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ISIS के नाम पर फर्जी कॉल करने वाले उवैस सईद को पुलिस ने किया गिरफ्तार

अहमदाबाद में करनज पुलिस ने मंगलवार (जून 25, 2019) को एक 32 वर्षीय व्यक्ति को ISIS के नाम से फर्जी कॉल करने पर गिरफ्तार किया है। जानकारी के मुताबिक करनज निवासी मोहम्मद उवैस सईद ने अपने घर के नंबर से पुलिस को फोन करके जानकारी दी थी कि युसूफ पठान नाम का व्यक्ति रथ यात्रा के रास्ते का मुआएना करता देखा गया है और हो सकता है वह तीन दिन के भीतर हमला करे। सईद का कहना था कि युसूफ लाल दरवाजे के पास खड़ा था और हाल ही में उसने पाकिस्तान का भी दौरा किया है।

हालाँकि, मामले में जाँच के बाद पुलिस ने पाया कि आईएसआईएस की लगातार खबरों को पढ़ने से सईद का दिमागी संतुलन बिगड़ गया है, इसलिए उसने पुलिस को इस तरह की कॉल की। पुलिस ने सईद के पास से आईएसआईएस से जुड़ी 250 खबरों की कतरनों को भी बरामद किया है

खबरों के मुताबिक सईद के इस कॉल के बाद पुलिस ने उसका पता लगाया और उसके द्वारा दी गई जानकारी की प्रमाणिकता की जाँच की, लेकिन पूछताछ में सईद पुलिस के किसी भी प्रश्न का जवाब देने में असमर्थ दिखा। साथ ही पुलिस के कहने पर वह पठान की पहचान कर पाने में भी असफल रहा।

पुलिस के मुताबिक, जब उन्होंने सईद को पकड़ा तो उसने बताया कि उसने किसी से सुना था कि युसूफ की इलाके में किसी से लड़ाई हुई है। इसके बाद ही उसे लगा कि पठान जरूर आईएसआईएस से जुड़ा हुआ है। सईद का बयान लेने के बाद पुलिस ने उसके पिता और भाई को पूछताछ के लिए बुलाया, जिन्होंने बताया कि सईद सनकी है और वह कुछ भी कल्पना कर सकता है।

अपनी जाँच के बाद करनज पुलिस थाने के इंस्पेक्टर फैज़ नायाब ने कहा, “सईद ISIS की बहुत खबरों को पढ़ता था, जिसके कारण उसे हर जगह आतंकी हमला होने का शक होने लगा।”

तेलंगाना: 2 पूर्व मंत्री व 1 पूर्व सांसद सहित 5 बड़े TDP व कॉन्ग्रेस नेता BJP में शामिल

तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी टीआरएस की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन कर उभर रही है। चूँकि, विधानसभा चुनाव के दौरान केसीआर की आँधी में टीडीपी और कॉन्ग्रेस राज्य में अपना अस्तित्व खो चुके हैं, हालिया लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन राज्य में अच्छा रहा और इससे राज्य में अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को भाजपा में सम्भावनाएँ दिख रही हैं। पश्चिम बंगाल की तरह तेलंगाना में भी भाजपा का उद्भव पार्टी के लिए सुखद है क्योंकि दक्षिण भारत में कर्नाटक छोड़ कर पार्टी अन्य राज्यों में काफ़ी ख़राब स्थिति में है।

अब तीन टीडीपी नेताओं ने भाजपा ज्वाइन किया है। आंध्र प्रदेश सरकार में मंत्री रहे ई पेड्डी रेड्डी और बोड़ा जनार्दन ने भाजपा की सदस्यता ले ली। इसके अलावा पूर्व सांसद सुरेश रेड्डी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। राज्य में तीन बड़े नेताओं के पार्टी में शामिल होने से भाजपा के आत्मविश्वास में बढ़ोतरी हुई है और पार्टी कार्यकर्ताओं ने ख़ुशी जताई है। 2 बार विधायक रहे ई पेड्डी रेड्डी राज्य के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं। वह टीडीपी के महासचिव भी थे। रेड्डी इस बात से नाराज़ चल रहे थे कि टीडीपी ने हालिया लोकसभा चुनाव में तेलंगाना में अपने उम्मीदवार नहीं उतारे और बीते विधानसभा चुनाव में भी काफ़ी कम सीटों पर चुनाव लड़ा।

रेड्डी ने हाल ही में आशंका जताई थी कि अगर टीडीपी का यही रवैया रहा तो तेलंगाना में पार्टी अपने संगठन को खो देगी। वहीं, अगर बोड़ा जनार्दन की बात करें तो वह वह चेन्नूर विधानसभा क्षेत्र से 4 बार विधायक रह चुके हैं। 1985 से लेकर 2004 तक वह लगातार 19 वर्षों तक क्षेत्र के विधायक रहे। इससे पहले भी कई टीडीपी नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। कॉन्ग्रेस से भाजपा में शामिल होने वालों में एक नाम शशिधर रेड्डी का है। 4 बार विधायक रह चुके रेड्डी संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

भाजपा ज्वाइन करने वाले दूसरे कॉन्ग्रेस नेता का नाम शेख रहमतुल्ला है। जानकारी देते चलें कि दक्षिण भारत में कॉन्ग्रेस के एक अन्य नेता और पूर्व सांसद एपी अब्दुल्ला कुट्टी कॉन्ग्रेस से निष्कासित होने के बाद बुधवार को भाजपा में शामिल हो गए। कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की उपस्थिति में अब्दुल्ला कुट्टी भाजपा में शामिल हुए थे। दक्षिण भारत में अपना संगठन मजबूत करने में लगी भाजपा लगातार नेताओं को अपने साथ जोड़ रही है।

‘तबरेज़ के अब्बू विवाद में मारे गए थे, उनकी लिंचिंग नहीं हुई थी – मीडिया फैला रहा भ्रम’

चोरी के संदेह में झारखंड में भीड़ के हमले में चौबीस वर्षीय तबरेज़ अंसारी की मौत की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने मुख्यधारा की मीडिया में नए विवादों को जन्म दे दिया है। इसमें पीड़ित के पिता की मृत्यु के बारे में असत्यापित और झूठे दावों आधार पर प्रोपेगेंडा भी शामिल है।

कई मीडिया समूह द्वारा तबरेज़ अंसारी की मौत की खबर मिलने के तुरंत बाद, उनके पिता मस्कुर अंसारी को भी उनके बेटे तबरेज़ अंसारी की तरह ही ‘मॉब लिंचिंग’ में मार डाला गया था। ऐसी खबरें चलाई गई।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया था कि तबरेज़ अंसारी के पिता मस्कुर अंसारी की भी लगभग 15 साल पहले इसी तरह से मॉब लिंचिंग में हत्या कर दी गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमशेदपुर के बागबेड़ा इलाके में कथित रूप से चोरी करते हुए मस्कुर को भीड़ ने पकड़ लिया और उन्हें भी भीड़ ने लिंच किया था।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट जिसमें दावा किया गया है कि तबरेज़ के अब्बू की भी लिंचिंग की गई थी

हालाँकि, तबरेज अंसारी के चाचा मरसूद आलम ने तबरेज के पिता मस्कुर की लिंचिंग के बारे में इस तरह के किसी भी दावे का खंडन किया है। मस्कुर की मौत के संबंध में मीडिया रिपोर्टों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मरसूद आलम ने कहा कि उनकी अपने दोस्तों के साथ विवाद के कारण हत्या कर दी गई थी और परिवार को एक सप्ताह बाद ही मस्कुर का शव मिला। मरसूद आलम ने मॉब लिंचिंग से जुड़ी ऐसी किसी भी रिपोर्ट को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।

बम की धमकी मिलने के बाद एयर इंडिया का प्लेन फाइटर जेट्स की सुरक्षा में लंदन में उतरा

मुंबई से नेवार्क जाने वाली एयर इंडिया की एक फ्लाइट में बम होने की धमकी के कारण लंदन में इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ गई। एयर इंडिया की फ्लाइट AI-191 ने आज सुबह 4.49 बजे मुंबई से उड़ान भरी थी, लेकिन उत्तरी आयरलैंड के हवाई क्षेत्र के बाद यह वापस मुड़ गई और लंदन के स्टैनस्टेड हवाई अड्डे पर स्थानीय समयानुसार लगभग 10.15 बजे सावधानीपूर्वक लैंडिंग हुई।


Flight path of AI191 on flightradar24

ख़बर के अनुसार, एयर इंडिया की बोइंग 777-337 (ER) फ्लाइट AI-191 ने मुंबई से उड़ान भरी थी, जो अमेरिका के नेवार्क जा रही थी। यूके के रक्षा मंत्रालय ने कहा, “ब्रिटिश फाइटर जेट्स की सुरक्षा में एयर इंडिया के प्लेन को स्टैनस्टेड एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया।” ट्वीट के मुताबिक, गुरुवार (27 जून) को सुबह मिली धमकी के बाद फ्लाइट को लंदन डायवर्ट कर दिया गया था। स्टैनस्टेड एयरपोर्ट पर प्लेन को एसेक्स पुलिस की निगरानी में स्थानीय समयानुसार सुबह 10.15 बजे लैंड कराया गया।

एयर इंडिया ने भी अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट के ज़रिए प्लेन की लैंडिंग की जानकारी दी थी। हालाँकि, बाद में उस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया।


एयर इंडिया द्वारा डिलीट किया गया ट्वीट

इमरजेंसी लैंडिंग और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी के कारण लंदन के स्टैनस्टेड हवाई अड्डे को कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया। हवाई अड्डे के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने बाद में पुष्टि की कि एयर इंडिया की उड़ान के उतरने के बाद हवाई अड्डे को फिर से खोला गया। स्टैन्स्टेड एयरपोर्ट ने ट्विटर पर लिखा, “एयर इंडिया के प्लेन को सुरक्षाबल की निगरानी में रखा गया है। इस घटना के कारण जो भी स्थितियाँ बनी और जो परेशानियाँ हुईं उसके लिए हम माफ़ी चाहते हैं। आपके धैर्य और सहनशीलता के लिए धन्यवाद।”

ख़बरों के मुताबिक़, एयर इंडिया के विमान को एस्कॉर्ट करने के लिए रॉयल एयर फोर्स के दो टाइफून जेट को उतारा गया था। डर्बीशायर पुलिस ने ट्वीट कर जानकारी दी कि लोगों ने जो धमाके की आवाज सुनी है, वह रॉयल एयर फ़ोर्स के लड़ाकू विमानों की आवाज़ थी।

खाना दिया, छत दी, लेकिन वोट BJP को… अब समस्या लेकर मोदी के पास जाओ: कुमारस्वामी, Siddaramaiah

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने लोकसभा चुनावों में राज्य में भाजपा की जीत के लिए जनता पर खुन्नस निकालना शरू कर दिया है। रायचूर जिले में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुमारस्वामी को अचानक से गुस्सा आ गया। विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों को कुमारस्वामी ने कहा कि आपलोगों ने मोदी को वोट दिया है इसीलिए मैं आपकी समस्या नहीं हल करूँगा। कुमारस्वामी आजकल ‘विलेज स्टे’ का कार्यक्रम चला रहे हैं, जिसमें वो अलग-अलग गाँवों में जाकर रुक रहे हैं। अभी यह भी ख़बर आई थी कि एक गाँव में कुमारस्वामी के 24 घंटे के कार्यक्रम के दौरान 1 करोड़ रुपए ख़र्च कर दिए गए।

इसी तरह अभी कर्नाटक में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस नेता सिद्धारमैया ने भी लोगों पर ताना मारा। बादामी में एक सभा को सम्बोधित करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि हमनें आपको छत दी, खाना दिया और आप लोगों ने मोदी को वोट दे दिया। सिद्धारमैया ने पूछा कि उन्हें इस बात का कारण नहीं पता है कि लोग भाजपा को वोट क्यों देते हैं? उन्होंने कहा, “हमनें पंचायत भवन बनवाया, आपको खाना दी, छत दी, लेकिन आप लोगों ने वोट भाजपा को दे दिया। मैं हैरान हूँ। आख़िर आपने ऐसा क्यों किया?

कुमारस्वामी ने अपना गुस्सा थर्मल पावर प्लांट के प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को दिखाते हुए उन्हें अपनी समस्याएँ लेकर मोदी के पास जाने की सलाह दी। कर्मचारियों के पास अपनी गाड़ी की खिड़की से झाँकते हुए कुमारस्वामी ने उन्हें ताना मारा। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से पूछा कि क्या उन लोगों को लाठीचार्ज की ज़रूरत है? कुमारस्वामी ने पूछा कि क्या मुझे आप लोगों का सम्मान करना चाहिए? कर्नाटक भाजपा के सचिव रवि कुमार ने कहा कि कुमारस्वामी द्वारा प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज करवाने की धमकी देना अनुचित है। कुमारस्वामी की आक्रामकता पर भी सवाल खड़े किए।

विधायक अरविन्द लिम्बावली ने सीएम का विरोध करते हुए कहा, “जरा एचडी कुमरस्वामी का दम्भ तो देखिए। अगर आप जनता की समस्याओं को नहीं सुन सकते तो आपको राज्य का मुख्यमंत्री बनने को किसने कहा? कन्नड़ लोगों ने न तो आपको वोट दिया और न ही आपको मुख्यमंत्री बनने को कहा। कृपया इस्तीफा देकर इस राज्य का भला करें। आप किसी लायक नहीं हैं।”

सांसद शोभा करंदलजे ने कुमारस्वामी के इस कृत्य को बेशर्मी भरा बताया। वहीं कुमारस्वामी ने कहा कि उनका ‘ग्राम वास्तव्य’ काफ़ी सुपरहिट हो रहा है और 2006 में मुख्यमंत्री रहते भी उन्होंने ऐसा ही प्रोग्राम चलाया था।

गैर-गाँधी नेताओं ने भी किया है पार्टी का नेतृत्व, राहुल जाना चाहते हैं तो जाने दो: कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता

कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद पर राहुल गाँधी बने रहेंगे या नहीं, यह एक ऐसा मुद्दा बनता जा रहा है जिसका शायद ही कोई अंत हो। अब असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बुधवार (जून 26, 2019) को बयान दिया है कि यदि राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस अध्यक्ष बने नहीं रहना चाहते हैं, तो उनका विकल्प बिना कोई देर किए ढूँढना चाहिए। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर अड़े राहुल गाँधी ने बुधवार को अपने 51 सांसदों की माँग भी ठुकरा दी थी। राहुल ने कहा था कि वह अब पार्टी अध्यक्ष नहीं रहेंगे।

‘कई बार गैर-गाँधी नेताओं ने भी पार्टी का नेतृत्व किया’

तरुण गोगोई ने कहा, “इस समस्या का हल हम सभी को जल्द कर लेना चाहिए। हम चाहते हैं कि राहुल अध्यक्ष पद पर बने रहें। गाँधी परिवार आजादी के बाद से कॉन्ग्रेस का नेतृत्व कर रहा है। हालाँकि, कई बार गैर-गाँधी नेताओं ने भी पार्टी का नेतृत्व किया है, लेकिन ऐसी स्थिति में हमें गाँधी परिवार के समर्थन की आवश्यकता होगी।”

यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी बुधवार को राहुल गाँधी के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी माँग थी कि राहुल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद न छोड़ें। उन्होंने राहुल से अपना इस्तीफा वापस लेने की माँग की। हालाँकि, दूसरी ओर राहुल अपने फैसले पर अडिग नजर आ रहे हैं। पार्टी के 51 सांसदों ने भी उनसे इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया था।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने भी कहा था कि गैर-गाँधी भी कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष बन सकता है, लेकिन गाँधी परिवार को पार्टी में सक्रिय रहना होगा। अगर राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष बने रहते हैं तो अच्छा रहेगा, लेकिन उनकी इच्छाओं का भी सम्मान किया जाना चाहिए। वे संकट के वक्त पार्टी को संभालने में मदद कर सकते हैं।

रामलिंगम हत्याकांड में NIA ने अहमद शाली को किया गिरफ़्तार, PFI से हैं संबंध

एक बड़ी कार्रवाई के तहत, राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने एक्टिविस्ट रामलिंगम की हत्या मामले में तमिलनाडु के थेंकासी के 51 वर्षीय निवासी शाली उर्फ़ ​​म्यान अहमद शाली नाम के एक आरोपित को गिरफ़्तार किया है। शाली को एर्नाकुलम से गिरफ़्तार किया गया था।

नवभारत टाइम्स की ख़बर के अनुसार, तमिलनाडु के तंजावुर में ‘धर्मान्तरण के एक कार्यक्रम’ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) एवं सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ़ इंडिया (SDPI) के कार्यकर्ताओं का विरोध करने वाले 42 वर्षीय रामलिंगम की हत्या के मामले में NIA ने एक आरोपित को गिरफ़्तार किया है।

आरोपित अहमद शाली ने कथित रूप से हिंदू कार्यकर्ता रामलिंगम की बेरहमी से हत्या कर दी थी क्योंकि उन्होंने इलाक़े में जबरन धार्मिक धर्मांतरण को रोकने का प्रयास किया था। NIA के अनुसार, म्यान अहमद शाली नियमित रूप से इस्लामवादी संगठनों PFI और SDPI की बैठकों में शामिल होता था जहाँ मतांतरण की साजिश रची जाती थी। इस बैठक में रामलिंगम के ख़िलाफ़ हमले की योजना भी बनाई गई थी।

इससे पहले, NIA ने कहा था कि साज़िशकर्ताओं का मकसद केवल रामलिंगम की निर्मम हत्या तक ही सीमित नहीं था, बल्कि साम्प्रदायिक तनाव पैदा करना भी था। NIA ने यहाँ तक ​​कहा कि रामलिंगम की हत्या एक आतंकी गतिविधि थी, क्योंकि उन्हें मुस्लिम उपदेशकों द्वारा धर्म-परिवर्तन का विरोध करने के लिए मारा गया था। ज़्यादातर आरोपी PFI संगठन के थे।

NIA के प्रवक्ता ने बताया कि गिरफ़्तार आरोपित को एर्नाकुलम में NIA की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा और ट्रांजिट रिमांड पर उसे चेन्नई ले जाया गया है जहाँ NIA की विशेष अदालत में उसे पेश किया जाएगा। शुरू में यह मामला तंजावुर ज़िले के तिरुविदईमरुदुर पुलिस थाने में दर्ज किया गया था लेकिन फिर इसे NIA ने अपने हाथों में ले लिया। इससे पहले मई में NIA ने हत्या के सिलसिले में मोहम्मद फारुक नामक एक और PFI सदस्य को गिरफ़्तार किया था। इस मामले को NIA द्वारा लिए जाने से पहले तमिलनाडु पुलिस ने 10 लोगों को गिरफ़्तार किया था।

कमलनाथ का नया क़ानून: गोरक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों को 10 साल तक की जेल, ₹50000 तक जुर्माना

मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार ने गोहत्या के नाम पर होने वाली कथित गुंडई के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने शुरू कर दिए हैं। बता दें कि राज्य में विधानसभा चुनाव के दौरान भी गायों की देखभाल और सुरक्षा एक अहम मुद्दा थी। तब कॉन्ग्रेस ने हर ग्राम पंचायत में एक गौशाला खोलने का निर्णय लिया था। लेकिन, ताज़ा ख़बर के अनुसार, अब अगर कोई गोहत्या के नाम पर हिंसा करता है तो उसे 6 महीने से लेकर 3 साल तक की सज़ा दी जा सकती है। साथ ही 25 हज़ार से लेकर 50 हज़ार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस संशोधित विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा

मध्य प्रदेश गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम-2004 में संशोधन कर राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। वर्ष 2004 में भाजपा सरकार के दौरान राज्य में गोकशी को रोकने के लिए यह क़ानून बनाया गया था। राज्य पशुपालन विभाग के मंत्री लखन सिंह यादव ने बताया कि सरकार एक्ट में संशोधन करने जा रही है और इसे जल्द ही कैबिनेट की मंज़ूरी के लिए रखा जाएगा। राज्य में विधानसभा का मानसून सत्र 8 जुलाई से शुरू हो रहा है। इसके अलावा इस प्रस्ताव में भीड़ द्वारा की गई हिंसा को लेकर भी सजा के कड़े प्रावधान किए गए हैं।

अगर गोरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हत्या की जाती है तो इस तरह के मामलों में 1 वर्ष से लेकर 5 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। अगर कोई एक बार से ज्यादा ऐसे अपराधों में शामिल होता है तो उसे दोगुनी सज़ा दी जाएगी। मंत्री ने इस बारे में ज्यादा जानकारी देते हुए कहा कि अगर कोई बार-बार इस तरह के अपराधों में शामिल होता है तो उसे 10 वर्ष तक की सजा दी जा सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सिवनी जिले में पिछले महीने गोमांस ले जाने के संदेह में एक मुस्लिम महिला और पुरुष को प्रताड़ित करने का मामला सामने आया था, जिसके बाद सरकार इस तरह के मामलों में लगाम लगाने के लिए यह संशोधन कर रही है।

इससे पहले कमलनाथ सरकार ने गायों को लेकर आने-जाने वाले नियमों में बदलाव कर यह सुनिश्चित करने की बात कही थी कि अगर किसान गायों को लेकर आवागमन करते हैं तो गोरक्षक उन्हें परेशान न करें। ऐसे किसानों और व्यापारियों को पुलिस न रोके, इसके लिए भी नियम बनाने की ख़बरें आई थीं।


तबरेज़ की बीवी को AAP से नौकरी, अंकित के पिता अब तक कर रहे केजरीवाल के ‘न्याय’ का इंतजार

अंकित सक्सेना के पिता से किए असफल वादे के बाद अब दिल्ली में आप सरकार ने तबरेज़ की पत्नी से वादा किया है कि वह उसे रोजगार देंगे। दरअसल खबरों के मुताबिक आप विधायक अमानतुल्लाह खान की अध्यक्षता वाले दिल्ली वक्फ बोर्ड के पैनल ने गुरुवार (जून 27, 2019) को तबरेज की पत्नी को ₹5 लाख और एक सरकारी नौकरी देने का फैसला किया है

अमानतुल्लाह खान ने बताया, “हम तबरेज़ की पत्नी को ₹5 लाख का चेक भेजने की कोशिश कर रहे हैं, हो सकता इस चेक को देने मैं खुद जाऊँ, हम उन्हें वक्फ बोर्ड में नौकरी भी देंगे और कानूनी मदद भी करेंगे।”

हैरानी की बात यह है कि दिल्ली वक्फ बोर्ड का यह फैसला उस समय लिया गया है, जब दिल्ली सरकार को अंकित सक्सेना के पिता को मुआवजा न देने के कारण आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ये वही अंकित सक्सेना है, जिसे समुदाय विशेष की लड़की से प्यार करने पर लड़की के घरवालों ने बीच सड़क पर बेरहमी से मार दिया था।

अंकित के पिता यशपाल सक्सेना ने हाल ही में वादा न पूरा करने के लिए दिल्ली सरकार के प्रति अपनी गहरी नाराज़गी जताई थी। उन्होंने बताया था कि किस तरह दिल्ली सरकार ने उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा न देकर नाउम्मीद किया।

अंकित के पिता ने शिकायत करते हुए कहा था, “हमें बताया गया कि हमें एक अच्छा वकील और वित्तीय मदद मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बेटे के दम पर ही हमारा परिवार चलता था जो चला गया। मुझे दिल का दौरा पड़ा है और मेरी पत्नी को 3 ऑपरेशन से गुजरना पड़ा है। पड़ोसी हमारी थोड़ी मदद करते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा था कि हमें 5 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा, बाद में उन्होंने कहा कि वह हमारी और मदद करेंगे लेकिन बाद में उन्होंने कुछ नहीं किया। मैं टूट गया हूँ। “

ऐसे में कपिल मिश्रा ने दोनों मामलों में अरविंद केजरीवाल की नीयत पर सवाल खड़े करते हुए पूछा है, “केजरीवाल सरकार झारखंड में जिस चोर को पब्लिक ने मार डाला उसके परिवार को पाँच लाख रुपये और चोर की बीबी को सरकारी नौकरी दे रही हैं क्योंकि वो एक मुसलमान हैं, ध्रुव त्यागी और अंकित सक्सेना की हत्या दिल्ली में हुई पर उन्हें एक रुपया नहीं दिया क्योंकि वो हिन्दू हैं।”

10 गलियाँ हुईं सुनसान, 125 हिन्दू परिवारों के पलायन के बाद मेरठ बन रहा दूसरा कैराना

अब उत्तर प्रदेश का मेरठ नया कैराना बन रहा है। यहाँ से हिन्दू पलायन करने को मज़बूर हैं। स्थिति भयावह है क्योंकि लोग अपने घरों को छोड़-छाड़ कर जा रहे हैं और अपनी संपत्ति को औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। कैराना में हिन्दुओं के पलायन की ख़बर राष्ट्रीय मुद्दा बनी। दैनिक जागरण ने आज (गुरुवार, जून 27, 2019) को एक विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की है। हम आपको संजीव तोमर की इस व्यापक रिपोर्ट की मुख्य बातें बताते हैं, जिससे आप भी सोचने को विवश हो जाएँगे।

लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के भीतर आने वाले प्रह्लाद नगर में कुल 125 परिवारों द्वारा पलायन की ख़बरें सामने आई हैं। यह मुस्लिम बहुल इलाक़ा है, जहाँ 425 बहुसंख्यक परिवार रहते थे। मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुकी है। लोगों का साफ़ कहना है कि एक विशेष समुदाय के लोगों द्वारा ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की गई कि वे पलायन को मजबूर हुए।

स्थिति यह है कि स्थानीय पार्षद भी लाचार नज़र आ रहे हैं। भाजपा पार्षद जीतेन्द्र पाहवा ने अधिकारियों को स्थिति से बार-बार अवगत कराया लेकिन अभी तक कोई ठोस क़दम नहीं उठाया गया है। बूथ अध्यक्ष महेश मेहता ने नमो ऐप पर शिकायत की है। पीएमओ ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय को उचित क़दम उठाने को कहा है।

इसके बाद हरकत में आए मुख्यमंत्री कार्यालय ने मेरठ के डीएम व वरिष्ठ एसपी को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। पार्षद पाहवा ने आरोप लगाया कि पुलिस सिर्फ़ खानापूर्ति कर रही है। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि संसद सत्र के बाद मेरठ पहुँचते ही वे इस मामले को देखेंगे। सांसद ने स्वीकार किया कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा सामाजिक ताना-बाना बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।

सांसद अग्रवाल ने कहा कि वे इस सम्बन्ध में अधिकारियों से बात करेंगे। मेरठ के जिलाधिकारी ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा रिपोर्ट माँगे जाने की जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि अगर ऐसा है तो स्थानीय थाना व प्रशासन से बातचीत कर के सीएमओ को सही जानकारी से अवगत कराया जाएगा।

एसएसपी ने कहा कि पुरानी शिकायतों को खंगाल कर यह देखने की कोशिश की जाएगी कि उन मामलों में पुलिस ने अब तक क्या कार्रवाई की है, और उसके बाद सीएमओ को रिपोर्ट सौंपी जाएगी। स्थानीय लोगों ने कहा कि बहू-बेटियों का बाहर बैठना तक दूभर हो गया है क्योंकि उन पर अश्लील कमेंट किए जाते हैं। यह सिलसिला आज से नहीं, बल्कि पिछले 5-6 वर्षों से चला आ रहा है।

स्थानीय जनता को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार से उम्मीद है कि वो सब ठीक कर देगी। पब्लिक का कहना है कि किसी भी सांप्रदायिक तनाव वाली घटना के बाद पुलिस तो आती है लेकिन फिर 2-3 दिन बाद हालात वही हो जाते हैं। समुदाय विशेष के शरारती तत्व स्टंटबाजी, लूटपाट, छेड़छाड़ जैसी हरकतें कर के लोगों को परेशान करते हैं।

विधायक सोमेंद्र तोमर ने कहा कि कॉलोनी में गेट लगाने को कहा गया है। सीओ कोतवाली ने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा एक्शन में आने के बाद पिकेट लगा दिया गया है, जहाँ दो पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। वहाँ नियमित जाँच की जाएगी। इसके अलावा एंटी-रोमियो स्क्वाड को भी काम पर लगा दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने कहा कि पुलिस सिर्फ़ अस्थायी पिकेट लगाती है, जिसे एक दिन बाद हटा लिया जाता है। लगभग हर रोज़ लोग मकान बेचने को विवश हैं और आए दिन लोगों के पलायन की ख़बर आ रही है। एक स्थानीय व्यक्ति ने कहा कि छात्राएँ स्कूल और ट्यूशन तक नहीं जा पा रही हैं और स्थिति भविष्य में विकराल रूप ले सकती है।

लोगों ने कहा कि थोड़ी-थोड़ी सी बात पर शरारती तत्व भीड़ लगा देते हैं और हुड़दंग चालू कर देते हैं। समुदाय विशेष के लोग बहुसंख्यकों के मकान के सामने अपनी गाड़ी खड़ी कर देते हैं और मना करने पर गाली-गलौज करते हैं। एक स्थानीय महिला ने कहा कि विरोध करने पर वो कहते हैं कि यह सब उनका अधिकार है। पलायन से दस गलियाँ अब तक सुनसान हो गई हैं।