मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर सूरत जाते हुए मनोर के पास बुधवार (मई 13, 2020) को हुए सड़क हादसे में दिग्विजय त्रिवेदी नाम के वकील की दर्दनाक मौत हो गई। पालघर साधु लिंचिंग में यही साधुओं के वकील थे।
— Legal Rights Observatory- LRO (@LegalLro) May 14, 2020
इस घटना में वकील के बगल में बैठी महिला के भी गंभीर रूप से घायल होने की सूचना है। हालाँकि महिला कौन हैं, उनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है। मगर, कासा के एक सरकारी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।
महाराष्ट्र टाइम्स के मुताबिक, ये हादसा मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर मनोर में मेंडवान ब्रिज के पास हुआ। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय त्रिवेदी ही गाड़ी चला रहे थे और इसी दौरान कार का नियंत्रण खोया और गाड़ी पलट गई, जिस कारण त्रिवेदी की मौके पर ही मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक, दिग्विजय त्रिवेदी राजनैतिक पार्टी बहुजन विकास अघाड़ी का लीगल सेल संभालते थे। इनकी मृत्यु के बाद ट्विटर पर पालघर मामले को लेकर सवाल उठाया जा रहा है और महाराष्ट्र सीएम, पालघर पुलिस, महाराष्ट्र डीजीपी को टैग करके पूछा जा रहा है कि बड़े पैमाने पर होने वाली लिंचिंग में किस-किस का हाथ है? क्या ये सब योजनाबद्ध है?
भारतीय सेना ‘टूर ऑफ ड्यूटी’ नामक प्रोग्राम लॉन्च करने की तैयारी में है। मकसद है, आम लोगों को सेना में सेवा करने का मौका देना। यदि इस प्रस्ताव पर मुहर लगती है तो आम लोग भी 3 साल तक सेना में काम कर सकेंगे।
बुधवार (13 मई 2020) को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवाने ने कहा कि आम नागरिकों को सेना भर्ती करने का विचार तब आया जब उन्होंने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का दौरा करने पर पाया कि युवा सेना के जीवन का अनुभव करने के लिए हमेशा उत्सुक रहते है। उन्होंने कहा, “जब हमारे अधिकारियों ने कॉलेजों में युवाओं को संबोधित किया, तो यह महसूस किया कि विद्यार्थी सेना के जीवन का अनुभव करना चाहते हैं, लेकिन कैरियर के रूप में नहीं।”
सेना प्रमुख ने कहा कि इससे हमारे दिमाग में यह विचार आया कि क्यों न युवाओं को दो-तीन साल तक अपने देश की सेवा करने का अवसर दिया जाए। देश के बेस्ट टैलेंट को अपनी कुनबे में शामिल करने से भारत को अत्यधिक लाभ होगा। साथ ही यह समाज को भी अनुशासित और लाभान्वित करेगा।
सेना में वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, टूर ऑफ ड्यूटी (टीओडी) के प्रस्तावित मॉडल को सीमित संख्या में सेना में अधिकारियों और अन्य रैंकों के लिए परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा। मॉडल सफल होने पर वैकेंसी बढ़ाई भी जाएँगी। साथ ही यह प्रस्ताव तीन साल के सशस्त्र बलों के इंटर्नशिप को परमानेंट जॉब में भी बदल दिया जाएगा।
आपको बता दे टीओडी योजना, अधिकारियों के लिए लगभग 100 रिक्तियों और जवानों के लिए 1,000 के साथ शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम भारतीय सशस्त्र बलों के लिए प्रशिक्षण, वेतन और भत्ते के रूप में बड़ी लागत बचा सकता है। नए मॉडल के तहत शामिल होने वाले लोगों पर 80-85 लाख रुपये खर्च होंगे, जबकि शार्ट सर्विस कमीशन के एक अधिकारी पर 6 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो जाते हैं जो 14 वर्ष तक सेवा प्रदान करते हैं।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि तीन साल आर्मी ज्वाइन किए हुए व्यक्तियों से कॉरपोरेट्स को भी लाभ होगा। सेना टीओडी योजना के अंतर्गत काम करने वाले अधिकारियों और जवानों को कुछ राशि देने के प्रस्ताव के बारे में भी सोच रही है। साथ ही अधिकारी यह भी कोशिश कर रहें हैं कि इस प्रस्तावित योजना के तहत आइआइटी जैसे टॉप इंस्टीट्यूट में पढ़ने वाले युवा भी इससे जुड़े।
“टूर ऑफ ड्यूटी” मॉडल इज़रायल या कुछ अन्य देशों की तरह कॉन्सक्रिप्शन ’या अनिवार्य सैन्य सेवाओं के समान नहीं होगा। हालाँकि, यह पूरी तरह से स्वैच्छिक होगा और इसमें शामिल होने के इच्छुक लोगों के लिए चयन मानदंड में कोई छूट नहीं दी जाएगी।
कथित तौर पर,सेना के पास वर्तमान में लगभग 43,000 अधिकारी हैं। इनमें से लगभग 80% स्थायी आयोग (पीसी) कैडर और 11.8 लाख अन्य रैंक के हैं। शॉर्ट-सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारी के लिए न्यूनतम सेवा कार्यकाल 10 वर्ष है और उनमें से 50-60% को कम से कम 54 वर्ष की आयु तक और उसके बाद पेंशन का लाभ पाने के लिए स्थायी कमीशन दिया जाएगा।
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में अस्पताल पर हुए आतंकी हमले ने जैनब की गोद फिर से सूनी कर दी है। गोद भरने के लिए उसने करीब सात साल इंतजार किया। नौ महीने तक बच्चे को पेट में पाला। लेकिन पैदा होने के चार घंटे के भीतर ही उस बच्चे की जिंदगी आतंकियों ने छीन ली।
27 वर्षीय जैनब बच्चे के जन्म लेने से बेहद खुश थी। उसका नाम रखा ओमिद, जिसका अर्थ होता है ‘उम्मीद’। वह अपने बच्चे और परिवार के साथ अपने घर बामियान लौटने की तैयारी में थी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।
12 मई को घड़ी में करीब सुबह के दस बजे थे। अस्पताल के प्रसूता वार्ड में कई महिलाएँ अपने बच्चों के साथ तो कुछ महिलाएँ अपने बच्चों के इंतजार में अस्पताल के बेड पर लेटी थीं। इसी बीच कुछ ऐसा होता है जिसका किसी को अंदेशा नहीं था।
तीन बंदूकधारी पुलिस की वर्दी में अस्पताल परिसर में प्रवेश कर जाते हैं। ये हमलावर सबसे पहले पानी टंकी को अपना निशाना बनाते हुए धमाका कर देते हैं। इसके बाद आतंकी अंधाधुंध गोलीबारी करते हुए प्रसूता वार्ड में घुस जाते हैं।
गोलीबारी की आवाज सुन अस्पताल में चीख-पुकार मच जाती है। जैनब की सास ज़ाहरा मुहम्मदी के हवाले से रॉयटर्स ने बताया कि आतंकियों ने ओमिद को गोली मार दी। उन्होंने कहा, “जब मैंने आँखें खोली मेरे पोते का खून से लथपथ शव जमीन पर पड़ा था।”
मुहम्मदी बिलखते हुए कहती है, मैं अपनी बहू को काबुल के अस्पताल में इसलिए लेकर आई ताकि उसका बच्चा सही से पैदा हो। लेकिन अब हम उसका शव लेकर बामियान जाएँगे। उन्होंने बताया कि हमलावर गर्भवती महिलाओं को अपनी गोलियों का निशाना बना रहे थे।
वह कहती हैं कि “हमने उस बच्चे का नाम ओमिद रखा। हमें एक बेहतर भविष्य और एक बेहतर अफगानिस्तान की उम्मीद की थी।” उन्होंने बताया कि जैनब ने अपने बेटे को पाने के लिए 7 साल 9 महीने का एक लंबा इतजार किया था, लेकिन वह अपने बच्चे के साथ मात्र चार घंटे ही साथ बिता सकी।
वहीं नर्सों और डॉक्टरों ने कहा कि हम इस हमले से इतने सदमे में हैं कि उनके परिजन अस्पताल जाने से भी मना कर रहे हैं। घटना की चश्मदीद मैसूमा क़ुर्बानज़ादा ने कहा “कल रात मैं सो नहीं सका, क्योंकि हमले के डरावने दृश्य मेरे दिमाग को विचलित कर रहे थे। मेरा परिवार मुझे अस्पताल में काम करना बंद करने के लिए कह रहा है। लेकिन मैं एक स्वास्थ्य कर्मचारी के तौर पर काम करना बंद नहीं करूँगा।”
आपको बता दें कि बीते मंगलवार को रमजान के महीने में अफगानिस्तान में दो अलग-अलग स्थानों हुए आतंकी हमलों से पूरे देश दहल गया था। आतंकियों ने पहला हमला देश की राजधानी काबुल के एक मैटरनिटी अस्पताल पर किया और दूसरा हमला नंगरहार प्रांत में अंतिम संस्कार के दौरान किया गया। इस हमले की जिम्मेदारी ISIS ने ली है।
काबुल के अस्पताल पर किए गए हमले में दो नवजात समेत उनकी माताओं और कई नर्सों को मिलाकर कुल 16 लोगों की मौत हुई, जबकि नंगरहार प्रांत में आत्मघाती हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए थे।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण प्रेस वार्ता कर आर्थिक पैकेज की दूसरी किश्त जारी कर रहीं। निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा घोषित ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज के बारे में विस्तार से मीडिया के सामने हर पहलुओं को रखा।
कल ही वित्त मंत्री ने MSME सेक्टर के लिए कई बड़ी घोषणाएँ की थीं। आज कृषि क्षेत्र के लिए उम्मीदें लगाई जा रही हैं।
प्रेस वार्ता शुरू होते ही वित्त मंत्री ने कहा कि पैकेज के दूसरे चरण में गरीब, प्रवासी मजदूर, छोटे व्यापारी और किसानों के लिए पैकेज होगा। अनुराग ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हमेशा ही समाज के गरीब वर्ग का ध्यान रखा है। उन्होंने कहा आज की प्रेस वार्ता भी उन्हीं को समर्पित है और अन्य घोषणाएँ अगली कॉन्फ्रेंस में सामने रखी जाएँगी।
निर्मला सीतारमण की प्रेस वार्ता की प्रमुख बातें –
3 करोड़ किसानों को रियायती दरों पर कर्ज दिया गया
29,500 करोड़ रूपए की मदद नाबार्ड और ग्रामीण बैंक्स के जरिए की गई है
नाबार्ड के जरिए किसानों को कर्ज मुहैया कराया गया
86,600 करोड़ रुपए के 63 लाख ऋण केवल मार्च में किसानों को दिए गए। 4,200 करोड़ रुपए का ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर विकास फंड राज्यों को मार्च में दिया गया
शहरी गरीबों के लिए 11 हजार करोड़ रुपए दिए गये हैं, ये राज्य सरकार पर है कि वो कैसे इसे खर्च करे
राज्य के किसानों के लिए 6700 करोड़ रुपए की मदद की गई
ग़रीबों और श्रमिकों पर सरकार का ध्यान; 3 करोड़ किसानों को 4.22 लाख करोड़ का रियायती कर्ज़ दिया गया; किसानों को 3 महीने तक ब्याज में रियायत का लाभ मिलेगा
25 लाख नए किसान क्रेडिट कार्ड की मंजूरी दी है जिसकी लिमिट 25000 करोड़ होगी
बेघरों के लिए रहने और खाने की व्यवस्था की गई है, 12 हजार स्वयं सहायता समूह ने 3 करोड़ मास्क बनाए
न्यूनतम दैनिक मजदूरी को 182 रूपए प्रति दिन से बढ़ाकर 202 रुपए किया गया
एसडीआरएफ फण्ड का इस्तेमाल प्रवासी मजदूरों के लिए शेल्टर बनाने के लिए करने की अनुमति दी
श्रमिकों का कल्याण सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर
श्रम कानून में सुधार का काम चल रहा है
ESIC रजिस्ट्रेशन जरुरी, ताकि फैक्ट्री कामगारों को इसका लाभ मिले
2.33 करोड़ मजदूरों को पंचायत के जरिए गांव में काम मिला है
अब तक 10 हजार करोड़ रुपए मनरेगा पर खर्च किए गए हैं
मजदूरों का सालाना स्वास्थ्य जांच जरूरी होगा
न्यूनतम मजदूरी में भेदभाव खत्म किया गया है
सभी मजदूरों को रोजगार पत्र मिलेगा
10 से कम मजदूरों वाली कंपनी में ESI जरूरी
लेबर कोर्ट के माध्यम से मजदूरों को लाभ जाएगा, न्यूनतम वेतन में भेदभाव और क्षेत्रीय असमानता को दूर किया जाएगा
8 करोड़ मजदूरों के लिए 35 सौ करोड़ का प्रवाधान किया जा रहा है, जिन्हें 5-5 किलो प्रति फैमली मेंबर चावल और 1 किलो चना दिया जाएगा
1 देश, 1 राशन कार्ड: देश के किसी भी कोने में राशन ले सकेगा
जिस राज्य का राशन है वो उस राशन कार्ड का इस्तेमाल कही भी कर सकता है। किसी भी राशन कार्ड के दुकान से अनाज उठा सकता है। पूरे देश में एक ही राशन कार्ड चलेगा।
अगले दो महीनों के लिए सभी प्रवासियों को मुफ्त अनाज की आपूर्ति की जाएगी। जो लोग गैर-कार्ड धारक हैं, उन्हें प्रति व्यक्ति 5 किलोग्राम गेहूं / चावल और 1 किलो चना प्रति परिवार दिया जाएगा।
कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने आगाह किया है। कहा है कि यह वायरस शायद ही कभी खत्म हो इसलिए इसके साथ जीना सीखना होगा।
WHO के अनुसार एचआईवी की तरह इसका अस्तित्व हमेशा बना रह सकता है। ऐसे में इसके खत्म होने को लेकर अटकलें लगाने की बजाए इससे मुकाबले पर फोकस किया जाना चाहिए।
WHO के इमरजेंसी विशेषज्ञ (आपातकालीन बीमारियॉं) डॉ. माइक रयान (Mike Ryan) ने बुधवार (13 मई 2020) को एक ऑनलाइन ब्रीफिंग में ये बातें कही। उन्होंने कहा, “शायद यह वायरस कभी न जाए।”
डॉ. रयान ने बताया कि पहले भी कुछ बीमारियॉं आई और कभी खत्म नहीं हुई। मसलन, एचआईवी। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों का इलाज खोजा गया ताकि लोग उसके साथ जी सकें।
Dr. Mike Ryan, the head of the World Health Organization emergencies program, said that the novel coronavirus may become ‘another endemic virus in our communities’ and ‘may never go away’ https://t.co/vnfbFP3LDrpic.twitter.com/vUDJaGMHDn
डॉ. रयान ने कहा कि इस संक्रमण का एक प्रभावी टीका आने की उम्मीद है। लेकिन इसे बड़े पैमाने पर बनाने और दुनियाभर में इसे उपलब्ध कराने के लिए काफी काम करने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि यह बता पाना मुश्किल है कि कब तक दुनिया इस संकट पर विजय प्राप्त कर लेगी।
उन्होंने कहा, “यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदाओं का एक दुष्चक्र है, जिसके बाद आर्थिक आपदाएँ आती हैं। यह वायरस कभी दूर नहीं किया जा सकता है। जैसे हम एचआईवी को दूर नहीं कर पाएँ है। मगर हमने एचआईवी से निजात पा लिया है। हमने तमाम तरह के थेरेपी, टीके इसके रोकथाम के तरीके विकसित किए। अब लोगों को एचआईवी से उतना डर नहीं लगता जितना पहले हुआ करता था। हमारी तमाम कोशिशों की वजह से हम एचआईवी लोगों को लंबा और स्वस्थ जीवन प्रदान कर रहे हैं।
रयान ने कहा किवे दो बीमारियों की तुलना नहीं कर रहें है। लेकिन यथार्थवादी होना ज़रूरी है। वर्तमान में 100 से अधिक टीके तैयार किए जा रहें है। खसरा जैसी अन्य बीमारियाँ हैं, जिनके टीके होने के बावजूद वो समाप्त नहीं हुए हैं।
उन्होंने कहा, “हमारे पास एक अत्यधिक प्रभावी वैक्सीन विकसित करने का तरीका है। लेकिन हमें उस वैक्सीन को सभी के लिए उपलब्ध कराना होगा, तभी इस बीमारी को खत्म करने की कोशिश की जा सकेगी।”
इस बीच, डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेबियस (Tedros Adhanom Ghebreyesus), जिन पर लोग चीनी महामारी को लेकर दुनिया को गुमराह करने का आरोप लग रहे हैं, ने कहा है कि अभी भी प्रयास के साथ वायरस को नियंत्रित करना संभव है।
डॉ. टेड्रोस ने बताया कि प्रतिबंधों में ढील से संक्रमण फैलेगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार प्रतिबंधों में ढील से संक्रमण का फैलाव अपने दूसरे चरण में पहुँच सकता है।
मनोज कुमार यादव अपने 15 साथियों के साथ दिल्ली से चल दिए। पहुँचना है उन्हें बिहार के भागलपुर। दिल्ली में अपने कमरे से निकले हुए आज चार दिन हो गए हैं। उनके पास रास्ते में खाने के लिए पैसे तक नहीं हैं। बस सबके पास अपनी-अपनी साइकल है और किसी भी तरह से अपने गाँव-घर पहुँचने का हौंसला!
बिहार के मनोज कुमार यादव से जब ऑपइंडिया ने फ़ोन के माध्यम से सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लॉकडाउन की घोषणा के कुछ दिन बाद ही उनके पास दिल्ली में जो एक-दो हजार रुपए थे, वो भी खर्च हो गए और राशन लेने के लिए भी उनके पास और पैसे नहीं बचे थे।
मनोज ने बताया कि जब सारे पैसे खत्म हो गए तो किसी भी तरह से अपने गाँव पहुँचना चाहते थे। इसी चाह में वो अपने साथियों के साथ साइकल लेकर घर की ओर निकल गए। आज मनोज और उनके साथियों का दल इटावा पहुँच गया है।
काम और रोजगार के लिए मनोज दिल्ली स्थित नजफगढ़ के धर्मपुर में रह रहे थे। वो मूल रूप से भागलपुर, बिहार के निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनके रुपए और राशन खत्म होने के बाद कुछ दिन उन्हें पास ही के इलाके में गेहूँ की कटाई करनी पड़ी।
इस दौरान दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा उनके लिए किसी भी प्रकार के प्रबंध नहीं किए गए और ना ही उन तक किसी ने राशन पहुँचाया। जेबखर्च या पैसे देने की बात तो दूर, उनकी समस्याओं को लेकर किसी ने सम्पर्क साधने तक की कोशिश नहीं की।
गेहूँ काटकर जोड़े चंद पैसे
गेहूँ कटाई के बाद एक दिन गोपाल और उसके साथी सड़क पर थे। तभी एक व्यक्ति, जो गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने को आए थे, ने उनका हाल जानना चाहा तो मनोज और उनके साथियों ने अपने गाँव लौटने की इच्छा जताई।
इस व्यक्ति ने ही उनके सभी साथियों को साइकल दिलाई और खाना खिलाया। तपती धूप में साइकल से अपने घर के लिए निकले मनोज यादव ने फोन पर बातचीत में बताया कि रास्ते में उन्हें खाने-पीने की समस्या नहीं आ रही है। क्योंकि कोई ना कोई उन्हें भोजन करवा देता है।
उन्होंने बताया कि मोबाइल वैन वाले लगातार सड़क पर मौजूद लोगों को खाना उपलब्ध करवा रहे हैं। मनोज कुछ महीने पहले ही रोजगार के लिए दिल्ली आए थे। लेकिन इसी बीच पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में आ गया, जिस कारण देशव्यापी बंद की घोषणा की गई। फिर एक दिन उन्हें खाने और घर लौटने को मजबूर होना पड़ा।
दिल्ली से बिहार जाने के लिए निकले मनोज के दल में साइकल पर कुल सोलह लोग हैं और उनका अनुमान है कि दो-चार दिन में वो अपने घर पहुँच जाएँगे।
प्रवासी मजदूर और दिल्ली की सरकार
दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार प्रवासी श्रमिकों को उनके घर वापस भेजने के इंतजामों के बारे में झूठ ही बोलती नजर आ रही है। कभी केजरीवाल यह कहते देखे गए हैं कि दिल्ली सरकार अपने खर्च पर लोगों को घर भेज रही है तो कुछ दिन बाद सच्चाई सामने आने पर पता चलता है कि उन्होंने चुपके से इसके लिए बिहार सरकार को इसका बिल थमाया है।
लेकिन मनोज जैसे ही और भी न जाने कितने ऐसे लोग हैं, जो दिल्ली सरकार के प्रबंधों की ‘वास्तविकता‘ का शिकार हुए होंगे। यह वास्तविकता ही है कि एक ओर दिल्ली सरकार मीडिया मैनेजमेंट में जुटी हुई अपनी पीठ थपथपा रही है और दूसरी ओर श्रमिक अपने स्तर पर ही किसी तरह से प्रबंध कर घर पहुँचने का प्रयास कर रहे हैं।
तबलीगी जमात के सदस्यों को क्वारंटाइन सेंटर से बाहर निकालने का मामला अब अदालत पहुँच गया है। जानकारी के मुताबिक, इस संबंध में आज यानी गुरुवार (मई 14, 2020) को दिल्ली के हाई कोर्ट में याचिका दर्ज हुई है।
Plea moved in Delhi High Court seeking immediate release of all persons related to Tabligi Jamaat, alleging that they are detained for more than 35 days in the name of quarantine centers. Matter to be heard tomorrow. pic.twitter.com/MFx6Kc0tIz
इस याचिका में आरोप लगाया गया कि तबीलीगी जमात के सदस्यों को क्वारंटाइन सेंटर में रखने के नाम पर 35 दिनों से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया है। इसलिए अब उन्हें रिहा किया जाना चाहिए।
बता दें, इस याचिका को वकील शाहिद अली द्वारा दायर किया गया है। जिसमें 3288 व्यक्तियों को तत्काल रिहा करने की माँग है।
इस याचिका में सरकार पर निशाना साधते हुए कहा गया कि सरकार अपने काम में विफल रही है और अपने कर्तव्यों का पालन सही ढंग से नहीं कर रही हैं।
याचिका में कहा गया कि क्वारंटाइन के नाम पर जबरन तबलीगी सदस्यों को रखना न्यायसंगत नहीं है और यह केंद्र सरकार के नियमों का पूरी तरह से उल्लंघन है।
Plea moved in Delhi High Court seeking immediate release of all persons related to Tabligi Jamaat, alleging that they are detained for more than 35 days in the name of quarantine centers. Matter to be heard tomorrow. (ANI)
याचिका में आरोप लगाया गया कि मरकज में इकट्ठा हुए 3288 जमातियों को कोरोना वायरस की वजह से विभिन्न क्वारंटाइन सेंटर में भेजा गया था और अब 40 दिन बीत जाने के बाद भी इन्हे छोड़ा नहीं गया। इसलिए न्यायलय सरकार को निर्देश दे कि वे 14 दिन से क्वारंटाइन अवधि के नियम का पालन सुनिश्चित करे।
इसके अलावा, याचिका में संगठन के 2 सदस्यों की मौत की जाँच करने के लिए एक समिति गठित करने की माँग भी की गई है, जिनकी क्वारंटाइन केंद्र में मौत हो गई थी। साथ ही अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की माँग भी की है।
उल्लेखनीय है कि इस याचिका से पहले दिल्ली सरकार ने तबलीगी जमात के लोगों की क्वारंटाइन सेंटर से रिहा करने के आदेश दे दिए थे और सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए थे कि जो 2466 जमाती अपना क्वारंटाइन का समय पूरा कर चुके हैं, उन्हें छोड़ दिया जाए।
मगर, बावजूद इसके दिल्ली सरकार पर कई बार जमातियों को जबरन क्वारंटाइन केंद्रों में बंद करके रखने के आरोप लगे। खुद AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने इस प्रकार का आरोप दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर लगाया था।
बता दें, गुरुवार को दायर हुई इस याचिका में सामाजिक कार्यकर्ता सबीहा क़ादर ने आरोप लगाते हुए कहा है कि कई लोगों को अवैध तरीके से क्वारंटाइन सेंटर्स में रखा गया है और इन केंद्रों में रह रहे कई लोगों ने प्रशासन अधिकारियों को पत्र लिखे हैं लेकिन उन पर विचार नहीं किया गया।
वकील शाहिद अली द्वारा दायर की गई इस याचिका में प्रशासन पर ये भी आरोप लगाया गया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वाहन करने में नाकाम रहे हैं और उन्होंने इसमें लापरवाही बरती है।
गौरतलब है कि भारत में कोरोना संक्रमण राज्यों में तेजी से पहुँचने के पीछे का महत्तवपूर्ण कारण तबीलीगी जमातियों को माना गया था। हालाँकि, इनके बारे में पता लगते ही राज्य प्रशासन ने इन्हें ढूँढ-ढूँढकर क्वारंटाइन कराया था।
लेकिन, फिर भी कई जगह ऐसे मामले आए थे जहाँ जमाती जान-बूझकर बीमारी को छुपाते और फैलाते मिले। ऐसे में सरकार ने एक निश्चित अवधि के बाद इनपर कार्रवाई करने का फैसला किया था।
हिंदूफोबिया का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। विन्नी बैलम (Vinny Bailam) नामक शख्स ने सोशल मीडिया में हिंदुओं के खिलाफ घृणा फैलाते हुए उन्हें मारने की धमकी दी है। विन्नी के फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वह हॉस्पिटैलिटी चेन मैरियट इंटरनेशनल के लिए काम करता है।
सोशल मीडिया पोस्ट में विन्नी ने न केवल हिंदुओं के खिलाफ नफरत दिखाई है, बल्कि कट्टरपंथियों और ईसाइयों को हिंदुओं के नरसंहार के लिए उकसाया भी है।
उसने भारतीयों, विशेष रूप से हिंदुओं को ‘नस्लवादी’ कहते हुए, धमकी दी है कि अगर देश के मुस्लिम और ईसाई एकजुट हो गए तो हिदुओं को खतरनाक परिणाम भुगतने होंगे। इस्लामिक कट्टरपंथियों के भारत विरोधी दुष्प्रचार के बाद जिन हिंदुओं को खाड़ी देशों में नौकरी से निकाला जा रहा है, उनका मजाक उड़ाते हुए उसने लिखा है कि अब हिंदुओं को भोजन तक नहीं मिलेगा और उन्हें भीख माँगनी होगी।
साभार-@Vedic_Revival
विनी बैलम ने इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों की तरह ही गोमूत्र पीने के लिए हिंदुओं का मजाक उड़ाया है। पीएम मोदी और रिपब्लिक टीवी के प्रमुख अर्नब गोस्वामी पर हमला करते हुए उसने अपमानजनक शब्दों में कहा कि हिंदुओं को गोमूत्र पीना पसंद है।
साभार-@Vedic_Revival
राष्ट्रवादी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी संगठन कहते हुए, विनी बैलम ने उन सभी को मारने की अपील की।
साभार-@Vedic_Revival
चौंकाने वाली बात यह है कि उसने मुंबई पुलिस को हिंदू पुलिस ‘आतंकवादी’ बताया है।
साभार-@Vedic_Revival
उसने यह भी कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा, तो मजहब विशेष के लोग इसे नष्ट कर देंगे।
“ look like even Supreme Court judge took bribe from BJP…when there was 400yrs old masjid how can they give this stupid decision. You built ram mandir there and Muslims will demolish this time for sure. pic.twitter.com/7YRQV6fLfz
विन्नी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर गौर करने से पता चलता है कि वह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हिंदू विरोधी प्रचार को बढ़ावा देता रहा है। अप्रैल 2020 में बनाए गए उसके ट्विटर प्रोफाइल पर पीएम मोदी, कई पत्रकारों और हिंदूवादी संगठनों पर गाली-गलौज के साथ अपमानजनक पोस्ट भरी हुई हैं।
विन्नी बैलम (Vinny Bailam) के नाम से बना एक फेसबुक प्रोफाइल जिसमें उल्लेख किया गया है कि वह मैरियट इंटरनेशनल के साथ काम कर रहा है।
विनी बैलम का फेसबुक पेज
विन्नी बैलम के फेसबुक विवरण के अनुसार वह मुंबई से है और वर्तमान में लंदन (यूनाइटेड किंगडम) में रहता है।
सोशल मीडिया यूजर्स ने मैरियट से यह स्पष्ट करने की मॉंग की है कि वह अपने कर्मचारी के इस तरह विचारों का समर्थन करती है या नहीं।
मैरियट ने एक ट्वीट में कहा है कि कोई भी आचरण जो आंतरिक नीतियों और सेवा मानकों का पालन नहीं करता है, वह स्वीकार्य नहीं होगा। इसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।
अपडेट: इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मैरियट ने अब कहा है कि विन्नी बैलम यूरोप के किसी भी प्रबंधित होटल में कार्यरत नहीं है और मैरियट इंटरनेशनल के साथ कोई व्यवसायिक संबंध नहीं है। 14 मई को ऑपइंडिया को भेजे गए एक ईमेल में, होटल चेन के दक्षिण एशिया के एरिया मार्केटिंग डायरेक्टर ने निम्नलिखित बयान जारी किया- “हम हाल ही में आई रिपोर्टों और एक व्यक्ति द्वारा मैरियट इंटरनेशनल के कर्मचारी होने का दावा करने वाले व्यक्ति के बारे में ऑनलाइन चर्चाओं से अवगत और परेशान हैं। जिसने अनुचित नस्लीय और धार्मिक टिप्पणी की। इस व्यक्ति के विचार मैरियट इंटरनेशनल के विचार और रुख को नहीं दर्शाते हैं। हमने इस मामले को गंभीरता से लिया है और हमारी प्रारंभिक जाँच से पता चला है कि यह व्यक्ति यूरोप के हमारे किसी प्रबंधित होटल में कार्यरत नहीं है और मैरियट इंटरनेशनल के साथ इसका कोई व्यवसायिक संबंध नहीं है। हम अपने फ्रैंचाइजी के साथ भी काम कर रहे हैं, जो सीधे कर्मचारियों को नियुक्त करते हैं और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इस पर उचित कार्रवाई की जाए। एक आतिथ्य कंपनी के रूप में, मैरियट विभिन्न संस्कृतियों और जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को सम्मान करता है। मैरियट हमारे मेहमानों के लिए एक सुरक्षि और मेहमाननवाज वातावरण बनाने का प्रयास करता है। हम अपने मेहमानों और सहयोगियों की सुरक्षा और भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता के रूप में सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय कानूनों और नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। विशेष रूप से आज की वर्तमान परिस्थिति में, यह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है कि हम एकजुटता में खड़े हों और सभी के लिए सम्मान बनाए रखें।”
कुलमिलाकर, अपने जवाब में मैरिएट ने कहा है कि विन्नी वैलम सीधे मैरिएट से नहीं जुड़ा है किसी फ्रेंचाइज के एम्प्लॉय के रूप में कार्यरत हो सकता है। हम फिर भी उस पर सख्त एक्शन सुनिश्चित करेंगे।
Zoom ऐप बाइबिल क्लास को हैक कर Porn क्लिप (अश्लील वीडियो) चलाने की घटना सामने आई है। चर्च ने इस मामले में अदालत का सहारा लिया है। चर्च ने बाइबिल क्लास के दौरान पोर्नोग्राफी के प्रसारण पर ‘Zoombombing’ का मुकदमा दर्ज कराया है।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जूम ऐप (Zoom) के खिलाफ शिकायतों में अब सैन फ्रांसिस्को के सबसे पुराने चर्चों में से एक चर्च भी शामिल हो गया है। चर्च ने दावा किया है कि ‘ज़ूमिंग’ सुरक्षा कारणों से सुरक्षित नहीं है।
चर्च द्वारा संघीय अदालत में दायर की गई एक शिकायत के अनुसार, यह घटना 6 मई को हुई थी। कुछ साइबर हमलावरों ने एक बाइबिल क्लास को हैक कर लिया था। हैकर्स द्वारा इस बाइबिल क्लास में शमिल लोगों की स्क्रीन से स्क्रीन कंट्रोल बटन भी गायब कर दिए गए, जिसके बाद स्क्रीन पर पोर्न क्लिप (अश्लील वीडियो) दिखाई देने लगी।
चर्च का कहना है कि उनकी क्लास के दौरान यह दो बार हो चुका है, जिस कारण क्लास को रद्द करना पड़ा। कम्प्लेन में कहा गया है, “वीडियो बहुत ही बुरे थे। वयस्क लोग नवजात और बच्चों के साथ यौन क्रियाएँ कर रहे थे। इसके साथ ही वो उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी कर रहे थे।”
दायर की गई याचिका में ज़ूम ऐप पर ‘चर्च की पवित्रता’ को भंग करने का आरोप लगाया गया है।
चर्च ने अपनी शिकायत में आगे कहा है कि इस वर्चुअल क्लास, जिनमें से ज्यादातर वरिष्ठ नागरिक थे, को बंद करने के तुरंत बाद सेंट पॉलुस लुथरन चर्च (Saint Paulus Lutheran Church) ने ज़ूम वीडियो कम्युनिकेशंस (Zoom Video Communications Inc) से संपर्क किया, लेकिन ‘ज़ूम’ ने शिकायत पढ़ने के बाद भी कुछ नहीं किया।
चर्च के अनुसार, कंपनी ने उनसे कहा कि ऐसा करने वाला एक ‘ज्ञात अपराधी’ था और उसे ब्लॉक कर दिया गया है। लेकिन उन्होंने वीडियोकॉन्फ्रेंसिंग की सुरक्षा में सुधार करने के लिए कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।
चर्च गोपनीयता के उल्लंघन के लिए ज़ूम ऐप से हर्जाने की माँग कर रहा है और अदालत से याचना की है कि वह शिकायतों पर लापरवाही बरतने से कंपनी को रोकने का निर्देश दे।
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के कारण जारी बंद के दौरान कई देशों में शैक्षिणिक संस्थानों, सरकारी और निजी क्षेत्रों में ज़ूम ऐप की लोकप्रियता बढ़ी है।
हालाँकि, ऐप से संबंधित कई सुरक्षा सम्बन्धी मामले भी सामने आए हैं। ‘ज़ूमबॉम्बिंग’ यानी, हैक कर के ऐप उपयोगकर्ता का डेटा बेचने के लिए उनके निजी चैट रूम में घुसना आदि शिकायतें बड़ी मात्र में दर्ज की गई हैं।
हाल ही में भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा एक नई एडवाइजरी जारी कर कहा गया था कि किसी भी व्यक्ति के लिए जूम ऐप एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म नहीं है, इसलिए उपयोगकर्ता जूम ऐप का इस्तेमाल निजी कार्यों के लिए न करें।
कोरोना वायरस की मार सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूरों पर पड़ी है। लॉकडाउन के बीच पैदल ही अपने घर जाने की जद्दोजहद में लगे मजदूर आए दिन हादसे का शिकार हो रहे हैं। इस बार घटना उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर की है। मुजफ्फरनगर-सहारनपुर हाइवे पर पैदल जा रहे प्रवासी मजदूरों को बुधवार (13.5.20) देर रात एक तेज रफ्तार बस ने कुचल दिया। इसमें 6 लोगों की मृत्यु हो गई।
6 migrant workers who were walking along the Muzaffarnagar-Saharanpur highway killed after a speeding bus ran over them late last night, near Ghalauli check-post. Case registered against unknown bus driver. pic.twitter.com/s81e7gpYkH
रिपोर्टों के अनुसार, यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घौली चेक-पोस्ट के पास हुई। पुलिस ने अज्ञात बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है। आउटलुक की रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के वक़्त आरोपी ड्राइवर शराब के नशे में गाड़ी चला रहा था। पुलिस ने इलाके की नाकाबंदी कर फरार ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया है।
रिपोर्ट के अनुसार गंभीर रूप से घायल हुए दो प्रवासी श्रमिकों को जिला चिकित्सालय में प्राथमिक उपचार के बाद मेरठ रेफर कर दिया। साथ ही मामूली रूप से घायल हुए दो अन्य प्रवासियों का मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इस तरह की एक और भयावह घटना मध्य प्रदेश के गुना जिले में हुई। यहाँ 14 मई की सुबह 3 बजे एक ट्रक हादसे में 50 प्रवासी मजदूर घायल हो गए और 8 लोगों की मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार प्रवासी मजदूर कंटेनर में सवार होकर महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जा रहे थे। यह कंटेनर गुना कैंट थाना के समीप विपरीत दिशा से आ रही बस से टकरा गया। दुर्घटना में घायल हुए लोगों का जिला अस्पताल में इलाज चल रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में, मध्य प्रदेश में ट्रक पलटने की वजह से 5 प्रवासियों की मौत हो गई थी और 11 लोग घायल हो गए थे। ये हादसा तब हुआ, जब आम से लदे ट्रक में मजदूर हैदराबाद से उत्तर प्रदेश जा रहे थे। इससे पहले भी 15 प्रवासी कामगारों की मौत ट्रैन से कुचलने की वजह से तब हुई थी, जब वे पटरियों पर सो रहे थे।