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आजम खान ने एक-एक इंच जमीन खरीदी है तो दिखाएँ कागज वरना गिरफ्तार हों: अब्दुल सलाम

समाजवादी पार्टी से रामपुर के सांसद आजम खान और पूर्व सीओ आलेहसन पर किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में पुलिस ने बुधवार (जुलाई 17, 2019) को एक साथ 8 मामले दर्ज किए। जानकारी के मुताबिक अभी तक जमीन हड़पने के मामले में इन दोनों पर कुल 13 मामले दर्ज हो चुके हैं।

दरअसल, ये मामला मझरा आलियागंज ग्राम का है। यहाँ गाँव वालों ने अजीमनगर थाने में शिकायत दर्ज करवाते हुए आजम खान पर आरोप लगाया है कि उन्होंने समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान जमीन का बैनामा कराने का उन पर दबाव बनाया और जब गाँव वालों ने ऐसा नहीं किया तो तत्कालीन सीओ आलेहसन ने उन्हें अजीमनगर थाने में बंद कर दिया। इतना ही नहीं गाँव वालों को स्मैक रखने के केस में जेल भेजने की धमकी भी दी गई।

बाद में उनकी जमीनों को जौहर यूनिवर्सिटी में मिला लिया गया और इसकी चार दिवारी करवा दी गई। गाँव वालों ने जब अपनी जमीने वापस माँगने का प्रयास किया तो उन्हें डरा धमका कर भगा दिया गया।

जमीन मिलने की आस न दिखने पर ग्रामीणों ने मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करने की माँग की। अमर उजाला की खबर के मुताबिक पुलिस ने हनीफ, मतलूब, नब्बू, जुम्मा, नासिर, नाजिम, मुस्तकीम, शरीफ की तहरीर के आधार सांसद आजम खान और पूर्व सीओ आलेहसन के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 384, 447, 506 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। और फिलहाल अभी पुलिस अपनी जाँच में जुटी है। पुलिस अधीक्षक अजय पाल शर्मा की मानें तो इस संबंध में पुलिस जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

आजतक के मुताबिक पुलिस अधीक्षक ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया कि रामपुर के थाना अजीम नगर में आजम खान और उनके सहयोगी आलेहसन के खिलाफ जमीन हड़पने के आरोपों में किसानों की तहरीरों के आधार पर अब तक कुल 13 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। जिनमें किसानों के साथ मारपीट और जबरन धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

खबर के अनुसार पुलिस अधीक्षक का कहना है कि आजम खान और आलेहसन ने किसानों की जमीन को अवैध तरीके से लिया और उन पर कई हजार हेक्टेयर जमीन हासिल करने के लिए जाली कागजात पर साइन करने का दबाव डाला। जब किसानों से ऐसा करने से इनकार किया तो जमीन पर जबरन कब्जा कर लिया। फिलहाल पुलिस टीम आरोपों की जाँच कर रही है, जिसके बाद इसमें अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि इस मामले पर जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलाम ने भी किसानों की जमीन कब्जाने के आरोप में सांसद आजम खां और पूर्व सीओ आलेहसन को गिरफ्तार किए जाने की माँग की है। उन्होंने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि आजम खान की ओर से दावा किया जाता है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी की एक-एक इंच जमीन खरीदी है तो इसकी रजिस्ट्री क्यों नहीं दिखा रहे हैं। सलाम का कहना है कि आजम सरकार और जिला प्रशासन को वह रजिस्ट्री के कागजात दिखाएँ और अगर रजिस्ट्री नहीं है तो जमीन पर से कब्जा छोड़ें।

TMC नेता द्वारा राम कथा आयोजन से पार्टी हैरान-परेशान, BJP ने की तारीफ़

पश्चिम बंगाल में सियासी घमासान के बीच ‘जय श्री राम’ का नारा आए दिन सुर्ख़ियों में बना रहता है। ऐसे में अगर यह ख़बर सामने आए कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता राम कथा का आयोजन करा रहे हैं, तो भला किसे अश्चर्य नहीं होगा। ‘जय श्री राम’ के नारे पर लगातार बढ़ता विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी बीच TMC नेता मदन मित्रा ने आगामी 24 जुलाई को राम कथा का आयोजन कराने का निर्णय लिया है।

एक तरफ़ राम कथा के आयोजन की इस ख़बर से ख़ुश बीजेपी ने इस क़दम की तारीफ़ की है, तो वहीं दूसरी तरफ़ मित्रा के इस आयोजन पर तृणमूल हैरान-परेशान है। ख़बर के अनुसार, TMC नेता मदन मित्रा अपने गृहक्षेत्र भोवनीपुर में न केवल पूजा-पाठ करवाएँगे, बल्कि दुर्गा पूजा के दौरान देवी दुर्गा के साथ भगवान श्री राम और देवी सीता की मूर्ति भी स्थापित करवाएँगे। मित्रा का कहना है कि वो यह सब किसी राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक भारतीय नागरिक होने के नाते करवा रहे हैं।

मित्रा के अनुसार, “हमारे संविधान की प्रस्तावना धर्मनिरपेक्षता के बारे में बात करती है। उन्होंने (बीजेपी ने) भगवान राम को एक वस्तु के रूप में घटा दिया है, जिससे वे अपने हिंदुत्व के अजेंडे को बेच सकें।” साथ ही उन्होंने इस बात पर भी दु:ख व्यक्त किया कि उन्हें तब बेहद दु:ख होता है जब कोई पार्टी और उसके कार्यकर्ता राम के नाम पर हमले करते हैं। हालाँकि मित्रा के समर्थकों की मानें तो TMC पार्टी की तरफ़ से इस निर्णय के प्रति कोई अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिलने से वे काफ़ी आहत हैं और इसीलिए अब उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा क्षेत्र भोवनीपुर में अपना आधार मज़बूत करने का मन बना लिया है।

उनके समर्थकों का कहना है कि ऊपरी तौर पर तो मित्रा को पार्टी ने अपना समर्थन दिया है क्योंकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को यहाँ हार का मुँह देखना पड़ा था। मित्रा ने राम कथा के आयोजन पर बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि इस आयोजन का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है क्योंकि राम के नाम पर राजीति केवल बीजेपी ही करती आई है।

कॉन्ग्रेस के पूर्व MLA ने की महिला के घर में घुसकर बदसलूकी, विरोध करने पर बुरे अंजाम की धमकी

हरियाणा के पूर्व कॉन्ग्रेस विधायक फूल सिंह खेड़ी पर बबीता (बदला हुआ नाम) नाम की महिला के घर में घुसकर उससे बदसलूकी करने और धमकी देने का आरोप लगा है। खबरों के मुताबिक ये मामला जींद का है, जहाँ हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी स्थित एक घर में घुसकर पूर्व विधायक ने महिला के साथ बदसलूकी की और विरोध करने पर बुरा अंजाम भुगतने की धमकी भी दी।

जानकारी के अनुसार 13 जुलाई की सुबह बबीता नाम की महिला अपने घर में अकेली थी। तभी गुहला चीका के पूर्व कॉन्ग्रेसी विधायक फूल सिंह खेड़ी उसके घर में घुस आए और उसके साथ बदसलूकी करनी शुरू कर दी। महिला ने जब इसका विरोध किया तो पूर्व विधायक ने उसके साथ गाली-गलौच किया और उसे बुरा अंजाम भुगतने की धमकी दी।

हरियाणा एक्सप्रेस के मुताबिक पूर्व विधायक और पीड़िता के बीच रुपयों की लेन-देन को लेकर पहले से विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि पूर्व विधायक द्वारा पीड़िता को दिया चेक भी एक बार बाउंस हो गया था, जिसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। फिलहाल बदसलूकी के मामले में पूर्व विधायक के बबीता के घर में घुसने की सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। ये फुटेज सबूत के तौर पर पुलिस को भी मुहैया करवाई गई है।

महिला की शिकायत के आधार पर मामले को सिविल लाइन थाना पुलिस ने फूल सिंह खेड़ी के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज कर लिया है। इसके बाद मामले की जाँच की जा रही है।

मंदिर के सामने भाला मारकर गौहत्या: अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद पर मामला दर्ज

उत्तर प्रदेश नोएडा के गौतम बुद्ध नगर जिले के दनकौर थाना क्षेत्र में पुलिस ने बुधवार को (जुलाई 18, 2019) खेत में घुसी गाय की हत्या के मामले में तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। खबरों के मुताबिक अकबर, जाफर, जुल्फिकार और फरियाद पर आरोप है कि इन्होंने मंदिर के सामने एक गाय को भाला मारा, जिसके कारण उस गाय की मौत हो गई।

जनसत्ता में प्रकाशित खबर के मुताबिक दनकौर थाने के प्रभारी निरीक्षक समरेश कुमार सिंह ने बताया है कि ये आरोपित अच्छेजा बुर्ज गाँव के रहने वाले हैं और इन पर ग्रामीण भगवान दास ने मुकदमा दर्ज करवाया है। इसके बाद इन 4 आरोपितों में से 3 की गिरफ्तारी हुई जबकि इनका एक साथी 1 फरार है। पुलिस फरार आरोपित की तलाश में जुटी है।

जानकारी के अनुसार खेत में घुसी गाय को देखकर इन्होंने पहले उसे धारदार हथियार लेकर भगाया और फिर गाँव में एक धार्मिक स्थल के पास उसे घेरकर मारना शुरू कर दिया। घटना में गाय की मौके पर ही मौत हो गई। इस बीच ग्रामीणों को देखकर चारों आरोपित फरार हो गए। लेकिन बाद में पुलिस 3 को गिरफ्तार करने में कामयाब रही।

बता दें कि इस घटना के बाद गाँव में 2 समुदायों के बीच तनाव शुरू हो गया था लेकिन मौक़े पर पहुँच कर पुलिस ने मामले को शांत करवा दिया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी उत्तर प्रदेश के गोंडा में खेत की रखवाली करते समय असगर अली नाम के शख्स पर गाय को भाले से मारने का आरोप लगा था। जिसके बाद पुलिस ने उस पर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था और मामला 2 समुदायों का होने के कारण सुरक्षा के लिहाज से विशेष पुलिस बल की तैनाती भी की थी। बाद में आरोपित को जेल भेज दिया गया था।

तख्ती गैंग, मौलवी क़ुरान पढ़ाने के बहाने जब रेप करता है तो कौन सा मज़हब शर्मिंदा होगा?

उत्तर प्रदेश में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। यह घटना इतने चुपके से सामने आई है कि मेनस्ट्रीम मीडिया को अपने दफ्तर से विवेकाधीन अवकाश लेना पड़ा। आनन-फानन में छुट्टियाँ घोषित कर कर्मचारियों को घर भेज दिया गया।

हर दूसरी घटना में ‘दलित-हिन्दू-जय श्री राम’ के नारे तलाशने वाले कद्दावर जर्नलिस्ट भी कविता करते नजर आने लगे। इस सबके अलावा एक और बड़े गैंग ने अपने-अपने क्षेत्र में नकार दिए जाने के बाद सामाजिक मुद्दों पर अभिव्यक्ति प्रकट करने की जिम्मेदारी अपनाई थी। लेकिन वो भी आज नदारद ही चल रहा है। इन सबके अंतर्ध्यान होने की बड़ी वजह है। बड़ी वजह यह है कि नौ साल की बच्ची का बलात्कार करने वाला एक मौलवी है, जिसे बच्ची के माँ-बाप ने रोजाना घर पर इसलिए बुलाया था, ताकि वो उनकी बच्ची को ‘दीनी तालीम’ यानी, नमाज पढ़ना और उर्दू सिखा सके।

यह बात सही है कि दुष्कर्म/अपराध करने वालों का कोई मजहब नहीं होता है। अपराध सामाजिक घटनाओं, परिवेश और कुछ विक्षिप्त मानसिक प्रवृत्ति की ही परिणीति होती है। लेकिन हमने देखा है कि एक वर्ग है जो इन विषयों पर ‘अच्छी बातें’ तो खूब करना जाता है, लेकिन वह उसे अपनाने से बचता है। इस तख्ती-गैंग और आदर्श लिबरल-गैंग ने हमारे सामने अनेक उदाहरण पेश किए हैं, जिनसे हमें यह प्रमाण मिलते हैं कि अपराध का भी मजहब होता है।

मौलाना मोहम्मद अफजल नाम का यह बलात्कारी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में नमाज पढ़ाने का काम करता है। यदि सोशल मीडिया पर दिन-रात हिन्दुओं के प्रतीकों को अपमानित करने के लिए कमर कस कर बैठे इस आदर्श लिबरल गैंग का ही अनुसरण किया जाए, तो क्या आज हमें नमाज से लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बोर्ड पर कॉन्डोम नहीं लटका देने चाहिए?

हर दूसरी घटना में भगवा और हिन्दू प्रतीकों को घुसेड़ देने वाले लोगों को क्या बलात्कारी मौलाना की हरकत में हरा रंग नजर नहीं आ रहा है? क्या ‘दीनी तालीम’ सीखाने वाले इस मौलवी को अदालत द्वारा सजा के रूप में सार्वजानिक स्थान पर उस तालीम का विरोध करने के लिए बाध्य नहीं करना चाहिए, जिसका सहारा लेकर उसने अपनी विक्षिप्त मानसिकता का शिकार एक नाबालिग को बनाया है?

हर दूसरे झूठे नैरिटिव को अपने मीडिया प्रमुखों के जरिए फैलाकर खुद तख्ती उठाने वाले इस गिरोह को अगर आज 9 साल की बच्ची का बलात्कार करने वाले मौलाना का विरोध करने के लिए तख्तियों की कमी पड़ रही है, तो मैं अपनी सुन्दर हैंडराइटिंग में दर्जन भर या आवश्यकतानुसार उन्हें तख्तियाँ सप्लाई करवाने के लिए तैयार हूँ। वो कैंडल, जिन्हें यह तख्ती गैंग सुविधानुसार छुपा कर रख लेता है, मैं वो भी उपलब्ध करवाने के लिए तैयार हूँ। बशर्ते, वो 9 साल की बच्ची के बलात्कार की घटना को बलात्कार करने वाले मौलवी की धार्मिक पहचान से बढ़कर समझने का हौसला दिखा सकें।

लेकिन हम सब जानते हैं कि उनके लिए यह नामुमकिन है। बात चाहे हस्तमैथुन और ऑर्गेज़्म के जरिए महिलाओं के अधिकारों की बात करने वाली स्वरा भास्कर की हो या फिर उन्हीं के जैसी काम के अभाव में सोशल मीडिया पर एक्टिविस्ट्स बने फिर रहे अन्य मीडिया गिरोह हों, सब जानते हैं कि उन्हें कब कैंडल बाहर निकालनी है और किन घटनाओं का विरोध करना है।

हालात ये हैं कि मेरे जैसे किसी आम व्यक्ति को यदि किसी अपराध में शामिल आरोपित के बारे में जानना हो, तो मैं सिर्फ इन गिने-चुने दोहरे व्यक्तित्व के धनी लोगों की प्रतिक्रिया देखकर भी जान सकता हूँ। सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का दावा करने वाले ये लोग किस प्रकार से हर दूसरी घटना में मनगढंत तरीके से हिन्दूवादी संगठनों को अपमानित करते आए हैं, इसका उदाहरण हम देखते आए हैं।

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जिस तरह से कठुआ में हुई रेप की घटना के बाद यह मीडिया गिरोह और तख्तीबाज अपने अपने बिलों से बाहर निकलकर एक घटना में ‘मंदिर-हिन्दू-पुजारी’ जैसे शब्दों को गढ़ने का प्रयास कर रहे थे, इस तरह से आज हमें कहना चाहिए कि दीनी तालीम के नाम पर बलात्कार करने वाले एक मौलवी के मजहब का रंग हरा था और जिस तालीम को सिखाने के नाम पर उसने यह घिनौना कृत्य किया है, उसके बारे में ज्यादा कुछ कहने की गुंजाइश बाकी रह ही नहीं जाती है।

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मेनस्ट्रीम मीडिया अपनी बोई हुई फसल काटने के लिए बाध्य है। उसने बिना सोचे समझे 1,000 में से किसी एक अपराध में हिन्दू या फिर ‘जय श्री राम’ के नारे का बहाना बनाकर अपनी विषैली मानसिकता को शांत करने का प्रयास किया लेकिन समाज अब उसका भुगतान एक लम्बे समय तक करता रहेगा। सवाल भी किए जाएँगे, कोई उनका जवाब देने के लिए बाध्य हो या न हो।

सवाल पूछने के शौक़ीन अब दोतरफा संवाद के इस दौर में सवालों से बौखलाने भी लगे हैं। उनकी भड़ास अब उपहास में तब्दील हो चुकी है। आप उत्पात और उपद्रव की सीमा सोच भी नहीं सकते हैं कि इसी देश-काल-वातावरण में तब क्या हो रहा होता अगर यही घटना किसी दूसरे समुदाय से जुड़ी होती। लेकिन आज कोई उपद्रव, हो-हल्ला नहीं होगा। आज उनके प्राइम टाइम में गोबर से गैस बनाने की विधि सिखाई जानी तय की गई होगी। या हो सकता है कि अम्बानी इस समय देश में कौन-कौन से प्रोजेक्ट चला रहे हैं इस पर भी विश्लेषण देखने को मिल जाए। लेकिन, ‘मौलवी-नमाज-AMU’ ये शब्द आज शब्दकोश से मिटा दिए जाएँगे।

फिलहाल, मौलवी को POCSO Act के तहत गिरफ्तार कर लिया गया है। लेकिन उस तालीम और उस जगह के बारे में अवश्य सोचते रहिए, जहाँ-जहाँ से ये शख्स गुजरा था। जहाँ-जहाँ 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने वाला मौलाना मोहम्मद अफजल दीनी तालीम के नाम पर नमाज पढ़ाता और उर्दू सिखाता था। उन सभी संस्थाओं, चाहे वो घर हो या यूनिवर्सिटी हो, सबको शक की नजर से देखना शुरू कर दीजिए। सुरक्षित रहने का यही उपाय है कि हम रंगों की पहचान करना सीख सकें, ठीक उसी तरह जिस तरह से तख्ती-गैंग और मेनस्ट्रीम मीडिया ने पहचाना है।

‘लेफ्ट वाले सनकी और पागल, पसंद नहीं देश तो छोड़ दो न!’

अपने देश की चार डेमोक्रैट सांसदों पर निशाना साधते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ट्वीट किया है। एक साथी सांसद की बातों को उद्धृत करते हुए ट्वीट में उन्होंने चार सांसदों को निशाने पर रखने के साथ-साथ विपक्षी डेमोक्रैटिक पार्टी की भी आलोचना की है और उन्हें ‘पागल’ करार दिया है। साथ ही अमेरिका को न पसंद करने वाले अमेरिकियों को देश छोड़ देने की भी सलाह दी है।

‘इन्हें लगता है कि सभी नस्लभेदी और दुष्ट हैं’

चार अमेरिकी सांसदों अलेक्सांद्रिया ओकेशिओ-कोर्टेज़, इल्हान उमर, राशिदा तलैब और आयना प्रेस्ली का नाम लिए बिना ट्रम्प ने लुइसियाना के सीनेटर जॉन केनेडी की बातों को ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “चार अमेरिकी महिला सांसदों को लगता है कि अमेरिका का जन्म घृणास्पद है, आज हम पहले से अधिक घृणास्पद हैं, और हम सभी नस्लवादी और दुष्ट हैं। मेरे विचार में वे सभी लेफ्ट वाले सनकी हैं।” अपने तीखे हमलों के लिए अमेरिका ही नहीं, पूरी दुनिया में जाने जाने वाले ट्रम्प यहीं पर नहीं रुके, बल्कि उन्होंने यह भी लिखा कि बाकियों को इन्हें नज़रंदाज़ करना चाहिए। “यह इतने मूर्ख हैं कि इन्हीं के लिए शैम्पू की बोतल जैसी सरल चीज़ पर भी इस्तेमाल करने का तरीका लिखा जाता है।”

ट्रम्प ने केनेडी को उद्धृत करते हुए चारों सांसदों पर अपनी ही डेमोक्रेटिक पार्टी को बर्बाद करने का भी आरोप लगाया। उनके ट्वीट के अनुसार इन चारों महिलाओं ने पार्टी को अति वामपंथ की ओर धकेल दिया है। ट्रम्प ने इस बात से भी नाराज दिखे कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सभी राष्ट्रपति प्रत्याशी के बीच इन चारों महिला संसद की हाँ-में-हाँ मिलाने की होड़ लगी है।

झारखंड: महिला को निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में 3 महिलाओं समेत 5 गिरफ़्तार

हजारीबाग में महिला को निर्वस्त्र कर पीटने के मामले में पुलिस ने 5 आरोपितों को गिरफ़्तार किया है। टाटीझरिया थाना क्षेत्र के मुरूमातू गाँव में एक विधवा को निर्वस्त्र कर पीटा गया था। सोमवार (जुलाई 15, 2019) को इस मामले में पुलिस ने 3 महिला आरोपितों सहित 5 को गिरफ़्तार किया।

ख़बरों के मुताबिक पीड़िता को निर्वस्त्र कर उसके दोनों हाथ पीछे बाँध दिए गए थे। इसके बाद उसकी पिटाई की गई। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि जान से मारने के इरादे से आरोपितों ने उसका गला भी दबाया। इस मामले में कई अन्य भी आरोपित हैं, जिनकी गिरफ़्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है।

ख़बरों के अनुसार, महिला की पिटाई करने वाले उसके रिश्तेदार ही हैं। रिश्तेदारों ने यह हरकत तब की जब पीड़िता ने सौतेली बेटी की शादी में अपनी राय नहीं लिए जाने पर विरोध जताया। असल में, सौतेली बेटी का लालन-पालन पीड़िता ने ही किया था। लेकिन, उसकी शादी में अपनी अनदेखी पर जब उसने नाराजगी जताई तो उसके साथ यह घिनौनी हरकत की गई।

‘मुगलों ने हिंदुस्तान को लूटा ही नहीं, माल बाहर भी भेजा, ये रहा सबूत’

बर्बर मुगल राज का बचाव करने वाले लिबरल गैंग के पास जो आखिरी हथियार था, कि ‘कम-से-कम मुगलों ने हिंदुस्तान का धन हिंदुस्तान में ही रखा’, वह भी अब झूठा निकला है। ट्विटर पर इतिहास से जुड़े अनसुने-दफ़न तथ्य निकाल लाने के लिए (लिबरलों के बीच) ‘कुख्यात’ ट्विटर हैंडल ‘True Indology’ ने इस झूठ को बेनकाब करते हुए मुगलों के हिंदुस्तान से की हुई लूट को दूसरे इस्लामी मुल्कों में भेजने के सबूत पेश किए हैं।

‘2 लाख टन चावल जितना पैसा केवल एक साल में भेजा’

‘कैम्ब्रिज हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया’ से स्क्रीनशॉट्स लेकर True Indology मुगलों के बचाव में लिखे जा सकने वाले इस आखिरी झूठ की कलई कायदे से खोलता है। उसके तथ्य कुशासन और हिंदुस्तान की मुगलों के हाथों बर्बादी की कई परतें उघाड़ते हैं। मसलन, इकलौते एक साल 1659 में औरंगज़ेब के मक्का को 600,000 रुपए देने का ज़िक्र करते हुए True Indology उसके मायने भी समझाता है। बकौल True Indology, यह उस समय के छह लाख रुपए हैं जिस समय एक रुपए में 280 किलो चावल आता था। यानी करीब 2 लाख टन चावल खरीदे जाने भर का पैसा औरंगज़ेब ने केवल एक साल में ‘काफिर’ हिन्दुस्तानियों से लूट कर मक्का भेजा।

औरंगज़ेब इतना क्रूर शासक था कि कर न चुका पाने वाले हिंदुस्तानी खेतिहरों को पेड़ों से लटका कर मौत के घाट उतरवा देता था। और इसी औरंगज़ेब ने 6 सालों में 70 लाख रुपए हिंदुस्तान से नोंच कर मुस्लिम देशों में, अपने ‘दारुल-इस्लाम’ में भेज दिए।

Fraudrey भी पकड़ी गईं

औरंगज़ेब जैसे निर्मम शासक के प्रति विशेष अनुराग रखने के लिए जानी जाने वाली ‘विदुषी’ ऑड्रे ‘Fraudrey’ ट्रश्के के झूठों को भी True Indology ने तसल्ली से बेनकाब किया है। पहले ऑड्रे ने यह दिखाने की कोशिश की कि मुगलों ने हिंदुस्तान के हिन्दुओं को जी भर के लूटा ज़रूर, लेकिन सारा माल दबा के बैठे रहे, बाहर नहीं भेजा।

True Indology ने उन्हें आइना दिखा दिया है।

इस पर नाराज़ ऑड्रे बीबी ने True Indology को ब्लॉक कर दिया।

इसके बाद ऑड्रे ने True Indology के शब्दों को न केवल तोड़ा-मरोड़ा, बल्कि साथ में यह झूठ भी फ़ैलाने की कोशिश की कि बदले में मुगलों को भी बराबर कीमत के उपहार इस्लामी देशों से मिलते थे। इस झूठ की भी True Indology ने चिन्दियाँ बिखेर दीं। सोने, हीरे और हिन्दुस्तानियों के, हिन्दुओं के लाखों-करोड़ों रुपयों के बदले विदेशी इस्लामी शासकों ने क्या भेजा? काबा की ज़मीन बुहारने के लिए इस्तेमाल हुई झाड़ू। स्वरा भास्कर, ऑड्रे, ‘Chirpy Says’ आदि का लिबरल गैंग बताएगा कि इससे उन हिन्दुओं को क्या फायदा हुआ जिनका पैसा लूट कर इस्लाम के पैरोकार देशों में भेजा गया, जो इस पैसे को देने वाले हिन्दुओं को काफिर होने के नाते काबिले-कत्ल मानते थे।

‘हिन्दू’ और ‘इनटॉलेरेंस’ का रोना रोने वालों, पहले दलितों को बाल कटाने का अधिकार तो दिला दो

मैं आज ही डॉ. अंबेदकर पर वैज्ञानिक-लेखक आनंद रंगनाथन का लगभग एक वर्ष पुराना वक्तव्य सुन रहा था, जिसमें एक विषय अंबेदकर द्वारा हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म की आलोचना का भी था। और एक घंटे से भी कम समय बाद मैं यह खबर पढ़ रहा हूँ कि मुरादाबाद के समुदाय विशेष के लोग नाईयों की दुकानों का बहिष्कार कर रहे हैं, जो दलितों, खासकर वाल्मीकि समाज के लोगों के बाल काटते हैं

इसके बारे में समझ नहीं आ रहा लिखना कहाँ से शुरू किया जाए? हिन्दुओं को यह याद दिला कर कि इस्लामी आक्रांताओं की तलवार के बाद दूसरा सबसे बड़ा कारण हिन्दुओं के कम होने का यही छुआछूत की परम्परा रही, जिसकी पीठ पर मिशनरी चढ़ कर आए और दलितों-आदिवासियों को एक झटके में हिन्दू-धर्म का दुश्मन बना दिया। या समुदाय विशेष को आड़े हाथों लेकर यह पूछते हुए कि उनके यहाँ तो ‘अल्लाह ने सारे इंसानों को एक जैसा बनाया है’ का चूरन बेचा जाता है, तो फिर उन्हें वाल्मीकियों के सर को छुए कंघी-उस्तरे से परहेज़ क्यों हो रहा है?

अंबेदकर को गलत साबित तो करें हिन्दू…

मैं अंबेदकर की इस राय से कतई सहमत नहीं हूँ कि यह अमानवीय छुआछूत हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म का अभिन्न अंग है, और इससे निजात हिंदुत्व को नकार कर ही मिल सकती है। अपनी इस असहमति के पक्ष में में दस नहीं सौ उद्धरण प्रस्तुत कर सकता हूँ। लेकिन उन सौ उद्धरणों को सूचीबद्ध करने के बाद जब मैं मुरादाबाद के इस पीपलसाना गाँव की ओर नज़र डालता हूँ तो यह कवायद अपनी ही मायूसी से बचने का एक खोखला प्रयास लगती है। अंबेदकर को मैं जब चुनौती देने की कोशिश करता हूँ तो मुझे पीपलसाना के हिन्दू गलत साबित कर देते हैं।

जो लोग यह तर्क देना चाहते हैं कि समाज या व्यक्ति की गलती और उनके अन्याय को उनकी आस्था, उनके मज़हब से नहीं जोड़ा जा सकता, वे या तो अनभिज्ञ हैं या झूठे। किसी भी आस्था या पंत का अपने-आप में मूल्याँकन अपूर्ण होता है, जब तक उसमें यह न जोड़ा जाए कि व्यवहारिकता में, मानव समाज में, दैनिक जीवन में- बाल काटने में- उस मत के मतावलम्बी अपनी आस्था के चलते कैसा व्यवहार करते हैं। यहाँ छुआछूत की व्यवस्था हिन्दू समाज को उसी पायदान पर खड़ा कर देती है जिस पर मजहब विशेष वाले पर्दा, हलाला, बुरका और तीन तलाक के चलते खड़े होते हैं- इंसान से उसकी इंसानियत का, इंसान होने और इंसानों की गरिमा दिए जाने का हक छीनने वाला चाहे तीन तलाक हो, हलाला हो, या छुआछूत, वह बराबर निंद्य है, बराबर दोषी है।

कहॉं गए मौलवियों के दावे

स्वराज्य की रिपोर्ट यह भी बताती है कि बड़ी संख्या में ऐसा करने वाले समुदाय विशेष वाले भी हैं। एक अल्पसंख्यक तो ‘अछूत’ वाल्मीकियों के लिए यह भी कहता है कि अगर ‘गलती से’, ‘अनजाने में’ किसी वाल्मीकि के साथ बाल बनवा लें तो अलग बात है, लेकिन “जब चाय में मक्खी दिख जाती है, तो लोग निकाल के ही पीएंगे।” समुदाय विशेष के बारे में इतना ही कह सकता हूँ, हालाँकि इस्लाम का कोई पीएचडी नहीं हूँ, लेकिन हर मुल्ला-मौलवी को यह दावा करते ज़रूर सुना है कि उनके यहाँ अस्पृश्यता जैसा ‘हिन्दू रोग’ नहीं है। उन्हें गला फाड़ कर मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से यह दावा करते हुए भी सुना है कि करोड़ों ‘काफिर’ ‘इस्लाम की तलवार’ की नोंक से नहीं, बल्कि उसमें जाति-प्रथा न होने के चलते इस्लाम अपनाया। तो ये अल्लाह की एक नज़र और जाति-प्रथा का अभाव केवल उम्मत के लिए बचा कर रखा गया है, या फिर काफ़िरों को भी इस जाति-विहीन दारुल-इस्लाम का ‘ट्रेलर’ दिखाया जा सकता है?

छूआछूत कैंसर, मिटाना ही होगा

आप ‘वैज्ञानिकता’, ‘हाइजीन’ से लेकर ‘यही हथियार मिशनरी इस्तेमाल करते हैं’ और ‘ये हमारी परम्परा है’ आदि इस अमानवीय प्रथा को बचाए रखने के लिए जो भी तर्क इस्तेमाल करने की कोशिश कर लें, इसका बचाव नहीं किया जा सकता है। छुआछूत हिंदुत्व में निस्संदेह कैंसर है, जिसका जड़ से इलाज करना ज़रूरी है। और यह इलाज महज़ राजनीतिक नहीं हो सकता- पूरा इलाज नैतिक, आत्मा के स्तर पर होगा। केवल छुआछूत के पीड़ितों को आरक्षण दे देने या यूपीएससी में बैठने वालों को 5-10 साल आयु सीमा में छूट दे देने से पीपरसाना के उस महेश को सम्मानजनक रूप से बाल कटाने का वह हक नहीं मिलेगा जिसका उसे इंसान होने के नाते अधिकार है।

अपनी आत्मा के अंदर झाँक कर हममें से हर एक को यह अपने आप से पूछना होगा कि अगर हम उस जगह पर होते तो हमें कैसा लगता, और हम अपने लिए कैसा व्यवहार चाहते। इसका ईमानदारी से जवाब देना होगा, और फिर उस जवाब को अमलीजामा पहनाना होगा। यह हर एक इंसान को करना होगा, हर एक हिन्दू को करना होगा। अंबेदकर जैसे विचारक का हिंदुत्व/हिन्दू-धर्म से, हिन्दू समाज से विश्वास टूटना हिन्दुओं की क्षति थी। लेकिन इससे हमने नहीं सीखा। हर एक हिन्दू को, एक और अंबेदकर को हिन्दू समाज को नकारने से रोकने के लिए, छुआछूत को नकारना ही होगा।

AMU की मस्जिद में नमाज पढ़ाने वाले मौलाना ने 9 साल की बच्ची को बनाया हवस का शिकार

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 9 साल की नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर उसके साथ बलात्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मौलवी के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।

कुरान पढ़ाने, दीनी तालीम देने बच्ची के घर जाता था मौलवी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मस्जिद में मोहम्मद अहमद मोज्जिन है। उस पर 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मौलाना मोहम्मद अफजल नाबालिग को घर पर कुरान और उर्दू पढ़ाने जाता था। मौलाना ने मासूम को डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और शिकायत करने पर बच्ची को जान से मारने की धमकी दी।

इस घटना की जानकारी परिजनों को होने पर पीड़ित बच्ची की माँ ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया।

आरोपित मौलवी मूलत: सुल्तानपुर जिले के डेली मुबारकपुर गाँव का रहने वाला है। वह अलीगढ़ में जमालपुर गली नंबर 4 में रहता था। महिला थाना इंस्पेक्टर सुनीता मिश्रा ने बताया कि मौलवी के खिलाफ छेड़खानी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मुकदमा दर्ज किया गया है।

मामले में एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि एएमयू में मोज्जिन के पद पर तैनात मौलवी द्वारा 9 साल की नाबालिग के साथ डरा धमकाकर दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एएमयू मेंबर इंचार्ज साफे किदवई ने बताया कि शिकायत मिलने पर मौलाना को तत्काल पद से हटा दिया गया है और रिपोर्ट तलब की जा रही है।