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एक तरफ हिंदू विहीन हो रहे मेवात के गाँव, दूसरी तरफ लड़कों के कपड़े पहन पहचान छिपा रही लड़कियाँ, बाहर कपड़े भी नहीं सुखा सकतीं: वजह डेमोग्राफी चेंज

हत्या, अपहरण, लव जिहाद, धर्मांतरण, गोतस्करी, गोहत्या… ऐसे तमाम अपराधों के लिए कुख्यात मेवात (जो मुख्य रूप से हरियाणा के नूंह, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है) एक बार फिर चर्चा में है।

कारण दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दो महिला पत्रकारों ने जमीन पर उतरकर इस क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों के जीवन की उस हकीकत को बयान किया है जिसकी कल्पना मेवात इलाके से बाहर रहने वाले कर भी नहीं सकते। रिपोर्ट मुख्यत: अलवर के मेवात इलाके से जुड़ी है।

सोचकर देखिए, सुनकर ही कैसा लगता है कि घर की दहलीज तक जाने के लिए छोटी-छोटी बच्चियों को चेहरे पर नकाब लगाना पड़े या बाहर जाने के लिए लड़कियाँ अपने कपड़े छोड़कर लड़कों वाले कपड़े पहनें ताकि किसी की नजर उनपर न पड़े और उनके साथ कोई अनहोनी न हो। दिन की रौशनी में लड़कियाँ मुँह ऐसे ढककर घूमें जैसे अगर पर्दा हटा तो कुछ भी हो सकता है।

प्रेरणा साहनी और पूजा शर्मा की यह रिपोर्ट यही बताती है कि दिन के उजालों में पसरा सन्नाटा ही इलाके की असली तस्वीर है। डर और बेचैनी से भरे माहौल में दूर तक चलते हुए जब दोनों पत्रकारों को एक बुजुर्ग महिला मिलीं तो उन्होंने बताया कि उनके घर में 4 पोतियाँ लेकिन वह चारों को लड़के वाले कपड़े पहनाती हैं ताकि जब कोई उन्हें देखे तो लड़का ही समझे, वो यही कपड़े पहनकर आती-जाती हैं।

दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर

इसके अतिरिक्त जो घर इन पत्रकारों को दिखे उनमें कपड़े बाहर निकली धूप में सूखने की बजाय भीतर टँगे मिले। सवाल किया तो पता चला कि ऐसा इसलिए ताकि किसी को ये मालूम न चले कि इस घर में लड़कियाँ है। सोच सकते हैं कि इलाके में रहने वाले लोग लड़कियों को बाहर के माहौल से बचाए रखने के लिए कितने प्रयत्न करते हैं।

ऐसा भी नहीं है कि मेवात के इलाकों में लड़कियाँ बाहर नहीं निकलती… बाहर निकलती हैं लेकिन पहला झुंड में, दूसरा अपना मुँह पूरी तरह से ढककर। कहीं आना जाना होता है तो ये लड़कियाँ उन टैम्पो का इंतजार करती हैं जो भरे हों, क्योंकि खाली टैम्पो में बैठने से लड़कयों को डर रहता है कि कहीं कोई अकेला पाकर कुछ गलत न कर दे।

लड़कियों की सुरक्षा के यहाँ ये हाल हैं कि घर की चारदीवारी में जब बेटियाँ होती हैं तब भी घर के पुरुषों को बाहर रहकर उनकी रक्षा करना पड़ती है। शायद उन्हें ऐसा लगता हो कि कहीं दरवाजे से हटने पर कोई जबरन घर में घुस बेटियों को शिकार न बना ले। घरवालों के मन में बच्चियों की सुरक्षा का डर ऐसा है कि उनकी शादी 14 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है।

मेवात क्षेत्र में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर पसरा यह भय निराधार ही नहीं है। मेवात के ग्रामों पर बनी रिपोर्ट में स्थानीयों के अलावा पूर्व सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ रवि माथुर का भी बयान है। डॉ माथुर कहते हैं कि उनके पास तो साल में रेप के ढाई सौ से ज्यादा मामले आते थे। हैवानियत के किस्से ऐसे होते थे कि दरिंदे जानवरों को भी नहीं छोड़ते थे।

डॉक्टर के अतिरिक्त इलाके की डिप्टी एसपी (स्पेशनल इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन इंचार्ज) डॉ पूनम चौहान ने कहा कि उन्होंने कुछ ही माह में 70 से ज्यादा पॉक्सो के मामले देखे हैं। डिप्टी एसपी मानती हैं कि ये हालात तब तक नहीं बदलेंगे जब लड़कों को समझा, सिखाकर संवेदनशील नहीं बनाया जाएगा।

क्षेत्र के हालातों के परखने के बाद जब दोनों महिला पत्रकार उन क्षेत्रों की ओर बढ़ने चलीं जहाँ से रेप के मामले सबसे ज्यादा आए- जैसे रामदढ़, नौगाँव आदि तब उन्हें भी सलाह दी गई कि वो लोग रात के अंधेरे में उस तरफ न जाएँ क्योंकि वहाँ खतरा बहुत ज्यादा है।

सोच सकते हैं कि अंजान महिलाओं को लेकर इतनी चिंता में रहने में ग्रामीण अपने घर की बहन-बेटियों को कैसे रखते होंगे और उनकी चिंता में कैसे दिन-रात बीतती होगी…।

मेवात से बाहर रहने वालों को शायद ये बातें अतिश्योक्ति भरी लगें या दिमाग में ऐसा आए कि ये सब हो कैसे सकता है… लेकिन हकीकत वही जानतें है जो स्थानीय हैं।

मेवात के हाल और बढ़ती मुस्लिम आबादी

मेवात के हालात समझने के लिए पुरानी खबरें पढ़िए। ये इलाका पहली दफा चर्चा में नहीं आया है। इसकी पूरी टाइमलाइन पुरानी है।

इंटरनेट पर केवल क्षेत्र का नाम डाल देने भर से तमाम घटनाएँ निकलकर सामने आती हैं जो सोचने पर मजबूर करती हैं कि ऐसा आखिर यहाँ क्या है जो अपराध घटने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं… फिर नजर यहाँ के डेमोग्राफी और एक ही पैटर्न में घटती घटनाओं पर जाती है, तब जाकर समझ आता है कि समस्या आखिर है कहाँ।

याद हो अगर साल 2020 में भी मेवात की खबरें चर्चा में आई थीं जिन्होंने सबको चौंका दिया था। उसी समय इलाके की जनसंख्या को लेकर खूब चर्चा हुई थी। चिंता जताई गई थी कि कैसे हिंदुओं की आबादी इन इलाकों से कम हो रही है और मुस्लिम बढ़ रहें हैं… फिर धर्मांतरण, लव जिहाद, मारपीट, पलायन की घटनाएँ पता चली थीं।

हरियाणा के मेवात में हिंदूविहिन गाँवों पर रिपोर्ट

जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई में जाँच समिति ने एक रिपोर्ट बनाकर ये बताया था कि कैसे मुस्लिम बहुल मेवात हिंदुओं खासकर दलितों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। उन्होंने कहा था कि समुदाय विशेष (बहुसंख्यक आबादी) का अल्पसंख्यकों पर अत्याचार इतना भीषण है कि जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 गाँव ऐसे हैं जो हिंदू विहीन हो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।

उसी रिपोर्ट में बताया गया था कि मेवात में महिलाओं को अगवा करना, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की कई घटनाएँ वैसे ही सामने आए हैं, जैसी खबरें पाकिस्तान से आती रहती है। इन्हीं घटनाओं की वजह से उस समय मेवात को मिनी पाकिस्तान तक कहकर चलाया गया था।

मेवात की जनसंख्या

आज भी आँकड़े यही बताते हैं कि मेवात जिले की जनसंख्या वैसी ही है। आधिकारिक जनगणना 2011 और 2025 की जनसंख्या डेटा से पता चलता है कि यहाँ कि सबसे अधिक आबादी मुस्लिमों की है। जनगणना 2011 के अनुसार, मेवात की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 79.20 फीसद है और यहाँ हिंदुओं की आबादी मात्र 20.37% है।

मेवात से आई कुछ खबरें

2024 के नवंबर में ही यहाँ पुलिस ने 100+ गोवंशों को तस्करों के चंगुल से छुटाया था। 2024 की ही एक खबर है जो बताती है कि मेवात में सरकारी ट्यूबवेल से दलितों के पानी भरने पर मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें किस कदर पीटा था। हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मेवात में हमला करने की बात हो या पुलिस पर इस्लामी भीड़ का अटैक करना… ये सारी घटनाएँ इन इलाकों से आती रही हैं। इसके अलावा दलितों के उत्पीड़न के अनेक मामले ढूँढने पर पता चल जाएँगे।

आखिर में, ये बात बिलकुल सच है कि समाज में हो रहे दुष्कर्म के मामलों में कमी तभी आएगी जब लोगों की सोच में न बदलाव आए, लेकिन मेवात जैसे इलाकों में ये सोच कैसे बदलेगी ये ज्यादा सोच का विषय है।

गौतम गंभीर नहीं चाहते थे टीम इंडिया के उप-कप्तान बनें शुभमन गिल: रिपोर्ट में दावा, रोहित शर्मा के साथ ऋषभ पंत और संजू सैमसन को लेकर भी हैं मतभेद

मुंबई में बीसीसीआई मुख्यालय में शनिवार (18 जनवरी 2025) को चयन समिति की एक अहम बैठक हुई, जिसमें 2025 में पाकिस्तान और दुबई में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का चयन किया गया। हालाँकि टीम के अधिकांश नाम पहले से तय थे, लेकिन चर्चा का केंद्र हार्दिक पांड्या और शुभमन गिल को लेकर उपकप्तानी का मुद्दा रहा। यह मीटिंग ढाई घंटे तक चली और चयनकर्ताओं, कोच और कप्तान के बीच गंभीर मतभेद सामने आए।

हार्दिक और शुभमन के बीच उपकप्तानी को लेकर टशन!

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने हार्दिक पांड्या को रोहित शर्मा का डिप्टी बनाए जाने की सिफारिश की थी। उनका मानना था कि हार्दिक पांड्या की कप्तानी के अनुभव और ऑलराउंडर के तौर पर उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर शुभमन गिल के नाम पर अड़े रहे। रोहित का तर्क था कि शुभमन गिल युवा हैं और उन्होंने पिछले एक साल में वनडे क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।

हार्दिक पांड्या को लेकर तेजी से बदले समीकरण

बता दें कि हार्दिक पांड्या वनडे और टी-20 दोनों फॉर्मेट्स में पहले उपकप्तान रह चुके हैं। 2023 में भारत में हुए वनडे वर्ल्ड कप के दौरान वह रोहित शर्मा के साथ डिप्टी थे। हालाँकि चोट के कारण हार्दिक टूर्नामेंट के बीच से बाहर हो गए थे, जिसके बाद केएल राहुल ने उनकी जगह ली थी।

इस बीच, दिसंबर 2023 में मुंबई इंडियंस ने हार्दिक को अपनी फ्रेंचाइजी का कप्तान बनाया, जो रोहित शर्मा की जगह पर थी। दिग्गज खिलाड़ियों समेत फैन्स ने रोहित शर्मा की खूब धज्जियाँ उड़ाई, जिसके बाद से समीकरण बदलने लगे।

हालात ये बन गए कि इसके बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के खिलाफ जो वनडे सीरीज खेली, उसमें शुभमन गिल को उपकप्तान बना दिया गया। इसी लाइन पर चलते हुए ही इस बार भी शुभमन गिल को उपकप्तानी सौंपी गई है। साथ ही ये भी बात अहम है कि वो सभी फॉर्मेट में टीम इंडिया के खेल रहे हैं। वहीं, हार्दिक पांड्या लगातार चोटों से जूझते रहे हैं और वो टेस्ट मैचों में नहीं खेलते।

संजू सैमसन और ऋषभ पंत को लेकर भी चयन समिति में मतभेद

उपकप्तानी के अलावा, टीम के विकेटकीपर को लेकर भी चयन समिति में असहमति देखने को मिली। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को टीम में जगह देने का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि संजू ने टी-20 में एक कैलेंडर वर्ष में तीन शतक लगाए हैं और उनका अनुभव टीम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन चयन समिति ने ऋषभ पंत को तरजीह दी और केएल राहुल को बैकअप विकेटकीपर के रूप में टीम में शामिल किया। इस टीम में करुण नायर जैसे खिलाड़ियों की अनदेखी करना भी बड़ी चर्चा का विषय रहा है।

बीसीसीआई में बढ़ रहा मतभेद?

चयन समिति की इस बैठक में बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद स्पष्ट नजर आए। टी-20 कप्तानी को लेकर भी रोहित शर्मा, चयन समिति और बोर्ड के बीच पहले भी असहमति देखी गई है। 2024 में रोहित ने वेस्टइंडीज में टी-20 वर्ल्ड कप जिताने के बाद इस फॉर्मेट से संन्यास लिया था। इसके बाद हार्दिक को टी-20 टीम की कप्तानी दी जानी थी, लेकिन सूर्यकुमार यादव को यह जिम्मेदारी दी गई।

बता दें कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2 टेस्ट मैच गवाँ देने के बाद आखिरी टेस्ट मैच से रोहित शर्मा ने खुद को बाहर कर लिया था। इसके बाद खबरें आई थी कि वो संन्यास ले सकते हैं। हालाँकि सिडनी टेस्ट के दौरान रोहित शर्मा ने स्टार स्पोर्ट्स पर इरफान पठान के साथ बातचीत में साफ किया था कि वो संन्यास नहीं ले रहे। इसके बाद गौतम गंभीर की नाराजगी की खबरें भी सामने आई थी।

इस बाद अभी 1 सप्ताह पहले हुई बीसीसीआई की बैठक के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों के लिए कई नियम बनाए गए हैं, जिसमें विदेशी दौरों पर उनके परिवारों की उपस्थिति भी सीमित कर दी गई है।

इंग्लैंड सीरीज और चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम का ऐलान

बहरहाल, बीसीसीआई की बैठक भले ही ढाई घंटे तक चली हो, लेकिन अंत में चैंपियंस ट्रॉफी और इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी गई। कप्तानी रोहित शर्मा के पास बरकरार रही, तो उपकप्तानी शुभमन गिल को सौंप दी गई।

भारतीय टीम इस प्रकार है: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह, यशस्वी जायसवाल, रिषभ पंत, रवींद्र जडेजा। तेज गेंदबाज हर्षित राणा को सिर्फ इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया है।

टीम चयन पर उठ रहे सवाल

इस पूरी प्रक्रिया ने टीम चयन के पीछे मौजूद राजनीति और मतभेदों को उजागर कर दिया है। कोच और चयन समिति के बीच तालमेल की कमी और खिलाड़ियों के चयन में एकमत नहीं होने की वजह से कई बार टीम के प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह टीम इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में कैसा प्रदर्शन करती है।

BSF के बाड़ पर एतराज, खुद सीमा पर बाँधों को ऊँचा कर रहा बांग्लादेश: भारत में बाढ़ का बढ़ सकता है खतरा, इंदिरा-मुजीब ट्रीटी का हो रहा उल्लंघन

भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है, क्योंकि बांग्लादेश ने त्रिपुरा के कैलाशहर इलाके में जीरो पॉइंट पर एक स्थायी नदी तटबंध का निर्माण शुरू कर दिया है। यह निर्माण बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले और त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के कैलाशहर सब-डिवीजन के बीच हो रहा है। यह क्षेत्र भारतीय सीमा से बहुत करीब है और ऐसे में तटबंध निर्माण से भारतीय इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के मजिस्ट्रेट दिलीप कुमार चकमा ने शुक्रवार (17 जनवरी 2025) को अधिकारियों के साथ इस निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद दिलीप कुमार चकमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश द्वारा तटबंध की ऊँचाई बढ़ाने से त्रिपुरा के कैलाशहर क्षेत्र में बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश यह तटबंध बाढ़ से बचाव के लिए बना रहा है, लेकिन उनकी टीम ने जब सीमा क्षेत्र का दौरा किया तो पाया कि तटबंध की ऊँचाई को बहुत बढ़ा दिया गया है। चकमा ने कहा कि अब भारत को अपने तटबंध को और मजबूत करना पड़ेगा, क्योंकि अधिक पानी अब भारतीय इलाके की ओर बढ़ेगा। इस मामले को अब उच्च स्तर (सरकार के स्तर) पर उठाने की आवश्यकता है।

चकमा ने यह भी बताया कि भारतीय तटबंध जीरो पॉइंट से लगभग 350 गज की दूरी पर स्थित है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के तटबंध की लंबाई का कोई स्पष्ट आँकड़ा नहीं है, लेकिन उनके अनुसार लगभग एक किलोमीटर का हिस्सा दिखाई दे रहा है। इस पर काम अब भी चल रहा है और बांग्लादेश इसे स्थायी रूप (पक्का) से बनाने की तैयारी में है। चकमा ने कहा कि भारत को इस मामले में आवश्यक कदम उठाने चाहिए और राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पास भेजने की योजना बना रही है।

इंदिरा-मुजीब संधि का उल्लंघन कर रहा बांग्लादेश

यह तटबंध निर्माण 1972 की इंदिरा-मुजीब संधि का उल्लंघन भी हो सकता है। इस संधि के तहत जीरो पॉइंट पर कोई स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकता, सिवाय इसके कि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति हो। जीरो पॉइंट दोनों देशों की सीमा पर लगे पिलर्स (खंबों) के 150 गज के भीतर आता है और इस पर कोई भी निर्माण भारतीय और बांग्लादेशी सरकार की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता।

बांग्लादेश जिन तटबंधों को बना रहा है, उसकी वजह से भारत और बांग्लादेश की सीमा पर बहने वाली मनु नदी में पानी बढ़ जाने भारतीय इलाके में बाढ़ आ सकती है। खास बात यह है कि बांग्लादेश ने भारत को इस निर्माण के बारे में पहले से सूचित नहीं किया, जो भारत के लिए चिंता का कारण बन गया है। बांग्लादेश ने पहले ही भारत द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध किया था, जबकि वो घुसपैठ को रोकने के लिए बाड़ लगा रहा था। वहीं, दूसरी तरफ वो खुद तटबंध को बढ़ाकर भारतीय क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा रहा है।

इस मामले में भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इसे जल्द से जल्द सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की इमरजेंसी की स्थिति से बचा जा सके।

हमले वाली रात से पहले भी सैफ अली खान के घर आ चुका था शहजाद, हिंदू पहचान से पुलिस को गुमराह कर रहा था ‘बांग्लादेशी’: नकाब से चेहरा छिपा फ्लैट में घुसा था

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमला करने वाले ‘मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद’ ने गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे किए हैं। पूछताछ के दौरान पता चला कि शुरुआत में इस्लाम ने हिंदू नाम ‘बिजय दास’ बताकर पुलिस को बरगलाना चाहा जबकि उसका अन्य नाम मोहम्मद इलियास भी है। सबसे बड़ी बात न्यूज में ये बताई जा रही है कि वो घटना वाले दिन पहली बार सैफ के घर नहीं आया था, उससे पहले भी वो घर का दौरा कर चुका था। हालाँकि पुलिस का इस बिंदु पर अभी स्पष्ट बयान नहीं आया है।

सूत्रों के चलाई जा रही खबरों के अनुसार, आरोपित हाउसकीपिंग कंपनी में काम करने के दौरान घर पर आया था और 16 जनवरी को लूटपाट के इरादे से घर में घर में घुसा था। अपार्टमेंट में आने से पहले उसने देखा कि बिल्डिंग का सुरक्षाकर्मी सो रहा था। उसने मौके का फायदा उठाकर एंट्री ली और मुँह नकाब से ढककर ऊपर तक चढ़ता गया।

11वीं मंजिल पर पहुँचने के बाद उसने शाफ्ट का इस्तेमाल करके सैफ अली खान के फ्लैट में एंट्री की और बाद में बच्चों के कमरे से सटे बाथरूम में छिप गया।

खबरों के मुताबिक, हमलावर 5-6 महीने पहले मुंबई आया था और हाउसकीपिंग एजेंसी में काम करता था। उसका ठिकाना वर्ली में था, लेकिन घटना के लिए उसने ठाणे जाने के लिए ट्रेन ली थी। उसके बाद उसे कोई बाइक पर लेने आया था। अब पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस के डीसीपी दीक्षित गेडम ने बताया कि उन्होंने उसके विरुद्ध केस को दर्ज कर लिया है।

उन्होंने कहा, “मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद ने सैफ के निवास स्थान पर लूट की नीयत से प्रवेश किया था। उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। प्रथम दृश्टया में पता चलता है कि वो बांग्लादेश से है। उसके पास कोई भारतीय दस्तावेज नहीं है। उसने विजय दास के नाम से पहचान बताई हुई थी”

उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी 2025 को सैफ अली खान के घर पर हमला करने के बाद शरीफुल इस्लाम 3 दिन से न्यूज देख देखकर लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था। आखिर में गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ठाणे वेस्ट के हीरानंदानी एस्टेट के पास छापा मारा और वह टीसीएस कॉल सेंटर के पीछे चल रहे मेट्रो निर्माण स्थल पर लेबर कैंप में मिला। पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद भारतीय पासपोर्ट अधिनियम के तहत उचित धाराएँ जोड़ी हैं।

बाइक से आए और फूँक दिया पाकिस्तान का सुरक्षा पोस्ट, फौजी को भी किया ढेर: बलूचिस्तान के तुरबत की घटना, बंधक बना हथियार-उपकरण छीने

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के केच जिले के तुरबत इलाके में शनिवार (18 जनवरी 2025) को हथियारबंद लड़ाकों ने पुलिस पोस्ट पर हमला किया और उसे आग के हवाले कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार लड़ाके तुरबत शहर के बाहरी इलाके में स्थित पुलिस पोस्ट पर पहुँचे और हमला किया।

हमलावरों ने पुलिसकर्मियों को बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया और उनके सरकारी हथियार, वायरलेस रेडियो और अन्य उपकरण छीन लिए। इसके बाद पोस्ट को लूटकर पूरी तरह आग लगा दी। इस हमले की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन फोर्स ने ली है। बीएलएफ ने 2 अन्य हमले भी किए, जिसमें 1 पाकिस्तानी फौजी मारा गया, तो कई घायल हो गए।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने बताया, “पुलिस पोस्ट पूरी तरह जलकर खाक हो गई।” घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के जवान मौके पर पहुँचे, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। गनीमत यह रही कि इस हमले में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और हमलावरों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। दो अन्य हमलों के बारे में पाकिस्तानी अखबारों, सुरक्षा बलों ने चुप्पी साध ली है, जिसमें पाकिस्तानी फौजियों को नुकसान पहुँचा है।

बीएलएफ ने ली हमलों की जिम्मेदारी, पाकिस्तानी फौजी भी ढेर

इस हमले की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन फोर्स ली है। बीएलएफ ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को उसके लड़ाकों ने तीन हमले किए। पहले पहले में कई सुरक्षाकर्मी मारे भी गए। बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलोच ने कहा, “इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को काफी नुकसान हुआ और हमने काफी हथियार भी जब्त किए हैं।” उन्होंने कहा कि बीएलएफ के लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ ऐसे अभियान जारी रखेंगे।

पहला हमला 17 जनवरी की दोपहर को बीएलएफ के स्नाइपर टैक्टिकल टीम ने जमुरान के चुर मुबारकी कोह इलाके में यहाँ, जिसमें पाकिस्तानी फौजी मारा गया। इस हमले के बाद ऑटोमेटिक हथियारों से फौजियों के मूवमेंट पर हमला किया, जिससे वो बिखर गए। इनसे में भी पाकिस्तानी फौजियों को नुकसान पहुँचा।

दूसरा हमला जमुरान इलाके के ही पगंजन इलाके में किया गया, जो मिलिटरी चेकप्वॉइंट था। इस हमले में 2 पाकिस्तानी फौजी घायल हुए और तीसरा हमला तुरबत के सिंगानी सार में किया गया, जिसमें बीएलएफ के लड़ाकों ने चौकी से हथियार उठा लिए और पूरी चौकी को आग के हवाले कर दिया।

तुरबत कहाँ हैं?

तुरबत पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में है। ये बलोचिस्तान में क्वेटा के बाद सबसे बड़ा शहर है। तुरबत केच जिले में आता है, जो ईरान की सीमा से सटा है। ये पूरा इलाका ग्वादर के इलाके के आसपास ही है, जहाँ बलोच लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर हमला करते रहे हैं। हमले की जगह तुरबत शहर के बाहरी इलाके में स्थित पुलिस पोस्ट थी, जो फिलहाल खाक में मिल चुकी है।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी तुरबत के उपनगरीय इलाके में एक बस को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में 47 लोगों की मौत हो गई थी और 32 लोग घायल हुए थे। इस हमले में अधिकतर पाकिस्तानी सेना के जवान थे। हमले की जिम्मेदारी बलोच राष्ट्रवादी संगठनों ने ली थी, जिन्हें पाकिस्तान आतंकवादी मानना है।

बंगाल के सियालदह में अवैध रूप से घुसे 3 रोहिंग्या मुसलमान, ₹20-20 हजार देकर बनवाए फर्जी दस्तावेज: दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पहुँचने से पहले हुए गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल बांग्लादेशी और म्यांमार के रोहिंग्या घुसपैठियों का जंक्शन बन गया है। पुलिस ने कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन से तीन रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों अवैध रूप से घुसे हैं और वे जम्मू-कश्मीर या नई दिल्ली में अपने परिचितों के पास जा रहे थे। इसके पहले वे बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में रह रहे थे। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मामले की जाँच NIA से कराने की माँग की है।

गिरफ्तार लोगों में 2 महिलाएँ और एक पुरुष हैं। घुसपैठियों की पहचान नूर फातिमा, सबू पानेकर और अब्दुल रहमान के रूप में हुई है। दोनों महिलाओं की उम्र 18 साल से कम बताई जा रही है। दरअसल, सियालदह पुलिस स्टेशन के कर्मियों को स्टेशन परिसर में तीनों की गतिविधियों पर संदेह हुआ। इसके बाद उनके पहचान दस्तावेज माँगे तो उनकी असली पहचान उजागर हुई।

तीनों घुसपैठिए आपस में रिश्तेदार हैं और म्यांमार के रखाइन प्रांत के निवासी हैं। ये सभी बिना वीजा और वैध दस्तावेजों के अवैध रूप से भारत में घुसे हैं। उसने बताया कि पश्चिम बंगाल की एक खुली सीमा से से तीनों भारत में घुसे थे। इसके बाद वे शनिवार (18 जनवरी 2025) की सुबह ट्रेन से सियालदह स्टेशन पहुँचे थे और यहाँ से वे दिल्ली या जम्मू-कश्मीर जाने वाले थे। यहाँ उन्हें पकड़ लिया गया।

म्यांमार में हिंदुओं एवं बौद्धों के खिलाफ हिंसा करने वाले इस्लामी आतंकी समूहों के खिलाफ वहाँ की सेेना की कार्रवाई के बाद मुस्लिम वहाँ से भाग रहे हैं। इस दरम्यां ये तीनों भी भागकर बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर में ठहरे। इसके बाद वहाँ एक एजेंट को प्रति व्यक्ति 20,000 देकर बिना दस्तावेज के अवैध रूप से भारत की सीमा में घुस आए।

जाँच अधिकारी पता कर रहे हैं कि वे भारत में किन संपर्कों के जरिए घुसे और किसके पास जाने वाले थे। पुलिस ने उनका भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किनकी मदद से वे अवैध रूप से भारत की सीमा पार करने में कामयाब रहे थे। जाँच अधिकारी महिला तस्करी और आतंकवाद के ऐंगल से भी इस मामले की जाँच कर रही है।

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में NIA जाँच की माँग की है। भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “ये अवैध अप्रवासी पहले म्यांमार से भागकर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बालूखाली कैंप में रह रहे थे। वे किसी एजेंट को कुछ रकम देकर भारत में घुस आए। वे कोलकाता से नई दिल्ली जाकर बसने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कैमरे पर स्वीकार किया है कि वे नई दिल्ली में बसे कई रोहिंग्याओं को जानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, मैं दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल से आग्रह करता हूँ कि वे वहाँ रोहिंग्याओं के बसने के मामले की जाँच NIA और दिल्ली पुलिस से करवाएँ कि पश्चिम बंगाल दिल्ली की ओर जाने वाले ऐसे लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग कैसे बन गया है। ED को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत अवैध भुगतान और प्राप्तियों के मामले की भी जाँच करनी चाहिए, जो इस तरह के अवैध सीमा अतिक्रमण को सुविधाजनक बना रहे हैं।”

सुवेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा पर 600 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ नहीं लगाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को ज़मीन उपलब्ध नहीं कराई है। उन्होंने एक सोशल मीडिया यूजर को जवाब देते हुए कहा, “ममता बनर्जी से पूछिए कि वह यहाँ 600 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए BSF को ज़मीन क्यों नहीं दे रही हैं।”

सैफ अली खान पर हमला करने वाला बांग्लादेशी, नाम ‘शरीफुल इस्लाम शहजाद’: ठाणे में झाड़ियों के बीच से पुलिस ने दबोचा, न्यूज देखकर बदल रहा था लोकेशन

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमले के केस का बांग्लादेशी एंगल भी निकला है। मुंबई पुलिस ने हमलावर मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद उर्फ विजय दास, उर्फ बीजे को ठाणे से गिरफ्तार किया है। मुंबई पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपित के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह बांग्लादेशी है और भारत में अवैध तरीके से घुसा था। आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम का इस्तेमाल किया। मुंबई पुलिस ने अब इस केस में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ भी जोड़ दी हैं।

मुंबई के डीसीपी जोन 9, दीक्षित गेडम ने बताया, “16 जनवरी की रात 2 बजे अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमला हुआ। इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है और उसकी उम्र 30 वर्ष है। उसने चोरी के इरादे से घर में घुसपैठ की थी। आरोपित को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसकी रिमांड की माँग की जाएगी। मामले की आगे जाँच जारी है।”

डीसीपी दीक्षित गेडम ने आगे कहा, “प्रथम दृष्टया, आरोपित बांग्लादेशी है। उसने भारत में प्रवेश करने के बाद अपनी पहचान बदल ली थी। उसका असली नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है। शुरुआत में उसने कुछ दिनों तक मुंबई में काम किया और फिर मुंबई के आसपास के इलाकों में चला गया। आरोपित हाउसकीपिंग एजेंसी में काम करता था।” मुंबई पुलिस ने इस मामले में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ जोड़ते हुए अपनी जाँच का दायरा बढ़ा दिया है।

पुलिस की शुरुआती जाँच में यह भी पता चला है कि आरोपित पिछले कुछ समय से अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहा था। गिरफ्तारी से पहले वह ठाणे के हीरानंदानी एस्टेट के पास बने लेबर कैंप की झाड़ियों में छिपा हुआ था। पुलिस ने वहाँ सर्च ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार किया। सैफ पर हमला करके फरार होने के बाद से वह लगातार न्यूज चैनल देख रहा था और पुलिस एक्शन के हिसाब से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित ने अपराध को अंजाम देने के लिए सैफ अली खान के अपार्टमेंट की इमरजेंसी सीढ़ियों का इस्तेमाल किया और दमकम विभाग की सीढ़ियों की तरह हल्की सीढ़ियों के बल पर वो अंदर घुसा।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित के पास से कोई पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी, नहीं मिला। उसकी हरकतें एक साधारण मजदूर के बजाय एक शातिर अपराधी जैसी थी, तभी वो इतने समय तक मुंबई पुलिस को चमका देता रहा। उसे पकड़ने के क्रम में मुंबई से लेकर एमपी और छत्तीसगढ़ तक युवकों को पकड़ा गया। ऐसे में पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश है।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर अटैक मामले में 2 संदिग्ध हिरासत में… एक छत्तीसगढ़ के दुर्ग से, दूसरा MP से: CCTV फुटेज में ईयरफोन खरीदते दिखा था हमलावर

बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ग्यानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन में एक संदिग्ध को पकड़ा। पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों के आधार पर इस व्यक्ति की पहचान की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में आरपीएफ ने संदिग्ध को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पकड़ा और फिर जीआरपी थाने में भेज दिया, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में मुंबई पुलिस ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लिया। इन दोनों गिरफ्तारियों को लेकर पुलिस को उम्मीद है कि सैफ अली खान पर हुए हमले की गुत्थी जल्द ही सुलझाई जा सकेगी।

इस बीच, पुलिस को दादर स्थित एक मोबाइल शॉप से सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति ईयरफोन खरीदते हुए देखा गया। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति हमले के बाद स्टेशन के पास देखा गया था। मुंबई पुलिस ने इस आधार पर रेलवे स्टेशनों की निगरानी बढ़ाई और अन्य राज्यों में भी सूचना साझा की। इस संदिग्ध की शक्ल छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पकड़े गए व्यक्ति से मिलती जुलती दिख रही है।

मुंबई पुलिस की 35 से अधिक टीमें इस मामले की जाँच में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर हमले के बाद कपड़े बदलकर भागने की कोशिश कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज में उसे लकड़ी की छड़ी और हेक्सा ब्लेड के साथ देखा गया है। पुलिस ने फुटेज के आधार पर कई संदिग्धों से पूछताछ की और आखिरकार दो संदिग्धों को हिरासत में लेने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने बताया कि हमलावर ने हमले से पहले अभिनेता के फ्लैट की रेकी की थी और उसे सैफ के घर के बारे में पूरी जानकारी थी।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर हमले के बाद से हमलावर फरार था। जिसके बाद पुलिस ने हमलावर को पकड़ने के लिए 35 टीमें बनाई थी। इससे पहले, एक अन्य व्यक्ति को हमले के दूसरे ही दिन हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसका सैफ के मामले से कोई लेना-देना नहीं निकला था।

फ्लाइट बुकिंग में 162% का उछाल, होटल कारोबार 3 गुना बढ़ा: प्रयागराज महाकुंभ आध्यात्मिक ही नहीं, कारोबार को भी कर रहा मजबूत; ₹4 लाख करोड़ के बिजनेस का अनुमान

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में प्रशंसा हर तरफ हो रही है। कुंभ ना सिर्फ सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी निखारने का काम कर रहा है। महाकुंभ के आयोजन के दौरान भारत के कई व्यवसायिक क्षेत्रों में भारी उछाल देखने को मिला है। इनमें सबसे अधिक उछाल होटल इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है। इससे प्रयागराज के व्यवसायी काफी खुश हैं।

महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज के कारोबार में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। होटलों में अगले कई दिनों तक कमरे खाली नहीं हैं। होटल के साथ-साथ खान-पान के सामान, स्थानीय उत्पाद, कंबल, ऊनी कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज में फ्लाइट्स की बुकिंग में 162 प्रतिशत का उछाल देखने को मिल रहा है।

फ्लाइट्स के अलावा रेलवे, बसों, टैक्सियों आदि की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों से लेकर बसों एवं टैक्सियों तक में लोग खचाखच भर करके कुंभ नहाने के लिए प्रयागराज पहुँच रहे हैं। छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और ऑनलाइन बुकिंग का काम करने वाली कंपनियाँ भी इस बूम से काफी खुश हैं। कुंभ खत्म होने तक यानी 45 दिनों में उन्हें भारी मुनाफा होने की उम्मीद है।

प्रयागराज होटल एंड रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि श्रद्धालु और पर्यटकों द्वारा बुकिंग कराने के कारण होटल इंडस्ट्री को 30 से 40 फीसदी तक का मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुनाफा बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। थोक और खुदरा व्यापारी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का मानना है कि महाकुंभ के अवसर पर सिर्फ होटल और टेंट सिटी का कारोबार 2,500 से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। केंद्रीय व्यापार मंडल के महामंत्री शिवशंकर सिंह का मानना है कि एफएमसीजी उत्पाद, ऑटोमोबाइल, सीसीटीवी कैमरा, केबल और खाने-पीने के सामान की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।

शिवशंकर सिंह का कहना है कि मकर संक्रांति के स्नान तक खुदरा व्यापार में भी 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि कुंभ स्नान में विशेष स्थान रखने वाले मौनी अमावस्या पर यह बिक्री और भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हस्तशिल्पी इस बार 35 करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकते हैं। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद कादिर का भी ऐसा ही मानना है।

मोहम्मद कादिर का कहना है कि महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज में खाद्य सामग्री, अनाज, पूजा सामग्री, कपड़े, कंबल, गद्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेंट के कपड़े आदि के व्यापार में दोगुना की बढ़ोतरी हुई है। मोहम्मद कादिर का कहना है कि मेले में जैसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी वैसे-वैसे वृद्धि में और भी अधिक वृद्धि होगी और व्यापारियों को फायदा होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ होटलों, धर्मशालाओं और टेंट से ही 40,000 करोड़ रुपए के व्यापार की संभावना है। पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन से जुड़ा 20,000 करोड़ रुपया का कारोबार होगा। वहीं तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियाँ, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा।

इसी तरह परिवहन यानी रेलवे-टैक्सी आदि से 10,000 करोड़ रुपए का व्यवसाय होने का अनुमान है। टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से 10,000 करोड़ रुपए का व्यापार अनुमानित है। वहीं, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से 10,000 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है।

CAIT ने अनुमान लगाया है कि अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से 3,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा। इसी तरह डिजिटल भुगतान सेवा, वाई-फाई सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग बुकिंग यानी ई-टिकटिंग से 1,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस महाकुंभ में डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे बड़े ब्रांडों ने 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इस तरह 26 फरवरी तक चलने वाले 45 दिनों के इस महाकुंभ मेले में 2 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस होने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, इंडस्ट्री के जानकार इस व्यापार को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बता रहे हैं। वहीं, सरकार का अनुमान है कि मेले से उसे 25,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कुंभ मेले में करीब 6,900 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 

दरअसल, कुंभ मेले में दुनिया भर से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। अगर हर पर्यटक औसतन 5000 रुपए खर्च करता है तो महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है। वहीं, इंडस्ट्री का अनुमान है कि मेले में औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपए हो तो यह आँकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए को पार सकता है। इससे देश की जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है। 

मुसीबुल शेख ने ‘प्रदीप’ नाम से बनवाए फर्जी दस्तावेज, लिव-इन में रहने लगा हिंदू लड़की के साथ: खुफिया इनपुट पर सूरत पुलिस ने पकड़ा, पूछताछ में बोला- ‘निकाह’ का था इरादा

गुजरात के सूरत में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 26 वर्षीय मुसीबुल मकबूल शेख ने खुद को हिंदू प्रदीप क्षेत्रपाल बताकर एक हिंदू लड़की को प्रेमजाल में फंसाया। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले मुसीबुल ने सूरत में हिंदू इलाके में झूठी पहचान के सहारे एक मकान किराए पर लिया और नेपाली मूल की हिंदू लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा। यह साजिश तब खुली, सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को उसकी फर्जी पहचान के बारे में गुप्त सूचना मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुसीबुल ने मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से एक फर्जी आधार कार्ड तैयार किया था, जिसमें उसने अपना नाम प्रदीप सुजय क्षेत्रपाल बताया। यह सब उसने इसलिए किया क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू बहुल इलाके में मकान किराए पर नहीं मिल रहा था और उसे अपनी पहचान भी छिपानी थी। पुलिस जाँच में पता चला कि वह पिछले पाँच महीने से झूठे दस्तावेजों के सहारे हिंदू बनकर वहाँ रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले मुसीबुल ने मुंबई में एक हिंदू लड़की से मुलाकात की थी। देश गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की नेपाली मूल की है। उसे फाँसने के लिए मुसीबुल ने खुद को प्रदीप बताकर लड़की का विश्वास जीता और उसे शादी और बेहतर जीवन का सपना दिखाया। लड़की उसके जाल में फंस गई और वह उसके साथ सूरत आ गई। मुसीबुल ने हिंदू इलाके में रहने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रांदेर इलाके में एक व्यक्ति झूठे दस्तावेजों के सहारे रह रहा है। इसके बाद SOG ने कार्रवाई करते हुए मुसीबुल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने हिंदू बनकर लड़की को धोखा दिया। पुलिस ने मुसीबुल के पास से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आरसी बुक और ₹15,000 नकद बरामद किए हैं। मुसीबुल ने कबूल किया कि उसने यह साजिश सिर्फ इसलिए रची क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू इलाके में मकान नहीं मिल रहा था और वो जल्द ही ‘निकाह’ भी करने वाला था।

एएसआई जालूभाई मगनभाई की शिकायत पर एसओजी सूरत सिटी ने BNS की धाराओं 319, 336(2), 336(3) और 338 के तहत उस पर केस दर्ज किया है। पुलिस इस मामले को लव जिहाद के एंगल से जाँच रही है। अधिकारियों का मानना है कि मुसीबुल की इस साजिश में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि मुसीबुल का संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। फिलहाल उसे रांदेर पुलिस को सौंप दिया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जा रही है।