंद किया जाता था। शुक्रवार की देर रात बदमाशों ने मंदिर में शिव प्रतिमा को क्षतिग्रस्त कर दिया और फिर फरार हो गए। सुबह जब महिलाएँ वहाँ पूजा करने पहुँची तो उन्होंने प्रतिमा को क्षतिग्रस्त पाया। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण वहाँ पहुँचे।

ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने इस मामले का विरोध किया। पुलिस ने ग्रामीणों से वार्ता कर के मामले को शांत कराया। खंडित शिव प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा लगवाने की बात भी कही गई है। बुढ़नपुर सीओ शीतला प्रसाद ने कहा कि किसी ने क्षेत्र में अशांति फैलाने के लिए इस तरह की करतूत की है। पुलिस दोषियों की पहचान कर के उनकी गिरफ़्तारी के प्रयास में लगी हुई है। फ़िलहाल वहाँ शांति बनी हुई है।

इसी तरह नवम्बर 2019 में आज़मगढ़ में ही महाराजगंज थाना क्षेत्र के सहदेव गंज रोड पर स्थित मुंडीलपुर प्राइमरी विद्यालय के पास स्थित शिव मंदिर में तोड़फोड़ कर के प्रतिमा को खंडित किया गया था। वहाँ शराब बोतलें भी पड़ी हुई मिली थी। पूजा करने गए ग्रामीणों ने इसे देख कर विरोध किया था, जिसके बाद पुलिस ने मूर्ति की मरम्मत कराई थी। अब फिर से ऐसी घटना सामने आना चिंता का विषय है।

अयोध्या राम मंदिर 1000 साल तक रहेगी पूरी तरह सुरक्षित: भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा भी कुछ बिगाड़ नहीं पाएगी

अयोध्या में बनने जा रहा राम मंदिर भूकंप रोधी होगा साथ ही 1000 सालों तक प्राकृतिक आपदाओं का सामना करेगा। राम मंदिर के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला पिलर काफी विशाल और मजबूत होगा। ये पिलर जितना जमीन के उपर होंगे उतनी ही गहरी इनकी नींव होगी। ये सभी भूकंप रोधी होंगे। भूकंप का एक भी झटका इनको छू भी नहीं पाएगा।

राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी चंपत राय ने शुक्रवार (अगस्त 7, 2020) को ये बातें कही। उन्होंने बताया कि राम मंदिर का डिजाइन जल्द बन कर तैयार हो जाएगा। अयोध्या में कारसेवकपुरम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह होगा कि इस पर किसी प्रकार के कोई प्राकृतिक आपदाओं का असर नहीं होगा। हजारों सालों तक इस पर भूकंप जैसे प्राकृतिक आपदाओं का कोई असर नहीं होगा।

चंपत राय ने बताया कि मंदिर के लिए जिस उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, उससे ये मंदिर 1000 साल तक आँधी तूफान सहने के बाद भी पूरी तरह सुरक्षित होगा। जिस तरह नदियों का पुल बनता है, उसी तरह नींव के पिलर खड़े होंगे। बस अंतर इतना होगा कि नींव में लोहे का प्रयोग नहीं होगा, बीम पत्थर की बनाई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि राम भक्तों को राम मंदिर के परिसर में खुदाई में मिले पुरातत्वों के भी दर्शन प्राप्त होंगे।

राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए फंड के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट अकाउंट में फिलहाल 42 करोड़ रुपए हैं जो लोगों की तरफ से मिले दान हैं। लोगों ने 1 रुपए से लेकर 1 करोड़ तक दान दिए हैं। देश भर से करीब 20,000 संतों ने राम मंदिर आंदोलन में भाग लिया था और ऐसे में हर किसी को भूमिपूजन में आमंत्रित करना संभव नहीं था।

उन्होंने बताया कि राम मंदिर निर्माण का प्रोजेक्ट लार्सन एंड टर्बो कंपनी को दिया गया है। चंपत राय ने कहा, “राम मंदिर निर्माण का मैप अपने अंतिम चरण में है। इस मैप को जल्द ही अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी से पास करा लिया जाएगा।”

पीएम मोदी के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, “इतने मुश्किल समय में भी चारों तरफ से आलोचना झेलने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या का दौरा किया और राम लला को साष्टांग प्रणाम किया और मंदिर का शिलान्यास किया। पूरे भारत के लोगों ने इस ऐतिहासिक क्षण को सेलिब्रेट किया।”

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर भूमिपूजन के दौरान “सियावर रामचंद्र की जय” से सम्बोधन शुरू किया था। पीएम मोदी ने कहा कि बरसों से टाट और टेंट के नीचे रह रहे हमारे रामलला के लिए अब एक भव्य मंदिर का निर्माण होगा। टूटना और फिर उठ खड़ा होना, सदियों से चल रहे इस व्यतिक्रम से रामजन्मभूमि आज मुक्त हो गई है। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चले आंदोलन में अर्पण भी था, तर्पण भी था, संघर्ष भी था, संकल्प भी था।

उन्होंने याद दिलाया कि राम हमारे मन में गढ़े हुए हैं, हमारे भीतर घुल-मिल गए हैं। कोई काम करना हो, तो प्रेरणा के लिए हम भगवान राम की ओर ही देखते हैं। उन्होंने कहा कि आप भगवान राम की अद्भुत शक्ति देखिए, इमारतें नष्ट कर दी गईं, अस्तित्व मिटाने का प्रयास भी बहुत हुआ, लेकिन राम आज भी हमारे मन में बसे हैं, हमारी संस्कृति का आधार हैं।

कर्नाटक: मंदिरों से दानपेटी हटाते पुजारियों का वीडियो फिर वायरल, सरकारी नियंत्रण का कर रहे थे विरोध

मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के खिलाफ लगातार आवाज उठती रही है। इसी कड़ी में वह वीडियो फिर से वायरल हो रहा है जब कर्नाटक के मंदिरों में पुजारियों ने दानपेटी हटा दी थी।

उस समय दानपेटी हटाते हुए पुजारियों ने कहा था कि अगर भक्तों का पैसा हिंदुओं के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता है तो फिर इन दानपेटियों का औचित्य ही क्या है? यह वीडियो पहली बार प्रजा टीवी ने 31 अक्टूबर 2015 को शेयर किया था।

अब यह फिर से वायरल हो रहा है। लेखिका अद्वैत काला ने भी ट्विटर पर इसे शेयर किया है। आप इसमें देख सकते हैं कि कैसे उस वक्त पुजारियों ने मंदिरों की कमाई पर सरकारी कब्जे का विरोध किया था। दानपेटी हटाते हुए उनका कहना था कि जब भक्तों का दान हिंदुओं या मंदिर पर खर्च नहीं हो रहे हैं तो फिर दानपेटी का फायदा ही क्या है?

असल में मंदिरों और उसकी आय पर सरकारी नियंत्रण किसी विशेष राज्य की ही समस्या नहीं है। भारत की सेकुलर-धर्मनिरपेक्ष सरकारों ने सबसे ज्यादा जमीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा है, लेकिन मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है। पुजारियों को उचित वेतन भी नहीं मिलता।

गौरतलब है कि हाल ही में केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के प्रशासन और उसकी संपत्तियों के अधिकारी को लेकर 13 जुलाई 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए मंदिर के प्रबंधन का अधिकार त्रावणकोर के पूर्व शाही परिवार को दिया था। इसके बाद से यह मुद्दा फिर से चर्चा में है।

जाकिर नाइक को निकालना चाहते हैं, लेकिन कोई भी देश उसे कबूल करने को तैयार नहीं है: मलेशिया के पूर्व PM महातिर मोहम्मद

ऐसा लगता है कि इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक की जहर से मलेशिया भी आजिज आ चुका है। पूर्व मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि उनका देश भारत को छोड़ किसी अन्य देश की तलाश में है जहाँ नाइक को भेजा जा सके। लेकिन कोई भी देश उसे कबूल करने को तैयार नहीं है।

बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग और घृणा फैलाने वाले भाषणों से चरमपंथ को उकसाने के आरोपित कट्टरपंथी इस्लामी उपदेशक नाइक की भारतीय अधिकारियों को तलाश है। 

वह 2016 में भारत से भाग गया था। बाद में वह मुस्लिम बहुल मलेशिया चला गया, जहाँ उसे स्थायी निवास की सुविधा दी गई थी। उस समय महातिर प्रधानमंत्री थे। महातिर एक समय में दुनिया में सबसे ज्यादा समय तक पीएम की कुर्सी पर रहने वाले नेता थे। फिलहाल वह सत्ता में वापसी करने की कोशिश में हैं। राजनीतिक वापसी के लिए प्रयासरत 95 वर्षीय महातिर ने दावा किया कि भगोड़ा उपदेशक ‘भारतीय जनता से सुरक्षित नहीं रहेगा।’

उन्होंने कहा कि वह उसे किसी सुरक्षित देश में भेजना चाहते हैं। डब्ल्यूआईओएन समाचार चैनल से बातचीत में महातिर ने कहा, “वह अभी यहाँ रह सकता है लेकिन हम उसे किसी अन्य देश में भेजना चाहेंगे, जहाँ वह सुरक्षित रहे। लेकिन कोई भी देश उसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।” 

यह पूछे जाने पर कि अगर वह फिर से प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह क्या नाइक को प्रत्यर्पित करेंगे, महातिर ने कहा, “हम उसे किसी ऐसे देश में भेजना चाहेंगे, जहाँ हमें लगता हो कि वह सुरक्षित रहेगा।” उन्होंने एक बार फिर नाइक को भारत भेजने से इनकार करते हुए कहा, “इस समय हमें लगता है कि वह भारतीय जनता से सुरक्षित नहीं रहेगा।’’

गौरतलब है कि भारत में जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग और कट्‌टरता को बढ़ाने के आरोप में केस दर्ज है। गिरफ्तारी की डर से वह 2016 में मलेशिया भाग गया। जून 2017 में कोर्ट ने नाइक को अपराधी घोषित किया था। उस पर मलेशिया में अल्पसंख्यक हिंदुओं और चीन के लोगों की भावनाएँ आहत करने का भी आरोप है।

मलेशिया में नाइक ने एक भड़काऊ भाषण दिया था। उसने कहा था कि मलेशिया में हिंदुओं को भारत के मुस्लिमों के मुकाबले 100 गुना ज्यादा अधिकार मिले हैं।

पिछले दिनों इस्लामी कट्टरपंथी जाकिर नाइक ने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर तोड़ने का समर्थन करते हुए कहा था कि पाकिस्तान अपनी राजधानी में श्रीकृष्ण मंदिर बनवाने के लिए पैसे देकर पाप कर रहा है। उसने कहा था कि एक मुस्लिम व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम पूजा स्थल के निर्माण में दान नहीं कर सकता है। इसके अलावा जाकिर ने कहा वह ऐसे किसी निर्माण का समर्थन भी नहीं कर सकता।

राजस्थान में बढ़ी सियासी सरगर्मी: BJP ने अपने 12 MLA को गुजरात शिफ्ट किया, राज्य पुलिस ने देशद्रोह मामले में बंद की फाइल

राजस्थान की राजनीति एक बार फिर से गरमा रही है। भाजपा अपने कुछ विधायकों को गुजरात ले गई है, जहाँ पार्टी की ही सरकार है। बता दें कि 14 अगस्त से राज्य में विधानसभा सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें बहुमत परीक्षण की माँग उठने की भी उम्मीद है। पार्टी को आशंका है कि उसके विधायकों को खरीदने की कोशिश हो सकती है, इसीलिए उसने ऐसा किया। 11 अगस्त को बसपा-कॉन्ग्रेस मर्जर पर भी कोर्ट का फैसला आना है।

इस मामले में राजस्थान हाइकोर्ट की सिंगल बेंच सुनवाई कर रही है। भाजपा को डर है कि अगर भाजपा में मिले 6 बसपा विधायकों को डिसक्वालीफाई किया जाता है तो उसके विधायकों के खरीद-फरोख्त का प्रयास हो सकता है, इसीलिए उसने इस निर्णय और विधानसभा सत्र से पहले ही विधायकों को गुजरात ले जाने का फैसला किया। इसी कड़ी में उदयपुर के 5 विधायकों को गुजरात ले जाया गया है। इससे वहाँ सरगर्मी फिर बढ़ गई है।

उधर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी सक्रिय हो गई हैं। राजनीतिक सरगर्मी के बीच वो धौलपुर से दिल्ली के लिए रवाना हुई हैं। राजे बुधवार (अगस्त 5, 2020) को दिल्ली के लिए निकलीं। माना जा रहा है कि दिल्ली दौरे के दौरान उन्होंने पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात की है। वो पिछले कुछ दिनों से राजधानी जयपुर में नहीं थीं, जिसके बाद उनके रुख को लेकर चर्चा चलने लगी थी। अब वो वरिष्ठ भाजपा नेताओं से मिल रही हैं।

उन्होंने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मिल कर भी नाराजगी जताई है और प्रदेश में अपने ख़िलाफ़ हुई बयानबाजी को लेकर चर्चा की। बता दें कि कुछ लोगों ने वसुंधरा राजे और अशोक गहलोत में मिलीभगत का आरोप लगाया था। प्रदेश में पार्टी के अलग-अलग गुट बनने के कारण वो नाराज़ हैं। कहा जा रहा है कि अब तक भाजपा ने अपने 12 विधायकों को गुजरात शिफ्ट किया है। उदयपुर से गुजरात की दूरी भी कम है।

उधर राजस्थान पुलिस की SOG ने राष्ट्रद्रोह के 3 मामलों की जाँच बन्द कर दी है, जिसमें पूर्व उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट को भी नोटिस भेजा गया था। ये मामला अशोक गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकने के आरोपों से जुड़ा हुआ था। अब इस मामले में केस बंद करते हुए फाइनल रिपोर्ट डाल दी गई है। भाजपा ने इस मामले में कॉन्ग्रेस पर हमला किया है। पार्टी ने कहा कि 28 दिन जाँच चली लेकिन कुछ नहीं निकला।

इधर राम मंदिर का भूमिपूजन, उधर ‘Burnol’ के सर्च में भारी उछाल: नॉर्थ-ईस्ट ने दिखाई सबसे ज्यादा दिलचस्पी

अयोध्या में 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमिपूजन हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें हिस्सा लिया और राम मंदिर की आधारशिला रखी।

भूमिपूजन से पूरा देश आह्लादित और भावुक था। पर कुछ ‘लिबरल’ यह कह कर विलाप करने में व्यस्त थे कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान के लिए घातक है।

लिबरलों के लिए यह सच स्वीकार करना काफी मुश्किल था कि भगवान राम आखिरकार अपनी जन्मभूमि पर विराजमान होंगे और वहॉं एक भव्य राम मंदिर बनाया जाएगा। लिबरलों के दुखी होने का एक कारण यह भी था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से हो रहा है।

इस्लामिक कट्टरपंथियों और लिबरलों पर कटाक्ष करते हुए कई हिन्दुओं ने उन्हें सुझाव दिया कि राम मंदिर निर्माण से अपने ‘जले हुए जख्मों’ पर वे ‘बर्नोल‘ (Burnol) लगा लें।

दिलचस्प बात यह है कि सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर, हिंदुओं और भगवान राम के भक्तों ने लिबरल और इस्लामवादियों को डिजिटल बर्नोल वितरित किया। वहीं कई लोग Google पर बर्नोल सर्च करने में व्यस्त थे। इसका नतीजा यह हुआ कि राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान 5 अगस्त को ‘बर्नोल’ के लिए सर्च रिजल्ट कई गुना बढ़ गए।

यदि कोई पिछले 90 दिनों के ग्राफ को देखता है, तो यह स्पष्ट है कि बर्नोल का सर्च रिजल्ट 5 अगस्त को काफी हद तक बढ़ गया था।

Google search for 'Burnol' in the past 90 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 90 days

बता दें कि पिछले 90 दिनों में सबसे ज्यादा ‘बर्नोल’ त्रिपुरा में सर्च किया गया। इसके बाद उत्तराखंड, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और झारखंड में सर्च किए गए।

Google search for ‘Burnol’ in the past 90 days

इसके अलावा, ज्यादातर लोगों ने पिछले 90 दिनों में ‘बर्नोल इमेज’ सर्च की और 5 अगस्त को यह आँकड़ा सबसे अधिक था।

पिछले 30 दिनों में ‘बर्नोल’ का सर्च

पिछले 30 दिनों में बर्नोल के लिए Google सर्च एक दिलचस्प ट्रेंड दिखाती है। Google से पता चलता है कि मेघालय में लोग “बर्नोल” शब्द की खोज में सबसे अधिक रुचि रखते थे, जो राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान 5 अगस्त को भी चरम पर था।

Google search for 'Burnol' in the past 30 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 30 days

मेघालय के बाद, पिछले 30 दिनों में ‘बर्नोल’ के लिए गूगल सर्च में सबसे ऊपर आने वाले राज्यों में झारखंड, गोवा, उत्तराखंड और हरियाणा है।

दिलचस्प बात यह है कि सबसे ज्यादा संबंधित प्रश्न ‘बर्नोल मीम्स’ और ‘बर्नोल क्या है’ के लिए थे। 5 अगस्त को ‘बर्नोल’ क्यों वितरित किया जा रहा था, यह देखते हुए Google ने बर्नोल सर्च से संबंधित टॉपिक को ही ‘related topics’ बना दिया।

Google search for 'Burnol' in the past 30 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 30 days

उस दिन Google के ‘related topics’ लिबरल, इंटरनेट मीम, भगवान राम और राम जन्मभूमि से संबंधित थे।

पिछले 7 दिनों में ‘बर्नोल’ का सर्च

पिछले 7 दिनों में गूगल सर्च पर काफी दिलचस्प परिणाम देखे गए। हालाँकि 5 अगस्त को 1:30 बजे दोपहर में बर्नोल का सर्च करने वाले शीर्ष राज्य झारखंड, असम, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और गोवा थे।

Google search for 'Burnol' in the past 7 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 7 days

हालाँकि, सबसे दिलचस्प बात यह है कि Google द्वारा विश्लेषण में  ‘related queries’ सेक्शन में कुछ दिलचस्प परिणाम सामने आए। इसके मुताबिक पिछले सप्ताह में, ‘बर्नोल’ के लिए सबसे लोकप्रिय संबंधित प्रश्न ‘आज तक बर्नोल’, ‘आज तक बर्नोल विज्ञापन’ आदि थे।

Google search for 'Burnol' in the past 7 days
Google search for ‘Burnol’ in the past 7 days

राम मंदिर भूमि पूजन के दौरान Aaj Tank Burnol विज्ञापन

दरअसल 5 अगस्त को भूमि पूजन के दौरान लाइव दिखाते समय की एक तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में पीएम मोदी पूजन कर रहे होते हैं और उसी समय स्क्रीन पर बर्नोल का विज्ञापन दिखाया जाता है। यह फोटो नेटिज़न्स के लिए मनोरंजन का एक स्रोत बन गई, क्योंकि पूजा से ‘लिबरल और इस्लामी जल रहे थे’, तो उनके लिए इस विज्ञापन को दिखाना उपयुक्त माना गया।

हालाँकि इंडिया टुडे ने बाद में बताया कि ये तस्वीर एडिट की हुई थी। इंडिया टुडे ने ट्वीट कर कहा कि चैनल ने राम मंदिर के भूमि पूजन के दौरान बर्नोल का कोई विज्ञापन नहीं चलाया था। इसलिए, वायरल होने वाली यह फोटो नकली थी।

हिन्दुओं को गाली, लेकिन बुर्का, शरिया, मौलाना, मदरसा पर चुप्पी: जस्टिस काटजू ने ‘सेकुलर’ गैंग को लताड़ा

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने हिन्दू धर्म को गाली देने वाले वामपंथी लिबरलों को जमकर लताड़ लगाई है। उन्होंने कहा है कि कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और उमर खालिद जैसे जेएनयू के पूर्व छात्र नेता हिन्दू कट्टरवाद पर जम कर निशाना साधते हैं, लेकिन बुर्का, शरिया, मदरसा और मौलानाओं की कभी निंदा नहीं करते हैं।

मार्कण्डेय काटजू ने इसके पीछे का कारण भी बताया है। उन्होंने कहा कि ये सब चुनावों में खास मजहब के वोट बैंक को ध्यान में रखकर किया जाता है। पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि इनके सेकुलरिज्म की सच्चाई भी यही है।

उन्होंने इस्लामी कट्टरवादी पत्रकार राणा अयूब का एक वीडियो भी शेयर किया है। बकौल काटजू, इस वीडियो में अयूब ‘सेकुलरिज्म चैंपियन’ हैं और हिन्दू कट्टरवाद का विरोध करती हैं, लेकिन इस्लामी पिछड़ेपन पर कोई बात नहीं करती।

काटजू ने कहा कि 2014 से भारत में जो बहुसंख्यकवाद शुरू हुआ, वो उससे पहले दशकों तक सेकुलर पार्टियों द्वारा की गई हरकतों का नतीजा था। उन्होंने इसके पीछे वोट बैंक के तुष्टिकरण को कारण बताया। उन्होंने गिनाया कि कैसे हिन्दू लॉ को तो हटा दिया गया, लेकिन शरिया और तीन तलाक को बरकरार रखा गया। उन्होंने राजीव गाँधी द्वारा शाहबानो पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलने की भी चर्चा की।

मार्कण्डेय काटजू ने इस्लामी कट्टरवादियों को लताड़ा

काटजू ने कहा कि पत्रकार आरफा खानम शेरवानी का सेकुलरिज्म ज्यादा से ज्यादा पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर के निर्माण का समर्थन करने तक ही सीमित है। उन्होंने पूछा कि क्या वो मदरसों, मौलानाओं, शरिया और बुर्का का विरोध कर सकती हैं, जिन चीजों ने समुदाय विशेष को हमेशा पिछड़ा बनाए रखा। उन्होंने कहा कि आरफा और अयूब अगर सच में सेकुलर हैं तो क्या वो इन चीजों को हटाने का समर्थन करते हुए मजहब विशेष को आधुनिक बनाने की कोशिश कर सकती हैं।

ज्ञात हो कि आरफा ने यह मानने से इनकार कर दिया था कि तबलीगी जमात वाले महिलाओं के साथ बदसलूकी या उनका शोषण कर सकते हैं। उसने कहा था कि जमाती नि:स्वार्थ भाव से सेवा करने वाले लोग हैं, जो मजहब/समाज की सेवा के लिए दुनियादारी, यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।

इसी तरह राणा अयूब ने एक ऐसा वीडियो शेयर किया था, जिसमें एक मस्जिद को जलाया जा रहा था। अयूब ने इस वीडियो को दिल्ली का बता कर पेश किया था।

मार्कण्डेय काटजू ने अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा कि जब वो हिन्दू कट्टरपंथ पर बोलते हैं तो दूसरे मजहब वाले उनकी खूब प्रशंसा करते हैं। लेकिन जैसे ही उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथ और ग़लत रिवाजों पर बोलना शुरू किया तो मजहब विशेष ने उन्हें साम्प्रदायिक बताया ही। साथ में ये भी कहा कि वो कभी सेकुलर नहीं बन सकते। उन्होंने कहा कि सेकुलरिज्म ‘वन वे ट्रैफिक’ नहीं हो सकता।