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बलिदानी सैनिकों को नमन कर CM पद की शपथ लेंगे येदियुरप्‍पा

कर्नाटक में बीजेपी अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। बीएस येदियुरप्पा आज (जुलाई 26, 2019) शाम 6 बजे राज्य में चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। राज्य में 3 दिन पहले ही कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार गिरी है। नई सरकार के गठन के बाद तकरीबन 1 महीने से चला आ रहा सियासी संकट शांत होने की उम्मीद है। हालाँकि, बीजेपी को 31 जुलाई तक विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना होगा।

गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष के आर रमेश कुमार ने तीन बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराया। अयोग्य घोषित होने वालों में कॉन्ग्रेस के दो बागी विधायक रमेश जरकिहोली और महेश कुमथल्ली हैं, जबकि एक निर्दलीय विधायक आर शंकर शामिल हैं। कुमार ने फैसला सुनाते हुए कहा कि तीनों विधायकों के इस्तीफे ‘‘स्वैच्छिक एवं स्वाभाविक नहीं हैं”। इसलिए उन्हें 2023 में मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने तक तत्काल प्रभाव से दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य करार दिया जाता है। यानी कि 2023 तक विधायक विधानसभा का उपचुनाव भी नहीं लड़ पाएँगे।

फिलहाल स्पीकर ने 14 अन्य विधायकों के इस्तीफे पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा है कि अगले कुछ दिनों में वो इनके इस्तीफे पर फैसला लेंगे। गौरतलब है कि, 18 विधायकों के बागी रुख के बाद 23 जुलाई को कर्नाटक की कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार अल्पमत में आ गई थी। विधानसभा में एचडी कुमारस्वामी की सरकार बहुमत साबित नहीं कर पाई थी। संसद में कुमारस्वामी के पक्ष में 99 वोट पड़े थे, जबकि विपक्ष में 105 वोट पड़े थे। जिसके बाद कुमारस्वामी को मंगलवार (जुलाई 23, 2019) को सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था।   

रिक्शा खरीदने के लिए सास-ससुर ने नहीं दिए ₹40,000, बीवी को दिया तीन तलाक

गुजरात के सूरत में दहेज़ में 40,000 रुपए नहीं मिलने पर एक व्यक्ति ने अपनी बीवी को तीन तलाक़ दे दिया। पीड़ित मुस्लिम महिला के मुताबिक उसका पति रिक्शा खरीदने के लिए उसके मॉं-बाप से 40 हजार रुपए मॉंग रहा था। मॉं-बाप पैसे नहीं दे पाए तो पति ने उसे तीन तलाक दे दिया।

रिपोर्टों के मुताबिक पीड़िता को तलाक़ उस दिन दिया गया जिस दिन उसकी माँ को गुजरे 40 दिन पूरे हुए। महिला ने बताया कि परिवार के सामने ही पति ने उसे तीन तलाक दिया।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पीएल चौधरी ने बताया कि पीड़िता ने चौक बाजार थाने में शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने बताया, “महिला के मुताबिक ससुराल वाले उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। पति ने रिक्शा खरीदने के लिए 40 हजार रुपए दहेज में लाने को कहा था। पैसा नहीं मिलने पर पति ने जान से मारने की धमकी दी और तीन तलाक देकर उसे घर से निकाल दिया।”

तीन तलाक का यह मामला इस पर रोक से जुड़ा बिल लोकसभा में पास होने के अगले ही दिन सामने आया है। विपक्ष के विरोध के बावजूद गुरुवार (25 जुलाई) को लोकसभा में तीन तलाक़ बिल पास हुआ था। बिल के पक्ष में 303, जबकि विरोध में 82 वोट पड़े थे।

49 के लिबरल नाच पर 61 सेलेब्स का पलटवार: हिन्दुओं के पलायन पर चुप, अब कर रहे नौटंकी

मॉब लिंचिंग के बहाने प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले कथित 49 बुद्धिजीवियों को 61 सेलेब्स ने खुला खत लिखकर खरी-खरी सुनाई है। इनलोगों ने पीएम को लिखे पत्र को ‘लिबरल्स’ की नौटंकी बताते हुए ‘सेलेक्टिव गुस्सा’ और गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश बताया है।

साथ ही हिन्दुओं के पलायन, जेएनयू में राष्ट्रविरोधी नारेबाजी जैसी घटनाओं पर इनकी चुप्पी को लेकर सवाल उठाया है। जवाबी पत्र लिखने वाली हस्तियों में अभिनेत्री कंगना रनौत, गीतकार प्रसून जोशी, क्लासिकल डांसर सोनल मानसिंह, फिल्मकार मधुर भंडारकर जैसे नामचीन लोग शामिल हैं।

जवाबी पत्र में 61 हस्तियों ने कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री को खत लिखने वाले 49 लोगों से पूछा है कि वे तब क्यों चुप रहते हैं जब जय श्रीराम कहने पर लोगों को जेल में डाल दिया जाता है? जब जय श्रीराम बोलने के लिए मजबूर करने की झूठी शिकायत दर्ज करवाई जाती है? जब कैराना से हिंदू पलायन करते हैं? जब कश्मीरी पंडित घाटी से निकाल फेंके जाते हैं? जब मंदिरों को तोड़ा जाता है, जब पशु तस्कर किसानों और जवानों को मार देते हैं?

खुले पत्र में कथित 49 बुद्धिजीवियों को देश का ‘स्वयंभू गार्जियन’ बताते हुए उनकी मंशा पर सवाल उठाया गया है। कहा गया है कि पीएम को पत्र लिखने वाले नक्सली हमलों में आदिवासियों और गरीबों के मारे जाने पर चुप थे। टुकड़े-टुकड़े गैंग पर भी इनकी जुबान नहीं खुली थी।

पीएम को लिखे पत्र पर बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना ने कहा, “कुछ लोग अपनी हैसियत के इस्तेमाल भ्रम फ़ैलाने के लिए कर रहे हैं। लोगों को बरगलाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस सरकार में ऐसी घटनाएं हो रही है। जबकि पहली बार चीजें सही दिशा में जा रही है। हम एक बड़े बदलाव का हिस्सा बन रहे हैं। देश की बेहतरी के लिए चीजें बदलने से कुछ लोग झुंझलाहट में हैं। आम लोगों ने अपने नेताओं को चुना है। जो लोगों की इच्छा की अवहेलना करते हैं उनके मन में लोकतंत्र के लिए कोई सम्मान नहीं होता है। “

दो दिन पहले ही कुछ अभिनेता-अभिनेत्रियों-फिल्मकार- सामाजिक कार्यकर्ता- इतिहासकार समेत विभिन्न क्षेत्रों के 49 हस्तियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखा था। इस पत्र में दलित व अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री से हस्तक्षेप की माँग की गई थी। साथ ही कहा था, “अफसोस की बात है कि जय श्रीराम का इस्तेमाल आज उकसाने के लिए किया जा रहा है। यह युद्धोन्मादी और भड़काऊ नारा है। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को राम के नाम पर डराया जा रहा है।”

‘जो ना बोले जय श्री राम, भेज दो उसको कब्रिस्तान’ के गायक वरुण बहार को पुलिस ने किया गिरफ्तार

‘जो ना बोले जय श्री राम, भेज दो उसको कब्रिस्तान’ गाने को लेकर मचे बवाल के बीच इसके गायक वरुण बहार को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने वरुण को शुक्रवार (जुलाई 26, 2019) को उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले से गिरफ्तार किया है। इस गाने के जरिए वरुण का कहना था कि जो इंसान जय श्री राम का नाम नहीं ले सकता, उसे कब्रिस्तान भेज देना चाहिए। पुलिस ने बताया कि वरुण बहार को सोशल मीडिया पर अश्लील और भड़काऊ गाने अपलोड करने के आरोप में मनकापुर के बंदराह गाँव से 3 बजे गिरफ्तार किया गया।

खबर के मुताबिक, वरुण के खिलाफ कई और उत्तेजक और उकसाने वाले गानों के लिए एफआईआर दर्ज की गईं हैं। वहीं, जय श्री राम वाले इस विवादित गाने से सोशल मीडिया पर तूफान लाने वाले सिंगर वरुण बहार का कहना है कि राम उनके खून में हैं। वह मरते दम तक जय श्रीराम बोलते रहेंगे। उन्हें अंदाजा नहीं था कि गाने के इस कदर वायरल होने से मामला तूल पकड़ लेगा और उन्हें देश-विदेश से धमकियाँ मिलने लगेंगी। इस कारण उन्हें वीडियो में दर्ज अपने दोनों मोबाइल नंबर पिछले तीन दिनों से बंद करने पड़े।

गौरतलब है कि, वरुण बहार के गाने को ट्विटर यूजर प्रशांत कनौजिया ने ट्वीट करते हुए सिंगर को डिजिटल टेररिस्ट बताया था। सीएम योगी पर आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले प्रशांत कनौजिया ने ट्वीट में लिखा था, “भारत एकमात्र देश है जहाँ आतंकवादी अपना म्यूजिक वीडियो बनाते हैं और यूट्यूब पर चलाते हैं। इस मामले में तालिबान और आईएसआईएस भी इस तकनीक तक नहीं पहुँच पाए हैं। डिजिटल इंडिया के साथ डिजिटल आतंकवाद…”। वीडियो के वायरल होने के बाद कुछ लोगों ने इस पर आपत्ति व्यक्त की थी, तो वहीं कुछ लोगों को इस गाने में कोई बुराई नज़र नहीं आई थी।

DD से निकाले जाने के बाद बीफ प्रोमोशन पर घिरी इरा त्रिवेदी, बोली- माफ़ करो, दिल से हूँ हिन्दू

बीफ (गोमांस) का प्रचार करने के कारण सोशल मीडिया पर लगातार हो रहे विरोध के बाद इरा त्रिवेदी को दूरदर्शन ने योग वाले शो से हटा दिया है। इरा रोजाना सुबह दूरदर्शन पर ‘योगा विद इरा त्रिवेदी’ कार्यक्रम पेश करती थीं। अब उनकी जगह यामिनी मुथाना को इस शो की जिम्मेदारी दी गई है। इस घटना के बाद इरा त्रिवेदी ट्विटर पर स्पष्टीकरण देते हुए देखी जा रही हैं।

दूरदर्शन पर ‘योगा विद इरा त्रिवेदी’ के नाम से शो चलाने वाली इरा त्रिवेदी ने गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को ट्विटर पर लिखा कि वो शुद्ध शाकाहारी हैं और हिंदू धर्म का सम्मान करती हैं। उन्होंने कहा कि वो सभी धर्मों और ग्रंथों का सम्मान करती हैं, लेकिन हिंदू धर्म उनके दिल में है।

इरा ने आगे लिखा कि वो योग का अभ्यास करने वाले सभी लोगों के लिए शाकाहारी भोजन करने को कहती हैं और इसे बढ़ावा देती हैं। इरा का कहना है कि जो लोग उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करते हैं वो देख सकते हैं कि वो (इरा) शाकाहारी भोजन की कितनी वकालत करती हैं।

दरअसल, 19 जुलाई को दूरदर्शन ने एक ट्वीट किया था जिसमें लिखा था- “स्वस्थ और फिट रहने के लिए सुबह 6.30 बजे देखना नहीं भूलें, हमारी प्रस्तुति कार्यक्रम “योगा विद इरा त्रिवेदी” सिर्फ @DDNational पर।”

इस ट्वीट के बाद इरा का एक पुराना ट्वीट वायरल होने लगा, जिसमें उन्होंने हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के धर्मग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताया था। दरअसल, यह सब तब शुरू हुआ जब सीएनएन न्यूज 18 के साथ उनका 2017 का इंटरव्यू सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वायरल वीडियो में, वह गोमांस (बीफ) को प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत बताती हैं। इंटरव्यू में इरा त्रिवेदी बीफ पर प्रतिबंध की बात कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके अनुसार गोमांस कुपोषित लोगों के लिए प्रोटीन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसलिए गोमांस पर प्रतिबंध लगाना अनुचित होगा, विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय के लिए।

बता दें कि, इरा कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीसी शुक्ला की पोती हैं।

वीसी शुक्ला इंदिरा गाँधी सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री थे। वे पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी और उनके बेटे संजय गाँधी के करीबी सहयोगी थे। अपने कार्यकाल के दौरान, वह प्रेस को मोहरा बनाने के लिए कुख्यात थे। वह ऐसे कॉन्ग्रेस नेता थे, जिन्होंने आकाशवाणी और दूरदर्शन पर किशोर कुमार के गानों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

इरा त्रिवेदी के इंटरव्यू पर प्रतिक्रिया देते हुए कई लोगों ने कहा कि वो तथ्यात्मक रूप से गलत बयान दे रही थी और साथ ही उन लोगों ने ये भी साबित करके दिखाया कि बीफ प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत क्यों नहीं है।

वीडियो वायरल होने के बाद, इरा के पिछले ट्वीट्स के कई स्क्रीनशॉट भी काफी तेजी से शेयर होने लगा। जिसमें इरा हिन्दू धर्म की तुलना इस्लाम से करते हुए आधुनिक हिन्दू धर्म को पिछड़ा और इस्लाम के मजहबी ग्रंथ कुरान को प्रोग्रेसिव बताती हैं। वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट का जवाब देते हुए इरा ने कहा कि उनकी बातों को अलग तरीके से देखा जा रहा है। हालाँकि, ट्विटर यूजर इरा के जवाब और माफी से संतुष्ट नहीं हैं।

इरा के हिन्दू-विरोधी बयानों को लेकर कई लोग काफी हैरत में पड़ गए। कुछ ने इरा को ‘हिंदूफोबिक’ कहा, तो कुछ ने दूरदर्शन से उनके एक कार्यक्रम के लिए होस्ट के रूप में चुनने को लेकर भी सवाल किया है।

प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने इस मुद्दे पर ध्यान दिया और इसे दूरदर्शन के महानिदेशक को भेज दिया।

डीडी के ही पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने भी इरा के होस्ट के रुप में चुनने को लेकर दूरदर्शन पर सवाल उठाया। इरा त्रिवेदी ने ट्वीट कर अशोक श्रीवास्तव से माफी माँगी है।

गौरतलब है कि, पिछले साल अक्टूबर में, मीटू अभियान के तहत इरा त्रिवेदी ने जाने-माने लेखक चेतन भगत पर जबरदस्ती चूमने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। जिसके बाद उन्होंने सारे ईमेल सार्वजनिक कर दिए। इसमें इरा ने ‘मिस यू किस यू’ के मैसेज के साथ साइन ऑफ किया था।

1984 से चल रही थी कारगिल की तैयारी, हवा में मुशर्रफ़ को बर्खास्त कर कुर्सी गँवा बैठे नवाज़ शरीफ़

किसी राजनीति के मशहूर पंडित (शायद मैक्यावेली/Machiavelli) ने कहा था कि राजनीति में दुश्मन का हाल चाल दोस्तों से ज्यादा पता रखना चाहिए। कारगिल को आज 20 साल हो गए हैं। पाकिस्तान इन बीस सालों में लोकतंत्र, राजनीति, अर्थव्यवस्था यानि एक राष्ट्र की सफ़लता के हर लिहाज से जहाँ इन दो दशकों में बद से बदतर हुआ है, वहीं तमाम उतार-चढ़ावों के बावजूद हिंदुस्तान की सफलता पाकिस्तान की तुलना में अचम्भित कर देने वाली रही है। और इसका एक बड़ा श्रेय हिंदुस्तान के स्थिर लोकतंत्र और पाकिस्तान के उलट हिंदुस्तानी सेना में एक संस्था के तौर पर सत्ता-लोलुपता के अभाव की बड़ी भूमिका है। आज यह ज़रूरी है कि हम सीमा के उस पार पाकिस्तान की राजनीति पर नज़र डालें, और देखें कि कारगिल के हालात राजनीतिक रूप से कैसे पैदा किए गए, और उसके बाद क्या हुआ, ताकि भविष्य में भी कभी हम वही गलतियाँ दोहराने की गलती न करें।

1984 से नज़र

1984 में दुर्गम और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण सियाचिन दर्रे पर हिंदुस्तानी सेना के कब्ज़े के बाद से पाकिस्तानी सेना की नज़र इसका ‘बदला’ लेने पर थी। इसके लिए पाकिस्तान के चार जनरलों ने एक ‘प्लान’ तैयार किया। जानकारों की मानें तो यह प्लान कारगिल क्षेत्र में पाकिस्तानी घुसपैठ का ही था। किन्हीं कारणवश न केवल नागरिक प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो, बल्कि उनके पहले सैन्य तानाशाह जनरल ज़िया उल हक ने भी इस प्लान पर अमल करने की बजाय इसे ठंडे बस्ते में ही रखा।

इसके बाद प्रधानमंत्री बने नवाज़ शरीफ़, और सेना के सिरमौर हुए जनरल परवेज़ मुशर्रफ़। ‘शांतिप्रिय’ नवाज़ शरीफ़ की हिंदुस्तानी ‘वज़ीरे-आज़म’ वाजपेयी से बढ़ती पींगों से पाकिस्तानी सेना परेशान थी दो कारणों से- पहले तो इसलिए कि पाकिस्तान में हिंदुस्तान के उलट सेना का देश के हर स्तर पर दखल है (उस समय भी था)। मलाईदार ठेकों, जो सेवारत होते हुए भी सेना और आईएसआई के जनरल खुल्लमखुल्ला लूटते हैं, के चलते सेना में भर्ती होना पाकिस्तान में तरक्की की सबसे शर्तिया और आसान सीढ़ी थी। (कॉन्ग्रेस में होने के बावजूद अक्सर पाकिस्तान को आईना दिखाने में सफल रहने वाले पूर्व संयुक्त राष्ट्र राजनयिक शशि थरूर की मशहूर कहावत है कि हिंदुस्तान में देश के पास सेना है, पाकिस्तान में सेना के लिए एक देश है।) ऐसे में अगर हिंदुस्तान के साथ शांति कायम हो जाती तो देश के संसाधनों की खुली लूट के ज़रिए सेना को दुलारने-पुचकारने की इतनी ज़रूरत न रहती। इसके अलावा दूसरा कारण यह था कि जिहादी और हिंदुस्तान-विरोधी मानसिकता को पाकिस्तान ने न केवल आतंकी संगठनों के ज़रिए पाला है, बल्कि अपने अंदर भी, अपने सैनिकों में जिहादियों की भर्ती के रूप में भी पनाह दी है।

ऐसे में एक ओर वाजपेयी के साथ नवाज़ शरीफ़ 1998 में वार्ता शुरू कर रहे थे, हिन्दुस्तान-पाकिस्तान शिखर सम्मेलन ज़ोर-शोर से करने की तैयारी कर रहे थे, और दूसरी ओर उनके सैनिक उनकी ही बेखबरी में कारगिल के शिखर पर चढ़े जा रहे थे, ‘ऑपरेशन कोह-ए-पाइमा’ (“पर्वतारोही”) के तहत। जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ द्वारा सक्रिय किए गए इस प्लान की रूपरेखा 1984 वाले प्लान पर ही आधारित थी, और मकसद था हिन्दुस्तान से सियाचिन का बदला लेने के अलावा कश्मीर में सुस्त पड़ती दहशतगर्दी को सक्रिय करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के कश्मीर प्रोपेगंडा के लिए जमीन तैयार करना।

अपने ही जनरलों द्वारा ब्रीफिंग के नाम पर ‘चक्रम’ बने शरीफ़ प्रशासन को इस योजना और जंग की भनक, नसीम ज़ेहरा की किताब ‘फ्रॉम कारगिल टू कू (तख्तापलट)’ के मुताबिक, 17 मई, 1999 के आसपास लगी, जब जंग ने ज़ोर पकड़ लिया था, और ऐसे में पीछे हटना नाक कटवाना होता। तब तक 3 मई को हिंदुस्तानी गड़ेरियों ने बर्फ़ पिघलना शुरू होने के बाद पाकिस्तानी कब्ज़ा देख कर हिंदुस्तानी सेना को इत्तला कर दिया था, 5 मई को पाकिस्तानियों ने हमारी सेना के गश्ती दल के सैनिकों को टॉर्चर कर के मार डाला था, और जब तक हिंदुस्तान की गोलियों को सुनने के लिए नवाज़ शरीफ़ जनरलों के हाथ अपने कान से हटाते, जंग पूरे शबाब में थी।

बिखरा पाकिस्तान का ‘घर’

मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी परिवार या सामाजिक इकाई का वर्गीकरण इस आधार पर किया जा सकता है कि किसी मुसीबत के आने पर उसके सदस्य और करीब आ जाते हैं, एक-दूसरे से सामान्य समय से बेहतर तालमेल बिठा लेते हैं, या आपस में ही लड़कर मुसीबत को और नासूर बना देते हैं। हिंदुस्तान और काफिरों से नफ़रत की बुनियाद पर बना पाकिस्तान अगर कभी भी एक परिवार के तौर पर रहा होगा, तो वह परिवार कारगिल के समय एक-दूसरे से ही जूझता अधिक नज़र आया।

पहले तो, जैसे कि ऊपर बताया गया है, न केवल सेना ने अपने प्रधानमंत्री को ही अँधेरे में रख कर ऑपरेशन शुरू किया और एक शत्रु देश (हिंदुस्तान) पर उस समय धावा बोला जिस समय उनके प्रधानमंत्री उसी देश से मित्रता करने की कोशिश कर रहे थे,बल्कि उन्हें इसके बारे में झूठी ब्रीफिंग भी दी।

अपनी तमाम चालबाज़ियों के बाद भी पाकिस्तान का सैन्य प्रशासन अंततः सैन्य था, और इसलिए राजनीतिक गणित में वह गलतियों पर ऐसी गलतियाँ करता गया, जो शायद दिन-रात राजनीति को ओढ़ने-बिछाने वाले नागरिक राजनेता और राजनयिक उसे करने से रोक लेते। उनकी सेना को लगा कि मुश्किल से एक साल पहले प्रकाश में आए मोनिका लेविंस्की सेक्स स्कैंडल में फँसे और हिंदुस्तान के पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट से भड़के अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन प्रशासन की पाकिस्तान के साथ बहुत ज़्यादा सहानुभूति होगी; उसे यह भी लगा कि कश्मीर में उसके फैलाए दहशत और जिहाद से लड़ते-लड़ते हिंदुस्तानी सैनिक थक गए होंगे। उसने यहाँ तक कि गर्मियों में घुसपैठ का पता चलने के बाद हिंदुस्तान को पलटवार में कितना समय लगेगा, इसका गणित करने में भी चूक कर दी।

नतीजन न केवल हिंदुस्तान के ‘अप्रत्याशित’ रूप से द्रुत प्रत्युत्तर के चलते पाकिस्तानी सेना ने मुँह की खाई, बल्कि अमेरिका ने भी इस मामले में हिंदुस्तान के स्टैंड का स्पष्ट समर्थन किया। दुनिया के अधिकाँश देशों का दबाव भी पाकिस्तान के गले पर ही पड़ा। अंत में खीझ कर सरकार को सेना को वापिस बुलाना पड़ा।

अंदर की शतरंज में अपनी ही शह पर मात

हार के बाद प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ ने जो फैसले लिए, अंत में वह उनके प्रधानमंत्रित्व के ताबूत की कील साबित हुए। उन्होंने एक ओर जनरल मुशर्रफ़ को कारगिल के लिए पूरी तरह ज़िम्मेदार ठहराया और खुद के अनजान-मासूम होने का दावा किया, और दूसरी ओर मुशर्रफ़ को पद पर भी बने रहने दिया। परवेज़ मुशर्रफ़, अपनी ही किताब ‘इन द लाइन ऑफ़ फायर’ में इकबालनामे के मुताबिक, कारगिल के समय ही नवाज़ शरीफ़ की कथित कमज़ोरी और नाकाबिलियत को भाँप गए थे, और बाद में उनसे और सेना से सीधा टकराव मोल लेकर शरीफ़ ने उन्हें तख्तापलट के लिए बहाना भी थमा दिया।

जंग के बाद पाकिस्तानी सैनिक मायूस थे और अफ़सर, जो असैन्य/नागरिक सरकार को अपने से ‘नीचे’ देखने की संस्कृति में पगे हुए थे, प्रधानमंत्री की ‘जुर्रत’ से भड़के हुए थे। मुशर्रफ़ ने मौके का फायदा उठाया और तख्तापलट के आखिरी अध्याय के लिए ज़मीन तैयार करनी शुरू कर दी, जिसे पता नहीं नवाज़ शरीफ देख के अनजान बने रहे, या देख ही नहीं पाए। मुशर्रफ़ ने उस तरह से विभिन्न सैन्य अड्डों का दौरा शुरू किया, जैसे लोकतंत्र में चुनावी रैलियाँ होतीं हैं। बहाना लिया सैनिकों का ‘मनोबल बढ़ाने’ का। वह सैनिकों को साफ़ सिग्नल भेज रहे थे कि वह (मुशर्रफ़) न केवल उनके ‘अपने आदमी’ हैं, बल्कि हार के बाद उनके साथ भी खड़े हैं; वहीं ‘बाहरी’/’ब्लडी सिविलयन’ नवाज़ शरीफ़ उनके (सैनिकों के) जान की बाज़ी लगाकर बर्फ़ीली चोटी पर जंग लड़ने के बाद उन्हें अपनी नाक बचाने के लिए बलि का बकरा बना रहे हैं।

इसके बाद अंत में चेते नवाज़ शरीफ ने न केवल मूर्खतापूर्ण, बल्कि कायरतापूर्ण, कदम उठाते हुए परवेज़ मुशर्रफ़ को उस समय बर्खास्त कर दिया जब मुशर्रफ़ श्री लंका के दौरे से लौटते हुए एक हवाई जहाज में थे। शरीफ शायद मुशर्रफ़ का सामना करने से इतना हिचकिचा रहे थे कि उन्होंने जनरल मुशर्रफ़ के जहाज को पाकिस्तान की बजाय किसी भी और देश में उतारे जाने का भी आदेश दे दिया! मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइन्स के नागरिक विमान, जिसमें वह तकरीबन सौ अन्य सहयात्रियों के साथ थे, के कॉकपिट से दो फ़ोन किए यह खबर सुनने के बाद। एक अपने जनरल स्टाफ़ के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल मुहम्मद अज़ीज़ खान को, और दूसरा रावलपिंडी सैन्य टुकड़ी के लेफ्टिनेंट जनरल महमूद अहमद को। जब तक मुशर्रफ़ का जहाज कराची में उतरा, सेना ने शरीफ़ को बंदी बना लिया था, और पाकिस्तान के जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ सरताज बन चुके थे

न होगी सड़क पर हनुमान जी की आरती और न पढ़ी जाएगी नमाज: अलीगढ़ जिला प्रशासन

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में जिला प्रशासन ने सड़कों पर सभी प्रकार की धार्मिक गतिविधियों जैसे नमाज पढ़ना, हनुमान चालीसा पढ़ना, आरती करने पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिला प्रशासन का यह फैसला उस समय आया है जब कुछ दक्षिण पंथी समूह द्वारा सड़कों पर मुस्लिमों के नमाज पढ़े जाने के विरोध में आरती और हनुमान चालीसा पाठ का कार्यक्रम आयोजित किया जाने लगा।

जिला मजिस्ट्रेट सीबी सिंह के मुताबिक पूर्व सूचना दिए बिना सड़को पर किसी प्रकार की धार्मिक गतिविधि करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनका कहना है कि उन्होंने इन गतिविधियों से जुड़े लोगों से बात की है और उन्हें मामले की गंभीरता के बारे में बताया। उनके मुताबिक इस तरह की गतिविधियों से इलाके में कानून व्यव्स्था प्रभावित हो सकती है। जिला मजिस्ट्रेट का कहना है कि ये प्रतिबंध ईद के मौके पर पढ़े जाने वाले नमाज को लेकर भी है।

बता दें इस मामले में एक ओर जहाँ भाजपा नेता मानव महाजन ने जिला प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है तो वहीं मौलाना खलीद रशीद फरंगी महाली ने गुहार लगाई है कि मामले का राजनीतिकरण न किया जाए। इस मामले पर भाजपा नेता ने कहा कि अगर एक समुदाय के लोग सड़कों को जाम करके नमाज पढ़ सकते हैं तो फिर हिंदू सड़कों पर महाआरती क्यों नहीं कर सकते हैं? मानव महाजन का कहना है कि वो शुक्रगुजार है उन लोगों का जिन्होंने सड़कों पर पढ़ी जा रही नमाज के बदले इस परंपरा की शुरुआत की।

वहीं, मीडिया खबरों के मुताबिक मौलाना खालीद रशीद का कहना है कि ऐसी खबर आ रही है कि सड़को पर नमाज पढ़े जाने के विरोध में लोग सड़को पर हनुमान चालीसा पढ़ेंगे, लेकिन लोगों को ये समझना चाहिए कि जब मस्जिदों में जगह खत्म हो जाती है, सिर्फ़ तभी लोगों को (मुस्लिम) जबरदस्ती सड़क पर नमाज पढनी पड़ती है। अगर किसी दूसरे धर्म में भी इबादत के दौरान जगह भर जाती है तो लोग बाहर खड़े होकर ही प्रार्थना करते हैं।

गौरतलब है इस महीने के हर मंगलवार और शनिवार बजरंग दल जैसे हिंदू संगठनों ने मंदिर के बाहर हनुमान आरती का आयोजन करवाया, जिसमें कई लोग शामिल हुए। पिछले शनिवार तो इस आयोजन में अलीगढ़ की पूर्व मेयर शकुंतला भारती भी शामिल हुईं थी और उन्होंने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया था।

ट्रिपल तलाक़ पर PM मोदी ने निभाया अपना वादा, मौलवियों ने कहा शरीयत में दखलअंदाज़ी

लोकसभा में कड़े विरोध के बावजूद ट्रिपल तलाक़ विधेयक पास हो गया। इस विधेयक के पास होने पर जहाँ एक तरफ़ मुस्लिम महिलाओं में ख़ुशी की लहर है, तो वहीं दूसरी तरफ़ उलेमा और मौलवियों ने इस पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए इसे शरीयत के ख़िलाफ़ बताया। दारुल उलूम समेत कई उलेमाओं ने कड़ा विरोध जताते हुए इस विधेयक को शरीयत में दखलअंदाज़ी करार दिया।

ख़बर के अनुसार, तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ बरेली की निदा ख़ान ने आवाज़ उठाई थी। उन्होंने सभी पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को एकजुट करके तीन तलाक़ के विरोध में मोर्चा खोला था। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए तीन तलाक़ बिल लाकर अपना वादा निभाया है। 

निदा ख़ान ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं ने इसी उम्मीद से उन्हें (बीजेपी) वोट भी दिया था। इस बिल के माध्यम से उलेमा को चेताते हुए उन्होंने कहा कि अब मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार नहीं हो सकेगा। देश में क़ानून सबसे ऊपर है जिसे हर शख़्स को मानना होगा। इसके लिए मुस्लिम समाज की पीड़ित महिलाओं ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद भी दिया है। बता दें कि आला हज़रत खानदान की बहू निदा ख़ान आला हज़रत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष हैं।

इसके अलावा मेरा हक़ फाउंडेशन की अध्यक्ष फरहत नकवी का कहना कि वर्तमान सरकार ने ट्रिपल तलाक़ बिल को लाकर अपनी नीयत साफ़ कर दी है जिससे यह पता चलता है कि वो तीन तलाक़ पर रोक लगाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। लंबे समय से जो मुस्लिम महिलाएँ तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ रही थीं उन्हें अब जाकर न्याय मिला है। उन्होंने यह उम्मीद भी जताई कि जल्द ही यह बिल राज्यसभा से पास होकर क़ानून बन जाएगा और महिलाएँ अपनी ज़िंदगी बिना किसी ख़ौफ़ के जी सकेंगी।

मॉब लिंचिंग: जैकम, अख्तर, साजिद, मकसूदन, सरजीना, सैकुल व रुजदार ने नवीन को बेरहमी से पीटा, मौत

हरियाणा के उदाका गाँव में एक सप्ताह पहले एक पक्ष द्वारा बेरहमी से पीटकर घायल किए गए वकील नवीन यादव की बुधवार (जुलाई 24, 2019) देर रात गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में मौत हो गई। नवीन यादव की मौत से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। नवीन की मौत से बौखलाए गुरुग्राम कोर्ट के वकीलों ने गुरुवार (जुलाई 25, 2019) को राजीव चौक पर प्रदर्शन किया। वकीलों ने हत्यारों को जल्द पकड़ने की माँग की।

बार एसोसिएशन के सदस्यों ने अदालत परिसर में भी धरना प्रदर्शन किया और नवीन यादव के परिवार के लिए 1 करोड़ रुपए सहयोग के रूप में देने, उनके बच्चों को बालिग होने तक फ्री शिक्षा मुहैया करवाने और उनकी पत्नी को सरकारी नौकरी की माँग की। मृतक नवीन के परिजनों की माँग है कि मुकदमे को नूंह जिला अदालत की बजाय गुरुग्राम के फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर 3 महीने में केस का निपटारा कराया जाए। साथ ही जिन गाँव के पंचों की मौजूदगी में नवीन पर जानलेवा हमला हुआ, उन सभी पंचों के खिलाफ मुकदमा चलाने की माँग की है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

प्रदर्शन में सोहना बार एसोसिएशन के साथ नूंह व गुरुग्राम बार एसोसिएशन के सदस्यों के साथ हजारों की संख्या में हिंदू संगठनों से जुड़े लोग शामिल हुए। लोगों ने कड़ी शब्दों में घटना की निंदा करते हुए प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे तक रोड जाम रहने से प्रशासन व पुलिस हरकत में आ गई। जाम खुलवाने के लिए मौके पर गुरुग्राम जिला अदालत के न्यायाधीश आरके सोंधी, एसडीएम नूंह प्रदीप अहलावत, डीएसपी नूंह धर्मबीर ने लोगों को उनकी माँगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया। तब जाकर लोगों ने जाम हटाया।

इस मामले में नवीन के चाचा कुंदन की शिकायत पर तीन महिलाओं समेत 7 नामजद पर केस दर्ज किया था। जिसमें अख्तर, जैकम, साजिद को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं आरोपित सरजीना, मकसूदन, रुकसार, शेकुल अभी फरार है। वहीं, जाँच अधिकारी राजकुमार को लापरवाही बरतने के मामले में निलंबित कर दिया गया।

खबर के मुताबिक, 15 जुलाई, 2019 को ऊदाका गाँव में ममरेज के पुत्र जमशेद और रुस्तम के पुत्र अख्तर के बीच झगड़ा हुआ था। इसकी शिकायत लेकर रोजकामेव थाने जा रहे जमशेद ने रास्ते में एडवोकेट नवीन से लिफ्ट माँगी और फिर नवीन अपने काम से चले गए, वहीं जमशेद थाने में शिकायत देने के लिए रोजकामेव चला गया। इस मामले में अख्तर के परिवार ने नवीन पर आरोप लगाया कि उसने जमशेद के साथ मिलकर उसके खिलाफ शिकायत दर्ज की है, जिसका परिणाम वो भुगतेगा। इसी विवाद को लेकर गाँव में 19 जुलाई को पंचायत हुई, जिसमें जमशेद और अख्तर के बीच समझौता हो गया। इस दौरान नवीन भी पंचायत में मौजूद था। 

पंचायत खत्म होने के बाद जब नवीन अपने घर जा रहा था, तो इसी दौरान अख्तर की पत्नी मकसूदन व बेटी सरजीना ने अपनी छत से नवीन के सिर पर ईंट फेंक कर मारी, जिससे वह घायल हो गया। पहले से ही घात लगाए बैठे नसरूद्दीन के पुत्र जैकम ने नवीन को अपने घर में खींच लिया और वहाँ पर जैकम, अख्तर, साजिद, मकसूदन, सरजीना, सैकुल व रुजदार ने नवीन को बेरहमी से पीटा। जब नवीन को बचाने के लिए उसके चाचा कुंदन व परिवार की महिलाएँ वहाँ पहुँचीं, तो आरोपितों ने उनके साथ भी बेरहमी से मारपीट की। झगड़े की सूचना की सूचना मिलते ही गाँव के अन्य लोग वहाँ पहुँचे तो आरोपित, नवीन व उसके परिजनों को घायल अवस्था में छोड़कर फरार हो गए। ग्रामीणों ने घायलों को गुरुग्राम के एक मेदांता अस्पताल पहुँचाया।

ख़ारिज हुई नीरव मोदी की ज़मानत याचिका, जेल में ही रहना होगा 22 अगस्त तक

भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी को लंदन की कोर्ट से एक बार फिर से झटका लगा है। कोर्ट ने नीरव मोदी की ज़मानत याचिका एक बार फिर ख़ारिज कर दी है और साथ ही 22 अगस्त तक उसकी हिरासत भी बढ़ा दी। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 22 अगस्त की तारीख़ मुकर्रर की है।

ख़बर के अनुसार, ब्रिटेन की हाईकोर्ट ने नीरव के मोदी को फ़टकार भी लगाई और कहा कि याचिकाकर्ता के ख़िलाफ़ कई देशों में मुकदमे दर्ज हैं। ऐसे में इस बात पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि वो बाहर आने के बाद सबूतों को नष्ट नहीं करेगा।

ग़ौरतलब है कि नीरव मोदी पर आरोप है कि उसने पंजाब नेशनल बैंक को क़रीब 13 हज़ार करोड़ रुपए का चूना लगाया था। जब तक इस घोटाले की ख़बर सामने आती, उससे पहले ही वो देश छोड़कर भाग गया। दरअसल, फरवरी 2018 में PNB बैंक का घोटाला सामने आया था। काफ़ी समय बाद यह पता चला था कि वो इतना बड़ा फ्राड करके ब्रिटेन भाग गया है। उसके बाद से नीरव मोदी की करोड़ों की सम्पत्तियाँ ज़ब्त की जा चुकी हैं।

हाल ही में, सिंगापुर हाईकोर्ट ने PNB बैंक घोटाले के आरोपी नीरव मोदी के चार बैंक खातों को ज़ब्त करने का आदेश दिया था। सिंगापुर हाईकोर्ट ने जिन खातों को ज़ब्त करने का आदेश दिया था, उनमें ब्रिटिश वर्जन आइसलैंड के नाम से रजिस्टर कंपनी के हैं, इनमें पूर्वी मोदी और मयंक मेहता के भी नाम शामिल हैं।

इसके अलावा ख़बर यह भी है कि PNB बैंंक को करोड़ों रुपए का चूना लगाकर भागने वाले नीरव मोदी को प्रत्यर्पित कर भारत लाने की कोशिश में केंद्रीय एजेंसियाँ जुटी हुई हैं। ब्रिटेन की पुलिस ने नीरव मोदी को 19 मार्च 2019 को होलबोर्न से गिरफ़्तार किया था। उसके बाद से ही वो पुलिस हिरासत में है।