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सरकार के ‘अतुल्य भारत’ में इरा त्रिवेदी: गोमांस को प्रोटीन का सस्ता स्रोत बताने के बाद दूरदर्शन ने कर दी थी छुट्टी

पर्यटन को बढ़ावा देने वाले भारत सरकार के अभियान अतुल्य भारत ने अपने एक वेबिनार में विवादित योग शिक्षिका इरा त्रिवेदी को मंच प्रदान किया। ये वही इरा त्रिवेदी हैं, जिन्होंने पिछले साल हिन्दू धर्म पर विवादित बयान दिया था। इसके बाद दूरदर्शन ने उन्हें शो से निकाल दिया था। 

इरा के विवादित बयान का विरोध ना सिर्फ दर्शकों ने किया था, बल्कि डीडी के पत्रकार तक ने इरा को होस्ट के रूप में चुनने को लेकर सरकार पर सवाल खड़े किए थे। उनका कहना था कि योग सिखाने वाले गुरुओं की कमी नहीं है, फिर भी दूरदर्शन ने योग के कार्यक्रम के लिए इरा त्रिवेदी जैसी विवादित शख्सियत को क्यों चुना, जिन्हें प्रोटीन की कमी दूर करने के लिए गोमांस का भक्षण जरूरी लगता है?

अब एक बार फिर से भारत सरकार के प्लेटफॉर्म पर इरा त्रिवेदी को जगह दिए जाने और प्रमोट किए जाने से लोग काफी आक्रोशित नजर आ रहे हैं। वे उस अधिकारी को भी बर्खास्त करने की माँग कर रहे हैं जिन्होंने इरा के बारे में सब कुछ जानने के बावजूद उनके नाम को मँजूरी।

सरकार ने क्या सोचकर ये कदम उठाया है, ये तो नहीं कहा जा सकता है। लेकिन लोगों के सवाल भी नजरअंदाज नहीं किए जा सकते। लोगों का कहना है कि क्या योग सिखाने वालों की इतनी कमी हो गई है कि हमें हिंदू से घृणा करने वाले को योग शिक्षक के रूप में अपनाना पड़े।

लोगों का कहना है कि इरा त्रिवेदी जैसे हिन्दू विरोधी को सरकार द्वारा प्रमोट करना दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे पार्टी के समर्थकों को भी गहरा आघात पहुँचा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माँग की है कि संबंधित मंत्रालय के मंत्री एवं उनके अफसरों को तत्काल प्रभाव से पदच्युत किया जाए।

बता दें कि इरा त्रिवेदी ने हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के धर्मग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताया था। सीएनएन न्यूज 18 के साथ उनका 2017 का इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वायरल वीडियो में, वह गोमांस (बीफ) को प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत बताती हैं। उनके अनुसार गोमांस कुपोषित लोगों के लिए प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए गोमांस पर प्रतिबंध लगाना अनुचित होगा, विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए।

वीडियो वायरल होने के बाद, इरा के पिछले ट्वीट्स के कई स्क्रीनशॉट भी काफी तेजी से शेयर होने लगे। इसमें इरा हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए आधुनिक हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के मजहबी ग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताती हैं। विवाद बढ़ता देख दूरदर्शन ने उनको शो से निकाल दिया था और उनकी जगह यामिनी मुथाना को इस शो की जिम्मेदारी दी गई।

मामले को बढ़ता देख इरा त्रिवेदी ने फिर एक ट्वीट किया जिसमें वह अपनी बात से पलटती और माफी भी माँगती नज़र आई। उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म उनके दिल में है। बाद में इरा ने अपना ट्विटर अकाउंट भी डिलीट कर लिया।

अब जब सरकार ने एक बार फिर से सरकारी प्लेटफॉर्म से इरा को प्रमोट करना शुरू किया तो लोगों ने विरोध करना शुरू कर दिया और सरकार को घेरने लगे। सवाल उठाया गया कि सरकार कैसे एक बार फिर से ऐसे हिंदू विरोधी मानसिकता वाले लोगों के साथ काम करने के लिए तैयार हुई।

गौरतलब है कि इससे पहले भी सरकार ‘द वायर’ के संस्थापक एस वरदराजन की पत्नी नंदिनी सुंदर को शिक्षा समिति में शामिल करने को लेकर सवालों के घेरे में आ गई थी। नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने उन्हें सामाजिक विज्ञान पाठ्य पुस्तक कक्षा IX पाठ्यक्रम के लिए 2020-21 का सदस्य नियुक्त किया है। बता दें कि नंदिनी हत्या की आरोपित हैं। ऐसे में उन्हें शिक्षा समिति में शामिल करना सवाल खड़े करता है। 

चीन मामले में मोदी सरकार में पूरी आस्था, विपक्ष दिखाए परिपक्वता: मनमोहन के बयान के बाद मायावती की दो टूक

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भारत-चीन सीमा तनाव मामले में केंद्र की मोदी सरकार पर पूर्ण आस्था जताई है। बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो ने कहा कि अभी हाल ही में 15 जून को लद्दाख में चीनी सेना के साथ हुए संघर्ष में कर्नल सहित 20 सैनिकों की मौत से पूरा देश काफी दुखी, चिन्तित व आक्रोशित है।

उन्होंने इसके निदान हेतु सरकार व विपक्ष दोनों को पूरी परिपक्वता व एकजुटता के साथ काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि काम ऐसा हो जो देश-दुनिया को दिखे व प्रभावी सिद्ध हो।

मायावती द्वारा विपक्ष को परिपक्वता से काम करने की सलाह देने के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसे कठिन व चुनौती भरे समय में भारत सरकार की अगली कार्रवाई के सम्बन्ध में लोगों व विशषज्ञों की राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन मूल रूप से यह केंद्र सरकार पर ही छोड़ देना बेहतर है कि वह देशहित व सीमा की रक्षा हर हाल में करे, जो कि हर सरकार का दायित्व भी है।

इससे पहले भी मायवती ने गलवान घाटी संघर्ष में वीरगति को प्राप्त हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा था कि देश की आन, बान व शान के लिए चीनी सेना के साथ संघर्ष में अपने प्राण की आहुति देने वाले 20 वीर सैनिकों के घरों में मातम के दृश्य काफी हृदयविदारक हैं।

उन्होंने कहा था कि जवानों ने अपना कर्तव्य ऐसा निभाया है जिस पर परिवार व देश को गर्व है। साथ ही देश को उन जवानों पर गर्व होने की भी बात कही थी। उन्होंने कहा था:

“पीएम का यह कहना कि ’वे मारते-मारते मरे हैं’, उनकी वीरता व शहादत को पूरे देश की ओर से भावभीनी श्रद्धांजलि है लेकिन यह काफी नहीं है। अब केन्द्र व राज्य सरकारों का खास दायित्व बनता है कि वे उनके परिवारों को 3 माह के भीतर ही सभी मदद व परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी जरूर दे। भारत सरकार दोनों देशों के बीच सीमा विवाद व तनाव को कम करने में प्रयासरत है। सरकार को अब अत्यधिक सतर्क व सूझबूझ से देशहित में कदम उठाने की जरूरत है।”

हालाँकि, मायावती ने विश्वास जताया था कि भारत सरकार देश की आन, बान व शान के हिसाब से सही समय पर सही फैसला लेगी व देश का एक इंच जमीन भी किसी को कभी हड़पने नहीं देगी। उन्होंने कहा था कि सरकार की कमियों को भुलाकर ऐसे नाजुक समय में पूरा देश एकजुट है। अब सरकार को जनता की उम्मीद पर खरा उतरना है। मायावती ने इस मामले में बाकी विपक्षी नेताओं से अलग रुख अख्तियार किया है।

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि भ्रामक प्रचार कभी भी कूटनीति और मजबूत नेतृत्व का विकल्प नहीं बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज हम इतिहास के एक ऐसे नाजुक मोड़ पर खड़े हैं, जब हमारी सरकार के फ़ैसलों व उठाए गए कदम ये तय करेंगे कि भविष्य की पीढ़ियाँ हमारे बारे में क्या सोचेंगी। उन्होंने देश के नेतृत्वकर्ताओं को दायित्व निभाने की सलाह दी।

चीन मुद्दे पर डॉक्टर मनमोहन सिंह का बयान

पूर्व पीएम ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में इन कर्तव्यों के निर्वहन का दायित्व देश के प्रधानमंत्री पर है। उन्होंने प्रधानमंत्री को अपने शब्दों और सम्बोधनों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ‘पिछलग्गू सहयोगी’ झूठ प्रचारित कर आडम्बरों से सच्चाई को दबाना चाहते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री के बयान का देश के हित पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

बता दें कि इधर भारत सरकार ने सीमा पर तैनात भारतीय सेना को अपने हिसाब से कार्रवाई करने की खुली छूट दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की तीनों सेनाओं के प्रमुखों के साथ हुई बैठक में सरकार ने LAC के नियमों में बदलाव किया और सेना के फील्ड कमांडरों को यह अधिकार दिया कि वह परिस्थितियों में जवानों को हथियार के इस्तेमाल की आजादी दे सकते हैं। सरकार ने हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए सेना के तीनों अंगों को 500 करोड़ रुपए तक की प्रति खरीद परियोजना की आपात वित्तीय शक्तियाँ दी हैं।

तिरंगा झंडा जलाते हुए देश-विरोधी नारे के साथ TikTok वीडियो, समुदाय विशेष का मामला होने के कारण तनाव

लखनऊ के बाजारखाला में कुछ लड़कों द्वारा तिरंगा झंडा जलाते हुए टिक-टॉक (TikTok) वीडियो बनाने का मामला सामने आया है। बताया गया है कि ये चारों रविवार (जून 21, 2020) की देर शाम वीडियो बनाते हुए देश के राष्ट्रीय ध्वज को जला रहे थे और जब लोगों ने इसका विरोध किया तो उन्होंने उलटा लोगों पर ही हमला कर दिया।

चारों आरोपित तिरंगा झंडा जलाने के साथ-साथ देश विरोधी नारेबाजी भी कर रहे थे। वहाँ से गुजर रहे दो सजग नागरिकों ने इस कृत्य का विरोध किया। इस पर चारों उग्र हो गए और उन्होंने विरोध करने वाले दोनों युवकों पर हमला बोल दिया। जब वहाँ से गुजर रहे कुछ अन्य लोगों ने इस घटना को देखा तो उन्होंने बीच-बचाव किया।

इस दौरान लोगों ने एक आरोपित को खदेड़ कर पकड़ लिया। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। चूँकि आरोपित नाबालिग है, उसे बाल सुधार गृह में भेज दिया गया है। उसके तीन साथी भागने में कामयाब रहे हैं। वो अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है।

‘हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, बाजारखाला इंस्पेक्टर ने जानकारी देते हुए बताया कि राजाजीपुरम निवासी रविकांत शाम को टिकैत राय तालाब कॉलोनी के अंदर साइकलिंग कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने देखा कि चार लड़के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे झंडे को जला रहे हैं।

रविकांत ने इन लोगों को ऐसा करने से मना किया तो वे लोग मारपीट पर उतर आए। इसी समय रूपेश गुप्ता नामक सजग नागरिक रविकांत की मदद के लिए आगे आए लेकिन बदमाशों ने उन पर भी हमला बोल दिया।

फिर कुछ और लोगों की मदद से एक आरोपित को पकड़ कर पुलिस के हवाले किया गया। आरोपित की उम्र 15 साल है। सभी बदमाशों का इरादा था कि वो टिक-टॉक पर तिरंगा झंडा जलाते हुए वीडियो बना कर वायरल करें।

इस घटना के बाद कई स्थानीय नेता आरोपित को छुड़ाने थाने भी पहुँचे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्थानीय लोगों ने बताया कि आरोपित समाजवादी पार्टी के एक पूर्व नेता का भतीजा है। लेकिन, ऑपइंडिया से बातचीत में पुलिस ने इस बात को नकार दिया। रविकांत की शिकायत के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।

आरोपित के पकड़े जाने के बाद इलाक़े में तनाव भड़क गया था क्योंकि मामला दो समुदायों के बीच का बना दिया गया था। इसको ध्यान में रखते हुए पुलिस ने सांप्रदायिक तनाव रोकने के लिए व्यवस्था की। वहाँ अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ी। ‘न्यूज़ 18’ के अनुसार, इंस्पेक्टर बृजेन्द्र सिंह ने बताया कि तीनों फरार आरोपितों के बारे में पुलिस को जानकारी मिल गई है और उनकी तलाश तेज़ कर दी गई है।

पुलिस ने आईपीसी की धारा 124(A), 153(A), 504, 505(1)(B)(2), 352, 325, 506 और राष्ट्र गौरव अपमान निवारण अधिनियम 2 के तहत मामला दर्ज किया है। काफ़ी तादाद में थाने पहुँचे समुदाय विशेष के लोगों ने पुलिस पर दबाव बनाया कि वो आरोपित को छोड़ दें। उक्त नाबालिग आरोपित ने ही पूछताछ के दौरान पुलिस को अपने तीन अन्य साथियों के बारे में सूचना दी।

TikTok तिरंगा वीडियो मामले के आरोपित का सपा नेता से कोई रिश्ता नहीं: पुलिस

जब ऑपइंडिया ने पुलिस से बात की तो उन्होंने बताया कि गिरफ़्तार आरोपित का समाजवादी पार्टी के किसी नेता से कोई ताल्लुक नहीं है। पुलिस ने ऑपइंडिया से बात करते हुए उन मीडिया रिपोर्ट्स को नकार दिया, जिसमें आरोपित को समाजवादी पार्टी के नेता का भतीजा या रिश्तेदार बताया जा रहा था। हालाँकि, पुलिस ने अन्य आरोपितों के नामों का भी खुलासा नहीं किया है।

हाल ही में TikTok का इस्तेमाल इस्लामी और देशविरोधी प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किए जाने के कई मामले सामने आए हैं। जिस तरह से यहाँ कामोत्तेजक वीडियो, अश्लील हरकतें, सेक्सिज्म, नारीद्वेष, पोर्न, किसी अन्य के कंटेंट का दुरूपयोग, मजहबी कट्टरता, झूठी सूचनाओं और घरेलू हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है, कई लोगों ने इसे बैन करने की भी माँग की है। लोगों ने इसकी रेटिंग भी गिराई थी, जिससे गूगल ने रिस्टोर कर दिया था।

‘तू कौन होता है मास्क पहनाने वाला’: शराब तस्कर के साथ मिल कॉन्ग्रेस नेता के भाइयों ने हवलदार को पीटा

पंजाब के पटियाला के त्रिपड़ी इलाके में लॉकडाउन के दौरान सड़क पर बिना मास्क घूमने वाले युवकों को टोकने पर एक हवलदार से मारपीट का मामला सामने आया है। आरोपितों में से दो की पहचान एक कॉन्ग्रेस नेता के भाई के रूप में हुई है। इनके साथ तीसरा शख्स शराब तस्कर था। पुलिस ने सभी आरोपितों के ख़िलाफ़ केस दर्ज कर लिया है।

हवलदार का कहना है कि जब उन्होंने बिना मास्क के गाड़ी में घूमते हुए युवकों को रोका, तो उन्होंने उनके साथ ही बदसलूकी शुरू कर दी। युवक हवलदार से ही पूछने लगे- तू कौन होता है मास्क पहनाने वाला।

इस घटना के बाद हवलदार शेर सिंह ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वह पीसीआर विंग के ASI अजीत सिंह व दलीप सिंह के साथ त्रिपड़ी स्थित गुरु नानक नगर चौक पर लोगों को मास्क पहनने के लिए जागरूक कर रहे थे।

इसी दौरान कार में बिना मास्क लगाए तीन युवक वहाँ पहुँचे। हवलदार की नजर उनपर पड़ी तो उन्होंने तीनों युवकों से मास्क न पहनने व लॉकडाउन में बाहर घूमने की वजह पूछी। लेकिन जवाब देने की बजाय वो तीनों भड़क गए और बोले, मास्क पूछने का अधिकार हवलदार को नहीं है।

जब हवलदार शेर सिंह ने इस घटना का वीडियो बनान शुरू किया तो युवकों ने अपने साथी को फोन करके बुला लिया। बाद में युवकों ने हवलदार के साथ गाली-गलौच करके उससे मारपीट की। पर, जैसे ही लोगों ने इलाके में इकट्ठा होना शुरू किया वे सभी कार में भाग गए।

पड़ताल में आरोपितों की पहचान मनी, गिफ्टी, रिक्की व नानू के रूप में हुई। इनमें से रिक्की पर शराब तस्करी का केस दर्ज है। मनी और गिफ्टी पटियाला टू व्यापार मंडल के प्रधान गुरजीत सिंह बंटी के भाई हैं।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, घायल हवलदार को इस घटना के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, जहाँ उनपर समझौते का दबाव बनाया जाने लगा। बाद में वे छुट्टी लेकर अस्पताल से चले गए और अपनी शिकायत दर्ज करवा दी। अभी तक किसी आरोपित के गिरफ्तार होने की सूचना नहीं है।

रिपोर्ट के मुताबिक, थाना त्रिपड़ी के इंचार्ज हरजिंदर सिंह ढिल्लों ने कहा है कि आरोपितों ने ड्यूटी पर तैनात कर्मियों पर हमला किया था। एक आरोपित के खिलाफ शराब तस्करी का मामला त्रिपड़ी थाने में ही दर्ज है, जबकि दो आरोपित कॉन्ग्रेस नेता के भाई हैं।

गौरतलब है कि लॉकडाउन के पहले चरण से ही पुलिस पर हमले की बहुत खबरें आ चुकी हैं। लेकिन अब पटियाला का ये मामला बिलकुल नया है। जिससे पता चलता है कि लंबे समय से स्थिति को जानने समझने के बाद भी कुछ लोगों को अभी समझ नहीं आया कि कोरोना काल में क्या सावधानियाँ बरतनी हैं और कैसे उन लोगों का सम्मान करना है जो हमारी सुरक्षा के लिए कोरोना वॉरियर्स के रूप में तैनात किए गए हैं।

जिस सांसद ने किया ईसाई धर्मान्तरण का खुलासा, उसे अपनी ही पार्टी से मिल रही जान से मारने की धमकी

आंध्र प्रदेश में धर्मान्तरण में लिप्त ईसाई मिशनरियों की पोल खोलने वाले सांसद ने अपनी पार्टी से अपनी जान को ख़तरा बताया है। वहाँ की सत्ताधारी वाईएससीआरपी (YSRCP) के नेता ने कहा कि उन्हें अपनी ही पार्टी से जान का ख़तरा है। रघुराम कृष्णम राजू नर्सापुरम से सांसद हैं। उन्होंने अंदेशा जताया है कि उनकी अपनी ही पार्टी YSRCP के नेता और कार्यकर्ता उन्हें जान से मारना चाहते है। बता दें कि जगन रेड्डी की सरकार पर ईसाई तुष्टिकरण के आरोप लगते रहे हैं।

रघुराम कृष्णम राजू ने लोकसभाध्यक्ष ओम बिरला को एक याचिका देकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। उन्होंने कहा है कि उन्हें केंद्रीय बलों के द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि उनकी अपनी ही पार्टी के विधायक और समर्थक लगातार जान से मार डालने की धमकी दे रहे हैं। रघुराम कृष्णम राजू पिछले कुछ दिनों से आंध्र प्रदेश में अपनी ही पार्टी की सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस-प्रशासन उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दे रहा है, इसीलिए वो केंद्रीय सुरक्षा के लिए निवेदन कर रहे हैं।

रघुराम कृष्णम राजू उद्योगपति भी हैं, जिन्होंने बाद में राजनीति का रुख कर लिया। हाल ही में जब तिरुपति तिरुमला देवस्थानम बोर्ड ने मंदिर की संपत्ति को नीलाम करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने हिन्दुओं की भावनाओं को देखते हुए इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। हाउस-साइट डिस्ट्रीब्यूशन और बालू बेचने में हुए भ्रष्टाचार को लेकर भी उन्होंने मंदिर प्रशासन पर सवाल खड़े किए थे, जिसके बाद उनकी अपनी ही पार्टी विधायकों के साथ तू-तू-मैं-मैं हुई थी।

उन्होंने आरोप लगाया है कि स्थानीय पुलिस ने आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया, इसीलिए उन्हें मजबूरन लोकसभाध्यक्ष से गुहार लगानी पड़ी। उनका आरोप है कि एक विधायक ने तो उन्हें गन्दी-गन्दी गालियाँ भी दीं। उन्होंने वाईएसआरसीपी कैडर पर भी उन्हें धमकी देने का आरोप लगाया है। रघुराम कृष्णम राजू का कहना है कि चुनाव भी उन्होंने अपने ही दम पर जीता है, इसमें जगन मोहन रेड्डी के चेहरे का कोई योगदान नहीं है।

बता दें कि रघुराम कृष्णम राजू पहले भाजपा में थे। इसके बाद चुनाव आते ही उन्होंने वाईएसआरसीपी (YSRCP) का दामन थाम लिया था। उससे पहले वो चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी में भी रहे थे। वाईएसआरसीपी पार्टी के टिकट पर ही वो सांसद भी चुने गए थे। उनके आरोपों को लेकर पार्टी ने कोई जवाब नहीं दिया है। लोकसभाध्यक्ष की तरफ से फ़िलहाल किसी प्रकार का एक्शन लिए जाने की सूचना नहीं है।

बता दें कि एक न्यूज़ डिबेट में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी के सांसद खुलेआम ऑन एयर शो पर ये बोलते नजर आए थे कि यदि मिशनरी के लोग धर्मांतरण करवा रहे हैं, तो उसमें वो क्या कर सकते हैं। YSRCP के सांसद रघुराम कृष्णा राजू ने इस बात को ऑन एयर शो में माना था कि आंध्र प्रदेश में धर्मांतरण की प्रक्रिया तेजी से चालू है। लेकिन वह ये भी कहते नजर आए थे कि इसमें सरकार का कोई हाथ नहीं है।

इसके बाद उन्होंने कहा था, “रिकॉर्ड के अनुसार हमारे राज्य में ईसाइयों का प्रतिशत 2.5% से कम है, लेकिन वास्तव में यह 25% से कम नहीं होगा।” YSRCP नेता ने बताया था कि कुछ लोग ऐसे वर्ग से आते हैं, जिन्हें पहले से ही फायदा मिल रहा होता है। ऐसे में यदि वो ईसाई धर्म अपना लेते हैं, तो उन्हें वो फायदा मिलना बंद हो जाता है। यही कारण है कि लोग धर्मांतरण करते हैं, मगर उसका पंजीकरण नहीं करवाते।

ट्रक पर सवार होकर J&K से दिल्ली के लिए निकले आतंकी: कई राज्यों में है अलर्ट, सघन तलाशी शुरू

दिल्ली में आतंकी हमले की आशंका के बाद अलर्ट जारी कर दिया गया है। ख़ुफ़िया एजेंसियों को पता चला है कि जम्मू कश्मीर से दिल्ली के लिए ट्रक पर सवार होकर 4-5 आतंकी निकले हैं, जिसके बाद बीच में पड़ने वाले सभी राज्यों में है अलर्ट जारी कर दिया गया है ताकि उन्हें रोका जा सके। चूँकि दिल्ली में कोरोना के कारण सरकार और पुलिस-प्रशासन ख़ासा व्यस्त है, ऐसे में आतंकी अपनी मंसूबों को कामयाब करने के लिए मौके ढूँढ़ रहे हैं।

पुलिस को मिली सूचना ​के अनुसार, ट्रक, बस, कार या टैक्सी से जम्मू कश्मीर से कुछ आतंकी दिल्ली में प्रवेश कर चुके हैं। कुछ घुसने की ताक में लगे हुए हैं, जिसको लेकर सभी गेस्ट हाउस, होटलों और कश्मीर के नंबर के वाहनों की सघन तलाशी प्रारम्भ कर दी गई है। सभी बस स्टैंडों और रेलवे स्टेशनों पर भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रारंभिक सूचना ये थी कि जम्मू-कश्मीर से 4 से 5 आतंकी ट्रक में सवार होकर दिल्ली के लिए निकले थे।

दिल्ली के आउटर नॉर्थ जिले के क्षेत्रों में पुलिस को अत्यधिक सतर्क रहने और सघन तलाशी अभियान चलाने को निर्देशित किया गया है। डीसीपी, स्पेशल सेल क्राइम ब्रांच, स्पेशल ब्रांच और अन्य यूनिट को पहले ही अलर्ट जारी कर दिया गया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमाओं पर भी विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। भारत-चीन के बीच चल रहे तनाव के कारण सुरक्षा एजेंसियाँ पहले से ही अलर्ट पर हैं।

ज्ञात हो कि सशस्त्र बलों ने कश्मीर में पिछले 24 घंटों में कुलगाम व जडीबल में दो अलग-अलग मुठभेड़ों में चार आतंकवादियों को मौत के घाट उतार दिया। मारे गए चारों आतंकवादियों में से तीन की पहचान कर ली गई जबकि एक आतंकवादी की पहचान अभी होनी बाकी है। पुलिस व सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली थी कि श्रीनगर के जडीबल में तीन आतंकवादी छिपे हुए हैं। इसके बाद तुरंत पुलिस व सीआरपीएफ ने संयुक्त अभियान शुरू किया, जिसमें सभी आतंकी मारे गए। 

जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार कल (21 जून, 2020) के मुठभेड़ में आतंकियों के मारे जाने के साथ ही घाटी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब 4 प्रमुख आतंकी संगठनों के सरगनाओं का 4 महीने में सफाया हो गया है। जम्मू-कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने मीडिया को बताया कि पिछले 4 महीने में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिजबुल मुजाहिदीन और अंसार गजवत-उल हिंद के सरगनाओं को मुठभेड़ में मार गिराने में पुलिस ने सफलता पाई है। 

सफूरा जरगर ने राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला: दिल्ली पुलिस ने कहा, बेल पर सुनवाई टली

सफूरा जरगर की जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने 23 जून तक सुनवाई स्थगित कर दी। सफूरा के वकील द्वारा जमानत याचिका के बाद हाई कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस से रिपोर्ट माँगी थी।

दिल्ली पुलिस ने 22 जून 2020 को हाई कोर्ट में सफूरा जरगर और उसके दिल्ली दंगों में संलिप्तता संबंधित रिपोर्ट पेश किया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार की गई छात्र सफूरा ज़रगर ने अशांति पैदा की और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला था।

अपनी स्टेटस रिपोर्ट में, दिल्ली पुलिस ने कहा कि अभियुक्त सफूरा ज़रगर न केवल घृणा पैदा करने के लिए षड्यंत्रकारी डिजाइन का हिस्सा थी, बल्कि उसका षड्यंत्र किसी भी तरह के उपयोग से लोगों की मृत्यु और घायल होने का कारण बनता।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों की आरोपित और जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर के वकील ने चौथी बार उनकी जमानत के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इससे पहले तीन बार सफूरा की बेल याचिका खारिज की जा चुकी थी।

आज 22 जून को दिल्ली हाई कोर्ट में उनकी याचिका पर सुनवाई है। लेकिन, यहाँ तक पहुँचने से पहले बता दें कि सफूरा की बेल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट विचार करने से मना कर चुका है। वहीं लोअर कोर्ट में भी यह याचिका खारिज हो चुकी है। मगर, इस बार सफूरा जरगर ने मामले में निचली अदालत के 4 जून के आदेश को चुनौती दी है, जिसमें अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया था।

कोर्ट ने कब-कब खारिज की सफूरा की जमानत याचिका

सबसे पहले 18 अप्रैल को सफूरा पर UAPA लगने से पूर्व एक याचिका दायर की गई थी। लेकिन 21 अप्रैल तक उसके ऊपर आतंकवाद विरोधी कानून लगने के कारण उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया। उस समय मेट्रोपोलिटियन मजिस्ट्रेट वसुंधरा छौंकर ने सफूरा को आरोपों को मद्देनजर राहत देने से मना कर दिया था।

इसके बाद 2 मई को दोबारा बेल के लिए अर्जी दी गई। मगर, इस बार भी लंबी बहस के बाद सफूरा को जमानत नहीं मिल पाई।

4 जून को सफूरा ने मेडिकल ग्राउंड पर दिल्ली के ट्रॉयल कोर्ट में फिर याचिका दायर की। इस याचिका में सफूरा को पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीड़ित बताकर रियायत की माँग की गई। लेकिन कोर्ट ने 4 जून को भी सफूरी की बेल के लिए मंजूरी नहीं दी। बल्कि जेल प्रशासन को यह आदेश दिया कि वह सफूरा को उपयुक्त मेडिकल सुविधाएँ उपलब्ध करवाएँ।

अपना आदेश सुनाते हुए कोर्ट ने कहा था, “जब आप अंगारे के साथ खेलना चुनते हैं, तो आप हवा को दोष नहीं दे सकते कि चिंगारी थोड़ी दूर तक पहुँच जाए और आग फैल जाए।”

ट्रायल कोर्ट ने दंगों के मद्देनजर कहाकि जाँच के दौरान एक बड़ी साजिश की जाँच की गई और अगर किसी साजिशकर्ता द्वारा किए गए षड्यंत्र, कृत्यों और बयानों के सबूत थे, तो यह सभी के खिलाफ स्वीकार्य है।

अदालत ने सफूरा पर फैसला सुनाते हुए कहा था कि भले ही आरोपित (सफूरा) ने हिंसा का कोई काम नहीं किया था, लेकिन वह गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के प्रावधानों के तहत अपने दायित्व से नहीं बच नहीं सकती।

सफूरा कब और क्यों हुई थी गिरफ्तार?

जामिया की छात्रा सफूरा जरगर के खिलाफ दिल्ली विरोधी दंगों के मद्देनजर यूएपीए के तहत मामला चल रहा है। उसे 10 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। उसपर आरोप है कि उसने जाफराबाद-सीलमपुर में 50 दिनों के हंगामा की साजिश रची थी और वहाँ महिलाओं-बच्चों को बिठाने के लिए पूरा जोर लगाया था।

इसके अलावा दिल्ली पुलिस ने सफूरा के मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को यह भी बताया था कि सफूरा जरगर ने भीड़ को उकसाने के लिए कथित तौर पर एक भड़काऊ भाषण दिया था, जिसके बाद फरवरी में दंगे हुए थे। इतना ही नहीं, सफूरा जरगर की एक वीडियो भी सामने आई थी। जिसमें उन्हें कहते सुना गया था, ‘दिल्ली तेरे खून से इंकलाब आएगा।’

सफूरा जरगर को रिहा कराने के लिए मीडिया गिरोह हुआ सक्रिय

सफूरा जरगर की गिरफ्तारी के बाद से ही उसके गर्भवती होने को लेकर मीडिया गिरोह लगातार विक्टिम कार्ड खेल रहा था। कभी उसके हालातों को गौर करवाते हुए भावनात्मक पोस्ट लिखे जा रहे थे। कभी गर्भवती हथिनी के समान रखते हुए भारत में मातृत्व के प्रति सम्मान पर सवाल उठाए जा रहे थे।

गिरफ्तारी से लेकर अब तक के अंतराल में स्क्रॉल,द प्रिंट, द वायर लगातार इन कोशिशों में जुटे थे कि किसी तरह उसके ख़िलाफ़ लिए एक्शन को गलत साबित कर दिया जाए और उसे रिहाई दिलवाई जाए। लेकिन सफूरा पर लगे आरोप इतने संगीन थे कि 2 महीने तक उनकी जमानत संभव न हो सकी और कोर्ट से हर बार सफूरा को निराशा मिली।

इसके अलावा सफूरा के लिए फर्जी व उन्मादी रिपोर्टिंग करने पर द वायर को भी दिल्ली पुलिस से फटकार मिली थी। क्योंकि द वायर ने अपनी रिपोर्ट में बिना तथ्यों के आधार पर लिख दिया था कि दिल्ली पुलिस ने एक हिंदू और एक मुस्लिम को गिरफ्तार किया और बाद में दोनों के साथ अलग-अलग बर्ताव किया।

‘मंदिर के भगवान को बीच सड़क पर रख कर जूते से मारो’ – आसिफा गैंगरेप को हिंदुत्व से जोड़ने की कोशिश में पत्रकार

उत्तर प्रदेश के कुख्यात पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने एक बार फिर से अपनी गंदी जुबान का परिचय देते हुए हिन्दू देवी-देवताओं पर ओछी टिप्पणी की है। ट्विटर पर उसके द्वारा इस तरह की बयानबाजी के बाद कई हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुँची। कनौजिया ने हिन्दू देवता की मूर्ति को जूते मारने की बात कही। हालाँकि, विरोध होने के बाद अब कनौजिया ने अपनी इस ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

तथाकथित पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने इस बार हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा को प्रदर्शित करने के लिए एक छोटी बच्ची की लाश का सहारा लिया। जम्मू में आसिफा की बलात्कार वाली घटना का जिक्र करते हुए उसने कहा कि जिस मंदिर में आसिफा का बलात्कार हुआ, उस मंदिर के भगवान की मूर्ति को सड़क के बीच में रखकर जूता से मरना चाहिए और फिर उसे गटर में विसर्जित कर देना चाहिए।

प्रशांत कनौजिया पहले भी ऐसे ही अजीबोगरीब ट्वीट कर के सुर्खियाँ बटोरने की कोशिश करता रहा है। बता दें कि कठुआ की नाबालिग आसिफा के गैंगरेप को हिंदुत्व से जबरदस्ती जोड़ने की कोशिश की गई थी। इस ख़बर के सामने आने के बाद त्रिशूल पर कंडोम दिखाने से लेकर मंदिरों को बलात्कार की जगह बताने तक की कुचेष्टा की गई थी। आसिफा गैंगरेप मामले में 6 आरोपितों को न्यायालय पहले ही सज़ा सुना चुका है।

प्रशांत कनौजिया ने इसी मामले को फिर से उठाया ताकि वो हिन्दू देवी-देवताओं को गाली देकर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचा सके। प्रशांत कनौजिया ने एफआईआर की चेतावनी के बाद ट्वीट डिलीट तो कर दिया लेकिन उसने अभी तक इस मामले में माफ़ी नहीं माँगी है। कई हिंदूवादी संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ पुलिस कार्रवाई की माँग की है। कनौजिया द्वारा चुपके से ट्वीट डिलीट करने के बाद भी लोग उसके कृत्य से आहत हैं।

प्रशांत कनौजिया ने लोगों के विरोध के बाद चुपके से डिलीट किया अपना ट्वीट

वैसे ये पहली बार नहीं है जब प्रशांत कनौजिया ने इस तरह की हरकत की हो। फेसबुक और ट्विटर पर आपत्तिजनक पोस्ट शेयर करने के आरोप में लखनऊ पुलिस ने 8 जून 2019 को स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत जगदीश कनौजिया को उसके आवास से गिरफ्तार किया था। दरअसल, जून 6, 2019 को कनौजिया ने फेसबुक और ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें हेमा नाम की एक युवती मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर खड़ी होकर खुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी।

साथ ही वो ये भी दावा कर रही थी कि सीएम योगी उसके साथ एक साल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात कर रहे हैं। प्रशांत ने इस वीडियो को ‘इश्क छुपता नहीं छुपाने से योगी जी’ कैप्शन के साथ शेयर किया था। जिसके बाद यूपी पुलिस ने उस पर एक्शन लेते हुए उसे गिरफ्तार किया था और फिर जमानत के लिए उसकी पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आरोपित कनौजिया को 11 जून को जमानत मिली थी। 

इसके कुछ ही दिनों बाद सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने को लेकर यूपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए पत्रकार प्रकाश कनौजिया को फौरन रिहा करने का आदेश दिया था। यही नहीं, मामले की सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने यूपी पुलिस को फटकार भी लगाई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रशांत कनौजिया ने जो शेयर किया और लिखा, इस पर यह कहा जा सकता है कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। लेकिन, उसे अरेस्ट किस आधार पर किया गया था?

जवान और जुबान से चीन को जवाब: जरूरत पड़ने पर प्रोटोकॉल नहीं, अपने हिसाब से कार्रवाई करने की सेना को खुली छूट


गलवान घाटी में भारत-चीन सेना के बीच चल रहे विवाद के मद्देनजर भारत सरकार ने सीमा पर तैनात भारतीय सेना को मौका आने पर अपने हिसाब से कार्रवाई करने की खुली छूट दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शीर्ष सैन्य अधिकारियों के साथ लद्दाख में हालात पर उच्च स्तरीय बैठक के बाद सूत्रों ने यह जानकारी मीडिया को दी।

रक्षा मंत्री के साथ इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह और वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने हिस्सा लिया। इस बैठक में सेना को सरकार की ओर से यह साफ कर दिया गया कि वह कोई भी एक्शन ले सकती है।

इस बैठक में सरकार ने LAC के नियमों में बदलाव किया और सेना के फील्ड कमांडरों को यह अधिकार दिया कि वह परिस्थितियों में जवानों को हथियार के इस्तेमाल की आजादी दे सकते हैं।

इसके अलावा सीमा पर चीन के साथ तनाव बढ़ने के मद्देनजर सरकार ने हथियार और गोला बारूद खरीदने के लिए सेना के तीनों अंगों को 500 करोड़ रुपए तक की प्रति खरीद परियोजना की आपात वित्तीय शक्तियाँ दी हैं।

सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर सैनिकों की जान खतरे में पड़ती है और चीनी सैनिक खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करते हैं तो सेल्फ डिफेंस करते वक्त किसी प्रोटोकॉल की ना सोचें।

वहीं, एयरफोर्स के जवानों की छुट्टियाँ भी रद्द होने की खबर मीडिया में है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने पहले ही कहा है कि वायुसेना अब किसी भी चुनौती के लिए तैयार है।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ सेना को सीमा पर कार्रवाई करने की खुली छूट दी गई है। वहीं बातचीत के रास्ते को भी खुला रखा गया है। कहा जा रहा है कि इस हफ्ते दोनों देशों के बीच एक बार फिर सैन्य और डिप्लोमेटिक लेवल की बातचीत हो सकती है। इसके अलावा इसमें सैनिकों को पीछे करने और अप्रैल से पहले की स्थिति को लागू करने पर चर्चा हो सकती है।

हालाँकि, यहाँ याद दिला दें कि इससे पहले भी भारत चीन मसले को सुलझाने के लिए कुछ बैठकें हुईं थीं। लेकिन, उस समय उनसे कोई हल नहीं निकला। हर बातचीत में भारत की ओर से यही कहा गया कि चीनी सैनिक पूरी तरह से पीछे हटें और अप्रैल से पूर्व की स्थिति को सीमा पर लागू कंरे। लेकिन चीनी सैनिक इस बात को मानने को ही तैयार नहीं हुए।

इसी का नतीजा था कि 15 जून को डि-एस्केलेशन प्रक्रिया के दौरान चीनी फौजियों ने लाठी-डंडे, लोहे की कँटीली तारों से लिपटे डंडे और पत्थरों का इस्तेमाल कर भारतीय सेना पर हमला किया। इस हमले में भारत ने अपने 20 जवान खोए। लेकिन, इन 20 जांबाजों ने जाते-जाते भी चीन को भी मुँहतोड़ जवाब दिया और कम से कम चीन के 43 सैनिक मारे गए।

अपने कर्म से अनिल कपूर के घर पैदा हुई, फायदा मिला: सोनम कपूर ने नेपोटिज्म का किया बचाव

एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म भाई-भतीजावाद को लेकर बहस छिड़ी हुई है। इसकी वजह से स्टार किड्स को होने वाले फायदों को लेकर लोग मुखर हैं। जिन लोगों को इस वजह से निशाना बनाया जा रहा उनमें एक नाम सोनम कपूर का भी है। ट्विटर और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग कह रहे हैं कि ‘भाई-भतीजावाद’ की वजह से ही सोनम फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं।

इस बीच रविवार (जून 21, 2020) को सोनम कपूर ने फादर्स डे के मौके पर ट्विटर पर नेपोटिज्म का बचाव किया। उन्होंने कहा है कि अनिल कपूर की बेटी होने पर उन्हें गर्व है। उन्हें यह बात कहने में हिचक नहीं है कि अपने कर्म की वजह से वह उनके घर पैदा हुईं और इसका उन्हें फायदा हुआ।

‘स्टारकिड’ होने की वजह से इंडस्ट्री में टिके होने के आरोपों का जवाब देते हुए सोनम कपूर ने ट्वीट किया, “आज फादर्स डे पर मैं एक बात कहना चाहूँगी। हाँ, मैं अपने पिता की बेटी हूँ और मैं उन्हीं की वजह से यहाँ हूँ। यह मेरा सौभाग्य है। यह कोई अपमान नहीं है। मेरे पिता ने मुझे यह सब देने के लिए कड़ी मेहनत की है और यह मेरे कर्म हैं, जहाँ मैं पैदा हुई हूँ और जिनके यहाँ पैदा हुई हूँ। मुझे गर्व है उनकी बेटी होने पर।”

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद निर्माता, निर्देशकों, स्टारकिडों के एक समूह के खिलाफ नेपोटिज्म के आरोप का सोनम कपूर द्वारा बचाव करने के बाद भी सोशल मीडिया यूजर्स ने अभिनेत्री के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया था और कड़े सवाल उठाए।

सोनम कपूर भी इंडस्ट्री के कई कलाकारों में से एक थीं, जिन्हें सुशांत सिंह राजपूत की मौत के लिए दोषी ठहराया गया था। प्रशंसकों ने निर्माता, निर्देशक और स्टार किड्स के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की, जिन्हें उन्होंने ‘इनसाइडर’ बताते हुए बाहरी लोगों को धमकाने और बिना किसी कारण के अलग-थलग करने के लिए जिम्मेदार ठहराया।

गौरतलब है कि बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के मौत के बाद बॉलीवुड के कुछ स्टार्स पर लोगों का गुस्सा फूट रहा है। सोशल मीडिया पर यूजर्स बॉलीवुड इंडस्ट्री पर निशाना साध रहे हैं कि यहाँ सिर्फ स्टार्स के बच्चों को मौका मिलता है और आउटसाइडर्स को नहीं।

इसके साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स ने सोनम कपूर से जवाब माँगा। इसके बाद सोनम कपूर ने अपना कमेंट सेक्शन बंद कर दिया। फिर यूजर्स ने उनके मैसेज बॉक्स में जाकर जवाब माँगना शुरू कर दिया।

17 जून को सोनम ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा था, “दोस्तों मैं आमतौर पर नफरत और नकारात्मकता से दूर नहीं भागती, क्योंकि मुझे उन लोगों पर तरस आती है, जिनके दिलों में इतनी नफरत है, क्योंकि यह उन्हें ज्यादा परेशान करता है। लेकिन यह मेरे दोस्तों और परिवार को ट्रिगर कर रहा है। मैं समझती हूँ। ये वे लोग हैं जो रूढ़िवादी दक्षिणपंथी एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। मैं अपने कमेंट्स सेक्शन को बंद कर रही हूँ।” इसे सोनम ने बाद में हटा दिया था। 

रविवार को सोनम कपूर ने ‘नेपोटिज्म’ का बचाव करने के साथ ही सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा किए गए कमेंट्स और मैसेज को शेयर करते हुए सोनम लिखती हैं, “ये कुछ कमेंट्स हैं जो मुझे सुनने को मिल रहे हैं। जो भी मीडिया और अन्य लोगों ने इस बात को बढ़ावा दिया है। मैं आप सबको इसका जिम्मेदार मानती हूँ। जो लोग दूसरों के साथ अच्छा बर्ताव करने का संदेश दे रहे हैं, वो खुद दूसरे का बुरा कर रहे हैं।”

जब एक यूजर ने कमेंट को बंद करने के बारे में पूछा तो सोनम ने कहा, “हाँ मैंने अपने और अपने माता-पिता के कमेंट सेक्शन को बंद कर दिया है, क्योंकि मैं नहीं चाहती कि मेरे 64 वर्षीय माता-पिता भी इससे गुजरें। उन्होंने कुछ नहीं किया और मैं ऐसा डर कर नहीं कर रही हूँ, बल्कि मैं अपने मानसिक स्वास्थ्य और मेरे माता-पिता के संरक्षण के लिए ऐसा कर रही हूँ।”

सोशल मीडिया पर एक पुराना वीडियो जमकर शेयर किया जा रहा है। इसमें सोनम कपूर, करण जौहर से कह रही हैं कि वे सुशांत सिंह राजपूत को नहीं जानती हैं। इस वीडियो को शेयर करके सुशांत के फैंस ने उन्हें सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल किया है। सोनम ने लिखा कि लोग मेरे उस बच्चे की मौत की दुआ माँग रहे हैं, जो अभी पैदा भी नहीं हुआ। उन्होंने वीडियो पर सफाई देते हुए कहा कि ये वीडियो 7 साल पुराना है, जब उनकी एक फिल्म आई थी। वो उनको नहीं जानती थीं।