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माता सीता, वीर सावरकर, भारतीय सेना… सबको गाली देती है राणा अयूब, दिल्ली की कोर्ट ने FIR का दिया आदेश: चंदा खोरी को लेकर भी इस्लामी कट्टरपंथी के खिलाफ चल रही जाँच

हिन्दुओं के खिलाफ लगातार घृणा फ़ैलाने वाली राणा अयूब के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। यह FIR हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान और भारत विरोधी माहौल बनाने के लिए दर्ज की गई है। FIR दर्ज करने का आदेश दिल्ली की एक अदालत ने दिया था, इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की।

दिल्ली की साकेत कोर्ट ने राणा अयूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश सोमवार (27 जनवरी, 2025) को दिया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में वकील अमिता सचदेव की एक याचिका पर दिया गया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “तथ्यों को देखते हुए, शिकायत में संज्ञेय अपराध की बात सामने आई है और इसके लिए FIR दर्ज करना आवश्यक है। धारा 156(3) CRPC के तहत यह आवेदन मंजूर किया जाता है। SHO साइबर पुलिस स्टेशन, दक्षिण को निर्देश दिया जाता है कि शिकायत को FIR में बदल दें और मामले की निष्पक्ष जाँच करें।”

अमिता सचदेव का कहना था कि वह 2 महीने से विषय में कार्रवाई की माँग कर रही हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इसके बाद वह अदालत पहुँची थी। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने साइबर थाने में राणा अयूब के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

अमिता सचदेव ने इस मामले में नवम्बर, 2024 में राणा अयूब के खिलाफ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करवाई थी। अमिता सचदेव का आरोप है कि राणा अयूब ने लगातार अपने एक्स अकाउंट से भारतीय सेना और हिन्दू धर्म के खिलाफ लगातार अपमानजनक पोस्ट किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अयूब के ट्वीट के चलते देश में नफरत का माहौल पनपता है।

राणा अयूब लगातार माता सीता, रामायण और महाभारत को लेकर अपमानजनक ट्वीट करती आई है। वह भारतीय सेना का अपमान भी करती आई हैं। ऐसे कई पोस्ट पर लोगो ने सोशल मीडिया पर आपत्ति भी जताई है। इससे पहले भी राणा अयूब के खिलाफ कई FIR हो चुकी है।

राणा अयूब के खिलाफ कोविड के नाम पर चंदा इकट्ठा कर उसे अपनी मौज मस्ती में लगाने का आरोप भी है। इस मामले में उसकी ₹1.7 करोड़ की सम्पत्ति भी ED ने जब्त की थी।

AAP सरकार की DJB ने भी केजरीवाल को बताया झूठा, कहा था- हरियाणा ने दिल्ली को जहरीला पानी सप्लाई किया: ECI ने माँगा जवाब, CM नायब सिंह सैनी बोले- मानहानि का केस करेंगे

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक केजरीवाल ने हरियाणा पर दिल्ली आने वाले पानी को जहरीला बनाने का आरोप लगाया था। दिल्ली जल बोर्ड ने ही उनके इन आरोपों को नकार दिया है। DJB ने कहा है कि केजरीवाल का बयान से तथ्यों से परे और भ्रामक है।

DJB ने कहा है कि ऐसे आरोपों से दिल्ली शहरियों में डर पैदा होता है। वहीं चुनाव आयोग ने इस मामले में हरियाणा सरकार से जवाब माँगा है। वहीं हरियाणा सरकार इस मामले में अब केजरीवाल पर मानहानि का केस करेगी।

दिल्ली जल बोर्ड की मुखिया शिल्पा शिंदे ने सोमवार (27 जनवरी, 2025) को एक पत्र जारी करके केजरीवाल के बयान का खंडन किया है। शिल्पा शिंदे ने कहा, “ये बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, निराधार और भ्रामक हैं। सच तो यह है कि DJB नियमित रूप से आने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी करता है और विभिन्न मापदंडों के आधार पर आपूर्ति को नियंत्रित करता है।”

DJB ने बताया, “हर सर्दियों के मौसम में, अक्टूबर से फरवरी के दौरान यमुना नदी में अमोनिया बढ़ जाती है। DJB वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 1 PPM तक अमोनिया का ट्रीटमेंट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है… दिल्ली सब ब्रांच से मिले अमोनिया वाले पानी को सही करके 2 से 2.5 PPM तक के अमोनिया का भी जल उपचार संयंत्रों में उपचार किया जा रहा है।”

पत्र में कहा गया है कि अमोनिया का स्तर वजीराबाद नहर में जल्द ही घट जाएगा जिसके बाद सप्लाई सही हो जाएगी। जल बोर्ड ने बताया है कि ऐसा पहले भी लम्बे समय से होता है। केजरीवाल के इस बयान को DJB ने दिल्ली के निवासियों में डर पैदा करने वाला बताया है। DJB ने इस मामले को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को भेजा है।

वहीं इस मामले में AAP प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर हरियाणा सरकार से जवाब माँगा है। यह जवाब उसे मंगलवार (28 जनवरी, 2025) तक देना होगा। वहीं हरियाणा सरकार ने अब केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोंकने का ऐलान किया है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वह इस मामले में चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे और मानहानि का मुकदमा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने उस मिट्टी का अपमान किया जिसमें वह स्वयं पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगा भाग जाना केजरीवाल की आदत है।

केजरीवाल ने सोमवार (27 जनवरी, 2025) को आरोप लगाया था कि हरियाणा की भाजपा सरकार दिल्ली आने वाले पानी में जहर मिलाकर भेज रही है। उन्होंने कहा था कि यदि यह पानी दिल्ली में होता तो बड़े स्तर पर लोग मरते और ‘नरसंहार‘ होता।

उत्तराखंड में 4 निकाह और 3 तलाक पर अब फुल स्टॉप, UCC हुआ लागू: पोर्टल भी CM धामी ने किया लॉन्च, इसी पर होगा लिव इन और तलाक का रजिस्ट्रेशन

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी गई है। उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे नए युग का शुभारंभ बताया है। सीएम धामी ने UCC जुड़ी सेवाएँ लेने के लिए एक पोर्टल भी लॉन्च किया है।

देहरादून में सोमवार (27 जनवरी, 2025) को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में UCC पोर्टल लॉन्च करके इसके लागू होने की घोषणा की है। उन्होंने बताया है कि उत्तराखंड में भाजपा ने 2022 के चुनाव में यह वादा किया था और पूरा भी कर दिया।

पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा, “UCC किसी धर्म और पंथ के खिलाफ नहीं है। बार-बार दावा होता है कि किसी को निशाने पर लिया जा रहा है। ऐसा नहीं है। यह समाज से कुप्रथाओं को मिटा कर समानता और समरसता स्थापित करने का कानूनी प्रयास है। इससे केवल कुप्रथाओं को खत्म किया गया है।”

CM धामी ने इसे कानूनी मामले में भेदभाव को अंत करने का उपाय बताया है। उन्होंने कहा कि इससे महिला सशक्तिकरण भी होगा और बालविवाह, तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने UCC सेवाओं के लिए तैयार किए गए पोर्टल ucc.uk.gov.in का भी शुभारम्भ किया है।

इस पोर्टल पर राज्यवासी विवाह, तलाक, लिव इन रिलेशनशिप, इसे तोड़ने और विरासत जैसी सेवाओं का फायदा ले पाएँगे। इसके लिए राज्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है और विशेष अधिकारी तैनात किए गए हैं। उत्तराखंड में UCC को फरवरी, 2024 में विधानसभा में मंजूरी मिली थी।

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को ऑनलाइन इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसे खत्म करने की भी सूचना देनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता तो जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा विवाह का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।

UCC आने के बाद मामा-मौसी आदि की बेटी से निकाह समेत 4 निकाह पर भी रोक लग जाएगी। UCC के तहत राज्य में अब बेटियों को भी सम्पत्ति का भी हिस्सा मिलेगा। UCC में तलाक को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। हलाला पर भी रोक लगेगी। राज्य में लागू किए गए कई प्रावधानों से जनजातीय समुदायों को छूट दी गई है।

वक्फ संशोधन विधेयक को JPC से मंजूरी, 14 बदलावों पर लगी मुहर: विपक्ष के सुझाव खारिज, हंगामा मचाने का नहीं हुआ फायदा

वक्फ संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से मंजूरी मिल गई है। लोकसभा और राज्यसभा सांसदों से मिलाकर बनाई गई इस समिति ने महीनों तक इस पर चर्चा और कई पक्ष सुनने के बाद इसे मंजूरी दी है। नए वक्फ अधिनियम में इस JPC ने 14 खंड में बदलाव किए हैं।

नई दिल्ली में सोमवार (27 जनवरी, 2025) को वक्फ बिल के अंतिम ड्राफ्ट को JPC ने बहुमत से स्वीकार किया है। इस बिल के मूल स्वरुप में 14 बदलाव, JPC में शामिल NDA सांसदों ने प्रस्तावित किए थे। इन्हें JPC की बैठक में मंजूरी मिल गई। यह 14 खंड में बदलाव बिल के अलग-अलग नियमों को लेकर किए गए हैं।

वहीं विपक्ष ने भी इस वक्फ बिल में कई बदलाव प्रस्तावित किए थे लेकिन उन्हें मतदान में मंजूरी हासिल नहीं हुई। समिति में 16 सदस्य NDA जबकि 10 बाकी दलों के लोग शामिल थे। ऐसे में मतदान के दौरान विपक्ष द्वारा सुझाए गए बदलाव 16:10 के बहुमत से गिर गए।

विपक्ष के सदस्यों ने बिल के सभी 44 खंड में संशोधन के प्रस्ताव दिए थे। इनकी संख्या सैकड़ों में थी। हालाँकि, वह सफल नहीं हुए। NDA द्वारा किए गए बदलावों में वक्फ ट्रिब्यूनल में सदस्यों की संख्या और सरकारी अधिकारियों की वक्फ संपत्तियों को लेकर अधिकार से जुड़े हुए थे।

वक्फ संशोधन अधिनियम के लिए बनाई गई JPC के मुखिया और सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि बदलाव को लेकर अपनाई गई पद्धति पूरी तरीके से लोकतांत्रिक थी। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा लोकतांत्रिक तरीका कुछ नहीं हो सकता था।

विपक्ष के सांसद और वक्फ बिल का विरोध करने वाले नेता कल्याण बनर्जी ने पूरी प्रक्रिया को ही गड़बड़ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि सब कुछ पहले से तय था और सरकार की मर्जी से ही काम हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों को बोलने का भी मौका नहीं दिया गया।

इससे पहले कई बार हुई वक्फ की बैठकों में विपक्ष के सांसदों ने हंगामा भी काटा। कल्याण बनर्जी ने एक बार ग्लास तोड़ हाथ चोटिल कर लिया था। वक्फ बिल को अब संभवतः संसद के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। बजट सत्र 31 जनवरी, 2025 से लेकर 13 फरवरी, 2025 तक चलेगा। इसका मसौदा पेश किए जाने से पहले जनता के सामने भी आएगा।

बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथियों ने पुजारी समेत 3 हिन्दुओं का किया अपहरण, चौथी मंजिल पर ले जाकर पीटा: बशीर, जिहाद, आरिफ समेत 4 गिरफ्तार, आतंकी सैफुल के थे सब मुरीद

बांग्लादेश में हिन्दुओं का निशाना बनाने का सिलसिला जारी है। उन पर हमलों से लेकर अपहरण जसी घटनाएँ लगातार हो रही हैं। अब बांग्लादेश में तीन हिन्दू अपहरण का निशाना बने हैं। इनका अपहरण करने वाले इस्लामी कट्टरपंथी पार्टी BNP से जुड़े लोग हैं।

यह घटना बांग्लादेश के चटगाँव में हुई है। शनिवार (25 जनवरी) को इस्लामी कट्टरपंथियों यहाँ हिलव्यू रिहायशी इलाके से तीनों हिन्दू का अपरहण किया। पीड़ितों की पहचान रुबेल रुद्र (42), केशब मित्रा दास (43) और समीर दास (45) के रूप में हुई है। समीर और रुबेल धोबी का काम करते हैं,जबकि केशब एक हिंदू मंदिर में पुजारी हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, चार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस अपहरण की घटना को अंजाम दिया और पीड़ितों के परिवारों से फिरौती की माँग की। उनकी पहचान बशीर अहमद राणा, मोहम्मद जिहाद, मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद इमोन उर्फ ​​सद्दाम के रूप में हुई है।

चारों आरोपितों ने शनिवार (25 जनवरी, 2025) को क्रमशः रुबेल रुद्र और समीर दास को उनकी दुकान से उठाया। इसके बाद शाम को उन्होंने मंदिर के पुजारी केशव मित्रा दास का अपहरण कर लिया। पीड़ितों को एक निर्माणाधीन इमारत की चौथी मंजिल पर ले जाया गया और पीटा गया।

इन अपहरणकर्ताओं ने तीनों हिन्दुओं को छोड़ने के लिए फिरौती के तौर पर 9 लाख टका की भी माँग की। मामले की जानकारी इसी दौरान पुलिस को दी गई जो हरकत में आई। चटगाँव पुलिस ने रात में इस इमारत पर छापा मारा और तीनों हिंदुओं को बचा लिया।

पुलिस ने इन चारों इस्लामी कट्टरपंथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से 12 धारदार हथियार और 5 मोटरसाइकिलें भी बरामद की हैं। चारों आरोपित बीएनपी की छात्र शाखा छात्र दल से जुड़े हैं। बशीर अहमद राणा, मोहम्मद जिहाद, मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद इमोन, आतंकवादी सैफुल इस्लाम उर्फ ​​बर्मा सैफुल के अनुयायी हैं।

ये सभी हिस्ट्रीशीटर हैं और इनके खिलाफ कई पुलिस थानों में चोरी, डकैती, डकैती और वसूली के कई मामले पहले से दर्ज हैं।

पुरुष भी होते हैं क्रूरता के शिकार… दिल्ली HC का ये सिर्फ फैसला नहीं, बल्कि आंदोलन की शुरुआत: समाज भी बदले अब सोच, मर्दों के अधिकारों पर हो बात

दिल्ली HC ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि पुरुष भी महिलाओं की तरह क्रूरता और हिंसा से समान सुरक्षा के हकदार हैं। यह फैसला उन अनगिनत पुरुषों की तकलीफों को मान्यता देता है, जिनकी आवाजें सदियों से दबाई जाती रही हैं।

हमारे समाज में पुरुषों को हमेशा ताकत और सहनशीलता का प्रतीक माना गया है। उन्हें सिखाया जाता है कि रोना कमजोरी है और दर्द को सह लेना मर्दानगी की निशानी। लेकिन, जो समाज उनके आंसुओं को कमजोरी समझता है, वह यह भूल जाता है कि भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक अत्याचारों का दर्द पुरुष भी महसूस करते हैं।

पुरुष आयोग की अध्यक्ष बरखा त्रेहन ने इस फैसले को क्रांतिकारी बताते हुए कहा, “यह केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि समाज की जड़ों में बैठे अन्याय के खिलाफ एक आंदोलन की शुरुआत है। हर आत्महत्या करने वाले पुरुष के पीछे एक अनसुनी चीख होती है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।”

भारत में झूठे आरोपों के कारण न केवल पुरुषों की गरिमा, बल्कि उनकी जिंदगियां भी दांव पर लग जाती हैं। क्या उन बेटों, पतियों और पिता के बलिदानों को यूँ ही भुला दिया जाएगा, जो समाज और कानून की कठोरता के शिकार हुए?

यह फैसला पुरुषों के लिए न्याय की दिशा में पहला बड़ा कदम है। यह उन सभी लोगों को चेतावनी है जो कानून का दुरुपयोग कर पुरुषों को फँसाने की साजिश करते हैं। समाज को अब यह स्वीकार करना होगा कि समानता का मतलब केवल महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा नहीं, बल्कि पुरुषों के दर्द और उनके अधिकारों को भी पहचानना है।

इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर इंसान का दर्द मायने रखता है—चाहे वह महिला हो या पुरुष। अब समय आ गया है कि समाज अपनी सोच बदले और यह समझे कि न्याय और सुरक्षा पर हर किसी का हक है।

छत्तीसगढ़ के 2 शहरों में ईसाई धर्मांतरण रैकेट का पर्दाफाश, 2 पादरी समेत 7 गिरफ्तार: बरामद पोस्टर में लिखा था- ‘मेरे सिवा किसी को मत मानना ईश्वर’

छत्तीसगढ़ में हिन्दू संगठनों ने दो अलग-अलग शहरों में चल रहे ईसाई धर्मांतरण रैकेट पकड़े। हिन्दू संगठनों ने राजधानी रायपुर और बलरामपुर में प्रार्थना के नाम पर ईसाई धर्मांतरण के रैकेट का भंडाफोड़ किया। मामले में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन भी किया। दोनों घटनाओं में 2 पादरियों समेत 7 लोग गिरफ्तार हुए हैं।

रायपुर में पंडरी थाना क्षेत्र के मितान विहार कॉलोनी में जबरन धर्मांतरण की जानकारी बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों को मिली थी। इसके बाद वह उस घर में पहुँच गए जहाँ धर्मांतरण गतिविधियाँ करवाए जाने का आरोप लगाया गया था। यहाँ हिन्दू संगठनों ने जय श्री राम के नारे लगाए। इसके बाद मौके पर कुछ पुलिसकर्मी भी पहुँचे।

रायपुर ACP लखन पटेल इसके बाद कई थानों की फ़ोर्स के साथ मौके पहुँचे। यहाँ उस घर से दस लोगों को निकाला गया, इनमें पुरुष, महिलाएँ, बच्चे और एक नाबालिग शामिल थे। पुलिस ने कीर्ति कुमार केशवानी, महारथी बंजारे और जीवन लाल साहू नाम के तीन लोगों को हिरासत में लिया और बाद में जेल भेज दिया।

इस मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4 के तहत FIR दर्ज की है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से धर्मांतरण हो रहा है। उन्होंने पादरी पर प्रार्थना की आड़ में कमजोर लोगों को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया है।

वहीं धर्मांतरण की दूसरी ऐसी ही घटना बलरामपुर जिले के वड्रफनगर ब्लॉक के सरुआत गाँव में हुई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि एक पादरी और उसके साथी ग्रामीणों को बीमारियों के इलाज और पैसे का वादा करके लालच दे रहे थे। इस मामले में उन्होंने पुलिस को भी सूचना दी।

पुलिस ने इसके बाद छापा मारकर धर्मांतरण वाले घर से एक पादरी सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इन के पास से बड़ी संख्या में बाइबिल, प्रचार सामग्री और राष्ट्रीय ईसाई संघ का एक पहचान पत्र भी जब्त किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पादरी ने लोगों को इकट्ठा करने के लिए “हीलिंग मीटिंग” आयोजित की थी। और

पुलिस ने कहा है कि दोनों मामलों में जाँच चल रही है। इन दो घटनाओं के साथ छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। पिछले कुछ सालों में, राज्य में धर्मांतरण के बड़े पैमाने पर मामले देखे गए हैं, इनमें मिशनरियों ने आदिवासियों सहित पिछड़े लोगों को लालच देकर धर्मान्तरित करवाया है।

बरेली में मजार पर अवैध निर्माण, कब्रिस्तान में खड़ी हुई 20 फीट ऊँची बिल्डिंग: BJP सांसद की शिकायत के बाद 100 पर FIR, डर से स्थानीय मुस्लिमों ने खुद तोड़ी छत और पिलर

उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मजार पर अवैध पक्का निर्माण करवा दिया गया। रातों रात यहाँ पर सीमेंट का लेंटर डाल दिया गया। जब इस मामले में बरेली के सांसद ने शिकायत की तो प्रशासन ने जाँच करके नोटिस भेज दिया। इसके बाद मुस्लिमों ने अवैध मजार को खुद तोड़ना चालू कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स अनुसार, बरेली के शाही थाना क्षेत्र में गणेशपुर में गाँव में यह घटना हुई। यहाँ एक कब्रिस्तान के भीतर एक पुरानी मजार बनी हुई थी। यह मजार लगभग 30-40 साल पुरानी है। यहाँ के मुस्लिमों ने इसके चारों तरफ से 20 फीट ऊँचे पिलर रातों रात खड़े किए।

इस पर जनवरी, 2025 में ही रातों-रात छत डाल गई। इस निर्माण कार्य के लिए ना प्रशासन की कोई अनुमति ली गई और ना ही उसे सूचना दी गई। यह पूरा मामला तब खुला जब बरेली के सांसद छत्रपाल सिंह गंगवार इस गाँव के पास से गुजरे। उन्होंने इस जगह को देख कर जानकारी इकट्ठा की।

इसके बाद उन्होंने प्रशासन से विषय में शिकायत की। एसडीएम ने इसके बाद मामले की जाँच के आदेश दिए। प्रशासन जब जाँच की तो निर्माण अवैध निकला। इसके बाद तुंरत इस निर्माण को तोड़ने के आदेश दिए गए। लेकिन यहाँ निर्माण को तोड़ने के लिए प्रशासन कोई कार्रवाई करता इससे पहले ही लोग तोड़ने लगे।

मुस्लिमों ने यहाँ निर्माण में लगी बाँस-बल्ली हटा कर सीमेंट के पिलर और छत तोड़ने चालू कर दिए। मुस्लिमों ने कहा कि उन्होंने पुरानी मजार की हिफाजत के लिए यह नया निर्माण किया था। हालाँकि, इस संबंध में कोई कागज प्रशासन की जाँच पर नहीं दिखाए गए।

पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए गाँव के 100 लोगों पर शांतिभंग की धाराओं में FIR दर्ज की है। इनको 5 लाख के मुचलके पर छोड़ा गया है। पुलिस ने कहा है कि मजार तोड़ने को लेकर कोई विवाद नहीं है।

संभल दंगों के बीच वकील विष्णु जैन की हत्या करने का था प्लान, गोली पुलिस पर चलानी थी: गिरफ्त में आए वारिस ने कबूला- ‘नईम, कैफ को मैंने ही मारा’, ऑडियो वायरल

संभल में दंगाई हिंसा के दौरान एडवोकेट विष्णु जैन की हत्या करना चाहते थे। इसके लिए हथियार भी दंगाइयों के बीच बाँटे गए थे। यह साजिश शारिक साठा ने रची थी। उसी के गुर्गे मुल्ला अफरोज ने हथियार दिए थे। यह सारे खुलासे शारिक साठा के एक और गुर्गे की गिरफ्तारी से हुए हैं। संभल पुलिस ने दंगाई वारिस को गिरफ्तार किया है। वारिस ने दंगे के दौरान 2 युवकों की हत्या भी कर दी थी। वह पुलिस को भी निशाना बना रहा था।

वारिस को पुलिस ने शनिवार (25 जनवरी, 2025) को पकड़ा। वह मोहल्ला खग्गूसराय का रहने वाला है। उसने पुलिस पूछताछ में खुलासा किया है कि हिंसा के बाद वह दिल्ली में छिपा था। वारिस ने पुलिस को बताया है कि शारिक साठा गैंग ने कथित तौर पर नबी की शान में गुस्ताखी करने वाले एडवोकेट विष्णु शंकर जैन की हत्या के लिए हथियार बाँटे थे।

शारिक साठा गैंग ने कहा था कि उन्हें ‘मस्जिद की हिफाजत’ करनी है और सर्वे के दौरान हत्या करनी है। विष्णु शंकर जैन शाही जामा मस्जिद-हरिहर मंदिर विवाद में हिन्दू पक्ष के वकील हैं। वारिस ने यह खुलासा भी किया है कि हिंसा के दौरान उसने गोली चलाई जिससे कैफ और नईम नाम के युवक मारे गए। वारिस ने बताया है कि उसे हथियार मुल्ला अफरोज ने दिए थे। मुल्ला पहले ही गिरफ्तार हो चुका है।

वारिस का एक ऑडियो भी वायरल हुआ था। इसमें उसने हिंसा के दौरान ‘सामान’ लाने को कहा था। पुलिस ने कहा है कि ‘सामान’ का मतलब हथियार ही थे। उसका साथी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। वारिस के पास से पुलिस को एक तमंचा,कारतूस, नाल में फंसा एक कारतूस और दो मोबाइल बरामद किए हैं।

वारिस ने बताया है कि शारिक साठा का गैंग इन हत्याओं से देश भर में दंगे भड़काना चाहता था। वारिस की गिरफ्तारी के साथ ही हिंसा में हुई 4 मौतों का मामला सुलझ गया है। इनमें से 2 हत्याएँ मुल्ला अफरोज और 2 वारिस ने की थी। पुलिस ने एक और दंगाई को भी संभल से गिरफ्तार किया है। उसका नाम मोहम्मद निहाल है।

 

‘RIMS में नहीं होगी सरस्वती पूजा, जाकर हॉस्टल में मनाओ’: झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कानून-व्यवस्था का दिया था हवाला, विरोध के बाद फैसला वापस

झारखंड के राँची में स्थित राजेन्द्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में सरस्वती पूजा के आयोजन पर रोक लगा दी गई। कई दशकों से होते आ रहे इस आयोजन को रद्द करने को कहा गया। छात्रों को सभी तैयारियाँ बंद करने और चंदे का पैसा वापस करने का आदेश RIMS प्रशासन ने जारी किया। RIMS के ही एक बड़े डॉक्टर समेत बाकी लोगों ने जब मामला उठाया तो RIMS को पीछे हटना पड़ा और उसने अनुमति दी।

RIMS में हर साल सरस्वती पूजा का आयोजन छात्र मिल कर करते हैं। यह आयोजन MBBS के दूसरे वर्ष के छात्र करते हैं। इस बार की सरस्वती पूजा आयोजन के लिए छात्रों ने लाखों का चंदा इकट्ठा करके सारे इंतजाम कर लिए थे। लगभग 70% काम हो चुका था। कई वेंडरों को भी पैसा दिया जा चुका था। हालाँकि, इसी बीच RIMS प्रशासन ने सरस्वती पूजा पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

RIMS की डीन शशिबाला सिंह ने शनिवार (25 जनवरी, 2025) को एक आदेश जारी करके पूजा को निरस्त करने को कहा। इस आदेश में RIMS में मारपीट की एक घटना का हवाला दिया गया। यह घटना शुक्रवार (24 जनवरी, 2025) को घटी थी जिसमें छात्र और कुछ बाहरी लोग आपस में भिड गए थे। RIMS प्रशासन के इस आदेश पर छात्रों ने नाराजगी जताई।

RIMS में न्यूरो सर्जन डॉक्टर विकास कुमार ने भी इस आदेश को लेकर आवाज उठाई। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर RIMS प्रशासन को निशाने पर लिया। डॉक्टर विकास ने कहा, “लगता है रिम्स में बैठे बड़े पद वालो से RIMS संभल नहीं रहा है और अपनी कमी को छुपाने के लिए इस देश की सांस्कृतिक परंपराओं पर सीधा आघात किया जा रहा है, जो हर दृष्टि से निंदनीय है।”

सोशल मीडिया पर इसको लेकर भाजपा ने भी सरकार को निशाने पर लिया। भाजपा झारखंड के मुखिया बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी की साम्प्रदायिक सोच के चलते यह रोक लगी है। उन्होंने इसे धार्मिक विभाजन को बढ़ावा देने वाला बताया।

वहीं स्वास्थ्य मंत्री इरफ़ान अंसारी ने इसे बाद दावा किया कि रोक कानून व्यवस्था को देखते हुए लगाई गई है। उन्होंने कहा कि छात्र हॉस्टल में ही सरस्वती पूजा मनाएँगे। मंत्री अंसारी ने आरोप लगाया कि बाबूलाल मरांडी भाईचारे को तोड़ रहे हैं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर काफी विरोध के बाद RIMS ने रोक का फैसला वापस ले लिया।

इसकी जानकारी डॉक्टर विकास कुमार ने दी। विकास कुमार ने लिखा, “सरस्वती पूजा की परमिशन मिल गई है ,प्रबंधन ने अपनी रोक को वापस ले लिया है। इस छात्रों में खुशी की लहर है।”

गौरतलब है कि 2022 में रांची में हुए दंगों के दौरान 2 मुस्लिम पुलिस फायरिंग में मारे गए थे। इरफ़ान अंसारी ने इन्हें शहीद का दर्जा, 50 लाख रुपए का मुआवजा और उसके परिजनों को सरकारी नौकरी देने की माँग की थी।