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मुर्शिदाबाद हत्याकांड: BJP ने गृहमंत्री-राष्ट्रपति से माँगा बंगाल पर चर्चा के लिए समय

मुर्शिदाबाद हत्याकांड में राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और गृह मंत्री अमित शाह से भारतीय जनता पार्टी ने मिलने का समय माँगा है, ताकि बंगाल की कानून-व्यवस्था के बारे में उन्हें अवगत कराया जा सके। यह जानकारी पार्टी के राज्य प्रभारी और महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने दी। “हमने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह जी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद जी से समय माँगा है, ताकि उन्हें बंगाल में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के बारे में उन्हें सूचित किया जा सके। लोगों की दिनदहाड़े हत्या हो रही है।” उल्लेखनीय है कि अमित शाह भाजपा के ही राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं।

80 कार्यकर्ताओं की हत्या का ब्यौरा सौंपेगी भाजपा

हालाँकि, वार्ता का केंद्रबिंदु हालिया बन्धु प्रकाश पाल की परिवार समेत हत्या के रहने की उम्मीद की जा सकती है, लेकिन भाजपा ने गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रपति कोविंद को सौंपने के लिए अन्य दस्तावेज़ भी तैयार किए हैं। इनमें पिछले सालों में बंगाल में मारे गए उन भाजपा कार्यकर्ताओं की भी सूची है, जिनके लिए पितृ पक्ष में भाजपा के ही कार्यकारी अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने पिंड दान किया था। उस कार्यक्रम के बारे में बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा था कि अमित शाह को इसकी जानकारी है और वे इसमें शिरकत करने का प्रयास करेंगे।

अब तक चार हिरासत में

मुर्शिदाबाद हत्याकांड में पुलिस ने दो और लोगों को शक के आधार पर हिरासत में ले लिया है, जिससे हिरासत में आए लोगों की संख्या कुल 4 हो गई है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी पुलिस और राज्य मशीनरी की ओर से अपेक्षित गंभीरता का प्रदर्शन नहीं किए जाने पर नाराज़गी जताई थी। एक मामूली स्कूल शिक्षक बन्धु गोपाल पाल, उनकी गर्भवती पत्नी और 8 साल के बेटे की धारदार हथियार से हत्या के मामले को हृदयविदारक बताते हुए राज्यपाल ने DGP और राज्य के मुख्य सचिव से उन्हें यथाशीघ्र मामले पर अपडेट देने के लिए कहा था।

नदीम खान तीसरी पत्नी सीमा का गला रेतने के आरोप में गिरफ्तार, सोशल मीडिया की मदद से पुलिस ने ढूँढ़ निकाला

उत्तर प्रदेश की राजधानी में एक और रूह कंपा देने वाले मामले में नदीम खान को पुलिस ने गुरुवार (10 अक्टूबर) को पत्नी सीमा सोनी की हत्या के प्रयास में गिरफ्तार कर लिया। मीडिया खबरों के अनुसार नदीम ने सीमा का गला रेत कर बुधवार रात को उसे शहीद पथ के पास मरा समझकर छोड़ दिया था। संयोगवश न केवल सीमा की मौत घाव से नहीं हुई, बल्कि किसी राहगीर ने पुलिस को सूचित कर उसे सही समय पर अस्पताल भी पहुँचा दिया।

चिट पर लिखा आधा नंबर, पुलिस ने लगाया Permutation–Combination  

लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (Senior superintendent of police, SSP) कलानिधि नैथानी ने बताया कि आधी बेहोशी की हालत में भी महिला ने अपना नाम सीमा सोनी एक कागज़ पर लिख कर बता दिया। उसने कागज़ पर एक मोबाइल नंबर भी अंग्रेज़ी के ‘N’ अक्षर के साथ लिखा, जो अंततः नदीम तक पुलिस को ले गया।

नैथानी के मुताबिक सीमा का दिया हुआ नंबर तो गलत निकला, लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी। इस अंदाज़े से कि शायद गलती आखिर के ही 3-4 अंकों में रही होगी, नैथानी ने Permutation-Combination नामक गणित की टेक्नीक लगानी शुरू की, और हर नंबर को WhatsApp, TrueCaller आदि पर चेक किया। इन्हीं में से एक नंबर WhatsApp और TrueCaller पर ‘नदीम खान’ नाम से दिखा, जिससे सीमा का ‘N’ लिखना समझ में आया। इसके बाद फेसबुक पर ‘नदीम खान’ सर्च किए जाने पर एक प्रोफाइल की तस्वीर नंबर की WhatsApp प्रोफाइल पिक्चर से मेल खा गई।

फेसबुक पर सीमा खान?

फेसबुक पर पुलिस को नदीम की फ्रेंड लिस्ट में ‘सीमा खान’ दिखी, जिसकी शक्ल घायल सीमा सोनी से मिलती थी, और उसके हाथ में अंगूठियाँ भी वैसे ही थीं, जैसे सीमा सोनी ने पहन रखी थी। वहीं से पुलिस को यकीन हो गया कि नदीम खान का मामले से कोई कनेक्शन है। उसके फेसबुक पर मौजूद एक वैन का नंबर पुलिस ने निकलवाया तो वह एक स्कूल वैन का नंबर निकला, जिसका नदीम चालक था।

पैसे की चिक-चिक से तंग आकर किचन के चाकू से किया हमला

उसके घर का पता निकलवा कर जब पुलिस नदीम के घर पहुँची तो देखा आरोपित शहर छोड़ कर अपने पैतृक शहर बलरामपुर निकल भागने की फ़िराक में था, वहीं पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। उसके पास से हमले में इस्तेमाल किचन का चाकू बरामद हुआ, और सीमा का खून उसकी कार में भी मिला। इसके बाद हुई पूछताछ में पूरी बात पता चली।

विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में नदीम की कुल पत्नियों की संख्या में अंतर है, लेकिन सीमा के उसकी पहली पत्नी न होने की बात पर सभी सहमत हैं। तो नदीम की दूसरी/तीसरी पत्नी सीमा ने नदीम के साथ रहने के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी थी, और काफ़ी समय से उस पर पैसे देने का दबाव बना रही थी जिस वजह से वह अपनी पहली पत्नी/पत्नियों को पैसा नहीं दे पा रहा था। इसी विवाद से बचने के लिए उसने प्लान बनाकर सीमा को घुमाने के बहाने गाड़ी में बिठाया और शहीद पथ की ओर ले गया।

डीजीपी मुख्यालय के पास उसने सन्नाटा पाकर सीमा का गला रेता, और उसे मरा हुआ समझकर कार से धकेल कर भाग निकला। NBT की खबर के मुताबिक नदीम की बाकी दोनों पत्नियों में से एक नेहा को कैंसर है, और वह सीमा की बहन भी है। इसके बावजूद सीमा उस पर नेहा की मदद न करने, उससे न मिलने का दबाव बना रही थी।

‘UP में RSS के कट्टरपंथियों की हरकत देखिए…’ मथुरा पुलिस ने किया ‘गिरोह’ के हिन्दू विरोधी एजेंडे को बेनकाब

हिन्दुओं के खिलाफ घृणा फ़ैलाने वालों ने एक बार फिर ज़हर उगला था मगर पुलिस की सूझबूझ ने इसके चलते माहौल बिगड़ने से पहले ही रोक लिया, @Notmukerji नामक ट्विटर एकाउंट से एक वीडियो शेयर किया गया जिसके साथ हिन्दुओं पर आरोप मढ़ते हुए लिखा गया-

“यूपी में आरएसएस के हिन्दू कट्टरपंथियों की हरकत देखिए, एक इसाई दंपत्ति को अपनी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा करने का विरोध करने पर जिंदा जला दिया गया, उनका बेटा वहीं पड़ा बिलखता रहा। यह कितनी भयावह घटना है। दुनिया ने तो जैसे भारत में हो रहे इस अत्याचार पर आँख ही मूँद ली है।”

इतना पोस्ट होते ही यह ट्वीट वायरल हो गया, करीब 5500 रीट्वीट के साथ इसने बहुत लोगों का ध्यान खींचा मगर हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाने वालों की बुरी किस्मत थी क्योंकि उनका यह एजेंडा ज्यादा चल नहीं सका, मथुरा पुलिस ने इस वायरल होते ट्वीट पर संज्ञान लेते हुए इसकी सच्चाई खंगाल निकाल कर सामने रख दी और बताया कि यह पूरी तरह से एक फेक न्यूज़ है जिसे सिर्फ माहौल बिगाड़ने के उद्देश्य से फैलाया जा रहा है.

मथुरा पुलिस ने पूरे मामले की छानबीन करने के बाद फेक न्यूज़ का खंडन करते हुए फैलाए जा रहे वीडियो से सम्बंधित घटना के बारे में अपने ट्वीट में बताया कि वीडियो दरअसल 28 अगस्त 2019 की एक घटना से सम्बंधित है जिसमें दंपत्ति नगर के एक नामी-गिरामी व्यक्ति द्वारा घर पर कब्ज़ा करने और धमकी दिए जाने से परेशान थे और थक हार-कर उन्होंने थाने के सामने आत्मदाह करने की कोशिश की थी।(हालाँकि बाद में दोनों को आग से बचाकर पुलिस उन्हें अस्पताल ले गई जहाँ उनका उपचार हो सके)

मथुरा पुलिस ने इस मामले का पूरा खंडन करते हुए कहा है कि मामले को बेवजह सांप्रदायिक रंग देकर माहौल बिगाड़ने तथा आरएसएस और हिन्दुओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है जबकि असल मामला फैलाई जा रही फेक न्यूज़ से बहुत अलग है।

मोदी की हर बात को स्टंट बताने वाला लिब्रांडू गिरोह कल को अपनी ही विष्ठा खा सकता है अगर…

पढ़े-लिखे दिखने वाले लोग, डिग्री-डिप्लोमा वाले लोग, स्वघोषित बुद्धिजीवी आदि से ले कर फेसबुकिया मायाजाल में दिन के दस घंटे निकालने वाले मोदी द्वारा समुद्र किनारे, बालू से प्लास्टिक बीनने को पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं। वो लिख रहे हैं कि ‘पीआर जहाँ भी मिले बीन लेना चाहिए’। कोई ये कह रहा है कि सब दिखावा है, कोई ये भी कह देगा कि देखो, प्लास्टिक बीन कर, प्लास्टिक की थैली में ही रख रहा है। और सबसे उन्नत नस्ल के चिंटू वो होंगे जो कहेंगे एक दिन तो साफ कर दिया, कल कौन करेगा?

ये परिवर्तन छः सालों में आया है कि कुछ लोग इतने बौरा गए हैं कि व्हाट्सएप्प पर घूमता वो चुटकुला अगले दो अक्टूबर तक सही हो जाएगा जिसमें लिखा होता है कि लिब्रांडु समूह और उनके समर्थक खाने के बाद उल्टी करने लगेंगे, अगर मोदी कह दे कि खाने के कुछ घंटे बाद, आदमी विष्ठा करता है।

सरकार की आलोचना होनी चाहिए, जहाँ ज़रूरी है बेशक कीजिए, लेकिन ये सोचना कि मोदी फलाँ दिन ही झाड़ू क्यों लगाता है, मोदी एक दिन ही प्लास्टिक कचरा क्यों इकट्ठा कर रहा है, मोदी एक दिन ही फौज से मिलने क्यों जा रहा है, मोदी एक दिन ही वेस्ती क्यों पहन रहा है, इससे आपकी मानसिकता पर आप स्वयं प्रकाश डाल रहे हैं।

मोदी ने तमिलनाडु जाने पर वहाँ की वेशभूषा धारण की, वहाँ का भोजन किया। लोग कह रहे हैं कि ये तो चुनावों के कारण हो रहा है। लोग यह बहुत ही आराम से भूल जाते हैं कि मोदी जब भी किसी ऐसे इलाके में जाते हैं, वो वहाँ का पहनावा या कोई विशिष्ट चीज जरूर धारण करते हैं। अरुणाचल में उन्होंने एक टोपी पहनी थी, जो कि वहाँ की जनजाति से संबंधित था। लोगों ने मजाक उड़ाया था।

आप पूछते हैं ना कि साउथ में नॉर्थ वालों को तो ऐसे करते हैं, वैसे करते हैं, या यह कि उत्तरपूर्व के लोग तो खुद को भारत का हिस्सा नहीं मानते। जब कोई बड़ा नेता सांकेतिक तौर पर ऐसा करता है तब आप उपहास करते हैं। तब आपको भारत की विविधता के लिए सम्मान नहीं दिखता। तब आप अपनी घृणा की आग में जल रहे होते हैं, और अपने हृदय की कालिमा को फेसबुक पर अपने ही देश के लाखों-करोड़ों लोगों का उपहास करने वाले शब्दों के रूप में उतार देते हैं।

जी नहीं, प्रधानमंत्री का काम न तो झाड़ू देना है, न कचरा उठाना

कभी सोचा है कि प्रधानमंत्री को ऐसा क्यों करना पड़ रहा है? जिन कूढमगज लोगों ने इसे पीआर और स्टंट कहा है, उनसे सीधा सवाल यह है कि यह पब्लिसिटी स्टंट कैसे है? इससे पब्लिसिटी कैसे मिलती है? क्या मोदी की कोई फिल्म आने वाली है? क्या मोदी ग्रीन ऑस्कर के लिए प्रयासरत है? या, मोदी को ऐसा लगता है कि समुद्र तट पर कचरा उठाते देख उसे तमिलनाडु के लोगों का वोट मिल जाएगा?

ये किस तरह का तर्क है? इतनी दुर्भावना ले कर ज़िंदा ही क्यों हैं ऐसे लोग? इतनी घृणा ले कर हर दिन कैसे बिता रहे हैं लोग? क्या ये आश्चर्य की बात नहीं है कि आपको समुद्र तट साफ भी चाहिए, और कोई इसे एक जन-अभियान बनाना चाहता है तो आपको दर्द होने लगता है? लोग इसी तरह तब भी हँस रहे थे जब स्वच्छता अभियान शुरु हुआ था। लोग तब भी हँस रहे थे जब ‘शौचालय’ बनवाने की बात शुरु हुई थी।

तब यही चम्पू मंडली ये कह कर हँस रही थी कि शौचालय बनाने से क्या होगा, उसको तो लोग इस्तेमाल ही नहीं कर रहे। रवीश कुमार जैसे महान पत्रकारों ने गाँव-गाँव घूम कर शौचालयों में बाकायदा कैमरा लगा कर दिखाया था कि नहीं भाई, लोग तो इसमें विष्ठा नहीं त्याग रहे। मतलब, इनकी इच्छा यह थी कि आप पहले शौचालय बनवाओ, फिर बाल्टी में पानी ले कर खड़े रहो, और जब आदमी शौच कर ले, तो पानी डाल दो, उन्हें साबुन दो और चापा कल चला कर हाथ धुलवा दो।

और ये काम कौन करे? ये काम वही करेगा जिसे ये फालतू का आइडिया आया था कि देश में करोड़ों लोग खुले में शौच करते हैं, जिनसे उन्हें बीमारी होती है, भूजल प्रदूषित होता है, महिलाओं के लिए ये हर दिन मरने जैसी स्थिति है, इसलिए इन्हें शौचालय बना कर दिया जाए। और हाँ, हर बात में ‘पब्लिसिटी स्टंट’ लिख देने वाले तो ये भी कह देंगे कि मोदी को न सिर्फ बाल्टी में पानी ले कर खड़ा होना चाहिए बल्कि उससे पहले वाला स्टेप भी कर देना चाहिए ताकि आम आदमी को हाथ न धोना पड़े।

ये घृणा नहीं तो और क्या है?

हमारा समाज बहुत ही सिनिकल है, और लोग सनकल हैं। ‘सनकल’ अंगिका का एक शब्द है जो असामान्य व्यवहार करने वाले समझदार लोगों के प्रयोग में लाया जाता है। बाकी समय वो खूब शायरी करेंगे, विदेशी नीति पर चर्चा करेंगे, अर्थव्यवस्था पर लेख लिखेंगे, लेकिन जो बात एकदम सीधी हो, और फ्रेम में मोदी आ जाए तो वो सनक जाते हैं। तब सारा ज्ञान भितरामपुर चला जाता है, और भीतर की कुबुद्धि बाहर वमन हो जाती है।

वहीं, ‘सिनिकल’ अंग्रेजी का शब्द है जिसका अर्थ है वह अवस्था जो हर बात में मीन-मेख निकालता हो। ऐसे लोगों को छिद्रान्वेषी भी कहते हैं। ये वैसे लोग होते हैं जो हर बात में सिर्फ बुराई ही निकालते हैं। इन्हें बुलेट ट्रेन नहीं चाहिए क्योंकि लोग भूखे मर रहे हैं, इन्हें चन्द्रयान नहीं चाहिए क्योंकि लोग बीमार हैं, इन्हें राफेल नहीं चाहिए क्योंकि उसकी ज़रूरत क्या है, इन्हें शौचालय नहीं चाहिए क्योंकि प्रधानमंत्री टट्टी की बात क्यों कर रहा है?

और यही लोग, बाद में कहेंगे कि आह! जापान की ट्रेन गजब तेज होती है, हमारे यहाँ तो कभी टाइम से कुछ आता ही नहीं। यही लोग कहेंगे कि आदमी चाँद पर गया और हमारे यहाँ लोग खेत में शौच कर रहे हैं। यही लोग कहेंगे कि पाकिस्तान तो पुलवामा और उरी में जवानों को मार रहा है, कहाँ गया छप्पन इंच का सीना। यही लोग कहेंगे कि तेरह लाख बच्चे कुपोषण से मर जाते हैं, लेकिन सरकार को परवाह ही नहीं।

सरकार को परवाह है इसलिए वो उन बातों पर ध्यान दे रही है जिससे बचाव हो बीमारियों से। ये पहला कदम है। चूँकि आपके लिए प्रधानमंत्री के मुँह से सिर्फ बड़े-बड़े शब्दों का निकलना ही पद की गरिमा के योग्य है, और उस पर करेले जैसी बात यह कि वो आपकी विचारधारा का नहीं है, तब तो आपको लगेगा ही कि शौचालय की बात लाल किला से कोई क्यों करता है!

ये आपको नहीं पचेगा। क्योंकि आप अपनी घृणा के ज़हर को हर मिनट बहत्तर बार अपनी धमनियों और शिराओं में भेज रहे हैं। आपके द्वारा साँस में लिए गए ऑक्सिजन का सत्तर प्रतिशत जो दिमाग में पहुँचता है, वो आपकी घृणा से सना हुआ है, इसलिए आपको हर बात में स्टंट नज़र आता है। एक बार सोचिए कि प्रधानमंत्री द्वारा झाड़ू देने, सफाई कर्मचारी के पाँव धोने, रेत से कचरा बीनने से कौन वोट देने को प्रेरित होगा? आप तो नहीं होंगे, ये तो तय है।

अगर ये स्टंट ही है, तो क्या इससे कोई नुकसान है?

एक मिनट के लिए मान लेते हैं कि हाँ मोदी को स्टंट ही करना है, वो हर बात कैमरे के सामने ही करता है। यही आपका तर्क होता है। अब ये बता दीजिए कि कचरा बीनने से किस तरह के नुकसान हैं? झाड़ू देने से सड़क पर किस तरह की क्षति होती है? सफाई कर्मचारी के पाँव धोने से क्या उनके पाँव में पकुआ लग जाता है? इन बातों से क्या हानि होती है समुद्र, सड़क, या समाज को? और हाँ, आपके पृष्ठ भाग से उठता धुँआ उस नुकसान में शामिल नहीं किया जाएगा!

ये सवाल भी खूब आता है कि कैमरे के सामने करने का मतलब क्या है? मतलब बहुत ही साफ है कि उसका ये सांकेतिक कार्य एक संदेश की तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचे। इसका और कोई दूसरा लक्ष्य नहीं होता। प्रधानमंत्री का काम झाड़ू लगाना नहीं है, उसका काम यह है कि वो एक बार कोई संदेश दे, ताकि लोग उसे अपनाएँ, जीवन में लाएँ और वैयक्तिक बदलाव से सामाजिक और राष्ट्रीय स्तर पर वो बदलाव दिखे।

अगर आपको लगता है कि मोदी हर दिन थैला ले कर घूमता रहे, कचरा बीनता रहे, तब आप उसे कहेंगे कि हाँ, ये स्टंट नहीं है, वो गंभीर है इस बात को ले कर, तो वो नहीं होने वाला। उसकी गंभीरता इसी बात में है कि उसने अपने व्यस्त कार्यक्रम में से दस मिनट निकाल कर, लोगों तक पर्यावरण की सुरक्षा के संदेश दिया। ये तो नेहरू ने भी किया था, और इंदिरा ने भी, इससे मतलब नहीं है। चूँकि उन्होंने यूपी में गेहूँ काटी थी, इसका ये मतलब नहीं हो जाता कि बाकी कोई न काटे!

मुद्दा यह है कि इस कथित स्टंट से बदलाव संभव है कि नहीं? बिलकुल संभव है। अगर आज मैं सब्जी लाने के लिए अपने बैग में, हमेशा एक कपड़े का थैला रखता हूँ, तो ये बदलाव मुझमें आया है। वैसे ही लाखों लोग होंगे जो कचरा यहाँ-वहाँ फेंकते होंगे, उन्हें अब लोग टोकेंगे। कई बार लोक-लाज से भी लोग संभलते हैं। कई बार, जो बातें हमें पता है कि गलत है, उन्हें सामाजिक अभियान के रूप में लाने से आपको अपनी पीठ पर दसियों जोड़ी आँखें ताकती महसूस होती हैं, और आप संभल जाते हैं।

ये पहले भी पता था कि सड़कों पर गंदगी नहीं करनी चाहिए, और कचरा कूड़ेदान में या गाड़ी में फेंकना चाहिए, लेकिन लोग अपनी छतों से नीचे फेंकते रहे। ऐसा होना कम तभी होगा जब इस समाज के सामूहिक व्यवहार को समझते हुए, उसे उसी तरह से समाधान सुझाया जाए। समाधान यही है कि क्या तुम्हें प्रधानमंत्री के झाड़ू मारने से भी बात समझ में नहीं आती? लोग झेंप जाते हैं, अगली बार सोचते हैं कि वो ऐसा न करें।

अमिताभ बच्चन ने पोलियो की दो बूँदों के लिए क्या घर-घर जा कर दवा पिलाई थी? क्या वो इतने नाटकीय तरीके से बोल कर अपने बच्चों के पैर सीधे कर रहे थे? उस व्यक्ति को क्या पड़ी थी ऐसा करने को, बिना पैसा लिए? उस व्यक्ति ने यह बात समझी कि उनका कहा बहुत लोग मानेंगे, और लगातार चले इस अभियान का हासिल यह है कि भारत पोलियो मुक्त है।

उसी तरह, आप न सही, आप भले ही उन लोगों में से हों जो ये मानते हैं कि वो तो बस उनके प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने वोट दिया, आपके नहीं, बाकी के लोगों को उनमें उम्मीद दिखती है। बाकी के लोग उनके सांकेतिक कार्यों को अपने जीवन में लाना चाहते हैं। अगर आधा भारत इन आदतों को सीख ले, कचरा फेंकना बंद कर दे, सड़कें साफ करने लगे, तो बदलाव की गति दोगुनी हो जाएगी।

आपका क्या है, आप तो व्हाट्सएप्प ग्रुप के चुटकुले के वो पात्र हैं जिन्हें पता चल जाए कि मोदी ने कहा कि करने के बाद धोना चाहिए, तो आप उसे पूरे पैर में लपेट कर घूमेंगे और फेसबुक पर अपडेट करेंगे, “देखो बे मोदी, हम नहीं धोते, हमें कुछ नहीं हुआ। इन फासीवादी बातों में हम नहीं उलझेंगे। हमारी टट्टी, हम चाहे जैसे करें, जैसे रखें, प्रधानमंत्री को हमारे बाथरूम में घुसने की आवश्यकता नहीं है।”

दोस्त कहेगी, “यार बहुत दुर्गंध दे रहा है।” आप कहेंगे, “ये क्रांति की खुशबू है कामरेड! ये फासीवादी ताकतों को यह संदेश देना है कि उसे सत्ता ज़रूर मिल गई लेकिन वो ये तय नहीं करेगा कि हम अपने शरीर से निकले अपशिष्ट को धोएँ, पोंछे, सर पर लगाएँ या…”

वामपंथन कहेगी, “बेबी मेरा माइंड, तू करे ब्लो…”

महाभारत का मुर्शिदाबाद वर्जन: जब द्रौपदी के चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने Tweet कर लिबरलों से पूछे सवाल

सहसा ही राजसभा में शांति छा गयी। ज्येष्ठ भ्राता के निर्देश पर पाञ्चाली को केश से घसीटते हुए दुःशासन सभा में ले आए। परमवीर परन्तु पराजित पाँचों पति नतमस्तक बैठे थे और दुर्योधन के मुख पर क्रूर स्मित थी। राजवधू के क्रंदन से समस्त सभासदों का ह्रदय द्रवित था। दुर्योधन ने चीरहरण का आदेश दिया। युधिष्ठिर ने बिना कौरवों का नाम लिए घोर आपत्ति जताई और बोले- “ऐसे भी कुछ लोग हैं जो परस्त्रियों को निर्वस्त्र करना चाहते हैं। विश्व समुदाय को इनका संज्ञान लेना होगा। अमेरिका को भी अवश्य इन पर कार्यवाही करनी चाहिए।” उसके पश्चात धर्मराज ने कौरवों को सम्बोधित करके कहा कि हम अपनी हारी हुई संपत्ति से आपको छात्रवृत्ति देंगे, हमें आपका विश्वास जीतना है।

धर्मराज युधिष्ठिर ने उद्घोष किया- ‘सबका साथ, सबका विश्वास।‘ पराजित किन्तु रोमांचित पांडव सेना ने उनके आह्वान के साथ स्वर मिला कर नारा दोहराया। यह कह कर पाँचों पांडव पुनः नतमस्तक हुए और ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए‘ की धुन पर चरखा कातने लगे। द्रौपदी ने उन्हें शांत देख कर अपने पाँचों पतियों को पुनः मदद के लिए पुकारा। तत्पश्चात भीम ने सिंह गर्जना की।

टीवी चैनलों के कैमरे लिंचोन्मुखी भीम के क्लोज शॉट लेकर असहिष्णु पांडवों पर बहस करने लगे। सहसा ही खिचड़ी दाढ़ी वाले पुरुष, और कॉटन की साड़ी वाली महिलाएँ प्रकट होकर गंभीर स्वर में भीम की भर्त्सना करने लगीं। सबने ध्वनिमत से भीष्म की हिंदुत्ववादी विचारधारा को नाजीवादी बता कर निंदा की जो पांडवों की एंटी-माइनॉरिटी नीति पालिसी में परिलक्षित हो रही थी।

किसी ने कौरवों को अल्पसंख्यक कहे जाने का विरोध किया, तो कश्मीर में वर्ग विशेष को अधिकता में होने के बावजूद अल्पसंख्यक कहे जाने का उदाहरण दे कर शांत करा दिया गया। धर्मराज ने सबको शांत किया, और योगेंद्र यादव सुलभ व मधुर स्वर में बोले- “महाबली भीम जैसे फ्रिंज एलिमेंट्स का संज्ञान न लिया जाए और उनके हिंसक प्रलापों को पार्टी लाइन से जोड़ कर न देखा जाए।”

निराश द्रौपदी ने भीष्म की ओर देखा। चीरहरण की प्रक्रिया के असंवैधानिक होने की गुहार लगाई। भीष्म कुछ बोलें इससे पूर्व राज नृतकों, संगीतकारों एवं गायकों के समूह ने उन्हें पांडवों के नाज़ीवाद के विरुद्ध एक ताड़ पत्र पर ज्ञापन प्रस्तुत कर दिया। भीष्म जनभावना के समक्ष चुप रहने को विवश हो गए। गान्धारी की आँखों पर बँधी पट्टी का संज्ञान लेते हुए और उन्हें दीदी कह कर प्रेम करने वाले बुद्धिजीवी वर्ग का क्रोध पितामह को चुप करा गया। तब विवश हो कर द्रौपदी ने श्रीकृष्ण का स्मरण किया। श्री कृष्ण के प्रकट होते ही द्रौपदी की साँस में साँस आयी और उसे लगा की अब उसके सम्मान की रक्षा हो सकेगी।

दुःशासन ने द्रौपदी की ओर कदम बढ़ाया ही था कि प्रभु बोल पड़े- “कहाँ हैं वो लिबरल जो विपरीत दल के समर्थकों के उत्पीड़न पर प्रश्न उठाते थे? क्या वे वामपंथी बुद्धिजीवी द्रौपदी की इस स्थिति पर प्रश्न उठाएँगे? क्यों विपक्षी दल आज इस महिला पर हो रहे अत्याचार पर मौन है?” सभागार में उनके प्रश्नो पर ‘साधु, साधु’ के स्वर उठने लगे। केशव बोले- “गान्धारी मेरी बड़ी बहन सामान है, परन्तु उन्हें इस सब के लिए क्षमा माँगनी चाहिए। वेद व्यास जी को ऐसे प्रसंग लिखने के लिए क्षमा माँगनी चाहिए।“

तभी उन्हें ध्यान आया कि व्यास जी रमन मैग्सेसे पुरस्कार लेने गए हैं। केशव ने तुरंत इस कथन को भी ट्वीट किया, और भक्तों के लाइक और रीट्वीट पा कर हर्षित हुए। इसके पश्चात अपने स्मार्टफोन पर अपने वायरल होते ट्वीट को देखते हुए प्रफुल्लित प्रभु अंतर्ध्यान हो गए। द्रौपदी निराश हो कर असाहय अपनी दुखद नियति की प्रतीक्षा करने लगी।

‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के ख़िलाफ़ जाँच का ऐलान, योगी के मंत्री ने दी सुधर जाने की सलाह

जैसे-जैसे राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले की घड़ी नजदीक आती जा रही है, हर पक्ष की ओर से बयानों का सिलसिला भी तेज़ होता जा रहा है। अगर मुस्लिम समुदाय के बयानों पर गौर करें तो उनके बीच असहमति बनती दिख रही है। एएमयू के पूर्व कुलपति जमीरुद्दीन शाह ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय चाहे जो भी आए, इस मामले में मुस्लिमों की हार होनी तय है। मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने विवादित ज़मीन हिन्दुओं को दिए जाने की वकालत की। सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड ने शाह के बयान का विरोध किया। अब इस मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का बयान आया है। अब नया बयान मोहसिन रजा का आया है।

योगी सरकार में मंत्री मोहसिन रजा ने कहा कि ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ के लोग बड़े होटलों में रुकते हैं और फ्लाइट से यात्रा करते हैं। उन्होंने पूछा कि इन सबके लिए रुपया आख़िर आ कहाँ से रहा है? उन्होंने कहा कि मुल्सिम लॉ बोर्ड बस एक एनजीओ की तरह है जो देश के बदले अपने फायदे के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सुधर जाए क्योंकि सरकार उनकी गतिविधियों पर जाँच भी बिठाएगी।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुस्लिम बुद्धिजीवियों व अन्य संगठनों द्वारा दिए गए सुझावों को ठुकरा दिया है। आज ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ की बैठक भी हुई। संगठन ने साफ़ कर दिया है कि विवादित ज़मीन को छोड़ने का कोई सवाल ही नहीं है। मुस्लिम पक्षकार जफरयाब जिलानी ने कहा कि बोर्ड इस तरह की किसी भी माँग से काफ़ी हैरान है। बोर्ड ने क़ानूनी प्रक्रिया से इस मामले का हल निकालने की अपनी बात दोहराई और कहा कि वे सभी सुप्रीम कोर्ट के बहुप्रतीक्षित फ़ैसले का इंतजार कर रहे हैं।

जमीरुद्दीन शाह ने कहा कि अगर हिन्दू पक्ष केस जीत जाता है, फिर भी भारतीय समाज में कुछ ऐसे तत्व हैं जो इसका ग़लत फ़ायदा उठाना चाहेंगे। वहीं उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा ने ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ की फंडिंग पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि टेरर फंडिंग विदेश से होती है। साथ ही उन्होंने पूछा कि बोर्ड को फंडिंग कहाँ से मिल रही है?

PMC बैंक घोटालाः राकेश और सारंग वधावन के पास ₹3500 करोड़ की 2100 एकड़ जमीन, जब्त करेगी ED

पंजाब एंड महाराष्ट्र बैंक घोटाले के मुख्य आरोपित और एचडीआईएल के मालिक राकेश वधावन और उनके बेटे सारंग वधावन के पास 2100 एकड़ की जमीन भी है, जिसकी बाजार में 3500 करोड़ रुपए की कीमत बताई गई है। अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) इस जमीन को जब्त करने जा रहा है। यह जमीन वसई-पालघर के सात अलग-अलग गाँवों में स्थित है।

राकेश और सांरग ने इस जमीन को कई साल पहले टाउनशिप बनाने के लिए खरीदा था। लेकिन यहाँ पर काम कभी शुरू नहीं हुआ। इन खाली प्लॉट पर किसी तरह का कोई अतिक्रमण नहीं है। जानकारी के मुताबिक, ईडी फिलहाल दस्तावेज की जाँच कर रहा है, जिसमें यह पता लगाया जा सके कि यह जमीन वधावन के नाम खरीदी गई थी, या फिर एचडीआईएल के नाम से।

बता दें कि फिलहाल एचडीआईएल दिवालिया प्रक्रिया से गुजर रही है। समूह की कंपनियों ने पीएमसी बैंक से 1306 करोड़ रुपए का लोन लिया था, जो आरबीआई के नियमों के खिलाफ है। राकेश वधावन को जहाँ 1903 करोड़ रुपए देने हैं, वहीं सारंग पर 129 करोड़ रुपए का बकाया है। ED द्वारा जब्त की जाने वाली इस 2100 एकड़ की जमीन में से 600 एकड़ जमीन एचडीआईएल और उसके प्रमोटरों ने पीएमसी बैंक के पास गिरवी रखी है। इसके अलावा 400 एकड़ जमीन अन्य बैंकों के पास गिरवी है। जाँच में पता चला कि पीएमसी और अन्य बैंकों से इन 1,000 भूमि पार्सल के एवज में लगभग 800 करोड़ रुपए का ऋण लिया गया है। हालाँकि, ईडी के अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

वहीं 1100 एकड़ जमीन किसी के पास गिरवी नहीं है। यह जमीन उनसे अलग है, जिनको मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने पहले ही जब्त कर लिया है। एचडीआईएल और इसके प्रमोटरों के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज करने के बाद ईडी को वधवान की संपत्तियों के बारे में कई इनपुट मिले। ईडी के अधिकारी कुर्की के लिए इन संपत्तियों का ब्योरा एकत्र कर रहे हैं।

गौरतलब है कि ईडी ने इससे पहले वधावन की 70 करोड़ की कीमत वाली आलीशान बंगले को जब्त कर लिया था। ईडी ने अब तक राकेश वधावन और सारंग वधावन और उनके परिवार के सदस्यों से संबंधित कई संपत्तियों की जाँच की है। इस सिलसिले में जाँच एजेंसी ने नौ सीटर डसॉल्ट फाल्कन 200 और एक बॉम्बार्डियर चैलेंजर 300 सहित दो निजी व्यापार जेट्स जब्त किए हैं। पिछले हफ्ते पुलिस 60 करोड़ रुपए की ज्वैलरी को भी जब्त कर लिया था। इसके साथ ही अलीबाग के अवास बीच पर ढाई एकड़ में फैले उनके घर पर छापे के दौरान तीन एसयूवी बरामद की गई थी। एजेंसी वधावन के स्वामित्व वाली 15 कारों को भी जब्त कर चुकी है, जिसमें दो रोल्स-रॉयस, दो रेंज रोवर्स और एक बेंटले शामिल हैं।

RTI आवेदनों में कमी बताता है सरकार संतोषजनक काम कर रही है: गृहमंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने RTI के आवेदनों में कमी आने को को सरकार की उपलब्धि बताया है। उन्होंने केन्द्रीय सूचना आयोग के 14 वें वार्षिक सम्मेलन को आज सम्बोधित करते हुए कहा कि मोदी सरकार का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा सूचनाओं को सक्रियता से सार्वजनिक पटल पर रखना है ताकि RTI आवेदनों की संख्या में कमी आए। उनका कहना है कि सरकार की सफलता अधिक आरटीआई आवेदनों में नहीं है बल्कि आवेदनों में कमी आने का मतलब है कि सरकार का कार्य संतोषजनक है।

उन्होंने कहा, “हम एक ऐसा तंत्र लाना चाहते हैं जहाँ लोगों को सूचना पाने के लिए आरटीआई आवेदन दाखिल करने की जरूरत न महसूस हो।”

गृहमंत्री ने डैशबोर्ड प्रणाली के बारे में बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डैशबोर्ड प्रणाली लाकर ये सुनिश्तिच किया है कि बिना आरटीआई आवेदन डाले, जारी योजनाओं से संबंधित सभी जानकारी हासिल हो सके। उन्होंने इस नए प्रयोग को पारदर्शी युग की शुरुआत बताई है

उन्होंने कहा, “एक व्यक्ति डैशबोर्ड पर जाकर देख सकता है कि कितने शौचालय बनाए गए। डैशबोर्ड का प्रयोग कर लोग जान सकते हैं कि सौभाग्य योजना के तहत बिजली कनेक्शन कब मिलेगा? एक निरक्षर महिला डैशबोर्ड पर क्लिक कर जान सकती है कि उसे गैस सिलेंडर कब मिलेगा।”

गौरतलब है कि इस दौरान उन्होंने आयोग के लोगों ने अनुरोध किया कि वे न सिर्फ़ आरटीआई के आवेदनों का निपटान करें बल्कि लोगों को उन कदमों से भी अवगत करवाएँ जो ये सुनिश्चित करेंगे कि आगे इस आवेदन की जरूरत नहीं हैं।

हालाँकि , गृहमंत्री अमित शाह ने आरटीआई के कानून को पिछले 14 सालों से देश में सफल बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य लोगों का विश्वास बढ़ाना था। उन्होंने बोला कि इसके परिणामों के आँकलन से ज्ञात होता है कि देश में पारदर्शिता बढ़ी है। भ्रष्टाचार कम हुआ है और सुशासन की गति में भी तेजी आई है।

श्रीनगर: अतिसुरक्षित हरि सिंह रोड पर आतंकियों ने किया ग्रेनेड से हमला, 11 घायल

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शनिवार (12 अक्टूबर) को आतंकवादियों ने ग्रेनेड से हमला किया है। आतंकियों ने यह हमला श्रीनगर के हाई सिक्योरिटी ज़ोन कहे जाने वाले हरि सिंह मार्ग पर किया है। घटना को अंजाम देने के तुरंत बाद सेना, पुलिस और सीआरपीएफ की टीमों ने एक बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

ख़बर के अनुसार, इस हमले में 11 लोग घायल हो गए हैं, जिन्हें श्रीनगर के एसएमएसएच अस्पताल में इलाज के लिए भेजा गया है। जानकारी के मुताबिक़, कुछ अज्ञात हमलावरों ने शुक्रवार (11 अक्टूबर) को हरि सिंह रोड पर सुरक्षाबलों की एक पोस्ट से कुछ ही दूरी पर ही ग्रेनेड से हमला किया और तुरंत वहाँ से फ़रार हो गए। हमले में कुछ वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गए और धमाके की आवाज़ से अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।

घटना की सूचना मिलते ही जम्मू-कश्मीर पुलिस, सीआरपीएफ और सेना की टीमों को स्थिति पर क़ाबू पाने के लिए भेजा गया। पुलिस ने बताया, “ग्रेनेड हमले में कम से कम 11 नागरिक घायल हो गए हैं। सभी घायलों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है और इलाक़े की घेराबंदी कर छापेमारी की जा रही है।”

ग़ौरतलब है कि इससे पहले, कश्मीर के अनंतनाग में 5 अक्टूबर को भी आतंकियों ने एक ग्रेनेड हमले की घटना को अंजाम दिया था, जिसमें क़रीब 14 लोग घायल हुए थे। इस हमले में घायल हुए लोगों में एक पत्रकार और एक ट्रैफ़िक पुलिसकर्मी भी शामिल थे।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर के अवंतीपुर में मंगलवार (1 अक्टूबर) को सुरक्षाबलों की आतंकियों के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें सुरक्षा बलों ने लश्कर-ए-तैयबा के अबु मुस्लिम आतंकवादी को मार गिराया था। उसके बारे में पता चला था कि वो अवंतीपुर का ही रहने वाला था और वो 4 जुलाई 2018 को आतंकी संगठन में शामिल हुआ था। ख़ुफ़िया जानकारी के मुताबिक, अबु मुस्लिम अवंतीपोरा पुलिस स्टेशन और मालनपोरा में एयरबेस के पास आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।

दिल्ली में प्रधानमंत्री की भतीजी से छिनैती, ₹56,000, मोबाइल समेत पर्स लूटा

ऐसा लगता है कि राजधानी दिल्ली में कोई भी व्यक्ति अपराध से सुरक्षित नहीं है। एक स्तब्धकारी घटना में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भतीजी से दिल्ली में शनिवार (12 अक्तूबर) को उनका पर्स, मोबाइल और पैसे छीन लिए गए, जब वे ऑटो वाले को पैसे दे रहीं थीं। यह घटना गुजरात समाज भवन के ठीक बाहर की है।

अमृतसर से आईं थीं दिल्ली

पीड़िता नरेंद्र मोदी के बड़े भाई प्रह्लाद मोदी की बेटी दमयंतीबेन मोदी हैं। अपने पति के साथ वे अमृतसर से दिल्ली आज सुबह-सुबह पहुँची थीं। उनका कार्यक्रम आज दिन भर गुजरात समाज भवन में रुक कर शाम को फ्लाइट से अहमदाबाद जाने का था।

पुलिस के अनुसार दमयंतीबेन ने अपने कथन में बताया कि उन पर हमला पीछे से हुआ। जब उनका ऑटो गुजरात भवन के सामने रुका और वे ऑटोवाले को किराया देने ही वालीं थीं, तभी दो स्कूटर पर सवार दो 16-18 साल के किशोरों ने उनका पर्स झपट लिया। वह उनकी गोद में रखा हुआ था। दमयंती मोदी ने India Today को बताया कि उनके पर्स में कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज़, मोबाइल फ़ोन और ₹56,000 मौजूद थे।

सुबह 8.10 के करीब हुई इस घटना के बाद वे सिविल लाइन्स पुलिस थाने गईं और मामले की शिकायत दर्ज कराई। उत्तरी दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (DCP) मोनिका भरद्वाज ने डकैती का मामला दर्ज कराए जाने की पुष्टि की है। टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पत्रकार राज शेखर झा के अनुसार दिल्ली पुलिस ने अपनी आतंकरोधी इकाई (एंटी-टेरर यूनिट), क्राइम ब्रांच समेत सभी संसाधन मामले को सुलझाने में झोंक दिए हैं।

केजरीवाल के पड़ोस की घटना  

दिल्ली में गुजरात समाज भवन जिस सिविल लाइन्स क्षेत्र में है, उसे हाई-प्रोफाइल, ‘पॉश’ इलाका माना जाता है। फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल का आधिकारिक निवास घटनास्थल से महज़ कुछ ही दूरी पर स्थित है। ऐसे में सवाल यह है कि जो पुलिस मुख्यमंत्री आवास जैसे हाई-प्रोफाइल इलाकों में, महत्वपूर्ण लोगों की सुरक्षा करने में भी नाकाम हो रही है, उसके हाथ में आम आदमी की सुरक्षा किस हद तक राम-भरोसे है, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।