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4 साल में ग्रीन टैक्स का 20% ही केजरीवाल सरकार ने किया खर्च, फिर क्यों न घुटे दिल्ली का दम

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण हवा बेहद जहरीली हो गई है। आलम यह है कि लोगों के लिए घर से निकलना मुश्किल हो गया है। ऐसे में एक आरटीआई जवाब से पता चला है कि दिल्ली में AAP सरकार ने पिछले कई वर्षों में ग्रीन टैक्स के तहत एकत्रित किए गए अधिकतर धन राशि को खर्च नहीं किया है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली सरकार ने पर्यावरणीय समस्याओं को कम करने के लिए एकत्र किए गए धन का लगभग 20 फीसदी ही खर्च किया।

ग्रीन टैक्स पर आरटीआई का जवाब

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक एक आरटीआई जवाब में कहा गया कि दिल्ली सरकार ने साल 2015 में कुल ₹1174.67 करोड़ का ग्रीन टैक्स जमा किया था, जिसमें से केवल ₹272.51 करोड़ ही खर्च किए गए। इस ₹272 करोड़ में से ₹265 करोड़ सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खर्च किए गए। दिल्ली सरकार ने सड़कों की मरम्मत के लिए ग्रीन फंड के कुछ करोड़ रुपए ही खर्च किए। आरटीआई के जवाब में कहा गया है कि दिल्ली-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम पर ₹265 करोड़ खर्च किए गए। इसका मतलब यह है कि दिल्ली सरकार द्वारा ग्रीन टैक्स के रूप में एकत्र किए गए फंड में ₹902 करोड़ की बड़ी राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह भारी भरकम रकम का 77 फीसदी है।

आरटीआई के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि यह राजधानी के नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली सरकार के लापरवाह और असंवेदनशील रवैये को दर्शाता है। डॉ हर्षवर्धन ने कहा कि ₹900 करोड़ कोई छोटी राशि नहीं है। लोगों ने इसका भुगतान इसलिए किया ताकि सरकार इसका सही चीजों पर सही तरीके से खर्च करे। जिससे कि उनके लिए बेहतर जीवनयापन सुनिश्चित हो सके।

आरटीआई के जवाब पर दिल्ली की AAP सरकार ने कहा ये फंड का पैसा इस्तेमाल किया जाएगा। उनका कहना है कि ये पैसे एक निश्चित प्रक्रिया के तहत अगले 6 महीनों में खर्च किए जाएँगे। केजरीवाल सरकार ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रिक बसों को पहले ही चालू कर दिया गया है।

वैसे यह पहली बार नहीं है जब आरटीआई के जवाब से पता चला है कि दिल्ली सरकार किस तरह से इकट्ठा किए गए ग्रीन टैक्स को खर्च करने में असफल रही है। 2017 में इसी तरह की एक और आरटीआई के जवाब से पता चला था कि ₹787 करोड़ ग्रीन टैक्ट जमा किए गए थे, जिसमें से केवल ₹93 लाख खर्च किए गए थे। यह राशि टोल प्लाजा पर रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन सिस्टम के लिए दस्तावेज तैयार करने पर खर्च की गई थी।

2017 में दिल्ली सरकार ने यह भी कहा था कि 500 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के लिए अप्रयुक्त राशि का उपयोग किया जाएगा। इस साल मार्च में केजरीवाल सरकार ने 1000 इलेक्ट्रिक बसों की खरीद को मंजूरी दी थी, लेकिन अभी तक राजधानी में इलेक्ट्रिक बस सेवाएँ शुरू नहीं हुई हैं।

श्रीनगर के लाल चौक के पास सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला: 1 की मौत, करीब 15 घायल

जम्मू कश्मीर में श्रीनगर के हरि सिंह हाई स्ट्रीट पर ग्रेनेड हमले की ख़बर सामने आई है। पुलिस ने जानकारी दी है कि इस हमले में 1 की मौत और करीब 15 लोग घायल हुए हैं। आतंकियों द्वारा किया गया यह हमला दोपहर 1:20 बजे हुआ।

ख़बर के अनुसार, श्रीनगर में अमीराकदल पुल के पास गनी ख़ान इलाक़े में मौलाना आज़ाद रोड पर संदिग्ध आतंकवादियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाकर ग्रेनेड हमला किया। इसमें सुरक्षाकर्मियों समेत आम नागरिकों के घायल होने की ख़बर है। घायलों को पुलिस और सुरक्षाबलों की मदद से अस्पताल पहुँचाया गया है। साथ ही सुरक्षाबलोंं ने हमले के तुरंत बाद इलाक़े की घेराबंदी कर आतंकवादियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।

जानकारी के अनुसार, आतंकवादियों ने यह ग्रेनेट हमला उस वक्त किया जब लोग बााज़ार में ख़रीददारी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि यहाँ लगी रेहड़ियों से लोग फल-सब्ज़ियाँ लेने आते हैं और अक्सर यहाँ भीड़ लगी होती है। आतंकियों पर नज़र बनाए रखने के लिए इलाक़े में सुरक्षाबलों की तैनाती भी काफ़ी अधिक रहती है।

पिछले महीने 26 अक्टूबर को श्रीनगर के करन नगर इलाक़े में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल के एक दल पर आतंकवादियों ने ग्रेनेड हमला किया था। इस दौरान छ: जवान ज़ख़्मी हुए थे। हमला CRPF की 144वीं बटालियन को निशाना बनाकर किया गया था, जो सुरक्षा चौकी पर तैनात था। इससे पहले, हाई सिक्योरिटी कहे जाने वाले हरि सिंह मार्ग पर हुए ग्रेनेड हमले में 11 लोग घायल हुए थे।

इसके अलावा, कश्मीर के अनंतनाग में 5 अक्टूबर को भी आतंकियों ने एक ग्रेनेड हमले की घटना को अंजाम दिया था, जिसमें क़रीब 14 लोग घायल हुए थे। इस हमले में घायल हुए लोगों में एक पत्रकार और एक ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी भी शामिल थे।

17 साल के नाबालिग ने 7 साल की मासूम से किया रेप, पीड़िता कहती थी भैया: छठ पर दिल्ली में घिनौनी घटना

देश में नाबालिगों के ख़िलाफ़ यौन अपराध के मामले में कड़ी सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके ऐसी घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा। ख़ासकर हिन्दू पर्व-त्योहारों के समय इस तरह की घटनाओं का होना समाज और पुलिस-प्रशासन पर सवाल खड़े करता है। राजधानी दिल्ली में छठ के दौरान 7 साल की बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई है।

बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाला 17 साल का नाबालिग है। कोर्ट के निर्देश हमें उसका नाम बताने से रोकते हैं। लेकिन, आप समझ सकते हैं कि हिंदुओं के त्योहार के मौके पर इस तरह का दुष्कृत्य कौन कर सकता है।
विकास नगर के रनौला थाना के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर इलाक़े में तनाव का माहौल है। बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है और वो अस्पताल में भर्ती है।

पीड़िता के पिता अजय शर्मा बिहार के रहने वाले हैं। शर्मा दिल्ली में मजदूरी का काम करते हैं। छठ पूजा में जाने के लिए लिए उनकी बेटी तैयार हो रही थी, तभी आरोपित आया और उसका कोई सामान लेकर भाग गया। इसके बाद आरोपित का पीछा करते-करते बच्ची छत पर चली गई। वहाँ आरोपित ने बच्ची का मुँह बंद कर के उसके साथ इस दरिंदगी को अंजाम दिया। आरोपित 6 महीने पहले ही बच्ची के पड़ोस में रहने आया था।

आरोपित और बच्ची एक-दूसरे को जानते थे। बच्ची उसे भैया कहती थी और वो भी पीड़िता को बहन कहा करता था। पीड़िता के पिता ने बताया कि आरोपित हमेशा उनके घर में आया-जाया करता था। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी इस प्रकार का ख्याल नहीं आया कि वह ऐसा कर सकता है। पुलिस ने नाबालिग आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया है। आरोपित ने बच्ची के साथ छत पर बलात्कार करने के बाद उसे वहीं लहूलुहान छोड़ दिया और फरार हो गया। बच्ची किसी तरह अपनी माँ के पास पहुँची और आपबीती सुनाई।

पहले बच्ची को पास के अस्पताल में ले जाया गया लेकिन उसकी हालत नाजुक होने के कारण उसे दीनदयाल हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। इसके बाद पीड़िता के परिवार ने पुलिस को सूचना दी। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है।

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर प्रियंका चोपड़ा ने किया रियेक्ट: लोगों ने पूछा- सिगरेट पीने में नहीं होती क्या दिक्कत?

नेटफ्लिक्स की फिल्म द व्हाइट टाइगर की शूटिंग के लिए दिल्ली में मौजूद प्रियंका चोपड़ा को रविवार को एयर प्यूरिफायर मास्क लगाए देखा गया। हालाँकि, इस मास्क को पहनकर उन्होंने अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर भी अपलोड की, लेकिन तस्वीर पर लिखे कैप्शन के कारण यूजर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया।

दरअसल, मास्क पहनकर इंस्टाग्राम पर अपलोड की अपनी फोटो में प्रियंका चोपड़ा ने दिल्ली वालों के प्रति चिंता जताई और बताया कि उनके लिए शूटिंग के दौरान दिल्ली में रहना बहुत मुश्किल होता जा रहा है। पता नहीं दिल्ली वाले यहाँ कैसे रहते हैं।

प्रियंका चोपड़ा अपने पोस्ट के कारण हुई ट्रोल

अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इस शहर में फिलहाल शूटिंग करना बहुत मुश्किल हो रहा है, मुझे समझ नहीं आता कि लोग इन हालातों में यहाँ रह कैसे रहे हैं। शुक्र है कि हमारे पास एयर प्यूरीफायर और मास्क जैसी सुविधा है। गरीबों और बेघरों के लिए दुआ करें। सभी लोग अपना ध्यान रखें। “

इस पोस्ट के आने के बाद कुछ यूजर्स ने प्रियंका चोपड़ा को उन्हें उनकी बीते समय में शेयर की गई तस्वीरों की याद दिलाईं।

एक यूजर ने प्रियंका चोपड़ा से पूछा, सुट्टा पीने में दिक्कत नहीं होती, पॉल्यूशन से परेशानी है। वहीं, किसी ने उन्हें उनके पोस्ट पर दोगला कहा, तो किसी ने पूछा कि उन पटाखों का क्या, जो उन्होंने अपनी शादी में दगवाए?

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गौरतलब है कि बीते दिनों प्रियंका चोपड़ा ने अपने पति निक जोनस के साथ छुट्टियाँ मनाते हुए कुछ तस्वीरें शेयर की थी। जिसमें वे सबके बीच सिगरेट पीती नजर आई थी , जबकि निक सिगार पीते। इस तस्वीर के आधार पर ही उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया और उनसे पूछा गया कि उनके दमे का क्या हाल है?

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J&K को बेच कर खा जाएँगे इमरान: मौलाना ने रैली में Pak PM को कहा- मोदी का यार और गद्दार

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने जम्मू कश्मीर को लेकर दुनियाभर में जितना हो-हल्ला मचाया, उससे उन्हीं के देश के नेता ख़ुश नहीं है। पाकिस्तान के विपक्षी नेताओं को लगता है कि इमरान ने कश्मीर को लेकर जो कुछ भी किया, उसका पाकिस्तान पर कोई सकारात्मक असर नहीं हुआ। इधर भारत की कूटनीति सफल रही और पीएम मोदी ने किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर बिना इमरान का नाम लिए पाकिस्तान को धो डाला। मौलाना फज़ल-उर-रहमान की ‘आज़ादी मार्च’ में भी कश्मीर मुद्दा गूँजा। इस दौरान पाकिस्तान नेताओं में जम्मू कश्मीर को लेकर अपने देश की नाकामी का दर्द छलका।

मौलाना ने आज़ादी मार्च में लाखों की भीड़ को सम्बोधित करते हुए इमरान ख़ान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब नरेंद्र मोदी भारत में चुनाव प्रचार अभियान चला रहे थे, तब पाक पीएम इमरान ख़ान ने कहा था कि जब मोदी जीत कर आएँगे तो वो कश्मीर मसले को हल कर देंगे। मौलाना ने पाकिस्तान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि देखो मोदी कामयाब भी हो गया और कश्मीर का मसला हल भी हो गया। उन्होंने इमरान ख़ान के उस बयान को भी आड़े हाथों लिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वो कश्मीर की जंग लड़ रहे हैं।

मौलाना ने कहा कि इमरान ख़ान कश्मीर की जंग नहीं लड़ रहे हैं बल्कि वो कश्मीर को बेच कर कमाने की फ़िराक़ में हैं। उन्होंने इमरान की सरकार को ‘कश्मीरफरोश’ करार देते हुए कहा कि वो सभी मगरमच्छ के आँसू बहा रहे हैं। इमरान ख़ान ने संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंबली के मंच पर लम्बा-चौड़ा भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने इस्लाम, पैगम्बर मुहम्मद और कश्मीर को ही मुद्दा बनाया था। बाद में इमरान के भाषण की उनकी पार्टी ने ख़ूब प्रशंसा की थी। मौलाना ने पूछा कि अगर इमरान ने यूएन में इतनी अच्छी तकरीर की तो उसका कोई फ़ायदा क्यों नहीं हुआ?

मौलाना ने इस ओर इशारा किया कि कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान एकदम अलग-थलग पड़ चुका है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब भी वोटिंग का मौक़ा आया, तब उन देशों ने भी पाकिस्तान के ख़िलाफ़ वोट दिया, जो अब तक पाकिस्तान का साथ देते आ रहे थे। इसके बाद मौलाना के ‘आज़ादी मार्च’ में उपस्थित नेताओं ने ‘मोदी का यार है, गद्दार है, गद्दार है’ का नारा लगाते हुए अपने ही प्रधानमंत्री को घेरा। रैली में उपस्थित जनता ने भी इस नारे को जोर से दोहराया। मौलाना ने एक तरह से कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान सरकार को पूरी तरह नाकाम करार दिया।

सरकार-विरोधी मार्च में मौलाना को पाकिस्तान की जनता और दोनों प्रमुख विपक्षी दलों का भरपूर सहयोग मिल रहा है। नवाज़ शरीफ की पार्टी ने उनके भाई शाहबाज़ शरीफ की अध्यक्षता में बैठक बुला कर चर्चा की है कि मौलाना को कब तक समर्थन देना है? आज़ादी मार्च में कैम्प लगा कर लोगों के सोने व खाने-पीने की भी व्यवस्था की जा रही है। लाहौर हाईकोर्ट में मौलाना के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया गया है। मौलाना ने एक बैठक बुला कर आगे की रणनीति पर चर्चा की है और कहा है कि उनके पास प्लान बी और प्लान सी भी है।

मंसूरी समुदाय की कब्रिस्तान पर भू-माफियों का कब्जा: बढ़ा तनाव, यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश

उत्तरप्रदेश के कौशांबी में भू-माफियों द्वारा एक कब्रिस्तान पर किए कब्जे के कारण उपजे तनाव की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि नगर पंचायत के अंसारगंज मोहल्ले में स्थित ईदगाह के समीप मंसूरी समुदाय के पूर्वजों का कब्रिस्तान है। जिसपर भू-माफियों द्वारा कुछ समय पहले कब्जा किया गया था और अब उसपर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। पूर्वजों के कब्रिस्तान पर जबरन कब्जा देखकर मंसूरी समुदाय के लोगों में तनाव फैल गया। इसलिए एसडीएम ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिए।

उल्लेखनीय है कि करारी नगर पंचायत के नया पुरवा, तुरतीपुर, रहीमपर मोलानी गाँव में मंसूरी समुदाय के लोग काफी समय से रहते हैं।

इनका दावा है कि उनके समुदाय के पूर्वजों का सैंकड़ो वर्ष पुराना कब्रिस्तान अंसारगंज में स्थित है। जिसका उल्लेख राजस्व अभिलेखों में भी है। लेकिन कुछ समय पहले कस्बे के लोगों ने इसपर कब्जा कर लिया था और 2 दिन पहले इसपर निर्माण कार्य शुरू कर दिया।

इस संबंध में मंसूरी समुदाय के आशिक अली मंसूरी, हसन अली मंसूरी, रफीक अहमद मंसूरी, मुस्ताक अहमद मंसूरी, हासिम अली, अहमद अली ने उच्च अधिकारियों को शिकायत पत्र भी दिया। उन्होने उक्त बातों के अलावा अपने पत्र में बताया कि उनके समुदाय के कब्रिस्तान पर धनबल और बाहुबल के जरिए भू-माफिए कब्जा कर रहे हैं। जिससे इलाके में तनाव है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस पूरी घटना की जानकारी मिलते ही एसडीएम राजेश चंद्र ने इस मामले पर अग्रिम आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।

चीन से सटे उत्तराखंड के इलाकों में एयरफील्ड बना रही है सेना: जनरल रावत

भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने बताया है कि चीन की सीमा से सटे उत्तराखंड के इलाकों में एयरफील्ड बनाए जा रहे हैं। सीमाई इलाकों में सशस्त्र बलों के लिए कनेक्टिविटी बढ़ाने के मकसद सेना इनका निर्माण करवा रही है। वे रविवार (3 नवंबर 2019) को टिहरी में ‘रैबार कॉन्फ्रेंस’ के दौरान अपनी बात रख रहे थे।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सेना प्रमुख ने कहा कि चीन से सटे इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने, आधारभूत और दूरसंचार संरचनाओं को मजबूत करने में सेना और वायु सेना उत्तराखंड सरकार को हर तरीके से मदद मुहैया कराएगी। उन्होंने बताया कि सीमाई इलाकों के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में एडवांस लैंडिंग की सुविधा के लिए ठोस क़दम उठाए जा रहे हैं।

सेना प्रमुख ने कहा, “हाल में मैं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिला था। उन्होंने कहा कि चीन की सीमा से सटे इलाकों में एडवांस लैंडिंग के लिए एयरफील्ड का निर्माण किया जाना चाहिए। हम तेज़ी से इस पर काम कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारतीय सेना कनेक्टिविटी में सुधार के लिए हर संभव प्रयास करेगी, फिर चाहे वो सड़क सम्पर्क हो या हवाई सम्पर्क। जनरल ने कहा, “सेना सीमावर्ती इलाक़ों में रहने वाले स्थानीय लोगों की भी मदद कर रही है, जैसे अखरोट और पाइन-नट की खेती।”

नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान के उकसावे वाली कार्रवाई को लेकर जनरल रावत ने कहा कि सेना प्रभावी तरीके से जवाब दे रही है। उन्होंने कहा, “मैं आपको आश्वस्त करना चाहता हूँ कि हम हर संभव उपाय कर रहे हैं और प्रभावी ढंग से जवाब दे रहे हैं।”

‘रैबार कॉन्फ्रेंस’ का आयोजन उत्तराखंड सरकार की ओर से सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में विकास को रफ्तार देने के मकसद से किया जाता है। यह आयोजन का दूसरा वर्ष है। इस कार्यक्रम में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत सहित कई हस्तियों ने शिरक़त की थी।

सीमावर्ती क्षेत्रों के सामरिक महत्व को देखते हुए, भारत सरकार देश की सुरक्षा संबंधी तैयारियों को बढ़ावा देने के लिए सभी सड़कों, संचार-लाइनों, रेलवे बुनियादी ढाँचे आदि जैसे आवश्यक बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रही है। हाल ही में, सीमा सड़क संगठन (BRO) ने डोकलाम घाटी को जोड़ने के लिए एक वैकल्पिक सड़क का निर्माण किया था। भारत और चीन के बीच 2017 में चुम्बी घाटी में 73 दिनों तक सैन्य गतिरोध देखने को मिला था। नवनिर्मित वैकल्पिक सड़क से सीमा पर बलों की तैनाती सुगम हो जाएगी।

कॉमेडी के नाम पर स्वरा भास्कर की फूहड़ता: 4 साल के बच्चे को कहा- चू**या, कमीना…

टेलीविज़न पर दिखाए जाने वाले कॉमेडी शो का मक़सद आपको हँसाना होता है। रोज़मर्रा के जीवन में लोग कभी-कभी कुछ हँसी के ठहाके लगाने के लिए कॉमेडी शो को देखने के लिए अपना टीवी ऑन कर देते हैं। इस तरह के कार्यक्रमों में इस बात का ख़ासतौर पर ध्यान रखा जाता है कि हँसी के ठहाकों के लिए कहीं ऐसे शब्दों का इस्तेमाल न हो जाए जिससे किसी की भावनाएँ आहत हो जाएँ। लेकिन, अभिनेत्री स्वरा भास्कर को इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। इसलिए वो कहीं भी कुछ भी बोल बैठती हैं। 

ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो एक चार साल के बाल कलाकार का ज़िक्र करती नज़र आईं। इस दौरान उन्होंने उस बाल कलाकार को चू ** या और कमीना कहा। उन्होंने यह टिप्पणी यूट्यूब पर अबीश मैथ्यू के कॉमेडी शो ‘Son of Abish’ के हालिया एपिसोड में की।

इस एपिसोड में स्वरा अपने शुरुआती विज्ञापन शूट के बारे में बता रही थी, जोकि एक साबुन से संबंधित था। इस दौरान वो बताती हैं कि वो इस बात से काफ़ी आश्चर्यचकित रह गई थीं जब एक चार साल के बाल कलाकार ने उन्हें ‘ऑन्टी’ कहकर संबोधित किया। स्वरा ने इस घटना का ज़िक्र करते हुए उस बाल कलाकार को ‘चू ** या’ कहा। भले ही दर्शकों को स्वरा की इस बात पर हँसी आ गई हो, लेकिन बच्चों के सन्दर्भ में कही गई यह बात बेहद अपमानजनित है।

कॉमेडी शो में वह उस विज्ञापन के बारे में अधिक बात करती हैं, जहाँ वो बाल कलाकार बाथरुम जाने के लिए पूछ रहा था और कोई उस बच्चे की मदद नहीं कर रहा था। इस पर स्वरा को उस बच्चे पर दया आ गई। इस बात को बताते हुए स्वरा ने बच्चे को कमीना कहकर संबोधित किया। 

स्वरा भास्कर ने जिस अंदाज़ में यह सब बातें कही उस अंदाज़ को भले ही दर्शकों ने पसंद किया हो, लेकिन एक बाल कलाकार को इस तरह से संबोधित करके स्वरा ने अपने अभद्र व्यवहार का ही प्रमाण दिया है।

आज़ादी मार्च से तिलमिलाए इमरान: मौलाना पर FIR, प्रदर्शनकारियों ने किया देश ठप्प करने का ऐलान

विपक्षी दलों के ‘आजादी मार्च’ से डरे पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने रविवार (नवंबर 3, 2019) को जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल (JUI-F) के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मौलाना पर प्रधानमंत्री, सरकारी संस्थानों के खिलाफ लोगों को भड़काने के लिए यह मामला दर्ज किया गया। शिकायत में कहा गया कि मौलाना और उनके समर्थक अशांति फैलाने और देशद्रोह के दोषी हैं। इसलिए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू की जाए।

इस्लामाबाद में इस वक्त आजादी मार्च के हजारों प्रदर्शनकारी 31 अक्टूबर से जमे हुए हैं। मौलाना फजलुर रहमान जहाँ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान के इस्तीफे, देश में नया चुनाव और एनआरओ (नेशनल रेकन्सिलिएशन आर्डिनेंस) पर अड़े हैं, वहीं सरकार ने इन माँगों को खारिज कर दिया है। इमरान खान ने कहा है कि उनकी इस्तीफा देने की कोई योजना नहीं है।

बता दें कि मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्तीफा देने के लिए रविवार (नवंबर 3, 2019) तक की मोहलत दी थी। इस्तीफे के लिए दी गई समय सीमा रविवार रात समाप्त हो जाने के बाद मौलाना फजलुर रहमान ने पूरे देश में बंद की धमकी दी है। उन्होंने इस्लामाबाद में एक प्रदर्शन रैली को संबोधित करते हुए कहा कि मकसद पूरा होने तक प्रदर्शन जारी रहेगा। रहमान ने कहा कि लोगों की भीड़ इमरान को सत्ता से बेदखल करने तक बनी रहेगी।

मौलाना ने गरजते हुए कहा, “यह साफ है कि शासन करने वालों को जाना होगा और लोगों को निष्पक्ष चुनाव के जरिए नया शासक चुनने का मौका देना होगा। यह स्पष्ट है कि इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं है। अभी इस्लामाबाद बंद है, फिर हम पूरा पाकिस्तान बंद करेंगे। हम रुकेंगे नहीं और अपनी लड़ाई को जारी रखेंगे।” उन्होंने कहा कि वह सोमवार (नवंबर 4, 2019) को विपक्ष के अन्य नेताओं से मुलाकात की योजना बना रहे हैं ताकि आगे के कदम के बारे में सर्वसम्मति से फैसला किया जा सके। 

आजादी मार्च की भयावहता देखते हुए ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रशासन से 5,000 अतिरिक्त पुलिस बल की माँग की गई है। वहीं, इस्लामाबाद में तैनाती के लिए 3,000 अतिरक्त पुलिस बल भेज दिए गए हैं। सरकार की पूरी कोशिश ये है कि प्रदर्शन स्थल से मौलाना और उसके अनुयायियों को आगे न बढ़ने दिया जाए, लेकिन मौलाना ने इमरान ख़ान द्वारा इस्तीफा न देने की सूरत में मार्च को आगे बढ़ाने का फ़ैसला लिया है।

साथ ही मौलाना ने क़ानून-व्यवस्था की बात करते हुए कहा कि पिछले 15 महीनों से चल रहे प्रदर्शन के दौरान भी संयम बरता गया, यह दिखाता है कि प्रदर्शनकारी क़ानून-व्यवस्था को लेकर कितने सजग हैं। वहीं मौलाना ने यह आरोप भी लगाया कि इमरान ख़ान की सरकार ने 1 साल में जितना क़र्ज़ लिया, उतना पिछले 70 साल की सभी सरकारों ने मिल कर भी नहीं लिया।

ऑर्थोडॉक्स और जैकोबाइट के बीच विवाद, दफन नहीं हो पाई 91 साल की महिला

चर्च के दो गुटों के बीच विवाद की वजह से 91 साल की एक महिला को दफनाने में अड़चन पैदा हो गई। दफनाने की विधि को लेकर मलानकारा ऑर्थोडॉक्स चर्च और जैकोबाइट सीरियन चर्च के बीच मतभेद के कारण यह स्थिति पैदा हुई। ख़बर के अनुसार, सोमवार (28 अक्टूबर) को किजाकेकेवेटिल की 91 वर्षीय महिला मरियम्मा राजन की मौत हो गई। मृतक जैकोबाइट ईसाई थी, जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के बीच तनाव की स्थिति के चलते उनके अंतिम संस्कार में देरी हुई।

जैकोबाइट गुट चाहता था कि मरियम्मा के दफनाने की विधि उनके चर्च के पादरी घर पर पूरा करें। वे नहीं चाहते थे कि कब्रिस्तान में ऑर्थोडॉक्स पादरी अंतिम संस्कार की विधि को पूरा करें। सेंट मैरी चर्च ऑर्थोडॉक्स गुट के नियंत्रण में है। लिहाजा उन्होंने इसे अस्वीकार कर दिया। जानकारी के अनुसार, ऑर्थोडॉक्स गुट द्वारा चर्च के कब्रिस्तान में मृतका को दफ़नाने का विरोध करने के बाद पुलिस अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों ने चर्च से 100 मीटर की दूरी पर शव यात्रा को रोक दिया। इसके बाद मृतका के परिजन अंतिम संस्कार किए बिना ही शव के साथ लौट गए।

उच्च न्यायालय के एक आदेश के अनुसार, जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स गुटों के सदस्यों के पास एकसमान अधिकार हैं। हालाँकि, 1934 के संविधान के अनुसार केवल नियुक्त पादरी ही दफ़न करने की प्रक्रिया का संचालन कर सकते हैं। ज़िला कलेक्टर अदीला अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने जैकोबाइट और ऑर्थोडॉक्स दोनों गुटों के साथ चर्चा की। प्रशासन के मुताबिक दोनों गुट के अपने रुख पर अड़े रहने के कारण मध्यस्थता नाकाम रही।

बताा दें कि कट्टचिरा स्थित सेंट मैरी चर्च पिछले कई महीनों से बंद था क्योंकि इसके स्वामित्व को लेकर ऑर्थोडॉक्स और जैकबाइट गुटों के बीच कई बार झड़पें हुई थीं। हालाँकि, बाद में चर्च को जुलाई में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर ऑर्थोडॉक्स गुट को सौंप दिया गया था।

पिछले साल भी इसी तरह की लड़ाई सामने आई थी। 95 वर्षीय एक व्यक्ति के शव को चर्च के कब्रिस्तान में दफ़नाने से इनकार कर दिया गया था, क्योंकि दफनाने की विधि पूरा कराने के लिए पहुॅंचा उसका पोता जैकोबाइट पादरी था। दोनों गुटों के बीच मृतकों को दफ़नाने को लेकर झगड़े कई मामले सामने आए चुके हैं। ऐसे मामलों में, मृतकों के शवों को कई दिनों तक फ्रीज (बर्फ़ में जमा) कर दिया जाता है, क्योंकि उनके परिवार के सदस्य अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के लिए कई दिनों तक संघर्ष करते रहते हैं।