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76वें गणतंत्र दिवस पर देश खुशियों से झूमा: राष्ट्रपति ने ली तिरंगे की सलामी, पहली बार तीनों सेनाओं ने निकाली संयुक्त झाँकी, UP की थीम में दिखा समुद्र मंथन

भारत अपना 76वाँ गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तिरंगा फहराकर पूरे देश को शुभकामनाएँ दीं। राष्ट्रपति ने इस दौरान देश के मातृभूमि के बलिदान देने वाले शूरवीरों को याद किया। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती की भी बधाई दी। राष्ट्रपति ने इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में देश में हुई प्रगति को भी याद किया।

इस बार के गणतंत्र दिवस समारोह में 10,000 विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। इनमें पैरालंपिक खिलाड़ी, बेहतर प्रदर्शन करने वाले सरपंच, हथकरघा कारीगर, वन एवं वन्यजीव संरक्षण कार्यकर्ता शामिल हैं। परेड में 16 राज्यों और केंद्र सरकार के 15 मंत्रालयों की कुल 31 झाँकियाँ निकाली गईं। पहली बार तीनों सेनाओं ने संयुक्त रूप से झाँकी निकाली।

इस बार गणतंत्र दिवस की थीम ‘गोल्डन इंडिया- हेरिटेज एंड डेवलपमेंट’ है। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो मुख्य अतिथि बने। उनके साथ 352 सदस्यीय इंडोनेशियाई मार्चिंग और बैंड दल परेड में भाग लिया। परेड से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इंडिया गेट स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

परेड के दौरान ब्रह्मोस मिसाइल, पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम समेत अत्याधुनिक रक्षा प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए गए। सेना की बैटल सर्विलांस सिस्टम ‘संजय’ और डीआरडीओ की ‘प्रलय’ सामरिक मिसाइल भी पहली बार प्रदर्शित की गई। इसके अलावा टी-90 ‘भीष्म’ टैंक, सरथ सैन्य वाहन, नाग मिसाइल सिस्टम और वाहन पर लगे पैदल सेना मोर्टार सिस्टम (ऐरावत) शामिल हुए।

वहीं, फ्लाईपास्ट में भारतीय वायुसेना के 40 विमान शामिल हुए। इनमें सी-130जे सुपर हरक्यूलिस, सी-17 ग्लोबमास्टर और एसयू-30 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इनमें 22 फाइटर जेट थे। भारतीय तटरक्षक बल के तीन डोर्नियर विमान भी इसमें हिस्सा लिए। वहीं, सिग्नल कोर के कर्मियों ने मोटरसाइकिल पर करतब का प्रदर्शन किया। इसके अलावा, 5,000 कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रदर्शन किया।

गणतंत्र दिवस की सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली में अर्धसैनिक बलों की 70 से अधिक कंपनियों और 70,000 से अधिक पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया। राजधानी में छह स्तरीय सुरक्षा घेरा है। इसमें चेहरे की पहचान करने वाले AI फीचर वाले 2,500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन रोधी प्रणाली, छत पर तैनात स्नाइपर और परेड मार्ग पर 200 से अधिक इमारतों में जाने पर रोक शामिल है।

इस साल जिन 16 राज्यों/UT की झाँकियाँ प्रदर्शित की गईं, उनमें गोवा, उत्तराखंड, हरियाणा, झारखंड, गुजरात, आंध्र प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, दिल्ली, दादरा और नगर हवेली, और दमन और दीव शामिल हैं। इस बार उत्तर प्रदेश की झाँकी का थीम महाकुंभ रहा। झाँकी में समुद्र मंथन एवं उसमें निकलने वाले अमृत कलश को दिखाया गया है।

मध्य प्रदेश की झाँकी की थीम ‘चीता- द प्राइड ऑफ इंडिया’ है। इसमें कूनो नेशनल पार्क की प्राकृतिक सुंदरता और चीतों की झलक दिखाई गई। चार साल बाद इस बार दिल्ली की झाँकी प्रदर्शित की गई। दिल्ली की झाँकी की थीम गुणवत्तापूर्ण शिक्षा है।

काशी की तर्ज पर ‘महाभारत कॉरिडोर’ और साबरमती की तरह ‘यमुना रिवर फ्रंट’: BJP का संकल्प पत्र-3 जारी, श्रमिकों से लेकर पत्रकारों और वकीलों का भी रखा गया ख्याल

भाजपा ने दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए अपने संकल्प पत्र का तीसरा भाग शनिवार (25 जनवरी 2025) को जारी किया। संकल्प पत्र जारी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल को सबसे झूठा आदमी बताया। उन्होंने केजरीवाल को सलाह दी कि वे प्रयागराज कुंभ जाएँ और संगम में स्नान करें। उनके झूठ बोलने के पाप धुल जाएँगे।

अमित शाह ने दिल्ली के संकल्प पत्र का अंतिम भाग जारी करते हुए AAP सरकार पर घोटालों का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में स्कूलों, मंदिरों और गुरुद्वारों को भी नहीं छोड़ा। सबके ठेके दिए गए और उनमें हजारों करोड़ रुपए का घोटाला किया गया। अमित शाह ने कहा कि केजरीवाल ने हर चुनाव में झूठे वादे किए हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा कभी झूठे वादे नहीं करती।

अमित शाह ने कहा, “भाजपा ने हर चुनाव में जो वादे किए उन्हें पूरा करने का गंभीरता से प्रयास किया है। इसलिए दिल्ली प्रदेश भाजपा ने महिलाओं, युवाओं, जेजे कलस्टर के निवासियों, असंगठित मजदूरों, मध्यम आय वर्ग, व्यापारियों, पेशेवरों के साथ नीचे तक जाकर सुझाव प्राप्त करने का काम किया है। 1.08 लाख लोगों ने सुझाव दिए हैं। 62 प्रकार की समूहों की बैठक की गई।”

अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए अमित शाह ने कहा, “दिल्ली में केजरीवाल ऐसी सरकार चला रहे हैं, जो वादे करते हैं, उन्हें पूरा नहीं करते हैं और फिर से झूठ के एक बहुत बड़े पुलिंदे और भोले से चेहरे के साथ जनता के सामने उपस्थित होते हैं। मैंने अपने राजनीतिक जीवन में इतनी सफाई से झूठ बोलने वाला व्यक्ति नहीं देखा है।”

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा, “अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मैं, मेरी सरकार का कोई मंत्री सरकारी बंगला नहीं लेंगे, लेकिन इन्होंने बंगला लिया। यहाँ तक तो ठीक था, लेकिन 51 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करके 4 बंगलों को एक साथ मिलाकर इन्होंने एक शीशमहल बना दिया।”

अमित शाह ने बताया कि अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि 7 साल में वे यमुना को एकदम शुद्ध कर देंगे और दिल्ली वालों के सामने वे यमुना में डुबकी लगाएँगे। उन्होंने कहा, “मैं केजरीवाल जी को याद कराना चाहता हूँ कि केजरीवाल जी दिल्ली की जनता आपकी उस विश्वप्रसिद्ध डुबकी की राह देख रही है कि कब आप डुबकी लगाओगे।”

भाजपा के संकल्प पत्र-3 की प्रमुख बातें

  • गिग वर्कर्स को 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा, 5 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा
  • ‘टेक्सटाइल वर्कर्स वेलफेयर बोर्ड’ का गठन, 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा, 5 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा और 15 हजार रुपए का टूलकिट प्रोत्साहन, बच्चों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति
  • निर्माण श्रमिकों को 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा, 5 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा, 10 हजार रुपए तक का टूलकिट प्रोत्साहन और पंजीकृत श्रमिकों को 3 लाख रुपए तक का लोन
  • युवाओं को 50 हजार सरकारी नौकरियाँ, 20 लाख रोजगार और स्व-रोजगार के अवसर, जरूरतमंद विद्यार्थियों को मुफ्त मेट्रो रेल यात्रा के लिए NCMC में 4 हजार रुपए सालाना
  • मान्यता प्राप्त मीडियाकर्मियों और वकीलों को 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा और 10 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा एवं दुर्घटना बीमा
  • 20,000 करोड़ रुपए के निवेश से एकीकृत पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क, 13 हजार ई-बसों के साथ दिल्ली को बनाया जाएगा ई-बस सेवाओं वाला शहर, 24 घंटे बस सेवा और मेट्रो के फेज-4 का काम पूरा होगा
  • भव्य महाभारत कॉरिडोर का विकास
  • 3 साल में यमुना नदी को पुनर्जीवित और साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर ‘यमुना रिवर फ्रंट’ का विकास
  • हाथ से कचरा एवं गंदगी उठाने का काम पूरी तरह खत्म की जाएगी
  • श्रमिकों को कौशल विकास और स्वर-रोजगार के अवसर
  • रेहरी-पटरों वालों को आर्थिक मदद

घोषणा पत्र में अमित शाह ने यह भी कहा कि कच्ची कॉलोनियों को उनका मालिकाना हक दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने 1700 अनधिकृत कॉलोनियों को मालिकाना हक देने की बात कही थी, लेकिन उन्हें इसे तोड़ने या खरीदने-बेचने का अधिकार नहीं था। अब इसका पूर्ण मालिकाना हक दिया जाएगा। वे इसे तोड़कर नया घर बना सकते हैं। इसके साथ ही इसे खरीद और बेच भी सकते हैं।

इसके साथ ही अमित शाह ने यह भी कहा कि अगर दिल्ली में भाजपा की सरकार बनती है तो सील की गईं 13 हजार दुकानों को 6 महीने के भीतर दोबारा खोला जाएगा। एलएनडीओ के स्वामित्व वाले मार्केट को फ्री-होल्ड किया जाएगा।

भाजपा का संकल्प पत्र-2 के वादे

इससे पहले केंद्रीय मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने भाजपा के संकल्प पत्र का दूसरा भाग चार दिन पहले जारी किया था। उन्होंने कहा था कि दिल्ली के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 15,000 रुपए की एकमुश्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। दो बार की यात्रा और आवेदन शुल्क को वापस लौटाया जाएगा। उन्होंने इसे ‘मोदी की गारंटी’ बताया था। अन्य वादे इस तरह हैं-

  • जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को KG से लेकर PG तक मुफ्त शिक्षा
  • अनुसूचित जाति (SC) के विद्यार्थियों को हर महीने 1,000 रुपए की आर्थिक -मदद
  • ऑटो-टैक्सी वालों के लिए वेलफेयर बोर्ड, 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा, 5 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा
  • घरेलू कामगारों के लिए वेलफेयर बोर्ड का गठन, 10 लाख रुपए तक का जीवन बीमा, 5 लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा, उनके बच्चों के लिए छात्रवृत्ति और 6 महीने की पेड मैटरनिटी लीव
  • युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 15,000 रुपए की मदद
  • दो बार के यात्रा और आवेदन शुल्क की प्रतिपूर्ति का भी वादा

भाजपा के संकल्प पत्र-1 की घोषणाएँ

इस घोषणा पत्र को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयप्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) ने जारी किया था। उन्होंने दिल्ली के लोगों से वादा किया था कि वर्तमान की जन कल्याण को बंद नहीं किया जाएगा। इसके अलावा, योजनाओं से जुड़ी सुविधाओं में सुधार करके उन्हें और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने इन योजनाओं को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की बात भी कही थी। संकल्प पत्र-1 के वादे निम्नलिखित हैं- 

  • महिला समृद्धि योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपए की वित्तीय मदद
  • गरीब महिलाओं को गैस सिलेंडर में 500 रुपए की सब्सिडी
  • गरीब परिवारों को होली और दिवाली पर एक सिलेंडर मुक्त
  • गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपए की सहायता
  • 70 साल से अधिक आयु के लोगों को 10 लाख रुपए का बीमा कवर
  • 60 से 70 साल के लोगों की वर्तमान पेंशन में 500 रुपए की बढ़ोतरी
  • 70 साल से अधिक उम्र के लोगों और दिव्यांग एवं विधवा महिलाओं को 3,000 रुपए की पेंशन
  • दिल्ली में अटल कैंटीन योजना के तहत झुग्गी झोपड़ी इलाके में 5 रुपए में भोजन दिया जाएगा

₹2100 देने के नाम पर AAP ने भरवाए जो फॉर्म, उनमें से 30 हजार कबाड़ी के पास मिले: BJP अध्यक्ष का आरोप – महिलाओं की पर्सनल डिटेल से किया गया समझौता

दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने ऐलान किया था कि वो सरकार बनते ही महिलाओं को ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत ₹2100 हर महीने देगी, लेकिन आम आदमी पार्टी की ओर से भरवाए गए फॉर्म कबाड़ी के यहाँ मिले हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि AAP ने अपनी ‘मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना’ के तहत महिलाओं से भरवाए गए फॉर्म कचरे में फेंक दिए।

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेव ने शनिवार (25 जनवरी 2025) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि लगभग 30,000 भरे हुए फॉर्म तिमारपुर इलाके के कबाड़ियों के पास से मिले हैं। इन फॉर्म्स में महिलाओं की आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक डिटेल्स और अन्य संवेदनशील जानकारी शामिल है। सचदेव के अनुसार, इन फॉर्म्स को तिमारपुर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा उम्मीदवार सूर्य प्रकाश खत्री को एक कबाड़ी ने सौंपा। उन्होंने यह भी दावा किया कि दिल्ली के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे फॉर्म्स बड़ी संख्या में मिल सकते हैं।

सचदेव ने कहा, “दिल्ली महिला सम्मान योजना के तहत फॉर्म भरने वाली महिलाओं की निजी जानकारियाँ खतरे में है। यह जानकारी बैंक धोखाधड़ी और अन्य साइबर अपराधों में इस्तेमाल हो सकती है। यह न सिर्फ गोपनीयता का उल्लंघन है, बल्कि महिलाओं के साथ धोखा भी है।”

भाजपा ने आरोप लगाया कि AAP ने जनता को झूठे वादों के जरिए भ्रमित किया और महिलाओं की संवेदनशील जानकारी को सुरक्षित रखने में फेल रही। सचदेव ने कहा कि जो फॉर्म प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए, वे असली थे और उनमें महिलाओं के पासपोर्ट साइज़ फोटो तक लगे हुए थे।

बता दें कि AAP ने 2024 में मुख्यमंत्री महिला सम्मान योजना के तहत महिलाओं को हर महीने ₹2100 देने का वादा किया था। इस योजना के तहत महिलाओं से फॉर्म भरवाने का अभियान बड़े स्तर पर चलाया गया था। पार्टी ने दावा किया था कि लगभग 11.5 लाख लोगों ने इस योजना का लाभ उठाने के लिए पंजीकरण कराया था। हालाँकि दिसंबर 2024 में ही दिल्ली सरकार के महिला एवँ बाल विकास विभाग ने साफ कर दिया था कि ऐसी कोई योजना अधिसूचित नहीं है।

‘अखबार में नाम छापकर करूँगा बदनाम’ : The Hindu के पूर्व पत्रकार महेश लांगा के खिलाफ प्रॉपर्टी डीलर ने कराई FIR बताया- डरा-धमकाकर 40 लाख रुपए वसूले

अंग्रेजी अखबार The Hindu के पत्रकार महेश लांगा के खिलाफ गुरुवार (23 जनवरी 2025) को अहमदाबाद के सैटेलाइट थाने में एक और एफआईआर दर्ज की गई। उस पर पहले से ही जीएसटी घोटाले, धोखाधड़ी और सरकारी दस्तावेजों के लीक से जुड़े कई मामले चल रहे हैं। यह शिकायत प्रॉपर्टी डीलर जनक ठाकोर ने दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने लांगा पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 308(2) के तहत ₹40 लाख की जबरन वसूली का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लांगा ने ठाकोर से कहा था कि उनका नाम The Hindu में छापने से उनके बिज़नेस को बड़ा फायदा होगा। जनवरी 2024 में लांगा ने ठाकोर से ₹20 लाख लिए और एक आर्टिकल में उसका नाम शामिल किया। इसके बाद उसने दोबारा ₹20 लाख माँगे और कुल ₹40 लाख वसूल किए।

ठाकोर का कहना है कि लांगा से उनकी मुलाकात डेढ़ साल पहले बोडकदेव स्थित एक कैफे में हुई थी। लांगा ने खुद को पत्रकार और जमीन के कारोबार में माहिर बताया। उन्होंने ठाकोर को भरोसा दिलाया कि वह जमीन से जुड़े मुश्किल मामले हल कर सकते हैं और उन्हें बड़ा मुनाफा दिला सकते हैं। लांगा ने वादा किया कि अगर ठाकोर का नाम अखबार में छपेगा तो वह एक सफल बिल्डर बन सकते हैं।

शिकायत की कॉपी (फोटो साभार: OPIndia Gujarati)

शिकायत के मुताबिक, जनवरी 2024 में लांगा ने GIFT City पर एक आर्टिकल में ठाकोर का नाम शामिल किया। इसके बाद लांगा ने ठाकोर पर और पैसे देने का दबाव बनाया और धमकी दी कि अगर पैसा नहीं मिला तो वह अपने राजनीतिक और प्रशासनिक संपर्कों का इस्तेमाल करके उसकी छवि खराब कर देंगे। इस दबाव में ठाकोर ने जुलाई 2024 में ₹20 लाख नकद और दिए।

द हिंदू में छापे आर्टिकल में महेश लांगा ने शामिल किया था जनक ठाकोर का नाम (फोटो साभार: The Hindu)

बता दें कि द हिंदू अखबार के पत्रकार महेश लांगा को 8 अक्टूबर 2025 को GST धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। यह मामला 13 कंपनियों और उनके मालिकों द्वारा फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के जरिए सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने से जुड़ा है।

पुलिस के अनुसार, 220 से अधिक बेनामी फर्मों का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी के लिए किया गया। लांगा पर IPC की धारा 420, 467, 468, 471, 474 और 120B के तहत केस दर्ज हैं। उस पर वसूली को लेकर भी केस था और अब नया केस दर्ज हुआ है।

54 साल बाद ढाका पहुँचा ISI चीफ, PAK से साठगाँठ देख भारत सतर्क: कहा- ‘सभी गतिविधियों पर हमारी नजर, कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे’

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के बांग्लादेश में गुप्त मिशन ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। आईएसआई के उच्चाधिकारियों के बांग्लादेश के दौरे बांग्लादेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडल के पाकिस्तान दौरे और पाक सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर से मुलाकात के ठीक बाद हुए हैं। भारत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है और आवश्यकता पड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हम देश और क्षेत्र में सभी गतिविधियों पर नजर रखते हैं, साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली सभी गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं और सरकार उचित कदम उठाएगी।

जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तानी एजेंसी ISI के चीफ असीम मलिक, आईएसआई महानिदेशक (एनलसिस) मेजर जनरल शाहिद आमिर अफसर और कई दूसरे वरिष्ठ अधिकारी कथित तौर पर इस समय बांग्लादेश का दौरा कर रहे हैं। सोमवार (21 जनवरी 2025) को आईएसआई के मेजर जनरल शाहिद अमीर अफसर समेत चार वरिष्ठ अधिकारी ढाका पहुँचे और दूसरे दिन मंगलवार (22 जनवरी 2025) को आईएसआई चीफ असीम मलिक भी बांग्लादेश पहुँचा। वो दुबई के रास्ते ढाका पहुँचा, जहाँ उसका स्वागत बांग्लादेश आर्मी के वरिष्ठ अधिकारी मुहम्मद फैजुर रहमान ने किया। मलिक का दौरान 54 साल बाद किसी आईएसआई चीफ का बांग्लादेश दौरा है।

इससे पहले, बांग्लादेशी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के रावलपिंडी का दौरा किया था, जहाँ बांग्लादेशी सैन्य अधिकारियों ने सेना, वायु सेना, नौसेना प्रमुखों से मुलाकात की थी। अब दोनों देशों के बीत संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, आईएसआई ने बांग्लादेश में उल्फा चीफ परेश बरुआ से भी मुलाकात की है, जो जेल में बंद हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उल्फा के कैंप एक बार फिर बांग्लादेश के कशालॉन्ग क्षेत्र में सक्रिय हो गए हैं। पाकिस्तानी एजेंसी भारत के पूर्वोत्तर में अस्थिरता फैलाने के लिए बांग्लादेश की जमीन का उपयोग कर रही है।

बता दें कि शेख हसीना के शासनकाल में आतंकवादी गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की गई थी। लेकिन मोहम्मद यूनुस सरकार ने उल्फा चीफ की मौत की सजा माफ कर दी और 14 साल की सजा में तब्दील कर दी। इससे उल्फा की गतिविधियाँ फिर तेज हो गई हैं।

भारत के विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह अपने पड़ोसी देशों की हर गतिविधि पर सतर्कता बनाए हुए है। बढ़ते पाक-बांग्लादेश सैन्य संबंधों पर भी भारत की नजर है और उचित समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएँगे।

अदालत से पहले मीडिया पर दस्तावेजों का पहुँचना स्वीकार्य नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट ने जताई चिंता, कहा- पत्रकार समझें जिम्मेदारी, इससे फैसले पर पड़ सकता है असर

दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिकाओं पर न्यायालय द्वारा विचार किए जाने से पहले ही संबंधित दस्तावेज, हलफनामे आदि मीडिया को जारी करने पर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की खंडपीठ ने इसको लेकर कहा कि इससे पक्षकारों के बीच पूर्वाग्रह पैदा हो सकता है और संबंधित अदालत द्वारा स्वतंत्र निर्णय लेने पर भी असर पड़ सकता है।

खंडपीठ ने कहा कि अदालतों को विचार करने का अवसर मिलने से पहले ही हलफनामों और दस्तावेजों को मीडिया में जारी करने की आदत स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने कहा कि नोटिस को सार्वजनिक करने से पहले आरोपों की पुष्टि करना पत्रकार का कर्तव्य था। इसके बाद कोर्ट ने भविष्य में सावधानी बरतने और पत्रकारिता की जिम्मेदारी समझने की हिदायत देते हुए बरी कर दिया।

दरअसल, कोर्ट ब्रेन लॉजिस्टिक्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी द्वारा हीरो मोटोकॉर्प लिमिटेड को जारी किए गए बिना तारीख और हस्ताक्षर वाले कानूनी नोटिस से संबंधित मामले की सुनवाई कर रहा था। इस नोटिस को एक पत्रकार ने पहले ही सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था। कोर्ट ने नोटिस के मामले में आपराधिक अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू की है।

कोर्ट ने पाया कि कानूनी नोटिस में हाई कोर्ट की रजिस्ट्री की कार्यप्रणाली, फोरम शॉपिंग के आरोपों और न्यायालय के समक्ष मामलों का उल्लेख करने में गड़बड़ी के बारे में झूठी, निंदनीय और अपमानजनक टिप्पणियाँ की गई थीं। इसे ब्रेन लॉजिस्टिक्स के निदेशक रूप दर्शन पांडे ने हीरो मोटोकॉर्प की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने के लिए जानबूझकर इस कानूनी नोटिस को मीडिया में लीक किया था।

पांडे ने दो वकीलों के नाम बताए, जिनके परामर्श पर कानूनी नोटिस में आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। इन वकीलों ने कोर्ट से बिना शर्त माफी माँगी और स्वीकार किया कि उन्होंने कानूनी नोटिस में गलत आरोप लगाए थे। इस पर कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं ने न्यायालय और मुवक्किल के प्रति बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के निर्देशों का पालन नहीं किया।

इसके बाद न्यायालय ने दिल्ली बार काउंसिल को दोनों अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया। वहीं, कोर्ट ने ब्रेन लॉजिस्टिक्स के निदेशक रूप दर्शन पांडे को आदतन अपराधी बताया और कहा कि वह माफी माँगकर नहीं बच सकता। इसके बाद कोर्ट ने उसे 2 सप्ताह के साधारण कारावास की सजा सुनाई।

कोर्ट ने कहा, “पांडे को न्यायालयों, न्यायाधीशों और वकीलों के विरुद्ध आरोप लगाने की आदत है। इसलिए यह अपमानजनक आचरण अनजाने में हुई गलती या गलत सलाह नहीं है। यह जानबूझकर और गुप्त उद्देश्यों से किया गया है। पांडे को 2,000 रुपए के जुर्माने के साथ दो सप्ताह के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। जुर्माना नहीं देने पर 7 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा।।”

जिसने रची 26/11 की साजिश, दोस्त भेजकर कराई मुंबई की रेकी… वो आतंकी तहव्वुर राणा होगा अब भारत की गिरफ्त में, अमेरिकी कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी

साल 2008 में हुए मुंबई हमले के दोषी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने दे दी है। भारत में वांछित 63 वर्षीय तहव्वुर राणा को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है। तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई व्यवसायी है। भारत प्रत्यर्पण संधि के आधार पर तहव्वुर को भारत प्रत्यर्पित करने की माँग लंबे समय से करता आ रहा था।

भारत ने 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई आतंकी हमले में तहव्वुर राणा की अहम भूमिका को लेकर भारत ने अमेरिका के साथ जरूरी दस्तावेज साझा किए थे। इसके बाद प्रत्यर्पण का विरोध करते हुए तहव्वुर ने निचली अदालत में याचिका दी थी। निचली अदालत ने प्रत्यर्पण को मंजूरी तो तहव्वुर ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। अब सुप्रीम कोर्ट ने उसकी याचिका खारिज कर दी।

बता दें कि मुंबई हमले की जाँच करने वाली एजेंसी ने 405 पन्नों की चार्जशीट में तहव्वुर राणा को आरोपित बनाया था। चार्जशीट के अनुसार, तहव्वुर पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI और इस्लामी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सदस्य है। वह हमले का मास्टरमाइंड एवं मुख्य आरोपित डेविड कोलमैन हेडली उर्फ दाऊद सईद गिलानी की मदद कर रहा था।

चार्जशीट में कहा गया है कि तहव्वुर और हेडली ने मुंबई हमले का ब्लूप्रिंट तैयार किया था। तहव्वुर ने आतंकियों को बताया था कि मुंबई में हमलावर आतंकियों को कहाँ ठहरना है और उन्हें कहाँ-कहाँ हमले करने हैं। तहव्वुर ने उसकी मदद की थी। अमेरिका में सुनवाई के दौरान तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे पता था कि हेडली लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम कर रहा है।

तहव्वुर ने यह भी बताया था कि उसे जानकारी थी कि हेडली किससे मिल रहा है और उनसे क्या बात कर रहा है। उसे हमले की योजना और टारगेट के बारे में भी बता था। तहव्वुर राणा अपने बचपन के दोस्त और आतंकियों के मददगार डेविड कोलमैन हेडली की आर्थिक सहित हर तरह से मदद करके इस्लामी आतंकियों का सपोर्ट कर रहा था। यह बात उसने अमेरिकी कोर्ट में मानी है।

हेडली अमेरिकी नागरिक है। उसकी माँ अमेरिका और उसके अब्बू पाकिस्तानी मूल के थे। अमेरिकी अधिकारियों ने अक्टूबर 2009 में हेडली को अमेरिका के शिकागो से गिरफ्तार किया था। अमेरिकी कोर्ट ने 24 जनवरी 2013 को मुंबई में आतंकी हमलों में शामिल होने का दोषी मानते हुए हेडली को 35 साल जेल की सजा सुनाई थी। भारत हेडली के प्रत्यर्पण की भी लगातार माँग कर रहा है।

तहव्वुर और हेडली बचपन के दोस्त हैं। हेडली भी शुरुआती 5 साल की पढ़ाई पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में की है। इसके बाद वह परिवार के साथ अमेरिका चला गया। तहव्वुर राणा भी इसी स्कूल में पढ़ा है। बाद में वह पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर के रूप में काम करने लगा। फिर वह कनाडा चला गया। कुछ साल के बाद उसे कनाडा की नागरिकता मिल गई।

तहव्वुर ने शिकागो में ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम से एक कंसल्टेंसी फर्म की शुरुआत की। इस फर्म की एक शाखा मुंबई में भी थी। इसी फर्म के सहारे हेडली भारत आया था और हमले करने वाली जगहों की रेकी की थी। तहव्वुर राणा फिलहाल अमेरिका के लॉस एंजिल्स के मेट्रोपोलिटन डिटेंशन सेंटर में हिरासत में है। उसे एफबीआई ने साल 2009 में शिकागो से दबोचा था। 

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को मुंबई में लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने हमला किया था। आतंकियों ने मुंबई के लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, होटल ताज पैलेस, होटल ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज ने निशाना बनाया था। वे अपने साथ भारी मारा मात्रा में IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47 लेकर आए थे।

इस हमले में 166 लोग मारे गए थे और 300 लोग मारे गए थे। मृतकों में अमेरिकी सहित कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इन आतंकियों के खिलाफ NSG, मरीन कमांडो फोर्स, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF, मुंबई फायर ब्रिगेड और रेलवे पुलिस फोर्स ने ऑपरेशन चलाया था। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब को जिंदा गिरफ्तार किया था। साल 2012 में उसे फाँसी दी दे गई थी।


‘वैवाहिक क्रूरता’ के पुरुष भी होते हैं शिकार, आरोपित महिला से क्यों बरतें नरमी: दिल्ली HC ने खारिज की उस महिला की बेल याचिका, जिसने सोते में पति पर डाला था गर्म पानी और मिर्च पाऊडर

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति-पत्नी के संबंधों में क्रूरता को लेकर अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि यह सोचना गलत है कि केवल महिलाएँ ही वैवाहिक क्रूरता की शिकार होती हैं। पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं और उन्हें भी कानून के तहत समान सुरक्षा का अधिकार है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने ये टिप्पणी उस महिला की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दी, जिस पर अपने पति पर उबलते पानी और मिर्च पाउडर डालकर जलाने का आरोप है। घटना 1 जनवरी की है, जब पीड़ित पति सो रहा था। आरोपित महिला ने न सिर्फ उसे जलाने की कोशिश की, बल्कि कमरे को बाहर से बंद कर फरार हो गई। उसने पति का मोबाइल फोन भी साथ ले लिया, ताकि वह किसी से मदद न माँग सके। कमरे में उनकी तीन महीने की बच्ची भी मौजूद थी।

महिला ने कोर्ट में तर्क दिया कि वह एक महिला है, इसलिए नरम रुख अपनाया जाए। कोर्ट ने इसे लैंगिक पूर्वाग्रह मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यदि आरोपित महिला की जगह पुरुष होता, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाती। ऐसे में केवल महिला होने के आधार पर नरमी बरतना न्याय के साथ अन्याय होगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पुरुष जो अपनी पत्नियों के हाथों हिंसा का शिकार होते हैं, अक्सर सामाजिक कलंक और लोगों के अविश्वास का सामना करते हैं। ऐसे मामलों में जेंडर आधारित पक्षपात न्याय के बुनियादी सिद्धांतों को कमजोर करता है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने आरोपित महिला के तीन महीने के बच्चे की देखभाल करने के तर्क को भी खारिज कर दिया। कोर्ट ने पाया कि महिला ने बच्चे को भी खतरे में डाल दिया था। जाँच में सहयोग न करने और पीड़ित का फोन बरामद होने की जरूरत को देखते हुए हाई कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया।

बांग्लादेश में हिंदू छात्र की सरेआम निर्मम हत्या, दुकान पर चाय पीते समय 12 हमलावरों ने गोलियों से भूना: बुलेट सिर चीर कर हुई पार, पुलिस बोली- नहीं मिली औपचारिक शिकायत

बांग्लादेश में प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली आवामी लीग की सरकार के तख्ता पलट के बाद हिंदुओं के खिलाफ हिंसा अपने चरम पर है। हर रोज किसी ना किसी हिंदू की हत्या, बलात्कार और मंदिरों पर हमले किए जा रहे हैं। एक और हिंदू छात्र की हत्या कर दी गई है। वहीं, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली इस्लामी मुल्क की अंतरिम सरकार अल्पसंख्यकों के खिलाफ धार्मिक हिंसा को नकार कर रही है।

स्थानीय मीडिया के अनुसार, मृतक छात्र की पहचान 26 वर्षीय अर्नब कुमार सरकार के तौर पर हुई है। अर्नब खुलना विश्वविद्यालय में MBA के छात्र थे। अर्नब शहर के सोनाडांगा इलाके में स्थित अबू अहमद रोड के रहने वाले नीतीश चंद्र सरकार का बेटा हैं। वे बोसपुरा कॉलेजियट स्कूल के पास रहते थे। कहा जा रहा है कि एक चाय की दुकान पर चाय पीने के दौरान उनके सिर में गोली मारी गई।

सोनाडांगा पुलिस स्टेशन के इंचार्ज शफीकुल इस्लाम का कहना है कि शुक्रवार (23 जनवरी 2025) की रात करीब 9 बजे के तेंतुलतला चौराहे पर स्थित एक चाय की दुकान पर अर्नब चाय पी रहे थे। उसी दौरान मोटरसाइकिल से कुछ हमलावर आए और उन्हें गोली मार दी। गोली उनके सिर में लगी और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए।

इस घटना के बाद स्थानीय लोग अर्नब को सिटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गए, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं, खुलना सिटी पुलिस (दक्षिणी डिवीजन) के डिप्टी कमिश्नर मोहम्मद मोनिरुज्जमां ने इसे आतंकी हमला बताया। उन्होंने कहा, “आतंकवादियों ने एक छात्र की गोली मारकर हत्या कर दी। उसकी हत्या के पीछे का मकसद जानने के लिए जाँच चल रही है।”

खुलना मेट्रोपॉलिटन पुलिस के एडीसी (मीडिया) मोहम्मद अहसान हबीब ने बताया कि हत्या करने वालों की पहचान की जा रही है और उन्हें पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई मोटरसाइकिलों पर सवार होकर 10-12 हमलावरों का एक समूह आया और घटना को अंजाम दिया।

इससे पहले 5 जनवरी को बांग्लादेश के फरीदपुर में अज्ञात हमलावरों ने एक हिन्दू पत्रकार और उसके परिवार को निशाना बनाया। इसमें उनके घर की महिलाओं को गंभीर चोट आईं। घटना मधुखली गाँव की थी। यहाँ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी श्यामलेंदु बोस अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनका बेटा सौगात बोस दैनिक अजमेर पत्रिका में पत्रकार है। 

इसी तरह चटगाँव के पटेंगा काठगढ़ में प्रांत तालुकदार नाम के एक हिंदू युवक को मुस्लिम भीड़ ने पहले अगवा कर लिया और उसके बाद उसे ले जाकर खूब प्रताड़ित किया। इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रांत पर पहले ईशनिंदा का आरोप लगाया था। ऐसी ही घटना दिसंबर 2024 में भी हुई थी, जब मुस्लिम भीड़ ने आकाश दास नाम के युवक पर ईशनिंदा का आरोप लगाकर 130 हिंदू घरों और 20 मंदिरों में आगजनी की थी।

दिसंबर के अंतिम सप्ताह में नरैल में 52 साल की हिंदू महिला बसना मलिक की रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। बसना के साथ मुस्लिम कट्टरपंथियों ने गैंग रेप किया था। इससे तनाव में आई बसना मलिक ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। इसके बाद पुलिस ने इस मामले में लीपापोती शुरू कर दी थी और मृतक का ही चरित्रहनन करने लगी थी। बांग्लादेश में हिंदुओं के उत्पीड़न की ऐसी सैकड़ों घटनाएँ हैं।

बच्चियों तक का अपहरण और धर्मांतरण के बाद निकाह, नहीं बची उम्मीद: पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने माना- मुल्क से जान बचा भाग रहे हिंदू

पाकिस्तान में हिन्दुओं का उत्पीड़न लगातार जारी है। रोज बलात्कार,धर्म परिवर्तन, बलात्कार, भेदभाव, मंदिरों को अपवित्र करना और हिंसा झेलने वाले हिन्दू किसी भी पाकिस्तान से तरह भारत आना चाहते हैं। हिन्दुओं की एक बड़ी जनसँख्या 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद से अपनी जान बचा कर भारत आ भी चुकी है।

पाकिस्तान के अधिकांश इलाकों में हिन्दुओं की जनसँख्या नगण्य हो चुकी है। हालाँकि, पाकिस्तान के सिंध में अब भी कुछ लाख हिन्दू बचे हैं। लेकिन यहाँ भी बीते कुछ सालों से हालात ऐसे हैं कि हिन्दू अपनी जमीन-घर और व्यापार छोड़ कर भारत में आ रहे हैं।

पाकिस्तान से हिन्दुओं का पलायन कितना तेज है, इसी को साबित करती हुई एक रिपोर्ट अब सामने आई है। पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग (HRCP) ने 23 जनवरी, 2025 को यह रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में सिंध के हिन्दुओं के सामने आने वाले समस्याएँ बताई गई हैं, जिसके चलते वह भारत भागने को मजबूर हैं।

नया नहीं हिन्दुओं का पलायन

HRCP की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान या सिंध से हिन्दुओं का पलायन कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह दशकों से चला आ रहा है। रिपोर्ट बताती है कि 1992 के बाद से सिंध में हिन्दू विरोधी रवैये में तेजी आई है और तबसे यह समुदाय तेजी से भारत को आ रहा है।

सिंध के हिन्दू धार्मिक उत्पीड़न के साथ ही कानून व्यवस्था के चलते भी भागने को मजबूर हैं। रिपोर्ट बताती है कि 1986 में पाकिस्तान की सुक्कर जेल से वह 34 अपराधी भाग गए थे जो हिन्दू कारोबारियों का अपहरण कर उनसे वसूली करते थे। इसके बाद हिन्दुओं में डर बैठ गया और वह भारत जाने को ही एक सुरक्षित विकल्प के रूप में देखने लगे।

इसी का एक उदाहरण है कि यहाँ के कशमोर इलाके से 300 हिन्दू परिवार अब तक पलायन कर चुके हैं। इन परिवारों के पलायन के पीछे भी अपराधियों का डर और उनके ख़ास करके निशाना बनाया जाना ही कारण रहा है। कई परिवारों को सिंध के कुख्यात ‘कच्चे के डाकू’ भी लगातार परेशान करते रहे हैं।

HRCP रिपोर्ट के अनुसार, “काशमोर जिले से 300 से ज़्यादा हिंदू अराजकता और डाकुओं द्वारा अपहरण के डर से भारत चले गए हैं। ऐसी रिपोर्टों के बावजूद, सरकार इन पर ध्यान नहीं देती। और सही एक्शन लेने बजाय इसे पाकिस्तान के खिलाफ़ एक ‘साजिश’ के रूप में पेश करती है।”

ऑपइंडिया इस विषय में पहले भी बता चुका है कि पाकिस्तान में 1990 के बाद से, लगभग 95% हिंदू मंदिरों को नष्ट कर दिया गया है, इस्लामवादियों द्वारा उन पर कब्जा कर लिया गया है या पाकिस्तानी सरकारों द्वारा उन्हें मस्जिदों, मदरसों, मुर्गी की दुकानों, पशु फार्मों और कभी-कभी शौचालयों के रूप में पुनः उपयोग में लाया जाता है।

असुरक्षा बड़ा कारण

HRCP रिपोर्ट में वह कारण भी बताए गए हैं, जिनके चलते सिंध से हिन्दू पलायन कर रहे हैं। रिपोर्ट बताती है कि हिंदुओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा की घटनाएँ भले ही कम हुई हों लेकिन अपहरण, फिरौती और वसूली अब भी जारी है। इसके चलते हिन्दू सिंध में हिंदू लगातार डर और असुरक्षा में रहते हैं।

HRCP ने बताया कि सिंध में हिंदुओं का अपहरण और जबरन वसूली बड़े पैमाने पर होती है, यह सबसे अधिक सिंध के उत्तरी इलाकों में हो रही है। हिंदू समुदाय, विशेष रूप से तथाकथित “उच्च जाति” हिंदुओं को उनकी धार्मिक पहचान के साथ-साथ उनकी संपत्ति के लिए भी निशाना बनाया जाता है।

रिपोर्ट बताती है कि घोटकी, जैकबाबाद और काश्मोर जैसे जिलों में हिन्दुओं की ऊँची जातियों का कारोबार, ट्रांसपोर्ट समेत बाकी क्षेत्रों में दबदबा है। इसी के चलते वह इनके निशाने पर आते हैं। उनकी सम्पत्ति छीनने की कोशिश होती है।

यहाँ तक कि सिंध के इन इलाकों के कबीलाई सरगनाओं को हिन्दुओं के व्यापार में हिस्सेदार बनाने का दबाव डाला जाता है। यह मुनाफे में लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा लेते हैं और डाकुओं को रोकने के लिए हिंदू दुकानों और व्यवसायों के बोर्ड और बैनर पर उनके नाम लिखे जाते हैं।

हिन्दू लड़कियाँ भी बन रही निशाना

HRCP रिपोर्ट बताती है कि सिंध में हिंदू महिलाओं को उत्पीड़न, अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन की लगातार धमकियों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण हिंदू परिवार अपनी बेटियों को पढ़ाई छुड़वा कर उन्हें दूसरे शहर भेजते है। यहाँ तक कि उन्हें भारत भी भेज दिया जाता है।

HRCP की रिपोर्ट में बताई गई ऐसी ही एक घटना के विषय में एक सामाजिक कार्यकर्ता ने बताया, “एक शादी में, एक कबीलाई सरदार के बेटे ने एक हिंदू दुल्हन को अनुचित तरीके से छुआ, जिससे उसे अपमानित होना पड़ा। इसका बदला ना ले पाने के चलते परिवार तीन महीने के भीतर चुपचाप भारत चला गया।”

HRCP के अनुसार, सिंध में जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह एक बड़ा मुद्दा है, इसका केंद्र घोटकी है। HRCP ने बताया कि सिंध का एक मौलाना मियां अब्दुल हक उर्फ ​​मियां मिट्ठू लगातार हिन्दू लड़कियों को निशाना बनवाता है।

रिपोर्ट बताती है, “मियां मिठू अपने प्रभाव का लाभ उठाकर नाबालिग हिंदू लड़कियों का जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह करवाता है। घोटकी के दहारकी में स्थित उसकी दरगाह भरचुंडी शरीफ में यह काम धड़ल्ले से हो रहा है…, यहाँ कथित तौर पर इस तरह के अपहरण और धर्मांतरण होते हैं।”

HRCP रिपोर्ट बताती है कि मियां मिठू इन सभी निकाह को लड़कियों की मर्जी बताता है। जबकि असल में नाबालिग लड़कियों पर दबाव डाल कर ही उनके निकाह करवा दिए जाते हैं। यहाँ तक कि हिन्दू लड़कियों को सिंध से पंजाब ले जाया जाता है, ताकि उनका 18 साल से कम ही निकाह करवाया जाए।

मंदिरों पर भी हो रहा हमला

सिंध लगातार हिंदू विरोधी हिंसा का केंद्र रहा है। जून 2024 में, इस्लामी कट्टरपंथियों ने कच्ची कॉलोनी में भगवान राम के जीर्ण-शीर्ण मंदिर में रात को हमला किया था। उन्होंने हिंदू मंदिर को अपवित्र किया और मंदिर के दरवाज़े बंद होने के बावजूद हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ और गीता लूट कर ले गए।

उन्होंने ओम सहित पूजनीय हिंदू धार्मिक प्रतीकों को स्प्रे पेंट से नुकसान पहुँचाया। इससे पहले, इस्लामी कट्टरपंथियों ने नवाबशाह जिले में सोची पाड़ा, टांडो आदम में एक प्राचीन हिंदू मंदिर को लूटा और अपवित्र किया। ऑपइंडिया ने न केवल सिंध बल्कि पाकिस्तान के अन्य इलाकों से सामने आई ऐसी ही घटनाएँ लगातार बताई हैं।

HRCP की रिपोर्ट में यह तो माना गया है कि हिन्दू मंदिर लगातार निशाना बनाए जा रहे हैं लेकिन इस बार से इनकार किया गया है कि यह सब जानबूझ कर हो रहा है। इसके अलावा हिन्दुओं पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाकर भी उन्हें निशाने पर लिया जाता है।

रिपोर्ट में आगे बताया गया कि ईशनिंदा के आरोप, अक्सर झूठे होते हैं और हिन्दुओं पर आपसी दुश्मनी के चलते लगाए जाते हैं। हालाँकि, आरोप लगाने के बाद हिन्दुओं की कोई नहीं सुनता और उन्हें या तो भागना पड़ता है या फिर वह हिंसा झेलते हैं। इसके चलते भी बड़ी संख्या में हिन्दू भारत की तरफ आए हैं।

HRCP रिपोर्ट कहती है ,”ईशनिंदा के आरोपों के बाद, कुछ हिंदू सिंध को पूरी तरह से छोड़ देते हैं। घोटकी में एक हिंदू पंचायत नेता ने बताया कि ईशनिंदा का आरोप लगने के बाद के दो हिन्दू भारत भाग गए थे। शुरू में माना गया था कि वे कराची गए हैं, लेकिन बाद में पता चला कि वे भारत के इंदौर में बस गए हैं।”

CAA बना आशा की किरण

मजबूरी में पलायन करने वाले पाकिस्तानी हिन्दुओं के लिए भारत CAA नागरिकता क़ानून आशा की किरण जैसा है। CAA के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों से आने वाले गैर मुस्लिमों को भारत नागरिकता देता है। इसका फायदा वही ले सकते हैं, जो 2014 से पहले भारत आ गए थे। हालाँकि, इसके चलते बने सकारात्मक रवैये से भी हिन्दू भारत आ रहे हैं।

इस बात को HRCP ने भी माना है। HRCP की रिपोर्ट कहती है, “CAA ने सिंध के हिन्दुओं को खास तौर पर प्रभावित किया है। मध्य प्रदेश में, इन शरणार्थियों की एक बड़ी संख्या को नागरिकता दी गई है। NDTV ने 2021 में जैकबाबाद के एक परिवार के बारे में रिपोर्ट की थी, जिसे इंदौर में नागरिकता प्रमाण पत्र मिला था। पिछले 5 सालों में सिंध के लगभग 2,000 हिंदू शरणार्थियों ने भारतीय नागरिकता प्राप्त पाई है और 1200 से अधिक इस मामले में आवेदन कर चुके हैं।