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जय श्री राम न बोलने पर युवक को जिंदा जलाया: मीडिया गिरोह ने खबर के नाम पर फिर परोसा ‘जहर’

उत्तर प्रदेश के चंदौली से आज सुबह एक 17 साल के मुस्लिम बच्चे को जय श्री राम न बोलने पर आग में झोंकने की खबर आई। खबर चलाई किसने – आजतक और इंडिया टुडे ने, वो भी बिना पूरी सच्चाई जाने ही! एक ही मीडिया समूह की दोनों वेबसाइटों पर इसे हेट क्राइम का एँगल दिया गया।

जब हमने इसकी सच्चाई जानने के लिए आगे खबर का फॉलोअप किया तो पता चला कि एएनआई ने इस घटना के संबंध में चंदौली के एसपी का बयान अपने ट्विटर पर ट्वीट किया है, जिसमें वे बताते नजर आ रहे हैं कि पुलिस ने बच्चे के बयानों में विरोधाभास पाया है। उनके मुताबिक एक चश्मदीद के बयान के अनुसार बच्चे को किसी समूह ने नहीं, बल्कि बच्चे ने खुद ही आग लगाई थी। मतलब ये मामला आत्मदाह का प्रतीत होता है।

जानकारी के मुताबिक खालीद नाम का यह बच्चा इस समय काशी के कबीर चौरा अस्पताल में भर्ती है। 45 प्रतिशत झुलसने के कारण उसकी स्थिति गंभीर है। पुलिस का मामले पर कहना है कि बच्चे ने खुद अपने आप को आग लगाई। वो अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है। जिससे मामले में संदेह वाली स्थिति बनी हुई है। पुलिस के मुताबिक बच्चे को देखकर लग रहा है जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं, क्योंकि जिस जगह के बारे में बच्चा बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है।

चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, पीड़ित बच्चे ने दो अलग बयान दिए हैं। पहले नाबालिग ने कहा कि वह महाराजपुर गाँव की ओर जा रहा था कि तभी वहाँ उसे 4 लोग मिले, जो उसे घसीटकर खेत में ले गए और आग लगा दी। उसके बाद उसने कहा घटना छतल गाँव की है, जो महाराजपुर से 1.5-2 किलोमीटर दूर है। बाद में उसे बीएचयू भेजा गया, जहाँ उसने फिर बयान बदला और बताया कि 4 लोग मोटरसाइकल पर आए और उसे अगवा करके हतीजा गाँव ले गए। पुलिस का इन बयानों को दर्ज करने के बाद संदेह इसलिए गहराया क्योंकि ये गाँव अलग-अलग दिशाओं में स्थित हैं।

खैर पुलिस द्वारा मामले की सच्चाई का पर्दाफाश करने के बाद पता चल चुका है कि बच्चा जय श्री राम का नारे वाली बात भी झूठ बोल रहा है, लेकिन सबसे तेज होने की होड़ में ‘इंडिया टुडे’ और उससे जुड़ा ‘आज तक’ जो हड़बड़ी दिखा रहे हैं, वो उनकी विश्वसनीयता पर एक सवालिया निशान है।

इंडिया टुडे ने हेड लाइन तो बदली लेकिन हेटक्राइम को दर्शाता अपना यूआरएल बदलना भूल गया

फिलहाल, इंडिया टुडे की वेबसाइट ने अपनी इस गलती को हेडलाइन का एँगल बदलकर सुधारने की कोशिश की है, लेकिन यूआरएल अब भी वही हेट क्राइम वाला ही है। वहीं आज तक ने भी अपनी हेडिंग से जय श्री राम को हटाकर पाठकों के सामने खुद को सबसे साफ़ दिखाने का प्रयास किया है। लेकिन दुनिया डिजिटल है और लोग मीडिया गिरोह का पर्दाफाश करने के लिए स्क्रीनशॉट का उपयोग बखूबी करना जान गए हैं।

आजतक द्वारा एक घंटे में बदली गई हेडलाइन का स्क्रीनशॉट

कर्नाटक: येदियुरप्पा ने साबित किया बहुमत, विधानसभा अध्यक्ष रमेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से सौंपा इस्तीफा

कर्नाटक में लंबे समय से चल रहे सियासी संकट पर आज विराम लग गया है। कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा सरकार को बहुमत प्राप्त हो गया है। इस दौरान विपक्ष ने मत विभाजन की माँग नहीं की। इसी के साथ सरकार अपने आगे के कामकाज में जुट गई है। राज्य में फ़िलहाल, 207 विधायकों वाली विधानसभा है, जिसमें बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए था और बीजेपी के पास 105 विधायक हैं।

सदन में मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने कहा कि वो किसी के ख़िलाफ़ बदले की राजनीति के साथ काम नहीं करते हैं, आगे भी नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार किसानों के लिए काम करना चाहती है, इसलिए मैं सभी से अपील करता हूँ कि सरकार के विश्वास मत प्रस्ताव का समर्थन करें।”

इससे पहले जेडीएस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने सदन में बोलते हुए कहा, “मैं 14 महीने तक सरकार में रहा। मुझे आपके (बीएस येदियुरप्पा) सवालों के जवाब देने की कोई बाध्यता नहीं है। मुझे अपनी अंतरात्मा की आवाज का जवाब देने की जरूरत है। पिछले 14 महीनों से सब कुछ दर्ज किया जा रहा था। लोग जानते हैं कि मैंने क्या काम किया है।”

वहीं, सिद्धरमैया ने कहा, “हमें उम्मीद है कि आप (बीएस येदियुरप्पा) मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। आप बागियों के साथ हैं, क्या आप एक स्थिर सरकार दे सकते हैं? यह नामुमकिन है, मैं इस अविश्वास प्रस्ताव का विरोध करता हूँ क्योंकि इसका कारण सरकार का असंवैधानिक और अनैतिक होना है।”

एक और नाटकीय घटनाक्रम में कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष रमेश कुमार ने तत्काल प्रभाव से अपना इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के बाद उन्होंने सदन के सभी सदस्यों और कर्मचारियों का धन्यवाद किया।

‘सांसद रमा देवी मेरी बहन की तरह हैं’ – भद्दी टिप्पणी करने के बाद आज़म ख़ान ने माँगी माफ़ी

25 जुलाई को लोकसभा में ट्रिपल तलाक बिल पर पर चर्चा के दौरान सदन की अध्यक्षता कर रहीं बीजेपी सांसद रमा देवी पर सपा नेता आज़म ख़ान ने अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने रमा देवी से कहा था, “आप मुझे इतनी अच्छी लगती हैं कि मेरा मन करता है कि आपकी आँखों में आँखें डाले रहूॅं।” इस तरह की टिप्पणी से अध्यक्षता कर रहीं सांसद थोड़ी देर के लिए असहज हो गई थीं। आज़म ख़ान की इस भद्दी टिप्पणी से उनकी किरकिरी होना तय था, जो हुई भी।

इस मामले में ताज़ा समाचार यह है कि सपा नेता आज़म ख़ान ने सांसद रमा देवी के ख़िलाफ़ की गई अपनी भद्दी टिप्पणी के लिए माफ़ी माँग ली है और कहा कि सासंद रमा देवी मेरी बहन हैं।

औरत ही औरत की दुश्मन: आजम खान के बचाव में बोली बीवी- उर्दू की मिठास से गलतफहमी

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी आज़म खान के बयान की आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक बताया था। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “आज़म खान द्वारा दिया गया शर्मनाक बयान उनके चरित्र का प्रतिबिंब है; उनका बचाव करके अखिलेश यादव ने भी प्रमाणित कर दिया कि उनकी सोच में भी कोई फ़र्क़ नहीं। जो सदन में महिला के साथ निंदनीय व्यवहार कर सकता है वह साधारण महिला से किस प्रकार का व्यवहार करता होगा, यह सोचने वाली बात है।” इसके साथ ही एक और ट्वीट में स्मृति ने आज़म खान को सभी पुरुष सांसदों पर धब्बा बताया।

जब मॉं-बेटे का चुम्मा सेक्स नहीं तो आजम खान गलत कैसे?

‘कॉन्ग्रेस-NCP के 50+ MLA हमारे सम्पर्क में’ – BJP के दावे के बाद महाराष्ट्र में सियासी उठापटक तेज़

पिछले एक महीने से कर्नाटक में लगातार सियासी उठापटक देखने को मिल रही है। इस उठापटक का नतीजा यह रहा कि सूबे में कॉन्ग्रेस-जेडीएस की गठबंधन सरकार गिर गई और इसका फ़ायदा बीजेपी को मिला। ऐसे ही कुछ बनते-बिगड़ते समीकरण महाराष्ट्र की राजनीति में भी देखने को मिल रहे हैं। ख़बर है कि महाराष्ट्र में बीजेपी, कॉन्ग्रेस-NCP (राष्ट्रवादी कॉन्ग्रेस पार्टी) गठबंधन को एक बड़ा झटका देने की तैयारी में है।

सूबे में बीजेपी के वरिष्ठ नेता और जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन ने दावा किया है कि कॉन्ग्रेस और NCP के क़रीब 50 विधायक उनके सम्पर्क में हैं। ग़ौरतलब है कि महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और ऐसे में इस दावे से सियासी गलियारे में हलचल तेज़ होना तय है।

बता दें कि गिरीश महाजन का यह बड़ा बयान ऐसे समय में आया है जब NCP के कई नेता पहले से ही पार्टी को अलविदा कह चुके हैं। हाल ही में, NCP की वरिष्ठ नेता चित्रा वाघ का बयान आया था कि वो बीजेपी में शामिल होना चाहती हैं क्योंकि NCP का अब कोई भविष्य नहीं है। उन्होंने यह ख़ुलासा भी किया था कि उनसे कई अन्य विधायकों ने अनुरोध किया था कि वो विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल होना चाहते हैं।

इन दिनों NCP में इस्तीफ़ों का दौर भी जारी है। एक के बाद एक पार्टी के कई नेताओं ने अपना इस्तीफ़ा दिया, ज़ाहिर सी बात है इससे पार्टी कमज़ोर हुई है। 26 जुलाई को पार्टी की महिला विंग की अध्यक्ष चित्रा वाघ ने पार्टी के अंधकारमय भविष्य को देखते हुए इस्तीफ़ा दिया था। वहीं, पार्टी के मुंबई प्रमुख सचिन अहीर ने पहले से ही शिवसेना का दामन थाम लिया था। ख़बर तो यह भी है कि पूर्व मंत्री मधुकर पिचड के बेटे और NCP विधायक वैभव पिचड भी बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। इन हालातों के मद्देनज़र यह अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि गिरीश महाजन के दावों में कितनी सच्चाई है।

फ़िलहाल, महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के पाँव डगमगा रहे हैं और अगर यह स्थिति लगातार बनी रही तो निश्चित तौर पर NCP भी कमज़ोर हो जाएगी। इसके अलावा राज्य मंत्री गिरीश महाजन ने शरद पवार के उस दावे को भी ख़ारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजेपी सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल करके कॉन्ग्रेस और NCP के नेताओं को अपने खेमे में शामिल करने की कोशिश कर रही है।

नाम- सौरभ शुक्ला, काम: लश्कर-ए-तैयबा के लिए फंड जुटाना, UP पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में रविवार (जुलाई 26, 2019) को एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड ने लश्कर-ए-तैयबा के लिए काम करने के आरोप में सौरभ शुक्ला नाम के शख्स को गिरफ्तार किया। जानकारी के अनुसार सौरभ भारत में रहकर लश्कर के कहने पर उनके लिए फंड जुटाने का काम कर रहा था।

मीडिया खबरों के मुताबिक सौरभ मध्य प्रदेश के सीधी जिले का रहने वाला है। वह प्रयागराज में रहकर बीए की पढ़ाई कर रहा था। सौरभ के पिता टीचर हैं। रविवार को हुई सौरव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने बताया कि वो भारत से जानकारी जुटाकर पाकिस्तान के सक्रिय आतंकी संगठन लश्कर-ए तैयबा को दिया करता था। इसके अलावा वह भारत से रुपए जमा करके पाकिस्तान भी भेजता था, ताकि आतंकी अपने मनसूबों को अंजाम दे सकें।

सौरभ फोन और इंटरनेट के माध्यम से लश्कर के सदस्यों से संपर्क करता था। इनसे अलग-अलग बैंक खाताओं में पैसे मंगवाकर आतंकियों तक सप्लाई भी करता था। अधिकारियों के मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस को काफ़ी समय से सौरभ की तलाश थी। पुलिस ने इसे पकड़ने के लिए बीते दिनों इस पर 25 हजार रुपए का इनाम भी रखा था। साथ ही इस मामले में पुलिस ने मध्य प्रदेश एटीएस की भी मदद ली थी। अब फिलहाल, गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों का कहना है कि सौरभ से इस मामले में पूछताछ जारी है।

मुख्तार अपनी बेटियों से करता था जबरदस्ती: पत्नी ने शराब पिला, नशे की गोली खिला, गला घोंट कर मार डाला

बिजनौर में हुए मुख्तार अहमद हत्याकांड में पुलिस ने रविवार (जुलाई 28, 2019) को एक बड़ा खुलासा किया है। दरअसल, पुलिस ने इस हत्याकांड के पीछे मृतक की पत्नी को ही दोषी पाया है। पुलिस के अनुसार महिला ने खुद बताया कि उसका पति नशे की हालत में अपनी बेटियों के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करता था। जिससे तंग आकर एक दिन महिला ने गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी। मामले की गुत्थी सुलझने के बाद अब पुलिस ने मुख्तार की पत्नी को हिरासत में ले लिया है। साथ ही जाँच को आगे बढ़ाया है।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार बिजनौर के एसपी संजीव त्यागी ने इस मामले पर बताया कि 8 जुलाई को धामपुर निवासी मुख्तार अहमद की हत्या हुई थी। जिसके बाद मुख्तार के भाई इरफान ने अपने भाई की पत्नी फिरदौस पर पहले दिन से हत्या करने का शक जताते हुए पुलिस में शिकायत की थी।

जाँच के बाद फिरदौस को हिरासत में लिया गया, जहाँ पूछताछ के दौरान उसने हत्या करने की बात स्वीकार ली। लेकिन जब उसने अपने इस कदम के पीछे का कारण बताया तो सबके होश उड़ गए।

इस पूछताछ में फिरदौस ने बताया कि उसका निकाह मुख्तार से 8 साल पहले 26 अप्रैल 2011 को हुआ था। वो मुख्तार की दूसरी पत्नी थी। मुख्तार का पहला निकाह नगीना की रजिया से हुआ था, लेकिन रजिया ने मुख्तार के हँगामे करने और मारपीट से तंग आकर ससुराल छोड़ दिया था। हालाँकि इसके बाद भी मुख्तार की आदतों में सुधार नहीं हुआ और जब उसकी शादी फिरदौस से शादी हुई वह तब भी मारपीट करता रहा।

फिरदौस के मुताबिक मुख्तार नशे की हालत में अपनी बेटियों को हवस का शिकार बनाने की कोशिश करता था और उसके विरोध करने पर उससे मारपीट करता था। इसलिए एक दिन उसने अपनी बेटियों को मुख्तार से बचाने के लिए पहले उसे शराब पिलाई, फिर खाने में नशे की गोलियाँ दी और फिर बेहोश होने पर उसने (फिरदौस ने) प्लॉस्टिक की रस्सी से उसका (मुख्तार) गला घोंटकर मार दिया।

जिस जगह पर दलित महिला MLA ने किया विरोध-प्रदर्शन, कॉन्ग्रेसियों ने उसे गोबर से धोया

केरल में एक विचित्र घटना हुई। वो भी एक महिला विधायक के साथ। केरल के त्रिशूर जिले के युवा कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने यह अपमानजनक काम किया है। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) की विधायक गीता गोपी ने इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई है। उनका कहना है कि वह मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के साथ-साथ विधानसभा अध्यक्ष पी श्रीरामकृष्णन से भी शिकायत दर्ज करेंगी।

शनिवार (27 जुलाई 2019) को त्रिशूर में नत्तिका निर्वाचन क्षेत्र की विधायक गीता गोपी ने चेरपु मिनी सिविल स्टेशन के परिसर में विरोध-प्रदर्शन किया। यह विरोध-प्रदर्शन त्रिपयार से चेरपु राज्य राजमार्ग पर रखरखाव से संबंधित था। जब उन्हें लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से इस मामले में आश्वासन मिल गया तो उन्होंने अपना विरोध-प्रदर्शन समाप्त कर दिया। असली ड्रामा इसके बाद युवा कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने किया।

चेरपु मिनी सिविल स्टेशन के परिसर में जिस जगह पर विधायक गीता गोपी ने विरोध-प्रदर्शन किया था, उस जगह को युवा कॉन्ग्रेसी कार्यकर्ताओं ने गोबर से लेपा। ऐसा करने के पीछे उनका मकसद “स्पॉट को शुद्ध करने” से था। आपको बता दें कि विधायक गीता गोपी दलित समुदाय से आती हैं। आपको यह भी जानना चाहिए कि केरल में साक्षरता दर भारत के किसी भी राज्य की तुलना में सबसे अधिक है।

केरल की स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और महिला एवं बाल विकास मंत्री केके शैलजा ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस अपने कार्यों के माध्यम से पार्टी की संस्कृति दिखा रही है। शैलजा ने कहा, “विधायक गीता गोपी के खिलाफ जातिवादी भेदभाव चौंकाने वाला है। यह आपराधिक और बेहद निंदनीय है कि कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने उस स्थान पर गाय का गोबर-मिश्रित पानी डाला, जहाँ लोकतांत्रिक ढंग से विरोध-प्रदर्शन किया गया।”

शैलजा ने जोर देकर कहा, “केरल पुनर्जागरण में बहुत आगे रहा है, यहाँ ऐसा नहीं होना चाहिए। ऐसे कृत्य को अंजाम देने वाले लोग अपनी संस्कृति दिखा रहे हैं। इससे वे अस्पृश्यता का डर वापस ला रहे हैं। उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।”

कृष्ण स्वयं शैतान, गोपियाँ मूल रूप से उनकी वेश्याएँ: रूस में ईसाई कट्टरपंथियों के निशाने पर हिंदू धर्म

रूस में ईसाई कट्टरपंथियों द्वारा एक हिन्दू आश्रम (श्री प्रकाश धाम) से जुड़े लोगों को लंबे समय से लगातार सताया जा रहा है। हाल ही में, ऑपइंडिया ने इस मामले से संबंधित एक ख़बर भी प्रकाशित की थी। इस आश्रम के आध्यात्मिक गुरू ने बताया कि रूस में वो 1990 से शांति से रह रहे थे, लेकिन स्थिति तब बिगड़ गई थी जब हिन्दू-विरोधी अलेक्जेंडर दोर्किन (Alexander Dvorkin) की नज़र उनके आश्रम पर पड़ी।

रूस में कट्टरपंथियों के निशाने पर हिन्दू आश्रम

इस मामले में ताज़ा समाचार यह है कि अलेक्जेंडर दोर्किन जो कि धार्मिक संगठनों और समूहों पर हमला करने के लिए जाना जाता है, उसने अपनी वेबसाइट iriney.ru पर खुले तौर पर हिंदू धर्म के देवी-देवताओं का अपमान किया है। हिन्दू धर्म और देवी-देवताओं के बारे में दोर्किन द्वारा की गईं अभद्र टिप्पणियों के कुछ अंश इस प्रकार हैं:

  • हिंदू धर्म एक धर्म नहीं है, बल्कि एक राक्षसी, बुतपरस्त पंथ है, जिसमें हज़ारों सम्प्रदाय मौजूद हैं।
  • इसके सार में, हिंदू धर्म शैतानवाद के अलावा और कुछ नहीं है।
  • हिंदू धर्म जादू टोना और मूर्तिपूजक दर्शन का मिश्रण है।
  • कृष्ण स्वयं शैतान हैं।
  • हिंदू धर्म जंगली बुतपरस्ती है।
  • श्री प्रकाश जी एंटीक्राइस्ट हैं।
  • श्री प्रकाश जी शैतानवाद फैला रहे हैं, हिंदू धर्म नहीं।
  • उनके चेहरे पर लगा तिलक मल के समान है, मानो शैतान ने उसे लगाया हो।
  • योग राक्षसी प्रथाओं का एक सेट है।
  • योग मृत्यु का मार्ग है।
  • योग का उद्देश्य स्थायी रूप से मरना है।
  • ध्यान के दौरान, एक योगी शैतान के साथ मिलकर रहता है।
  • कृष्ण की गोपियाँ मूल रूप से उनकी वेश्याएँ थीं।
  • काली शैतान का राक्षसी स्त्री रूप है।
  • हिंदू धर्म मानव जाति के लिए सबसे घातक दर्शन है।

आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश ने हिंदू धर्म की इस अवहेलना को जब चुनौती दी, तो अलेक्जेंडर दोर्किन ने उन्हें और उनके परिवार को ‘विदेशी मैल’ तक कहा। 1 नवंबर 2018 को कुछ रूसी असामाजिक तत्वों ने पुलिस के कपड़े पहनकर उनके आश्रम में अनाधिकृत छापेमारी भी की थी। उन लोगों के साथ वहाँ की पुलिस ने श्री प्रकाश को रूस छोड़ने का दबाव बनाया और कभी वापस न लौटने को कहा। इस मामले में श्री प्रकाश के दूसरे वकील ने साबित कर दिया कि ये छापेमारी अवैध थी और 10 दिसंबर 2018 को उन्हें अलेक्जेंडर दोर्किन के ख़िलाफ़ मुक़दमा जीतने में मदद मिली। तब अदालत के आदेश में यह कहा गया कि दोर्किन की वेबसाइट पर मौजूद सभी जानकारी बेहुदी है, जो मानहानि के तहत आती है।

ईसाई कट्टरपंथी अलेक्जेंडर दोर्किन

आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश ने रूस में पहले हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए नरेंद्र मोदी से अपील की है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त 12 बड़े NGO ने नरेंद्र मोदी और एस जयशंकर को पत्र भेजकर रूस में ईसाई कट्टरपंथी अलेक्जेंडर दोर्किन को सज़ा देने और रूस में हिंदुओं व आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश की मदद करने के लिए कहा है।

अलेक्जेंडर दोर्किन को सज़ा देने और रूस में हिंदुओं व आध्यात्मिक गुरू श्री प्रकाश की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र से मान्यता प्राप्त जो 12 बड़े NGO उनके समर्थन में आए, उसकी लिस्ट नीचे दी गई है।

आध्यात्मिक गुरू के समर्थन में आए 12 बड़े NGO

दरअसल, हिन्दू आश्रम ‘श्री प्रकाश धाम’ रूस, यूरेशिया, यूरोप और यूके में मौजूद केंद्रों का एक समूह है। इस हिन्दू आश्रम को ईसाई कट्टरपंथियों ने न सिर्फ़ बदनाम करने की कोशिश की बल्कि इसके संरक्षकों पर शारीरिक हमले भी करवाए। इसकी जानकारी आश्रम के निदेशक प्रसून प्रकाश ने ख़ुद दी।

उन्होंने इस मामले में एक याचिका भी दायर की है, जिस पर उन्होंने लोगों से मदद की गुहार लगाते हुए इस पर हस्ताक्षर करने और इसे अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की है।

आसिफ गफूर ने 2015 के वीडियो में छेड़छाड़ कर ढूँढा बालाकोट, सोशल मीडिया पर हुई छीछालेदर

सलमान खान की फिल्म ‘दबंग-2’ में मनोज पाहवा का किरदार सलमान खान के किरदार को समझाता है कि ‘दबाव बने रहना चाहिए।’ ऐसा लग रहा है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के पाँच महीने बाद भी पाकिस्तानी सेना ऐसे ही ‘दबाव’ में है, और अब तक हिन्दुस्तानी वायु सेना के ‘पेड़ उखाड़ने’ वाली एयर स्ट्राइक के सदमे से बाहर नहीं आ पाई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने अपने ट्विटर अकाउंट से 1962 के भारत-चीन युद्ध के नायकों में एक एयर मार्शल डेन्ज़िल कीलोर का डॉक्टर्ड (छेड़-छाड़ किया हुआ) वीडियो शेयर किया है। इसमें 62 के युद्ध में हिंदुस्तानी फ़ौज को हुई कुछ ऐसी जान की हानि के किस्सों की बात की जा रही है, जिनसे शायद बचा जा सकता था।

एयर मार्शल कीलोर इस वीडियो में कहते हुए सुने जा सकते हैं कि हिंदुस्तानी सेना को हुई जन-क्षति कुछ हद तक रणनीतिक चूक और अनुभवहीनता के कारण थी। “आप बिना अनुभव के लड़ाई नहीं लड़ सकते। इसकी हमने भारी कीमत चुकाई है।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तानी सेना के पास हिन्दुस्तानियों से बेहतर हथियार थे। लेकिन यह वीडियो असल में बालाकोट से साढ़े तीन साल पहले 2015 का है।

इस वीडियो पर गफ़ूर की टिप्पणी में भी साफ तौर पर यह 27 फ़रवरी, 2019 को हुई बालाकोट एयर स्ट्राइक के संदर्भ में किए गए कमेंट होने का दावा किया गया है। शायद अपने देश की सेना को एयर स्ट्राइक में लगे झटके में मेजर गफ़ूर यह भूल गए कि 2015 के वीडियो में बालाकोट एयर-स्ट्राइक की बात हो ही नहीं सकती।

चार घंटे और ट्विटर पर पड़ी लताड़ के बाद जब मेजर गफूर को यह ‘समझ’ में आ गया कि उन्होंने क्या हरकत की है तो वह प्रवक्ता मोड में स्पष्टीकरण वाले ट्वीट करने लगे।

लेकिन इसमें भी अपनी पाकिस्तानी (तुच्छ) सोच दिखाना वह जब्र नहीं कर पाए। उनके ट्वीट के मुताबिक वह कन्फ्यूज़ इसलिए हो गए क्योंकि जिन गलतियों की बात एयर मार्शल कर रहे थे, जिन हालातों की वह बात कर रहे थे, और जैसे कर रहे थे, वह एक जैसे हैं (1965 और 2019 में)। उन्होंने यह भी कहा कि हिन्दुस्तानी वायु सेना के लिए परिस्थितियाँ (उनके हिसाब से असफलता की) 1965 से लेकर अब तक कमोबेश समान हैं।

नगर निगम चलाने का भी अनुभव नहीं, फिर भी योगी को क्यों बनाया CM? अमित शाह ने बताया

भारतीय जनता पार्टी के अध्‍यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में बताया कि गोरक्षपीठ के महंत योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री क्यों बनाया गया? वैसे दक्षिण पंथ के पोस्टर बॉय योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद पर चुनने के बीजेपी के फैसले ने कई लोगों को चौंका दिया था। सबसे बड़ा सवाल यह था कि जिसे कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं है, उसे देश के सबसे बड़े राज्य की कमान क्यों दे दी गई है?

गृहमंत्री अमित शाह ने आज एक कार्यक्रम में इस बात का खुलासा किया है कि पीएम मोदी और उन्होंने योगी आदित्यनाथ को देश के सबसे ज्यादा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री क्यों बनाया है। अमित शाह ने कहा, “किसी ने सोचा भी नहीं था कि योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बनेंगे। कई लोगों ने मुझसे कहा कि योगी को तो नगर निगम चलाने का भी अनुभव नहीं है, आप उन्हें सीएम क्यों बना रहे हैं। हाँ यह सही है कि उनको नगर निगम चलाने का भी अनुभव नहीं था। वह एक मंदिर के प्रमुख थे।”

कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में अमित शाह ने आगे कहा, “लोगों ने मुझसे कहा आप उनको इतने बड़े राज्य की कमान क्यों सौंप रहे हैं। लेकिन पीएम मोदी और मैंने उन्हें सीएम बनाने का फैसला किया क्योंकि वह कर्मठ हैं और उन्होंने अपने कम अनुभव को कठोर परिश्रम से कभी बाधा नहीं बनने दिया।”

आपको बता दें कि साल 2017 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश में प्रचंड बहुमत मिला था। जनता के इस फैसले को पीएम मोदी के विकास कार्यों को लेकर किए गए वादों के प्रति जनता का अटूट विश्वास माना गया। लेकिन इस चुनाव में पार्टी ने किसी को भी सीएम पद का चेहरा नहीं घोषित नहीं किया था। नतीजों के बाद यह एक बड़ा मुद्दा बन गया था कि बीजेपी किसे उत्तर प्रदेश का सीएम बनाया जाए। कई नामों पर चर्चा थी।

मीडिया ने भी कई नामों पर लम्बी बहस की थी, कयास लगाए थे मनोज सिन्हा का नाम ज़्यादा चर्चा में था। लेकिन बाद में योगी के नाम पर फैसला शायद इसलिए किया गया क्योंकि वह पार्टी कैडर में बहुत ज्यादा लोकप्रिय थे। योगी के मुख्यमंत्री बनते ही ऐसे सभी कयासों पर विराम लग गया था। लेकिन क्यों वाला सवाल रह गया था। जिसका जवाब आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दे दिया।