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आतंकियों का प्लान A और B नाकाम, BSF ने अखनूर सेक्टर से पकड़ा घुसपैठिया

अंतराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र के समीप जम्मू के अखनूर सेक्टर से सीमा सुरक्षाबल ने गुरुवार (अक्टूबर 3, 2019) को एक संदिग्ध घुसपैठिए को पकड़ा। भारतीय सीमा क्षेत्र में घुसने की कोशिश करने के दौरान बीएसएफ जवानों ने उसे दबोचा। बाद में उसे पुलिस को सौंप दिया गया।

आतंकी मनसूबों को अंजाम देने के लिए आए दिन घुसपैठिए भारत में घुसने की कोशिश कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू संभाग के ऊधमपुर जिला के कुद क्षेत्र में भी संदिग्ध दिखने की सूचना पर पुलिस व सुरक्षाबलों ने 8 घंटे तक संयुक्त तलाशी अभियान चलाया। जिसमें ड्रोन की भी मदद ली गई।

दैनिक जागरण की खबर के अनुसार उधमपुर के एसएसपी राजीव पांडेय ने बताया कि थाने में एक व्यक्ति अपने पास काम करने वाले नेपाली किशोर को लेकर पहुँचा था। उस किशोर ने बताया कि सुबह कुद के टमाटर मोड़ इलाके में मवेशी चराने गया था, जहाँ उसे 3 व्यक्तियों ने रोका।

नेपाली किशोर के अनुसार तीनों संदिग्धों के पास सुरक्षाबल की ड्रेस थी। उन्होंने किशोर को रोककर कुछ पूछा और उसकी पिटाई की। किशोर भागकर अपने मालिक के पास आया और घटना के बारे में बताया। दोनों ने आकर इसकी सूचना थाने में दी।

पुलिस ने किशोर से पूछताछ के बाद करीब 11 बजे सुरक्षाबल के साथ मिलकर तलाशी अभियान शुरू किया। उन्होंने चिनैनी से लेकर कुद एवं आसपास के इलाकों को अच्छे से खंगाला लेकिन उन्हें वहाँ कोई संदिग्ध नहीं मिला।

इसके अलावा सांबा के पुलपुर बसंतपुर में भी सेना की 25 पंजाब रेजीमेंट के जवानों ने तड़के करीब 4 बजे संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलते ही सर्च ऑपरेशन चलाया। हालाँकि यहाँ भी उन्हें कुछ हासिल नहीं हुआ, लेकिन सांबा और रामगढ़ बसंतर क्षेत्र के साथ सटे इलाकों को हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। कहा जाता है बसंतर इलाका हमेशा से आतंकियों के घुसपैठ का रास्ता रहा है।

बता दें कि आर्टिकल 370 निष्प्रभावी होने के बाद से सीमा पार बैठ आतंकी बौखलाए बैठे हैं। उनके पास प्लॉन ‘ए’, प्लॉन ‘बी’, प्लॉन ‘सी’ बना हुआ है। प्लान ‘ए’ के तहत आतंकवादी कश्मीर में व्यापक स्तर पर खून खराबा कराना चाहते हैं। प्लान ‘बी’ में वे बार्डर से घुसपैठ कर हमला करना चाहते हैं और प्लॉन ‘सी’ से वह साम्प्रादायिक दंगे भड़काना चाहते हैं। खबर है कि सीमा पर सुरक्षा बल की तैनाती से आतंकियों का प्लॉन ए और बी में नाकामयाब हो गया है, इसलिए अब वह नवरात्रि में धार्मिक स्थल पर दंगे करवाकर माहौल खराब करने की कोशिश में है। साथ ही घुसपैठ के जरिए प्लॉन बी को भी कामयाब करने की कोशिशों में हैं।

गॉंधी परिवार को 31 साल की MLA की चुनौती: कॉन्ग्रेस के मना करने पर भी सदन में पहुँचीं अदिति सिंह

उत्तर प्रदेश का रायबरेली कॉन्ग्रेस परिवार का गढ़ माना जाता है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी खुद यहॉं से सांसद हैं। लेकिन, अब देश की सबसे पुरानी पार्टी का यह गढ़ भी दरकता दिख रहा है। रायबरेली सदर से कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने एक बार फिर पार्टी के निर्देशों को अनसुना कर शीर्ष नेतृत्व को चुनौती दी है।

31 साल की अदिति पार्टी की पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी और महासचिव प्रियंका गॉंधी की बेहद करीबी बताई जाती रही हैं। लेकिन, पिछले कुछ समय से वो पार्टी लाइन के खिलाफ जाकर काम कर रही हैं। आर्टिकल 370 को हटाने का समर्थन करने वाली अदिति ने गॉंधी जयंती के मौके पर आयोजित विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया। कॉन्ग्रेस ने इसके बहिष्कार का निर्देश दिया था।

विशेष सत्र का एसपी और बीएसपी ने भी विरोध किया था। लेकिन कॉन्ग्रेस विधायक अदिति सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाक़ात कर और सत्र में शामिल होकर सभी को चौंका दिया। वो न सिर्फ़ सत्र में शामिल हुईं बल्कि उन्होंने स्वच्छता व पानी जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात भी रखी। बता दें कि अदिति सिंह रायबरेली के बाहुबली नेता अखिलेश सिंह की बेटी हैं। उनके पिता भी इस सीट से विधायक रह चुके हैं।

ख़बर के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार की भाजपा सरकार ने महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती को यादगार बनाने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित ‘सस्टेनेबल डिवेलपमेंट गोल्स’ पर चर्चा करने के मक़सद से यूपी विधानसभा का 48 घंटे का विशेष सत्र बुलाया था। जहाँ इस सत्र का विपक्षी दलों ने बहिष्कार किया, वहीं अदिति सिंह ने शामिल होकर कॉन्ग्रेस को करारा झटका दिया है।

अदिति सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया,

“आज गाँधी जयंती है और मैंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के विकास के बारे में बात की। इस दौरान पीने के पानी व बिजली की समस्या पर भी चर्चा की। मुझे लगता है कि अपने क्षेत्र की समस्याएँ उठाने का यह अच्छा मौक़ा था। मैंने आर्टिकल-370 पर अपने मन की बात कही। मुझे जो सही लगा, मैंने आज वही कहा। लोगों ने विकास के लिए मुझे वोट दिया। पार्टी मेरे बारे में जो फ़ैसला लेगी, मुझे मंज़ूर है, लेकिन मुझे लगता है कि मैंने जो किया, सही किया”

इससे पहले अदिति सिंह ने पार्टी लाइन के़ ख़िलाफ़ जाकर जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 को ख़त्म करने का समर्थन किया था। केंद्र सरकार के इस क़दम का स्वागत करते हुए उन्होंने ट्वीट कर अपना समर्थन दिया था।

जब किसी ने उनसे पूछा, “आप तो कॉन्ग्रेसी हो?” तो, इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि वो एक हिन्दुस्तानी हैं।

बता दें कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने महात्मा गाँधी की जयंती पर लखनऊ में ‘शांति मार्च’ निकाला था, जिससे अदिति सिंह ने दूरी बनाए रखी। ऐसे में अदिति के कॉन्ग्रेस छोड़ने के कयास तेज हो गए हैं। रायबरेली में कॉन्ग्रेस के एक और प्रमुख चेहरा रहे दिनेश प्रताप सिंह पहले ही भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

‘अच्छे दिन’ के इंतजार में सिद्धू: कॉन्ग्रेस नेता भी जोड़ रहे प्रचार कराने से हाथ

क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू कभी भाजपा के स्टार प्रचारक हुआ करते थे। हाल तक कॉन्ग्रेस में भी सितारे बुलंद थे। लेकिन, आम चुनावों के बाद किस्मत ने ऐसी पलटी खाई कि इस पूर्व सांसद और पंजाब के मौजूदा विधायक को उनकी पार्टी के नेता ही नहीं पूछ रहे।

कॉन्ग्रेस नेता आलाकमान से गुहार लगा रहे हैं कि उनके क्षेत्र में सिद्धू को प्रचार के लिए न भेजा जाए। पंजाब का पड़ोसी प्रदेश हरियाणा इसमें प्रमुख है, जहॉं इसी महीने विधानसभा के चुनाव होने हैं। हरियाणा में सिद्धू की एक जनसभा में न केवल उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई, बल्कि उन पर चप्पल फेंकने की भी कोशिश हुई। उल्लेखनीय है कि सिद्धू का नाम पार्टी के स्टार-प्रचारकों की सूची में है।

बताया जा रहा है कि कॉन्ग्रेस नेताओं को डर है सिद्धू के आने से भाजपा को बैठे-बिठाए राष्ट्रवाद का मुद्दा मिल जाएगा, क्योंकि इस ‘पिच’ पर सिद्धू का ‘फॉर्म’ हालिया समय में कतई अच्छा नहीं रहा है। वे न केवल तालिबान-समर्थक पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ अपनी क्रिकेट के दिनों की दोस्ती को खुल कर ‘फ्रंट-फुट’ पर खेलते हैं, बल्कि वे पाकिस्तानी आर्मी के प्रमुख जनरल बाजवा से गले भी मिल आए थे। पुलवामा हमले पर उनका बयान इतना आपत्तिजनक था कि उनके ‘बॉस’, पंजाब के मुख्यमंत्री और पूर्व सैनिक कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनकी निंदा की थी। लोक सभा चुनाव के नतीजे आने के बाद उनसे ‘मलाईदार’ मंत्रालय छीन कर हाशिए वाले मंत्रालय थमा दिए गए तो उन्होंने प्रभार ही ग्रहण नहीं किया और मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया।

ऐसे में हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेताओं को डर है कि सिद्धू के आते ही भाजपा राष्ट्रवाद को सबसे बड़ा मुद्दा बना देगी और वे स्थानीय मुद्दे जिन पर कॉन्ग्रेस नेता खट्टर सरकार को घेरना चाहते हैं, गौण हो जाएँगे। हरियाणा के लोक सभा चुनाव में भी सिद्धू आए थे और नतीजा यह हुआ कि 2014 की मोदी लहर में 7 सीटें जीतने वाली भाजपा ने इस बार पूरी 10 सीटें निकाल ली। हरियाणा के बड़े नेताओं की मानें तो सिद्धू जहाँ-जहाँ गए, पार्टी को वहाँ-वहाँ हार का सामना करना पड़ा था। पंजाब में भी लोक सभा हार का ठीकरा कई नेताओं ने सिद्धू के ही सर फोड़ा था। हरियाणा में 21 अक्टूबर को चुनाव होने हैं।

एकेडमी लड़कियों के लिए नहीं थी, महिला क्रिकेट की नई सनसनी शैफाली वर्मा ने ‘लड़का’ बन ली थी ट्रेनिंग

बॉलीवुड की फ़िल्म ‘दिल बोले हड़िप्पा’ की रानी मुखर्जी याद है आपको! इस फ़िल्म में वीर कौर (रानी मुखर्जी) को लड़की होने की वजह से जब क्रिकेट की ट्रेनिंग नहीं मिल पाती, तो वो वीर प्रताप सिंह यानी लड़का बनकर क्रिकेट टीम में शामिल हो जाती है। इस दौरान वो न सिर्फ़ भारतीय टीम का हिस्सा बनती है बल्कि पाकिस्तान के साथ होने वाले एक स्थानीय मैच में नया इतिहास भी रचती है।

ऐसा ही कुछ कर दिखाया है हरियाणा के रोहतक ज़िले की रहने वाली शैफाली वर्मा ने। दरअसल, उनके होम टाउन में लड़कियों के लिए कोई एकेडमी नहीं थी और हरियाणा के रोहतक ज़िला के सभी क्रिकेट एकेडमी ने उन्हें एडमिशन देने से साफ़ इनकार कर दिया था।

दक्षिण अफ्रीका महिला क्रिकेट टीम के ख़िलाफ़ सूरत में मंगलवार (1 अक्टूबर) को खेले गए मुक़ाबले में भारतीय महिला टीम को जीत दिलाने में शैफाली वर्मा ने अहम योगदान दिया था। इस युवा खिलाड़ी के बारे में बता दें कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम में सबसे कम उम्र में टी-20 इंटरनेशनल में डेब्यू करने वाली 15 साल की बैट्समैन शैफाली ने क्रिकेट के लिए जुनूनी पिता संजीव वर्मा के निर्देश पर अपने बाल कटवा दिए थे।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया से हुई बातचीत में शैफाली के पिता संजीव ने बताया,  “कोई मेरी बेटी को लेना नहीं चाहता था क्योंकि रोहतक में लड़कियों के लिए एक भी अकैडमी नहीं थी। मैंने उनसे भीख माँगी कि उसे एडमिशन दे दें, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।”

उन्होंने बताया, “मैंने कई क्रिकेट एकेडमी का दरवाज़ा खटखटाया, लेकिन हर जगह रिजेक्शन मिला। तब मैंने अपनी बेटी के बाल कटवा कर उसे एक अकैडमी ले गया और लड़के की तरह उसका एडमिशन कराया।”

लड़का बन कर शैफाली जब लड़कों की टीम के साथ क्रिकेट खेलती, तो उन्हें कई बार गंभीर चोटें भी आईं, लेकिन उनकी परवाह किए बिना वो लगातार आगे बढ़ती गईं। शैफाली के पिता के अनुसार,

“लड़कों के ख़िलाफ़ खेलना आसान नहीं था क्योंकि अक्सर उसकी हेलमेट में चोट लगती थी। कुछ मौक़ों पर बॉल उसके हेलमेट ग्रिल पर लगती थी, मैं डर जाता था, लेकिन उसने हार नहीं मानी।”

शुरूआती दौर में शैफाली के पिता को पड़ोसियों और रिश्तेदारों के तमाम ताने सुनने पड़े। उन दिनों को याद करते हुए वो कहते हैं, “पड़ोसी और रिश्तेदारों ने ताने मारने शुरू कर दिए थे। तुम्हारी लड़की लड़कों के साथ खेलती है, लड़कियों का क्रिकेट में कोई भविष्य नहीं है।” उन्होंने कहा, “मुझे और मेरी बेटी को इतना सुनना पड़ा कि कोई भी परेशान हो जाए, लेकिन शैफाली ने एक दिन मुझसे कहा- ये लोग किसी दिन मेरे नाम के नारे लगाएँगे।” इसके बाद परिस्थितियाँ तब बदलीं जब उनके स्कूल ने लड़कियों के लिए क्रिकेट टीम बनाने का फ़ैसला लिया।

शैफाली में क्रिकेट का पैशन उस वक़्त शुरू हुआ जब सचिन तेंदुलकर 2013 में अपना अंतिम रणजी मैच खेलने आए थे। उस समय शैफाली महज़ 9 साल की थी, जो सचिन के समर्थन में नारे लगा रही थी। वहीं से शैफाली के मन में क्रिकेट के लिए एक अलग जगह बन गई। शैफाली को भारतीय टीम में खेलने का मौका तब मिला जब उन्होंने घरेलू सीजन में 1923 रन बनाए, जिसमें छह शतक और तीन अर्ध शतक शामिल हैं। उस समय शैफाली 10वीं कक्षा की छात्रा थीं, शैफाली का कहना है कि उनका लक्ष्य भारत के लिए अधिक से अधिक मैच खेलना है और देश के लिए मैच जीतना है।

बिहार बाढ़ पर घिरे नीतीश ने मीडिया की भाषा पर कसा तंज, कहा- समाज को कहाँ ले जाना है, क्या लैंग्वेज है भाई

बिहार की स्थिति पर मीडिया के उठाए सवालों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को नाराज दिखे। उन्होंने मीडिया को अपनी भाषा पर लगाम लगाने की सलाह दी। उन्होंने मंगलवार की शाम को कुछ मीडिया चैनलों द्वारा उनके ख़िलाफ़ अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर मीडिया वालों से कहा कि आप समाज को कहाँ ले जाना चाहते हैं, आप किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं। उन्होंने कहा, गजब का हिसाब हो गया है…हमारे मीडिया वाले… हम सबको प्रणाम करते हैं। इनकी क्या-क्या लैंग्वेज है भाई।

गौरतलब है कि बिहार सीएम नीतीश कुमार पटना के ज्ञानभवन में महात्मा गाँधी की 150वीं जयन्ती के अवसर पर गाँधी विचार समागम को संबोधित कर रहे थे। जहाँ उन्होंने मीडिया चैनल द्वारा उनके ख़िलाफ़ इस्तेमाल होती भाषा पर कहा कि उन्हें प्रचार पर भरोसा नहीं, वे काम करते हैं। लेकिन जो लोग काम नहीं करते, वे अपना प्रचार खूब करते हैं।

उन्होंने बताया कि वे मीडिया वालों से प्रेम करते हैं, लेकिन मंगलवार शाम को जब श्रद्धांजलि के कार्यक्रम में भाग लेने गए तो कुछ मीडिया वाले उनपर चिल्लाने लगे और पता नहीं कैसी-कैसी भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने आगे कहा कि लोगों को उनकी आलोचना का अधिकार हैं और वे इसका स्वागत भी करते हैं। लेकिन थोड़ा समाज का भी ख्याल किया जाए।

बिहार मुख्यमंत्री ने बताया मंगलवार को पटना में हुए जल जमाव को लेकर पम्पिंग हाउस का निरीक्षण कर जब वो एक कार्यक्रम में पहुँचे तो कुछ पत्रकार उनसे चिल्ला-चिल्लाकर सवाल पूछने लगे। नीतीश ने कहा, “तो भाई आखिर इसका क्या अर्थ होने वाला है। कहाँ ले जाना चाहते हैं समाज को, किस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं? आपको कोई भ्रम है क्या कि आपकी भाषा के प्रयोग करने से कुछ होता है? कुछ नहीं होता है। जनहित में जनता के हित में जो काम किया जाता है हम उसके लिए पूरे तौर पर समर्पित हैं। हम प्रचार के लिए समर्पित नहीं हैं और आज के युग में जो काम नहीं करता है, वो अपना प्रचार खुद करवाता है।”

इस दौरान नीतीश कुमार ने मीडिया से ये भी अपील की कि उनके ख़िलाफ़ या उन जैसे व्यक्ति को डुबाने के लिए जो कहना है, वो कहें। लेकिन समाज में कडुआहट नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने पूछा कि क्या जिस तरह की भाषा का प्रयोग किया जा रहा है, क्या उससे समाज सुधर जाएगा? या समाज आगे बढ़ पाएगा?, उनका कहना है कि बेशक उनकी कमियों को उजागर किया जाए, लेकिन समाज में सौहार्द भी बनाना चाहिए।

मीडिया को समझाते हुए उन्होंने कहा कि आजतक उन्होंने किसी की मर्यादा पर असर डालने की कोशिश नहीं की है। वे यही कोशिश करते हैं कि सब लोगों की मर्यादा रहे।” उनके अनुसार किसी के विचारों से असहमत होना, सबका अपना अधिकार है। लेकिन विचार से असहमत होने का मतलब यह नहीं है कि ऐसा वातावरण बनाया जाए और व्यवहार किया जाए कि दोनों के बीच झगड़ा हो। उनका कहना है लोग अपने विचारों को जरूर रखें, लेकिन असहमत हैं तो झगड़ा न करें।

पाकिस्तानी सेना के ‘टॉर्चर सेलों’ की पोल खोलने वाली गुलालाई इस्माइल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट

पाकिस्तानी महिला अधिकार कार्यकर्ता गुलालाई  इस्माइल के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय संस्थानों को ख़राब करने से संबंधित मामले में बुधवार (2 अक्टूबर, 2019) को ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया गया है। आदेश के अनुसार, यदि वो 21 अक्टूबर तक कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होती हैं तो उन्हें ‘घोषित अपराधी’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

कोर्ट के इस आदेश पर पाकिस्तान के एक पत्रकार ने ट्वीट किया कि कोर्ट ने कार्यकर्ता गुलालाई इस्माइल के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया है। यह कोर्ट ने नहीं किया है। पाक सेना चाहती है और हम सब जानते हैं कि न्याय व्यवस्था कितनी स्वतंत्र है। इस ट्वीट के जवाब में इस्माइल ने लिखा, “ISI को ख़ुश करने के लिए पाकिस्तान की अदालतें यही सब करती हैं।”

दरअसल, गुलालाई इस्माइल को पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसलिए निशाने पर लिया है क्योंकि उन्होंने पाक सेना द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को उजागर किया था। इसलिए पाकिस्तान ने उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया था, इसके बाद वो अमेरिका पहुँच गई थीं। फ़िलहाल, वो इस समय अपनी बहन के साथ ब्रूकलिन में रह रही हैं।

बता दें कि गुलालाई, पाकिस्तान के पश्तून समुदाय के अधिकारों के लिए आवाज़ उठाती रही हैं। उन्होंने ‘अवेयर्स गर्ल्स’ नाम का एनजीओ बनाया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार का कहना है कि उनका संबंध पश्तून तहफ्फुज आंदोलन से है, जिसके ज़रिए वो देश की संस्थाओं के ख़िलाफ़ बातें करती हैं। पाकिस्तान के इस दावे का गुलालाई पूरी तरह से खंडन करती हैं और कहती हैं कि वो सिर्फ़ लोगों के मानवाधिकारों का मुद्दा उठाती हैं।

ग़ौरतलब है कि मीडिया से बातचीत करते हुए गुलालाई इस्माइल ने बताया था कि जिहादी आतंकवाद से निबटने, उसे मिटाने के नाम पर पाकिस्तान (यानी पाकिस्तानी पंजाबी मुस्लिम) अल्पसंख्यक पश्तूनों की सामूहिक हत्याओं को अंजाम दे रहे हैं। गुलालाई इस्माइल का कहना है कि आतंकवाद मिटाने के नाम पर पाकिस्तानी सेना बेगुनाह पश्तूनियों का क़त्ल कर रही है। पाकिस्तानी सेना के टॉर्चर सेलों और नज़रबंदी कैम्पों में हज़ारों लोग बंदी हैं। उन्होंने पाकिस्तानी सेना द्वारा मानवाधिकारों (“इंसानी हुकूक”) का हनन तुरंत बंद करने और बंदियों को रिहा करने की माँग की। साथ आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और अन्य उत्पीड़न करने वालों के खिलाफ उठने वाली आवाज़ों को ही दहशतगर्दी का ख़िताब दे दिया जाता है। पाकिस्तानी सेना की खैबर पख्तूनख्वा में तानाशाही चलती है।

सलमान खान को जान से मारने की धमकी, आरोपित ने कहा- कोर्ट नहीं, उसकी जान लेकर मैं दूँगा उसे सजा

बॉलीवुड के सुपरस्टार सलमान खान को जान से मारने की धमकी मिली है। ये धमकी सोशल मीडिया के जरिए दी गई है। जानकारी के अनुसार पोस्ट के वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया, लेकिन गिरफ्तारी उस समय हुई जब राजस्थान पुलिस ने आरोपित को गाड़ी चुराने के आरोप में पकड़ा। बाद में खुलासा हुआ है कि ये वही शख्स है, जो सलमान खान को मारने की धमकी भी दे चुका है। आरोपित का नाम जैकी बिश्नोई (कुछ खबरों के मुताबिक लॉरेंज बिश्नोई) है और वह सोपू गैंग का सदस्य है।

बता दें कि जैकी ने कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट डाली थी। उसमें उसने सलमान खान को धमकी देते हुए कहा था कि सलमान को उनके गुनाहों की सजा कोर्ट नहीं बल्कि वो देगा। उसने लिखा था, “सोच ले सलमान तू भारत के कानून से बच सकता है, लेकिन बिश्नोई समाज और सोपू पार्टी के कानून ने तुझे मौत की सजा सुना दी है। सोपू की अदालत में तू दोषी है।”

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अब जैसे ही जैकी ने ये पोस्ट डाला, देखते ही देखते ये सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पहले लगा काला हिरण शिकार कांड को लेकर आरोपित ने ये पोस्ट डाला था, लेकिन बाद में खुलासा हुआ कि जैकी ने वास्तविकता में ये पोस्ट पब्लिसिटी के लिए डाला था।

जोधपुर चोपसानी के सीआई प्रवीण आचार्य ने सलमान खान को दी धमकी वाले मामले में सूचना देते हुए बताया कि 2 लोग गिरफ्तार हुए हैं। जाँच में पता चला है कि इन्होंने ये काम सिर्फ़ पब्लिसिटी पाने के लिए किया था।

पुलिस के अनुसार उन्होंने संदिग्ध मानते हुए कुछ दिनों पहले इन्हें चेकिंग के दौरान रोका था। दोनों लग्जरी कार में थे। जाँच में पता चला गाड़ी चोरी की हैं और दोनों मादक पदार्थों की तस्करी करते हैं, जिसके लिए वे गाड़ियों की चोरियाँ भी करते हैं। मामले में जाँच आगे बढ़ी तो पता चला कि इनमें से एक आरोपित जैकी बिश्नोई तो वही शख्स है जिसने सलमान खान को जान से मारने की धमकी दी थी।

पूछताछ में आरोपित ने अपने इस अपराध को स्वीकार लिया। उसने बताया कि उसने सलमान खान को फेसबुक पोस्ट के जरिए 16 सितंबर को जान से मारने की धमकी दी थी, लेकिन ऐसा सिर्फ़ सोशल मीडिया पर पॉपुलर होने के लिहाज से किया था।

नई दिल्ली-कटरा का सफर अब 8 घंटे में, गृहमंत्री अमित शाह ने वंदे भारत एक्सप्रेस को दिखाई हरी झंडी

वैष्णो देवी कटरा के लिए चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन का आज गुरुवार (3 अक्टूबर) को शुभारंभ हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आज वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखा कर रवाना किया। अमित शाह के साथ रेल मंत्री पीयूष गोयल और अन्य मंत्री भी उपस्थित थे।

यह भारत की दूसरी वंदे भारत एक्सप्रेस है, जो बिना इंजन के स्व-चालित ट्रेन है। नई दिल्ली और वाराणसी के बीच पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को पीएम मोदी ने हरी झंडी दिखाई थी। हाई स्पीड ट्रेन चलने से दिल्ली और कटरा के बीच यात्रा का समय 12 घंटे से कम होकर अब आठ घंटे रह जाएगा।

गृह मंत्री ने कहा कि आज हाईस्पीड वंदे भारत रेलगाड़ी माता वैष्णो देवी के दरबार जाएगी। इससे एक नई शुरूआत वैष्णो देवी जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए होने जा रही है। रेल अधिकारियों के अनुसार, इस ट्रेन में 16 डिब्बे हैं, जिसमें 14 चेयर कार और 2 एग्ज़ीक्युटिव क्लास के हैं। प्रत्येक चेयर कार कोच में 78 कुर्सियाँ हैं। इस ट्रेन में 1100 यात्री सवार हो सकते हैं, इसकी बुकिंग शुरू कर दी गई है। 5 अक्टूबर से यह ट्रेन रोज़ाना नई दिल्ली-कटरा और कटरा-नई दिल्ली के लिए दौड़ेगी। टिकट के बारे में बता दें कि चेयर क्लास का टिकट 1630 रुपए का है और एग्ज़ीक्यूटिव चेयर कार का टिकट 3,015 रुपए का होगा। 

इस मौक़े पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि उन्हें पूरी तरह भारत में बनी इस ट्रेन पर गर्व है। वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने से पहले अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने अनुच्छेद-370 पर बात की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद-370 को हटाकर कश्मीर को हमेशा के लिए भारत से जोड़ने का काम किया है क्योंकि हर भारतीय के मन में एक कसक थी, इसका समाधान पीएम मोदी ने किया।

अमित शाह ने कहा, “मैं मानता हूँ कि 370 देश की एकता और अखंडता के लिए विघ्न था, 370 कश्मीर के विकास के बीच में सबसे बड़ा रोड़ा था। मुझे भरोसा है कि 370 हटने के बाद कश्मीर के अंदर आतंकवाद और आतंकवादियों की विचारधारा को संपूर्ण उन्मूलन करने में हमें सफलता मिलने वाली है।”

पाक ने फिर खाई मात: भारत के दबाव में फ्रांस ने POK के ‘राष्ट्रपति’ को नेशनल असेंबली में बोलने से रोका

भारत को फ्रांस में बड़ी कूटनीतिक जीत मिली है। सूत्रों के अनुसार, भारत ने फ्रांस के निचले सदन में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के राष्ट्रपति मसूद खान के कार्यक्रम को रद्द करवा दिया है। भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक आपत्ति पत्र लिखा था जिसके बाद पीओके के राष्ट्रपति को कार्यकम में शामिल होने से रोक दिया गया।

दरअसल, फ्रांस की राजधानी पेरिस में पाकिस्तानी मिशन 24 सितंबर को नेशनल असेंबली में पीओके के राष्ट्रपति मसूद ख़ान की बैठक के लिए ज़ोर दे रहा था। इसके बारे में जैसे ही भारत को पता चला उसने कूटनीतिक क़दम उठाया। इस क़दम के तहत भारतीय मिशन ने फ्रांस के विदेश मंत्रालय को एक डेमार्श (आपत्ति पत्र) भेजते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से भारत की संप्रभुता का उल्लंघन होगा।

भारतीय समुदाय ने भी नेशनल असेंबली के स्पीकर और सांसदों को इस मामले के संबंध में मेल भेजे। ख़ान, फ्रांस के निचले सदन मे आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने वाले थे। जब उन्हें फ्रांस सरकार ने कार्यक्रम में जाने की अनुमति नहीं दी गई तो पाकिस्तान के राजदूत मोइन-उल-हक ने इसमें हिस्सा लिया और उनकी तरफ़ से संबोधित किया। कार्यक्रम पूरी तरह से फ्लॉप रहा और इसमें स्थानीय हस्तियों ने भी शिरक़त नहीं की।

इस पूरे घटनाक्रम के चश्मदीदों के अनुसार, फ्रांस के सांसदों के नहीं पहुँचने की आशंका की वजह से पाकिस्तानी राजदूत को मसूद ख़ान के सम्मान में आयोजित डिनर को भी रद्द करना पड़ा। ये डिनर नेशनल असेंबली के कार्यक्रम की पूर्वसंध्या यानी 23 सितंबर को आयोजित होना था। जानकारी के अनुसार, फ्रांस सरकार ने फ्रांस-पाकिस्तान फ्रेंडशिप ग्रुप को पहले ही स्पष्ट संदेश दे दिया था कि मसूद ख़ान और उनके कार्यक्रम से पूरी तरह से दूरी बनाकर रखनी है। इस तरह, भारत अपने मंसूबे में क़ामयाब हो गया और फ्रांस में भी पाकिस्तान की चालबाज़ियों पर पानी फिर गया।

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान की उम्मीद के विपरीत कार्यक्रम ने किसी भी स्थानीय जनता का ध्यान अपनी ओर नहीं आकर्षित किया। कार्यक्रम में शिरक़त करने वाले अधिकतर लोग पाकिस्तानी कर्मचारी ही थे। बता दें कि फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य है। उसने जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान द्वारा की जाने आतंकी गतिविधियों के ख़िलाफ़ भारत का साथ दिया था। इसके अलावा, फ्रांस ने जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध समिति में वैश्विक आतंकी घोषित किए जाने पर भी भारत का साथ दिया था।

दिल्ली में घुसे जैश के 3-4 आत्मघाती आतंकवादी, खुफिया सूचना के बाद कई जगह छापेमारी, रेड अलर्ट

राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में इस वक्त जैश-ए-मोहम्मद के 4 आतंकी मौजूद हैं। खूफिया एजेंसी ने खुद इसके बारे में खुलासा किया है। इन आतंकियों के पास आधुनिक हथियार हैं और ये किसी बड़े हमले को अंजाम देने की फिराक में हैं। इंटेलिजेंस को मिली सूचना के बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल कई इलाकों में छापेमारी कर रही हैं। इन्हें ढूँढने के लिए पुलिस का सर्च ऑपरेशन जारी है।

आतंकी हमले की आशंका के चलते दिल्ली में पुलिस ने अलर्ट जारी कर दिया है, साथ ही सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई हैं। बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों और मेट्रो स्टेशन पर भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किए गए हैं।

जानकारी के अनुसार आतंकियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने अब तक सीलमपुर और उत्तर पूर्वी दिल्ली के 2 स्थानों एवं जामिया नगर और सेंट्रल दिल्ली के पहाड़गंज स्थित 2 जगहों पर छापेमारी की है। इसके अलावा 2 लोगों को पूछताछ के लिए भी हिरासत में लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि एक दिन पहले यानी बुधवार को ही अभी पंजाब से एक आतंकी गिरफ्तार हुआ है और आज दिल्ली को लेकर ये खबर आ गई। फिदायीन हमले की आशंका के कारण श्रीनगर, अमृतसर, पठानकोट में सुरक्षा कड़ी कर दी गई और अन्य कई जगहों पर भी ऑरेंज अलर्ट जारी हुआ है। इससे पहले एसआईटी ने अमृतसर से तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया था। उनके पास से 5 AK–47, 2 राइफल और गोला बारूद बरामद हुआ है।

यहाँ बता दें कि आर्टिकल 370 के निष्प्रभावी होने के बाद से ही आतंकी भारत में घुसपैठ करने की कोशिशों में जुटे हैं। बीते दिनों घुसपैठ के मनसूबों को नाकाम होता देख उन्होंने ड्रोन के जरिए भारत में आतंकियों तक हथियार भी पहुँचाएँ, जिनमें 2 ड्रोन पुलिस द्वारा जब्त कर लिए गए।