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दिल्ली में डबल इंजन सरकार के आसार, एग्जिट पोल्स में BJP को बहुमत: AAP की वापसी नहीं, कॉन्ग्रेस के लिए ‘अच्छे दिन’ बहुत दूर

दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी 2025 को वोट डाले गए। नतीजे 8 फरवरी को आने हैं। उससे पहले ज्यादातर एग्जिट पोल्स बता रहे हैं कि दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद बीजेपी की वापसी होने जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) की जीत के आसार नहीं हैं। वहीं कॉन्ग्रेस का खाता मुश्किल से ही खुलता दिख रहा है।

MATRIZE के एग्जिट पोल में बीजेपी और आप के बीच कड़ी टक्कर दिख रही है। बीजेपी 35-40 तो AAP को 32-37 सीटें मिलने के आसार जताए गए हैं। कॉन्ग्रेस को एक भी सीट मिलने के आसार नहीं हैं। चाणक्य स्ट्रैटजी के एग्जिट पोल में बीजेपी की स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बन रही है। इसके मुताबिक बीजेपी को 39-44 सीटें मिल सकती है। आप 25-28 सीटों पर सिमट सकती है। कॉन्ग्रेस को 2-3 सीटों पर जीत मिलने की संभावना दिख रही है।

पोल डायरी के एग्जिट पोल में भी AAP हार रही है। उसे 18-25 सीटें मिल सकती है। बीजेपी 42-50 सीटें हासिल कर सरकार बनाती दिख रही है। कॉन्ग्रेस को 0-2 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है। पीपुल्स इनसाट के अनुसार बीजेपी को 40 से 44 सीटें मिल सकती हैं। आप को 25 से 29 सीटें मिलने का अनुमान है।

पी-मार्क के पोल में बीजेपी को 39-49 तो आप को 21-31 सीटों का अनुमान लगाया गया है। वहीं WeePreside के एग्जिट पोल में AAP की सत्ता कायम रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार उसे 46 से 52 सीटें तो बीजेपी को 18 से 23 सीटें मिल सकती है।

ज्यादातर एग्जिट पोल बता रहे हैं कि इस बार केंद्र शासित प्रदेश में लोगों ने डबल इंजन सरकार के लिए मतदान किया है। वहीं 15 साल तक लगातार दिल्ली पर शासन करने वाली कॉन्ग्रेस के दिन बदलने के आसार नहीं हैं, जबकि 12 साल सत्ता में रहने के बाद AAP की विदाई होती दिख रही है।

एग्जिट पोल्स के बाद बीजेपी में उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मालवीय नगर से प्रत्याशी सतीश उपाध्याय ने कहा है कि झाड़ू के तिनके बिखर गए हैं और कमल खिल रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी स्पष्ट बहुमत से सरकार बनाने जा रही है। वहीं AAP ने एग्जिट पोल्स को खारिज कर दिया है। पार्टी नेता सौरव भारद्वाज ने कहा है कि इससे पहले के चुनावों में भी आप की हार दिखाई गई थी, लेकिन पार्टी बड़ी बहुमत के साथ सरकार बनाने में कामयाब रही थी।

पहले अपने ही बच्चों की खाई झूठी कसम, अब बुजुर्ग माँ-बाप की निकाली ‘परेड’… मौका कोई भी हो अरविंद केजरीवाल हर बार ‘नीचता’ का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डालते हैं

अरविंद केजरीवाल कभी डंके की चोट पर कहा करते थे कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है। वे जीवन में कोई चुनाव नहीं लड़ेंगे। कोई राजनीतिक पद नहीं लेंगे। पर जब मौका आया तो वे अपने ही मुँह से निकली इन सारी बातों से पलट गए। उन्होंने वह सब कुछ किया जिसको लेकर वे दूसरों को खाँस-खाँसकर कोसते थे।

इतना तो चलता है, क्योंकि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदलाव का रास्ता राजनीति से ही निकलता है। लेकिन इस राजनीति के लिए केजरीवाल की गिरने की खुद से ही जो प्रतिस्पर्धा रहती है, उस मामले में उनकी टक्कर का कोई दूसरा दूर-दूर तक नहीं दिखता। हर बार वे ‘नीचता’ का अपना ही रिकॉर्ड तोड़ डालते हैं।

भारतीय राजनीति की कुछेक बीमारियों में से एक परिवारवाद भी है। ऐसे बहुतेरे नेता हैं (करीब-करीब सभी दलों में) जो राजनीति में अपने बाल-बच्चों/रिश्तेदारों को ही आगे बढ़ाते हैं। कई राज्यों में तो परिवारवादी दलों का अच्छा-खासा प्रभाव तक भी है। बिहार में तो भनसाघर से पत्नी को निकालकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बिठा देने की परंपरा 90 के दशक में ही लिख दी गई थी।

लेकिन शायद ही किसी ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए अपनों की झूठी कसम खाई हो। शायद ही राजनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए अपने बुजुर्ग माँ-बाप की प्रदर्शनी लगाई हो। केजरीवाल इस मामले में इकलौते हैं।

उन्होंने कभी अपने ही बच्चों की कसम खाकर कहा था कि आम आदमी पार्टी बीजेपी या कॉन्ग्रेस से कभी हाथ नहीं मिलाएगी। लेकिन उन्होंने अपनी पहली ही सरकार कॉन्ग्रेस के समर्थन से बनाई। बाद में कॉन्ग्रेस की छतरी के नीचे जमा भी हुए। उसके साथ मिलकर चुनाव भी लड़ा।

इस नीचता का अगला अध्याय उन्होंने तब लिखा जब दारू घोटाले के छींटों से भ्रष्टाचार से लड़ने का उनका मुखौटा उतरा, जब उन्हें तिहाड़ की हवा खानी पड़ी, जब ‘शीशमहल’ खाली करना उनकी मजबूरी हो गई, उन्होंने अपनी सियासत को आगे बढ़ाने के लिए बुजुर्ग माँ-बाप को मीडिया के आगे कर दिया।

इस उम्मीद में कि उनकी उम्र, उनकी बीमारी से उनके दाग छिप जाएँगे। अब इससे भी आगे निकलते हुए उन्होंने बुजुर्ग माँ-बाप की ‘परेड’ तब निकाली है, जब 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों को आम आदमी पार्टी के लिए अब तक की सबसे कड़ी परीक्षा बताई जा रही है।

5 फरवरी को मतदान करने के बाद उन्होंने ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “आज पूरे परिवार के साथ जाकर मतदान किया। हर दिल्लीवासी की तरक्की और हर गरीब परिवार के सम्मानजनक जीवन के लिए वोट दिया। आप भी अपने परिवार के साथ मतदान करें और दूसरों को भी प्रेरित करें। दिल्ली की तरक्की रुकनी नहीं चाहिए। गुंडागर्दी हारेगी, दिल्ली जीतेगी।”

अपने समर्थकों को वोट के लिए प्रेरित करने में कोई बुराई नहीं है। हर राजनीतिक दल ऐसा करते हैं। अपने परिवार के साथ मतदान भी आम है। लेकिन इस पोस्ट के साथ शेयर किए गए वडियो में जिस तरह का ‘प्रदर्शन’ दिखता है, वह सामान्य नहीं है। वीडियो में आप मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल को खाँसते भी देख सकते हैं।

इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए, क्योंकि चुनावी मौसम में अक्सर केजरीवाल की यह दबी बीमारी बाहर आ जाती है। बुजुर्गों को वोटिंग के लिए ले जाना कोई गलत बात नहीं है। लोकतंत्र के पर्व में सबकी भागीदारी हो, यह सबसे अच्छी बात है। लेकिन बात-बात पर माँ-बाप को बीमार बताने वाले केजरीवाल उन्हें बाकायदा गाड़ी में भी बिठा कर ले जा सकते थे।

उनके पास गाड़ियों का पूरा काफिला है, कभी वैगनआर से चलने वाले केजरीवाल आज ₹50 लाख की गाड़ी से चलते हैं। पत्रकार आदेश रावल ने खुलासा किया था कि केजरीवाल की सेवा में पंजाब से आई लैंड क्रूजर गाड़ियाँ भी रहती हैं। लेकिन इन सभी का उपयोग ना करके माँ-बाप की प्रदर्शनी रोड पर निकाली गई।

वह चाहते तो चुनाव आयोग की घर बैठ कर वोट वाली सुविधा का फायदा भी उठा ही सकते थे। उनके पिता इसके लिए योग्य भी हैं। लेकिन उन्होंने बुजुर्ग माँ-बाप का व्हीलचेयर पर परेड निकाल सहानुभूति और वोट जुटाने की कोशिश की।

वोटिंग के दिन बूढ़े माँ-बाप को सड़क पर लेकर घूमने वाले केजरीवाल मई, 2024 में उन्हें परेशान ना किए जाने की अपील कर रहे थे। वो नहीं चाहते थे कि दिल्ली पुलिस उनके घर पर स्वाति मालीवाल कि पिटाई के मामले में पूछताछ करने पहुँचे। इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी तक को घेरा था। अब उन्हें अपने बूढ़े माँ-बाप को सड़क पर घुमाने में कोई समस्या नहीं है।

केजरीवाल ने सोचा कि यह सब देख कर दिल्ली की जनता उनके 10 साल के कुकर्मों को भूल जाएगी। खुद को फैमिली मैन दिखने वाले केजरीवाल का यह स्टंट बताता है कि उनके लिए राजनीति ही सब कुछ है। इसके लिए वह कुछ भी कर सकते हैं।

वे राजनीतिक तौर पर अति महत्वाकांक्षी हैं। वे कुर्सी के लिए, सत्ता के लिए किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। ऐसा करते हुए केजरीवाल को शायद ही एहसास हो कि जनता की लाठी जब पड़ती है तो आवाज नहीं होती।

‘शुरू हो गया खेल, बिना डाले पड़ गया वोट, BJP के गुंडों ने ऊँगली में लगा दी स्याही’: जिसका वीडियो दिखा चुनाव आयोग को AAP सांसद संजय सिंह ने कोसा, उसका जानिए सच

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग से पहले आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसमें भाजपा से जुड़े लोगों पर वोटरों के स्याही लगाने का आरोप लगाया गया। एक वीडियो भी संजय सिंह ने एक्स (पहले ट्विटर) पर डाल दी। बाद में इस मामले की सच्चाई दिल्ली पुलिस ने बयान कर दी।

मंगलवार (4 फरवरी, 2025) को AAP सांसद ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक वीडियो डाल कर लिखा, “भाइयों गाँधी नगर में शुरू हो गया खेल “बिना वोट डाले वोट पड़ गया” BJP के गुंडों ने उँगली में स्याही लगा दी। क्या चुनाव आयोग को ये सब कुछ नहीं दिख रहा।”

इस वीडियो में दिखता है कि कुछ लोग खड़े हैं। इनमें से एक आदमी ने ट्रैकसूट पहन रखा है और वह एक खाकी वर्दी पहने एक आदमी को कुछ डीटेल्स बता रहा है। ट्रैकसूट पहने हुए आदमी बताता है कि कुछ लोगों की झुग्गी में एक आदमी आके ₹500 देकर साइन करवाए और उंगली पर स्याही लगवाई। AAP ने इस वीडियो को लेकर भाजपा में चुनावी गड़बड़ी का आरोप जड़ा।

संजय सिंह के इस दावे पर पुलिस ने इस मामले की जाँच की। इसके बाद इस पूरे वीडियो की हकीकत सामने आई। पता चला कि वीडियो में पैसे बाँट कर स्याही लगाने का दावा करने वाला एक शराबी है और उसने नशे में ही यह दावे किए थे। वह हिस्ट्रीशीटर भी है।

दिल्ली पुलिस के शाहदरा DCP ने इस मामले में संजय सिंह को जवाब दिया। DCP शाहदरा ने लिखा, “04 फरवरी को शाम 5 बज कर 58 मिनट पर पुलिस स्टेशन गांधी नगर में एक मतदाता की उंगली पर स्याही लगाने के संबंध में एक पीसीआर कॉल मिली थी।”

आगे उन्होंने बताया, “पूछताछ करने पर पता चला कि जिस व्यक्ति ने यह दावा किया कि उस की उंगली पर स्याही लगी है उसका नाम फिरोज खान उम्र 40 वर्ष है और वह हिस्ट्रीशीटर है। वह एक कुख्यात अपराधी है, उसके खिलाफ पहले से 15 आपराधिक मामले दर्ज हैं। वह नशे की हालत में पाया गया था। इसके अलावा, उसकी उंगलियों पर स्याही नहीं लगी हुई पाई गई।”

पुलिस ने बताया कि फिरोज खान चुनाव के समय मीडिया में चर्चा बटोरने के लिए यह मनगढ़ंत कहानी बनाई। दिल्ली पुलिस ने उसका एक वीडियो भी जारी किया। इस वीडियो में कहता है कि पुलिस को फोन उसने नहीं बल्कि आसपड़ोस वालों ने की थी। फिरोज खान ने कहा कि दोस्तों में आपस बात करते समय यह सब बात की थी और किसी ने पुलिस बुला ली।

फिरोज खान ने बताया कि उसके हाथ कोई स्याही भी नहीं लिखी और खाली का आरोप कोई लगा रहा है। पुलिस के इस खुलासे के बाद संजय सिंह का दावा फर्जी साबित हो गया। हालाँकि, पुलिस के खुलासे के बाद भी अपना ट्वीट नहीं हटाया और ना ही माफ़ी माँगी।

मदुरै की जिस पहाड़ी पर मुरुगन मंदिर उसे बचाने को एकजुट हुए हिंदू, लैंड जिहाद के विरोध में सड़क पर उतरे: वक्फ प्रॉपर्टी बता रहे इस्लामी कट्टरपंथी, कुर्बानी देने का किया था ऐलान

तमिलनाडु के मदुरई में स्थित पवित्र थिरुपरनकुन्द्रम पहाड़ी पर मुस्लिमों पकाया हुआ मांस ले जाने की अनुमति के बाद हिंदू संगठनों ने भारी संख्या में विरोध प्रदर्शन किया। कोर्ट के आदेश के बाद हजारों हिंदुओं ने मंगलवार (4 फरवरी) को मदुरै के पलक्कनाथम में विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल, यहाँ के थिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर प्राचीन मंदिर मुरुगन मंदिर स्थित, लेकिन मुस्लिम पूरी पहाड़ी को वक्फ की संपत्ति बता रहे हैं।

मुस्लिम समुदाय ने इस पहाड़ी पर एक दरहगाह बना लिया है, जो मुरुगन मंदिर के ठीक बगल में है। वे वहाँ बकरा और मुर्गा काटने के लिए ले जाना चाहते हैं। इसको लेकर बीते दिनों में भारी बवाल हो चुका है। इसके बाद पुलिस ने जीवित बकरा या मुर्गा ले जाकर कुर्बानी देने पर रोक लगा दी है। हालाँकि, मुस्लिम वहाँ पकाया मांस ले जाकर खा सकते हैं। इससे हिंदू समुदाय के लोग बिफर गए हैं।

हिंदू संगठनों के विरोध को देखते हुए जिला पदाधिकारी ने इलाके में धारा 144 लगा दी और हिंदू समुदाय के लोगों के आने पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद हिंदू मुनानी संगठन इसके खिलाफ मद्रास हाई कोर्ट पहुँच गया और इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की इजाजत माँगी। कोर्ट ने 4 फरवरी को शाम 5 बजे से 6 बजे तक विरोध प्रदर्शन की अनुमति दे दी और प्रशासन को इसकी तैयारी का आदेश दिया।

कोर्ट की इजाजत मिलने के बाद हिंदू मुन्नानी, हिंदू फ्रंट, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, आरएसएस, भाजपा सहित 50 से अधिक हिंदू संगठनों इसके खिलाफ प्रदर्शन किया। हिंदू संगठनों के सदस्यों ने इस दौरान हाथ में भगवा झंडा लेकर लहराया और हिंदू देवताओं के नारे लगाए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रदर्शन को देखते हुए 3500 से अधिक पुलिसकर्मी वहाँ तैनात किए गए।

वहीं, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के सांसद नवाज कानी ने पुलिस अधिकारियों से बात की। कानी ने कहा कि पहाड़ी के ऊपर बकरियों और मुर्गियों को ले जाकर उनकी कुर्बानी देने, उनके पकाने और खाने के लिए प्रक्रिया बहाली की जानी चाहिए। मुस्लिमों का दावा है पहाड़ी पर मुरुगन मंदिर के पास स्थित दरगाह सिकंदर बादुशाह थोझुगई पल्लीवासल को सुल्तान सिकंदर ने लगभग 400 साल पहले बनवाया था।

इसके बीच डीएमके मणप्पराई विधायक अब्दुल समद ने 21 जनवरी को पहाड़ी का अनौपचारिक सर्वेक्षण का दावा करते हुए इसे मुस्लिमों का बताया। कानी ने पहाड़ी को ‘सिकंदर पहाड़ी’ बताते हुए दावा किया कि यह वक्फ की संपत्ति है और हर मुस्लिम को यहाँ अपनी मर्जी से इबादत करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी के ऊपर जीवों की कुर्बानी देना एक पुरानी परंपरा है और इसे जारी रहना चाहिए।

बता दें कि यहाँ पर सिर्फ प्राचीन मुरुगन मंदिर मंदिर ही नहीं, बल्कि ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी की जैन गुफाएँ भी हैं। इस पर ब्राह्मी लिपी में अभिलेख भी हैं। इसी पहाड़ी में स्थित जैन गुफाओं को भी कट्टरपंथियों ने हरा रंग दिया। इसके अलावा, यहाँ एक शिव मंदिर भी है। अब मुस्लिम इस प्राचीन एवं पवित्र पहाड़ी को आधिकारिक रूप से ‘सिकंदर पहाड़ी’ करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

यह प्रयास कई दशकों से हो रहा है। सन 1931 में इस्लामवादियों ने इसी तरह का दावा करते हुए कहा था कि यह पहाड़ी मुस्लिमों की संपत्ति है और इसका नाम ‘सिकंदर हिल्स’ है। 12 मई 1931 को प्रिवी काउंसिल ने मामले का संज्ञान लिया और कहा कि थिरुपरनकुंद्रम मंदिर ने पहाड़ी के खाली हिस्सों पर अपना ऐतिहासिक कब्ज़ा साबित कर दिया है और इसे पीढ़ियों से वह अपनी संपत्ति मानता है।

महाकुंभ में नहीं जाएँगे फारूक अब्दुल्ला, क्योंकि उनका खुदा पानी में नहीं रहता: लेकिन CM बेटे को लेकर ‘उमरा’ करने गए थे मक्का, नेटिजन्स ने फोटो दिखा उतार दिया ‘सेकुलरिज्म’ का भूत

नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला ने महाकुंभ को लेकर एक जहरीला बयान दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने हिन्दू विश्वास पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि उनका खुदा पानी में नहीं बसता है। फारूक अब्दुल्ला के बयान के बाद उनकी आलोचना शुरू हो गई है। लोगों ने मक्का मदीना की उनकी पुरानी तस्वीरें भी दिखाई हैं।

मीडिया से बात करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “मेरा खुदा पानी में नहीं बसता। मेरा खुदा ना मंदिर में है, ना मस्जिद में है और ना ही गुरूद्वारे में है। मेरा खुदा मेरे दिल में बसता है।” उन्होंने यह बयान महाकुंभ में जाने को लेकर प्रश्न पूछे जाने पर दिया।

फारूक अब्दुला के इस बयान के बाद बवाल हो गया है। उनकी एक पुरानी तस्वीर अब सामने आई है। इसमें वह बेटे फारूक अब्दुल्ला के साथ मक्का की मस्जिद-अल-हरम में खड़े हैं। मस्जिद अल हरम वही है जहाँ दुनिया भर के मुस्लिम उमरा करने जाते हैं। लोगों ने इसी के साथ उने इस सेक्युलर टाइप दावे पर प्रश्न उठाए हैं।

जहाँ फारूक अब्दुल्ला अभी कह रहे हैं कि उनका खुदा पानी या फिर किसी मस्जिद में नहीं बसता, वहीं वह कुछ ही दिन पहले बेटे समेत सऊदी अरब पहुँच गए थे। यह यात्रा भी तब हुई थी जब उमर अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर के दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गए थे।

ऐसे में उनके ‘खुदा मस्जिद’ में नहीं रहता वाले उनके दावे को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। उनके इस बयान से उन हिन्दुओं को भी धक्का पहुँचा है, जो प्रकृति के हर तत्व में भगवान को मानते हैं। फारूक अब्दुल्ला का बयान पवित्र नदी गंगा के महत्त्व को कम करके आंकने वाला भी मालूम होता है।

फारूक अब्दुल्ला पहले ऐसे नेता नहीं हैं, जिन्होंने महाकुंभ को लेकर ऐसा कोई बयान दिया ही। उनसे कुछ ही दिन पहले सपा सांसद जया बच्चन ने महाकुंभ को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी कुंभ में है। वहाँ शवों को उठा कर फेंक दिया गया है। उसकी वजह से पानी प्रदूषित हो गया है। 

महिला की हत्या कर नग्न परेड निकालता है जो आतंकी संगठन, उसके कमांडर को POK में बुला रहा पाकिस्तान: हमास के जरिए कश्मीर पर ‘उम्माह’ जगाने का प्लान

पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में अपने सारे पैंतरे फेल होता देख अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने की जुगत में है। पाकिस्तान इसे पूरी दुनिया के मुस्लिमों की समस्या बताना चाहता है। इसके लिए वह कश्मीर समस्या को फिलिस्तीन विवाद के बराबर खड़ा करना चाहता है। वह इसके लिए उम्माह की एकता चाहता है।

इस काम के लिए उसने हमास कमांडर को पाक अधिकृत कश्मीर में तक़रीर देने को बुलाया है। हमास वही संगठन है जिसने इजरायल की महिलाओं को अगवा करके नग्न परेड करवाई थी। वहीं जम्मू कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। वह हाल ही में हुई एक पूर्व सैनिक की हत्या पर अब एक्शन में है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुलगाम में आतंकी हमले में मारे गए पूर्व सैनिक मंजूर अहमद वागे के हत्यारों के अब सुरक्षा एजेंसियाँ पीछे पड़ गई हैं। इस हमले में उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई थीं जबकि उनकी भतीजी को भी भर्ती करवाया गया था।

इस हमले के बाद से जम्मू कश्मीर पुलिस और सेना मिलकर बड़ा सर्च अभियान चला रही हैं। मामले में लगभग 27 लोगों को हिरासत में लिया गया है। दूसरी रिपोर्ट बताती है कि जाँच का दायरा 500 लोगों तक है।

इनमें से कई लोग ऐसे हैं जिनके परिवार का कोई व्यक्ति आतंकी संगठनों से जुड़ा हुआ है। कई ऐसे भी घेरे में लिए गए हैं जिनके कोई रिश्तेदार पाक अधिकृत रिश्तेदार (PoK) में रहते हैं। बड़ी संख्या में लोगों को समन भेजे गए हैं और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

यह ऑपरेशन कुलगाम के साथ ही शोपियां और अनंतनाग में भी चलाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियाँ ओवरग्राउंड वर्करों के लिंक भी तलाश हो रही है। सुरक्षा एजेंसियाँ जल्द ही इन आतंकियों को पकड़ सकती हैं।

कश्मीर में इस बीच सुरक्षा चिंताएँ और भी बढ़ गई हैं। पाकिस्तान अपना नेटवर्क वापस बढ़ाने और कश्मीर को वैश्विक मुद्दा बनाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए वह कश्मीर मुद्दे को फिलिस्तीन जैसा बताना चाह रहा है, वह चाहता है कि जिस तरह दुनिया भर के मुस्लिम फिलिस्तीन को लेकर भावनात्मक रुख रखते हैं, वैसा ही कश्मीर को प्रदर्शित किया जाए।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह इसके लिए फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास की मदद ले रहा है। हमास के मिलिट्री कमांडर खालिद कद्दूमी की इस तक़रीर में पाकिस्तान के लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे इस्लामी आतंकी संगठनों के लोग शामिल होंगे।

इस कायर्क्रम को ‘अल अक्सा फ्लड’ नाम से किया जा रहा है। यह नाम जानबूझ कर चुना गया है। यह नाम हमास ने 7 अक्टूबर, 2023 के इजरायल पर किए गए हमले को दिया था।

21 साल की महिला की हत्या, फिर लाश के साथ सेक्स भी… सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शव के साथ सेक्स करना रेप नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में मंगलवार (4 फरवरी 2025) को नेक्रोफिलिया (महिला के मृत शरीर से यौन क्रिया) को बलात्कार मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 375 के तहत बलात्कार के तहत अपराध नहीं है। इसके बाद शीर्ष अदालत ने कर्नाटक सरकार द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे की जाँच करना और जरूरी होने पर कानून में प्रासंगिक बदलाव करना संसद का काम है। अदालत ने कहा कि कानून नेक्रोफीलिया को अपराध नहीं मानता। इसलिए हाई कोर्ट द्वारा आरोपित को बलात्कार के आरोप से बरी करने के लिए आदेश में वह हस्तक्षेप नहीं कर सकता।

कर्नाटक सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार ने तर्क दिया कि धारा 375(सी) के तहत ‘शरीर’ शब्द में मृत शरीर को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बलात्कार की परिभाषा के 7वें विवरण कहा गया है कि ऐसी स्थिति जहाँ महिला सहमति नहीं दे सकती है, उसे बलात्कार माना जाएगा। इस प्रकार, यहाँ भी मृत शरीर सहमति नहीं दे पाएगी।

पंवार ने कहा कि कोर्ट को धारा 375 में शवों को शामिल करने के लिए उदारतापूर्वक इसकी व्याख्या करनी चाहिए। उन्होंने पंडित परमानंद कटारा बनाम भारत संघ मामले में शीर्ष न्यायालय के 1995 के निर्णय का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि सम्मान और उचित व्यवहार का अधिकार शवों पर भी लागू होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि स्टेट बनाम ब्रोबेक मामले में टेनेसी के सर्वोच्च न्यायालय सहित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालयों ने शवों को बलात्कार के दायरे में लाने के लिए इसी तरह के दंडात्मक प्रावधानों का विस्तार किया है। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन पंवार की दलील से संतुष्ट नहीं हुई थी और अपील को खारिज कर दिया।

दरअसल, यह मामला कर्नाटक का है। इस मामले में आरोपित ने 21 साल की एक महिला की हत्या कर दी थी। इसके बाद उसने शव के साथ यौन संबंध बनाए थे। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपित को आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या और आईपीसी की धारा 375 के तहत बलात्कार के लिए दोषी ठहराया था। इसके बाद मामला हाई कोर्ट में गया।

इस मामले में सुनवाई करते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट ने मई 2023 में कहा कि नेक्रोफीलिया भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत बलात्कार या धारा 377 के तहत अप्राकृतिक सेक्स वाले अपराध के दायरे में नहीं आता। इसलिए आरोपित को रेप का दोषी नहीं नहीं माना जा सकता है। इसके बाद हाई कोर्ट ने आरोपित को हत्या का दोषी माना, लेकिन रेप के आरोप से मुक्त कर दिया।

हाई कोर्ट ने कहा कि नेक्रोफीलिया एक ‘मनोवैज्ञानिक विकार’ है, जिसे DSM-IV (मानसिक विकारों का नैदानिक ​​और सांख्यिकीय मैनुअल) ‘पैराफीलिया’ नामक विकारों के समूह में वर्गीकृत किया जाता है। इसमें पीडोफीलिया (बच्चों का यौन शोषण), एग्जिबिशनिज्म (किसी अनजान व्यक्ति को अपना जननांग दिखाना) और यौन आत्मपीड़ा (दर्द, प्रताड़ना या तिरस्कार में यौन उत्तेजना महसूस करना) शामिल है।

न्यायालय ने कहा, “यह हमारे संज्ञान में लाया गया है कि अधिकांश सरकारी और निजी अस्पतालों में, विशेष रूप से युवा महिलाओं के शवगृह में रखवाली के लिए नियुक्त परिचारक शव के साथ संभोग करते हैं। इसलिए राज्य सरकार के लिए यह सुनिश्चित करने का समय आ गया है कि ऐसा अपराध न हो, जिससे महिला के शव की गरिमा बनी रहे।”

कर्नाटक हाई कोर्ट ने आगे कहा, “दुर्भाग्य से भारत में महिला के शव के प्रति अपराध और उसके अधिकारों की रक्षा करने तथा उसकी गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों सहित कोई विशिष्ट कानून नहीं बनाया गया है।” हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि शवों से दुष्कर्म की घटना को बलात्कार की श्रेणी में शामिल करने के लिए कानून बनाने के लिए कहा।

आरोपित को रेप के केस से मुक्त करने के हाई कोर्ट के फैसले को कर्नाटक सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सुप्रीम ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद इसे रेप मानने से इनकार कर दिया और कर्नाटक सरकार की याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इससे संबंधित कानून के लिए संसद को मार्ग बताया।

स्वीडन के स्कूल में अंधाधुन फायरिंग, कम-से-कम 10 की मौत, मारा गया हमलावर भी: कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की भी यहीं हुई थी हत्या

यूरोपीय देश स्वीडन के ऑरेब्रो शहर में मंगलवार (4 फरवरी 2025) को बंदूकधारी हमलावर ने एक स्कूल में अंधाधुन फायरिंग की, जिसमें कम-से-कम 10 लोग मारे गए हैं। मृतकों में हमलावर भी शामिल है। मृतकों के पहचान के बारे में अभी तक पुलिस ने नहीं बताया है। पुलिस का कहना है कि वह हमले के संभावित मकसद का पता लगाने की कोशिश कर रही है।

गोलीबारी स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम से लगभग 200 किलोमीटर (125 मील) पश्चिम में स्थित ऑरेब्रो में कैंपस रिसबर्गस्का सेकेंड्री स्कूल हुई। इसमें प्राइमरी और अपर सेकेंडरी की पढ़ाई होती है। इसके साथ ही इस विद्यालय में आप्रवासियों के लिए स्वीडिश कक्षाएँ, व्यावसायिक प्रशिक्षण और बौद्धिक विकलांग लोगों के लिए कार्यक्रम भी प्रदान किए जाते हैं।

इस स्कूल के छात्रों की उम्र 20 साल से अधिक है। जिस समय गोलीबारी हुई, उस समय वहाँ कई स्कूली बच्चे, टीचर एवं अन्य लोग उपस्थित थे। ऑरेब्रो के पुलिस प्रमुख रॉबर्टो ईद फॉरेस्ट ने बताया, “करीब 10 लोग मारे गए हैं। संख्या के बारे में हम अभी स्पष्ट नहीं हैं।” पुलिस को आशंका है कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। वहीं, इसे आतंकी घटना मानने से भी इनकार किया है।

इस हमले के कई प्रत्यक्षदर्शी भी सामने आए हैं। उनमें से एक 28 वर्षीय एंड्रियास सुंडलिंग ने कहा कि उसने तीन धमाके और तेज चीखेें सुनीं। इसके बाद वह जान बचाने के लिए एक कक्षा में जाकर छिप गई। स्कूल के अधिकारियों का कहना है कि हमले के वक्त घटनास्थल पर बहुत कम बच्चे थे। अधिकांश बच्चे घर जा चुके थे। माना जा रहा है कि हमला ऑटोमेटिक राइफल से की गई है।

वहीं, स्कूल की 54 वर्षीय टीचर मारिया पेगाडो ने बताया कि लंच ब्रेक के ठीक बाद किसी ने उनकी कक्षा का दरवाज़ा खोला और चिल्लाते हुए सभी को बाहर निकलने के लिए चिल्लाया। उन्होंने कहा, “मैंने अपने सभी 15 छात्रों को बाहर हॉलवे में ले जाकर भागना शुरू कर दिया। फिर मैंने दो गोलियाँ सुनीं, लेकिन हम बच गए। हम स्कूल के प्रवेश द्वार के करीब थे।”

टीचर मारिया ने आगे कहा, “मैंने लोगों को घायलों को घसीटते हुए बाहर निकलते देखा। पहले एक को देखा, फिर दूसरे को। मुझे एहसास हुआ कि यह बहुत गंभीर स्थिति है।” पुलिस ने मृतकों की उम्र, लिंग या निवास स्थान आदि को लेकर कोई जानकारी नही दी है। पुलिस का मानना है कि हमलावर अकेला था। स्थानीय मीडिया के अनुसार, पुलिस ने हमलावर के घर पर छापेमारी की है।

कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि संदिग्ध हमलावर की उम्र करीब 35 साल है और उसके पास हथियार रखने का लाइसेंस है। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन उसकी पहचान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। पुलिस ने इस जानकारी की पुष्टि नहीं की है। बता दें कि मुस्लिमों के दीनी किताब कुरान जलाने वाले सलवान मोमिका की भी कुछ दिन पहले स्वीडन में हत्या कर दी गई थी।

स्वीडन के राजा कार्ल सोलहवें गुस्ताफ ने इस घटना की निंदा की है। वहीं, स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने इस हमले को देश के इतिहास में सबसे भयानक सामूहिक गोलीबारी बताया है। इस देश में संगठित अपराधिक गिरोहों को लेकर क्रिस्टरसन ने कहा, “यह स्वीडन को विरासत में मिली समस्या है। वे बहुत लंबे समय से विकसित हो रहे हैं। हिंसा पर हमारा नियंत्रण नहीं है, यह बिल्कुल स्पष्ट है।”

स्वीडन में गिरोह अपराध की समस्या के कारण गोलीबारी और बम विस्फोट की घटनाएँ बढ़ रही हैं। हालाँकि स्कूलों में घातक हमले अभी भी दुर्लभ हैं। स्वीडिश नेशनल काउंसिल फॉर क्राइम प्रिवेंशन के अनुसार 2010 से 2022 के बीच स्कूलों में घातक हिंसा की सात घटनाओं में दस लोग मारे गए।

नेहरू लेते थे अमेरिकी राष्ट्रपति की बीवी (33 साल) और बहन (27 साल) दोनों में दिलचस्पी, 73 साल के ‘पंडित’ जी ने जिद करके PM आवास में ही दिलवाया था कमरा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू पर करारा हमला किया। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव बोलते हुए उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की विदेश नीति को लेकर उठाए गए क़दमों की आलोचना की। पीएम मोदी ने इस दौरान विपक्ष के सांसदों को सलाह दी कि वह ‘JFK’s फॉरगॉटेन क्राइसिस’ किताब पढ़ने की सलाह दी। यह किताब अमेरिकी विदेश नीति एक्सपर्ट ब्रूस रिडेल ने लिखी है और इसमें जॉन एफ केनेडी के कार्यकाल में आए राजनीतिक और वैश्विक संकटों पर बात की गई है।

पीएम मोदी ने यह सुझाव तब दिया जब वह भारत-चीन सीमा विवाद पर अपनी सरकार के क़दमों को लेकर बोल रहे थे। उन्होंने इस दौरान विपक्ष की आलोचना का भी उन्होंने जवाब दिया। इससे पहले सोमवार को कॉन्ग्रेस सांसद राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी नेता अखिलेश यादव ने भारत-चीन विवाद को लेक सरकार को घेरा था।

पीएम मोदी ने इस किताब के हवाले से बताया कि नेहरू ने देश की सुरक्षा के साथ क्या खेल खेला और उनके लिए विदेश नीति का क्या मतलब था। उन्होंने कहा, “जो लोग सही में विदेश नीति में रुचि रखते हैं, मैं उन्हें JFK’s की फॉरगॉटन क्राइसिस पढ़ने का सुझाव देता हूँ।”

उन्होंने कहा, “विदेश नीति के एक विशेषज्ञ द्वारा लिखी गई इस किताब में भारत के पहले प्रधानमंत्री का जिक्र है, उन्होंने विदेश मामले भी देखे थे। इस किताब में इसमें उस क्राइसिस के दौरान उनकी जॉन एफ केनेडी की पत्नी के साथ उनकी बातचीत भी शामिल है, जिसे विदेश नीति के नाम पर लिए गए एक्शन कहा गया था।”

नेहरू के बारे में कई खुलासे करती है किताब

जिस किताब का पीएम मोदी ने जिक्र किया उसमे केनेडी की पत्नी की भारत यात्रा और पीएम नेहरू के विदेशी सम्बन्धों पर लिए गए एक्शन को लेकर बातें लिखी गई हैं। किताब के अनुसार, भारत में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत जॉन केनेथ गैलब्रेथ के साथ बातचीत में, अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने कथित तौर पर उनसे कहा कि पीएम नेहरू उनके बजाय उनकी पत्नी जैकी के साथ बातचीत में ज्यादा दिलचस्पी रखते थे।

इस किताब में यह भी बताया गया है कि केनेडी की भारत यात्रा के दौरान अमेरिकी दूतावास ने उनकी पत्नी के लिए एक विला किराए पर लिया था। लेकिन इसी दौरान नेहरू इस बात जोर दिया कि केनेडी की पत्नी प्रधानमंत्री आवास में एक कमरे में रुकें। गौरतलब है कि यह वही कमरा है जिसका उपयोग एडविना माउंटबेटन द्वारा किया गया था। एडविना अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की पत्नी थीं, जो इस देश का बँटवारा होने के समय वायसराय थे।

किताब में यह भी बताया गया है कि नेहरू को केनेडी या उनकी पत्नी बॉबी की अपेक्षा JFK की 27 वर्षीय बहन पैट कैनेडी में खूब दिलचस्पी ले रहे थे। यह यात्रा 1962 में हुई थी। पंडित नेहरू तब 73 साल के थे।

यह सारी बातें पीएम मोदी ने राहुल गाँधी के सदन में किए गए दावे के बाद कही। राहुल गाँधी ने कह़ा कि भारत ने चीन के हाथों 4,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक इलाका खो दिया है। राहुल ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री इसबात को नहीं मानते, लेकिन सेना के बयान इसके विपरीत हैं। उनकी इस बात का रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब दिया था।

शीशमहल की बात, सवाल- क्या किसी SC/ST परिवार से हुए एक साथ 3 सांसद… PM मोदी ने नाम लिए बिना ही केजरीवाल से लेकर गाँधी परिवार तक का उतार दिया नकाब

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलते हुए सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई हैं। उन्होंने इसी के साथ कॉन्ग्रेस और AAP समेत विपक्ष पर हमला बोला है। उन्होंने देश के कुछ नेताओं पर अर्बन नक्सलों की भाषा बोलने का आरोप लगाया है और इसे देश का दुर्भाग्य बताया है। पीएम मोदी ने आयकर सीमा को ₹12 लाख तक बढ़ाने को घावों पर बैंडेज बताया है। जाति की राजनीति करने को लेकर भी उन्होंने कॉन्ग्रेस को घेरा है।

मंगलवार (4 फरवरी, 2025) को लोकसभा में पीएम मोदी ने धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार रखे हैं। पीएम मोदी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण को नए भारत का आत्मविश्वास जगाने वाला बताया। पीएम मोदी ने गरीबी पर काम करने को लेकर भी कॉन्ग्रेस को घेरा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने गरीबी हटाने को झूठे नारे नहीं दिए बल्कि सच्ची सेवा की।

पीएम मोदी ने कहा, “जो लोग गरीबों की झोपड़ियों में फोटो खिंचा कर अपना मनोरंजन करते रहते हैं, उन्हें गरीबों की बात बोरिंग ही लगेगी।” पीएम मोदी ने यह जवाब राहुल गाँधी की राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘बोरिंग’ वाली टिप्पणी को लेकर दिया। पीएम मोदी ने राजीव गाँधी के ‘₹1 में 15 पैसे’ वाले बयान के सहारे कॉन्ग्रेस को घेरा।

लोकसभा में पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष में हताशा फैली हुई है, इसलिए वह कुछ भी बोलते है। पीएम मोदी ने बताया कि सरकार का कबाड़ ही बेचने से ₹2300 करोड़ मिले हैं। उन्होंने गाँधी जी के सिद्धांतों को भी लोकसभा में बताया। पीएम मोदी ने कहा कि उनकी सरकार में एक भी घोटाला नहीं हुआ, इससे पैसा विकास में लगा।

पीएम मोदी ने गिनाया कि हर साल जल जीवन मिशन से ही एक परिवार को ₹40 हजार का फायदा ले रहा है। वहीं आयुष्मान कार्ड से ₹1.20 लाख करोड़ का फायदा लोगों को हुआ है। पीएम मोदी ने सूर्य घर योजना से होने वाले ₹25 हजार तक का लाभ भी गिनाया। पीएम मोदी का भाषण आप नीचे लगे लिंक में सुन सकते हैं।

उन्होंने कहा, “2014 से पहले ऐसे बमगोले फेंके गए थे कि देश वासियों का जीवन छलनी हो गया था। हम धीमे-धीमे वह भरते हुए आगे बढ़े थे। ₹2 लाख की इनकम टैक्स की लिमिट 2014 में थी। अब यह बढ़ कर ₹12 लाख हो चुकी है। रास्ते में लगातार घाव भरते गए, अब बैंडेज लगाया गया है।”

पीएम मोदी ने कहा कि विपक्ष के कुछ दल देश पर आप-दा बन कर गिरे हुए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वह संविधान को जीने वाले लोग हैं। उन्होंने 2014 के बाद विपक्ष की कम सीटें होने के बावजूद उसे संसदीय प्रक्रियाओं में हिस्सा दिए जाने की बात याद दिलाई। पीएम मोदी ने लोकसभा में अरविन्द केजरीवाल का नाम लिए बिना शीशमहल को लेकर उन्हें घेरा।

पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि कुछ लोग उन अर्बन नक्सल की भाषा बोल रहे हैं, जो देश को तोड़ना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अब जाति की बात करना फैशन हो गया है। गाँधी परिवार से तीन सांसद होने की बात होने को लेकर उन्होंने हमला किया। पीएम मोदी ने पूछा कि किस SC-ST परिवार से अभी तक तीन सांसद एक साथ हुए हैं।