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नहा रही युवतियों के साथ मोहम्मद समीर व जावेद ने की छेड़खानी, विरोध करने पर परिजनों को पीटा

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में महिलाओं से दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया है। भोपा क्षेत्र के रजबहे गाँव में जब कुछ युवतियाँ नहा रही थीं, तब मुस्लिम समुदाय के कुछ युवक वहाँ पहुँच गए और उन्होंने फब्तियाँ कसने के साथ-साथ अश्लील हरकतें की। इतना ही नहीं, इसके बाद ‘उलटे चोर कोतवाल को डाँटे’ को चरितार्थ करते हुए आरोपित युवक अपने साथियों के साथ गाँव में पहुँच गए और पीड़ित पक्ष के परिजनों के साथ मारपीट की। इस घटना में 2 महिलाओं समेत 3 लोग घायल हो गए। उक्त युवतियाँ गाँव की एक शादी में भाग लेने आई थीं और घूमने-फिरने के दौरान नहा रही थी, जब उनके साथ छेड़खानी हुई।

दो वर्गों के बीच का मामले होने के कारण गाँव में सांप्रदायिक तनाव व्याप्त है। पुलिस फ़ोर्स तैनात कर दी गई है। पुलिस को मौके पर स्थिति को शांत करने के लिए लाठियाँ तक भी भाजनी पड़ी। तनाव के कारण ख़ुद एसपी को घटनास्थल पर कैम्प करना पड़ा। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में एकतरफा कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पीड़ित पक्ष के ही तीन युवकों को हिरासत में ले लिया। ग्रामीणों ने जब थाना पहुँच कर विरोध प्रदर्शन किया और हिंदूवादी संगठनों ने आवाज़ उठाई, तब जाकर उक्त युवकों को छोड़ा गया।

हिंदूवादी संगठनों और पुलिस के बीच थाने में नोंकझोंक भी हुई क्योंकि संगठनों का आरोप था कि पुलिस उल्टा पीड़ित पक्ष पर ही कार्रवाई कर रही है। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने एसएसपी से भी मुलाक़ात कर अपनी बात रखी। इसके बाद पुलिस ने आरोपितों पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया, तब जाकर ग्रामीण शांत हुए। गाँव में कई थानों की पुलिस पहुँची, तब जाकर मामला शांत हुआ। समीर व जावेद नामक युवकों के ख़िलाफ़ छेड़छाड़ का मामला दर्ज किया गया है। गाँव में अभी भी तनाव व्याप्त है और पुलिस कैम्प कर रही है।

जिन संगठनों ने पीड़ितों की ओर से पुलिस के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन कर मामले में सही तरीके से कार्रवाई करने की माँग की, उनमें विश्व हिन्दू परिषद, शिवसेना और हिन्दू संघर्ष समिति शामिल थी। इन सभी संगठनों के पदाधिकारियों व कार्यकताओं ने पीड़ितों का पूरा साथ दिया और पुलिस से भी बातचीत की। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला काफ़ी गंभीर है क्योंकि एक तो युवकों ने छेड़खानी की और ऊपर से महिलाओं सहित अन्य परिजनों की पिटाई भी की। इस बीच कुछ लोगों ने दोनों पक्षों में समझौता कराने की भी कोशिश की। हालाँकि, पुलिस इस बात से भड़क उठी।

पुलिस ने कहा कि अब इस मामले में समझौते का कोई सवाल ही नहीं है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने ख़ुद स्वीकार किया कि गाँव में इस तरह की घटनाएँ बढ़ गई हैं और इसलिए दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पीड़ित युवतियाँ लुधियाना से आई थी। वे गाँव में एक परिवार में रिसेप्शन में हिस्सा लेने आई थीं। ख़बर के अनुसार, छेड़खानी के आरोपित दोनों युवकों ने एक दर्जन के क़रीब ‘अपने लोगों’ के साथ लौट कर पीड़ित पक्ष की पिटाई की। पुलिस अभी भी मामले की जाँच में लगी हुई है।

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने पहचान उजागर कर खुफिया अधिकारियों का जीवन खतरे में डाला: पूर्व रॉ अधिकारी का दावा

भारतीय खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के एक पूर्व अधिकारी ने सनसनीखेज खुलासा किया है। इसके मुताबिक पूर्व उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने 1990-92 के बीच ईरान में भारतीय राजदूत रहते तेहरान में रॉ के सेटअप को उजागर कर वहाँ काम कर रहे अधिकारियों की जिन्दगी को खतरे में डाल दिया था।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि अंसारी ने आईबी के एडिशनल सेक्रेटरी रतन सहगल के साथ मिलकर 1992 बम धमाकों से पहले रॉ के गल्फ यूनिट को पंगु कर दिया था। (एडिटर्स नोट: शायद वे 1993 के धमाकों की बात कर रहे थे, लेकिन भूल से ट्वीट में गलत साल का उल्लेख कर दिया है।)

द संडे गार्डियन में प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पूर्व रॉ अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तेहरान में राजदूत होने के दौरान “रॉ के अभियानों को नुकसान पहुँचाने” को लेकर अंसारी के खिलाफ जाँच की माँग की है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने दावा किया है कि अंसारी न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करने में नाकाम रहे थे, बल्कि ईरान की सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी एसएवीएके की मदद भी की थी, जिसके कारण रॉ और उसके अभियानों को गंभीर नुकसान पहुँचा। अधिकारियों के मुताबिक चार बार भारतीय दूतावास में कार्यरत अधिकारियों और राजनयिकों का एसएवीएके ने अपहरण किया और अंसारी ने जान-बूझकर भारत के राष्ट्रीय हितों का ख्याल नहीं रखा।

पूर्व रॉ अधिकारी सूद ने द संडे गार्डियन को मई 1991 में भारतीय अधिकारी संदीप कपूर के अगवा होने की घटना के बारे में बताया। सूद के मुताबिक, कपूर को एसएवीएके ने तेहरान एयरपोर्ट से अगवा कर लिया। उस वक्त तेहरान में तैनात अंसारी को इसके बारे में सूचना दी गई, लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कपूर की तलाश में कोई कदम नहीं उठाया। भारतीय विदेश मंत्रालय को भेजी गई कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट में एसवीएके की संलिप्तता का उल्लेख करने की बजाए कपूर की गतिविधियों को संदेहास्पद बताते हुए कहा था कि एक स्थानीय महिला से उनके संबंध थे।

अगवा किए जाने के तीन दिन बाद एक अज्ञात कॉल से भारतीय दूतावास को सूचना दी गई कि कपूर सड़क किनारे पड़े हैं। कपूर को काफी ड्रग्स दिया गया था, जिसका सालों तक उन पर असर रहा।

अगस्त 1991 की एक अन्य घटना का उल्लेख करते हुए सूद ने द संडे गार्डियन ​को बताया ईरान के धार्मिक केंद्र कोम की नियमित तौर पर यात्रा करने वाले और हथियार चलाने की ट्रेनिंग ले रहे एक कश्मीरी युवा पर रॉ की नजर थी। रॉ के नए स्टेशन चीफ, डीबी माथुर को साथी अधिकारियों ने इसके बारे में अंसारी को जानकारी नहीं देने की सलाह दी। हालाँकि, माथुर ने इसकी सूचना अंसारी को दी। कथित तौर पर अंसारी ने इसकी जानकारी ईरान के विदेश विभाग को दी, जिससे एसएवीएके को इसकी भनक लग गई और ​फिर माथुर अगवा हो गए।

माथुर को वापस लाने के लिए जब अंसारी ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो रॉ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से अटल बिहारी वाजपेयी को इसकी जानकारी दी। वाजपेयी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव को इसके बारे में बताया। आखिरकार, अगवा होने के चार दिन बाद माथुर को एविन कारागार से छोड़ा गया और 72 घंटे के भीतर ईरान छोड़ने का फरमान सुनाया गया। रिहा होने के बाद माथुर ने बताया कि अंसारी ने ईरानी विदेश मंत्रालय को जो जानकारी दी उसके कारण एसएवीएके को उनके स्टेशन चीफ होने का पता चला। साथ ही एसवीके को सूद के बारे में भी जानकारी थी।

प्रधानमंत्री को लिखे खत में रॉ के स्टेशन चीफ रहे पीके वेणुगोपाल को एसएवीएके द्वारा अगवा करने और पीटने की घटना का भी उल्लेख है। पत्र में दावा किया गया है कि अंसारी ने ईरानी अधिकारियों के सामने कभी इस घटना को लेकर आपत्ति दर्ज नहीं कराई। पत्र में यह भी कहा गया है कि तेहरान में पाकिस्तानी राजदूत के साथ अपनी लंबी और नियमित मुलाकातों का ब्यौरा भी अंसारी ने विदेश मंत्रालय को नहीं दिया।

रॉ के अधिकारी चाहते हैं कि प्रधानमंत्री इस मामले की गहन जाँच कराएँ। पत्र में लिखा गया है, “दुबई, बहरीन और सउदी अरब के अपने अन्य समकक्षों के साथ अंसारी ने इस क्षेत्र में रॉ की ईकाइयों को नुकसान पहुॅंचाया। जब मुंबई में धमाके हुए थे, तब खाड़ी देशों में रॉ की गतिविधियों का भट्ठा बैठ चुका था।”

सूद का दावा है कि 1993 के मध्य में जब अंसारी का ईरान से तबादला हुआ तो भारतीय दूतावास में जश्न मनाया गया।

उप राष्ट्रपति के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद से ही हामिद अंसारी विवादों में हैं। वे देश के हर जिले में शरीयत अदालत के गठन के विचार का समर्थन कर चुके हैं। उप राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा होने के बाद उन्होंने एक बयान जारी कर कहा था कि बतौर नागरिक वे असुरक्षित और असहज महसूस कर रहे हैं। उनके बयान की समाज के सभी वर्गों ने निंदा की थी। उन्होंने इस्लामी कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएपफआई) के कार्यक्रम में भी ​शिरकत की थी। राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआईए) ने इस संगठन को केरल के विवादित ‘लव जिहाद’ मामलों में संलिप्त पाया है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में जिन्ना की तस्वीर लगाने का समर्थन कर रहे छात्रों के पक्ष में भी वे खड़े हुए थे।

एस राधाकृष्णन के बाद अंसारी दूसरे ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें बतौर उपराष्ट्रपति लगातार दो कार्यकाल मिला था।

सरकारी पैसे से फल-फूल रही ईसाई संस्था फैला रही अपनी आस्था, छात्रों के बीच बांटा ‘चमत्कारी’ परचा

‘सेक्युलर’ संविधान की शपथ लेने वाली सरकार के पैसे से फल-फूल रही एक ईसाई संस्था केरल के आलप्पुषा जिले में अपनी आस्था फैलाने के साथ-साथ चमत्कार के नाम पर अन्धविश्वास को भी हवा दे रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुछ दिन पहले जिले के एससीयू नामक सरकारी व्यवसायिक उच्चतर माध्यमिक स्कूल में इस संस्था के प्रोपेगैंडा अख़बार ‘क्रेउपासनम’ की प्रतियाँ छात्रों के बीच बांटकर और इसे संभाल कर रखने का निर्देश दिया गया। इम्तिहान में अच्छा करने और अच्छे अंक हासिल करने के लिए अख़बार की कॉपी छात्रों से अपनी किताब में डालकर तकिए के नीचे रख कर सोने को कहा गया।

स्कूल के ही टीचर की कारस्तानी

ऐसा गैर-सेक्युलर कृत्य करने वाला व्यक्ति और कोई नहीं, सेक्युलर सरकार से तनख्वाह पाने वाला कक्षा 8 का अध्यापक जोसफ ही है। कथित तौर पर उसी ने छात्रों को अख़बार के इस ‘चमत्कारी’ गुण के बारे में बताया। जब अभिवावकों को यह पता चला तो वे बिफ़र पड़े और उच्च अधिकारियों से इसकी शिकायत की। लेकिन, केरल के शिक्षा विभाग द्वारा खबर लिखे जाने तक कोई कार्रवाई किए जाने की सूचना नहीं थी। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक अभिवावकों की शिकायत के बाद जोसेफ़ मास्टर साहब छुट्टी लेकर निकल गए

लड़की की जान खतरे में डाल चुका है अख़बार

इस अख़बार के कारण पूर्व में एक 27 वर्षीय युवती की जान जाते-जाते बची थी। असल में, एक महिला ने अपनी बेटी को यह अख़बार कतरा-कतरा कर डोसे में मिलाकर खिला दिया था, जिसके बाद लड़की को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ गया था। यह परिवार चाहता था कि उसकी बेटी की शादी जल्द-से-जल्द हो जाए। इसका उपाय बताते हुए फादर वीपी जोसेफ़ वलियावीतील ने उन्हें ऐसा करने की सलाह दी थी। फादर वीपी जोसेफ़ इस विवादित अख़बार को प्रकाशित करने वाली संस्था क्रेउपासनम मारिआन रिट्रीट सेण्टर एंड सोशिओ-कल्चरल सेंटर चलाते हैं। उन्होंने महिला को इस अख़बार की प्रति ₹2,000 में बेची थी।

मई, 2019 में केरल शास्त्र साहित्य परिषद ने जिलाधिकारी और जिला पुलिस से क्रेउपासनम सेंटर के खिलाफ ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज (ऑब्जेक्शनेबल एंड एडवर्टाइज़मेन्ट) एक्ट के अंतर्गत शिकायत की थी। शिकायत के अनुसार सेंटर की कथित जालसाज़ी से सैकड़ों लोग परेशान हैं। दुर्भाग्य से केरल में अन्धविश्वास-रोधी कानून नहीं है और इसी का फायदा उठाकर क्रेउपासनम जैसी संस्थाएं अपनी आस्था को चमत्कार का कवर चढ़ाकर बेचती हैं।

ईशा गुप्ता ने होटल मालिक पर लगाया आँखों से रेप करने का आरोप, कहा- ‘तुम्हें कीड़े पड़ें’

फ़िल्म अभिनेत्री ईशा गुप्ता ने एक व्यक्ति पर आँखों से रेप करने का आरोप लगाया है। ईशा गुप्ता का कहना है कि उक्त व्यक्ति ने उन्हें असहज महसूस कराया। गुप्ता ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। आरोपित व्यक्ति दिल्ली के एक रेस्टॉरेंट का मालिक है। इमरान हाशमी अभिनीत फ़िल्म ‘जन्नत-2’ से बॉलीवुड में क़दम रखने वाली ईशा ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए लिखा:

“अगर मेरे जैसी महिला इस देश में पीड़ित और असुरक्षित महसूस कर सकती हैं तो सोचिए, आम लड़कियों का क्या होता होगा? मेरे साथ 2 बॉडीगॉर्ड थे, फिर भी मैंने ऐसा महसूस किया कि मेरा बलात्कार हुआ है। रोहित विग, तुम एक सूअर हो। तुम्हे कीड़े पड़े। रोहित विग जैसे लोगों की वजह से ही लड़कियाँ सुरक्षित नहीं हैं। तुमनें मुझे अपनी आँखों से घूरा और तुम्हारी निगाहें ही काफ़ी थी।”

“वह ऐसा व्यक्ति है जो सोचता है कि लड़कियों को रात भर घूरना और असहज कर देना सही है। उसने मुझे छुआ नहीं और न ही कुछ कहा लेकिन लगातार घूरता रहा। ऐसा उसने इसलिए नहीं किया क्योंकि मैं एक अभिनेत्री हूँ बल्कि मेरे महिला होने की वजह से उसने ऐसा किया। हमलोग कहाँ सुरक्षित हैं?”

ईशा गुप्ता के आरोपों के बाद लोगों ने रोहित का फोटो शेयर किया, जिसे गुप्ता ने रीट्वीट किया। ईशा गुप्ता दरअसल रेस्टॉरेंट में अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने गई थीं। ‘टोटल धमाल’ और ‘रुस्तम’ जैसी बड़ी फ़िल्मों में अभिनय कर चुकीं ईशा पर एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि वह अपनी फ़िल्म चलाने के लिए विवाद पैदा कर रही हैं। मोहित शर्मा नामक व्यक्ति ने लिखा, “फ़िल्म रिलीज होने के बाद अगर कोई दर्शक न मिले तो एक कंट्रोवर्सी पैदा कीजिए। इससे मदद मिलती है। वाह।”

इसके बाद ट्विटर पर ईशा गुप्ता ने उक्त व्यक्ति को जवाब देते हुए कहा कि तुम गंदगी हो। गुस्साई ईशा ने पूछा कि तुम मर्द लोग अपने आप को क़ानून से ऊपर समझते हो क्या? ईशा ने पूछा कि क्या महिलाओं को सुरक्षित महसूस करने का अधिकार नहीं है?

मंदिर ध्वंस और इस्लामी हमलों पर हिन्दू आखिर चुप क्यों रह जाता है?

मेरे एक मित्र पूछा, “मीडिया और ‘बुद्धिजीवी’ वर्ग की बात छोड़ो, आम हिन्दू क्यों आवाज़ नहीं उठाता? दिल्ली में मंदिर ध्वंस होने पर यह सन्नाटा क्यों है?” हम दोनों का ही यह मानना था कि हिन्दू होने ने नाते यह तकलीफदेह था। मैंने कहा, “मेरे लिए मंदिरों के ध्वंस से भी ज़्यादा तकलीफदेह उसे निगलती ये चुप्पी है।”

सदमे और सन्नाटे का रिश्ता

यह सन्नाटा कमोबेश हमारी (हिन्दुओं की) मानसिकता, हमारी आत्मा की ‘विशिष्टता’ बन गया है, और यह सदियों से बदस्तूर ऐसे ही है। एक सवाल जो कई लोगों के मन में उठता है, वह ये है कि क्या मध्ययुगीन (दिल्ली सल्तनत और मुगलिया काल) समय में जब आक्रांताओं के झुण्ड मंदिरों पर टूट पड़ते थे, तब भी ऐसे ही होता रहा होगा? मेरे हिसाब से काफ़ी सारी समानताएँ हैं उस समय में और आज में। हिंसक भीड़ बेख़ौफ़ भी थी और मज़हबी हुक्म की तामील करती हुई, उस समय भी और आज भी। हिन्दुओं ने उस समय भी पलटवार नहीं किया, और आज भी नहीं। खाली मुँह बंद कर के तमाशबीन बने खड़े रहे। यह सन्नाटा सदमे से आता है। सदमे और सन्नाटे का अलग ही रिश्ता होता है।

मनोविज्ञान के विशेषज्ञ होने के नाते गवाह के तौर पर मैंने कई सारे आपराधिक मुकदमों में भागीदारी की है। उनमें से एक मुकदमे में पीड़िता एक 17 साल की लड़की थी, और जज का मानना था कि आरोपित लड़के को पुलिस द्वारा फँसाया जा रहा है। उनकी इस धारणा का आधार यह था कि लड़की न चिल्लाई न ही उसने कोई प्रतिरोध किया, केवल चुप रही। मैंने लड़की की मानसिक हालत की जाँच कर उसके क्लिनिकल सदमे (पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर, PTSD) में होने की बात अपनी रिपोर्ट में लिखी थी। जज साहब को उस रिपोर्ट पर विश्वास नहीं हो रहा था, और उन्होंने मुझसे पूछा कि अगर लड़की को सही में सदमा लगा था तो वह चुप रहने की बजाय चिल्लाई या चीखी क्यों नहीं? उसने आरोपित से लड़ने का प्रयास क्यों नहीं किया?

“योर हॉनर, लड़की इसलिए नहीं चीखी चिल्लाई, इसलिए नहीं प्रतिरोध किया क्योंकि सदमे का मिजाज़ ही ऐसा होता है। अपनी जान गंभीर खतरे में पाकर पीड़ित सुन्न पड़ जाता है। इसका मतलब यह नहीं कि लड़की ने लड़के को हाँ कर दी थी।” मैंने जज साहब को बताया। साथ ही मैंने उन्हें मनोवैज्ञानिक पहलू कुछ हद तक समझाने का प्रयास किया।

जिस समय इंसान सदमे से गुज़र रहा होता है, या फिर उसे सदमा पहुँचाने वाली बातें फिर से याद दिलाईं जातीं हैं, उस समय इंसान के दिमाग का जो हिस्सा बोलने को नियंत्रित करता है (Broca’s area), वह सुन्न पड़ जाता है या बहुत कम हरकत करता है। इसीलिए जब इंसान किसी सदमा पहुँचाने वाली घटना से गुज़र रहा होता है, जैसे वह लड़की गुज़री, तो वह चिल्लाता नहीं है। मैंने बेसेल वन डर कॉल्क का हवाला भी दिया, जिन्होंने यह खोज की थी। जज ने पूछा कि क्या मैं इस विषय पर उन्हें और जानकारी दे सकता हूँ। मुझे दिख रहा था कि यह पहलू समझने के बाद उनका मुक़दमे के प्रति, आरोपित के प्रति रवैया बदल गया, और यह उनके फैसले में भी दिखा।

बाद में जज साहब ने मुझे अपने चैम्बर में बुलाया। उन्होंने कहा कि वह चुप्पी और सदमे के इस रिश्ते को और समझना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि उनके जज के तौर पर कैरियर में जिस किसी पीड़िता ने प्रतिरोध नहीं किया, चीखी-चिल्लाई नहीं, उसके मामले में उन्होंने आरोपित को बरी कर दिया, क्योंकि उनका मानना था कि ऐसे हर मामले में पीड़िता झूठ बोल रही थी। “आज मुझे ऐसा करने पर ग्लानि हो रही है।” उन्होंने मुझसे कहा। साथ ही उन्होंने मुझसे इस विषय पर नेशनल जुडिशल अकादमी में भी एक भाषण देने का अनुरोध किया।

मैं यह साफ़ कर देना चाहता हूँ कि उत्पीड़न के कई सारे सच्चे मामलों में महिलाओं और युवतियों की एक बड़ी संख्या होती है, जो अपने सदमे को शब्दों में बयान नहीं कर पातीं हैं। उनका सदमा उनके ‘सिस्टम’ पर इतना ज्यादा हावी होता है।

यही चीज़ युद्धक्षेत्र से लौटे सैनिकों, आपदा पीड़ितों या किसी भी प्रकार का उत्पीड़न झेलने वाले एक बड़ी संख्या के लोगों पर लागू होती है। उनका सदमा इतना ज्यादा गहरा होता है कि कई बार सदमा ही यादों को दबा लेता है, और/या फिर उनके दिमाग के बोलने को नियंत्रित करने वाले हिस्से (Broca’s area) के साथ खिलवाड़ करता है।

यह व्यक्तियों ही नहीं, समाजों पर भी लागू होता है

आज मनोवैज्ञानिक रिसर्च के माध्यम से यह स्थापित सत्य है कि व्यक्तियों की याददाश्त पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाली यही चीज़ समूहों पर भी लागू होती है। पूरा-का-पूरा समाज एक सदमाग्रस्त व्यक्ति की ही तरह व्यवहार कर सकता है। इसे हम ‘सामुदायिक/सामाजिक सदमा’ (collective trauma) कह सकते हैं। इससे गुज़रने वाले समाजों के लोग अक्सर अपने साथ हुई हिंसा या ज़्यादती को शब्दों में बयान नहीं कर पाते।

हिन्दू समाज के लिए शायद सबसे बड़ा सदमा अपने मंदिरों का विध्वंस ही रहा है, और सदमाग्रस्त हिन्दू समाज ने वह समय भी सन्नाटे में काटा, और वह उन यादों को भी सन्नाटे में ही संजोए है। इसी लिए आज भी जब किसी मंदिर का ध्वंस होता है तो हिन्दू समाज को आवाज़ उठाने में हिचक होती है। उनके अंदर यह सदमा सामाजिक रूप से घर कर बैठा।

सदमे की भाषा ही सन्नाटा होता है। जितना सदमे का दौर लम्बा खिंचता है, उतना ही व्यक्तियों में (और समाजों में) सदमा गहराई तक घर करता जाता है। एली वीसल (यहूदियों के नाज़ी हत्याकाण्ड से गुज़र चुके लेखक) का यह मानना था कि सदमाग्रस्त समाज पीढ़ी-दर-पीढ़ी यादों की विरासत को सन्नाटे के ज़रिए ही सौंपता है। उनके अनुसार सन्नाटे में ही सदमे की यादें छिपी होतीं हैं। क्या इसका यह मतलब है कि हिन्दू सभ्यता के पुनर्निर्माण के लिए इस सन्नाटे, इस चुप्पी को तोड़ना और पूरे समाज में बैठे उन मनोवैज्ञानिक घावों को भरने की ज़रूरत है? क्या दुखती रग का इलाज नहीं होगा, हिन्दू समाज को क्या आंतरिक शांति और आगे बढ़ने की गति मिल सकती है?

मध्ययुगीन हिन्दुओं ने अपने मंदिरों के ध्वंस को देखने पर क्या प्रतिक्रिया दी होगी, इसकी कल्पना खासी मुश्किल नहीं है? शुरुआती नकार की मुद्रा और झटके के बाद आत्मसमर्पण, बेबसी और शर्म के आगे हिन्दुओं ने घुटने टेक दिए होंगे। जब मंदिरों पर हमला हज़ारों की संख्या में हो रहा हो, तो उसकी मनोवैज्ञानिक परिणति किस प्रकार होगी, यह सोचना कोई मुश्किल चीज़ नहीं है। हिन्दुओं के ज़ख्म (नाज़ियों के) गैस चैंबरों में मारे गए दसियों लाख यहूदियों या (स्टालिन-लेनिन के) गुलागों और अकालों में मारे गए करोड़ों रूसियों के परिजनों और वंश से अलग नहीं हैं।

आज

जब कश्मीर के मंदिरों पर हमला हो रहा था तो बाकी देश के हिन्दू चुप थे। इस विषय पर चर्चा करता कोई लेख, कोई वाद-विवाद, कोई बौद्धिक मुझे नहीं मिला। आज जब दिल्ली में एक मंदिर तोड़ा गया तो भी एक सन्नाटे में ही अधिकाँश हिन्दू चीख रहे हैं। इस सन्नाटे की जड़ें ही मेरी किताब ‘द इनफिडेल नेक्स्ट डोर’ का विषय है, जो इस विषय (ट्रांस-जेनेरशनल ट्रॉमा) पर आधारित है।

आज हमें सक्रिय लोगों की ज़रूरत है, जो इस सन्नाटे को तोड़ कर हिम्मत के साथ बोलें। हमें ऐसे लोग चाहिए जो बीते कल की आँखों में आँखें डाल कर हमारे उत्पीड़ित समाज की आवाज़ बनें; हिन्दुओं को ही याद दिलाएँ कि एक समय वह गुलाम नहीं, बल्कि अपने भाग्य-विधाता थे। हमे लोगों के ज़मीर को जगाने वाले चाहिए। हमें एक बौद्धिक वर्ग चाहिए, चाहे वह जितना छोटा हो। यही वर्ग समाज को इस सदमे से उत्पन्न ठहराव से बाहर निकाल सकता है।

हिन्दू समाज के अन्तस की गहराई में पैठी लकीरें निकल कर बाहर आ रहीं हैं, और हर उस चीज़ को चुनौती दे रहीं हैं, जो हमारा एक समय निश्चित विश्वास थीं। अंदर तक पैवस्त ज़िल्लत बाहर आने को बेताब है। आज का हिन्दू अपनी सरकार और अपने नेता को लेकर मुखर है। वह इस देश पर अपना हक़ जमा रहा है, और हक़ माँग रहा है। और इसी का विस्तार वह उस आस्था के पालन के हक़ के तौर पर कर रहा है, जिसके लिए उसने हज़ार साल का उत्पीड़न झेला है। शायद किसी भी और कौम से ज़्यादा।

(रजत मित्रा वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक हैं, जिन्होंने हार्वर्ड में रिफ्यूजी ट्रॉमा को करीब से देखा और उसका अध्ययन किया है। फ़ेसबुक पर मूलतः अंग्रेजी में प्रकाशित उनके लेख का अनुवाद मृणाल प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव ने किया है। )

गर्व का रंग है भगवा: कॉन्ग्रेस सांसद ने अपनी ही पार्टी को दिखाया आइना

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ने टीम इंडिया की भगवा जर्सी का बचाव किया है। तिरुअनंतपुरम सांसद ने कहा कि भगवा गर्व का रंग है। उन्होंने अपनी पार्टी के रुख के विपरीत जाते हुए कहा कि इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हुए मैच में टीम इंडिया के खिलाड़ियों द्वारा भगवा जर्सी पहनना आईसीसी के नियमों के अनुरूप है और इसमें कुछ भी ग़लत नहीं है। बता दें कि आईसीसी ने यह नियम बनाया है कि जब मैदान पर भिड़ रहीं दो टीमों की जर्सी का रंग समान हो तो मेहमान टीम को अपनी जर्सी में बदलाव करना होगा।

मैच के दिन भगवा जैकेट पहनने पर थरूर ने कहा कि ऐसा उन्होंने टीम इंडिया के समर्थन में किया है। बता दें कि कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भाजपा पर आरोप लगाया था कि वो खेल का भगवाकरण कर रही है। कॉन्ग्रेस के कई नेताओं ने इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। कॉन्ग्रेस नेता नसीम ख़ान ने इसका विरोध करते हुए कहा था, “मोदी सरकार जब से आई है तब से भगवा राजनीति शुरू हो गई है। तिरंगे का सम्मान होना चाहिए लेकिन यह सरकार हर चीज के भगवाकरण की तरफ बढ़ रही है।

महाराष्ट्र से कॉन्ग्रेस विधायक एमए खान ने कहा “ये सरकार हर चीज को अलग नजर से देखने और दिखाने की कोशिश पूरे देश में पिछले पाँच वर्षों से कर रही है। ये सरकार भगवाकरण की तरफ इस देश को ले जाने का काम कर रही है।” कॉन्ग्रेस नेताओं की इस बयानबाज़ी के बाद शशि थरूर का यह बयान अहम है क्योंकि उन्होंने पार्टी के रुख के बिपरीत बयान दिया है और अपनी ही पार्टी के नेताओं को आइना दिखाया है।

केरल: पादरी जॉर्ज 6 महीने से कर रहा था हॉस्टल में रह रहे बच्चों का यौन शोषण, गिरफ़्तार

केरल में एक ईसाई पादरी द्वारा बच्चों का यौन शोषण करने का मामला सामने आया है। पादरी पर आरोप है कि वह 6 महीने तक लड़कों का यौन शोषण करता रहा। पादरी एक बॉयज होम हॉस्टल का डायरेक्टर है, जो ग़रीब परिवार के बच्चों को शिक्षा और रहने की व्यवस्था प्रदान करता है। पादरी जॉर्ज उर्फ़ जेरी के ख़िलाफ़ बच्चों के माता-पिता ने शिकायत दर्ज करवाई थी। ये वो बच्चे थे, जो पादरी से तंग आकर हॉस्टल से निकल कर भाग गए थे।

ये घटना पेरम्बदम की है, जहाँ शनिवार (जुलाई 6, 2019) की रात उक्त पादरी ने एक बार फिर से बच्चों का यौन शोषण करने की कोशिश की, लेकिन वे भाग निकले। आज रविवार को आरोपित पादरी को गिरफ़्तार कर लिया गया है। डरे-सहमे 7 बच्चे जब रात को भाग रहे थे, तब उन्हें सड़क पर एक व्यक्ति मिला। बच्चों से उस व्यक्ति की मदद से अपने घर पर कॉल किया और फिर सारी बातों की जानकारी दी।

पादरी के ख़िलाफ़ नाबालिगों का यौन शोषण और पोस्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। 40 वर्षीय पादरी पर आरोप है कि वह दिसंबर 2018 से ही लड़कों का यौन शोषण कर रहा था। पादरी जॉर्ज को 14 दिनों के लिए रिमांड पर पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है।

‘भगवा आतंकवाद’ के अब्बा दिग्विजय ने मॉब लिंचिंग का दोष BJP-RSS पर मढ़ा

इंदौर-3 से भाजपा विधायक आकाश विजयवर्गीय के बल्ला कांड को लेकर राजनीति का दौर अब भी जारी है। कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस घटना का जिक्र करते हुए भाजपा और आरएसएस की मानसिकता पर सवाल उठाए। सिंह ने कहा कि भाजपा और आरएसएस की मानसिकता की वजह से ही मॉब लिंचिंग की घटनाएँ बढ़ रही हैं।

दिग्विजय सिंह ने कहा, “देश में मॉब लिंचिंग के दो कारण हैं। पहला यह है कि लोगों को समय पर न्याय नहीं मिलता है, जिससे लोगों में गुस्सा बढ़ जाता है और वह ऐसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। दूसरी वजह है भाजपा और आरएसएस की मानसिकता। आकाश विजयवर्गीय को ही देख लीजिए, उन्होंने कहा था कि हमें सिखाया जाता है कि पहले आवेदन, फिर निवेदन और फिर अंत में दे दना-दन। यह भाजपा और आरएसएस की मानसिकता का ही परिणाम है।” इससे पहले दिग्विजय सिंह ‘भगवा आतंकवाद’ की थ्योरी के भी प्रणेता माने जाते हैं। जिसकी पोल RVS मणि ने अपने किताब ‘हिन्दू टेरर’ में खोल दी थी।

गौरतलब है कि, बुधवार (जून 26, 2019) को इंदौर-3 विधानसभा सीट से पहली बार विधायक चुने गए आकाश विजयवर्गीय ने शहर के गंजी कम्पाउंड क्षेत्र में एक जर्जर भवन ढहाने की मुहिम के विरोध के दौरान बढ़े विवाद के बाद आकाश ने नगर निगम के एक अधिकारी की क्रिकेट के बैट से पिटाई कर दी थी, जिसके बाद उन्हें हिरासत में ले लिया गया था और फिर 4 दिन तक जेल में रहने के बाद रविवार (जून 30, 2019) को जेल से रिहा हो गए। जेल से रिहा होने के बाद आकाश ने कहा था, “मैं जनता की सेवा करता रहूंँगा। जेल में समय अच्छा बीता है। ऐसी स्थिति में जब पुलिस के सामने ही किसी महिला को घसीटा जा रहा था, मैं कुछ और करने की नहीं सोच सकता था। इसलिए मैंने जो कुछ भी किया उसे लेकर शर्मिंदा नहीं हूँ। हाँ, मैं भगवान से जरूर प्रार्थना करूँगा कि वह दोबारा मुझे ‘बल्लेबाजी’ करने का अवसर ना दे।”

वहीं, प्रधानमंत्री मोदी ने सख्ती दिखाते हुए कहा था कि जेल से छूटने के बाद आकाश के स्वागत में जो लोग गए थे, उनको बाहर किया जाए, पूरी यूनिट भंग की जाए। पीएम मोदी ने बिना नाम लिए ही इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा था, “किसी का भी बेटा हो, उसकी ये हरकत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिन लोगों ने स्वागत किया है, उन्हें पार्टी में रहने का हक नहीं है। सभी को पार्टी से निकाल देना चाहिए।”

PAK ने गुलाम कश्मीर के आतंकी शिविरों को अफगानिस्तान की सीमा पर शिफ्ट किया

आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के काडर भारत-पाकिस्तान की सीमा छोड़कर अफ़गानिस्तान की सीमा में शिफ़्ट हो गए हैं। इस वजह से भारत के राजनयिक मिशन और कार्यालयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकी इन्हें निशाना बना सकते हैं। अपनी जान-माल की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के आतंकी अफ़गानिस्तान के प्रांत कुनार, ननगरहार, नूरिस्तान और कंधार में शिफ़्ट हो गए हैं। बता दें कि भारतीय वायु सेना द्वारा बालाकोट आतंकी कैंपों में की गई एयर स्ट्राइक के बाद आतंकियों ने अपना ठिकाना बदला है।

इसके अलावा भारतीय दूतावास पर एक और ख़तरा मंडरा रहा है। ऐसी आशंका है कि विस्फ़ोट से भरी कार के ज़रिए काबुल में स्थित भारतीय दूतावास पर आतंकी हमला करने की फ़िराक में हैं। वहीं, कंधार में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर तालिबानी हमला होने की भी आशंका है।

ख़बर के अनुसार, डूरंड रेखा के पार पाक आतंकियों ने अफ़गान तालिबान और अफ़गान विद्रोही संगठन हक्कानी नेटवर्क के साथ हाथ मिला लिया है। डूरंड रेखा अफ़गानिस्तान से पाकिस्तान को अलग करती है। यहाँ इनके चरमपंथी काडर को विध्वंसक गतिविधियों की ट्रेनिंग दी जाती है। यही एक मुख्य वजह थी जिसके कारण मोदी सरकार ने पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार द्वारा 1-2 जुलाई को लश्कर नेताओं और आतंकी फंडिंग से जुड़े पाँच चैरिटी संगठनों पर की गई कार्रवाई पर विश्वास नहीं किया था।

भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि आतंकी काडर डूरंड लाइन के पार शिफ़्ट हो गए हैं। जिससे इस साल के अंत में पेरिस सम्मेलन में वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (FATF) पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट न कर सके। यह संस्था दुनियाभर में आतंकी लेन-देन पर कड़ी नज़र रखता है और इसने पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला रखा है। 

BJP में शामिल हुईं हरयाणवी डांसर सपना चौधरी, वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में ली पार्टी की सदस्यता

मशहूर हरियाणवी डांसर और सिंगर सपना चौधरी ने आज भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर शिवराज सिंह चौहान, मनोज तिवारी, हर्षवर्धन सिंह जैसे कई सीनियर नेता मौजूद थे। रविवार (जुलाई 7, 2019) को राजधानी दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम में भारतीय जनता पार्टी के सदस्यता अभियान के कार्यक्रम में सपना चौधरी बीजेपी की मेंबर बनीं। 

इस दौरान 2 गैलेंट्री अवॉर्ड विजेता रिटायर्ड डीसीपी एनएन राव ने भी सदस्‍यता ली। इसके अलावा विवेक भट ने भी भाजपा की सदस्‍यता ली। विवेक 70℅ दिव्यांग हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने भाषण में विवेक का जिक्र कर चुके हैं। 

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले सपना चौधरी पर सस्पेंस बना हुआ था। पहले उनके कॉन्ग्रेस में आने की खबरें आई थीं। कुछ तस्वीरों के बाद कहा गया कि वह कॉन्ग्रेस में आ गई हैं। लेकिन फिर सपना खुद मीडिया के सामने आईं और उन्होंने इस खबर को गलत बताया। इसके बाद प्रचार के दौरान सपना चौधरी बीजेपी के दिल्ली अध्यक्ष मनोज तिवारी के साथ देखी गईं। उन्होंने दिल्ली की विभिन्न सीटों पर बीजेपी के लिए रोड शो में हिस्सा लिया था। अब आखिरकार पार्टी में शामिल हुईं।