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सैफ अली खान पर हमला करने वाला बांग्लादेशी, नाम ‘शरीफुल इस्लाम शहजाद’: ठाणे में झाड़ियों के बीच से पुलिस ने दबोचा, न्यूज देखकर बदल रहा था लोकेशन

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमले के केस का बांग्लादेशी एंगल भी निकला है। मुंबई पुलिस ने हमलावर मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद उर्फ विजय दास, उर्फ बीजे को ठाणे से गिरफ्तार किया है। मुंबई पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपित के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह बांग्लादेशी है और भारत में अवैध तरीके से घुसा था। आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम का इस्तेमाल किया। मुंबई पुलिस ने अब इस केस में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ भी जोड़ दी हैं।

मुंबई के डीसीपी जोन 9, दीक्षित गेडम ने बताया, “16 जनवरी की रात 2 बजे अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमला हुआ। इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है और उसकी उम्र 30 वर्ष है। उसने चोरी के इरादे से घर में घुसपैठ की थी। आरोपित को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसकी रिमांड की माँग की जाएगी। मामले की आगे जाँच जारी है।”

डीसीपी दीक्षित गेडम ने आगे कहा, “प्रथम दृष्टया, आरोपित बांग्लादेशी है। उसने भारत में प्रवेश करने के बाद अपनी पहचान बदल ली थी। उसका असली नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है। शुरुआत में उसने कुछ दिनों तक मुंबई में काम किया और फिर मुंबई के आसपास के इलाकों में चला गया। आरोपित हाउसकीपिंग एजेंसी में काम करता था।” मुंबई पुलिस ने इस मामले में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ जोड़ते हुए अपनी जाँच का दायरा बढ़ा दिया है।

पुलिस की शुरुआती जाँच में यह भी पता चला है कि आरोपित पिछले कुछ समय से अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहा था। गिरफ्तारी से पहले वह ठाणे के हीरानंदानी एस्टेट के पास बने लेबर कैंप की झाड़ियों में छिपा हुआ था। पुलिस ने वहाँ सर्च ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार किया। सैफ पर हमला करके फरार होने के बाद से वह लगातार न्यूज चैनल देख रहा था और पुलिस एक्शन के हिसाब से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित ने अपराध को अंजाम देने के लिए सैफ अली खान के अपार्टमेंट की इमरजेंसी सीढ़ियों का इस्तेमाल किया और दमकम विभाग की सीढ़ियों की तरह हल्की सीढ़ियों के बल पर वो अंदर घुसा।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित के पास से कोई पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी, नहीं मिला। उसकी हरकतें एक साधारण मजदूर के बजाय एक शातिर अपराधी जैसी थी, तभी वो इतने समय तक मुंबई पुलिस को चमका देता रहा। उसे पकड़ने के क्रम में मुंबई से लेकर एमपी और छत्तीसगढ़ तक युवकों को पकड़ा गया। ऐसे में पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश है।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर अटैक मामले में 2 संदिग्ध हिरासत में… एक छत्तीसगढ़ के दुर्ग से, दूसरा MP से: CCTV फुटेज में ईयरफोन खरीदते दिखा था हमलावर

बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ग्यानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन में एक संदिग्ध को पकड़ा। पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों के आधार पर इस व्यक्ति की पहचान की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में आरपीएफ ने संदिग्ध को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पकड़ा और फिर जीआरपी थाने में भेज दिया, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में मुंबई पुलिस ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लिया। इन दोनों गिरफ्तारियों को लेकर पुलिस को उम्मीद है कि सैफ अली खान पर हुए हमले की गुत्थी जल्द ही सुलझाई जा सकेगी।

इस बीच, पुलिस को दादर स्थित एक मोबाइल शॉप से सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति ईयरफोन खरीदते हुए देखा गया। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति हमले के बाद स्टेशन के पास देखा गया था। मुंबई पुलिस ने इस आधार पर रेलवे स्टेशनों की निगरानी बढ़ाई और अन्य राज्यों में भी सूचना साझा की। इस संदिग्ध की शक्ल छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पकड़े गए व्यक्ति से मिलती जुलती दिख रही है।

मुंबई पुलिस की 35 से अधिक टीमें इस मामले की जाँच में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर हमले के बाद कपड़े बदलकर भागने की कोशिश कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज में उसे लकड़ी की छड़ी और हेक्सा ब्लेड के साथ देखा गया है। पुलिस ने फुटेज के आधार पर कई संदिग्धों से पूछताछ की और आखिरकार दो संदिग्धों को हिरासत में लेने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने बताया कि हमलावर ने हमले से पहले अभिनेता के फ्लैट की रेकी की थी और उसे सैफ के घर के बारे में पूरी जानकारी थी।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर हमले के बाद से हमलावर फरार था। जिसके बाद पुलिस ने हमलावर को पकड़ने के लिए 35 टीमें बनाई थी। इससे पहले, एक अन्य व्यक्ति को हमले के दूसरे ही दिन हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसका सैफ के मामले से कोई लेना-देना नहीं निकला था।

फ्लाइट बुकिंग में 162% का उछाल, होटल कारोबार 3 गुना बढ़ा: प्रयागराज महाकुंभ आध्यात्मिक ही नहीं, कारोबार को भी कर रहा मजबूत; ₹4 लाख करोड़ के बिजनेस का अनुमान

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में प्रशंसा हर तरफ हो रही है। कुंभ ना सिर्फ सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी निखारने का काम कर रहा है। महाकुंभ के आयोजन के दौरान भारत के कई व्यवसायिक क्षेत्रों में भारी उछाल देखने को मिला है। इनमें सबसे अधिक उछाल होटल इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है। इससे प्रयागराज के व्यवसायी काफी खुश हैं।

महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज के कारोबार में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। होटलों में अगले कई दिनों तक कमरे खाली नहीं हैं। होटल के साथ-साथ खान-पान के सामान, स्थानीय उत्पाद, कंबल, ऊनी कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज में फ्लाइट्स की बुकिंग में 162 प्रतिशत का उछाल देखने को मिल रहा है।

फ्लाइट्स के अलावा रेलवे, बसों, टैक्सियों आदि की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों से लेकर बसों एवं टैक्सियों तक में लोग खचाखच भर करके कुंभ नहाने के लिए प्रयागराज पहुँच रहे हैं। छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और ऑनलाइन बुकिंग का काम करने वाली कंपनियाँ भी इस बूम से काफी खुश हैं। कुंभ खत्म होने तक यानी 45 दिनों में उन्हें भारी मुनाफा होने की उम्मीद है।

प्रयागराज होटल एंड रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि श्रद्धालु और पर्यटकों द्वारा बुकिंग कराने के कारण होटल इंडस्ट्री को 30 से 40 फीसदी तक का मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुनाफा बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। थोक और खुदरा व्यापारी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का मानना है कि महाकुंभ के अवसर पर सिर्फ होटल और टेंट सिटी का कारोबार 2,500 से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। केंद्रीय व्यापार मंडल के महामंत्री शिवशंकर सिंह का मानना है कि एफएमसीजी उत्पाद, ऑटोमोबाइल, सीसीटीवी कैमरा, केबल और खाने-पीने के सामान की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।

शिवशंकर सिंह का कहना है कि मकर संक्रांति के स्नान तक खुदरा व्यापार में भी 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि कुंभ स्नान में विशेष स्थान रखने वाले मौनी अमावस्या पर यह बिक्री और भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हस्तशिल्पी इस बार 35 करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकते हैं। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद कादिर का भी ऐसा ही मानना है।

मोहम्मद कादिर का कहना है कि महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज में खाद्य सामग्री, अनाज, पूजा सामग्री, कपड़े, कंबल, गद्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेंट के कपड़े आदि के व्यापार में दोगुना की बढ़ोतरी हुई है। मोहम्मद कादिर का कहना है कि मेले में जैसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी वैसे-वैसे वृद्धि में और भी अधिक वृद्धि होगी और व्यापारियों को फायदा होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ होटलों, धर्मशालाओं और टेंट से ही 40,000 करोड़ रुपए के व्यापार की संभावना है। पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन से जुड़ा 20,000 करोड़ रुपया का कारोबार होगा। वहीं तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियाँ, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा।

इसी तरह परिवहन यानी रेलवे-टैक्सी आदि से 10,000 करोड़ रुपए का व्यवसाय होने का अनुमान है। टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से 10,000 करोड़ रुपए का व्यापार अनुमानित है। वहीं, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से 10,000 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है।

CAIT ने अनुमान लगाया है कि अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से 3,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा। इसी तरह डिजिटल भुगतान सेवा, वाई-फाई सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग बुकिंग यानी ई-टिकटिंग से 1,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस महाकुंभ में डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे बड़े ब्रांडों ने 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इस तरह 26 फरवरी तक चलने वाले 45 दिनों के इस महाकुंभ मेले में 2 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस होने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, इंडस्ट्री के जानकार इस व्यापार को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बता रहे हैं। वहीं, सरकार का अनुमान है कि मेले से उसे 25,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कुंभ मेले में करीब 6,900 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 

दरअसल, कुंभ मेले में दुनिया भर से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। अगर हर पर्यटक औसतन 5000 रुपए खर्च करता है तो महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है। वहीं, इंडस्ट्री का अनुमान है कि मेले में औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपए हो तो यह आँकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए को पार सकता है। इससे देश की जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है। 

मुसीबुल शेख ने ‘प्रदीप’ नाम से बनवाए फर्जी दस्तावेज, लिव-इन में रहने लगा हिंदू लड़की के साथ: खुफिया इनपुट पर सूरत पुलिस ने पकड़ा, पूछताछ में बोला- ‘निकाह’ का था इरादा

गुजरात के सूरत में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 26 वर्षीय मुसीबुल मकबूल शेख ने खुद को हिंदू प्रदीप क्षेत्रपाल बताकर एक हिंदू लड़की को प्रेमजाल में फंसाया। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले मुसीबुल ने सूरत में हिंदू इलाके में झूठी पहचान के सहारे एक मकान किराए पर लिया और नेपाली मूल की हिंदू लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा। यह साजिश तब खुली, सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को उसकी फर्जी पहचान के बारे में गुप्त सूचना मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुसीबुल ने मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से एक फर्जी आधार कार्ड तैयार किया था, जिसमें उसने अपना नाम प्रदीप सुजय क्षेत्रपाल बताया। यह सब उसने इसलिए किया क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू बहुल इलाके में मकान किराए पर नहीं मिल रहा था और उसे अपनी पहचान भी छिपानी थी। पुलिस जाँच में पता चला कि वह पिछले पाँच महीने से झूठे दस्तावेजों के सहारे हिंदू बनकर वहाँ रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले मुसीबुल ने मुंबई में एक हिंदू लड़की से मुलाकात की थी। देश गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की नेपाली मूल की है। उसे फाँसने के लिए मुसीबुल ने खुद को प्रदीप बताकर लड़की का विश्वास जीता और उसे शादी और बेहतर जीवन का सपना दिखाया। लड़की उसके जाल में फंस गई और वह उसके साथ सूरत आ गई। मुसीबुल ने हिंदू इलाके में रहने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रांदेर इलाके में एक व्यक्ति झूठे दस्तावेजों के सहारे रह रहा है। इसके बाद SOG ने कार्रवाई करते हुए मुसीबुल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने हिंदू बनकर लड़की को धोखा दिया। पुलिस ने मुसीबुल के पास से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आरसी बुक और ₹15,000 नकद बरामद किए हैं। मुसीबुल ने कबूल किया कि उसने यह साजिश सिर्फ इसलिए रची क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू इलाके में मकान नहीं मिल रहा था और वो जल्द ही ‘निकाह’ भी करने वाला था।

एएसआई जालूभाई मगनभाई की शिकायत पर एसओजी सूरत सिटी ने BNS की धाराओं 319, 336(2), 336(3) और 338 के तहत उस पर केस दर्ज किया है। पुलिस इस मामले को लव जिहाद के एंगल से जाँच रही है। अधिकारियों का मानना है कि मुसीबुल की इस साजिश में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि मुसीबुल का संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। फिलहाल उसे रांदेर पुलिस को सौंप दिया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जा रही है।

कर्नाटक में 45% बढ़ा मेट्रो का किराया, पहले बस फेयर में हुआ था 15% इजाफा: लोगों ने कॉन्ग्रेस सरकार से पूछा- क्या यही आपका ‘खटाखट मॉडल’

कर्नाटक सरकार द्वारा फ्री बस यात्रा की रेवड़ी बाँटने के बीच अब आम जनता पर और बोझ डालने की तैयारी हो गई है। सरकार द्वारा फ्री यात्रा की सुविधा का ऐलान करने के बाद सरकार का खजाना खाली हो गया था और अब इसे भरने के लिए कर्नाटक सरकार ने जनता के परिवहन खर्च को बढ़ाने का कदम उठाया है। कर्नाटक में राज्य परिवहन निगम द्वारा बसों का किराया 15 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद अब बेंगलुरु मेट्रो (Namma Metro) के किराए में भी 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 20 जनवरी से लागू होने की संभावना है, जिससे मेट्रो में सफर करने वालों को बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 17 जनवरी को अपनी बोर्ड मीटिंग में मेट्रो किराए में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वृद्धि के तहत, मेट्रो का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो जाएगा, जबकि अधिकतम किराया 60 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाएगा। इस वृद्धि का कारण मुख्य रूप से ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बिजली के खर्च और पुराने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

BMRCL अधिकारियों के अनुसार, नए किराए की घोषणा जल्दी ही की जाएगी और यह बढ़ोतरी 20 जनवरी से लागू हो सकती है। इसके अलावा स्मार्टकार्ड उपयोगकर्ताओं को 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जो मेट्रो यात्रा को थोड़ा सस्ता बनाए रखने में मदद करेगा। हालाँकि यह फैसला यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि 45 प्रतिशत की वृद्धि एक बड़ा बदलाव है और इस कारण बेंगलुरु में मेट्रो के उपयोगकर्ता खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं।

इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। लोग कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर तंज भी कस रहे हैं।

शिल्पा नाम की एक्स यूजन ने इसे ‘खटा खट कॉन्ग्रेस मॉडल’ करार दिया।

सिद्दाराम नाम के यूजर ने इसे कॉन्ग्रेस की कार्यप्रणाली करार दिया है। उन्होंने नम्मा मेट्रो के किराए की बढ़ोतरी को जनता के साथ धोखा कहा।

बसों में बढ़ाया गया था 15% किराया

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी बसों के किराए में की थी, और इसके पीछे भी वही कारण थे – ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया था कि इन बढ़ती लागतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन परिवहन सेवाओं में लगातार बढ़ती लागत के कारण राज्य सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईंधन और कर्मचारियों के खर्च में बढ़ोतरी के कारण राज्य परिवहन निगमों को लगभग 74.84 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे भरने के लिए यह कदम जरूरी था।

मेट्रो और बसों के किराए में बढ़ोतरी का यह कदम तब उठाया गया है, जब कर्नाटक सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी थी और अब इसे भरने के लिए आम आदमी को और अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव केवल मेट्रो और बसों के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बेंगलुरु शहर के ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। कई लोग पहले ही बढ़ते हुए किराए की वजह से मेट्रो और बसों के उपयोग में संकोच कर सकते हैं, जिससे निजी वाहन उपयोग में वृद्धि हो सकती है और इससे शहर में ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है।

PM मोदी के सुरक्षा चूक मामले में 25 लोगों की गिरफ्तारी तय, एक आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: फिरोजपुर कोर्ट ने बताया गंभीर मामला, प्रदर्शन की आड़ में फ्लाईओवर को किया था जाम

पंजाब के फिरोजपुर जिले की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में 2022 में हुई चूक के मामले में बड़ा फैसला करते हुए एक प्रदर्शनकारी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। बता दें कि फिरोजपुर कोर्ट ने 25 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और पुलिस को आदेश दिया था कि वो सभी आरोपितों को 22 जनवरी 2025 तक कोर्ट में पेश करे, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए एक व्यक्ति ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी की सुरक्षा चूक मामले में फिरोजपुर के सेशन जज विरिन्दर अग्रवाल ने कथित प्रदर्शनकारी कमलजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है और पुलिस को आदेश दिया है कि वो सभी आरोपितों को गिरफ्तार करे। इस मामले में मुख्य आरोपित किसानों में से एक कमलजीत सिंह ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में इस प्रकार की चूक बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती।

अदालत ने पाया कि आरोपित कई बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और फिरोजपुर के कुलगढ़ी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वह आरोपितों को गिरफ्तार कर 22 जनवरी 2025 तक अदालत में पेश करें।

इस मामले में 3 जनवरी 2025 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अदालत ने यह आदेश उस एफआईआर के आधार पर दिया, जो 6 जनवरी 2022 को इस घटना के संबंध में दर्ज की गई थी। शुरुआत में यह एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी, लेकिन विशेष जाँच दल (एसआईटी) द्वारा की गई जाँच के बाद 25 किसानों की पहचान की गई। इन किसानों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 341 (गलत तरीके से रोकना), 186 (सरकारी काम में बाधा), 149 (गैरकानूनी सभा) और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8-बी के तहत आरोप लगाए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी उस दिन हुसैनीवाला में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जा रहे थे। इसके साथ ही उन्हें पीजीआई फिरोजपुर के सैटेलाइट सेंटर का शिलान्यास भी करना था। लेकिन खराब मौसम और रैली में अपेक्षित भीड़ न होने के कारण उन्होंने हेलीकॉप्टर से यात्रा करने के बजाय सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया। जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर पहुँचा, तो भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) और क्रांतिकारी पेंडू मजदूर यूनियन के प्रदर्शनकारियों ने सड़क को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस अवरोध के कारण प्रधानमंत्री को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी और उन्हें बठिंडा एयरपोर्ट लौटकर दिल्ली जाना पड़ा।

इस घटना के बाद सुरक्षा चूक को लेकर भारी विवाद हुआ। केंद्र सरकार ने इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही करार दिया। इस मामले की जाँच के लिए पंजाब पुलिस की एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया। इस एसआईटी की अगुवाई फिरोजपुर के एसपी (इन्वेस्टिगेशन) कर रहे हैं। जाँच के दौरान कुल 26 लोगों की पहचान हुई थी, जिनमें से एक आरोपित, मेजर सिंह की मौत हो चुकी है। अब कुल 25 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

इस घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकारों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। विपक्ष ने इसे पंजाब सरकार की लापरवाही करार दिया था, जबकि पंजाब सरकार ने कहा था कि यह प्रदर्शन किसानों के आंदोलन का हिस्सा था। इस बीच, एसआईटी की जाँच में यह पाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने योजना बनाकर फ्लाईओवर को जाम कर दिया था, जिससे प्रधानमंत्री के काफिले को वहाँ से गुजरने में मुश्किल हुई।

‘VHP की पुस्तकें विवादास्पद और संवेदनशील, अशांति फैलने का खतरा’: कोलकाता पुस्तक मेले में स्टॉल देने से इनकार, हाई कोर्ट पहुँचा विश्व हिंदू परिषद

पश्चिम बंगाल में आयोजित हो रहे 48वें अंतर्राष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को स्टॉल लागने की अनुमति नहीं दी गई है। इसको लेकर विहिप ने शुक्रवार (17 जनवरी) को कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस हिंदू संगठन ने पिछले साल अक्टूबर में प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता गिल्ड के पास एक स्टॉल के लिए आवेदन किया था।

अपने आवेदन में विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि वह कई वर्षों से पुस्तक मेले में भाग लेता रहा है और इस बार भी एक स्टॉल लगाना चाहता है। विहिप के आवेदन को ना ही स्वीकृत किया गया और ना ही खारिज किया गया। विहिप का कहना है कि उसके आवेदन को लंबित रखा गया। विहिप के बार-बार कहने के बावजूद प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड अब दावा कर रहा है कि 28 जनवरी 2025 से 9 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले पुस्तक मेले में स्टॉल के लिए विहिप द्वारा दिया गया आवेदन ‘निर्दिष्ट फॉर्म में नहीं है’। इसलिए उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया है। गिल्ड का यह भी आरोप है कि हिंदू अधिकार संगठन विहिप ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आवश्यक ‘शर्तों को पूरा नहीं किया’ है।

सुनवाई के दौरान गिल्ड की ओर से पेश वकील ने दावा किया, “विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रकाशित पुस्तकें संवेदनशील और विवादास्पद हैं। ये पुस्तकें अशांति फैला सकती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “गिल्ड ऐसी कोई अशांति नहीं चाहता। इसलिए उसने इस साल के मेले में वीएचपी को कोई स्टॉल आवंटित नहीं करने का फैसला किया है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने पूछा, “क्या गिल्ड को पता है कि वीएचपी के पास उसके प्रकाशन हैं? गिल्ड ने पहले भी वीएचपी को स्टॉल आवंटित किए थे। अचानक ऐसा क्या हुआ कि गिल्ड को लगने लगा कि वीएचपी के प्रकाशन इतने संवेदनशील और विवादास्पद हैं कि वे परेशानी खड़ी कर सकते हैं?” इस पर अगली सुनवाई सोमवार (20 जनवरी) को होगी।

41 दिन के लिए टला हमास-इजरायल युद्ध, PM नेतन्याहू ने दी मंजूरी: 2 अमेरिकी नागरिक समेत 33 इजरायली होंगे रिहा, 735 जिहादी सौंपे जाएँगे

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद इजरायल पिछले 15 महीनों से इस्लामी आतंकी समूहों पर कार्रवाई कर रहा है। अब हमास और इजरायल के बीच सीजफायर को लेकर समझौता हुआ है। इजरायल सरकार ने शनिवार (18 जनवरी 2025) को युद्धविराम समझौते को मंजूरी दे दी। यह समझौता रविवार (19 जनवरी) से प्रभावी होगा। इस समझौते के तहत बंधकों की अदला-बदली भी होगी।

इजरायल की सरकार ने शनिवार को इस मामले पर लगभग छह घंटे तक विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि इजरायली कैबिनेट ने इस शांति समझौते को हरी झंडी दे दी है। इस समझौते में छह सप्ताह के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। इस दौरान दोनों तरफ के बंधकों और कैदियों को तीन चरण में रिहा किया जाएगा।

हालाँकि, इस समझौते को लेकर इजरायल में ही विरोध के सुर उठ रहे हैं। इजरायल सरकार में इस समझौते के खिलाफ कुछ धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों ने कड़े विरोध विरोध किए और इसके खिलाफ मतदान किया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेतन्याहू के 24 कैबिनेट सदस्यों ने युद्धविराम का समर्थन किया। इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने शुक्रवार (17 जनवरी) को इस समझौते को मंजूरी दे दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जनवरी 2025 को हमास और इजरायल के बीच हुए इस समझौते की मध्यस्थता मिस्र, कतर और अमेरिका ने की है। समझौते के बाद जी-7 देशों ने इसका स्वागत किया और कहा कि ईरान और उसके सहयोगियों को इजरायल के खिलाफ किसी भी तरह के हमले से बचना चाहिए। समूह ने यह भी कहा कि अगर इस तरह के खतरे सामने आते हैं तो इजरायल की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

इजरायल के किबुत्ज में हमला करके हमास में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और अदला-बदली के लिए तीन प्वॉइंट बनाए गए हैं। इनमें मिस्र की सीमा के पास स्थित केरेम शलोम, रीम शहर और एरेज़ शामिल हैं। बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल हमला करके 1,200 लोग मार दिया था और करीब 250 लोगों को बंदी बना लिया था। हमास के पास अभी भी 100 के आसपास बंधक हैं।

यह समझौता तीन चरण में पूरा होगा। पहले चरण में आतंकी समूह हमास बंधक बनाए गए इजराइल के 33 लोगों को रिहा करेगा। इनमें अमेरिकी नागरिक अमेरिकी कीथ सीगल और सागुई डेकेल-चेन शामिल हैं। वहीं, इजराइली सेना गाजा की सीमा से 700 मीटर पीछे लौटेगी। इजराइली सरकार 95 फिलिस्तीनी कैदियों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें रिहा किया जाएगा। इनमें 69 महिलाएँ, 16 पुरुष और 10 नाबालिग शामिल हैं।

अगर पहला फेज तय नियमों के तहत आगे बढ़ता है तो समझौते का दूसरा चरण 3 फरवरी को लागू किया जाएगा। इसके लिए योजना को आगे बढ़ाने पर बातचीत शुरू हो जाएगी। इस दौरान किसी भी पक्ष द्वारा कोई भी हमला नहीं किया जाएगा। इस चरण में युद्ध को स्थायी तौर पर खत्म करने पर विचार किया जाएगा। दूसरा चरण सफल होने पर तीसरा चरण लागू किया जाएगा।

19 जनवरी से 1 मार्च तक के लिए लागू इस समझौते के तहत इजरायल 735 फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा। इनमें विभिन्न मामलों में गिरफ्तार करके इजरायल की जेलों में रखा गया है। इन लोगों के नाम की लिस्ट भी जारी की गई है। इस लिस्ट में हमास के कई कुख्यात आतंकी भी शामिल हैं। इसके अलावा, हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं जिहादी भी शामिल हैं।

इमरान ने सनातन में की घरवापसी तो भड़का लैंडलॉर्ड इफ्तिखार, घर में घुस पत्नी को धमकाया: बोला- ’24 घंटे में वापस मुस्लिम बन, वरना तुझे उठा लूँगा’

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक युवक और उसकी पत्नी को सनातन धर्म अपनाने के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 14 जनवरी को इमरान नाम के युवक ने अपनी पत्नी के साथ विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर ईश्वर रख लिया। महादेवगढ़ में इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद ईश्वर और उनकी पत्नी खुश होकर अपने किराए के मकान में लौटे। लेकिन उनका यह फैसला उनके मुस्लिम मकान मालिक इफ्तिखार को रास नहीं आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईश्वर के धर्म परिवर्तन की जानकारी मिलने के बाद इफ्तिखार उनके घर आया और गाली-गलौच करने लगा। गुस्से में उसने ईश्वर और उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी। ईश्वर ने बताया कि इफ्तिखार ने यह चेतावनी दी कि अगर 24 घंटे के भीतर दोनों ने इस्लाम मजहब में वापसी नहीं की, तो वह उन्हें मार डालेगा।

24 घंटे में अपनाओ इस्लाम, वर्ना पत्नी को रख लूँगा

घटना यहीं खत्म नहीं हुई। ईश्वर ने अपनी शिकायत में बताया कि इफ्तिखार ने उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया। उस समय ईश्वर की पत्नी घर पर अकेली थी। इफ्तिखार घर में जबरन घुसा और उनकी पत्नी की कलाई पकड़कर उसे धमकाने लगा। उसने कहा कि अगर उसने अपने पति को इस्लाम मजहब में वापस लाने के लिए मजबूर नहीं किया, तो वह उसे अपनी पत्नी बनाकर अपने साथ रख लेगा। महिला ने शोर मचाया और अपने पति को फोन किया। ईश्वर के घर पहुँचने पर मामला और गंभीर हो गया। इफ्तिखार ने ईश्वर के साथ मारपीट की और फिर पड़ोसियों के जमा होने पर मौके से भाग गया।

ईश्वर और उनकी पत्नी ने बताया कि उन्होंने महादेवगढ़ में पूरे विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया था। इस प्रक्रिया में उनके परिवार के कुछ सदस्य और परिचित भी शामिल थे। इसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनका जीवन शांति और सुकून से आगे बढ़ेगा। लेकिन उनके मकान मालिक ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। पड़ोसियों का कहना है कि इफ्तिखार अक्सर गुस्सैल रहता है और उसने पहले भी कुछ लोगों के साथ झगड़ा किया है। लेकिन इस बार उसने सारी हदें पार कर दीं। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है।

इफ्तिखार फरार, पुलिस कर रही तलाश

इस घटना के बाद दंपति जावर थाने पहुँचा। जहाँ उन्होंने इफ्तिखार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने ईश्वर और उनकी पत्नी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। जावर थाना प्रभारी जीपी वर्मा ने बताया कि आरोपित इफ्तिखार के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

‘भोलेनाथ का पुत्र, डरूँगा नहीं’

ईश्वर ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि वह भोलेनाथ का पुत्र है और किसी की धमकी से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया है। यह मेरी आस्था का मामला है और मैं इसी धर्म में रहूँगा। मुझे किसी का डर नहीं है, चाहे वह मुझे मारने की धमकी ही क्यों न दे।” पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने धर्म के आधार पर जीने का अधिकार है और किसी को भी इसमें दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

बरेली में पाकिस्तानी महिला 9 साल से कर रही थी सरकारी टीचर की नौकरी, पोल खुलने पर बर्खास्त: जाँच में फर्जी निकले सारे प्रमाण-पत्र, 2021 में अम्मी भी ऐसे ही पकड़ी गई थी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुमायला खान नाम की महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। यह नौकरी उन्होंने 2015 में शुरू की और 9 साल तक सरकारी वेतन भी लिया। मामला तब खुला जब एक शिकायत के बाद प्रशासन ने उनके निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जाँच की। फिलहाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 अक्तूबर, 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया। इसके बाद, उन्हें नियुक्ति की तिथि से ही पद से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुमायला ने रामपुर के एसडीएम कार्यालय से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। तहसीलदार की जाँच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र गलत तथ्यों पर आधारित था। तहसीलदार की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि शुमायला वास्तव में पाकिस्तान की नागरिक हैं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शुमायला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

शुमायला ने अपनी अम्मी से प्रेरणा लेते हुए फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई। जाँच में पाया गया कि शुमायला के माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे। रामपुर तहसील से निवास प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्होंने यह तथ्य छिपाया।

फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी थाने में शुमायला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की हेराफेरी के आरोपों में कानूनी कार्रवाई हो रही है। पुलिस शुमायला की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

बता दें कि शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को साल 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था, जब वो रिटायरमेंट से सिर्फ 2 दिन दूर थी। 11 मार्च 2021 को रिटायर होने जा रही शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को 9 मार्च 2021 को बर्खास्त किया गया था, जबकि शुमायरा को सस्पेंड किया गया था। माहिरा अख्तर ने भी खुद को भारतीय नागरिक बताया था, लेकिन जाँच में वे पाकिस्तानी पाई गईं। माहिरा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा और अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक संगठित तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

बहरहाल, शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है और इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में सुधार की कितनी जरूरत है।