तीन तलाक मामले में यूपी पुलिस ने जीकरू रहमान को गिरफ्तार किया। ये गिरफ्तारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर हुई। आरोपित मालपुरा इलाके का रहने वाला है। जानकारी के अनुसार जीकरू (Zikru Rehman) की पत्नी तरन्नूम बेगम ने मुख्यमंत्री से इस मामले पर शिकायत की थी कि उसके पति ने उसे तीन तलाक दे दिया है।
शिकायत के मुताबिक, तरन्नुम ने बताया था कि उनका निकाह जीकरू से 5 साल पहले हुआ था। उसके तीन बच्चे हैं। शादी के बाद से ही रहमान उनके साथ बदसलूकी करता था। पिछले हफ्ते मदरसे में पढ़ने वाले एक लड़की से निकाह करने के बाद जीकरू ने तरन्नूम को तलाक दे दिया था। ये लड़की उसी मदरसे में पढ़ती थी, जिसमें जीकरू न सिर्फ पढ़ाता था बल्कि वहाँ का डायरेक्टर भी वही था।
Zikru Rahman gave triple talaq to Tarannum Begum. She complained to @myogiadityanath and @Uppolice after verification of her complaint arrested Zikru Mian as he married another girl he taught at a madrassa. Some progressive Muslims have hailed the move https://t.co/0nprog70im
तरन्नूम का आरोप है कि तलाक देने के बाद उसे घर से बाहर निकाल दिया गया। जिसके बाद उसने मदद के लिए योगी आदित्यनाथ का दरवाजा खटखटाया। शिकायत लेकर वह योगी आदित्यनाथ से मिली। तथ्यों की जाँच के बाद स्थानीय पुलिस को मामले पर तुरंत एक्शन लेने की बात कही गई। मुस्लिम मैरिज प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत जीकरू को तुरंत गिरफ्तार किया गया। बता दें कि कानून के प्रभाव में आने के बाद ये पहला मामला है जिसमें गिरफ्तारी हुई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिलाए इंसाफ़ को लेकर तरन्नूम बहुत खुश है। तरन्नुम ने इंडिया टुडे से हुई बातचीत में अपनी खुशी जाहिर की। महिला ने कहा कि उसे हमेशा से योगी आदित्यनाथ पर भरोसा था कि वो इस मामले में जरूर कार्रवाई करेंगे। महिला ने बताया कि इस तुरंत कार्रवाई के लिए वो हमेशा योगी आदित्यनाथ की आभारी रहेंगी।
तीन तलाक मामले में पुलिस की इस कार्रवाई पर सोशल एक्टिविस्ट आमिर कुरैशी ने कहा कि यह देखना बेहद खुश करने वाला है कि अब आखिरकार सरकार देश में रह रही करोड़ों मुस्लिम महिलाओं का भरोसा जीतने के लिए उचित कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि ये नया कानून मुस्लिम पुरूषों को सबक सिखाएगा कि महिलाएँ उनकी संपत्ति नहीं हैं। उन्हें भी इज्जत और सम्मान से रहने का अधिकार है।
हालिया लोकसभा निर्वाचन के दौरान विभिन्न विवादों के केंद्र में रहा फ़ेसबुक एक और संभावित रूप से विवादास्पद ऍप लेकर हाज़िर है। यूज़र्स की निजी जानकारी आधिकारिक रूप से हासिल करने के लिए फेसबुक ने ‘स्टडी’ नामक एक ऍप लॉन्च किया है, जिससे वह उपभोक्ता की सहमति से उनकी ब्राउज़िंग हिस्ट्री, वह कौन-कौन से ऍप इस्तेमाल करना पसंद करते हैं, कितनी देर तक करते हैं आदि इकठ्ठा करेगा। इस जानकारी का वह क्या करने वाला है इसका तो उसने खुलासा नहीं किया है, लेकिन इसके लिए $20 अर्थात लगभग 1390 रुपए तक यूज़र्स को मासिक भुगतान मिलेगा। फ़िलहाल इस ‘स्टडी’ प्रोग्राम में भागीदारी सीमित भौगोलिक क्षेत्र में रह रहे लोगों की ही होगी।
वेबसाइट पर घोषणा, जानकारी फेसबुक के बाहर साझा न करने का वादा
फेसबुक ने अपनी वेबसाइट पर इस कार्यक्रम की घोषणा करते हुए वादा किया है कि स्टडी ऍप के ज़रिए इकट्ठा जानकारी का वह न तो यूज़र्स को कौन से विज्ञापन दिखाए जाने हैं, इसका निर्धारण करने के लिए करेगा, न ही इस डाटा को वह किसी अन्य थर्ड पार्टी के साथ बाँटेगा। उसने यह भी वादा किया है कि वह अति-संवेदनशील जानकारियाँ जैसे आपका यूज़रनेम, पासवर्ड, फ़ोटो/वीडियो या आपके एसएमएस/अन्य किसी ऍप (वॉट्सऍप, ट्विटर आदि) से आए संदेश आदि नहीं पढ़ेगा या एक्सेस करेगा। इसके अलावा यूज़र्स के पास इस कार्यक्रम से बाहर निकलने का विकल्प हमेशा रहेगा- यानि किसी भी समय आप अपनी जानकारी देना बंद करने का अधिकार सुरक्षित रखेंगे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इसके लिए आपको $20 तक का मासिक शुल्क मिलेगा, और अगर आप किसी अन्य व्यक्ति को भी अपना डाटा देने के लिए मना लें तो आपको रेफरल बोनस भी मिलेगा। फ़िलहाल यह प्रोग्राम केवल अमेरिका और भारत के उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध होगा। इसके अलावा यह केवल एंड्राइड यूज़र्स के लिए है, क्योंकि एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम आईओएस के सुरक्षा प्रबंधन एक ऍप को किसी दूसरी ऍप तक इतनी पहुँच बहुत आसानी से नहीं दे देते।
निजता को लेकर चिंता बरकरार, फ़ेसबुक का इतिहास नहीं रहा है बहुत आशाजनक
फेसबुक के लाख वादों के बावजूद निजता को लेकर शंकाएँ उठना लाज़मी है। न केवल इसलिए कि यह ‘स्टडी’ प्रोग्राम अपने आप में, अपनी प्रकृति में ही किसी अनजाने व्यक्ति को अपने घर में केवल यह देखने के लिए बैठा लेने जैसा है कि आप घर में कौन से कपड़े पहनते हैं, क्या खाते या टीवी पर देखते हैं आदि, बल्कि इसलिए भी कि फेसबुक का अपने यूज़र्स की निजता, और यहाँ तक कि उनकी निजी जानकारी, को लेकर इतिहास बहुत उजला नहीं है।
कैम्ब्रिज एनालिटिका तो सभी के जेहन में ताज़ा है कि कैसे फेसबुक ने अपने उपभोक्ताओं की जानकारी कैम्ब्रिज एनालिटिका कम्पनी को सौंप दी थी। इसके अलावा पिछले साल एक और ‘स्कैंडल’ सामने आया जब यह खुलासा हुआ कि नेटफ्लिक्स, स्पॉटीफाई जैसी कम्पनियाँ फेसबुक को खिड़की की तरह इस्तेमाल कर आपके सन्देशों में झाँक सकतीं हैं, माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न यह देख सकतीं हैं कि आपकी कॉन्टैक्ट लिस्ट में कौन-कौन है आदि। यही नहीं, फ़ेसबुक पर पहले भी एप्पल ने सीमित प्रतिबंध लगाया था प्राइवेसी के हनन और उसके सुरक्षा प्रबंधों को चकमा देने के कारण। इसके अलावा फेसबुक इस इकठ्ठा हुई जानकारी का क्या करने वाला है, इसका बहुत अस्पष्ट सा ‘बेहतर उत्पाद और सेवाएँ विकसित करने के लिए’ जवाब दिया गया है।
नफ़ा बनाम नुकसान
इस प्रोग्राम में हिस्सा लेने के नफ़े हैं:
$20 की बैठे-बिठाए कमाई
अपनी निजी जानकारी के नुकसान/संभावित खतरे हैं:
आपकी जानकारी गलत हाथों में पड़ने का संभावित खतरा
फेसबुक द्वारा (या किसी कर्मचारी द्वारा निजी रूप से भी) थर्ड-पार्टियों को अवैध तरीके से आपकी जानकारी बेचे जाने के बाद आपको ‘ध्यान में रखकर’/निशाना बनाकर दिखाए गए राजनीतिक और कॉर्पोरेट विज्ञापन
फ़ेसबुक को वह जानकारियाँ भी प्राप्त हो जाना जो शायद आप न देना चाहें (खासकर कि यदि आप राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं तो यह दीर्घकालिक रूप से शर्तिया खतरे से खाली नहीं है)
‘स्टडी’ प्रोग्राम से पूरी तरह हटने के लिए केवल ऍप अनइंस्टाल कर लेना काफी नहीं होगा- आपको इसकी बाकायदा सूचना देनी होगी। यह सूचना कैसे देनी होगी, फेसबुक ने यह साफ़ नहीं किया है।
एक लम्बे अंतराल के बाद भारत एक बार फिर चंद्रमा के लिए उड़ान भरने को तैयार है। देश की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ऐलान किया है कि 15 जुलाई को चंद्रयान-2 लॉन्च होगा। इसरो के अध्यक्ष श्री के सिवन ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि चंद्रमा के लिए आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से सुबह 2 बजकर 51 मिनट पर भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 को 15 जुलाई को प्रक्षेपित किया जाएगा।
Indian Space Research Organisation Chairman Dr. K Sivan: ISRO has firmed up that Chandrayaan 2 Mission will be launched on July 15 early morning at 2 hours 51 minutes. pic.twitter.com/E64eBaZfu7
क्या आपको पहला चंद्रयान मिशन याद है? कब लॉन्च हुआ था? दूसरे की कब तैयारी थी? क्यों देर हुआ? क्या इसके लिए कोई राजनीतिक हस्तक्षेप ज़िम्मेदार है? इन सभी सवालों के साथ ही इस समय किस तरह से इसरो प्रगति पथ पर है इन सब का जवाब कुछ सनसनी खेज खुलासों के साथ दिया है इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने।
#LIVE | ‘Lost time due to political reasons’: Former ISRO Chief G Madhavan Nair makes big revelation over Chandrayaan-2’s delay during UPA 2. Tune in to watch the exclusive newsbreak here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/G4q1oZqDzL
रिपब्लिक टीवी को दिए एक विशेष इंटरव्यू में इसरो के पूर्व चेयरमैन जी माधवन नायर ने कुछ चौकाने वाले खुलासे किए कि क्यों चंद्रयान-2 को लॉन्च होने में इतना समय लगा। इस सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि देरी का मुख्य कारण उस समय कि UPA-2 है। मनमोहन सिंह सरकार ने मार्स मिशन से लोकसभा चुनाव में अधिक फायदे की आस में चंद्रयान-2 की तैयारियों को जानबूझकर डाइवर्ट करने के लिए कहा।
Dr Subramanian Swamy is #LIVE on Republic TV following the big revelations by former ISRO chief G Madhavan Nair regarding the UPA 2 delaying the Chandrayaan-2 mission. Tune in to watch here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/BHoGXxMRKc
चंद्रयान-1 मिशन 22 अक्टूबर 2008 को लॉन्च किया गया था। माधवन नायर ने कहा, जब चंद्रयान-1 लॉन्च किया गया और चंद्रयान-2, 2012 में लॉन्च के लिए लगभग तय था। और इसरो इसके लिए तैयार भी था, ज़रूरत केवल राजनीतिक सहमति की थी। लेकिन, लोकसभा चुनाव में अधिक लाभ और क्रेडिट के लिए मनमोहन सिंह सरकार ने उसे डिले कर मार्स मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कहा जबकि इसरो ऐसी संस्था है जो दोनों मिशन पर एक साथ काम करने में सक्षम है। लेकिन उस समय कि सभी तैयारियों को सिर्फ चुनावी फायदे के लिए मनमोहन सिंह सरकार ने नज़रअंदाज़ कर दिया और चंद्रयान मिशन लम्बे समय के लिए टल गया।
#LIVE | ‘I am not surprised,’ says Dr Subramanian Swamy alleging ‘UPA’s complicity with foreign powers’ following former ISRO chief G Madhavan Nair’s revelations regarding UPA 2 delaying Chandrayaan-2 mission. Tune in to watch here – https://t.co/LGCyJUEBn5pic.twitter.com/AzRY6ELd8A
इतना ही नहीं, माधवन नायर ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनके आने से अब इसरो फ़ास्ट ट्रैक मोड में काम कर रही है। चन्द्रमा के लिए मानव मिशन एक रिस्की मिशन है, जो सफल होने पर देश को दूसरे देशों से बहुत आगे ले जाएगा, जिसके लिए इसरो तेजी से प्रयासरत है। राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव के बाद, मोदी जी ने पहल करते हुए इसरो जैसी संस्था को अपने टॉप पर परफॉर्म करने का मौका दिया। इस समय इसरो के सभी मिशन फ़ास्ट ट्रैक मोड में चल रहे हैं। माधवन ने बताया कि इस समय इसरो में हर साल लगभग 28 मिशन पर कार्य हो रहा है। लगातार इसरो नए-नए शोध और तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। और इस सब के पीछे है मजबूत राजनीतिक नेतृत्व।
यह पहली बार नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने चुनावी लाभ के राष्ट्रीय हितों से समझौता करते हुए महज चुनावी लाभ के लिए संस्थाओं को अपने तरीके से चलाया है। यहाँ भी यह साबित हो रहा है कि संस्थाओं की कार्यशैली में जितना हस्तक्षेप कर कॉन्ग्रेस ने देश की तरक्की को नुकसान पहुँचाया है उतना किसी ने नहीं।
और अब जब चंद्रयान-2 मिशन लॉन्च के लिए पूरी तरह तैयार है तो जान लीजिए कि यह मिशन है क्या। चंद्रयान-2 मिशन पूरी तरह से स्वदेशी मिशन है। इस मिशन में चंद्रयान-2, 3 लाख 84 हज़ार किलोमीटर की उड़ान भरेगा। यान को चाँद पर पहुँचने में 55 दिन लगेंगे।
इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 दूसरा चंद्र अभियान है और इसमें तीन मॉडयूल हैं ऑर्बिटर, लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान)। लैंडर रोवर में समाहित रहेगा और चंद्रमा पर लैंडर के उतरने के बाद रोवर सतह पर बाहर आ जाएगा। इसरो की जानकारी के अनुसार मिशन के समय ऑर्बिटर सर्वप्रथम चंद्रमा के मंडल का चक्कर लगाएगा और फिर चंद्रमा के दक्षिण भाग पर लैंडिंग करेगा।
800 करोड़ रुपए की लगत वाला चंद्रयान-2 मिशन 3890 किलोग्राम का एक स्पेसक्राफ्ट है। जिसे GSLV-मार्क-3 द्वारा लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का उद्देश्य चाँद की टोपोग्राफी, कंडीशन और एक्सोस्फीयर का स्टडी करना और उससे सम्बंधित डाटा इकट्ठा करना है।
भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य रहे राजनाथ सिंह सूर्य का आज सुबह निधन हो गया। 84 वर्षीय राजनाथ सिंह ने गोमतीनगर के पत्रकारपुरम स्थित अपने निवास स्थान पर अंतिम साँस ली। वो पिछले काफ़ी समय से शरीर में कंपन की दिक्कत झेल रहे थे। प्रख्यात चिंतक और विचारक के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले राजनाथ सिंह सूर्य के निधन की सूचना पाते ही उनके आवास पर पत्रकार और राजनेताओं के पहुँचने का सिलसिला शुरू हो गया। ख़बर के अनुसार, काफ़ी समय पहले ही उन्होंने मेडिकल कॉलेज को अपनी देहदान की घोषणा कर दी थी। अब उनका पार्थिव शरीर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ में रखा जाएगा।
आज वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व राज्य सभा सांसद श्री राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ जी के निधन पर उनके आवास पत्रकारपुरम गोमतीनगर, लखनऊ पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और ईश्वर से प्रार्थना की कि उनकी आत्मा को वे अपने श्रीचरणों में स्थान दें। pic.twitter.com/76oEYq0j4X
उनके देहांत पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ ने हमेशा जन सरोकारों को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी कलम के ज़रिए जनहित और समाज हित से जुड़े मुद्दों को निर्भिकता और निष्पक्षता के साथ व्यक्त किया। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के अलावा उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, लखनऊ की मेयर संयुक्ता भाटिया, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों समेत कई नेताओं ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व राज्य सभा सांसद श्री राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ जी के निधन की खबर सुनकर दुःख हुआ।
उन्होंने सदैव समाज से जुड़ें मुद्दों को निर्भीकता और निष्पक्षता से व्यक्त किया। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें शोक संतप्त परिजनों को इस दुःख से उबरने के लिए संबल दें।
दिवंगत राजनाथ सिंह सूर्य ने पत्रकार के तौर पर कई समाचार पत्रों में काम किया था। इसके अलावा, वो एक समाचार पत्र के संपादक के रूप में भी काम कर चुके हैं। उनकी पहचान एक स्तंभकार के रूप में भी विख्यात थी। पत्रकारिता जगत में उनकी भरपाई करना बेहद कठिन है।
राजनाथ सिंह सूर्य का जन्म 03 मई 1937 को अयोध्या से छ: किलोमीटर दूर जनवौरा गाँव में एक किसान के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा आर्यसमाज के विद्यालय से हुई थी। वो बचपन में वो राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़ गए थे। अपनी राजनीतिक सोच और वैचारिक स्पष्टता के चलते वो राजनीति और पत्रकारिता दोनों क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे।
बंगाली अभिनेत्री और सासंद नुसरत जहान का इंटरव्यू लेते हुए इंडिया टुडे ग्रुप के पत्रकार राहुल कँवल ने उनके साथ अच्छा-ख़ासा समय गुज़ारा। इसमें उन्होंने नुसरत के सुबह उठ कर जिम में एक्सरसाइज करने से लेकर अपने बॉयफ्रेंड निखिल के साथ समय गुज़ारने तक को कैप्चर किया। राहुल ख़ुद भी नुसरत के साथ जिम में एक्सरसाइज करते दिखे। कँवल ने ‘कूल’ पत्रकारिता करते हुए उन सभी चीजों में नुसरत का साथ दिया, जो नुसरत की दैनिक दिनचर्या का हिस्सा है या फिर जो नुसरत ने इंटरव्यू के दौरान किया। ज़मीन पर लेटने से लेकर बॉयफ्रेंड के साथ गाड़ी में सफ़र करने तक, कुछेक कैमरों के साथ कँवल ने हर जगह उनका साथ दिया और इसे इंटरव्यू की बजाय फ़िल्मफेयर का शो बना दिया।
देश के भविष्य को लेकर नुसरत जहान की राय जानते राहुल कँवल
पत्रकारिता अब अपना रूप बदल रही है। श्रीदेवी की मृत्यु अगर बाथ टब में डूबने के कारण होती है तो एंकरों को स्टूडियो में बाथ टब लाकर उसमें डूब कर दिखाना ज़रूरी है। असंवेदनशीलता भी चरम पर है। बहुत सारे प्रसिद्ध लोगों की मृत्यु ह्रदय गति रुकने के कारण होती है। वो तो भला हो कि नए जमाने के पत्रकारिता के पुरोधा साँस रोक कर स्टूडियो में नहीं लेटते, ताकि दिखा सकें कि सेलेब्रिटी कैसे मरते हैं? मीडिया संस्थानों को स्पष्ट करना चाहिए कि उनके नए नियम के मुताबिक़ अगर कोई पत्रकार सड़क किनारे मजदूरी कर रहे किसी मजदूर से इंटरव्यू लेने जाता है तो वह क्या करेगा और क्या नहीं – हथौड़ा उठाएगा या फावड़ा? सीमा पर गोलीबारी कवर करने जाने वाले पत्रकार भी लगे हाथ दो-चार गोलियाँ दागेंगे क्या?
श्रीदेवी की मृत्यु के बाद अज़ीबोग़रीब तरीके से चलाए गए शो
टाइटल में बताया जाता है कि पत्रकार देश की राजनीतिक दशा-दिशा एवं भविष्य पर एक सांसद की राय लेने गया है। यह पढ़ कर लगता है कि अभिनेत्री से नेत्री बनी नुसरत जहान से भारत की नीतियों, योजनाओं व समस्याओं के बारे में बात की गई होगी और इन सबके बारे में उनकी राय जानी जाएगी। लेकिन, वीडियो खोलने पर पत्रकार अभिनेत्री के साथ ज़मीन पर लेटा होता है। क्या यही भारत के राजनीतिक भविष्य को लेकर एक नेता की दृष्टि है? प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लेने वाले एक बड़ा पत्रकार जब इस तरह की हरकतें करने जाता है तो उसे इस बात को पहले ही वीडियो के टाइटल में बता देना चाहिए- “नुसरत जहान के साथ एक्सरसाइज, उनके बॉयफ्रेंड के साथ सुहाना सफ़र”।
बाथरूम टब में लेट कर ‘क्रन्तिकारी’ रिपोर्टिंग
अगर कोई सेलेब्रिटी आत्महत्या करता है तो क्या पत्रकार स्टूडियो में पंखे से लटक कर न्यूज़ पढ़ेगा? क्या संसाधन और रुपए होने का मतलब यह है कि न्यूज़ शो को टीवी सीरियल और फ़िल्म की तरह पेश किया जाए? इस पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए अगर कोई एंकर कल को स्टूडियो में नंगा दौड़ता मिले, वो भी यह दिखाने के लिए कि दिल्ली में गर्मी काफ़ी बढ़ गई है। यह सर्कस नहीं है, एक न्यूज़ चैनल पर चल रहा शो है, जिसमें ख़बरें बताई जाती है, उनका विश्लेषण किया जाता है। हर चीज में ग्लैमर ठूँसने वाले ‘कूल’ पत्रकार कल को पूर्व में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध की जानकारी देने के लिए स्टूडियो में आपस में ही सिर-फुटव्वल न कर बैठें। ऐसा हो भी रहा है, अब एक प्रवक्ता दूसरे के मुँह पर पानी का ग्लास फेंक देता है और एंकर को कोई फर्क नहीं पड़ता।
अगर केवल यही सब करना है तो इसे सर्कस ही घोषित कर दिया जाए। न्यूज़ चैनलों पर ऐसे कार्यक्रमों से पहले बता दिया जाए कि यह सर्कस है, न्यूज़ शो नहीं है। इससे दर्शक भी पहले से मन बना कर देख सकेंगे। लेकिन, देश की राजनीति पर किसी नेत्री के विचार जानने गया पत्रकार अगर ज़मीन पर लेट कर अजीब हरकतें करता दिखे, तो दर्शकों को दुःख होगा ही। दरअसल, ऐसे पत्रकार अपनी फैंटसी को पूरा कर रहे हैं, पत्रकारिता नहीं कर रहे। इन्हें अभिनेत्रियों के साथ दिन गुज़ार कर दर्शकों के सामने एक ऐसी इमेज बनानी है, जैसी फ़िल्मी हीरो की होती है। अगर ऐसा है तो इन्हें सच में बॉलीवुड में कोशिश करनी चाहिए।
राहुल कँवल द्वारा लिए इंटरव्यू का एक दृश्य
किसको इस बात में इंटरेस्ट है कि फलाँ सेलेब्रिटी ने मरने के पहले 1 दिन तक क्या-क्या किया? किसने कब चाय की चुस्कियाँ ली? कैसे ग्लास में पानी पिया, क्या खाया, क्या नहीं खाया? किसी सेलेब्रिटी ने मरने से पहले कितनी बार कपड़े बदले और उसने कैसे कपड़े पहन रखे थे, इस बात में किसी की क्या दिलचस्पी हो सकती है? दुबई के डॉक्टरों और जाँच एजेंसियों ने ज़रूरी प्रक्रिया वहाँ पूरी की, तब तक यहाँ बेवजह ऐसा मीडिया ट्रायल हुआ, जिससे लोगों को ऐसा लगा जैसे कि वे कोई सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म देख रहे हों। जब कोई विमान गायब हो जाता है, जो कि एक संवेदनशील मुद्दा है, जिस पर 13 लोग सवार थे, तब ये एक एनीमेशन बना कर बताते हैं कि कैसे स्पेससिप से आकर एलियन विमान को उठा कर ले जा रहा है।
ऐसे सैकड़ों उदाहरण हैं, जहाँ मीडिया ने न्यूज़ को सर्कस बनाया। सब्जी में मसाला उतना ही अच्छा लगता है, जितनी मात्र में वह होनी चाहिए। अगर एक कड़ाही मसाले में पाँव भर भिन्डी की सब्जी बनाई जाए, तो उसका ख़राब होना तय है। आज मीडिया में यही हो रहा है। मसाला पहले तैयार किया जाता है, ख़बरों के बारे में अपडेट बाद में लिए जाते हैं। छौंक पहले लगाया जाता है, दाल बाद में तैयार होता है। ऐसी चीजें कूड़ेदान की शोभा बढ़ाने के लिए होती है, डाइनिंग टेबल पर नहीं रखी जाती। ठीक उसी तरह, आजकल मीडिया में तैयार किए जा रहे शो किसी कार्टून चैनल या मनोरंजन वाले चैनल पर दिखाने लायक हैं, ख़बरों वाले चैनल पर नहीं। सारी ख़बरें मनोरंजन के लिए नहीं होती, असल में न्यूज़ का मतलब मनोरंजन होता ही नहीं।
नुसरत जहान के साथ राहुल कँवल का इंटरव्यू इसका ताज़ा उदाहरण है। ‘बताना कुछ और दिखाना कुछ’ वाले रोग से ग्रसित इन पत्रकारों, मीडिया संस्थानों और न्यूज़ चैनलों ने हिटलर का लिंग मापने से लेकर ख़ुद से ट्वीट करवाई गई चीजों का फैक्ट चेक भी कर बैठते हैं। किसी की मौत का मज़ाक बनाने से लेकर सेना के जवानों को असंवेदनशीलता दिखाने तक, मनोरंजन के क्षेत्र में काफ़ी आगे आ चुके ये पत्रकार शायद यही कारण है कि एक उम्र के बाद नेता बन जाते हैं। इसके लिए ज़रूरी नाटकीयता तो ये विकसित कर ही चुके होते हैं। आश्चर्य नहीं कल को अगर आपके सामने स्क्रीन पर न्यूज़ स्टूडियो में कोई एंकर उल्टा लटक कर न्यूज़ पढ़ रहा हो।
इन दिनों सोशल मीडिया पर सरकारों, नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ आपत्तिजनक या अपमानजनक टिप्पणी के आरोप में लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। इसी कड़ी में अब छ्त्तीसगढ़ के सीएम का नाम भी जुड़ गया है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल के खिलाफ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार कर लिया है। रायपुर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बुधवार (जून 12, 2019) को बताया कि जिले के खरोरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत सारागाँव निवासी ललित यादव (34) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
Man Arrested For Posting Abusive Comment Against Bhupesh Baghel, Chhattisgarh Chief Minister https://t.co/pRNJI57NfA
पुलिस ने यह कार्रवाई कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता की शिकायत के बाद की है। ललित यादव पर आरोप है कि उसने फेसबुक पर मुख्यमंत्री बघेल के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। अधिकारी ने बताया कि यादव के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, उसके बाद उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया। जहाँ से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
जानकारी के मुताबिक, राज्य की राजधानी में शास्त्री चौक से जयस्तंभ चौक के बीच पैदल यात्रियों की आवाजाही के लिए बनाए जा रहे स्काईवॉक से संबंधित एक फेसबुक पोस्ट पर ललित ने अभद्र टिप्पणी की थी। गौरतलब है कि राजधानी रायपुर में पूर्व सीएम रमन सिंह सरकार ने पैदल चलने वालों के लिए स्काईवॉक का निर्माण शुरू किया था। स्काईवॉक के निर्माण के प्रारंभ होने के साथ ही यह परियोजना विवादों में घिर गई थी। राज्य में नई सरकार के गठन के बाद इसकी उपयोगिता को लेकर बहस छिड़ गई है। राज्य सरकार ने स्काईवॉक को लेकर जनता से राय माँगी है कि परियोजना को पूरा किया जाना चाहिए या फिर आंशिक रूप से खड़ी संरचना को ध्वस्त कर दिया जाए।
इससे पहले, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के खिलाफ सोशल मीडिया पर अपमानजनक टिप्पणी करने के मामले में पुलिस ने बीते तीन सालों में 119 लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। वहीं, यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में पत्रकार प्रशांत कनौजिया को गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कनौजिया को रिहा करने का आदेश दे दिया था।
पिछले एक दशक से राज्यसभा में भाजपा के नेता रहे अरुण जेटली ने ख़राब स्वास्थ्य की वजह से मंत्रिमंडल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया। इसके बाद लगातार यह कयास लगाए जा रहे थे कि एक साथ कई ज़िम्मेदारियाँ संभालने वाले अरुण जेटली की जगह भाजपा में कौन लेगा? मंत्रिमंडल में पूर्व केंद्रीय रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण को उनकी जगह वित्त मंत्रालय का प्रभार सौंपा गया। निर्मला इकोनॉमिक्स की छात्रा रही हैं और उनका इस क्षेत्र से लम्बा जुड़ाव रहा है। वहीं दूसरी तरफ राज्यसभा में भी भाजपा को नया नेता खोजना था। अरुण जेटली 2014 से 2019 तक राज्यसभा में सदन के नेता रहे और उससे पहले यूपीए काल के दौरान 5 वर्षों तक राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।
भाजपा ने राज्यसभा में अरुण जेटली का रिप्लेसमेंट खोज लिया है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत को राज्यसभा में सदन का नेता बना कर यह ज़िम्मेदारी दी गई है। थावर चंद गहलोत मध्य प्रदेश के शाजापुर लोकसभा क्षेत्र (परिसीमन के बाद अब यह नहीं रहा) से लगातार 4 बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने 1996, 98, 99 और 2004 में इस क्षेत्र में भाजपा का झंडा बुलंद किया और जीत दर्ज की। अब वह राज्यसभा के सदस्य हैं। 71 वर्षीय गहलोत भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं और उन्हें संगठन एवं राजनीति का भी लंबा अनुभव है।
उज्जैन स्थित विक्रम विश्वविद्यालय से पढ़े गहलोत दलित समुदाय से आते हैं और 1962 से ही वो जनसंघ से जुड़े रहे हैं। 1977 में उन्हें जनता पार्टी के उज्जैन क्षेत्र का उपाध्यक्ष और महासचिव बनाया गया था। 1985 में वे मध्य प्रदेश में भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव बने। 2004 में भाजपा ने उन्हें बड़ी ज़िम्मेदारी देते हुए उत्तर-पूर्वी राज्यों का प्रभारी बनाया। उत्तर-पूर्व में कमज़ोर भाजपा को सफलता दिलाने के लिए उन्होंने मेहनत की। इससे पहले वे 1980, 84 एवं 93 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज कर चुके हैं। 7 लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव जीत चुके गहलोत को उनके लम्बे अनुभव को देखते हुए भाजपा ने अब राज्यसभा में नेता की ज़िम्मेदारी दी है।
हालाँकि, थावर चंद गहलोत को प्रखर वक्ता नहीं माना जाता है लेकिन वो तार्किक रूप से अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं। मजदूरों के हितों के लिए आन्दोलन करने के कारण कई बार जेल जा चुके गहलोत को राज्यसभा में कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और पी चिदंबरम जैसे क़द्दावर कॉन्ग्रेसी नेताओं का मुकाबला करना होगा। रविशंकर प्रसाद के राज्यसभा में रहने से जेटली की अनुपस्थिति में भी भाजपा का पक्ष मजबूती से रखा जाता था, लेकिन प्रसाद अब पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा को हरा कर लोकसभा पहुँच गए हैं, इसीलिए भाजपा ने गहलोत को यह बड़ी ज़िम्मेदारी दी है।
कुल मिलाकर देखें तो भाजपा ने मजदूरों के हितैषी नेता को यह पद देकर यह जताया है कि पार्टी में लम्बे समय से मेहनत करने वाले अनुभवी नेताओं की पूछ है और उन्हें उचित सम्मान दिया जाता है। साथ ही, मध्य प्रदेश जैसे राज्य से गहलोत को लाकर उनका क़द बढ़ाना कमलनाथ सरकार के लिए भी मुसीबत बन सकता है क्योंकि राज्य में कॉन्ग्रेस पहले से ही सत्ता में होने के बावजूद दबाव से गुजर रही है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को राज्यसभा में सदन का उपनेता बनाया गया है।
वायुसेना की सर्च टीम आज यानी गुरुवार (जून 13, 2019) सुबह AN-32 की क्रैश साइट पर पहुँची, जहाँ कोई भी जवान जीवित नहीं मिला है। इसके बारे में वायुसेना ने विमान में सवार सभी 13 यात्रियों के परिवारों को सूचना दे दी है। वायुसेना ने वीरगति को प्राप्त सभी यात्रियों को श्रद्धांजलि दी है। इस विमान में जीएम चार्ल्स, एच विनोद, आर थापा, ए तंवर, एस मोहंती, एमके गर्ग, केके मिश्रा, अनूप कुमार, शेरिन, एसके सिंह, पंकज, पुताली और राजेश कुमार सवार थे।
IAF Pays tribute to the brave Air-warriors who lost their life during the #An32 crash on 03 Jun 2019 and stands by with the families of the victims. May their soul rest in peace.
3 जून को असम के जोरहाट से उड़े AN-32 का मलबा 11 जून को अरुणाचल प्रदेश के टेटो इलाके के पास मिला था। इसके बाद क्रैश साइट पर पहुँचने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन मौसम खराब होने के कारण सर्च टीम पहुँच नहीं पा रही थी। बुधवार (जून 12, 2010) को 15 पर्वतारोहियों को एमआई-17 और एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) से लिफ्ट करके मलबे वाली जगह के नजदीक तक पहुँचाया गया था।
IAF search teams reached the AN-32 crash site today morning and did not find any survivors. The families of the 13 personnel have already been informed that there are no survivors. pic.twitter.com/7FZj0ugryk
इंडिया आइडियाज समित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने भारत में हुए 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार द्वारा इस्तेमाल किए गए नारे ‘मोदी है तो मुमकिन है’ को दोहराया। माइक पॉम्पियो ने इस नारे का इस्तेमाल भारत और अमेरिका के संबंधों को नई ऊँचाई तक पहुँचाने के संदर्भ में किया।
अमेरिका में इंडिया आइडियाज समिट में अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा, “…प्रधानमंत्री मोदी ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान जो नारा दिया, ‘मोदी है तो मुमकिन है’, ‘मोदी मेक्स इट पॉसिबल’, मैं भी भारत और अमेरिका के बीच संबंध को आगे बढ़ते देख रहा हूँ।”
#WATCH: US Secretary of State Mike Pompeo, at the India Ideas Summit, in the US says, “…as Prime Minister Modi said in his latest campaign, he said ‘Modi hai to mumkin hai’, Modi makes it possible. I’m looking forward to exploring what’s possible between our people.” pic.twitter.com/jgta6OhhQd
माइक पॉम्पियो ने अपने संबोधन में भारत आने को लेकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री जयशंकर से मिलने को लेकर उत्सुकता दिखाई। उन्होंने कहा, “मैं इस महीने के अंत में नई दिल्ली की यात्रा, पीएम मोदी और उनके नए विदेश मंत्री एस जयशंकर से मिलने के लिए बहुत उत्सुक हूँ।”
गौरतलब है पॉम्पियो 24 से 30 जून तक भारत, श्रीलंका, जापान और साउथ कोरिया का दौरा करेंगे। चार देशों की इस यात्रा का खाका राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रम्प के हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक साझेदारी बढ़ाने के मद्देनजर तैयार किया गया है।
खबरों के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री पॉम्पियो इस मुलाकात में प्रधानमंत्री मोदी और भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात के दौरान भारत और अमेरिका के मध्य सामरिक साझेदारी के महत्तवकांक्षी एजेंडे पर चर्चा करेंगे।
इस विषय पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मोर्गन ओर्तागस ने मंगलवार को कहा था कि पोम्पियो की हिंद-प्रशांत यात्रा का मकसद अमेरिका के महत्तवपूर्ण देशों के साथ साझेदारी और मज़बूत करना है, जिससे साझा लक्ष्य को पाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा।
भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भविष्य में स्वदेशी मिसाइल प्रोग्राम को ऊँचाईयों तक पहुँचाने की दिशा में बुधवार (जून 12, 2019) को हाइपरसोनिक रफ्तार हासिल करने लिए टेस्ट लॉन्च किया। इस हाइपरसोनिक टेक्नॉलजी डिमोन्स्ट्रेटर व्हीकल (एचएसटीडीवी) का भविष्य में न केवल हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होगा बल्कि इसकी मदद से काफ़ी कम खर्चे में सैटेलाइट लॉन्चिंग भी की जा सकेगी।
“The #DRDO launched a technology demonstrator vehicle to prove a number of critical technologies for futuristic missions from Dr. Abdul Kalam Island,” the Ministry of #Defence said without identifying what the technology demonstrator was. https://t.co/3n0slW9Q0K
इस परीक्षण की जानकारी एक प्रेस रिलीज के जरिए दी गई कि ओडिशा तट के निकट एक बेस से हाइपरसोनिक टेक्नॉलजी डिमोन्स्ट्रेटर व्हीकल को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया।
.@DRDO_India launched a Technology Demonstrator Vehicle to prove a number of critical technologies for futuristic missions from Dr Abdul Kalam Island off the coast of Odisha.
गौरतलब है इस एचएसटीडीवी प्रोग्राम को अपने मिसाइलों के निर्माण के लिए डीआरडीओ पिछले 2 दशकों से आगे बढ़ा रहा है। इसमें SCRAMJET इंजन इस्तेमाल किया जाता है। जिसकी मदद से 6 मैक तक की रफ्तार हासिल की जा सकती है।
India test fires Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle capable of Mach 6 https://t.co/K3kIlFhdTE
इस परीक्षण में 1 टन वजन वाले और 18 फीट लंबे एयरव्हीकल को अग्नि मिसाइल से लॉन्च किया गया था। इस दौरान एचएसटीडीवी को विभिन्न रडार, टेलीमेट्री स्टेशन्स और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग के जरिए ट्रैक किया गया। इस परीक्षण का उद्देश्य एचएसटीडीवी को एक खास ऊँचाई तक पहुँचाना था, जिसके बाद स्क्रैमजेट इंजन अपने आप चालू हो जाता है और व्हीकल को 6 मैक की रफ्तार तक ले जाता है।
खबरों के मुताबिक यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन के वरिष्ठ वैज्ञानिकों और रक्षा सचिव संजय मित्रा की मौजूदगी में किया गया। खास बात ये है कि रूस, अमेरिका और चीन के बाद सिर्फ़ भारत ऐसा देश है, जिसने इस तकनीक को विकसित किया है। इस परीक्षण के साथ ही 6 मैक की रफ्तार हासिल करने वाला भारत चौथा देश बन गया है।