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कुशीनगर मस्जिद विस्फोट में पूर्व आर्मी मेजर डॉ अशफाक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड हाजी कुतुबुद्दीन का है पोता

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के बैरागीपट्टी गाँव की मस्जिद में हुए बम ब्लास्ट केस में यूपी पुलिस ने अब तक 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। यूपी एटीएस ने इस मामले में छठे आरोपित डॉ अशफाक आलम को हैदराबाद के ओल्ड सिटी से गिरफ्तार किया। बता दें कि डॉ अशफाक पूर्व आर्मी मेजर है। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ के लिए आलम को लखनऊ ले जाया गया है। विस्फोटक को मस्जिद तक पहुँचाने में प्रमुख भूमिका निभाने वाले अशफाक को पूरी साजिश का प्रमुख सूत्रधार बताया जा रहा है।

मस्जिद में धमाके के समय डॉ आलम कुशीनगर में ही मौजूद था। अशफाक पर सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने और आपराधिक साजिश रचने का आरोप है। डॉ आलम इस मामले के एक मुख्य आरोपित हाजी कुतुबुद्दीन का पोता है, जो मस्जिद में अक्सर नमाज अदा करता था। कुतुबुद्दीन पर एक बैग में मस्जिद में विस्फोटक विस्फोट करने का आरोप है। हाजी कुतुबुद्दीन को गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि डॉ आलम 8 नवंबर को एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए कुशीनगर आया था। इससे पहले मस्जिद में ब्लास्ट मामले में 4 अन्य मौलानाओं को गिरफ्तार किया जा चुका है।

डॉ अशफाक आलम 2017 तक हैदराबाद के सेना अस्पताल में कैप्टन था और दो साल पहले ही उसने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए समयपूर्व स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ली थी। डॉ आलम को यूपी एटीएस और तेलंगाना पुलिस के संयुक्त अभियान के दौरान हैदराबाद से गुरुवार (नवंबर 14, 2019) को गिरफ्तार किया गया। अशफाक की पत्नी भी सेना अस्पताल में डॉक्टर है। फिलहाल वो हैदराबाद में तैनात है।

यूपी के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एटीएस) ध्रुव कांत ठाकुर ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “डॉ आलम ने इनवर्टर की बैटरी में शॉर्ट-सर्किट का हवाला देते हुए एक मस्जिद में विस्फोट के बारे में पुलिस को फोन कर बताया। मगर पुलिस के वहाँ पहुँचने से पहले ही अशफाक, कुतुबुद्दीन के साथ भाग गया था।” दरअसल अभियुक्तों से पूछताछ के दौरान विस्फोट में डॉ आलम के शामिल होने की पुष्टि की गई थी। जिसके बाद उसे तुरंत गिरफ्तार करने के लिए एक टीम को हैदराबाद भेजा गया।

ध्रुव कांत ठाकुर ने बताया कि डॉ आलम इस बात का ठोस जवाब देने में असमर्थ रहा कि वो पुलिस को फोन करने के बाद विस्फोट स्थल से क्यों भाग गया। पूछताछ के दौरान वह अन्य आरोपितों से भिड़ गया था। उन्होंने बताया कि मौलाना अजीमुद्दीन लगातार अपना बयान बदलता रहा। बता दें कि अजीमुद्दीन पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। उसे बच्चों को नमाज पढ़ाने के लिए 6000 रुपए की तनख्वाह पर नियुक्त किया गया था। पहले तो अजीमुद्दीन ने अपने बयान में कहा कि विस्फोटक वाला बैग उसके इमाम बनने से पहले से ही मस्जिद में रखा गया था। और फिर उसने बयान बदलते हुए इस बैग को रखने के लिए कुतुबुद्दीन को जिम्मेदार ठहराया।

अजीमुद्दीन, डॉ आलम और कुतुबुद्दीन के अलावा पुलिस ने मामले में तीन अन्य आरोपितों- जावेद अंसारी, इज़हार और आशिक अंसारी को गिरफ्तार किया है। इन पर दंगा करने, धर्म का अपमान करने, आपराधिक साजिश रचने समेत कई मामले दर्ज किए गए। मस्जिद विस्फोट मामले में एक अन्य आरोपित सलाउद्दीन अंसारी उर्फ मुन्ना फिलहाल फरार चल रहा है।

‘मुझे मेरी मस्जिद वापस चाहिए, औरंगज़ेब का सबसे बड़ा साम्राज्य था, वो इस्लामी कट्टरपंथी नहीं था’

राम जन्मभूमि के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपना रुख़ जारी रखते हुए AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि 9 नवंबर को सुनाया गया अयोध्या का फ़ैसला ‘क़ानून पर विश्वास की जीत’ है और वह ‘अपनी मस्जिद वापस चाहते हैं’। आउटलुक को दिए एक साक्षात्कार में, ओवैसी ने कहा कि राम जन्मभूमि मामला दो पक्षों के बीच एक दीवानी मुक़दमा (Civil Suit) था, जहाँ क़ानून पर विश्वास ने जीत पाई।

ओवैसी ने कहा,

“अगर मस्जिद को (1992 में) ध्वस्त नहीं किया जाता, तब भी क्या यही फ़ैसला आता? हमारी लड़ाई ज़मीन के टुकड़े के लिए नहीं थी। यह सुनिश्चित करना था कि मेरे क़ानूनी अधिकारों का ध्यान रखा जाए। SC ने यह भी स्पष्ट कहा कि मस्जिद बनाने के लिए किसी मंदिर को नहीं गिराया गया। मुझे अपनी मस्जिद वापस चाहिए।”

सदियों से चले आ रहे एक विवाद को समाप्त करने वाले ऐतिहासिक फ़ैसले में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 9 नवंबर को विवादित राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि हिन्दू पक्ष को सौंप दी। इससे हिन्दू भक्तों के लिए भगवान राम के जन्मस्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण प्रशस्त हो सका। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को 1992 में बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण के लिए अयोध्या में एक प्रमुख स्थान पर सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को एक वैकल्पिक स्थान पर 5 एकड़ भूमि प्रदान करने का भी आदेश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ASI की रिपोर्ट में पर्याप्त सामग्री थी, जिसके तहत निम्नलिखित निष्कर्ष निकाले जा सके- खाली ज़मीन पर बाबरी मस्जिद का निर्माण नहीं किया गया था। विवादित ढाँचे में अंतर्निहित एक संरचना थी। अंतर्निहित संरचना एक इस्लामी संरचना नहीं थी। यह विवाद ज़मीन के मालिक़ाना हक को लेकर था।

इसके अलावा, अपने साक्षात्कार में, मुगल सम्राट औरंगज़ेब का बचाव करते हुए, जो कि हिंदुओं पर अत्याचार के लिए जाना जाता है, ओवैसी ने कहा कि भारत के सम्राट के रूप में, औरंगज़ेब का सबसे बड़ा साम्राज्य था। “और ये दक्षिणपंथी उसे एक इस्लामी कट्टरपंथी कहते हैं। अब क्या इतनी बड़ी संख्या में नमाज़ मस्जिद में नहीं होगी?” ओवैसी ने कहा कि औरंगजेब की ‘धर्मनिरपेक्षता’ एक कारण है, जो वो इस फ़ैसले से असहमत हैं।

AIMIM प्रमुख ने इससे पहले राम जन्मभूमि के फ़ैसले पर प्रकाश डाला। फ़ैसले के ठीक बाद एक सार्वजनिक रैली में बोलते हुए, असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था,

“अगर बाबरी मस्जिद वैध थी तो इसे (भूमि) उन लोगों को क्यों सौंप दिया गया, जिन्होंने इसे ध्वस्त किया था। अगर यह ग़ैर-क़ानूनी थी तो केस क्यों चल रहा है और आडवाणी के ख़िलाफ़ केस वापस लिया जाए। और अगर यह क़ानूनी है तो मुझे दे दो।”

जनसभा को संबोधित करने के दौरान, ओवैसी ने भीड़ से कहा था, “हिम्मत मत हारो।” मजबूत रहो, हमें संघर्ष करना है, हमें एकजुट रहना है। दुनिया यहीं ख़त्म नहीं होने वाली है।”

बाद में, रविवार को, ओवैसी ने कहा था, “आज एक मुस्लिम क्या देखता है? इतने सालों तक वहाँ एक मस्जिद खड़ी रही, जिसे ध्वस्त कर दिया गया। अब अदालत एक इमारत को उस जगह पर आने की अनुमति दे रही है, जहाँ कथित तौर पर पाया गया था कि यह ज़मीन रामलला की है।”

दिलचस्प बात यह है कि ओवैसी के लिए, आक्रमणकारियों द्वारा निर्मित एक मस्जिद पवित्र थी, जबकि ASI के निष्कर्षों के बावजूद हिन्दू विश्वास का मज़ाक उड़ाने और इसे ‘कथित खोज’ कहने में उन्हें कोई समस्या नहीं हुई।

तोड़ दिए जाएँगे हनुमान और शिव मंदिर? चाँदनी चौक के विकास के लिए दिल्ली HC का आदेश

दिल्ली के चाँदनी चौक इलाक़े में पुनर्विकास योजना से जुड़े कार्यों में बाधा बनने वाले दो मंदिरों को वहाँ से हटाना होगा – यह आदेश दिल्ली की हाई कोर्ट का है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार के उस प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया, जिसमें धार्मिक ढाँचों के साथ ही पुनर्विकास के काम को जारी रखने यानी मंदिरों को वहीं बने रहने की माँग की गई थी।

ख़बर के अनुसार, जस्टिस एस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह की बेंच ने आम आदमी पार्टी सरकार और विशेष तौर पर गृह विभाग के एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी सत्य गोपाल को निर्देश दिया है कि वे अपनी वैधानिक और संवैधानिक ज़िम्मेदारी का पालन करें। आदेश में यह भी कहा गया है कि वो सुनिश्चित करें कि दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के संबंधित आदेशों का पालन हो। आदेश यह है कि चाँदनी चौक में पुनर्विकास योजना के कार्यों में बाधा बनने वाले हर अतिक्रमण को वहाँ से हटाया जाए।

नवभारत टाइम्स के दिल्ली संस्करण में प्रकाशित ख़बर

बता दें कि इन दो मंदिरों में एक हनुमान मंदिर है और दूसरा शिव मंदिर। कोर्ट ने इन दोनों ही मंदिरों को हटाने का आदेश देते हुए कहा कि लॉ एन्फ़ोर्समेंट एजेंसी फ़ैसला लें कि यह कैसे और किस तरीक़े से संभव हो सकेगा। साथ ही कोर्ट ने इन आदेशों की एक तय अवधि के अंदर पूरा करने की ज़िम्मेदारी व्यक्तिगत तौर पर गृह विभाग के एडिशनल चीफ़ सेक्रेटरी सत्य गोपाल को सौंपी है।

जानकारी के अनुसार, भाई मति दास स्मारक के बारे में कोर्ट को यह बताया गया था कि फ़िलहाल अभी तक तो उसकी वजह से कार्य में किसी तरह की बाधा नहीं आई है। इसके बाद, हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को चाँदनी चौक के आड़े आ रहे पाँच धार्मिक ढाँचों से जुड़े अपने 30 अप्रैल 2015 के आदेश का स्मरण कराया। इन आदेशों के तहत पुनर्विकास के कार्यों में बाधा बनने वाले इन पाँचों धार्मिक ढाँचों को हटाए जाने का फ़ैसला लिया गया था।

रात तक थी डील पक्की, अब पवार ने कहा – अभी और वक्त लगेगा: बिगड़ रही शिवसेना-कॉन्ग्रेस-NCP की बात?

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के बीच सरकार गठन को लेकर जद्दोजहद जारी है। कयासों के अलावा सहमति जैसा फिलहाल राज्य की राजनीति में दिख नहीं रहा। कल रात तक भाजपा का साथ छोड़ शिव सेना की कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ डील पक्की हो गई थी। सत्ता के समझौते के कथित मसौदे के मुताबिक शिव सेना को मुख्यमंत्री की कुर्सी और 16 मंत्री पद मिलने थे, वहीं एनसीपी को 14 और कॉन्ग्रेस के 12 विधायकों को मंत्री बनना था। लेकिन जैसा गडकरी ने कहा था कि राजनीति और क्रिकेट में कुछ असंभव नहीं, वैसा ही आज सुबह से दिख रहा है।

डील पक्की होने के बावजूद अभी तक सरकार के गठन का रास्ता साफ नहीं दिख रहा। वो इसलिए क्योंकि शिवसेना-कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बीच अभी भी पशोपेश जारी है। एक तरफ जहाँ बाला साहेब ठाकरे की पुण्यतिथि (17 नवंबर) को सरकार बनाने की बात सामने आ रही है वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार का कहना है कि सरकार बनने में अभी वक्त लगेगा। इससे साफ झलक रहा है कि अभी भी इनके बीच विचारों की सहमति नहीं बन पाई है।

इस बीच बीजेपी ने एक बार फिर सरकार बनाने की अपनी घोषणा करते हुए कहा कि बीजेपी के बिना महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं हो सकती। महाराष्ट्र बीजेपी के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटील ने मीडिया के सामने राज्य में सरकार बनाने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास सबसे ज्यादा विधायक हैं। चंद्रकांत पाटील ने कहा कि उनके पास 119 (105 बीजेपी और 14 निर्दलीय) विधायकों का समर्थन है। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी राज्य को एक स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। बीजेपी के बिना महाराष्ट्र में कोई सरकार नहीं हो सकती। पाटील ने आगे कहा कि बीजेपी के सभी विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जाएँगे और किसानों की दुर्दशा को समझेंगे।

गौरतलब है कि 288 विधानसभा सीटों वाले राज्य में 24 तारीख को चुनाव के नतीजे आए थे और किसी भी दल या गठबंधन के सरकार न बना पाने के बाद राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया है। बता दें कि बीजेपी और शिवेसना ने एक साथ चुनाव लड़ा था और 161 सीटें जीती थीं। हालाँकि चुनाव के बाद शिवसेना ने बीजेपी से सीएम पद साझा करने की बात कही, जिस पर सहमति न बनने के बाद दोनों दलों ने अपने रास्ते अलग कर लिए।

चंद्रकांत पाटील ने कहा कि बीजेपी ने चुनाव में 1.42 करोड़ मतदाताओं के वोट हासिल किए, जबकि एनसीपी 92 लोख वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रही। शिवसेना को 90 लाख वोट मिले और मत प्रतिशत के लिहाज से वह तीसरे नंबर पर रही। उन्होंने कहा कि 1990 के बाद से महाराष्ट्र में बीजेपी के अलावा कोई भी दल 100 से ज्यादा सीटें नहीं जीत सका है। 

मो. सोनू ने किया नाबालिग का रेप, लोगों ने घेरा तो हथियारों से लैस अब्बू व गैंग भगा कर ले गया

बिहार के अररिया ज़िले में हथियार के बल पर एक नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, जोकीहाट थाना क्षेत्र के सिसौना दरगाह टोला निवासी एक पीड़िता ने 6 नवंबर 2019 को महिला थाने में शिक़ायत दर्ज करवाई थी। अपनी शिक़ायत में उसने बताया कि 5 नवंबर की रात को जब वो अपने घर में सो रही थी, तो उसी समय अचानक सिसौना गाँव के वार्ड 12 के रहने वाले मोहम्मद सोनू पिता तैबुल उसके घर में ज़बरदस्ती घुस आया। इसके बाद उसने दरवाज़ा बंद करके हथियार के बल पर नाबालिग से दुष्कर्म किया। इस बीच नाबालिग ने शोर मचाया, जिससे आस-पास के लोग वहाँ इकट्ठा हो गए।

प्रभात खबर में प्रकाशित ख़बर

रिपोर्ट के अनुसार लोगों ने बड़ी मुश्किल से नाबालिग को मोहम्मद सोनू के क़ब्जे से छुड़ाया। इसके बाद घटना की जानकारी नाबालिग के पिता को दी गई। मामला यहीं नहीं थमा, क्योंकि जब अपने बेटे की क़रतूत की ख़बर सोनू के अब्बू तैबुल को लगी तो वो हथियार के साथ उसे बचाने के लिए अपने साथ कई लोगों को लेकर घटना-स्थल पर पहुँचा।

ख़बर के अनुसार, इन लोगों में तनवीर, बाबरस राजा, अफ़सर, मुर्तजा और दिलशाद शामिल थे, जो हथियार के ज़ोर पर सोनू को वहाँ से बचाकर ले गए। साथ ही उन्होंने लोगों को धमकी भी दी कि इस मामले को लेकर पुलिस में किसी तरह की कोई शिक़ायत दर्ज नहीं करवाई जानी चाहिए।

पीड़िता ने बताया कि वो इस मामले को लेकर जोकीहाट थाना गई। जहाँ उसने अपनी आप बीती सुनाई, इसके बाद जोकीहाट थाने की पुलिस ने पीड़िता को महिला थाने में भेज दिया। महिला थाने में दर्ज इस मामले की संख्या 164/19 है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अग्रेतर कार्रवाई की जा रही है।

हमारे हवाले करो पाकिस्तान में छिपे बैठे जिहादी, बेहतरी इसी में है: विदेश मंत्री जयशंकर

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान के खिलाफ मोदी सरकार के कड़े रुख को दोहराते हुए कहा है कि अगर पाक को भारत के साथ रिश्तों में बेहतरी की इतनी ही ज़रूरत है तो रिश्तों की बेहतरी के लिए उसे अपने पास छिपे बैठे जिहाद-आरोपित भारतीयों को हमारे हवाले कर देना चाहिए। उन्होंने यह बात फ्रेंच दैनिक समाचार पत्र ल मोंड के साथ विस्तार से बात करते हुए कही है।

“रिश्ते कई सालों से मुश्किल मुख्यतः इसलिए हैं क्योंकि पाक ने एक महत्वपूर्ण जिहादी इन्डस्ट्री बना ली है और भारत में हमले करने के लिए दहशतगर्द भेजता रहता है। पाक खुद इस स्थति को नकारता नहीं यही।” जयशंकर ने यह बात शाह महमूद कुरैशी, पाकिस्तानी विदेश मंत्री के उस बयान पर प्रतिक्रिया में कही जिसमें कहा गया था कि आज भारत और पाक के कूटनीतिक रिश्ते शून्य के करीब हैं।

“आप ये बताइए कौन सा देश ऐसे पड़ोसी से बातचीत और लेनदेन करना चाहेगा जो उसके खिलाफ आतंकी गतिविधियों में हो… हम कार्रवाई चाहते हैं जो सहयोग की असली इच्छा को प्रदर्शित करे।”

“उदाहरण के तौर पर, पाकिस्तान में ऐसे भारतीय रह रहे हैं जिनकी भारत को आतंकी गतिविधियों के मामले में तलाश है। हम पाकिस्तान से कह रहे हैं कि उन्हें हमारे हवाले कर दो।” उनका इशारा भारत के नंबर 1 वांछित दाऊद इब्राहिम की ओर था, जिसे भारत मुंबई में 1993 के बम धमाकों के मामले में वापिस लाकर सज़ा देना चाहता है।

भारत के राष्ट्रवाद के बारे में जयशंकर ने एक बार फिर दोहराया कि भारत के राष्ट्रवाद को पाश्चात्य नज़रिए से नहीं देखा जाना चाहिए। “हर देश में राष्ट्रवाद की अलग समझ और एक अलग इतिहास होता है। अमेरिका में यह अलग-थलग पड़ने की वकालत का टोन लिए रहता है। एशिया में, कम से कम भारत में, राष्ट्रवाद एक सकारात्मक शब्द है।”

इसके अलावा राष्ट्रवाद और अल्पसंख्यकों के बारे में सवाल पर उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता देश तय करता है, आस्था, जाति या भाषा नहीं।

₹100 करोड़ की टैक्स फाइल खुली: मुश्किल में सोनिया-राहुल, नेशनल हेराल्ड से जुड़ा है मामला

इनकम टैक्स अपील ट्रिब्यूनल ने कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्षा सोनिया गाँधी और उनके बेटे व पूर्व कॉन्ग्रेस प्रमुख राहुल गाँधी की अपील नामंज़ूर कर दी है। उनके विरुद्ध ₹100 करोड़ की टैक्स अनियमितता की फाइल फिर से खोली जाएगी। माना जा रहा है कि इस निर्णय का दोनों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर किए गए नेशनल हेराल्ड मामले पर भी असर पड़ने की संभावना है।

रियायती दर पर कॉन्ग्रेस राजनीतिक दल को मिली सम्पत्ति को कथित तौर पर अवैध तरीके से गाँधियों की निजी सम्पत्ति में परिवर्तित करने का इन दोनों पर आरोप है। फ़िलहाल दोनों इस मामले में कॉन्ग्रेस कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा और अन्य कॉन्ग्रेस पदाधिकारियों समेत जमानत पर चल रहे हैं।

टाइम्स नाउ की मैनेजिंग एडिटर नविका कुमार के मुताबिक यह अपील यंग इंडियन नामक कम्पनी द्वारा दायर की गई थी, जिसे ख़ारिज कर दिया गया है। कम्पनी ने चैरिटेबल ऑर्गनाइज़ेशन के तौर पर टैक्स में छूट का दावा किया था। इससे वर्तमान में कॉन्ग्रेस के मुखपत्र और ऐतिहासिक समाचारपत्र नेशनल हेराल्ड के मालिकाना हक पर सवालिया निशान लग गया है। प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा शुरू किया यह अख़बार आज़ादी के पहले अंग्रेजी सरकार पर हमले और विभिन्न नेताओं के लेखों के लिए जाना जाता था लेकिन आज़ादी के बाद बाकी की कॉन्ग्रेस की तरह नेहरू-गाँधी परिवार की छाया में दब गया।

टाइम्स नाउ के अनुसार वह यह दावा उसके हाथ लगे टैक्स ट्रिब्यूनल के 175 पन्नों के आदेश के आधार पर कर रहा है।

राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और मामले के अन्य आरोपित कॉन्ग्रेस नेता यंग इंडियन और इस मामले से जुड़ी एक दूसरी कम्पनी एसोसिएटेड जर्नल्स के शेयर होल्डर हैं। स्वामी का आरोप है कि ऐतिहासिक महत्व वाले नेशनल हेराल्ड और इसे सरकार से रियायती दरों पर मिली दिल्ली की महंगी सम्पत्तियों का स्वामित्व गाँधी परिवार और अन्य कॉन्ग्रेस नेताओं को औने-पौने दामों पर कानून को ताक पर रखते हुए किया गया है।

कॉन्ग्रेस के सहयोगी एनसीपी के नेता माजीद मेमन ने टाइम्स नाउ एंकर पद्मजा जोशी से बात कर मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मामले में गड़बड़ियाँ भले ही दिख रहीं हों, लेकिन फिर भी अदालत में आपराधिक केस का फैसला आने तक राहुल गाँधी को दोषी नहीं कहा जाना चाहिए।

‘शराब’ पीने की वजह से पृथ्वीराज चौहान, प्रताप के क़िले में अब चमगादड़ें ब्याही जा रही: कॉन्ग्रेस MLA

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के विधायक बैजनाथ कुशवाह के एक बयान से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, उन्होंने कहा कि शराब ने दिल्ली के पृथ्वीराज चौहान और महाराणा प्रताप जैसे राजाओं के राज्य को बर्बाद कर दिया। सत्तारूढ़ दल के विधायक ने गुरुवार (14 नवंबर) को बाल दिवस कार्यक्रम के दौरान स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की।

मध्य प्रदेश के मुरैना ज़िले के एक स्कूल में बाल दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, मुरैना ज़िले की सबलगढ़ सीट से कॉन्ग्रेस विधायक बैजनाथ कुशवाह ने कहा,

“दिल्ली के पृथ्वीराज चौहान से लेकर कन्नौज के शासक जयचंद तक, सभी राजा अतुलनीय शासक थे। लेकिन केवल एक कारण की वजह (विधायक ने शराब पीने की आदत की ओर इशारा किया) से अपने राज्यों को बर्बाद कर दिया, उनके क़िले में चमगादड़ें ब्याह रही हैं।”

विधायक ने इसके आगे कहा कि आज इन राजाओं का कोई नाम लेने वाला नहीं बचा है। उन्होंने कहा, “इसलिए, कभी भी शराब को हाथ न लगाएँ।”

बैजनाथ कुशवाह ने ये टिप्पणी छात्रों को समझाने के लिए की थी कि शराब कितनी बुरी है। लेकिन विधायक द्वारा प्रस्तुत अजीब आरोप ने उन्हें परेशानी में डाल दिया क्योंकि राजपूत करणी सेना के नाराज़ सदस्यों ने अपने पूर्वजों को बदनाम करने के लिए राजनेता से सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने की माँग की है। जिसके जल्द से जल्द न माँगे जाने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी है। स्थानीय राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष अरुण राजावत ने कहा, “विधायक द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द बहुत ही अपमानजनक हैं और अगर विधायक इन शब्दों के लिए सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं माँगते हैं, तो उनकी जीभ काट दी जाएगी।”

हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने कुशवाहा के बयान से ख़ुद को दूर कर लिया। पार्टी के वरिष्ठ सदस्य और कॉन्ग्रेस के मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल में सामान्य प्रशासन मंत्री, गोविंद सिंह ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी करने वाले की जवाबदेही होनी चाहिए।

इस बीच, भाजपा प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने बयान की निंदा की और कहा कि कॉन्ग्रेस ने हमेशा देशभक्तों का अपमान किया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस विधायक का बयान बहुत बड़ा अपमान है।

‘इमारत में गुंबद तो मस्जिद, लंबी-सीधी तो चर्च और अगर गंदी मूर्तियाँ/गुड़ियाँ हैं तो वह एक मंदिर’

तमिलनाडु के चिदंबरम निर्वाचन क्षेत्र के सांसद थोल थिरुमावलवन की हिन्दू मंदिर के सन्दर्भ में की गई टिप्पणी से सोशल मीडिया पर हंगामा बरपा हुआ है। यह टिप्पणी 13 नवंबर को की गई थी।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने वाले लोकसभा सांसद ने मंदिरों के सन्दर्भ में एक अभद्र टिप्पणी की। बता दें कि वो विदुथलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) के संस्थापक हैं, जो अनुसूचित जाति के अधिकारों के लिए लड़ने का दावा करते हैं।

सोशल मीडिया एक वीडियो में, थिरुमावलवन को “सनातन धर्म शिक्षा नीतियों का विरोध” करने वाली एक बैठक को संबोधित करते हुए कहा, “अगर इमारत में गुंबद है, तो यह एक मस्जिद है; अगर वो इमारत लंबी और सीधी हो, तो वो एक चर्च है; और अगर इमारत में गंदी मूर्तियाँ/गुड़ियाँ हैं, तो वह एक मंदिर है।”इस दौरान वहाँ कई दर्शक भी मौजूद थे, जिन्होंने नेता की टिप्पणी की सराहना भी की।

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने चिदंबरम के सांसद की गिरफ़्तारी की माँग की है।

कुछ लोगों का कहना है कि आख़िर थिरुमावलवन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही थी, जबकि इंदु मक्कल काची (आईएमके) के संस्थापक अर्जुन संपत को सिर्फ़ एक तिरुवल्लुवर की मूर्ति को भगवा गमछा बाँधने और फिर उसे रुद्राक्ष की माला पहनाने पर गिरफ़्तार कर लिया गया था।

ख़बर के अनुसार, हिन्दू मुन्नानी ने अरियालुर ज़िले के विभिन्न पुलिस स्टेशनों में शिक़ायत दर्ज की है कि उन पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए हैं और विदुथलाई थिरुमावलवन काची (वीसीके) नेता थोल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जा रही है। अपनी कथित टिप्पणी के ज़रिए थिरुमावलवन ने हिन्दू देवताओं और धार्मिक विश्वासों को नीचा दिखाया।

संगठन के पदाधिकारियों ने गुरुवार (14 नवंबर) को जयमकोंडम, कुवागम, अंदिमडम और सेंदुरई पुलिस स्टेशनों में शिक़ायतें दर्ज कीं। पुलिस ने बताया कि शिक़ायत पर सेंदुरई पुलिस ने एक सीएसआर (सामुदायिक सेवा रजिस्टर) रसीद जारी की है। सूत्रों ने कहा कि चार पुलिस स्टेशनों में इस संबंध में कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है।

तमिलनाडु कॉन्ग्रेस के एक नेता, अमेरिकाै वी नारायणन ने ट्वीट कर उन्होंने थिरुमावलवन की टिप्पणी पर अपना दु:ख व्यक्त किया, जिसके बाद उन्होंने बताया कि तिरुमलावलन को अपनी टिप्पणी पर पछतावा है और वो टिप्पणी तैश में आकर की गई थी।

बता दें कि थिरुमावलवन इससे पहले भी हिन्दुओं की आलोचना कर चुके हैं और बाद में वो अपने बयान से पलट जाते हैं। हालाँकि, चिदंबरम सांसद ने कथित तौर पर अपने भाषण पर ख़ेद व्यक्त किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने उनसे सार्वजनिक माफ़ी की माँग की है। संशयवादियों का कहना है कि थिरुमावलवन एक आदतन अपराधी है और वह संभवत: भविष्य में फिर इसी तरह के बयान देगा।

डील पक्की: 50-50 के लिए एनडीए छोड़ने वाली शिव सेना के 16/42 मंत्री, एनसीपी 14, कॉन्ग्रेस 12

मीडिया सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि भाजपा और एनडीए छोड़ यूपीए में शामिल हुई शिव सेना की कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ डील पक्की हो गई है। सत्ता के समझौते के कथित मसौदे के मुताबिक शिव सेना को मुख्यमंत्री की कुर्सी और 16 मंत्री पद मिलेंगे, वहीं एनसीपी को 14 और कॉन्ग्रेस को 12 विधायकों को मंत्री बनवाने का मौका मिलेगा।

शिव सेना प्रवक्ता संजय राउत ने पत्रकारों से बात करते हुए दावा किया है कि सेना अब 25 साल तक महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज रहेगी।

कल यानि गुरुवार, 14 नवंबर को शिवसेना, कॉन्ग्रेस और एनसीपी के बीच एक संयुक्त बैठक हुई थी जिसमें न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चर्चा की गई। मीडिया खबरों के अनुसार इस बैठक में तीनों पार्टियों के बीच एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार किया गया है। जिसे तीनों पार्टियों के शीर्ष के नेतृत्व के पास भेजा गया। अब अगर तीनों पार्टी के शीर्ष नेता इस कार्यक्रम पर अपनी सहमति देते हैं, तो जल्द ही महाराष्ट्र में सरकार बन सकती है। कहा जा रहा है कि इस साझा मसौदे में शिवसेना कट्टर हिंदुत्व की वैचारिक प्रतिबद्धता का त्याग करेगी यानी शिवसेना वीर सावरकर का नाम लेने से भी बचेगी।

इसके अलावा जनसत्ता की खबर के मुताबिक कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने इस बैठक में शिवसेना को शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिमों को पाँच प्रतिशत आरक्षण देने वाली उस योजना के लिए तैयार कर लिया गया है, जिसे पूर्व में कॉन्ग्रेस और एनसीपी सरकार द्वारा उनके कार्यकाल में शुरू किया गया था। लेकिन जब नई सरकार आई तो इसे आगे लागू नहीं किया गया।

ऐसे में अब पूरी उम्मीद है कि शिवसेना-कॉन्ग्रेस-एनसीपी का गठबंधन होता है तो ये योजना दोबारा लागू होगी। साथ ही कॉन्ग्रेस-एनसीपी द्वारा चुनावी घोषणा पत्र में कुछ अतिरिक्त वादों पर भी काम होगा। जिसमें किसानों की कर्जमाफी, बेरोजगार युवाओं को मासिक भत्ता, नए उद्योगों में स्थानीय युवाओं का नौकरी के लिए कोटा आदि लागू होने के कयास है।

288-सदस्यीय विधानसभा के लिए हुए चुनाव में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली। युति सरकार बननी तय थी, लेकिन भाजपा के पास अपने दम पर बहुमत नहीं होने के कारण शिवसेना ढाई साल के लिए सीएम पद मॉंग रही थी।

उसका दावा था कि उद्धव ठाकरे से अमित शाह ने इसका वादा किया था, लेकिन सेना ने ऐसे किसी वादे का सबूत पेश नहीं किया। फिर शिव सेना ज़्यादा सीटें मिलने पर भाजपा की नज़र बदल जाने का आरोप लगाने लगी। उसका कहना था कि पहले यह तय हुआ था कि चाहे जिसे जितनी सीटें मिलें, भाजपा और शिव सेना के मुख्यमंत्री ढाई-ढाई साल रहेंगे, और आधे-आधे मंत्रालय बाँटे जाएँगे, और अब ज्यादा सीटें जीतने पर राष्ट्रीय दल अपनी बात से पीछे हटना चाहता है।

फिर चुनाव नतीजों के दो हफ्ते बाद पूर्व भाजपा अध्यक्ष और महाराष्ट्र के कद्दावर नेता कहे जाने वाले नितिन गडकरी के हवाले से न्यूज़ 18 ने दावा किया था कि न केवल भारतीय जनता पार्टी 50-50 फॉर्मूले पर तैयार नहीं है, बल्कि चुनावों के पहले दोनों पार्टियों के बीच ऐसी कोई डील थी ही नहीं। 

इसके बाद शिव सेना ने भाजपा-एनडीए के बाहर सरकार बनाने की कोशिश तेज कर दी, जिसका नतीजा सत्ता का यह नया समीकरण सबके सामने है।