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‘RSS वाले शादी नहीं करते, यही हनीट्रैप का कारण’ – कॉन्ग्रेस नेता का बयान, लोगों ने पूछा – राहुल ने क्यों नहीं किया?

मध्य प्रदेश में हनी ट्रैप सेक्स स्कैंडल का भंडाफोड़ होने के बाद कॉन्ग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने इस पूरे कांड के लिए आरएसएस के लोगों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने इस इल्जाम के पीछे बड़ा ही अजीब तर्क दिया है। उनका कहना है कि RSS के लोगों का शादी नहीं करना, इसका पूरे स्कैंडल का मुख्य कारण है।

उन्होंने कहा, “RSS के लोग शादी नहीं करते, यह हनीट्रैप का मुख्य कारण है। संघ के लोगों को शादी करनी चाहिए। संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन भागवत को भी शादी करनी चाहिए।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने आगे कहा, “मध्य प्रदेश में हनी ट्रैप का ये गैंग शिवराज सिंह चौहान के वक्त से चल रहा है। इस केस में कई भाजपा नेताओं के नाम सामने आएँगे। इस केस में कई भाजपा नेता शामिल हैं। ये गिरोह देश में 5 से 6 राज्यों में काम करता है।”

अब इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स उन्हें काफी ट्रोल कर रहे हैं। उनके इस बयान को घटिया करार देते हुए यूजर्स सवाल कर रहे हैं कि यदि संघ के लोगों को शादी करनी चाहिए तो फिर कॉन्ग्रेस के राहुल गाँधी कौन सी दुल्हनिया का इंतजार कर रहे हैं? ट्विटर पर लोग पूरे गाँधी परिवार को लेकर सवाल उठा रहे हैं और इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।

इस बयान के बाद लोग मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की वायरल हुई तस्वीरों का मुद्दा भी उछालते नजर आए।

लोगों ने अग्रवाल के बयान पर कहा कि ऐसा लगता है भाजपा वालों ने कॉन्ग्रेस को खत्म करने की सुपारी कॉन्ग्रेसियों को ही दे रखी है।

गौरतलब है कि 19 सितंबर 2019 को इंदौर नगर निगम के अधीक्षण इंजीनियर हरभजन सिंह की शिकायत पर इस पूरे गिरोह का आधिकारिक रूप से खुलासा हुआ था। जिसमें फिलहाल 6 आरोपित गिरफ्तार हैं, जिनमें महिलाएँ भी शामिल हैं।

इस कांड को देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहा जा रहा है। इस मामले में जाँच में जुटी एसआईटी की टीम अब तक 4 हजार से ज्यादा फाइलें जुटा चुकी हैं और बाकी के मिलने का सिलसिला जारी है। बताया जा रहा है गिरोह के शिकंजे में कई शीर्ष नेता, आईएस अधिकारी, इंजिनियर और बड़े व्यापारी फँस चुके हैं। इसके अलावा इस सेक्स रैकेट में कई मीडियाकर्मियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। लेकिन बता दें कि अन्य लोगों की तरह मीडियाकर्मी हनी ट्रैप रैकेट के शिकार नहीं थे, बल्कि दलाल थे।

रजनीकांत और कमल हासन राजनीति में न घुसें, वरना मेरे जैसा हश्र होगा: चिरंजीवी

साउथ फिल्मों के सुपरस्टार चिरंजीवी ने मेगास्टार से राजनेता बने रजनीकांत और कमल हासन को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी। तमिल मैग्जीन को दिए अपने इंटरव्यू में उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए दोनों स्टार नेताओं के लिए अपना संदेश दिया।

उन्होंने कहा, “अगर इंसान सच्चा है और उसके अंदर कुछ करने की इच्छा शक्ति है, तो वह उसे (राजनीति में) नहीं कर पाएगा।” अपने अनुभवों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “जब मैं राजनीति से जुड़ा था, उस वक्त मैं नंबर-1 सुपरस्टार था, लेकिन राजनीति से जुड़ने के लिए मैंने सब छोड़ दिया, और चुनाव में मैं अपने क्षेत्र से ही हार गया, क्योंकि मेरे प्रतिद्वंदी ने करोड़ों रुपए खर्च किए, सिर्फ़ मुझे हराने के लिए। इसके बाद ऐसा ही पवन कल्याण के साथ हुआ।”

तमिल मैग्जीन ‘आनंद विकटन’ को दिए साक्षात्कार में साउथ सुपरस्टार ने इस बात का भी खुलासा किया कि इन चुनावों में उन्हें लगा था कि कमल हासन की पार्टी जीत जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसलिए जो लोग संवेदनशील हैं, उनके लिए राजनीति नहीं हैं।

उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ, कमल हासन और रजनीकांत के साथ ऐसा बिलकुल न हो, जैसा मेरे साथ हुआ, लेकिन मेरी सलाह दोनों को यही है कि राजनीति में न घुसें।”

चिरंजीवी के मुताबिक अगर आप हार और असफलताओं को संभालते हुए लोगों के लिए काम करने को, अच्छा काम करने को तैयार हैं, तो राजनीति में जाइए। हो सकता है चीजें एक दिन आपके लिए बदल जाएँ।

यहाँ बता दें कि मेगास्टार चिरंजीवी की नई फिल्म ‘सैरा नरसिम्हा रेड्डी’ विश्व भर में 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है, जिसका प्रमोशन करने के दौरान दिए इंटरव्यू में ही उन्होंने ये बयान दिया और जहाँ वो इस दौरान इस बात पर भी जोर डालते दिखे कि राजनीति सिर्फ़ पैसे का खेल है।

बच्चों का सीरियल रेपिस्ट आसिफ़ गिरफ्तार, 10 साल के बच्चे के बलात्कार के बाद गला दबाकर कुएँ में फेंका

उत्तर प्रदेश के फ़र्रुखाबाद में एक 10 साल के जुबैर (बदला हुआ नाम) का बेरहमी के यौन शोषण कर गला दबाकर उसकी हत्या करने का मामला सामने आया है। इस ख़ौफ़नाक वारदात को अंजाम देने वाला आसिफ़ (26 वर्षीय) नाम का शख़्स सीरियल रेपिस्ट है, जो सेक्स का आदी है। पुलिस की पूछताछ में इस बात का ख़ुलासा हुआ है कि आसिफ़ अपनी हवस को मिटाने के लिए छोटे बच्चों (4-11 वर्ष के) को शिकार बनाता था। आसिफ़ ने पुलिस को बताया कि वो 6 बच्चों के साथ कुकर्म कर चुका है। पुलिस ने उसके ख़िलाफ़ हत्या व अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे जेल भेज दिया है।

ख़बर के अनुसार, 20 सितंबर को फ़र्रुखाबाद की सदर कोतवाली क्षेत्र के एक कुएँ में 10 साल के जुबैर की लाश मिली। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद ख़ुलासा हुआ कि बच्चे की मौत गला दबाने से हुई थी। कुकर्म की पुष्टि के लिए स्लाइड बनाकर जाँच के लिए भेज दी गई है। पुलिस ने बताया कि इस मामले की जाँच के लिए स्पेशल टीम का गठन किया गया था। 

इस मामले की जाँच टीम के इंचार्ज राजीव सिंह ने शुरू की। आसिफ़ ने पुलिस को बताया कि जुबैर को वो बकरी तलाशने के बहाने से जंगल में ले गया था, जहाँ उसने बच्चे के साथ कुकर्म किया। घर पहुँच कर बच्चे ने अपने घरवालों को आपबीती सुनाई, इससे नाराज़ आसिफ़ ने मासूम का गला दबाकर उसकी हत्या कर दी और शव को कुएँ में फेंक दिया। पूछताछ के दौरान इस बात का भी पता चला कि आसिफ़ बच्चों के साथ दुष्कर्म नहीं करने पर पागल सा हो जाता था।

सख़्ती से पेश आई पुलिस के सामने आसिफ़ ने यह भी बताया कि वो छोटे बच्चों को टॉफ़ी-बिस्किट देने के बहाने अपने पास बुलाता था और सुनसान जगह पर लेकर उनका यौन शोषण करता था। साथ ही वो बच्चों को सख़्त हिदायत भी देता ता कि वो किसी से कुछ न बताएँ, नहीं तो वो उन्हें जान से मार देगा। डरे-सहमे बच्चों ने ख़ुद के साथ हुए शोषण के ख़िलाफ़ कभी अपना मुँह नहीं खोला। लेकिन, जब यह मामला सामने आया तो पुलिस ने मोहल्ले के बच्चों से पूछताछ की। पूछताछ के दौरान बच्चों ने रोते-बिलखते हुए दरिंदगी भरे व्यवहार का पूरा हाल कह सुनाया।

मीडिया में आई ख़बर के अनुसार, गुरुवार (26 सितंबर) को कोतवाली पहुँचे अपर पुलिस अधीक्षक त्रिभुवन सिंह ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि कुकर्म करने के आरोपित आसिफ़, पुत्र मोहम्मद सईद, निवासी जटवारा जदीद को पकड़ा था। उन्होंने बताया कि घटना के दिन से ही चारों तरफ़ पुलिस ने अपने मुखबिर लगा दिए थे। मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने उसे गिरफ़्तार कर लिया।

प्रोपेगेंडा वालों के दिमाग के अलावा कहीं बंदी नहीं: J&K पुलिस अधिकारी ने दिखाया विडियो

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले से आर्टिकल 370 को निरस्त किए जाने के बाद से ही देश भर में अफवाहों का दौर जारी है। विपक्षी नेता और विदेशी मीडिया लगातार ये दिखा रहा है कि वहाँ के हालात बेहद खराब हैं। इसी के साथ पाकिस्तान भी भ्रामक खबरें फैलाने में जुटा हुआ है।

इन सबके झूठ का तब पर्दाफाश हो गया, जब जम्मू-कश्मीर के पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन ने एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में साफ तौर पर कश्मीर के सामान्य हालात को देखा जा सकता है। जम्मू-कश्मीर में हालात सामान्य हैं, बावजूद इसके देश के कई बड़े नेता और अन्य लोग माहौल बिगाड़ने वाले संदेश लगातार जारी कर रहे हैं। अगर पुलिस अधिकारी इम्तियाज हुसैन द्वारा जारी किए गए वीडियो को देखें तो वहाँ हालात सामान्य ही नजर आ रहे हैं।

इस वीडियो में घाटी के कई जिलों की तस्वीरें और लाइव फुटेज है, जिसे देखकर पता चलता है कि वहाँ पर हालात सामान्य हैं। लोग सामान्य तरीके से अपनी दिनचर्या में जुटे हुए हैं। इम्तियाज हुसैन ने कश्मीर में हालात खराब होने के दावे को नकारते हुए ये वीडियो पोस्ट किया और लिखा कि प्रोपेगेंडा फैलाने वालों के दिमाग के अलावा कहीं कोई बंद या प्रतिबंध नहीं है।

बता दें कि इससे पहले भी हुसैन ने बकरीद के समय में एक वीडियो पोस्ट करते हुए कश्मीर के हालात को सामान्य बताया था। वीडियो में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों द्वारा बकरीद की तैयारी के चलते खरीदारी करने से कई दुकानों में हलचल नजर आ रही है। हुसैन ने 1 मिनट 48 सेकेंड के इस वीडियो को 10 अगस्त की रात 9.40 बजे अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर किया था।

जम्मू पुलिस ने जैश के बड़े आतंकी मॉड्यूल का किया पर्दाफाश, इम्तियाज अहमद सहित 8 संदिग्ध आतंकी हिरासत में

आतंक के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। जम्मू पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर जैश के बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है। इस दौरान 8 संदिग्ध आतंकी हिरासत में लिए गए हैं। इन लोगों को सांबा, जम्मू, रामबन और शोपियां से पकड़ा गया है। इनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पकड़े गए संदिग्धों पर ट्रक के जरिए जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकियों तक हथियार पहुँचाने का शक है। हाईवे पर तलाशी अभियान चलाकर तीन ट्रकों को जब्त किया गया है। जबकि एक ट्रक पंजाब सीमा में पकड़ा गया है।

जानकारी के मुताबिक, यह लोग पाकिस्तान में अपने हैंडलर के संपर्क में थे और किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहे थे। बताया जा रहा है कि इनमें से एक इम्तियाज अहमद है, जिसको पाकिस्तान से लगातार निर्देश मिल रहे थे। पाकिस्तान से आशिक मीर नाम का शख्स लगातार इम्तियाज के संपर्क में था और निर्देश देता था। बता दें कि डोडा पुलिस की सूचना पर दो दिन पूर्व जम्मू से एक युवक को पकड़ा गया था। उसने पूछताछ में बताया था कि रगूड़ा गाँव निवासी इम्तियाज अहमद के पास पाकिस्तान से फोन आते हैं। उस युवक की सूचना के आधार पर सात अन्य को हिरासत में लिया गया।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की ओर से संभावित खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने गुरुवार (सितंबर 26, 2019) को दिल्ली लौटने से पहले कश्मीर घाटी में सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की और बड़े आतंकी हमले की आशंका जताए जाने के बाद एक बार फिर केंद्र शासित प्रदेश का दौरा किया था।

डोभाल ने सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट रहने और काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड को मजबूत रखने का आदेश दिया था। उन्होंने कश्मीर में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की और सुरक्षा अधिकारियों को आतंकवाद निरोधक अभियान में और अधिक तेजी लाने के निर्देश दिए थे। अजित डोभाल के जाने के एक दिन बाद ही सुरक्षा कर्मियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है।

EC का बड़ा फैसला: असम में NRC से बाहर हुए लोग डाल पाएँगे वोट

चुनाव आयोग ने NRC लिस्ट में बाहर हुए लोगों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। EC ने बताया है कि एनआरसी की सूची से बाहर लोगों को वोट डालने की अनुमति होगी। हालाँकि आयोग ने ये भी साफ़ किया है कि इन लोगों को ये अधिकार तभी तक मिलेगा जब तक नागरिक ट्रिब्यूनल उनके ख़िलाफ़ फैसला न सुना दे। इन सभी लोगों को ‘डी’ मतदाता श्रेणी (संदेहास्पद नागरिकता वाली श्रेणी) में रखा गया है। इसलिए इनके वोटर आइडी कार्ड में ‘डी’ चिह्नित किया जाएगा।

चुनाव आयोग के मुताबिक नागरिक ट्रिब्यूनल का फैसला आने तक वोटर लिस्ट में मौजूद हर मतदाता को वोट डालने का अधिकार होगा। ऐसे में अब जब तक इस मामले पर फाइनल ऑर्डर नहीं आता, तब तक ये आदेश बहाल रहेगा।

गौरतलब है कि NRC द्वारा अंतिम सूची 31 अगस्त को प्रकाशित हुई थी। जिसमें 3.11 करोड़ लोगों के नाम शामिल थे, लेकिन 19 लाख लोग इस सूची से बाहर हो गए थे।

लिस्ट से बाहर लोगों को नागरिक ट्रिब्यूनल में अपील करने के लिए 120 दिन का मौका दिया गया है और कहा गया है कि अगर वे ट्रिब्यूनल के फैसले से संतुष्ट नहीं होते, तो उनके पास हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाने का भी विकल्प है।

प्रशासन ने इस कार्य के संबंध में असम में 100 से ज़्यादा नागरिक ट्रिब्यूनल स्थापित किए हैं और राज्य सरकार आने वाले हफ्तों में अन्य 200 नागरिक ट्रिब्यूनल स्थापित करने वाली है।

बता दें असम में एनआरसी की आखिरी सूची आने के बाद से इसपर लगातार बहस चल रही है। खासतौर पर दिल्ली और पश्चिम बंगाल में इस सूची को लेकर नेताओं में बयानबाजी तेज है। जिसका सबसे ताजा उदाहरण अरविंद केजरीवाल और मनोज तिवारी वाला मसला है। जहाँ दिल्ली सीएम केजरीवाल ने सांसद मनोज तिवारी के लिए कहा था कि यदि यहाँ एनआरसी आई तो मनोज तिवारी को दिल्ली छोड़नी पड़ेगी।

वहीं दूसरी ओर ममता बनर्जी भी पश्चिम बंगाल में NRC लागू होने की बात पर अपने हाथ पीछे कर रही है। वो तो इस संबंध में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलकर बात कर चुकी है, लेकिन अमित शाह द्वारा उन्हें इस संबंध में कोई जवाब नहीं मिला।

पाकिस्तान में 25000 से ज्यादा अल्पसंख्यक मार दिए गए, हजारों लापता: कराची के पूर्व मेयर ने ही खोली इमरान की पोल

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति कितनी बदहाल है? ये किसी से छिपा नहीं हैं। विश्व के कोने-कोने से पाकिस्तान को अपनी कट्टरपंथी गतिविधियों के लिए थू-थू मिल रही है। अब ऐसे में कराची के पूर्व मेयर वासे जलील ने भी न्यूयॉर्क में पाकिस्तानी अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर होते अत्याचारों की पोल-पट्टी खोलकर पाक की हकीकत को और पारदर्शी कर दिया है। उन्होंने गुरुवार (सितंबर 26, 2019) को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों और मुहाजिरों पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जताई है।

न्यूयॉर्क में गुरुवार को उन्होंने पाकिस्तान में दशकों से मुहाजिरों पर होते जुल्म पर अपना बयान दिया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में 25 हजार से ज्यादा अल्पसंख्यक लोग मारे जा चुके हैं। हजारों लोग लापता हो गए। हम पाकिस्तान में अपनी स्थिति से दुनिया को अवगत कराना चाहते हैं।”

उन्होंने बताया, “पाकिस्तान मुहाजिरों को अन्याय के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करने की अनुमति नहीं देता है। हमारे पास अपनी माँगों के लिए संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। यह हमारा नैतिक, मानवीय और लोकतांत्रिक अधिकार है।”

पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य की हत्या का जिक्र करते हुए पूर्व मेयर ने कहा, “पाक के पंजाबी मुस्लिम बहुसंख्यकों के अल्पसंख्यकों के साथ किए अत्याचार की सैकड़ों कहानियाँ हैं। 2018 में पाकिस्तान नेशनल असेंबली के एक सदस्य सैयद अली रज़ा आब्दी को पाकिस्तान की सेना के इशारे पर मार दिया गया था।”

गौरतलब है कि इस समय पाकिस्तान द्वारा अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे अत्याचारों के ख़िलाफ़ न्यूयॉर्क की सड़कों पर बड़ी तादाद में प्रदर्शन चल रहा है। ये सब उस समय हो रहा है जब कल पाक पीएम इमरान UNGA में भाषण देने वाले हैं।

कई सौ की तादाद में डिस्प्ले स्क्रीन के साथ टैक्सी और ट्रक न्यूयॉर्क की सड़कों पर देखने को मिल रहे हैं, जहाँ पाकिस्तान के अत्याचारों के ख़िलाफ़ तस्वीरों और स्लोगन्स के जरिए प्रदर्शन हो रहा है। इसे अमेरिका के मुहाजिर एडवोकेसी ग्रुप वॉयस ऑफ कराची ने लॉन्च किया है।

जानकारी के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के आसपास खड़ी गाड़ियों पर दिखे कुछ विज्ञापनों में लिखा है, “पाकिस्तान: मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के चार्टर को न मानने वाला देश” और “मुहाजिर पाकिस्तान में यूएन हस्तक्षेप की माँग करते हैं।” (“Pakistan: A country in denial of UN charter on Human rights” and “Mohajirs demand the UN intervention in Pakistan.”)

इसके अलावा बता दें वॉयस ऑफ कराची के अध्यक्ष नदीम नुसरत की मानें तो पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को इसलिए उठा रहा है, ताकि लोगों का ध्यान पाक सेना के अत्याचारों पर न जाए। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अल्पसंख्यक अमेरिकी कॉन्ग्रेसियों और सीनेटरों के पास पहुँच रहे हैं और वे उनसे पाक पर दबाव बनाने के लिए भी मदद माँग रहे हैं।

वहीं, एक मुहाजिर कार्यकर्ता कहकशां हैदर का कहना है, ‘‘पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट कर देना चाहिए। उसे दी जा रही सभी वित्तीय सहायता रोक देना चाहिए। यह आतंक का देश है। पाक पूरी दुनिया में आतंकवाद फैला रहा है। मोदी और ट्रम्प से गुजारिश है कि हमारे समुदाय को बचाने में मदद करें।’’

मजहब के ख़िलाफ़ ग़लतफ़हमी दूर करने, महान धर्म इस्लाम के बारे में बताने के लिए Pak PM इमरान खान शुरू करेंगे इस्लामिक TV चैनल

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस्लाम को लेकर लोगों के बीच ग़लत धारणाएँ हैं, इसे दूर करने के लिए पाकिस्तान, तुर्की और मेलेशिया ने मिलकर अंग्रेज़ी भाषी इस्लामी टीवी चैनल शुरू करने का निर्णय लिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 74वें सत्र में शामिल होने न्यू यॉर्क पहुँचे इमरान ख़ान ने कहा कि दुनिया को इस्लामी इतिहास से अवगत कराने के लिए टीवी चैनल पर मजहब से जुड़े कार्यक्रम और फ़िल्में दिखाई जाएँगी।

अपने एक ट्वीट में इमरान खान ने लिखा, “राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन, प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद और मैंने आज बैठक की। इस बैठक में इस्लाम को लेकर बनी ग़लत धारणाओं को दूर करने और हमारे महान धर्म इस्लाम के बारे में एक अंग्रेज़ी चैनल शुरू करने का फ़ैसला किया गया।” इसके आगे उन्होंने कहा कि मुस्लिमों के ख़िलाफ़ ग़लतफ़हमी को दूर किया जाएगा और ईशनिंदा से जुड़ी बातों को सही अर्थों में प्रस्तुत किया जाएगा।

पाक पीएम इमरान ख़ान ने कहा, “अपने लोगों को शिक्षित, अवगत कराने के लिए मुस्लिम इतिहास पर सीरीज और फिल्मों का निर्माण किया जाएगा।”

ख़बर के अनुसार, पाकिस्तान, तुर्की की सह-मेज़बानी में नफ़रती भाषणों के प्रतिकार विषय पर हुई चर्चा में इमरान ख़ान ने भी शिरक़त की।

इस दौरान ख़ान ने अपने संबोधन में नफ़रत भरे भाषणों का प्रतिकार और इस्लाम को लेकर ग़लत धारणाओं को ख़त्म करने के ठोस उपायों पर ज़ोर देने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समुदाय के हाशिए पर जाने से कट्टरता बढ़ सकती है। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने घृणात्मक भाषणों को इंसानियत के ख़िलाफ़ सबसे जघन्य अपराध बताया। 

मध्य प्रदेश हनी ट्रैप: दलाली करते थे हाई-प्रोफ़ाइल पत्रकार, श्वेता और आरती ने शामिल किया था गैंग में

मध्य प्रदेश हनी ट्रैप कांड में आए दिन नए ख़ुलासे हो रहे हैं। इस मामले में ताज़ा समाचार यह है कि जाँच दल ने पाया है कि सेक्स रैकेट में भोपाल के कई मीडियाकर्मियों के नाम भी शामिल हैं। इंडिया टीवी की ख़बर के अनुसार, इन नामों में एक हिंदी समाचार पत्र के क्षेत्रीय संपादक, एक समाचार चैनल के कैमरामैन और क्षेत्रीय सैटेलाइट चैनल के मालिक का नाम शामिल है।

इससे पहले यह ख़ुलासा हुआ था कि महिलाएँ कैसे हाई प्रोफ़ाइल और नामी लोगों को अपने जाल में फँसाती थीं। बता दें कि इन महिलाओं के जाल में फँस चुके कई राज्य मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं।

ख़बर के अनुसार, मीडियाकर्मी हनी ट्रैप रैकेट के शिकार नहीं थे, बल्कि दलाल थे। मीडियाकर्मियों ने कथित तौर पर पीड़ित नौकरशाहों, मंत्रियों और रैकेट की सरगना श्वेता जैन के बीच दलाल के तौर पर सौदे करवाने में मदद की थी।

पत्रकारों और प्रमुख मीडियाकर्मियों के रैकेट में शामिल होने का आरोप सबसे पहले भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने लगाया था। मीडिया से बात करते हुए विजयवर्गीय ने कहा था कि उनके पास रैकेट में शामिल 3 या 4 पत्रकारों के बारे में विशेष जानकारी है।

IANS ने एक हिन्दी दैनिक के प्रधान संपादक हेमंत शर्मा के हवाले से कहा है कि पत्रकारों का एक निश्चित समूह है, जो सत्ता के गलियारों में केवल ब्लैकमेलिंग और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं से पैसा ऐंठने के एकमात्र उद्देश्य से चलते हैं। शर्मा ने यह भी कहा है कि श्वेता और आरती दयाल ने कुछ पत्रकारों को अपने रैकेट में शामिल किया था, जिनका इस्तेमाल वे अपने पीड़ितों के साथ सौदे करने के लिए करती थी।

इसी कड़ी में मोनिका यादव जिसे अन्य महिलाओं के साथ गिरफ़्तार किया गया था, उसके पिता को पूछताछ के लिए इंदौर पुलिस ने हिरासत में लिया था। ख़बर में कहा गया है कि मोनिका ने ख़ुलासा किया था कि उसके घर में कुछ साक्ष्य छिपे हुए हैं और पुलिस टीम मोनिका के साथ राजगढ़ ज़िले के सांवंसी गाँव गई थी।

कथित तौर पर, मोनिका एक ग़रीब परिवार की एक प्रतिभाशाली लड़की थी, जिसे पत्रकारिता पाठ्यक्रम के लिए वित्तीय मदद देने का वादा कर आरती दयाल ने फँसाया था। मोनिका और आरती को उनके ड्राइवर ओमप्रकाश के साथ 18 सितंबर को इंदौर के एक होटल से गिरफ़्तार किया गया था, जहाँ वे एक सरकारी अधिकारी से 50 लाख रुपए लेने गए थे, जिसे वे ब्लैकमेल कर रहे थे।

आरती दयाल, श्वेता स्वप्निल जैन, बरखा सोनी, श्वेता विजय जैन, मोनिका यादव और ओमप्रकाश कोरी नाम के ड्राइवर हाई प्रोफाइल हनी ट्रैपिंग रैकेट में गिरफ़्तार होने वाले पहले व्यक्ति थे।

इस पूरे कांड में जाँच टीम के हाथों एक एक हिट लिस्ट हाथ लगी थी, जिसमें 13 आइएस अधिकारियों के नाम सामने आए थे, जिन्हें लड़कियों ने प्रेम में फँसाया था और उनकी सेक्स वीडियो दिखाकर उनसे पैसे माँगने वाले थे। पुलिस को इस ब्लैकमेल करने वाले गिरोह से अभी तक 90 वीडियो मिल चुके हैं। इनमें सियासत से जुड़े लोगों से लेकर कई ब्यूरोक्रेट्स के चेहरे उजागर हुए। गिरोह में शामिल महिलाओं के पास से 8 सिम कार्ड भी मिले थे।

अब्दुल और नावेद ने बंदूक की नोंक पर किया दलित युवती का रेप, वीडियो बनाकर किया वायरल

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के कोतवाली क्षेत्र में बलात्कार करने के बाद वीडियो वायरल करने का एक और मामला सामने आया है। बता दें कि अब्दुल और नावेद नाम के दो युवकों ने 20 वर्षीय एक दलित युवती के साथ बलात्कार किया और फिर उसका वीडियो बनाकर वायरल कर दिया।

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित अब्दुल को बुधवार (सितंबर 25, 2019) को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि एक अन्य आरोपित नावेद फरार है। रामपुर के पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया, “अपराध 12 सितंबर को हुआ था, लेकिन मंगलवार (सितंबर 24, 2019) की शाम को इसकी शिकायत दर्ज की गई। अब्दुल को एफआईआर दर्ज करने के 12 घंटे के भीतर स्वार रोड पर तोपखाना गेट इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया और आरोपित नावेद को पकड़ने के लिए पुलिस की 5 टीमों को लगाया गया है।”

दरअसल, 12 सितंबर 2019 को दलित लड़की गाँव में ही पास के खेत में चारा काटने गई थी, जहाँ नावेद और अब्दुल नाम के दो लोगों ने उसे दबोच लिया और जबरदस्ती उसे एक सुनसान इलाके में ले गए। यहाँ दोनों ने बंदूक की नोंक पर उसके साथ बलात्कार किया। जब पीड़िता ने इसका विरोध किया तो आरोपितों ने उसे जान से मारने की धमकी दी। आरोपितों ने इसका वीडियो भी बनाया और फिर बाद में इसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया।

आरोपितों की धमकी से डरकर पीड़िता ने अपने परिवार को इस बारे में कुछ भी नहीं बताया। मगर, आरोपित द्वारा वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने के बाद पीड़िता के परिवारवालों को इस घिनौने सच का पता चला। इसके बाद पीड़िता के परिजनों ने रामपुर पुलिस स्टेशन का दरवाजा खटखटाया और दोनों आरोपितों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 376-डी, 504, 325, एससी / एसटी अधिनियम के प्रासंगिक प्रावधानों और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया।

इस बीच एसपी अजय पाल शर्मा ने कहा कि शुरुआती जाँच में ये पाया गया कि पीड़ित युवती का अब्दुल के साथ अफेयर था और अब्दुल ने फोन पर बातचीत की रिकॉर्डिंग भी की थी। एसपी ने कहा कि उन्हें आरोपितों द्वारा विभिन्न सोशल मीडिया साइटों पर अपलोड किए गए अपराध का 25-सेकंड का वीडियो भी मिला है। उन्होंने बताया कि पीड़िता को फिलहाल मेडिकल जाँच के लिए भेजा गया है। बाद में जाँच अधिकारी उसे सीआरपीसी की धारा 164 के तहत अपना बयान दर्ज कराने के लिए मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेंगे। 

गौरतलब है कि ऐसी ही एक घटना 22 सितंबर को सामने आई थी जिसमें कौशाम्बी जिले के घोसिया गाँव में तीन युवकों द्वारा एक दलित नाबालिग के साथ गैंगरेप किया गया था और इसका वीडियो बनाया गया था। इस मामले में, नाज़िक नाम के एक आरोपित को ग्रामीणों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि आदिल नाम का मुख्य आरोपित को अगले दिन पकड़ा गया, जो एक मजार में छिपा हुआ था। पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ के बाद उसे दबोच लिया गया था। वहीं, तीसरे आरोपित मोहम्मद आकिब उर्फ बड़का को कौशाम्बी पुलिस ने सराय अकिल इलाके से हिरासत में ले लिया है। इस पर 25 हजार का इनाम भी रखा गया था।