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इरफ़ान पठान, कोच और ट्रेनर सहित 100 युवा क्रिकेटरों को कहा गया- अपने घर जाएँ

भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे ऑलराउंडर और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के मेंटर इरफ़ान खान को घाटी छोड़ घर लौट जाने को कहा गया है। घाटी में बढ़ रहे तनाव और स्वतन्त्रता दिवस समेत कई त्यौहारों पर मंडरा रहे आतंकी हमले के मद्देनज़र यही सलाह उनके कैम्प में आए 100 अन्य युवा क्रिकेटरों को भी दी गई है। इरफ़ान को भारी सुरक्षा इंतज़ाम के साथ सुरक्षा बल श्रीनगर एयरपोर्ट तक छोड़ने भी गए, जहाँ से वह हवाई मार्ग से अपने घर लौटेंगे।

सपोर्ट स्टाफ़ को भी कहा गया जाने को

इरफ़ान पठान जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के मेंटर के तौर पर पिछले कुछ समय से घाटी में ही थे। उनके साथ सपोर्ट स्टाफ़ के तौर पर कोच मिलाप मेवाड़ा और ट्रेनर सुदर्शन वीपी भी थे, जो घाटी के नहीं बल्कि राज्य से बाहर के हैं। उन्हें भी घर जाने को कह दिया गया है। इन सभी के अलावा जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के कैम्प के लिए शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम, श्रीनगर में इकट्ठा करीब 100 युवा क्रिकेटरों को भी उनके घर भेज दिया गया है। इनमें अंडर-19 और अंडर-16 के खिलाड़ी भी शामिल हैं

हाल में तनाव बढ़ने पर सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं और कश्मीर घूमने गए पर्यटकों को भी उनके घर लौट जाने की एडवाइजरी जारी की है। जिहादी हमले की आशंका के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा पिछले एक पखवाड़े में हज़ारों अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती घाटी में सुरक्षा इंतज़ामों को चाक-चौबंद करने के लिए की गई है।

बकरीद पर पशुओं की क़ुर्बानी सड़कों पर न दें, फोटो सोशल मीडिया पर न डालें: मौलाना केआर फ़िरंगी

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना केआर फ़िरंगी महली ने सभी मुस्लिमों से अपील करते हुए कहा, “मैं सभी मुस्लिमों से अपील करता हूँ कि प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी ईद-उल-अजहा पर केवल उन्हीं पशुओं की क़ुर्बानी दी जानी चाहिए जिस पर सरकार ने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है।”

इसके अलावा उन्होंने कहा कि पशुओं की क़ुर्बानी सड़कों पर नहीं दी जानी चाहिए। उनकी क़ुर्बानी घर या मदरसे के अंदर दी जा सकती है, जिससे अन्य समुदाय के लोगों को किसी तरह की समस्या का सामना न करना पड़े। उन्होंने कहा कि पशुओं की क़ुर्बानी की कोई भी फ़ोटो सोशल मीडिया पर नहीं जानी चाहिए।

ग़ौरतलब है कि भारत में बकरीद का चाँद शुक्रवार (2 अगस्त) को नज़र आ गया है। इसके साथ ही बकरीद का त्योहार 12 अगस्त को मनाया जाएगा। दरअसल, बकरीद का चाँद जिस रोज नज़र आता है उसके ठीक 10वें दिन बकरीद मनाई जाती है। इस्लाम के अनुसार, इस त्योहार में पशुओं की क़ुर्बानी दी जाती है और इस महीने हज यात्रा भी की जाती है।

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता का समय अभी: घबराए पाक PM इमरान ने गाया ‘पुराना गाना’

जम्मू-कश्मीर के हालातों को लेकर बनी संदेह की स्थिति के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने आनन-फानन में रविवार (अगस्त 4, 2019) को इस्लामाबाद में राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (NSC) की बैठक बुलाई है। भारतीय सेना द्वारा आतंकवादियों और घुसपैठ कर रहे पाक सैनिकों को मुँहतोड़ जवाब दने से पाकिस्तान सदमे में आ गया है। उसने आरोप लगाया है कि भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) पर कलस्टर बम का इस्तेमाल किया है। हालाँकि, भारतीय सेना ने कलस्टर बम के इस्तेमाल करने की बात को गलत बताया है।

इसके साथ ही, इमरान खान ने ट्वीट करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात दोहराई। उन्होंने ट्विटर लिखा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया था। अभी इसी का समय है। भारतीय सुरक्षा बलों की आक्रामक कार्रवाई की वजह से नियंत्रण रेखा पर स्थिति बिगड़ती जा रही है।

दरअसल, भारतीय सेना के एक्शन से पाकिस्तान काफी घबराया हुआ है। पाकिस्तान ने इसके मद्देनज़र LoC के पास पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में सेना के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। इसमें एलओसी पर फायरिंग के चलते सेना को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में भारतीय सेना ने शनिवार (अगस्त 3, 2019) को पाकिस्तानी BAT (Border Action Team) की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करते हुए 5 से 7 घुसपैठिए को मार गिराया। सेना ने रविवार को सबूत के तौर पर 4 शवों की सैटेलाइट तस्वीरें जारी करते हुए पाकिस्तानी सेना से कहा कि वो सफेद झंडे के साथ आकर इन शवों को ले जा सकती है। मगर, पाकिस्तान ने इन शवों को लेने से इनकार कर दिया।

J&K बैंक घोटाला: महबूबा मुफ्ती क्या अवैध नियुक्तियों में आपकी भी सहमति? ACB ने भेजा नोटिस

जम्मू कश्मीर में जारी सियासी माहौल के बीच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने जम्मू-कश्मीर बैंक में कथित घोटालों की जाँच करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती से बैंक में अवैध भर्तियों के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है। ACB ने महबूबा ने पूछा है कि क्या अवैध नियुक्तियों में उनकी भी सहमति है?

ACB के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) ने इस संदर्भ में पत्र जारी करते हुए कहा कि जाँच के दौरान ये बात सामने आई है कि कुछ मंत्रियों के सिफारिशों पर जम्मू कश्मीर बैंक के अध्यक्ष द्वारा अवैध तरीके से नियुक्ति की गई है। एसएसपी ने महबूबा को नोटिस जारी करते हुए कहा कि इस संदर्भ में वो अपनी स्थिति बताएँ कि इसमें उनका मौखिक या फिर किसी और तरह का कोई समर्थन था या नहीं। 

वहीं, ACB द्वारा जारी किए गए पत्र का जवाब देते हुए महबूबा ने अपने ट्वीट में लिखा कि भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से पत्र मिलने पर उन्हें कोई ताज्जुब नहीं है। उनका कहना है कि मुख्य धारा के नेताओं को एकजुट करने और सामूहिक प्रतिक्रिया के लिए संभावित प्रयासों को विफल करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। महबूबा ने कहा कि वो बहुत छोटी इकाई है, जो आज उन्हें एकजुट करती है। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह की रणनीति से काम नहीं चलेगा।

नाबालिग लड़की से एक साथ इश्क का एंगल: जहांगीर ने मसलाहउद्दीन और आतिफ़ को रॉड से मार डाला

उत्तर प्रदेश के बदायूँ में दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले जहांगीर को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया है। दरअसल यह मामला प्रेम प्रसंग का है, जिसके चलते LLB के छात्र जहांगीर ने दोहरे हत्याकांड को अंजाम दिया। पुलिस को इस हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में चार दिन लगे और पाँचवे दिन घटना का ख़ुलासा करते हुए आरोपित को पकड़ लिया।

एसएसपी अशोक कुमार त्रिपाठी के अनुसार, 30 जुलाई को हुई आतिफ़ (19 वर्षीय) और सबलू (26 वर्षीय) की हत्या में पुलिस ने आतिफ़ के ताऊ मोहम्मद मियां की शिक़ायत पर हत्या का मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी थी। घटनास्थल से मिले साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज की मदद से हत्याकांड को अंजाम देने वाले जहाँगीर का नाम सामने आया। पुलिस ने शनिवार (3 अगस्त) सुबह तीन बजे आरोपित जहाँगीर को छोटे सरकार के पास से गिरफ़्तार कर लिया। एसएसपी ने आरोपित पर 25 हज़ार रुपए की ईनामी राशि भी घोषित की हुई थी।

एसएसपी ने बताया कि पूछताछ के दौरान जहांगीर ने अपना ग़ुनाह क़बूल करते हुए बताया कि वो अपनी रिश्तेदारी में एक नाबालिग लड़की से मोबाइल पर कॉल/मैसेज के माध्यम से बात करता था। इधर उसका दोस्त सबलू उर्फ़ मसलाहउद्दीन भी उसी लड़की से मोबाइल पर बात करने लगा। इस बात का पता जब जहांगीर को लगा तो उसने उसे बहुत समझाया कि वो उस लड़की से बात न करे।

सबलू ने जहांगीर की बात नहीं मानी और ये बात जहांगीर को इतनी नागवार लगी कि उसने पास में पड़ी लोहे की रॉड उठा ली और सबलू के सिर पर दे मारी। इससे सबलू बेहोश हो गया। इसी दौरान आतिफ़ वहाँ आ पहुँचा। सबलू की हालत देख वो चिल्ला पड़ा। जहाँगीर ने उसे चुप कराने के लिए उसका गला दबा दिया और उसी लोहे की रॉड से आतिफ़ के भी सिर पर वार किया। इससे दोनों की ही घटना-स्थल पर मौत हो गई। इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर जहांगीर मौक़े से फ़रार हो गया।

कुर्बानी पर PAK कप्तान का विवादित ट्वीट, ANI की संपादक ने पूछा- गोवंश से बात करते हो

हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव और कश्मीर में भी हिंदुस्तानी सुरक्षा बलों की गतिविधि का असर सोशल मीडिया पर भी दिखने लगा है। पाकिस्तान की क्रिकेट टीम के कप्तान सरफ़राज़ अहमद ने सोशल मीडिया पर ऐसा उकसावे वाला ट्वीट किया, जिसका साफ़ मकसद हिंदुस्तान की बहुसंख्य आबादी हिन्दुओं को भड़काना था। लेकिन ANI की सम्पादक स्मिता प्रकाश ने उलटे उन्हीं की चुटकी ले डाली।

‘बछड़े कुर्बान होने को बेताब’

सरफ़राज़ अहमद ने कल रात ट्वीट किया कि उनके बछड़े ईद-ए-कुर्बान पर कुर्बान होने के लिए ‘तैयार’ और ‘बेचैन’ हैं। साथ में उन्होंने एक तबेले में बँधे गौवंश की तस्वीर भी डाली।

यह साफ़ तौर पर हिन्दुओं को भड़काने और उकसाने के लिए की गई हरकत थी। पाकिस्तान और उनके द्वारा समर्थित हिंदुस्तानी जिहादी अक्सर हिन्दुओं (हिंदुस्तान के भी, और खुद अपने यहाँ के भी) का मज़ाक “गौमूत्र पीने वालों” कहकर उड़ाते हैं। पुलवामा के हमलावर आदिल डार से लेकर पाकिस्तान के नेता तक यही भाषा बोल चुके हैं

इसके अलावा हिन्दुओं की आस्था में गाय के अवध्य होने के कारण भी कई बार कट्टरपंथी इस्लामी केवल हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए गायों की हत्या करते रहते हैं। सरफ़राज़ का ट्वीट भी उसी भावना से लिखा गया प्रतीत होता है, जिसमें अपने मज़हब के त्यौहार की ख़ुशी मनाना नहीं, हिन्दुओं को नीचा दिखाना अलसी मकसद मालूम होता है।

‘गाय ने बताया या बछड़े से बात कर लेते हो?’

सरफ़राज़ अहमद की इस हरकत की प्रतिक्रिया में समाचार एजेंसी ANI की सम्पादक और पत्रकार स्मिता प्रकाश ने सरफ़राज़ अहमद से पूछा कि उन्हें कैसे पता बछड़ा अपना गला रेते जाने (हलाल होने) के लिए ‘बेताब’ है। उन्होंने क्या बछड़े से पूछा, या गाय ने उन्हें बताया?

उन्नाव रेप मामला: सीबीआई ने चार शहरों में तलाशे सबूत, MLA सेंगर के घर पर भी छापा

उन्नाव रेप पीड़िता की कार को टक्कर मारने के मामले में सीबीआई की टीम ने रविवार को उत्तर प्रदेश के चार शहरों में एक साथ छापेमारी की। सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर जॉंच एजेंसी ने दबिश दी।

सूत्रों ने बताया कि सीबीआई की एक टीम ने पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ की। माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला और पुलिसकर्मियों से पूछताछ की। जॉंच अधिकारी पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी मिले। आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम साक्ष्य इकट्ठा किए।

धमकी देने के आरोप में सह आरोपी का बेटा गिरफ्तार

  • सबूत की तलाश में लखनऊ, उन्नाव, बाँदा और फतेहपुर में 17 ठिकानों पर सीबीआई ने दबिश दी।
  • पीड़िता के गॉंव माखी में ग्रामीणों से पूछताछ। माखी थाने में दस्तावेजों को खंगाला। पुलिसकर्मियों से पूछताछ। सीसीटीवी फुटेज खंगाले और फोरेंसिक सबूत इकट्ठा किए।
  • पीड़िता के वकील के पड़ोसियों से भी पूछताछ।
  • आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के घर और दफ्तर पर छापेमारी कर अहम साक्ष्य इकट्ठा किए।
  • सीतापुर जेल में बंद सेंगर से आज फिर हो सकती है पूछताछ।
  • फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर पर छापा, कई अहम दस्तावेज कब्जे में लिए।
  • बांदा में ट्रक ड्राइवर के माता-पिता से पूछताछ ।
  • मामले की सह आरोपी शशि सिंह का बेटा नवीन सिंह गिरफ्तार। नवीन पर पीड़िता के परिजनों ने धमकी देने का आरोप लगाया था।

सीतापुर जेल में बंद सेंगर से सीबीआई के अधिकारियों ने शनिवार को पूछताछ की थी। सूत्रों के मुताबिक आज फिर उससे जेल में पूछताछ हो सकती है। सीबीआई ने जेल प्रशासन से विधायक से मुलाकात करने के लिए जेल आने वाले लोगों का ब्योरा भी मॉंगा है। जॉंच टीम ने शनिवार को इस सिलसिले में आंगतुकों का रजिस्टर अपने कब्जे में ले लिया था।

सूत्रों ने बताया कि फतेहपुर में कार को टक्कर मारने वाले ट्रक मालिक देवेंद्र किशोर पाल के घर और दफ्तर में भी सीबीआई ने जाँच की। टीम ने कई अहम दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया है। सीबीआई की एक टीम बाँदा में ट्रक ड्राइवर के घर पहुॅंची और उसके माता-पिता से पूछताछ की। करीब दो घंटे तक जॉंच टीम वहॉं रही।

गौरतलब है कि 30 जुलाई को रायबरेली के गुरूबख्शगंज क्षेत्र में एक तेज रफ्तार ट्रक ने पीड़िता की कार को टक्कर मार दी थी। इस हादसे में पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे, जबकि उसकी चाची और मौसी की मौत हो गई थी।

‘विधायक बनी रहूँगी लेकिन आम आदमी पार्टी से दे दूँगी इस्तीफ़ा’

चाँदनी चौक से आम आदमी की विधायक अलका लांबा का आखिरकार आम आदमी पार्टी से मोह भंग हो चुका है और वो जल्द ही इस्तीफा दे सकती हैं। अलका लांबा ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें इस बारे में लोगों से बात करनी चाहिए और फिर एक निर्णय पर आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह तय किया गया है कि उन्हें आम आदमी पार्टी से सारे संबंध तोड़ लेने चाहिए और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देना चाहिए। लांबा ने कहा कि जल्द ही वो लिखित में आम आदमी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे देंगी। हालाँकि, उनका कहना है कि इसके बावजूद वो विधायक बनी रहेंगी।

बता दें कि, पिछले दिनों भी अलका लांबा ने आम आदमी पार्टी पर अपमानित करने का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि उन्हें मीटिंग में नहीं बुलाया जाता है, बार-बार अपमानित किया जाता है। उन्होंने कहा था कि वो 20 साल कॉन्ग्रेस में रही और वहाँ भी संघर्ष किया, लेकिन आम आदमी पार्टी में उन्हें कभी सम्मान नहीं मिला। इस दौरान उन्होंने ये भी कहा था कि वो पार्टी छोड़ने का मन बना चुकी हैं और इसको लेकर 4 अगस्त को फैसला करेंगी कि वो निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में चुनाव लड़ेंगी या नहीं।

गौरतलब है कि, अलका लांबा और पार्टी नेतृत्व के बीच टकराव कोई नई बात नहीं है। वे कई मौकों पर अपनी ही पार्टी के फैसलों पर सवाल उठाती रहीं हैं। इस बीच, उन्होंने एक बार फिर से पार्टी छोड़ने की बात कही है। अलका लंबे समय से पार्टी से नाराज चल रही हैं और वह पार्टी लाइन के खिलाफ बयान देती रही हैं। लोकसभा चुनाव के बाद भी उन्होंने पार्टी के प्रदर्शन पर सवाल उठाए थे। 

इंदिरा के दुलारे जगमोहन कश्मीर के गुनहगार तो नेहरू-राजीव मसीहा कैसे?

“पिछले दिनों में जो घटनाएँ हुई हैं उससे जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख के लोग डरे हुए हैं। इससे 1990 की यादें ताजा हो गई हैं, जब वीपी सिंह की सरकार में बीजेपी ने जगमोहन को कश्मीर का राज्यपाल बनवाया था और फिर घाटी से कश्मीरी पंडितों को बसों में भर कर बाहर निकाला गया जो आज तक एक कलंक की तरह है।”
-गुलाम नबी आजाद, नेता विपक्ष, राज्यसभा

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रह चुके आजाद ने शनिवार को कॉन्ग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यह बात कही। आजाद वही नेता हैं जिन्होंने बीते साल कश्मीर में राज्यपाल शासन लागू होने के बाद कहा था ‘सेना का एक्शन नागरिकों के खिलाफ ज्यादा और आंतकियों के खिलाफ कम है।’ इस बयान के लिए उन्होंने सीमा पार खूब वाहवाही बटोरी थी। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने कहा था, “शुरू से ही हमारी राय वही है जो गुलाम नबी आजाद की है। हिंदुस्तान कश्मीर में राज्यपाल शासन लगाकर दोबारा जगमोहन युग की शुरुआत करना चाहता है और निर्दोषों का कत्लेआम करना चाहता है।”

सो, ताज्जुब नहीं कि आजाद ने कश्मीर की समस्या का ठीकरा जगमोहन के मत्थे मढ़ दिया। जम्मू-कश्मीर में जगमोहन की भूमिका पर गौर करने से पहले यह जानना जरूरी है कि जगमोहन को कसूरवार बताने की कोशिश कॉन्ग्रेसी पहले भी कर चुके हैं। ऐसा करना उनके लिए जरूरी भी है, क्योंकि इससे जवाहर लाल नेहरू से लेकर राजीव गॉंधी तक के बेतुके फैसलों पर पर्दा डल जाता है।

जैसा कि पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट किया है, “2014 में वाराणसी में एक साक्षात्कार के दौरान ने गुलाम नबी आजाद ने मुझे जगमोहन के बारे में सवाल पूछने को कहा था ताकि वे भाजपा पर निशाना साध सकें।” कश्मीरी पंडितों के मसीहा जगमोहन को खलनायक साबित करने के लिए एक अन्य कॉन्ग्रेसी और केन्द्र में मंत्री रह चुके सैफुद्दीन सोज तो बकायदा एक किताब ‘Kashmir: Glimpses of History and the Story of Struggle’ भी लिख चुके हैं।

पंडितों के मसीहा, कॉन्ग्रेस के लिए खलनायक

अब आते हैं जगमोहन की भूमिका पर। वे दो बार कश्मीर के राज्यपाल रहे। आपातकाल के जमाने में उनकी गिनती संजय गॉंधी के वफादारों में होती थी। इंदिरा गॉंधी के भी वे आँख के तारे थे। उन्हें जम्मू-कश्मीर का पहली बार राज्यपाल इंदिरा ने तब बनाया था, जब वह फारूख अब्दुल्ला को हटाकर उनके बहनोई गुल शाह को मुख्यमंत्री बनाना चाहती थीं। रिश्ते में इंदिरा के भाई तत्कालीन राज्यपाल बीजू नेहरू ने ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उनकी जगह जगमोहन लाए गए।

यह सही है कि दूसरी बार, उन्हें जब 1990 में कुछ महीनों के लिए जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया तो केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार थी और वह भाजपा के समर्थन से चल रही थी। यह भी सच है कि उनके इस कार्यकाल में कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। लेकिन, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनके राज्यपाल बनने से पहले 1987-88 से ही पंडितों ने घाटी छोड़ना शुरू कर दिया था। 14 सितंबर 1989 को भाजपा नेता पंडित टीका लाल टपलू की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ समय बाद ही जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। जुलाई से नवंबर 1989 के बीच 70 अपराधी जेल से रिहा किए गए थे। घाटी में हमें पाकिस्तान चाहिए। पंडितों के बगैर, पर उनकी औरतों के साथ जैसे नारे लग रहे थे।

ऐसे माहौल में श्रीनगर पहुॅंचे जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी से सुरक्षित निकलने का मौका मुहैया कराया, जिसके लिए पंडित उन्हें आज भी मसीहा मानते हैं। बाद में जगमोहन भाजपा में शामिल हो गए और वाजपेयी सरकार में मंत्री बने। जाहिर है इंदिरा के दुलारे को कॉन्ग्रेस का विलेन बनना ही था।

…और परिवार की प्रयोगशाला

कश्मीर की कहानी परिवारों की कहानी है। एक राजपरिवार और तीन राजनीतिक (नेहरू-गॉंधी, अब्दुल्ला और सईद) परिवार। बॅंटवारे के बाद पाकिस्तानी कबायली सेना ने हमला किया तो कश्मीर के महाराजा हरि सिंह (उनके बेटे कर्ण सिंह कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं) ने भारत के साथ विलय की संधि की। शेख अब्दुल्ला कश्मीर के प्रधानमंत्री बने। उन्हें नेहरू का समर्थन हासिल था। बाद में दोनों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई। 1953 में अब्दुल्ला गिरफ्तार कर लिए गए।

बाद में नेहरू की बेटी इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला से सुलह कर ली। उन्हें 1975 में कश्मीर का मुख्यमंत्री बनाया। यह रिश्ता इंदिरा ने शेख अब्दुल्ला के बेटे फारूक के साथ भी शुरुआत में निभाया। फिर इंदिरा ने 1984 में कैसे फारूख को हटाकर गुल शाह को सीएम बनवाया, ये आप ऊपर पढ़ चुके हैं। शाह ने जम्मू के न्यू सिविल सेक्रेटेरिएट एरिया के एक प्राचीन मन्दिर परिसर के भीतर मस्जिद बनाने की अनुमति दे दी ताकि मुस्लिम कर्मचारी नमाज पढ़ सकें। इस फैसले का जम्मू में विरोध हुआ और दंगे भड़क गए। घाटी में पंडितों पर अत्याचार का सिलसिला यहीं से शुरू हुआ।

इंदिरा की हत्या के बाद फारूक ने उनके बेटे राजीव से दोस्ती गांठी और 1986 में दोबारा सीएम बने। इधर, पंडितों के खिलाफ अलगाववादियों की साजिश चरम पर पहुॅंच गई थी। कई कश्मीरी पंडितों को मारा गया, लेकिन फारूक अब्दुल्ला ने कुछ नहीं किया। ऐसे वक्त में वे मार्तण्ड सूर्य मन्दिर के भग्नावशेष पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करा रहे थे। इसी बीच, दिसंबर 8, 1989 को वीपी सिंह सरकार के मंत्री मुफ़्ती मुहम्मद सईद की बेटी रुबैया सईद अगवा कर ली गईं। बदले में आतंकी छोड़े गए।

इस तरह से कुछ परिवारों की गलती से बदतर हुए हालात पर काबू पाने के लिए जगमोहन दूसरी बार श्रीनगर भेजे गए। आलोचक कहते हैं कि सुरक्षित रास्ता देकर जगमोहन ने पंडितों को घाटी से पलायन के लिए प्रेरित किया। उनकी हिफाजत नहीं की। यानी, पंडितों को घाटी में मरने के लिए अकेले नहीं छोड़ना जगमोहन की गलती थी! बाद में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने दूसरी गलती की और ‘सेक्युलर’ गिरोह के आसान निशाना बन गए!

Breaking: 9 की मौत, 16 घायल: अमेरिका में 12 घंटे के भीतर दूसरा हमला, अब तक कुल 30 की मौत

अमेरिका 12 घंटे के भीतर दो-दो भीषण हमलों से दहल उठा है। इस बार ओहायो राज्य के डेटन शहर में संदिग्ध बंदूकधारी ने रविवार (स्थानीय समय) को हमला कर नौ लोगों को मार डाला है, और 16 अन्य को घायल कर दिया है। द गार्जियन के मुताबिक हमलवार खुद भी मारा गया है।

तीसरी घटना

न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह एक हफ्ते में अमेरिका में सामूहिक गोलीकांड की तीसरी घटना है। समाचार पत्र ने यह भी लिखा है कि रात 1 बजे शुरू हुए इस हमले को पुलिस की फौरन कार्रवाई के चलते बहुत जल्दी काबू में कर लिया गया। हमला ईस्ट 5th स्ट्रीट पर हुआ है। घायलों को मियामी वैली अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

इसके पहले कल ही टेक्सास में एक शॉपिंग मॉल में भारी गोलीबारी की घटना में 20 लोगों के मारे जाने की खबर आई थी। साथ ही 26 लोग घायल हुए थे। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी की यह घटना अल पासो इलाके के सीएलो विस्ता मॉल में हुई।