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194 लोगों ने की जिसकी ‘मॉब लिंचिंग’ वह 3 महीने बाद ज़िंदा लौटा: कठघरे में मीडिया और पुलिस

जिसकी मॉब लिंचिंग को लेकर मीडिया ने नकारात्मकता फैलाई, वो ज़िंदा वापस लौट आया। घटना पटना स्थित नौबतपुर के महमदपुर गाँव की है। यहाँ एक ऐसा व्यक्ति सकुशल वापस लौट आया, जिसे पुलिस एवं प्रशासन ने मृत घोषित कर दिया था। इस व्यक्ति का नाम कृष्णा है। अगस्त में ख़बर आई थी कि बच्चा चोर समझ कर उसे भीड़ ने पीट पीटकर मार डाला। इसके बाद गिरोह विशेष का मीडिया हरकत में आ गया था। स्क्रॉल ने एक लम्बी-चौड़ी ग्राउंड रिपोर्ट कर के बताया था कि किस तरह से देश में मॉब लिंचिंग की घटनाएँ बढ़ गई हैं और ये चिंता का विषय है।

उस समय ख़बर आई थी कि मृतक की पत्नी ने लाश के हाथ में गोदना देख कर अपने पति की पहचान की थी। इसके अलावा एक टूटे हुए दाँत को देख कर शव की पहचान हुई थी, क्योंकि चेहरा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। अब जब कृष्णा लौट आया है, उसके हाथ में कोई गोदना नहीं है। इससे पुलिस की कार्यवाही पर भी सवाल उठ रहे हैं। जब मॉब लिंचिंग की ख़बर आई थी, तब परिजनों ने ख़ुद पुलिस से संपर्क किया था। शव क्षत-विक्षत हो चुका था और उससे दुर्गन्ध आ रही थी। अब पुलिस इस बात को लेकर माथापच्ची कर रही है कि ‘मृतक’ लौट आया है तो मरने वाला कौन था?

स्क्रॉल ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि कारवाँ-ए-मोहब्बत नामक संगठन ने ‘कृष्णा की मॉब लिंचिंग’ की ख़बर के बाद उसके परिवार के लिए फंड्स जुटाए थे। लोगों से चंदा लेकर रुपए इकट्ठे किए गए थे। अनवारुल हक़ और इब्राहम नामक एक्टिविस्ट्स इस मामले में काफ़ी सक्रिय रहे थे। इस पूरे मामले की सच्चाई तब उजागर हुई जब कृष्णा को उसके एक रिश्तेदार ने कन्याकुमारी में देखा। कृष्णा के श्राद्ध के बाद कन्याकुमारी गया यह रिश्तेदार उसे देख हतप्रभ रह गया।

रिश्तेदारों का कहना है कि कृष्णा 3-4 बार कन्याकुमारी जाकर आ चुका था। वह वहाँ काम करता था और कभी-कभी दूसरा काम खोजने जाता था। वह अगस्त महीने में घर लौटा और फिर बिना किसी को बताए वापस कन्याकुमारी चला गया। परिजनों ने उसके लापता होने की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने एक शव परिवार को सौंप कर दावा किया कि यही कृष्णा है। इसके बाद मीडिया को मसाला मिला और मॉब लिंचिंग की बात फैलाई गई। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर आक्रोश जताया गया, न्यूज़ पोर्टल्स में ओपिनियन लिखे गए और इसे ‘मॉब लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं’ के क्रम में रख दिया गया।

अब कृष्णा के वापस लौट आने से मीडिया और बिहार पुलिस, दोनों की ही पोल खुलती नज़र आ रही है। वहीं परिवार ख़ुश है। जिस रुदी देवी के माथे का सिन्दूर पोछ दिया गया था, अब वो फिर से सिन्दूर लगा रही हैं। एक और आश्चर्यजनक बात ये है कि 10 अगस्त को इस मामले में जो केस दर्ज किया गया था, उसमें 44 नामजद और 150 अज्ञात आरोपित थे। तो क्या 194 लोगों ने जिसे मिल कर मार डाला, उसके ज़िंदा लौट आने के बाद पुलिस और मीडिया पर सवाल खड़े नहीं होते?

वहीं, अब पुलिस को इस बात की टेंशन है कि जिस व्यक्ति की पहचान कृष्णा के रूप में हुई थी, उसे जलाए जाने के बाद उससे जुड़े सभी साक्ष्य भी चले गए हैं। ऐसे में उसकी पहचान कैसे हो पाएगी? वो कौन था? कैसे मरा? इन सभी सवालों के जवाब आने बाकी हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इस रिपोर्ट में क्या कृष्णा की शारीरिक बनावट और लाश के डील डॉल में कोई अंतर दिखा भी या नहीं? या फिर सिर्फ़ खानापूर्ति की गई, जिससे मीडिया को एक बड़ा मसाला मिल गया?

दिल्ली में BJP के साथ है मुकाबला, कॉन्ग्रेस का तो कोई नहीं करता जिक्र: AAP नेता

आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेता संजय सिंह का कहना है कि अगले साल की शुरुआत में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में सीधा मुकाबला आम आदमी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच होगा। उन्होंने कहा कि इन चुनावों में तो कॉन्ग्रेस प्रतिस्पर्धा में ही नहीं है।

उन्होंने उन अटकलों को दरकिनार कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस हरियाणा की तरह दिल्ली विधानसभा चुनाव में छुपा रुस्तम साबित हो सकती है और कड़ा मुकाबला दे सकती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में स्थिति पूरी तरह से अलग है। AAP के सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि दिल्ली में कोई कॉन्ग्रेस का जिक्र भी नहीं करता है और उसे दिल्ली में होने वाले चुनावों में प्रतिद्वंद्वी भी नहीं समझा जा सकता।

AAP नेता ने PTI को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “दिल्ली में लोगों ने हमारा काम देखा है और वे इससे खुश हैं और वे इसके आधार पर ही मतदान करेंगे।” संजय सिंह ने विधानसभा चुनाव के लिए कॉन्ग्रेस के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने की संभावनाओं को भी नकार दिया। बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले AAP और कॉन्ग्रेस चुनाव पूर्व गठबंधन बनाने के लिए बातचीत कर रहे थे। केजरीवाल तो गिरगिराने तक की सीमा पार कर कॉन्ग्रेस से जुड़ने को तैयार थे लेकिन सीट बँटवारे को लेकर सहमति न बनने पर गठबंधन नहीं हो पाया था।

वहीं आगामी चुनाव को लेकर AAP के एजेंडे के बारे में पूछे जाने पर संजय सिंह ने कहा कि पिछले 5 साल में AAP सरकार अपनी योजनाओं के जरिए समाज के हर वर्ग तक पहुँची है। संजय सिंह ने विभिन्न वर्गों के लिए किए गए कामों में बच्चों एवं युवाओं के कल्याण के लिए शिक्षा, बुजुर्गों के लिए तीर्थ यात्रा, बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा या उनकी सुरक्षा के लिए CCTV लगाने को गिनवाया। 

उन्होंने कहा, “यह दर्शाता है कि हम सभी को आगे ले जाने पर विचार करते है। यही वे एजेंडे हैं, जिन्हें सरकार सत्ता में आने के बाद आगे लेकर जाएगी।” यह पूछे जाने पर कि क्या दिल्ली में अनधिकृत कॉलोनियों के नियमन संबंधी केंद्र सरकार की हालिया घोषणा बीजेपी के लिए पासा पलट सकती है। सिंह ने कहा कि यह उनका एक और ‘जुमला’ है। उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी इस कदम के लिए गंभीर है तो वह इसके लिए अध्यादेश ला सकती थी।

गौरतलब है कि केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि केंद्र राजधानी में अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को राहत देने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र में एक विधेयक लाएगा। इस फैसले से 175 वर्ग किलोमीटर में फैली अनधिकृत कॉलोनियों में कम आय वर्ग के लोगों की 1,797 आबादी प्रभावित होगी।

अवैध हैं रामलला, शरीयत के हिसाब से कहीं और मस्जिद नहीं कबूल: मुस्लिम पक्ष फिर जाएगा सुप्रीम कोर्ट

अयोध्या राम मंदिर मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने 9 नवंबर को ऐति​हासिक फैसला सुनाते हुए राम जन्मभूमि हिन्दुओं को दिए जाने और मंदिर निर्माण के लिए सरकार को ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया था। साथ ही मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिमों को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ ज़मीन दिए जाने का आदेश भी दिया था। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 5 एकड़ ज़मीन लेने से इनकार कर दिया है और कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला त्रुटिपूर्ण है। बोर्ड के वकील ज़फ़रयाब जिलानी ने ये जानकारी दी।

रविवार (नवंबर 17, 2019) को बोर्ड की लम्बी बैठक हुई, जिसमें पुनर्विचार याचिका दायर करने का फ़ैसला लिया गया। पहले ये बैठक नदवा इस्लामिक सेंटर में होनी थी, लेकिन बाद में मुमताज पीजी कॉलेज को बैठक स्थल के रूप में प्रयोग किया गया। नियमानुसार सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फ़ैसले के 30 दिनों के भीतर ये याचिका दायर करनी होती है। जिलानी ने कहा कि लखनऊ प्रशासन ने नदवा सेंटर पर दबाव बनाकर वहाँ बैठक नहीं होने दी। एक तरह से जिलानी ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोप लगाया। लखनऊ प्रशासन के ख़िलाफ़ विरोध दर्ज कराते हुए जिलानी ने कहा कि उसकी वजह से बैठक स्थल में बदलाव करना पड़ा।

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फ़ैसले को त्रुटिपूर्ण करार दिया। बोर्ड की तरफ से बयान देते हुए कासिम रसूल इलियास ने कहा कि बाबरी मस्जिद की ज़मीन न्यायहित में मुस्लिम पक्ष को दी जानी चाहिए, क्योंकि कही अन्यत्र मस्जिद को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बैठक में मुस्लिम पक्ष के 45 सदस्य शामिल हुए। सभी ने एक सुर में कहा कि वो किसी अन्य जगह पर मस्जिद लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट नहीं गए थे बल्कि विवादित स्थल रहे ज़मीन पर ही मस्जिद की माँग लेकर गए थे।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका को लेकर जारी किया बयान

बोर्ड ने शरीयत क़ानून का जिक्र करते हुए कहा कि इस्लमिक व्यवस्था में एक बार जहाँ मस्जिद बन गई, वहाँ मस्जिद ही रहती है। बोर्ड ने यह भी तय किया है कि वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ही इस मामले की पैरवी करेंगे। अगर समयसीमा की बात करें तो बोर्ड को 9 दिसंबर से पहले पुनर्विचार याचिका दायर करनी होगी। वहीं इस मामले के अन्य पक्षकार इक़बाल अंसारी ने स्पष्ट कर दिया है कि मुस्लिम पक्ष के दूसरे लोगों द्वारा दायर की जाने वाली समीक्षा याचिकाओं से उनका कोई वास्ता नहीं है।

बोर्ड ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाते समय वक़्फ़ एक्ट की कुछ धाराओं पर विचार नहीं किया। बोर्ड ने कहा कि जब सन 1857 से 1949 तक वहाँ नमाज पढ़े जाने की बात सुप्रीम कोर्ट ने भी मानी है, फिर ये ज़मीन हिन्दुओं को क्यों दे दी गई? बोर्ड ने रामलला की मूर्ति को अवैधानिक बताया और कहा कि सिर्फ़ वैधानिक रूप से रखी गई मूर्ति को ही ‘ज्यूरिस्टिक पर्सन’ माना जा सकता है। बोर्ड ने दावा किया कि इसकी अनुमति हिन्दू धर्मशास्त्र भी नहीं देता है।

5 साल की बच्ची का बेहोश होने तक रेप किया, जब मर गई तो फेंक दिया: मोहम्मद रफी गिरफ्तार

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले की पुलिस ने शनिवार (नवंबर 16, 2019) को 5 वर्षीय एक बच्ची के साथ यौन शोषण और उसकी हत्या के मामले में एक 25 वर्षीय लॉरी क्लीनर को गिरफ्तार किया। आरोपित की पहचान पाटन मोहम्मद रफी के रूप में की गई है। मृतक बच्ची के माता-पिता द्वारा दर्ज की गई शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 302 के तहत हत्या का मामला दर्ज किया और जाँच शुरू किया।

बता दें कि पाँच साल की मृतक बच्ची 7 नवंबर अपने माता-पिता के साथ अंगल्लू गाँव के एक निजी समारोह हॉल में एक शादी में भाग लेने गई थी। जहाँ रहस्यमय परिस्थितियों में वो लापता हो गई और अगले दिन 8 नवंबर को सुबह समारोह हॉल के पीछे मृत पाई गई थी। पुलिस ने मामले को सुलझाने के लिए सीसीटीवी फुटेज का सहारा लिया। फुटेज में कथित तौर पर आरोपित पाटन मोहम्मद रफी को बच्ची के साथ खेलते और फोटो क्लिक करते हुए देखा गया। जिसके बाद पुलिस ने संदिग्ध आरोपित का सुराग प्राप्त करने के लिए सोशल मीडिया पर उसके स्केच को फैला दिया।

जिला एसपी सेंथिल कुमार ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, “सीसीटीवी फुटेज के अलावा हमारे तकनीकी विश्लेषण, स्थानीय लोगों से मिले इनपुट और जानकारी के आधार पर आरोपित को पकड़ने में इस्तेमाल किया गया था।” उन्होंने कहा कि आरोपित ने कथित तौर पर ‘पूर्व मकसद’ के साथ बच्ची से दोस्ती की थी।

एसपी ने बताया कि बच्ची की फोटो क्लिक करने और उसके साथ दोस्ती करने के बाद वो बच्ची को बाथरूम ले गया और फिर उसका यौन शोषण किया। जब वह बेहोश हो गई और फिर मर गई, तो रफी ने उसके शव को समारोह हॉल के परिसर से बाहर फेंक दिया। फिर फंक्शन में आकर उसने सामान्य तरीके से खाना खाया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं था। पुलिस ने अब आरोपित के ऊपर यौन शोषण के लिए POCSO अधिनियम के तहत अन्य धाराएँ भी लगा दी है। जिला एसपी ने कहा कि वे मृत्यु के सटीक कारण पर पहुँचने के लिए FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।

पुलिस अधिकारी के मुताबिक आरोपित रफी का बाल यौन शोषण का आपराधिक इतिहास रहा है। चित्तौड़ के एसपी ने बता कि आरोपित रफी को लगभग 10 साल पहले बेसिनिकोंडा में उनके खिलाफ दर्ज एक बलात्कार के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पहली बार उसने पाँच साल की बच्ची के साथ यौन शोषण किया था। मोहम्मद रफी उस समय 15 साल का था और उसे यौन शोषण के आरोप में एक जुवेनाइल होम भेजा गया था। फिर बाद में उसे जमानत मिल गई।

लगभग डेढ़ साल पहले उसने कथित तौर पर एक 12 वर्षीय लड़की से छेड़छाड़ की थी। उस समय वो अंगल्लू गाँव में एक वाटर प्लांट में काम कर रहा था। रफी की इस हरकत के बाद उसे काम से निकाल दिया गया लेकिन उसके खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया था। उसका तीसरा शिकार वो पाँच वर्षीय बच्ची बनी, जिसके शोषण और हत्या के आरोप में पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।

कमलनाथ के 2 मंत्री: एक के साथ महिला खिंचवाने लगी फोटो तो दूसरे उखड़े, मिला टका सा जवाब

मंच और मौका कोई भी मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस की गुटबाजी सामने आ ही जाती है। सागर में एक कार्यक्रम के दौरान पार्टी की एक महिला कार्यकर्ता को कमलनाथ सरकार में मंत्री हर्ष यादव ने भाजपा का एजेंट बता दिया। महिला ने भी उन्हें जवाब देने में देर नहीं लगाई और बताया कि वह 35 साल से पार्टी में हैं।

यह वाकया तब हुआ जब कार्यक्रम में शिरकत करने पहुॅंचे राज्य के गृह मंत्री बाला बच्चन के साथ नेताओं ने फोटों खिंचवाना शुरू किया। बच्चन के साथ हर्ष यादव भी थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसी दौरान अनीता मिश्रा नाम की एक महिला कार्यकर्ता भी गृहमंत्री के साथ अपनी फोटो खिंचवाने आई। उन्होंने एक कार्यकर्ता को फोन थमाकर फोटो खींचने को कहा।

यह सब कुछ देख हर्ष यादव भड़क गए। कथित तौर पर उन्होंने बच्चन से कहा, “इसकी कोई बात मत सुनिए। यह भारतीय जनता पार्टी की एजेंट है। इसके साथ फोटो मत खिंचवाना।” अनीता मिश्रा ने भी बिना वक्त गॅंवाए मंत्री को टका सा जवाब दे दिया। कहा कि वह 35 साल से पार्टी के लिए काम कर रही है।

2018 के विधानसभा चुनावों के बाद कॉन्ग्रेस डेढ़ दशक बाद राज्य की सत्ता में वापसी करने में कामयाब रही थी। लेकिन, इसके बाद से कई मौकों पर उसका अंदरूनी कलह सार्वजनिक हो चुका है। मुख्यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया के गुट के नेता एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका नहीं छोड़ते।

राम मंदिर तोड़ने का नारा लगाने वाली मजहबी महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं, बचाव में उतरे मंत्री महमूद अली

राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मजहब विशेष की महिलाओं के एक समूह द्वारा साम्प्रदायिक घृणा फैलाने का वीडियो सामने आया था। इसमें हिंसा और देशद्रोह की बातें की जा रही थी। इस मामले में हैदराबाद पुलिस ने देशद्रोह का मामला तो दर्ज कर लिया है, लेकिन मजहब विशेष की इन आरोपित महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इन महिलाओं के समर्थन में भी समुदाय विशेष के लोग आवाज उठा रहे हैं।

तेलंगाना के गृह मंत्री महमूद अली ने मामला दर्ज किए जाने को लेकर जॉंच के आदेश दिए हैं। उनका कहना है कि न केवल हैदराबाद, बल्कि दिल्ली के मजहब विशेष वाले भी इनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से आहत हैं। इसे देखते हुए मामले की जॉंच के आदेश दिए गए हैं। मंत्री ने कहा है कि सरकार और पुलिस राज्य में शांति बहाली के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन, जब देश भर के उलेमा सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सहमत हैं तो ये महिलाएँ कैसे विरोध कर सकती हैं?

मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के अमजदुल्ला ख़ान ने भी इन महिलाओं का बचाव किया है। उनका कहना है कि यह साफ नहीं ​है कि किस आधार पर पुलिस ने महिलाओं के खिलाफ आरोप लगाए हैं। वे ईदगाह में नमाज अता करने के लिए थी। जो कुछ भी हुआ वह चार दीवारी के भीतर हुआ। आरोप लगाकर पुलिस ने एक विवाद पैदा किया और इसे सुर्खियों में ला दिया। खान के मुताबिक जो वीडियो सामने आया है वह भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने पूछा कि आखिर 30 से 50 महिलाएँ कैसे किसी मुल्क को चुनौती दे सकती हैं?

गौरतलब है कि इस मामले में हैदराबाद की सईदाबाद पुलिस ने शुक्रवार (15 नवंबर) को मौलाना अब्दुल अलीम इस्लाही की बेटियों- शबीस्ता, ज़िले हुमा के अलावा मजहबी समूह की अन्य महिलाओं के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124-ए के तहत राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।

इस घटना का एक वीडियो भी वायरल हुआ, इसमें देखा सकता है कि किस तरह से महिलाओं के समूह ने अयोध्या के फ़ैसले के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए सामूहिक रूप से कई नारे लगाए। सामने आए इस वीडियो में, महिलाओं ने एकजुट होकर नारे लगाते हुए कहा, “तोड़ेंगे-तोड़ेगे, राम मंदिर तोड़ेंगे, लाठी-गोली खाएँगे, बाबरी मस्जिद बनाएँगे, हमारी आरज़ू शहादत-शहादत।”

इसके अलावा, नारा-ए-तक़बीर और अल्लाहु-अकबर के नारों के साथ, महिलाओं ने अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर को तोड़ने और बाबरी मस्जिद को हर हाल में लेकर रहने की बात भी कही। 

ख़बर के अनुसार, मजहबी समूह के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 153-ए एंड बी (दो समुदायों के बीच दुश्मनी और नफ़रत को बढ़ावा देना) और 295-ए (जानबूझकर और धार्मिक भावनाओं को अपमानित करने के लिए दुर्भावनापूर्ण कार्य) के तहत मामला भी दर्ज किया गया है। सेक्टर सब-इंस्पेक्टर डीडी सिंह ने स्टेशन हाउस ऑफ़िसर के पास शिक़ायत दर्ज कराई थी, जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज की थी।

इस मामले पर लीपापोती की कोशिश मीडिया का एक धड़ा भी कर रहा है। सियासत टीवी चैनल ने इस मामले पर जो ख़बर चलाई थी उसमें कहीं इस बात का उल्लेख नहीं किया गया कि महिलाओं ने दो सम्प्रदायों के बीच धार्मिक भावनाओं को आहत करने का काम किया है। देश में अराजकता फैलाने के उद्देश्य से भरे इस कृत्य की रिपोर्टिंग बिलकुल सीधे और सपाट तरीक़े से की गई, जैसे उसे इस तरह की भड़काऊ विषय-वस्तु पर कोई आपत्ति ही न हो।

‘PM मोदी प्लीज हमें राजनीतिक शरण दें… अगर असमर्थ हैं तो आर्थिक मदद कीजिए’ – पाकिस्तानी नेता

पाकिस्तान में मुत्तहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक अल्ताफ हुसैन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भारत में राजनीतिक शरण देने की माँग की है। MQM चीफ ने कहा कि पीएम मोदी उन्हें राजनीतिक शरण दें, और अगर वो निर्वासित पाकिस्तानी राजनेता और उनके साथियों को शरण देने में असमर्थ हैं तो उनकी आर्थिक मदद की जाए।

इंग्लैंड पुलिस की जमानत शर्तों में ढील देने के बाद अपने पहले सार्वजनिक भाषण में MQM नेता ने भारतीय प्रधानमंत्री की ओर रुख किया और उनसे कई रूपों में मदद माँगी। अल्ताफ हुसैन को क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विसेज (CPS) द्वारा आतंकवादी गतिवधियों में शामिल होने का आरोप इंग्लैंड में लगाया गया है। इस मामले में अगले साल जून में उनके केस का ट्रायल शुरू होना है। उनका पासपोर्ट उनकी जमानत शर्तों के तहत इंग्लैंड की पुलिस के पास है। इसके अलावा जब तक कोर्ट द्वारा अनुमति नहीं दी जाती है, तब तक उन्हें किसी भी यात्रा दस्तावेज के लिए आवेदन करने की अनुमति नहीं है।

अल्ताफ हुसैन ने पीएम मोदी से जो राजनीतिक शरण माँगी है, उस वीडियो को हजारों लोगों द्वारा ऑनलाइन देखा गया है। इस भाषण में अल्ताफ हुसैन ने कहा कि वह भारत की यात्रा करना चाहते हैं क्योंकि उनके दादा वहाँ दफन हैं। इंग्लैंड में रह रहे पाकिस्तानी नेता ने भारत सरकार से अपने अनुरोध में कहा, “यदि भारत के प्रधानमंत्री मोदी मुझे भारत आने की अनुमति देते हैं और मुझे अपने सहयोगियों के साथ शरण प्रदान करते हैं, तो मैं अपने सहयोगियों के साथ भारत आने के लिए तैयार हूँ क्योंकि मेरे दादाजी वहाँ दफन हैं। मेरी दादी को वहीं दफनाया गया है। इसके अलावा मेरे हजारों रिश्तेदारों को भी वहाँ दफनाया गया है। मैं भारत में उनके मज़ार पर जाना चाहता हूँ।”

पीएम मोदी को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने आरोप लगाया कि 22 अगस्त 2017 के बाद कराची में उनकी संपत्ति, घर और कार्यालय को अपने कब्जे में ले लिया गया। उन्होंने भारतीय प्रधानमंत्री से कहा कि अगर वह उन्हें शरण देने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं तो वो उनका आर्थिक मदद करें।

अल्ताफ हुसैन भारत की सर्वोच्च अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद मामले में अपना फैसला सुनाए जाने के बारे में बात करते हुए कहा कि विवादित ऐतिहासिक स्थल पर मजहब विशेष का अधिकार नहीं है। हुसैन ने कहा कि पीएम मोदी की वर्तमान सरकार को “हिंदू राज (शासन) स्थापित करने का अधिकार” है और यदि भारतीय राजनेता असदुद्दीन ओवैसी और अन्य को भारत पसंद नहीं है, तो उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अल्ताफ हुसैन ने अपने भाषण में बाबरी मस्जिद मुद्दे पर स्पष्ट पक्ष रखा।

आपको बता दें कि पाकिस्तानी नेता पर ब्रिटेन में अगस्त 2016 में कराची में अपने समर्थकों की भीड़ को संबोधित करते हुए हिंसा भड़काने का आरोप लगाया गया है।

‘सुप्रीम कोर्ट राम मंदिर पर हमारी समीक्षा याचिका 100% ख़ारिज कर देगा, फिर भी दायर करेंगे’

मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि राम मंदिर मामले में मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा याचिका (रिव्यु पेटिशन या पुनर्विचार याचिका) दाखिल करेगा। जमात-ए-उलेमा-ए-हिन्द की बैठक के बाद मदनी ने अजीबोगरीब बयान देते हुए कहा कि उन्हें पता है कि उनकी समीक्षा याचिका ख़ारिज हो जाएगी लेकिन फिर भी वो इसे दायर करेंगे। मदनी ने कहा कि समीक्षा याचिका दायर करना उनका अधिकार है और वो ऐसा करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें ख़ूब मालूम है कि उनकी समीक्षा याचिका शत-प्रतिशत खारिज ही की जानी है फिर भी वो सुप्रीम कोर्ट जाएँगे और इसे दाखिल करेंगे। मदनी ने कहा कि ये उनकी लड़ाई है।

राम मंदिर को लेकर मौलाना मदनी इससे पहले भी भड़काऊ बयान दे चुके हैं। जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द की राष्ट्रीय कार्यसमिति के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले के बाद कहा था कि मस्जिद का निर्माण किसी मंदिर को तोड़ कर नहीं किया गया था। इससे पहले जमीयत ने एक पैनल बनाया था। कहा गया था कि ये पैनल वकीलों और शिक्षाविदों से बात कर के तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष निकालेगा कि पुनर्विचार याचिका दाखिल करना है या नहीं। अब जमीयत ने साफ़ कर दिया है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी।

सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय पीठ ने अयोध्या विवाद में ऐतिहासिक फ़ैसला दिया था। इस फ़ैसले के साथ ही अयोध्या में राम मंदिर पर मुहर लग गई और मस्जिद के लिए कहीं और ज़मीन दिए जाने की बात कही गई। कई मुस्लिम नेताओं ने इस फ़ैसले का विरोध किया। हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि उन्हें उनकी मस्जिद वापस चाहिए। वहीं मौलाना मदनी ने कहा था कि जहाँ एक बार मस्जिद बन गई, वहाँ क़यामत तक मस्जिद ही रहती है।

मौलाना अरशद मदनी ने बाबर को भी क्लीनचिट देते हुए कहा था कि बाबर ने जबरन मंदिर तोड़ कर मस्जिद नहीं बनाई। उन्होंने कहा कि मस्जिद तोड़ कर बनाए गए मंदिर में नमाज नहीं पढ़ी जा सकती है। उन्होंने इस बात को भी नकार दिया कि जिस मस्जिद में नमाज नहीं होती है, वो मस्जिद नहीं है। उन्होंने कहा था कि नमाज हो या नहीं हो, मस्जिद हमेशा मस्जिद ही रहता है।

ध्वस्त कर दिया गया माँ कनक दुर्गा का मंदिर, तोड़ डाली प्रतिमाएँ: सरकार के फैसले से तनाव व्याप्त

आंध्र प्रदेश के गुंटूर में एक मंदिर को ध्वस्त किए जाने को लेकर तनाव व्याप्त है। स्थानीय लोग गुंटूर म्युनिसपल कॉर्पोरेशन से आक्रोशित हैं। कोल्ली शारदा बाजार में स्थित माँ कनक दुर्गा के मंदिर को स्थानीय लोगों के विरोध के बावजूद प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। सरकार का कहना है कि नंदीवेलूगु तक जाने वाली सड़क के चौड़ीकरण में यह मंदिर बाधा बन रहा था। प्रशासन ने इसे तोड़ने के पीछे कारण बताते हुए कहा कि ये विकास कार्य के आड़े आ रहा था। ये मंदिर क़रीब 3 दशक पुराना है। मंदिर को तोड़े जाने के बाद देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ टूटी-फूटी अवस्था में इधर-उधर बिखरी पड़ी रहीं।

स्थानीय जनता की शिकायत है कि मंदिर को ढाहने से पहले अधिकारियों ने उन्हें न तो कोई नोटिस दिया और न ही इसे लेकर कोई पूर्व-सूचना दी गई। लोगों ने मंदिर को कहीं और स्थापित किए जाने को लेकर आवेदन दिया था। स्थानीय जनता का कहना था कि मंदिर को ध्वस्त करने की बजाय इसे रिलोकेट कर के कुछ दूर अलग स्थापित कर दिया जाए। प्रशासन ने लोगों की इस माँग को अस्वीकार कर दिया और मंदिर को गिरा डाला गया। अंत मे लोगों ने सरकार से कहा कि कम से कम मंदिर के अंदर की चीजों को कहीं और रखने के लिए अतिरिक्त समय दी जाए। उनकी इस माँग पर भी कोई ध्यान नहीं दिया गया।

‘द न्यूज़ मिनट’ में प्रकाशित ख़बर के अनुसार, एक महिला ने विरोध करते हुए पूछा कि मंदिर को गिराने का अधिकार सरकार व प्रशासन को किसने दिया है? वहीं नगरपालिका प्रशासन का कहना है कि इस सम्बन्ध में मंदिर के प्रबंधकों से 1 वर्ष से बातचीत चल रही थी। उन्होंने बताया कि इस कार्य की समीक्षा के लिए एक कमिटी बनाई गई थी और नियमानुसार ही सारे कार्य पूर्ण किए गए। नगरपालिका ने बताया है कि मंदिर को अलग बनाने के लिए पास ही एक ज़मीन उपलब्ध कराई गई है। वहाँ नगरपालिका के फण्ड से मंदिर बनाया जा रहा है। म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने पूर्व-सूचना न दिए जाने के आरोपों को भी ख़ारिज कर दिया।

गुंटूर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ने दावा किया कि उक्त मंदिर अतिक्रमण की गई भूमि पर बनाया गया था और मंदिर प्रशासन के पास कोई कागज़ात ही नहीं थे। मंदिर के अवशेषों के चित्र व वीडियो ऑनलाइन वायरल हो गए। इसके बाद लोगों ने आंध्र प्रदेश की जगन मोहन रेड्डी सरकार के ख़िलाफ़ आक्रोश दर्ज कराया। भाजपा नेता लंका दिनाकरन ने कहा कि मौजूदा राज्य सरकार एक तरफ तो जेरुसलम जाने वाले लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधाएँ मुहैया करा रही है, वहीं दूसरी तरफ मंदिरों को तोड़ रही है। जब विवाद बढ़ गया तो मंदिर प्रशासन से एक ‘सहमति पत्र’ लिया गया, जिसमें दावा किया गया है कि मंदिर को उसके प्रबंधकों की सहमति के बाद तोड़ा गया।

श्रीलंका राष्ट्रपति चुनाव में भी खिला कमल, मुस्लिमों ने पूछा- हाय! हम कहाँ जाएँ?

श्रीलंका में अप्रैल 2019 में हुए ईस्टर बम ब्लास्ट के घाव अभी तक ताज़ा हैं। इस घटना में इस्लामिक आतंकियों का हाथ निकलने के बाद अब तक कई ऐसे मामले आ चुके हैं, जहाँ श्रीलंका में मुस्लिमों का बहिष्कार किया गया। अब राष्ट्रपति चुनाव में भी एक बौद्ध राष्ट्रवादी की जीत हुई है। रविवार (नवंबर 17, 2019) को जारी किए गए मतगणना परिणाम के अनुसार, लेफ्टिनेंट कर्नल नंदसेना गोटाभया राजपक्षे राष्ट्रपति चुनाव जीत चुके हैं। वो पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भाई हैं। महिंदा, बासिल, चामल और गोटाभाया- ये चारों राजपक्षे भाई दशकों से श्रीलंका की राजनीति में प्रभावी रहे हैं और शीर्ष पदों पर काबिज रहे हैं।

श्रीलंका मुस्लिम काउंसिल के अध्यक्ष हिल्मी अहमद ने चुनाव परिणाम जारी होने से पहले ही कहा था कि इस चुनाव में मुस्लिम काफ़ी डरे हुए हैं और गोटाभाया के जीतने से उनके भीतर का डर और बढ़ेगा। गोटाभाया एक बौद्ध राष्ट्र्वादी हैं, जो सुरक्षा के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता करने या दया दिखाने के ख़िलाफ़ रहे हैं। वो इससे पहले श्रीलंका के डिफेंस चीफ रह चुके हैं। श्रीलंका मुस्लिम काउंसिल ने कहा था कि गोटाभाया जीतने के बाद मुस्लिम-विरोधी एजेंडा को लागू करने में पूरी ताक़त लगा देंगे और मुस्लिमों का दमन करेंगे। मुस्लिम संगठनों का पूछना है कि राजपक्षे की जीत के बाद उनका क्या होगा? वो कहाँ जाएँगे?

श्रीलंका में मुस्लिम संगठनों के आरोपों के बीच गोटाभाया की जीत अहम है। इससे पता चलता है कि द्वीपीय देश अभी ईस्टर बम ब्लास्ट को भूला नहीं है और राइट विंग की तरफ़ उनका झुकाव पहले से काफ़ी ज्यादा बढ़ा है। उस बम ब्लास्ट में 270 लोग मारे गए थे। इस चुनाव में गोटाभाया राजपक्षे का चुनाव चिह्न कमल छाप था। श्रीलंका में 70% लोग सिंहला बौद्ध हैं और राजपक्षे उनकी ही भावनाओं पर सवार होकर राष्ट्रपति पद तक पहुँचे हैं, क्योंकि उन्होंने राष्ट्रवाद को चुनावी मुद्दा बनाया था।

चुनाव परिणामों के अनुसार, राजपक्षे को 6,310,035 मत मिले। वहीं दूसरे नंबर पर रहे उनके प्रतिद्वंद्वी सजीत प्रेमदासा को 5,184,552 मत प्राप्त हुए। अगर प्रतिशत की बात करें तो राजपक्षे को 52% मत मिले, वहीं प्रेमदासा को 42% मत मिले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरा चुनाव परिणाम स्पष्ट होने से पहले ही राजपक्षे को बधाई दे दी। उन्होंने साफ़-सुथरे चुनाव के लिए श्रीलंका की जनता को भी बधाई दी। मोदी ने कहा कि वो शांति और समृद्धि के लिए राजपक्षे के साथ मिल कर काम करेंगे।