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पूर्व PM चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर BJP में शामिल, अगले साल पहुँच सकते हैं राज्यसभा

पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के बेटे नीरज शेखर आज (जुलाई 16, 2019) आधिकारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए। एक दिन पहले ही उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफा दिया था। राज्यसभा में वे
समाजवादी पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे।

उन्होंने भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में पार्टी की सदस्यता ली। इसके बाद उन्होंने भाजपा के कार्यवाहक अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मुलाकात की।

गौरतलब है 50 वर्षीय नीरज शेखर 2 बार लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के निधन के बाद 2007 में बलिया सीट से पहली बार जीत हासिल की थी और बाद में वो 2009 में फिर से सांसद निर्वाचित हुए थे। 2014 में हार का मुँह देखने के बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए नामित किया। उनका कार्यकाल 2020 में समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया। बताया जा रहा है भाजपा 2020 में उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा भेज सकती है।

खबरों के मुताबिक वह 2019 के लोकसभा चुनाव में अपनी परंपरागत सीट बलिया से टिकट माँग रहे थे। कहा जा रहा है कि टिकट न मिलने से वह नाराज़ चल रहे थे। हालाँकि उन्होंने इस इस्तीफ़े के पीछे ऐसे कोई वजह खुलकर नहीं बताई है, अपने इस कदम के पीछे उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है।

डोनाल्‍ड ट्रम्प की बेटी ने माना ओवैसी के हॉस्पिटल का लोहा, स्पेशल विजिट करने आईं भारत: Fact Check

सोशल मीडिया पर कौन सी खबर किस दिशा में आगे बढ़ जाए, कहना मुश्किल होता है। ऐसा ही एक उदाहरण ओवैसी के प्रशंसकों द्वारा आजकल देखने को मिल रहा है।

क्या है मामला?

दरअसल, फेसबुक पर एक विडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें एक महिला इंटरव्यू देते हुए देखी जा रही है। इस विडियो को शेयर करते हुए दावा किया गया है कि यह महिला अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प की बेटी हैं, जो खासतौर पर हैदराबाद में ओवैसी के अस्पताल का दौरा करने गई थी।

वीडियो में महिला ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (AIMIM) नेता और असदुद्दीन ओवैसी के भाई अकबरूद्दीन ओवैसी की तारीफ करते सुनी जा सकती हैं। शेयर करते हुए इस विडियो के साथ कैप्शन लिखा गया है-

“डॉनल्ड ट्रम्प की बेटी खुद कह रही हैं कि हम स्पेशल अकबरुद्दीन ओवैसी के हॉस्पिटल विजिट करने आए हैं। असदुद्दीन ओवैसी नाम नहीं ब्रैंड हैं।”

AIMIM पार्टी समर्थकों द्वारा यह वीडियो शेयर किया जा रहा है

AIMIM पार्टी के अन्य समर्थकों द्वारा भी यह वीडियो इसी कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है।

AIMIM समर्थक इस वीडियो में किए गए दावे पर अपनी प्रतिक्रियाएँ भी दे रहे हैं।

ओवैसी की पार्टी AIMIM के कार्यकर्ता भी इस वीडियो को शेयर कर रहे हैं और कटाक्ष करते हुए लिख रहे हैं- “डंका तो सिर्फ मोदी का ही बज रहा है विदेश में।”

क्या है सच्चाई?

वास्तव में, सोशल मीडिया पर AIMIM समर्थकों द्वारा शेयर किया जा रहा यह वीडियो यूट्यूब डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवाँका ट्रम्प का नहीं बल्कि ब्रियाना कुक का है। यूट्यूब पर इस ओरिजनल वीडियो में साफ-साफ लिखा है कि इवाँका की दोस्‍त आसरा अस्‍पताल (अकबरुद्दीन ओवैसी) गईं थीं। इस वीडियो को दिसंबर 01, 2017 में SharpIndians TV News & Entertainment नाम के Youtube चैनल ने अपलोड किया था। इसका वॉटरमार्क भी वीडियो में देखा जा सकता है।

यूट्यूब पर अपलोडेड यह वीडियो यहाँ देखा जा सकता है –

यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि वायरल वीडियो में दिख रहीं महिला डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवाँका ट्रंप नहीं बल्कि ब्रियाना कुक हैं। ब्रियाना भी अमेरिकी ही हैं।

जबकि, डोनाल्ड ट्रम्प की बेटी इवाँका नवंबर 2017 में हैदराबाद गई थीं। हैदराबाद में हुए ग्लोबल ऑन्टरप्रिन्योरिशप समिट 2017 में वह अमेरिकी डेलिगेशन का नेतृत्व कर रही थीं। जैसा कि ANI के इस ट्वीट में देखा जा सकता है।

वीडियो पर दिख रहे वॉटरमार्क और लोगो से यह स्पष्ट है कि यह वीडियो असली है और इसी का एक हिस्सा फर्जी दावे के साथ शेयर किया जा रहा है। असली वीडियो की शुरुआत में महिला कहती हैं, “इवाँका ट्रंप के डेलिगेशन के साथ अमेरिका से मैं ब्रियाना कुक हूँ।”

हालाँकि, वीडियो की वास्तविकता से हटकर AIMIM समर्थकों द्वारा वायरल किए जा रहे वीडियो में दिख रही महिला को ध्यान से देखने पर खुद यह साबित हो जाता है कि वह न तो इवाँका ट्रंप हैं और न ही डॉनल्ड ट्रम्प की दूसरी बेटी टिफनी ट्रम्प हैं। ऐसी भी कोई रिपोर्ट नहीं है कि टिफनी ट्रम्प अपनी बहन इवाँका से साथ भारत आई थीं।

अंतिम निर्णय

इस फैक्ट चेक से पता चलता है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्प की बेटी हैदराबाद स्थित ओवैसी के अस्‍पताल में कभी नहीं गईं थीं। ओवैसी की पार्टी AIMIM के समर्थकों द्वारा वायरल वीडियो में दिख रहीं महिला का नाम ब्रियाना कुक है, जो कि वे इवाँका के हैदराबाद दौरे के वक्‍त अ‍मेरिकी प्रतिनिधि मंडल में शामिल थीं।

तमिलनाडु: इस्लामी शासन खड़ा करने की कोशिश नाकाम, NIA ने 14 को गिरफ्तार किया

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने तमिलनाडु में आतंकी संगठन ‘अंसारुल्ला’ को खड़ा करने की कोशिश कर रहे 14 संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इन्हें हाल ही में सऊदी अरब ने भारत को सौंपा था। बताया जाता है कि इस्लामिक शासन खड़ा करने के लिए ये लोग आतंकी हमले की साजिश रच रहे थे।

संदिग्धों को सोमवार (जुलाई 16, 2019) को नई दिल्ली से चेन्नई विशेष विमान से ले जाया गया। उन्हें पूनमल्ली की एनआईए कोर्ट में विशेष जज के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने इन्हें 25 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया।

जानकारी के मुताबिक कोर्ट के सामने पेश किए गए संदिग्ध चेन्नई, तिरूनवेल्ली,थेनी, नागापट्टनम और रामनाथपुरम के रहने वाले हैं और वाहदत-ए-इस्लामी हिंद (तमिलनाडु का धार्मिक संगठन) के सदस्य हैं। साथ ही इन लोगों पर आरोप है कि ये तमिलनाडु के उन लोगों के संपर्क में थे जो प्रदेश में अंसारुल्ला को खड़ा करना चाहते थे।

बताया जा रहा है कि ये सभी संदिग्ध अंसारुल्ला को खड़ा करने के लिए पैसे जुटा रहे थे। जिसके चलते इन्हें हाल ही में सऊदी अरब से भारत प्रत्यर्पित किया गया।

खबरों की मानें तो इस मामले में एनआईए ने शनिवार को हसन अली और हरीश मोहम्मद नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया था। दोनों ने पूरे नेटवर्क का खुलासा किया और बताया कि इस्लामिक शासन स्थापित करने के मकसद से वे आतंकी हमले को अंजाम देना चाहता था। इसके लिए पैसे की व्यवस्था की और अन्य तैयारी की। 

एनआईए ने चेन्नई और नागपट्टनम जिलों में आरोपितों के ठिकानों पर छापेमारी भी की और चेन्नई निवासी सईद बुखारी और नागपट्टिनम निवासी हसन अली, युनुसमारिकार और मोहम्मद युसुफूद्दीन हरीश मोहम्मद के खिलाफ 9 जुलाई, 2019 मामला दर्ज किया।

छापेमारी में 15 सिमकार्ड, 7 मेमोरी कार्ड, 3 लैपटॉप, 5 हार्डडिस्क, 6 पेन ड्राइवर, 2 टैबलेट, 3 सीडी/डीवीडी, दस्तावेज, मैगजीन, बैनर, नोटिस, पोस्टर और पुस्तकें बरामद हुई थी।

गाँधी परिवार का करीबी संजय भण्डारी, ₹2800 करोड़ का भ्रष्टाचार: पिलैटस पर एक साल के प्रतिबंध की कहानी

₹2800 करोड़ के भ्रष्टाचार में सीबीआई द्वारा आरोपित होने का खमियाजा पिलैटस कंपनी को रक्षा मंत्रालय का सौदा खोकर भुगतना पड़ा है। रक्षा मंत्रालय ने 38 प्रशिक्षण हवाई जहाज उससे खरीदने की योजना को त्याग दिया है। यही नहीं, कम्पनी पर न्यूनतम एक वर्ष का प्रतिबंध भी लगा दिया गया है। पिलैटस पर जिस मामले में भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप है, वह 2012 यानी पूर्ववर्ती संप्रग सरकार के अंतिम दौर का है।

‘वायु सेना को बता दिया है’

हिंदुस्तान टाइम्स में रक्षा मंत्रालय के अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि सरकार ने सीबीआई जाँच को ध्यान में रखते हुए वायु सेना को पिलैटस के साथ बात आगे न बढ़ाने की हिदायत दे दी है। प्रशिक्षण एयरक्राफ्टों की त्वरित आवश्यकता को देखते हुए सरकार-से-सरकार समझौते के रास्ते से प्रशिक्षण एयरक्राफ्टों की यथाशीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। फ़िलहाल एयर फोर्स में HAL के HJT-16 किरण प्रशिक्षण एयरक्राफ्ट पुराने पड़ रहे हैं।

भ्रष्टाचार मामले का भंडारी एंगल

जिस भ्रष्टाचार मामले में पिलैटस को प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है, वह भी कॉन्ग्रेस के गाँधी परिवार के करीबी माने जाने वाले संजय भण्डारी से जुड़ा है। सीबीआई ने पिछले महीने ही कुख्यात हथियार सौदागर संजय भण्डारी, पिलैटस और वायु सेना के अज्ञात अधिकारियों के ख़िलाफ़ 75 प्रशिक्षण एयरक्राफ्टों की खरीद में ₹339 करोड़ की रिश्वत का मामला दर्ज किया था। सौदे की कुल कीमत उस समय ₹2800 करोड़ थी। सीबीआई का आरोप है कि पिलैटस ने भण्डारी और उनकी कंपनी ऑफसेट इंडिया सोल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड के एक दूसरे निदेशक बिमल सरीन के साथ आपराधिक षड्यंत्र रचा और इसी के अंतर्गत पिलैटस ने भण्डारी के साथ जून, 2010 में एक सर्विस प्रोवाइडर अनुबंध किया।

मामला प्रकाश में तब आया था जब उपरोक्त सौदे के लिए पिलैटस की निकटतम प्रतिद्वंद्वी रही दक्षिण कोरियाई कंपनी कोरिया एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज़ ने पिलैटस को यह करार दिए जाने के खिलाफ तत्कालीन यूपीए सरकार से विरोध दर्ज कराया था। उनका दावा था कि पिलैटस की बोली के दस्तावेज़ अधूरे थे, और इसलिए उसे मिला हुआ करार रद्द होना चाहिए। दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्री ने इस मामले में भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी से बात की थी और उनसे इस निर्णय पर पुनर्विचार का आग्रह किया था। लेकिन इसका भी कोई नतीजा नहीं निकला, और अंत में यह अनुबंध पिलैटस को ही दिया गया था।

कर्नाटक: कल तय हो जाएगा सरकार का भाग्य, बागी विधायकों पर स्पीकर करेंगे फैसला

कर्नाटक की कुमारास्वामी सरकार का भाग्य कल तय हो जाएगा जब स्पीकर रमेश कुमार 16 बागी विधायकों के इस्तीफे और उन्हें अयोग्य ठहराए जाने की याचिकाओं पर सुनवाई करेंगे। इस आशय से सुप्रीम कोर्ट को जानकारी उनके वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत को दी। सिंघवी बागी विधायकों में से अधिकाँश के द्वारा दाखिल उस याचिका के उत्तर में अदालत में पेश हुए थे, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि विधानसभा अध्यक्ष उनकी (विधायकों की) मर्जी के खिलाफ उन्हें विधायक बने रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं। याचिका में यह भी कहा गया था कि ऐसा कर्नाटक में कुमारास्वामी सरकार को बचाने के लिए किया जा रहा है।

यथास्थिति का आदेश बदलने का अदालत से अनुरोध

सिंघवी ने विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अदालत से आग्रह किया कि वह अपना यथास्थिति बनाए रखने के पिछले आदेश में संशोधन करें ताकि स्पीकर विधायकों के भविष्य पर फैसला ले सकें। इसके अलावा उन्होंने अदालत को सूचित किया कि विधयकों को अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी थी। अधिकाँश विधायक 11 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के सामने पेश हुए थे। इस पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने पूछा कि आखिर क्यों विधायकों को मिलने का समय देकर भी स्पीकर उनसे नहीं मिले और विधयकों को अदालत का रुख करना पड़ा। इस पर सिंघवी ने दावा किया कि ऐसा किसी भी विधायक के साथ नहीं किया गया था।

‘आज दोपहर तक इस्तीफे स्वीकार करने का निर्देश दिया जाए’

विधायकों की ओर से पेश वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि इस्तीफ़े स्वीकार करने में हीला-हवाली इसीलिए हो रही है कि इससे सरकार अल्पमत में आ जाएगी। उन्होंने अदालत से माँग की कि स्पीकर को दोपहर तक इस्तीफ़े स्वीकार कर लेने के लिए निर्देश दिया जाए। इस्तीफा और अयोग्यता दो अलग-अलग मसले हैं। स्पीकर पहले विधयकों के इस्तीफे स्वीकार कर लें, उसके बाद उनकी योग्यता के बारे में जो निर्णय लेना हो वह ले सकते हैं।

मुस्लिमों से डरते हो और उनका वोट भी चाहिए, ऐसा नहीं चलेगा: कॉन्ग्रेस सांसद का अपनी पार्टी पर आरोप

कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने पार्टी में मुस्लिमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। उन्होंने सोमवार (जुलाई 15, 2019) को कहा कि पार्टी में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व बहुत कम है। महाराष्ट्र में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बनने वाली समितियों में मुस्लिमों के कम प्रतिनिधित्व पर चिंता जाहिर करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम नेताओं को नजरअंदाज करते हुए औरों को चुनाव लड़ाना चाहता है।

दलवई ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “मुझे लगता है कि मुस्लिमों की आबादी के अनुपात के हिसाब से अल्पसंख्यक समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है। पार्टी की रणनीतिक समिति में सिर्फ एक ही व्यक्ति रहता है। मेरे जैसे व्यक्ति को भी कमिटी में होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जब भी अन्य पार्टियों के साथ चर्चा की बात आती है, तो पार्टी मुस्लिमों को नजरअंदाज कर देती है, उनकी उपेक्षा करती है। मुस्लिम बहुल सीटों पर दूसरों को चुनाव लड़ने का मौका दिया जाता है। इस मुद्दे को लेकर वो केसी वेणुगोपाल से मिलने गए थे, लेकिन वो वहाँ पर नहीं थे।

उनके मुताबिक, हर समिति में मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व कम है। मैनिफेस्टो कमिटी में भी महज दो मुस्लिमों को शामिल किया गया है। उनका कहना है कि मुस्लिमों के मुद्दों को उठाना महत्वपूर्ण है और अगर वो (कॉन्ग्रेस) मुस्लिमों से इतना डरते हैं, तो फिर उन्हें मुस्लिमों के वोटों की क्या ज़रूरत है? उन्होंने कहा, “मुस्लिमों से इतना डरते हो और मुस्लिमों को वोट चाहिए, ऐसा नहीं चलेगा।”

गौरतलब है कि बालासाहेब थोरात को महाराष्ट्र प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी (MPCC) का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने अशोक चव्हाण का स्थान लिया है। राज्य पार्टी इकाई ने आगामी चुनावों के मद्देनजर कई समितियों का गठन किया है। हुसैन दलवई, मुजफ्फर हुसैन और आरिफ नसीम खान सहित प्रमुख मुस्लिम नेताओं को अलग-अलग समितियों का सदस्य बनाया गया है, लेकिन दलवई का कहना है कि उन्हें प्रमुख समितियों से बाहर रखा गया है। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुनाव इस साल अक्टूबर में होने वाले हैं।

चाइनीज माल जैसी चीनी अर्थव्यवस्था, 27 साल के निचले स्तर पर ग्रोथ रेट

भारत के पड़ोसी देशों की अर्थव्यवस्था ICU से गुजर रही है। पाकिस्तान के बाद अब उसके सदाबहार दोस्त चीन की हालात भी नाजुक दौर में है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध और वैश्विक स्तर पर माँग की कमी का असर चीन पर पड़ा है। शायद यही वजह है कि चीन की आर्थिक विकास की रफ्तार 27 साल में सबसे सुस्त पड़ गई है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार चीन की GDP (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 2019 की दूसरी तिमाही में 6.2% रही।

6 अरब डॉलर का कर्ज भी डूबने से नहीं बचा पाएगा पाकिस्तान को

वर्तमान वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में चीन की आर्थिक वृद्धि की रफ्तार पिछले तीन दशक में सबसे कम रही है। अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के कारण भी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग अमेरिका के खिलाफ लड़ने में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। पिछले वर्ष से चीन के आर्थिक विकास पर मंदी का दबाव पड़ा है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की रफ्तार मंद पड़ने का एक प्रमुख कारण चीन और अमेरिका के बीच जारी व्यापारिक तनाव (ट्रेड वॉर) को माना जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रम्प मना रहे हैं खुशियाँ

चीन की अर्थव्यवस्था के आँकड़ों में तीन दशक में सबसे कम वृद्धि दर की रिपोर्ट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प खुशियाँ मना रहे हैं। उन्होंने कहा, “पिछले 27 साल में इस दूसरी तिमाही में चीन में सबसे कम ग्रोथ दर्ज हुई है। यह अमेरिकी टैरिफ का नतीजा है, अब कंपनियां गैर-टैरिफ वाले देशों की ओर जाने को बेताब हैं। चीन से कंपनियां देश छोड़ कर जा रही हैं, यही वजह है कि चीन अब अमेरिका से डील करना चाहता है।”

आँकड़ों के अनुसार, साल 2019 के अप्रैल-जून के दौरान चीन की जीडीपी वृद्धि दर 6.2% रही, जबकि पहली तिमाही में यह 6.4% थी। इससे कम वृद्धि दर 1992 की जनवरी-मार्च तिमाही में दर्ज की गई थी।हालाँकि, जीडीपी के यह आँकड़े पूरे साल के लिए सरकार के छह से 6.5% के लक्ष्य के अनुरूप हैं।

बीजिंग और वाशिंगटन के बीच व्यापारिक विवाद का असर अर्थव्यवस्था की सेहत पर नजर आने लगा है। यही वजह हैं कि बीजिंग के अधिकारी अपने अमेरिकी समकक्ष के साथ व्यापारिक विवाद को सुलझाने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। नेशनल ब्यूरो ऑफ स्टेटिस्टिक्स ने कहा कि बाहरी अनिश्चितताओं को लेकर अर्थव्यवस्था जटिल दौर से गुजर रही है। ब्यूरो ने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था पर नया दबाव बना हुआ है।

संसद में मंत्रियों को Absent देखकर भड़के PM मोदी, माँगी लिस्ट

संसद में नेताओं की गैरहाजिरी के कारण प्रधानमंत्री मंगलवार (जुलाई 16, 2019) को भड़क गए। उन्होंने संसदीय समिति की बैठक के दौरान अपनी नाराजगी जाहिर की और संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी को संसद में अनुपस्थित रहने वाले मंत्रियों के नामों की लिस्ट रोजाना देने को कहा।

प्रधानमंत्री ने इस दौरान जल संकट के मुद्दे पर बात की। उन्होंने नेताओं को निर्देश दिए कि वे संसदीय क्षेत्र में अधिकारियों के साथ जल संकट पर बैठक करें और स्थानीय लोगों से भी इस बारे में बातचीत करें।

खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री ने सांसदों को राजनीति से इतर भी काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने सांसदों से कहा कि वे लोग अपने संसदीय क्षेत्र में कुछ हटकर भी काम करें। जिसमें वे स्थानीय प्रशासन की मदद लें और साथ में सामाजिक कार्यों से भी जुड़ें।

प्रधानमंत्री ने सांसदों को गंभीर बीमारियों जैसे टीबी और लैप्रोसी से लड़ने और उन्हें दूर करने के लिए मिशन की तरह काम करने का सुझाव दिया।

सांसदों की अनुपस्थिति पर संसदीय कार्यमंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि जैसा कि पीएम मोदी पहले भी कह चुके हैं कि संसद में उपस्थिति के मामले में कोई अपवाद नहीं होगा। सभी के लिए संसद की चर्चाओं में भाग लेना अनिवार्य है।

बता दें कि 14 जुलाई को पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों को नोटिस जारी करके आज की बैठक के बारे सूचित कर दिया था ताकि सभी सांसद बैठक में मौजूद रहें। लेकिन सूचना देने के बाद भी सांसदों की कुर्सी खाली रही, जिसके कारण प्रधानमंत्री भड़क उठे। इस बैठक में हिस्सा लेने वालों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी, विदेश मंत्री एस जय शंकर और वी मुरलीधरन का नाम शामिल है।

सब खुदाओं को इनकार, सिर्फ़ अल्लाह से इकरार, बगैर इसे माने मुस्लिम नहीं: सलमा अंसारी को दो टूक जवाब

हाल ही में पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी की पत्नी सलमा अंसारी ने चाचा नेहरु मदरसे में साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए मंदिर और मस्जिद का निर्माण करवाया। जिसके बाद सोमवार (जुलाई 15, 2019) को उस मदरसे के प्रांगढ़ में बने मंदिर में पूजा हुई और मुस्लिम बच्चों ने वहाँ नमाज पढ़ी।

हालाँकि सलमा अंसारी द्वारा उठाए गए इस कदम की हर ओर सराहना हुई लेकिन कुछ इस्लामी धर्मगुरुओं ने इसका खूब विरोध किया है। एक ओर जहाँ अलीगढ़ की पूर्व मेयर ने सलमा के विचार से प्रभावित होकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में मंदिर बनाने की माँग की तो वहीं AMU के प्रोफेसर मुफ्ती जाहिद का कहना है कि अगर कोई मुस्लिम है तो उसे सब खुदाओं को इनकार करना पड़ता है और सिर्फ़ अल्लाह से इकरार करना पड़ता है। और बगैर इसे माने कोई मुस्लिम नहीं हो सकता।

मंदिर बनाने के विरोध में सिर्फ़ अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने ही नहीं बल्कि सपा के पूर्व विधायक ज़मीरुल्लाह ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि मदरसे में किसी मंदिर की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा करने पर कई और जगह भी लोग मदरसों में मंदिर बनाने की माँग कर सकते हैं।

हालाँकि सलमा अंसारी ने इन सभी धर्मगुरुओं की टीका-टिप्पणी को नजरअंदाज करते हुए इस मामले पर बोला, “मैं चाहती हूँ कि हिंदुस्तान के निर्माण में सबकी भागीदारी होनी चाहिए। यहाँ मैं केवल अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए चिंतित हूँ। मॉब लिचिंग जैसे अपराध देश के ऊपर धब्बा हैं। मदरसा चलाते हुए इन चीजों को ध्यान रखने की जरूरत है।”

5 साल से JNU में बतौर गार्ड तैनात रामजल मीणा ने निकाला एंट्रेंस एग्जाम, पढ़ेंगे रशियन

जब राजमल मीणा ने 2014 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में एक गार्ड के रूप में क़दम रखा था, तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह इसी यूनिवर्सिटी के छात्र होंगे। राजस्थान के करौली से आने वाले मीणा ने रशियन भाषा में बीए ऑनर्स कोर्स में दाखिले की परीक्षा पास की है। मीणा ने कहा, “जेएनयू की सबसे अच्छी बात यह है कि यहाँ लोग सामाजिक भेदभाव में विश्वास नहीं रखते। तैयारी के दौरान शिक्षकों से लेकर छात्रों तक, सभी ने मेरी हौसला अफजाई की और अब वे मुझे बधाई दे रहे हैं।“

मीणा ने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है, जैसे उन्हें रातोरात बहुत बड़ी ख्याति मिल गई हो। मीणा के पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा-दीक्षा गाँव के स्कूल में ही हुई। लेकिन, बाद में पढ़ाई छोड़नी पड़ी। गाँव से कॉलेज की दूरी 28-30 किलोमीटर थी और उन्हें अपने पिता का हाथ बँटा कर घर-परिवार के लिए रुपए भी कमाने थे।

लेकिन मीणा ने हार नहीं मानी। पिछले वर्ष उन्होंने डिस्टेंस एजुकेशन के द्वारा राजस्थान यूनिवर्सिटी से राजनीतिक विज्ञान, इतिहास और हिंदी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। जेएनयू के कुलपति एम जगदीश ने कहा कि संस्थान ने हमेशा अलग-अलग सामाजिक परिवेश से आने वाले छात्रों का हौसला बढ़ाया है।

मीणा अभी मुनिरका में किराए पर रहते हैं। वो शादीशुदा हैं और उनकी 3 बेटियाँ भी हैं। मीणा मानते हैं कि परिवार की वित्तीय ज़रूरतों को पूरा करने में वह ख़ासे व्यस्त रहे, लेकिन उनके मन में कहीं न कहीं नियमित शिक्षा के लिए किसी कॉलेज में एडमिशन न ले पाने का दुःख ज़रूर था। उन्होंने जब जेएनयू के शैक्षिक वातावरण को देखा, तब उनकी यह इच्छा फिर से जाग उठी। वह अपनी ड्यूटी के दौरान व उसके बाद प्रवेश परीक्षा की तैयारी करते थे।

मीणा अपने फोन में ही रोज़ अखबार पढ़ा करते थे और जेएनयू के छात्र भी पीडीएफ नोट्स देकर उनका सहयोग करते थे। विदेशी भाषा पढ़कर मीणा का विदेश घूमने का सपना है। वह सिविल सर्विसेज की भी तैयारी करना चाहते हैं। लेकिन, रुपयों को लेकर उनकी चिंता बनी हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी घर की वित्तीय ज़रूरतों को लेकर चिंतित रहती है। जेएनयू में नौकरी करते हुए नियमित शिक्षा पाना कठिन है, इसीलिए उन्होंने नाइट शिफ्ट दिए जाने की माँग की है। फिलहाल उन्हें 15,000 रुपए प्रति महीने मिलते हैं।

जेएनयू के मुख्य सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि नियमित शिक्षा के साथ जेएनयू में नाइट शिफ्ट में नौकरी कर पाना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें मीणा पर गर्व है और उन्हें हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। मीणा ने बताया कि फरवरी 2016 में हुए प्रकरण (जेएनयू नारेबाजी प्रकरण) के कारण कुछ लोगों ने अपने मन में इस संस्थान को लेकर ग़लत छवि बना ली है, लेकिन आज हर क्षेत्र में कई बड़े पदों पर जेएनयू से पढ़े लोग हैं। उन्होंने कहा कि वे भी यहाँ से पढ़ कर कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं।