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मंदिर निर्माण एक धार्मिक घटना ही नहीं, संस्कृति का पुनर्जागरण है

अगर मंदिर बन नहीं रहा होता और हम मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में लिखने बैठ जाते, तो उसे पढ़ता कौन? राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण शुरू होने के बहाने, हमें अपने मंदिरों की स्थापत्य शैली के बारे में बात करने का मौका भी मिल जाता है। ऐसा नहीं है कि इनके बारे में पढ़ा नहीं जाता या बताया नहीं जाता। हाँ ये जरूर है कि आम आदमी की पहुँच से इस जानकारी को दूर रखा गया है।

भारत में मंदिरों का निर्माण 2300 साल से अधिक पुराना है। इतना समय मिलेगा तो जाहिर कि ये काफी विकसित शास्त्र के रूप में बनकर तैयार हो गया होगा। शुरुआती दौर में मंदिर के लिए देवगृह, देवस्थान, देवालय जैसे शब्द प्रयुक्त होते थे। मंदिर निर्माण की जो तीन विशिष्ट शैलियाँ हैं- नागर, द्रविड़ और बेसर, उनका विकास अलग अलग क्षेत्रों में हुआ।

भारत की विविधता का ये धोती या साड़ी जैसा ही उदाहरण है। धोती अलग अलग तरीके से पहनी जाती है, महाराष्ट्र के साड़ी पहनने के तरीके और बंगाल वाले में काफी अंतर है। इस विविधता को स्वीकार करते हुए भी मूल में एक होना सनातन का लक्षण है। हम “वन साइज फिट्स ऑल” की जबरदस्ती के समर्थक तो कभी रहे नहीं ना?

उत्तरी से लेकर मध्य भारत तक के नगरों में जिस प्रकार के मंदिर बनते थे, उन्हें नगर शब्द के आधार पर ही नागर शैली का नाम दिया गया। द्रविड़ शैली नर्मदा के निचले हिस्से से दक्षिणी भारत तक अधिक प्रसिद्ध है और बेसर इन दोनों शैलियों का मिला जुला रूप है।

अगर भारत में तीर्थों पर या मंदिरों के आस-पास विदेशों (और अब भारत) में प्रचलित “हेरिटेज वॉक” जैसा कुछ ज्यादा चलता तो इन मंदिर निर्माण शैलियों के बारे में जानकारी आम होती। अफ़सोस कि कक्षा के बाहर, वैकल्पिक पद्धतियों से शिक्षा देने की नीति भारत में कभी शुरू नहीं हुई और ऐसी सभी जानकारी आईएएस/यूपीएससी की तैयारी करने वालों तक सिमटी रही।

सोशल मीडिया के दौर और इंटरनेट से फैलती सूचनाओं के दौर ने इसे थोड़ा बदला है, वरना मंदिर निर्माण की किताबें भी बहुत महंगी होती हैं और अधिकतर आम लोगों की पहुँच से बाहर ही होंगी। मंदिर निर्माण पर चर्चा एक तो करीब 70 साल पहले हुई होगी, जब सोमनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार शुरू हुआ था। अब भी यदा-कदा उस पर बात होती रहती है।

90 के दशक में जब राम-जन्मभूमि मंदिर का निर्माण फिर से करवाने का आंदोलन जोर पर था, करीब-करीब तभी से एक मंदिर का प्रारूप सा सबने देख रखा है। ये तीन शिखरों वाला मंदिर था और जैसा ये दिखता था, करीब-करीब वही “नागर” शैली है। इसके वास्तुकार चंद्रकांत भाई सोमपुरा एक ऐसे परिवार से आते हैं, जो करीब 15 पीढ़ियों से मंदिर निर्माण से जुड़ा है।

अपने पिता के साथ मिलकर इन्होंने ही सोमनाथ मंदिर का नक्शा भी बनाया था। अगर आपने दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर देखा है, तो वो भी इनका ही बनाया हुआ है। पिछले वाले नक़्शे से अब का नक्शा थोड़ा अलग है, लेकिन है ये भी नागर शैली ही। ये मंदिर उँचाई में 8 भागों में बाँटे गए हैं – मूल (आधार), गर्भगृह मसरक (नींव और दीवारों के बीच का भाग), जंघा (दीवार), कपोत, शिखर, गल, आमलक और कुंभ (शूल सहित कलश)।

मंदिर निर्माण में मुख्यत: पत्थर का प्रयोग होता रहा है, किंतु ईंटों के भी प्रचुर प्रयोग मिल जाते हैं। मौर्य काल में काष्ठ मंदिरों के भी साक्ष्य हैं। पहाड़ी क्षेत्र में लकड़ी के मंडपों का प्रयोग अधिक देखने को मिलता है।

नेपाल के काठमांडू का नामकरण ही काष्ठ मंडप शब्द से हुआ है। समतल क्षेत्र के मंदिरों में पत्थरों का प्रयोग अधिक है। नागर शैली के मंदिरों के 8 प्रमुख अंगों में से अधिष्ठान वो मूल आधार होता है, जिस पर सम्पूर्ण भवन खड़ा किया जाता है। शिखर मंदिर का शीर्ष भाग अथवा गर्भगृह का ऊपरी भाग, कलश शिखर का शीर्षभाग होता है, जो कलश ही या कलश जैसा होता है।

ताजमहल का ऊपरी भाग देख लें, तो वहाँ भी कलश की संरचना नजर आ जाएगी। आमलक शिखर के ऊपरी हिस्से पर कलश के ठीक नीचे का वर्तुलाकार (थाली-चकरी जैसा) भाग होता है। इसके नीचे ग्रीवा होती है जो शिखर से ढलान के जैसी दिखती है।

कपोत किसी द्वार, खिड़की, दीवार या स्तंभ का ऊपरी छत से जुड़े भाग को कहते हैं। फिर आता है मसूरक जो कि नींव और दीवारों के बीच का भाग होता है, जंघा विशेषकर गर्भगृह की दीवारों को कहते हैं। इनके अलावा भी कई अलग-अलग भागों के नाम होते हैं, जैसे अधिष्ठान का ऊपरी प्लेटफॉर्म जगती कहलाता है।

मूल मंदिर के शिखर के बाद थोड़ी सी जगह छोड़कर मंडप भी बनते हैं। ये भी क्रमश: घटती ऊँचाई व विस्तार के साथ महामंडप, मंडप, अर्धमंडप कहलाते हैं। द्वार व स्तंभ भी स्वरूप के हिसाब से अलग-अलग नाम वाले होते हैं, जैसे तोरण द्वार।

शिखर में जुड़ने वाले उपशिखर उरुशृंग कहे जाते हैं। शिखर को विमान भी कहा जाता है। मंदिर के विभिन्न स्थानों पर गवाक्ष भी दिख सकते हैं। अगर बहुत गौर से देखा जाए तो नागर शैली में वर्गाकार (स्क्वायर) क्षेत्र पर निर्माण होता है और द्रविड़ शैली में आयताकार (रेक्टेंगल)। 

इस आधार पर जन्मभूमि मंदिर को नागर कहें या द्रविड़, या बेसर, ये सोचना पड़ेगा। नागर शैली में गर्भगृह के सामने मंडप होता है, द्रविड़ में मंडप का वहीं होना आवश्यक नहीं और मंडप पर शिखर भी नहीं होता। इस आधार पर जन्मस्थान मंदिर नागर होगा। द्वार के लिए नागर शैली के मंदिरों में तोरण द्वार होते हैं और द्रविड़ में गोपुरम होता है। द्रविड़ शैली में मंदिर परिसर में ही जलाशय (जिसे कल्याणी या पुष्करणी कहते हैं) आवश्यक होता है, नागर शैली में ये आवश्यक नहीं है।

जैसी बहसें हाल में मंदिर निर्माण के शुरू होने के मुहूर्त को लेकर छिड़ी हुई दिखी, वैसी बहसें कभी स्थापत्य या वास्तु पर नहीं दिखीं। संभवतः इसका एक कारण ये होगा कि शिक्षा नीति बनाने वालों ने 70 साल तक स्थापत्य से जुड़ी भारतीय जानकारी को छुपाकर रखा होगा। इसके बाहर आने पर वैज्ञानिक गणना जैसी चीज़ों में भारतीय कितने सक्षम थे, इस पर भी बात करनी पड़ती, जो कि उनके बनाए नैरेटिव पर फिट नहीं आती थी।

अपर गंगा कनाल (हरिद्वार से कानपुर) का निर्माण 1842 में आरम्भ हुआ व 1854 में पूरा हो गया। 1858 तक भारत पर राज ईस्ट इंडिया कम्पनी का था, ब्रिटेन का नहीं। एक ट्रेडिंग कम्पनी क्यूँ इतना इन्वेस्ट करेगी?

जाहिर है लोग आपसी सूझ-बूझ से इतने बड़े निर्माण आराम से कर सकते थे। इनके बारे में चर्चा, शिक्षा के सबके लिए नहीं होने, सिर्फ ब्राह्मणों तक सीमित होने, के दावे की भी पोल खोल देता। भारत का सबसे पहला इंजीनियरिंग कॉलेज भी नहर की देखभाल और मरम्मत करने वालों के लिए बनाए जाने के नाम पर ही बनवाया गया था।

कहने का मतलब ये है कि आँखें खोलकर आपको देखना होगा। अपने आस पास देखना और सवाल पूछना भी हमें ही शुरू करना होगा। जन्मभूमि मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक घटना ही नहीं है। ये संस्कृति का पुनः जागरण है।

इसके बनने से इतनी दिक्कत इसलिए भी है क्योंकि विदेशियों की फेंकी हुई बोटियों पर पलने वाले कुत्तों की दशकों की मेहनत पर ये एक झटके में पानी फेर देता है। बाकी अपनी आँखों से शेखुलरिज्म का टिन का चश्मा उतारिए तो शायद नजर आए। निर्माण में ढाई साल तो कम से कम लगेंगे ही, इतने वक्त में भी काफी कुछ बदल सकता है।

(इंटरनेट से साभार ली गई तस्वीर में एक, इस्लामिक आक्रमण में तोड़ दिए गए हिस्सा हम्पी के हजार राम मंदिर के अवशेषों का है, जिसे 1970 में लिया गया था और दूसरा हिस्सा उसके पुनः निर्माण के बाद का है। नागर थी, द्रविड़ या बेसर, ये आप खुद तय कर लें।)

हिंदू मंदिर
चित्र साभार: इंटरनेट

भूमिपूजन की बधाई, हनुमान चालीसा पाठ: सावरकर ने कहा था- हिन्दू एक हुए तो कॉन्ग्रेसी कोट पर जनेऊ पहनेंगे

आज जब मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ रामभक्त और हनुमान भक्त बन गए हैं और छत्तीसगढ़ में कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रामायण से जुड़े पर्यटन स्थलों को विकसित करने की बातें कर रहे हैं, हमें विनायक दामोदर सावरकर का एक बयान याद करने की ज़रूरत है। सावरकर ने तब कहा था कि उन्होंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को न सिर्फ शरीर पर बल्कि कोट पर जनेऊ पहन कर संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करने के लिए बाध्य कर दिया।

सावरकर ने यह बात तत्कालीन राजनीति के संदर्भ में कही थी लेकिन ये आज भी प्रभावी है। महाराष्ट्र के सावरकर स्मारक के अध्यक्ष और वीर सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने ‘विश्वास न्यूज़’ से बात करते हुए उनके इस बयान की पुष्टि की। उन्होंने जुलाई 10, 1943 को अविभाजित भारत के सिंध प्रान्त में मुस्लिम लीग के साथ हिन्दू महासभा के गठबंधन को लेकर कॉन्ग्रेसी दुष्प्रचार को जवाब देते हुए ये बातें कहीं थीं।

उनके इस बयान का जिक्र 10 वॉल्यूम वाले ‘समग्र सावरकर’ के वॉल्यूम-8 (ऐतिहासिक निवेदन) में पृष्ठ संख्या 485-89 पर भी है। यहाँ सावरकर लिखते हैं:

“परंतु यह टिप्पणी मन:पूर्वक की जाती तो मुझे प्रसन्नता होती। क्योंकि हिंदुओं पर यदि अत्यंत घिनौना, हीन आरोप करना हो तो वह ‘पाकिस्तानानुकूल’ और लीग को अथवा ‘मुस्लिमों’ को संतुष्ट करने के लिए हिंदू हित का घात करनेवाला यह है, यह बात सीखने के लिए मैंने कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को अंत में बाध्य किया। जैसा मैं बार-बार कहता था, उनके अनुसार कॉन्ग्रेसवादी हिंदुओं को केवल शरीर पर नहीं, कोट पर जनेऊ पहनकर हिंदू संघटनी सिद्धांतों का प्रचार करना पड़ा!”

“परंतु इन नेताओं के नेता बंदीशाला से मुक्त होने पर हिंदुस्थान के बँटवारे के करारनामे पर हस्ताक्षर करने के लिए और कॉन्ग्रेस की आधी-अधूरी राष्ट्रीयता की वेदी पर हिंदू हित की बलि चढ़ाने जब लीग के शिविर में जाऍंगे तब ये लोग उनका आदर-सत्कार कैसे करेंगे-यह विचार मेरे मन में आने पर उन लोगों पर दया आती है। (चार वर्षों के पश्चात जून 1947 में ऐसा ही घटा।)”

कुछ ही दिनों पहले कमलनाथ ने राम मंदिर के भव्य निर्माण का स्वागत किया था। उन्होंने शुक्रवार (जुलाई 31, 2020) के दिन एक वीडियो संदेश जारी किया था। उसमें उन्होंने कहा कि देशवासियों को लम्बे समय से इसकी अपेक्षा और आकांक्षा थी। मंदिर निर्माण हर भारतीय की सहमति से हो रहा है और यह केवल भारत में ही संभव है। इस वीडियो में कमलनाथ के पीछे भगवान हनुमान की तस्वीर भी नजर आ रही थी।

कमलनाथ के पीछे-पीछे आज यानी 4 अगस्त को मनीष तिवारी और फिर प्रियंका गाँधी ने भी राम मंदिर को लेकर ट्वीट किया। बताना जरूरी इसलिए है क्योंकि यही वो पार्टी है, जो अब तक भगवान राम के अस्तित्व को ही नकार रही थी। इसी पार्टी के वकील सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर के खिलाफ दलील दे रहे थे।

हाल ही में कमलनाथ ने भोपाल में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ कराने का आह्वान किया। वहीं दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस के इस कदम को दिखावा बताया। भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल का कहना था कि “कॉन्ग्रेस ने हमेशा राम के अस्तित्व को खारिज है। 

कर्नाटक कॉन्ग्रेस IT सेल का सचिव गिरफ्तार, अमित शाह के कोरोना+ खबर पर लिखा – ‘मर जा #*ले तड़ीपार’

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले एक युवक को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने यह जानकारी सोमवार (अगस्त 3, 2020) को दी।

पुलिस ने बताया कि आरोपित व्यक्ति को रविवार (अगस्त 2, 2020) रात उसके घर से गिरफ्तार किया गया। उसकी पहचान बेंगलुरू के राममूर्ति नगर निवासी आनंद प्रसाद के रूप में हुई। वह कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के आईटी सेल का सचिव है।

सोशल मीडिया पर भी हम देख सकते हैं कि आनंद प्रसाद की तस्वीर राहुल गाँधी के साथ है। साथ ही उन्होंने अपने नाम के साथ KPCC और सोशल मीडिया भी लिखा हुआ है। इसके अलावा फेसबुक प्रोफाइल से भी आनंद के KPCC से जुड़े होने के प्रमाण मिलते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री की कोरोना टेस्ट की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर जो आपत्तिजनक व अपमानजनक ट्वीट किए थे, उसी के जवाब में KPCC के अधिकारी का रिप्लाई आया था।

साभार: NA Haris का ट्विटर

इतना ही नहीं, इस रिप्लाई में आनंद ने भी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था। जिसके बाद उनके खिलाफ़ आईपीसी की 505/C, 505/1/B और 153-A समेत कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ।

इस बीच, प्रदेश कॉन्ग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से किसी भी नेता के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी नहीं करने की अपील की और कहा कि यह पार्टी की संस्कृति नहीं है। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कॉन्ग्रेस एक ऐसी पार्टी है, जो भाईचारे और मानवता का उदाहरण प्रस्तुत करती है।

गौरतलब है कि रविवार को अमित शाह की कोरोना की रिपोर्ट पॉजिटिव पाए जाने के बाद उन्हें डॉक्टर्स की सलाह पर मेदांता अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। इसकी जानकारी भी उन्होंने खुद ट्वीट करके दी थी।

उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “कोरोना के शुरुआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। मेरी तबीयत ठीक है परन्तु डॉक्टर्स की सलाह पर अस्पताल में भर्ती हो रहा हूँ। मेरा अनुरोध है कि आप में से जो भी लोग पिछले कुछ दिनों में मेरे संपर्क में आए हैं, कृपया स्वयं को आइसोलेट कर अपनी जाँच करवाएँ।”

अमित शाह के कोरोना पॉजिटिव आने से लिबरलों और कट्टरपंथी इस्लामी लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई थी। सोशल मीडिया पर किसी ने इसे अमित शाह की अंतिम रात बताते हुए उनके मौत की दुआ माँगी तो कई ने इसे सबसे अच्छा ‘ईदी’ बताया था।

एक यूजर ने लिखा, “सहायक पुजारी कोरोना पॉजिटिव पाए गए। राम मंदिर के पास तैनात 16 पुलिसकर्मी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए और अब अमित शाह कोरोना संक्रमित हो गए हैं। वो प्लान करते हैं, मगर अल्लाह बेस्ट प्लानर है।” वहीं एक अन्य ने लिखा, “अल्लाह को जल्दी प्यारे हो जाओ।”

TikTok अमेरिका में होगा बैन, ट्रम्प सख्त: बचने का एकमात्र रास्ता – 15 सितंबर से पहले खरीद ले अमेरिकी कम्पनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन को लेकर और सख्त हो गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चाइनीज सोशल मीडिया एप TikTok को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 15 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है।

ट्रम्प ने कहा कि अगर दिए गए डेडलाइन तक किसी अमेरिकी कंपनी ने TikTok को नहीं खरीदा तो उसका प्रतिबंधित होना तय है। उन्होंने जोर दिया कि एक अच्छे करार के तहत TikTok को किसी अमेरिकी कंपनी द्वारा खरीद लिया जाना चाहिए।

इधर माइक्रोसॉफ्ट भी TikTok के साथ बातचीत में लगा हुआ है। वो इसकी पैरेंट कम्पनी ByteDance से TikTok को खरीदना चाहता है। हालाँकि, इस डील में TikTok का 30% शेयर खरीदने की बात चल रही है लेकिन डोनाल्ड ट्रम्प का मानना है कि इसका पूरा 100% स्टेक अमेरिका में होना चाहिए। इसीलिए वो इस वार्ता से खुश नहीं हैं।

डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मामले में माइक्रोसॉफ्ट के CEO सत्या नडेला के साथ बात भी की है। ट्रम्प ने कहा कि ये बातचीत अच्छी रही और उन्होंने नडेला को अपनी सोच से अवगत करा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा कारणों से TikTok को किसी चाइनीज कम्पनी द्वारा चलाए जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। उन्होंने इसे एक बड़ी आक्रमणकारी समस्या बताया।

व्हाइट हाउस की कैबिनेट रूम में पत्रकारों को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि 30% स्टेक खरीदने से ज्यादा आसान है कि इसे पूरा का पूरा खरीद लिया जाए। उन्होंने पूछा कि जब इसका स्वामित्व दो कम्पनियों के पास होगा, तो चीजें कैसे ठीक होंगी? उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी खजाने को भी फायदा होगा।

डोनाल्ड ट्रम्प ने TikTok को एक बड़ा एसेट करार दिया लेकिन साथ ही कहा कि इसकी महत्ता तब तक नहीं हो सकती जब तक इसे अमेरिकी सरकार अप्रूव न करे। माइक्रोसॉफ्ट ने भी कहा है कि उसने अमेरिकी राष्ट्रपति की चिंताओं को समझते हुए बातचीत को आगे बढ़ाने का फैसला लिया है ताकि देश की सुरक्षा और अमेरिका को होने वाले वित्तीय फायदे को ध्यान में रखते हुए प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश कर रहा है। उसने बातचीत को तेज़ी से आगे बढ़ा कर कुछ ही हफ्तों में इसे अंजाम तक पहुँचाने की बात भी कही है।

इस डील में ‘माइनॉरिटी बेसिस’ पर अन्य अमेरिकी कम्पनियों को भी निवेश करने का मौका दिया जाएगा। साथ ही डील पूरी होते ही अमेरिका में TikTok का सारा डेटा अमेरिका के नियंत्रण में आ जाएगा।

अमेरिका का कहना है कि 100 मिलियन अमेरिकी लोगों का डेटा चीन को भेजे जाने का खतरा है। हालाँकि, TikTok कहता रहा है कि उसने यूजर्स का सारा डेटा अमेरिका में आधारित सर्वर पर ही रखा है और सिंगापुर में इसे बैकअप किया जाता है। साथ ही ये भी बताया कि ये चाइनीज सरकार के नियंत्रण में नहीं आता है।

इधर भारत के बाद अब पाकिस्तान में भी TikTok को प्रतिबंधित करने की माँग उठ रही है। पाकिस्तान टेलीकॉम अथॉरिटी (PTA)’ ने लाइव स्ट्रीमिंग ऐप Bigo को प्रतिबंधित करने का फरमान सुनाया है। साथ ही TikTok को भी ‘अंतिम चेतावनी’ दी है।

TikTok पर अश्लील और अनैतिक कंटेंट्स होने के कारण उसे प्रतिबंधित करने की धमकी दी गई है। इससे चीन के सोशल नेटवर्किंग ऐप्स के लिए पाकिस्तान में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।

IPL से चाइनीज स्पॉन्सर को हटाओ, BCCI नहीं माने तो पूरे टूर्नामेंट का करो बायकॉट: RSS से जुड़ी संस्था की अपील

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से सम्बद्ध संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने IPL प्रबंधन से कहा है कि वो चाइनीज स्पॉन्सर के साथ अगला सीजन आयोजित कराने को लेकर पुनर्विचार करे। इसके लिए संस्था ने BCCI से अनुरोध किया है।

लद्दाख में भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के बीच चाइनीज कम्पनी Vivo द्वारा IPL आयोजित कराने को लेकर लोग विरोध जता रहे हैं। IPL-13 को यूएई में आयोजित किया जाना है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इसे भारत में आयोजित नहीं किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि Vivo ने 2017 में BCCI के साथ 2199 करोड़ रुपए का करार किया था, जो 5 साल के लिए हुआ था। चाइनीज प्रोडक्ट्स का बहिष्कार किए जाने के लिए लगातार अभियान चला रहे स्वदेशी जागरण मंच ने तो यहाँ तक कहा कि अगर BCCI इस निर्णय को वापस नहीं लेता है तो लोगों को IPL का ही बॉयकॉट करना चाहिए।

संस्था ने इसे देश की वर्तमान भावनाओं के विपरीत बताया। संस्था के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने कहा कि ये सिर्फ उनकी माँग नहीं है बल्कि पूरा देश लद्दाख में हुई घटना के बाद ऐसा ही चाहता है। महाजन ने BCCI को जनभावनाओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति संवेदनशील रवैया अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जब पूरी दुनिया चीन का बॉयकॉट कर रही है, IPL उसे शरण दे रहा है।

उन्होंने कहा कि BCCI को समझना चाहिए कि राष्ट्र से ऊपर कुछ भी नहीं है। वहीं कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी इस फैसले का विरोध जताते हुए कहा कि ये ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दोहरे रवैये को दिखाता है।

हालाँकि, BCCI ने इस संबंध में कुछ जवाब नहीं दिया है। बता दें कि IPL-13 कब आयोजन 19 सितंबर से लेकर 10 नवंबर तक किया जाना है। शाम में होने वाले मैच 7:30 PM से शुरू होगा।

10 नवंबर को फाइनल मैच होगा। सोशल डिस्टेंसिंग को देखते हुए दो मैचों के बीच पर्याप्त गैप भी दिया गया है। मैच में दर्शकों की उपस्थिति के विषय में UAE से बातचीत के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सभी फ्रेंचाइजियों को वीजा की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दे दी गई है।

इधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चीन को लेकर और सख्त हो गए हैं। इसी कड़ी में उन्होंने चाइनीज सोशल मीडिया ऐप TikTok को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है। इसके लिए उन्होंने 15 सितंबर की तारीख मुकर्रर की है। ट्रम्प ने कहा कि अगर दिए गए डेडलाइन तक किसी अमेरिकी कंपनी ने TikTok को नहीं खरीदा तो उसका प्रतिबंधित होना तय है।

‘खुदा करे ये मर जाए… इस बार अमित शाह मरना चाहिए… सब दुआ करो’ – शाहीन बाग वाली रिजवी का जहरीला वीडियो

अमित शाह के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद एक निश्चित तबका खुलकर उन्हें बद्दुआएँ दे रहा है। इसी क्रम में ऐमन रिजवी नाम की महिला ने भी अपनी हालिया वीडियो में देश के गृह मंत्री के लिए जमकर जहर उगला है। 

ऐमन रिजवी (Aiman Rizvi) की यह पूरी वीडियो भारत न्यूज 91 नाम के यूट्यूब चैनल पर अपलोड है। इस वीडियो में हम सुन सकते हैं कि मोदी सरकार के प्रति अपनी घृणा व्यक्त करते हुए वह अमित शाह की मृत्यु के लिए दुआ कर रही है और अन्य लोगों से भी ऐसा करने को कह रही है। 

वीडियो में ऐमन रिजवी गृह मंत्री के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग भी कर रही है। वीडियो में हम देख सकते हैं कि वह अमित शाह को ‘टकलू शाह’ कहती है और उनके कोरोना पॉजिटिव होने के तार मरकज से जोड़कर पूछती है कि क्या इसके तार मरकज से हैं या ये मरकज में घुसपैठ करता था?

ऐमन कहती है, “पूरा देश बर्बाद हो रहा है। लेकिन अमित शाह 5 महीने से पता नहीं कौन सी गुफा में घुसा हुआ है। अब मालूम चला है कि उसे कोरोना हो गया।” अपनी बात को आगे रखते हुए वह कहती है कि कोरोना महामारी जैसा कुछ भारत में तो क्या पूरी दुनिया में नहीं है। उसका मानना है कि किसी भी मुद्दे से बरगलाने के लिए भाजपा सरकार कोई नया ‘स्कैंडल’ लेकर आ जाती है और जनता से सहानुभूति इकट्ठा कर लेती है।

इसके बाद वीडियो में लुकमान की मॉब लिंचिंग पर झूठ फैलाते हुए ऐमन कहती है कि समुदाय के

एक नौजवान का बर्बरता से कत्ल कर दिया गया। जबकि हकीकत ये है कि लुकमान जिंदा है और उसकी स्थिति भी फिलहाल स्थिर है। इसके अलावा उसके साथ जो बर्बरता हुई, उस पर पुलिस कार्रवाई कर रही है।

लुकमान मामले में एफआईआर दर्ज हो गई है। लेकिन बिन इन तथ्यों को जाने ऐमन अपनी वीडियो में खुलकर नफरत फैला रही है। रिजवी की शिकायत है कि जो पुलिस मजहबी कॉलोनी में कोई मास्क न लगाए तो उसे मारने के लिए आ जाती है, वही पुलिस लुकमान के मामले में कुछ करने को तैयार नहीं है।

मुंबई मिरर की खबर से स्क्रीनशॉट

महिला की मानें तो वैसे तो पूरे विश्व में कोरोना महामारी जैसा कुछ है ही नहीं। लेकिन अगर, वाकई में कोरोना जैसा कुछ है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। उसे कहते सुना जा सकता है, “मैं 6 महीने से बोल रही हूँ। कोरोना का सिर्फ़ ड्रामा चल रहा है। कोई कोरोना नही है और अगर कोरोना है तो इस बार अमित शाह को मरना चाहिए। आप दुआ करें कि अगर वाकई इसे (अमित शाह) कोरोना हुआ है तो आप सब दुआ करें कि या खुदा ये मर जाए। हम कोरोना पर 1% तभी यकीन करेंगे जब अमित शाह मर जाएगा।”

ऐमन के अनुसार, कोरोना अगर भाजपा समर्थक या फिर उसके आईटी सेल में से किसी को भी होता है, तो वो बच जाता है। जबकि समुदाय विशेष से या दलित अगर आम बीमारी से भी पीड़ित हो रहा है तो वह मर रहा है। इसलिए ये समझना चाहिए कि यह सारा ड्रामा केवल लोगों का दिमाग डायवर्ट करने के लिए चल रहा है।

अपनी वीडियो में यह महिला संबित पात्रा के लिए ‘गोबर पात्रा’ और अमिताभ बच्चन को भाजपा के आईटी सेल व आरएसएस का एम्बेसडर बताते हुए कहती है:

“इन दोनों को कोरोना किया, लेकिन ये मरे नहीं। फिर जी न्यूज वालों को भी किया गया लेकिन वहाँ भी कुछ नहीं हुआ। इसके बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया को किया, उसे भी कुछ नहीं हुआ। दिल्ली के इनके चाटुकार सीएम केजरीवाल को भी कुछ नहीं हुआ, वो भी हनीमून मनाकर वापस आ गया। अब इन्होंने सोचा कि किसको कोरोना करें? अगर यह नरेंद्र मोदी को करते तो वो 5 अगस्त को शिलान्यास में कैसे जा पाता। इसलिए इन्होंने बड़ी स्ट्रैटेजी प्लॉन की और कहा- टकलू हम तुझे कर देते हैं। तू तो वैसे भी गुफा में पड़ा हुआ है। ताकि लोग लुकमान को भूल जाएँ, गुजरात को भूल जाएँ, महाराष्ट्र को भूल जाएँ।”

वीडियो में आगे यह महिला यूपी सीएम के लिए भी घृणा व्यक्त करती है। ऐमन उनके लिए न केवल टकलू नंबर-2 जैसे शब्द का इस्तेमाल करती है, बल्कि उन्हें आतंकवादी भी कहती है। महिला बोलती है कि यह सब मिलकर आपको बावला बना रहे हैं।

ऐमन रिजवी के अनुसार इन लोगों ने आरएसएस के दफ्तर में बैठकर मीटिंग की है, तब जाकर निर्णय हुआ कि इस बार नंबर किसका आएगा। भाजपा नेताओं को अय्याश करार देते हुए ऐमन कहती है कि कोरोना के बहाने उन्हें लग्जरी ट्रीटमेंट दिया जा रहा है। उन्हें हनीमून पर भेजा जा रहा है और कहा जा रहा है कि तुम पहले ही अय्याश हो और अय्याशी करो।

भारतीय मीडिया को रखैल मीडिया कहते हुए ऐमन रिजवी ने वीडियो में राफेल के आने पर मनाई जा रही खुशी पर भी आपत्ति जताई। वह कहती है कि जहाँ से राफेल आया है, उसकी दुनिया में कोई औकात नहीं है। लेकिन ‘चिंदी चोर’ मोदी 5 खरीद कर ले आता है तो पूरी दुनिया भारत से काँपने लगती है?

महिला चीन नेपाल और भूटान का जिक्र करते हुए कहती है कि अभी इन देशों के साथ विवाद खत्म नहीं हुए हैं। लेकिन भाजपा हर रोज कोरोना वायरस का चूर्ण लेकर आ जाती है और बताती रहती है कि आज इसको हुआ, आज उसको हुआ। वह पूछती है कि अगर कोरोना हो रहा है तो आखिर इनके नेता मरते क्यों नहीं हैं। 

वे दर्शकों से कहती है,

“दुआ करो ये मर जाए। हम भी दुआ कर रहे हैं कि ये पाप हमारे सिरों से हट जाए। क्योंकि ये आतंकवादी तड़ीपार है। ये वही तड़ीपार है, जिसने गोधरा ट्रेन करवाया और कारसेवकों को मरवाया। फिर उसी के नाम पर पूरा गुजरात जलवाया। सोहराब का एनकाउंटर करवाया। इशरत जहाँ का एनकाउंटर करवाया। ये वही तड़ीपार है, जिसके कारण आईपीएस संजीव भट्ट जेल में हैं। खुदा से दुआ करो। अल्लाह पाक इस पर बद्दुआएँ लग जाए। ये तड़ीपार मर जाए। चाहे इसे कोरोना न हो। लेकिन कोई ऐसी मौलिक बीमारी हो जाए कि ये उठे न।”

गौरतलब है कि ऐमन के अलावा गृहमंत्री के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद कुछ लोग सोशल मीडिया पर उनकी मौत की कामना कर रहे हैं। इनमें से एक कॉन्ग्रेस आईटी सेल के सचिव आनंद प्रसाद भी हैं, जिन्हें हाल ही में पुलिस ने उनके आवास से गिरफ्तार किया और कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया।

LOC पर राइफलधारी महिलाएँ, पहली बार कर रहीं भारत-पाक सीमा की सुरक्षा: देखें वायरल हुआ Video

भारत-पाकिस्तान सीमा पर पहली बार भारतीय सेना की राइफलधारी महिलाओं को तैनात किया गया है। लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) पर पहली बार इन महिलाओं को तैनात किया गया, जिसे देश और भारतीय सेना के लिए गर्व की बात बताई जा रही है।

पत्रकार आदित्य राज कौल ने इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा कि इस रक्षाबंधन वो इन महिलाओं को देख कर गर्व की अनुभूति कर रहे हैं। वीडियो में महिलाएँ राइफल के साथ सीमा पर तैनात दिख रही हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि इसमें दिख रही महिलाएँ असम राइफल्स की हैं। ये दावा लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने किया, जिन्होंने असम राइफल्स को एक तगड़ी फोर्स करार दिया।

लेफ्टिनेंट जनरल सतीश दुआ ने बतौर मेजर जनरल असम राइफल्स की एक बटालियन को कमांड किया था। उन्होंने कहा कि अब इस पैरा मिलिट्री फोर्स ने महिलाओं को मौका दिया है। बता दें कि असम राइफल्स देश की सबसे पुरानी पैरा मिलिट्री फोर्स है।

बता दें कि हाल ही में भारतीय सेना ने महिलाओं के लिए वैकेंसी भी जारी की है। जनरल ड्यूटी के पदों पर महिलाओं के लिए वैकेंसी जारी की गई है। कुल 99 पदों के लिए सेना ने वैकेंसी निकाली है। इसके लिए 10वीं तक की परीक्षा पास होने की एलिजिबिलिटी रखी गई है।

बता दें कि जुलाई 2019 में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करने के लिए औपचारिक आदेश जारी किया था। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को एक याचिका पर सुनवाई के बाद भारतीय सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन व कमांड पोस्ट दिए जाने का आदेश दिया था और सरकार को इस फैसले पर अमल के लिए तीन माह का समय दिया था।

‘क्यों बताई मुहूर्त की तारीख? क्यों हो रहे शामिल?’ – राम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त बताने वाले को मौत की धमकी

अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से ठीक एक दिन पहले इस पूरे कार्यक्रम की एक तरह से नींव रखने वाले पुजारी को मौत की धमकी मिली है। यह पुजारी हैं कर्नाटक के विजयेंद्र। पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी इसलिए महत्वपूर्ण है और किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा कर रही है क्योंकि यही वो पुजारी हैं, जिन्होंने राम मंदिर भूमि पूजन का मुहूर्त बताया था।

नीचे के वीडियो में 5 मिनट 20 सेकंड के बाद से पुजारी विजयेंद्र को मिली धमकी का जिक्र।

कर्नाटक के पुजारी विजयेंद्र ने ही राम मंदिर भूमि पूजन के लिए 29 जुलाई, 31 जुलाई, 3 अगस्त और 5 अगस्त का मुहूर्त निकाला था। बाद में सबकी सहमति से 5 अगस्त को इस शुभ कार्य के लिए दिन फाइनल किया गया। अब इन्हीं पुजारी विजयेंद्र को कर्नाटक में फोन पर जान से मारने की धमकी मिल रही है।

कर्नाटक के बेलगावी स्थित तिलकवाड़ी पुलिस स्टेशन में इस संबंध में मामला दर्ज किया गया है। वहाँ की पुलिस ने बताया कि 75 वर्ष के पुजारी विजयेंद्र को फोन पर धमकी मिली है। इस पूरे मामले पर पुजारी विजयेंद्र ने कहा:

“फोन करने वालों ने नाम नहीं बताया। वो धमकी दे रहे थे। कहा कि मुहूर्त की तारीख क्यों बताई? इसमें शामिल क्यों हो रहे हो? मैंने कहा कि आयोजकों ने मुझसे इसके लिए आग्रह किया था और मैंने धर्म का पालन किया। कई जगहों से, कई बार फोन आ रहे हैं। लेकिन मैं इसे गंभीरता से नहीं ले रहा।”

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक पुलिस ने पुजारी विजयेंद्र के घर पर कुछ पुलिसकर्मियों की तैनाती कर दी है। पुलिस के अनुसार कॉल करने वाले ने पुजारी विजयेंद्र से मुहूर्त के समय को वापस लेने को कहा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुजारी विजयेंद्र पिछले कई सालों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े रहे हैं। इस साल फरवरी में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर भूमि पूजन के लिए मुहूर्त निकालने के लिए उनसे संपर्क किया था।

‘इंशाअल्लाह, न कभी भूलेंगे, न माफ करेंगे’: भूमि पूजन से पहले जामिया वाली लदीदा ने दिखाई नफरत

बरखा दत्त की जामिया मिलिया वाली जिहादन ‘हीरोइन’ लदीदा फरजाना याद है? उसने अयोध्या में राम मंदिर भूमि पूजन से पहले वह तस्वीर अपलोड की है, जिसमें कारसेवकों ने 6 दिसंबर 1992 को इस्लामी अत्याचार के प्रतीक विवादित ढॉंचे को ध्वस्त कर दिया था।

हिंदू मंदिर का ध्वंस कर बनाए गए बाबरी ढाँचे को धराशायी करने वाली तस्वीर को शेयर करते हुए लदीदा ने लिखा, “इंशा अल्लाह, न कभी भूलेंगे, न माफ करेंगे।” भूमि पूजन से कुछ दिनों पहले आए लदीदा के इस पोस्ट को उत्तेजक माना जा सकता है, क्योंकि ये वही लदीदा है जिसके जिहाद के ऐलान पर दिल्ली में दंगे हुए थे।

लदीदा फरजाना के द्वार अपलोड किया गया फेसबुक पोस्ट

नवंबर 2019 में शीर्ष अदालत ने हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद उन्हें उक्त स्थल पर भव्य राम मंदिर का निर्माण करने की अनुमति मिली। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब 5 अगस्त को भूमि पूजन का आयोजन किया गया है। अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन समारोह से पहले, लदीदा की टिप्पणी शीर्ष अदालत और हिंदुओं के लिए उसकी नफरत ही दिखाती है।

सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने के बाद इस तरह का ट्वीट करना उसका कोर्ट के प्रति उपेक्षा को दर्शाता है। यही नहीं, उसका पिछला फेसबुक पोस्ट कट्टरपंथी इस्लामी चरमपंथ के प्रति उसकी निष्ठा और हिंदुओं के प्रति उसकी घृणा को दर्शाता है।

बता दें कि लदीदा फरजाना ने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध के दौरान ‘जिहाद’ का आह्वान किया था, जिसके बाद यह विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गया था। लदीदा ने अपने एक पोस्ट में खुले तौर पर ’जिहाद’ का आह्वान किया था और कहा था कि लोगों को “हमारे जिहाद के बारे में सीखना चाहिए।”

उसने ‘ला इलाहा इल्लल्लाह, मुहम्मद रसूलुल्लाह’ के साथ अपने पोस्ट को समाप्त किया। जिसका मतलब था, “अल्लाह के सिवाय पूजा के योग्य कोई ईश्वर नहीं है और मुहम्मद उसका दूत है।” अप्रैल 2018 से उसकी एक अन्य पोस्ट में वह भारत को ‘मिडिल फिंगर’ दिखाते हुए देश का अपमान करती हुई नजर आई थी।

लदीदा के जिहाद के आह्वान के बाद भारत के कई हिस्सों, विशेष रूप से दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हिंसा भड़क गई थी, जहाँ मुस्लिम भीड़ ने उग्र होकर दंगे को अंजाम दिया। इस दौरान हिंदुओं को निशाना बनाया गया, उनकी संपत्तियों को जलाया गया, क्योंकि उनका मानना था कि सीएए मुस्लिम समुदाय के खिलाफ था।

इसके अलावा लदीदा फरजाना ने मोपला नरसंहार के दोषियों का भी गुणगान किया, जिसमें हिंदुओं की नृशंस हत्या कर दी गई थी।

दिसंबर 2019 में हिंसा ने दिल्ली के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया था। विशेष समुदाय के लोगों ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध के बहाने देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा भड़काया और अराजकता फैलाई।

सीएए के पारित होने के बाद देश फैली हिंसा ने इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों, विदेशी-वित्त पोषित गैर सरकारी संगठनों और गैर-सरकारी संगठनों का एक गठजोड़ देखा, जो माओवादियों और शहरी नक्सलियों से बड़े पैमाने पर जुड़े हुए थे और नए अधिनियम को रद्द करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।

संदिग्ध समूहों और इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों के संघ ने खुलासा किया कि यह खिलाफत आंदोलन का नया संस्करण था- खिलाफत 2.0।

लदीदा के कट्टरपंथी सोशल मीडिया पोस्टों के बावजूद, सेकुलर मीडिया ने उसका महिमामंडन किया था। इसमें विवादास्पद पत्रकार बरखा दत्त का विशेष योगदान था, जिसने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ जामिया मिलिया इस्लामिया के विरोध का नेतृत्व करने के लिए उसे  ‘shero’ कहा था।

इससे पहले जब लदीदा ने जिहाद के लिए आह्वान किया था, तो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में हिंसा भड़की थी। अब जब एक बार फिर से राम मंदिर भूमि पूजन से पहले कट्टरपंथी इस्लामी जहर उगलने लगती है, तो यह निश्चित रूप से संदिग्ध है।

मुंबई पुलिस को फरवरी में बताया था बेटे की जान खतरे में, पर कोई कारवाई नहीं की: सुशांत के पिता

बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें वे कहते नजर आ रहे हैं कि उन्होंने फरवरी में मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके बेटे की जान को खतरा है। बॉलीवुड अभिनेता का परिवार शुरू से ही कहता रहा है कि उन्हें उसकी कथित आत्महत्या के पीछे धोखाधड़ी का संदेह है।

वीडियो में सुशांत सिंह राजपूत के पिता कह रहे हैं, “25 फरवरी को मैंने बांद्रा पुलिस को आगाह किया था कि मेरे बेटे की जान को खतरा है। 14 जून को जब मेरे बेटे की जान चली गई तो हमने 25 फरवरी में नामित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा परन्तु 40 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।”

वो आगे कहते हैं, “इसके बाद मैंने पटना जाकर थाने में FIR दर्ज की। पटना पुलिस तुरंत एक्शन में आई। परंतु मुजरिम अब भाग रहे हैं, हम सभी को चाहिए कि पटना पुलिस की मदद करें।”

बिहार पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी आईपीएस विनय तिवारी को कथित तौर पर बीएमसी अधिकारियों द्वारा रविवार (अगस्त 2, 2020) को मुंबई पहुँचने पर क्वारंटाइन के लिए भेज दिया गया। तिवारी सुशांत सिंह राजपूत मामले में पुलिस टीम का नेतृत्व करने के लिए मुंबई पहुँचे हैं। इतना ही नहीं, तिवारी के अनुरोध करने पर भी उन्हें IPS मेस में आवास प्रदान नहीं किया गया। अधिकारी वर्तमान में गोरेगाँव के एक गेस्ट हाउस में रह रहे हैं।

डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने ट्वीट में लिखा, “आईपीएस ऑफिसर विनय तिवारी पुलिस टीम को लीड करने के लिए आधिकारिक ड्यूटी पर पटना से मुंबई पहुँचे थे, लेकिन रविवार रात 11 बजे बीएमसी अधिकारियों ने उन्हें जबरन क्वारंटाइन कर दिया। उन्हें आईपीएस मेस में रहने की सुविधा नहीं दी गई। वह गोरेगाँव के एक गेस्ट हाउस में रुके हुए हैं।”

यह केस फिलहाल दो राज्यों के पुलिस विभागों के बीच झगड़े में बदलता नजर आ रहा है। बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने बताया कि मुंबई पुलिस ने बिहार पुलिस के साथ सुशांत सिंह राजपूत की ऑटोप्सी रिपोर्ट शेयर करने से इनकार कर दिया है। मुंबई पुलिस से अभी कई जरूरी कागजात और सीसीटीवी फुटेज की माँग की गई है, लेकिन ये सब उपलब्ध नहीं कराया गया है।

DGP ने अपने एक बयान में रिया से जाँच में शामिल होने का आग्रह किया। रिया का फिलहाल कोई अता-पता नहीं है। गुप्तेश्वर पांडेय ने एक चैनल से कहा कि अगर रिया खुद को दोषी नहीं मानती हैं तो फिर वह पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल बंद करें और सामने आकर अपना बयान दर्ज कराएँ।