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ओवैसी ने ‘बाबरी विध्वंस’ के लिए प्रियंका पर साधा निशाना, कहा- खुशी है कि अब नाटक नहीं कर रहे

अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन पाँच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होगा। इस भूमि पूजन से पहले लगातार राजनीतिक बयानबाजी भी हो रही है। लेकिन इस सभी के बीच कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने बयान जारी करते हुए कहा कि भूमि पूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रियंका के इस ट्वीट को लेकर उनकी खिंचाई की। ओवैसी ने कॉन्ग्रेस पार्टी पर उस ‘आंदोलन में योगदान देने का आरोप लगाया जिसने बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया।’

ओवैसी ने प्रियंका गाँधी के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “खुशी है कि वे अब और नाटक नहीं कर रहे हैं। यह अच्छी बात है कि वो भी अतिवादी विचारधार को गले से लगा रही हैं। लेकिन भाईचारे के मुद्दे पर वो खोखली बातें क्यों करती हैं। शर्म मत कीजिए, आप इस बात पर गर्व महसूस करिए कि किस तरह से आपकी पार्टी ने उस आंदोलन में योगदान दिया, जिसकी वजह से हमारे बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया।”

प्रियंका गाँधी वाड्रा ने अपने ट्वीट में लिखा था, “सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बने।” इसके साथ प्रियंका गाँधी ने अपना वक्तव्य भी शेयर किया है, जिसके अंत में उन्होंने ‘जय सियाराम’ लिखा है।

प्रियंका गाँधी वाड्रा की ओर से ये बयान तब आया, जब कॉन्ग्रेस की ओर से राम मंदिर को लेकर अलग-अलग तरह के बयान सामने आ रहे थे। एक तरफ मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भूमि पूजन का समर्थन किया, साथ ही स्वागत भी किया। उन्होंने लोगों को भूमि पूजन की बधाई भी दी। इतना ही नहीं कमलनाथ ने अपने ट्विटर पर प्रोफाइल फोटो भी बदल ली है और भगवा वस्त्र में नज़र आ रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर दिग्विजय सिंह की ओर से भूमि पूजन के वक्त पर सवाल खड़े किए गए थे, उन्होंने कहा था कि अभी शुभ मुहूर्त नहीं है ऐसे में इसे कुछ वक्त के लिए टाल देना चाहिए।

इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह ने शुभ मुहूर्त ना होने और भाजपा नेताओं को कोरोना होने के कनेक्शन को जोड़ दिया था जिस पर काफी विवाद हुआ था। इन बयानों के बाद ही भाजपा की ओर से आरोप लगाया जा रहा था कि कॉन्ग्रेस एक बार फिर मंदिर निर्माण में अड़ंगा लगा रही है।

बांग्लादेशी वामपंथी नेता मनीषा चक्रवर्ती ने बकरीद पर 5 गायों को काटकर बाँटा गोमांस, अगले साल 30 की ‘गौ-कुर्बानी’ का वादा

बांग्लादेशी कम्युनिस्ट राजनेता डॉ. मनीषा चक्रवर्ती और उनके कॉमरेड साथियों ने शनिवार (अगस्त 1, 2020) को बांग्लादेश के बारिसल में बकरीद के अवसर पर कथित तौर पर गोमांस वितरित किया। मनीषा चक्रवर्ती, बांग्लादेश समाजवादी दल (Bangladesh Socialist party) की बारिसल डिस्ट्रिक्ट कमेटी की सदस्य सचिव हैं।

मनीषा इस ’नेक’ इरादे के पीछे के अपने उद्देश्यों को बताने के लिए फेसबुक पर लाइव आई। इस दौरान उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से गरीब लोग ईद का त्योहार न मनाने के लिए मजबूर थे। इसलिए उन्होंने और उनकी टीम ने यह सुनिश्चित किया कि ‘दलितों’ को पीछे न छोड़ा जाए।

लाइव के दौरान मनीषा को यह कहते हुए सुना गया, “एखना पंचति गोरू कुर्बानी दोव होयचा ओ सेत के प्रोसेस कोरा होइछे। (हमने 5 गायों की बलि दी है और मांस को परिष्कृत किया है)।”

उन्होंने कहा कि इतने कम समय के भीतर 5 गायों को मारना मुश्किल था, लेकिन उनके साथियों और स्वयंसेवकों के समूह मुश्किल काम को पूरा करने में सक्षम थे।

मनीषा ने कहा कि उसने बारिसल जिले के 30 वार्डों में से 50 ऐसे गरीब परिवारों की सूची तैयार की थी, जिन्हें पुलाव बनाने के लिए 1 किलो गोमांस और 1 किलो चावल दिया गया।

इस कार्य का श्रेय लेते हुए, मनीषा ने अपनी टीम द्वारा कड़ी मेहनत पर जोर देने के लिए गाय के मांस से भरे पैकेट की ओर कैमरे को घुमाया।

उन्होंने कहा कि उनकी टीम ईद के दिन सुबह 7 बजे से अथक प्रयास कर रही थी। जिला स्तर पर पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले एक व्यक्ति ने कहा, “पिछले साल, हमने लगभग 5000 परिवारों को खिलाया था … हमने 5 गायों को खरीदने और उसकी बलि देने के लिए धन जुटाया। हम सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने ऐसा करने में हमारी मदद की।”

बांग्लादेशी राजनेता ने अपनी फ्यूचर प्लानिंग बताते हुए कहा, “अगामी कुर्बानी ते 30 टा वार्ड ई मिनिमम 30 टा गोरू कुर्बानी दिबो (अगले वर्ष, ईद पर, हम जिले के 30 वार्डों में लोगों को खिलाने के लिए कम से कम 30 गायों की बलि देंगे)।”

मीर जाफ़र का उदाहरण देते हुए, जो एक गद्दार था और पलासी की लड़ाई में बंगाल के राजा सिराजुद्दुल्ला को धोखा दिया था, उन्होंने कहा, “षड्यंत्रकारी विफल हो गए हैं। इतिहास इस बात का प्रमाण है कि जो लोग लोगों के लिए काम करते हैं वे ही सफल हो सकते हैं।”

मनीषा ने आगे कहा, “हम एक परिवार हैं। हम दुःख और खुशी एक साथ साझा करते हैं … हम शोक और उत्सव एक साथ मनाते हैं …चूँकि यहाँ हर किसी ने इसे संभव बनाने के लिए अपना समय समर्पित कर दिया, यह वास्तव में बलिदान के अर्थ को दर्शाता है।”

चीन छोटे देशों का रहनुमा है, किसी के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता: नेपाल ने कहा- पहले हम गलत साइड में थे

नेपाल ने एक बार फिर से अपना भारत-विरोधी रवैया प्रदर्शित किया है। वहाँ के विदेश मंत्री प्रदीप ग्यावली ने चीन की तरफ अपने देश के बढ़ते झुकाव और भारत से लगातार बढ़ रही दूरी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि नेपाल पहले भारत की तरफ ज्यादा झुका हुआ था लेकिन अब वो सही रास्ते पर है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि नेपाल को ये ग़लती पहले ही सुधार लेनी चाहिए थी। बता दें कि नेपाल के प्रधानमंत्री ओली लगातार कुछ दिनों से विवादित बयान देकर भारत विरोधी रुख अपना रहे हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री ने कहा कि नेपाल और मौजूद कम्युनिस्ट सरकार पर चीन की तरफ झुकाव वाले आरोप परेशान करने वाले हैं। उन्होंने संतुलन और राष्ट्रीय हित की बात करते हुए इसका बचाव किया। हालाँकि, उन्होंने दोनों पड़ोसियों, नेपाल और चीन के साथ साझेदारी बढ़ाने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि नेपाल के लिए दोनों देश आवश्यक हैं और किसी भी एक की कीमत पर दूसरे को बढ़ावा नहीं दे सकते या अनदेखा नहीं कर सकते।

‘आजतक’ की ख़बर के अनुसार, इस दौरान उन्होंने कहा कि नेपाल ने चीन को जो समझ दी है वो इतिहास में काफी पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने यहाँ तक दावा किया कि नेपाल पहले ग़लत जगह झुक गया था और एकतरफा ढलान की ओर बढ़ रहा था, जिसे सही करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि अब नेपाल कनेक्टिविटी को विविधता दे रहा है। नेपाल ने हाल ही में चीन के साथ एक परिवहन नेटवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किया है।

उन्होंने भारत के साथ भी समझौते करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा:

“हमें मालूम है कि भारत-चीन के बीच तनाव है लेकिन 21वीं सदी को एशिया की सदी कहा जाता है। चीन और भारत के बीच जितनी अच्छी समझ विकसित हो और मेलजोल हो, क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि बढ़ेगी। ये एशिया ही नहीं बल्कि विश्व शांति के लिए एक उपलब्धि होगी। इसलिए, उनके बीच की दूरी कम होने दें और सहयोग को बढ़ावा दें। नेपाल भी यही चाहता है। अगर भारत और चीन के बीच कोई झगड़ा है तो हम किसी का पक्ष नहीं लेंगे। हम योग्यता और मुद्दे के आधार पर अपने रिश्तों को विकसित करते हैं।“

उन्होंने उत्पादन और परिवहन में होने वाले खर्च का भी रोना रोया और कहा कि लैंडलॉक्ड होने के कारण नेपाल को 20% ज्यादा खर्च देना पड़ता है। उन्होंने समझाया कि बांग्लादेश में किसी चीज की कीमत 100 रुपए है तो वह नेपाल में 120 रुपए हो जाती है। नेपाल के विदेश मंत्री ने चीन के साथ हुए समझौते की वजह इसी को बताया।

उन्होंने चीनी राजदूत पर टिप्पणी का विरोध करते हुए कहा कि चीन कभी किसी के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करता है, ये उसकी अघोषित नीति है। उन्होंने दावा किया कि चीन छोटे देशों की तरफदारी करता है।

बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल के विदेश मंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक भी की थी। इस बैठक में कोरोना महामारी, आर्थिक मदद और चीन की महत्वकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड को लेकर चर्चा हुई। जहाँ चीन ने पाकिस्तान की मिसाल देने से गुरेज नहीं किया। चीन ने पाकिस्तान को अपना अच्छा पड़ोसी देश बताते हुए कहा कि अच्छा पड़ोसी मिलना खुशनसीबी होती है। 

लव जिहाद: झूठी पहचान बताकर सुहेल ने रचा प्रेम प्रसंग, फिर दलित युवती को देने लगा निकाह और धर्म परिवर्तन की धमकी

उत्तरप्रदेश के मेरठ से एक बार फिर कथिततौर पर लव जिहाद का मामला सामने आया है। इस बार घटना भावनपुर के लाड़पुरा इलाके की है। यहाँ एक मुस्लिम लड़के ने एक दलित युवती को पहले झूठी पहचान बताकर प्रेमजाल में फँसाया और जब पोल खुली तो लड़की के घर से उसे जबरन उठाकर उससे निकाह करने की कोशिश की।

हालाँकि, मौके पर मौजूद परिवार ने उस वक्त विरोध करके लड़की को छुड़वा लिया और बाद में उन्होंने भावनपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, 31 जुलाई को समुदाय विशेष का युवक अपने साथियों के साथ दलित युवती को घर से उठाने पहुँचा था। जहाँ परिवार के लोगों ने मामले का विरोध करके लड़की को बचा लिया और बाद में युवती के पिता की तरफ से भावनपुर थाने में तहरीर दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर युवक को गिरफ्तार कर लिया।

आरोपित युवक का नाम रिपोर्ट में सुहेल बताया गया है। मामले में एफआईआर हो गई है। युवती के परिजनों ने बताया कि आरोपित सुहेल पिछले 6 माह से उनकी बेटी से नाम बदलकर मोबाइल पर इंटरनेट कॉल से बातचीत करता था।

उसने युवती को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया था। लेकिन जब युवती को सुहेल की असलियत के बारे में पता चला तो उन्होंने थाने में तहरीर दी। इसके बाद उनसे समझौता करवा लिया गया। फिर 31 जुलाई को वह कुछ साथियों के साथ घर पहुँच गया और लड़की का धर्म परिवर्तन कराने की धमकी देने लगा।

रिपोर्ट के मुताबिक युवती के माता-पिता का कहना है कि वह पिछले तीन दिनों से इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं। लेकिन पुलिस ने इस मामले को मामूली धाराओं में दर्ज किया है।

ऑपइंडिया ने इस संबंध में भावनपुर थाने में बात करने की कोशिश की। मगर, कॉल रिसीव न होने के कारण कोई जवाब नहीं मिल पाया। आगे हमें जैसे ही इस मामले पर जानकारी मिलेगी हम अपनी रिपोर्ट अपडेट करेंगे।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले मेरठ के परतारपुर इलाके में एक लव जिहाद का वीभत्स चेहरा सामने आया था। जब एक माँ-बेटी का शव जमीन से बरामद हुआ। इस मामले में पुलिस ने शमशाद को गिरफ्तार किया था।

शमशाद पर आरोप था कि उसने पहले प्रिया नाम की महिला को फँसाया और फिर झूठ बोलकर शादी की। जब हकीकत खुली तो वह उस पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाने लगा और एक दिन आपसी बहस में उसे और उसकी बेटी को मौत के घाट उतार दिया।

ऐसा होगा अयोध्या का भव्य राम मंदिर: इन 8 तस्वीरों में देखें अंदर से बाहर तक का अलौकिक दृश्य

अयोध्या का भव्य, दिव्य और अलौकिक राम मंदिर कैसा होगा, इसे आप 8 आधिकारिक तस्वीरों के माध्यम से समझ सकते हैं जिसे ट्रस्ट द्वारा जारी किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इन तस्वीरों को आधिकारिक रूप से जारी करते हुए कहा है कि श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर विश्व में भारतीय स्थापत्य कला का अनुपम उदाहरण होगा। इसके आंतरिक और बाह्य स्वरूप के कुछ और चित्र यहाँ देखें:

अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट ने आश्वासन दिया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर भव्यता और दिव्यता की अद्वितीय कृति के रूप में विश्व पटल पर उभरेगा। बता दें कि ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मंदिर होगा। 5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन के साथ ही इसके निर्माण की औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। ऊपर की तस्वीरों में आप इस मॉडल को बारीकी से देख सकते हैं।

सीएम योगी ने कहा है कि इस पावन घड़ी की प्रतीक्षा करते हुए पीढ़ियाँ ख़त्म हो गईं। राम के नाम में आस्था रखने वालों ने 5 शताब्दी तक इस अवसर की प्रतीक्षा की। तमाम कठिनाइयों के बावजूद राम मंदिर निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों ने हार नहीं मानी। उसका ही परिणाम है कि राम मंदिर बहुत जल्द आकार लेने वाला है। करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे प्रबल प्रतीक उनके सामने होगा।

उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम का एक वनवास सदियों पहले ख़त्म हुआ था और दूसरा अब ख़त्म हुआ है। इसके बाद वह अपनी जन्मभूमि स्थित सिंहासन पर विराजमान होंगे। इस पूरे अभियान और संघर्ष में कुछ नाम ऐसे थे जिनके उल्लेख के बिना पूरा विषय अधूरा है। 1989 में जब राम मंदिर निर्माण के लिए प्रतीकात्मक तौर पर भूमि पूजन हुआ। तब पहला फावड़ा किसी और ने नहीं बल्कि खुद महंत श्री अवेद्यनाथ ने चलाया था। 

PM मोदी भूमि पूजन करेंगे, इससे स्वर्णिम अवसर कुछ नहीं हो सकता: शिवसेना

शिवसेना ने मंगलवार (अगस्त 04, 2020) को कहा कि अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन समारोह को लेकर पूरा देश उत्साहित है और इससे बड़ा स्वर्णिम अवसर कुछ नहीं हो सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे।

शिवसेना ने अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में कहा है कि देश में COVID-19 संकट व्याप्त है, लेकिन यह भगवान शिव के आशीर्वाद से गायब हो जाएगा। हालाँकि, बुधवार (अगस्त 05, 2020) को उत्तर प्रदेश के अयोध्या में आयोजित होने वाले इस समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की कमी खलेगी क्योंकि वो कोरोना संक्रमण के कारण इसमें शामिल नहीं हो पाएँगे।

गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार (अगस्त 02, 2020) को कहा कि कोरोना के प्रारंभिक लक्षण दिखने के बाद उनका कोरोना वायरस पॉजिटिव पाए गए। उन्होंने कहा कि उनका स्वास्थ्य ठीक है और वह डॉक्टरों की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहे हैं।

अपने मुखपत्र में शिवसेना ने कहा कि वह उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। इसके अलावा, शिवसेना ने इशारा करते हुए कहा है कि हालाँकि, शाह आइसोलेशन में हैं, फिर भी राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार पर संकट मंडरा रहा है।

मराठी दैनिक सामना ने कहा कि गहलोत के पास खुश होने का कोई कारण नहीं है कि शाह आइसोलेशन में हैं क्योंकि भाजपा नेता जहाँ कहीं भी हों, वो ‘राजनीतिक सर्जरी’ करना जानते हैं।

इसमें कहा गया है कि भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी और राम मंदिर निर्माण अभियान से जुड़े प्रमुख नेता मुरली मनोहर जोशी दिल्ली से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्रीराम मंदिर निर्माण की लड़ाई के इस इस मधुर अंत के गवाह बनेंगे।

दरअसल, आडवाणी और जोशी को सलाह दी गई है कि वे अपनी उम्र और अयोध्या में COVID-19 के प्रकोप को देखते हुए समारोह में न जाएँ। शिवसेना ने कहा कि अभियान से जुड़ी एक अन्य नेता उमा भारती, COVID ​​-19 के डर से इस समारोह में शामिल नहीं होंगी, और सरयू के तट से समारोह देखेंगी। शिवसेना ने इस लेख में कहा है कि लेकिन भगवान श्रीराम के आशीर्वाद से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को कुछ नहीं होगा।

गौरतलब है कि कल 05, अगस्त को होने जा रहे अयोध्या में श्रीराम मंदिर भूमि पूजन की भव्य तैयारियाँ चल रही हैं। राम मंदिर भूमि पूजन कार्यक्रम में 5 अगस्त को हिस्सा लेने जा रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन घंटे तक अयोध्या में रहेंगे। सुबह 9 बजकर 35 मिनट पर पीएम मोदी दिल्ली से वह विशेष विमान के जरिए अयोध्या के लिए रवाना होंगे।

CPIM के पूर्व सांसद पर अफवाह फैलाने का आरोप: कहा- त्रिपुरा में लेनिन या टैगोर भी सुरक्षित नहीं, FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर झूठी अफवाहें फैलाने के आरोप में पूर्वी त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व CPIM सांसद जितेंद्र चौधरी और CPIM सोशल मीडिया पेजों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

पूर्व सांसद ने त्रिपुरा के एडीसी मुख्यालय में होजागिरी की एक त्रिपुरा लड़की की टूटी हुई मूर्ति की तस्वीर पोस्ट की थी और दावा किया था कि मूर्ति को कुछ बदमाशों ने तोड़ दिया था।

त्रिपुरा पुलिस ने सीपीआईएम नेता के दावे का खंडन करते हुए अपने फेसबुक पेज में कहा कि सोशल मीडिया पर टूटी हुई मूर्ति के बारे में अफवाहें फैलाई जा रही हैं। इस अफवाह के जरिए दो समुदायों के बीच विवाद पैदा करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने बताया कि यह मूर्ति भारी बारिश और तूफान के कारण नीचे गिर गई। उस समय एक पुलिस पार्टी भी वहाँ मौजूद थी जब वह नीचे गिर गई थी। राधापुर पुलिस स्टेशन की डायरी में इस संबंध में रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया है।

पुलिस ने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और न ही फैलाएँ। इस तरह की अफवाहें फैलाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस तरह समुदायों के बीच मतभेद पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

FIR दर्ज होने के बाद जितेंद्र चौधरी ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार त्रिपुरा की संस्कृति को बर्बाद कर रही है और विरोध करने वालों पर केस दर्ज कर रही है।

चौधरी ने कहा, “यह अफसोस की बात है कि कोई भी लेनिन, कार्ल मार्क्स, यहाँ तक ​​कि रवींद्रनाथ टैगोर, महाराजा बीर बिक्रम भी इस शासन के तहत सुरक्षित नहीं है और जो कोई भी आवाज़ उठाना चाहते हैं, उन्हें या तो मौखिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है या फिर उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाता है।”

सीपीआईएम नेता जितेंद्र चौधरी ने कहा, “1 अगस्त को होजागिरी की एक महिला की मूर्ति को तोड़ दिया गया। इसके बाद मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्ट के एक वर्ग का कहना था कि यह रात में कुछ बदमाशों द्वारा किया गया था। मैंने पूछा था कि इस तरह की घटनाएँ क्यों हो रही हैं। ”

उन्होंने आगे कहा, “होजागिरी हमारे राज्य का प्रतीक है, इस तरह के कृत्य हमारी संस्कृति पर हमले हैं। त्रिपुरा ने इस तरह के असहिष्णु व्यवहार को कभी नहीं अपनाया लेकिन जब से भाजपा सत्ता में आई है, स्थिति बदल गई है।”

पूर्व सांसद ने त्रिपुरा को राजनीतिक प्रयोगों की एक प्रयोगशाला बनाने के लिए सत्ताधारी सरकार पर निशाना साधा, जिसे बाद में “हिंदू राष्ट्र” में लागू किया जाएगा।

आगे जितेंद्र चौधरी ने कहा, “लोगों को चुप कराने, समृद्ध संस्कृति पर हमले शुरू करने, हमारे अधिकारों का उल्लंघन करने, पुलिस को अपनी इच्छा के अनुसार इस्तेमाल करने और हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य पर नजर रखने के लिए झूठे मामलों में FIR दर्ज कराने जैसे प्रयोगों के लिए त्रिपुरा को प्रयोगशाला के तौर पर चुना है। हालाँकि, मैं अपना केस लड़ूँगा क्योंकि संविधान सभी के लिए समान है।”

नहीं दिखेगी टाइम्स स्क्वायर पर भूमिपूजन की तस्वीर: मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद कंपनी का फैसला, कट्टरपंथी खुश

अयोध्या में राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीरें अब न्यूयॉर्क की टाइम्स स्क्वायर इमारत पर नजर नहीं आएँगी। खबर है कि जिस विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’ के पास बिल्डिंग पर मुख्य बिल बोर्ड मैनेज करने का अधिकार था उन्होंने यूएस के मुस्लिम गुटों की आपत्ति के बाद इमारत पर श्रीराम की तस्वीर डिस्प्ले पर दिखाने से मना कर दिया।

संयुक्त राज्य अमेरिका में मुस्लिम समूहों के गठबंधन में से एक समूह ने कहा कि विज्ञापन कंपनी ‘ब्रांडेड सिटीज’, जो टाइम्स स्क्वायर में नैस्डैक के लिए डिजिटल विज्ञापन बोर्ड का प्रबंधन करती है और प्रमुख डिजिटल बोर्ड चलाती है, उसने अपने बिलबोर्ड पर भगवान राम की तस्वीरें दिखाने की योजना बनाने वाले हिंदू समूहों के लिए विज्ञापन चलाने से इनकार कर दिया।

क्लेरियन इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार मुस्लिम समूह इमामनेट ने दावा किया कि वह लोग न्यूयॉर्क के मेयर पर, न्यूयॉर्क के सिटी काउंसिल पर, गवर्नर पर, सीनेटर और सभासदों पर दबाव बना रहे थे कि वह हिंदू समुदाय के लोगों को टाइम्स स्कॉयर के बिलबोर्ड्स पर राम मंदिर के भूमिपूजन की तस्वीर न दिखाने दें।

इमामनेट के अध्यक्ष डॉ शईक उबैद ने बताया कि ऐड कंपनी ने भूमिपूजन समारोह के विज्ञापन को बिल्डिंग पर दिखाने से मना कर दिया है- ये बहुलवाद, मानवाधिकार, और कानून नियमों की जीत है।

इसके बाद डॉ उबैद ने अमेरिका में दक्षिणपंथी हिंदू विचारधारा के उदय के परिणामों के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि विज्ञापन विवाद ने उन्हें प्रभावशाली अमेरिकियों को विहिप और बजरंग दल के साथ मोर्चे पर तैनात भारत के आरएसएस के बारे में शिक्षित करने का अवसर दिया है।

मुस्लिम समूह की ओर से आए बयान के अनुसार ब्रांडेड सिटीज के डेनिस लेवाइन ने इस फैसले की पुष्टि की है। साथ ही बताया कि कंपनी ने उन्हें आश्वस्त किया है कि ब्रांडेड सिटीज व नैस्डैक बाबरी मस्जिद के विध्वंस का विरोध करते हैं और कभी भी किसी भी वर्चस्ववादी समूहों को अपने विज्ञापन चलाने की अनुमति नहीं देंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले खबर आई थी कि 5 अगस्त के ऐतिहासिक मौके पर यादगार बनाने के लिए न्यूयॉर्क में कोशिशें की जा रही हैं जिसके चलते 5 अगस्त को वहाँ की प्रतिष्ठित इमारत टाइम्स स्क्वायर पर भगवान राम की भव्य तस्वीर प्रदर्शित होगी।

अमेरिका-भारत सार्वजनिक मामलों की समिति के अध्यक्ष जगदीश सेव्हानी ने इस मामले में बताया था कि 5 अगस्त को न्यूयॉर्क में ऐतिहासिक क्षण मनाने की व्यवस्था की जा रही है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या में राम मंदिर की आधारशिला रखेंगे।

बता दें, मुस्लिम समूहों के विरोध के बाद एक ओर जहाँ ब्रांडेड सिटीज की ओर से यह फैसला आया है। वहीं ट्विटर पर कट्टरपंथी इसे अपनी जीत मान रहे हैं। आतिश तासिर जैसे लोग इस खबर की पुष्टि पूछते हुए लिख रहे हैं, “क्या यह सच है? कोई बता सकता है क्या? अगर हाँ, तो यह बहुत बड़ी जीत है। हिंदुत्व के दुष्ट नाजी प्रेरित पंथ का न्यूयॉर्क में कोई स्थान नहीं है। “

राम सब में हैं, रामायण हमारी संस्कृति है, भूमि पूजन एकता का कार्यक्रम बनेगा: प्रियंका गाँधी भी बनीं ‘रामभक्त’

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भगवान राम के मंदिर बनाने की औपचारिक शुरुआत बुधवार (अगस्त 5, 2020) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमिपूजन में मंदिर की नींव रखने के साथ ही हो जाएगी। इसी क्रम में अब कॉन्ग्रेस नेता भी एक-एक कर के रामभक्त बनते जा रहे हैं। इसमें नया नाम प्रियंका गाँधी का जुड़ा है, जिन्हें राज्य में पार्टी के पुनरुद्धार की कमान सौंपी गई है। प्रियंका गाँधी ने अयोध्या में राम मंदिर बनने के स्वागत किया है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि सरलता, साहस, संयम, त्याग, वचनवद्धता, दीनबंधु राम नाम का सार है। राम सबमें हैं, राम सबके साथ हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि भगवान राम और माता सीता के संदेश और उनकी कृपा के साथ रामलला के मंदिर के भूमिपूजन का कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व और सांस्कृतिक समागम का अवसर बनें। बता दें कि कॉन्ग्रेस पर अक्सर आरोप लगते हैं कि उसने सत्ता में रहते राम के अस्तित्व को नकार दिया था।

इतना ही नहीं, प्रियंका गाँधी ने तो यहाँ तक कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप की संस्कृति में रामायण की गहरी और अमिट छाप है। उन्होंने कहा कि भगवान राम और सीता की गाथा हज़ारों वर्षों से भारत की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा रही हैं। उन्होंने नीति, कर्तव्यपरायणता, धर्म, प्रेम, पराक्रम, सेवा और उदात्तता का प्रेरणास्रोत रामायण को ही करार दिया। उन्होंने राम ही नहीं बल्कि श्रीहरि के अन्य रूपों का भी गुणगान किया।

उन्होंने यहाँ तक कहा कि भगवान राम का चरित्र युगों-युगो से लोगों को जोड़ने का माध्यम रहा है। उन्होंने शबरी, सुग्रीव, वाल्मीकि, भास, कम्बन, कबीर, तुलसीदास, रैदास और वारिस अली शाह का जिक्र करते हुए कहा कि राम सबके हैं, सबके दाता हैं। मैथिलीशरण गुप्त और महाप्राण निराला जैसे कवियों का जिक्र करते हुए प्रियंका गाँधी ने राम के लिए उनके द्वारा दिए गए वक्तव्यों को याद किया।

जहाँ एक तरफ दिग्विजय सिंह और प्रमोद कृष्णन सरीखे कॉन्ग्रेस नेता बुधवार को होने वाले अयोध्या भूमिपूजन का विरोध करते हुए मुहूर्त पर सवाल उठा रहे हैं, प्रियंका ने इसका स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि रामलला का ये कार्यक्रम राष्ट्रीय एकता, बंधुत्व, सांस्कृतिक समागम का कार्यक्रम बनेगा। प्रियंका गाँधी ने कहा कि चारों दिशाओं में रामकथा अनगिनत रूपों में लोकप्रिय होती आ रही है।

बता दें कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस नेता कमलनाथ आज 4 अगस्त के दिन एक बड़ा आयोजन कर रहे हैं। 5 अगस्त के दिन होने वाले राम मंदिर के भूमि पूजन से एक दिन पहले वह भोपाल स्थित अपने आवास पर हनुमान चालीसा का पाठ कराएँगे। इतना ही नहीं, इस दिन मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के तमाम नेता अपने घरों या स्थानीय मंदिरों में हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं।

सुशांत सिंह केस में निकल आया 8 जून का नया एंगल: बिहार सरकार करेगी CBI जाँच की सिफारिश

सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले में अब तक कई एंगल हमारे सामने आ चुके है। ताजा खुलासा रिपब्लिक टीवी की डिबेट में हुआ है। इस डिबेट में बिहार डीजीपी के अलावा सुशांत सिंह राजपूत को इंसाफ दिलाने के लिए चलाए जा रहे कैंपेन के प्रशांत भी शामिल रहे।

प्रशांत ने बताया कि उन्हें सुशांत की मैनेजर दिशा के एक मित्र का फोन आया था। फोन पर उन्होंने कहा, “मैं दिशा का मित्र बात कर रहा हूँ। मैं बहुत दुखी हूँ कि मैं कोई एक्शन नहीं ले पा रहा हूँ। आप लोग इस पर बहुत काम कर रहे हैं और शायद मैं आपकी कुछ सहायता कर सकूँ। लेकिन मैं चाहता हूँ मेरा नाम इसमें न आए। क्यूँकि मैं मुंबई में रहता हूँ और इन सब चीजों से डरता हूँ।”

प्रशांत दिशा के मित्र के हवाले से बताते हैं कि दिशा 8 जून को एक पार्टी में गई थी। वहाँ बॉलीवुड के कई कलाकार और कुछ नेता-मंत्री भी शामिल थे। उस पार्टी में दिशा के साथ दुर्व्यवहार किया गया। इसके बाद दिशा ने समय निकालकर सुशांत को फोन किया। जहाँ सुशांत ने सब बातें सुनकर उन्हें जल्द से जल्द वहाँ से निकलने को बोला और कहा कि तुम निकलो फिर कुछ एक्शन लेते हैं।

इसके 1 घंटे बाद संदीप का कॉल सुशांत को गया। सुशांत को उन्होंने बताया कि उनकी एक्स मैनेजर ने सुसाइड कर ली है। इस पर हैरानी जताते हुए सुशांत कहते हैं कि ऐसा तो हो ही नहीं सकता, क्योंकि दिशा ने सोचा ही नहीं था कि उसे सुसाइड करना है। जिसे सुनकर संदीप को यह मालूम चल गया कि सुशांत को सारी बातें मालूम हैं। फिर संदीप ने अपने सभी लोगों से डिस्कस किया।

प्रशांत कहते हैं कि दिशा के दोस्त ने उनसे कहा कि रिया का अगले दिन सुशांत से झगड़ा भी हुआ। सुशांत अपनी बातें रिया को समझाना चाहते थे। लेकिन रिया उनकी बातों को सुनना नहीं चाह रही थी, चूँकि शायद रिया का भाई भी उस 8 जून की पार्टी में शामिल था। इस नोंक झोंक के बाद ही दोनों अलग हुए।

गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत के इस पूरे मामले में जहाँ रिया चक्रवर्ती पर लगातार शिकंजा कसता जा रहा है, वहीं बिहार पुलिस की सक्रियता ने मुंबई पुलिस को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।

इसी बीच बिहार सरकार भी सुशांत के पिता के कहने पर उनको इंसाफ दिलाने के लिए आगे आई है। जेडीयू प्रवक्ता संजय सिंह ने बताया है कि बिहार सरकार सुशांत मामले में सीबीआई जाँच के लिए सिफारिश करेगी। उनके अलावा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी कहा है कि वह सुशांत मामले में सीबीआई जाँच की सिफारिश करेंगे।

उधर, महाराष्ट्र सरकार ने सुशांत मामले में किसी भी प्रकार के कागज बिहार पुलिस को देने से साफ इंकार किया है। उनका कहना है कि बिहार पुलिस के अधिकार क्षेत्र में ये केस नहीं आता। मुंबई पुलिस अपनी जाँच कर रही है। हम इस केस को किसी और जाँच एजेंसी को नहीं सौंपेंगे।