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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश: J&K की स्थिति दिल्ली जैसी, लद्दाख होगा चंडीगढ़ के जैसा

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने की सिफ़ारिश की है। अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का संकल्प राज्यसभा में पेश किया। शाह ने कहा कि अनुच्छेद 370 का सिर्फ़ एक खंड लागू होगा और राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी है।

इसके बाद एक और महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए केंद्र सरकार ने वर्तमान जम्मू-कश्मीर से लद्दाख को अलग कर दिया है। इस फैसले के बाद जम्मू-कश्मीर अब केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। इस तरह मोदी सरकार ने राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने का निर्णय लिया है: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।

गृहमंत्री अमित शाह के नाम से जो पत्र जारी किया गया है, उसके अनुसार जम्मू कश्मीर में विधायिका होगी, जबकि लद्दाख में विधायिका नहीं होगी। यहाँ पर उदाहरण के लिए हम आपको बता दें कि दिल्ली भी केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन यहाँ विधायिका है। जबकि अंडमान निकोबार द्वीप समूह या चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश तो हैं, लेकिन वहाँ पर विधायिका नहीं है।

अमित शाह के धारा 370 हटाने की सिफारिश करने के तुरंत बाद ही विपक्षों ने उच्च सदन में बड़े पैमाने पर हंगामा किया गया। इस विधेयक पर विरोध दर्शाते हुए पीडीपी सांसदों ने अपने कपड़े फाड़ दिए। वहीं विरोधी दल के सांसद राज्‍यसभा में जमीन पर बैठ गए हैं। राज्‍यसभा अध्‍यक्ष ने सदन में मार्शल बुलाने के आदेश दिए हैं।

सोमवार (अगस्त 5, 2019) को प्रधानमंत्री आवास पर हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और सभी मंत्री मौजदू रहे। इस बात को लेकर पहले से ही अटकलें तेज थीं कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 को हटा सकती है और अनुच्छेद 35ए को खत्म कर सकती है और आज सदन में आखिरकार मोदी सरकार ने यह कर दिखाया।

370 का ‘पावर’ खत्म करने का प्रस्ताव पेश: J&K पर ऐतिहासिक निर्णय, मोदी सरकार ने लिया बड़ा व कड़ा फैसला

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा को संबोधित किया। असमंजस की स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370(1) के अलावा अनुच्छेद 370 के सभी खंड हटाने का निर्णय लिया गया है। अमित शाह ने कहा कि सरकार की ओर से जो चारों बिल आए हैं, वह कश्मीर मुद्दे पर ही है।

अनुच्छेद 370 (1) के अलावा सभी खंड राष्ट्रपति के अनुमोदन से खत्म होंगे। अमित शाह ने कहा कि राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद अनुच्छेद 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का प्रस्ताव पेश करते ही विपक्षी दलों ने हंगामा शुरू कर दिया।

जम्मू-कश्मीर में गृह मंत्री द्वारा अनुच्छेद 370 हटाने के प्रस्ताव के बाद राज्यसभा में विपक्ष ने हंगामा किया। विपक्षी पार्टियों के हंगामे के बीच सदन का कार्रवाई स्थगित कर दी गई।

आपको बता दें कि कश्मीर मुद्दे पर चल रही अटकलों के बीच आज (अगस्त 5, 2019) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट की बैठक की गई। यह बैठक सुबह 9:30 बजे शुरू हुई थी। इसमें गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाकार अजित डोभाल, विदेश मंत्री जयशंकर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद शामिल थे। खबरों के मुताबिक इस बैठक से पहले पीएम आवास पर मोदी-शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल के बीच अलग से भी बैठक हुई थी। बैठक के बाद से मीडिया में कयास लगाए जाने लगे थे कि जम्मू-कश्मीर पर केंद्र सरकार ने कोई बड़ा फैसला ले लिया है।

जम्मू-कश्मीर पर चल रही हलचल के बीच केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों में अलर्ट जारी किया गया है, साथ ही कुछ को हाई अलर्ट पर रखा गया है। इस बीच उत्तर प्रदेश और अन्य कुछ राज्यों में एंटी राइट ड्रिल (दंगा रोधी ड्रिल) करवाने को लेकर भी सुझाव दिया गया है।

गौरतलब है कश्मीर मुद्दे पर केंद्र सरकार का इशारा हमेशा से साफ़ रहा है। उन्होंने कश्मीर समस्या के मसले पर हमेशा से अपना मत एक पक्ष में रखा है। जो स्थिति फिलहाल देश में कश्मीर राज्य को लेकर चल रही हैं, उसका इशारा कहीं न कहीं मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में तात्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा कर दिया गया था। उस दौरान पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 35-A जैसे अनुच्छेद पर अपने विचारों को रखते हुए बताया था कि किस तरह 35-ए, जिसे आज अलगाववादी नेता कश्मीर का हक बता रहे हैं, उसने कश्मीर के साथ पूरे देश को प्रभावित किया हुआ है और इसका हल मोदी सरकार में होकर रहेगा।

हमारे लिए जानना जरूरी है कि अरुण जेटली ने उस दौरान सवाल किया था कि देश के बाकी हिस्सों पर लागू होने वाला क़ानून का शासन इस राज्य में लागू क्यों नहीं होना चाहिए? क्या हिंसा, अलगाववाद, व्यापक पैमाने पर पत्थरबाजी (Stone Pelting), ख़तरनाक विचारधारा इत्यादि को इस दलील पर अनुमति दी जानी चाहिए कि अगर हम इसकी जाँच करते हैं, तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने इसे गलत नीति बताते हुए कहा था “35-ए विकास-विरोधी साबित हुई है। इसलिए आज वर्तमान सरकार ने निर्णय लिया है कि कश्मीर घाटी के लोगों के हित में और भारत के हित में, क़ानून का शासन सबके लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।”

जेटली द्वारा कहे गए ये शब्द और वर्तमान परिस्थितियाँ आज बताती हैं कि मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही इस विषय पर अपना काम कर रही थी। वो इस गंभीर विषय को लेकर पहले से ही कार्यवाई करने का विचार बना रहे थे, लेकिन चुनावों के कारण ये टल गया। उस दौरान तात्कालीन वित्त मंत्री ने 35 ए का हवाला देकर संकेत दे दिए थे कि विकास-विरोधी 35-ए का आगे क्या होने वाला है। उन्होंने कहा था – , “यह समृद्धि, संसाधन निर्माण और रोज़गार सृजन को रोकता है। कॉलेज की पढ़ाई के लिए छात्रों को नेपाल और बांग्लादेश सहित सभी जगहों पर जाना पड़ता है। जम्मू में केंद्र सरकार द्वारा स्थापित सुपर-स्पेशियलिटी सुविधा सहित इंजीनियरिंग कॉलेज और अस्पताल या तो अंडर-यूज़ किए गए या प्रयोग करने लायक ही नहीं हैं क्योंकि बाहर से प्रोफेसर और डॉक्टर वहाँ जाने के लिए तैयार ही नहीं हैं। अनुच्छेद 35A ने निवेश को रोक दिया है और राज्य की अर्थव्यवस्था को नष्ट कर दिया है। इस आर्टिकल को कई लोग राजनीतिक हथियार रूप में भी प्रयोग कर रहे हैं।”

उन्होंने साफ़ किया था, आज की तारीख़ में राज्य (जम्मू कश्मीर) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधन नहीं हैं। अधिक वित्तीय लाभ उठाने की इसकी क्षमता को अनुच्छेद 35A द्वारा अपंग कर दिया गया है। कोई भी निवेशक यहाँ पर उद्योग, होटल, निजी शिक्षण संस्थान या निजी अस्पताल स्थापित करने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वह राज्य में न तो ज़मीन या संपत्ति ख़रीद सकता है और न ही उसके अधिकारी ऐसा कर सकते हैं। उनके बच्चों को सरकारी नौकरियों या कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिल सकता है। आज, ऐसी कोई बड़ी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय होटल चेन नहीं है, जिसने पर्यटन केंद्रित राज्य में एक भी होटल स्थापित किया हो।

‘भाजपा नेता होने के बावजूद…’ – अटल बिहारी वाजपेयी को कुछ यूँ याद कर रही हैं एक महिला नेता

जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई को देखकर पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सोमवार (अगस्त 5, 2019) को राज्य के प्रति सहानुभूति रखने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें आज (कश्मीर की स्थिति को देख) सबसे ज्यादा अटल बिहारी वाजपेयी की कमी महसूस हो रही है।

श्रीनगर में धारा 144 लगने के करीब एक घंटे बाद पीडीपी नेता का ट्वीट आया। जिसमें उन्होंने लिखा, “भाजपा नेता होने के बावजूद अटल जी में कश्मीरियों के लिए सहानुभूति थी और उन्होंने कश्मीर की जनता का प्यार हासिल किया। आज उनकी कमी हम सबसे ज्यादा महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने आगे लिखते हुए बताया कि जो लोग आज कश्मीर की स्थिति का जश्न मना रहे हैं, वे केंद्र सरकार की एकतरफा कार्रवाई के दूरगामी परिणामों से अनजान हैं।

उन्होंने कहा, “आशा है कि जिन लोगों ने हम पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया, उन्हें एहसास होगा कि हमारा डर गलत नहीं था। नेता नजरबंद हैं, इंटरनेट सेवा बंद है और धारा 144 लागू होना किसी भी मानक से सामान्य नहीं है।”

गौरतलब है कि इससे पहले महबूबा मुफ्ती खुद को नजरबंद किए जाने को लेकर भी एक ट्वीट कर चुकी थीं। जिसमें उन्होंने लिखा था, “कैसी विडंबना है कि हमारे जैसे शांति के लिए लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। दुनिया देख रही है कि जम्मू-कश्मीर में कैसे लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है।”

बता दें कि इस समय कश्मीर घाटी में केंद्र सरकार द्वारा की जा रही कार्रवाई से हलचल बनी हुई है। वहाँ इंटरनेट सेवाएँ बंद कर दी गई हैं और देर रात धारा 144 लगाई गई है। इस आदेश के तहत इलाके में लोगों की किसी तरह की आवाजाही नहीं हो सकेगी और सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। आदेश जारी रहने के दौरान शहर में किसी भी तरह की रैली और जनसभा करने की मनाही होगी। सभी सरकारी अधिकारियों से कहा गया है कि वे अपना पहचान-पत्र साथ रखें। 

J&K: मोबाइल-इंटरनेट-स्कूल-कॉलेज बंद, धारा 144 लागू – सुरक्षा के लिहाज से मुफ्ती, अब्दुल्ला समेत कई नेता ‘नजरबंद’

जम्मू-कश्मीर में कड़ी सुरक्षा को लेकर चल रही हलचल के बीच कई बड़े नेताओं को उनके घरों में ‘नजरबंद’ कर दिया गया है ताकि उनकी सुरक्षा कॉम्प्रोमाइज न हो। इस सूची में मुख्यत: पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्लाह का भी नाम है। इनके अलावा पीपल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन को लेकर भी यही खबर है। जानकारी के मुताबिक इन नेताओं के अलावा राज्य में पूर्व विधायकों सहित कई अन्य मुख्यधारा के नेताओं को भी अपने निवास स्थान से बाहर निकलने के लिए मना किया गया है

धारा 144 लागू

राज्य प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से श्रीनगर में अनिश्चितकाल तक धारा 144 लगा दी है। इस आदेश के तहत इलाके में लोगों की किसी तरह की आवाजाही नहीं हो सकेगी और सभी शैक्षणिक संस्थान भी बंद रहेंगे। खबरों के मुताबिक कई शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों को होस्टल खाली करने के लिए भी कहा गया है।

इंटरनेट बंद, अधिकारियों को सैटेलाइट फोन

इसके अलावा कश्मीर घाटी में मोबाइल इंटरनेट कनेक्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। पुलिस अधिकारियों और जिला मैजिस्ट्रटों को सैटेलाइट फोन दिए गए हैं। अधिकारियों ने आतंकवादी खतरे और पाकिस्तान के साथ नियंत्रण रेखा पर शत्रुता बढ़ने के बीच अहम प्रतिष्ठानों और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है।

इन्हीं परिस्थितियों के मद्देनजर पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती को उनके घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी गई है। दोनों नेताओं ने इस बात की जानकारी अपने ट्वीटर अकॉउंट के जरिए दी है।

महबूबा ने ट्वीट किया, “कैसी विडंबना है कि हमारे जैसे शांति के लिए लड़ने वाले जनप्रतिनिधियों को हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। दुनिया देख रही है कि जम्मू-कश्मीर में कैसे लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है।”

वहीं, उमर अब्दुल्ला कल अपने पहले ट्वीट में लिखते हैं, “मुझे लगता है कि मुझे आज आधी रात से घर में नजरबंद किया जा रहा है और मुख्यधारा के अन्य नेताओं के लिए भी यह प्रक्रिया पहले ही शुरू हो गई है।” उन्होंने परिस्थितियों को लेकर कहा कि इनकी सच्चाई जानने का कोई तरीका नहीं है लेकिन अगर यह सच है तो फिर आगे देखा जाएगा। 

इसके बाद अपने एक अन्य ट्वीट में वे लिखते हैं, “कश्मीर के लोगों के लिए हमें नहीं मालूम कि क्या चल रहा है लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि अल्लाह ने जो भी सोचा है वह हमेशा बेहतर होगा। हमें यह शायद अभी नजर न आए लेकिन हमें कभी उनके तरीकों पर शक नहीं करना चाहिए।” अपने ट्वीट में उमर ने हर किसी को गुड लक कहते हुए कहा है कि वे सभी सुरक्षित रहें और सबसे महत्तवपूर्ण है कि शांति बनाए रखें।

बता दें कि कश्मीर की स्थिति को लेकर अनिश्चितता की स्थिति शुक्रवार (अगस्त 2, 2019) को शुरू हुई थी, जब राज्य प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को 14 दिन पहले ही रद्द करते हुए यात्रियों और पर्यटकों को जल्द-से-जल्द घाटी को ख़ाली करने के लिए कह दिया था।

अब ऐसे में सबकी निगाहें दिल्ली में होने वाली बैठक पर लगी हुई है, जो आज सुबह 9:30 बजे प्रधानमंत्री मोदी अपने निवास स्थान पर करने वाले हैं। वहीं, पाकिस्तान के इस्लामबाद में भी आज दोपहर 2 बजे कश्मीर मामलों की संसदीय समिति की बैठक बुलाई गई है।

‘फोटो के कारण डर गई थी… लेकिन हाँ, मैंने शादी कर ली है, इतना अच्छा पति देने के लिए जीसस का शुक्रिया’

बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से कम और उल-जुलूल बातों से ज्यादा सुर्खियों में रहने वाली एक्ट्रेस राखी सावंत एक बार फिर से चर्चा में हैं। इस बार वो अपनी शादी को लेकर सुर्खियों में बनी हुई हैं। दरअसल, शादी की खबरों को खारिज करने के बाद अब राखी ने शादी करने की बात को स्वीकार लिया है। अपने नए इंटरव्यू में राखी ने बताया कि उन्होंने शादी कर ली है।

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Good morning sweetheart fans

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एक वेबसाइट को इंटरव्यू देते हुए राखी ने कहा कि वो डर गई थींं, इसीलिए सच नहीं बताया। मगर अब वो अपनी शादी की बात कंफर्म कर रही हैं। राखी ने कहा, “हाँ मैंने शादी कर ली है।” राखी ने अपने पति के बारे में बताते हुए कहा कि उनके पति का नाम रितेश है। वो NRI हैं और यूके से हैं। राखी ने बताया कि उनके पति वापस यूके जा चुके हैं। उनके वीजा का प्रोसेस चल रहा है। वो भी जल्द ही यूके में शिफ्ट हो जाएँगी।

राखी ने बताया कि रितेश ने उनका प्रभु चावला के साथ पहला इंटरव्यू देखा और तभी से वो उनके फैन हो गए थे। इसके बाद मैसेज के जरिए उनकी बात होने लगी। राखी ने कहा कि रितेश को जानने के बाद वो जीसस से प्रार्थना कर रही थीं कि वो उन्हीं की पत्नी बनें और उनकी वो ख्वाहिश पूरी हो गई। राखी ने कहा कि इतना अच्छा पति देने के लिए वो जीसस का शुक्रिया अदा करती हैं।

बता दें कि कुछ दिनों पहले राखी एक वेडिंग आउटफिट पहने नजर आई थीं। साथ ही उन्होंने मेहंदी भी लगाई हुई थी और चूड़ा भी पहना था।

इस फोटो के बाद एक बार फिर राखी की शादी की खबर ने सोशल मीडिया पर तूल पकड़ ली थी। लोगों ने राखी ने पूछा भी कि क्या उन्होंने शादी कर ली? तो राखी ने इन खबरों को खारिज करते हुए कहा था कि उन्होंने एक फोटोशूट के लिए वेडिंग आउटफिट पहना था। मगर, अब उन्होंने खुद ही अपनी शादी की बात स्वीकार कर ली है।

मेरी सहेली का बॉयफ़्रेंड संघी, इसलिए शादी-बर्थडे में नहीं बुलाई: दुःखी हैं The Print की स्तम्भकार!

The Print की स्तम्भकार और स्वघोषित कॉन्ग्रेस ‘फैन‘ ज़ैनब सिकंदर ने ट्विटर पर दुःख जताया है कि उनकी दस साल से ज्यादा की फ्रेंड के संघी बॉयफ़्रेंड ने उन्हें शादी और बर्थडे पार्टी में नहीं आने दिया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी दोस्त दिल्ली के ‘पॉश’ इलाके में रहती है।

निखिल वागले के प्रलाप में मिलाया सुर

दरअसल ट्विटर पर निखिल वागले ने हफिंगटन इंडिया की एक रिपोर्ट शेयर की थी, जिसमें बिना किसी सिर-पैर के दावा किया गया है कि दिल्ली की आवासीय कॉलोनियों में ‘एंटी-मुस्लिम’ भावनाएँ भड़काईं जा रहीं हैं।

इसी के सुर में सुर मिलाते हुए ज़ैनब ने उस ट्वीट को रीट्वीट किया। साथ में बताया कि उनकी दस साल से ज्यादा दोस्त रह चुकी लड़की ने, जो उच्च-मध्यम वर्ग की थी, उन्हें अपने बर्थडे की पार्टी में नहीं बुलाया क्योंकि उस दोस्त के नए-नए बने ‘संघी’ बॉयफ्रेंड को मुस्लिम पसंद नहीं थे। ज़ैनब के अनुसार उस दोस्त ने खुद यह कबूल किया। साथ ही ज़ैनब ने दावा किया कि उन्हें उस दोस्त की शादी में भी नहीं बुलाया गया।

पवित्र किताब पर सन्नाटा

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को देश में बढ़ती नफ़रत के लिए ज़िम्मेदार बताने वालीं ज़ैनब को जब ‘पवित्र किताब’ के कुछ विवादित हिस्सों की याद दिलाई गई तो वह सन्नाटा मार कर बैठ गईं। लेखक संक्रांत सानु ने उनके ट्वीट पर तंज़ करते हुए ‘पवित्र किताब’ के मूल, अरबी रूप में से स्क्रीनशॉट पोस्ट किया और कहा कि यह असहिष्णु किताब भी “संघियों” ने ही लिखी होगी! उन्होंने यह भी लिखा कि एकेश्वरवाद में दूसरों के ‘नकली देवताओं’ से नफ़रत ज़रूरी है, जो एकेश्वरवादी पंथों के ‘ईश्वर का आदेश’ है, कोई आकस्मिक चीज़ नहीं।

उन्होंने ‘लोग सही तरह से समझे नहीं’ के प्रोपेगंडा को भी ठेंगा दिखाते हुए याद दिलाया कि आइएस का मुखिया बगदादी इस्लामिक स्टडीज़ में पीएचडी था, तालिबान के नेताओं ने अपनी पूरी ज़िंदगी ‘पवित्र किताब’ को पढ़ने में लगा दी थी। इसके बाद उनके द्वारा निकाले गए निष्कर्ष अगर गलत हैं, तो यह तो बड़ी समस्या की बात है।

अंत में उन्होंने ज़ैनब को सलाह दी कि उनके जैसे ‘लिबरल’ मुस्लिम अगर इस्लामी असहिष्णुता के ख़िलाफ़ लड़ने में अपना वक्त खपाएँ, बजाय ‘संघियों’ को कोसने के, तो वे समाज में एक सकारात्मक योगदान करेंगे।

सोनभद्र नरसंहार पर सख्त हुए CM योगी: हटाए गए DM और SP, कुल 15 लोगों पर कार्रवाई

सोनभद्र नरसंहार मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने बड़ा ऐक्शन लिया है। सोनभद्र के ज़िलाधिकारी अंकित अग्रवाल को हटा दिया गया है। उनकी जगह एस रामलिंगम को नया जिलाधिकारी बनाया गया है। ज़िलाधिकारी के अलावा सोनभद्र के पुलिस अधीक्षक (एसपी) सलमान ताज पाटिल को भी हटा दिया गया है। उनकी जगह प्रभाकर चौधरी को नया एसपी नियुक्त किया गया। यह कार्रवाई तीन सदस्यीय जाँच कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर की गई है। अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका कुमार ने सोनभद्र नरसंहार मामले की एक हज़ार पेज की जाँच रिपोर्ट सौंपी है। इसमें तीन सदस्यीय जाँच कमिटी प्रमुख सचिव श्रम सुरेश चंद्रा और कमिश्नर मिर्ज़ापुर एके सिंह भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने यह जानकारी रविवार (4 अगस्त) को सोनभद्र नरसंहार मामले पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी। सीएम योगी ने कहा, “17 जुलाई 2019 को जनपद सोनभद्र के घोरावल थाना व तहसील के ग्राम उम्‍भा में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटित हुई थी। इसके उपरान्त मैंने 21 जुलाई को उस गाँव का दौरा किया था। मेरे साथ प्रदेश के मुख्य सचिव व प्रदेश के पुलिस महानिदेशक भी साथ में थे।”

इस दौरान उन्होंने बताया कि स्थिति का अवलोकन करने के बाद हमने दो प्रकार की कमिटियाँ गठित की थीं। एक कमिटी अपर मुख्य सचिव राजस्व श्रीमती रेणुका कुमार की अध्यक्षता में गठित हुई, दूसरी कमिटी पुलिस से सम्बंधित मामलों की जाँच के लिए एडीजी ज़ोन वाराणसी के नेतृत्व में गठित थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें ये दोनों रिपोर्ट 3 अगस्त को प्राप्त हुईं और उसी क्रम में व्यापक परीक्षण करने के बाद ही यह कार्रवाई की गई है। ग़ौरतलब है कि पूर्वी यूपी के सोनभद्र ज़िले के गाँव उम्‍भा में हुए हत्‍याकांड में 10 आदिवासी किसानों की मौत हुई थी। मुख्य आरोपी ग्राम प्रधान के अलावा कुल 24 लोगों को इस मामले में गिरफ़्तार किया गया था।

इसके अलावा उन्होंने इस बात का ज़िक्र किया कि मिर्ज़ापुर और सोनभद्र में सरकारी ज़मीनों के दुरुपयोग की अगले तीन महीनों में जाँच की जाएगी। उन्होंने बताया कि 8 राजपत्रित और 7 गैर-राजपत्रित अधिकारियों के ऊपर कार्रवाई की गई है। साज़िश करने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर 1952 को आदर्श कृषि सहकारिता समिति कॉन्ग्रेस के पूर्व एमएलसी महेश्वर प्रसाद नारायण सिंह और दुर्गा प्रसाद राय ने गठित की थी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इसके बाद साल 1989 में ज़मीन को ग़लत तरीके से बेचने का काम शुरू हुआ।

Blenders Pride के ऐड पर प्रियंका चोपड़ा ‘दीदी’ से यूज़र्स ने पूछा उनके अस्थमा का हाल

फ़िल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा आए दिन अपनी किसी न किसी गतिविधि के चलते सुर्ख़ियों में बनी रहती हैं। कभी वो बिकिनी में दिखती हैं तो कभी सिगरेट का धुआँ उड़ाती नज़र आती हैं। सोशल मीडिया पर उनकी इन्हीं तस्वीरों को देखकर लोग टीका-टिप्पणी करते हैं। फ़िलहाल, वो अपने एक ऐड को लेकर चर्चा में है, जिस पर यूज़र्स ने उनके अस्थमा का हाल तक पूछ डाला। दरअसल, प्रियंका चोपड़ा ने नामी-गिरामी ब्रैंडेड शराब के नाम पर होने वाली फैशन टूर की ऐड की क्लिप इंस्टाग्राम पर पोस्ट की।

इस वीडियो क्लिप को पोस्ट करते समय प्रियंका चोपड़ा ने इसके कैप्शन में लिखा, “ज़िंदगी ख़ुद को बार-बार सुदृढ़ बनाना है। आपको हर मौक़े को हाथ में लेना होगा, जोख़िम का सामना भी करना होगा और अपने लिए रास्ता भी बनाना होगा। सभी की सफलता उनकी अपनी है, यह वो चीज़ है जिसे आप ख़ुद कमाते हैं। यह आपका गर्व है।”

ख़बर के अनुसार, प्रियंका चोपड़ा ने जिस ब्रांड के लिए यह ऐड किया है, उसमें उन्होंने तीन अलग-अलग शेड्स के ज़रिए अपनी क़ामयाबी के बारे में बताया। इस वीडियो क्लिप के सोशल मीडिया पर पहुँचते ही यूज़र्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।

सोशल मीडिया पर किसी ने उनके अस्थमा के बारे में पूछा तो किसी ने कहा कि प्रियंका को अस्थमा की बीमारी देश में ही होती है, लेकिन विदेश जाते ही उनकी बीमारी हवा हो जाती है।

एक यूज़र ने दीदी का संबोधन करते हुए लिखा कि कोई दीदी को सिगार लाकर दो। वहीं, एक अन्य यूज़र ने तंज कसा कि ये लोग पैसों के लिए ज़हर तक का प्रमोशन कर देंगे। सोशल मीडिया पर इससे पहले भी प्रियंका चोपड़ा को घेरा गया था, जिसमें यूज़र्स ने उन्हें ये याद दिलाने की कोशिश की थी वो बाढ़ से बेहाल असम की ब्रांड एम्बेसडर हैं।

दर्जी की दुकान से 15 लाइव ग्रेनेड बरामद, LoC से घुसे जैश के 4-5 आतंकी: सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जिहादी सीमा रेखा (LoC) पार कर हिंदुस्तान के अंदर आ गए हैं। इस घटना के मद्देनज़र सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट जारी किया गया है, और उनकी तलाश जारी है। इस बीच एक दर्जी की दुकान में 15 हथगोले (ग्रेनेड, वो भी लाइव) मिलने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया है।

LoC के पास दुकान

हालाँकि दुकान के मालिक का नाम तो नहीं सामने आया है, लेकिन यह खबर आ रही है कि इस दर्जी की दुकान संवेदनशील केरन सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास ही थी। इस दुकान में आज (4 अगस्त) ही एक धमाका हुआ था, जिसमें स्थानीय नागरिक अब्दुल हमीद बजाद की मौत हो गई थी। इसके बाद इस दुकान से सेना और पुलिस की संयुक्त टीम ने 15 और ग्रेनेड बरामद किए और मालिक को हिरासत में ले लिया

BAT के 4 प्रयास, आखिर 4-5 जिहादी घुसाने में सफल

पाकिस्तानी फ़ौज के विशेष दस्ते बॉर्डर एक्शन फ़ोर्स (BAT) का पिछले काफ़ी समय से हिंदुस्तान में जिहादी घुसाने का प्रयास चल रहा था। पिछले एक हफ़्ते में कम-से-कम चार बार BAT ने सीमा के पास हरकत करने की कोशिश की थी, लेकिन हिंदुस्तानी सेना ने उन्हें मुँह-तोड़ जवाब दिया था।

लेकिन अब सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्टें आ रही हैं कि सीमा पर हो रही इन झड़पों की आड़ में पाकिस्तान जैश के 4-5 दहशतगर्दों को भेजने में सफल रहा है। सभी दहशतगर्द पीओके (पाकिस्तान-ऑक्युपाइड कश्मीर) से ताल्लुक रखते हैं। हालाँकि केरन सेक्टर में हुई ऐसी ही एक कोशिश को सेना ने न केवल नाकाम किया था, बल्कि कोशिश करने वाले 4 घुसपैठियों को मार गिराया था, जिनकी लाशें अब भी हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच की ज़मीन पर पड़ी हैं

इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक उनके सूत्र ने बताया कि घुसपैठ की कोशिशें केरन के अलावा गुरेज़, तंगधार और माछिल में भी हुईं थीं।

इरफ़ान पठान, कोच और ट्रेनर सहित 100 युवा क्रिकेटरों को कहा गया- अपने घर जाएँ

भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे ऑलराउंडर और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के मेंटर इरफ़ान खान को घाटी छोड़ घर लौट जाने को कहा गया है। घाटी में बढ़ रहे तनाव और स्वतन्त्रता दिवस समेत कई त्यौहारों पर मंडरा रहे आतंकी हमले के मद्देनज़र यही सलाह उनके कैम्प में आए 100 अन्य युवा क्रिकेटरों को भी दी गई है। इरफ़ान को भारी सुरक्षा इंतज़ाम के साथ सुरक्षा बल श्रीनगर एयरपोर्ट तक छोड़ने भी गए, जहाँ से वह हवाई मार्ग से अपने घर लौटेंगे।

सपोर्ट स्टाफ़ को भी कहा गया जाने को

इरफ़ान पठान जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के मेंटर के तौर पर पिछले कुछ समय से घाटी में ही थे। उनके साथ सपोर्ट स्टाफ़ के तौर पर कोच मिलाप मेवाड़ा और ट्रेनर सुदर्शन वीपी भी थे, जो घाटी के नहीं बल्कि राज्य से बाहर के हैं। उन्हें भी घर जाने को कह दिया गया है। इन सभी के अलावा जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) के कैम्प के लिए शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम, श्रीनगर में इकट्ठा करीब 100 युवा क्रिकेटरों को भी उनके घर भेज दिया गया है। इनमें अंडर-19 और अंडर-16 के खिलाड़ी भी शामिल हैं

हाल में तनाव बढ़ने पर सरकार ने अमरनाथ यात्रा पर जा रहे श्रद्धालुओं और कश्मीर घूमने गए पर्यटकों को भी उनके घर लौट जाने की एडवाइजरी जारी की है। जिहादी हमले की आशंका के मद्देनज़र यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा पिछले एक पखवाड़े में हज़ारों अर्धसैनिक बलों की अतिरिक्त तैनाती घाटी में सुरक्षा इंतज़ामों को चाक-चौबंद करने के लिए की गई है।