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ग़रीबों को 5 रुपए में नहीं मिल रहा खाना: शिवराज की ‘दीनदयाल रसोई’ पर कमलनाथ सरकार में ताला

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद से ही पिछली भाजपा सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं का बुरा हाल है। अब पूर्ववर्ती शिवराज सिंह चौहान सरकार की ‘दीनदयाल अंत्योदय रसोई’ पर भी ग्रहण लग गया है। इस योजना के तहत ग़रीबों को केवल 5 रुपए में भोजन मुहैया कराया जाता था। भोपाल में यह योजना अप्रैल 2017 में शुरू की गई थी।

भोपाल के सुल्तानिया अस्पताल के सामने स्थित दीनदयाल रसोई पर भी कई दिनों से ताला लटका हुआ है। कहा जा रहा है कि यह रसोई पिछले एक महीने से बंद पड़ी है। इसे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। सफाई में सरकार ने योजना की समीक्षा की बात कही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रसोई बंद होने से गरीब बेहद नाराज हैं। कई ग़रीबों ने बताया कि सस्ता खाना न मिलने के कारण उन्हें समोसे और पकौड़े खा कर पेट भरना पड़ रहा है।

शिवराज ने कहा है कि कॉन्ग्रेस से ग़रीबों का सुख नहीं देखा जाता है। इसलिए, कमलनाथ ग़रीबों के मुँह से निवाला छीन रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। इस योजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पूर्व सीएम ने कहा, “ग़रीब और मजदूरी करने वाला व्यक्ति काम की तलाश में शहर आता है। उसकी कमाई कम होती है। यदि वह अपनी कमाई होटल में खाना खाने पर ख़र्च करने लगे तो परिवार कैसे पालेगा? इसी को ध्यान में रखते हुए यह योजना शुरू की गई थी।”

भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित राज्य के कई अन्य शहरों में भी यह योजना शुरू की गई थी। प्रदेश के खाद्य मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि सरकार इस योजना को नए सिरे से शुरू करेगी और बेहतर तरीके से इसका संचालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कमलनाथ सरकार आम आदमी को भोजन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

रिज़वान ने दी सुहागरात की वीडियो वायरल करने की धमकी, विरोध करने पर किया अप्राकृतिक सेक्स

दहेज़ की लालच में एक युवक इतना गिर गया कि उसने अपनी ही पत्नी को बदनाम करने की ठान ली। उत्तर प्रदेश के बरेली में एक महिला ने अपने पति के ख़िलाफ़ ‘निजता का उल्लंघन (ब्रीच ऑफ प्राइवेसी)’ और उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया है। महिला ने अपने पति पर आरोप लगाया है कि उसने दोनों के बीच अंतरंग पलों का वीडियो बना लिया और फिर उसके सहारे ब्लैकमेल करने लगा। बारादरी पुलिस थाने में महिला ने अपने पति रिज़वान के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई है।

महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसने वीडियो बनाने का विरोध किया लेकिन पति ने आश्वासन दिया था कि वह वीडियो को डिलीट कर देगा। लेकिन, बाद में उसकी नीयत में खोट आ गई और वह उस वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देने लगा। पुलिस ने आरोपित रिज़वान के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 377 (अप्राकृतिक सेक्स) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, पीड़िता ने स्थानीय ठेकेदार से अक्टूबर 2018 में शादी की थी। सुहागरात के दिन ही उसके पति ने पीड़िता के साथ बिताए अंतरंग पलों को अपने फोन के कैमरे में क़ैद कर लिया। महिला की आपत्ति के बाद उसने वीडियो को डिलीट कर देने का भरोसा दिया। इसके कुछ दिनों बाद जब पीड़िता ने देखा कि ये वीडियो अभी भी उसके पति के फोन में पड़े हुए थे, तो उसने ख़ुद से उन्हें डिलीट करने की कोशिश की। लेकिन, रिज़वान ने पीड़िता के साथ जबरन अप्राकृतिक सेक्स किया और फिर से एक वीडियो शूट कर लिया।

इसके बाद पीड़िता ने अपने ससुराल वालों से मदद की गुहार लगाई। इसके बावजूद उसके साथ बुरा सलूक जारी रहा और ससुराल वालों ने भी रिज़वान का ही पक्ष लिया। पति द्वारा बार-बार मिल रही वीडियो वायरल करने की धमकी के बीच महिला ने अपने मायके वालों को बदनामी के डर से कुछ भी नहीं बताया। 30 जून को जब रिज़वान ने फिर से उसकी पिटाई की, तब वह अपने घर पहुँची और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई। उससे पहले पीड़िता के देवर ने भी उसके साथ बलात्कार करने की कोशिश की थी।

पुलिस ने बताया कि इस मामले की जाँच जल्द ही शुरू होगी और प्रथम दृष्टया महिला की शिकायत सही लग रही है। यह भी पता चला है कि पीड़िता को ससुराल वालों ने घर से निकाल दिया था। ससुराल वालों ने उसे धमकी दी थी कि अगर मायके वालों को इस बात की जानकारी दी तो वो उसके भाई की हत्या करा देंगे। बाद में पति के मनाने के बाद वह ससुरवाल वापस आई लेकिन उसका पति अब भी नहीं सुधरा था और उसने फिर से वही हरकतें चालू कर दी। आरोपित के ख़िलाफ़ आईटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।

बॉलीवुड हीरोइन ने कॉन्ग्रेस नेताओं को बताई हार की वजह, पत्र लिख कर पार्टी पर लगाए गंभीर आरोप

मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा के रविवार (जुलाई 7, 2019) को इस्तीफा देने के बाद से मुंबई कॉन्ग्रेस में अंतर्कलह खुलकर सामने आने लगी है। मिलिंद देवड़ा के इस्तीफे के बाद सोमवार (जुलाई 8, 2019) को मुंबई के पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने ट्विटर के जरिए उन पर निशाना साधा तो वहीं, अभिनत्री से राजनेता बनी उर्मिला मातोंडकर ने लोकसभा चुनाव में अपनी हार का ठीकरा स्थानीय नेताओं पर फोड़ा है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं पर सहयोग न करने का आरोप लगाया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तर-मुंबई से कॉन्ग्रेस प्रत्याशी रहीं उर्मिला मातोंडकर ने पत्र लिखकर पार्टी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने 16 मई को 9 पेजों का एक पत्र मुंबई के तत्कालीन कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मिलिंद देवड़ा को लिखा था। जिसमें उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ न देने, कमजोर प्लानिंग, प्रचार तंत्र की नाकामी के साथ चुनाव प्रचार के लिए नियुक्त चीफ कॉर्डिनेटर सन्देश कोंडविलकर, दूसरे पदाधिकारी भूषण पाटिल को जिम्मेदार ठहराया है। ये दोनों नेता पूर्व मुंबई कॉन्ग्रेस अध्यक्ष संजय निरुपम के नजदीकी हैं।

उर्मिला ने अपने पत्र में इन दोनों नेताओ का नाम लेते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर इन दो नेताओं ने लोगों तक पहुँचने में कोताही बरती है। उर्मिला का कहना है कि कोंडविलकर जमीनी स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं को जुटाने में असफल रहे। वहीं, भूषण पाटिल जैसे अन्य प्रमुख पदाधिकारी ब्लॉक स्तर और वार्ड स्तर पर पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक, प्रचारसभा, पदयात्रा आयोजित करने में विफल रहे, जिसकी वजह से जनता पार्टी के एजेंडे को समझ नहीं पाई और उनके साथ जुड़ नहीं पाई। इसके साथ ही उर्मिला ने कोंडविलकर और पाटिल पर राजनीतिक परिपक्वता, अनुशासन की कमी और बेवजह विवाद पैदा करने का भी आरोप लगाया।

उर्मिला ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कड़ी मेहनत की, लेकिन कॉन्ग्रेस संगठन की तरफ से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उर्मिला ने शिकायती पत्र में लिखा कि केंद्रीय कार्यालय में पर्याप्त जगह नहीं थी। निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के कार्यालय नहीं बनाए गए। प्रचार सामग्री का वितरण उचित तरीके से नहीं किया गया, जिसके कारण मतदाताओं तक उनकी बात सही ढंग से नहीं पहुँची।

उर्मिला ने कोंडविलकर पर उनके परिवारवालों को बुलाने और चुनाव अभियान के लिए पैसे माँगने का भी आरोप लगाया। साथ ही कोंडविलकर ने कॉन्ग्रेस के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल से बात करने के बारे में भी उनके परिवारवालों से पूछा। मातोंडकर ने सन्देश कोंडविलकर, और भूषण पाटिल पर जिला कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अशोक सुत्राले के प्रति अनादर करने का आरोप लगाया और साथ ही उन्होंने पार्टी के बेहतर और उज्जवल भविष्य के लिए दोनों नेताओं के खिलााफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संगठनात्मक स्तर पर बदलाव की माँग की थी।

3 तलाक, हलाला का आश्वासन और हत्या: अब्बास के अवैध संबंधों के कारण आरिफा के 2 बच्चे हुए अनाथ

राजस्थान के अलवर जिले से एक साथ तीन तलाक, हलाला और हत्या का मामला सामने आया है। यहाँ तिजारा क्षेत्र के गाँव पलासली में एक मुस्लिम व्यक्ति ने अवैध संबंधों के चलते अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद मृतका के पिता ने अपने दामाद सहित अन्य ससुराल वालों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज करवाया है।

जागरण में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट

जानकारी के मुताबिक डीडारा गाँव के रहने वाले उमरदीन ने दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया है कि उनकी पुत्री का निकाह 2011 में रीति-रिवाजों के साथ पलासली निवासी अब्बास के साथ किया गया था। आरिफा के 2 बच्चे भी हैं। लेकिन 2 साल पहले अब्बास ने उनकी पुत्री से दूरी बना ली, जिसके कारण उनके बीच अच्छे संबंध भी नहीं थे।

एफआईआर में उमरदीन ने अपने दामाद अब्बास पर आरोप लगाया है कि उसके किसी और से अवैध संबंध थे, जिसके बारे में अब्बास के पिता ईसब, माँ सुफेदी और चाचा दीनू को भी जानकारी दी गई थी, लेकिन उस दौरान उन लोगों ने अब्बास से बात करने का विश्वास दिलाकर मामले को शांत कर दिया, और फिर डेढ़ साल पहले पूरे परिवार की मिलीभगत से आरिफा को उसके पति ने तलाक दे दिया।

जब मामले ने तूल पकड़ा तो पंचायत में अब्बास के परिजनों ने आरिफा के घरवालों को आश्वासन दिया कि वह आरिफा का हलाला करवाकर 4 महीने बाद दोबारा अब्बास से उसका निकाह करवा देंगे। जिसके चलते वह अपने मायके ही रह रही थी, लेकिन जब 2 दिन पहले वह अपने ससुराल आई तो उसकी मौत हो गई।

पुलिस के मुताबिक अब्बास ने 7 जुलाई की सुबह 7 बजे अपने पुत्र फतेह मोहम्मद को कॉल की और कहा कि आरिफा की हालत खराब है, ‘तुम लोग आ जाओ।’ जिसके बाद आरिफा के घर वाले जब कर उसके ससुराल पहुँचे तो वहाँ उसे मृत पाया। उसके शरीर पर चोट के निशान थे और उसके शरीर से खून निकल रहा था।

दर्ज की गई शिकायत में आरिफा के ससुराल वालों पर उससे मारपीट कर हत्या करने का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने अब्बास, उसके पिता ईसब, माँ सुफेदी के अलावा दीनू और अफसाना के खिलाफ़ धारा 143, 302 में मामला दर्ज किया है। साथ ही शव का पोस्टमॉर्टम कराके परिजनों को सौंप दिया।

विधायकों की नाराज़गी से जूझती गुजरात कॉन्ग्रेस को बड़ा झटका, 40 नेताओं ने दिया इस्तीफा

गुजरात में कई विधायकों के पाला बदलने से परेशान चल रही कॉन्ग्रेस को कई अन्य नेताओं व कार्यकर्ताओं ने तगड़ा झटका दिया है। भरूच में 40 के क़रीब कॉन्ग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। ऐसा उन्होंने जगन्नाथ यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाज़ी की घटना को लेकर किया। गुरुवार (जुलाई 4, 2019) को हुई पत्थराबाज़ी की घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया था। इस मामले में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष परिमल सिंह राणा की चुप्पी को लेकर कार्यकर्ता नाराज़ थे। उसी दिन सूरत में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई थी।

किसी बड़े बवाल से बचाते हुए घटनास्थल पर मौजूद पुलिस ने तत्परता दिखाई और यात्रा आगे बढ़ सकी। भरूच पुलिस ने भी इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है। इसके अलावा दो अन्य को भी हिरासत में लिया गया है, जो नाबालिग हैं। ज्ञात हो कि उस दिन तबरेज अंसारी की मॉब लिंचिंग के विरोध में प्रदर्शन किया जा रहा था। नानपुरा क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करने के साथ-साथ आँसू गैस के गोले भी छोड़ने पड़े थे। इस मामले में 6 आरोपितों की गिरफ़्तारी हुई थी।

भरूच में कॉन्ग्रेस अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष अयूब सैयद ने कहा, “झारखण्ड में तबरेज अंसारी की भीड़ द्वारा हत्या किए जाने के विरोध में हम शांतिपूर्वक मार्च निकालना चाहते थे लेकिन प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने हमारा समर्थन नहीं किया। 22 नेताओं ने इस्तीफा दिया है और राणा ने हमारा इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। हमारे शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए पुलिस ने भी अनुमति नहीं दी।” वहीँ भरूच सिटी कॉन्ग्रेस सचिव ने कहा;

“हम चाहते थे कि प्रदेश अध्यक्ष राणा रथ यात्रा के दौरान हुई पत्थरबाजी की घटना की निंदा करने के लिए हमें कार्यक्रम करने की इजाजत दें। लेकिन, इस विरोध प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। इसके परिणामस्वरूप हमने इस्तीफा दे दिया है। 18 नेता व पार्टी कार्यकर्ता पहले ही हमारी भावनाएँ आहत होने के कारण इस्तीफा दे चुके हैं।”

प्रदेश अध्यक्ष परिमल राणा ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई थी, जिसमें उन्हें इस्तीफा न देने को कहा गया लेकिन वे अड़े रहे। उन्होंने कहा कि पत्थरबाज़ी वाली घटना के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना थी लेकिन पुलिस की अनुमति न मिलने के कारण इसे रद्द करना पड़ा। सिटी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह रैली पार्टी के बैनर तले नहीं निकाली गई थी लेकिन कुछ कॉन्ग्रेस नेताओं को गिरफ़्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि वे इस सम्बन्ध में पुलिस कमिश्नर से मिलेंगे।

‘सरकारी खजाने पर बोझ हैं सिद्धू, सैलरी ले रहे हैं पर काम नहीं कर रहे’

पंजाब की सियासत में नवजोत सिंह सिद्धू का नाम लगातार उछलता रहा है, लेकिन इस बार कैप्टन अमरिंदर सिंह से उनकी अनबन खुलकर सामने आ गई है। जानकारी के मुताबिक पंजाब सरकार द्वारा सिद्धू का मंत्रालय बदले जाने के बाद से सिद्धू ने अपने जिम्मेदारी अभी तक नहीं संभाली है। जिसके चलते भारतीय जनता पार्टी के महासचिव ने राज्यपाल को उनके ख़िलाफ़ चिट्ठी भी लिखी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि सिद्धू बिना सरकारी कार्य किए सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं और सरकारी खजाने पर बोझ बन गये हैं।

भाजपा ने सिद्धू के इस रवैये को जनता का अपमान बताते हुए चिट्ठी लिखी। जिसमें महासचिव तरुण चुघ ने राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से कहा है, “सिद्धू और सीएम के बीच विवाद ने संवैधानिक संकट पैदा कर दिया है। एक महीने से अधिक समय बीत गया, मंत्री ने शपथ तो ले ली, लेकिन कोई काम नहीं किया।”

दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू इस समय मंत्रालय बदले जाने से काफी नाराज हैं। बीते 06 जून को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सिद्धू से शहरी निकाय के साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक मामले विभाग वापस ले लिए थे और उन्हें ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार सौंपा था।

तरुण चुघ का आरोप है कि सिद्धू सैलरी तो ले रहे हैं, लेकिन कोई काम नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री और मंत्री के अनबन का नुकसान जनता को उठाना पड़ रहा है, इसलिए उन्होंने गवर्नर से पंजाब के हक में फैसला सुनाने की अपील की है।

चुघ के मुताबिक, अगर वह (सिद्धू) काम नहीं करना चाहते तो किसी और को काम सौंपा जाना चाहिए, और अगर वह सिर्फ सैलरी ले रहे हैं और सुविधाओं का लुत्फ उठा रहे हैं तो उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए।

‘मुस्लिम होने के कारण मोहम्मद शमी को BJP के दबाव में टीम से किया गया बाहर’

पाकिस्तान की टीम के वर्ल्ड कप से बाहर होने बाद से पाकिस्तानी बुरी तरह से खिसियाए हुए हैं। पाकिस्तानी खिलाड़ी और एक्सपर्ट्स की तरफ से भारतीय टीम के लिए उल-जुलूल बातें कही जा रही हैं। इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर मोइन खान ने एक शर्मनाक बयान दिया है। उन्होंने रविवार (जुलाई 7, 2019) को एक न्यूज चैनल के स्पोर्ट्स शो को दिए इंटरव्यू में भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया। मोइन ने कहा कि श्री लंका के खिलाफ मुकाबले में मोहम्मद शमी के साथ भेदभाव किया गया और मुस्लिम होने की वजह से उन्हें जान बूझकर प्लेइंग इलेवन से बाहर किया गया।

पाकिस्‍तानी क्रिकेट विशेषज्ञ ने इसके पीछे भाजपा का हाथ बताया। उनका कहना है कि शमी को श्रीलंका के खिलाफ मैच में इसलिए आराम दिया गया, क्‍योंकि भाजपा का एजेंडा मुस्लिमों को आगे नहीं बढ़ने देना है। मोहम्मद शमी शानदार प्रदर्शन कर रहे थे, वो 15 विकेट ले चुके थे। वो रिकॉर्ड बनाने के बेहद करीब थे। वह सबसे ज्‍यादा विकेट लेने वाले गेंदबाजों की लिस्‍ट में शीर्ष दो या तीन में पहुँच सकते थे। लेकिन अचानक से उन्हें बैठा दिया गया। मोइन का मानना है कि शमी को बाहर बैठाने के लिए टीम इंडिया पर दबाव था। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि शमी को बाहर बैठाने का कारण भाजपा का मुस्लिमों को आगे नहीं बढ़ने देने का एजेंडा है।

गौरतलब है कि टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप 2019 का आखिरी लीग मैच श्रीलंका के खिलाफ लीड्स में खेला था। इस मैच में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 7 विकेट से हरा दिया। भारतीय टीम ने शनिवार (जुलाई 6, 2019) को इस मुकाबले के लिए दो बदलाव किए थे। मोहम्मद शमी और युजवेंद्र चहल को आराम देकर रवींद्र जडेजा और कुलदीप यादव को मैदान में उतारा गया था। चूँकि, लीड्स की पिच स्पिनर के अनुकूल थी, स्पिनर के लिए ये पिच फायदेमंद साबित हो सकती थी, इसलिए टीम इंडिया ने शमी की जगह जडेजा को वर्ल्ड कप में पहली बार मौका दिया था।

इस्लामिक बैंकिंग घोटाला: मामले की जाँच कर रहे IAS अधिकारी ने ली ₹1.5 करोड़ की रिश्वत, गिरफ्तार

कर्नाटक के आईएमए ग्रुप पोंजी घोटाले में एसआईटी ने सोमवार (जुलाई 8, 2019) को बंगलुरू अर्बन जिले के डिप्टी कमिश्नर बीएम विजय शंकर को 1.5 करोड़ रुपए की घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

जानकारी के अनुसार विजय शंकर ने यह घूस आईएमए संस्थापक मंसूर खान से ली है। ये वही मंसूर खान है जिसने बेहतर ब्याज का लालच देकर 40000 निवेशकों (अधिकतर मुस्लिम) से अरबों रुपए ऐंठ लिए और बाद में विदेश भाग गया।

एसआईटी के प्रेस नोट के मुताबिक आईएस अधिकारी बीएम विजय ने आरबीआई द्वारा राज्य को दिए कंपनी की जाँच के आदेश के बाद, रिश्वत लेकर कंपनी के पक्ष में रिपोर्ट दी थी। इसी आधार पर गिरफ्तारी की गई है। इस मामले में एसआईटी अब तक 5 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

बीएम विजय शंकर से पहले एजेंसी ने बंगलुरू नॉर्थ सब डिविजन के सहायक कमिश्नर एलजी नागराज और एक ग्रामीण अकॉउंटेंट मंजूनाथ को गिरफ्तार किया था। इन लोगों पर मंसूर खान से 4.5 करोड़ रुपए लेकर क्लीनचिट देने का आरोप है। इनके अलावा एक पार्षद और बंगलुरू विकास प्राधिकरण के एक अधिकारी को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

गौरतलब है इस बार हज यात्रियों से आईएमए ग्रुप के संस्थापक मंसूर खान के लौटने की दुआ करने को कहने वाले राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान से भी ईडी ने पूछताछ की है, क्योंकि उन्होंने भी मंसूर को अपनी एक संपत्ति बेची थी। इसके अलावा ईडी के एक अधिकारी ने भी जमीर अहमद को नोटिस जारी करके उनके सामने पेश होने के लिए एक हफ्ते का वक्त दिया है।

गार्ड सद्दाम और वॉर्डन गिरफ़्तार: ‘गर्ल्स हॉस्टल में आधी रात को बुलाए जाते थे पुरुष, मुखिया भी आता था’

बिहार के आरा स्थित कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय में एक हॉस्टल वॉर्डन पर छात्राओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं ने रात के अँधेरे में गर्ल्स हॉस्टल में वॉर्डन द्वारा पुरुषों को बुलाए जाने की बात कही है। साथ ही हॉस्टल वॉर्डन पर छात्राओं से अपना निजी काम करवाने की बात भी सामने आई है। स्थानीय आला अधिकारियों ने हॉस्टल पहुँच कर मामले की जाँच की। जाँच टीम ने पाया है कि 2 महिलाएँ व 2 अन्य लड़कियाँ हॉस्टल में बिना एंट्री दर्ज किए अवैध तरीके से रह रही थीं। उन्होंने विजिटर रजिस्टर में भी किसी तरह की एंट्री नहीं की थी।

आरा में गर्ल्स हॉस्टल का दौरा करने के बाद अपनी बात रखते पूर्व सांसद पप्पू यादव

ग्रामीणों ने बताया कि हॉस्टल वॉर्डन गीता और गार्ड सद्दाम छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार करते थे और आपत्तिजनक कार्य करते थे। पुलिस ने चारों आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है। बिहार राज्य महिला आयोग ने भी प्रशासन से मामले की रिपोर्ट माँगी है। बता दें कि यह मामला तब सामने आया था जब बुधवार (जुलाई 3, 2019) को 2 छात्राएँ हॉस्टल से भाग निकली थीं। ग्रामीणों ने उन्हें पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया था, जिसके बाद उनके बयान के आधार पर उक्त कार्रवाई की गई।

इस घटना की सूचना मिलते ही हॉस्टल में रहने वाली 80 छात्राओं के परिजन उन सभी को वापस ले गए। छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल वॉर्डन उनसे मालिश करने को भी कहती थी। पूर्व सांसद राजेश रंजन उर्फ़ पप्पू यादव ने इस सम्बन्ध में कहा, “यहाँ सुरक्षा व्यवस्था मापदंडों के अनुरूप नहीं है। हॉस्टल के वॉर्डन पर लगे आरोपों की उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।” छात्राओं ने आरोप लगाया कि स्थानीय मुखिया हर रात 12 बजे से 1 बजे के बीच गर्ल्स हॉस्टल में आया करता था।

‘जैसे हम सुप्रीम कोर्ट के जजों का सम्मान करते हैं, वैसे ही वो भी हमारा सम्मान करें’

केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को केंद्र सरकार के लिए कड़वे शब्दों का इस्तेमाल न करने की नसीहत दी है। आधार संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान उन्होंने ये बातें कहीं। कॉन्ग्रेस की आधार योजना को निराधार बताते हुए प्रसाद ने कहा कि सांसद को अदालत न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि देश की जनता ने दोनों सदनों को क़ानून बनाने का सार्वभौम अधिकार दिया है। रविशंकर प्रसाद ने याद दिलाया कि वो न्यायालय का सम्मान करते हैं लेकिन जवाबदेही देश की जनता के प्रति है। उन्होंने कहा, “मैं सदन के सभी सदस्यों को याद दिलाना चाहता हूँ कि दोनों सदनों के पास यह अधिकार है कि किसी भी जजमेंट को पलट सकें।“

केंद्रीय मंत्री सुप्रीम कोर्ट द्वारा आधार पर दिए गए निर्णय के सम्बन्ध में बोल रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने आधार ऑर्डिनेंस को लेकर केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हर-हमेशा सुप्रीम कोर्ट का पूरा सम्मान किया गया है। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए कहा कि 15 करोड़ राशन कार्ड में से लगभग 3 करोड़ फ़र्ज़ी पाए गए थे, जिन्हें आधार की वजह से पकड़ा जा सका। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट को अपने निर्णय में ‘संवैधानिक धोखाधड़ी’ जैसे शब्दों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “जैसे हम सुप्रीम कोर्ट के जजों का सम्मान करते हैं, वैसे ही वो भी हमारा सम्मान करें।“

आधार को लेकर सांसदों की आपत्तियों का केंद्रीय क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दिया विस्तृत जवाब

उन्होंने आधार जजमेंट में निर्णय करने वाले सुप्रीम कोर्ट जज की उस टिप्पणी को याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के संविधान को बनाने वाले यह जानते थे कि बहुमत की सरकार तानाशाह होती है। प्रसाद ने कहा कि उन्होंने क़ानून दिवस के दिन सार्वजनिक रूप से ऐसा कहने वाले जज को नसीहत दी कि इस तरह के कमेंट्स से बचा जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि वो जज आख़िर इस तरह की बातें कहाँ से लेकर आए?

इस दौरान रविशंकर प्रसाद ने आधार की उपयोगिताएँ गिनाईं और कहा कि इससे किसी की भी प्राइवेसी का हनन नहीं होता। उन्होंने संसद में अपना आधार कार्ड निकाल कर उस पर अंकित चीजों को समझाते हुए कहा कि मनुष्य की उँगलियों के निशान और पुतलियों को ‘कोर बायोमेट्रिक्स’ कहा गया है, जिसे बदला नहीं जा सकता।