उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में 9 साल की नाबालिग बच्ची को डरा-धमकाकर उसके साथ बलात्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में पुलिस ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मौलवी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी मौलवी के खिलाफ महिला थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है।
कुरान पढ़ाने, दीनी तालीम देने बच्ची के घर जाता था मौलवी
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के मस्जिद में मोहम्मद अहमद मोज्जिन है। उस पर 9 साल की बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, मौलाना मोहम्मद अफजल नाबालिग को घर पर कुरान और उर्दू पढ़ाने जाता था। मौलाना ने मासूम को डरा धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया और शिकायत करने पर बच्ची को जान से मारने की धमकी दी।
इस घटना की जानकारी परिजनों को होने पर पीड़ित बच्ची की माँ ने शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपित मौलवी के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई शुरू की और मौलवी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपित मौलवी मूलत: सुल्तानपुर जिले के डेली मुबारकपुर गाँव का रहने वाला है। वह अलीगढ़ में जमालपुर गली नंबर 4 में रहता था। महिला थाना इंस्पेक्टर सुनीता मिश्रा ने बताया कि मौलवी के खिलाफ छेड़खानी, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में मुकदमा दर्ज किया गया है।
मामले में एसएसपी आकाश कुलहरि ने बताया कि एएमयू में मोज्जिन के पद पर तैनात मौलवी द्वारा 9 साल की नाबालिग के साथ डरा धमकाकर दुष्कर्म के मामले में मुकदमा दर्ज कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। वहीं, एएमयू मेंबर इंचार्ज साफे किदवई ने बताया कि शिकायत मिलने पर मौलाना को तत्काल पद से हटा दिया गया है और रिपोर्ट तलब की जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने कुलभूषण जाधव मामले में भारत के पक्ष में निर्णय दिया है। अदालत ने पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को दी गई सजा की समीक्षा करने और पुनर्विचार करने को कहा है। इसके साथ ही कुलभूषण जाधव को मिली मौत की सज़ा पर भी रोक लगा दी गई है। अदालत ने पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का दोषी पाया है। अदालत ने कहा कि कुलभूषण जाधव को उनके अधिकारों के बारे में विवरण नहीं दिया गया। इसके अलावा अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि जाधव की गिरफ़्तारी की जानकारी भारत को तुरंत नहीं दी गई।
कुलभूषण जाधव मामले में कोर्ट के निर्णय का हिस्सा
भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने जासूसी का आरोप लगा कर अपने जेल में बंद कर रखा है। मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में गया और पाकिस्तान वहाँ भी इस मामले में लचर नज़र आया। यह मामला अंतरराष्ट्रीय न्यायलय में 2 वर्ष और 2 महीने तक चला। बता दें कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने कुलभूषण जाधव को मौत की सज़ा सुनाई थी। कुलभूषण को पाकिस्तान की जेल में ‘अपराध कबूलने’ के लिए प्रताड़नाएँ भी दी गई थी।
पाकिस्तान ने वियना संधि का सीधा-सीधा उल्लंघन करते हुए भारत द्वारा कुलभूषण जाधव को किसी भी प्रकार का क़ानूनी मदद (काउंसलर एक्सेस) मुहैया कराने की अनुमति नहीं दी। जब कुलभूषण की माँ और पत्नी उनसे मिलने गई, तब उनके साथ भी दुर्व्यवहार किया गया। मुलाक़ात के दौरान बीच में काँच की दीवार लगा दी गई थी और फिर फोन से उनकी बातचीत कराई गई। भारत ने अंतरराष्ट्रीय कोर्ट को बताया कि कैसे पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को अगवा कर जबरदस्ती बयान दिलवाया और फाँसी की सज़ा सुना दी।
बता दें कि आईसीजे (ICJ) ने कुलभूषण जाधव की सजा पर रोक लगा दी थी। जाधव को जब अगवा किया गया था, तब वह रिटायरमेंट के बाद ईरान में अपना कारोबार कर रहे थे।
उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक दिल दहला देने वाला प्रकरण सामने आया है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि एक शख्स को सोशल मीडिया पर अजय देवगन के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट लिखने के कारण पुलिस द्वारा अरेस्ट कर लिया गया है।
युवक पर आरोप है कि उसने यह पोस्ट लिखकर विमल (केसर वाला) खाने वालों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने और कानपुर के पान-बहार फैब्रिक को तोड़ने का काम किया है। इस मामले में स्थानीय अदालत ने तुरंत संज्ञान लेते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने आपत्तिजनक पोस्ट लिखने वाले उस युवक को अगले एक साल तक कानपुर के हर गली-मोहल्ले में ‘विमल’ बाँटने की सजा सुना दी है और साथ ही उसे ‘बोलो जुबाँ केसरी’ के नारे भी लगाने होंगे। देखते ही देखते यह घटना राष्ट्रीय मुद्दा बन गई और इसी बीच ट्विटर पर भी #vimal4life हैशटैग भी पहले नंबर पर ट्रेंड करने लगा।
आरोप है कि कानपुर मूल के युवक केसरी ने सिर्फ अजय देवगन के खिलाफ ही पोस्ट नहीं किया, बल्कि यह भी लिखा है कि उन्हें अजय देवगन अभिनीत राम गोपाल वर्मा की आग फिल्म पसंद नहीं है। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाली कमिटी ‘कानपुर- जुबाँ केसरी एकता मंच’ के प्रमुख सचिव का कहना है-
“अजय देवगन के खिलाफ पोस्ट लिखने से भी हमें विशेष शिकायत नहीं थी, यह उनकी अभिव्यक्ति के अधिकार के अंतर्गत आता है। लेकिन जब उसने पान-गुटखा खाने वालों को कानपुर छोड़कर धामपुर भेज दिए जाने की बात लिखी तो यह उनके कानपुर में रहते हुए पान खाने की स्वतंत्रता के अधिकार, अनुच्छेद 21-(क) का उल्लंघन माना जाएगा। अजय देवगन ने पान-गुटखा खाने वालों की जुबाँ केसरी कर के हमें एक करने का काम किया है और आज उनकी बदौलत विश्वस्तर पर लोग विमल खाने और इसके केसरी रंग के प्रति जागरूक हो रहे हैं।”
फेसबुक पर अजय देवगन को लेकर विवादित पोस्ट से नाराज एक पान-बहार कार्यकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि युवक ने विमल इलायची में कमियाँ निकालते हुए लिखा है कि इसमें इस्तेमाल होने वाली केसर में ‘वो’ बात नहीं है क्योंकि ये पाकिस्तान से आता है। युवक ने अपने पोस्ट में रामगोपाल वर्मा की आग और हिम्मतवाला फिल्मों में अजय देवगन की एक्टिंग को भी निशाना बनाया है। नाराज प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें पूरी पोस्ट ने उतना आहत नहीं किया था, जितना उस आखिरी लाइन ने, जिसमें की राम गोपाल वर्मा की आग फिल्म की निंदा की गई है।
हालाँकि, नाम न बताने की शर्त पर यह विवादित पोस्ट लिखने वाले बहुसंख्यक समुदाय के युवक केसरी का कहना है कि यह एक मामूली पोस्ट था और उसका मकसद किसी भी पान-गुटखा खाने वाले सज्जन की भावना को आहत करना नहीं था। केसरी ने पान-बहार एकता मंच के कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाए हैं कि उन्हें अक्सर जबरदस्ती विमल पान खाने के लिए प्रेरित किया जाता है और जबरन ‘बोलो जुबाँ केसरी’ के नारे लगवाने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।
अदालत के फैसले पर नालसार से कानून के जानकार, प्राइम टाइम का कैमरा अपने घर में लगा कर रखने वाले वीसी ने बताया है कि संवैधानिक दायरे में तो जज अगर चाहते तो युवक को पूरे शहर की दीवार रंगने की बात भी कह सकते थे। लेकिन उन्होंने इस डर से नहीं कहा क्योंकि भगवा लहर को रोकना उनकी मंशा थी, हवा देना नहीं।
केसरी ने भावुक शब्दों में यह भी कह दिया कि जिस आदमी का अपना ही नाम केसरी हो, उसे जुबाँ के केसरी होने से क्या फ़र्क़ पड़ता है। साथ ही केसरी ने जोर देते हुए कहा कि आज के दिन जो लोग दिन के पाँच वक़्त विमल खाते हैं, उन्हीं लोगों के पूर्वज कभी कमला पसंद खाया करते थे इसलिए उन्हें ज्यादा फैलना नहीं चाहिए।
सामाजिक समरसता कायम करने के लिए कानपुर में रैली करेंगे अजय देवगन
इस घटना से पैदा हुए तनाव को शांत करने के लिए खुद अजय देवगन ने फैसला किया है कि वो कानपुर में एक विमल इलायची रैली का आयोजन करेंगे और इसमें वो 2 मोटरसाइकिल पर बैठकर पहुँचने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इस रैली में मौजूद लोगों को हर किस्म के पान और गुटखे वितरित किए जाएँगे ताकि कानपुर की संस्कृति में पान-बहार फैब्रिक बना रहे।
रैली में कुछ इस तरह नजर आएँगे अजय देवगन (प्रतीकात्मक चित्र)
कपिल सिब्बल के तिरंगा टीवी से जुड़े विवाद बढ़ते ही जा रहे हैं। बरखा दत्त के उनकी पत्नी पर गाली-गलौज का आरोप लगाने और पत्रकारों को आनन-फानन में निकाले जाने की खबरों के बीच उनके चैनल के एक सीनियर प्रोड्यूसर पर एक महिला जर्नलिस्ट ने अभद्र संदेश वॉट्सऍप पर भेजने का आरोप लगाया है।
ट्विटर पर अपलोड किए स्क्रीनशॉट
हिमांशी गुप्ता नामक लड़की के अकाउंट से अपलोड स्क्रीनशॉट्स में सुरेश कुमार पर अश्लील संदेश भेजने और यौन प्रताड़ना करने का आरोप लगाया गया है। हिमांशी के मुताबिक, सुरेश कुमार तिरंगा टीवी में सीनियर प्रोड्यूसर हैं। हिमांशी का यह भी कहना है कि वह उन्हें लगातार फोन कर प्रताड़ित कर रहे हैं।
हिमांशी गुप्ता ने आरोपी की लिंक्डइन प्रोफाइल और तस्वीर भी साथ में पोस्ट की है।
इन चैटों से यह भी साफ है कि हिमांशी संदेशों को अनुचित बताते हुए सुरेश से ऐसा न करने का आग्रह करती हैं। उसके बाद, हिमांशी के मुताबिक, वह शुरू में तो रुक गए लेकिन बाद में फिर संदेश भेजना शुरू कर दिया।
Yes. Initially. He even said sorry. But then he said “I will not sleep. I will keep texting” https://t.co/iplugNvZmZ
राँची की अदालत ने ऋचा भारती वाले मामले में दिया गया ‘कुरान बाँटने’ वाला आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने यह निर्णय इस केस की जाँच कर रहे इन्वेस्टीगेशन अधिकारी के निवेदन पर लिया। बता दें कि सोशल मीडिया पर ऋचा भारती द्वारा की गई ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ को लेकर राँची की अदालत ने उन्हें अजीबोगरीब शर्त लगा कर जमानत दी थी। अदालत ने जमानत देते हुए कहा था कि ऋचा को 15 दिनों के भीतर कुरान शरीफ की पाँच प्रतियाँ बाँटनी होंगी।
#BREAKING | रांची कोर्ट ने बदला फैसला, ऋचा के ऊपर से कोर्ट ने कुरान बांटने की शर्त हटाई
ऋचा ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया था और कहा था कि आज अदालत उन्हें कुरान बाँटने को कह रही है, कल को इस्लाम मज़हब अपनाने को भी कहा जा सकता है। ऋचा ने पूछा था कि क्या कभी किसी अदालत ने किसी आरोपित को रामायण या भगवद्गीता बाँटने को कहा है? अब राँची की अदालत ने अपना आदेश वापस ले लिया है।
राँची के वकीलों ने भी इस निर्णय का विरोध किया। देश के कई अन्य वकीलों ने भी ऋचा को मदद की पेशकश की थी। उनके घर के बाहर हिन्दू संगठनों नेताओं की लाइन लगी रही व कई लोगों ने ऋचा के पिता को फोन कर अपना समर्तहन जताया। अब तमाम विरोधों के बाद राँची की अदालत ने अपना निर्णय वापस ले लिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने घुसपैठियों को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा है कि सभी घुसपैठियों और अवैध अप्रवासियों की पहचान कर उन्हें देश से निकाला जाएगा। सपा संसद जावेद अली ख़ान के सवाल का जवाब देते हुए शाह ने ये बात कही।
अली ने पूछा था कि क्या एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स) भविष्य में देश के अन्य हिस्सों में भी लागू किया जा सकता है? राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान बोलते हुए भाजपा अध्यक्ष ने कहा:
“एनआरसी अभी जो असम के अंदर है, वो असम अकॉर्ड का ही एक भाग है। अगर सबने राष्ट्रपति महोदय का भाषण सुना होगा या भाजपा का घोषणा-पत्र पढ़ा होगा, उन्हें पता होना चाहिए कि हम देश के एक-एक इंच ज़मीन से घुसपैठियों को चिह्नित कर अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार निर्वासित करने वाले हैं।”
We will detect all the illegal infiltrators living on every inch of our country and deport them as per the international law.
देश की इंच-इंच जमीन पर रह रहे घुसपैठिये की पहचान कर अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर हम उन्हें देश से निकालेंगे। pic.twitter.com/Uk5x7IHZOT
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को घुसपैठियों के प्रति सख्त रुख के कारण विरोधी अक्सर निशाने पर लेते रहे हैं। सरकार ने मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को कहा था कि घुसपैठियों को बाहर निकालने के लिए वह बहुआयामी तरीकों पर काम कर रही है। सीमा पर फेंसिंग कराने, फ्लड लाइट्स लगवाने, सीमा पर अच्छी सड़कें बनवाने और आउटपोस्ट्स स्थापित करने सम्बन्धी कई निर्णय लिए गए हैं।
गृह मंत्रालय ने बताया कि सीमा की सुरक्षा करने वाले फोर्सेज को नियमित चेकिंग करने, चेकपोस्ट लगा कर जायजा लेने और गश्ती में तेज़ी लाने को कहा गया है, ताकि घुसपैठियों को दाखिल होने से रोका जा सके। भारतीय सीमा पर पहाड़ और नदियाँ होने के कारण घुसपैठिए इस भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाते हैं और सुरक्षा बलों को चकमा देने में कामयाब होते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और उससे जुड़े संगठनों पर नीतीश कुमार की अगुआई वाली बिहार सरकार ने नजर गड़ा रखी है। इन संगठनों के पदाधिकारियों की कुंडली तैयार करने का काम पुलिस को दिया गया था। बीते साल जारी की गई एक चिट्ठी के अब सार्वजनिक होने से मामला सामने आया है।
पुलिस अधिकारियों को भेजी गई इस चिट्ठी में आरएसएस और उससे जुड़े 18 अन्य संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में जानकारियाँ माँगी गई है। पटना विशेष शाखा के एसपी ने सभी डीएसपी को यह पत्र भेजते हुए जानकारियाँ जुटाने को कहा था।
पत्र में संघ और उससे सम्बद्ध 18 अन्य संगठनों के सभी पदाधिकारियों के नाम, पता, फोन नंबर और व्यवसाय से सम्बंधित जानकारियाँ जुटा कर भेजने को कहा गया है। हालाँकि, नीतीश सरकार आरएसएस, बजरंग दल, हिन्दू युवा वाहिनी, दुर्गा वाहिनी और हिन्दू महासभा सहित इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों के बारे में सारे डिटेल्स क्यों निकलवा रही है, इस बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं चल पाया है।
28 मई 2019 को भेजी गई इस चिट्ठी में सारी जानकारियाँ पुलिस उपाधीक्षकों को एक सप्ताह के अंदर भेजने को कहा गया है। कहा जा रहा है कि स्पेशल ब्रांच गुप्त रूप से सीधा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सारे विवरण समय-समय पर देता है, ऐसे में संभव है कि यह निर्णय मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ही लिया गया हो। वैसे भी अभी बिहार गठबंधन में सबकुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। वांछित भागीदारी नहीं मिलने पर जदयू केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं हुई थी। बाद में जब नीतीश ने बिहार में अपनी कैबिनेट का विस्तार किया तो उसमे भाजपा को जगह नहीं दी।
Bihar: In a letter dated 28/5/19, Superintendent of Police (Special Branch), Patna directed Deputy SPs (Special Branch) to “collect names,addresses, phone no & professions of the office bearers of RSS & its below mentioned supporting orgs”, residing in their areas “within 1 week” pic.twitter.com/QnfMYAvgRs
2016 में ‘संघ मुक्त भारत’ की बात कर चुके नीतीश कुमार के इस क़दम को लेकर भी भाजपा नेताओं की तरफ से कोई बयान नहीं आया है। इंसेफ्लाइटिस, गर्मी और बाढ़ के कारण इस साल सैकड़ों मौतों का गवाह बन चुके बिहार में नीतीश के इस ‘ऑपरेशन संघ परिवार’ के पीछे क्या कारण हैं, यह तो वक़्त ही बताएगा।
ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत देने का मामला तूल पकड़ते जा रहा है। अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रहने वाली साध्वी प्राची ने कहा है कि इस फैसले से ऐसा लगता है जैसे फतवा जारी किया गया हो।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने कहा कि यदि जज ऋचा भारती को कुरान बाँटने का फैसला सुना सकते हैं तो जिन लोगों ने दिल्ली समेत कई राज्यों में मंदिर तोड़ने का काम किया है, उन्हें राम नाम का पटका गले में डाल कर कावड़ लाने का आदेश भी सुनाया जाए।
उन्होंने कहा कि ऋचा भारती के मामले में जैसा आदेश दिया गया उससे लगता है कि यह फैसला हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि सीरिया में सुनाया गया हो। ऐसा लगता है कि हिन्दुस्तान में देश विरोधी गैंग सक्रिय हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि शांति चाहिए और शांति के लिए इस तरह के फैसले का हवाला दिया जा रहा हो तो जज को कुरान के बजाए वेद बॉंटने का आदेश देना चाहिए था।
कांवड़ लाने पर वाले समुदाय विशेष की आस्था पर सवाल उठाते हुए साध्वी ने कहा कि यह महज दिखावा होता है। यदि जज किसी समुदाय विशेष को कांवड़ लाने का आदेश दे तो वह इसे कभी नहीं मानेंगे। उनके फैसले को साजिश करार दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि सोशल मीडिया पर एक पोस्ट को लेकर मंगलवार (जुलाई 17, 2019) को राँची की एक अदालत ने ग्रेजुएशन की छात्रा ऋचा भारती को कुरान बाँटने की शर्त पर जमानत दी थी। ऋचा ने इस फैसले को मानने से इनकार किया है। इसके बाद से सोशल मीडिया में इस मसले पर बहस छिड़ी हुई है। कुछ लोग जहॉं ऋचा के स्टैंड की तारीफ कर रहे हैं तो कुछ लोग जज के फैसले का बचाव।
आपको याद होगा कि अलीगढ़ के शाहजमल क्षेत्र से मुस्लिम व्यक्ति के साथ मार-पिटाई का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया था। खबर के अनुसार, यहाँ 55 साल के मुस्लिम व्यक्ति को उसके समुदाय के कुछ युवकों ने घर में घुसकर सिर्फ़ इसलिए पीटा था क्योंकि वह अपने घर में बैठकर हिंदुओं की धार्मिक पुस्तक ‘रामायण’ और ‘गीता’ पढ़ रहा था। ताज़ा सूचना के अनुसार, दोनों ही आरोपितों को अदालत द्वारा बिना शर्त जमानत दे दी गई है।
Earlier this month, a man from minority community, Dilsher, was attacked by co-religionists for reading Ramayan. Instead of asking the accused to distribute copies of Ramayan, court gave them unconditional bail 🙂
इस घटना के बारे में स्थानीय पुलिस का कहना था कि दिलशेर नाम का मुस्लिम व्यक्ति एक फैक्ट्री में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता है। गुरुवार (जुलाई 4, 2019) की सुबह 9 बजे वह अपने काम से लौटने के बाद घर पर बैठकर गीता पढ़ रहा था कि तभी समीर, जाकिर और कुछ अन्य युवक घर में घुसे और दिलशेर से मारपीट करने लगे। इसके बाद उन युवकों ने दिलशेर से ‘गीता’ और ‘रामायण’ छीनी और अपने साथ ले गए।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ये बातें भी पता चलीं कि समीर और जाकिर ने धार्मिक ग्रंथों को फाड़ने की भी कोशिश की। दिलशेर ने बमुश्किल उन लोगों से अपनी और परिवार की जान बचाई थी। कट्टरपंथी हमलावर जाते-जाते आगे से गीता-रामायण न पढ़ने की चेतावनी देते हुए, जान से मारने की धमकी देकर भी गए थे।
दिलशेर के मुताबिक वह इन हिन्दू धर्म ग्रंथों को पिछले 38 साल से पढ़ रहें है। वह कहते हैं, “मैं एक मुस्लिम हूँ लेकिन मेरा मजहब मुझे दूसरे धर्मों की कोई और पाक किताब पढ़ने से नहीं रोकता।“
एसपी सिटी अभिषेक ने आश्वासन दिया था कि मामले की जाँच चल रही है और आरोपितों के ख़िलाफ़ जल्द ही कार्रवाई होगी। इस मामले में आरोपित जाकिर, समीर समेत अज्ञात युवकों के ख़िलाफ़ आईपीसी धारा 298 (धार्मिक भावनाएँ आहत करना), 323 (मार-पीट और चोट पहुँचाना), 452 (गलत इरादों से घर में घुसपैठ), 504 (शांतिभंग की कोशिश) और 506 (आपराधिक कृत्य) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था।
गुजरात में ठाकोर समुदाय के एक तुगलकी फरमान का कॉन्ग्रेस विधायक जेनीबेन ठाकोर ने समर्थन किया है। इस फरमान के मुताबिक अविवाहित लड़कियों द्वारा मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने पर उनके मॉं-बाप पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि इस पाबंदी से लड़के अपने-आप सुधर जाएँगे। उन्होंने अंतरजातीय विवाह पर रोक का भी समर्थन किया है।
क्षत्रिय ठाकोर समुदाय ने बनासकांठा जिले के जिगोल गॉंव में 14 जुलाई को हुई बैठक में यह फरमान जारी किया था। बैठक में तय किया गया कि इस फैसले को नहीं मानना अपराध होगा और ऐसा करने वाली लड़कियों के मॉं-बाप पर जुर्माना लगाया जाएगा।
हालॉंकि बैठक में पारित किए गए प्रस्ताव में कानूनी पचड़े से बचने के लिए ‘अंतरजातीय विवाह’ को लेकर बेहद सरल शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। इसमें कहा गया है,“ जो लड़की समुदाय को नीचा दिखाएगी,उसकी जिम्मेदारी उसके परिवार और माता-पिता की होगी। उन पर 1.5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा।”
जेनीबेन ने इसका समर्थन करते हुए कहा है कि लड़कियॉं अपने मॉं-बाप के साथ रहती हैं, इसलिए आसानी से उन पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
वैसे, यह पहला मौका नहीं जब जेनीबेन ने विवादित बयान दिया है। पिछले साल किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने उनकी दुर्दशा के लिए भाजपा नेताओं की हत्या की बात कही थी।