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हाथी-मगरमच्छ की कहानी से समझें कश्मीरियत का दर्द सुनाने वालों ने लद्दाख जाना क्यों उचित नहीं समझा

सुदूर केरल अपने वनों के सौन्दर्य के लिए प्रसिद्ध है और आम तौर पर पर्यटन विभाग भी इसे “गॉड्स ओन कंट्री” के तौर पर प्रचारित करते दिखते हैं। कुछ सौ साल पहले जब त्रावनकोर राजवंश शासन में था, तब यहाँ एक छोटा सा महल बनवाना शुरू किया गया था। समय बीतने के साथ-साथ (संभवतः 1728 से 1758 के बीच) केरल के कायमकुलम में स्थित ये कृष्णापुरम महल अपने पूरे स्वरूप में आया।

आजकल इस महल का इस्तेमाल संग्रहालय के तौर पर होता है। संग्रहालय की प्रसिद्धि यहाँ के “कायामकुलम वाळ” (दोधारी तलवार/खांडा) और इसी जिले में पाई गई एक बुद्ध की मूर्ति के यहाँ होने की वजह से भी है। इसकी असली प्रसिद्धि यहाँ मौजूद “गजेन्द्र मोक्ष” की मुरल पेंटिंग की वजह से है। ये अपने तरीके की सबसे बड़ी पेंटिंग है।

दक्षिण भारत के ही तमिलनाडु में “गजेन्द्र मोक्ष” से जुड़ा गजेन्द्र वर्धा पेरूमल मंदिर भी है। इस मंदिर के बारे में ऐसा माना जाता है कि एक बार हनुमान जी ने यहाँ भगवान विष्णु की उपासना की ताकि वो “गजेन्द्र मोक्ष” का दृश्य देख सकें। उनके यहाँ “गजेन्द्र मोक्ष” का दर्शन करने के कारण इस जगह को “कबीस्थलम” भी कहा जाता है। छठी से नौवीं शताब्दी के बीच के तमिल संतों ने “दिव्य प्रबंध” में इस मंदिर की काफी प्रशंसा की है। आजकल ये दूसरे कई मंदिरों की ही तरह, ‘सेक्युलर सरकार बहादुर’ के नियंत्रण में है, इसलिए इसकी अभी की दशा पर चर्चा जाने देते हैं। जुलाई-अगस्त के समय तमिल मास “आदि” चल रहा होता है और इसी समय इस मंदिर में कुछ विशेष अनुष्ठान भी होते हैं।

अब वापस अगर इन स्थलों से जुड़ी कहानी, यानी “गजेन्द्र मोक्ष” पर चलें तो ये कई जन्मों की कहानी है। जैसा कि गजेन्द्र नाम से ही जाहिर है, कथा में एक हाथी है। अपने पूर्व जन्म में ये हाथी, इंद्रदयुम्न नाम के एक विष्णु भक्त राजा थे। एक बार जब इनके दरबार में अगस्त्य ऋषि आए तो ये उनके स्वागत में उठकर खड़े नहीं हुए। इस पर क्रुद्ध ऋषि ने उन्हें शाप दे डाला कि अगर इतने भारी हो गए हो कि उठ भी नहीं सकते तो अगले जन्म में तुम हाथी के रूप में ही पैदा हो और फिर समझो कि शरीर का बोझ कैसा होता है। कहानी के दूसरे मुख्य किरदार मगरमच्छ भी पिछले जन्म में हुहू नाम के एक गंधर्व राजा थे। एक बार ऋषि देवल के साथ स्नान करते समय उन्हें ठिठोली सूझी।

जैसे ही ऋषि देवल नदी में स्नान करते समय सूर्य को जल अर्पण करने लगे, हुहू पानी के अन्दर घुसकर उनका पैर कुछ ऐसे खींचने लगे जैसे कोई मगरमच्छ हो! इससे क्रुद्ध देवल ऋषि ने उन्हें मगरमच्छ हो जाने का शाप दिया। काफी अनुनय विनय के बाद जब देवल ऋषि माने तो उन्होंने कहा कि भगवान विष्णु आकर तुम्हें इस शाप से मुक्ति दिलाएंगे। शापों के मुताबिक, हाथी और मगरमच्छ अपना जीवन-यापन कर रहे होते हैं।

एक दिन जब हाथी पानी पीने आता है तो मगरमच्छ उसे दबोचकर पानी के अन्दर खींचने लगता है। हाथी अपने आप को छुड़ाने का खूब प्रयास करता है, मगर वो पानी में मगरमच्छ से जीत नहीं पाता। आख़िरकार वहीं के एक कमल के फूल को भगवान विष्णु को अर्पित करते हुए वो उनसे मदद मांगता है। इस वैष्णव कथा के मुताबिक भक्त की पुकार पर भगवान फ़ौरन दौड़े आते हैं और सुदर्शन चक्र चलाकर भक्त को बचाते हैं।

वैष्णव मान्यताओं में इस कहानी की प्रतीकों के रूप में मान्यता भी है। ऐसा माना जाता है कि हाथी यहाँ जीव का स्वरूप है, मगरमच्छ उसके पाप और माया हैं, जिस नदी के कीचड़ जैसे स्थान में हाथी मगरमच्छ के जबड़े में फँसा है, वो कीचड़ संसार है। विकट परिस्थितियों में फँसे लोगों को अक्सर “गजेन्द्र मोक्ष” पढ़ने की सलाह दी जाती है।

शुक्लांबरधरं विष्णुं शशि वर्णं चतुर्भुजं ।
प्रसन्न वदनं ध्यायेत सर्व विघ्नोपशान्तये ।।

बाकी हालिया राजनीति में रूचि रखने वालों के लिए शायद लद्दाख का कश्मीरियत के जबड़े से छूटना कुछ ऐसा ही दृश्य उपस्थित करता होगा। जामयांग सृंग नामग्याल द्वारा लद्दाखी जनता की ओर से दिया गया आभार भी मिलता-जुलता लगता है। आप ये मान सकते हैं कि भगवान हैं, तो “भक्तों” की पुकार भी सुनते होंगे। कश्मीरियत का दर्द सुनाने वालों ने लद्दाख जाना क्यों उचित नहीं समझा, ये भी एक बड़ा सवाल हो सकता है। मेरे विचार से धर्म को आम भारतीय लोगों की तरह राजनीति को दिशा-निर्देश करते रहना चाहिए।

दुर्गा पूजा पंडालों को कोई IT नोटिस नहीं, सिर्फ TDS के बारे में पूछा: TMC का प्रोपेगेंडा CBDT से ख़ारिज

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने तृणमूल कॉन्ग्रेस और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने किसी दुर्गा पूजा समिति को आयकर नोटिस भेजा ही नहीं। उन्होंने तो TDS काटे जाने की जानकारी भर माँगी थी।

दिसंबर, 2018 में भेजी थीं TDS नोटिसें

CBDT के अनुसार उसने केवल दिसंबर, 2018 में करीब 30 दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस भेज कर यह पूछा था कि उन्होंने अपने कॉन्ट्रैक्टरों और इवेंट मैनेजरों के भुगतान में जो TDS काटा था, उसका क्या ब्यौरा है। इसके अलावा मीडिया रिपोर्टों में लगाए जा रहे दुर्गा पूजा समितियों को इनकम टैक्स नोटिस के आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। इस वर्ष दुर्गा पूजा समिति फ़ोरम को कोई नोटिस जारी ही नहीं हुआ है।

अपने कथन में आयकर विभाग की चोटी की संस्था ने कहा कि यह TDS नोटिसें कॉन्ट्रैक्टरों और इवेंट मैनेजरों के टैक्स भुगतान सुनिश्चित करने के लिए थीं। और बहुत सारी समितियों ने टीडीएस काटने और उसे सरकारी खजाने में जमा किए जाने का सबूत भी दिया।

अब क्या कहेगी तृणमूल?

तृणमूल सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वह दुर्गा पूजा समितियों जैसे स्थानीय संगठनों को भाजपा के लिए काम करने पर मजबूर करना चाहती है, इसीलिए उन्हें दबाने की कोशिश हो रही है। उनका दावा था कि आयकर विभाग (IT विभाग) ने दुर्गा पूजा समितियों को नोटिस भेज कर टैक्स देने के लिए कहा है।

‘भारत के पंजाबी सैनिको, कश्मीर में हो रहे जुल्म का हिस्सा ना बनो, ड्यूटी से इनकार कर दो’

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पाकिस्तान के मंत्री फवाद हुसैन के ट्वीट को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए फटकार लगाई। साथ ही, उन्होंने पाकिस्तान को भारत के आंतरिक मामलों से दूर रहने की सलाह दी है। पाकिस्तान के मंत्री ने पंजाबी में ट्वीट कर भारतीय सेना के पंजाबी जवानों को बगावत करने के लिए उकसाया था।

पाकिस्तान के मंत्री फवाद ने भारतीय सेना के सिख सैनिकों से अपील की थी कि वे कश्मीर में ड्यूटी से इनकार कर दें। इस पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फवाद को टैग करते हुए ट्वीट किया, “भारत के आंतरिक मामले में दखल देना बंद कर दो। मैं साफ कर दूँ कि भारतीय सेना एक अनुशासित और राष्ट्रवादी फोर्स है, यह तुम्हारी पाकिस्तानी सेना की तरह नहीं है। तुम्हारा भड़काऊ बयान काम नहीं करेगा और ना ही भारतीय सेना के जवान इस विभाजनकारी सलाह को कोई भाव देंगे।”

जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 पर मोदी सरकार द्वारा लिए गए फैसले पर पाकिस्तान लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। इसी क्रम में आज उन्होंने भारतीय सेना में भी फुट डालने का प्रयास किया। इसी बात पर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें सबक सिखाया है। मंगलवार को फवाद ने ट्वीट किया कि मैं भारतीय सेना में मौजूद पंजाबियों से अपील करता हूँ कि वे कश्मीर में हो रहे जुल्म का हिस्सा ना बनें और कश्मीर में ड्यूटी से इनकार कर दें।

जहीरुल शेख इंदौर से गिरफ्तार: JMB का यह आतंकी बर्दवान धमाके का है मुख्य आरोपित

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को बर्दवान धमाके के मुख्य आरोपी जहीरुल शेख को इंदौर से गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी UNI के मुताबिक मंगलवार (13 अगस्त) को एक आधिकारिक कथन इस आशय से जारी किया गया है। कोलकाता स्थित NIA स्पेशल कोर्ट में उसे प्रस्तुत करने के लिए NIA ने इंदौर के न्यायिक मजिस्ट्रेट से उसकी ट्रांज़िट रिमांड हासिल की है।

बंगाल का ही रहने वाला

फ़रार चल रहा आरोपित शेख बंगाल के नादिया का रहने वाला है। 23 जुलाई, 2015 को उसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। आरोप था भारत और बांग्लादेश के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंक फ़ैलाने के लिए जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) की साज़िश में शामिल होने का। जहीरुल शेख के खिलाफ IPC की विभिन्न धाराओं 120B, 121A, 122, 123, 307, 326, 286, और 34 के अलावा Explosive Substance Act की धाराओं 3, 4 और UA(P) Act की धाराओं 16, 18, 18A, 19, और 20 में चार्जशीट दायर की गई है।

2014 का मामला

2014 में बर्दवान धमाके की जाँच करते हुए NIA ने भारी मात्रा में IEDs, विस्फोटक और ग्रेनेड बरामद किए थे। कुल 33 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई थी। अपनी चार्जशीट में NIA ने दावा किया था कि जहीरुल शेख JMB के नादिया मॉड्यूल का वरिष्ठ नेता था। उसने JMB के कई ट्रेनिंग कैम्पों में हिस्सा लिया था, और उसकी गतिविधियों में भी सक्रिय था।

जाँच एजेंसी ने बर्दवान धमाके को भारत में JMB की बड़ी साज़िश का हिस्सा बताया था। उसके मुताबिक भारत में लोगों को उग्रवाद की ओर मोड़ने, उनकी JMB में भर्ती और उन्हें ट्रेनिंग और हथियार मुहैया कराने के मकसद से हो रहे इस ऑपरेशन का अंतिम ध्येय भारत और बांग्लादेश में आतंक फ़ैलाने और इन देशों की लोकतान्त्रिक ढंग से चुनी गई सरकारों के खिलाफ जंग छेड़ना था।

पाक नेता रहमान मालिक ने पुराने वीडियो से J&K का माहौल बिगाड़ना चाहा, पुलिस ने फेल किया एजेंडा

जम्मू-कश्मीर मामले में पाकिस्तान फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो रहा है। न ही उसका मुस्लिम ब्रदरहुड ‘उम्मा’ मदद के लिए आ रहा है, न ही अमेरिका या और कोई पश्चिमी देश- यहाँ तक कि चीन ने भी गच्चा दे दिया है। हिंदुस्तान से सीधी लड़ाई तो उसके औकात से ही बाहर की चीज़ है। इसीलिए अब पाकिस्तान फेक न्यूज़ फैला कर हिंदुस्तान के भीतर ही अस्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है।

इसी कोशिश में पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों के पूर्व मंत्री रहमान मलिक ने एक पुराने वीडियो के ज़रिए भारतीय सेना के खिलाफ प्रोपेगंडाबाज़ी करने की कोशिश की।

इस वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और संयुक्त राष्ट्र को टैग कर रहमान दावा कर रहे हैं कि भारतीय सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर के गाँवों पर हमला करने के लिए गनशिप हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कथित ‘बहादुर कश्मीरियों’ की संचार ब्लैकआउट के दौरान भी वीडियो बना-बना कर भेजने के लिए तारीफ़ की है।

राज्य पुलिस: ‘फेक न्यूज़; हमने ट्विटर को कर दिया है इत्तला’

जम्मू-कश्मीर पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने रहमान मलिक के प्रोपेगंडा गुब्बारे में पिन चुभोते हुए खुलासा किया कि जो वीडियो वह बाँट रहे हैं, वह एक बम धमाके का पुराना वीडियो है, जिसे रहमान अभी का बता रहे हैं। साथ ही राज्य पुलिस ने ट्विटर को भी रहमान मलिक के उनके प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से फेक न्यूज़ फ़ैलाने की इत्तला दे दी है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक यह वीडियो 2018 का है, जब सुरक्षा बलों और जिहादियों के बीच चल रही फायरिंग की चपेट में आकर एक घर में आग लग गई थी, और 6 सिविलियन्स की जान चली गई थी। कुलगाम के उपर्युक्त घर में पड़े ज़िंदा बम में आग लगने से विस्फ़ोट हो गया था।

https://www.youtube.com/watch?v=1SMxM_VtzmI

जब यह घटना हुई थी, उसी समय पुलिस ने लोगों को सर्च ऑपरेशन खत्म होने तक उस जगह से दूर रहने की हिदायत दी थी। लेकिन सिविलियन्स ने उनकी बात नहीं सुनी थी, और इलाके में घुस आए थे। लिहाजा जब आग से बम में धमाका हुआ तो कुछ लोग उसकी चपेट में आ गए थे।

कल भी झूठ फैलाने की हुई थी कोशिश

कल भी पाकिस्तानी पत्रकार-कम-प्रोपेगंडाबाज़ वजाहत एस खान ने ट्विटर पर झूठा प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की थी कि कश्मीर पुलिस के मुस्लिम कर्मी ने CRPF जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी है। इस प्रोपेगंडा के खिलाफ न केवल कश्मीर के पूर्व डीजीपी ने मीडिया से बात करते हुए इसे झूठा बताया, बल्कि CRPF के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इसका खंडन किया गया है।

यह पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा है, जिससे हिंदुस्तान में, और खासकर सुरक्षा बलों में, तनाव भड़का कर शांति भंग किया जा सके।

‘ठोक के बजा दूँगा यहीं’ – प्रियंका गाँधी के गुंडों ने दी ABP पत्रकार को धमकी

नेता और नेतागिरी के साथ एक अन्य शब्द अनायास ही ध्यान आ जाता है, वो है ‘गुंडागिर्दी’। सोशल मीडिया के दौर में नेता और उनके मैनेजर्स द्वारा पत्रकारों के साथ की जाने वे बद्तमीजी को छुपा पाना आसान नहीं है। ऐसा ही एक वीडियो ट्विटर के जरिए सामने आया है, जिसमें राहुल गाँधी की बहन प्रियंका वाड्रा गाँधी के मैनेजर्स ABP न्यूज़ के एक पत्रकार को धमकी देते हुए और हाथापाई करते हुए देखा जा रहा है।

यह वीडियो अचानक से ट्विटर पर शेयर किया जाने लगा और लोग प्रियंका गाँधी से सवाल पूछते हुए भी देखे जा रहे हैं। हर कोई इस वीडियो पर अपने तरह से प्रतिक्रियाएँ देते हुए देखे जा रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि लिबरल पत्रकार जिस डर की बात कर रहे थे, प्रियंका गाँधी के गुंडे बस यही समझा रहे हैं। वहीं कुछ यूज़र्स का मानना है कि पत्रकार को प्रियंका वाड्रा से सवाल नहीं करना चाहिए था क्योंकि उन्होंने मना कर दिया था।

‘ठोक के यहीं बजा दूँगा’

इस वीडियो में ABP पत्रकार प्रियंका गाँधी से अनुच्छेद 370 पर उनकी राय पूछते हैं जिस पर प्रियंका गाँधी के मैनेजर्स पत्रकार को धक्का देते हुए रोक रहे हैं और उन्हें प्रियंका गाँधी से सवाल पूछने से रोक रहे हैं।

मैनेजर: सुनो सुनो ठोक के यहीं बजा दूँगा। मारूँगा तो गिर जाओगे।
रिपोर्टर: प्रियंका जी देखिए कॉन्ग्रेस कार्यकर्त्ता द्वारा कैमरे पर धक्का मारा जा रहा है। संदीप आप मुझे बताओ, आपने मुझे मारने की धमकी दी। आप हाथ चलाओगे? संदीप जी आप मुझे धमकी दे रहे हो। आप मुझे ठोक के बजा दोगे?
मैनेजर (संदीप): तुम भाजपा से पैसा ले कर आए हो।
रिपोर्टर: सर आप बात सुनिए, हमारे कुछ सवाल हैं।
मैनेजर (संदीप): बीजेपी से पैसा लेकर हमें डिस्टर्ब मत करो।
रिपोर्टर: हमने डिस्टर्ब नहीं किया, हमने सिर्फ बात किया।

इसके बाद प्रियंका गाँधी के मैनेजर (संदीप) पत्रकार को अलग से समझाते हुए देखे जा रहे हैं कि उनको इस सबसे कोई फर्क नहीं पड़ता है।

‘हम राम के वंशज हैं, हमें अयोध्या में कोई संपत्ति नहीं चाहिए… सिर्फ राम मंदिर चाहिए’

सुप्रीम कोर्ट के सवाल के जवाब में श्री राम के वंशजों ने दावा करना शुरू कर दिया है। राजस्थान के दो पूर्व राजघरानों ने पहले ही खुद को भगवान राम का वंशज बताया था। बीजेपी सांसद और जयपुर राजघराने की राजकुमारी दीया कुमारी के बाद राजस्थान के एक और राजघराने ने भगवान श्री राम का वंशज होने का दावा किया है। यह दावा करने वाले हैं जयपुर के गुर्जर राजपूत गोत्र के सत्येंद्र सिंह राघव, जो कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं। इस कड़ी में अब एक और नाम जुड़ गया है, मेवाड़ राजघराने उदयपुर के अरविंद सिंह मेवाड़ ने भी खुद को भगवान राम का वंशज बताया है।

अरविंद ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया कि ऐतिहासिक रूप से सिद्ध है कि उनका परिवार भगवान राम का वंशज है।

अरविंद ने आगे लिखा है, “…हम राम जन्मभूमि पर कोई दावा नहीं करना चाहते लेकिन हमारा मानना है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर श्रीराम मंदिर अवश्य बनना चाहिए।” बता दें कि अरविंद मेवाड़ प्रत्यक्ष रूप से किसी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़े हैं। वहीं जयपुर राजघराने की सदस्य दीया कुमारी राजसमंद से बीजेपी सांसद हैं।

मेवाड़ राजघराने के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ का कहना है कि हम राम के वंशज हैं और हम चाहते हैं कि राम मंदिर जल्द से जल्द बने। वहीं, अरविंद सिंह ने यह भी कहा कि हमें अयोध्या में किसी भी तरह की कोई संपत्ति नहीं चाहिए। हमें ना हक चाहिए ना हुकूमत चाहिए, अब हमें सिर्फ राम मंदिर चाहिए।

राजसमंद से भाजपा सांसद दीया कुमारी ने दावा किया कि उनका परिवार भगवान राम के पुत्र राजकुमार कुश से संबद्ध है। उनका कहना है कि जयपुर के पूर्व राजा और उनके पिता महाराजा भवानी सिंह कुश की 307वीं पीढ़ी के थे। बीजेपी सांसद ने इस बात का सबूत भी पेश किया। उन्होंने एक पत्रावली दिखाई, जिसमें भगवान राम के वंश के सभी पूर्वजों का नाम क्रम से लिखा हुआ है। इसी पत्रावली में 209वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में दीया के पिता महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है। साथ ही दीया ने कहा कि राम मंदिर मामले की सुनवाई तेजी से हो और इस पर कोर्ट जल्द अपना फैसला सुनाए।

इसके साथ ही सत्येंद्र सिंह राघव का दावा है कि उनका परिवार श्री राम के बड़े बेटे राजकुमार लव का वंशज है। अपनी बात के समर्थन में वह वाल्मीकि रामायण का ज़िक्र करते हैं, जिसमें उल्लेख है कि लव का राज्य उत्तर कौशल था, जिसमें आज की अयोध्या नगरी आती है। राघव का कहना है कि लव के भाई कुश का राज्य, जिनकी वंशबेल में उत्पन्न होने का दावा जयपुर का राजवंश करता है, दक्षिण कौशल के शासक थे।

 

भाई ने अपनी बहन की दोनों आँखें फोड़ दीं… क्योंकि उसने 100 रुपए का सूट खरीद लिया

दिल्ली में द्वारका के पास एक परिवार रहता है। परिवार के कुछ सदस्यों में 17 साल का एक लड़का है, उससे 3 साल बड़ी एक बहन है। मतलब एक वयस्क है और दूसरा वयस्क होने की कगार पर है। इनके माँ-बाप फिलहाल दिल्ली में नहीं हैं, अपने गृह राज्य बिहार गए हुए हैं। इसी बीच भाई-बहन में कुछ ऐसा होता है, जो आने वाले रक्षाबंधन पर एक कलंक के समान है।

20 साल की बहन 100 रुपए में अपनी पसंद की एक ड्रेस खरीदती है। घर आती है। लेकिन भाई को इस बात पर गुस्सा आ जाता है। वो बड़ी बहन पर हमला कर देता है, मारता-पिटता है और उसकी आँखें फोड़ डालता है। इतना ही नहीं, लगातार बह रहे खून के बावजूद उसने अपनी बहन को घर में बंद कर दिया, किसी भी डॉक्टर या पास के अस्पताल ले जाने से इनकार कर दिया।

इस बर्बर घटना का पता तब चलता है जब दिल्ली महिला आयोग (DCW) की पंचायत टीम इलाके में डोर टू डोर विजिट के दौरान लड़की के रोने की आवाज सुनी। जब उन्होंने इस बारे में पूछताछ की, तो पड़ोसियों ने बताया कि आरोपित लड़का अक्सर गालियाँ देता है और अपनी बहनों (मतलब पीड़िता के अलावा भी और बहनें उसकी प्रताड़ना की शिकार हैं) की पिटाई करता है।

इस संबंध में जब DCW पंचायत टीम ने पीड़िता के घर में घुसने और उसकी स्थिति जानने की कोशिश की, तो आरोपित लड़के ने गाली दी और उन पर हमला करने की धमकी भी दी। घर में घुसने में किसी तरह वे लोग कामयाब हुए। यह टीम जब घर के अंदर गई तो दंग रह गए यह देखकर कि लड़की फर्श पर पड़ी थी। चोटों से उसका चेहरा सूज गया था और उसे खून बह रहा था।

DCW पंचायत टीम ने पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ उसका इलाज किया जा रहा है। उसकी हालत गंभीर बनी हुई है और वह सदमे में है। डॉक्टरों का कहना है कि वे सूजन कम होने का इंतजार कर रहे हैं, तभी उसकी आँखों को होने वाले नुकसान का सही आकलन कर सकेंगे।

उन्नाव बलात्कार मामला: सेंगर पर झूठे आर्म्स एक्ट केस में भी आरोप तय, SC का 20 अन्य मामलों में पड़ने से इंकार

उन्नाव बलात्कार मामले में पीड़िता के पिता को झूठे आर्म्स एक्ट मुकदमे में फँसाने को लेकर दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट (जहाँ उच्चतम न्यायालय ने मामला यूपी से स्थानांतरित कराया था) ने आरोपित कुलदीप सिंह सेंगर और अन्य के खिलाफ आरोप तय कर दिया है। अदालत ने प्रथम-दृष्टया मामले को बड़ी साजिश माना है। इसके पहले आरोपित विधायक पर पॉक्सो एक्ट धारा 120B और गैंगरेप के भी आरोप शुक्रवार (9 अगस्त) को तय किए थे।

CBI चार्जशीट के हिसाब से गवाहियाँ

उन्नाव के बांगरमऊ से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के अलावा माखी पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, सब-इंस्पेक्टर कामता प्रसाद सिंह, कॉन्स्टेबल आमिर खान और सेंगर के भाई अतुल सिंह सेंगर को भी आरोप बनाया गया था। आरोप है अप्रैल, 2017 में सेंगर के हाथों बलात्कार का शिकार होने वाली पीड़िता के पिता को आर्म्‍स एक्ट के झूठे मामले में फँसाने, उनपर हमला करने, और उनकी न्यायिक हिरासत में हत्या का। अब इस मामले में सीबीआई द्वारा दायर चार्जशीट (आरोपपत्र) के हिसाब से गवाहियाँ होंगी।

इसी साल एक संदिग्ध सड़क हादसे में बुरी तरह घायल होने के बाद वह लड़की फ़िलहाल एम्स में मौत से लड़ रही है। उसके चाचा महेश सिंह को भी सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश से तिहाड़ जेल स्थानांतरित करा दिया है। महेश सिंह आरोपित विधायक के भाई अतुल सेंगर द्वारा दायर 19 साल पुराने के मामले में 10 साल की सजा काट रहे हैं।

‘हम मामले का दायरा बढ़ाना नहीं चाहते’

जस्टिस दीपक गुप्ता और बीआर गढ़वी की बेंच ने पीड़िता के परिवार पर उत्तर प्रदेश में दायर 20 अन्य मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट राज्य सरकार से माँगने या उनमें हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। बेंच ने कहा कि वे अपने सामने लंबित मामले का न दायरा बढ़ाना चाहते हैं, न ही अन्य मामलों में हस्तक्षेप करना चाहते हैं।

उच्चतम न्यायालय ने चार मुकदमें- 2017 का बलात्कार का मुकदमा, पीड़िता के पिता को आर्म्‍स एक्ट के झूठे मामले में फँसाना, इनकी हिरासत में मौत, और पीड़िता के गैंग-रेप का मामला- उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित किए थे। तीस हज़ारी कोर्ट के जिला जज जस्टिस धर्मेश शर्मा को चारों मामले सौंप कर सर्वोच्च अदालत ने रोज़ाना सुनवाई करते हुए 45 दिन में सभी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया था।

श्रीनगर के विवादित वीडियो से फैले रायते को फर्जी खबर से समेट रहा है BBC, जानिए पूरा सच

एक ओर सरकार जहाँ श्रीनगर में शांति और किसी प्रकार का विरोध प्रदर्शन ना होने की बात कह रही है वहीं पत्रकारिता का एक विशेष वर्ग है, जो चाहता है कि लोग कश्मीर के नाम पर ग़ुस्साएँ और किसी बड़े विवाद को जन्म दे सकें। BBC लगातार अपनी रिपोर्ट्स में यह साबित करने की कोशिश कर रही है कि कश्मीर में स्थिति तनावपूर्ण है। अपने प्रोपेगैंडा और नैरेटिव को ही सच्चाई से हमेशा ऊपर रखने के लिए BBC किसी भी स्तर तक जा सकता है और इसका उदाहरण BBC आज स्वयं देते हुए नजर आया है।

हालाँकि मीडिया की इन भ्रामक रिपोर्टों को देखते हुए गृह मंत्रालय ने एक ट्वीट किया, जिसमें लिखा गया है- “मीडिया में श्रीनगर के सौरा इलाक़े में घटना की ख़बरें आई हैं। 9 अगस्त को कुछ लोग स्थानीय मस्ज़िद से नमाज़ के बाद लौट रहे थे। उनके साथ कुछ उपद्रवी भी शामिल थे। अशांति फैलाने के लिए इन लोगों ने बिना किसी उकसावे के सुरक्षाकर्मियों पर पत्थरबाज़ी की। लेकिन सुरक्षाकर्मियों ने संयम दिखाया और क़ानून व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश की। हम ये दोहराते हैं कि अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने के बाद से अभी तक जम्मू कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है।

BBC की कारस्तानी

लेकिन, BBC ने गृह मंत्रालय के प्रवक्ता के ट्वीट को अपने कथित फर्जी वीडियो से जोड़कर रिपोर्ट में लिखा है- “श्रीनगर के सौरा में हुई थी पत्थरबाज़ी, सरकार ने माना”

ख़ास बात ये है कि बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में तो ट्वीट का सही अनुवाद किया है, लेकिन उनकी इस रिपोर्ट का उस तथ्य/वीडियो से कोई लेना-देना नहीं है, जिसमें BBC ने बहुत सारे लोगों के विरोध करने और सुरक्षाबलों द्वारा उन पर पेलेटगन इस्तेमाल करने का दावा किया था।

नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट BBC की इसी रिपोर्ट का हिस्सा हैं, जिसमे कि स्पष्ट है कि गृह मंत्रालय के प्रवक्ता का बयान BBC की हेडलाइन से एकदम भिन्न है। अपने नैरेटिव और झूठे आरोपों को लगातार अपने कुतर्कों से किस तरह से सही साबित किया जा सकता है, यह कला BBC जैसी मीडिया संस्था से सीखी जा सकती है।

यह भी जानना आवश्यक है कि BBC ने सरकार पर यह आरोप उस अल जज़ीरा के दावे के आधार पर लगाया है जो खुद ही BBC के झूठ और प्रोपेगैंडा का खंडन कर चुका है।

इससे पहले भी गृह मंत्रालय जम्मू कश्मीर पुलिस के ट्वीट को रीट्वीट कर चुकी है, जो घाटी में लोगों पर सुरक्षाबलों द्वारा फायरिंग करने जैसी भ्रामक ख़बरें फैलाते हुए देखे जा रहे हैं।

सरकार ने BBC और अल जज़ीरा से इस वीडियो का वास्तविक वीडियो दिखाने की भी माँग की है, जिसे ये मीडिया चैनल श्रीनगर के सौरा का होने का दावा कर रहे हैं। हालाँकि, BBC की ओर से अभी तक भी सरकार को उस वीडियो का असली (Raw) वीडियो उपलब्ध नहीं करवाया गया है लेकिन हो सकता है कि BBC अपनी इन रिपोर्ट्स के जरिए अपनी ‘क्लिकबेट’ पत्रकारिता को ही अपना स्पष्टीकरण का आधार बनाना चाह रही हो।

इस बीच प्रश्न यदि विश्वसनीयता का है तो वो BBC लगातार यह साबित करता आया है कि कम से कम उनके नाम के साथ विश्वसनीयता शब्द जोड़ा जाना इस शब्द का मजाक बनाने के समान है।