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35A उन्मूलन: 370 हटाने का वह ‘द्वार’, जिस पर ‘कश्मीरियत’ के जिहादी नेता दे रहे पहरा

घाटी में 10,000 अतिरिक्त जवानों की तैनाती के साथ ही 35A के हटने को लेकर नए सिरे से अटकलबाज़ियाँ शुरू हो गई हैं। हालाँकि कुछ मीडिया रिपोर्टें सैन्य गतिविधि के आतंक से जुड़े होने का दावा कर रही हैं, लेकिन जानकारों की मानें तो नई सरकार के निर्वाचन के तुरंत बाद गृह मंत्री और सत्तारूढ़ भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह, और उसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल का कश्मीर दौरा संयोग नहीं है। और यह बात 35A के कश्मीरी खैरख्वाह भी जानते हैं, इसीलिए महबूबा मुफ़्ती की भाषा आग उगलने से आगे बढ़कर सीधी हिंसक हो गई है।

राष्ट्रपति भी नहीं ले सकते ‘एक इंच जमीन’…

संविधान के अनुच्छेद 35A की शब्दावली अपने आप में कम चिंताजनक नहीं है। लेकिन डान्टे (Dante) के काव्य ‘इन्फर्नो’ में जैसे नर्क के भी तल या परतें होती हैं, वैसे ही इसकी ‘चिंताजनक’ शब्दावली से भी ज़हरीला इस अनुच्छेद का इस्तेमाल है। जिहादी और उनके हिमायती इस अनुच्छेद का इस्तेमाल संविधान के दूसरे अनुच्छेद, अनुच्छेद 370 को हटने से रोकने के लिए करते हैं। अगर 35A न हो तो संभव है एक बार 370 के शांतिपूर्ण तरीके से हटने की परिस्थिति बनाई जा सकती है।

35A में जम्मू कश्मीर की राज्य सरकार और विधानसभा को यह ताकत मिली हुई है कि वह अपने नागरिक का ‘चुनाव’ करे- तय करे कि किसे वह ‘राज्य का नागरिक’ और माने किसे नहीं। अन्य राज्यों को यह ताकत नहीं है। पहली नज़र में यह महाराष्ट्र, तमिलनाडु या दिल्ली में दिखाए जा रहे बाहरी बनाम स्थानीय के क्षेत्रवाद से बहुत अलग नहीं लगता। हम रोज़ “मुंबई मराठों की”, “दिल्ली की नौकरियों कर कॉलेजों की सीटों पर पहला हक दिल्ली वालों का”, या जगन मोहन रेड्डी का “70% नौकरियाँ ‘हमारे लोगों’ को ही”, इत्यादि सुनते ही रहते हैं।

लेकिन अगर ठहर कर गौर किया जाए तो 35A की गंभीरता दिखने लगती है। हालाँकि हर राज्य में क्षेत्रवाद दबे-छिपे रूप में भाषाई आधार पर भेदभाव के लिए ही होता है, लेकिन जब यह अर्ध-अलगाववादी भावना कानून बनती है तो कमज़ोर पड़ जाती है। इसमें राज्य के जिन स्थाई निवासियों के अतिरिक्त कल्याण की बात होती है, वह स्थाई निवासी कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य में जा कर लम्बा समय बिताकर बन सकता है।

यानी जगन रेड्डी ने भले ही आरक्षण “राज्य के स्थाई निवासियों” की आड़ में तेलुगु-भाषियों के लिए शुरू किया हो, लेकिन अगर आप आंध्र में जाकर, एक दशक (या आंध्र विधानसभा की ‘मूल/स्थाई निवासी’ की परिभाषा के अनुसार जो भी न्यूनतम आवश्यक समय हो) का समय बिताकर, सरकारी नौकरी करते हुए या ज़मीन खरीदकर आंध्र के स्थाई निवासी बनना चाहें, तो कानून आपको नहीं रोकेगा- रोक ही नहीं सकता।

लेकिन यही अगर आप कश्मीर में 14 मई, 1954 के बाद रहने गए हों, या उसके पहले आपने वहाँ ज़मीन नहीं ले ली थी, तो आप वहाँ ज़मीन नहीं खरीद सकते, सरकारी नौकरी नहीं कर सकते, पंचायत या विधानसभा चुनाव में वोट नहीं कर सकते। आपके बच्चे जम्मू-कश्मीर सरकार के कॉलेजों में दाखिला नहीं ले सकते। आप क्या, 35A के अनुसार इस देश के ‘महामहिम’ राष्ट्रपति भी कश्मीर में सूई की नोंक बराबर भूमि अपने नाम पर नहीं खरीद सकते हैं।

आप जिस भी हालत में हों, कश्मीर सरकार के कोष से आपके लिए एक नया पैसा जारी नहीं हो सकता। इसके अलावा 35A के तहत स्थाई नागरिकों का दर्जा-प्राप्त लोगों को मिले उपरोक्त विशेष अधिकारों को राज्य के बाहर के लोग सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी इस आधार पर नहीं दे सकते कि यह संविधान-प्रदत्त कहीं भी बसने, कार्य करने, जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन है।

370 को कवच

केवल इतना ही नहीं, 35A हिन्दुस्तान की संसद को हिन्दुस्तान का हिस्सा होते हुए भी कश्मीर में सबसे बड़ी ताकत होने से रोकने वाले अनुच्छेद 370 के लिए ‘कवच’ का काम करता है। बकौल कश्मीरी पक्ष, 370 को हिन्दुस्तान के किसी ‘प्रेजिडेंशियल नोटिफिकेशन’ से नहीं हटाया जा सकता, भले ही यह 370 अपनी शब्दावली में खुद के अस्थाई होने की बात करता है।

तो हिन्दुस्तान की संसद की तरफ से 370 का हटाया जाना जिहादी मानसिकता वाले ‘अलगाववादी’ स्वीकार नहीं करेंगे, और अपनी तरफ से उसे हटने देने से रोकने के लिए 35A है। 35A से जिहादियों और उनके समर्थकों का बहुमत सुनिश्चित होता है-विधानसभा में सीटों की गिनती में, और घाटी के विधानसभा क्षेत्रों में वोटरों की संख्या में।

अगर 35A हट जाए तो ऐसा हो सकता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति वाली कोई केंद्र सरकार वहाँ हिन्दुओं, सिखों और अन्य गैर मुस्लिमों की कॉलोनियों को पूरी सुरक्षा के साथ बसाकर जिहादियों से बहुमत छीन ले। फिर ऐसा सम्भव है कि विधानसभा 370 को खुद ही हटा दे और सही अर्थों में कश्मीर का हिन्दुस्तान में पूर्ण-विलय हो जाए। और इसी से रोकने के लिए 35A के पक्ष में ‘कश्मीरियत’ के तीनों गुट हार्डकोर जिहादी (लश्कर, जमाते-इस्लामी), ‘सॉफ़्ट’ जिहादी (हुर्रियत, आसिया अंद्राबी) और जिहादियों के हिमायती (अब्दुल्ला-मुफ़्ती खानदान, इंजीनियर रशीद) एक सुर में खड़े हैं।

अंबेडकर ने कहा गद्दारी, बिना संसद के आया 35A

वर्तमान ही नहीं, हर काल में राष्ट्रीय स्तर पर लगभग सभी देश के हितचिंतक नेताओं ने कश्मीर के विशेष दर्जे का विरोध किया है। अंबेडकर ने संविधान सभा के अध्यक्ष होते हुए भी 370 को लिखने वाली कलम चलाने से भी मना कर दिया, क्योंकि उनकी नज़र में यह मुल्क से गद्दारी थी। उसके बाद संविधान सभा से लेकर कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी तक हर जगह उसे ख़ारिज कर दिया गया। तब नेहरू ने विदेश में बैठे-बैठे सरदार पटेल को फोन किया और 370 पास कराने की अपील की। यह जानते हुए भी कि पटेल मनसा-वाचा-कर्मणा इस अनुच्छेद, और इसके पीछे के वृहद्तर ‘अभिप्राय’ मुस्लिम तुष्टिकरण के विपरीत ध्रुव पर खड़े थे। सरदार ने खून का घूँट पीकर संविधान सभा सत्र में इसे पास कराया

अगर 370 आपको संवैधानिक रूप से ‘अपवित्र’ लग रहा है, तो 35A आपके लिए ‘अधार्मिक’ होगा। यह संविधान का अनुच्छेद तो है, लेकिन इसे संसद से कभी भी पास ही नहीं किया गया है। यह राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद द्वारा दिए गए एक ‘प्रेजिडेंशियल नोटिफिकेशन’ से लाया गया है। उसमें भी राजेंद्र प्रसाद ने पत्र लिखकर इस पर आपत्ति प्रधानमंत्री नेहरू से जताई थी, लेकिन पत्र के जवाब में नेहरू ने कहा कि वह इस बारे में ‘अनौपचारिक’ रूप से राजेंद्र प्रसाद को समझा देंगे। राष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद 28 फरवरी 1963 को राजेंद्र प्रसाद की मृत्यु हो गई, 1964 में नेहरू की। कोई नहीं जानता कि उन्होंने कभी राजेंद्र प्रसाद को संसद को बाईपास कर, “लोकतंत्र की हत्या” कर संविधान में बदलाव करने का कारण समझाया या नहीं समझाया। लेकिन इसका दुष्प्रभाव हिन्दुस्तान आज भी झेल रहा है।

(अधिकाँश संभावित रूप से विवादास्पद तथ्यों के लिए संदर्भ की लिंक दे दी गई है। बाकी के लिए कश्मीरी हिन्दुओं के मानवाधिकार कार्यकर्ता सुशील पंडित के नीचे एम्बेड किए वीडियो और इस विषय पर उनके अन्य वक्तव्यों को देखें।)

‘भगवा चोला पहन अराजकता फैलाना, मुस्लिमों पर धौंस जमाना कुछ लोगों की आदत बन गई है’

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने यूपी में लोगों को सड़कों पर नमाज पढ़ने से मना किया है। AIMPLB के महासचिव मौलाना वली रहमानी ने रविवार (जुलाई 28, 2019) को मुस्लिम धर्म गुरुओं से अपील की है कि वे सड़क पर नमाज पढ़ने से परहेज करें। उन्होंने कहा कि शरीयत के हिसाब से खाली जगह पर नमाज अदा की जा सकती है। खाली जगह पर नमाज पढ़ना जायज है। सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर उन्होंने कहा कि नमाज अल्लाह की इबादत है और किसी को तकलीफ देकर इबादत करना ठीक नहीं है। जब उनसे सवाल किया गया कि सड़क तो कोई खाली जगह नहीं है, तो मौलाना ने इसके जवाब में कहा कि इसके आगे वो कुछ नहीं कहना चाहते, उनकी बात का मतलब निकालने का काम सुनने और पढ़ने वालों पर छोड़ दिया जाए।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ऐसा हर रोज नहीं होता है, सिर्फ जुमे (शुक्रवार) वाले दिन होता है और वो भी चंद मस्जिदों के बाहर। मौलाना ने कहा कि जब मस्जिदों में भीड़ बढ़ जाती है, तो मजबूरी में लोग सड़क पर नमाज पढ़ते हैं, लेकिन यदि इससे किसी को कोई ऐतराज है तो नमाजियों को थोड़ी जहमत उठाकर दूसरी मस्जिद में चले जाना चाहिए। सड़क पर हनुमान चालीसा पढ़ने को लेकर उन्होंने दोहरा रवैया अपनाते हुए कहा कि भगवा चोला पहनकर अराजकता फैलाना और मुस्लिमों पर धौंस जमाना कुछ लोगों की आदत बन गई है। 

गौरतलब है कि, उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में सड़कों पर नमाज पढ़ने को लेकर हिन्दू संगठनों ने कड़ा विरोध जताया था। इसके विरोध में उन्होंने सड़क पर हनुमान चालीसा और महाआरती करना शुरू कर दिया था। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं का कहना था कि जब सड़क पर नमाज पढ़ी जा सकती है, तो हनुमान चालीसा क्यों नहीं? उन्होंने प्रशासन से भी इसको लेकर दोहरा रवैया अपनाने पर सवाल किया था।

जिसके बाद इस मामले का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने अलीगढ़ में सड़कों पर नमाज और हनुमान चालीसा पर बैन लगा दिया है। अलीगढ़ के डीएम ने कहा था कि जिले में सड़क पर नमाज पढ़ना प्रतिबंधित किया गया है। जिला मजिस्ट्रेट का कहना है कि ये प्रतिबंध ईद के मौके पर पढ़े जाने वाले नमाज को लेकर भी है। डीएम ने कहा कि हर व्यक्ति को धर्म का पालन करने का अधिकार है, लेकिन वह सिर्फ अपने व्यक्तिगत जगहों या धार्मिक जगहों पर ही धार्मिक गतिविधि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को भी किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि सड़क पर करने की अनुमति नहीं है।

बुजुर्ग माँ-बाप को छोड़ देना Vs काँवड़ में बिठा पैदल हरिद्वार से चलना: मिलिए कलियुग के ‘श्रवण कुमार’ से

सावन के इस पावन महीने में शिवमय हुए हिन्दुस्तान में भगवान शिव की महिमा की गूँज हर तरफ़ है। सड़कों पर काँवड़ ले जाते शिवभक्तों की लंबी कतार आसानी से देखी जा सकती है। देशभर में काँवड़ियों द्वारा काँवड़-यात्रा निकाली जा रही है। बड़ी संख्या में भक्त लोग काँवड़ में जल भर कर हरिद्वार से अपने गंतव्य पहुँच रहे हैं। लेकिन, पानीपत के चार बेटे अपने माता-पिता को काँवड़ में बिठाकर उत्तराखंड के हरिद्वार से शामली पहुँचे हैं।

माता-पिता को काँवड़ में बिठाकर हरिद्वार से लाने पर बेटों ने बताया कि पिछले साल केवल दो भाईयों ने यह यात्रा पूरी की थी, लेकिन इस बार हम चारों भाई काँवड़ यात्रा लेकर जा रहे हैं। बाँस के खंभे के दोनों तरफ़ बैठने के लिए स्थान बनाया गया है, उसी में माता-पिता को बैठाने लायक जगह है। थोड़ी-थोड़ी दूर पर चारों भाई मिलकर माता-पिता को बिठाकर काँवड़ लिए चलते जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर चारों भाईयों और उनके माता-पिता की फ़ोटो वायरल तो हो ही रही है साथ ही ख़ूब तारीफ़ भी हो रही है। बता दें कि काँवड़ यात्रा हर साल सावन के महीने में होती है। हरिद्वार से लाखों की संख्या में श्रद्धालु जल भरकर अपने गंतव्य स्थान पर भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं।

आज के युग में जहाँ ऐसे कई मामले सामने आते हैं कि लोग अपने माता-पिता को घर से बाहर कर देते हैं और बुज़ुर्ग होने पर उन्हें वृद्धाश्रम तक पहुँचा आते हैं, वहीं पानीपत के ये भाई आज के युग में श्रवण कुमार के रूप में सामने आए हैं। माता-पिता की इच्छा को पलकों पर सजाकर की गई यह काँवड़ यात्रा निश्चित तौर पर समाज पर एक अच्छा प्रभाव छोड़ेगी।

पकड़ुआ विवाह: 2017 में बंदूक की नोक पर करवाई थी विनोद की शादी, कोर्ट ने अवैध करार दिया

बिहार में पकड़ुआ विवाह की कुप्रथा अभी भी कई जगह देखने को मिल जाती है। ऐसे ही एक बहुचर्चित पकड़ुआ विवाह को पटना की फैमिली कोर्ट ने अवैध करार दिया है। फैमिली कोर्ट के फैसले से विनोद बेहद खुश हैं। मगर अभी भी उन्हें धमकियाँ मिल रही हैं। बता दें कि, बोकारो के स्टील प्लांट में अधिकारी विनोद कुमार का 2017 में पकड़ुआ विवाह किया गया था। 

विनोद अपने पकड़ुआ विवाह के दिन की घटना के बारे में बताते हुए कहते हैं, “मैं दिसंबर 2017 में अपने दोस्त की शादी में शामिल होने के लिए पटना आया हुआ था। इसी दौरान सुरेंद्र यादव ने मुझे फोन करके घर पर बुलाया। इसके बाद उसने मेरे साथ मारपीट की और फिर बंदूक की नोक पर जबरदस्ती अपनी बहन से मेरी शादी करा दी।”

विनोद का आरोप है कि पुलिस ने उनका सहयोग नहीं किया। इस शादी के खिलाफ जब वो पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराने गए, तो एफआईआर दर्ज करने की बजाय उन्हें 16 घंटे तक थाने में बैठाए रखा। फिर विनोद ने फैमिली कोर्ट पहुँचकर इस शादी को चुनौती दी और 7 जनवरी 2018 में पंडारक थाने में क्रिमिनल केस दर्ज कराया। इस पर फैमिली कोर्ट ने भी अब मुहर लगा दी है और इसे अवैध करार दिया है। कोर्ट के फैसले के बावजूद विनोद अभी काफी डरे हुए हैं। वो कहते हैं कि कोर्ट के इस फैसले से उन्हें राहत तो जरूर मिली है, लेकिन जबरन शादी करवाने वाले लोग अभी भी बाहर आजाद घूम रहे हैं। उन्हें धमकियाँ दे रहे हैं। ऐसे में वो बेहद डरे हुए हैं। हालाँकि, क्रिमिनल केस में अभी फैसला नहीं आया है।

बता दें कि, बिहार में एक जमाने में ऐसी शादी हजारों की संख्या में होती थी। जैसे ही लगन का शुभ मुहूर्त शुरू होता था, लड़की के माँ-बाप अच्छी नौकरी कर रहे या जमीन जायदाद से संपन्न लड़कों पर नज़रें टिकाए रहते थे और मौका देखते ही जबरन उसका अपहरण कर लेते थे और उसकी शादी करवा देते थे। फिर बाद में जब कानून व्यवस्था में सुधार हुआ और बहुत बड़ी संख्या में विवाहित महिलाओं को जब उनके ससुराल पक्ष के लोगों ने स्वीकार करने से मना कर दिया तो ऐसी घटनाओं में कमी आने लगी। वैसे, जबरन शादी के मामले में किसी कोर्ट का ऐसा फैसला हाल के समय में पहला है। पूर्व में सूबे के नवादा, लखीसराय समेत अन्य जिलों में कुल 1,097 केस इस तरह के हैं, जिसमें पकडुआ विवाह कराया गया।

’35A के साथ छेड़छाड़ बारूद को हाथ लगाने के बराबर, सारा जिस्म जल कर राख हो जाएगा’

हाल ही में अजीत डोभाल के कश्मीर से लौटने के तुरंत बाद, 27 जुलाई को केंद्र सरकार ने कश्मीर में आतंक की कमर तोड़ने के लिए 100 कंपनी अर्थात 10000 अतिरिक्त सुरक्षा बलों को तैनात कर दिया। इसके बाद पता नहीं कहाँ से ये हवा उड़नी शुरू हुई कि मोदी-अमित शाह की जोड़ी 35A को ख़त्म करने की तैयारी कर रही है। कुछ बड़ा होने वाला है, कहकर तमाम कश्मीरी और अलगाववादी नेताओं ने इस पर बयानबाजी शुरू कर दी।

आज पीडीपी के 20वें स्थापना दिवस पर श्रीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महमबूबा मुफ्ती ने हमेशा की तरह 35A पर बात करते हुए आग उगलना शुरू कर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार को चेतावनी देते कहा, “आर्टिकल 35A के साथ छेड़छाड़ करना बारूद को हाथ लगाने के बराबर है। जो हाथ 35A के साथ छेड़छाड़ करने के लिए उठेंगे, वो हाथ ही नहीं बल्कि सारा जिस्म जल कर राख हो जाएगा।”

उन्होंने कहा, “हमारे पास जो कुछ भी है, उसे बचाने के लिए हमें कश्मीरियों की जरूरत है, हमारा अपना संविधान है, हमारे पास एक ऐसा दर्जा है जो बाहर के लोगों को यहाँ संपत्ति खरीदने की अनुमति नहीं देता है। आज घाटी में जो हालात हैं, वे डरावने हैं, जम्मू कश्मीर बैंक खत्म हो चुका है और धीरे-धीरे वे सब कुछ खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं।” उमर ने कहा कि दिल्ली को अनुच्छेद-35ए में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट को इससे निपटना चाहिए। हम दिल्ली को बताना चाहते हैं कि अनुच्छेद 35ए को छूना बारूद को छूने जैसा होगा।

इससे पहले कल भी महबूबा ने केंद्र सरकार को सलाह दिया था कि केंद्र को अपनी कश्मीर नीति पर पुनर्विचार और उसे दुरुस्त करना होगा। महबूबा ने ट्वीट कर कहा, “घाटी में अतिरिक्त 10,000 सैनिकों को तैनात करने के केंद्र के फैसले ने लोगों में भय पैदा कर दिया है। कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है। जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसे सैन्य तरीकों से हल नहीं किया जा सकता। भारत सरकार को अपनी नीति पर पुनर्विचार और उसे दुरूस्त करने की जरूरत है।”

आपको बता दें कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ऑर्डर में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती इसलिए की जा रही है ताकि राज्य में आतंकवादियों की बढ़ती सक्रियता के मद्देनज़र कानून-व्यवस्था बेहतर की जा सके।   

खैर, तमाम कश्मीरी नेता इस कदम के संभावित कयास लगा कर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। इस कड़ी में उनके कई बयान सीधे-सीधे केंद्र को धमकी है। महबूबा मुफ्ती ने तो यहाँ तक कह दिया, “हम अपनी आखिरी साँस तक कश्मीर का बचाव करेंगे।”

14 साल की लड़की से गैंगरेप, फोटो-विडियो किया Viral: राहुल (अलादीन का बेटा), जैकम और इमरान पर FIR

थानागाजी गैंगरेप के बाद राजस्थान के अलवर जिले के बड़ौदा मेव थाना इलाके में एक 14 वर्षीय किशोरी के साथ गैंगरेप कर उसकी तस्वीरें वायरल करने का मामला सामने आया है। मामला करीब 11 दिन पुराना 17 जुलाई का बताया जा रहा है। मामले का खुलासा तब हुआ, जब पीड़िता की कजिन की नज़र वायरल फोटोज पर पड़ी। इस संबंध में पीड़िता की माँ ने चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। पुलिस सक्रियता से मामले की छानबीन में जुट गई है।

अलवर के बड़ौदा मेव थाने में दर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, वारदात 17 जुलाई को घटित हुई थी। यहाँ पड़ोस में ही रहने वाली जैकम की पत्नी रौनक, 14 वर्षीय किशोरी को दोपहर में करीब 12 बजे अपने घर बुलाकर ले गई थी। वहाँ रौनक ने अपने घर में किशोरी को पहले से सीढ़ियों पर बैठे अपने परिचित राहुल (जो कि अलादीन का बेटा है) के हवाले कर दिया। उसके बाद राहुल ने कथित रूप से किशोरी का बलात्कार किया। इस दौरान रौनक का पति जैकम पहले से ही छत पर मौजूद था। उसने इस दौरान मोबाइल से किशोरी की अश्लील फोटो खींच ली और वीडियो भी बना लिया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, “किशोरी से रेप करने के बाद राहुल (अलादीन का बेटा) चला गया। उसके बाद जैकम ने भी किशोरी को उसके अश्लील फ़ोटो दिखाकर उससे रेप किया। इस गैंगरेप की घटना में जैकम की पत्नी रौनक ने भी आरोपितों का पूरा साथ दिया। रेप के बाद जैकम की पत्नी रौनक ने किशोरी को धमकी देते हुए कहा कि घटना के बारे किसी से कुछ मत बताना। अन्यथा उसके अश्लील फोटो वॉट्सएप पर वायरल कर बदनाम कर दिया जाएगा। इससे किशोरी डर गई और चुपी साध ली।”

इस घटना के करीब पाँच दिन बाद पीड़िता को रास्ते में घंटोली उर्फ इमरान खान मिला। इमरान ने भी पीड़िता को ब्लैकमेल करते हुए अकेले में मिलने को कहा। इमरान ने पीड़िता को धमकी दी कि जैकम द्वारा खींचे गए अश्लील फोटो उसके पास हैं। अगर वह नहीं आई तो वह उन्हें सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। इतने के बाद भी जब पीड़िता ने इमरान से मिलने से मना कर दिया तो उसने अश्लील फोटो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।

तेजी से वायरल अश्लील फोटो जब सोशल मीडिया के जरिए पीड़िता के चचेरे भाई के पास पहुँचे तो परिजनों को इस घटना के बारे में पता चला। इस पर उन्होंने पीड़िता से पूछताछ तो उसने पूरी घटना बता दी। इसके बाद पीड़िता की माँ ने शनिवार को थाने पहुँचकर आरोपितों के खिलाफ FIR दर्ज कराया।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बड़ौदा मेव थानाधिकारी दिनेश मीणा ने बताया कि इस मामले में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इनमें राहुल (अलादीन पुत्र) और जैकम के खिलाफ गैंगरेप, जैकम की पत्नी रौनक के खिलाफ सहयोग करने और इमरान के खिलाफ आईटी एक्ट व ब्लैकमेल करने तथा रेप की कोशिश का मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का अभी मेडिकल करवाया जा रहा है। इस मामले की जाँच लक्ष्मणगढ़ डीएसपी ओमप्रकाश मीणा कर रहे हैं।

अभी तक गैंगरेप के इस मामले में किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है। आरोपितों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। पुलिस ने गैंगरेप, सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।

पश्चिम बंगाल: नहर में तैरती मिली BJP कार्यकर्ता की लाश, TMC पर हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में सियासी हिंसा चरम पर है। एक भाजपा कार्यकर्ता की लाश नहर में तैरती मिली। मृतक की पहचान काशीनाथ घोष के तौर पर हुई है। उनका शव हुगली के गोघाट में रविवार (जुलाई 28, 2019) की सुबह नहर से बरामद किया गया। भाजपा ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं पर उनकी हत्या का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घोष टीएमसी कार्यकर्ता लालचंद बाग की हत्या में आरोपी थे। लालचंद की 22 जुलाई को पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस 6 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

हालॉंकि लालचंद की हत्या में अपने कार्यकर्ताओं की संलिप्तता से बीजेपी इनकार करती रही है। उसका कहना है कि लालचंद की हत्या टीएमसी की भीतरी लड़ाई के चलते हुई।

गौरतलब है कि बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा की अब तक कई भाजपा कार्यकर्ता भेंट चढ़ चुके हैं। बीते दिनों बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के घर पर भी हमला किया गया था। यहॉं तक कि राज्य के निवर्तमान राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने शनिवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तुष्टिकरण की नीति के कारण राज्य का माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया था।

अब मांझी बहके, कहा- जब मॉं-बेटे का चुम्मा सेक्स नहीं तो आजम खान गलत कैसे?

लोकसभा में भाजपा सांसद रमा देवी पर सपा सांसद आजम खान की टिप्पणी पर जारी विवाद के बीच बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने शर्मनाक बयान दिया है। आजम का बचाव करते हुए मांझी ने कहा है कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला जा रहा है।

हिन्दुस्तानी अवामी मोर्चा (हम) के अध्यक्ष मांझी ने कहा, “जब भाई-बहन मिलते हैं और एक-दूसरे को चुम्मा लेते हैं तो क्या वह सेक्स कहलाता है? मां अपने बेटे को चुम्मा लेती है, बेटा मां को चुम्मा लेता है, क्या वह सेक्स होता है? आजम खान ने भी उसी लहजे में अपनी बात कही थी। लेकिन, उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया। इसीलिए वह इस्तीफा ना दें, माफी मॉंग लें।”

गौरतलब है कि लोकसभा में गुरुवार को तीन तलाक बिल पर चर्चा के दौरान आजम ने अशोभनीय टिप्पणी की थी। उस समय रमा देवी सदन की अध्यक्षता कर रही थीं। आजम की टिप्पणी को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया था।

लेकिन इस बयान के लिए आजम खान की चौतरफा निंदा हो रही है। शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला ने विपक्ष के नेताओं के साथ बैठक की थी। बैठक में तय किया गया कि अपनी टिप्पणी के लिए आजम खान सदन में माफी माँगे। यदि वे ऐसा नहीं करते तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

पाकिस्तान समेत अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश से आए हिन्दुओं व 6 अल्पसंख्यक समूहों को हर सुविधा देगी सरकार

केंद्र सरकार पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान और बांग्लादेश से आए हिन्दू समेत छ: अल्पसंख्यक समूहों के लोगों को भारतीय नागरिकों के समान ज़रूरी सुविधाएँ व सरकारी रियायतें देगी। सरकार अब इन हिन्दुओं व 6 अल्पसंख्यक समूहों को सुविधा देने की समय-सीमा की बाध्यता समाप्त कर देगी। केंद्र ने सैद्धांतिक रूप से यह तय किया है कि पड़ोसी देशों से आए इन धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए समय-सीमा और दस्तावेज़ रोड़ा नहीं बनेंगे।

ग़ौरतलब है कि इससे पहले, 31 दिसंबर 2014 तक या उससे पहले आए लोगों को बिना वैध दस्तावेज़ के भारत में रहने संबंधी आदेश जारी किए गए थे। ख़बर के अनुसार, एक अधिकारी ने बताया कि शीर्ष स्तर पर तय किया गया है कि पड़ोसी देशों से उत्पीड़न के चलते भारत आने को मजबूर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए सीमा का प्रतिबंध नहीं होगा। इस संबंध में राज्यों को जल्द ही दिशा-निर्देश दिए जाएँगे।

दरअसल, नागरिकता संशोधन विधेयक अभी आगे नहीं बढ़ पाया है। फ़िलहाल, इस पर सहमति बनाने की कोशिशें चल रही हैं। इस संशोधन विधेयक, 2019 का मुख्य मक़सद बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के 6 अल्पसंख्यक समुदायों को भारतीय नागरिकता प्रदान करना है।

नया विधेयक नागरिकता कानून-1955 में संशोधन के लिए तैयार किया गया है। इस विधेयक के क़ानून बनने के बाद अफ़गानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई धर्म को मानने वाले अल्पसंख्यक समुदाय को 12 साल के बजाय छह साल भारत में गुजारने पर और बिना उचित दस्तावेज़ों के भी भारतीय नागरिकता प्रदान की जाएगी और जब तक उन्हें नागरिकता नहीं मिलेगी, उन्हें दीर्घावधि वीजा व कार्यकारी आदेशों के आधार पर सुविधाएँ मिलती रहेंगी।

बता दें कि भाजपा ने 2014 के चुनावों में इसका वादा किया था। वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री मोदी ने इस विधेयक पर अपनी प्रतिबद्धता फिर दोहराई थी। ऐसी संभावना है कि संबंधित अल्पसंख्यक समूहों से लगभग 30,000 लोग हैं, जो भारत में लंबी अवधि के वीज़ा पर रह रहे हैं, उन्हें इसका लाभ मिलेगा।

घाटी में बड़े हमले की फिराक में आतंकी, इसलिए भेजे 10,000 अतिरिक्त जवान

पाकिस्तानी जमीन पर फल-फूल रहे आतंकी संगठन कश्मीर में बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने की फिराक में हैं। यही कारण है कि केन्द्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में 10,000 हजार अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है। न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है।

सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को जवानों पर बड़े हमले की साजिश रचे जाने का इनपुट मिला है। इसे देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोवाल ने पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में आतंकरोधी ग्रिड के अधिकारियों के साथ बैठक कर घाटी में सुरक्षा-व्यवस्था का जायजा लिया। इसी इनपुट के आधार पर सरकार ने एहतियातन अतिरिक्त जवानों को तैनात करने का फैसला किया है और खुद डोवाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

जम्मू-कश्मीर के दो दिन के दौरे से डोवाल के लौटने के बाद केन्द्र सरकार ने घाटी में अर्ध सैनिक बलों की 100 और कंपनियॉं तैनात करने का फैसला किया था। गृह मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि अतिरिक्त जवानों की तैनाती आतंकरोधी अभियानों को मजबूती देने और राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ करने के लिए की गई है। सीआरपीएफ़ की 50, सीमा सुरक्षा बल की 30 और बीएसएफ तथा आईटीबीपी की 10-10 कंपनियॉं तैनात होंगी।

जम्मू-कश्मीर में अभी राज्यपाल शासन है। इससे पहले केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियों को 24 फरवरी को कश्मीर भेजा गया था। उस समय लोकसभा चुनाव के दौरान सुरक्षा-व्यवस्था का हवाला देते हुए तैनाती की गई थी। अमरनाथ यात्रा के लिए भी राज्य में करीब 40 हजार अतिरिक्त जवान तैनात किए गए हैं।

अतिरिक्त जवानों की तैनाती के फैसले ने कश्मीरी नेताओं और अलगाववादियों को बेचैन कर रखा है। इनका आरोप है कि जवानों की भारी तैनाती से केन्द्र घाटी में डर का माहौल पैदा कर रहा है। जवानों की अतिरिक्त तैनाती के साथ अनुच्छेद 35ए को खत्म किए जाने की अटकलों ने भी जोर पकड़ लिया है।